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कैसे होगी किसानों की कमाई दोगुनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत जोरजोर से ऐलान कर दिया कि किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी, मगर हकीकत में ऐसा होना आसान नहीं है. कमाई कई गुना बढ़ सकती है, लेकिन उस के लिए सही तरीके से कोशिशें करनी होंगी. इस मामले में सरकार को किसानों का पूरा साथ देना होगा. अनुदानों की रकम घटाने की बजाय उस में इजाफा करना होगा.

सरकार का दावा है कि अगले 5 सालों में किसानों की कमाई दोगुनी हो जाएगी. केंद्र सरकार ने अपने हालिया बजट को खेती व किसानों के लिए फायदेमंद बताया है और दावा किया है कि अगले 5 सालों के दौरान किसानों की कमाई दोगुनी हो जाएगी. सरकार के दावे में कितना दम है, इसे एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर सरकार की ओर से हर साल किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन उन सभी योजनाओं को आम किसानों तक पहुंचाने का काम ग्राम स्तर पर कृषि की देखरेख करने वाले कर्मचारी का होता है. लेकिन अफसोस की बात है कि हर किसान के पास न तो कृषि की देखरेख करने वाला कर्मचारी पहुंचता है और न ही किसानों को योजनाओं की सही जानकारी मिलती है.

ऐसे में इन किसानों को न तो कोई सलाह देने वाला है और न ही कृषि की देखभाल करने वाले कर्मचारी या अधिकारी खेतों में पहुंच रहे हैं. इस के चलते किसानों को खुद के बूते ही फसलों को रोगों और कुदरती मार से बचाने के उपाय करने पड़ते हैं. अगर कृषि विभाग में पदों की बात की जाए तो ऊपर से लगा कर नीचे तक कई पद खाली पड़े हैं.

कर्मचारियों का हाल

एक छोटे से इलाके चाकसू ब्लाक की ही बात करें तो पूरे ब्लाक में कृषि पर्यवेक्षक के 31 पद ही हैं, जबकि कुल ग्राम पंचायतें 37 हैं. नियमानुसार 1 ग्राम पंचायत पर 1 कृषि की देखभाल करने वाला कर्मचारी होना जरूरी है. लेकिन ब्लाक के आधा दर्जन से भी अधिक कर्मचारियों के जिम्मे 2-2 पंचायतों की जिम्मेदारी है. वहीं कई पद खाली होने के चलते हर कर्मचारी के जिम्मे 10 से 12 गांव आ रहे हैं. ऐसे में एक कर्मचारी का हर किसान के पास पहुंचना मुश्किल हो रहा है. फसल में कौन सा रोग पनप रहा है, किस रोग की रोकथाम के लिए कौन सी दवा का इस्तेमाल करना चाहिए, ये सभी काम कृषि कर्मचारी के जिम्मे हैं, लेकिन कर्मचारी न तो खेतों में जाते हैं और न ही किसानों की परेशानी दूर करते हैं.

कृषि कर्मचारियों का कहना है कि खेतों में जा कर किसानों को सलाह देने के लिए उन के पास सही इंतजाम नहीं हैं. वहीं कृषि अधिकारी भी खेतों में जाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. जब ‘फार्म एन फूड’ के लेखक द्वारा जयपुर जिले के चाकसू ब्लाक के आसपास के खेतों में पड़ताल की गई, तो किसानों ने बताया कि कृषि अधिकारी व कर्मचारी न तो खेतों में आते हैं और न ही उन को फसल में लगे कीटों व रोगों की रोकथाम संबंधी जानकारी मिल पाती है. किसान सेवा केंद्रों की भी बुरी हालत है. ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों को अपने गांव में ही कृषि के बारे में हर तरह की जानकारी देने के लिए किसान सेवा केंद्र बनाए गए हैं. लेकिन इन केंद्रों के भवनों की हालत यह है कि कई जगहों पर भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा है, तो कई जगह बने भवनों में कृषि कर्मचारी बैठते ही नहीं हैं.

 पंचायतीराज विभाग जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से किसानों को एक ही जगह सभी तरह की कृषि संबंधी जानकारी व सुविधाएं देने के लिए प्रदेश के सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर किसान सेवा केंद्र बनाने की इजाजत मिली हुई है. हर सेवा केंद्र में करीब 10 लाख रुपए की लागत से 4 कमरे व 2 लौबी बनाई जा सकती हैं. इन केंद्रों पर किसानों की कई तरह की समस्याओं के हल के लिए समयसमय पर कृषि विभाग की बैठकें भी की जा सकती हैं. दिलचस्प बात तो यह है कि प्रदेश की तकरीबन 9800 ग्राम पंचायतों में से अभी तक महज 4500 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर ही भवन बनाए गए हैं. कई ग्राम पंचायतों में तो किसान सेवा केंद्रों की सिर्फ नींव का ही काम हुआ है, तो कई जगह काम ही शुरू नहीं हो पाया है. इस के चलते भी किसान जरूरी जानकारी व सुविधाओं का फायदा नहीं ले पा रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में अनुदान से चलाई जाने वाली योजनाओं के चलते किसानों ने बागबानी व खेती के पुराने तरीकों में बदलाव करते हुए नई तकनीक के जरीए खेतीबारी करने में रुचि दिखानी शुरू की थी. किसानों का रुझान बूंदबूंद सिंचाई तकनीक से ले कर ग्रीन हाउसों व पौली हाउसों में नई तकनीक से खेती करने में बढ़ने लगा था. योजनाओं का फायदा ले चुके किसानों की देखादेखी बाकी दूसरे किसान भी इन अनुदानित योजनाओं के जरीए खेती में बदलाव के इच्छुक थे, लेकिन सरकार द्वारा अनुदान की रकम घटा दिए जाने से किसानों की मंशा व रुझान पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के बजाय सरकार ने खेती के कामों से जुड़ी ज्यादातर अनुदानित योजनाओं पर दी जाने वाली सब्सिडी राशि में कटौती कर दी है या फिर उन का लक्ष्य कम कर दिया है. हाईटेक खेती के लिए किसानों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही अनुदानित योजनाओं पर सरकार द्वारा कटौती करने से किसान अब सरकारी मदद से मुंह फेरने लगे हैं.

गौरतलब है कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से अलगअलग योजनाओं पर किसानों को ग्रीन हाउस, पौली हाउस, शेडनेट, सोलर पंप, बूंदबूंद सिंचाई, पाइप लाइन, फव्वारा सिंचाई, फार्म पौंड व डिग्गी निर्माण पर अनुदान दिया जा रहा है. लेकिन इन तमाम योजनाओं पर सरकार ने अनुदान 75 फीसदी से घटा कर 45 से 65 फीसदी तक कर दिया है. ऐसे में अनुदानित योजनाओं में फायदा लेने वाले किसानों की रुचि 60 से 70 फीसदी तक घट गई है.

किसानों ने सब से ज्यादा रुचि बूंदबूंद सिंचाई तकनीक और सोलर पंप योजना को ले कर दिखाई थी, लेकिन अनुदान में कटौती करने से किसानों ने अब इन में रुचि दिखाना छोड़ दिया है. अनुदान में कटौती ने गरीब व छोटे किसानों को निराश किया है. जबकि कृषि अधिकारियों व कृषि कर्मचारियों की मानें तो किसान अब बागबानी के साथसाथ सभी तरह की खेतीबारी में भी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहते हैं और इस से उत्पादन भी दोगुना तक बढ़ने की संभावना है, लेकिन अनुदानित योजनाओं की सब्सिडी घटा दिए जाने से इन योजनाओं का लाभ छोटे व गरीब किसानों के बूते से बाहर हो गया है.

अनुदान पर भी कटौती

सरकार द्वारा किसानों को माली मदद देने और नए व वैज्ञानिक तरीके से खेती कर के कम लागत में अधिक उपज लेने के लिए ड्रिप सिंचाई, पाइप लाइन व कृषि पौध संरक्षण यंत्रों सहित कई अनुदानित योजनाएं भी चलाई गई हैं. इन योजनाओं से किसानों को फायदा तो मिला ही है, साथ ही किसानों का इन योजनाओं के प्रति रुझान भी बढ़ा है.

सिंचाई में बूंदबूंद सिंचाई तकनीक व फव्वारा सिस्टम के इस्तेमाल से जहां पानी की बचत होती है, वहीं कृषि यंत्रों से कम समय में अच्छा काम हो जाता है. लेकिन सरकार द्वारा चलाई जाने वाली व अनुदानित इस कृषि यंत्र योजना पर भी सरकार ने कटौती कर दी है.

घट रहा खेती का रकबा

मुख्य सड़कों व संपर्क सड़कों के आसपास की किसानों की कृषि लायक जमीनों पर हजारों कालोनियां बन गई हैं. इन कालोनियों में कच्चीपक्की सड़कें बना कर व बिजली के खंभे लगा कर भूकारोबारी लोगों को प्लाट बेच रहे हैं और कालोनियों के कई तरह के नक्शे बना कर कालोनाइजर जमीनों की खरीदफरोख्त में जुटे हैं. इस के चलते जहां खेती का रकबा घट रहा है, वहीं किसानों की खेती में रुचि घटती जा रही है. इतना ही नहीं कई भूमाफियाओं ने किसानों के मवेशियों के लिए आरक्षित चरागाहों समेत नालों व पानी के बहाव क्षेत्रों की जमीनों पर भी अवैध कालोनियां बना दी हैं.

भारत में ट्विटर से ज़्यादा फेसबुक हिट

भारत में लोग सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक का इस्तेमाल ट्विटर से 2.4 गुना और यूट्यूब से दो गुना अधिक करते हैं. एक शोध में यह जानकारी सामने आई है. बाजार अनुसंधान एवं व्यापार परामर्श कंपनी, आईएमआरबी द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, फेसबुक के उपयोगकर्ता भारत भर में हैं. शीर्ष आठ महानगरों में इस मंच से जुड़े लोगों की संख्या के दोगुने लोग गैर शीर्ष आठ महानगरों में इस मंच से जुड़े हैं.

इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि फेसबुक पर 70 प्रतिशत लोग स्मार्टफोन और 88 प्रतिशत लोग प्रीपेड कनेक्शन का उपयोग करते हैं. फेसबुक के लिए एंड्रॉयड भारतीयों का सबसे लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम है, उसके बाद आईओएस और विंडोज की बारी आती है.

भारत के लगभग सभी लोग और फेसबुक उपयोगकर्ताओं की एक बड़ी संख्या व्हाट्सऐप का प्रयोग करती है. आईएमआरबी के अनुसार, भारत में 63 प्रतिशत फेसबुक उपयोगकर्ताओं के पास 3 जी कनेक्शन है, जबकि 38 प्रतिशत लोगों ने फेसबुक का उपयोग करने के लिए 2जी कनेक्शन ले रखा है.

क्लाउड कंप्यूटिंग में कैरियर

इंटरनैट और कंप्यूटर ऐप्लिकेशंस की तेजी से बदलती दुनिया में क्लाउड कंप्यूटिंग ने डाटा स्टोरेज के क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है. सामान्य रूप से आप अपने कंप्यूटर पर कोई सौफ्टवेयर या अन्य प्रोग्राम को इंस्टौल कर के इसे अपने लिए यूज या रन करते हैं, लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग के कारण अब इसे इस प्रकार से इंस्टौल करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह सौफ्टवेयर आप को वैब सर्विसेज के माध्यम से उपलब्ध होगा, जिस के लिए आप को किराया देना होगा. आप अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर उसी के मुताबिक किराए का भुगतान कर सकेंगे.

गूगल गियर ऐप्लिकेशंस द्वारा इन सेवाओं को औफलाइन भी प्राप्त किया जा सकता है. क्लाउड, जिसे तकनीकी भाषा में इंटरनैट भी कह सकते हैं, रिमोट में डाटा और अन्य कई प्रकार की इन्फौर्मेशन से भरे होते हैं इसे डिजिटल डाटा स्टोर कहते हैं. ये काफी पावरफुल और हाई कैपेसिटी कंप्यूटर्स से औपरेट किए जाते हैं जिन्हें सर्वर कहा जाता है.

आमतौर पर जब हम कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं तो कंप्यूटिंग रिसोर्सेज के रूप में सभी टूल्स जैसे कि कंप्यूटर, सर्वर, मौडम, इंटरनैट कनैक्शन या फिर अन्य आवश्यक टूल्स फिजिकली हमारे पास ही प्रैजेंट होते हैं, लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग में इन सभी टूल्स को अपनी जरूरत के अनुसार किराए पर ले कर इस्तेमाल किया जाता है. आप को इन टूल्स को खरीदने की आवश्यकता नहीं होती. क्लाउड कंप्यूटिंग में कंप्यूटिंग रिसोर्सेज के आवश्यक सभी टूल्स इस्तेमाल करने वाले के पास नहीं होते बल्कि ये टूल्स रिमोट में होते हैं और इस्तेमालकर्ता की जरूरत के हिसाब से इन को सप्लाई करने वाली कंपनियां पैसा ले कर बेचती हैं. यही कारण है कि इन्हें क्लाउड कंप्यूटिंग कहा जाता है. इसे ‘वर्चुअलाइजेशन’ भी कहते हैं.

गूगल ऐप क्लाउड कंप्यूटिंग का एक अच्छा उदाहरण है जो बिजनैस ऐप्लिकेशन औनलाइन उपलब्ध कराता है. क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिए आप डाटा और इन्फौर्मेशन को अपने कंप्यूटर के सिवा किसी रिमोट सर्वर में सेव कर के रख सकते हैं, जिसे क्लाउड के नाम से जाना जाता है. इस प्रकार के रिमोट सर्वर में सुरक्षित डाटा को कोई इस्तेमालकर्ता निश्चित पैसा दे कर इंटरनैट कनैक्टेड स्मार्टफोन, लैपटौप और डेस्कटौप से ऐक्सैस कर सकता है.

वास्तव में क्लाउड कंप्यूटिंग इंटरनैट आधारित कंप्यूटिंग पावर है. इस में इंटरनैट इस्तेमालकर्ता को अपने कंप्यूटर पर सभी सौफ्टवेयर और औपरेटिंग सिस्टम्स को लोड कर इंस्टौल करने की जरूरत नहीं होती. ये सभी सर्विसेज आवश्यकता पर आधारित होती हैं जिन्हें एक इस्तेमालकर्ता बिजनैस एग्रीमैंट के आधार पर औनलाइन प्राप्त कर सकता है. इस प्रकार इंटरनैट के सर्वर से डायरैक्टली सौफ्टवेयर और अन्य ऐप्लिकेशंस की सर्विसेज प्राप्त कर लेने की प्रक्रिया ही क्लाउड कंप्यूटिंग कहलाती है.

वर्तमान में यह अपनी कम लागत के कारण काफी प्रचलित हो रही है. डिजिटल जर्नल की एक रिपोर्ट का यह मानना है कि आने वाले 5-6 वर्ष में क्लाउड कंप्यूटिंग का बिजनैस केवल ऐजुकेशन सैक्टर में ही प्राय: 13 बिलियन डौलर का हो जाएगा. इस के अतिरिक्त यह सर्विस अमेजन डौट कौम जैसी कंपनी द्वारा उपलब्ध होती है.

क्लाउड कंप्यूटिंग में यूज होने वाली शब्दावली

क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में खास शब्दावली का प्रयोग किया जाता है. क्लाउड कंप्यूटिंग को अच्छी तरह से समझने के लिए इन को जानना भी आवश्यक है.

क्लाउड प्रोवाइडर : जो संस्था क्लाउड पर आधारित इन्फौर्मेशन टैक्नोलौजी की सेवा उपलब्ध कराती है, उसे क्लाउड प्रोवाइडर कहा जाता है. इन कंपनियों के पास कंप्यूटिंग रिसोर्सेज (कंप्यूटर या इंटरनैट की सहायता से कोई टास्क परफौर्म करने के लिए जितने टूल्स की आवश्यकता होती है, उन सभी टूल्स को तकनीकी रूप से कंप्यूटिंग रिसोर्सेज कहा जाता है) होते हैं जो क्लाउड कंप्यूटिंग के इस्तेमालकर्ता को उपलब्ध कराए जाते हैं.

क्लाउड कंज्यूमर :  वे सभी संस्थाएं और व्यक्ति जो किसी क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेज के प्रोवाइडर की शर्तों व अनुबंध के अंतर्गत आईटी रिसोर्सेज का इस्तेमाल करते हैं, क्लाउड कंज्यूमर कहलाते हैं.

क्लाउड सर्विस ओनर : वे सभी संस्थाएं और व्यक्ति जिन के पास कानूनी रूप से क्लाउड कंप्यूटिंग की सेवा प्रोवाइड करने का अधिकार है, क्लाउड सर्विस ओनर कहलाते हैं. वैसे क्लाउड कंप्यूटिंग की सर्विस एक क्लाउड कंप्यूटिंग ओनर और क्लाउड कंप्यूटिंग कंज्यूमर दोनों के पास हो सकती है.

क्लाउड कंप्यूटिंग ऐडमिनिस्ट्रेटर : क्लाउड पर आधारित आईटी रिसोर्सेज की सर्विसेज को ऐडमिनिस्ट्रेट करने वाली संस्था या व्यक्ति क्लाउड कंप्यूटिंग ऐडमिनिस्ट्रेटर कहलाता है.

ग्रिड कंप्यूटिंग :  कंप्यूटर्स के समूह का आपस में किसी खास उद्देश्य के लिए इंटरकनैक्ट होना ही ग्रिड कंप्यूटिंग कहलाता है.

यूटिलिटी कंप्यूटिंग :  क्लाउड कंप्यूटिंग का यह कौंसैप्ट ‘पे पर यूज’ यानी इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान करो पर आधारित है. इस प्रोसैस के अंतर्गत यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से कंप्यूटिंग सर्विसेज को परचेज करता है और उस का इस्तेमाल करता है.

क्लाउड कंप्यूटिंग के लाभ

क्लाउड कंप्यूटिंग टैक्नोलौजी इस्तेमालकर्ता को निम्न रूप से लाभ पहुंचा सकती है :

लागत : क्लाउड कंप्यूटिंग का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि एक इंटरनैट यूजर को सौफ्टवेयर, हार्डवेयर, डाटा स्टोरेज और अन्य प्रकार की सर्विसेज के आवश्यक टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को इंस्टौल करने की जरूरत नहीं होती.

आसान अपडेट

क्लाउड कंप्यूटिंग का एक अन्य बड़ा फायदा यह है कि एक यूजर अपने लोकल कंप्यूटर पर प्रोग्राम और अन्य सौफ्टवेयर बिना इंस्टौल और डाउनलोड किए क्लाउड कंप्यूटिंग के सर्वर की सहायता से सभी प्रकार के प्रोग्राम्स को ऐक्सैस कर सकता है. ऐसे में सौफ्टवेयर अपडेट करने और मैंटेनैंस की कोई समस्या नहीं होती.

लोकेशन फ्रीडम

क्लाउड कंप्यूटिंग में सर्वर और वैब ब्राउजर के माध्यम से इंटरनैट सर्विसेज को आसानी से ऐक्सैस किया जा सकता है. इस सर्विस की ऐक्सैसिबिलिटी के लिए केवल इंटरनैट कनैक्शन की आवश्यकता होती है. इंटरनैट कनैक्शन द्वारा इस्तेमालकर्ता दुनिया के किसी भी कोने से अपने कामों को अंजाम दे सकता है जिन्हें वह अपने घर और औफिस में बैठ कर करता है.

क्लाउड कंप्यूटिंग में कैरियर

आईटी सैक्टर में तेजी से हो रहे विकास के कारण बड़ी संख्या में कंप्यूटर साइंस में बीटैक और एमटैक के छात्रों का क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में रुझान बढ़ा है, क्योंकि इस में कैरियर की अपार संभावनाएं हैं. एक लेटैस्ट डाटा के अनुसार वर्तमान में आईटी सैक्टर में करीब 208 मिलियन युवा काम कर रहे हैं. उन के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बड़ी तेजी से बढ़ती जा रही हैं. क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में इंस्टौलेशन और मैंटेनैंस सैक्टर में इंजीनियर्स और तकनीशियंस की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. एक सर्वे के अनुसार 2016 के अंत तक क्लाउड कंप्यूटिंग के सैक्टर में लगभग 2 मिलियन नई नौकरियों के क्रिएट होने की संभावना है.

आने वाले वर्षों में निम्न इंडस्ट्रीज में क्लाउड कंप्यूटिंग के कारण नौकरी के नए अवसरों में भारी वृद्धि की संभावनाएं हैं :

मीडिया : इस क्षेत्र में कंटैंट राइटिंग से ले कर डाटा एनालिसिस और प्रोडक्ट मार्केटिंग के सेगमैंट में नई नौकरियों की अपार संभावनाएं हैं.

रिटेल सैंटर : फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स के मौडर्न युग में क्लाउड कंप्यूटिंग मार्केटिंग के सेगमैंट में सफलता के नए रिकौर्ड स्थापित कर सकती है.

हैल्थ केयर : हैल्थ सैक्टर में हर रोज आ रही नई टैक्नोलौजी के कारण भी क्लाउड कंप्यूटिंग विशेषज्ञों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं. मैडिसिन से ले कर रिसर्च तक और मैनेजमैंट से ले कर रिकौर्ड कीपिंग तक क्लाउड कंप्यूटिंग एक महत्त्वपूर्ण टूल के रूप में साबित होगा. इस क्षेत्र में ब्यूटी और कौस्मैटिक प्रोडक्ट्स के सेगमैंट में क्लाउड कंप्यूटिंग में रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद की जा रही है.

शिक्षा के क्षेत्र में :  शिक्षा अब पूरी तरह से ग्लोबल हो गई है और इस कारण क्लाउड कंप्यूटिंग ऐप्लिकेशन की संभावनाएं भी काफी बढ़ जाती हैं. क्लास मैनेजमैंट, टीचिंग, लर्निंग, आउटसोर्सिंग, स्टडी मैटीरियल्स, औनलाइन ट्यूशन और अन्य कई सेगमैंट्स में क्लाउड कंप्यूटिंग की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. इसलिए माना जा रहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में क्लाउड कंप्यूटिंग में दक्ष युवाओं की भारी मांग पैदा होगी.

डिफैंस, एग्रीकल्चर, इंडस्ट्रीज, बैंकिंग, इंश्योरैंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनौमी के प्राय: सभी सैक्टर्स में क्लाउड कंप्यूटिंग ऐप्लिकेशन से जौब सैक्टर में बड़े पैमाने पर वृद्धि की संभावना है.

क्लाउड कंप्यूटिंग के मुख्य 3 प्रकार हैं :

1. पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग :  क्लाउड कंप्यूटिंग की यह सर्विस आम लोगों के लिए ऐक्सैसिबल होती है और यही कारण है कि इस में प्राइवेसी अधिक नहीं रहती. ईमेल सर्विस इस प्रकार की पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग के अंतर्गत आती है.

2. प्राइवेट क्लाउड : क्लाउड कंप्यूटिंग की यह सर्विस इस्तेमालकर्ता के और्गेनाइजेशन या फिर उन के ग्रुप के लिए उपलब्ध होती है.

3. हाइब्रिड क्लाउड : ऐसा माना जाता है कि यह क्लाउड कंप्यूटिंग प्राइवेट और पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग का मिलाजुला रूप है, क्योंकि इस क्लाउड के अंतर्गत अधिक प्राइवेसी वाली टास्क को प्राइवेट क्लाउड के जरिए और कम सैंसिटिव और प्राइवेसी वाली टास्क को पब्लिक क्लाउड की सहायता से परफौर्म किया जाता है.

लव गेम्सः पैसे खर्च कर इस फिल्म को देखना मूर्खता

बात बात पर नारी स्वतंत्रता व नारी उत्थान की बात करने वाला भट्ट कैंप खासकर महेश भट्ट और विक्रम भट्ट के लिए इन शब्दों के क्या मायने हैं, यह विक्रम भट्ट निर्देशित फिल्म ‘‘लव गेम्स’’ देखकर लोगों को समझ लेना चाहिए. फिल्म ‘‘लव गेम्स’’ में सारी मर्यादाएं, सारे जीवन मूल्यों को ताक पर रखकर सिर्फ सेक्स व जिस्मानी रिश्तों में आकंठ डूबे रहने में ही नारी स्वतंत्रता व नारी की प्रगति नजर आती है. क्या विवाहेत्तर /उच्छंखल सेक्स संबंध ही नारी की प्रगति का पैमाना है?

फिल्म‘‘लव गेम्स’’की कहानी के केंद्र में तीन पात्र हैं – समीर (गौरव अरोड़ा), रमोना (पत्रलेखा) और डाक्टर अलीषा (तारा अलीषा बेरी). इन पात्रों के साथ ही ड्रग्स, सेक्स, थ्रीसम, वाइफ स्वैपिंग और हत्या के इर्द गिर्द ही सारी कहानी का ताना बाना बुना गया है. फिल्म देखकर अहसास होता है कि यह किसी अति घटिया व निचले दर्जे के उपन्यास का फिल्मी करण है.

समीर एक अमीर बाप का बेटा है, जिसकी मां बचपन में किसी और के साथ चली गयी थी. इसलिए उसका प्यार से विश्वास उठ चुका है. पिता ने ही उसे पाल पोसकर बड़ा किया है. उसके लिए प्यार के कोई मायने नहीं है. वह 24 घंटे ड्रग्स व सेक्स में डूबा रहता है. उसे दर्द का कभी अहसास ही नहीं होता. यहां तक कि जब तब वह अपने हाथ की नस काट लेता है. उधर समीर के जिस्मानी संबंध रमोना के साथ है. रमोना का पति काफी बड़ी उम्र का है. समीर के साथ बिना किसी बंदिश के सेक्स करते रहने के लिए एक दिन रमोना खुद ही अपने पति की हत्या कर देती है और पुलिस के सामने ऐसा नाटक करती है कि पुलिस उसके पति की उम्र देखकर उसे स्वाभाविक मौत मान लेती है. अब समीर व रमोना की जिंदगी में रंगीनियत ही रंगीनियत है.

एक दिन समीर कहता है कि अब वह उसके साथ हर दिन सेक्स करते करते बोर हो गया. तब रमोना उसे ‘लव गेम्स’ उपन्यास दिखाकर कहती है कि वह भी अब लव गेम्स खेंलेंगे. इसके लिए वह योजना बनाकर बड़ी पार्टीयों/स्विंगर ग्रुप में जाते हैं. दोनो के बीच तय हुआ है कि पार्टी में खूबसूरत जोड़े को देखकर दोनो उसे अपने अपने जाल में फंसाने की कोशिश करेंगे, जो ऐसा करने में सफल हो जाएगा, उसकी जीत होगी. जो जिसे फंसा लेगा, वह उसके साथ सेक्स संबंध स्थापित कर सकता है. इस खेल में कभी रमोना तो कभी समीर जीतता है. एक पार्टी में इनकी मुलाकात ऐसे दंपति से होती है, जिनमें से पति वकील गौरव (हितेन तेजवानी) और पत्नी डाक्टर (तारा अलीषा बेरी) है. मगर पति अपनी पत्नी को हर दिन किसी न किसी बहाने पीटता रहता है. इस पार्टी में रमोना, गौरव को तथा समीर, अलीषा को फंसाने में कामयाब हो जाते हैं. इनके जिस्मानी संबंध बनते हैं. उसके बाद समीर व डाक्टर अलीषा की मुलाकातें बढ़ने लगती हैं.

डाक्टर अलीषा, समीर को अस्पताल ले जाकर दर्द का अहसास कराती है और समीर, अलीषा से प्यार करने लगता है. यह बात रमोना को गंवारा नहीं होती. जलनवश रमोना, अलीषा  की सच्चाई उसके पति गौरव तक पहुंचा देती है. डाक्टर अलीषा की पिटायी हो जाती है. उसके बाद रमोना, समीर के साथ डाक्टर अलीषा के घर पर उस वक्त पहुंचती है, जब डाक्टर अलीषा अपने बेड रूम में सो रही होती है और उसका पति घर से बाहर गया होता है. रमोना वहीं पर समीर के साथ सेक्स करती है. इसके बाद समीर व डाक्टर अलीषा मिलकर एक योजना बनाते हैं. फिर रमोना के घर पहुंचाकर डाक्टर अलीषा उसे एक सीडी दिखाकर साबित करती है कि रमोना ने खुद ही अपने पति का खून किया था. अलीषा के कहने पर रमोना, अलीषा के पति गौरव को मार डालती है. इस खेल में अलीषा की मौत हो गयी है. पर पता चलता है कि वह तो जिंदा है. सिर्फ पुलिस रिकार्ड में डाक्टर अलीषा की मौत हुई है. अंत में डाक्टर अलीषा, रमोना को गोली मार देती है और समीर के साथ नए नाम व पहचान के साथ विदेश रवाना हो जाती है.

बोल्ड व सेक्सी सीन वाली पूरी फिल्म देखने के बाद इस बात का अहसास होता है कि विक्रम भट्ट समाज के एक खास तबके को ही देखते हैं और उनकी पहुंच वहीं तक है और उसी तबके की मानसिकता को बार बार परदे पर चित्रित करते रहते है. अब इस तरह का तबका हमारे समाज का कितना बड़ा हिस्सा है, यह जानने का प्रयास किया जाना चाहिए. फिल्म देखकर कहीं स्पष्ट नहीं होता कि फिल्म प्यार की बात कर रही है या बदला लेने की बात कर रही है. सिर्फ जिस्मानी संबंध ही रेखांकित होते हैं. फिल्म में संवेदनशीलता का घोर अभाव है. सिर्फ यंत्रणा ही यंत्रणा है. सेक्स एडिक्ट रमोना के किरदार के साथ न्याय करने में पत्रलेखा बुरी तरह से असफल रही है. अब यह यह समझना पड़ेगा कि ‘सिटी लाइट्स’ में चर्चा बटोरने के बावजूद पत्रलेखा को दूसरी फिल्में क्यों नही मिली? बौलीवुड में कहा जाता है कि कलाकार को पहली फिल्म उसके लुक वगैरह के हिसाब से मिल जाती है और वह सफल हो जाता है. पर हर हर फिल्म उसी तरह की नहीं हो सकती. इसलिए कलाकार में अभिनय प्रतिभा का होना अति आवश्यक है. अन्यथा पहली फिल्म की अपार सफलता के बाववूद उसे काम नहीं मिलता. इस तर्क पर पत्रलेखा की प्रतिभा को कसा जाए, तो क्या जवाब आएगा…? गौरव अरोड़ा माडल ही नजर आते हैं. समीर की जिंदगी में कई पड़ाव आते हैं, उनके अनुसार गौरव के चेहरे के भावों में कोई फर्क नजर नहीं आता. गौरव का चेहरा भावहीन नजर आता है. हितेन तेजवानी भी जम नहीं पाए. फिल्म का गीत संगीत भी स्तरहीन ही है. सिर्फ एक गाना ‘अवारगी..’ही ठीक है.

‘‘महेश भट्ट व मुकेश भट्ट की कंपनी ‘‘विशेष फिल्मस’’ तथा टीसीरीज निर्मित फिल्म ‘‘लव गेम्स’’ के लेखक व निर्देशक विक्रम भट्ट, कैमरामैन मनोज सोनी, संगीतकार संगीत सिद्धार्थ तथा कलाकार हैं- पत्रलेखा, तारा अलीषा बेरी, गौरव अरोड़ा, हितेन तेजवानी.

इस साल आईपीएल में 50 करोड़ होगी दर्शकों की संख्या…!

इंडियन प्रीमियर लीग के प्रसारक सोनी ने कहा कि इस साल इस टी20 क्रिकेट लीग की बीएआरसी टीवी रेटिंग दर्शक संख्या 50 करोड़ के पार पहुंच सकती है.

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष और व्यवसाय प्रमुख (खेल ) प्रसन्ना कृष्णन ने कहा कि पिछली बार टीएएम रेटिंग के तहत आईपीएल दर्शक संख्या 20 करोड़ थी जिसमें सिर्फ शहरी दर्शक शामिल थे . इस बार ग्रामीण दर्शकों को भी शामिल किया गया है, जिससे दर्शक संख्या 50 करोड़ पार कर सकती है . नौ अप्रैल से 29 मई तक होने वाले आईपीएल में आठ टीमें करीब 60 मैच खेलेंगी.

सोनी ने यह भी कहा कि आईपीएल के नौवे सत्र से प्रसारण से राजस्व में 15 से 20 फीसदी इजाफा होने की उम्मीद है. आईपीएल की हिन्दी कमेंट्री सोनी मैक्स और सोनी सिक्स पर प्रसारित होगी, जबकि सोनी सिक्स पर तमिल, तेलुगू और बंगाली में भी कमेंट्री होगी. अंग्रेजी में कमेंट्री सोनी ईएसपीएन और ईएसपीएन एचडी चैनलों पर होगी.

हॉलीवुड की कुर्सी, नीलामी कीमत जानकर दंग रह जाएंगे आप

हेरीटेज ऑक्शंस द्वारा नीलामी से पहले भी मशहूर लेखिका जे.के. रोलिंग की कुर्सी की दो बार नीलामी हो चुकी है. रोलिंग ने परोपकारी संस्था 'नेशनल सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू चिल्ड्रन की मदद के लिए 2002 में इसे चेयर-इश अ चाइल्ड को दान कर दिया था. लेखिका ने इसे दान में देने से पहले इस पर लिखा था, मैं शायद आपको खूबसूरत न दिखूं, लेकिन आप जो देखते हैं, उससे फैसला न लें. उन्होंने लिखा, इस कुर्सी पर बैठकर मैंने 'हैरी पॉटर' लिखी है.

बता दें कि अब इसी कुर्सी की 3,94,000 डॉलर में नीलाम हुई यानी 2,62,71,920 करोड़ रुपए में बिकी. है न हैरान कर देने वाली बात…. गोयाकि रोलिंग ने हैरी पॉटर सीरीज की पहली दो किताबें 'हैरी पॉटर एंड द फिलॉसफर्स स्टोन' और 'हैरी पॉटर एंड द चैम्बर ऑफ सीक्रेट्स' इसी कुर्सी पर बैठकर लिखी थीं. कुर्सी बलूत की लकड़ी से बनी है. समाचारपत्र 'द गार्डियन' की वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, 1930 के दशक की यह कुर्सी रोलिंग के एडिनबर्ग के फ्लैट के लिए मुफ्त में दी गई चार कुर्सियों में से एक है.

VIDEO: इम्तियाज की इस फिल्म के वो आखिरी पांच मिनट

इम्तियाज अली बॉलीवुड के एक ऐसे फिल्मकार हैं, जो अपने अलग अंदाज व अलग विचारों के कारण जाने जाते हैं. उनकी फिल्में संदेश छोड़ती हैं. समाज को सोचने पर विवश करती हैं. इन दिनों वो एक लघु फिल्म से चर्चा में हैं. फिल्म का नाम है इंडिया टुमारो. उन्होंने इस फिल्म को अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया है.

इस लघु फिल्म को देखने के बाद कहा जा सकता है कि उन्होंने कमर्शियल सिनेमा से हटकर ऑफबीट फिल्म की रचना की है. इसमें उन्होंने महिला सशक्तिकरण की बात की है. उनके सपनों के साथ उनके जीने के अंदाज को बखूबी दर्शाया है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसके प्रचार-प्रसार को लेकर किए गए सवाल पर इम्तियाज ने कहा कि शॉर्ट फिल्म के साथ मैं डिजिटल दुनिया का दरवाजा खोल रहा हूं. इसमें दिलचस्पी रखने वाले लोगों और संगठनों से बातचीत की जाएगी. इस तथ्य पर जोर देते हुए कि यह शॉर्ट फिल्म इंटरनेट पर उपलब्ध है, जो इसके उपयोग को आसान बनाता है.

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि वेब सीरीज, शॉर्ट फिल्म्स रोमांचक है, जिसकी कहानी संभवत: पूरी तरह अलग है. मैं इसे आपके जीवन की फीचर फिल्म कह सकता हूं और यह वन-नाइट स्टैंड जैसा है. इंडिया टूमॉरो के आखिरी पांच मिनट के दृश्यों में सेक्स वर्कर्स को शेयर मार्केट में पैसा लगाने वालों के साथ बातचीत करते दिखाया गया है. यह देखने के बाद यह सवाल उठता है कि शेयर मार्केट का इतना तजुर्बा होते हुए इस औरत ने वेश्या के धंधे को क्यों चुना.

जवाब जानने के लिए देखें वीडियो…

हॉलीवुड अभिनेत्री केटी लोव्स के लिए प्रियंका बनीं मिसाल

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की हॉलीवुड में धूम है. हर कोई उनका दीवना है. चाहे अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा हों या फिर हॉलीवुड की सेलिब्रिटीज. पिछले दिनों जहां एक हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका के क्वांटिको प्रोमो में उनके बालों का मजाक बनाया था, वहीं हॉलीवुड की एक जानी मानी अभिनेत्री ऐसी है, जो प्रियंका को मेकअप के लिए प्रेरणामान बैठी हैं. जी हां, हम बातकर रहे हैं केटी लोव्स की. इस अमरीकी अभिनेत्री केटी के लिए मेकअप प्रेरणा बन गई हैं प्रियंका चोपड़ा. केटी को टेलीविजन प्रोग्राम 'स्कैंडल' में क्वीन पर्किन्स किरदार के लिए पहचाना जाता है. केटी लोव्स ने बुधवार रात ट्विटर पर लिखा, प्रियंका चोपड़ा को मेकअप प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद.

उन्होंने प्रियंका की मैग्जीन क्लिपिंग के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की. प्रियंका वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय फिल्म बेवॉच की शूटिंग में व्यस्त हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें 'स्कैंडल' और इसमें लोव्स का अभिनय पसंद है. भारतीय अभिनेत्री और पूर्व मिस वल्र्ड ने अमेरिकी टेलीविजन धारावाहिक 'क्वांटिको' के साथ अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की. इसमें उन्हें एफबीआई एजेंट की भूमिका निभाई थी. 'बेवॉच' के साथ उन्होंने हॉलीवुड में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी. फिल्म 'बेवॉच' 1990 के दशक के बेहद लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक पर आधारित है. इसमें ड्वेन जॉनसन और जैक एफ्रोन भी प्रमुख भूमिका में हैं.

यूं ही नहीं कहते आमिर खान को मिस्टर परफेक्शनिस्ट

वो यूं ही नहीं हैं मिस्टर परफेक्शनिस्ट. चाहे रील लाइफ हो रीयल लाइफ…हर जगह वो कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि चर्चा का विषय बन जाता है. जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा, हम आमिर खान की ही बात कर रहे हैं.

इन दिनों वो दंगल फिल्म में अपने कैरेक्टर को लेकर सुर्खियों में तो हैं ही, साथ ही जिस तरह से उन्होंने अचानक अपना वजन कम किया है, वह हर जगह कौतूहल का विषय बना हुआ है. वजन बढ़ाने के बाद पिछले माह अचानक उन्हें घटे वजन में देख लोग दंग रहे गए. उनका घटा वजन देख कई सिने हस्तियां हैरान हैं उन्हें इसलिए ज्यादा ताज्जुब हुआ, क्योंकि आमिर ने अपना वजन प्राकृतिक तरीकों से घटाया है.

बता दें कि आमिर (50) ने व्यायाम में साइकिलिंग, ट्रेकिंग, स्वीमिंग व टेनिस खेलना शामिल किया. हिंदी फिल्म जगत से कई हस्तियां आमिर से पूछ रही हैं कि उन्होंने अपना बढ़ा वजन किस तरह कम किया. आमिर के प्रवक्ता ने कहा, फिल्म उद्योग से आमिर के कई दोस्तों ने उनसे संपर्क किया है और वजन घटाने के उनके राज के बारे में पूछ रहे हैं. आमिर ने अपना मौजूदा लुक पाने के लिए जो समर्पण दिखाया, उसे देखकर हर कोई दंग है.

इन्हे देख कर ही शर्म क्यों

डाक्टर राम प्रकाश दोगने मध्य प्रदेश की हरदा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं और उन्हे अपने विधान सभा क्षेत्र के किसानो की चिंता है, इसलिए वे लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि तवा बांध का पानी हरदा के किसानो को भी दिये जाने की व्यवस्था सरकार करे. सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया तो उन्होने अपनी बात कहने का अनूठा रास्ता चुना और गांधी शैली मे सिर्फ अधोवस्त्र पहने विधान सभा पहुँच गए. बात कतई नई नहीं है देश के नेता ऐसे दिलचस्प उपाय करते रहते हैं, अधिकांश का मकसद मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींच पब्लिसिटी हासिल करना है, मुमकिन है डाक्टर दोगने का भी रहा हो, पर उन्हें इस हालत मे देख भाजपा की महिला विधायकों ने पल्लू से इस तरह अपने चेहरे ढक लिए मानो एक अर्धनग्न पुरुष को देख उनका कोई बहुत बड़ा नैतिक नुकसान या हनन हो रहा हो. जाहिर है  इन महिला विधायकों की मंशा यूं मुंह छिपाकर यह जताने की थी कि राम प्रकाश दोगने एक भद्र पुरुष नहीं हैं.

यह मंशा और प्रतिक्रिया जाने क्यों उस वक्त प्रदर्शित नहीं होती जब नंग धढ़ंग साधु संत सरे आम सड़कों पर स्व्छन्द विचरण करते नजर आते हैं और कोई महिला उनका तिरिस्कार इस तरह नहीं करती जैसे उक्त विधायक का किया यानि धर्म के नाम पर हर कुछ जायज है और इतना है कि नंगे, अधनंगे साधु संतों और मुनियों सम्मान के हकदार हो जाते हैं उनके अंग प्रदर्शन से किसी का कुछ नहीं बिगड़ता. यह पूर्वाग्रह और  दोहरापन दिखलाकर भाजपा की विधायकों ने साबित यही किया है कि खोट उनकी मानसिकता और नजरों मे है नहीं तो विधायक महोदय की मंशा तो कहीं से अश्लील या महिलाओं को लज्जित करने की नहीं दिख रही .

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