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बीएसई सूचकांक सातवें आसमान पर

शेयर बाजार में उत्साह का माहौल है. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई ने एक सप्ताह में 700 अंक की 7 माह में सब से बड़ी साप्ताहिक छलांग लगाई. इस से पता चलता है कि शेयर बाजार सातवें आसमान का रुख किए हुए है. इस की बुनियाद में आर्थिक सुधार की सतत प्रक्रिया के साथ ही वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी विधेयक पारित कराने के लिए कांगे्रस का नरम रुख, मानसून की भारी बारिश और बारिश घाटा 18 फीसदी से घट कर 16 प्रतिशत ही रहने के नए अनुमान के चलते विकास दर के बेहतर रहने की उम्मीद शामिल हैं.

इस के अलावा रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट यानी एफएसआर में देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत रहने का भी बाजार पर बड़ा असर रहा. ब्रिटेन के जनमत संग्रह से पहले वैश्विक बाजारों की तरह बीएसई में भी खलबली रही लेकिन बाद में सुधारों तथा वेतन आयोग की खबरों ने बाजार की रौनक बढ़ा दी और 4 जुलाई तक बाजार लगातार 8 सत्र तेजी पर बंद हुआ. निफ्टी में भी उस दौरान तेजी का रुख रहा और सूचकांक पहली जुलाई को 10 माह के उच्चतम स्तर को पार कर गया.

वजन घटाने के लिए कर्मचारी बहा रहे पसीना

बाजार में कारोबार की प्रतिस्पर्धा में लगातार आगे बढ़ने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता और विपणन नीति पर ध्यान देने के साथ ही कंपनियों ने कर्मचारियों की फिटनैस पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है. इस क्रम में कंपनियों का सब से ज्यादा ध्यान कर्मचारियों का मोटापा कम करने पर है. कंपनियों का मानना है कि उस की टीम शारीरिक रूप से स्वस्थ और फिट नहीं होगी तो उस से उस का कारोबार प्रभावित होगा और कंपनी बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकती है. इसी के मद्देनजर एडिडास इंडिया, एचडीएफसी, युनाइटेड ब्रेवरीज, मैरिको इंडस्ट्रीज, गोदरेज, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, टाटा, वेदांता, आदित्य बिड़ला समूह जैसे कई प्रमुख घरानों ने अपने कर्मचारियों को फिट रहने की हिदायतें जारी की हैं. इस के लिए कार्यालय में ही जिम खोले गए हैं और स्वस्थ रहने के तरीके से जुड़े अन्य साधन उपलब्ध कराए गए हैं. कई कंपनियां योग भी करा रही हैं.

कंपनियों की इस धारणा के नतीजे में बाजार में इस तरह की सेवा देने वाली नईनई कंपनियां खड़ी हो गई हैं. कंपनियों का सब से ज्यादा ध्यान कर्मचारियों का वजन कम करने पर है. वजन काम के दबाव, शारीरिक गतिविधियां नहीं होने, उलटेसीधे खानपान से बढ़ता है. कर्मचारी को संतुलित आहार मिले और दबाव में काम नहीं करना पड़े, इस के लिए कंपनी में स्वस्थ माहौल तैयार किया जा रहा है. वजन नहीं बढ़े, इस पर रोक के लिए स्टेपथलोन लाइफस्टाइल जैसी कंपनियां बाजार में उतरी हैं जिन का कहना है कि वजन कम करने के लिए कम से कम 10 हजार कदम चलना जरूरी है. उस की इस युक्ति को सैकड़ों कंपनियां अपना रही हैं और उस के लिए इस की सेवाएं ली जा रही हैं. कंपनी ने अपने ग्राहकों के कार्यालयों में आधुनिक मशीनें लगा दी हैं जिन के सहारे कर्मचारी नियमित नियमों का पालन करते हुए वजन घटाने के लिए पसीना बहा रहे हैं.

भारत को विदेशों में छवि सुधारने की सलाह

विश्व के आर्थिक मंच पर तेजी से उभर रहे भारत को अर्थशास्त्री विदेशों में छवि पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं. यह ठीक है कि विश्व बैंक जैसी प्रमुख संस्थाएं भारत की विकास गतिविधियों से बहुत प्रभावित हैं लेकिन हमें इस से भी आगे जा कर देश के राजनीतिक हालात से बनने वाली छवि में सुधार लाने की जरूरत है. यह सुझाव 2001 में अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले अर्थशास्त्री जोसेफ ई स्टिगिल्ट्ज ने हाल में बेंगलुरु में प्रायोजित एक कार्यक्रम में दी.

स्टिगिल्ट्ज खुद भारत की आर्थिक तरक्की की रफ्तार से प्रभावित हैं लेकिन उन का विश्वास है कि भारत को अपनी छवि में, विदेशों में विशेष रूप से, सुधार लाना है. उन का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय विवाद जैसी घटनाओं के कारण दुनिया में भारत की छवि संकुचित हो रही है. खुद सरकार को इस तरह की घटनाओं पर अपनी स्थिति साफ करनी जरूरी है. उन का यह भी मत है कि भारत के स्वयंसेवी संगठनों यानी एनजीओज के बारे में भी विदेशों में अच्छी राय नहीं है. इस बाबत भारत की छवि रूस, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के समान ही नजर आती है. इस से माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. नतीजतन, अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है.

एनजीओज सचमुच एक बड़ी समस्या है. विदेश ही नहीं, देश में भी इन के प्रति लोगों की अवधारणा ठीक नहीं है. कुछ संगठनों को छोड़ दें, ज्यादातर एनजीओज सिर्फ मोटी कमाई का जरिया बने हुए हैं. कई संगठन प्रभावशाली आईएएस अफसरों की पत्नियां और रिश्तेदार चला रहे हैं. बड़े राजनेता एनजीओज से मिली कमाई पर राजनीति कर रहे हैं. वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल अपने करीबियों द्वारा संचालित एनजीओज को फंड देने के लिए कर रहे हैं. इस से एनजीओज की अवधारणा ध्वस्त हो रही है. इसलिए इन पर रोक लगाने की सख्त जरूरत है.

उत्पाद बेचने के लिए कानून तोड़ते बाबा

उद्योगपति व बाबा रामदेव आक्रामकता को लक्ष्य साधने का शायद सब से बड़ा हथकंडा मानते हैं. इसी आक्रामकता की बदौलत विपरीत परिस्थितियों में घर छोड़ संन्यासी बने इस बाबा ने योग साधना की और जल्द ही योग के विशाल बाजार का आकलन कर इस का व्यापार आरंभ कर दिया. बड़ेबड़े योगसाधक योग बाजार पर कब्जा करने की उन की आक्रामकता के कारण बहुत पीछे छूट गए. योग की क्रियाओं का टीवी चैनल पर प्रसारण देख लोग उन की तरफ आकर्षित होने लगे और पतंजलि योग आश्रम खोल कर बाबा दिग्गज नेताओं और अभिनेताओं के सहारे देश के सब से चर्चित योगगुरु बन गए. धनबल अपाररूप से बढ़ने लगा तो बाबा ने खा- वस्तुओं का कारोबार शुरू कर दिया. उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनी खोल ली और नूडल जैसे खा- पदार्थ बना कर विदेशी कंपनियों को चुनौती देने लगे.

बाबा ने अपनी कंपनी के उत्पादों का विज्ञापन खुद ही किया. इस दौड़ में आगे निकलने के लिए उन्होंने विज्ञापन नीति की परवा किए बिना अपने सामान को डाबर तथा हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड के नाम ले कर उन से बेहतर बताना शुरू कर दिया. किसी कंपनी का नाम ले कर अपने सामान को श्रेष्ठ बताना विज्ञापन नीति का उल्लंघन है. लेकिन बाबा हैं कि उन के लिए कानून और नीतियों का कोई मतलब नहीं है. भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने भी इसे गलत बताया है. इन कंपनियों ने विज्ञापनों पर नजर रखने वाले अन्य संस्थानों से भी शिकायत की है. लेकिन बाबा हैं कि अपने उत्पादों को लगातार उन के उत्पाद से अच्छा होने का दावा कर रहे हैं.

दरअसल, यह इन चतुर बाबा की बाजार पर कब्जा करने की रणनीति का हिस्सा है. वे जानते हैं कि नीतियों में बंधी कंपनियों को मात देने का तरीका आक्रामकता ही है. बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि नियमों का उल्लंघन न हो, क्योंकि नियम अराजकता से बचाते हैं.

खलनायक इज बैक

अभिनेता संजय दत्त जब से अपनी सजा पूरी कर के जेल से बाहर आए हैं, उन के कमबैक को ले कर तरहतरह के कयास लगाए जा रहे हैं. पहले कहा जा रहा था कि उन्होंने सिद्धार्थ आनंद की फिल्म से कमबैक करने का मन बनाया है. लेकिन अब खबर है कि संजय उस फिल्म से बाहर हो गए हैं. लेकिन संजय के फैन्स के लिए अच्छी खबर है कि सुभाष घई संजू बाबा के साथ ‘नायक नहीं खलनायक हूं’ वाला जादू फिर से दोहराने जा रहे हैं. संजय दत्त ‘खलनायक रिटर्न्स’ में गैंगस्टर बल्लू बलराम के तौर पर लौटेंगे और इस फिल्म का निर्माण फिल्मकार सुभाष घई करेंगे. गौरतलब है कि 1993 में आई फिल्म ‘खलनायक’ में माधुरी दीक्षित व जैकी श्रौफ भी थे.

राजश्री परिवार में बिखराव

ताराचंद बड़जात्या ने 15 अगस्त, 1947 के दिन बड़े जतन के साथ ‘राजश्री प्रोडक्शन’ की शुरुआत की थी. उन की मौजूदगी में ही उन के बेटे राजकुमार बड़जात्या, कमल कुमार बड़जात्या, अजीत कुमार बड़जात्या भी इस कंपनी के साथ फिल्म बिजनैस में लग गए. फिर ताराचंद बड़जात्या के पोते व पोतियां भी इस कंपनी के साथ जुड़ गए. लेकिन इन दिनों बौलीवुड में इस परिवार के अंदर विघटन की खबरें काफी गरम हैं. सूरज बड़जात्या और कविता बड़जात्या के बीच रचनात्मक मतभेद काफी बढ़ चुके हैं. दोनों ने अलगअलग राह पकड़ ली है. हालांकि परिवार इन अफवाहों को नकार रहा है.

लंबी उम्र का राज

जिस का डर था वही बात हो गई. हम न कहते थे कि ऐसे बदनउघाड़ु व सनसनीखेज करतब चुपचाप देखते रहो और आंखें तर करते रहो, ज्यादा होहल्ला न करो. मगर कुछ सिरफिरों ने पुलिस के पास गुहार की थी कि एक कोल्ड डिंरक ब्रैंड के प्रोमोशन के सिलसिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नायिका ने बेहद कम व उत्तेजक कपड़ों में और बहुत ही अश्लील मुद्राएं बनाते हुए यह नृत्य आइटम नंबर पेश किया था. ग्लैमरस और बिंदास छवि के बलबूते पर अपनी पहचान बनाने वाली नायिका इन दिनों बहुत गहरे सदमे में है. डिप्रैशन के दौर से गुजरते हुए उस ने ऐलान कर दिया है कि वह अब साड़ी पहन कर स्टेज शो किया करेगी.

अरे मियां, कोल्ड  ड्रिंक को लोकप्रिय बनाने के लिए क्या रामायण का पाठ करवाया जाता. ऐसे बिंदास गाने सुन कर ही तो लोग मस्ती में झूमझूम कर  ड्रिंक का आनंद उठाते हैं. देख नहीं रहे कि जब से टीवी पर सैक्स बढ़ा है तो देखने वालों की संख्या भी बढ़ी है. अध्यात्म वाले कार्यक्रम भी बहुत आते हैं और चटपटे कार्यक्रमों की भी भरमार है कि परिवार के साथ बैठ कर टीवी देखना मुश्किल होता जा रहा है. अब भारतीय पुलिस इतनी अनाड़ी भी नहीं कि शीलअश्लील का भेद न समझे. पुलिस ने अश्लील डांस करने का मामला दर्ज तो किया और साथ ही हीरोइन साहिबा को तलब किया. जनता को कुछ तो मीठी गोली देनी ही थी न. पुलिस जानती है कि अंदर से सभी चाहते हैं कि ऐसे कार्यक्रम खूब चलते रहें मगर बाहर से नैतिकता का मुलम्मा चढ़ाना भी जरूरी है.

नायिका ने कहा कि शो के दौरान उस ने एक लंबी स्कर्ट पहनी हुई थी जो पारदर्शी थी और उस का डांस भी शालीन था. पुलिस को यकीन आ गया और उस ने नायिका को चेतावनी दे कर छोड़ दिया. यह किस्सा है कोल्हापुर का मगर नांदेड़ में नायिका का डांस देखने वाली भीड़ पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. यही कारण है कि औरंगाबाद में शो को रोक दिया गया है. अब नायिका का कहना है, ‘नासिक में स्टेज पर लोग मुझे साड़ी में देखेंगे. साड़ी में भी मैं खूबसूरत ही दिखूंगी. यह उन लोगों के लिए सबक है जो समझते हैं कि मैं सिर्फ तंग और कम कपड़ों में ही अच्छी लगती हूं या स्टेज पर जा सकती हूं. अब लोग मुझे देख कर खुद ही अपने कपड़े फाड़ने लगें तो मैं क्या करूं?’

गालिब ने कितनी बेताबी से दिल पर हाथ रख कर कहा था, ‘हाय उस चार गिरह कपड़े की किस्मत गालिब, जिस की किस्मत में हो महबूब का गिरेबां होना.’ तब माशूक के गिरेबान में झांकने के लिए कितना सब्र करना पड़ता था. इतना ढांप कर रखती थी महिलाएं अपनेआप को कि तंग आ कर भरी जवानी में ही संन्यास लेने का मन करता होगा. अब वक्त ने करवट बदली थी. फैशन के नाम पर ही सही, औरतें कुछ बिंदास लहजे में आई ही थीं कि नैतिकता का मामला खड़ा हो गया. समाज को आगे बढ़ने दो मियां. फैशन शो के दौरान मौडलों के वस्त्र फिसलने की बढ़ती तथाकथित शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केंद्र सरकार कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है. इस के तहत फैशन मौडलों के लिए रैंप पर शो के दौरान अंडरगारमैंट आदि पहनने की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाएगी. सरकारी अफसरमौडलों को पहले चैक करेंगे और उस के बाद वे रैंप पर उतारी जाएंगी. केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय इस बाबत प्राप्त सुझावों पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके. बहुत से लोगों को पता ही होगा कि फैशन वीक के दौरान रैंप पर मौडल के कपड़े फिसलने से खासा विवाद खड़ा हो गया था.

राज्यसभा में नैशनल फैशन टैक्नोलौजी इंस्ट्टियूट विधेयक पर चर्चा के दौरान फैशन शो में मौडलों के कपड़े फिसलने का मामला जोरशोर से उठा. सदस्यों का मत था कि ऐसा जानबूझ कर किया गया ताकि फैशन शो पब्लिसिटी हासिल कर सके. सब का एकमत था कि इस पर रोक लगनी चाहिए. एक सदस्य ने भोलेपन से कहा कि उस ने कई ऐसे फैशन शो देखे हैं और कई शो वाकई अच्छे भी हैं. कुछ सदस्य बोले कि चिंता की बात तो यह है कि आज के डिजाइनर जो परिधान तैयार कर रहे हैं उन में कपड़ों का आकार घटता जा रहा है. सदन के बुजुर्ग सदस्य इस बात पर एकमत थे कि डिजाइनरों को ऐसे सुझाव दिए जाएं कि वे ऐसे परिधान तैयार करें जिस में कपड़ों की खपत अधिक हो. गालिब चचा ने कहा था, ‘चंद तसवीरें बुतां, चंद हसीनों के खतूत, बाद मरने के ये सामान मेरे घर से निकला.’ उन दिनों छापाखाना इतना विकसित नहीं हुआ था कि हसीनों के बडे़ स्केल पर सुंदर चित्र उपलब्ध होते. तभी तो गालिब साहब इतनी लंबी उम्र जी कर हसीन महिलाओं की चंद तसवीरें ही जमा कर पाए.

च्यवनऋषि से ले कर हकीम लुकमान तक हार गए मगर लंबी उम्र जीने का राज एक राज ही बना रहा. अखबार की ताजा खबर है कि आखिर लंबी उम्र जीने का राज पता चल ही गया. दुनियाभर के वैज्ञानिक भले ही लंबी उम्र का राज ढूंढ़ने में दिनरात जुटे हुए हैं मगर चीन के 94 वर्षीय हुआंग चुनेई की मानें तो सुंदर महिलाओं की तसवीरें देखने से लोगों की आयु बढ़ सकती है. इन महाशय का कहना है कि हर रोज आकर्षक महिलाओं की कामुक तसवीरें देखने से उन की उम्र लंबी हो गई है. आज से 20 साल पहले हुआंग बाबू नौकरी से रिटायर हुए थे. अब कोई खास काम तो था नहीं. अच्छीखासी पैंशन मिलती थी. उन्होंने सुंदर महिलाओं की तसवीरें एकत्र करनी शुरू कर दीं. उन का कहना है कि उन के पास आकर्षक महिलाओं की 1 लाख से ज्यादा तसवीरें हैं जो अपनेआप में एक रिकौर्ड है. मनोवैज्ञानिक उन्हें रोगी कह सकते हैं मगर इन तसवीरों को देख कर उन्हें अजीब किस्म का नशा हो जाता है. हर रोज हुआंग साहब घंटों इन तसवीरों को देखते हैं. इस से उन की देखने और सुनने की क्षमता जस की तस बनी हुई है.

उन की पसंदीदा महिलाओं में ताइवान की मशहूर मौडल लिन और हौलीवुड की सैक्सी ऐक्ट्रैस कैमरून डियाज हैं. बौलीवुड की सैक्स क्वीन मल्लिका शेरावत की हसीन तसवीर उन की एलबम में नहीं है, इस का उन्हें अफसोस है. हुआंग चुनेई अगर भारत में यह राज खोलते तो उन के बेटों को शर्म आती और वे बयान देते कि बूढ़ा इस उम्र में सनकी और ठरकी हो गया है. मगर चीन में हुआंग के बेटों को अपने आशिकमिजाज पिता पर नाज है जो देर रात तक दिलकश महिलाओं की तसवीरों की कटिंग करते रहते हैं. किसी बड़े फिल्मी समारोह के दौरान वे सबकुछ भूल कर टैलीविजन से चिपक जाते हैं. हुआंग का कहना है कि उन के बाद उन के बेटे और पोते इन तसवीरों को देखेंगे. अभी हाल में एक इंटरनैट कंपनी ने यह राज खोला है कि इंटरनैट के प्रयोग में भारत के लोग केवल सैक्सी साइट्स ही खंगालते हैं जबकि विदेशी अध्यात्म से संबंधित सामग्री इंटरनैट पर ढूंढ़ते हैं.

बाहर के लोग सैक्स से उकता चुके हैं जबकि दक्षिण एशिया के लोगों को हसीन नजारे देखने का मौका अभीअभी ही मिला है. हुआंग इस हसीन शौक के अकेले रसिया नहीं हैं. उन के करोड़ों हमखयाल भारत में बसते हैं.

दिन दहाड़े

मैं अपनी कुछ सहकर्मियों के साथ एक सैमिनार में भाग लेने के लिए मुंबई जा रही थी. हम 4 महिलाएं एक ही डब्बे में थीं. दोपहर के समय हम सब गपशप में व्यस्त थीं, तभी एक साधारण सी दिखने वाली महिला बैग लिए अपने 2 बच्चों के साथ हमारे डब्बे में आई और बैठने के लिए थोड़ा सा स्थान मांगने लगी. हम सब को बच्चों पर दया आ गई और उसे ऊपर वाली सीट पर जाने का संकेत कर दिया और फिर बातों में व्यस्त हो गईं. 2 स्टेशन बाद वह महिला कुछ बुदबुदाई और नमस्कार कर के चली गई. रात को जब मैं अपने ऊपर वाली सीट पर गई तो देखा ऊपर रखे मेरे बैग से एक चादर व कुछ नकदी जो मैं ने खरीदारी के लिए अलग रखी थी, गायब थीं. हम दिनदहाड़े ठगी जा चुकी थीं.

नीलू चोपड़ा, जनकपुरी (न.दि.)

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मेरे बेटे ने एक मौल से पैंट का कपड़ा खरीदा और दर्जी के पास सिलाने ले गया. दर्जी ने कपड़ा देखा और उस से पूछा, ‘‘कितने का खरीदा और कहां से?’’ बेटे ने जब बताया तो दर्जी कहने लगा, हमारे पास भी पैंट के ब्रैंडेड कपड़े हैं और सस्ते भी. बेटे ने कपड़ा देखा तो उसे अच्छा लगा और अगले दिन मुझे उस के पास ले गया. मुझे भी कपड़ा अच्छा लगा लेकिन तभी मुझे ध्यान आया कि ब्रैंडेड कपड़े पर कंपनी का नाम हर मीटर के बाद किनारे पर छपा होता है. दर्जी से जब मैं ने यह बात कही तो बोला, ‘‘हां, होता है लेकिन मेरे पास वैसा नहीं है.’’ हम ने न उस से कपड़ा खरीदा और न ही उसे सिलने के लिए दिया. इस तरह हम ठगतेठगते बचे.

गिरिजा शंकर प्रसाद, ग्रेटर नोएडा (उ.प्र.)

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मैं अपनी कार से पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) अपने घर वापस जा रहा था. गाड़ी ड्राइवर चला रहा था. कार फतेहगढ़ साहिब से जब चली थी तो रात के 10 बजे थे. अभी हम बस्सी के समीप पहुंचने वाले थे कि 2 व्यक्ति मोटरसाइकिल से हमारी गाड़ी के पीछे लग गए. रास्ता बिलकुल सुनसान था. एक व्यक्ति ने पुलिस की वरदी पहनी थी. दूसरा सादे कपड़ों में था. दोनों ही नशे में धुत थे. वे दोनों हमारे ड्राइवर से गाड़ी के कागज दिखाने को कह रहे थे. ड्राइवर ने उन से कहा कि वे भले चालान कर दें, लेकिन वह गाड़ी के कागज नहीं दिखाएगा. जैसे ही हमारी कार बस्सी के पास पहुंची उन दोनों व्यक्तियों का कहीं अतापता नहीं था. हम फर्जी पुलिस वाले के हाथों से लुटने से बच गए थे.

प्रदीप गुप्ता, बिलासपुर (हि.प्र.)

बच्चों के मुख से

एक कार्यक्रम में मैं अपने 7 वर्षीय पौत्र के साथ गया था. कार्यक्रम में हर एक को 2-2 पंक्तियां किसी भी गीत की गानी थीं. एक सज्जन जो गाना नहीं चाहते थे, आयोजकों की काफी मिन्नतों के बाद बोले, ‘‘मेरा गला लगा हुआ है.’’

यह सुन मेरा पौत्र उठा और हर कुरसी के पीछे जा कर बड़े ही गौर से देखने लगा. जब उस की यह प्रक्रिया समाप्त हुई, मैं ने पूछा, ‘‘बेटा, क्या कर रहे थे?’’ वह बोला ‘‘बाबा, सब लोग झूठ बोल रहे हैं.’’ मैं ने पूछा, ‘‘वह कैसे?’’ वह बोला, ‘‘मैं ने हर अंकल की कुरसी के पीछे जा कर गौर से देखा कि सब अंकल लोगों के गले लगे हैं. किसी का भी गला कटा नहीं है.’’ उस की यह बात सुन पूरे उत्सव का रंग ही बदल गया.

डा. ओ पी गुप्ता, सागर (म.प.)

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मेरी 5 वर्षीय नवासी श्रेया अपना काम निकालने में चतुर है. एक दिन उसे अपने हाथों में मेहंदी लगवाने की इच्छा हुई. घर पर किसी ने उस के हाथ में मेहंदी नहीं लगाई तो वह हमारी पड़ोसिन के पास गई, बोली, ‘‘मेरे हाथों में मेहंदी लगा दीजिए.’’

‘‘बाद में लगा दूंगी,’’ पड़ोसिन ने कहा, ‘‘अब दोपहर में गरमी के कारण नींद आ रही है.’’ श्रेया ने कुछ देर में बहाना सोचा, फिर मीठे स्वर में कहा, ‘‘1-2 दिन में मेरे पापा की शादी है.’’ पड़ोसिन हंस पड़ी और उस ने उसी समय उस के मेहंदी लगा दी. पड़ोसिन ने सारी बातें दूसरे दिन हमें बताईं तो सब हंस पड़े. श्रेया के मम्मीपापा भी हंस रहे थे.

प्रेम प्रकाश ‘विद्रोही’, अलवर (राज.)

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मैं कैलिफोर्निया में रह रहे अपने बेटे के यहां गया था. मेरा 10 साल का पोता बड़ा बातूनी है. उसे खाने में ज्यादातर फास्टफूड ही पसंद है. वह फल खाने से कतराता है. जबकि कैलिफोर्निया के अधिकांश घरों में सेब और नारंगी के पेड़ भी लगे हुए थे. मेरी बहू उसे बारबार सेब खाने को कहती और समझाती, ‘डाक्टर से दूर रहना है तो एक सेब रोज खाओ.’ उस ने भी अपनी मां से कहा, ‘‘तभी मार्था आंटी के यहां से डाक्टर अंकल चले गए क्योंकि उन के पेड़ में काफी सेब फलते हैं.’’

यह सुन कर हम सभी हंसने लगे थे. दरअसल, उन की पड़ोसिन का नाम था मार्था जिन का अपने डाक्टर पति से हाल में ही तलाक हो चुका था और वे अकेले ही रह रहीं थीं.

श्रीप्रकाश, बोकारो (झारखंड

नरगिस फाखरी झूठ बोलकर किसे धोखा दे रहीं हैं…?

बौलीवुड में तीन माह से चर्चाएं गर्म हैं कि नरगिस फाखरी ने बौलीवुड को हमेशा के लिए अलविदा कह अमेरिका में बस गयी हैं. मगर कुछ दिन पहले ही नरगिस फाखरी ने ‘‘इंस्टग्राम’’ पर पोस्ट किया था कि वह बहुत जल्द भारत आ रही हैं और बौलीवुड को अलविदा कहने का उनका इरादा नहीं है. मगर अब जो नई खबर मिली है, उससे यह बात उभरकर आती है कि नरगिस फाखरी ने इंस्टाग्राम पर झूठ लिखा था. जी हां! एक तरफ वह बौलीवुड लौटने की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ वह नई हौलीवुड फिल्म अनुबंधित कर रही हैं.

वास्तव में नई खबर यह है कि नरगिस फाखरी ने नम्रता सिंह गुजराल की हौलीवुड फिल्म ‘‘5 वेडिंग्स’’ अनुबंधित की है, जिसमें वह आस्कर नामित कलाकार कैंडी क्लार्क और ग्लोबल अवार्ड से नामित कलाकार बो डेरेक के साथ अभिनय करने वाली हैं. सूत्रों के अनुसार इस हौलीवुड फिल्म में नरगिस फाखरी केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसी अमेरिकन महिला पत्रकार की है, जो बौलीवुड वेडिंग्स पर किताब लिखने के लिए भारत आती है.

सूत्रों की माने तो इस फिल्म का कुछ हिस्सा भारत व कुछ हिस्सा हौलीवुड में ही फिल्माया जाएगा. तो क्या ‘इंस्टाग्राम’ में नरगिस ने जो कुछ लिखा उसके मायने यह थे कि वह इस हौलीवुड फिल्म की शूटिंग के लिए भारत आएंगी. पता नहीं इस तरह की बातें सोशल मीडिया पर लिखकर नरगिस जो झूठ बोल रही हैं, उससे वह किसे धोखा दे रही हैं..

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