Download App

धोनी ने शुरू की नई पारी

महेंद्र सिंह धोनी अब जीवन की एक नई पारी खेलने जा रहे हैं. उन्होंने क्रिकेट कोच बनने कि दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.

उन्हें क्रेग मैकडरमॉट इंटरनेशनल क्रिकेट एकेडमी का ब्रांड दूत बनाया गया है. यह ऑस्ट्रेलिया की अत्याधुनिक निजी क्रिकेट और शैक्षणिक खेल एकेडमी है, जिसमें युवाओं की प्रतिभा को निखारा जाता है.

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज मैकडरमॉट की यह एकेडमी खेल विज्ञान और प्रबंधन में चार साल की स्नातक उपाधि दे रही है, जिसमें क्रिकेट पर खास फोकस है. भारत के टी-20 और वनडे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को यह आइडिया पसंद आ गया है और उन्होंने ऑफर स्वीकार कर लिया है.

टीम इंडिया को आईसीसी के सभी तीन प्रमुख खिताब दिलाने वाले धोनी ने कहा, 'गेम को वापस कुछ देने का यह मेरे पास एक सुनहरा अवसर और उपयुक्त प्लेटफॉर्म है.'

धोनी ने कहा कि वह इसका हिस्सा बनकर काफी खुश हैं, क्योंकि इससे उन्हें भारत और ऑस्ट्रेलिया के युवा क्रिकेटरों से मिलकर उन्हें सलाह देने का मौका मिलेगा.

उन्होंने आगे कहा, ‘‘सबसे खास बात यह है कि एकेडमी खेलों में रुचि लेने वाले बच्चों में पढ़ाई और खेलों के बीच सही संतुलन स्थापित करते हुए उनके खिलाड़ी बनने में मदद करेगी. अभी तक होता यह था कि ऐसे बच्चे जो पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अच्छे हैं, उन्हें दोनों में से कोई एक विकल्प चुनना पड़ता था.’’

मैकडरमॉट ने कहा कि उन्होंने हाल ही में भारतीय उपमहाद्वीप में आने का फैसला किया था.  इस ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने कहा, 'हमें एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो दुनिया के इस हिस्से में हमारे ब्रांड को पहचान दिला सके और धोनी इसके लिए एकदम सही व्यक्ति हैं.'

पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, "एमएस की बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है और वह हमारे विजन से सहमत हैं. यही वह चीज थी जिसने हमें उनसे जुड़ने को प्रेरित किया.'

गौरतलब है कि इस बीच धोनी स्पोर्ट्स फाउंडेशन को लेकर भी योजनाएं बनाई जा रही हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे युवा प्रतिभाओं को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी. यह करार सीएमआईसीए और रिती स्पोर्ट्स के बीच हुआ है, जिसके तहत धोनी सिक्योर्ड वेंचर केपिटल का वैश्विक चेहरा होंगे.

लॉन्च हुआ पहला लिक्विड-कूल्ड लैपटॉप

ताइवानी कंपनी असूस ने भारत में दुनिया का पहला लिक्विड-कूल्ड लैपटॉप लॉन्च किया है. कंपनी ने इस गेमिंग लैपटॉप को आईएफए 2015 के दौरान प्रदर्शित किया था. Asus ROG GX700 लैपटॉप की कीमत 4,12,990 रुपये है.

यह लैपटॉप केवल मांग के आधार पर उपलब्ध होगा. इसके साथ-साथ असूस ने 1,27,990 रुपये की कीमत पर ROG Strix GL502 लैपटॉप भी लॉन्च किया है.

यह लैपटॉप एक सूटकेस‌ के साथ मिलता है. यह लैपटॉप एक डीटैचेबल ROG एक्सक्लूसिव हाइड्रो ओवरलॉकिंग सिस्टम कूलिंग मॉड्यूल के साथ आता है जिसमें 92 एमएम के डुअल रेडिएटर हैं. कंपनी का कहना है कि ये 500 वाट से ज्यादा हीट को कम कर सकते हैं.

आरओजी जीएक्स700 छठवीं जेनरेशन इंटेल 'स्काईलेक' कोर आई7-6820एचके प्रोसेसर के साथ है जो फोर-कोर ऐट-थरेड 2.7 गीगाहर्ट्ज पर है. इसमें 16 जीबी डीडीआर4 रैम मौजूद है जिसे 64 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है. कंपनी ने एक अलग एनवीडिया जीफोर्स जीटीएक्स 980 जीपीयू दिया है जो 8 जीबी जीडीडीआर5 वीरैम के साथ है. इसकी स्टोरेज 512जीबी एसएसडी है.

इसमें एनवीडिया जी-सिंक टेक्नोलॉजी के साथ 17 इंच 4के यूएचडी (3840×2160 पिक्सल) डिस्‍प्ले है. कंपनी के मुताबिक, हाइड्रो ओवरलॉकिंग सिस्टम ना केवल कूलिंग की सुविधा देता है बल्कि सुपीरियर ओवरलॉकिंग भी करता है. सीपीयू 40 प्रतिशत तक ओवरलॉक हो सकता है और डीडीआर4 मेमोरी को 43 प्रतिशत तक ओवरलॉक्ड किया जा सकता है.

ROG स्ट्रिक्स जीएल502 की बात करें तो यह कॉम्पैक्ट गेमिंग लैपटॉप 15.6 इंच 4के यूएचडी डिस्प्ले के साथ है. इसमें इंटेल कोर आई7-6800एचक्यू प्रोसेसर है और ग्राफिक्स के लिए एनवीडिया जीफोर्स जीटीएक्स97एम जीपीयू है.

विकिलीक्स ने ट्विटर को दी धमकी

दुनिया को हिला देने वाले खुलासे करने के लिए चर्चित विकिलीक्स ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को अपनी माइक्रो-ब्लॉगिंग सर्विस शुरू करने की धमकी दी है. ट्विटर ने हाल ही में कंजर्वेटिव न्यूज साइट ब्रीटबार्ट के टेक एडिटर माइलो यिएनॉपोलस को स्थायी तौर पर बैन कर दिया था. विकिलीक्स ने इस कदम को 'साइबर सामंतवाद' करार देते हुए ट्विटर से कहा कि अगर यह सब ऐसे ही जारी रहा तो हम अपनी सर्विस शुरू कर देंगे.

शिकायतें मिलने के बाद और यिएनॉपोलस के ट्विटर अकाउंट को कई बार सस्पेंड किया गया था, मगर इस बारे उन्हें हमेशा के लिए बैन कर दिया गया. दरअसल उन्होंने गोस्टबस्टर स्टार लेस्ली जोन्स को ऑनलाइन ट्रॉल किया था. इस पर जोन्स ने आहत होकर ट्विटर को छोड़ने की बात कही थी.

एक बयान में ट्विटर ने कहा, 'लोगों को ट्विटर पर विभिन्न विचार रखने चाहिए, मगर किसी को भी टारगेट करना या परेशान करना सही नहीं और हमारे नियम इसके खिलाफ हैं.' द वर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक विकिलीक्स के ट्विटर अकाउंट ने इस बैन को साइबर फ्यूडलिजम करार दिया.

विकिलीक्स और ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी के बीच ऑनलाइन हुई बातचीत में विकिलीक्स ने पोस्ट किया है, 'अगर यह सब जारी रहा तो हम प्रतिद्वंद्वी सर्विस शुरू कर देंगे, क्योंकि विकिलीक्स और इसके समर्थक सामंतवादी जस्टिस की वजह से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.'

डॉर्सी ने विकिलीक्स को जवाब दिया, 'हम लोगों को विचार रखने से बैन नहीं करते. किसी को टारगेट करके परेशान करना और लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित करना अलाउड नहीं है.'

मगर विकिलीक्स ने इस बैन की तुलना तुर्की में हाल ही में बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों से की. वहीं यिएनॉपोलस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्विटर मुस्लिम आतंकियों और ब्लैक लाइव्स मैटर के चरमपंथियों को तो जगह देता है, मगर कंजर्वेटिव्स को नहीं.

इन स्मार्टफोन्स पर बंद होने वाला है Skype

पॉपुलर वीडियो कॉलिंग सर्विस स्काइप कुछ स्मार्टफोन्स के लिए अपनी सर्विस बंद करने जा रही है. कंपनी ने अपने P2P से क्लाउड में ट्रांजिशन लगभग पूरा होने वाला है. इसलिए कंपनी अक्टूबर 2016 तक पुराने एंड्रॉयड और विंडोज फोन से अपना सपोर्ट हटा रही है.

किन स्मार्टफोन्स पर बंद होगा स्काइप…

स्काइप 6.2 या उससे ऊपर के वर्जन को इस्तेमाल करने के लिए एंड्रॉयड 4.0.3 (किटकैट) या उससे ज्यादा ऑपरेटिंग सिस्टम की जरूरत पड़ेगी. एंड्रॉयड किटकैट से पहले के ऑपरेटिंग सिस्टम पर स्काइप काम नहीं करेगा. इसी तरह ऐसे यूजर्स जो विंडोज 8 या उससे कम वाला वर्जन यूज कर रहे हैं वे स्काइप नहीं चला पाएंगे.

स्काइप चीफ गुरुदीप पाल ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि ट्रांजिशन का ये काम काफी समय से चल रहा है और अभी भी पूरा नहीं हो सका है. इस दौरान यूजर्स को मैसेजेस सिंक नहीं होने और डिलेड नोटिफिकेशन जैसे कई इशूज सामने आए जिसे सॉल्व किया गया.

पाल ने आगे लिखा कि एंड्ऱॉइड 4.0.3 और विंडोज 8 से कम ऑपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन्स पर सपोर्ट बंद करने का डिसिजन हमारे लिए आसान नहीं था लेकिन स्काइप की स्मूद वर्किंग के लिए ऐसा करना पड़ा. डेस्कटॉप यूजर्स के लिए विंडोज 7, 8, XP और विस्टा पर स्काइप सपोर्ट पहले जैसा ही रहेगा. इसके अलावा Mac, iOS 8 और एंड्रॉयड 4.0.3 से ऊपर के ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर्स स्काइप का इस्तेमाल कर पाएंगे.

पोस्ट में आगे कहा गया है कि अब कंपनी उन डिवाइसेस पर फोकस करेगी जिनके यूजर्स ज्यादा हैं. ऐसे में हम स्काइप में नए फीचर्स जोड़ने और बेटर कॉल क्वालिटी के लिए काम कर सकेंगे. विंडोज 10 के लिए हाल ही में रिलीज हुए फास्ट UWP ऐप और iPhone, iPad, एंड्रॉयड के लिए स्काइप पर कंपनी का फोकस रहेगा.

ऐसी कमाई जिन पर नहीं देना पड़ता टैक्स

आयकर अधिनियम 1961 के सेक्शन 10 में 50 क्लॉज हैं, जिसमें कुल 108 तरह की आय बताई गईं हैं जो कर योग्य नहीं होती हैं. सामान्य करदाता इन जटिल धाराओं को पढ़ने और इनके कार्यान्वयन में सक्षम नहीं होते हैं.  कुछ ऐसे आय भी हैं जिन पर कोई भी कर नहीं लगता यानि आय पूरी तरह से करमुक्त होते हैं.

फाइनेन्शियल एनालिस्ट अंकित गुप्ता के मुताबिक आम करदाता का सरोकार निश्चित तौर पर सभी 108 तरह की करमुक्त आय से नहीं होता है. लेकिन कुछ आय ऐसी होती हैं जिन पर आम करदाता अपना टैक्स बचा सकता है.

करमुक्त आय के प्रावधानों में हर साल बजट के दौरान फाइनेंस बिल के माध्यम से परिवर्तन होता रहता है. हर साल कुछ नई आय इसमें जोड़ दी जाती हैं और कुछ को हटा दिया जाता है. वर्ष 2016 में करदाता के लिए कुल 108 की आय ऐसी हैं जो करमुक्त आय के अंतर्गत आती हैं.

निम्न तरह की आय पर नहीं लगता कोई इंकम टैक्स

लाभांश से होने वाली आय पर

किसी भी कंपनी की ओर से शेयर धारकों को दिए जाने वाले लाभांश पर किसी तरह का आयकर नहीं लगता है. कंपनी पहले ही डिविडेंड डिस्ट्रीब्युशन टैक्स के रूप में इसका भुगतान कर देती है. ऐसे में करदाता को किसी भी तरह के लाभांश या टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड पर मिलने वाले रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं लगता है.

PF और PPF पर मिलने वाले ब्याज पर

पीपीएफ में निवेश की गई राशि पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है. साथ ही इस पर मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इसी तरह मैच्योरिटी पर भी किसी तरह का कोई टैक्स करदाता को नहीं देना होता है. इस तरह पीएफ और पीपीएफ पर निवेश EEE यानि एक्जेम्प्ट, एक्जेम्प्ट, एक्जेम्प्ट श्रेणी में आता है.

कृषि से होने वाली आय पर

कृषि से होने वाली 5000 रुपए सालाना तक की आय करमुक्त होती है. नौकरीपेशा करदाता यदि अपनी आय का ब्यौरा देते समय अगर अन्य आय के स्रोत में कृषि से होने वाली आय दर्ज करता है तो 5000 रुपए तक की आय करमुक्त मानी जाएगी.

LIC में निवेश की गई राशि

 PF और PPF की तरह ही LIC में भी निवेश की गई राशि EEE कैटेगरी में आती है. ऐसे में करदाता को LIC की मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता है.

साझेदारी फर्म से होने वाली आय पर

अगर करदाता किसी साझेदारी फर्म में साझेदार है तो फर्म से मिलने वाली आय पर उसे किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होता है. कंपनी साझेदार की ओर से पहले ही तमाम तरह के कर दायित्व की पूर्ति करती है.

इसके अतिरिक्त नौकरीपेशा करादाताओं की सैलरी में एचआरए (HRA), ट्रांस्पोर्ट एलाउंस जैसे तमाम हेड करमुक्त होते हैं. नियोक्ता कर्मचारी की ओर से कर दायित्व का ध्यान रखते हुए टीडीएस काट लेता है.

उपरोक्त आय के अतिरिक्त भी तमाम ऐसी आय होती हैं जिन पर टैक्स नहीं लगता है. इंकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 में इन सभी का जिक्र है.

महज दो रुपये में 10 लाख का बीमा कराएगा रेलवे

ट्रेनों में सफर करने वाले पैसेंजरों को जल्द ही मामूली दर पर इंश्योरेंस की सुविधा मिलने जा रही है. रेलवे की कंपनी आईआरसीटीसी ने इंश्योरेंस की सुविधा के लिए तीन प्राइवेट कंपनियों से हाथ मिला लिया है. इन तीनों का ही टेंडर के जरिए चयन किया गया है. ये कंपनियां दो रुपये प्रति ट्रिप के आधार पर पैसेंजर को दस लाख का इंश्योरेंस कवर देंगी. इसमें पांच हजार रुपये के लगेज का इंश्योरेंस भी शामिल है. इसके अलावा अगर यात्रा के दौरान दुर्घटना में कोई पैसेंजर स्थायी तौर पर विकलांग होता है तो उस हालत में उसे साढ़े सात लाख रुपये का कवर मिलेगा.

उम्मीद है कि अगले एक महीने में इस योजना का श्रीगणेश किया जाएगा. यह जानकारी देते हुए आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक एके मनोचा ने बताया कि जल्द ही इस सुविधा का उदघाटन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि फिलहाल यह सुविधा ऑनलाइन रिजर्व टिकट लेने वाले पैसेंजरों को ही उपलब्ध होगी. इसके लिए पैसेंजर को टिकट बुक कराते वक्त इंश्योरेंस के कॉलम में अपनी सहमति देनी होगी. इसके बाद उस पैसेंजर की टिकट की राशि में ही इंश्योरेंस की राशि भी जोड़ दी जाएगी.

इस तरह से पैसेंजर इंश्योरेंस कवर का हिस्सेदार हो जाएगा. उन्होंने बताया कि अगर यह प्रयोग कामयाब रहता है तो उसके बाद यह सुविधा काउंटर से टिकट रिजर्व कराने वाले पैसेंजरों को भी दी जाएगी और फिर तीसरे चरण में अनरिजर्व टिकट लेने वाले पैसेंजरों को भी देने का विचार है. उनका कहना है कि चूंकि रेलवे पैसेंजरों का वॉल्यूम बहुत ज्यादा है इसलिए इंश्योरेंस कंपनियां भी बेहद कम दर पर इंश्योरेंस कवर देने के लिए तैयार हैं.

आईआरसीटीसी प्रमुख का कहना है कि उम्मीद की जानी चाहिए कि जब अनरिजर्व पैसेंजरों को इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा तो उनका प्रीमियम और भी कम होगा, क्योंकि उनकी यात्रा बहुत कम देर की होती है. उनका कहना है कि इंश्योरेंस कंपनियों को भी इस स्कीम से फायदा होगा क्योंकि रोजाना लगभग ढाई करोड़ यात्री रेल में सफर करते हैं. फिलहाल अगर रिजर्व कैटेगरी के पैसेंजरों को मानें तो यह आंकड़ा दस लाख के आसपास होगा.

भगवाई परचम

भारतीय जनता पार्टी के नेता महिलाओं को क्या समझते हैं, यह जानना कठिन नहीं है. हमारे सारे धर्मग्रंथ औरत को पापों की गठरी मानते हैं और भगवा धर्म यह आदेश देता है कि उस को मानने वाले इस धारणा को मानें ही नहीं लागू भी करें. इसीलिए जब भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रमुख दिलीप घोष ने कहा कि वहां के प्रसिद्ध जाधवपुर विश्वविद्यालय की युवतियों का स्तर निम्न है, उन्हें शर्म नहीं है, वे हर समय युवकों का साथ पाने के लिए उतावली रहती हैं, तो कुछ नया नहीं कहा. भारतीय जनता पार्टी न केवल राज करना चाहती है, बल्कि पौराणिक युग की वापसी भी चाहती है, जिस में, ‘शूद्र, ढोल, चमार और नारी ये सब ताड़न के अधिकारी’ का सिद्धांत चलता हो.

जाधवपुर विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय भगवाइयों को खटक रहे हैं, क्योंकि यहां ऐसी पौध पनपती है जो उदार है, समझदार है और पोंगापंथी का खुला विरोध करती है. यहां चूंकि अमीरगरीब का भेद कम है, जाति और वर्ण के भेद केवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों तक सीमित रहते हैं. ऊंची जातियों या उन के अंधभक्तों को समझ नहीं आता कि आखिर कैसे जाति के बंधनों से दूर हो कर साथसाथ रहा जा सकता है.

इन विश्वविद्यालयों में जो विवाद खड़े हो रहे हैं, वे नीतियों पर कम जाति व्यवस्था के कारण ज्यादा हैं. ऊंची जातियों के युवकयुवतियों को समझ नहीं आता कि पिछड़ी व दलित जातियों के बीच ये आपसी समझौते कैसे हो रहे हैं कि वे धर्म की लकीर पीटने की जगह नए उन्मुक्त धर्मविहीन समाज और शासन की मांग कर रहे हैं. इन विश्वविद्यालयों में राजनीति की जड़ में जाति के प्रति विद्रोह है, क्योंकि विद्रोही उन जातियों के हैं जिन्हें आज भी ऊंची जातियां स्लमों में धकेल रही हैं. उन के साथ होस्टल, ढाबे शेयर करने पड़ें, यह ऊंची जातियों के छात्रों को स्वीकार नहीं होता. यह इन खास विश्वविद्यालयों में ही नहीं हो रहा है, बल्कि यह उन सब विश्वविद्यालयों में हो रहा है जहां सरकारी सहायता के कारण फीस न के बराबर है और भारी छात्रवृत्ति मिल रही है. हजारों पिछड़ी व दलित जातियों के छात्र इतने अच्छे नंबर ले आते हैं कि वे गरीब या अमीर ऊंची जातियों के युवाओं को पीछे धकेल सकें.

ऊंची जातियों के छात्र फिर से उन मुफ्त विश्वविद्यालयों पर कब्जा चाहते हैं और उन्हें गुरुकुलों में परिवर्तित करना चाहते हैं जहां कट्टरता का पाठ पढ़ाया जाए और इसी के लिए यह सारा खेल रचा जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ही नहीं, हर राज्य का शिक्षा मंत्री इस पुनीत कार्य में लीन है. जाधवपुर विश्वविद्यालय तो इस का एक उदाहरण मात्र है.

कोहली ने लगाई ‘विराट’ रिकॉर्ड्स की झड़ियां

भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली ने एक बार फिर अपना दम दिखाया है. वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन शानदार शतक जड़ने के बाद विराट ने अब दूसरे दिन तेज अंदाज में खेलते हुए अपने टेस्ट कॅरियर का पहला दोहरा शतक पूरा किया.

बहुत हुए शतक, ये लो 200

विराट ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरियर में कई बड़े शतक जड़े हैं लेकिन ये उनके क्रिकेट कॅरियर में पहली बार हुआ है जब वो 200 के आंकड़े को छूने में सफल रहे.

विराट ने 281 गेंदों पर कॅरियर का पहला दोहरा शतक जड़कर इतिहास रचा. इस दौरान विराट ने 24 चौके जड़े. इसके बाद वो 283 गेंदें खेलकर 200 के आंकड़े पर गैब्रियाल की गेंद पर बोल्ड हो गए.

आपको बता दें कि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं बल्कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट को मिलाकर भी ये उनकी पहली डबल सेंचुरी है. इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रथम श्रेणी क्रिकेट स्कोर 197 रन था.

ऐसा करने वाले पहले कप्तान बने

विराट कोहली पहले ऐसे भारतीय टेस्ट कप्तान बन गए हैं जिन्होंने विदेशी धरती पर टेस्ट में दोहरा शतक जड़ा है. विराट से पहले किसी भी भारतीय टेस्ट कप्तान ने विदेशी सरजमीं पर टेस्ट मैच में दोहरा शतक नहीं लगाया था.

अपने सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड को भी तोड़ा

यही नहीं, इसके बाद विराट ने 169 का आंकड़ा भी पार कर लिया है. गौरतलब है कि टेस्ट क्रिकेट में विराट का सर्वाधिक स्कोर दिसंबर 2014 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आया था. विराट ने उस मैच में 169 रनों की पारी खेली थी और आज वो उससे भी आगे निकल गए हैं.

3000 भी पूरे किए थे

पहले दिन विराट कोहली ने शानदार अंदाज में पहले शिखर धवन के साथ पारी को संभाला और बेहतरीन साझेदारी को अंजाम दिया जबकि धवन के आउट हो जाने के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं खोया और वेस्टइंडीज की जमीन पर अपना पहला शतक जड़ा था.

वहीं, पहले दिन आते ही भारतीय कप्तान ने एक और कीर्तिमान हासिल कर लिया था. विराट ने अपनी पारी की सातवीं गेंद पर चौका जड़कर टेस्ट क्रिकेट में 3000 रन पूरे कर लिए. ये विराट के कॅरियर का 42वां टेस्ट मैच है.

कुछ खास रिकॉर्ड

विदेश में दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय कप्तान

अपने टेस्ट कॅरियर का पहला दोहरा शतक लगाया

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी पहली बार जमाया दोहरा सैकड़ा

वेस्टइंडीज में दोहरा शतक जड़ने वाले तीसरे विदेशी कप्तान

51 साल बाद वेस्टइंडीज में दोहरा शतक जड़ने वाले विदेशी कप्तान

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया. भारतीय पारी के दौरान इस मैच में एक ऐसा वाकया देखने के मिला जो विश्व क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले सिर्फ एक ही बार हुआ है.

आखिर क्या हुआ ऐसा

पहली पारी में भारतीय टीम की बल्लेबाजी के दौरान भारत की तरफ से दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे और सातवें विकेट के लिए 50 से ज्यादा रन की साझेदारी हुई.

इससे पहले टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा सिर्फ एक ही बार हुआ है. वर्ष 2008 में भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले गए टेस्ट मैच में ऐसा वाकया देखने को मिला था.

पहली पारी में ऐसी रही भारतीय बल्लेबाजों की साझेदारी

दूसरे विकेट के लिए पुजारा और धवन के बीच 60 रन की साझेदारी हुई. तीसरे विकेट के लिए धवन और कोहली के बीच 105 रन की साझेदारी हुई. चौथे विकेट के लिए रहाणे और कोहली के बीच 57 रन की साझेदारी हुई.

पांचवें विकेट के लिए कोहली और अश्विन के बीच 168 रन की साझेदारी हुई. छठे विकेट के लिए साहा और अश्विन के बीच 71 रन की साझेदारी हुई. सातवें विकेट के लिए अश्विन और अमित मिश्रा के बीच 51 रन की साझेदारी हुई.

यों आम खाएगा आम आदमी

‘अब की बार आम आम आदमी की पहुंच के अंदर,’ किराने की दुकान से नूनतेल लेते हुए अचानक नजर अखबार की इस सुर्खी पर पड़ी, तो एकाएक भरोसा नहीं हुआ. लेकिन अखबार वाले झूठी खबर भला क्यों छापेंगे, यह सोचते हुए उस ने हिम्मत जुटाई और आम के भाव पूछे. कीमत बहुत ज्यादा नहीं थी, तो कम भी नहीं थी. हफ्ताभर चायबीड़ी वगैरह  की तलब छोड़ कर आखिरकार उस ने आधा दर्जन आम खरीद ही लिए. मियांबीवी और 3 बच्चे. कुल 5 जनों के लिए एकएक आम. 6ठा आम वह कहीं अकेले में बैठ कर गुपचुप खाना चाहता था.

सड़क पर किसी जानपहचान वाले से टकराने का खतरा था, इसलिए वह पास के एक पार्क में घुस गया, जहां ज्यादातर बड़े आदमी ही टहला करते थे. वह झाड़ी की ओट ले कर बचपन के दिनों को याद करते हुए तबीयत से आम चूसने का इरादा कर के बैठ गया.

‘‘कौन है तू? थैली में क्या है?’’ वह आम निकालता, इस से पहले ही किसी ने कड़क कर उस से पूछा.

सकपकाते हुए उस ने सिर उठाया. सामने डंडा लिए हवलदार खड़ा था.

‘‘जी, आम हैं,’’ कहते हुए उस ने बेहिचक थैली का मुंह खोल दिया. उस के हिचकने का कोई कारण भी तो नहीं था. ‘आम आदमी आम खाते हुए पकड़ा गया’ ऐसी कोई खबर बनने की उम्मीद थोड़े ही थी.

‘‘अरे, इतने सारे आम. कहां से लाया है और यहां क्या कर रहा है?’’ हवलदार जोर से बोला.

‘‘जी, ये आम मैं ने सड़क पर ठेले वाले से लिए हैं… बच्चों के लिए. शांति के साथ बैठ कर एक आम खाने के लिए यहां आ गया.’’

यह सुन कर हवलदार की आंखें चमकीं, ‘‘तू जब पार्क में घुस रहा था, तभी तेरी चाल देख कर मैं समझ गया था कि जरूर कुछ गड़बड़ है. हम पुलिस वाले मामला फौरन ताड़ लेते हैं. अच्छा बता, किधर है शांति?’’

‘‘जी, शांति से मेरा मतलब यहां आराम से बैठ कर आम खाने से है,’’ वह थोड़ा हड़बड़ाया.

हलवदार खिसियाते हुए बोला, ‘‘पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता है. चल बता, यहां कितने दिनों से यों छिप कर आम खा रहा था?’’

‘‘जी, मैं तो यहां पहली बार आया हूं. और आम तो मैं ने पिछले 2 साल से नहीं खाया. इस महंगाई में आम आदमी भला रोजरोज कैसे आम खा सकता है?’’

हवलदार सोच में पड़ गया.

‘‘आम आदमी को आम खाना भी नहीं चाहिए. क्या तुझे मालूम नहीं है कि आम फलों का राजा है और आम आदमी जनतंत्र का राजा है. एक राजा दूसरे राजा को खाए, यह थोड़े ही शोभा देता है. फिर हम सेवक किसलिए हैं. खानेपीने का तगड़ा अभ्यास है हमें,’’ कहते हुए हवलदार ने आमों पर नजर डाली.

उस ने थैली का मुंह बंद कर लिया और हिम्मत की, ‘‘सेवक नहीं, आप तो सरकार हैं. अब जाने की इजाजत दीजिए.’’

हवलदार डपटते हुए बोला, ‘‘ऐसे कैसे जाने देंगे. हम कानून के रखवाले हैं. पैनी नजर रखते हैं. दूर की सोचनी पड़ती है हमें, नहीं तो देश कैसे चलेगा.’’

‘‘लेकिन इस में देश और कानून का क्या सवाल?’’ न चाहते हुए भी उस का मुंह बिगड़ गया.

‘‘अरे वाह, सवाल क्यों नहीं है? तुम और तुम्हारे बच्चे आम खाएंगे. छिलके गली में फेंकेंगे. इस से गंदगी होगी. हैजा भी फैल सकता है,’’ हवलदार तुनका.

‘‘लेकिन साहब, हम लोग छिलके फेंकते ही नहीं, खा लेते हैं,’’ उस ने सफाई दी.

‘‘क्या कहा? छिलके तक खा लेते हो. लेकिन यह तो सेहत के लिए हानिकारक है. जो हानिकारक है, वह जुर्म है,’’ हवलदार ने दूर की हांकी.

‘‘छिलके समेत आम खाना जुर्म कैसे हो सकता है साहब? छिलके में तो तमाम तरह के विटामिन होते हैं. मेरे बेटे की किताब में लिखा है,’’ आम आदमी जानकार निकला.

पर हवलदार कहां हार मानने वाला था, ‘‘अच्छा किताब में लिखा है, तो चलो मान लेते हैं. लेकिन गुठली तो जरूर तुम सड़क पर फेंकोगे. इस से हादसा तक हो सकता है. तब तो जुर्म होगा कि नहीं?’’

इस बाबत आम आदमी गांधीवादी था, ‘‘नहीं जनाब, हम तो गुठली भी नहीं फेंकते. उसे सुखाते हैं, फिर भून कर या उबाल कर खा लेते हैं. गुठली के कड़े खोल को चूल्हा जलाने के काम में लाते हैं,’’ अपनी तरफ से उस ने एकदम सधा हुआ जवाब दिया था. उस के हिसाब से अब के पकड़ में आने की कोई गुंजाइश नहीं थी.

‘‘ओ… हो… तो यह बात है,’’ कहते हुए हवलदार गंभीर हो गया. अब हवलदार को भी अपने बच्चे की किताब टटोलने का फायदा मिल रहा था.

‘‘यह तो तुम बड़ा खतरनाक जुर्म कर रहे हो. सरकार बेचारी अपील करकर के हार गई है कि पेड़ लगाओ, धरती को खूबसूरत बनाओ, लेकिन इस अपील का कोई असर ही नहीं हो रहा है. अब जा कर पता चला कि आखिर पेड़ बेचारे उगें तो कैसे उगें. सारी गुठलियां तो तुम लोग खा जाते हो. इस गुनाह का तो तुम्हें भारी दंड मिलना चाहिए.’’

यह सुन कर उस की घिग्घी बंध गई. वाकई वह कितना भारी अपराध करता आ रहा है. यहां तक कि उस के बच्चे तो आसपड़ोस वालों की गुठलियां भी चट कर जाते हैं. हर गुठली से आम का एक पेड़ तैयार हो सकता था यानी अब तक उस ने देश के कितने पेड़ों का नुकसान कर दिया है. कहीं हवलदार ने हिसाब लगा लिया, तो गजब हो जाएगा. तब कितना जुर्माना भरना पड़ेगा.

वह ढीला पड़ गया, ‘‘माफ करें साहब. आगे से गुठली नहीं खाऊंगा.’’

‘‘माना कि नहीं खाएगा, लेकिन गुठलियां खाखा कर अब तक जो देश का कबाड़ा किया है, उस का हर्जाना कौन भरेगा?

‘‘ऐसा करते हैं कि 6 में से बस 3 आम हम ले लेते हैं,’’ कहते हुए हवलदार ने थैली की तरफ हाथ बढ़ाया, तो वह एकदम बिदका.

‘‘अरे साहब, मुझ गरीब को क्यों घेरते हो? आम तो आप उस ठेले वाले से ले लेना. वह आप को मना थोड़े ही करेगा.’’

‘‘चुप बे, हमें ही सिखाता है. भला ठेले से हम आम कैसे ले सकते हैं. उस से तो हम हफ्ता लेते हैं. नियम की बात है यह,’’ हवलदार ने घुड़का, तो उस

ने चुपचाप 3 आम हवलदार के हवाले कर दिए.

हवलदार का मूड ठीक हुआ, तो उस ने हौसला किया, ‘‘हुजूर, हम छोटे लोगों को तो आप जब चाहो कानून के डंडे से दबा देते हो, लेकिन सुना है कि ये बड़े लोग तो आप की बिलकुल परवाह

नहीं करते हैं. फिर भी आप हम से तूतड़ाक और उन से बड़ी तमीज से पेश आते हो.’’

यह आरोप सुन कर हवलदार तिलमिलाया, ‘‘नहीं, एकदम गलत बात है यह. कानून की नजर में सब बराबर हैं. भेदभाव हम बिलकुल नहीं रखते. कानून का जो भी हक बनता है, सब से वसूलते हैं. किसी को नहीं छोड़ते. बस, आदमी देख कर जरा तरीका बदल देते हैं. ट्रेनिंग में हम ने यही सीखा है.

‘‘देखो, वह जो अभीअभी सामने सड़क पर सेठ ने गलत जगह पर कार खड़ी की है, मैं उस से भी हर्जाना लूंगा. जाते ही एक सलाम ठोकूंगा. देखना, तपाक से 50 का नोट देगा मुझे. छुट्टा नहीं हुआ, तो सौ भी दे सकता है.

‘‘चल, तू कहता है, तो तमीज की खातिर मैं तुझे भी एक सलाम झाड़ देता हूं. तू 50 का नहीं, सिर्फ 10 का ही नोट देना. पर इस से कम में सलाम वाली तमीज खर्च करना मेरे कानून के खिलाफ है.’’

यह सुनते ही वह पुलिस वाले की सलामी की मार से बचने के लिए भाग खड़ा हुआ. सड़क पर आतेआते उस ने बड़ी सरलता से यह जटिल हिसाब लगाया कि 3 बच्चों में 2 आम बांट देगा और एक आम वह बीवी के साथ मिल कर खाएगा. अकेले एक पूरा आम खाने के अपराध  से बचने का संतोष सुख भी अब उस के खाते में था.               

दूसरी औरत

मैं मोटरसाइकिल ले कर बाहर खड़ा था. अम्मी अंदर पीर साहब के पास थीं. वहां लोगों की भीड़ लगी थी.

भीतर जाने से पहले अम्मी ने मुझ से भी कहा था, ‘आदिल बेटा, अंदर चलो.’ ‘मुझे ऐसी फालतू बातों पर भरोसा नहीं है,’ मैं ने तल्खी के साथ कहा था.

‘ऐसा नहीं कहते बेटा,’ कह कर अम्मी पर्स साथ ले कर अंदर चली गई थीं. न जाने बाबाबैरागियों के पीछे ये नासमझ लोग क्यों भागते हैं? मैं देख रहा था कि कोई नारियल तो कोई मिठाई ले कर वहां आया हुआ था. पिछले जुमे पर भी जब अम्मी यहां आई थीं, तो 5 सौ रुपए दे कर अपना नंबर लगा गई थीं. फोन से ही आज का समय मिला था, तो वे मुझे साथ ले कर आ गई थीं. मैं घर का सब से छोटा हूं, इसलिए सब के लिए आसानी से मुहैया रहता हूं. मैं ने अम्मी को कई बार समझाया भी था, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थीं. यह बात आईने की तरह साफ थी कि पिछले 2-3 सालों में हमारे घर की हालत बहुत खराब हो गई थी. इस के पहले सब ठीकठाक था.

मेरे अब्बा सरकारी ड्राइवर थे और न जाने कहां का शौक लगा तो एक आटोरिकशा खरीद लिया और उसे किराए पर दे दिया. कुछ आमदनी होने लगी, तो बैंक से कर्ज ले कर 2-3 आटोरिकशा और ले लिए और उसी हिसाब से आमदनी बढ़ गई थी. अब्बा घर में मिठाई, फल लाने लगे थे. 1-2 दिन छोड़ कर चिकन बिरयानी या नौनवेज बनने लगा था. फ्रिज में तो हमेशा फल भरे ही रहते थे. अम्मी के लिए चांदी के जेवर बन गए थे और फिर हाथ के कंगन. गले में सोने की माला आ गई थी. मेरी पढ़ाई के लिए अलग से कोचिंग क्लास लगा दी गई थी. मेरी बड़ी बहन यानी अप्पी भी हमारे शहर में ही ब्याही गई थीं. उन की ससुराल में अम्मी कभी भी खाली हाथ नहीं जाती थीं. बड़ी अप्पी के बच्चे तो नानानानी का मानो इंतजार ही करते रहते थे.

फिर अब्बा परेशान रहने लगे. वे किसी से कुछ बात नहीं कहते थे. मुझे कभी कपड़ों की या कोचिंग के लिए फीस की जरूरत होती, तो वे झिड़क देते थे, ‘कब तक मांगोगे? इतने बड़े हो गए हो. खुद कमओ…’

अब्बा के मुंह से कड़वी बातें निकलने लगी थीं. नए कपड़े दिलाना बंद हो गया था. अम्मी अब बड़ी अप्पी के यहां खाली हाथ ही जाने लगी थीं. अम्मी घरखर्च के लिए 3-4 बार कहतीं, तब अब्बा रुपए निकाल कर देते थे. आखिर ऐसा क्यों हो रहा था? अम्मी कहतीं कि घर पर किसी की नजर लग गई या किसी शैतान का बुरा साया घर में आ गया है. हद तो तब हो गई, जब अब्बा ने अम्मी से सोने के कड़े उतरवा कर बेच दिए और जो रुपए आए उस का क्या किया, पता नहीं? अम्मी को भरोसा हो गया था कि कुछ न कुछ गलत हो रहा है. वे मौलाना से पानी फुंकवा कर ले आईं, कुछ तावीज भी बनवा लिए. अब्बा के तकिए के नीचे दबा दिए, लेकिन परेशानियां दूर नहीं हुईं. एक दिन शाम को अम्मी ने एक पीर साहब को बुलवाया. वे पूरा घर घूम कर कहने लगे, ‘कोई बुरी शै है.’

इसे दूर करने के लिए पीर साहब ने 2 हजार रुपए मांगे. अम्मी ने जो रुपए जोड़ कर रखे थे, वे निकाल कर दे दिए और तावीज ले लिया. घर में पानी का छिड़काव कर दिया. दरवाजों के बीच में सूइयां ठुंकवा लीं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. अब्बा ने अम्मी से चांदी के जेवर भी उतरवा लिए. अम्मी ने मना किया, तो बहुत झगड़ा हुआ. अब तो मुझे भी यकीन होने लगा था कि मामला गंभीर है, क्योंकि ऐसी खराब हालत हमारे परिवार की कभी नहीं हुई थी. अम्मी ने यह बात अपनी बहनों से भी की और कोई बहुत पहुंचे हुए पीर बाबा के बारे में मालूम किया. अम्मी ने पिछले जुमे को पैसा दे कर अपना नंबर लगवा लिया था.

मैं अपनी यादों से लौट आया. मैं ने घड़ी में देखा. रात के 9 बज रहे थे. तभी देखा कि अम्मी बाहर बदहवास से आ रही थीं. मैं घबरा गया और पूछा, ‘‘क्या बात है अम्मी?’’ ‘‘कुछ नहीं बेटा, घर चल,’’ घबराई सी आवाज में अम्मी ने कहा और कहतेकहते उन का गला भर आया.

‘‘आखिर माजरा क्या है? पीर साहब ने कुछ कहा क्या?’’ मैं ने जोर दे कर पूछा.

‘‘तू घर चल, बस… अम्मी ने गुस्से में कहा.

बड़ी अप्पी घर पर आई हुई थीं. अम्मी तो अंदर आते ही अप्पी के गले लग कर रोने लगीं. आखिर दिल भर रो लेने के बाद अम्मी ने आंसुओं को पोंछा और कहा, ‘‘मैं जो सोच रही थी, वह सच था.’’

‘‘क्या सोच रही थीं? कुछ साफसाफ तो बताओ,’’ बड़ी अप्पी ने पूछा.

‘‘क्या बताऊं? हम तो बरबाद हो गए. पीर साहब ने साफसाफ बताया है कि इन की जिंदगी में दूसरी औरत है, जिस की वजह से यह बरबादी हो रही है…’’ अम्मी जोर से रो रही थीं. मैं ने सुना, तो मैं भी हैरान रह गया. अब्बा ऐसे लगते तो नहीं हैं. लेकिन फिर हम बरबाद क्यों हो गए? इतने रुपए आखिर जा कहां रहे हैं?

अम्मी को अप्पी ने रोने से मना किया और कहा, ‘‘अब्बा आज आएंगे, तो बात कर लेंगे.’’ हम सब ने आज सोच लिया था कि अब्बा को घर की बरबादी की पूरी दास्तां बताएंगे और पूछेंगे कि आखिर वे चाहते क्या हैं? रात के तकरीबन साढ़े 10 बजे अब्बा परेशान से घर में आए. वे अपने कमरे में गए, तो अम्मी वहीं पर पहुंच गईं. अब्बा ने उन्हें देख कर पूछा, ‘‘क्या बात है बेगम, बहुत खामोश हो?’’

अम्मी चुप रहीं, तो अब्बा ने दोबारा कहा, ‘‘कोई खास बात है क्या?’’

‘‘जी हां, खास बात है. आप से कुछ बात करनी है,’’ अम्मी ने कहा.

‘‘कहो, क्या बात है?’’

‘‘हमारे घर के हालात पिछले 2 सालों से बद से बदतर होते जा रहे हैं, इस पर आप ने कभी गौर किया है?’’ ‘‘मैं जानता हूं, लेकिन कुछ मजबूरी है. 1-2 महीने में सब ठीक हो जाएगा,’’ अब्बा ने ठंडी सांस खींच कर कहा. ‘‘बिलकुल ठीक नहीं होगा, आप यह जान लें, बल्कि आप हमें भिखारी बना कर ही छोड़ेंगे,’’ अम्मी की आवाज बेकाबू हो रही थी. हम दरवाजे की ओट में आ कर खड़े हो गए थे, ताकि कोई ऊंचनीच हो, तो हम अम्मी की ओर से खड़े हो सकें.

‘‘ऐसा नहीं कहते बेगम.’’

‘‘क्यों? क्या कोई कसर छोड़ रहे हैं आप? आप को एक बार भी अपने बीवीबच्चों का खयाल नहीं आया कि हम पर क्या गुजरेगी,’’ कह कर अम्मी रोने लगी थीं.

‘‘मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं कि हम इन बुरे दिनों से पार निकल जाएं.’’ ‘‘लेकिन निकल नहीं पा रहे, यही न? उस औरत ने आप को जकड़ लिया है,’’ अम्मी ने अपनी नाराजगी जाहिर कर तकरीबन चीखते हुए कहा.

‘‘खामोश रहो. तुम्हारे मुंह से ऐसी बेहूदा बातें अच्छी नहीं लगतीं.’’

‘‘क्यों… मैं सब सच कह रही हूं, इसलिए?’’

‘‘कह तो तुम सच रही हो, लेकिन बेगम मैं क्या करूं? पानी को कितना भी तलवार से काटो, वह कटता नहीं है,’’ अब्बा ने अपना नजरिया रखा.

‘‘आज आप फैसला कर लें.’’

‘‘कैसा फैसला?’’ अब्बा ने हैरत से सवाल किया.

‘‘आखिर आप चाहते क्या हैं? उस औरत के साथ रहना चाहते हैं या हमारे साथ जिंदगी बसर करना चाहते हैं?’’ अम्मी ने गुस्से में कहा.

‘‘क्या मतलब है तुम्हारा? साफसाफ कहो?’’ अब्बा भी नाराज होने लगे थे.

‘‘मैं आज बड़े पीर साहब के पास गई थी. उन्होंने मुझे सब बता दिया है,’’ अम्मी ने राज खोलते हुए कहा.

‘‘क्या सब बता दिया है?’’ अब्बा ने हैरत से सवाल किया.

‘‘आप किसी दूसरी औरत के चक्कर में सबकुछ बरबाद कर रहे हैं. लानत है…’’ अम्मी ने गुस्से में कहा.

‘‘चुप रहो. जानती हो कि वह दूसरी दूसरी औरत कौन है?’’ अब्बा ने गुस्से में कांपते हुए कहा.

‘‘कौन है?’’ अम्मी ने भी उतनी ही तेजी से ऊंची आवाज में पूछा.

‘‘तुम्हारी ननद है, मेरी बड़ी बहन. उस की मेहनत की वजह से ही मैं पढ़ाई कर पाया और अपने पैरों पर खड़ा हो सका और उस की एक छोटी सी गलती की वजह से हमारे पूरे परिवार ने उसे अपने से अलग कर दिया था, क्योंकि उस ने अपनी मरजी से शादी की थी. ‘‘मुझे पिछले एक साल पहले ही मालूम पड़ा कि उस के पति को कैंसर है, जिस की कीमोथैरैपी और इलाज के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी. उस के बच्चे भी ऊंचे दर्जे में पढ़ रहे थे. उन्होंने तो तय किया था इलाज नहीं कराएंगी, लेकिन जैसे ही मुझे खबर लगी, तो मैं ने इलाज और पढ़ाई की जिम्मेदारी ले ली, ताकि वह परिवार बरबाद होने से बच सके. ‘‘मेरी बहन के हमारे सिर पर बहुत एहसान हैं. अगर मुझे जान दे कर भी वे एहसान चुकाने पड़ें, तो मैं ऐसा खुशीखुशी कर सकता हूं,’’ कहतेकहते अब्बा जोर से रो पड़े. अम्मी हैरान सी सब देखतीसुनती रहीं.

‘‘मुझ से कैसा बड़ा गुनाह हो गया,’’ अम्मी बड़बड़ाईं. हम भी दरवाजे की ओट से बाहर निकले और अब्बा के गले से लिपट गए. ‘‘अब्बा, हमें माफ कर दो. अगर हमें  और भी मुसीबतें झेलना पड़ीं, तो हम झेल लेंगे, लेकिन आप उन्हें बचा लें,’’ मैं ने कहा. अब्बा ने आंसू पोंछे और कहा, ‘आदिल बेटा, उन का पूरा इलाज हो गया है. वे ठीक हो गए हैं और भांजे को नौकरी भी लग गई है. ‘‘यह सब तुम लोगों की मदद की वजह से ही सब हो पाया. तुम लोग खामोश रहे और मैं उस परिवार की मदद कर के उन्हें जिंदा रख पाया,’’ अब्बा की आवाज में हम सब के प्रति शुक्रिया का भाव नजर आ रहा था. अम्मी ने शर्म के मारे नजरें नीची कर ली थीं. अब्बा ने कहा, ‘‘कल सुबह मेरी बहन यहां आने वाली हैं. अच्छा हुआ, जो सब बातें रात में ही साफ हो गईं.’’

‘‘हम सब कल उन का बढि़या से इस्तकबाल करेंगे, ताकि बरसों से वे हम से जो दूर रहीं, सारे गम भूल जाएं,’’ अम्मी ने कहा.

‘‘क्यों नहीं,’’ अब्बा ने कहा, तो हम सब हंस दिए. रात में हमारी हंसी से लग रहा था, मानो रात घर में बिछ गई हो और खुशियों के सितारे उस में टंग गए हों.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें