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एंड्रायड में पहले से हैं iOS 10 के कुछ खास फीचर्स

हाल ही में एप्‍पल के द्वारा आईफोन और आईपैड के लिए नए ऑपरेटिंग सिस्‍टम iOS 10 को लांच कर दिया गया है. एप्‍पल की मानिए तो यह अब तक सबसे अलग और अपडेटेड ओएस है लेकिन स्‍मार्टयूजर्स का कहना है कि इसमें दिए जाने वाले कई फीचर्स पहले से ही एंड्रायड में उपलब्‍ध हैं. आइए डालते हैं एक नजर कि iOS 10 के कौन से 10 फीचर पहले से एंड्रायड में मौजूद हैं

लॉक स्‍क्रीन यूआई  

iOS 10 के मुताबिक लॉक स्‍क्रीन यूआई में मेजर चेंजेस किए गए हैं. 3डी टच कंट्रोल का उपयोग किया गया है. नए डिजाइन में लॉक स्क्रीन में कंटेंट कार्ड स्टाइल में आते हैं. राइट साइड में आप स्‍वाइप करके विजेट्स भी देख सकते हैं. जबकि ये सारे फीचर्स पहले से ही एंड्रायड में उपलब्‍ध हैं.

क्‍लीयर ऑल नोटिफिकेशन

iOS 10 में क्‍लीयर ऑल नोटिफिकेशन को लांच किया गया यानि आपके फोन में हर एप के कई नोटिफिकेशन पड़े हुए हैं जिन्‍हें आपको एक साथ हटा देना है तो हटा सकते हैं. जबकि एंड्रायड में लॉलीपॉप वर्जन से ही यह सुविधा यूजर्स को दी जा रही है.

राइज टू अवेक

फोन की बटन को बिना दबाएं डिस्‍प्‍ले को एक्टिव करने की सुविधा, राइज टू अवेक कहलाती है. iOS 10 ने यह अब लांच किया जबकि एंड्रायड में यह फीचर काफी पहले से है.

ब्रॉड ओपन सीरी

iOS 10 ने सीरी को ज्‍यादा ब्रॉड किया है जिसका उपयोग थर्ड पार्टी एप में भी मैसेज भेजने के लिए किया जा सकता है, साथ ही सेंड वीचैट या सेंड व्हाट्सएप बोलकर इन एप्लिकेशन के साथ सीरी का उपयोग करने में कोई कठिनाई नहीं होगी. साथ ही साथ, सीरी फोटो सर्च करने के लिए और वर्कआउट व बुकिंग के लिए भी यूजफुल होगा. जबकि एंड्रायड में यह फीचर पहले से ही दिया गया है.

क्विक टाइप कीबोर्ड

iOS 10 ने क्विक टाइप कीबोर्ड को लांच किया ताकि यूजर्स,मैसेज और कंटेंट के आधार पर आसानी से जल्‍दी ही अपनी बात को लिख सकें. जबकि एंड्रायड में यह फीचर काफी टाइम से यूजर्स की हेल्‍प करता आ रहा है.

आई मैसेज

iOS 10 ने आई मैसेज के फीचर्स में काफी बदलाव किए हैं जो कि यूजर्स के लिए हेल्‍पफुल होंगे. जबकि गूगल द्वारा एलो मैसेज में इससे कहीं ज्‍यादा फीचर्स उपलब्‍ध हैं और एप्‍पल इससे इंकार भी नहीं कर सकता है.

स्‍टॉक एप्‍स को अनइंस्‍टॉल करना

iOS 10 में कुछ स्‍टॉक एप्‍स को अनइंस्‍टॉल करने की सुविधा दी गई है जो कि यूजर्स के लिए राहत की बात है. यह फीचर्स पहले किसी भी ओएस वर्जन में उपलब्‍ध नहीं था, सिवाय एंड्रायड के. अगर iOS 10 वाले फोन में प्‍ले बुक, प्‍ले गेम और न्‍यूज स्‍टैंड एप ऑलरेडी इंस्‍टॉल है तो आप उसे हटा सकते हैं.

वॉयस मेल

iOS 10 ने वॉयस मेल की सुविधा लांच की है जिसमें वाइस मेल ट्रांसक्रिप्शन में ​थर्ड पार्टी एप्स की सहायता से जाना जा सकता है कि कौन सा कॉल स्पैम है और कौन सा कॉल आप उठा सकते हैं. एंड्रायड के नेक्‍सेस फोन में यह सुविधा काफी पुरानी है. लेकिन एप्‍पल ने इसे इसी वर्जन में लांच किया है.

मैप

iOS 10 ने एप्‍पल मैप में काफी बदलाव किए हैं. यह आपको आपके कार्य में लगने वाले समय के बारे में, आसपास के होटल, रेस्‍टोरेंट और बैंक व रूट आदि की सही जानकारी देने में सक्षम होगा. नेवीगेशन के माध्‍यम से रूट की सटीक जानकारी प्राप्‍त होगी. अगर आप किस कारणवश गलत रास्‍ते पर चले जाते हैं तो तुरंत नया और सही रास्‍ता आपको बताएगा. ये सारे फीचर्स, एंड्रायड फोन में पहले से ही गूगल मैप में मिलते आएं हैं.

फोटो एप में चेहरा पहचानना

iOS 10 में फेस रिक्‍ग्‍नेशन फीचर आ गया है जबकि एंड्रायड में यह काफी पहले से ही उपलब्‍ध था.

लव यू आलिया: स्तरहीन फिल्म, पैसा व समय बर्बाद न करें

आमतौर पर धारणा यही है कि दक्षिण की क्षेत्रीय भाषा की फिल्में अच्छे कंटेंट व बेहतरीन तकनीक के साथ बनायी जाती हैं. लेकिन कन्नड़, तेलगू व हिंदी में एक साथ निर्मित़ फिल्म ‘‘लव यू आलिया’’ के साथ ऐसा नहीं कहा जा सकता. 17 जून को रिलीज हो रही हिंदी  फिल्म ‘‘लव यू आलिया’’ एक ऐसी स्तरहीन फिल्म है, जिसे देखना समय व पैसे की बर्बादी करना है. इसी फिल्म के साथ हिंदी फिल्म ‘‘तेरे नाम’’ फेम अदाकारा भूमिका चावला ने अभिनय में वापसी की है. फिल्म में पटकथा व कहानी का कोई सिर पैर नजर नहीं आता.

फिल्म‘‘लव यू आलिया’’ देखने के बाद एक सवाल उठना स्वाभाविक है कि हर अभिनेत्री फिल्मों में अपनी वापसी अति घटिया फिल्म के साथ ही क्यों करती है. फिल्म की शुरूआत होती है सुदीप के इंटरव्यू के साथ. इस इंटरव्यू में वह अपनी जिंदगी में अपने परिवार व अपनी बेटी की अहमियत की बात करते है. इंटरव्यू खत्म होने से पहले ही कहानी बहुत बड़े गुंडे जुल्फी (पी रविशंकर) द्वारा स्मिता के सामने शादी का प्रस्ताव रखने की ओर मुड़ जाती है. स्मिता अपने प्रेमी सुमंत के साथ शादी करना चाहती है. जिसकी मदद के लिए किरण (चंदन कुमार) आता है, जो कि शादियां करवाने व तुड़वाने का ही काम करता है.

इसी के चलते किरण की मुलाकात आलिया(संगीता चैहाण)से हो जाती है. आलिया को  विवाह संस्था में यकीन ही नहीं है. इंटरवल के बाद फिर फिल्म की शुरूआत सुदीप के इंटरव्यू के साथ होती है और अचानक कहानी किरण व आलिया की प्रेम कहानी की ओर मुड़ जाती है. जुल्फी, स्मिता व सुमंत का कोई अता पता नहीं. आलिया, किरण के प्यार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, पर शादी नहीं करना  चाहती. क्योंकि उसके माता पिता का तलाक हो चुका है.

आलिया की मां भूमि (भूमिका चावला) बहुत मशसहूर डांसर है, जिनका अपना डांस ट्रेनिंग स्कूल है. जबकि आलिया के पिता मशहूर डॉक्टर रवि (रवि चंद्रन) हैं. अब किरण भूमि व डॉक्टर रवि को मिलाने के लिए एक खेल रचता है और वह डॉक्टर रवि के अस्पताल में लड़की का रूप धर कर नर्स बन जाता है और फिर ऐसे वाहियात घटनाक्रम घटित होते हैं, जिन पर यकीन करना असंभव है.

पूरी फिल्म देखकर लगता है कि निर्देशक इंद्रजीत लंकेश के पास कोई पटकथा नही थी. सिर्फ कुछ चीजें दिमाग में थी. जो कलाकार मिल गए, उनके साथ कुछ सीन फिल्मा लिए और फिर उन्हें जोड़कर एक फिल्म की तरह परोस दिया. घटिया पटकथा व घटिया निर्देशन के साथ साथ तमाम चीजें समझ से परे हैं. जबकि फिल्म को बैंकाक, कश्मीर, मुंबई में फिल्माया गया है. फिल्म के संगीतकार जस्सी गिफ्ट का संगीत भी प्रभावहीन है. सनी लियोनी का आइटम नंबर भी आकर्षित नहीं करता. फिल्म में कुछ घटिया द्विअर्थी संवादों का भी समावेश है.

सम्मी ननवानी निर्मित फिल्म ‘‘लव यू आलिया’’ के निर्देशक इंद्रजीत लंकेश, पटकथा लेखक इंद्रजीत लंकेश व जनार्दन महर्षि, संगीतकार जस्सी गिफ्ट तथा कलाकार हैं-वी रवि चंद्रन, भूमिका चावला, चंदन कुमार,संगीता चैहाण.

धनकः नागेश कुकनूर की मर्मस्पर्शी फिल्म

मेहनत करने वालों की हार नहीं होती तथा ईमानदार कोशिश कभी बेकार नही जाती. इस संदेश को दो बच्चों के माध्यम से फिल्म ‘‘धनक’’ में जिस खूबसूरती से फिल्मकार नागेश कुकनूर ने पेश किया है, उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. फिल्म में इस बात को भी पुरजोर तरीके से रेखांकित किया गया है कि इस संसार में सभी बुरे नहीं हैं. इसी के साथ बौलीवुड के दो बडे़ स्टार कलाकारों सलमान खान और शाहरुख खान के प्रशंसको के बीच जिस तरह आपसी रंजिश होती है, उसे भी दो छोटे भाई बहनों की आपसी नोकझोंक से बहुत रोचक तरीके से नागेश कुकनूर ने अपनी फिल्म ‘‘धनक’’ में पेश किया है.

यह एक अलग बात है कि यह कलाकार अपने प्रशंसकों की परवाह नहीं करते. इस बात को शाहरुख खान अपनी फिल्म ‘‘फैन’’ के माध्यम से कुछ समय पहले ही कह चुके हैं. इस फिल्म में आठ वर्षीय छोटू, जो कि अंधा है, वह सलमान खान का फैन है. जबकि उसकी तेरह वर्षीय बहन परी शाहरुख खान की फैन है.

कहानी के केंद्र में राजस्थान के उक गांव में रह रही तेरह वर्षीय परी (हेतल गाड़ा) और उसका आठ वर्षीय छोटा भाई छोटू (कृष छाबरिया) है, जो कि अंधा है. यह दोनो अपने माता पिता की मौत के बाद से अपने चाचा (विपिन शर्मा) और चाची (गुलफाम खान) के साथ रहते हैं. चाची इनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती. चाची इन बच्चों को सिर्फ बाजरे की सूखी रोटी खाने के लिए देती है, जिसके चलते धीरे धीरे छोटू की आंखें चली गयी. पर परी ने प्रण किया है कि वह अपने भाई छोटू के नौंवें जन्म दिन पर उसकी आंखे लौटाकर रहेगी.

परी, शाहरुख खान की प्रशंसक और छोटू सलमान खान का प्रशंसक है. दोनों के बीच सलमान व शाहरुख को लेकर नोकझोक होती रहती है. छोटू निडर व ईमानदार है. छोटू को झूठ बोलना पंसद नहीं. परी हमेशा अपने भाई की रक्षा करती रहती है. एक दिन परी की नजर शाहरुख खान के उस पोस्टर पर पड़ती है, जिसमें शाहरुख खान लोगों से नेत्रदान करने की अपील कर रहे हैं. इस पोस्टर को परी अपने साथ घर ले आती है और अब उसे लगता है कि शाहरुख खान उसके भाई की आंखे वापस दिलाने में मदद करेगा. इसलिए परी हर दूसरे दिन शाहरुख खान के नाम एक पत्र लिखकर भेजना शुरू करती है.

शुरूआती दो पत्र पोस्टमास्टर अपनी तरफ से डाक टिकट लगाकर भेज देते है. पर बाकी की चिट्ठियां वह अपने पास जमा करके रखता रहता है और एक दिन परी के चाचा को दे देता है. तभी परी को पता चलता है कि शाहरुख खान जैसलमेर में एक फिल्म की शूटिंग कर रहा है. वह जैसलमेर जाकर शाहरुख खान से मिलना चाहती है. पर उसके चाचा तैयार नहीं होते. क्योंकि जैसलमेर उनके गांव से तीन सौ किलोमीटर दूर है. फिर चाचा कोई काम नहीं करते, दिन भर हुक्का गुड़गुड़ाते रहते हैं. चाची पैसे देने से रही. पर परी ने जैसलमेर जाकर शाहरुख खान से मिलने की ठान ली. वह रात में अपने भाई छोटू को लेकर घर से जैसलमेर के लिए निकल पड़ती है.

इस यात्रा के दौरान सबसे पहले भाई बहन की पानी की प्यास बुझाने का काम एक ट्रक ड्रायवर करता है. फिर एक ट्रैक्टर पर जा रही बारात उन्हे कुछ दूर ले जाती है. फिर एक पंडित उन्हे अपने हिसाब से फांसने का काम करता है, पर रास्तें में एक बंजारन उन्हे बचा लेती है. एक अमरीकन नागरिक, एक पागल ट्रक ड्रायवर व मेकेनिक सहित कई लोग मिलते हैं. अंततः छोटू को उसकी आंखे मिल जाती है. परी को लगता है कि शाहरुख खान ने आकर डाक्टर से बात करके आपरेशन करवा दिया.

कुछ वर्ष पहले नागेश कुकूनर के पास एक छोटी सी कूरियर कंपनी का विज्ञापन फिल्म बनाने का आफर आया था. जिसमें गांव की कूरियर कंपनी एक अंधा लड़के व उसकी बहन की मदद करती हैं. पर यह विज्ञापन फिल्म नही बनी. मगर विज्ञापन फिल्म की इस मूल कल्पना नागेश कुकूनर के दिमाग में बसी रही ओर एक दिन उसी मूल कल्पना/विचार पर नागेश कुकनूर बच्चों के लिए फिल्म ‘धनक’ का लेखन व निर्देशन कर डाला, जो कि अब लोगों के सामने है.

नागेष कुकनूर ने दिल को छू लेने वाली यह भावनात्मक कथा जिस अंदाज में सिनेमायी परदे पर उतारी है, उसे देखते हुए दर्शक अपनी सीट से नहीं उठता. एक घंटे 56 मिनट की अवधि वाली इस फिल्म को लोग बिना इंटरवल के एक साथ देखते हुए भी बोर नहीं होते हैं. यह फिल्म भावनात्मक स्तर पर भी लोगों को बांधकर रखती है. फिल्म में गांव से जैसलमेर तक की परी व उसके अंधे छोटे भाई छोटू की यात्रा काफी रोचक, मर्मस्पर्शी, रूला देने वाली महज बहुत ही ज्यादा स्वाभाविक है. फिल्म में एक भी बनावटी या कपोल कल्पित नजर आने वाला सीन नही है. फिल्म में शाहरुख खान व सलमान खान को लेकर बहन भाई के बीच जो बहस होती है, उससे इनके प्रशंसक और खुद यह दोनो स्टार कलाकार गौरवान्वित महसूस करेंगे. छोटू अंधा है, मगर एक भी मेलोड्रामैटिक सीन नहीं है.

कृष छाबरिया और हेतल गाड़ा ने जबरदस्त परफार्मेंस दी है. खुद को स्टार मानने वाले कई दिग्गज कलाकारों को कुछ तो इन बच्चों से सीखना चाहिए. हर फिल्मकार को ‘‘धनक’’ देखकर नागेश कुकनूर से सीखना चाहिए कि मानवीय भावनाओं व संवेदनाओं से ओतप्रोत फिल्म किस तरह बनायी जाती है. इतना ही नहीं निर्देशक ने राजस्थान के गांवों के जीवन को भी यथार्थरूप में परदे पर उकेरा है. राजस्थानी फोक संगीत व राजस्थानी संस्कृति का बेहतरीन उपयोग किया गया है.

फिल्म देखकर बाहर निकलते समय दर्शक सोचने पर मजबूर होगा कि ‘‘जिंदगी आसान नहीं है, तो क्या हुआ. ईमानदार कोशिश व मेहनत से जिंदगी आसान बन सकती है.’’

मनीष मुंद्रा और नागेश कुकनूर निर्देशित व लिखित फिल्म ‘‘धनक’’ के कलाकार हैं-‘‘हेतल गाड़ा, कृष छाबरिया, विपिन शर्मा, गौहर खान, विभा छिब्बर, विजय मौर्य व अन्य. संगीतकार तपस रेलिष्या, कैमरामैन  चिरंतन दास.

इन के इशारे पर नाचती है दुनिया

अगर एक तकनीकी सवाल पूछा जाए कि देश में सब से ताकतवर लोगों में आप किन्हें गिनते हैं तो निश्चित रूप से आप का जवाब होगा सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, क्योंकि तकनीकी रूप से सच यही है. आईएएस अधिकारी देश में एक व्यक्ति के रूप में सब से ताकतवर प्रोफाइल है. लेकिन यह सच महज तकनीकी है, क्योंकि व्यवहारिक दुनिया में आईएएस अधिकारी पर शासन करते हैं राजनेता. यह सिर्फ हिंदुस्तान का सच नहीं है, पूरी दुनिया का सच है. यह भी समझ लीजिए कि यह सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था की भी बात नहीं है. दुनिया में जितनी तरह की व्यवस्थाएं हैं उन सभी तरह की व्यवस्थाओं में राजनेता शिखर पर हैं. रास्ता कोई भी हो, तर्क किधर से भी निकले मगर सभी तरह की व्यवस्थाओं में किसी न किसी रूप में शिखर पर राजनेता ही हैं. चाहे भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश हों, चाहे इंगलैंड और जापान जैसे संवैधानिक राजतंत्र हों या फिर चीन जैसे समाजवादी देश.

सभी देशों की सत्ता में राजनेता ही विराजमान हैं. हर जगह अंतिम रूप से उन्हीं का शासन है. दुनिया में जो भी परिवर्तन होते हैं, उन्हीं की मरजी या सहमति से होते हैं या हो रहे हैं, अगर कुछ नकारात्मक परिवर्तनों को छोड़ दें. भले रिसर्च या खोजें वैज्ञानिक करते हों मगर उन खोजों को सामाजिक जामा राजनेता ही पहनाते हैं.

सवाल है आखिर क्यों? क्योंकि हजारों सालों की तमाम व्यवस्थाओं को देखने के बाद दुनिया इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जनप्रतिनिधियों का शासन ही अब तक की सब से उत्तम व्यवस्था है. भले ही इन जनप्रतिनिधियों के चुने जाने के तौरतरीके अलगअलग हों.

इसलिए पिछली 3 सदियों से हर समय दुनिया को दिशा देने के लिए ताकतवर राजनेताओं की फौज मौजूद रही है, चाहे द्वितीय विश्वयुद्ध के समय मौजूद चर्चिल, ट्रूमैन, गांधी, माओत्से तुंग और जोसेफ स्टालिन जैसे राजनेता रहे हों या बाद में जवाहरलाल नेहरू, नासिर, टीटो, निक्सन, कैनेडी, रुश्चेव और इंदिरा गांधी रही हों. देंगश्याओपिंग, रोनाल्ड रीगन, मिखाइल गोर्बाचोव, मार्ग्रेट थैचर इस के बाद के बड़े और दुनियाभर में अपना प्रभाव रखने वाले नेता रहे हैं. इसी क्रम में जौर्ज बुश, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा, पी वी नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी तक और गोर्बाचोव, येल्तसिन से होते हुए पुतिन तक आ पहुंचे हैं.

मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी

सवाल है आज दुनिया में कौनकौन से ऐसे राजनेता हैं जिन का उत्तरी गोलार्द्ध से, दक्षिणी गोलार्ध या दूसरे शब्दों में समूची दुनिया में असर है? बराक ओबामा तो मनमोहन सिंह के लिए कहा करते थे जब आप बोलते हैं तो पूरी दुनिया गौर से सुनती है.

पिछले डेढ़ सालों से नरेंद्र मोदी के लिए यह कहा भर ही नहीं जा रहा बल्कि देखा भी जा रहा है, फिर चाहे अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर में उन का रौक स्टार की तरह उभरना हो या फिर महज 3 हफ्तों में उन की योग के लिए एक विश्व दिवस हासिल कर लेने की बात रही हो. हालांकि इधर कुछ महीनों में मोदी की चमक फीकी पड़ी है. उन के कई दावे फोटोशौप तकनीकी से आंखमिचौली करते पकड़े गए हैं तो हाल में कई बेहद संवेदनशील मामलों में उन की चुप्पियां हैरान करती रही हैं. पहले दादरी हत्याकांड में उन की लंबी चुप्पी ने देश को बेचैन किया, तो उस के बाद रोहित वेमुला की आत्महत्या में वे उम्मीद से लेट बोले और अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मामले में भी वे बोलने से जिस तरह बच रहे हैं, उस से उन को कोई फायदा नहीं हुआ, उलटे नुकसान हुआ है. वह भी सिर्फ देश के स्तर पर ही नहीं, विदेशों में भी.

ताकतवर राजनेता

विदेशी मीडिया हैरान है कि मोदी अपनी चुप्पियों से अपनी हासिल की गई कमाई को डुबोने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? फिर भी मोदी अभी दुनिया के ताकतवर रोजनेताओं में शामिल हैं. हालांकि दुनिया के लोकप्रिय नेताओं के स्तर पर उन्हें अभी टौप-10 में जगह नहीं मिलती. ऐसे में यह सहज जिज्ञासा बन जाती है कि फिर दुनिया के मौजूदा ताकतवर राजनेताओं का क्रम क्या है? आइए देखते हैं- फोर्ब्स पत्रिका जिस तरह दूसरे क्षेत्रों के लिए ताकतवर लोगों की सूची बनाती है, उसी तरह से उस ने एक साझी सूची बनाई है. जिस में सभी क्षेत्र के सब से ताकतवर लोग शामिल हैं. लेकिन इस की शुरुआत में ज्यादातर राजनेता ही हैं, इसलिए यह बात निर्विवादित तरीके से साबित होती है कि राजनेता ही दुनिया में सब से ताकतवर होते हैं. फोर्ब्स की मौजूदा सूची के मुताबिक, दुनिया के सब से ताकतवर राजनेता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं. फोर्ब्स ने उन्हें लगातार दूसरे साल दुनिया के शीर्ष राजनेता के बतौर चुना है.

व्लादिमीर पुतिन

मार्शल आर्ट के क्षेत्र में ब्लैकबैल्ट हासिल करने वाले व्लादिमीर पुतिन ने पिछले 2 सालों से यह स्थान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को पछाड़ते हुए हासिल किया है. इस तरह देखा जाए तो शीतयुद्ध के दिनों का दुनिया का 2 महाशक्तियों के रूप में बंटा होना वैयक्तिक रूप में एक बार फिर से जीवंत हो रहा है. भले, आज यह बंटवारा 2 देशों के मुकाबले इन देशों के प्रमुखों के रूप में ही सिमट गया हो.

फोर्ब्स के मुताबिक, ‘‘वैश्विक स्तर पर तमाम विरोधों के बावजूद उन्होंने जिस तरह क्रीमिया का अधिग्रहण किया और यूके्रन में विद्रोहियों को सैन्य समर्थन जारी रखा, सीरिया में बमबारी की, साथ ही नाटो जैसे फौजी संगठन के तमाम थिंकटैंकों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि रूस आशंकित विश्वयुद्ध की बागडोर थाम सकता है. वह उन के हौसले और निडरता का जीताजागता सुबूत है.’’ दुनिया के तमाम कोनों से उन्हें धमकियां मिलीं. कई बार अमेरिका ने अपने स्वाभाविक यूरोपीय मित्रों के साथ भी रूस को धमकी दी लेकिन पुतिन का आत्मविश्वास एक पल के लिए भी कमजोर नहीं पड़ा.

बराक ओबामा

निश्चित रूप से दूसरे स्तर पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ही हैं. जिन्हें खुद ही नहीं, तमाम अमेरिकी नीति नियंताओं को भी पहले पायदान में न होने से कोफ्त होती है. बहरहाल, पिछले दिनों फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें ‘हीरो औफ होप’ के खिताब से नवाजा है, जो कि विकास और भविष्य के संबंध में सर्वाधिक सकारात्मक ताकत का प्रतीक है. फोर्ब्स ने दुनिया के सभी क्षेत्रों के जिन सर्वोच्च ताकतवर 72 व्यक्तित्वों का चयन किया है, उन में ओबामा दूसरे स्थान पर हैं.

फोर्ब्स के मुताबिक, दूसरे टर्म की आधी से ज्यादा पारी पार कर चुके ओबामा के सामने पश्चिम अफ्रीका में इबोला बीमारी के बाद अब अफ्रीका के साथसाथ लैटिन अमेरिका में बड़े पैमाने पर फैले जीका वायरस को महामारी बनने से रोकना और खूनी संगठन आईएसआईएस से निबटना सब से बड़ी चुनौतियां हैं. हाल के सालों में अमेरिका में बारबार सिर उठाता नस्लवाद भी एक बड़ी चुनौती है. अगर ओबामा अपने दूसरे टर्म के खत्म होने के पहले इन समस्याओं से कायदे से निबट पाते हैं, जैसे कि अभी तक वे करते रहे हैं, तो निश्चित रूप से वे अमेरिका को दुनिया के नक्शे में विकल्पहीन महाशक्ति बनाए रखेंगे.

शी जिनपिंग

पिछले साल के आखिर में इंगलैंड की आर्थिक पत्रिका ‘द इकोनौमिस्ट’ ने खुलासा किया था कि शायद चीन की अर्थव्यवस्था ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पछाड़ दिया है. इस तरह कुछ दशक पहले राजनीतिक हलकों में चीनी सदी का जो व्यंग्य इस्तेमाल हुआ करता था वह अब मूर्तरूप लेता दिख रहा है. बावजूद इस के कि तमाम पश्चिमी विशेषज्ञ चीखचीख कर यह भी कह रहे हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था रफ्तार खो चुकी है और अपना भविष्य भी. लेकिन जीडीपी के मामले में चीन का अमेरिका से ऊपर पहुंचना या लगभग उस के बराबर पहुंचना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. इस का श्रेय कोई न भी चाहे तो भी राजनेताओं को ही मिलेगा और यह स्थिति चीनी राजनेताओं को अमेरिकी राजनेताओं के बराबर खड़ी करती है. शायद इसीलिए पुतिन और ओबामा के बाद तीसरे स्थान पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का होना लाजिमी है. उन्हें ‘वैरियर औफ करप्शन’ की उपाधि से नवाजा गया है. क्योंकि जब से वे सत्ता में आए हैं, कई भ्रष्ट चीनी राजनेताओं को सजा हो चुकी है, कुछ को सजा-ए-मौत तक. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग फोर्ब्स की सूची में तीसरे स्थान पर हैं. 2 साल से सत्तारूढ़ जिनपिंग के बारे में माना जा रहा है कि वे माओत्से तुंग के बाद सब से ताकतवर चीनी राजनेता बन कर उभरे हैं.

एंजेला मर्केल

दुनियावी हलचल और भविष्य की संभावनाओं के नजरिए से देखा जाए तो भारत के राजनेता का चौथा स्थान होना चाहिए. मगर ऐसा नहीं है. यह हैसियत दिल्ली के खाते से अभी दूर है. दुनिया के नक्शे में अभी भी भारत एकसाथ अपार संभावनाओं वाले और अपार समस्याओं वाले देश के रूप में दर्ज है. इसलिए चौथे स्थान पर जरमनी की चांसलर एंजेला मर्केल हैं. उन्हें राजनीति के गलियारे में सी पावर इन पौलिटिक्स भी कहा जाता है. एंजेला मर्केल का यूरोप की राजनीति और आर्थिक पटल पर अपना अहम स्थान है. अर्थव्यवस्था के मामले में जरमनी यूरोप में अन्य देशों से कहीं अधिक शक्तिशाली है. इसलिए जरमन चांसलर दुनिया के ताकतवर राजनेताओं की लिस्ट में तो चौथे स्थान पर हैं लेकिन संपूर्णता में ताकतवर लोगों की सूची में उन का स्थान 5वां है. गौरतलब है कि उन्होंने पिछले साल के चुनावों में जीतने के बाद तीसरी बार जरमनी की कमान संभाली है.

डेविड कैमरन

करिश्माई ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने ब्रितानी सत्ता में एक बार फिर से लौट कर मीडिया के तमाम आकलन को तो झुठला दिया ही है, जिस तरह से उन्होंने अपने भरोसे और दिलेरी के चलते, स्कौटलैंड ब्रिटेन में रहे या न रहे, इस इश्यू पर चुनाव करा दिया, उन के जोखिम उठाने के स्वभाव का परिचायक है. हालांकि यह बात भी सही है कि वे स्कौटलैंड को हारतेहारते बचे थे. और यह भी सही है कि वे इंगलैंड की सत्ता में बने रहने का चुनाव जीतते कतई नहीं लग रहे थे. मगर यदि फिर भी जीत गए तो यह उन की ताकत है. कैमरन दुनिया की छठवीं सब से बड़ी राजनीतिक हस्ती हैं. जबकि सभी किस्म के ताकतवर लोगों की सूची में उन का स्थान 10वां है. कैमरन को आधुनिकतापसंद नेता समझा जाता है. वे ट्विटर पर भी काफी सक्रिय रहते हैं.

कैमरन के बाद दुनिया के ताकतवर राजनेताओं की सूची में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्थान है, जिन्हें फोर्ब्स ने ‘रौक स्टार मोदी’ की संज्ञा दी है. नरेंद्र मोदी ताकतवर राजनेताओं की फोर्ब्स सूची में छठें नंबर पर आते हैं. हालांकि सभी क्षेत्रों के साझे सर्वाधिक ताकतवर लोगों की सूची में उन को 15वां स्थान दिया गया है.        

अब नहीं दिख पाएगा चौके-छक्के का मजेदार इशारा

वैसे तो अंपायर अपने अलग-अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते है. इंग्लैंड के अंपायर डेविड शेफर्ड नेल्सन नंबर पर कूदने की वजह से काफी लोकप्रिय थे. वेस्टइंडीज के अंपायर स्टीव बकनर निर्णय देने से पहले समय लेने के लिए जाने जाते थे. लेकिन स्टाइल के मामले में अगर किसी अंपायर ने क्रिकेट प्रेमियों का सबसे ज्यादा दिल जीता है तो वह हैं न्यूज़ीलैंड के अंपायर बिली बॉडन. बिली बॉडन अपनी खास अंपायरिंग शैली के लिए मशहूर हैं.

बिली की निर्णय देने की शैली ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच उन्हें लोकप्रिय बना दिया. अलग अंदाज के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय अंपायर बिली बॉडन को न्यूजीलैंड क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय पैनल से हटा दिया गया है. लेकिन न्यूज़ीलैंड के घरेलू मैचों में वह अंपायरिंग करते रहेंगे. बॉडन का चौके, छक्के और आउट होने जैसे क्रिकेट के फैसलों को देने का अंदाज दूसरे अंपायरों से जुदा था.

क्रिकेटर बनने की थी ख्‍वाहिश

दरअसल बिली बॉडन तेज गेंदबाज़ बनना चाहते थे लेकिन 21 साल की उम्र में रुमेटी (गठिया) बीमारी के वजह से उनके क्रिकेटर बनने का सपना खत्म हो गया. इतनी कम उम्र में इस बीमारी की वजह से बिली काफी निराश थे. उनको लग रहा था कि ज़िंदगी उनका इम्तिहान ले रही है. उनके साथ नाइंसाफी हो रही है. लेकिन बिली हार मानने वाले नहीं थे.

जब बिली बॉडन यह सोच रहे थे कि क्रिकेट और उनका रिश्ता खत्म होने जा रहा है तब किस्मत ने उनके सामने एक नया रास्ता खोल दिया था और वह था अंपायरिंग. क्रिकेटर तो नहीं बन पाए लेकिन अंपायर बनते हुए मैदान के अंदर क्रिकेटरों के मास्टर बन गए.

बीमारी ने बिली को बनाया लोकप्रिय

बिली को जब पता चला कि वह रुमेटी की बीमारी से पीड़ित हैं तो वह शर्मिंदा महसूस करने लगे. पहले इस बीमारी के बारे में वह किसी को नहीं बता रहे थे लेकिन धीरे धीरे वह समाज का सामना करने सीखे. क्रिकेट छोड़कर अंपायरिंग में अपना करियर शुरू किया.

2009 में न्यूज़ीलैंड के प्रसिद्ध अखबार को इंटरव्यू देते हुए बिली ने बताया था कि यह बीमारी उन के लिए सही साबित हुई. अगर वह इस बीमारी से पीड़ित नहीं होते और क्रिकेट खेल रहे होते तो हो सकता हैं कि आज वह इतना लोकप्रिय नहीं होते. बिली का कहना था कि इस बीमारी की वजह से पूरी दुनिया आज उनको जानती है.

बीमारी के वजह से नहीं कर पाते अंगुली सीधा

इस बीमारी के वजह से बिली बॉडन अपनी अंगुली सीधा नहीं कर पाते और टेढ़ी अंगुली में उनको आउट, छक्का या चौका का निर्णय देना पड़ता है. लेकिन इस अंदाज के कारण वह क्रिकेट प्रेमियों के बीच काफी मशहूर हैं.

1995 में अपने अंपायरिंग करियर की शुरुआत करने वाले बिली बॉडन अभी तक 200 एक दिवसीय और 84 टेस्ट मैच में अंपायरिंग कर चुके हैं. 2005 में न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टी-20 मैच के दौरान बिली बॉडन ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ ग्लेन मैग्राथ को रेड कार्ड दिखाया था. उसकी वजह से वह काफी चर्चा में रहे थे.

उन्हें 2013 में आईसीसी की एलीट पैनल से हटाया गया था लेकिन उन्होंने 2014 में वापसी की. उन्हें फिर मई 2015 में बारबाडोस में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट में अंपायरिंग के बाद हटा दिया गया.

पीएनबी ने जारी की डिफॉल्टरों की सूची

सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक ने किंगफिशर एयरलाइंस और नैफेड समेत 913 विलफुल डिफॉल्टरों (जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले) की सूची जारी की है. इन बकायेदारों पर कुल 11,486 करोड़ रुपये कर्ज बकाया है.

पीएनबी की फरवरी में जारी सूची में आठ नए डिफॉल्टरों के नाम जुड़ गए हैं. इस तरह 31 मार्च 2016 को 913 डिफॉल्टर हो गए. पीएनबी द्वारा सूची में बड़े डिफॉल्टरों में विवादों में फंसे उद्योगपति विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस पर 594.44 करोड़ रुपये कर्ज बकाया है.

इस सूची में सबसे ऊपर विंसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी है. इस पर 900.06 करोड़ रुपये बकाया है. फॉरएवर प्रीसियस ज्वैलरी एंड डायमंड्स पर 747.98 करोड़ रुपये कर्ज बाकी है. अन्य बड़े बकायेदारों में जूम डवलपर्स पर 410.18 करोड़ रुपये और नैफेड पर 224.26 करोड़ रुपये बकाया हैं.

पीएनबी ने 31 मार्च 2016 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान फंसे कर्जो (एनपीए) के लिए 18,366.83 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. इसके कारण बैंक को 3974.39 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ.

पीएनबी की सूची में दूसरे प्रमुख बकायेदारों में एप्पल इंडस्ट्रीज (248.33 करोड़), एमबीए ज्वैलर्स (266.17 करोड़), रामस्वरूप ग्रुप कंपनीज (410.62 करोड़), एस. कुमार नेशनवाइड (146.82 करोड़ और राणा ग्रुप कंपनीज (169.36 करोड़) रुपये शामिल हैं.

ट्विटर का ब्लॉक बटन अब अधिक कारगर

माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के ब्लॉक बटन का उपयोग करने वाले यूजर अब एक दूसरे का ट्वीट नहीं देख पाएंगे.

ट्विटर ने अपना ब्लॉक बटन अपडेट किया है.

इससे पहले ट्विटर पर आपकी ओर से ब्लॉक यूजर का ट्वीट आपकी टाइमलाइन पर कोई दूसरा यूजर रीट्विट कर सकता था.

कंपनी ने ट्विटर ट्रॉलिंग और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया है.

ट्विटर ने कहा कि यह लोगों को आपसे संपर्क कर पाने और ट्वीट देख पाने से रोकने के लिए बेहद ताकतवर टूल है.

इसका कहना है, "जब आप ट्विटर पर किसी यूजर को ब्लॉक करते हैं, तो वे आपको न तो फॉलो कर सकते हैं, और न ही सीधा मैसेज भेज सकते हैं."

पब्लिक प्लेटफार्म होने के कारण ट्विटर पर यदि आप बिना लॉग-इन किए हुए सर्च इंजन की मदद से किसी यूजर को सर्च करते हैं, तो आप उनका अकाउंट देख सकते हैं.

लेकिन यदि आपने यूजर को ब्लॉक कर दिया है, तो वे किसी भी दूसरे माध्यम से आपके अकाउंट से जुड़ नहीं सकेंगे.

कंपनी ने एक और बड़ा बदलाव किया है. अब आप चाहें तो खुद को भी रीट्विट कर सकते हैं.

यदि आप ये जानना चाहते हैं कि किसी को कैसे ब्लॉक किया जाए तो देखें ये वीडियो.

 

स्वामी का अब जेटली पर हमला

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने बचत की दर को बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स खत्म किए जाने की वकालत की है. इसके अलावा उन्होंने ब्लैक मनी को लाने के लिए टैक्स पनाहगाहों में जमा कोष का राष्ट्रीयकरण करने का भी सुझाव दिया. स्वामी ने एक कार्यक्रम में कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली चूंकि खुद वकील है तो वह उन लोगों के अधिकारों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने काला धन विदेशों में जमा किया हुआ है. इसलिए, उन्होंने इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया.

स्वामी ने कहा, 'यदि मैं सरकार में आ जाऊं तो यह काम एक हफ्ते में कर दूंगा. आज लोगों को अधिक बचत के लिए इनकम टैक्स को पूरी तरह समाप्त करके ही प्रोत्साहित किया जा सकता है.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ही टैक्स अधिकारियों से कर आधार बढ़ाकर 10 करोड़ लोगों का करने को कहा है. वहीं, स्वामी ने कहा कि राष्ट्रीय बचत दर घटकर 33 प्रतिशत पर आ गई है. इसे बढ़ाकर कम से कम 40 प्रतिशत करने की जरूरत है. स्वामी ने कहा कि बचत दर बढ़ने से वृद्धि के लिए संसाधन मिलेंगे और इनकम टैक्स समाप्त होने से जो 2,000 अरब रुपए जाएंगे उनकी काफी हद तक भरपाई भी हो जाएगी. उन्होंने कहा कि गरीबी और बेरोजगारी समाप्त करने के लिए देश को कम-से-कम एक दशक तक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने की जरूरत है.

बीजेपी नेता ने दावा किया कि 1,20,000 अरब रुपए टैक्स बचाने के लिए विदेशों में जमा है, जिसे वापस लाने की जरूरत है. पीएम मोदी के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए स्वामी ने कहा कि पीएम काला धन वापस लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में मंजूर तरीका यानी ऐसे कोष का राष्ट्रीयकरण किए जाने के तरीके को प्राथमिकता दिए जाने के पक्ष में हैं.

अब हवा में उड़ेगी कार, गूगल का प्लान तैयार

दुनिया की आबादी जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही रफ्तार से सड़कों पर गाड़ियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह इजाफा इतनी तेज गति पकड़ चुका है कि अब दुनिया की कुछ सड़कों पर गाड़ियां चलती नहीं, बल्कि रेंगती नजर आती है. बात चाहे हिंदुस्तान की हो या फिर चीन और अमेरिका की, यह दृश्य हर कहीं आसानी से देखा जा सकता है.

अगर आपको ऑफिस टाइम पर पहुंचना हो तो ट्रैफिक सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरता है. ऐसे में गूगल ने आपकी मदद करने के लिए एक सीक्रेट प्लान तैयार किया है. गूगल जल्द ही बाजार में अपनी फ्लाइंग कार पेश कर सकता है.

दरअसल गूगल के सह संस्थापक लैरी पेज फ्लाइंग कार के दो स्टार्ट-अप पर काम कर रहे हैं, जिसमे से एक के लिए अभी तक करीब 100 मिलियन की राशि भी जुटाई जा चुकी है.

इस स्टार्ट-अप के लिए नासा के अनुसंधान केंद्र में विनिर्माण सुविधा उपलब्ध है. आपको बता दें कि बीते साल भी पेज ने इसी तरह के एक प्रतिस्पर्धी मॉडल बनाने वाले स्टार्ट-अप किटी हॉन्क को फंडिंग की थी.

किटी हॉन्क ने करीब एक दर्जन इंजीनियरों की भर्ती की थी. इसका मुख्यालय जी एरो से करीब आधे मील की दूरी पर है. यहां पर ड्रोन जैसे दिखने वाले एक विशाल संस्करण पर काम चल रहा है. पेज जिन्हें उनके कर्मचारी गॉय अपस्टेयर (जीयूएस) के नाम से भी जानते हैं, उन्होंने मांग रखी है कि इस स्टार्टअप में उनकी भागेदारी को गुप्त ही रखा जाए.

पानी में डूबे खेत, महंगा होगा टमाटर

पहले से दाम को लेकर लाल हुआ टमाटर अब और लाल हो जाएगा. टमाटर के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है. बुधवार रात हुई मूसलधार बारिश से बल्ह घाटी में टमाटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. यहां टमाटर के खेत बारिश के पानी में डूब गए हैं. खेतों में दो से तीन फुट तक पानी भर गया है.

प्री-मानसून की पहली बारिश ने टमाटर उत्पादकों के अरमानों पर एक ही झटके में पानी फेर दिया है. टमाटर की फसल खराब होने से अब आम लोगों को भी अपनी जेब ढीली करनी होगी. आने वाले दिनों में टमाटर की मांग व दाम को लेकर हाहाकार मचना तय है.बल्ह घाटी में आठ सौ हेक्टेयर में होती है टमाटर की खेती

बल्ह घाटी में करीब 800 हेक्टेयर से अधिक भूमि में टमाटर की खेती होती है. इन दिनों यहां टमाटर की फसल पूरी तरह से तैयार है. देश की राजधानी दिल्ली सहित उत्तरी भारत की अन्य सभी छोटी-बड़ी सब्जी मंडियों में टमाटर की सप्लाई बल्ह घाटी से हो रही है. यहां से रोजाना करीब 200 छोटी-बड़ी गाड़ियां पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान जा रही हैं.

बुधवार शाम तक टमाटर के 20 किलोग्राम के क्रेट का दाम 500 रुपये किलो चल रहा था. यानी किसानों को खेत में ही टमाटर के दाम 25 रुपये प्रति किलो मिल रहे थे. बारिश से टमाटर के दाम में एकाएक उछाल आ गया है. रविवार सुबह टमाटर का 20 किलोग्राम का क्रेट 728 रुपये में बिका. एक रात में ही टमाटर के दाम में करीब 11 रुपये प्रति किलो की दर से इजाफा हुआ है. बारिश से हुए नुकसान के बाद टमाटर के दाम और बढ़ने की संभावना है. आने वाले दो-तीन दिन में टमाटर का 20 किलो का क्रेट 1000 रुपये तक पहुंच सकता है.

किसानों को बारिश से हुआ नुकसान

किसानों का कहना है कि बारिश से उनके खेत पानी में डूब गए हैं. इससे उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. मंदी के चलते गत वर्ष टमाटर का 20 किलो का क्रेट 50 से 100 रुपये तक बिका था. क्षेत्र के किसानों को इससे काफी आर्थिक नुकसान हुआ था. कई किसान कर्ज में डूब गए थे. इस बार सीजन शुरू होते ही किसानों को टमाटर के अच्छे दाम मिल रहे थे. 200 रुपये से शुरू हुए क्रेट के दाम 500 रुपये तक पहुंच गए थे. दिल्ली व अन्य राज्यों में परचून में टमाटर के दाम 100 रुपये तक पहुंच चुके हैं. अब बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने से दाम में और इजाफा होगा.

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