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5 समर स्किन प्रौब्लम्स और निदान

गरमी के मौसम में स्किन काफी नाजुक और संवेदनशील हो जाती है. इस मौसम में स्किन के धूप के संपर्क में रहने से स्किन संबंधी कई समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में उस के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही आप की सुंदरता को बिगाड़ सकती है. गरमी में स्किन प्रौब्लम्स से बचने के उपाय बता रही हैं यावाना ऐस्थैटिक क्लीनिक की कंसल्टैंट डर्मैटोलौजिस्ट डा. माधुरी अग्रवाल और सोहम वैलनैस क्लीनिक की ब्यूटी ऐक्सपर्ट दिव्या ओहरी:

सनबर्न

सनबर्न सूर्य की हानिकारक किरणों के अत्यधिक संपर्क में आने के कारण स्किन पर होने वाली प्रतिक्रिया है. इस के लगातार संपर्क में आने से स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है. गंभीर रूप से सनबर्न होने पर स्किन में छाले भी पड़ जाते हैं. कभीकभी स्किन छिल भी जाती है.

सनबर्न के लिए घरेलू उपाय

– सनबर्न का प्राथमिक उपचार घर से शुरू किया जा सकता है. इस के लिए ठंडे पानी से नहाना या दिन में बारबार सनबर्न से प्रभावित पार्ट पर ठंडी गीली पट्टियां लगाना जलन और दर्द को कम करने में काफी सहायक होता है.

– सनबर्न के कारण स्किन पर काले चकत्ते हो गए हैं, तो प्रभावी हिस्से पर बर्फ रगड़ने से निशान काफी हद तक कम हो जाते हैं.

– आलू दर्दनिवारक का काम करता है. यह त्वचा पर हलकी जलन, खरोंच, घाव, जलने वाली जगह पर लगने से आराम देता है. आलू को काट कर सनबर्न वाली जगह लगाने से काफी आराम मिलता है. आप चाहें तो आलू का छिलका उतार कर पेस्ट बना कर रुई से लगा सकती हैं.

– पुदीने की पत्तियों का रस निकाल कर झुलसी त्वचा पर नियमित लगाने से आराम मिलता है. इस के अलावा 1 चम्मच उरद दाल को दही के साथ पीस कर झुलसी त्वचा पर लगाने से भी राहत मिलती है.

चिकित्सीय उपचार

 विटामिन ई एक तरह का ऐंटीऔक्सिडैंट होता है, जो संक्रमण को कम करता है. सनबर्न की वजह से आप सप्लिमैंट के रूप में विटामिन ई ले सकती हैं. आप चाहें तो विटामिन ई युक्त भोजन का भी सेवन कर सकती हैं.

– स्किन पर किसी तरह के साबुन का इस्तेमाल न करें. उसे साफ करने के लिए ऐसे फेसवाश और लोशन का इस्तेमाल करें, जिस में टी ट्री तत्त्व हों. स्किन को ठंडा रखने के लिए कैलिमाइन लोशन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

– अगर सनबर्न ज्यादा होता है, तो डर्मैटोलौजिस्ट पहले ऐंटीऐलर्जी दवा देते हैं ताकि जलन व सूजन को कम किया जा सके. बर्न खत्म होने के बाद हाइड्राफेशियल से स्किन को औक्सीजन प्रदान की जाती है.

प्रिकली हीट को करें ट्रीट

गरमी के मौसम में पसीना आना स्वाभाविक है. जब पसीना चेहरे पर जमा होता है तो उस से स्किन डल तो लगती ही है, साथ ही पसीने 5के कारण छोटेछोटे दाने भी निकलने लगते हैं, जिस से स्किन में इरिटेशन होने लगती है.

प्रिकली हीट के लिए घरेलू उपाय

– प्रिकली हीट के लिए बेकिंग सोडा सब से अच्छा रहता है. 1 चम्मच बेकिंग सोडा को ठंडे पानी में मिलाएं. फिर उस में साफ कपड़ा डुबो कर प्रभावित पार्ट पर 5-10 मिनट रखा रखें. यह प्रिकली हीट के कारण हो रही खुजली और सूजन को कम करने में मदद करता है.

– प्रिकली हीट पर ठंडा पानी जल्दी असर करता है. एक कपडे़ में कुछ बर्फ के टुकड़े रख कर प्रभावित जगह पर रखें. ऐसा हर 5-6 घंटे के अंतराल में करें. ऐसा करना चकत्तों को फैलने से रोकता है और दर्द से भी आराम देता है.

– चंदन में शरीर के तापमान को कम करने की क्षमता होती है और यह तेजी से काम करता है. चंदन पाउडर और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाएं और फिर प्रभावित जगह पर लगा कर सूखने दें. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें. दिन में ऐसा 2 बार करें. काफी आराम मिलेगा. प्रिकली हीट के समय कोटन के कपड़े पहनें और डीहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी का सेवन करें.

चिकित्सीय उपचार

– प्रिकली हीट के लिए हाइड्रोफेशियल ट्रीटमैंट किया जाता है. यह 3-4 स्टैप में होता है. पहले स्किन टाइटनिंग की जाती है. उस के बाद टौक्सिन रिमूवल, फिर औक्सीजनाइजेशन और अंत में विटामिन सी इंफ्यूज किया जाता है.

रोसेसिया

रोसेसिया एक बहुत ही सामान्य स्किन समस्या है, जो आमतौर पर 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होती है. इस में नाक, गाल व चिन पर लाल चकत्ते हो जाते हैं और स्किन ड्राई हो जाती है.

रोसेसिया के लिए घरेलू उपाय

– रोसेसिया को प्राकृतिक तरीके से कम किया जा सकता है. इस के लिए 2 कप ग्रीन टी बना कर ठंडा होने के लिए फ्रिज में आधे घंटे के लिए रख दें. फिर फ्रिज से निकाल कर इस में साफ मुलायम कपड़े को गीला कर के प्रभावित स्थान पर कुछ देर रखें. काफी आराम मिलता है.

– रोसेसिया के लिए ऐप्पल मास्क भी एक प्राकृतिक उपाय है. इस के लिए ऐप्पल का छिलका उतार कर उस का पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को फेस पर लगा कर 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. इस के बाद ठंडे पानी से धो लें.

चिकित्सीय उपचार

– रोसेसिया को घरेलू उपायों से ठीक करने के अलावा कैमिकल पील, ग्लाईकोलिक पील और फोटो फेशियल के द्वारा भी ठीक किया जाता है. कैमिकल पील एक ट्रीटमैंट है, जो डैड स्किन को रिमूव कर के स्किन को स्मूद करता है. इसी तरह ग्लाईकोलिक पील में स्किन की ऊपरी सतह पर जमी गंदगी को साफ किया जाता है.

ऐक्ने की प्रौब्लम

ऐक्ने तब शुरू होते हैं जब त्वचा में तैलीय ग्रंथियां अधिक सक्रिय व अनियमित ढंग से कार्य करने लगती हैं. बहुत अधिक तैलीय ग्रंथियों के रिसाव के कारण त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं, जिस के परिणामस्वरूप ब्लैकहैड्स और ऐक्ने की समस्या उत्पन्न होती है.

घरेलू उपाय

– ऐक्ने के लिए खीरे का फेसमास्क उपयोगी रहता है. खीरा और ओटमील को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें. फिर इस पेस्ट में 1 चम्मच दही मिक्स कर के मुंहासों पर लगाएं. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें. यह फेसमास्क स्किन को रिजूवनेट करता है और ऐक्ने को कम करता है.

– ऐक्ने के लिए हलदी भी बहुत कारगर है. 2 चम्मच बेसन में थोड़ी सी हलदी, चंदन और बादाम का तेल मिला कर चेहरे पर लगाएं. 10-15 मिनट के बाद हलकाहलका रब कर के हटाएं. फिर ठंडे पानी से चेहरे को धो लें.

– शहद भी ऐक्ने पर जल्दी असर दिखाता है. शहद में नीबू का रस मिला कर चेहरे पर लगाएं. सूखने के बाद कुनकुने पानी से चेहरे को धो लें.

चिकित्सीय उपचार

– ऐक्नों के लिए कुछ खाने की दवा भी दी जाती है. आजकल अलगअलग स्किन प्रौडक्ट्स के इस्तेमाल से भी ऐक्नों को ठीक किया जा रहा है जैसे खास ऐक्ने फेसवाश, ऐक्ने बेबी क्रीम, ऐक्ने स्पौट कंसीलर. ऐक्नों के लिए ऐक्ने पील, कैमिकल पील और लेजर लाइट ट्रीटमैंट का इस्तेमाल भी किया जाता है, इन ट्रीटमैंट्स से ऐक्नों को आसानी से खत्म किया जा सकता है. सैलिसिलिक ऐसिड भी चेहरे की स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद है इसलिए सैलिसिलिक ऐसिड से बने फेसवाश और क्रीम का इस्तेमाल करें.

बौडी ओडोर

हमारे शरीर से 2 तरह का पसीना निकलता है- पहला, ऐक्राइन जो साफ और बिना दुर्गंध का होता है तथा यह पूरे शरीर से निकलता है व शरीर के तापमान को बनाए रखता है और दूसरा, ऐपोक्राइन. यह एक मोटा पदार्थ होता है जो कमर और कांख में ग्रंथियों के द्वारा निर्मित होता है. ऐपोक्राइन भी बिना दुर्गंध का होता है. लेकिन जब बैक्टीरिया का प्रभाव पड़ता है तब यह दुर्गंध देता है.

अगर गरमी में पसीने की वजह से आप के शरीर से भी दुर्गंध आती है तो आजमाएं ये उपाय:

– नीबू बैक्टीरिया को मारता है. एक ताजे नीबू को 2 भागों में काट कर अंडरआर्म्स पर रगड़ें. थोड़ी देर के लिए नीबू का रस लगा रहने दें, फिर ठंडे पानी से धो लें.

– यदि आप घर पर हैं और आप के पास कोई डियोड्रैंट नहीं है तो 1 कप पानी में थोड़ा सा हाईड्रोजन पैराक्साइड मिलाएं. फिर इस पानी में एक साफ कपड़े को गीला कर के कांख पर रगडि़ए. ऐसा करने से पसीने की दुर्गंध कम होती है.

चिकित्सीय उपाय

डियोड्रैंट और ऐंटीपर्सपिरैंट कुछ चिकित्सीय उपचार हैं, जो बौडी ओडोर को कम करते हैं. ऐंटीपर्सपिरैंट में ऐल्यूमिनियम क्लोराइड होता है, जो शरीर के द्वारा उत्पन्न पसीने को कम करता है. बोटोक्स ट्रीटमैंट के द्वारा भी पसीने को कम किया जाता है.

कुलोट्स: फ्यूजन ड्रैस का कूल लुक

क्रौप टौप के बाद अब क्रौप पैंट्स का ट्रैंड फैशन में छाया हुआ है. इन क्रौप पैंट्स को कुलोट्स के नाम से जाना जाता है. फैशन का यह अंदाज भी जुदा है. नए स्टाइल की पैंटनुमा कुलोट्स आजकल फैशन ट्रैंड की सूची में पहले पायदान पर हैं. इस की सब से बड़ी खासीयत है कि यह पैंट छोटे कद, हैल्दी, लंबी या फिर पतली हर बौडी टाइप की युवतियों पर फबती है. हो सकता है कि पहली नजर में आप इसे नापसंद कर दें, लेकिन इसे नजरअंदाज बिलकुल भी न करेंगी. यदि आप इस नए लुक वाली पैंट को ट्राई करने में हिचक रही हैं, तो शुरुआत में ऐंकल लैंथ वाली कुलोट्स लें. पहली बार इसे पहनने में अटपटा कम लगे, इस के लिए प्रिंटेड कुलोट्स लेने की जगह सिंगल और डार्क कलर मसलन, काला, नीला या भूरे रंग की कुलोट्स चुनें.

किस के साथ पहनें कुलोट्स

कुलोट्स को किसी भी टौप के साथ पेयर किया जा सकता है. यह आप पर निर्भर करता है कि आप खुद को किस लुक में देखना पसंद करेंगी. उदाहरण के तौर पर यदि आप हाई वैस्ट कुलोट्स चुनती हैं, तो इसे आप एक स्टाइलिश क्रौप टौप के साथ पेयर कर सकती हैं. इस के अतिरिक्त यदि आप ने लो वैस्ट और ऐंकल लैंथ कुलोट्स को चुना है, तो इस को नी लैंथ कुरती के साथ पहना जा सकता है. कुलोट्स पहनने का यह स्टाइल आप को वैस्टर्न ऐथनिक का फ्यूजन लुक देगा. बाजार में ए लाइन स्कर्टनुमा कुलोट्स भी मौजूद हैं, जिन्हें फौर्मल या स्टाइलिश शर्ट के साथ पेयर किया जा सकता है. फैशन ट्रैंड्स में पहले ही सब के फेवरेट बन चुके ज्वैल्ड टौप भी कुलोट्स के साथ स्टाइलअप किए जा सकते हैं.

कब और कहां पहनें

कई लैंथ, स्टाइल और पैटर्न्स में मौजूद कुलोट्स न सिर्फ स्टाइलिश लगती हैं, बल्कि इन्हें पहनना भी काफी कंफर्टेबल है. इसीलिए इन्हें किसी भी जगह आसानी से कैरी किया जा सकता है. खासतौर पर गरमी के मौसम में तो ये बहुत ही आरामदायक होती हैं. आप इन्हें डे पार्टी, नाइट आउटिंग यहां तक कि औफिस में भी पहन कर जा सकती हैं. हां, यदि आप औफिस में कुलोट्स पहनना चाहती हैं तो फौर्मल लुक वाली कुलोट्स ही चुनें और इसे फौर्मल शर्ट या टौप के साथ ही पेयर करें. फौर्मल लुक के लिए आप मोनोक्रोमैटिक कलर की कुलोट्स ट्राई करें. इन के साथ आप ब्लेजर भी पहन सकती हैं. ब्लेजर और कुलोट्स का कौंबिनेशन सुनने में भले ही आप को अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह आप को स्टाइलिश प्रोफैशनल लुक देगा.

बौलीवुड में छाया कुलोट्स  का जादू

फिल्म ‘पीकू’ में दीपिका पादुकोण को पहली बार कई दृश्यों में कुलोट्स पहने देखा गया. तब इसे नी लैंथ कुरतियों के साथ ही पेयर करने का ट्रैंड था. लेकिन अब दीपिका के अलावा आलिया भट्ट भी फिल्म ‘शानदार’ के प्रमोशन पर फौर्मल लुक वाली कुलोट्स में दिखीं. तब से कुलोट्स के साथ फैशन ऐक्सपैरिमैंट का सिलसिला शुरू हो गया. अब इस स्टाइलिश पैंट को बौलीवुड की अन्य अभिनेत्रियां भी अलगअलग इवेंट्स में अलगअलग टौप्स के साथ कैरी करते देखी जा चुकी हैं. एक फोटोशूट के दौरान सोनम कपूर को भी कौमिक प्रिंट वाली कुलोट्स में देखा गया. कई जानेमाने फैशन डिजाइनर्स कुलोट्स को फैशन इंडस्ट्री में न्यू ऐंट्री नहीं मानते. उन की मानें, तो क्युलोट्स का फैशन 70 के दशक से प्रचलित है. अब नए लुक और स्टाइल के साथ इस का कमबैक हुआ है.

कुलोट्स का इतिहास

स्कर्ट की तरह दिखने वाली कुलोट्स  वास्तव में एक शौर्ट पैंट की तरह होती है. फ्रांस के हैनरी तृतीय के शासनकाल के दौरान कुलोट्स काफी लोकप्रिय थी. इस के बाद विक्टोरियन युग में जब महिलाओं को पैंट पहनने की स्वतंत्रता चाहिए थी, उस वक्तभी स्कर्टनुमा पैंट के रूप में कुलोट्स प्रचलन में आई. तब से ले कर अब तक इस के डिजाइन, पैटर्न और स्टाइल में कई बदलाव आ चुके हैं. क्युलोट्स का फैशन पिछले वर्ष से हौट लिस्ट में शामिल हो चुका है. कुलोट्स का ही एक स्वरूप डिवाइडेड स्कर्ट है. अधिकतर भारतीय स्कूलों में लड़कियों को डिवाइडेड स्कर्ट ही यूनिफौर्म के रूप में पहननी होती है.          

ध्यान रखें

– अगर कम हाइट की महिला को कुलोट्स  पहननी हो, तो ऐंकल लैंथ का चुनाव करना चाहिए. इसे हाईहील्स या वैजिस के साथ पेयर किया जाए, तो बहुत ही स्टाइलिश लुक उभर कर आता है.

– जहां लंबी महिलाओं पर बौटम फ्लेयर लुक वाली कुलोट्स खूब जंचेगी, वहीं पतलीदुबली महिलाओं पर मिड लैंथ कुलोट्स भी स्टाइलिश लुक देंगी. कुलोट्स को टी स्ट्रैप शूज या पीप टौप के साथ भी पहना जा सकता है.

– यदि आप के पास ब्लैक कुलोट्स है तो उसे व्हाइट टैंक टौप या व्हाइट जंपर के साथ पहनें. यह कौंबिनेशन बहुत ही ट्रैंडी लुक देगा.

– प्रिंटेड कुलोट्स को कभी प्रिंटेड टौप के साथ न पहनें. उसे सिंगल कलर टौप के साथ भी पेयर करें. 

फेशियल: बढ़ती उम्र में भी ग्लो रखें बरकरार

हर उम्र में त्वचा की जरूरत अलग होती है. उसी के अनुसार ब्यूटी प्रोडक्ट्स की आवश्यकता होती है. आप अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार ही उस का ध्यान रखें, क्योंकि आप की ढलती त्वचा ही आप की बढ़ती उम्र का राज खोलती है. ऐसे में यंग लुक बरकरार रखने के लिए स्किन टैक्निकल ऐक्सपर्ट उज्मा सिद्दीकी नौनसर्जिकल फेशियल की सलाह देती हैं. इस फेशियल द्वारा आप अपने चेहरे की त्वचा को बिना सर्जरी के ही फेस लिफ्ट करा कर टाइटनिंग इफैक्ट दे यंग लुक पा सकती हैं. इस के अलावा और भी फेशियल हैं जिन से बढ़ती उम्र में भी आप चेहरे पर ग्लो पा सकती हैं:

नौनसर्जिकल फेशियल: यह फेशियल बढ़ती उम्र में ढीली हुई त्वचा और असमय पड़ने वाली झुर्रियों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह ऐलोवेरा जैसे नैचुरल तत्त्वों से बना होता है. यह बिना किसी साइड इफैक्ट के त्वचा को हाइड्रेट कर नमी को वापस लाता है. यह बिना किसी सर्जरी व इंजैक्शन के फेस की स्किन को अपलिफ्ट कराता है.

नौनसर्जिकल फेशियल कैसे करें

एक ऐलोवेरा फेशियल किट लें. इस में सभी नैचुरल प्रोडक्ट होते हैं. उस के निर्देशानुसार फेशियल शुरू करें. सब से पहले ऐक्सफौलिएटिंग क्लींजर फेस पर लगा कर 2 मिनट मसाज करें. इस से फेस अच्छी तरह क्लीन हो जाएगा. जब यह स्किन में औब्जर्व हो जाए तो कौटन से साफ कर के कंटूर मास्क ब्रश से लगा कर 15 मिनट छोड़ दें. कंटूर मास्क से पहले आंखों पर गुलाबजल से भीगी कौटन गोलाकार में लगा लें ताकि आंखें पूरी तरह कवर हो जाएं. कानों में भी कौटन लगाएं. नाक पर बटर पेपर लगाएं. मास्क फेस पर टाइटनिंग इफैक्ट देगा. 15 मिनट बाद मास्क को कौटन से साफ कर लें. फिर रिहाइड्रेट टोनर लगाएं. इस के बाद पूरे फेस पर लोशन लगा कर छोड़ दें.

इस फेशियल का आप तुरंत ही असर देखेंगी. आप की त्वचा पहले से जवां और खूबसूरत दिखेगी. इसे घर पर भी कम समय में आसानी से किया जा सकता है. अन्य फेशियल के मुकाबले यह 20 से 25 मिनट में किया जा सकता है.

इस में डे व नाइट लोशन भी उपलब्ध है. आप समय के अनुसार इन लोशन का इस्तेमाल करें और चेहरे पर ग्लो पाएं. यह हर प्रकार की स्किन के लिए बेहतर है.

बढ़ती उम्र में ग्लो के लिए फेशियल

बढ़ती उम्र में त्वचा को हाइड्रेट करने के लिए फेशियल बहुत अच्छा उपाय है. यह बढ़ती उम्र की निशानियों को रोकने का काम करता है. फेशियल द्वारा ही त्वचा की कोशिकाओं को ऐनर्जी मिलती है और वे रिजेनरेट होती हैं. मगर फेशियल कराने से पहले स्किन को जरूर जांच लें कि वह सैंसिटिव तो नहीं. अगर है तो उसी के अनुसार फेशियल का चुनाव करें.

औक्सीजन फेशियल

औक्सीजन फेशियल त्वचा को गहराई से साफ करता है. औक्सीजन फेशियल त्वचा के फ्रीरैडिकल्स से लड़ता है जोकि ऐजिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं. इस फेशियल से झुर्रियां मिटती हैं और बढ़ती उम्र का प्रभाव कम होता है. यह चेहरे को मौइश्चराइज, डिटौक्सीफाई और त्वचा की रिपेयर करता है. इस में 2 मिनट तक औक्सीजन फेशियल फेस पर स्प्रे किया जाता है. चेहरे पर फ्रैश औक्सीजन छोड़ने की प्रक्रिया के बाद त्वचा की कोशिकाओं को ऐनर्जी मिलती है. चेहरे पर शाइन आती है. रूखी त्वचा के अंदर तक नमी पहुंचती है और सूर्य की हानिकारक किरणों से हुए नुकसान से भी छुटकारा मिलता है.

अल्ट्रासैंसिटिव स्किन के लिए

चौकलेट फेशियल: जिन की त्वचा बहुत ज्यादा सैंसिटिव होती है उन के लिए चौकलेट फेशियल बहुत अच्छा माना जाता है. यह कोको ऐंटीइनफ्लेमेटरी तत्त्वों से पूर्ण होता है. त्वचा इस से हाइड्रेट हो कर सौफ्ट हो जाती है.

सैंसिटिव स्किन के लिए फेशियल

फ्रूट फेशियल: यह फेशियल प्राकृतिक होता है. फिर भी पैक लगवाने से पहले देख लें कि किसी फल से आप को ऐलर्जी तो नहीं. उस फल को छोड़ कर अन्य किसी भी फल से फेशियल करा सकती हैं. इस से त्वचा को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.

सैंडलवुड फेशियल: यह फेशियल उन के लिए सेफ है, जिन के चेहरे पर रैशेज पड़ जाते हैं. यह फेशियल घावों तथा ऐक्नों को कम करता है. इस में ऐंटीऐलर्जिक तत्त्व पाए जाते हैं, जो त्वचा की रिपेयर करते हैं. चंदन के गुणों से भरपूर यह फेशियल चेहरे पर शीतलता प्रदान करता है.

अकाई बेरी फेशियल: यह स्किन को मौइश्चराइज करता है. इस में ऐंटीऔक्सिडैंट बहुत होते हैं इसलिए यह ऐंटीऐजिंग एजेंट का काम करता है. यह स्ट्रैस को दूर करता है और चेहरे पर ग्लो लाता है.

प्लैटिनम फेशियल

प्लैटिनम फेशियल स्किन के अंदर जा कर बढ़ती उम्र की निशानियों को रोकता है. यह कोलोजन की मात्रा बढ़ा कर त्वचा की लचक को बेहतर बनाता है और सभी प्रकार की त्वचा के लिए बैस्ट है.

विटामिन सी फेशियल: यह फेशियल त्वचा में ऐंटीऔक्सिडैंट्स को बढ़ावा देता है, यह न सिर्फ सैल्स बनाता है, बल्कि फ्रीरैडिकल्स को भी हटाता है. यह धूप में झुलसी त्वचा, दागधब्बों, पिंपल्स के दागों आदि को भी कम करता है.

आइसक्यूब फेशियल: आइसक्यूब फेशियल से पोर्स में कसाव आता है और पिंपल्स से छुटकारा मिलता है. रोजाना आइस मसाज से रक्तसंचार बेहतर होता है. इस फेशियल से झुर्रियों से छुटकारा मिलता है. बर्फ के टुकड़ों को कपड़े में लपेट कर हलके हाथ से सर्कुलर मोशन में मसाज करें. आप बर्फ में किसी ऐसेंशियल औयल की कुछ बूंदें भी डाल सकती हैं. इस से सनबर्न में भी आराम मिलता है.

गोल्ड फेशियल: इस फेशियल में सोने के छोटे पार्टिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. ऐंटीबैक्टीरियल और ऐंटीऐजिंग खूबियों के कारण यह त्वचा में आसानी से औब्जर्व हो जाता है, जिस से चेहरे पर ग्लो आ जाता है.  

Hindi Story: बिदाई

Hindi Story: ‘मां मैंने ठान लिया है कि मैं अभिनेत्री ही बनूंगी. अच्छा होगा आप और पापा भी मेरे इस निर्णय में मेरा साथ दो. वैसे भी जब मैं ने निर्णय ले ही लिया है तो करूंगी तो मैं वही,’’ रूहानी का सुर सख्त था. वह शुरू से अडि़यल रही थी. बड़ा होने के साथ, जल्द से जल्द पैसा और शोहरत पाने की धुन ने उसे और भी कठोर बना दिया था. मातापिता का उस के निर्णय में साथ देने या न देने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था. जब से उस की एक सहेली ने उसे एक एजेंट से मिलवाया था और उस एजेंट ने रूहानी को टैलीविजन पर उच्च कोटि की अभिनेत्री बनवाने के सुनहरे ख्वाब दिखाए थे, तब से रूहानी लगातार वही सपना देख रही थी. वह एजेंट भी लगभग रोज ही उसे फोन करता और जल्दी नोएडा पहुंचने को कहता. रूहानी भी उसी समय अपने मातापिता से जिद करने लगती.

‘‘मैं कहती हूं जी, यदि हम रूहानी को अपने साथ, अपने पास रखना चाहते हैं, तो हमें उस का साथ देना चाहिए वरना 18 वर्ष की तो वह हो ही गई है… घर छोड़ कर चली गई तो हम क्या कर पाएंगे?’’ उस की जिद के आगे मां ने हार मान ली थी. अब वे अपनी बेटी को खोना नहीं चाहती थीं, इसलिए उस के पिता को समझाबुझा रही थीं.

‘‘क्या तुम जानती नहीं हो कि वह कैसी दुनिया है… जितनी चकाचौंध है, उतना ही तनाव भी… जितना पैसा है, उतनी ही प्रतिस्पर्धा भी. जितनी जल्दी शोहरत मिलती है, उतना ही कठिन उस शोहरत को अपने पास बनाए रखना होता है. तुम्हें लगता है कि रूहानी इतनी कठिन जिंदगी जी पाएगी? और नोएडा यहां रखा है क्या? कितनी दूर है हमारे शहर से. वहां अकेली कैसे रहेगी वह?’’ पिता अब भी राजी न थे. लेकिन वयस्क बेटी की जिद के आगे कब तक टिक पाते?

रूहानी ने अपना बोरियाबिस्तर बांधा और निकल पड़ी घर से. पटरियों पर तेजी से दौड़ती ट्रेन से खिड़की से बाहर झांकते हुए, भागते हुए पेड़ों के साथ उस के मानसपटल पर अतीत के क्षण भी दौड़ने लगे…

कैसे उस एजेंट ने रूहानी को देखते ही 2-3 टीवी धारावाहिकों की बात कह डाली थी, ‘‘अरे रूहानी, तुम एक बार नोएडा आओ तो सही, औडिशन में तुम्हारा नंबर लगाना मेरा काम है… मैं दावे से कह सकता हूं कि तुम्हारा चयन हो जाएगा. फिर तुम्हें एक मैनेजर की आवश्यकता पड़ेगी… चलो, उस का इंतजाम भी कर दूंगा. अब बस, रातोंरात स्टार बनने की तैयारी कर लो, डार्लिंग.’’

ट्रेन में अकेले नोएडा जाते हुए वह सोचती जा रही थी, ‘आज मैं इस भीड़ का हिस्सा हूं. मुझे कोई नहीं जानता. मैं भी इन लोगों में, इन्हीं की तरह खो गई हूं, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब मैं इसी भीड़ की रोल मौडल होऊंगी,’ मन ही मन मुसकराती रूहानी पर किसी का ध्यान नहीं था.

आज वाकई वह इस भीड़ का हिस्सा थी. लेकिन भविष्य किस ने देखा है? शायद इसीलिए भविष्य के सपने सजानादिखाना आसान है. बहुत सी दुकानें इसी स्वप्निल भविष्य को बेच रही हैं… बहुत से लोग दूसरों के भविष्य को दिखा कर अपना वर्तमान सुधार रहे हैं.

नोएडा पहुंचते ही रूहानी ने उस एजेंट से संपर्क साधा. फिर उसी ने रूहानी को नोएडा से सटे एक सस्ते से गांव में पीजी में एक कमरा दिलवा दिया. रूहानी के साथ वहां 3 लड़कियां और रहती थीं.

कमरे की हालत देख रूहानी के सपने थोड़े चटकने लगे. बोली, ‘‘आप ने तो कहा था कि आप मुझे रातोंरात स्टार बना दोगे, पर यहां तो…’’

‘‘डोंट बी सिली रूहानी, स्टार बनने में मेहनत लगती है… पहले पेड़ उगाओ, फिर आम खाना. खैर, छोड़ो ये फुजूल की बातें, मैं ने कल तुम्हारे लिए एक औडिशन में नंबर लगाया है. ठीक 10 बजे पहुंच जाना इस पते पर,’’ वह उसे पता लिखा कागज पकड़ा गया.

सुबहसुबह तैयार हो रूहानी निश्चित समय पर निर्धारित स्थान पहुंच गई. नई जगह, नई संस्कृति. रूहानी थोड़ा असहज अनुभव कर रही थी. वहां लंबी कतार लगी थी. रूहानी का नंबर आतेआते तीसरा पहर आ गया.

भूखीप्यासी रूहानी थकान से बेहाल थी. अपना नाम पुकारे जाने पर चेहरा थोड़ा संवार कर वह अंदर पहुंची. जो लाइनें उसे दी गई थीं, उन्हें उस ने याद कर लिया था, किंतु पहली बार कैमरे के सामने बोलने के कारण उस के चेहरे पर कोई हावभाव न आ पाए. एक रोबोट की भांति उस ने लाइनें बोल दीं. जाहिर है वह उस औडिशन में नहीं चुनी गई. एक तो अनुत्तीर्ण होने का दुख, ऊपर से एजेंट से अच्छीखासी डांट सुननी पड़ी, वह अलग. एजेंट उसे अलगअलग जगह औडीशन पर भेजता, किंतु कैमरे के सामने आते ही पता नहीं रूहानी को क्या हो जाता. इसी भागदौड़ में 3 माह गुजर गए. घर से जो पैसे लाई थी, वे खत्म होने लगे थे. साथ रह रही अन्य लड़कियों का भी यही हाल था. सभी इस रुपहली दुनिया का हिस्सा बनने आई थीं, किंतु कामयाबी किसी के भी हाथ नहीं लग रही थी.

रूहानी के चेहरे का फायदा उठाने और कैमरे के प्रति उस की झिझक मिटाने हेतु एजेंट ने पहले उस से मौडलिंग करवाने की सोची. नियत समय पर रूहानी मालवीय नगर की गलियों में स्थित मौडलिंग एजेंसी पहुंच गई. वहां भी लड़कियों की लंबी कतार. वहां का एजेंट बेशर्मी से लड़कियों के बदन को छू रहा था. हर लड़की के बदन के हर हिस्से का नाप ले रहा था और जोरजोर से उसे दूसरे लड़के को बताता जा रहा था, जो उसे एक कागज पर लड़कियों के नाम के आगे लिखता जा रहा था.

हद तो तब हुई जब उस ने रूहानी के आगे खड़ी लड़की के नितंब दबा कर पूछा, ‘‘असली हैं?’’

रूहानी के लिए यह सब अप्रत्याशित था. लेकिन कहते हैं न भट्टी में तप कर ही सोना कंचन बनता है. धीरेधीरे रूहानी भी ऐसे कल्चर की आदी हो गई. उस की झिझक खुलने लगी. उस के हावभाव, उस की भावभंगिमा में खुलापन आ गया. छोटेमोटे विज्ञापन कर कुछ पैसा भी आने लगा था. इस शहर में रहना अब रूहानी के लिए संभव होता जा रहा था.

शायद रूहानी के एजेंट ने अपना लक्ष्य पाने को सही मार्ग अपनाया था. कुछ था उस की आंखों में, उस के चेहरे में जो उस एजेंट ने भांप लिया था. रूहानी को उस ने फिर एक टीवी धारावाहिक के औडिशन हेतु भेजा. इस बार रूहानी के सपने सिर्फ हवाई नहीं थे. रूहानी को एक छोटा रोल मिल गया, लीड ऐक्ट्रैस की ननद की भूमिका निभाने का. शुरू में रूहानी को यह काम भी और कामों जैसा ही प्रतीत हुआ जैसे दफ्तर जा रही हो. उतनी ही मेहनत, वैसी ही समयसारिणी, बल्कि छुट्टियां उस से कहीं कम. न कोई शनिवार, न कोई इतवार…चाहे बुखार ही क्यों न आ जाए. दवा फांको और चलो काम पर. किंतु जैसेजैसे उस धारावाहिक की टीआरपी बढ़ने लगी, लोग उस के किरदार को पहचानने लगे. रूहानी का मकानमालिक अब उस से तमीज से पेश आता. कभीकभार उस के बच्चे, अपने मित्रों सहित रूहानी के साथ सैल्फी लेने चले आते. उसे अच्छा लगता जब उस का एजेंट उसे किसी भी वेशभूषा में बाजार जाने से मना करता, ‘‘अब तुम एक सैलिब्रिटी हो, डार्लिंग, यों उठ कर अब तुम मार्केट नहीं जा सकती हो… अपना सामान औनलाइन और्डर कर दिया करो.’’

धारावाहिक करतेकरते रूहानी को 1 साल होने को आ रहा था. इस बीच अपने मातापिता से उस का संपर्क बहुत ही कम रह गया था. क्या करती समय ही नहीं था उस के पास. जब कभी मिलना होता तब उस के मातापिता ही चले आते उस के पास. लेकिन तब भी वह उन के साथ बहुत ही कम समय व्यतीत कर पाती.

‘‘बेटा, इन अखबारों में तेरे और उस ऐक्टर के बारे में न जाने क्याक्या ऊटपटांग छपता रहता है,’’ इस बार मां ने बात छेड़ी थी, ‘‘अभी तेरी उम्र ही क्या है… और इन बदतमीजों को देखो कुछ भी छापते रहते हैं.’’

रूहानी चुप रही थी. भले ही उस की उम्र अभी केवल 19 वर्ष थी, किंतु सफलता और शोहरत का फल वह चखने लगी थी. फिर ऐसे में परिपक्वता जल्दी आ जाना क्या बड़ी बात है? सहकलाकार विनोद उसे बहुत पसंद था. हो सकता है उस की आंखों के भाव किसी पत्रकार ने पकड़ लिए हों. उड़ती चिडि़या के पंख गिनना कला जो होती है इन की. इन्हीं रिपोर्टों के चलते विनोद को रूहानी के मन की बात ज्ञात हो गई थी.

एक दिन मौका देख उस ने रूहानी को कौफी डेट पर बुलाया. दोनों को एकदूसरे का साथ पसंद आया. फिर तो अकसर वे शूटिंग के बाद मिलने लगे. कभी कौफी तो कभी डिनर, कभी पब तो कभी डिस्को. 35 की उम्र पार कर चुके विनोद के हाथ एक कमसिन सुंदरी लग गई थी.

एक रात पांचसितारा होटल के डिस्को की भीड़ में नाचतेनाचते विनोद ने अचानक रूहानी के अधरों पर अपने होंठ अंकित कर दिए. इस अप्रत्याशित घटना से रूहानी कुछ कांप उठी. लेकिन विनोद ने उस की कमर पर अपनी बांहों के घेरे को और कस दिया. फिर लगातार एक…दो…तीन… चुंबनों के बाद रूहानी भी उसी लौ में बह गई. उसी होटल में पहले से बुक कमरे में विनोद ने रूहानी को अपना बना लिया.

फिर रूहानी को विनोद का भरी भीड़ में हाथ पकड़ने या हंस कर उस के कंधे पर झूल जाने में कोई आपत्ति न रहने लगी. धीरेधीरे मीडिया में इन दोनों के प्रसंग इन की तसवीरों के साथ उछलने लगे. एजेंट के ऐतराज करने पर भी रूहानी ने एक न सुनी. लेकिन मीडिया के पूछने पर दोनों यही कहते कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं. दोनों की नजदीकियों के किस्से लोग मजे लेले कर पढ़़तेसुनते. यूनिट के अन्य कलाकार भी उन की वैनिटी वैन के अंदर खिल रही उन की दास्तां ए मुहब्बत की कहानियां सुनाते.

इस विषय में मां का फोन आने पर रूहानी उन्हें भी झिड़क देती, ‘‘क्या मां, तुम भी इन प्रैस वालों की बातों में आ जाती हो. अच्छा अब रखती हूं… मेरी शूटिंग चल रही है.’’ ‘‘सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री मां बनने वाली है. अब ज्यादा दिन तक यह रोल नहीं निभा पाएगी. तुम कहो तो उस के डाइरैक्टर से इस विषय में तुम्हारी बात चलाऊं?’’ रूहानी के एजेंट ने उसे अंदर की खबर दी, तो रूहानी ने हामी भर दी. अपने कैरियर में आगे बढ़ने से वह खुश थी.

‘‘आज का अखबार पढ़ा तुम ने, रूहानी?’’ अचानक अपनी सहअभिनेत्री मिथिला का फोन आने पर रूहानी को आश्चर्य हुआ. आखिर मिथिला की उस से सिर्फ नाम की बनती थी, मीडिया के सामने या पार्टियों में एकदूसरे के गाल पर चुंबन अंकित करने के सिवा शायद ही इन में कोई बातचीत होती हो.

‘‘अभी नहीं, टाइम नहीं मिला. वह दरअसल मुझे सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री का रोल औफर हुआ है न. उसी की तैयारी में व्यस्त थी. क्यों ऐसा क्या आया है अखबार में?’’

‘‘वह रोल तुम्हें औफर हुआ है?’’ मिथिला की हंसी की आवाज से रूहानी और भी हैरान हुई. यहां इस इंडस्ट्री में तो रोल छीनने की होड़ लगी रहती है. इस खबर से मिथिला को रोना चाहिए था, लेकिन मुझे लीड ऐक्ट्रैस का रोल मिलने पर वह हंस रही है…

‘‘शायद ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक में ‘तुम्हारे’ का किरदार विनोद की प्रेमिका के नाम ही आना लिखा है. वह दरअसल इस धारावाहिक की असली अभिनेत्री विनोद के बच्चे की मां बनने वाली है और दोनों शादी कर रहे हैं. मैं ने सोचा विनोद तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त है, तो तुम्हें तो यह खुशखबरी पता ही होगी,’’ मिथिला ने आग में घी डाला.

रूहानी का मन धुड़क उठा कि उस के साथ इतना बड़ा धोखा, विश्वासघात. उस ने तेजी से फोन जमीन पर पटक मारा. उस का मन शोक, घृणा, संताप से भर उठा. वह वहीं जमीन पर पसर गई. न जाने कितने घंटे वहीं पड़ी रही. देर शाम उस का एजेंट उस के घर के अंदर प्रविष्ट होते हुए बड़बड़ाया, ‘‘कहां हो यार रूहानी, कब से तुम्हारा फोन ट्राई कर रहा हूं,’’ फिर उस की दशा देख वह समझ गया कि खबर रूहानी तक पहुंच चुकी है. उसी ने रूहानी को वहां से उठाया, पानी पिलाया और फिर बिस्तर पर लिटाया. अगली सुबह भी एजेंट वहीं था. गुड मौर्निंग कहते हुए उस ने रूहानी को चाय का कप थमाया, ‘‘क्या हुआ डार्लिंग… ऐसा तो होता रहता है. यू डोंट नीड टु गैट सो अप्सैट.’’

‘‘रियली? तुम्हें वाकई लगता है कि मुझे अप्सैट नहीं होना चाहिए? उस कुत्ते ने मेरे साथ…’’ रूहानी फुंफकार रही थी.

‘‘देखो रूहानी, बीत गई सो बात गई. यहां काम करना है, तो चमड़ी मोटी करनी पड़ेगी. टीवी की दुनिया लाजवाब है. रातोंरात प्रसिद्धि, रातोंरात कामयाबी… कल तक तुम एक छोटे शहर की अनजान जिंदगी जीने वाली लड़की थीं, लेकिन आज तुम घरघर में जानीमानी हस्ती बन चुकी हो. तुम्हारे पास पैसा है, शोहरत है, लोग तुम्हारे आगेपीछे दौड़ते हैं… उस पर तुम्हारी उम्र ही क्या है? अभी तुम्हें सालोंसाल काम करना है. इसलिए तुम्हें अपनेआप को बहुत ज्यादा तवज्जो देनी होगी. जितना तुम आगे बढ़ती जाओगी, उतना ही लोग तुम्हें कम समझ पाएंगे और यही तुम्हारे लिए अच्छा है. तुम्हारे निर्णय केवल तुम्हारे अपने हित में होने चाहिए… न कोई पारिवारिक निर्णय और न कोई भावनात्मक फैसला. पूरी दुनिया की नजर है तुम पर. ऐसे में कमजोर नहीं पड़ सकतीं तुम. इस का समय नहीं, तुम्हारे पास,’’ एजेंट ने रूहानी को खूब समझाया.

लेकिन हर इनसान अलग मिट्टी का बना है. सब का व्यक्तित्व अलग होता है. रूहानी को ऐसे फरेब की कतई उम्मीद नहीं थी. जनवरी की सर्द हवाओं के साथ बाहर फैला घना कुहरा उस के अंदर भी जमने लगा था. बाहर का उदास, रंगहीन मौसम उस के अंदर भी पसरने लगा था. रूहानी न ढंग से खाती, न किसी बातचीत में उस का मन लगता, न मुसकराती… कई दिन लग गए उसे सामान्य होने में. किंतु समय अपना चक्र घुमाते हुए सब को अपनी धुरी पर ले ही आता है.

लेकिन इस बीच उस के हाथ से वह लीड ऐक्ट्रैस का रोल जाता रहा. अब उस के पास कोई काम नहीं था. फिर भी वह थी तो एक टीवी अभिनेत्री ही. अपना रहनसहन उसे उसी हिसाब से बरकरार रखना था. पैसे भी खत्म होते जा रहे थे. इसी बीच उस ने जो हाथ आया, वही काम करने का निश्चय किया. एजेंट की मदद से उस ने एक रिऐलिटी शो में भाग लिया. शो देश के बाहर था. रूहानी प्रसन्न थी कि इस बहाने वह विदेश घूम आएगी और कुछ पैसे भी कमा लेगी. शो में उस की मुलाकात रंजन से हुई जो उस का टीममेट था. रंजन भी एक छोटे शहर का लड़का था, जो इस रंगीली दुनिया में अपने को आजमाने आया था. अभी तक उसे सिर्फ धक्के ही मिले थे. यह उस का पहला शो था. रूहानी और रंजन की अच्छी पटने लगी. टूटे दिल को एक आसरा मिलने लगा था. रंजन और रूहानी का अच्छा तालमेल उन्हें जीत की ओर अग्रसर करता गया. आखिर उन दोनों की टीम जीत गई. अच्छाखासा पैसा मिला.

अपने देश लौटते समय हवाईजहाज में रंजन ने रूहानी का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘अपनी टीम जारी रखोगी? क्या तुम मेरा प्यार स्वीकार करोगी, रूहानी?’’ रंजन ने रूहानी को प्रपोज कर दिया.

रूहानी बेहद खुश थी. एक तो जीत, उस पर पैसा और अब प्यार भी… और क्या चाहिए किसी 21 वर्षीया को. रंजन अब तक पीजी में रहता था और रूहानी किराए के घर में रहती थी. दोनों मिलते, संगसाथ समय व्यतीत करते, फिर अपनेअपने घर लौट जाते. ‘‘रूहानी, ऐसे तो जो पैसा हम दोनों ने जीता है, वह खत्म होता चला जाएगा. इस से अच्छा है हम उसे अपने भविष्य के लिए कहीं निवेश कर दें.’’

रंजन की बात में तर्क था. अत: दोनों ने आपसी सहमति से एक घर बुक करा लिया. ‘‘तुम लोन की चिंता मत करना, तुम्हें इस झंझट में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है. कुछ राशि हमारे पास है ही और कुछ मैं पर्सनल लोन ले लूंगा. ईएमआई मैं भरता रहूंगा. बस, कागजी काररवाई करवा लेते हैं.’’

लोन लेने की आवश्यकता के कारण घर रंजन के नाम बुक हुआ.

‘‘तुम बस हमारे घर को सजाने की चिंता करो… यह तुम्हारा डिपार्टमैंट है,’’ रंजन की इन बातों से रूहानी चहक उठी थी.

रूहानी ने अपने एजेंट के द्वारा रंजन को काफी काम दिलवाया और खुद घर सजानेबसाने में व्यस्त रहने लगी. कभीकभार 1-2 भूमिका निभा लेती. लेकिन काम का बोझ और दबाव उसे अब रास न आता. अब उस का मन प्यार, घरगृहस्थी में रमने लगा था. रंजन और वह रहते भी एक ही घर में थे. आजकल का प्यार न तो सीमाएं जानता है और न ही मानता है. उन दोनों ने अभी शादी नहीं की थी, लेकिन पतिपत्नी के रिश्ते की डोर थाम चुके थे. रंजन नईनवेली दुलहन की तरह रूहानी को उठा कर कमरे में ले जाता और दोनों प्रेमरस में भीग कर आनंदित हो उठते. यों ही साथ रहते हुए, प्यार के सागर में हिचकोले खाते दोनों रिश्ते के अगले पड़ाव पर पहुंच गए. माना कि दोनों ने सोचसमझ कर यह कदम नहीं उठाया था किंतु प्यार के बीज को पनपने से कोई रोक पाया है भला? जब रूहानी को पता चला कि वह गर्भवती है, तो उस ने रंजन को बताने की सोची. थोड़ा डर भी था मन में कि पता नहीं रंजन की प्रतिक्रिया कैसी होगी.

रात को सोते समय उस ने रंजन का हाथ हौले से अपने पेट पर रख दिया. बस इतना इशारा काफी था. रंजन समझ गया. इस खुशी के मौके पर उस ने रूहानी के गाल पर अपने प्यार का चुंबन अंकित कर दिया. रूहानी प्रसन्न भी थी और संतुष्ट भी. अब वह रंजन से जल्दी से जल्दी शादी करना चाहती थी. जीवन की नाव सुखसागर में गोते लगा रही थी कि अचानक एक दिन रंजन की गैरमौजूदगी में रूहानी ने उस का फोन उठा लिया. दूसरी तरफ से एक लड़की बोल रही थी, ‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’

‘‘आप को रंजन से बात करनी है न? वह इस समय घर पर नहीं है… मार्केट गया है… गलती से फोन घर भूल गया है. आप मुझे बता दीजिए क्या काम है आप को?’’ रूहानी ने कहा.

‘‘तुम्हें बता दूं तुम हो कौन रंजन की?’’

‘‘मैं उस की गर्लफ्रैंड हूं… जल्द ही हम शादी करने वाले हैं.’’

‘‘गर्लफ्रैंड?’’ कुछ पलों की खामोशी के बाद वह बोली, ‘‘मुझे अपना पता देना प्लीज, मैं उस की पुरानी फ्रैंड हूं. उसे सरप्राइज देना चाहती हूं.’’

रूहानी ने उसे अपना पता लिखवा दिया.

बस, उसी शाम उन के प्रेम नीड़ में तूफान आ गया. अचानक वह लड़की उन के घर आ धमकी.

दरवाजा खोलते ही उस ने रंजन को एक तमाचा जड़ा और जोरजोर से लड़ने लगी, ‘‘रंजन, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे धोखा देने की? शायद तुम भूल गए कि तुम्हारे पिता मेरे डैड के मातहत हैं. इस चुड़ैल के साथ मिल कर तुम मेरे साथ चीटिंग कर रहे हो… मैं कपड़े की गुडि़या नहीं हूं. मैं रोती नहीं, रूलाती हूं, समझे?’’ लगभग चीखती हुई वह रूहानी की ओर मुड़ी. फिर उसे धक्का दे कर जमीन पर गिरा दिया. रूहानी इस तरह के बरताव के लिए तैयार न थी. वह लड़की रूहानी पर टूट पड़ी. उसे पीटने लगी.

शोर सुन कर कुछ पड़ोसी इकट्ठा हो गए. उन्होंने बड़ी मुश्किल से उस लड़की को रूहानी से अलग किया.

इस घटना से रूहानी की जिंदगी में उथलपुथल मच गई. अचानक उस का जीवन ऐसे मोड़ पर आ गया था कि आगे उसे सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा था.

दरअसल, रंजन का उस की हालत पर ध्यान न देना उसे बहुत आहत कर गया था. यह वह ठेस थी जिस ने रूहानी के सभी मौसम बदल कर ठंडे, निर्जीव और बेरंग कर दिए थे. रूहानी हर वक्त उदास रहने लगी थी. एक तो गर्भावस्था में डोलती मनोस्थिति, उस पर साथी से मिला दुर्व्यवहार. आजकल रंजन को उस की खुशी, उस के मूड से कोई फर्क नहीं पड़ता था, बल्कि आजकल वह रूहानी पर अकसर नाराज होने लगा था. रंजन के सिवा रूहानी का अपना कहने का कोई नहीं था.

अकेली रूहानी सारा दिन उदासीन पड़ी रहती. रात को जब रंजन घर लौटता तो दोनों में घमासान होता. रंजन रूहानी पर हाथ भी उठाने लगा था. अवसाद से घिरी रूहानी को आगे की राह दिखाई नहीं दे रही थी कि क्या करे कि रंजन से उस का रिश्ता फिर मजबूत हो जाए. सोचसोच कर वह और भी अवसादग्रस्त होती जा रही थी. ऐसी ही एक शाम जब रूहानी छत पर टकटकी बांधे अकेली बिस्तर पर पड़ी थी, अचानक फोन घनघना उठा. दूसरी तरफ उसी लड़की की आवाज थी.

उस ने रूहानी के फोन उठाते ही खरीखरी सुनानी शुरू कर दी, ‘‘तुम क्या सोचती हो रंजन को मुझ से छीन लोगी? रंजन मेरा है, सिर्फ मेरा. तुम्हारी जैसी कितनी आईं और गईं. लेकिन रंजन को मुझ से कोई नहीं छीन पाई. कुछ दिन इधरउधर मुंह मारने से उस का मेरे प्रति प्यार कम नहीं हो जाता, समझी? अब अपना बोरियाबिस्तर बांध और निकल जा रंजन की जिंदगी से.’’

उस लड़की की बातें सुन कर रूहानी और भी परेशान हो उठी कि क्या रंजन ने उसे धोखा दिया है? उस का उद्विग्न मन शांत नहीं हो पा रहा था. रंजन भी तो उस के किसी सवाल का जवाब नहीं देता. आखिर किस से पूछे? वह सारे घर में कलपती सी घूमने लगी.

स्वयं को उपेक्षित महसूस करती रूहानी छटपटाने लगी कि क्या करे, कैसे मुक्ति पाए इस अवसाद से? क्या फायदा इस सौंदर्य का, इस शोहरत का, जब कोई उसे प्यार ही न करे? क्या इस जीवन में उस के लिए प्यार पाना संभव नहीं? इसी उधेड़बुन में रूहानी उठी और…

अगली सुबह एक ही खबर सारे टीवी चैनलों पर बारबार दिखाई जा रही थी कि प्रसिद्ध अभिनेत्री रूहानी ने अपने घर में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली.

बस, फिर सब तरफ वही शो, उसी की चर्चा. टीवी इंडस्ट्री में रूहानी के सहकर्मी, उस के तथाकथित मित्रगण अलगअलग कहानियां बयान करने लगे. न्यूज चैनलों को एक बढि़या मुद्दा मिल गया अपनी टीआरपी बढ़ाने का. एक चैनल ने रूहानी के इस कदम का दोष रंजन के जीवन में दूसरी लड़की के प्रवेश को दिया. आधार था पड़ोसियों से की गई बातचीत, तो दूसरा चैनल कहने लगा कि रूहानी गर्भवती थी और वह रंजन पर शादी का दबाव डाल रही थी, पर वह मान नहीं रहा था, इसलिए रूहानी ने आत्महत्या कर ली.

तीसरा चैनल रूहानी के कुछ दोस्तों के बयानों के आधार पर कहने लगा कि रूहानी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि रंजन ने उस दूसरी लड़की के साथ मिल कर उस का खून किया है यानी जितने मुंह उतनी बातें.

अंतिम संस्कार के समय काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी. सहकलाकार, आम जनता और इन सब के बीच छिपे, रोतेबिलखते रूहानी के मातापिता. इतनी भीड़ देख कर कौन कह सकता था कि यहां उस का अपना कहने को, उस के मन की टोह लेने वाला कोई न था. रूहानी चली गई… शायद संवेदनशीलता का यहां कोई काम नहीं. अपने घर में जिस धन व प्रसिद्धि की खोज में रूहानी निकल पड़ी थी, वह उसे मिल तो गई, लेकिन इनसान की खोज कब रुकी है भला. धनप्रसिद्धि के पश्चात प्यार पाने की खोज, प्यार के पश्चात अपना घर बसाने की आकांक्षा… यह सूची कभी खत्म नहीं होती. Hindi Story

बैंकिंग क्षेत्र में बज गयी खतरे की घंटी

विश्व बार-बार मंदी की मार खा रहा है. कच्चे तेल का बाजार मंदा है. विश्व अर्थव्यवस्था ही डगमगायी हुई है. लेकिन हमारी सरकार बार-बार यही कहती रही है कि मंदी का असर भारत पर नहीं है. पर अब धीरे-धीरे जो स्थिति उभर कर सामने आ रही है, उसमें कहा जा सकता है कि सरकार माने या न माने; इन दिनों देश की अर्थव्यवस्था में बहुत कुछ ठीक नहीं है. रिजर्व बैंक के गवर्नर भी अर्थव्यवस्था को लेकर बार-बार चिंता जता चुके हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के हो या निजी – बैंकों पर संकट गहराया हुआ है. बैंकों के बैड लोन से लेकर नौन परफोर्मिंग एसेट की चर्चा बड़े जोरशोर से है. बहुत सारे बैंक लिक्यूडिटी के संकट से गुजर रहे हैं. वहीं एक तरफ मुद्रास्फिति समेत महंगाई सूचकांक कुछ भी कहें – आम जनता को राहत देने में नाकाम है तो दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डौलर की तुलना में रुपए का अवमूल्यन को भी रोका नहीं जा सका है. ऐसे बहुत सारे संकट हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था घिरी हुई है.

विजय माल्या के देश छोड़ कर जाने के बाद बैंकों की माली हालत का हर रोज खुलासा हो रहा है. लेकिन इससे पहले ही रिजर्व बैंक ने बैंकों की नब्ज की पहचान रिजर्व बैंक को हो चुकी थी. तभी बकाया कर्ज के मामले में रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देश जारी किए तो विभिन्न बैंकों में कर्ज लेकर जानबूझ न चुकाने वाले डिफौल्टर कर्जदारों की संख्या और बैंकों के नौन परफोर्मिंग एसेट्स की विस्तृत जानकारी का खुलासा हुआ. देश में डिफौल्ट कर्जदारों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. देश के विभिन्न बैंकों में बकाया कर्ज की रकम 13 लाख करोड़ रु. से अधिक हो गयी है. इस साल के शुरूआत में क्रेडिट स्वीस की एक रिपोर्ट के अनुसार 58 अरब डौलर के ऋण में से 29 अरब डौलर लंबे समय संकट में है, लेकिन बैंकों ने महज 6 अरब डौलर को भी बैड लोन के रूप में मान्यता दी है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है.

बहरहाल, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने जानबुझ कर कर्ज न चुकानेवाले 1624 के खिलाफ मामला दर्ज किया है. हालांकि पिछले साल के अंत में दिसंबर से इस साल के मार्च महीने में चौथी तिमाही तक रिजर्व बैंक ने संकट की स्थिति से उबरने के लिए इन बैंकों को बहुत सारी सुविधा प्रदान की थी. वहीं बैंकौं की डावांडोल स्थिति को दुरुस्त करने और बैंकों के मूलधन में इजाफा के लिहाज से इस वित्त वर्ष में 25 हजार करोड़ रु. का बजट में प्रावधान किया गया है. लेकिन वह काफी नहीं था. दरअसल, 2014-15 की चौथी तिमाही में जहां विभिन्न बैंकों में बकाया कर्ज 6.55 प्रतिशत था, वहीं 2015-16 की चौथी तिमाही में यह प्रतिशत 12.9 तक पहुंच गया. इसके बाद तो पूरे देश में हडकंप मच गया.

बैंकिंग सेक्टर में खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने पहले ही स्टेट बैंक औफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक औफ हैदराबाद, स्टेट बैंक औफ मैसूर, बैंक औफ ‍त्र्वांकोर, स्टेट बैंक औफ पटियाला आदि अपने पांच सहयोगी बैंक के अधिग्रहण का प्रस्ताव सरकार को दे चुकी है. और अब यूको बैंक, बैंक औफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक तीन सहयोगी बैंकों के भी विलय की राह पर कदम बढ़ा चुका है. स्टेट बैंक का यह प्रस्ताव पर केंद्र के पास विचाराधीन है.

इधर पंजाब नेशनल बैंक भी नुकसान के सागर में गोते लगा रहा है. बैंक को अब तक रिकौर्ड नुकसान हुआ है. बताया जा रहा है कि नुकसान उठानेवाले भारतीय बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक शीर्ष पर पहुंच चुका है. इस साल मार्च महीने के अंत में चौथी तिमाही में इस बैंक को 5,367.14 करोड़ का नुकसान हुआ है. और इस नुकसान को बड़ा हिस्सा ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने के बाद रकम न लौटाए जाने से हुआ है. जबकि पंजाब नेशनल बैंक को पिछले साल की चौथी तिमाह में कुल 306.56 करोड़ रु. का लाभ हुआ था. इस एक साल के दौरान बैंक का लाभ 13,455.65 करोड़ रु. से घटकर 13,276.19 करोड़ रु. हो गया. यानि सीधे तौर पर पिछले वित्त वर्ष के अंत में बैंक को 1.33 प्रतिशत का नुकसान हुआ है.

पंजाब नेशनल बैंक में देश के पहुंचे हुए उद्योगपतियों के पास लगभग 10,869 करोड़ रु. की रकम बकाया है, जिन्होंने जानबुझ पर कर्ज की रकम नहीं लौटाया है. सितंबर 2015 तक 764 कंपनियों ने कर्ज नहीं लौटाया था. लेकिन दिसंबर 2015 तक पंजाब नेशनल बैंक ने जानबुझ कर कर्ज न लौटानेवाली 904 कंपिनयों की पहचान की, जिनके पास 9,204 करोड़ रु. कर्ज का बकाया है.

गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली ‍तिमाही में यूको बैंक को 1,715.16 करोड़ का नुकसान हुआ था. मौजूदा समय में उल्लेखनीय तौर पर बैंक का कर्ज लेकर वापस न लौटाए जाने वाली राशि का प्रतिशत 15.43 हो चुका है. वहीं बैंक औफ इंडिया को 1,506 करोड़ रु. का और ओवरसीज बैंक का 1,425 करोड़ रु. का नुकसान झेल रहा है. कुल मिला कर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति (75 प्रतिशत) की तुलना में नौन परफौर्मिंग एसेट्स 86 प्रतिशत आंकी गयी है. यही चिंता की सबसे बड़ी वजह है.

इससे जाहिर है इन बैंकों की सेहत बहुत खराब है. सार्वजनिक क्षेत्र के फिलहाल आठ कमजोर बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्टेट बैंक ने वित्त मंत्रालय को विलय का प्रस्ताव भेजा है. इन बैंकौं के कर्मचारी स्टेट ब;ंक औफ इंडिया के इस कदम का विरोध कर रहे हैं. इन बैंकों के लगभग 50 हजार कर्मचारियों ने 20 मई को एक दिन का सांकेतिक हड़ताल भी किया. बहरहाल, इस समय बौल सरकार के पाले में है. हालांकि स्टेट बैंक औफ इंडिया का यह प्रस्ताव अभी शुरूआती चरण में है. स्टेट बैंक के इस प्रस्ताव पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय बैंक्स बोर्ड ब्यूरो से सलाह-मश्विरा कर सकता है. लेकिन माना जा रहा है कि देर-सवेर संभवतया स्टेट बैंक औफ इंडिया को केंद्र की मंजूरी मिल जाएगी.

वैसे अगर यह हो गया तो इस बात में शक की कोई गुंजाइश नहीं कि इससे स्टेट बैंक औफ इंडिया को बहुत मजबूती मिलेगी और विश्व के बैंकिंग सूचकांक में स्टेट बैंक औफ इंडिया की स्थिति मजबूत होगी. इसकी वजह यह है कि अकेले पांच बैंकों के विलय से स्टेट बैंक को लगभग 50 हजार करोड़ की अचल पूंजी हासिल होगी. इससे स्टेट बैंक इंडिया का कुल जमा राशि 21 लाख करोड़ रु. और दी गयी कर्ज राशि 17.5 लाख करोड़ रु. हो जाएगी. स्टेट बैंक को उम्मीद यह विश्व बैंकिंग सूचकांक में स्टेट बैंक औफ इंडिया का क्रमांक 55 से 59 तक हो जाएगा. गौरतलब है कि 2015 में फोब्स की विश्व बैंकिंग सूची में स्टेट बैंक औफ इंडिया का स्थान 152 वां है. जाहिर है अगर कमजोर सेहत वाले बैंकों का विलय हो जाता है तो विश्व बैंकिंग की सूची में स्टेट बैंक औफ इंडिया की यह बहुत बड़ी छलांग होगी.

अब अगर निजी बैंकों की बात करें तो अभी पिछले महीने एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने कर्ज डिफौल्टर राशि का खुलासा करते हुए इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए चिंताजनक बताया है. एक्सिस बैंक की डिफौल्टर रकम भारतीय मुद्रा में 226 मिलियन है तो आईसीआईसीआई बैंक का 525 मिलियन. अभी हाल ही में रिजर्व बैंक ने इन दोनों बैंकों पर बैलेंश शीट क्लियर करने के लिए दबाव बनाया तो इनक डिफौल्टर राशि का खुलासा हुआ.

वहीं एचएसबीसी बैंक भी अपने खर्च को कम के लिए अपनी शाखाओं को समेटने का एलान कर दिया है. फिलहाल 26 शाखाओं को बैंक बंद कर रहा है। गौरतल है कि एचएसबीसी की भारत के 29 शहरों में 50 शाखाएं हैं. लेकिन अब 15 छोटे शहरों से 26 शाखाओं को बैंक ने बंद कर देने का फैसला किया है. कोलकाता में भी बैंक अपनी कम से कम पांच शाखाएं समेट रहा है. इसके अलावा चेन्नई, दिल्ली, पुणे में एक-एक शाखा बंद हो रहे हैं. बैंक के इस फैसले के बाद गुआहाटी, इंदौर, जोधपुर, लखनऊ, लुधियाना, थाणे, मैसूर, नागपुर, नासिक, पटना, रायपुर, सूरत, बडौदा, विशाखापट्टनम और तिरुवानंनतपुरम अब बैंक की एक भी शशखा नहीं होगी. इसके बाद बैंक के लगभग 10-12 प्रतिशत ग्राहक कम हो जाएंगे. वहीं 300 बैंक कमचारियों पर बेरोजगारी की तलवार लटकेगी.

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने हाल ही में चेतावनी देते हुए कहा भी कि कर्ज न चुकाए जाने से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा धक्का लगने वाला है. जल्द ही देश की अर्थव्यवस्था विशस सर्केल यानि दुश्चक्र में चली जाएगी. इसीलिए बड़ी कड़ाई से पेश आने की जरूरत है. उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की  ‘डीप सर्जरी’ की जरूरत पर भी बल दिया. वहीं वित्त मंत्री ने यह माना है कि बकाया कर्ज का परिमाण इतना बड़ा है कि बैंकों के मूलधन पर इसका असर पड़ रहा है. फौरी तौर पर वित्त मंत्री ने 25 हजार करोड़ रु. का एक फंड तैयार कर रखा है. लेकिन जहां तक ‘डीप सजरी’ की बात है तो सरकार कई कदम उठा रही है.

बजट में सरकार ने सार्वजनिक बैंकों के प्रबंधन और पूंजी में वृद्धि की योजना के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो गठन का एलान वित्त मंत्री अरुण जेटली कर चुके हैं.  हालांकि बैंक बोर्ड ब्यूरो के कामकाज और इसके लागू करने की समय सीमा समेत इससे जुड़ी और भी कई बातें फिलहाल पुख्ता तौर पर साफ नहीं हुई है.

इसके अलावा दिवालिया कानून लाने की भी घोषणा की गयी है, ताकि बैंक अपने बकाया कर्ज की वसूली कर सके. दावा है कि यह कानून बन जाने पर लगभग 8 हजार करोड़ रु. के कर्ज की वसूली आसान हो जाएगी. यह कानून वित्त बिल के तौर पर फिलहाल लोकसभा से पारित हो चुका है. राज्यसभा में दिवालिया कानून 2016 अभी पारित होना बाकी है. लेकिन फिलहाल बैंकिंग क्षेत्र में जो सरफेसी अधिनियम चालू है, उसमें भी संशोधन करके एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों में शेयरहोल्डर को सौ प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाने के बारे में सरकार सोच रही है. गौरतलब है कि एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी कम कीमत पर बैंक का बकाया कर्ज खरीद लेती है और फिर उस बकाया रकम की वसूली कर लेती है. ये एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियां बकाया कर्ज की रकम को बेच कर बैंकों को अपना बैलेंसशीट क्लियर रखने में मदद करता है. मौजूदा समय में एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी खोल कर सौ प्रतिशत विदेशी विनिवेश की अनुमति होने के बावजूद किसी विदेशी व्यक्ति या कंपनी को ऐसी कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ही रखने का प्रावधान रहा है. इसीलिए अब इसमें भी सरकार संशोधन करने जा रही है. कुल मिला कर बैंकिंग के क्षेत्र में आए संकट को देखते हुए लगता है कई बैंक दिवालिया होने के कगार पर है. सरकार द्वारा किए गए इंतजाम कितने कारगर साबित होते हैं, यह तो अब समय ही बताएगा.

फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं अजय देवगन

‘‘ऐक्शन जैक्सन’’ और ‘‘दृश्यम’’ की असफलता के बाद अजय देवगन अपने करियर को लेकर कुछ ज्यादा ही सचेत हो गए हैं और अब वह काफी सोचसमझकर कदम आगे बढ़ा रहे हैं. अब वह अपनी अतीत की गलतियों को दोहराने से भी बचना चाहते हैं. पिछले तीन वर्षों से मिलन लूथरिया निर्देशित फिल्म ‘‘बादशाहो’’ चर्चा में है, जिसमें अजय देवगन की मुख्य भूमिका है. मगर अभी तक इस फिल्म की शूटिंग ही शुरू नहीं हो पायी है. पिछले तीन वर्षों से इस फिल्म की हीरोईन कौन होगी,इसी बात की चर्चाएं होती रही हैं.

सूत्रों की माने तो ‘‘बादशाहो’’ की शूटिंग शुरू न हो पाने की वजह फिल्म की हीरोईन तय होना नहीं है, बल्कि अजय देवगन को मिलन लूथरिया ने जो कहानी सुनायी, वह पसंद न आना वजह है. अजय देवगन की इच्छानुसार मिलन इस कहानी में कई बार फेरबदल कर चुके हैं. सूत्र बताते हैं कि अभी भी इस कहानी में नए बदलाव किए गए हैं. ‘बादशाहो’ की कहानी का पंगा फंसने पर इसकी शूटिंग की कोई तारीख तय नहीं हो पायी, जिसके चलते अजय देवगन ने फिल्म ‘‘शिवाय’’ शुरू कर दी.

बौलीवुड में पिछले कुछ समय से चर्चाएं गर्म है कि 26 जनवरी 2017 को अजय देवगन की फिल्म ‘‘बादशाहो’, हृतिक रोषन की फिल्म ‘‘काबिल’’ और शाहरूख खान की फिल्म ‘‘रईस’’ एक साथ टकराने वाली हैं. मगर ‘सरिता’ पत्रिका ने पहले ही बताया है कि ‘रईस’ के रिलीज की तारीख पूरी तरह से तय नहीं है. उधर सूत्र बताते हैं कि इस बार अजय देवगन किसी भी सूरत में शाहरुख खान की फिल्म के साथ टकराने के मूड़ में नहीं है.

ज्ञातब्य है कि अजय देवगन की फिल्म ‘‘सन आफ सरदार’’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘‘जब तक है जान’’ एक साथ रिलीज हुई थी. उस वक्त अजय देवगन ने कम्पटीशन कमीशन का दरवाजा भी खटखटाया था. मामला अभी भी अदालत में हैं. तो दूसरी तरफ उनकी फिल्म ‘‘सन आफ सरदार’’ को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. इसलिए ‘बादशाहो’ 26 जनवरी 2017 की बजाय अप्रैल में रिलीज होगी.

वहीं अजय देवगन के एक अति नजदीकी सूत्र का दावा है कि ‘बादशाहो’ की अभी तक शूटिंग ही शुरू नहीं हुई है. इसलिए यह फिल्म जनवरी में कैसे रिलीज होगी. सूत्र का दावा है कि मिलन लूथरिया ने अब जो कहानी तैयार की है, वह यदि अजय देवगन को पसंद आ गयी, तो ‘बादशाहो’की शूटिंग जुलाई में ही शुरू हो पाएगी. फिर मिलन हर फिल्म को पूरी करने में एक साल का वक्त लगा देते हैं. इस हिसाब से यह फिल्म अप्रैल 2017 के बाद ही रिलीज होगी. खैर, ‘बादशाहो’ 2017  में रिलीज हो या 2018 में, पर यह तय हो गया है कि अब अजय देवगन फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं.

उड़नतश्तरियों का सच

आप ने उड़नतश्तरियों तथा उन के चालक लोकांतरवासियों यानी एलियंस के अनेक किस्से पढ़ेसुने होंगे. क्या ये किस्से सही और सच्चे हैं? पिछले वर्षों में इस सिलसिले में जो नए तथ्य सामने आए हैं, वे यही इशारा करते हैं कि उड़नतश्तरियों में बैठे एलियंस की कहानियां काफी हद तक हकीकत साबित हो रही हैं. लगता है कि अब कुछेक सालों में ही ये कथाकहानियां सच हो जाएंगी और हम इन एलियंस के सीधे संपर्क में होंगे. यह उन लोगों का कहना है जो विश्व की अंतरिक्ष एजेंसियों में काम करते हैं और चंद्रमा पर हो आए हैं या फिर बरसों अनुसंधान कर चुके विश्वविख्यात जर्नलिस्ट हैं. आज यदि आप अमेरिका जाएं तो पता लगेगा कि वहां तीनचौथाई नागरिक उड़नतश्तरियों के अस्तित्व के बारे में पूरी तरह आश्वस्त हैं. अब यह मुद्दा फिर गरमा गया है क्योंकि इन उड़नतश्तरियों के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं.

पिछली सदी के चौथे दशक में अमेरिका के रोजवेल इलाके में लोगों ने कई उड़नतश्तरियां उड़ती देखीं, जिन में से एक उड़नतश्तरी दुर्घटनावश पृथ्वी पर आ गिरी. इस का मलबा आधा मील तक फैला था, जिस में हर चीज अनजान किस्म की धातु की थी. उस पर कुछ अनजान किस्म के निशान व भाषा लिखी थी. इस बारे में नजदीकी एयरफोर्स यूनिट को सूचित करने से पहले कुछ मलबा स्थानीय लोगों ने उठा कर अपने पास रख लिया. इस के बाद सरकारी तंत्र ने सारा मलबा हटा कर अज्ञात स्थान पर भेज दिया, जिस में कई शव भी थे. हालांकि शुरू में यह भी कहा गया कि एक यूएफओ यानी ‘अनआइडैंटिफाइड फ्लाइंग ओब्जैक्ट’ गिरा, पर बाद में इसे ‘वैदर बलून’ बताया गया.

इस सरकारी तंत्र के कवरअप का कारण वहां के लोग आज भी नहीं समझ पाए हैं. रोजवेल में स्थापित यूएफओ म्यूजियम में आज भी आप एक एलियन का कंकाल तथा उस उड़नतश्तरी की कई चीजें देख सकते हैं. हालांकि रोजवेल घटना से पहले भी अनेक लोगों ने हजारों उड़नतश्तरियों को देखा और उन का वर्णन  किया, लेकिन उन्हें करीब से नहीं देख पाए.

उड़नतश्तरियां रोजवेल घटना के बाद भी दुनिया के कई देशों में दिखीं. ‘फ्लाइंग सौसर्स ओवर ब्रिटेन’ पुस्तक के लेखक रौबर्ट चैपमैन का कहना है कि फ्लाइंग सौसर्स की मौजूदगी तो सारी दुनिया को पता है, क्योंकि फ्लाइंग सौसर्स को ऐक्समिंस्टर से ऐडलेड, ब्राइटन से बैंकाक और मैनचेस्टर से मेंफिज तक देखा गया.

रौबर्ट आगे लिखते हैं कि ये उड़नतश्तरियां न केवल पृथ्वी का पूरा हाल जानती हैं बल्कि हमारी मदद को भी तैयार हैं. मगर क्या हम ने आज तक किसी तरह उन्हें बताया कि हम उन का स्वागत करना चाहते हैं. क्या हम ने उन के पृथ्वी पर उतरने के लिए आज तक कोई लैंडिंग पैड इस पृथ्वी पर बनाया है? रौबर्ट का यह संदेश लगता है कि अमेरिका के हवाई आइलैंड्स तक पहुंच चुका है, क्योंकि वहां उड़नतश्तरियों की लैंडिंग के लिए वाकई एक लैंडिंग पैड बनना शुरू हो गया है.

300 किलोग्राम के एलियंस

रोजवेल घटना को धीरेधीरे दुनियाभर के देशों ने कवर किया और इस पर लोगों की प्रतिक्रिया उड़नतश्तरी को सच मानने की रही. अब यह विषय वैज्ञानिकों तक जा पहुंचा और वे भी एलियन लाइफ के बारे में सोचने और अध्ययन करने लगे. 

महान ऐस्ट्रोनोमर कार्ल सैगन ने गणना कर के बताया कि हम से भी उन्नत समस्याएं हमारी गैलेक्सी में होंगी. इस के बाद सेटी यानी ‘सर्च फौर ऐक्स्ट्रौयूस्ट्रियल इंटैलिजैंस’ के अध्ययन दल प्रमुख फ्रैंक ड्रेक ने अपने डे्रक समीकरण द्वारा बताया कि अपनी गैलेक्सी में केवल 10 हजार ग्रह ही होंगे, जिन पर मनुष्य जीवन होगा. इस संख्या को फिर मशहूर खगोलविद जौन ओरो ने घटा कर केवल 100 कर दिया. फिर आए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के बेन जुकरमैन जिन्होंने कहा कि ब्रह्मांड में हम मनुष्यों जैसे प्राणी भले ही हों परंतु अपनी गैलेक्सी में इस प्रकार का कोई ग्रहउपग्रह नहीं जैसी कि अपनी पृथ्वी है.

इस के बाद अन्य कई वैज्ञानिक, खगोलविद, मैथमैटीशियंस, कौस्मोलौजिस्ट, ऐस्ट्रोबायोलौजिस्ट ने भी खूब माथापच्ची की और मामला मनुष्य जैसी सभ्यताओं के आगे ही नहीं, बल्कि जीवाणुओंकीटाणुओं तक की मौजूदगी की खोज तक जा पहुंचा. लेकिन सवाल वही था कि क्या उड़नतश्तरियां और इन को उड़ाने वाले सुसभ्य इंटैलिजैंट लोकांतरवासी होते हैं? यदि हां, तो हमें विजिट करने का उन का उद्देश्य क्या है?

इस अहम प्रश्न का उत्तर भी अब हमारे पास है कि एलियंस हैं और हम पर उन की नजर लगातार बनी रहती है. यह हम इसलिए नहीं कह रहे कि आज दुनिया के सब से बड़े खगोलविद स्टीफन हौकिंग ने यही कहा है. यही नहीं हम आप को कायल करने वाले कई तर्क और वक्तव्य भी आप के सामने  पेश करने वाले हैं. स्टीफन हौकिंग के बाद कुछ माह पहले यूनिवर्सिटी औफ बार्सिलोना के फर्गस सिंपसन ने इन एलियंस की मौजूदगी का समर्थन किया है और यहां तक कहा है कि ये करीब 300 किलोग्राम वजन के होने चाहिए. कुछ विद्वानों का मत है कि अन्य ग्रहों पर पृथ्वी के समान कार्बन के बजाय सिलिकौन आधारित जीवन भी  हो सकता है. अत: इन ग्रहों के विजिटर हम से वजन ही नहीं बल्कि रूपरंग में भी काफी अलग हो सकते हैं.

इधर ओलिविया जडसन जैसे लोगों का मत है कि पृथ्वी का समूल नाश करने को तैयार पृथ्वी के मनुष्य को रोकने क्या वे एलियंस नहीं पधारेंगे, जिन्होंने इस पृथ्वी पर मनुष्यों के बीज बोए? जाहिर है कि वे ऐरिक फौन डेनिकेन द्वारा ‘चैरियट्स औफ द गौड्स’ पुस्तक में उद्धृत इसी विचार को दोहरा रही हैं कि ‘एवरी प्लैनेट इज ए कालोनी औफ एनादर प्लैनेट.’

डेनिकेन यही कहते हैं कि हम मनुष्यों के देवीदेवता दरअसल, वही लोकांतरवासी हैं, जिन्होंने हमें पृथ्वी पर बनाया और पवित्र पुस्तकों के जरिए तरहतरह का ज्ञान दिया. लेकिन ये डेनिकेन के निजी विचार हैं. इन की असलियत क्या है यह कोई नहीं जानता. जब ओलिविया जडसन से यह पूछा गया कि इन लोकांतरवासियों की अनुपस्थिति के बारे में उन्हें क्या कहना है तो बड़े आत्मविश्वास के साथ उन्होंने कहा कि एब्सैंस औफ एवीडैंस इस नौट एवीडैंस औफ एब्सैंस.

ओलिविया ने आगे कहा, ‘‘एलियंस हमारे बीच वर्षों से रह रहे हैं और पृथ्वी के बिगड़ते पर्यावरण पर हमें परोक्ष रूप से शिक्षित भी कर रहे हैं.’’ कुछ तार्किक लोगों ने जब यह सवाल पूछा कि वर्ष 1960 से शुरू ‘सेटी’ कार्यक्रम ने जब आज तक अपने

रेडियोसिगनल्स से कोई रिस्पौंस नहीं पाया तो इस कार्यक्रम को बंद किया जाना चाहिए. इस पर फर्गस का कहना था, ‘‘वे लोकांतरवासियों से संपर्क के नएनए मैथमैटिकल तरीके ईजाद कर विज्ञान को पुष्ट ही कर रहे हैं.’’

इतना ही नहीं, विश्व के कई कालेजों व विश्वविद्यालयों में खगोलविद, ऐस्ट्रोबायोलौजिस्ट, ऐक्सोबायोलौजिस्ट, बायोऐस्ट्रोनोमर, ऐक्स्ट्रा टैरैस्ट्रियल जूलोजिस्ट व कौस्मोलौजिस्ट की संख्या पिछले वर्षों में बढ़ी ही है.

जाहिर है कि उड़नतश्तरियों को अब पूरी तरह काल्पनिक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 10 वर्ष में कम से कम 10 देशों में उड़नतश्तरियां देखी जाने की खबरें आई हैं.

ये हैं अंदर की बातें

जानिए कुछ अंदर की बातें, जो इस बात का ठोस सुबूत व आधार हैं कि उड़नतश्तरियां होती हैं.

रूस के एक दैनिक पत्र सोवियत्स्काया कल्चुरा तथा कई अन्य समाचारपत्रों ने अक्तूबर, 2015 की शुरुआत में यह खबर छापी थी कि रूस के वोरोनेज नगर के बाहरी पार्क में एक उड़नतश्तरी उतरी जिस में से 3 आंख वाला एक एलियन व एक रोबोट एक हैच खोल कर बाहर दिखाई दिए. जब इन्हें देख कर एक किशोर चिल्लाया तो एलियन ने एक ट्यूब से उस की तरफ देखा और किशोर सन्न हो गया, फिर वह एलियन उड़ कर उड़नतश्तरी के अंदर चला गया. लाल रंग की यह तश्तरी 10 मीटर व्यास के गोले जैसी थी. पार्क में खेलते अनेक बच्चे जब तश्तरी के इर्दगिर्द इकट्ठा हो गए तो तश्तरी अचानक उड़ गई. ऐसी ही अनेक खबरें ईरान, मैक्सिको व अन्य देशों से आई हैं. ये प्रामाणिक तो हैं, लेकिन सुबूतविहीन हैं. इन का सब से बड़ा सुबूत यही है कि आज उड़नतश्तरियों पर विश्वास करने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. इस वृद्धि के कुछ कारण भी हैं. सब से नया कारण यह है कि रूस के यूरी मिल्नर नामक एक अरबपति उद्योगपति ने पिछले वर्ष यह घोषणा की कि एलियंस की खोज में अब वे भी भागीदार बनने जा रहे हैं. स्टीफन हौकिंग के साथ मिल कर एलियन जीवन की पुष्टि के लिए वे यूनिवर्सिटी औफ बर्कले के वैज्ञानिकों को अनुसंधान हेतु 100 मिलियन डौलर देंगे.

इस खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, क्योंकि कोई उद्योगपति भी वहीं पैसा लगाएगा जहां उसे मुनाफा होगा? अब लोग कहने लगे हैं कि एलियन लाइफ की अंदरूनी बातें शायद उन्हें पता लग गई हैं. मगर क्या हैं ये अंदर की बातें? वर्ष 1971 में चंद्रमा पर उतरने वाले अमेरिका के टूठे मून मैन डा. एडगर मिशैल ने स्वीकार किया है कि एलियंस होते हैं, उड़नतश्तरियां भी होती हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं अंतरिक्ष पर नजर रखने वाली कई कमेटियों में हूं और मानता हूं कि ये बातें सही हैं. रोजवेल घटना को सरकार ने छिपाया है.’’ डा. मिशैल से नासा के पूर्व अंतरिक्षयात्री कर्नल गोर्डन कूपर ने तो इन उड़नतश्तरियों को देखना स्वीकार भी किया था. कर्नल ने राष्ट्रसंघ की एक यूएफओ इन्वैस्टिगेशन कमेटी को बताया था कि वर्ष 1951 व 1958 में उड़ानों के दौरान उन का पाला उड़नतश्तरियों से वाकई पड़ा था. शेटलेन ने कहा कि कई उड़नतश्तरियां चंद्रमा व उस के इर्दगिर्द मौजूद हैं. तभी अपोलो-13 में उन्होंने विस्फोट करवा दिया, क्योंकि नासा में अफवाह थी कि अपोलो-13 पर एक परमाणुयुक्ति मौजूद थी जिस का विस्फोट परीक्षण चंद्रतल पर किया जाना था. शेटलेन का कथन है कि अंतरिक्ष यात्री मैकडिविट तथा फ्रैंक बोर्मन व एलिड्रन आदि ने इन उड़नतश्तरियों के फोटो लिए हैं. विद्वानों का मत है कि एलियंस व उन की उड़नतश्तरियों की कहानियां अब इतने लोगों तक पहुंच चुकी हैं कि अब उन्हें छिपाना असंभव सा हो रहा है. इसी कारण नासा व अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के अधिकारी अब दबी जबान स्वीकार करने लगे हैं कि उड़नतश्तरियां होती हैं.

माना कि हम उड़नतश्तरी को आप के सामने साक्षात पेश नहीं कर पाए पर डा. मिशैल ने कहा कि अब बस 10 वर्ष के अंदर हम इन एलियंस के डायरैक्ट संपर्क में होंगे. हाल ही में बुल्गारिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी यही कहा है कि एलियंस न केवल हमारे मित्र हैं बल्कि वे हमारे बीच मौजूद हैं. बता दें कि बुल्गारिया के इन्हीं वैज्ञानिकों ने हमारे चंद्रयान-1 पर 2-2 पेलोड लगाए थे, जो सफल रहे. और हां, अमेरिका के हवाई आइलैंड्स पर इन उड़नतश्तरियों के लिए जो लैंडिंग पैड निर्माणाधीन है, जरा उसे भी देख लीजिए. यहां के मिस्टर गैरी होफेल्ड के संयोजन में ऐसा विशाल पोर्ट बन रहा है जो उड़नतश्तरियों के उतरनेउड़ने के काम आएगा. यह ‘स्टार विजिटर सैंक्चुरी ऐंड यूएफओ, लैंडिंग पैड’ अब इस बात का साक्ष्य है कि शीघ्र ही एलियंस से सीधे मिलन के निश्चित संकेत हैं. होफेल्ड का कहना है कि वे अंदर की कई बातें अभी नहीं बता सकते.

सलमान खान की दीवानी ऐश्वर्या

फिल्म ‘‘अकीरा’’ में सोनाक्षी सिन्हा के संग अभिनय कर फिल्म के रिलीज से पहले ही सुर्खियों में छा चुकी नवोदित अदाकारा ऐश्वर्या चौबे का दावा है कि वह सलमान खान की दीवानी हैं. अब तक कई प्रयासों के बावजूद सलमान खान से उनकी मुलाकात नहीं हो पायी है. ऐश्वर्या कहती हैं कि जिस दिन सलमान खान से उनकी मुलाकात हो जाएगी, उस दिन उनका बहुत बड़ा सपना पूरा हो जाएगा. ऐश्वर्या चौबे अभिनेत्री होने के साथ साथ अच्छी चित्रकार भी हैं. उन्होने सलमान खान की कम से कम दो सौ से अधिक पेंटिंग्स बना रखी हैं.

ऐश्वर्या राय बच्चन की शक्ल सूरत से मिलती शक्ल वाली ऐश्वर्या चौबे फिल्मों में अपना कैरियर बनाने के लिए वाराणसी के अपने घर से भागकर मुंबई पहुंची थी. मुंबई में उन्होने काफी स्ट्रगल किया. अब उनका स्ट्रगल व मेहनत रंग ला रही है. एक तरफ उन्होने सोनाक्षी सिन्हा के साथ फिल्म ‘‘अकीरा’’ की शूटिंग पूरी की है, वहीं कुछ समय पूर्व उन्होने 2015 व 2016 के कलेंडर के लिए मॉडलिंग भी की थी. वह एक म्यूजिक अलबम ‘‘कभी कभी’’के वीडियो में भी अभिनय कर चुकी हैं.

वह कहती हैं-‘‘मेरी यह बड़ी उपलब्धि है कि मुझे सोनाक्षी सिन्हा के साथ नारी प्रधान फिल्म ‘अकीरा’ में अति महत्वपूर्ण किरदार निभाने का मौका मिला. मैं इस फिल्म में मार्शल आर्ट ट्रेनर के किरदार में हूं. पर अभी मुझे बहुत आगे जाना है. अभी मुझे बहुत कुछ सीखना है. मैं अपने अभिनय को पॉलिश्ड करने में लगी हुई हूं.’’ 

…तो ये है सलमान की फिल्म ‘सुल्तान’ की कहानी

6 जुलाई को प्रदर्शित होने वाली सलमान खान की बहुचर्चित फिल्म ‘‘सुल्तान’’ के ट्रेलर के लांच होते ही फिल्म की कहानी तथा फिल्म में सलमान खान और अनुष्का शर्मा की रोमांटिक जोड़ी का भी खुलासा हो गया. अमूमन हर फिल्मकार अपनी फिल्म का ट्रेलर इस ढंग से बनाता है कि फिल्म की कहानी का पता फिल्म के रिलीज से पहले दर्शक को न चलने पाए. पर ‘सुल्तान’ के ट्रेलर से फिल्म की कहानी सामने आ गयी..अब निर्माताओं ने यह जान बूझकर किया है या अनजाने में ऐसा हो गया, यह तो पता नहीं.

पर फिल्म ‘‘सुलतान’ की कहानी है राष्ट्रीय स्तर के कुश्तीबाज सुल्तान अली (सलमान खान) की, जो कि ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीतने के लिए जाता है. जबकि सुल्तान अली की प्रेमिका आरफा (अनुष्का शर्मा) भी कुश्तीबाज तथा राष्ट्रीय चैंपियन है. वह खेतों में ट्रैक्टर भी चलाती है. ट्रेलर से इनकी प्रेम कहानी सामने आती है. वहीं ट्रेलर से सुल्तान अली की एक यात्रा पता चलती है. वह ‘कुछ नहीं’ से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाड़ी बनता है. पर बाद में सब कुछ खो बैठता है. उसके बाद वह पुनः चैम्पियन बनता है.

ट्रेलर से पता चलता है कि सुल्तान अली हरियाणा के एक अखाड़ा का उभरता हुआ कुश्तीबाज है. वह खूबसूरत कुश्तीबाज आरफा (अनुष्का शर्मा ) से प्यार कर बैठता है. पर उसका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार जीतना व नाम कमाना है. ओलंपिक में जीत हासिल करने के बाद वह खेल की बजाय अपने बारे में सोचना शुरू करता है. एक मुकाम पर वह पत्रकारों को भी थप्पड़ मार देता है, आरफा को सुल्तान का यह एटीट्यूड पसंद नहीं आता. वह सुल्तान को छोड़ देती है. अब सुल्तान को अपनी गलती का अहसास होता है और वह गुमनामी के अंधेरे में छिप जाता है. उसके बाद क्या होता है यह तो फिल्म में ही पता चलेगा…

‘‘यशराज फिल्मस’’ के बैनर तले आदित्य चोपड़ा निर्मित फिल्म ‘‘सुल्तान’’ के निर्देशक अली अब्बास जफर हैं.

माइक्रो सैटेलाइट बनाने की तैयारी

उपग्रह प्रक्षेपण को ज्यादा किफायती बनाने की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) तेजी से काम कर रहा है. आज के दौर में हर वस्तु के आकार को छोटे से छोटा बनाया जा रहा है. दुनिया माइक्रो की तरफ बढ़ रही है. ऐसे में हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिक भी माइक्रो उपग्रह बनाने में लगे हैं. साथ ही इसरो 10 टन वजन के उपग्रह को प्रक्षेपित करने वाला रौकेट भी तैयार कर रहा है, इस रौकेट में सेमी क्रायोजैनिक इंजन लगा होगा जो तरल औक्सीजन और कैरोसिन ईंधन से भी चलेगा. इस रौकेट के जरिए उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करना बेहद किफायती हो जाएगा. सेमी क्रायोजैनिक इंजन विकसित होने के बाद जीएसएलवी एमके-3 में इसे लगाया जाएगा, जिस से उस की पेलोड क्षमता 10 टन तक बढ़ाई जा सकेगी.

यह हमारे वैज्ञानिकों का ही कमाल है कि आज भारत विश्वस्तरीय रौकेट और उपग्रह तकनीक विकसित करने में अन्य देशों से आगे है. अभी हाल में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एकसाथ 10 उपग्रह छोड़ कर विश्व कीर्तिमान बनाया है. इस से पहले यह विश्व कीर्तिमान रूस के नाम था, जिस ने एकसाथ 8 उपग्रह छोड़े थे. एकसाथ 10 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ने के लिए बेहद आधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है, जिसे भारत ने कर के दिखा दिया. 1974 में भारत पर परमाणु परीक्षण की वजह से प्रतिबंध लगा था. इस के बावजूद इसरो ने बिना किसी बाहरी मदद के यह तकनीक विकसित की. जिस की मदद से भारत यह विश्व कीर्तिमान बनाने में कामयाब रहा है. भारत के पास 11 दूरसंचार उपग्रह हैं, जो इस समय पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं.

एशिया प्रशांत क्षेत्र में किसी देश के पास इतने दूरसंचार उपग्रह नहीं हैं. भारत उन गिनेचुने देशों में से है, जिन के पास इतनी संख्या में उपग्रह हैं. इस समय इसरो का व्यापार भी सब से ज्यादा मुनाफे वाला है.उस के हर 1 करोड़ रुपए के खर्च पर 2 करोड़ रुपए वापस मिलते हैं. आज दुनिया भर में भारतीय उपग्रहों की क्षमता मशहूर है. भारत द्वारा बनाए और प्रक्षेपित किए गए सब से ज्यादा उपग्रह इस समय अंतरिक्ष की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं. इन उपग्रहों की क्षमता इतनी ज्यादा है कि वे अंतरिक्ष से धरती पर 1 मीटर ऊंचाई वाली किसी भी वस्तु को देख सकते हैं.

अंतरिक्ष में मची होड़

अमेरिका और सोवियत संघ के बीच केवल धरती पर ही नहीं, अंतरिक्ष में भी एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ मची है. आज अंतरिक्ष मिशन कमाई का बहुत बड़ा जरिया बन गया है. इस में भारत भी पीछे नहीं है. अगर दोनों महाशक्तियों के बीच अंतरिक्ष में यह प्रतिस्पर्धा न होती, तो शायद इंसान आज चंद्रमा पर भी नहीं पहुंचा होता. फिर मंगल की खोज के प्रयास भी शुरू नहीं हुए होते. एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ में ही इन दोनों देशों ने अपने अंतरिक्ष मिशन पर अरबों डौलर खर्च कर डाले हैं. आज भारत समेत दुनिया के 6 देश चंद्रमा से आगे निकल मंगल अभियान में जुटे हुए हैं. भारत के मार्स मिशन को ले कर कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसी गरीब विकासशील देश को ऐसे स्पेस मिशन पर जाने की क्या जरूरत है, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और बदले में शायद कुछ नहीं मिलता. लेकिन शायद हम यह भूल जाते हैं कि अंतरिक्ष में हमारी सफलता से ही हम विकसित देश बन पाएंगे. इस के बिना हम नए संसार की खोज नहीं कर पाएंगे.

चीन से मुकाबले की तैयारी

चीन के मुकाबले भारत का सैटेलाइट सिस्टम अभी भी पीछे है. इसलिए डीआरडीओ अग्नि-5 मिसाइल को ऐंटीसैटेलाइट मिसाइल के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है. भारत चीन से मुकाबला करने के लिए अपनी सामरिक और सामुद्रिक युद्ध क्षमता को और ताकतवर बनाने के लिए सैटेलाइट सिस्टम पर काम कर रहा है. भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह दुश्मन पर नजर रखने का अवसर देता है. इस से प्राप्त परिणामों का इस्तेमाल सशस्त्र बलों द्वारा भी किया जा सकता है. अंतरिक्ष युग की शुरुआत में अंतरिक्ष कार्यक्रम सेना के बलबूते ही चलाए जाते थे, लेकिन आज भारत समेत हर जगह नागरिक अंतरिक्ष शोध ही अधिक विकसित हैं. इस का भरपूर फायदा नागरिकों को मिल रहा है. आज भारत मानवयुक्त अंतरिक्षयान चांद और मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहा है.

पहली अंतरिक्ष वेधशाला का प्रक्षेपण

28 सितंबर, 2015 को देश ने अपनी पहली अंतरिक्ष वेधशाला ‘एस्ट्रोसैट’ को प्रक्षेपित कर दिया. यह अंतरिक्ष अध्ययन के क्षेत्र में देश की एक बड़ी सफलता है. दरअसल, इस का उद्देश्य ऐसे विकास की ओर है, जिस से कि अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाया जा सके. भारत में सफलतापूर्वक रिमोट सैंसिंग तकनीक भी विकसित की जा रही है. ‘एस्ट्रोसैट’ खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने वाला भारत का पहला उपग्रह है. इस उपग्रह के सफलतापूर्वक लौंच के साथ इसरो ने कामयाबी की एक और मिसाल कायम की है. इस के साथ ही पहली बार अमेरिका अपने सैटेलाइट लौंचिंग के लिए भारत की मदद ले रहा है, जो अंतरिक्ष बाजार में भारत की धमक का स्पष्ट संकेत है. भारत 19 देशों के 45 से ज्यादा सैटेलाइट्स लौंच कर चुका है और यह पहली बार है कि अमेरिका ने किसी सैटेलाइट लौंचिंग के लिए भारत की मदद ली है. अमेरिका 20वां ऐसा देश है, जो कमर्शियल लौंच के लिए इसरो से जुड़ा है.

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