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तकरार है जहां, प्यार है वहां : पति पत्नी के बीच नोकझोंक का है अलग ही मजा

पति पत्नी के रिश्ते में कहा जाता है कि छोटीमोटी प्यार भरी तकरार तो होती ही रहती है. हम यहां बात कर रहे हैं उन खास मुद्दों की जिन पर अकसर प्यार भरी तकरार होती रहती है:

महिलाओं में सरप्राइज का क्रेज :

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में सरप्राइज का क्रेज ज्यादा पाया जाता है. ऐसे में वे अकसर इस बात पर झगड़ा करती हैं कि अब उन के पति ने उन्हें सरप्राइज देना बंद कर दिया है. हालांकि यह बात बहुत मामूली है, पर मामूली झगड़े की वजह बन जाती है और कभीकभी यह झगड़ा बड़ा भी हो जाता है.

अति व्यस्तता :

पत्नी पति की अति व्यस्तता से भी परेशान हो जाती है. पति के छुट्टी ले कर उसे समय न देने पर वह जी भर कर लड़ती है. अगर यह छुट्टी की कमी कहीं उस के मायके के कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की वजह बन जाए तो फिर तो पति को कोई नहीं बचा सकता.

सामान का जगह पर न मिलना :

पतियों को जो बात सब से ज्यादा परेशान करती है वह है उन के सामान का जगह पर न मिलना. तब पति बेहद नाराज हो जाते हैं. अब भले ही पत्नी ने उसे ज्यादा सुरक्षित रखने या सफाई के लिए हटाया हो. अब पहले वाला प्यार नहीं: यह एक कौमन प्रौब्लम है. अगर पतिपत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो अति व्यस्तता दोनों के बीच के रोमांस को उड़ा देती है. दोनों एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप करते रहते हैं.

कपड़ों को बेतरतीब रखना :

यह शाश्वत जंग का विषय है. गीले तौलिए, गंदे मोजों या फिर कपड़ों को इधरउधर डालने पर यह जंग अकसर हो जाती है.

दोस्तों से प्यार :

पत्नी को सब से ज्यादा परेशानी पति के दोस्तों से होती है, जिन के साथ वक्त गुजारने में पति कई बार अपनी पत्नी को इग्नोर कर देता है. ऐसे में पत्नी का यह शिकायत करना बनता ही है कि उस के लिए तो पति के पास समय ही नहीं है.

हरदम चिकचिक करना :

यह भी बहुतायत से पाई जाने वाली शिकायत है पतिपत्नी के बीच कि घर में जितनी देर रहते हैं मुंह बना रहता है जबकि बाहर के लोगों से खूब हंस कर बातें की जाती हैं.

क्या पकाऊं :

यह पत्नियों की बड़ी समस्या है और पतियों की शिकायत कि जब देखो एक ही चीज पका देती हो. यह लड़ाई की स्थाई वजह भी है.

कोई रिश्ता परफैक्ट नहीं :

सचाई यह है कि कोई भी रिश्ता परफैक्ट नहीं होता. यदि आप यह सोचती हैं कि रिश्ते में सब कुछ आप की मरजी के अनुसार या किसी फिल्मी कहानी की तरह होना चाहिए, तो चोट लगनी लाजिम है. हर रिश्ता अलग होता है. यही नहीं हर रिश्ते को आप के प्यार, समर्पण, श्रम और साथ के खादपानी की जरूरत होती है. कई बार रिश्ता टूटने की वजह बेमानी उम्मीदें होती हैं.

वह हमेशा सही बातें कहेगा :

ऐसा नहीं होगा और न ही आप उस से ऐसी उम्मीद रखें क्योंकि कोई भी परफैक्ट नहीं होता है. और पति न ही किसी रोमानी फिल्म का हीरो है, जो हमेशा सही और अच्छी बातें ही करेगा. वह भी इनसान है. और आम इनसानों की तरह वह भी गलतियां करेगा. वह ऐसी बातें कह सकता हैं, जो उसे नहीं कहनी चाहिए थीं. कई बार बातें गलत अर्थ में बाहर आती हैं. अगर ऐसी बातें कभीकभार हों तो ज्यादा दिल से न लगाएं. अगर ऐसा नियमित होता है, तो आप को सोचने की जरूरत है.

हम साथ में हमेशा खुश रहेंगे :

माफ कीजिएगा यह हकीकत नहीं है. भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है यह कोई नहीं जानता. जीवन में अजीब चीजें होती हैं. हो सकता है कि आप दोनों में से कोई एक बीमार पड़ जाएं. अपने रिश्ते के हर पल का आनंद उठाने का प्रयास करें. जरूरी नहीं प्रेम कहानी किसी परीकथा सी चलती रहे. उतारचढ़ाव आ सकते हैं. आप को उन के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है.

गुम है किसी के प्यार में के 2 साल पूरे, सई के फैंस ने ऐसे मनाया जश्न

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस आयशा सिंह इन दिनों सीरियल गुम है किसी के प्यार में नजर आ रही हैं. आयशा सिंह ने इस सीरियल के जरिए लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं.

खास बात तो यह है कि सई बने आयशा सिंह को आज पूरे 2 साल हो गए, इस खास मौके पर वह सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रह हैं. लोग उन्हें इस खास मौके पर जमकर बधाई दे रहे हैं. यूजर उनकी फोटो और वीडियो शेयर करके कह रहे हैं कि आयशा सिंह को इस सीरियल में पूरे 2 साल होने पर ढेंर बधाईयां.

कुछ ने लिखा कि आपने बहुत कम समय में अपनी मेहनत से अपना मुक्काम हासिल कर लिया है, एक ने कहा कि मैं चाहता हूं कि आपकी कहानी हर घर तक पहुंचेगी, तो वहीं एक ने कहा कि मेरी मां हमेशा कहती है कि सई को लगा दो.

सोशल मीडिया पर सई की तारीफें की पुल बांधते नहीं थक रहे हैं. बता दें कि 600 एपिसोड पूरा हो चुका है इस सीरियल का .इसके साथ ही कुछ यूजर्स ने केक काटकर मनाया है. बता दे कि इन्होंने अपनी कैरियर कि शुरुआत जिंदगी अभी बाकी है से कि थी. सई बनकर वह अपनी परछाई हर घर में बनाई हुईं हैं.

आलिया भट्ट ने गोद भराई में दिखाया प्रेग्नेंसी ग्लो, ये सेलेब हुए शामिल

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस आलिया भट्ट जल्द मां बनने वाली हैं, आलिया और रणबीर जल्द पेरेंट्स बनने वाले हैं. इनके बच्चे का इंतजार न सिर्फ कपूर खानदान कर रहा है बल्कि उनके फैंस भी इंतजार कर रहे हैं.

खास बात तो यह है कि आलिया भट्ट के बेबी का इंतजार सबको है ऐसे में आलिया भट्ट ने अपनी गोदभराई की रस्म पूरी हुई है. इस खास मौके पर आलिया भट्ट के करीबी लोग नजर आएं, करिश्मा कपूर, रिद्धिमा कपूर और नीतू कपूर खास अंदाज में नजर आईं.

इस दौरान आलिया भट्ट का ग्लो देखने लायक था, आलिया भट्ट की लेटेस्ट फोटो खूब चर्चा में हैं. इस खास मौके पर आलिया भट्ट की सास नीतू कपूर सबसे पहले पहुंची, पिंक और ग्रीन ड्रेस में नीतू कपूर का लुक देखने लायक था, बता दें कि नीतू कपूर दादी बनने के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं.

इसके साथ ही आलिया भट्ट की ननद रिद्धिमा कपूर भी शानदार तरीके से सजधज के पहुंची, ये भी बुआ बनने के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं. आलिया और रिद्धिमा की बॉन्डिंग काफी ज्यादा अच्छी है.

करिश्मा कपूर और रणबीर कपूर की बॉन्डिंग भी काफी ज्यादा अच्छी है, ऐसे में वह भी इस खास मौके पर नजर आईं. आलिया भट्ट की बहन शाहिन भट्ट भी नजर आईं. आलिया और रणबीर के खास दोस्त आयान मुखर्जी भी नजर आएं.

तेंदुए के दो मादा शावकों में एक को भवानी तो दूसरे को चंडी नाम दिया मुख्यमंत्री योगी ने

आदित्यनाथ ने कहा कि रामराज की भावना के अनुरूप मानव कल्याण के साथ प्रत्येक प्राणी की रक्षा व संरक्षण में सभी को अपना योगदान देना चाहिए. इसकी प्रेरणा हमें रामायण से भी मिलती है. रामायण की गाथा में अरण्य कांड जीव जंतुओं के संरक्षण, प्रकृति के प्रति दायित्वों, जीवों के प्रति व्यवहार की सीख देता है. अरण्य कांड में एक प्रकार से पूरी भारतीय ज्ञान संपदा समाहित है.

सीएम योगी बुधवार को शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (गोरखपुर चिड़ियाघर) में तेंदुए के दो मादा शावकों को दूध पिलाकर उनका नामकरण (भवानी और चंडी) करने, व्हाइट टाइगर (सफेद बाघिन गीता) को क्रॉल से बाड़ा प्रवेश कराने, चिड़ियाघर के हाल में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने रामचरित मानस की पंक्तियों ‘हित अनहित पसु पच्छिउ जाना, मानुष तनु गुन ग्यान निधाना’ का स्मरण करते हुए कहा कि कौन हितैषी है और कौन हानि पहुंचाने वाला पशुओं में इसका स्पंदन होता है.

इस उद्धरण को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम वन में माता सीता व अपने अनुज लक्ष्मण के साथ ही गए थे लेकिन वनवास काल में उनकी मदद वनवासियों, भालू, वानर, गिद्ध यहां तक कि पेड़, पौधों, व जंगल के नदी नालों ने की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य भी तभी संरक्षित रहेगा जब वह प्रकृति के प्रति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग रहेगा. उन्होंने वन्यजीवों के संरक्षण हेतु सभी लोगों के योगदान की अपील की.

लखनऊ में शुरू होने जा रहा यूपी का पहला नाइट सफारी :

सीएम योगी ने वन्यजीव संरक्षण तथा ईको टूरिज्म को लेकर प्रदेश सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ में प्रदेश का पहला नाइट सफारी शुरू करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इससे ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, वन्यजीवों के प्रति सम्मान की भावना जागृत होगी, मनोरंजन के साथ बच्चों का ज्ञानवर्धन भी होगा. उन्होंने कहा कि चित्रकूट के रानीपुर में टाइगर रिजर्व बनाए जाने की भी घोषणा हो चुकी है.

भगवान राम ने अपने वनवास काल का सर्वाधिक समय चित्रकूट में ही व्यतीत किया था. बिजनौर व रामनगर में भी ईको टूरिज्म से जुड़े प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं. सरकार वन्यजीवों के लिए महाराजगंज, मेरठ, चित्रकूट, पीलीभीत आदि जगहों पर रेस्क्यू सेंटर बना रही है. महाराजगंज के सोहगीबरवा क्षेत्र में गिद्ध संरक्षण केंद्र बनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों से होने वाली हानि को सरकार ने आपदा की श्रेणी में रखा है.

नमामि गंगे परियोजना से हो रहा जलीय जीवों का संरक्षण :

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार जलीय जीवों के संरक्षण को लेकर भी संवेदनशील है. उन्होंने कहा कि नमामि गंगे परियोजना से इसमें काफी मदद मिल रही है. सीएम ने कहा कि कानपुर के सीसामऊ में पहले गंगा नदी में प्रतिदिन 14 करोड़ लीटर सीवर गिरता था, नमामि गंगे परियोजना के कार्यों से अब एक बूंद भी नहीं गिरता. अब सीवर गिरने वाला स्थान सेल्फी प्वाइंट बन चुका है. इसी तरह जाजमऊ में चमड़ा उद्योग का कचरा गिरने से जलीय जीव समाप्त प्राय हो गए थे. वहां अब जलीय जीवों को पुनर्जीवन मिला है और बड़ी संख्या में जलीय जीव नदी में दिखने लगे हैं.

गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉल्फिन संरक्षण के लिए सरकार ने भगवान श्रीराम के प्रिय मित्र निषादराज के क्षेत्र को चुना है. विगत वर्ष अपने काशी के एक दौरे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कि अब वहां भी गंगा नदी में डॉल्फिन दिखाई देने लगी हैं. उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार डॉल्फिन संरक्षण के लिए हर संभव कदम उठाएगी.

वन्यजीवों के इलाज के लिए बनेगा डॉक्टरों का अलग कैडर :

कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्यजीवों के उपचार व संरक्षण के लिए पशु चिकित्सा अधिकारियों का अलग कैडर निर्धारित करने का निर्देश वन विभाग के जिम्मेदारों को दिया. उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के इलाज के लिए अभी चिकित्सक पशुपालन विभाग से लाए जाते हैं. पर, अब वन्यजीवों के रेस्क्यू व उनके उपचार हेतु पशु चिकित्सा अधिकारियों का अलग कैडर तैयार करना होगा.

एक-एक पेड़ का होना चाहिए संरक्षण :

पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण की अपील करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक एक पेड़ की कीमत को समझते हुए उनका संरक्षण होना चाहिए. उन्होंने बताया कि विगत 5 वर्ष में उत्तर प्रदेश में100 करोड़ पेड़ लगाए गए. यह दुनिया में सर्वाधिक है. इस बार 35 करोड़ वृक्ष लगाए गए हैं, इसे और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है पर्यावरण अनुकूल होगा तो स्वास्थ्य की रक्षा के साथ ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से भी बचा जा सकेगा. बुधवार को हो रही बारिश का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा ऐसी बारिश सावन में होती है. अक्टूबर माह में यदि इस तरह की बारिश हो रही है तो हमें इसके बारे में सोचना होगा. उन्होंने कहा कि प्रकृत से छेड़छाड़ होगी तो उसके दुष्परिणाम सामने आएंगे ही.

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने गंगा डॉल्फिन संबधी पोस्टर रिलीज करने के साथ प्रदेश के जलीय जीवों पर डाक विभाग के स्पेशल कवर का भी अनावरण किया. साथ ही चिड़ियाघर के निदेशक डॉ एच राजमोहन, पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश सिंह, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी.रोहित सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. उन्होंने वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किया.

सोहगीबरवा में शुरू होगी जंगल सफारी : वन मंत्री

कार्यक्रम में वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि महाराजगंज के सोगीबरवा में सरकार जल्द ही जंगल सफारी की सुविधा शुरू करेगी. जंगल सफारी से ईको टूरिज्म बढ़ेगा, लोगों को रोजगार मिलेगा. दूसरे प्रदेशों के लोग पर्यटन के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में रोजगार के लिए भी आएंगे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पर्यावरण प्रेम व वन्यजीवों से लगाव का उल्लेख करते हुए वन मंत्री ने कहा कि सीएम योगी ने अपने जन्मदिन पर सुबह उठते ही सबसे पहला काम पौधरोपण का किया था. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों से अपील की कि वे अपने जन्मदिन पर पौधरोपण अवश्य करें.

कार्यक्रम के दौरान डॉल्फिन दिवस पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जैव विविधिता के सलाहकार डॉ संदीप बेहरा ने आधारभूत व्याख्यान देते हुए डॉल्फिन संरक्षण में सबकी सहभागिता की अपील की. वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह ने वन्य जीव सप्ताह के कार्यक्रमों के साथ प्रदेश सरकार द्वारा ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. आभार ज्ञापन प्रधान वन संरक्षक वन्यजीव केपी दूबे ने किया.

इस अवसर पर वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री केपी मलिक, सांसद रविकिशन, महापौर सीताराम जायसवाल, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ धमेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ल, महेंद्रपाल सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागध्यक्ष श्रीमती ममता संजीव दूबे, गोरखपुर क्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक भीमसेन प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव, प्राणी उद्यान के निदेशक डॉ एच. राजा मोहन, पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश सिंह आदि मौजूद रहे.

मेरा अफेयर एक नौकरी करने वाली लड़की से है लेकिन वो हर बार खर्च मुझ पर टाल देती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 21 वर्षीय युवक हूं. ग्रैजुएशन की पढ़ाई करने के साथसाथ मैं नौकरी भी करता हूं. 3 साल से एक युवती के साथ मेरा अफेयर है. वह युवती भी जौब करती है. हफ्ते में एक बार हम एक रेस्तरां में मिलते हैं. पहले हम दोनों मिलजुल कर खर्च किया करते थे, लेकिन 5-6 महीने से मैं नोटिस कर रहा हूं कि वह खर्च मुझ पर टाल देती है. शर्म से मैं कुछ कह नहीं पाता, हालांकि उस की जौब भी अच्छीखासी है, जबकि मुझे अपना वेतन घर देना पड़ता है, क्योंकि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. मैं क्या करूं? डर लगता है कि अगर उस से पूछूं तो कहीं उसे खो न बैठूं?

जवाब

अगर आप यों ही शर्म करते रहेंगे तो फिर खर्च करने का अफसोस मत करिए. आप की कुछ आर्थिक मजबूरियां हैं, ये सब जानते हुए भी आप समझौता न ही करें तो अच्छा है. अगर युवती समझती है कि आप रईस परिवार से नाता रखते हैं तो आप उस से दोटूक बात कह कर वन बाय वन खर्च करने की बात कहें. उसे भी यह समझ आ जाएगा कि सिंगल खर्चे की बात दूसरे का हाजमा खराब कर सकती है. याद रखिए, जिस ने की शर्म, उस के फूटे कर्म. जब उस युवती ने धीरेधीरे अपना हाथ पीछे खींच लिया है तो आप भी रोमांस करिए, बात करिए और घर को चलते बनिए. युवती अगर भूख लगने की बात कहे तो कह दीजिए पेट फुल है, अगर उसे खाना है तो मजे से खाए.

विधवा का हक़

शादी के बाद 2-3 साल में यदि पति की मृत्यु हो जाए और चाहे बच्चे हों या न होंमृत पति के घरवालों को जितना सदमा बेटे को खाने का होता है उस से ज्यादा यह होता है कि अब बेटे की संपत्ति की हकदार विधवा पत्नी भी है. अगर बिना वसीयत के मौत हुई है तो कानून के अनुसार मृत पति के वारिसों में पत्नीबच्चे और मां होते हैं.

इस का अर्थ है कि जो संपत्ति मृत पति के पितादादा की दी या किसी और ढंग से युवा बेटे के नाम हुईउस में उस युवा पत्नी का एक बच्चा हो तो दोतिहाई और 2 बच्चे हों तो तीनचौथाई हिस्सा हो जाएगा. वर्ष 1956 में कानून निर्माताओं ने मां को बेसहारा न रखने के लिए उसे बेटे की संपत्ति में हकदार बना दिया था, इसलिए कुछ हिस्सा वह पा सकती है.

कितने ही मामलों में विधवा और उस की ससुराल वाले लड़ाई करते हैं कि मृत पति की संपत्ति को बांटें कैसे. हाल में एक मामले में पति की मृत्यु शादी के 8 माह में हो गई और बच्चा पति की मृत्यु के बाद हुआ. बच्चा न होता तो पति की संपत्ति का आधा हिस्सा मां को मिलता पर बच्चा हो जाने के बाद वह हिस्सा केवल एकतिहाई रह गया. चोट पर नमक तब छिडक़ा गया जब पत्नी ने ससुराल छोड़ दिया और ससुराल के मकान में पति के हिस्से पर हक जमाने लगी. इस से ज्यादा मृत बेटे के घर वालों को दुख तब होता है जब विधवा बहू दूसरा विवाह कर ले क्योंकि उस का मृत पति की संपत्ति पर हक बना रहता है.

इस का अर्थ है कि जो मांबाप मृत बेटे के साथ 20-30 साल से रह रहे हैं उन का संपत्ति पर जरा सा हक और वह लडक़ी, जो 2-3 साल साथ रहेबड़ा हिस्सा ले जाए. इस पर अदालतों में बरसों विवाद चलते हैं. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उन की बेटे की विधवा मेनका गांधी के बीच ऐसा ही एक विवाद हुआ था जो अदालतों में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद हुआ था. संजय गांधी की संपत्ति का एक हिस्सा इंदिरा गांधी को मिला जो उन्होंने तुरंत संजय के उस समय नाबालिग बेटे वरुण गांधी के नाम कर दिया था.

अब विरासत के कानूनों में परिवर्तनों की जरूरत है. बजाय मुसलिम कानूनों के पीछे पडऩे के भारतीय जनता पार्टी को हिंदू औरतों की सुरक्षा के कानून बनाने चाहिए. यह भी देखना होगा कि शादी के 2-4 महीने या 2-4 साल में पति की मृत्यु के बाद पत्नी को कितनी संपत्ति मिले या न मिले.

आजकल युवक शादी से घबराने लगे हैं क्योंकि आज कानून नई पत्नियों को भी बहुत अधिकार देता है. मातापिता बेटों के नाम पैसा करने से घबराते हैं. इकलौती बेटियों के मातापिता भी चिंतित रहते हैं कि उन का दामाद उन की संपत्ति के लिए कुछ गलत न कर दे. कानूनों पर चर्चा नहीं होती क्योंकि हिंदूमुसलिम करने में वोट मिलते हैं और हिंदू औरतों को छेडऩा मिड के छत्ते में हाथ डालना है.

भवनों व मूर्तियों का युग

राजनीति भवनों व मूर्तियों का युग जिस तरह मुगल काल में शहंशाह बड़ेबड़े बुर्ज बनवा कर यह साबित करते थे कि वे सब से ताकतवर हैं, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सैंट्रल विस्टा, बड़ी मूर्तियों को बनवा कर फुजूल पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं. यह और कुछ नहीं, बादशाहों वाली मानसिकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी क्या एक नया इतिहास रच रहे हैं?

अगर उन के सवा 8 सालों के कार्यकाल पर दृष्टि डालें तो देखते हैं कि देश को नए संसद भवन के अलावा उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की विशालतम प्रतिमा की स्थापना करवा यह संकेत दिया है. अब सैंट्रल विस्टा और राजपथ से कर्तव्य पथ उस के 2 अन्य आयाम हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी की बहुप्रतीक्षित सैंट्रल विस्टा को 8 सितंबर को देश को समर्पित किया गया है. दरअसल, नरेंद्र मोदी के संपूर्ण कार्यव्यवहार और मानसिकता को देखते हुए कहा जा सकता है कि वे 130 करोड़ की विशाल जनसंख्या वाले विकासशील भारत देश के प्रधानमंत्री नहीं, मानो एक मुगल शहंशाह हैं.

इतिहास में मुगल बादशाह और शहंशाह भी देश की जनता के दुखत्रासदी को नजरअंदाज कर के कभी लालकिला बनवाया करते तो कभी ताजमहल और कभी कोई बागबगीचा. मोदी के कार्यकाल को भी अगर हम देखें तो पाते हैं कि मोदी ने जब से सत्ता संभाली है, जनता के दुख की अपेक्षा कुछ ऐसा निर्माण करते रहते हैं जिस से आने वाले समय में लोग उन्हें याद रखें कि माननीय नरेंद्र मोदी ने देखो यह बनवाया था. प्रधानमंत्री अमर हो जाना चाहते हैं. उन की सिर्फ एक यही इच्छा है कि लोग उन्हें कभी न भूलें. यही कारण है कि सरदार वल्लभभाई पटेल की विशालकाय मूर्ति से ले कर अपने नाम पर अहमदाबाद में मोदी ने स्टेडियम भी बनवा लिया है. नया संसद भवन, जिस की कभी कोई मांग ही नहीं की गई थी,

को भी बनवा लिया है. सैंट्रल विस्टा और कर्तव्य पथ देश की जनता का करोड़ों रुपए खर्च कर दिल्ली में राजपथ जिसे सैंट्रल विस्टा कहा जाता है फिर से बनवाया और अपने नाम एक बार फिर पहले जैसी उपलब्धि दर्ज कराई है. आइए, आप को बताते चलें कि सैंट्रल विस्टा निर्माण के आगेपीछे का सच क्या है. द्य 20 महीने बाद 9 सितंबर से इंडिया गेट और उस के आसपास का इलाका आम जनता के लिए खुल गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 सितंबर की शाम विजय चौक से इंडिया गेट तक के खंड का उद्घाटन किया. इस खंड को सैंट्रल विस्टा एवेन्यू नाम दिया गया है.

पहले इंडिया गेट के पास घास पर बैठ कर आम लोग पिकनिक यानी खुशियां मनाया करते थे. अब इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी. यानी अब लोग इंडिया गेट के पास घास पर बैठ कर पिकनिक नहीं मना सकते. अगर आप पिकनिक मनाने बैठ गए तो पुलिस वाले डंडे ले कर आप के पीछे दौड़ेंगे.

नई सुविधाओं को नुकसान से बचाने और वहां लगी चीजों की चोरी को रोकने के लिए वहां करीब लगभग 80 सुरक्षा गार्ड मौजूद रहेंगे.

मजे की बात आप को बताते चलें कि यह पहले किंग्सवे से देश की आजादी के बाद राजपथ और अब कर्तव्य पथ यानी 100 साल में 3 नाम, का यह तमाशा हमेशा याद रखा जाएगा और दिल्ली आने वाले पर्यटकों को आने वाले समय में गाइड यह फलसफा हंस कर बताएंगे.

आने वाले लोगों के लिए आइसक्रीम खाने और बेचने की जगह भी तय कर दी गई है.

सैंट्रल विस्टा एवेन्यू में कम कर दी, सिर्फ 8 वैंडिंग प्लाजा बनाए गए हैं जहां आइसक्रीम विक्रेता और दूसरे वैंडर अपना सामान बेच सकेंगे. इस से पहले शाम के समय पूरे राजपथ पर आइसक्रीम की बिक्री होती थी. अब आइसक्रीम गाडि़यों को केवल वैंडिंग जोन में ही अनुमति होगी.

जौर्ज पंचम की मूर्ति तो इंडिया गेट के पीछे बनी कैनोपी से कांग्रेस ही हटवा चुकी थी पर अब वहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लगाई गई है. यही है नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का भारत.

दीवाली स्पेशल – भाग 2 : खोखली रस्में

‘तो क्या करूं? इज्जत तो रखनी ही पड़ेगी. नहीं होगा तो एक बीघा खेत ही बेच डालूंगा.’

‘क्या कहा? खेत बेच डालोगे?’ लगा किसी ने मेरे सिर पर हथौड़े का प्रहार किया हो. क्षणभर को मैं इज्जत के ऐसे रखरखाव पर सिर धुनती रह गई. तीखे स्वर में बोली, ‘उस के बाद? सुधा और अंजना के ब्याह पर क्या करोगे? तुम्हारा और तुम्हारे लाड़लों के भविष्य का क्या होगा? तुम्हारे पिताजी तो तुम्हारे लिए 4 बीघा खेत छोड़ गए हैं जो तुम रस्मों के ढकोसले में हवन कर लोगे, लेकिन तुम्हारे बेटे किस का खेत बेच कर अपनी मर्यादा की रक्षा करेंगे?’ सत्य का नंगापन शायद इन्हें दूर तक झकझोर गया था. बुत बने ये ताकते रह गए. फिर तिक्त हंसी हंस पड़े, ‘तुम तो ऐसे कह रही हो, विमला की मां, मानो 4 ही बच्चे तुम्हारे अपने हों और विमला तुम्हारी सौत की बेटी हो.’

‘हांहां, क्यों नहीं, मैं सौतेली मां ही सही, लेकिन मैं गौना नहीं होने दूंगी. शादी करो तब पूरे खानदान  को न्योता दो, गौना करो तब फिर पूरे खानदान को बुलाओ. कपड़ा दो,  गहना दो, यह नेग करो वह जोग करो. सिर में जितने बाल नहीं हैं उन से ज्यादा कर्ज लादे रहो, लेकिन शान में कमी न होने पाए.’ इन के होंठों पर विवश मुसकान फैल गई. जब कभी मैं ज्यादा गुस्से में रहती हूं, इसी तरह मुसकरा देते हैं, मानो कुछ हुआ ही न हो. इन के होंठों की फड़कन कुछ कहने को बेताब थी, परंतु कह नहीं सके. उठ खड़े हुए और आंगन पार करते हुए कमरे की ओर चले गए. जब से विमला की शादी तय हुई, शादी संपन्न होने तक यही सिलसिला जारी रहा. ये कंजूसी से ब्याह कर के समाज में अपनी तौहीन करवाने को तैयार नहीं थे, और मैं रस्मों के खोखलेपन की खातिर चादर से पैर निकालने को तैयार नहीं थी. ‘गौने की रस्म अलग से करनी ही होगी. सदियों से यह हमारी परंपरा रही है,’ मैं इस थोथेपन में विश्वास करने को तैयार न थी.

छोटी ननद के ब्याह पर ही मैं ने यह निर्णय कर के गांठ बांधी थी. याद आता है तो दिल कट कर रह जाता है. ब्याह पर जो खर्च हुआ वह तो हुआ ही, सालभर घर बिठा कर उस का गौना किया गया तो 80 हजार रुपए उस में फूंक दिए गए. गौना करवाने आए वर पक्ष के लोगों की तथा खानदान वालों की आवभगत करतेकरते पैरों में छाले पड़ गए, तिस पर भी ‘मुरगी अपनी जान से गई, खाने वालों को मजा न आया’ वाली बात हुई. चारों ओर से बदनामी मिली कि यह नहीं दिया, वह नहीं दिया. ‘अरे, इस से अच्छी साड़ी तो मैं अपनी महरी को देती हूं… कंजूस, मक्खीचूस’ तथा इसी से मिलतीजुलती असंख्य उपाधियां मिली थीं.

मुझे विश्वास था कि मैं वर्तमान स्थिति और परिवेश में गौना करने में आने वाली कठिनाइयां बता कर इन्हें मना लूंगी. जल्दी ही मुझे इस में सफलता भी मिल गई. मेरी सलाह इन के निर्णय में परिवर्तित हो गई, किंतु ‘ये नहीं फलता है’ की आशंका से ये उबर नहीं पाए. विवाह संबंधी खरीदफरोख्त की कार्यवाहियां लगभग पूरी हो चुकी थीं. रिश्तेदारों और बरातियों का इंतजार ही शेष था. रिश्तेदारों में सब से पहले आईं इन की रोबदार और दबंग व्यक्तित्व वाली विधवा मौसी रमा, खानदानभर की सर्वेसर्वा और पूरे गांव की मौसी. दोपहर का समय था. विवाह हेतु खरीदे गए गहने, कपड़े एकएक कर मैं मौसीजी को दिखा रही थी. बातों ही बातों में मैं ने अपना फैसला कह सुनाया. सुनते ही मौसीजी ज्वालामुखी की तरह फट पड़ीं. क्रोध से भरी वे बोलीं, ‘क्यों नहीं करोगी तुम गौना?’

‘दरअसल, मौसीजी, हमारी इतनी औकात नहीं कि हम अलग से गौने का खर्च बरदाश्त कर सकें,’ मैं ने गहनों का बौक्स बंद कर अलमारी में रख दिया और कपड़े समेटने लगी.

‘अरे वाह, क्यों नहीं है औकात?’ मौसीजी के आग्नेय नेत्र मेरे तन को सेंकने लगे, ‘क्या तुम जानतीं नहीं कि शादी के समय विदाई करना हमारे खानदान में अच्छा नहीं समझा जाता?’

‘लेकिन इस से होता क्या है?’

‘होगा क्या…वर या वधू दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाएगी. सालभर के अंदर ही जोड़ा बिछुड़ जाता है.’ मैं तनिक भी नहीं चौंकी. पालतू कुत्ते की तरह पाले गए अंधविश्वासों के प्रति खानदान वालों के इस मोह से मैं पूर्वपरिचित थी.

अलमारी बंद कर पायताने की ओर बैठती हुई मैं ने जिज्ञासा से फिर पूछा, ‘लेकिन मौसीजी, हमारे खानदान में शादी के समय विदाई करना अच्छा क्यों नहीं समझा जाता, इस का भी तो कोई कारण अवश्य होगा?’

 

सब से बड़ा सुख -भाग 3 : कमला के पति क्या करते थे?

वृद्धाश्रम शहर से दूर एकांत स्थान पर था. चारों तरफ हरियाली से घिरा वह भवन मन को शांति देने वाला था. अंदर जा कर उन्होंने देखा कि जीवन की सभी आवश्यकताओं का सामान वहां उपलब्ध है. जिस ने भी उसे बनवाया था, बहुत सोचविचार कर ही बनवाया था. चूंकि अभी वह नया ही बना था, इसी कारण 10-12 ही स्त्रीपुरुष वहां थे. सभी वृद्धों के चेहरों पर अपने अतीत की छाया मंडरा रही थी. कमला ने मुसकराते हुए सब से अभिवादन किया. उन्हें प्रफुल्लित तथा मुसकराते देख सभी चकित रह गए. सभी वृद्ध समृद्ध परिवारों के सदस्य थे. पैसे की उन के पास कमी न थी, पर अपमान की वेदना सहतेसहते वे टूट चुके थे. कमला उन के पास बैठ कर बोलीं, ‘‘देखिए, अगर मैं कुछ कहूं और उस से आप को पीड़ा पहुंचे तो इस के लिए मैं क्षमा चाहती हूं. मैं इसी शहर के सफल व्यवसायी प्रताप सिंह की पत्नी कमला हूं. 8 साल पहले मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है. मैं अपने बेटे ब्रजेश के साथ रहती हूं. आप सब के समान मुझे भी घर का फालतू प्राणी समझ कर यहां भेज दिया गया है.

‘‘थोड़ी देर के लिए मैं भी बहुत मायूस हो गई थी पर जब मैं ने सोचा कि मेरे पास तो धन और स्वास्थ्य दोनों ही हैं, पर उन वृद्धों की मनोस्थिति क्या होती होगी जो तन, मन तथा धन तीनों से वंचित होंगे, तो यह महसूस करते ही मुझ में एक अदम्य उत्साह जागृत हो गया. फिर मुझे यह अपमान, अपमान न लग कर वरदान लगा. हम सब को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए कि कुछ तो हमारे पास है, जिस का उपयोग हम कर सकते हैं. ‘‘हमें यह नहीं दिखना है कि हम टूट चुके हैं. जीवन में यही समय है जब हम खाली हैं और कुछ सत्कार्य करने में सक्षम हैं. आप सब के पास दौलत की कमी नहीं है. यह सभी दौलत आप ने अपने पुरुषार्थ से संचित की है. इसे उपयोग में लाने का आप को पूरा हक है. अपने बच्चों के लिए तो सभी करते हैं पर किसी ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़े उन वृद्धों के बारे में सोचा है, जो तिलतिल कर मर रहे हैं? चूंकि उन के पास पैसा नहीं है, इस कारण उन की जिंदगी कुत्तों से बदतर हो गई है. अपना ही खून सफेद हो गया है. क्या हम उन के लिए कुछ नहीं कर सकते?

‘‘अगर हम ने एक दुखी को अंत समय शांति तथा सुख दिया तो इस से बड़ा नेक कार्य और क्या हो सकता है. देने से बढ़ कर और कोई सुख नहीं है. मैं ने अपने बेटे को इस योग्य बना दिया है कि वह स्वयं कमा सकता है. मैं अपनी समस्त संपत्ति उन वृद्धों पर खर्च करूंगी जो इस वृद्ध आश्रम में पैसे के कारण नहीं आ सकते. हम उन से वही कार्य करवाएंगे, जिन में उन की रुचि होगी, ताकि वे अपने को दूसरों पर आश्रित समझ कर हीनभावना से ग्रसित न होने पाएं. हम अपने पैसे से दुत्कारे हुए वृद्धों को नवजीवन दे सकें तो इस से क्या सब को संतोष तथा प्रसन्नता नहीं होगी?’’ उन वृद्धों के पोपले मुखों पर संतुष्टि की एक स्मित रेखा सी खिंच गई. पूरा हौल तालियों से गूंज उठा. अब तक खाली बैठेबैठे उन की आंखों के आगे अतीत चलचित्र की भांति कौंध जाता था जब उन्हें पालतू प्राणी समझ कर उन की उपेक्षा की जाती थी. पर अब उन्हें अपने अस्तित्व की शक्ति का भान हुआ था. सभी बारीबारी से बोल उठे कि हमारी बड़ीबड़ी कोठियां हैं, उन्हें हम वृद्धों का निवासस्थान बना देंगे. वहां ऊंचनीच व जातपांत का भेदभाव नहीं रहेगा.

कमला की आंखें नम हो गईं. उन्हें लगा, ‘जो हमसफर इतने पास आ जाते हैं, उन्हें फिर एकदूसरे को अपनी बात समझानी नहीं पड़ती. उन की आंतरिक अनुभूतियां ही वाणी समान मुखर हो उठती हैं.’ सभी वृद्धों की आंखें विजयीगर्व से चमक रही थीं. दूसरे दिन कमला ने सभी वृद्धों से अपने पोते की भविष्यवाणी के बारे में बताया और यह भी कहा कि वे उस की पसंद की चीजें ले कर अकसर उस से मिलने जाया करेंगी. इतवार के दिन उन्होंने राजू की पसंद की ढेर सारी चीजें खरीदीं, ताकि वह अपने दोस्तों को भी दे सके. होस्टल पहुंचते ही राजू उन से लिपट कर बोला, ‘‘दादी, मैं जानता था कि तुम जरूर मुझ से मिलने आओगी,’’ उस ने अपने दोस्तों से कहा कि यही मेरी प्यारी दादी हैं. कमला ने सभी सामान बच्चों में बांटा और कई घंटे उन के साथ व्यतीत करने के बाद यह कह कर लौट पड़ीं कि वे यहां आती रहेंगी.

राजू ने पूछा, ‘‘घर पर सब ठीक है न?’’

उन्होंने मुसकराते हुए कहा, ‘‘ मैं घर में नहीं रहती. एक वृद्ध आश्रम है, वहीं पर रहती हूं.’’ राजू चीख कर बोला, ‘‘मैं समझ गया हूं, उन्होंने आप को भी घर से निकाल दिया है.’’ हंसते हुए उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘राजू, वहां तेरे बिना मेरा मन भी तो नहीं लगता था. इस कारण भी तेरे मातापिता ने मुझे आश्रम भेज दिया.’’

‘‘मैं सब समझता हूं. वे हम दोनों को प्यार नहीं करते, इसी कारण घर से निकाल दिया है.’’

उन्होंने प्यार से राजू के माथे को चूमते हुए कहा, ‘‘बेटे, मातापिता के लिए ऐसी बातें नहीं सोचनी चाहिए. वे जो कुछ भी कर रहे हैं, तुम्हारे भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए ही कर रहे हैं. होस्टल में बच्चों के संग तुम्हारा मन लग जाएगा, इसलिए तुम्हें यहां भेजा है.’’ राजू ने अविश्वास से दादी की तरफ देख कर कहा, ‘‘आप कहती हो तो मान लेता हूं,’’ फिर मासूमियत से बोला, ‘‘दादी, अपने घर में कब ले चलोगी?’’ कमला की आंखों में आंसू तैर आए, जिन्हें उन्होंने बड़े कौशल से पी कर कहा, ‘‘बेटे, हमारे घर में सभी वृद्ध लोग हैं. वहां तुम्हारा मन नहीं लगेगा. हम ही तुम्हारे पास आते रहेंगे.’’

वृद्धाश्रम लौटने पर काफी देर उन का मन उदास रहा. फिर उन के भीतर से आवाज आई, ‘तुझे भावुकता में बह कर अपने ध्येय को नहीं भूलना. तेरा लक्ष्य तेरे सामने है. इस समय बीस हाथ तेरी सहायता के लिए तैयार हैं. ये हाथ दिनोंदिन बढ़ते ही जाएंगे. सफलता तुझे पुकारपुकार कर कह रही है, आगे बढ़ती जा, ‘यह सोचते ही अदम्य उत्साह से वे उठ खड़ी हुईं.  दूसरे दिन कमला ने आश्रम के वृद्धों से कहा, ‘‘आप लोगों के पास जो भी कोठियां हैं, अगर आप खुशीखुशी उन्हें वृद्धाश्रम बनाने के लिए दे सकें, तो जो व्यय हम इस वृद्धाश्रम पर कर रहे हैं, वही हम अपने आश्रम पर खर्च करेंगे. हम सभी मिल कर उन्हें आवश्यक सामान से सुसज्जित कर कई वृद्ध आश्रम बना सकते हैं. मेरे पास जितनी संपत्ति है, उसे मैं वृद्धाश्रमों को दे रही हूं. यह सही है कि इस उम्र में हम थक सकते हैं पर जिस उत्साह से हम कार्य करेंगे, उस से शायद किसी को भी थकावट महसूस नहीं होगी.’’

हर वृद्ध, जिस के पास पैसा था, ने वह दिया और जिस के पास कोठी भी थी, उस ने सहर्ष कोठी तथा पैसा दोनों ही दिए. जब वृद्धों ने अपनीअपनी कोठियां खाली करवानी शुरू कीं तो रिश्तेदारों के होश उड़ गए. इस प्रकार कई कोठियां खाली हो गईं. अब उन वृद्धों ने बड़े उत्साह से उन में आवश्यक सामान तथा नौकरों का बंदोबस्त करना शुरू कर दिया. समाचारपत्रों में इन वृद्ध आश्रमों की प्रशंसा में कौलम भर गए. मध्यवर्गीय परिवार के वृद्धों को प्राथमिकता मिली. हर वृद्धाश्रम का ट्रस्ट बना दिया गया, ताकि जिन्होंने पैसा दिया है, उन की मृत्यु के बाद भी वे सुचारु रूप से चलते रहें. वृद्धों के निराश चेहरों पर रौनक आने लगी. समाज के जो संभ्रांत परिवार थे, उन के यहां एक अनोखा परिवर्तन आया. परिवार की युवा पीढ़ी जहां सतर्क हुई, वहीं वृद्धों के प्रति उन के व्यवहार में भी परिवर्तन आया और उन की पूरी देखभाल होने लगी. कमला तथा अन्य वृद्धों, जिन्होंने इन आश्रमों को बनवाने में अपना पूरा सहयोग दिया था, की देखादेखी बहुत से रईसों ने अपना पैसा तथा सहयोग देना शुरू कर दिया क्योंकि वे स्वजनों के व्यवहारपरिवर्तन के इस छलावे को समझ चुके थे और किसी न किसी रूप में इन वृद्धाश्रमों से संपर्क बनाने की चेष्टा में लग गए थे. एक तरफ वाहवाही की चाह थी, तो दूसरी ओर परोपकार की भावना जोर मार रही थी. हृदय के किसी कोने में प्रतिकार भी था.

कमला वृद्धाश्रम के एक कक्ष में बैठी विचारों में मगन थीं. उन के चहेरे पर वेदना और शांति के भावों का अनोखा मिश्रण झलक रहा था. अब उन्होंने जाना कि कांटों की शय्या पर सोया प्राणी ही कुछ करने की क्षमता रखता है. जिस सत्कार्य को करने का उन्होंने बीड़ा उठाया था, उस को प्रेरणा देने वाला उन के बेटेबहू का व्यवहार ही तो था. कमला ने महसूस किया कि देने से बड़ा सुख और कोई नहीं है. दूसरों को सहायता तथा सुख पहुंचा कर अपने हृदय को कितनी शांति और सुकून मिलता है. उन्होंने जीवन का सब से बड़ा सुख पा लिया था.

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