Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारी सीधे संसद के भीतर जाकर अपनी बात नहीं रख सकते, न ही वहां से सुप्रीम कोर्ट में कोई मामला अपने आप पहुंच जाता है, लेकिन इस जगह पर प्रदर्शन करके वे अपनी मांग को सार्वजनिक बहस का विषय बना सकते हैं, सांसदों और राजनीतिक दलों का ध्यान खींच सकते हैं, पत्रकारों को अपनी बात बता सकते हैं और जरूरत पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को व्यापक समर्थन दिला सकते हैं. यही बातें जंतर-मंतर को जंतर मंतर बनाती है.
एक ऐसी जगह जो किसी भी तरह की धार्मिक पहचान से पूरी तरह मुक्त है. जहां हर धर्म, सम्प्रदाय, जाति, वर्ग, लिंग के लोग आकर अपनी व्यथा रख सकते हैं. लेकिन मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से यह धर्मनिरपेक्ष स्थल जंतर मंतर छीन लिया है. उन्हें रामलीला ग्राउंड में जाकर प्रदर्शन करने के लिए कहा जा रहा है जहां एक तरफ दशहरा की तैयारी में रावण बन रहे हैं और दूसरी तरफ बरसात का पानी भरा है. साफ़ है कि तानाशाही सरकार अपने खिलाफ कोई आवाज नहीं उठने देना चाहती है. Jantar Mantar Protest
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