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एंग्री इंडियन गौडेसेस

पांच छह लड़कियां जब आपस में बतियाती हैं तो लड़कों या पुरुषों में यह उत्सुकता बनी रहती है कि वे क्या बातें करती हैं. यह फिल्म इसी विषय को दर्शाती है. यह शायद पहली फिल्म होगी जिस में कुछ लड़कियों को साथ रहते दिखाया गया है, वह भी कईकई दिनों तक. वे आपस में एकदूसरे से निजी बातें शेयर करती हैं, मौजमस्ती करती हैं, एकदूसरे को अपना दुखदर्द सुनाती हैं. निर्देशक पान नलिन ने हर लड़की (किरदार) को अपना दुखदर्द सुनाने का पूरा मौका दिया है. उस ने प्रत्येक किरदार की बातों को रोचकता से पेश किया है.

फिल्म की कहानी समाज में लड़कियों की हैसियत, उन के अधिकार, उन के संघर्ष को बयां करती है. फिल्म की कहानी शुरू तो होती है हंसतेखेलते वातावरण के साथ परंतु क्लाइमैक्स एक त्रासदी के साथ होता है.

फिल्म में कहा गया है कि घर की लड़कियों का सम्मान करना चाहिए. फिल्म में दिखाया गया है कि एक लड़की को जीवन में किस तरह उतारचढ़ावों से गुजरना पड़ता है.

कहानी 7 महिलाओं की है. सुरंजना (संध्या मृदुल) एक कंपनी की सीईओ है. जोआना (अमृत मघेरा) बौलीवुड में जाने का सपना पाले हुए है. मधुरीता (अनुष्का मनचंदा) अपने गानों का अलबम निकालना चाहती है. नरगिस (तनिष्ठा चटर्जी) सामाजिक कार्यकर्ता है. पामेला जसवाल (पवलीन गुजराल) शादी के बाद पारिवारिक कलह में उलझी है. फ्रीडा (सारा जेन डिआज) गोवा में रहती है. फ्रीडा की नौकरानी लक्ष्मी (राजश्री देशपांडे) है.

फिल्म की शुरुआत फ्रीडा द्वारा अपनी दोस्तों को अपने घर बुलाने से होती है. फ्रीडा अपनी दोस्त नरगिस से शादी करना चाहती है. एक दिन रात को सभी युवतियां पार्टी करने एक बीच पर जाती हैं. अचानक जोआना गायब हो जाती है. उस की लाश समुद्र किनारे मिलती है. उसे रेप कर मार कर फेंका गया था. सभी युवतियां रेपिस्ट व उन के साथियों को मार डालती हैं.

पुलिस तहकीकात करती है. अगले दिन चर्च में फ्रीडा और नरगिस की शादी के मौके पर पुलिस इन युवतियों को पकड़ने पहुंचती है. पुलिस पूछती है कि उन युवकों को किस ने मारा था. सब से पहले नरगिस खड़ी होती है, फिर उस की अन्य दोस्त. उस के बाद चर्च में बैठा हर शख्स खड़ा हो जाता है. पुलिस इंस्पैक्टर निरुत्तर लौट जाता है.

फिल्म वयस्कों के लिए है. फिल्म बलात्कार जैसे मुद्दे पर आंखें खोलने का प्रयास करती है, साथ ही लड़कियों को छेड़ने जैसी बातों पर भी प्रकाश डालती है. फिल्म मल्टीप्लैक्स कल्चर की है. कमर्शियल वैल्यू फिल्म में नहीं है. सभी कलाकारों ने अपनीअपनी भूमिकाएं ढंग से निभा ली हैं. पुलिस अफसर की भूमिका में आदिल हुसैन जंचा है. फिल्म का गीतसंगीत फिल्म के अनुरूप है. छायांकन साधारण है.

हेट स्टोरी-3

‘हेट स्टोरी-3’ सीरीज की यह तीसरी फिल्म है. आप को बता दें कि इस सीक्वल की चौथी फिल्म भी बनेगी. पिछली दोनों फिल्मों की अपेक्षा यह कुछ ज्यादा ही हौट है. अगर इसे ‘हेट स्टोरी’ न कह कर ‘हौट स्टोरी’ कहा जाए तो उपयुक्त होगा. फिल्म में जम कर कामुकता परोसी गई है. अब तक कई फिल्में कर चुकी जरीन खान फ्लौप ही रही है. इस फिल्म में उस ने जम कर कामुक सीन दिए हैं. फिल्म की दूसरी महिला किरदार डेजी शाह ने भी खूब अंग प्रदर्शन किया है.

फिल्म में 2 पुरुषों की जंग और अहं को दिखाया गया है. फिल्म में निर्देशक ने सभी मसालों को भर कर दर्शकों को खींचने का प्रयास किया है. फिल्म रिवैंज ड्रामा है. निर्देशक ने अंत तक यह सस्पैंस बनाए रखा है कि कौन किस से बदला ले रहा है. यह सस्पैंस फिल्म खत्म होने से सिर्फ 2 मिनट पहले ही जाहिर होता है.

फिल्म की कहानी विक्रम भट्ट ने लिखी है. उस ने रिश्तों के तानेबाने को इस प्रकार बुना है कि दर्शकों की रुचि यह जानने में लगी रहती है कि आगे क्या होने वाला है.

फिल्म की कहानी एक उद्योगपति आदित्य दीवान (शरमन जोशी) की है. सिया (जरीन खान) उस की बीवी है. दोनों की जिंदगी में एक दिन एक अन्य उद्योगपति सौरव सिंघानिया (करन सिंह ग्रोवर) आ जाता है. सौरव आदित्य और सिया को अपने घर बुला कर आदित्य से कहता है कि वह एक रात के लिए सिया को उस के पास भेज दे. यहीं से दोनों एकदूसरे के दुश्मन हो जाते हैं. सौरव सिंघानिया आदित्य को बरबाद करने की ठान लेता है. वह आदित्य की फैक्टरी को बंद करा देता है. आदित्य सौरव की चाल को काटने के लिए अपनी सैक्रेटरी काया (डेजी शाह) को सौरव के घर भेजता है ताकि उसे पलपल की खबर मिलती रहे. लेकिन सौरव काया को मरवा कर उलटे आदित्य को फंसा कर उसे जेल भिजवा देता है.

सिया अकेली पड़ जाती है. वह सौरव के पास जाने के बदले आदित्य की बेगुनाही के सारे सुबूत सौरव से देने की रिक्वैस्ट करती है. सारे सुबूत ले कर वह सौरव को जहर दे देती है. सौरव के आदमी उसे अस्पताल पहुंचा देते हैं. होश में आते ही सौरव आदित्य और सिया को मारने पहुंच जाता है. वह एकएक कर दोनों को मार डालता है.

अंत में भेद खुलता है कि सौरव कौन है. दरअसल, सौरव आदित्य के बड़े भाई विक्रम दीवान (प्रियांशु चटर्जी) का बचपन का दोस्त है. बचपन में विक्रम ने अपना आधा लिवर दे कर उस की जान बचाई थी और उस के भाई आदित्य ने उस की प्रेमिका को फंसा कर उस से शादी कर ली थी.

फिल्म की पटकथा भी विक्रम भट्ट ने लिखी है. पटकथा चुस्त है. फिल्म में तीखे टर्न्स और ट्विस्ट हैं. निर्देशक की मंशा दोनों अभिनेत्रियों के जिस्म को दिखाने की ही रही है. इस के बावजूद फिल्म अपने उद्देश्य से नहीं भटकती तो इसलिए क्योंकि फिल्म का संपादन कसा हुआ है. निर्देशन भी काफी हद तक ठीकठाक है.

शरमन जोशी को एक उद्योगपति की भूमिका नहीं जंचती. जब वह शर्ट के बटन खोलता है तो भद्दा लगता है और जब शर्ट के बटन बंद करता है तो जैंटलमैन लगता है. करन सिंह ग्रोवर ने खलनायकी अंदाज बखूबी दिखाए हैं. वह शरमन जोशी पर भारी पड़ा है. फिल्म में कई गाने हैं. गानों को अच्छी तरह फिल्माया गया है. ‘तुम्हें अपना बनाने की…’ गाना अच्छा बन पड़ा है. फिल्म का छायांकन बढि़या है.

‘की एंड का’ में दिखेगी अर्जुन-करीना की जबरदस्त केमिस्ट्री

बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर और एक्टर अर्जुन कपूर की आने वाली फिल्म 'की एंड का' का पहला लुक जारी किया गया है. फर्स्ट लुक की यह तस्वीर अर्जुन कपूर ने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए कैप्शन लिखा 'Good start to the year I say…Kia & Kabir s romance begins..ki and ka coming soon…'

निर्देशक आर.बाल्की की इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन अतिथि भूमिका में हैं. करीना अपने करियर में पहली बार मेट्रो सेंट्रिक कैरेक्टर में नजर आएंगी. वह कॉरपोरेट कंपनी में ऊंचे पद पर काम करने वाली औरत के किरदार में नजर आएंगी.

इस फिल्म में करीना घर की मुखिया हैं और कमाती हैं जबकि अर्जुन घर पर बैठे रहते हैं. आर.बाल्की इससे पहले 'चीनी कम' और 'पा' जैसी बेहतरीन फिल्म बनाने बना चुके हैं. फिल्म 'की एंड का' एक अप्रैल 2016 को रिलीज होगी.

‘सुल्तान’ के लिए सलमान की फीस सुन आप रह जाएंगे दंग

बॉलीवुड के दबंग सलमान खान अपनी आने वाली फिल्म 'सुल्तान' के लिए 100 करोड़ की फीस लेने जा रहे हैं. सलमान खान की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कीर्तिमान बना रही है.

चर्चा है कि यशराज फिल्मस के बैनर तले बन रही 'सुल्तान' के लिए उन्होंने मुनाफे में बराबर हिस्सा लेने का सौदा किया है.

ऐसे लेंगे सलमान 100 करोड़

फिल्म की निर्माण लागत निकालने के बाद कुल कमाई का बराबर बंटवारा निर्माता यशराज स्टूडियो और सलमान के बीच होगा.  'सुल्तान' की लागत 75 करोड़ और प्रिंट और प्रचार खर्च 25 करोड़ है. यानी कुल 100 करोड़. इसमें सलमान की फीस शामिल नहीं है. फिल्म का एक ही शूटिंग शेड्यूल हुआ है और इसे अभी से ‘बजरंगी भाईजान’ जितनी सफल फिल्म माना जा रहा है.

बताया जा रहा है कि फिल्म भारत में 330 करोड़ कमाएगी. इसमें से निर्माता यशराज का हिस्सा 165 करोड़ होगा. ओवरसीज में ग्रॉस 120 करोड़ के व्यवसाय की उम्मीद है जिसमें से यशराज को नेट 50 करोड़ मिल जाएंगे.

संगीत अधिकार के करीब 20 करोड़, सैटेलाइट अधिकार के करीब 65 करोड़ तय माने जा रहे हैं. फिल्म सुपरहिट होने पर यशराज का नेट रेवेन्यू 300 करोड़ होगा. जिसमें से 100 करोड़ की निर्माण लागत निकालने के बाद 200 करोड़ का विशुद्ध मुनाफा हो सकता है. ऐसा होने पर यह पहली भारतीय फिल्म होगी जिसमें हीरो की फीस 100 करोड़ होगी. 'सुल्तान' इस साल ईद के मौके पर रिलीज होगी.

संपत्ति रजिस्ट्रेशन और सर्कल रेट

तकरीबन पूरे देश में राज्य सरकारों ने संपत्तियों की खरीद पर सर्कल रेट सा प्रावधान बना रखा है. इस के तहत रजिस्ट्रार के कार्यालय में खरीदी गई संपत्ति के कागजात को पुख्ता कराने के लिए जो फीस दी जाती है, वह खरीद की कीमत या सर्कल रेट, जो भी अधिक हो, पर ही हो सकती है. अगर संपत्ति 50 लाख रुपये की खरीदी गई है और सर्कल रेट के हिसाब से उस की कीमत 80 लाख रुपये है, तो स्टैंप ड्यूटी 80 लाख रुपये पर ही देनी होगी. आयकर विभाग भी यही पूछेगा कि 80 लाख रुपये कहां से आए. बेचने वाले को 80 लाख रुपये की आय का हिसाब देना होगा.

रजिस्ट्रेशन कानून का मूल ध्येय सुप्रीम कोर्ट के सूरज लैंप इंडस्ट्रीज के मामले में इन शब्दों में स्पष्ट किया गया है :

रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 इस आशय से बनाया गया था कि अचल संपत्तियों के लेनदेन में अनुशासन हो, वे सही हों, इस बारे में जानकारी सार्वजनिक रहे और लेनदेन के कागजों में बेईमानी व धोखेबाजी न होने पाए. इससे पंजीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए गए समस्त दस्तावेजों के सत्य होने की गारंटी हो जाती है और खरीदारों को व्यर्थ के विवादों में नहीं पड़ना पड़ता.

सर्कल रेट के जरिये राज्य सरकारों ने संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को पैसा उगाहने का रास्ता बना लिया. उन्होंने संपत्तियों के न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने शुरू कर दिए और उन के रजिस्ट्रेशन का मामला गौण हो गया और यह काम छिपे तौर पर टैक्स एकत्र करना हो गया है.

यह गलत है और जनता से धोखा है. कोई कानून जिस मकसद से बने, उसी के लिए उस का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. यह बात दूसरी है कि हमारे विधायक और सांसद इतना समय व शक्ति नहीं लगाते कि जनता पर लागू होने वाले कानूनों के सही-गलत होने की वे गहराई से जांच करें और आमतौर पर सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर इस तरह के कानून मिनटों में पारित कर दिए जाते हैं.

पंजीकरण केवल यह देखने के लिए है कि संपत्ति का हस्तांतरण सही ढंग से हो रहा है और उस की खरीदफरोख्त के दस्तावेज आम जनता को देखने के लिए उपलब्ध हैं. सर्कल रेटों का इस्तेमाल करके स्टैंप ड्यूटी को राजस्व का हिस्सा बनाने का हक नहीं दिया जा सकता.

कानूनों का गलत इस्तेमाल कर हेराफेरी करने की आदत ही देश में भ्रष्टाचार की जड़ है. हर अफसर जानता है कि किसी भी कानून को किसी भी तरह तोड़मरोड़ कर इस्तेमाल करने का हक उसके पास है, क्योंकि सरकार स्वयं यही कर रही है.

आखिर किसकी ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ बनने जा रही हैं श्रद्धा कपूर…?

बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर फिल्म 'हाफ गर्लफ्रेंड' में काम करती नजर आ सकती हैं. बॉलीवुड के जानेमाने डायरेक्टर मोहित सूरी चेतन भगत के नॉवेल 'हाफ गर्लफेंड' पर फिल्म बनाने जा रहे हैं.

खबरें थी कि फिल्म में कृति सैनन काम कर सकती हैं लेकिन बात नहीं बन सकी. अब रिपोर्ट्स आ रही हैं कि मोहित सूरी श्रद्धा को 'हाफ गर्लफ्रेंड' में कास्ट करने वाले हैं. इससे पहले श्रद्धा कपूर और मोहित सूरी की जोड़ी ने ‘आशिकी-2’ और 'एक विलेन' जैसी हिट फिल्में दी हैं.

बताया जाता है कि हाफ गर्लफ्रेंड की कहानी दिल्ली की एक मॉडर्न लड़की रिया और बिहार के भोले-भाले लड़के माधव की लव स्टोरी पर आधारित है. कहा जा रहा है कि फिल्म में हीरो के तौर पर सुशांत सिंह को लिया जाएगा. हालांकि इस बात की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है.

रणवीर ने किया ‘बाजीराव मस्तानी’ से जुड़ा एक बड़ा खुलासा

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह का कहना है कि वह अपनी मां को फिल्म बाजीराव-मस्तानी नहीं दिखाना चाहते थे. हालांकि रणवीर के अभिनय की तारीफ सुनकर उनकी मां ने बाजीराव-मस्तानी देख ली.

दरअसल रणवीर की मां उन फिल्मों से नफरत करती है जिनके क्लाइमैक्स में रणवीर द्वारा निभाए गए किरदार की मौत हो जाती है. 'बाजीराव मस्तानी' के अंत में भी बाजीराव मारा जाता है और रणवीर को पता था कि मां यह सीन देख दुखी होंगी इसलिए उन्होंने मां को फिल्म देखने से मना किया था, लेकिन उनकी मां ने फिल्म देख ली.

रणबीर की मां अपने बेटे के अभिनय से अभिभूत हो गईं. फिल्म खत्म होते ही उन्होंने रणवीर को गले लगा लिया.

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म 'बाजीराव-मस्तानी' में रणवीर सिंह ने मराठा शासक पेशवा बाजीराव का दमदार किरदार निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है.  इसे रणवीर की अब तक की बेहतरीन फिल्म करार दिया जा रहा है.

जमाने के साथ चलना जरूरी: तौफीक कुरैशी

52 वर्षीय तबला वादक और संगीतकार तौफीक कुरैशी ने अपने प्रशंसकों को संगीत के कई नएनए वाद्ययंत्रों से परिचित करवाया है. उन्होंने अफ्रीका के एक प्राचीन वाद्य ‘जिम्बे’ को हिंदुस्तानी संगीत के साथ जोड़ कर फ्यूजन संगीत बनाया जिसे देश में ही नहीं, विदेश में भी लोग आश्चर्य से सुनते हैं.

बचपन से ही शास्त्रीय संगीत में रुचि रखने वाले तौफीक के पिता उस्ताद अल्ला रक्खा और भाई उस्ताद जाकिर हुसैन हैं. उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से ली. इस के बाद की शिक्षा उन्होंने पंडित विक्कू विनायक्रम और घाटम विधवान से ली. वे लाइव परफौर्मेंस के लिए जाने जाते हैं. शुरुआती दौर में उन का म्यूजिक बैंड ‘सूर्या’ काफी प्रसिद्ध रहा. देशविदेश में उन्होंने कई प्रस्तुतियां दीं. आज भी उन के किसी भी कौन्सर्ट में हजारों लोगों की भीड़ जुटती है.

उन्होंने टीवी सीरियल्स, ऐड जिंगल्स, एलबम आदि सभी के लिए काम किया है. वे ‘जिम्बे’ के अलावा डफ, बोंगो, बाताजौन आदि बजाते हैं. शास्त्रीय संगीत के दौर के बारे में पूछे जाने पर वे बताते हैं, ‘‘शास्त्रीय संगीत आज भी जीवित है. पिछले 10-15 सालों में संगीत के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं पर आज भी अच्छा संगीत सभी पसंद करते हैं.

‘‘हालांकि हमारे सभी साथी कलाकार अपनी कला में परिवर्तन कर रहे हैं लेकिन संगीत का आधार हमेशा शास्त्रीय संगीत ही रहेगा. बिना शास्त्रीय संगीत के कोई भी फ्यूजन या नया संगीत नहीं बन सकता.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘संगीत में पारंगत होने के लिए रियाज जरूरी है और रियाज के लिए धैर्य का होना अति आवश्यक है और धैर्य, आज के युवाओं में कम है. आज का युवा जल्दी पैसा कमाने की सोचता है. ऐसे में बहुत कम युवा इस दिशा की ओर आगे बढ़ रहे हैं. शास्त्रीय? संगीत में कामयाबी के लिए 4 घंटे प्रतिदिन रियाज करना पड़ता है.’’

वे बताते हैं, ‘‘युवा कई तरह के हैं. कुछ ऐसे हैं जो ग्लैमरस वाद्य जैसे गिटार बजाना चाहते हैं. कुछ अल्टरनेटिव रख कर चलते हैं, तो कुछ युवा संगीत सम्मेलन में सुनने जाते तो हैं पर आधापौने घंटे बाद उठ कर बाहर चले जाते हैं. उन की रुचि कम हुई है.

‘‘संगीत में आज जो अवसर हैं वे पहले नहीं थे. आज के लोग अलगअलग गाना सुनना चाहते हैं. मैं क्लासिकल को नए पैकेज में प्रस्तुत करता हूं. वही राग अगर इलैक्ट्रिक गिटार, सितार और ड्रम पर बजा दिया जाए तो सुनने में नया लगेगा लेकिन फाउंडेशन हमेशा शास्त्रीय संगीत ही रहना चाहिए.’’

आज के श्रोता और दर्शक हमेशा नई चीज खोजते हैं. इसलिए तौफीक संगीत में नएनए प्रयोग करते रहते हैं. वे हंसते हुए कहते हैं कि बदलाव हमेशा अच्छा होता है. यही वजह है कि हम फ्यूजन करते हैं. आज के दर्शकों को ‘बुफे’ की आदत लग चुकी है. उन्हें हर तरह के संगीत का आनंद लेना पसंद है. पर फ्यूजन करते वक्त वे इस बात का ध्यान रखते हैं कि वह पौप संगीत न बन जाए. शास्त्रीय संगीत को आधार बना कर ही वे फ्यूजन का प्रयोग करते हैं. उन के पिताजी कहा करते थे कि संगीत ऐसा होना चाहिए जिसे सुन कर लोग पांव नहीं, सिर हिलाएं. सो, उन की कोशिश वही रहती है. वे जमाने के साथ चलने पर विश्वास रखते हैं.

तौफीक को देश और विदेश दोनों स्थानों पर संगीत में मजा आता है. लेकिन पुणे, गोआ, चेन्नई आदि स्थानों के औडियंस संगीत का आनंद अधिक लेते हैं. इस बाबत वे कहते हैं, ‘‘मेरे परिवार में संगीत का वातावरण हमेशा रहा है. मेरे पिता कहा करते थे, ‘ताल में लय से चलना, लय को थामे रखना, कभी तुम लय और ताल से न हटना,’ ये बातें मुझे हमेशा याद रहती हैं. आज लोगों की लय में अंतर आ चुका है. ताल ‘क्रैश’ हो रही है. ऐसे में मैं एकदूसरे की लय और ताल को मिलाने की कोशिश कर रहा हूं. करीब 50 शिष्य मेरे यहां संगीत सीखने आते हैं. यह मुझे अच्छा लगता है. मैं किसी भी परफौर्मेंस के बारे में अपने बड़े भाई जाकिर हुसैन से परामर्श करता हूं. उन्हें मैं अपना गुरु मानता हूं.’’

यशस्वी भव:आखिर क्यूं भड़के हुए हैं चिदंबरम

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम भड़के हुए हैं. वजह, उन के व्यवसायी बेटे कीर्ति के व्यावसायिक मित्रों के यहां चेन्नई में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मारे गए छापे हैं बावजूद इस के कि इन छापों के 48 घंटे पहले वे आपातकाल और सलमान रुशदी की किताब ‘द सैटेनिक वर्सेस’ के प्रतिबंध को अपनी सरकार की गलती मान चुके थे.

अपने पूर्व आकाओं राजीव और इंदिरा गांधी की निंदा तक से ये एजेंसियां नहीं पसीजीं तो जाहिर है देश के मौजूदा आका अपनी पर उतारू हो आए हैं और कांग्रेसी नेताओं व उन के चिरंजीवों को चुनचुन कर बता रहे हैं कि घोटालों का परदाफाश लोकतंत्र के हित में बेहद जरूरी है. यही वक्त की मांग और तकाजा है. अब, जिसे तिलमिलाना है वह तिलमिलाता रहे.

शेख चिल्ली: सीएम अखिलेश का विचित्र फार्मूला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अब समझ आ रहा है कि सबकुछ ठीकठाक नहीं है. बिहार के नतीजों ने कम से कम यह तो जता ही दिया है कि 2017 में उत्तर प्रदेश में कोई एक पार्टी अकेले दम पर सत्ता में नहीं आ सकती. सपा व बसपा के गठबंधन की चर्चाओं या अफवाहों के बीच अखिलेश ने एक विचित्र सा फार्मूला यह दिया है कि अगली बार उन के पिता मुलायम सिंह पीएम और राहुल गांधी डिप्टी पीएम बनें.

सूत न कपास जुलाहों में लट्ठमलट्ठा सी इस बात के कोई दीर्घकालिक या तात्कालिक माने किसी ने नहीं निकाले, उलटे, बेचारगी से अखिलेश की तरफ देख सोचा कि वे कब परिपक्व होंगे. 5 लोकसभा सीटों के दम पर सपा के उपमुखिया सब से बड़ी कुरसी के सपने देख रहे हैं तो उन के सोचने की दाद देनी ही पड़ेगी कि सोचने में कंजूसी क्यों, सोचो तो बड़ा ही सोचो. गनीमत है, उन्होंने 2019 का केंद्रीय मंत्रिमंडल घोषित नहीं किया.

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