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Summer Special: पानी प्यास ही नहीं बुझाता, इलाज भी करता है

सर्दी के दिनों में हम पानी का इनटेक कम कर देते हैं. ठंड की वजह से हमें प्यास ज्यादा नहीं लगती. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दी के दिनों में उचित मात्रा में तरल पदार्थ हमारे शरीर में न पहुंचने से हमारा खून गाढ़ा हो जाता है. इस कारण रक्तसंचार में व्यवधान और धमनियों में प्रेशर बढ़ जाता है. रक्तसंचार ठीक रखने के लिए हमारे दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है. इस वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए गर्मी हो या सर्दी, दिन भर में दो से तीन लीटर पानी पीना आवश्यक है. पानी सिर्फ प्यास ही नहीं बुझाता है, बल्कि यह शरीर के कई रोगों का निवारण भी करता है. पानी हमारे शरीर के लिए औषधि है.

हमारे शरीर में पानी की मात्रा लगभग 70 प्रतिशत है. पानी अनेक तरीके से हमारे शरीर को सुचारू ढंग से चलाने में मदद करता है. यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है, शरीर को उत्तेजना पहुंचाता है, अंगों को सक्रिय रखता है, शरीर में जमे टौक्सिन्स को बाहर निकालता है, दर्द को दूर करता है, कफ को बाहर निकालने में मदद करता है, तनाव से मुक्ति देता है, जलन खत्म करता है और त्वचा में कसाव व चमक लाता है. जल चिकित्सा में पानी के इन्हीं गुणों का प्रयोग शरीर को स्वस्थ रखने, रोगों से बचाव तथा उनके निवारण में किया जाता है.

जल चिकित्सा बहुत पुरानी चिकित्सा विधि है, जिसमें गर्म-ठंडा सेंक, कटिस्नान, वाष्प स्नान, रीढ़ स्नान, पूर्ण टब स्नान आदि के जरिए अनेक रोगों का इलाज किया जाता है. पानी के तापक्रम के जरिए पेटदर्द, कब्ज, सर्दी-जुकाम, महिला सम्बन्धी रोगों का इलाज होता है.

जल से चिकित्सा वास्तव में एक पुरातन घरेलू चिकित्सा है. हम हमेशा से ही अनेक बीमारियों में जल का प्रयोग करते रहे हैं. घरों में ठंडे-गर्म पानी का सेंक अनेक परेशानियों से छुटकारा दिलाने के लिए किया जाता है. दर्द का इलाज हम गर्म पानी के सेंक से करते हैं, तो बुखार आने पर ठंडे पानी की पट्टियां सिर पर रखते हैं.

गर्म-ठंडे पानी की सिंकाई कब्ज तथा प्रदाह आदि में लाभकारी है. यदि सिर दर्द या सर्दी-जुकाम की समस्या है, तो रात को सोते समय गुनगुने पानी के टब में दोनों पैर डालकर 10 मिनट के लिए रखा जा सकता है या गर्म पानी की भांप लेने से राहत मिलती है. इससे बंद नाक खुल जाती है, सिरदर्द खत्म हो जाता है और सांस लेना आसान हो जाता है. गर्म पानी की भांप श्वांस नली और फेफड़ों में जमे हुए कफ को ढीला करके बलगम के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है.

मोटापा, चर्म रोग, जोड़ों का दर्द, सर्दी-जुकाम तथा दमा आदि में वाष्प स्नान की सलाह दी जाती है जो स्वेद ग्रंथियों की सक्रियता को बढ़ाकर त्वचा से विजातीय द्र्रव्य शीघ्रता से निकालने में मदद करता है. इसी तरह पेट के रोगों में कटि-स्नान, जोड़ों के दर्द में पूर्ण टब स्नान, मानसिक रोगों तथा तनाव आदि में रीढ़ स्नान आदि जल चिकित्सा के महत्त्वपूर्ण उपचार हैं.

बहुत से लोग अच्छी तरह से स्नान नहीं करते हैं. उन्हें लगता है कि फालतू पानी क्या बहाना. लेकिन यह जानना जरूरी है कि साफ पानी से अच्छी तरह से स्नान करने से हमारी त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं, डेड स्किन निकल जाती है और त्वचा जीवन्त हो जाती है तथा शरीर में रक्त संचार भी बढ़ जाता है जो अन्ततोगत्वा शरीर को स्वस्थ रखने तथा रोगों से बचाव में हमारी सहायता करता है.

कब्ज से लोग इसलिए परेशान होते हैं, क्योंकि उन्हें पानी पीने की आदत नहीं होती. पानी की कमी से आंतों को खाना पचाने के लिए उपयुक्त नमी नहीं मिलती और वह सूख जाती हैं. इसके कारण अल्सर की समस्या भी हो जाती है. कब्ज की शिकायत हो तो खूब पानी पियें और पेट पर गर्म-ठंडे पानी की सिंकाई करें. दिन में कम से कम 12 गिलास गुनगुना पानी पीने से कब्ज से राहत मिलती है. गर्म पानी पीने से आंतों में जमा मल आसानी से निकल जाता और पेट साफ होने से गैस की समस्या भी खत्म हो जाती है.

पानी पीने से हमारी किडनी भी बेहतर तरीके से काम करती है. अगर हम पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं तो इससे यूरिन साफ होता है और पूरा सिस्टम क्लीन हो जाता है. यह सफाई बाहरी रूप में भी दिखायी देती है. इससे त्वचा पर भी ग्लो आता है. पानी के इस्तेमाल से आपके अंदरूनी सिस्टम को क्लीन करने के लिए गुनगुने पानी के एक ग्लास में कुछ बूंदें शहद और नींबू के रस की मिलाकर सुबह-सुबह पीना लाभदायक है.

पानी की कमी से त्वचा ड्राई और डीहाईड्रेटिड हो जाती है और उस पर समय से पहले झुर्रियां दिखने लग जाती हैं. जबकि अगर आपकी त्वचा में नमी होगी तो आपकी कोशिकाएं फिर से नयी हो जाएंगी, जो झुर्रियों को रोकेंगी. इसलिए सर्दी हो या गर्मी पर्याप्त मात्रा में पानी पियें. इसके अलावा अपने चेहरे पर पानी के छींटें मारें और त्वचा पर आइस क्यूब्स लगाएं. इससे त्वचा के पोर जो ज्यादा खुल जाते हैं वह बंद हो जाएंगे.

जिन लोगों की त्वता बहुत अधिक गोरी या फिर संवेदनशील होती है उनके साधारण स्क्रब करने या फिर चेहरे पर थोड़ा दबाव डालने से ही त्वचा लाल हो जाती है. इसे दूर करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. बर्फ के पानी में रूई भिगोएं और अपने चेहरे पर लगाएं. एक दो मिनट ऐसा करने से ही चेहरे की लालिमा और जलन कम होने लगती है. संवेदनशील त्वचा के लिए साफ ठंडे पानी में कुछ बूंदें गुलाबजल की मिलाकर लगाने से भी राहत मिलती है.

Summer Special: ‘लू’ से बचाता है यह शरबत

गर्मी के मौसम में कच्चे आम का शरबत पीना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है. यह हमारे समाज का पसंदीदा पेय जल है. यह स्वाद में जितना अच्छा होता है, सेहत के लिए भी उतना ही अच्छा होता है. जब गर्मी चरम पर है. तो इसका शरबत अच्छा होता है. इसे बनाना भी उतना ही आसान होता है.

सम्रागी

300 ग्राम कच्चे आम, 2 चम्मच जीरा, स्वादनुसार काला नमक, एक चम्मच काली नमक, पुदीना कि पत्तियां, नमक स्वादनुसार

विधि

पुराना समय में जब खाना बनता था, कि चूल्हे पर खाना बनने के बाद आम को चूल्हे में डाल दिया जाता था. लेकिन आज के समय में आम को उबाल पर बनाया जाता हैं.

आम की गुठली को निकाल दिया जाता है, अब उसको गर्म पानी  में मिला दिया जाता है. अब उसमें भूना हुआ जीरा डालकर मिलाए. काला नमक और पुदीना को मिला दें, अब उसमें हरा धनिया मिला दें, अब इसे छलनी से छान लें, और ग्लास में निकालकर छान दें.

शक: क्या शादीशुदा रेखा किसी और से प्रेम करती थी?

‘बालिका वधू’ की आनंदी इस हॉरर फिल्म से करेंगी बॉलीवुड डेब्यू

कलर्स टीवी (Colors Tv) का मशहूर सीरियल ‘बालिका वधू’ (Balika Vadhu) फेम अविका गोर (Avika Gor) अपने किरदार के घर-घर में मशहूर हैं. आज भी लोग उन्हें आनंदी के नाम से बुलाते हैं. इस सीरियल में अविका गोर की एक्टिंग ने दर्शकों के दिल जीत लिया. अब आनंदी के फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. तो आइए बताते है, क्या है पूरा मामला.

अविका गोर जल्द ही विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) की अपकमिंग हॉरर फिल्म ‘1920: हॉरर्स ऑफ द हार्ट’ (1920: Horrors of The Heart) में अहम किरदार में नजर आएंगी. अविका काफी लंबे समय से बड़े प्रोजेक्ट के तलाश में थी. आखिकार अब वो बॉलीवुड में इस हॉरर फिल्म से डेब्यू करेंगी.

 

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विक्रम भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, 1920 ने मेरे जीवन में एक नया चैप्टर शुरू किया और अब 1920 में सेट की गई एक और कहानी हिंदी फिल्मों में बेहद टैलेंटेड अविका गोर के करियर की शुरुआत करेगी. कृष्णा भट्ट ‘1920: हॉरर्स ऑफ द हार्ट’ का निर्देशन करेंगी, जो मेरे गुरु महेश भट्ट द्वारा लिखी गई है. इस बार मैं निर्माता की भूमिका निभा रहा हूं.

 

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अविका गोर के फैंस उन्हें काफी लंबे से समय से किसी बॉलीवुड फिल्म में देखने के लिए बेताब थे. फैंस का ये इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. बता दें कि बॉलीवुड से पहले अविका गोर साउथ फिल्म में काम कर चुकी हैं. एक्ट्रेस ने साउथ में अपनी शुरुआत तेलुगु फिल्म से की थी.

 

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Anupamaa: अनुपमा को बददुआ देगा वनराज तो बापूजी का फूटेगा गुस्सा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि अनुज अनुपमा के लिए हिरे अंगुठी खरीदता है. अनुपमा काफी इमोशनल हो जाती है. वह घर आकर सबको बताता है, और अंगुठी की फोटो भी दिखाती है. बापूजी, किंजल, पाखी, समर और तोषु बहुत खुश होते हैं. तो दूसरी तरफ वनराज को जलन होती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में आप देखेंगे कि सगाई से पहले अनुपमा मंदिर जाएगी. तो दूसरी तरफ वनराज भी उसका पीछा करते हुए मंदिर पहुंच जाएगा और उससे कहेगा कि कुछ जरूरी बात करनी है. अनुपमा बिना मन के वनराज के साथ बात करने के लिए राजी हो जाएगी. तो दूसरी तरफ शाह परिवार को पता चलेगा कि वनराज अनुपमा से बात करने गया है तो अलग ही हंगामा शुरू हो जाएगा.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि सिर्फ बा को यह बात पता होगी कि वनराज अनुपमा से बात करने के लिए मंदिर गया है. जैसे ही बापूजी को यह बात पता चलेगी तो उनका गुस्सा फूटेगा. बापूजी बा से कहेंगे कि आखिर सब कुछ जानते हुए भी लीला ने वनराज को कैसे जाने दिया?

 

दूसरी तरफ देविका और मालविका को ये बात पता चलेगी कि वनराज अनुपमा बात करने के लिए एक साथ गये हैं. ऐसे में मालविका अनुज को फोन करेगी और कहेगी कि वनराज ने आखिरकार सगाई वाले दिन अनुपमा के साथ बाहर जाने का फैसला क्यों लिया? अनुज भी परेशान हो जाएगा लेकिन उसे अनुपमा पर पूरा विश्वास होगा.

 

अनुज कहेगा कि वनराज के मन में जरूर कुछ ना कुछ चल रहा है. अगर इस बार उसने अनुपमा को परेशान किया तो मैं उसे नहीं छोड़ूंगा. तो दूसरी तरफ वनराज अनुपमा के सामने बार-बार पुरानी बातों का जिक्र करेगा. अनुपमा कहेगी कि इन बातों का कोई मतलब नहीं है क्योंकि जब चीजों की अहमियत समझनी चाहिए थी तब वनराज ने सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचा.

वनराज ये भी कहेगा कि अनुज-अनुपमा को एक साथ देखकर उसे जलन होती है. वह कहेगा कि वह नहीं चाहता है कि अनुपमा-अनुज की शादी हो. वनराज अनुपमा से ये भी कहेगा कि शादी के बाद सारे मर्द बदल जाते हैं, अनुज भी बदल जाएगा. दूसरी शादी के बाद अनुपमा खुश नहीं रहेगी. शो में अब ये देखना होगा कि क्या वनराज इस शादी को रोकने के लिए नई चाल चलेगा?

हिंदु-मुस्लिम झगड़ों का क्या है कारण

हिंदुमुस्लिम झगड़ों में जानें ही नहीं जाती, जो बचे होते हैं उन की जानों पर भी बहुत सी आफतें आ जाती हैं. जिस भी इलाके में दंगे होते हैं, वहां के घरों के रहने वाले, चाहे मुसलिम हों या ङ्क्षहदू, समाज में कट जाते हैं. समाज अब उन्हें बचाने नहीं आता. उन्हें हिराकत की नजर से देखता है.

पिछले महीने जब खरगौन में दंगे हुए तो एक सब्जी बेचने वाले राहुल कुमावत की बहन की शादी 3 मई को होनी थी पर टाल दी गई क्योंकि लडक़े वाले ऐसी जगह शादी नहीं करना चाहते जहां दंगे होते हों, कफ्र्यू लगता हो. इस दंगे में गंभीर घायल हुए संजीव शुक्ला की बहन की शादी टाल दी गई. होटलों, बैक्वेहालों, वेटरर्स ने अपने आर्डर कैंसिल होने की सूचना है कि दंगों के कारण लोग इस इलाके में आने से कतरा रहे हैं.

हर दंगे में पार्टी की वोटें बढ़ती हैं पर लोगों की ङ्क्षजदगी घटती है. लोग डरेसहमे रहते हैं. औरतें घरों से नहीं निकलती. स्कूल बंद हो जाते हैं. अगर गलीमोहल्ला झगड़े का सेंटर हो तो खानापीना तक मुश्किल हो जाता है.

आजकल भडक़ाऊ टीवी की वजह से दंगे का नाम सप्ताहों तक सुॢखयों में रहता है और दूरदूर तक खबर पहुंच जाती है. लोग शादियां करने से भी कतराने लगे हैं अगर कोई घर दंगाग्रस्त इलाके में हो. इन इलाकों के लडक़ेलडक़ी को लंबी सफाई देनी पड़ती है कि उन के परिवार का कोई लेनादेना इन दंगाइयों से नहीं है. जिन घरों के दंगाई धर्म और कपड़े के हिसाब से पकड़े गए और जेलों में ठूस दिए गए वे तो इस बात को खुदा का हुक्म मान कर सहने की आदत डाल चुके हैं पर वे पूजापाठी जो सबक सिखाने वाली सोच रखते हैं पर दंगाई इलाकों में रहते है, फंस जाते हैं. पूरी कालोनी की चाहे एक गली में दंगा हुआ हो बदनाम पूरी कालोनी वाले हो जाते हैं.

वे लोग जो धर्म के उकसाने पर जोश में आ जाते हैं और आगे बढ़चढ़ कर नारेबाजी करने लगे हैं, उन से उन के घरवाले भी डरने लगते हैं क्योंकि ये लोग अपनी दंगाई आदत घर में घुसते समय चप्पल की तरह बाहर उतार कर नहीं आते, यह दंगाई आदत उन की दिमाग और खाल दोनों में घुस जाती है. धर्म को बचाने के लिए जो लोग झंडे और तलवारे लहरा रहे हैं, वे ङ्क्षजदगी भर एक तरह की बिमारी पाले रखते हैं. उन्हें न शादी में सुख मिलता है, न काम में. धर्म के सैनिक बने रहना ही अकेला काम रह जाता है.

जिन्हें दंगाग्रस्त इलाकों में रहना पड़ता है उन्हें नौकरियों भी नहीं मिलतीं क्योंकि नौकरी देने वाला डरता है कि यह दंगा करने वालों से मिला तो नहीं हुआ, जो उस इलाके में रहते है उन का काम में मन नहीं लगता. वे नागाएं भी बहुत करते हैं चाहे ङ्क्षहदू ही क्यों न हों. कोई देवीदेवता उन्हें नौकरी देने नहीं आता.

हर दंगे पर उन लोगों का पैसा भी खर्च होता है. जिन्होंने न दंगे में हिस्सा लिया, न दंगे के शिकार हुए. पूरे इलाके के बंद हो जाने पर काम कम हो जाता है. पढ़ाई कम हो जाती है, बातचीत दंगों के बारे में ज्यादा होती है, ‘देख लेंगे’, ‘मार देंगे’ जैसे बोल जवान पर चढ़ जाते हैं, नारे सुनसुन कर कुछ को डर लगता है तो कुछ कानून को भूल कर निकम्मे हो जाते हैं.

दिल्ली में जहांगीरपुरी में हनुमान यात्रा के दौरान दंगों में पुलिस एक ङ्क्षहदू परिवार के 6 लोगों को पकड़ कर ले गई. विश्व ङ्क्षहदू परिषद ने उन्हें खाना तो पहुंचाया पर कितने दिन पहुंचाएंगे. हर धर्म भक्तों से वसूलता है, कोई भी धर्म सप्ताहों और महिनों तक किसी परेशान को नहीं संभालता, अपने धर्म के शहीद को कोई पेंशन नहीं देता, उस के पास तो एक ही जवाब होता है, सब कुछ ईश्वर अल्ला के हाथ में हैं.

धर्म के दुकानदार अब राज करने वाले भी बन गए हैं और वे जानते है कि भक्त तो मूर्ख होते हैं. पाकिस्तान में बुरा हाल धर्म की वजह से है. श्रीलंका में बौध ङ्क्षसहलियों की वजह से आज बुरी हालत है. रूस के व्लादिमीर पुतिन ने भी यूक्रेन पर हमला अपने धर्म गुरू के कहने पर किया और यूक्रेनी भी मर रहे हैं और रूसी भी मर जी रहे हैं और पैसेपैसे को मोहताज हो रहे हैं.

शिवानी- भाग 2: फार्महाउस पर शिवानी के साथ क्या हुआ

बहुत कुछ सोच कर वह चुप रही. सब फ्रैश हो गए तो संजय ने माधव को नाश्ता बनाने के लिए कहा. संजय बिलकुल सामान्य ढंग से कह रहा था, ‘‘चलो, नाश्ता कर के निकलते हैं… शिवानी की तबीयत ठीक नहीं लग रही है… यह घर जा कर डाक्टर को दिखा लेगी.’’

शिवानी ने संजय के चेहरे को भी ध्यान से देखा पर वह हमेशा की तरह हंसतामुसकराता ही लगा. शिवानी को सुस्त देख कर सब को उस की चिंता हो रही थी. मन ही मन कलपती शिवानी वापस घर आ गई. शिवानी को छोड़ने सब से पहले सब उसी के घर आए.

सुधा से लिपट कर वह रो दी तो रमेश घबरा गए. पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’ तबीयत तो ठीक है?

रमन ने कहा, ‘‘अंकल, कल रात ही इस की तबीयत खराब हो गई थी.’’

‘‘अरे, क्या हुआ? फोन क्यों नहीं किया?’’

‘‘पापा, मैं जल्दी सो गई थी, सिर भारी था.’’

सुधा परेशान हो गईं, ‘‘चल, डाक्टर को दिखा लेते हैं.’’

‘‘नहीं मम्मी, अब थोड़ा ठीक हूं. बस आराम कर लूंगी.’’

सब चले गए. अजय भी शिवानी का हाल सुन कर परेशान हो गया. लता और उमा भी उस से मिलने आ गईं. शिवानी का दिल भर आया. उस की मनोदशा का तो किसी को अंदाजा ही नहीं था.

उमा कह रही थीं, ‘‘आराम ही करना, जब मन हो, आ जाना. वैसे तुम्हारे बिना हमारा मन नहीं लग रहा है. घर खालीखाली लगता है.’’

थोड़ी देर बैठ कर सब बातें करती रहीं. उन के जाने के बाद शिवानी का मन हुआ मां को सब सचसच बता दे पर उस की हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि सुधा उस के जाने के पक्ष में ही नहीं थीं. किस मुंह से कहे, उन का डर सच साबित हुआ है.

वह फिर रोने लगी तो सुधा ने कहा, ‘‘चल बेटा, डाक्टर को दिखा लेते हैं.’’

‘‘नहीं मम्मी, अब तो ठीक हूं.’’

फिर वह स्वयं को सामान्य दिखाते हुए थोड़ी बहुत बातें करती रही. 1-2 दिन और बीत गए. सब उस से फोन पर संपर्क में थे ही.

शिवानी बेचैन थी. उस का मन हर समय घबराया, उलझा सा रहता था. वह सुधा से कहने लगी, ‘‘मम्मी, अब ससुराल चली जाती हूं. अजय नहीं हैं तो मैं भी यहां आ गई. अच्छा नहीं लगता.’’

‘‘हां, ठीक है बेटा. जैसी तेरी मरजी.’’

रमेश ही उसे छोड़ने गए. उसे देखते ही सब के चेहरे खिल उठे.

उमा चहक उठीं, ‘‘अच्छा हुआ, आ गई बेटा. घर में बिलकुल रौनक नहीं थी.’’

रमेश भी हंसे, ‘‘संभालो अपनी बहू को आप लोग, अब इस का मायके में मन नहीं लगता.’’

शिवानी भी सब के साथ मुसकरा दी. रमेश चले गए.

डिनर करते हुए सब शिवानी के आने पर खुश थे. यह सब ने साफसाफ महसूस किया, पर उमा ने उसे टोक भी दिया, ‘‘बेटा, जब से आई ओ तब से मुंह उतरा हुआ है. अभी तक तबीयत ठीक नहीं लग रही है क्या?’’

‘‘नहीं मां, ठीक है.’’

विनय ने गौतम से कहा, ‘‘भैया, अजय का टूअर अब कम ही रखना, नहीं तो बहू ऐसे ही उदास रहेगी या इसे भी आगे से साथ ही भेजना.’’

‘‘हां, यह ठीक रहेगा.’’

अगला पूरा हफ्ता शिवानी अपने साथ घटी घटना को भूलने की नाकाम कोशिश करती रही. अपने को काम में उलझाए रखती पर उस रात को भूलना बहुत मुश्किल था और सब से बड़ी बात थी, इस अपराधबोध के साथ जीना कि उस ने यह बात सब से छिपा ली. वह किसी से यह बात शेयर करना चाह रही थी पर किस से करे, यह समझ नहीं आ रहा था. अपनी मम्मी को बताना चाहती थी पर उस ने उन की बात नहीं सुनी थी, इसलिए हिम्मत नहीं हो रही थी.

अजय आ गया तो सब के चेहरे खिल उठे. लता ने कहा, ‘‘देखो, मेरी बहू कितनी उदास रही. अब जल्दी कहीं मत जाना.’’

अजय ने शिवानी को देखा. उस की आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे, उस ने तो इन आंसुओं को इतने दिन की दूरी ही समझा. रात को एकांत में अजय के सीने पर सिर रख कर शिवानी बुरी तरह फफक पड़ी.

अजय परेशान हो गया, ‘‘मेरे पीछे तुम्हें कोई परेशानी हुई है क्या?’’

‘‘नहींनहीं, ऐसा तो कुछ नहीं है, एक बारगी तो शिवानी का मन हुआ इतने प्यार करने वाले पति से कुछ न छिपाए पर अंजाम सोच कर सिहर गई. अजय ने उस के रोने को फिर अपना जाना ही समझा.’’

कुछ दिन और बीते. शिवानी मन ही मन घुटती रही. वह चाह कर भी किसी से हंसबोल नहीं पा रही थी. एक अपराधबोध हर समय उस के मन पर हावी रहता था. उस ने सब से सच छिपा लिया था पर वह मन ही मन बहुत बेचैन रहने लगी थी.

इस बार जब तय समय पर उसे पीरियड्स नहीं हुए, तो उस का माथा ठनका. उस ने कुछ दिन और इंतजार किया. फिर एक दिन अजय के औफिस जाने के बाद उसे उमा से कहा, ‘‘मां, आज थोड़ी देर मम्मी से मिलने चली जाऊं?’’

‘‘हां, जरूर जाओ.’’

शिवानी ने रास्ते में ही प्रैगनैंसी चैक करने वाली किट खरीदी और मम्मी के यहां पहुंच गई. रमेश कालेज में ही थे. शिवानी से फोन पर बात होने के बाद सुधा अपने कालेज से जल्दी आ गईं. शिवानी का उतरा चेहरा देख परेशान हुईं, क्या बात है बेटा, तबीयत फिर खराब है क्या?

‘‘नहीं मम्मी, ठीक हूं.’’

दोनों थोड़ी देर बातें करती रहीं, फिर सुधा शिवानी के लिए कुछ चायनाश्ता बनाने किचन में चली गईं तो शिवानी ने बाथरूम में खुद ही टैस्ट किया. वह गर्भवती थी. उस के होश उड़ गए. माथे पर पसीने की बूंदे चमक उठीं. उस ने बारबार अपने पिछले पीरियड, अपने साथ हुए रेप और अजय के साथ बने संबंधों का हिसाब लगाया और वह इस परिणाम पर पहुंची कि यह बच्चा अजय का नहीं उसी का है, जिस ने उसे नशे में बेसुध कर उस के साथ जबरदस्ती संबंध बनाया था. वह रो पड़ी.

सुधा मन ही मन चिंतित थीं कि उन की बेटी को हुआ क्या है, उस का हंसनामुसकराना, चहकना सब कहां चला गया है.

हाथमुंह धो कर शिवानी बाहर आई तो सुधा को उस की सूजी आंखें देख कर झटका लगा, ‘‘क्या हुआ शिवानी, तुम कुछ बताती क्यों नहीं?’’

‘‘मैं चाय लाती हूं, तुम थोड़ा लेट लो.’’

शिवानी चुपचाप लेट कर मन ही मन इस फैसले पर पहुंची कि वह अबौर्शन करवा लेगी. वह इस अनहोनी का अंश अपने अंदर नहीं पनपने देगी. सुधा चाय लाई तो वह चुपचाप चाय पीने लगी.

सुधा ने कहा, ‘‘शिवानी, तुम्हें बहुत अच्छी ससुराल मिली है न?’’

‘‘हां, मां.’’

‘‘पर तुम कुछ परेशान सी दिखती हो आजकल?’’

‘‘कुछ नहीं है मां, यह सिरदर्द ही आज परेशान कर रहा है,’’ मां कुछ और न सोचे, यह सोच कर वह झूठ ही हंसनेबोलने लगी.

वापस जाते हुए रास्ते में शिवानी की मनोदशा बहुत अजीब थी. किसी को भी बिना बताए वह अबौर्शन का पक्का इरादा कर चुकी थी. घर पहुंच कर सब से सामान्य बातें करने में भी उसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी. मन ही मन घुटती जा रही थी.

अगले दिन सुबह से ही उमा को तेज बुखार हो गया. उन की तबीयत काफी बिगड़ने लगी तो उन्हें हौस्पिटल में दाखिल करवाना पड़ा. सब उन की सेवा में जुट गए. शिवानी सब कुछ भूल कर उन की सेवा में लग गई. 3 दिन बाद उन की हालत कुछ संभली. अगले दिन ही उन्हें डिस्चार्ज किया जाना था.

पहला विद्रोही: भाग 3- अनुपम ने आश्रम से दूर क्या देखा?

पृषघ्र हतप्रभ रह गया. मस्तिष्क शून्य हो गया और आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा. बड़ी कठिनाई से वह अपने स्थान पर लौटा और कटे शव की भांति गिर गया. प्रात:काल उस ने देखा, गाय की गरदन के साथ सिंह का कान भी कट कर गिर गया था.

दिन चढ़े तक जब वह बाहर न आया तो सहपाठियों ने गोशाला के द्वार से उसे पुकारा. कोई उत्तर न पा कर, भीतर आ कर जो हाल देखा तो सभी आश्चर्य- चकित रह गए.

‘‘गुरुदेव, पृषघ्र ने गोहत्या कर दी है,’’ एक शिष्य ने दौड़ कर ऋषि वसिष्ठ को सूचना दी.

‘‘यह तुम क्या कह रहे हो, वत्स? ऐसा कैसे हो सकता है?’’ वे अपने आसन से उठ खड़े हुए.

‘‘स्वयं चल कर देख लीजिए, गुरुदेव,’’ कई स्वर एकसाथ उभरे.

ऋषि वसिष्ठ तेज कदमों से गोशाला में पहुंचे. पृषघ्र द्वार पर सिर झुकाए बैठा था. सामने ही मृत गाय कटी पड़ी थी. ऋषि ने क्रोध से हुंकार भरी, ‘‘यह जघन्य अपराध किसलिए किया तुम ने…क्या केवल इसलिए कि बाहर न जा सकने के कारण तुम उस शूद्री से भेंट न कर सके? एक शूद्र कन्या के लिए इतना जघन्य अपराध?’’ ऊंचे स्वर और क्रोधावेग से वसिष्ठ का बूढ़ा शरीर कांपने लगा था.

‘‘नहीं, गुरुदेव, दरअसल, पिछली रात्रि गोशाला में सिंह घुस आया था. उसी को मारने के लिए तलवार का प्रयोग किया था, परंतु वह बच गया और…उस का कटा हुआ कान वहीं पड़ा है, देख लीजिए.’’

‘‘चुप रहो, वीरवर पृषघ्र का वार गलत पड़े, मैं नहीं मान सकता. तुम ने जानबूझ कर गोहत्या की है, ताकि तुम्हें गोशाला के कार्य से मुक्ति मिले और तुम बाहर जा कर उस शूद्री से प्रेमालाप कर सको, तुम रक्षक से भक्षक बन गए हो,’’ वसिष्ठ चीखे.

‘‘नहीं गुरुदेव, यह गलत है, मैं…’’

‘‘मुझे गलत कहता है, तू ने गोहत्या का महापाप किया है…वह भी एक शूद्री के लिए. मैं तुझे श्राप देता हूं, तू इस नीच कर्म के कारण अब क्षत्रिय नहीं रहेगा. जा, शूद्र हो जा,’’ इतना कह कर वे तेज कदमों से लौट गए.

शूद्रता का दंड मिलने से पृषघ्र का उसी क्षण आश्रम से निष्कासन हो गया. वह बहुत रोया, गिड़गिड़ाया और सत्य के प्रमाण में सिंह का कान दिखाया, पर वसिष्ठ ने न कुछ देखा, न सुना.

शाप क्या है?

उस काल में शिक्षा को ब्राह्मणों ने केवल अपने पास केंद्रित कर रखा था. शिक्षा का प्रसार सीमित वर्ग तक था और आदिवासी तथा निम्नवर्ग को ज्ञान के प्रकाश से कतई वंचित रखा गया था. शिक्षित वर्ग होने से ब्राह्मणों का वर्चस्व राजकाज में अधिक रहा और अर्द्धशिक्षित होने से शासक वर्ग ब्राह्मणों पर आश्रित था. अर्थात वसिष्ठ के शाप ने पृषघ्र को उस समय के सभ्य समाज से, सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर दिया था. ब्राह्मणों की इस एकाधिकारिक व्यवस्था को सामाजिक और राजनीतिक स्वीकृति प्राप्त थी.

समाज से बहिष्कृत हो कर पृषघ्र की समझ में न आया कि वह क्या करे. उस के अपने लोगों ने मुंह मोड़ कर उसे निकाल दिया था. जिस निम्नवर्ग में उसे शामिल होने का दंड मिला था, वह भी ब्राह्मणों के बनाए दंडविधान, सामाजिक असुरक्षा और राजभय के चलते उसे स्वीकार करने में असमर्थ था. पृषघ्र जानता था कि शूद्र वर्ग भी उसे अपने में सम्मिलित नहीं करेगा और साहस किया भी तो उस का दंड कईकई लोगों को भुगतना होगा.

वह वनों में भटकता रहा. कईकई दिनों तक मानव दर्शन भी न होता था. अंतत: उस ने नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया. सारी आसक्तियां छोड़ दीं, गुणमाला मस्तिष्क से विलोप हो गई. इंद्रियों को वश में कर वह जड़, अंधे, बहरे के समान हो कर तथाकथित ईश्वर को खोजता रहा, पर वह न मिला.

अंतत: वह पुन: गुणमाला के पास लौटा, ‘‘गुर्णवी, मैं लौट आया हूं,’’ अधीर स्वर में उस ने कुटिया के द्वार पर खड़े हो कर आवाज दी.

पर कोई उत्तर न मिला. पृषघ्र ने भीतर जा कर देखा, कोई नहीं था. कुटिया की हालत बता रही थी कि वहां काफी समय से कोई नहीं रहा. कुछ सोच कर उस ने कुटिया को आग लगा दी और स्वयं भी उसी में समा गया.

मेरी पत्नी किसी और से प्यार करती है, क्या करूं?

सवाल

मैं 42 साल का एक शादीशुदा मर्द हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. मेरी पत्नी का किसी और मर्द के साथ चक्कर चल रहा है और मैं उसे रंगे हाथ पकड़ भी चुका हूं.

मैं ने उसे कई बार समझाया कि बच्चों के भविष्य के लिए ऐसा करना छोड़ दे, पर वह मानती ही नहीं है. बोलती है कि अब वह इस शादी से उकता गई है और उस की जिंदगी में कोई रोमांच नहीं बचा है, इसलिए उस से कोई उम्मीद मत रखो. उस की इस बेवजह की ख्वाहिश से मैं परेशान रहता हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

अब आप के पास 3 ही रास्ते बचे हैं. पहला यह कि पत्नी को उस की सनसनी और मौजमस्ती वाली आजाद जिंदगी जीने दें और खुद कलपते रहें. दूसरा यह कि अगर आंखोंदेखी मक्खी न निगल पाएं, तो तलाक दे दें, जो कि आसान काम नहीं है. हां, अगर पत्नी तैयार हो, तो रजामंदी से तलाक जल्द हो जाएगा.

एक तीसरा रास्ता ज्यादा कारगर है कि अपनी जिंदगी में वह रोमांच पैदा करें, जैसा पत्नी चाहती है और जो उसे पराए मर्द से मिल रहा है.

मुमकिन है कि आप उसे सैक्स के मामले में संतुष्ट न कर पा रहे हों, लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले उस से यह जानने की कोशिश करें कि आखिर वह चाहती क्या है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

आम बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन

राघवेंद्र विक्रम सिंह

कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती

आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि मंजर में टिकोरा (फल) लगने के बाद बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन कैसे किया जाए.

मटर के दाने के बराबर

आम के फल होने की

अवस्था में किए जाने वाले

कृषि के काम

* फूल के अच्छी प्रकार से खिल जाने के बाद से ले कर फल के मटर के दाने के बराबर होने की अवस्था के मध्य किसी भी प्रकार का कोई भी कृषि रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए, अन्यथा फूल के कोमल हिस्से घावग्रस्त हो जाते हैं, जिस से फल बनने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है.

* मटर के दाने के बराबर फल हो जाने के बाद इमिडाक्लोप्रिड (17.8 एसएल)

1 मिलीलिटर दवा प्रति 2 लिटर पानी में और हैक्साकोनाजोल 1 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में या डाइनोकैप (46 ईसी) 1 मिलीलिटर दवा प्रति 1 लिटर पानी में घोल कर छिड़कने से मधुवा और चूर्णिल आसिता की उग्रता में कमी आती है.

* प्लेनोफिक्स नाम की दवा को

1 मिलीलिटर प्रति 3 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करने से फल के गिरने में काफी कमी आती है. इस अवस्था में हलकी सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए, जिस से बाग की मिट्टी में उचित नमी बनी रहे, लेकिन इस बात का खास ध्यान देना चाहिए कि पेड़ के आसपास पानी इकट्ठा न हो.

* यदि आप का पेड़ 10 वर्ष या उस से ज्यादा का है, तो उस में 500-550 ग्राम डाईअमोनियम फास्फेट, 850 ग्राम यूरिया और 750 ग्राम म्यूरेट औफ पोटाश और 25 किलोग्राम गोबर की अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद पौधे के चारों तरफ मुख्य तने से तकरीबन 2 मीटर दूर रिंग बना कर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए.

मार्बल अवस्था (गुठली

बनने की अवस्था) में किए

जाने वाले कृषि के काम

आईआईएचआर, बैंगलुरु द्वारा विकसित मैंगो स्पैशल या सूक्ष्म पोषक तत्त्व, जिस में घुलनशील बोरोन की मात्रा ज्यादा हो, तो 2 ग्राम प्रति लिटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करने से फल के झड़ने में कमी आती है और फल गुणवत्तायुक्त होते हैं.

* बाग में हलकीहलकी सिंचाई कर के मिट्टी को हमेशा नम बनाए रखना चाहिए. इस से फल की बढ़वार काफी अच्छी होती है.

* बाग को साफसुथरा रखना चाहिए. थियाक्लोप्रिडयुक्त कीटनाशकों का स्प्रे करने से आम फलों के बोरर्स को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है.

* गुठली बनने की अवस्था में या मार्बल स्टेज में फलों पर छिड़काव किए गए कीटनाशकों से संतोषजनक परिणाम मिलते हैं. क्लोरोपायरीफास 2.5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी का स्प्रे करने से भी आम के फल छेदक कीट को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता है.

* फल मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए फैरोमौन ट्रैप 15 प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं.

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