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ये लत है गलत

धनबाद (झारखंड) के सरायढेला में गत सोमवार एक बहुत ही दिलचस्प नजारा देखने को मिला. नारीशक्ति के बैनर तले करीब 50 ग्रामीण महिलाओं ने वहां के 5 गांवों में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया. जुलूस निकाल कर शराब के खिलाफ नारेबाजी की. इसी दौरान एक झोंपड़ी में बिक रहे देशी शराब के पाउच नष्ट करने के बाद उन्होंने शराब पीने वालों की पिटाई कर उन का नशा उतारने का काम भी किया. महिलाओं की भीड़ और तेवर देख कर शराबियों की भीउ़ तितरबितर होने लगी. जान बचा कर वे इधरउधर भागने लगे मगर महिलाओं ने दौड़दौड़ा कर उन्हें मारा.

जुलूस का नेतृत्व पुष्पादेवी, बेबी देवी, उर्मिला देवी, मंजू देवी और मालती देवी वगैर कर रही थीं. इन में वे महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्हें नशे के कारण अपने परिजनों को खोना पड़ा था. सच है, स्त्री चाहे तो हर बुराई से लड़ सकती है. शराब तो वैसे भी एक ऐसी बुराई है, जो कहीं न कहीं स्त्री के जीवन को ही तबाह करता है. भले ही शराब पीने का आदी पुरुष हो या फिर स्त्री स्वयं.

एक वैश्विक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भारत में अल्कोहल की खपत बीते 20 सालों में 55% बढ़ गई है. चिंता की बात तो यह है कि सब से ज्यादा युवा वर्ग ही नशे की चपेट में आ रहा है, वहीं महिलाएं भी इस फेहरिस्त में अपनी जगह बनाती दिख रही है. पैरिस की संस्था, ओईसीडी की हालिया प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 40 राष्ट्रों में भारत का तीसरा स्थान रहा. इन के अलावा चीन, इजराइल और ब्राजील भी अग्रणी हैं.

इस रिपोर्ट की मानें तो पीने की आदत युवाओं और महिलाओं में चमत्कारिक रफ्तार से बढ़ रही है. रिपोर्ट कहती है कि कम उम्र में ही देश के युवा लड़के लड़कियां पीने की लत का शिकार हो रहे हैं. आंकड़ों की बात करें तो 15 साल से कम उम्र के लड़कों में कभी न पीने वालों का प्रतिशत 44% से घट कर 30% व लड़कियों का 50% से घट कर 30 फीसदी रह गया है.

सेहत के लिए शत्रु के समान है शराब

तुलसी हेल्थ केयर के डायरेक्टर डॉक्टर गौरव गुप्ता कहते हैं कि अल्कोहल एक विषैला पदार्थ है. अगर इस का सेवन कम मात्रा में किया जाए तो भी यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है क्योंकि यह लिपिड (वसा) को घोलने का काम करता है. नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में भी अलकोहल का सेवन (महिलाओं के लिए एक ड्रिंक और पुरुषों के लिए 2 ड्रिंक्स प्रतिदिन) कोशिका भित्ती में लिपिड को घोल देता है या विघटित कर देता है और कोशिका में प्रवेश कर उन्हें नष्ट कर देता है इस के साथ ही पास स्थित कोशिकाओं की संरचना को भी क्षति पहुंचाता है. अल्कोहल को शरीर में स्टोर भी नहीं किया जा सकता. इसलिए शरीर इस को मेटाबोलाइज करने के लिए अधिक तेजी से कार्य करता है और इस प्रक्रिया में शरीर में संग्रहित बहुत सारे विटामिनों और मिनरलों का उपयोग हो जाता है, जिस के कारण पोषक तत्त्वों की अत्यधिक कमी हो जाती है.

विटामिन बी और फोलेट की कमी के कारण एंगजाइटी, डिप्रेशन, हृदय और तंत्रिकाओं से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं. पोटेशियम और मेग्नेशियम की कमी के कारण कमजोरी, थकान और भूख न लगने की समस्या हो जाती है. अल्कोहल के कारण मुंह, ओरोफैरिंग्सय, लीवर, इसोफेगस और स्तन कैंसर हो सकता है. इस के कारण डिपेंडेंस सिंड्रोम, सिरोसिस, पैंक्रियाटाइटिस (एक्यूरट और क्रानिक), गैस्ट्री टिस, मेंटल ब्लैक आउट, गुर्दे कमजोर पड़ना, पालीन्युरोपैथी, हेमरेजिक स्ट्रोप, साइकोसेस, मिर्गी के दौरे और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं.

यही नहीं, अलकोहल व्यक्ति के सोचनेसमझने की क्षमता भी कम कर देता है. शराब के नशे में इंसान ऐसे काम कर जाता है, जिन के लिए बाद में सिवा पछतावे के कुछ हासिल नहीं होता. मारपीट, हत्या, रेप, रैश ड्राइविंग जैसे ज्यादातर कारनामे नशे की हालत में ही होती है. सिर्फ पुरुष ही नहीं, स्त्रियां भी इस मामले में कम नहीं. हाल ही में चंडीगढ़ में नशे में धुत्त 2 लड़कियों ने 1 घंटे तक बवाल बचाया. बाद में पुलिस ने हिरासत में ले कर मेडिकल जांच करवाई तो पता चला कि उन्होंने शराब पी रखी थी.

एक बार शराब या नशे की आदत लग जाए तो फिर वह आसानी से छूटती नहीं और इंसान इस के जुनून में खौफनाक कदम भी उठा बैठता है. इस 24 मई को देहरादून के 22 वर्षीय आशुतोष ने महज इस वजह से फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली, क्योंकि उस की मां ने नशे के लिए उसे रुपए नहीं दिए थे.

एक बहुत ही लोकप्रिय उक्ति है, ‘पहले आदमी शराब पीता है, फिर शराब शराब को पीती है, और आखिर में शराब आदमी को पी जाती है.’ यह वो आदत है जो आदमी के शरीर और दिमाग को ही खोखला नहीं करती वरन उस के कैरियर और सामाजिक व पारिवारिक संबंधों को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है. इन लोगों के शरीर में ऐसे रसायन विकसित हो जाते हैं, जिन की वजह से एक बार शराब पीने के बाद वे बारबार शराब पीने को मजबूर होते हैं, इस रसायन का नाम है, ‘टेट्राहाइड्रो आइसोक्वीनोलिन’.

ऐसी बात नहीं कि आदतन शराब पीने वाले लोग इस के दुष्परिणामों से अवगत नहीं होते, मगर शराब उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से इस कदर अपना गुलाम बना लेता है कि वे अपना अच्छाबुरा सोचने की ताकत खो देते हैं. व्यक्ति कई कारणों से शराब पीने की आदत को अपनाता है, जैसे थकान मिटाने के लिए, तनाव या गम को हलका करने के लिए, बुरी संगत में रह कर या फिर इसे सामाजिक प्रतिष्ठा का सूचक मान कर. मगर ऐसा नहीं कि इस आदत से पीछा छुड़ाना असंभव हो. आज देश में विभिन्न स्वास्थ्य एवं चिकित्सा केंद्र हैं जो इस आदत को छुड़ाने में लोगों की मदद कर रहे हैं.

इन केंद्रों में रोगी को कुछ दिनों तक के लिए दाखिला दिया जाता है. इस दौरान उस की चिकित्सीय जांच, समुचित देखभाल और अन्य सर्वेक्षण किए जाते हैं. रोगियों के साथ व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से निरंतर परामर्श किया जाता है और उन की मानसिक समस्याओं का गहराई से अध्ययन करते हुए उन्हें दूर करने का हर संभव प्रयास किया जाता हो. चिकित्सीय प्रक्रिया भले ही कुछ दिनों तक चले लेकिन कुल मिला कर यह एक लंबी प्रक्रिया है.

डा. गौरव गुप्ता कहते हैं, ‘इस आदत से पीछा छुड़ाने के लिए रोगी के साथसाथ उस के परिजनों का भी समान योगदान अपेक्षित है. अकसर देखा गया है कि शराब पीने वाले ज्यादातर लोग परिजनों की उपेक्षा के शिकार होते हैं और इस का मुख्य कारण है, उन के परिजनों का व्यवहार उन के प्रति सही नहीं होता. ऐसा कर वे उन्हें शराब पीने से रोकने के बजाए उन्हें और प्रेरित करते हैं. परिजनों को चाहिए कि शराब छुपाने और फेंकने का प्रयास न करें क्योंकि रोगी को इस बात का पता चलने पर वह क्रोधवश गलत कदम उठाएगा. रोगी को शराब न पीने पर भाषण या उपदेश न दें. यह ध्यान रखें कि रोगी इस के परिणामों से भलीभांति अवगत है. उस के साथ शराब पीने या उसे प्रेरित करने की गलती कतई न करें. साथ ही रोगी की उपेक्षा करने या उस से दूरदूर रहने के बजाए उस के साथ ओर अधिक सहानुभूति रखिए.’

वस्तुतः शराब छोड़ना बहुत सहज है, बस जरूरत है तो पारस्परिक सहयोग और समझबूझ की, गलत को गलत कहने और इस के खिलाफ आवाज उठाने की.

120 घंटे चला फुटबॉल मैच, बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड

चिली की राजधानी सैन्टियागो में फुटबॉल में 23 मई को एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना. 120 घंटों तक खेले गए फुटबॉल मैच में 2,356 फुटबॉलरों ने हिस्सा लिया. इस तरह से फुटबॉल का अभी तक का सबसे लंबा मैच खेला गया.

जिन लोगों को फुटबॉल के बारे में ज्यादा पता नहीं उन्हें बता दें कि एक नॉर्मल फुटबॉल मैच 90 मिनट का खेला जाता है. स्टेडियम ऑफ बायसेंटेनरी में यह मैच खेला गया, सबसे लंबा मैच होने के अलावा इसमें सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया, यह भी एक नया रिकॉर्ड है.

मैच का फाइनल स्कोर 505-504 रहा. इससे पहले सबसे लंबा फुटबॉल मैच स्कॉटलैंड में पिछले साल खेला गया था. यह मैच 105 घंटे चला था और इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था. मैच में रेग्युलर और प्रोफेशन फुटबॉलर शामिल थे.

पक्षियों के खूबसूरत और कलात्मक घोंसले

पक्षियों के चमत्कारिक संसार में एक से बढ़ कर एक अचरज भरी बातें हैं. ये रंगबिरंगे पक्षी अपने अंडों और चूजों के उचित पालनपोषण और संरक्षण के लिए खूबसूरत और कलात्मक घोंसले बनाते हैं, जो इन के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल होते हैं. ये घोंसले जहां सर्प, अजगर और रेंगने वाले अन्य शिकारी जीवों से इन की रक्षा करते हैं, वहीं इन में पक्षी निश्चिंत हो कर अपने अंडे दे सकते हैं तथा उन अंडों को सेने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

प्रत्येक जाति का पक्षी अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार अपना घोंसला बनाने की जगह का चुनाव करता है. पिंगल (एक तरह का बंदर), कृकल और स्वर्णचूड़ (मुरगा) जैसे वनवासी पक्षी मैदानों में नहीं मिल सकते. इसी तरह सारंग, चपलाखु और धानीमूष जैसे मैदानी पशुपक्षी कभी जंगल में नहीं मिलेंगे. पक्षियों के घोंसलों की कई किस्में देखने को मिलती हैं, ऊबड़खाबड़ घोंसले, कप के आकार के घोंसले, पेड़ पर लटके हुए घोंसले, पेड़ की घनी पत्तियों व तनों, पुराने भवनों, खंडहरों तथा नदी के किनारे रेत में बने घोंसले. कुछ पक्षी अंडे देने से कुछ समय पहले ही घोंसले बनाते हैं तथा वहीं रहते हैं. उस के बाद वे दूसरी जगह उड़ जाते हैं.

जो पक्षी वर्षा के पहले घोंसले बनाते हैं वे अकसर घास वाले, सपाट मैदान का चुनाव करते हैं. वर्षा के कारण जब जमीन पर कीड़ेमकोड़े, इल्ली आदि पैदा हो जाते हैं, कुछ पक्षी तब अंडे देते हैं. वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उन के बच्चों के लिए आसानी से भोजन उपलब्ध हो सके. गिद्ध, चील, बाज आदि पक्षी (जो अपने शिकार पर अचानक आक्रमण करते हैं) ठंड के मौसम में अंडे देते हैं तथा वसंत ऋतु तक उन के बच्चे उड़ने लायक हो जाते हैं.

पक्षी अपने घोंसले मिलजुल कर बनाते हैं यानी नर और मादा दोनों मिल कर घोंसला तैयार करते हैं. कभीकभी नर या मादा अकेले भी यह कार्य कर लेते हैं. आस्ट्रेलिया के ‘मेले फूनाउनल’ जाति के पक्षी में नर घोंसला बनाता है तथा मादा अपने अंडे देने के हिसाब से उसे व्यवस्थित करती है. भारत में कुछ नर पक्षी एक ही ऋतु में 4-4 घोंसले तैयार करते हैं. मादा उन का निरीक्षण कर के, उन में से कोई एक पसंद करती है. आमतौर पर पक्षी अपने अंडों को अपने ही घोंसले में सेते हैं, लेकिन कोयल अपने अंडों को सेने के लिए कौए के घोंसले में रख देती है.

अफ्रीका के कुछ पक्षियों को सर्द हवा में रहना रुचिकर लगता है. वे अपने अंडे तालाब में उगने वाले जंगली कमल के पत्तों पर रखते हैं. जब असुरक्षा या खतरे का एहसास होता है, तो वे अपने अंडों को सुरक्षित जगह पर ले जाते हैं. उत्तरी ध्रुव के पैंगुइन अपने पैरों की उंगलियों के बीच में अंडे सेते हैं, क्योंकि वहां का तापमान शून्य से 40 डिगरी सेंटीग्रेड नीचे रहता है. इस कारण वहां घासफूस, चारा, पत्ते आदि नहीं होते.

जंगली मुरगा, चील, तीतर आदि अपने अंडे जमीन के उथले भाग में रखते हैं, ताकि दुश्मन उन्हें आसानी से पहचान न सके, क्योंकि उन के अंडों का रंग मटमैला होता है. उन पर काले या भूरे रंग के धब्बे भी होते हैं. नीलकंठ, टरकी आदि पक्षी अकसर अंडों को सेने के लिए उन्हें पोली जमीन में गाड़ कर रखते हैं, ताकि जमीन की गरमी से अंडों में बच्चे तैयार हो जाएं. आस्ट्रेलिया का ‘मूलफाउल’ जमीन से 2-3 फुट की ऊंचाई तक मिट्टी का टीला तैयार करता है. उसे अंदर से नरम गद्दीनुमा बनाने के लिए नरम तिनकों, पत्तों आदि का इस्तेमाल करता है. फिर उस टीले का मुंह मिट्टी से बंद कर देता है.

जब मुरगी अंडे देती है तो मुरगा उन अंडों को पहले से तैयार किए गए टीले में रखता है. उस के बाद उस टीले का मुंह मिट्टी, पंख आदि से ढक देता है. जमीन की गरमी से बच्चे तैयार हो जाते हैं तथा अंडों से चूजे चोंच मार कर ठीक समय पर बाहर निकल आते हैं. आस्ट्रेलिया में जमीन के ऊपर ‘लाफींगगल’ के टीलेनुमा घरोंदे, सामूहिक रूप से पाए जाते हैं. अन्य पक्षी तथा ‘डारटर पेलीकन’ पेड़ों की मजबूत डालियों पर तिनके रख कर अपने घोंसले बनाते हैं. इसी प्रकार अन्य पक्षी जैसे कौए, चील, सारस, बगुला भी घोंसले बनाते हैं. पेरेडाइस फ्लाई केचर नामक पक्षी कप के आकार के घोंसले 15-20 फुट की ऊंचाई पर तैयार करते हैं. ये घोंसले देखने में बड़े मनोहारी लगते हैं.

‘बया’ चिडि़या पेड़ पर लटकने वाले कप या शंख के आकार के घोंसले तैयार करती है. उन्हें बनाने में वह केले और नारियल के पत्तों का उपयोग करती है. इस प्रकार के घोंसले नदी व तालाब के किनारे के वृक्षों पर बनाए जाते हैं तथा अंदर से पंखों, कपास, पत्तों आदि का नरम आवरण दिया जाता है. ‘आर्कटिक आयडर डक’ नामक पक्षी पत्तों, तिनकों इत्यादि को घोंसले के अंदर चिपकाने के लिए अपनी विष्ठा का प्रयोग करता है. ‘बी ईटर’ और ‘किंगफिशर’ जाति के पक्षी अपनी चोंच से 1 से 3 फुट की गहराई तक नदी के किनारों पहाड़ों में गड्ढा खोद कर घोंसला बनाते हैं. यह गड्ढा अंदर से बड़ा और मुंह से संकरा होता है.

‘कठफोड़वा’ नाम का पक्षी जनवरी से मई की अवधि में पेड़ के पोले तने में घुस कर उस को अंदर से चोंच से चौड़ा करता है. नीचे की तह को नरम बनाने के लिए नदी की काई, कपास आदि का उपयोग करता है. अंडे रखने के बाद छेद का मुंह एकडेढ़ इंच खुला रखता है. ‘इंडियन ग्रे हार्नबिल’ नामक पक्षी पुराने वृक्षों के तनों में अंडे रखते हैं तथा जब अंडे परिपक्व हो जाते हैं, तब मादा तने के अंदर बैठ जाती है व नर उस के मुंह या छेद को मिट्टी, पत्तों, तिनकों तथा विष्ठा से ढक देता है. हवा मिलने के लिए छेद का व्यास  इंच रखता है. बच्चे तैयार होने तक मादा के लिए दानेपानी की व्यवस्था नर पक्षी करता है.

अंडों से बच्चे निकलने पर नरमादा दोनों सामूहिक रूप से बच्चों को दानापानी खिलाते हैं. आस्ट्रेलिया का ही ‘झलेक स्वान’ तथा कुछ अन्य विशिष्ट पक्षी पानी पर तैरते घोंसले बनाते हैं. फिर उन्हें इस प्रकार से बुनते हैं कि पानी की किसी भी अवस्था में घोंसले सदा तैरते रहते हैं. वे उस की निगरानी भी करते हैं तथा समय आने पर शत्रु पर आक्रमण भी करते हैं. ऐसे पक्षी दक्षिण एशिया और आस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं. मनुष्य को न केवल अपने आवास की ओर ध्यान देने के साथसाथ पक्षियों की आवास व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए. पक्षियों को भी रहने के लिए आवास स्थल चाहिए. वनों की बड़े पैमाने पर हो रही कटाई से पक्षियों के आवास की समस्या बड़ी विकट हो गई है. परिणामस्वरूप ये पक्षी मजबूरन अपने घोंसले पुराने किलों, ऊंचे भवनों और खंडहरों आदि में बनाने लगे हैं. इस में कोई संदेह नहीं कि पक्षियों के घोंसले बड़े ही कलात्मक होते हैं, जो हमारे ड्राइंगरूम की शोभा भी बढ़ाते हैं. इसलिए पक्षियों के आश्रय स्थलों की तरफ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

जीत के जश्न में चोटिल हुए डिविलियर्स, आया खून

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) को खराब शुरुआत के बावजूद अकेले दम पर आईपीएल-9 के फाइनल में ले जाने वाले एबी डिविलियर्स को टीम का आक्रामक जश्न कुछ महंगा पड़ गया और उनके चेहरे से खून तक निकलने लगा.

डिविलियर्स ने नॉटआउट 79 रन की पारी खेलकर टीम को मुश्किल स्थिति से निकाला और जीत दिलाने तक मैदान पर टिके रहे. आखिरी ओवरों में आरसीबी के कप्तान विराट कोहली से लेकर बाकी सभी खिलाड़ी प्रत्येक रन पर उछलते दिखे और जैसे ही मैच में डिविलियर्स ने आखिरी विजयी रन बनाया पूरी टीम चिल्लाते और भागते हुए मैदान पर आ गई और डिविलियर्स पर सभी खिलाड़ी इस तेजी से कूद गए कि उनका हेलमेट उतरकर पीछे जा गिरा.

इसी गहमागहमी और जबरदस्त खुशी के बीच डीविलियर्स के चेहरे पर जोर से चोट लगी और उनके चेहरे से खून निकलने लगा. मैन ऑफ द मैच डिविलियर्स से बाद में टीम के स्टार स्पिनर युजवेंद्र चहल ने सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी.

दरअसल पूरी टीम के साथ चहल भी डिविलियर्स पर कूद पड़े और इससे दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी को चोट लग गई. भारतीय खिलाड़ी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा, 'मुझे माफ कर दें, लेकिन इस रात के लिए शुक्रिया और इकबाल अब्दुल्ला तुमने भी बहुत अच्छा खेला.' मैच के बाद प्रेजेंटेशन के दौरान भी जब डिविलियर्स बात करने के लिए आये तो उनकी चोट और चेहरे से निकलता खून साफ दिखाई दे रहा था.

परखिए कितना आत्मविश्वास है आप में

अपने निर्धारित लक्ष्यों को पाने व जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए जरूरी है आप में भरपूर आत्मविश्वास हो. आप के काम करने के ढंग, जीवन के प्रति आप के दृष्टिकोण व आप के सोचने के ढंग से ही आप के आत्मविश्वास का स्तर निर्धारित होता है.

इस प्रश्नावली में भाग लीजिए और अपने आत्मविश्वास को खुद परखिए :

1. कोई लड़का/लड़की आप को अच्छी लगती है और आप उस से शादी करना चाहते हैं तो क्या आप –

अ. आगे बढ़ कर अपना परिचय देंगे व दोस्ती का प्रस्ताव रखेंगे.

ब. पत्र लिख कर अपने बारे में बताएंगे व दोस्ती का प्रस्ताव रखेंगे.

स. किसी तीसरे व्यक्ति को मध्यस्थ बना कर दोस्ती का प्रस्ताव भेजेंगे.

 

2. कल आप की परीक्षा है. परीक्षा की तैयारी आप कब और कैसे करते हैं?

अ. एक दिन पहले रात तक डट कर तैयारी करते हैं ताकि रात को निश्चिंतता से सो सकें. सुबह उठ कर नहाधो कर परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं.

ब. सुबह 5 बजे उठ कर पढ़ते हैं. नहानेधोने में समय व्यर्थ नहीं करते. जल्दीजल्दी सब पढ़ कर परीक्षा भवन पहुंचना चाहते हैं ताकि लेट न हो जाएं.

स. घंटी बजने तक किताब खोल कर पढ़ते रहते हैं. अंतिम क्षण तक सबकुछ जज्ब कर लेना चाहते हैं.

 

3. आप के हाथ में जब प्रश्नपत्र आता है तो आप सब से पहले क्या करते हैं?

अ. प्रश्नपत्र पर अपना रोल नंबर लिखते हैं. ध्यान से प्रश्नपत्र को पढ़ते हैं. 1-1 कर प्राथमिकता के आधार पर प्रश्नों को हल करते हैं.

ब. पूरा प्रश्नपत्र पढ़े बिना ही 1-1 प्रश्न पढ़ कर जवाब लिखना शुरू करते हैं.

स. प्रश्नपत्र पढ़ कर आप एकदम घबरा जाते हैं कि आप को तो कुछ भी नहीं आता है.

 

4. अपने कैरियर के बारे में आप की भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

अ. आप ने अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है और उसे पाने को प्रयासरत हैं.

ब. समय आने पर देखा जाएगा. जितने नंबर आएंगे, उसी के अनुसार अपना लक्ष्य निर्धारित करेंगे.

स. अपने कैरियर को ले कर आप सोचते बहुत हैं, लेकिन हर लक्ष्य आप को बहुत दूर व असंभव सा लगता है.

 

5. आप के अध्यापक ने प्रधानाचार्य से आप की झूठी शिकायत की है. आप कतई दोषी नहीं हैं. प्रधानाचार्य ने आप को बुलाया है. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?

अ. प्रधानाचार्य को सारी घटना विस्तारपूर्वक बताएंगे व अपनी सफाई पेश करेंगे.

ब. अध्यापक से सुलहसफाई कर अपनी शिकायत वापस लेने के लिए कहेंगे.

स. चुपचाप माफी मांग लेंगे. आप को लगता है सफाई पेश करने से बात बढ़ेगी, निबटेगी नहीं.

 

6. आप हमेशा कक्षा में प्रथम आते हैं. इस बार टर्मिनल परीक्षाओं में आप के नंबर काफी कम आए हैं. आप –

अ. डट कर मेहनत करेंगे ताकि वार्षिक परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त किए जा सकें.

ब. नंबर कम आने की वजह ढूंढ़ेंगे और उस कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे.

स. आप को लगता है कि अब आप प्रथम स्थान तो पा नहीं सकते. द्वितीय हो या चतुर्थ, उस से क्या फर्क पड़ता है? इसलिए अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाने का प्रयास करेंगे.

 

7. आप कहीं साक्षात्कार हेतु गए हैं, चयन समिति का अध्यक्ष आप को जवाब देने का मौका दिए बिना एक के बाद एक प्रश्न पूछता जा रहा है. आप –

अ. स्पष्ट शब्दों में कहेंगे कि आप को अधिकतर जवाब आते हैं. आप को जवाब देने के लिए थोड़ा समय दें.

ब. जितने भी प्रश्नों के उत्तर आप दे पाते हैं, दे देते हैं.

स. प्रश्नों की बौछार से आप घबरा जाते हैं. हकलाहकला कर मुश्किल से एकाध प्रश्न का ही उत्तर दे पाते हैं.

 

8. आप का पेपर बहुत अच्छा हुआ था, लेकिन नंबर बहुत कम आए हैं. आप की उम्मीद से कम. आप-

अ. प्रार्थनापत्र के माध्यम से उस पेपर का पुनर्निरीक्षण (रीचैकिंग) करवाएंगे.

ब. अपने अध्यापक से कहेंगे कि वे पेपर दोबारा जांच लें.

स. इसे नियति मान कर स्वीकार कर लेंगे.

 

9. आप ने निजी अलमारी में कपड़े व किताबें कैसे रखे हुए हैं?

अ. सबकुछ सलीके से रखा हुआ है.

ब. कुछकुछ ठीकठाक है, क्योंकि आप बीचबीच में उसे ठीक करते रहते हैं.

स. हर चीज बेतरतीबी से रखी हुई है.

 

10. आप ने महीने के अंत तक एक प्रोजैक्ट तैयार करना है. आप-

अ. धीरेधीरे उसे समय से पहले तैयार कर लेते हैं.

ब. आखिरी समय तक सोते रहते हैं. अंतिम दिन देर रात तक बैठ कर हड़बड़ी में जैसेतैसे काम निबटा लेते हैं.

स. तिथि निकलने के बाद ही आप मौडल जमा करवाते हैं.

 

11. आप को जो जेबखर्च मिलता है, उसे आप कैसे खर्च करते हैं?

अ. आधा जेबखर्च आप जमा कर लेते हैं ताकि किसी अचानक आ पड़े खर्च के समय किसी से पैसे न मांगने पड़ें.

ब. बचाना तो चाहते हैं, लेकिन बचा नहीं पाते. सब पैसे खर्च हो जाते हैं.

स. महीने के पहले हफ्ते में ही सारे पैसे खर्च हो जाते हैं.

 

12. आप का काम करने का ढंग कैसा है?

अ. सुनियोजित ढंग से एक के बाद एक सब काम निबटाते चले जाते हैं.

ब. बिना किसी योजना के जो भी काम सामने आता है, उसे निबटाते चले जाते हैं.

स. जो काम बहुत जरूरी होता है, केवल उसे ही निबटाते हैं.

 

13. स्कूल की ड्रैस आप कब और कैसे तैयार करते हैं?

अ. रात को सोने से पहले अपनी ड्रैस प्रैस कर के, जूते पौलिश कर निर्धारित स्थान पर रख कर सोते हैं.

ब. सुबह उठ कर सब से पहले कपड़े निकालते हैं, जूते पौलिश करते हैं.

स. ये सब काम मम्मी के हैं.

 

अगर आप के जवाब (अ) श्रेणी में हैं तो आप में भरपूर आत्मविश्वास है और आप के आत्मविश्वासी होने का श्रेय जाता है आप की आत्मनिर्भरता को. आप अपने सभी काम स्वयं करते हैं. विषम परिस्थितियों में भी नहीं घबराते हैं. अगर आप के जवाब ‘ब’ श्रेणी में हैं तो आप में आत्मविश्वास की कमी है, क्योंकि आप अपने फैसले स्वयं नहीं ले पाते. छोटीबड़ी हर बात के लिए दूसरों पर निर्भर हैं. आप अपनी बात को पूरे दावे से प्रस्तुत नहीं कर पाते, क्योंकि आप में आत्मविश्वास का अभाव है. अपनेआप को थोड़ा व्यवस्थित कीजिए, टाइमटेबल बनाइए व योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू कीजिए.

अगर आप के जवाब ‘स’ श्रेणी में हैं तो आप पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर व लापरवाह किस्म के व्यक्ति हैं. आप में कतई आत्मविश्वास नहीं है. आप को हर काम कठिन व असंभव प्रतीत होता है. अपनी कमियों, कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करने के बजाय उन्हें नियति मान कर स्वीकार कर लेते हैं. अपनी आदतें बदलिए, अपने जीने का ढंग बदलिए वरना बहुत पछताना पड़ेगा. आत्मनिर्भर बनिए, आत्मनिर्भरता ही आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है.

विराट कोहली ने लपका IPL का सबसे कनफ्यूजिंग कैच

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 9वें सीजन के पहले क्वालिफायर में एक मजेदार घटना देखने को मिली. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर और गुजरात लायंस के बीच हुए इस मैच में विराट कोहली ने एक ऐसा कैच लपका जिसे आईपीएल का सबसे कनफ्यूजिंग कैच कहा जाने लगा है.

19वें ओवर फेंकने आए थे शेन वाटसन, पहली दो गेंद पर एकलव्य द्विवेदी ने छक्के जड़ डाले. कप्तान विराट कोहली इससे काफी तनाव में नजर आ रहे थे. तीसरी गेंद पर भी एकलव्य ने लॉन्ग ऑन पर बड़ा शॉट खेला, लेकिन इसे अच्छे से टाइम नहीं कर पाए. कप्तान कोहली ने डाइव लगाकर लॉन्ग ऑन पर कैच लपका. वो इस कैच को लपककर गुस्से में गेंद को जमीन पर पटक बैठे. अंपायर को लगा कि कोहली इस कैच को सफाई से नहीं पकड़ पाए हैं इसलिए उन्होंने बल्लेबाज को इंतजार करने के लिए कहा.

इस बीच कोहली बाउंड्री लाइन पर खड़े होकर ड्रिंक लेने लगे. जब उन्होंने देखा कि अंपायर ने एकलव्य को इंतजार करने के लिए कहा है तो दौड़कर वहां पहुंचे. फील्ड अंपायरों ने आपस में बात करने के बाद थर्ड अंपायर का इशारा किया. थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद एकलव्य को आउट करार दिया.

यह कैच आरसीबी की जीत के लिए भी अहम साबित हुआ. अगर एकलव्य आखिरी ओवर तक टिक जाते तो गुजरात लायंस ने आरसीबी को 170 के करीब लक्ष्य दिया होता.

5 समर स्किन प्रौब्लम्स और निदान

गरमी के मौसम में स्किन काफी नाजुक और संवेदनशील हो जाती है. इस मौसम में स्किन के धूप के संपर्क में रहने से स्किन संबंधी कई समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में उस के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही आप की सुंदरता को बिगाड़ सकती है. गरमी में स्किन प्रौब्लम्स से बचने के उपाय बता रही हैं यावाना ऐस्थैटिक क्लीनिक की कंसल्टैंट डर्मैटोलौजिस्ट डा. माधुरी अग्रवाल और सोहम वैलनैस क्लीनिक की ब्यूटी ऐक्सपर्ट दिव्या ओहरी:

सनबर्न

सनबर्न सूर्य की हानिकारक किरणों के अत्यधिक संपर्क में आने के कारण स्किन पर होने वाली प्रतिक्रिया है. इस के लगातार संपर्क में आने से स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है. गंभीर रूप से सनबर्न होने पर स्किन में छाले भी पड़ जाते हैं. कभीकभी स्किन छिल भी जाती है.

सनबर्न के लिए घरेलू उपाय

– सनबर्न का प्राथमिक उपचार घर से शुरू किया जा सकता है. इस के लिए ठंडे पानी से नहाना या दिन में बारबार सनबर्न से प्रभावित पार्ट पर ठंडी गीली पट्टियां लगाना जलन और दर्द को कम करने में काफी सहायक होता है.

– सनबर्न के कारण स्किन पर काले चकत्ते हो गए हैं, तो प्रभावी हिस्से पर बर्फ रगड़ने से निशान काफी हद तक कम हो जाते हैं.

– आलू दर्दनिवारक का काम करता है. यह त्वचा पर हलकी जलन, खरोंच, घाव, जलने वाली जगह पर लगने से आराम देता है. आलू को काट कर सनबर्न वाली जगह लगाने से काफी आराम मिलता है. आप चाहें तो आलू का छिलका उतार कर पेस्ट बना कर रुई से लगा सकती हैं.

– पुदीने की पत्तियों का रस निकाल कर झुलसी त्वचा पर नियमित लगाने से आराम मिलता है. इस के अलावा 1 चम्मच उरद दाल को दही के साथ पीस कर झुलसी त्वचा पर लगाने से भी राहत मिलती है.

चिकित्सीय उपचार

 विटामिन ई एक तरह का ऐंटीऔक्सिडैंट होता है, जो संक्रमण को कम करता है. सनबर्न की वजह से आप सप्लिमैंट के रूप में विटामिन ई ले सकती हैं. आप चाहें तो विटामिन ई युक्त भोजन का भी सेवन कर सकती हैं.

– स्किन पर किसी तरह के साबुन का इस्तेमाल न करें. उसे साफ करने के लिए ऐसे फेसवाश और लोशन का इस्तेमाल करें, जिस में टी ट्री तत्त्व हों. स्किन को ठंडा रखने के लिए कैलिमाइन लोशन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

– अगर सनबर्न ज्यादा होता है, तो डर्मैटोलौजिस्ट पहले ऐंटीऐलर्जी दवा देते हैं ताकि जलन व सूजन को कम किया जा सके. बर्न खत्म होने के बाद हाइड्राफेशियल से स्किन को औक्सीजन प्रदान की जाती है.

प्रिकली हीट को करें ट्रीट

गरमी के मौसम में पसीना आना स्वाभाविक है. जब पसीना चेहरे पर जमा होता है तो उस से स्किन डल तो लगती ही है, साथ ही पसीने 5के कारण छोटेछोटे दाने भी निकलने लगते हैं, जिस से स्किन में इरिटेशन होने लगती है.

प्रिकली हीट के लिए घरेलू उपाय

– प्रिकली हीट के लिए बेकिंग सोडा सब से अच्छा रहता है. 1 चम्मच बेकिंग सोडा को ठंडे पानी में मिलाएं. फिर उस में साफ कपड़ा डुबो कर प्रभावित पार्ट पर 5-10 मिनट रखा रखें. यह प्रिकली हीट के कारण हो रही खुजली और सूजन को कम करने में मदद करता है.

– प्रिकली हीट पर ठंडा पानी जल्दी असर करता है. एक कपडे़ में कुछ बर्फ के टुकड़े रख कर प्रभावित जगह पर रखें. ऐसा हर 5-6 घंटे के अंतराल में करें. ऐसा करना चकत्तों को फैलने से रोकता है और दर्द से भी आराम देता है.

– चंदन में शरीर के तापमान को कम करने की क्षमता होती है और यह तेजी से काम करता है. चंदन पाउडर और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाएं और फिर प्रभावित जगह पर लगा कर सूखने दें. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें. दिन में ऐसा 2 बार करें. काफी आराम मिलेगा. प्रिकली हीट के समय कोटन के कपड़े पहनें और डीहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी का सेवन करें.

चिकित्सीय उपचार

– प्रिकली हीट के लिए हाइड्रोफेशियल ट्रीटमैंट किया जाता है. यह 3-4 स्टैप में होता है. पहले स्किन टाइटनिंग की जाती है. उस के बाद टौक्सिन रिमूवल, फिर औक्सीजनाइजेशन और अंत में विटामिन सी इंफ्यूज किया जाता है.

रोसेसिया

रोसेसिया एक बहुत ही सामान्य स्किन समस्या है, जो आमतौर पर 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होती है. इस में नाक, गाल व चिन पर लाल चकत्ते हो जाते हैं और स्किन ड्राई हो जाती है.

रोसेसिया के लिए घरेलू उपाय

– रोसेसिया को प्राकृतिक तरीके से कम किया जा सकता है. इस के लिए 2 कप ग्रीन टी बना कर ठंडा होने के लिए फ्रिज में आधे घंटे के लिए रख दें. फिर फ्रिज से निकाल कर इस में साफ मुलायम कपड़े को गीला कर के प्रभावित स्थान पर कुछ देर रखें. काफी आराम मिलता है.

– रोसेसिया के लिए ऐप्पल मास्क भी एक प्राकृतिक उपाय है. इस के लिए ऐप्पल का छिलका उतार कर उस का पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को फेस पर लगा कर 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. इस के बाद ठंडे पानी से धो लें.

चिकित्सीय उपचार

– रोसेसिया को घरेलू उपायों से ठीक करने के अलावा कैमिकल पील, ग्लाईकोलिक पील और फोटो फेशियल के द्वारा भी ठीक किया जाता है. कैमिकल पील एक ट्रीटमैंट है, जो डैड स्किन को रिमूव कर के स्किन को स्मूद करता है. इसी तरह ग्लाईकोलिक पील में स्किन की ऊपरी सतह पर जमी गंदगी को साफ किया जाता है.

ऐक्ने की प्रौब्लम

ऐक्ने तब शुरू होते हैं जब त्वचा में तैलीय ग्रंथियां अधिक सक्रिय व अनियमित ढंग से कार्य करने लगती हैं. बहुत अधिक तैलीय ग्रंथियों के रिसाव के कारण त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं, जिस के परिणामस्वरूप ब्लैकहैड्स और ऐक्ने की समस्या उत्पन्न होती है.

घरेलू उपाय

– ऐक्ने के लिए खीरे का फेसमास्क उपयोगी रहता है. खीरा और ओटमील को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें. फिर इस पेस्ट में 1 चम्मच दही मिक्स कर के मुंहासों पर लगाएं. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें. यह फेसमास्क स्किन को रिजूवनेट करता है और ऐक्ने को कम करता है.

– ऐक्ने के लिए हलदी भी बहुत कारगर है. 2 चम्मच बेसन में थोड़ी सी हलदी, चंदन और बादाम का तेल मिला कर चेहरे पर लगाएं. 10-15 मिनट के बाद हलकाहलका रब कर के हटाएं. फिर ठंडे पानी से चेहरे को धो लें.

– शहद भी ऐक्ने पर जल्दी असर दिखाता है. शहद में नीबू का रस मिला कर चेहरे पर लगाएं. सूखने के बाद कुनकुने पानी से चेहरे को धो लें.

चिकित्सीय उपचार

– ऐक्नों के लिए कुछ खाने की दवा भी दी जाती है. आजकल अलगअलग स्किन प्रौडक्ट्स के इस्तेमाल से भी ऐक्नों को ठीक किया जा रहा है जैसे खास ऐक्ने फेसवाश, ऐक्ने बेबी क्रीम, ऐक्ने स्पौट कंसीलर. ऐक्नों के लिए ऐक्ने पील, कैमिकल पील और लेजर लाइट ट्रीटमैंट का इस्तेमाल भी किया जाता है, इन ट्रीटमैंट्स से ऐक्नों को आसानी से खत्म किया जा सकता है. सैलिसिलिक ऐसिड भी चेहरे की स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद है इसलिए सैलिसिलिक ऐसिड से बने फेसवाश और क्रीम का इस्तेमाल करें.

बौडी ओडोर

हमारे शरीर से 2 तरह का पसीना निकलता है- पहला, ऐक्राइन जो साफ और बिना दुर्गंध का होता है तथा यह पूरे शरीर से निकलता है व शरीर के तापमान को बनाए रखता है और दूसरा, ऐपोक्राइन. यह एक मोटा पदार्थ होता है जो कमर और कांख में ग्रंथियों के द्वारा निर्मित होता है. ऐपोक्राइन भी बिना दुर्गंध का होता है. लेकिन जब बैक्टीरिया का प्रभाव पड़ता है तब यह दुर्गंध देता है.

अगर गरमी में पसीने की वजह से आप के शरीर से भी दुर्गंध आती है तो आजमाएं ये उपाय:

– नीबू बैक्टीरिया को मारता है. एक ताजे नीबू को 2 भागों में काट कर अंडरआर्म्स पर रगड़ें. थोड़ी देर के लिए नीबू का रस लगा रहने दें, फिर ठंडे पानी से धो लें.

– यदि आप घर पर हैं और आप के पास कोई डियोड्रैंट नहीं है तो 1 कप पानी में थोड़ा सा हाईड्रोजन पैराक्साइड मिलाएं. फिर इस पानी में एक साफ कपड़े को गीला कर के कांख पर रगडि़ए. ऐसा करने से पसीने की दुर्गंध कम होती है.

चिकित्सीय उपाय

डियोड्रैंट और ऐंटीपर्सपिरैंट कुछ चिकित्सीय उपचार हैं, जो बौडी ओडोर को कम करते हैं. ऐंटीपर्सपिरैंट में ऐल्यूमिनियम क्लोराइड होता है, जो शरीर के द्वारा उत्पन्न पसीने को कम करता है. बोटोक्स ट्रीटमैंट के द्वारा भी पसीने को कम किया जाता है.

कुलोट्स: फ्यूजन ड्रैस का कूल लुक

क्रौप टौप के बाद अब क्रौप पैंट्स का ट्रैंड फैशन में छाया हुआ है. इन क्रौप पैंट्स को कुलोट्स के नाम से जाना जाता है. फैशन का यह अंदाज भी जुदा है. नए स्टाइल की पैंटनुमा कुलोट्स आजकल फैशन ट्रैंड की सूची में पहले पायदान पर हैं. इस की सब से बड़ी खासीयत है कि यह पैंट छोटे कद, हैल्दी, लंबी या फिर पतली हर बौडी टाइप की युवतियों पर फबती है. हो सकता है कि पहली नजर में आप इसे नापसंद कर दें, लेकिन इसे नजरअंदाज बिलकुल भी न करेंगी. यदि आप इस नए लुक वाली पैंट को ट्राई करने में हिचक रही हैं, तो शुरुआत में ऐंकल लैंथ वाली कुलोट्स लें. पहली बार इसे पहनने में अटपटा कम लगे, इस के लिए प्रिंटेड कुलोट्स लेने की जगह सिंगल और डार्क कलर मसलन, काला, नीला या भूरे रंग की कुलोट्स चुनें.

किस के साथ पहनें कुलोट्स

कुलोट्स को किसी भी टौप के साथ पेयर किया जा सकता है. यह आप पर निर्भर करता है कि आप खुद को किस लुक में देखना पसंद करेंगी. उदाहरण के तौर पर यदि आप हाई वैस्ट कुलोट्स चुनती हैं, तो इसे आप एक स्टाइलिश क्रौप टौप के साथ पेयर कर सकती हैं. इस के अतिरिक्त यदि आप ने लो वैस्ट और ऐंकल लैंथ कुलोट्स को चुना है, तो इस को नी लैंथ कुरती के साथ पहना जा सकता है. कुलोट्स पहनने का यह स्टाइल आप को वैस्टर्न ऐथनिक का फ्यूजन लुक देगा. बाजार में ए लाइन स्कर्टनुमा कुलोट्स भी मौजूद हैं, जिन्हें फौर्मल या स्टाइलिश शर्ट के साथ पेयर किया जा सकता है. फैशन ट्रैंड्स में पहले ही सब के फेवरेट बन चुके ज्वैल्ड टौप भी कुलोट्स के साथ स्टाइलअप किए जा सकते हैं.

कब और कहां पहनें

कई लैंथ, स्टाइल और पैटर्न्स में मौजूद कुलोट्स न सिर्फ स्टाइलिश लगती हैं, बल्कि इन्हें पहनना भी काफी कंफर्टेबल है. इसीलिए इन्हें किसी भी जगह आसानी से कैरी किया जा सकता है. खासतौर पर गरमी के मौसम में तो ये बहुत ही आरामदायक होती हैं. आप इन्हें डे पार्टी, नाइट आउटिंग यहां तक कि औफिस में भी पहन कर जा सकती हैं. हां, यदि आप औफिस में कुलोट्स पहनना चाहती हैं तो फौर्मल लुक वाली कुलोट्स ही चुनें और इसे फौर्मल शर्ट या टौप के साथ ही पेयर करें. फौर्मल लुक के लिए आप मोनोक्रोमैटिक कलर की कुलोट्स ट्राई करें. इन के साथ आप ब्लेजर भी पहन सकती हैं. ब्लेजर और कुलोट्स का कौंबिनेशन सुनने में भले ही आप को अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह आप को स्टाइलिश प्रोफैशनल लुक देगा.

बौलीवुड में छाया कुलोट्स  का जादू

फिल्म ‘पीकू’ में दीपिका पादुकोण को पहली बार कई दृश्यों में कुलोट्स पहने देखा गया. तब इसे नी लैंथ कुरतियों के साथ ही पेयर करने का ट्रैंड था. लेकिन अब दीपिका के अलावा आलिया भट्ट भी फिल्म ‘शानदार’ के प्रमोशन पर फौर्मल लुक वाली कुलोट्स में दिखीं. तब से कुलोट्स के साथ फैशन ऐक्सपैरिमैंट का सिलसिला शुरू हो गया. अब इस स्टाइलिश पैंट को बौलीवुड की अन्य अभिनेत्रियां भी अलगअलग इवेंट्स में अलगअलग टौप्स के साथ कैरी करते देखी जा चुकी हैं. एक फोटोशूट के दौरान सोनम कपूर को भी कौमिक प्रिंट वाली कुलोट्स में देखा गया. कई जानेमाने फैशन डिजाइनर्स कुलोट्स को फैशन इंडस्ट्री में न्यू ऐंट्री नहीं मानते. उन की मानें, तो क्युलोट्स का फैशन 70 के दशक से प्रचलित है. अब नए लुक और स्टाइल के साथ इस का कमबैक हुआ है.

कुलोट्स का इतिहास

स्कर्ट की तरह दिखने वाली कुलोट्स  वास्तव में एक शौर्ट पैंट की तरह होती है. फ्रांस के हैनरी तृतीय के शासनकाल के दौरान कुलोट्स काफी लोकप्रिय थी. इस के बाद विक्टोरियन युग में जब महिलाओं को पैंट पहनने की स्वतंत्रता चाहिए थी, उस वक्तभी स्कर्टनुमा पैंट के रूप में कुलोट्स प्रचलन में आई. तब से ले कर अब तक इस के डिजाइन, पैटर्न और स्टाइल में कई बदलाव आ चुके हैं. क्युलोट्स का फैशन पिछले वर्ष से हौट लिस्ट में शामिल हो चुका है. कुलोट्स का ही एक स्वरूप डिवाइडेड स्कर्ट है. अधिकतर भारतीय स्कूलों में लड़कियों को डिवाइडेड स्कर्ट ही यूनिफौर्म के रूप में पहननी होती है.          

ध्यान रखें

– अगर कम हाइट की महिला को कुलोट्स  पहननी हो, तो ऐंकल लैंथ का चुनाव करना चाहिए. इसे हाईहील्स या वैजिस के साथ पेयर किया जाए, तो बहुत ही स्टाइलिश लुक उभर कर आता है.

– जहां लंबी महिलाओं पर बौटम फ्लेयर लुक वाली कुलोट्स खूब जंचेगी, वहीं पतलीदुबली महिलाओं पर मिड लैंथ कुलोट्स भी स्टाइलिश लुक देंगी. कुलोट्स को टी स्ट्रैप शूज या पीप टौप के साथ भी पहना जा सकता है.

– यदि आप के पास ब्लैक कुलोट्स है तो उसे व्हाइट टैंक टौप या व्हाइट जंपर के साथ पहनें. यह कौंबिनेशन बहुत ही ट्रैंडी लुक देगा.

– प्रिंटेड कुलोट्स को कभी प्रिंटेड टौप के साथ न पहनें. उसे सिंगल कलर टौप के साथ भी पेयर करें. 

फेशियल: बढ़ती उम्र में भी ग्लो रखें बरकरार

हर उम्र में त्वचा की जरूरत अलग होती है. उसी के अनुसार ब्यूटी प्रोडक्ट्स की आवश्यकता होती है. आप अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार ही उस का ध्यान रखें, क्योंकि आप की ढलती त्वचा ही आप की बढ़ती उम्र का राज खोलती है. ऐसे में यंग लुक बरकरार रखने के लिए स्किन टैक्निकल ऐक्सपर्ट उज्मा सिद्दीकी नौनसर्जिकल फेशियल की सलाह देती हैं. इस फेशियल द्वारा आप अपने चेहरे की त्वचा को बिना सर्जरी के ही फेस लिफ्ट करा कर टाइटनिंग इफैक्ट दे यंग लुक पा सकती हैं. इस के अलावा और भी फेशियल हैं जिन से बढ़ती उम्र में भी आप चेहरे पर ग्लो पा सकती हैं:

नौनसर्जिकल फेशियल: यह फेशियल बढ़ती उम्र में ढीली हुई त्वचा और असमय पड़ने वाली झुर्रियों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह ऐलोवेरा जैसे नैचुरल तत्त्वों से बना होता है. यह बिना किसी साइड इफैक्ट के त्वचा को हाइड्रेट कर नमी को वापस लाता है. यह बिना किसी सर्जरी व इंजैक्शन के फेस की स्किन को अपलिफ्ट कराता है.

नौनसर्जिकल फेशियल कैसे करें

एक ऐलोवेरा फेशियल किट लें. इस में सभी नैचुरल प्रोडक्ट होते हैं. उस के निर्देशानुसार फेशियल शुरू करें. सब से पहले ऐक्सफौलिएटिंग क्लींजर फेस पर लगा कर 2 मिनट मसाज करें. इस से फेस अच्छी तरह क्लीन हो जाएगा. जब यह स्किन में औब्जर्व हो जाए तो कौटन से साफ कर के कंटूर मास्क ब्रश से लगा कर 15 मिनट छोड़ दें. कंटूर मास्क से पहले आंखों पर गुलाबजल से भीगी कौटन गोलाकार में लगा लें ताकि आंखें पूरी तरह कवर हो जाएं. कानों में भी कौटन लगाएं. नाक पर बटर पेपर लगाएं. मास्क फेस पर टाइटनिंग इफैक्ट देगा. 15 मिनट बाद मास्क को कौटन से साफ कर लें. फिर रिहाइड्रेट टोनर लगाएं. इस के बाद पूरे फेस पर लोशन लगा कर छोड़ दें.

इस फेशियल का आप तुरंत ही असर देखेंगी. आप की त्वचा पहले से जवां और खूबसूरत दिखेगी. इसे घर पर भी कम समय में आसानी से किया जा सकता है. अन्य फेशियल के मुकाबले यह 20 से 25 मिनट में किया जा सकता है.

इस में डे व नाइट लोशन भी उपलब्ध है. आप समय के अनुसार इन लोशन का इस्तेमाल करें और चेहरे पर ग्लो पाएं. यह हर प्रकार की स्किन के लिए बेहतर है.

बढ़ती उम्र में ग्लो के लिए फेशियल

बढ़ती उम्र में त्वचा को हाइड्रेट करने के लिए फेशियल बहुत अच्छा उपाय है. यह बढ़ती उम्र की निशानियों को रोकने का काम करता है. फेशियल द्वारा ही त्वचा की कोशिकाओं को ऐनर्जी मिलती है और वे रिजेनरेट होती हैं. मगर फेशियल कराने से पहले स्किन को जरूर जांच लें कि वह सैंसिटिव तो नहीं. अगर है तो उसी के अनुसार फेशियल का चुनाव करें.

औक्सीजन फेशियल

औक्सीजन फेशियल त्वचा को गहराई से साफ करता है. औक्सीजन फेशियल त्वचा के फ्रीरैडिकल्स से लड़ता है जोकि ऐजिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं. इस फेशियल से झुर्रियां मिटती हैं और बढ़ती उम्र का प्रभाव कम होता है. यह चेहरे को मौइश्चराइज, डिटौक्सीफाई और त्वचा की रिपेयर करता है. इस में 2 मिनट तक औक्सीजन फेशियल फेस पर स्प्रे किया जाता है. चेहरे पर फ्रैश औक्सीजन छोड़ने की प्रक्रिया के बाद त्वचा की कोशिकाओं को ऐनर्जी मिलती है. चेहरे पर शाइन आती है. रूखी त्वचा के अंदर तक नमी पहुंचती है और सूर्य की हानिकारक किरणों से हुए नुकसान से भी छुटकारा मिलता है.

अल्ट्रासैंसिटिव स्किन के लिए

चौकलेट फेशियल: जिन की त्वचा बहुत ज्यादा सैंसिटिव होती है उन के लिए चौकलेट फेशियल बहुत अच्छा माना जाता है. यह कोको ऐंटीइनफ्लेमेटरी तत्त्वों से पूर्ण होता है. त्वचा इस से हाइड्रेट हो कर सौफ्ट हो जाती है.

सैंसिटिव स्किन के लिए फेशियल

फ्रूट फेशियल: यह फेशियल प्राकृतिक होता है. फिर भी पैक लगवाने से पहले देख लें कि किसी फल से आप को ऐलर्जी तो नहीं. उस फल को छोड़ कर अन्य किसी भी फल से फेशियल करा सकती हैं. इस से त्वचा को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.

सैंडलवुड फेशियल: यह फेशियल उन के लिए सेफ है, जिन के चेहरे पर रैशेज पड़ जाते हैं. यह फेशियल घावों तथा ऐक्नों को कम करता है. इस में ऐंटीऐलर्जिक तत्त्व पाए जाते हैं, जो त्वचा की रिपेयर करते हैं. चंदन के गुणों से भरपूर यह फेशियल चेहरे पर शीतलता प्रदान करता है.

अकाई बेरी फेशियल: यह स्किन को मौइश्चराइज करता है. इस में ऐंटीऔक्सिडैंट बहुत होते हैं इसलिए यह ऐंटीऐजिंग एजेंट का काम करता है. यह स्ट्रैस को दूर करता है और चेहरे पर ग्लो लाता है.

प्लैटिनम फेशियल

प्लैटिनम फेशियल स्किन के अंदर जा कर बढ़ती उम्र की निशानियों को रोकता है. यह कोलोजन की मात्रा बढ़ा कर त्वचा की लचक को बेहतर बनाता है और सभी प्रकार की त्वचा के लिए बैस्ट है.

विटामिन सी फेशियल: यह फेशियल त्वचा में ऐंटीऔक्सिडैंट्स को बढ़ावा देता है, यह न सिर्फ सैल्स बनाता है, बल्कि फ्रीरैडिकल्स को भी हटाता है. यह धूप में झुलसी त्वचा, दागधब्बों, पिंपल्स के दागों आदि को भी कम करता है.

आइसक्यूब फेशियल: आइसक्यूब फेशियल से पोर्स में कसाव आता है और पिंपल्स से छुटकारा मिलता है. रोजाना आइस मसाज से रक्तसंचार बेहतर होता है. इस फेशियल से झुर्रियों से छुटकारा मिलता है. बर्फ के टुकड़ों को कपड़े में लपेट कर हलके हाथ से सर्कुलर मोशन में मसाज करें. आप बर्फ में किसी ऐसेंशियल औयल की कुछ बूंदें भी डाल सकती हैं. इस से सनबर्न में भी आराम मिलता है.

गोल्ड फेशियल: इस फेशियल में सोने के छोटे पार्टिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. ऐंटीबैक्टीरियल और ऐंटीऐजिंग खूबियों के कारण यह त्वचा में आसानी से औब्जर्व हो जाता है, जिस से चेहरे पर ग्लो आ जाता है.  

Hindi Story: बिदाई

Hindi Story: ‘मां मैंने ठान लिया है कि मैं अभिनेत्री ही बनूंगी. अच्छा होगा आप और पापा भी मेरे इस निर्णय में मेरा साथ दो. वैसे भी जब मैं ने निर्णय ले ही लिया है तो करूंगी तो मैं वही,’’ रूहानी का सुर सख्त था. वह शुरू से अडि़यल रही थी. बड़ा होने के साथ, जल्द से जल्द पैसा और शोहरत पाने की धुन ने उसे और भी कठोर बना दिया था. मातापिता का उस के निर्णय में साथ देने या न देने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था. जब से उस की एक सहेली ने उसे एक एजेंट से मिलवाया था और उस एजेंट ने रूहानी को टैलीविजन पर उच्च कोटि की अभिनेत्री बनवाने के सुनहरे ख्वाब दिखाए थे, तब से रूहानी लगातार वही सपना देख रही थी. वह एजेंट भी लगभग रोज ही उसे फोन करता और जल्दी नोएडा पहुंचने को कहता. रूहानी भी उसी समय अपने मातापिता से जिद करने लगती.

‘‘मैं कहती हूं जी, यदि हम रूहानी को अपने साथ, अपने पास रखना चाहते हैं, तो हमें उस का साथ देना चाहिए वरना 18 वर्ष की तो वह हो ही गई है… घर छोड़ कर चली गई तो हम क्या कर पाएंगे?’’ उस की जिद के आगे मां ने हार मान ली थी. अब वे अपनी बेटी को खोना नहीं चाहती थीं, इसलिए उस के पिता को समझाबुझा रही थीं.

‘‘क्या तुम जानती नहीं हो कि वह कैसी दुनिया है… जितनी चकाचौंध है, उतना ही तनाव भी… जितना पैसा है, उतनी ही प्रतिस्पर्धा भी. जितनी जल्दी शोहरत मिलती है, उतना ही कठिन उस शोहरत को अपने पास बनाए रखना होता है. तुम्हें लगता है कि रूहानी इतनी कठिन जिंदगी जी पाएगी? और नोएडा यहां रखा है क्या? कितनी दूर है हमारे शहर से. वहां अकेली कैसे रहेगी वह?’’ पिता अब भी राजी न थे. लेकिन वयस्क बेटी की जिद के आगे कब तक टिक पाते?

रूहानी ने अपना बोरियाबिस्तर बांधा और निकल पड़ी घर से. पटरियों पर तेजी से दौड़ती ट्रेन से खिड़की से बाहर झांकते हुए, भागते हुए पेड़ों के साथ उस के मानसपटल पर अतीत के क्षण भी दौड़ने लगे…

कैसे उस एजेंट ने रूहानी को देखते ही 2-3 टीवी धारावाहिकों की बात कह डाली थी, ‘‘अरे रूहानी, तुम एक बार नोएडा आओ तो सही, औडिशन में तुम्हारा नंबर लगाना मेरा काम है… मैं दावे से कह सकता हूं कि तुम्हारा चयन हो जाएगा. फिर तुम्हें एक मैनेजर की आवश्यकता पड़ेगी… चलो, उस का इंतजाम भी कर दूंगा. अब बस, रातोंरात स्टार बनने की तैयारी कर लो, डार्लिंग.’’

ट्रेन में अकेले नोएडा जाते हुए वह सोचती जा रही थी, ‘आज मैं इस भीड़ का हिस्सा हूं. मुझे कोई नहीं जानता. मैं भी इन लोगों में, इन्हीं की तरह खो गई हूं, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब मैं इसी भीड़ की रोल मौडल होऊंगी,’ मन ही मन मुसकराती रूहानी पर किसी का ध्यान नहीं था.

आज वाकई वह इस भीड़ का हिस्सा थी. लेकिन भविष्य किस ने देखा है? शायद इसीलिए भविष्य के सपने सजानादिखाना आसान है. बहुत सी दुकानें इसी स्वप्निल भविष्य को बेच रही हैं… बहुत से लोग दूसरों के भविष्य को दिखा कर अपना वर्तमान सुधार रहे हैं.

नोएडा पहुंचते ही रूहानी ने उस एजेंट से संपर्क साधा. फिर उसी ने रूहानी को नोएडा से सटे एक सस्ते से गांव में पीजी में एक कमरा दिलवा दिया. रूहानी के साथ वहां 3 लड़कियां और रहती थीं.

कमरे की हालत देख रूहानी के सपने थोड़े चटकने लगे. बोली, ‘‘आप ने तो कहा था कि आप मुझे रातोंरात स्टार बना दोगे, पर यहां तो…’’

‘‘डोंट बी सिली रूहानी, स्टार बनने में मेहनत लगती है… पहले पेड़ उगाओ, फिर आम खाना. खैर, छोड़ो ये फुजूल की बातें, मैं ने कल तुम्हारे लिए एक औडिशन में नंबर लगाया है. ठीक 10 बजे पहुंच जाना इस पते पर,’’ वह उसे पता लिखा कागज पकड़ा गया.

सुबहसुबह तैयार हो रूहानी निश्चित समय पर निर्धारित स्थान पहुंच गई. नई जगह, नई संस्कृति. रूहानी थोड़ा असहज अनुभव कर रही थी. वहां लंबी कतार लगी थी. रूहानी का नंबर आतेआते तीसरा पहर आ गया.

भूखीप्यासी रूहानी थकान से बेहाल थी. अपना नाम पुकारे जाने पर चेहरा थोड़ा संवार कर वह अंदर पहुंची. जो लाइनें उसे दी गई थीं, उन्हें उस ने याद कर लिया था, किंतु पहली बार कैमरे के सामने बोलने के कारण उस के चेहरे पर कोई हावभाव न आ पाए. एक रोबोट की भांति उस ने लाइनें बोल दीं. जाहिर है वह उस औडिशन में नहीं चुनी गई. एक तो अनुत्तीर्ण होने का दुख, ऊपर से एजेंट से अच्छीखासी डांट सुननी पड़ी, वह अलग. एजेंट उसे अलगअलग जगह औडीशन पर भेजता, किंतु कैमरे के सामने आते ही पता नहीं रूहानी को क्या हो जाता. इसी भागदौड़ में 3 माह गुजर गए. घर से जो पैसे लाई थी, वे खत्म होने लगे थे. साथ रह रही अन्य लड़कियों का भी यही हाल था. सभी इस रुपहली दुनिया का हिस्सा बनने आई थीं, किंतु कामयाबी किसी के भी हाथ नहीं लग रही थी.

रूहानी के चेहरे का फायदा उठाने और कैमरे के प्रति उस की झिझक मिटाने हेतु एजेंट ने पहले उस से मौडलिंग करवाने की सोची. नियत समय पर रूहानी मालवीय नगर की गलियों में स्थित मौडलिंग एजेंसी पहुंच गई. वहां भी लड़कियों की लंबी कतार. वहां का एजेंट बेशर्मी से लड़कियों के बदन को छू रहा था. हर लड़की के बदन के हर हिस्से का नाप ले रहा था और जोरजोर से उसे दूसरे लड़के को बताता जा रहा था, जो उसे एक कागज पर लड़कियों के नाम के आगे लिखता जा रहा था.

हद तो तब हुई जब उस ने रूहानी के आगे खड़ी लड़की के नितंब दबा कर पूछा, ‘‘असली हैं?’’

रूहानी के लिए यह सब अप्रत्याशित था. लेकिन कहते हैं न भट्टी में तप कर ही सोना कंचन बनता है. धीरेधीरे रूहानी भी ऐसे कल्चर की आदी हो गई. उस की झिझक खुलने लगी. उस के हावभाव, उस की भावभंगिमा में खुलापन आ गया. छोटेमोटे विज्ञापन कर कुछ पैसा भी आने लगा था. इस शहर में रहना अब रूहानी के लिए संभव होता जा रहा था.

शायद रूहानी के एजेंट ने अपना लक्ष्य पाने को सही मार्ग अपनाया था. कुछ था उस की आंखों में, उस के चेहरे में जो उस एजेंट ने भांप लिया था. रूहानी को उस ने फिर एक टीवी धारावाहिक के औडिशन हेतु भेजा. इस बार रूहानी के सपने सिर्फ हवाई नहीं थे. रूहानी को एक छोटा रोल मिल गया, लीड ऐक्ट्रैस की ननद की भूमिका निभाने का. शुरू में रूहानी को यह काम भी और कामों जैसा ही प्रतीत हुआ जैसे दफ्तर जा रही हो. उतनी ही मेहनत, वैसी ही समयसारिणी, बल्कि छुट्टियां उस से कहीं कम. न कोई शनिवार, न कोई इतवार…चाहे बुखार ही क्यों न आ जाए. दवा फांको और चलो काम पर. किंतु जैसेजैसे उस धारावाहिक की टीआरपी बढ़ने लगी, लोग उस के किरदार को पहचानने लगे. रूहानी का मकानमालिक अब उस से तमीज से पेश आता. कभीकभार उस के बच्चे, अपने मित्रों सहित रूहानी के साथ सैल्फी लेने चले आते. उसे अच्छा लगता जब उस का एजेंट उसे किसी भी वेशभूषा में बाजार जाने से मना करता, ‘‘अब तुम एक सैलिब्रिटी हो, डार्लिंग, यों उठ कर अब तुम मार्केट नहीं जा सकती हो… अपना सामान औनलाइन और्डर कर दिया करो.’’

धारावाहिक करतेकरते रूहानी को 1 साल होने को आ रहा था. इस बीच अपने मातापिता से उस का संपर्क बहुत ही कम रह गया था. क्या करती समय ही नहीं था उस के पास. जब कभी मिलना होता तब उस के मातापिता ही चले आते उस के पास. लेकिन तब भी वह उन के साथ बहुत ही कम समय व्यतीत कर पाती.

‘‘बेटा, इन अखबारों में तेरे और उस ऐक्टर के बारे में न जाने क्याक्या ऊटपटांग छपता रहता है,’’ इस बार मां ने बात छेड़ी थी, ‘‘अभी तेरी उम्र ही क्या है… और इन बदतमीजों को देखो कुछ भी छापते रहते हैं.’’

रूहानी चुप रही थी. भले ही उस की उम्र अभी केवल 19 वर्ष थी, किंतु सफलता और शोहरत का फल वह चखने लगी थी. फिर ऐसे में परिपक्वता जल्दी आ जाना क्या बड़ी बात है? सहकलाकार विनोद उसे बहुत पसंद था. हो सकता है उस की आंखों के भाव किसी पत्रकार ने पकड़ लिए हों. उड़ती चिडि़या के पंख गिनना कला जो होती है इन की. इन्हीं रिपोर्टों के चलते विनोद को रूहानी के मन की बात ज्ञात हो गई थी.

एक दिन मौका देख उस ने रूहानी को कौफी डेट पर बुलाया. दोनों को एकदूसरे का साथ पसंद आया. फिर तो अकसर वे शूटिंग के बाद मिलने लगे. कभी कौफी तो कभी डिनर, कभी पब तो कभी डिस्को. 35 की उम्र पार कर चुके विनोद के हाथ एक कमसिन सुंदरी लग गई थी.

एक रात पांचसितारा होटल के डिस्को की भीड़ में नाचतेनाचते विनोद ने अचानक रूहानी के अधरों पर अपने होंठ अंकित कर दिए. इस अप्रत्याशित घटना से रूहानी कुछ कांप उठी. लेकिन विनोद ने उस की कमर पर अपनी बांहों के घेरे को और कस दिया. फिर लगातार एक…दो…तीन… चुंबनों के बाद रूहानी भी उसी लौ में बह गई. उसी होटल में पहले से बुक कमरे में विनोद ने रूहानी को अपना बना लिया.

फिर रूहानी को विनोद का भरी भीड़ में हाथ पकड़ने या हंस कर उस के कंधे पर झूल जाने में कोई आपत्ति न रहने लगी. धीरेधीरे मीडिया में इन दोनों के प्रसंग इन की तसवीरों के साथ उछलने लगे. एजेंट के ऐतराज करने पर भी रूहानी ने एक न सुनी. लेकिन मीडिया के पूछने पर दोनों यही कहते कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं. दोनों की नजदीकियों के किस्से लोग मजे लेले कर पढ़़तेसुनते. यूनिट के अन्य कलाकार भी उन की वैनिटी वैन के अंदर खिल रही उन की दास्तां ए मुहब्बत की कहानियां सुनाते.

इस विषय में मां का फोन आने पर रूहानी उन्हें भी झिड़क देती, ‘‘क्या मां, तुम भी इन प्रैस वालों की बातों में आ जाती हो. अच्छा अब रखती हूं… मेरी शूटिंग चल रही है.’’ ‘‘सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री मां बनने वाली है. अब ज्यादा दिन तक यह रोल नहीं निभा पाएगी. तुम कहो तो उस के डाइरैक्टर से इस विषय में तुम्हारी बात चलाऊं?’’ रूहानी के एजेंट ने उसे अंदर की खबर दी, तो रूहानी ने हामी भर दी. अपने कैरियर में आगे बढ़ने से वह खुश थी.

‘‘आज का अखबार पढ़ा तुम ने, रूहानी?’’ अचानक अपनी सहअभिनेत्री मिथिला का फोन आने पर रूहानी को आश्चर्य हुआ. आखिर मिथिला की उस से सिर्फ नाम की बनती थी, मीडिया के सामने या पार्टियों में एकदूसरे के गाल पर चुंबन अंकित करने के सिवा शायद ही इन में कोई बातचीत होती हो.

‘‘अभी नहीं, टाइम नहीं मिला. वह दरअसल मुझे सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री का रोल औफर हुआ है न. उसी की तैयारी में व्यस्त थी. क्यों ऐसा क्या आया है अखबार में?’’

‘‘वह रोल तुम्हें औफर हुआ है?’’ मिथिला की हंसी की आवाज से रूहानी और भी हैरान हुई. यहां इस इंडस्ट्री में तो रोल छीनने की होड़ लगी रहती है. इस खबर से मिथिला को रोना चाहिए था, लेकिन मुझे लीड ऐक्ट्रैस का रोल मिलने पर वह हंस रही है…

‘‘शायद ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक में ‘तुम्हारे’ का किरदार विनोद की प्रेमिका के नाम ही आना लिखा है. वह दरअसल इस धारावाहिक की असली अभिनेत्री विनोद के बच्चे की मां बनने वाली है और दोनों शादी कर रहे हैं. मैं ने सोचा विनोद तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त है, तो तुम्हें तो यह खुशखबरी पता ही होगी,’’ मिथिला ने आग में घी डाला.

रूहानी का मन धुड़क उठा कि उस के साथ इतना बड़ा धोखा, विश्वासघात. उस ने तेजी से फोन जमीन पर पटक मारा. उस का मन शोक, घृणा, संताप से भर उठा. वह वहीं जमीन पर पसर गई. न जाने कितने घंटे वहीं पड़ी रही. देर शाम उस का एजेंट उस के घर के अंदर प्रविष्ट होते हुए बड़बड़ाया, ‘‘कहां हो यार रूहानी, कब से तुम्हारा फोन ट्राई कर रहा हूं,’’ फिर उस की दशा देख वह समझ गया कि खबर रूहानी तक पहुंच चुकी है. उसी ने रूहानी को वहां से उठाया, पानी पिलाया और फिर बिस्तर पर लिटाया. अगली सुबह भी एजेंट वहीं था. गुड मौर्निंग कहते हुए उस ने रूहानी को चाय का कप थमाया, ‘‘क्या हुआ डार्लिंग… ऐसा तो होता रहता है. यू डोंट नीड टु गैट सो अप्सैट.’’

‘‘रियली? तुम्हें वाकई लगता है कि मुझे अप्सैट नहीं होना चाहिए? उस कुत्ते ने मेरे साथ…’’ रूहानी फुंफकार रही थी.

‘‘देखो रूहानी, बीत गई सो बात गई. यहां काम करना है, तो चमड़ी मोटी करनी पड़ेगी. टीवी की दुनिया लाजवाब है. रातोंरात प्रसिद्धि, रातोंरात कामयाबी… कल तक तुम एक छोटे शहर की अनजान जिंदगी जीने वाली लड़की थीं, लेकिन आज तुम घरघर में जानीमानी हस्ती बन चुकी हो. तुम्हारे पास पैसा है, शोहरत है, लोग तुम्हारे आगेपीछे दौड़ते हैं… उस पर तुम्हारी उम्र ही क्या है? अभी तुम्हें सालोंसाल काम करना है. इसलिए तुम्हें अपनेआप को बहुत ज्यादा तवज्जो देनी होगी. जितना तुम आगे बढ़ती जाओगी, उतना ही लोग तुम्हें कम समझ पाएंगे और यही तुम्हारे लिए अच्छा है. तुम्हारे निर्णय केवल तुम्हारे अपने हित में होने चाहिए… न कोई पारिवारिक निर्णय और न कोई भावनात्मक फैसला. पूरी दुनिया की नजर है तुम पर. ऐसे में कमजोर नहीं पड़ सकतीं तुम. इस का समय नहीं, तुम्हारे पास,’’ एजेंट ने रूहानी को खूब समझाया.

लेकिन हर इनसान अलग मिट्टी का बना है. सब का व्यक्तित्व अलग होता है. रूहानी को ऐसे फरेब की कतई उम्मीद नहीं थी. जनवरी की सर्द हवाओं के साथ बाहर फैला घना कुहरा उस के अंदर भी जमने लगा था. बाहर का उदास, रंगहीन मौसम उस के अंदर भी पसरने लगा था. रूहानी न ढंग से खाती, न किसी बातचीत में उस का मन लगता, न मुसकराती… कई दिन लग गए उसे सामान्य होने में. किंतु समय अपना चक्र घुमाते हुए सब को अपनी धुरी पर ले ही आता है.

लेकिन इस बीच उस के हाथ से वह लीड ऐक्ट्रैस का रोल जाता रहा. अब उस के पास कोई काम नहीं था. फिर भी वह थी तो एक टीवी अभिनेत्री ही. अपना रहनसहन उसे उसी हिसाब से बरकरार रखना था. पैसे भी खत्म होते जा रहे थे. इसी बीच उस ने जो हाथ आया, वही काम करने का निश्चय किया. एजेंट की मदद से उस ने एक रिऐलिटी शो में भाग लिया. शो देश के बाहर था. रूहानी प्रसन्न थी कि इस बहाने वह विदेश घूम आएगी और कुछ पैसे भी कमा लेगी. शो में उस की मुलाकात रंजन से हुई जो उस का टीममेट था. रंजन भी एक छोटे शहर का लड़का था, जो इस रंगीली दुनिया में अपने को आजमाने आया था. अभी तक उसे सिर्फ धक्के ही मिले थे. यह उस का पहला शो था. रूहानी और रंजन की अच्छी पटने लगी. टूटे दिल को एक आसरा मिलने लगा था. रंजन और रूहानी का अच्छा तालमेल उन्हें जीत की ओर अग्रसर करता गया. आखिर उन दोनों की टीम जीत गई. अच्छाखासा पैसा मिला.

अपने देश लौटते समय हवाईजहाज में रंजन ने रूहानी का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘अपनी टीम जारी रखोगी? क्या तुम मेरा प्यार स्वीकार करोगी, रूहानी?’’ रंजन ने रूहानी को प्रपोज कर दिया.

रूहानी बेहद खुश थी. एक तो जीत, उस पर पैसा और अब प्यार भी… और क्या चाहिए किसी 21 वर्षीया को. रंजन अब तक पीजी में रहता था और रूहानी किराए के घर में रहती थी. दोनों मिलते, संगसाथ समय व्यतीत करते, फिर अपनेअपने घर लौट जाते. ‘‘रूहानी, ऐसे तो जो पैसा हम दोनों ने जीता है, वह खत्म होता चला जाएगा. इस से अच्छा है हम उसे अपने भविष्य के लिए कहीं निवेश कर दें.’’

रंजन की बात में तर्क था. अत: दोनों ने आपसी सहमति से एक घर बुक करा लिया. ‘‘तुम लोन की चिंता मत करना, तुम्हें इस झंझट में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है. कुछ राशि हमारे पास है ही और कुछ मैं पर्सनल लोन ले लूंगा. ईएमआई मैं भरता रहूंगा. बस, कागजी काररवाई करवा लेते हैं.’’

लोन लेने की आवश्यकता के कारण घर रंजन के नाम बुक हुआ.

‘‘तुम बस हमारे घर को सजाने की चिंता करो… यह तुम्हारा डिपार्टमैंट है,’’ रंजन की इन बातों से रूहानी चहक उठी थी.

रूहानी ने अपने एजेंट के द्वारा रंजन को काफी काम दिलवाया और खुद घर सजानेबसाने में व्यस्त रहने लगी. कभीकभार 1-2 भूमिका निभा लेती. लेकिन काम का बोझ और दबाव उसे अब रास न आता. अब उस का मन प्यार, घरगृहस्थी में रमने लगा था. रंजन और वह रहते भी एक ही घर में थे. आजकल का प्यार न तो सीमाएं जानता है और न ही मानता है. उन दोनों ने अभी शादी नहीं की थी, लेकिन पतिपत्नी के रिश्ते की डोर थाम चुके थे. रंजन नईनवेली दुलहन की तरह रूहानी को उठा कर कमरे में ले जाता और दोनों प्रेमरस में भीग कर आनंदित हो उठते. यों ही साथ रहते हुए, प्यार के सागर में हिचकोले खाते दोनों रिश्ते के अगले पड़ाव पर पहुंच गए. माना कि दोनों ने सोचसमझ कर यह कदम नहीं उठाया था किंतु प्यार के बीज को पनपने से कोई रोक पाया है भला? जब रूहानी को पता चला कि वह गर्भवती है, तो उस ने रंजन को बताने की सोची. थोड़ा डर भी था मन में कि पता नहीं रंजन की प्रतिक्रिया कैसी होगी.

रात को सोते समय उस ने रंजन का हाथ हौले से अपने पेट पर रख दिया. बस इतना इशारा काफी था. रंजन समझ गया. इस खुशी के मौके पर उस ने रूहानी के गाल पर अपने प्यार का चुंबन अंकित कर दिया. रूहानी प्रसन्न भी थी और संतुष्ट भी. अब वह रंजन से जल्दी से जल्दी शादी करना चाहती थी. जीवन की नाव सुखसागर में गोते लगा रही थी कि अचानक एक दिन रंजन की गैरमौजूदगी में रूहानी ने उस का फोन उठा लिया. दूसरी तरफ से एक लड़की बोल रही थी, ‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’

‘‘आप को रंजन से बात करनी है न? वह इस समय घर पर नहीं है… मार्केट गया है… गलती से फोन घर भूल गया है. आप मुझे बता दीजिए क्या काम है आप को?’’ रूहानी ने कहा.

‘‘तुम्हें बता दूं तुम हो कौन रंजन की?’’

‘‘मैं उस की गर्लफ्रैंड हूं… जल्द ही हम शादी करने वाले हैं.’’

‘‘गर्लफ्रैंड?’’ कुछ पलों की खामोशी के बाद वह बोली, ‘‘मुझे अपना पता देना प्लीज, मैं उस की पुरानी फ्रैंड हूं. उसे सरप्राइज देना चाहती हूं.’’

रूहानी ने उसे अपना पता लिखवा दिया.

बस, उसी शाम उन के प्रेम नीड़ में तूफान आ गया. अचानक वह लड़की उन के घर आ धमकी.

दरवाजा खोलते ही उस ने रंजन को एक तमाचा जड़ा और जोरजोर से लड़ने लगी, ‘‘रंजन, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे धोखा देने की? शायद तुम भूल गए कि तुम्हारे पिता मेरे डैड के मातहत हैं. इस चुड़ैल के साथ मिल कर तुम मेरे साथ चीटिंग कर रहे हो… मैं कपड़े की गुडि़या नहीं हूं. मैं रोती नहीं, रूलाती हूं, समझे?’’ लगभग चीखती हुई वह रूहानी की ओर मुड़ी. फिर उसे धक्का दे कर जमीन पर गिरा दिया. रूहानी इस तरह के बरताव के लिए तैयार न थी. वह लड़की रूहानी पर टूट पड़ी. उसे पीटने लगी.

शोर सुन कर कुछ पड़ोसी इकट्ठा हो गए. उन्होंने बड़ी मुश्किल से उस लड़की को रूहानी से अलग किया.

इस घटना से रूहानी की जिंदगी में उथलपुथल मच गई. अचानक उस का जीवन ऐसे मोड़ पर आ गया था कि आगे उसे सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा था.

दरअसल, रंजन का उस की हालत पर ध्यान न देना उसे बहुत आहत कर गया था. यह वह ठेस थी जिस ने रूहानी के सभी मौसम बदल कर ठंडे, निर्जीव और बेरंग कर दिए थे. रूहानी हर वक्त उदास रहने लगी थी. एक तो गर्भावस्था में डोलती मनोस्थिति, उस पर साथी से मिला दुर्व्यवहार. आजकल रंजन को उस की खुशी, उस के मूड से कोई फर्क नहीं पड़ता था, बल्कि आजकल वह रूहानी पर अकसर नाराज होने लगा था. रंजन के सिवा रूहानी का अपना कहने का कोई नहीं था.

अकेली रूहानी सारा दिन उदासीन पड़ी रहती. रात को जब रंजन घर लौटता तो दोनों में घमासान होता. रंजन रूहानी पर हाथ भी उठाने लगा था. अवसाद से घिरी रूहानी को आगे की राह दिखाई नहीं दे रही थी कि क्या करे कि रंजन से उस का रिश्ता फिर मजबूत हो जाए. सोचसोच कर वह और भी अवसादग्रस्त होती जा रही थी. ऐसी ही एक शाम जब रूहानी छत पर टकटकी बांधे अकेली बिस्तर पर पड़ी थी, अचानक फोन घनघना उठा. दूसरी तरफ उसी लड़की की आवाज थी.

उस ने रूहानी के फोन उठाते ही खरीखरी सुनानी शुरू कर दी, ‘‘तुम क्या सोचती हो रंजन को मुझ से छीन लोगी? रंजन मेरा है, सिर्फ मेरा. तुम्हारी जैसी कितनी आईं और गईं. लेकिन रंजन को मुझ से कोई नहीं छीन पाई. कुछ दिन इधरउधर मुंह मारने से उस का मेरे प्रति प्यार कम नहीं हो जाता, समझी? अब अपना बोरियाबिस्तर बांध और निकल जा रंजन की जिंदगी से.’’

उस लड़की की बातें सुन कर रूहानी और भी परेशान हो उठी कि क्या रंजन ने उसे धोखा दिया है? उस का उद्विग्न मन शांत नहीं हो पा रहा था. रंजन भी तो उस के किसी सवाल का जवाब नहीं देता. आखिर किस से पूछे? वह सारे घर में कलपती सी घूमने लगी.

स्वयं को उपेक्षित महसूस करती रूहानी छटपटाने लगी कि क्या करे, कैसे मुक्ति पाए इस अवसाद से? क्या फायदा इस सौंदर्य का, इस शोहरत का, जब कोई उसे प्यार ही न करे? क्या इस जीवन में उस के लिए प्यार पाना संभव नहीं? इसी उधेड़बुन में रूहानी उठी और…

अगली सुबह एक ही खबर सारे टीवी चैनलों पर बारबार दिखाई जा रही थी कि प्रसिद्ध अभिनेत्री रूहानी ने अपने घर में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली.

बस, फिर सब तरफ वही शो, उसी की चर्चा. टीवी इंडस्ट्री में रूहानी के सहकर्मी, उस के तथाकथित मित्रगण अलगअलग कहानियां बयान करने लगे. न्यूज चैनलों को एक बढि़या मुद्दा मिल गया अपनी टीआरपी बढ़ाने का. एक चैनल ने रूहानी के इस कदम का दोष रंजन के जीवन में दूसरी लड़की के प्रवेश को दिया. आधार था पड़ोसियों से की गई बातचीत, तो दूसरा चैनल कहने लगा कि रूहानी गर्भवती थी और वह रंजन पर शादी का दबाव डाल रही थी, पर वह मान नहीं रहा था, इसलिए रूहानी ने आत्महत्या कर ली.

तीसरा चैनल रूहानी के कुछ दोस्तों के बयानों के आधार पर कहने लगा कि रूहानी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि रंजन ने उस दूसरी लड़की के साथ मिल कर उस का खून किया है यानी जितने मुंह उतनी बातें.

अंतिम संस्कार के समय काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी. सहकलाकार, आम जनता और इन सब के बीच छिपे, रोतेबिलखते रूहानी के मातापिता. इतनी भीड़ देख कर कौन कह सकता था कि यहां उस का अपना कहने को, उस के मन की टोह लेने वाला कोई न था. रूहानी चली गई… शायद संवेदनशीलता का यहां कोई काम नहीं. अपने घर में जिस धन व प्रसिद्धि की खोज में रूहानी निकल पड़ी थी, वह उसे मिल तो गई, लेकिन इनसान की खोज कब रुकी है भला. धनप्रसिद्धि के पश्चात प्यार पाने की खोज, प्यार के पश्चात अपना घर बसाने की आकांक्षा… यह सूची कभी खत्म नहीं होती. Hindi Story

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