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एंड्रॉयड यूजर्स के लिए अपडेट हुआ कॉन्टैक्ट एप

दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने अपने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए कई बदलावों के साथ अपना कॉन्टैक्ट एप अपडेट कर दिया है. इस अपडेट में कई नए फीचर्स और डिजाइन्स के साथ ही कुछ नए बदलाव भी किये गये हैं.

एप में कई नये फीचर्स में से एक है डुप्लीकेट कॉन्टैक्ट रख सकने की सुविधा जिसके लिए खुद एप यूजर को निर्देश भी देगा. इस निर्देश से यूजर डुप्लीकेट कॉन्टैक्ट की लिस्ट मर्ज कर सकते हैं या फिर सजेशन को डिसमिस कर सकते हैं.

इस बार एप में पिछले दो टैब ऑल और फेवरिट की जगह सिर्फ एक कॉन्टैक्ट लिस्ट ही दिखेगी. जिसे लेफ्ट साइडबार के हैमबर्गर बटन से देखा जा सकेगा. इससे पहले ये तीन हिस्से में बंट जाता था. डुप्लीकेट कॉन्टैक्ट मैनेज करने की सुविधा अभी तक सिर्फ वेब कॉन्टैक्ट एप में ही हुआ करती थी.

लंबी कॉन्टैक्ट लिस्ट में डुप्लीकेट कॉन्टैक्ट की छंटनी करने में अभी तक बड़ी मुश्किल हुआ करती थी. जिसे करने में अब ये ऑप्शन काम आएगा. इस बार के अपग्रेडेशन से आप अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट को कई लेबल में भी बांट सकते हैं. जैसे फैमिली, फ्रेंड्स आदि. ये फीचर भी अभी तक सिर्फ वेब पर ही मौजूद था.

गूगल 1.5 का ये अपडेट काफी हद तक अपने एंड्रॉयड फोन में लंबी कॉन्टैक्ट लिस्ट रखने वाले यूजर्स की मुश्किलों को आसान कर सकेगा.

 

योगेश्वर का सिल्वर मेडल लेने से इंकार, होगा डोप टेस्ट

2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके योगेश्वर दत्त को अपने ब्रॉन्ज मेडल के सिल्वर मेडल में बदलने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा. योगेश्वर को तब तक इंतजार करना पड़ेगा जब तक कि विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) उनके नमूने को साफ सुथरा करार नहीं देती है.

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि योगेश्वर को पदक सौंपने से पहले उन्हें भी 2012 के अपने टेस्ट में पाक साफ उतरना होगा.

अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘योगेश्वर का भी टेस्ट किया जाएगा और जब उनका डोप टेस्ट साफ आ जाएगा तो उन्हें सिल्वर मेडल सौंप दिया जाएगा.’’

आपको बता दें कि वाडा के संसोधित नियमों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के दौरान लिये गये डोप के नमूने दस साल तक फ्रीज में रखे जाते हैं ताकि समय के साथ उन्नत तकनीक आने पर उनका टेस्ट किया जा सके. और यह सुनिश्चित हो सके कि भले ही देर से लेकिन ईमानदार खिलाड़ी को न्याय मिले.

आईओसी नये नियमों को ध्यान में रखते हुए लंदन ओलंपिक के अलावा बीजिंग ओलंपिक 2008 और अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में एकत्रित किये गये नमूनों की दोबारा जांच कर रही है.

वहीं योगेश्वर दत्त ने ट्वीट कर कहा कि अगर हो सके तो यह मेडल कुदुखोव के परिवार के पास ही रहने दिया जाए. योगेश्वर ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘बेसिक कुदुखोव शानदार पहलवान थे. उनकी मृत्यु के बाद डोप टेस्ट में विफल हो जाना दुखद है. मैं खिलाड़ी के रूप में उनका सम्मान करता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर हो सके तो यह पदक उन्हीं के पास रहने दिया जाए. उनके परिवार के लिए भी सम्मान पूर्ण होगा. मेरे लिए मानवीय संवेदना सर्वोपरि है.’’

चार बार के विश्व चैम्पियन और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता कुदुखोव की दक्षिण रूस में 2013 में कार दुर्घटना में मौत हो गई थी. उनके 2012 में लिए नमूने का रियो खेलों से पूर्व विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी ने दोबारा टेस्ट किया गया जिसमें वह विफल रहे.

अब ज्यादा दाम पर लॉन्च होंगे गूगल स्मार्टफोन

उम्मीद जताई जा रही थी कि गूगल अपने ऐंड्रॉयड OS के लेटेस्ट वर्जन 'नॉगट' के साथ अपने नेक्सस डिवाइसेज भी लॉन्च करेगा. मगर ऐसा पहली बार हुआ, जब नए OS को जारी करते वक्त कंपनी ने कोई नया डिवाइस पेश नहीं किया. अब चर्चा है कि गूगल अपने नए स्मार्टफोन्स को अगले महीने लॉन्च करेगा और उनका लॉन्चिंग प्राइस अब तक आए नेक्सस डिवाइसेज के मुकाबले ज्यादा होगा.

चर्चा है कि इस बार का नेक्सस डिवाइस HTC बना रही है, मगर ये स्मार्टफोन नेक्सस की ब्रैंडिंग के बजाय कंपनी की अपनी ब्रैंडिंग के साथ लॉन्च हो सकते हैं. अब तक कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिनमें कहा गया है कि इन स्मार्टफोन्स में नेक्सस की ब्रैंडिंग नहीं होगी.

नेक्सस ब्लॉग के मुताबिक 5 इंच डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन का कोडनेम सेलफिश (Sailfish) रखा गया है. जानकारी मिली है कि इसे 449 डॉलर्स (करीब 30 हजार रुपये) में लॉन्च किया जाएगा.

इस फोन का 5.5 इंच डिस्प्ले वाला मॉडल भी लॉन्च होगा, जिसका कोडनेम मार्लिन (Marlin) रखा. इसका लॉन्चिंग प्राइस 599 डॉलर (करीब 40,100 रुपये) होगा. ये कीमतें इन स्मार्टफोन्स के 32 जीबी मेमरी वाले वैरियंट्स की हैं.

इन स्मार्टफोन्स को इसी महीने लॉन्च किया जा सकता है. इन स्मार्टफोन्स का मुकाबला सीधे आईफोन से होगा. ऐसी भी खबरें हैं कि अक्टूबर में इन्हें भारत में लॉन्च कर दिया जाएगा.

GST रजिस्ट्रेशन के डर से हट रहा काली कमाई से परदा

गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स का असर जानने के लिए इस साल अगस्त में एक रिटेलर्स एसोसिएशन ने जब मुंबई में एक आयोजन किया तो मुख्य आयोजन से अलग टैक्स एक्सपर्ट्स से केवल एक मुद्दे पर चर्चा की गई. क्या सरकार पहले नहीं चुकाए गए टैक्स के लिए भी उन्हें टारगेट करेगी? ऐसा हो तो वे क्या कर सकते हैं?

कई रिटेलर्स, मिडलमेन, रियल एस्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स और दूसरे छोटे वेंडर्स और ट्रेडर्स इस चिंता में पड़े हैं कि जीएसटी लागू होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उनके पीछे पड़ सकता है. इनमें से कुछ ने इनकम डिक्लेयरेशन स्कीम के तहत अपनी अघोषित संपत्ति का खुलासा कर दिया है और कई अन्य आने वाले दिनों में ऐसा कर सकते हैं. एक ओर जहां काला धन रखने वाले कई लोग आईडीएस के तहत सामने नहीं आ रहे हैं, वहीं कई बिचौलिए, रिटेलर्स और रियल एस्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स अपनी काली कमाई से परदा हटाने के बारे में सोच रहे हैं.

जीएसटी की व्यवस्था के तहत मैन्युफैक्चरर से लेकर सेलर और मिडलमेन तक, सभी लोगों को जीएसटी के आईटी प्लैटफॉर्म जीएसटीएन पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसका अर्थ यह है कि हर छोटे वेंडर या रिटेलर को जीएसटीएन पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अपने पैन की जानकारी देनी होगी. पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में एक बहस के दौरान कहा था, 'हम सभी को कच्चा बिल और पक्का बिल के बारे में पता है. हालांकि जीएसटी से कच्चा बिल का सिस्टम खत्म हो जाएगा क्योंकि व्यापारियों को पक्का बिल देना होगा और असली एकाउंट्स दिखाने होंगे ताकि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा मिल सके.'

कई कारोबारी मौजूदा सिस्टम में खामी का फायदा उठाते हुए अपनी असल आमदनी जाहिर नहीं करते हैं. कई कारोबारी कस्टमर्स को बिल नहीं देते हैं तो कई अन्य टैक्स से बचने के लिए बिल बढ़ाकर या घटाकर दिखाते रहते हैं. हालांकि जीएसटी का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा और इस तरह यह पारदर्शी होगा. यही बात कई लोगों को परेशान कर रही है. वे जब संबंधित साल में अपनी असल आमदनी पर जीएसटी के तहत टैक्स चुकाना शुरू कर देंगे तो रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारी यह भी अंदाजा लगा लेंगे कि इससे पहले के वर्षों में कितनी टैक्स चोरी हुई होगी.

एक कंसल्टेंसी के टैक्स हेड ने कहा, 'जीएसटी से केवल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन पर असर नहीं पड़ेगा, इससे इनकम टैक्स कलेक्शन पर भी प्रभाव पड़ेगा. इसके जरिए टैक्स अधिकारी लोगों की ओर से चुकाए गए टैक्स के आधार पर उनकी इनकम की गणना कर सकेंगे.'

काले धन की जानकारी आईडीएस के तहत देने के बारे में सोच रहे दो कारोबारियों को सलाह दे रहे मुंबई के एक टैक्स कंसल्टेंट ने कहा, 'जो कारोबारी जीएसटीएन पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगे, वे कारोबार नहीं कर पाएंगे, लेकिन रजिस्ट्रेशन होने पर उनके खेल से परदा हट जाएगा. ऐसी स्थिति से बचने के लिए कई लोग अपनी अघोषित संपत्ति की जानकारी देना चाहते हैं.'

AUSvsSL: ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज पर किया कब्जा

टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप झेलने के बाद वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका के खिलाफ शानदार वापसी की. पांच मैचों की सीरीज का चौथा वनडे जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त बना ली है. तेज गेंदबाज जॉन हेंस्टिंग्स, जॉर्ज बेली और एरन फिंच ऑस्ट्रेलियाई जीत के हीरो रहे.

हेस्टिंग्स ने अपने करियर का बेस्ट प्रदर्शन करते हुए 45 रन देकर छह विकेट लिए और श्रीलंका को निर्धारित 50 ओवरों में 212 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई. श्रीलंका की तरफ से सलामी बल्लेबाज धनंजय डिसिल्वा ने सर्वाधिक 76 रन बनाए जबकि तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड के बाउंसर पर चोटिल होने वाले कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने 40 रन का योगदान दिया.

वेड ने लगाया विजयी छक्का

फिंच (55) ने छोटे लक्ष्य के सामने ऑस्ट्रेलिया को तूफानी शुरुआत दिलाई. उन्होंने 18 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर ऑस्ट्रेलियाई रिकॉर्ड की बराबरी की. बाद में बेली ने स्पिनरों के सामने अपने कौशल का अच्छा नमूना पेश किया और 85 गेंदों पर नॉटआउट 90 रन की पारी खेली जिसमें 11 चौके और एक छक्का शामिल है.

बेली ने ट्रेविस हेड (40) के साथ चौथे विकेट के लिए 100 रन की साक्षेदारी की. मैथ्यू वेड (नॉटआउट 08) ने विजयी छक्का लगाया. ऑस्ट्रेलिया ने 31 ओवर में चार विकेट पर 217 रन बनाकर जीत दर्ज की. इस जीत से ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट सीरीज में मिली 0-3 से हार का दर्द भी कुछ कम कर दिया.

फिंच ने जमाया रंग

फिंच शुरू से ही गेंदबाजों पर हावी हो गए. उन्होंने अमिला अपोंसो पर चार चौके जड़कर शुरुआत की और तिसारा परेरा के अगले ओवर में दो छक्के और एक चौका लगाया. उन्होंने श्रीलंका के सबसे सफल गेंदबाज बाएं हाथ के स्पिनर सचित पातिराना पर छक्का जड़कर 18 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और साइमन ओडोनेल और ग्लेन मैक्सवेल के ऑस्ट्रेलियाई रिकॉर्ड की बराबरी की.

फिंच हालांकि अगली गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. उन्होंने अपनी 19 गेंद की पारी में आठ चौके और तीन छक्के लगाए और इस बीच कप्तान डेविड वार्नर (19) के साथ पहले विकेट के लिये 74 रन की साझेदारी की.

पातिराना ने इसी ओवर में उस्मान ख्वाजा को भी पवेलियन भेजा और फिर वार्नर की गिल्लियां बिखेरी. इससे पहले हेस्टिंग्स के सामने श्रीलंका के टॉप ऑर्डर के अधिकतर बल्लेबाज जूझते रहे. उन्होंने अपनी शानदार गेंदबाजी से श्रीलंका के टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसले को भी गलत साबित कर दिया.

मैथ्यूज की गर्दन पर लगी बाउंसर गेंद

श्रीलंकाई पारी के दौरार बोलैंड की गेंद मैथ्यूज के गर्दन के उपर हेलमेट पर लगी. वह कुछ देर तक क्रीज पर रहे लेकिन बाद में मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पवेलियन लौट गए. मैथ्यूज तब 28 रन पर खेल रहे थे. वह पारी के अंतिम क्षणों में वापस क्रीज पर लौटे. हेस्टिंग्स ने उन्हें पारी की अंतिम गेंद पर जॉर्ज बेली के हाथों कैच कराया.

मैथ्यूज ने 71 गेंदें खेली तथा चार चौके लगाए. श्रीलंका एक समय 200 रन तक पहुंचने के लिए भी संघर्ष कर रहा था लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों पातिराना (24), दिलरूवान परेरा (18) और तिसारा परेरा (13) के योगदान से वह सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा. ऑस्ट्रेलिया की तरफ से हेस्टिंग्स के अलावा मिशेल स्टार्क, बोलैंड, एडम जंपा और ट्रेविस हेड ने एक-एक विकेट लिया.

आखिर अनिल कपूर बुरी तरह से मात खा गए

इन दिनों अनिल कपूर कुछ ज्यादा ही परेशान नजर आ रहे हैं. अनिल कपूर की समझ में नहीं आ रहा है कि अब वह क्या करें? अनिल कपूर निर्मित और उनकी मुख्य भूमिका से सजे ‘‘कलर्स’’ चैनल पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘24’’ के दूसरे सीजन को दर्शकों ने एकदम से नकार दिया. अनिल कपूर का यह सीरियल इसी नाम के अमरीकन सीरियल का भारतीय संस्करण है. इसके पहले सीजन को जबरदस्त सफलता मिली थी. जिससे प्रेरित होकर अनिल कपूर इसका दूसरा सीजन पूरे अठारह माह बाद लेकर आए. मगर इस बार अनिल कपूर के सीरियल की बहुत दुर्गति हो रही है.

जबकि अनिल कपूर ने अपने इस सीरियल के लिए दर्शक जुटाने के लिए सारे प्रयास कर डाले. इस सीरियल के प्रचार के लिए अनिल कपूर ने कई स्टंट किए. वह मुंबई की लोकल ट्रेन में चढ़कर चलती ट्रेन से बाहर लटकते हुए नजर आए. ट्वीटर पर तस्वीरें डालीं. वह अपने इस सीरियल के प्रचार के लिए दुबई भी गए.

इसके अलावा वह ‘कलर्स’ चैनल के सीईओ राज नायक के साथ लंदन जाकर कुछ प्रेस काफ्रेंस करके वहां के पत्रकारों से अपने इस सीरियल के बारे में बातें करके आ गए. लेकिन वह इस सीरियल के दर्शक बढ़ाने के लिए इस देश से उस देश भाग रहे हैं या सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं, उतनी ही तेजी से उनके दर्शक कम होते जा रहे हैं. ‘बीएआरसी’ आंकड़ो के अनुसार 23 जुलाई को प्रसारित सीरयल ‘24’ के एपिसोड को तेरह लाख दर्शक मिले थे, जबकि 14 अगस्त को प्रसारित सीरियल ‘24’ के एपिसोड को महज छह लाख दर्शक मिले. अब तक के भारतीय टीवी के इतिहास में किसी भी सीरियल को इतने कम दर्शक नहीं मिले. मजेदार बात यह है कि 13 अगस्त को प्रसारित ‘झलक दिखला जा’ के एपिसोड को सत्ताइस लाख से अधिक दर्शक मिले. अब कहां 27 लाख और कहां 6 लाख.

अब एक तरफ ‘कलर्स’ चैनल की रचनात्मक टीम और अनिल कपूर के होश उड़े हुए है, उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह किस तरह सीरियल ‘‘24’’ के दर्शकों की संख्या बढ़ाए. उधर टीवी इंडस्ट्री में तमाम लोग जश्न मना रहे हैं. सूत्रों की माने तो अब टीवी इंडस्ट्री के कई प्रोड्यूसर्स को अनिल कपूर पर तंज कसने का अवसर मिल गया है. टीवी इंडस्ट्री में यह चर्चा भी काफी जोरों पर है कि अनिल कपूर जितना समय व पैसा दुबई या लंदल जाकर वहां के पत्रकारों के साथ मिलने के लिए बर्बाद कर रहे है, वही समय यदि वह अपने सीरियल की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए रचनात्मक ढंग से सोचने पर खर्च करते,तो ज्यादा बेहतर होता.. काश अनिल कपूर सीरियल की गुणवत्ता को सुधारने के साथ ही भारतीय दर्शकों तक अपने इस सीरियल को पहुंचाने के लिए भारतीय पत्रकारों के साथ बैठकर गुफ्तगूं करते तो शायद स्थिति सुधर जाती. लेकिन भारतीय पत्रकारों से मिलने के लिए अनिल कपूर के पास समय का बड़ा अभाव है..उन्हें लगता है कि सोशल मीडिया व विदशों में जाकर वहां की मीडिया से बात करके जंग जीत लेंगे…खैर,हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं…

38 करोड़ 50 लाख डॉलर में बिका टेन स्पोर्ट्स

मीडिया कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइज लिमिटेड (जील) ने अपने स्पोर्ट्स चैनल ‘टेन स्पोर्ट्स’ को पूर्ण नकदी करार के तहत सोनी पिक्चर्स को 38 करोड़ 50 लाख डॉलर (लगभग 2579 करोड़ रूपये) में बेच दिया है.

जील ने मुंबई स्टॉक एक्सचेंज को बताया, ‘‘कंपनी के बोर्ड निदेशकों ने कंपनी के खेल प्रसारण व्यवसाय की सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्‍स इंडिया (एसपीएन) को बिक्री और स्थानातंरण की स्वीकृति दे दी है. यह पूर्ण नकदी करार 38 करोड़ 50 लाख डॉलर का है.’’

जील ने कहा कि कंपनी और उसकी अधीनस्थ कंपनियों ने इस संबंध में जरूरी करार पूरा कर लिया है. कंपनी ने बताया कि फिलहाल उसका खेल प्रसारण व्यवसाय मॉरिशस की ताज टीवी लिमिटेड के अंतर्गत आता है जो टेलीविजन चैनलों के ‘टेन’ ब्रांड के टीवी चैनलों और ताज टेलीविजन (इंडिया) के जरिये सामग्री के वितरण और प्रसारण का व्यवसाय करता है.

ताज टेलीविजन (इंडिया) के पास मॉरिशस के ताज टीवी लिमिटेड के स्वामित्व वाले खेल चैनल के भारत में डाउनलिंकिंग, वितरण, विपणन और खेल चैनल पर विज्ञापन की बिक्री के एक्सक्लूसिव अधिकार हैं.

कंपनी के कुल राजस्व में खेल प्रसारण व्यवसाय का कुल हिस्सा 631 करोड़ रूपये था और 2015-16 में 37 करोड़ 20 लाख रूपये का नुकसान हुआ था. जील ने 2006 में दुबई के अब्दुल रहमान बुखातिर के ताज समूह से टेन स्पोर्ट्स को खरीदा था.

टेन स्पोर्ट्स के जिन चैनलों का अधिग्रहण किया गया है उनमें टेन 1, टेन 1एचडी, टेन 2, टेन 3, टेन गोल्फ एचडी, टेन क्रिकेट, टेन स्पोर्ट्स शामिल हैं जो भारतीय उपमहाद्वीप सहित मालदीव, सिंगापुर, हांगकांग, कैरेबिया और पश्चिम एशिया के कई देशों में संचालन करता है.

किसे टक्कर देने आ रही हैं राखी सावंत?

आइटम गर्ल के रूप में मशहूर अभिनेत्री राखी सावंत इन दिनों काफी उत्साहित हैं. उनके इस उत्साह की वजह यह है कि वह अब आइटम गर्ल की बजाय फिल्म ‘एक कहानी जूली की’ में हिरोईन बनकर आ रही हैं.

9 सितंबर को वह अपनी इस फिल्म के साथ कटरीना कैफ की फिल्म ‘बार बार देखो’ को टक्कर देने जा रही हैं. राखी सावंत को लग रहा है कि ‘फितूर’ और ‘फैंटम’ जैसी फिल्मों की असफलता के चलते वह कटरीना कैफ की फिल्म ‘बार बार देखो’ को पछाड़ देंगी.

ज्ञातब्य है कि अवध शर्मा निर्मित फिल्म ‘एक कहानी जूली की’ शीना मर्डर कांड पर आधारित है. इसमें राखी सावंत ने इंद्राणी मुखर्जी का किरदार निभाया है.

एक खास मुलाकात में राखी सावंत ने कहा, ‘‘मगर मेरी दिली तमन्ना ‘लेडी सलमान खान’ बनने की है. सलमान खान बॉक्स आफिस के राजा हैं. विद्या बालन ने भी बॉक्स आफिस पर कमाल दिखाया है. 9 सितंबर को मेरी फिल्म ‘एक कहानी जूली की’ के साथ ही कटरीना कैफ की फिल्म ‘बार बार देखो’ रिलीज होने वाली है. तो मैं भी कटरीना कैफ को जबदस्त टक्कर देना चाहती हूं. यही मेरा इरादा है.’’

राखी सावंत ने अगे कहा कि ‘‘शाहरुख खान, कपिल शर्मा, गोविंदा, टीवी कलाकार, क्रिकेटर, यह सभी सोशल मीडिया पर मुझे व मेरी फिल्म के लिए सपोर्ट कर रहे हैं. यह सभी कलाकार इस बात को लेकर खुश हैं कि मैं पहली बार ‘आइटम गर्ल’ से उपर उठकर किसी फिल्म में हिरोइन बनकर आ रही हूं. कभी कभी मुझे लगता है कि मेरा बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ है. तो कभी कभी लगता है कि मैं तो हिरोइन बनने के काबिल ही नहीं हूं. लेकिन इन दिनों बॉलीवुड में इतनी आड़ी टेढ़ी हिरोइनें आ रही हैं कि मुझे भी लगा कि अब मुझे भी ‘आइटम गर्ल’ की बजाय हिरोइन बनना चाहिए.ऐसे में जैसे ही मुझे अवध शर्मा ने फिल्म ‘एक कहानी जूली की’ में हिरोईन बनने का ऑफर दिया, मैंने तुरंत लपक लिया.’’ 

हौसलों में उड़ान होती है: प्रेमलता अग्रवाल

साल 2011 में एवरेस्ट पर विजयी पताका लहरा कर प्रेमलता अग्रवाल निश्चिंत होकर नहीं बैठ गई हैं. अब वह दक्षिण अफ्रीका के किलीमंजारो पर्वत और अंटार्कटिका पर फतह पाने के सपने को साकार करने की तैयारियों में लगी हुई हैं. एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे ज्यादा आयु की महिला होने का विश्व रिकार्ड उनके नाम है. वह कहती हैं- ‘मजबूत इरादों से हर उम्र में हर मुश्किल पर जीत हासिल की जा सकती है. उम्र चाहे जो भी हो संघर्ष से हर जंग जीती जा सकती है.’

ऊंचे पहाड़ों के शिखरों को छूने की उनकी कोशिश एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद खत्म नहीं हुई, बल्कि एक के बाद एक दुनिया के तमाम ऊंची शिखरों पर कदम रख डाला. दक्षिण अफ्रीका के तंजानिया के किलिमंजारो (5895 मीटर), अमेरिका के माउंट एकानकरगुआ (6962 मीटर), यूरोप के माउंट एल्ब्रस (5642 मीटर), आट्रेलिया के कासेंस पिरामिड (4884 मीटर) और अंर्टाटिका के माउंट विन्सन (4897 मीटर) की चोटियों पर जीत का झंडा फहरा चुकी हैं. अब वह उत्तर अमेरिका के 6196 मीटर ऊंची  चोटी माउंट मैकिनले पर चढ़ाई करने की तैयारियों में लग गई हैं.

1963 में सिलीगुड़ी में जन्मी प्रेमलता बताती हैं कि बेटी को स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग दिलवाते-दिलवाते उनमें भी स्पोर्ट्स में दिलचस्पी पैदा हो गई. उन्हीं दिनों टाटा में वाकिंग कॉम्पीटिशन में हिस्सा लिया और उसी दौरान मशहूर पर्वतारोही और टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की प्रमुख बछेंद्री पाल से मिलने का मौका मिला. उनकी औफिस में लगी मांउंटेनिंग की तस्वीरें देख कर उनमें माउंटेनिंग करने और उंचे पहाड़ों को फतह करने का सपना देख लिया. उसके बाद अपने सपने को साकार करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद 45 साल की आयु में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली उम्रदराज महिला बन गई.

उसके बाद एक के बाद एक कई चोटियों पर विजयी पताका लहरा कर उन्होंने  साबित कर दिया कि कामयाबी हासिल करने के लिए उम्र कोई रूकावट नहीं बनती है, सपना, मेहनत और लगन से हर मंजिल की राह आसान बन जाती है. पिछले दिनों इस माउंटेन वूमेन को भारत सरकार ने पद्मश्री के खिताब से नवाजा.

झारखंड के जमशेदपुर शहर में रहने वाली प्रेमलता कहती हैं कि जज्बे से ही जीत मिलती है. अकसर लोग कहते मिल जाते हैं कि उनकी उमर हो गई है अब क्या काम करें? घर-गृहस्थी में फंसने की दुहाई दी जाती है. यह सब बहानाबाजी ही होता है. जिस चीज के प्रति आदमी का इंटरेस्ट होता है उसके लिए वह किसी न किसी तरह से समय निकाल ही लेता है. बछेंद्री पाल की देखरेख और उनसे ट्रेनिंग लेकर प्रेमलता ने 20 मई 2011 को 8848 मीटर ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहरा दिया.

सिलीगुड़ी के व्यवसायी रामावतार अग्रवाल और शारदा अग्रवाल के घर पैदा हुई प्रेमलता बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें पढ़ने से ज्यादा खेलकूद में मन लगता था. बड़ा परिवार होने और पिता की व्यस्तताओं की वजह से वह अपने खेलकूद के शौक को आगे नहीं बढ़ा सकी. मां-बाप के 9 संतानों में दूसरे नंबर की प्रेमलता कहती हैं कि बड़ा परिवार होने के कारण परिवार का खर्च कापफी मुश्किल से चल पाता था. विमल अग्रवाल से विवाह होने के बाद वह जमशेदपुर आ गई.

मजबूत इरादों, हिम्मत और जुनून का दूसरा नाम है प्रेमलता अग्रवाल. उनकी एक बेटी की विवाह हो चुकी है और दूसरी बेटी नौकरी कर रही है. प्रेमलता का विवाह 18 साल की उम्र में ही हो गया था. विवाह के बाद वह परिवारिक काम-काज में पूरी तरह से रम गई थी. बछेंद्री पाल से मिलने के बाद तो प्रेमलता के सपनों और हौसलों को मानो पंख लग गए. पति बिमल अग्रवाल से उन्होंने जब एवरेस्ट पर चढ़ने की बात कही तो पहले वह हैरान हुए, पर बाद में उनकी लगन को देखकर प्रोत्साहन देने लगे. उसके बाद से प्रेमलता ने लगातार 12 सालों तक माउंटेनिंग की ट्रेनिंग ली, जिसमें बछेन्द्री पाल ने काफी मदद और हौसला आफजाई की. 25 मार्च 2011 को आखिर वह दिन आया जिस दिन उन्होंने 8848 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई शुरू की थी.

वह बताती हैं कि शरीर को बेधने वाली बर्फीली हवाएं, चारों ओर फैला बर्फ ही बर्फ, पीठ पर लादा भारी सामान, बर्फ का तेज तूफान, ऊंची- ऊंची चढ़ाई, जीरो से 20 डिग्री कम टेम्प्रेचर के बीच भी एवरेस्ट को छूने का हौसला कमजोर नहीं हुआ. बर्फीले सफर का खौफनाक दास्तान बताते हुए वह कहती हैं- ‘25 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंची थी तो अचानक मौसम बहुत ज्यादा खराब हो गया. ज्यादातर लोग वापस लौटने लगे, पर हमने हिम्मत नहीं हारी. मौसम के ठीक होते ही फिर चढ़ाई चालू की. 27 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंची तो ऑक्सीजन मशीन खराब हो गया. उसे ठीक करने के लिए दायें हाथ का गलव्स खोला तो वह तेज हवा में उड़ गया. हाथ ठंड से जड़ होने लगा. तभी पास में एक पुराना गलव्स गिरा हुआ मिल गया तो उससे राहत मिली.’

आगे वह बताती हैं कि मौसम जब ज्यादा खराब हो जाता था तो साथ चल रहे शेरपा उनका मजाक उड़ाते और फब्तियां कसते थे. वे कहते थे कि जिस उमर में लोग घर में आराम करते हैं. नाती और पोतों को खिलाते हैं, उस उमर में पता नहीं क्या सूझा कि एवरेस्ट पर चढ़ने चली आई. कभी शेरपा कहते थे कि  तुम्हें अपने घर परिवार, पति और बच्चों से प्यार नहीं है क्या? इन सबके बाद भी प्रेमलता का हौसला कमजोर नहीं हुआ और वह सबसे ज्यादा उम्र में एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला बन गईं.

प्रेमलता के कोच निर्मल पांडे कहते हैं कि प्रेमलता मजबूत इरादों वाली महिला हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कामयाबी पाने के लिए कोई उम्र नहीं होती है. इंसान में हिम्मत, हौसला, लगन और मेहनत करने का जज्बा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं.

शिक्षा को बीमारू बना रहा ‘मुफ्त पब्लिसिटी’ का रोग

बिहार की रूबी राय के बाद लखनऊ का अनन्या वर्मा प्रकरण शिक्षा के बाजारीकरण पर नये सवाल उठा रहा है. जिससे साफ लगता है कि मुफ्त की पब्लिसिटी का रोग शिक्षा को बीमारू बना रहा है.

जिस कॉलेज के बच्चे सबसे ज्यादा टॉप करते है वहां प्रवेश के लिये सबसे लंबी लाइन लगती है. वह स्कूल मनमानी फीस वसूलने लगता है. इस तरह की सफलता से स्कूल को मुफ्त का प्रचार मिलता है. स्कूल नये-नये प्रयोग करते है.

बिहार में टॉप करने वाली रूबी राय के बाद उत्तर प्रदेश में 4 साल 7 माह की बच्ची अनन्या वर्मा का प्रकरण चर्चा में है. उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग और समाजसेवियों की दखल से पता चला कि अनन्या वर्मा को 4 साल 7 माह की उम्र में 9वीं कक्षा में प्रवेश देने का फैसला सही नहीं था.

उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग अब अनन्या का आईक्यू टेस्ट कराकर देखेगा कि वह किस कक्षा में प्रवेश के लायक है. यही नही कक्षा 9 में अनन्या के प्रवेश की अनुमति देने वाले लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक को भी नोटिस जारी कर 5 सितम्बर तक जवाब देने को कहा गया है.

अनन्या वर्मा लखनऊ के रहने वाले तेज प्रताप वर्मा की बेटी है. उसकी उम्र 4 साल 7 माह है. पिता तेज प्रताप के मुताबिक अनन्या एक बहुत प्रतिभाशाली बच्ची है. इस बात की जानकारी तेज प्रताप ने सेंट मीराज स्कूल को दी. स्कूल ने इस संबंध में लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक को जानकारी देते हुए अनन्या के 9 वी कक्षा में प्रवेश दिये जाने की अनुमति मांगी.

जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति के बाद अनन्या का मामला सुर्खियों में आ गया. दरअसल इसकी एक वजह और भी है. अनन्या की बड़ी बहन सुषमा वर्मा के साथ भी पहले ऐसा हो चुका है. सुषमा वर्मा ने सेंट मीराज स्कूल से ही 7 साल 3 माह में हाईस्कूल पास किया. 15 साल की उम्र में एमएससी करने के बाद 16 साल में वह पीएचडी कर रही है. सुषमा ने 7 साल में 10 वीं पास करने और फिर एमएससी पीएचडी करने के चलते सेंट मीराज स्कूल और सुषमा वर्मा दोनो सुखियों में छाये रहे. उन्हें कई तरह के पुरस्कार भी मिले.

अनन्या के पिता का कहना है कि इतने ही गुण सुषमा में भी थे स्कूल के गाइडेंस के बाद वह कम उम्र में ही सफल हो गई. जब एक ही परिवार की सगी बहनों के प्रतिभाशाली होने की खबरों ने मामले को संदिग्ध बना दिया तब उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को दखल देनी पड़ी.

आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह और समाजसेवी डॉक्टर पूजा अवस्थी और विनिका करौली ने अनन्या वर्मा की जांच की तो उनको यह लगा कि अनन्या दूसरे बच्चों से बेहतर है पर ऐसा नहीं कि उसका प्रवेश कक्षा 9 में दे दिया जाये. 4 साल 7 माह की उम्र में सामान्य बच्चा कक्षा 1 तक भी नहीं पहुंच पाता है. ऐसे में अनन्या को कक्षा 9 में प्रवेश दिया जाना सवालों के घेरे में है. शिक्षा विभाग के साथ ही साथ सेंट मीराज स्कूल भी सवालों के घेरे में है.

उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने कहा कि अनन्या वर्मा का आईक्यू टेस्ट कराने के बाद एक्सपर्ट की राय पर यह तय होगा कि उन्हें किस कक्षा में दाखिला दिया जायेगा. मगर अब वह सेंट मीराज इंटर कालेज में नहीं पढेगी.

अगर स्कूल और परिवार बच्चों के साथ इस तरह की व्यवहार करेगे तो बच्चे मानसिक रूप से बीमार हो सकते है. अनन्या के पिता मीडिया की भूमिका से खुश नहीं है. उनका कहना है कि जिस तरह से अनन्या से सवाल पूछे जा रहे है उससे उनको धक्का लगा है. अनन्या अपनी बड़ी बहन सुषमा की ही तरह प्रतिभाशाली है.

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