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श्याम बेनेगल नहीं बना रहे फवाद खान के साथ कोई फिल्म

उरी आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने का मुद्दा उठने के बाद से बौलीवुड दो खेमो में बंट हुआ है. महेश भट्ट, हंसल मेहता, अनुराग कश्यप, सलमान खान सहित कुछ लोग कलाकारों के बैन के खिलाफ हैं. इनकी राय में कला व कलाकार को देश की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता.

कुछ दिन पहले श्याम बेनेगल ने कहा था-‘‘इस मुद्दे पर मेरी कोई राय नही हैं. यह कलाकार भारत में इसलिए हैं क्योंकि इन्हे भारतीय निर्माताओं ने बुलाया है और भारत सरकार ने इन्हें वीजा दिया. यदि वह अपनी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो इन्हे वापस चले जाना चाहिए. वह यहां कलाकार के तौर पर आए हैं, इसलिए मुझे उनके वापस चले जाने को कहने का कोई हक नहीं बनता.’’ श्याम बेनेगल के इस बयान को हर कोई मानकर चल रहा है कि श्याम बेनेगल पाकिस्तानी कलाकारों के पक्ष में हैं. पर हकीकत में उनके लिए भी देश पहले है.

कल बौलीवुड में चर्चा गर्म हुई कि श्याम बेनेगल अब पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान को लेकर भारत व पाक के बीच अच्छे संबंध बनाने के लिए एक फिल्म ‘‘ये रास्ते हैं प्यार’’ का निर्माण करने जा रहे हैं, जिसके निर्देशक हर्षनारायण हैं. इसमें फवाद खान एक म्यूजीशियन के किरदार में होंगे.

इस खबर के उड़ते ही हमने श्याम बेनेगल से बात की, तो पता चला कि यह खबर पूरी तरह से बेबुनियाद है. श्याम बेनेगल को मेरा प्रश्न सुनकर हंसी आ गयी. उन्होंने कहा कि वह ऐसी कोई फिल्म नहीं बना रहे हैं.

जी हां! श्याम बेनेगल कहते हैं-‘‘मैं भारत व पाकिस्तान के बीच शांति की बात करने वाली फिल्म का निर्माण क्यों करुं? हकीकत में यह हर्ष नारायण नामक एक युवक  की बदमाशी है, जो कि प्रचार के लिए मेरा नाम उपयोग कर रहा है. पर मैं ऐसी कोई फिल्म नहीं बना रहा. यह मूर्ख इंसान है. वह कभी मुझसे मिला था और मैंने उससे साफ तौर पर कहा था कि इस तरह के विषय में मेरी कोई रूचि नहीं है. फिर उसने कहा था कि वह फिल्म के लिए आर्थिक मदद जुटाने के लिए मेरा नाम फिल्म के साथ जोड़ना चाहता है. मैंने उसे मना कर दिया था. पर मुझे यकीन नहीं था कि वह हमारे बीच हुई इस बातचीत के बाद इस तरह से मेरे नाम का उपयोग करेगा. जब बाजार में यह खबर आयी, तो हमने उससे कहा कि वह सामने आकर इस खबर का खंडन करे, पर वह अब तक चुप है. देखिए, जब किसी विषय में मेरी रूचि होती है, तो उस पर मैं स्वयं पटकथा लिखता हूं. मैं दूसरे की लिखी पटकथा पर कभी फिल्म नहीं बनाता. पर यह हर्ष नारायण जो एक खास तरह की फिल्म बनाने के लिए मरा जा रहा है, उसने मेरी ‘गुडविल’ को गलत तरीके से उपयोग किया है.’’

अजय देवगनः चोर की दाढ़ी में तिनका

उरी आतंकवादी हमले के बाद देश के साथ साथ बौलीवुड में जिस तरह से पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ माहौल बना है, उससे काफी लोग अपने आपको देशभक्त कहलाने का बीड़ा तक उठाने लगे हैं. तो वहीं बौलीवुड से जुड़े कुछ लोग काफी डरे हुए हैं कि कहीं एमएनएस उनकी फिल्म के प्रदर्शन में भी रोड़ा न डाल दे. 28 अक्टूबर को दिवाली के खास मौके पर अजय देवगन की फिल्म ‘‘शिवाय’’ के साथ ही करण जोहर की फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ प्रदर्शित होने वाली है. एमएनएस ने धमकी दी है कि वह ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को प्रदर्शित नहीं होनें देंगे. क्योंकि इस फिल्म में पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान ने अभिनय किया है.

यदि एमएनएस की धमकी के चलते ‘ऐ दिल है मुश्किल’ नहीं प्रदर्शित हुई, तो अजय देवगन की फिल्म ‘‘शिवाय’’ को फायदा हो जाएगा. यूं भी अजय देवगन को इस वक्त एक सफल फिल्म की बहुत जरुरत है. क्योंकि पिछले दो वर्ष के दौरान उनकी लगातार ‘एक्शन जैक्सन’ और ‘दृश्यम’ बाक्स आफिस पर सफलता के झंडे गाड़ने में असफल रही हैं.

अपनी फिल्म ‘शिवाय’ को सही ढंग से प्रदर्शित करने के लिए अजय देवगन कई कदम उठा रहे हैं. हमने ‘सरिता’ पत्रिका में इसी स्थान पर 3 अक्टूबर को ‘बौलीवुड की देशभक्ति या बैन होने का डर’ लेख में बताया था कि अजय देवगन ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी फिल्म में किसी पाकिस्तानी कलाकार ने अभिनय नहीं किया है. पर उस वक्त अजय देवगन के इस तरह की सफाई देने की वजह साफ नहीं हुई थी. तब से बौलीवुड मे चर्चाएं हो रही है कि आखिर अजय देवगन को इस तरह की सफाई देने की जरुरत क्यों पड़ी?

अब अजय देवगन की इस सफाई का राज फिल्म ‘‘शिवाय’’ में अभिनय करने वाले अभिनेता वीर दास के जाने अनजाने दिए गए बयान से उजागर हो गया. जी हां! अजय देवगन का यह कहना सही हो सकता है कि उनकी फिल्म में किसी पाकिस्तानी कलाकार ने अभिनय नहीं किया है…मगर फिल्म ‘शिवाय’ के जिस पक्ष को अब तक अजय देवगन ने लोगों से छिपाकर रखा हुआ था, उसे जाने अनजाने अभिनेता वीर दास ने उजागर कर दिया. वीर दास का दावा है कि उन्होंने अजय देवगन निर्देशित फिल्म ‘‘शिवाय’’ में एक पाकिस्तानी हैकर का किरदार निभाया है.

जी हां! मीडिया से बात करते हुए वीर दास ने कहा है-‘‘मैंने फिल्म ‘शिवाय’ में पाकिस्तानी हैकर का किरदार निभाया है. यह निगेटिव नहीं है. मैं एक अनुबंध के तहत बंधा हुआ हूं, इसलिए इस फिल्म को लेकर ज्यादा कुछ बता नहीं सकता..’’ वीर दास के इस बयान से यह बात उभरती है कि अजय देवगन को इस बात का डर सता रहा है कि जब एमएनएस को पता चलेगा कि उनकी फिल्म में एक पाकिस्तानी किरदार है, तो हो सकता है कि वह कुछ बवाल कर दें…

मजेदार बात यह है कि पिछले एक सप्ताह से अजय देवगन का निरंतर कोई न कोई बयान आ रहा है. उसके बाद अजय देवगन ने ऐलान किया कि वह पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करेंगे. फिर अभी चार दिन पहले अजय देवगन का बयान आया कि पाकिस्तानी अभिनेताओं के अभिनय से सजी उन फिल्मों के प्रदर्शन को नहीं रोका जाना चाहिए, जो उरी हमले से पहले ही फिल्मायी जा चुकी हैं.

अब मीडिया से बात करते हुए अजय देवगन ने कहा है-‘‘मुझे पाकिस्तानी कलाकार पसंद हैं. हमने उनके साथ काम किया है, उन्होंने हमारे साथ किया है. लेकिन कभी कभी ऐसे हालात हो जाते हैं, जहां पर बात देश की होती है. हमें हमारे जवान के परिवार के बारे में सोचना चाहिए. वह जवान आपके लिए जिंदगी दे देता है. हमें लगता है कि उस वक्त के लिए हमें अपने देश के लिए खड़ा रहना चाहिए. देश सबसे उपर है. अक्षय कुमार ने भी कहा कि हम लोगों को अपने लोगों को सपोर्ट करना चाहिए. कल्चरल एक्सचेंज नहीं हो सकते.’’

बहरहाल, पिछले एक सप्ताह के दौरान अजय देवगन ने जो जो बातें कही हैं, उन पर बौलीवुड की प्रतिक्रिया यही है कि अजय देवगन के अंदर का डर बोल रहा है? अब यह डर क्या है,यह तो वही जानें…

इतना ही नही अब अजय देवगन ने दावा किया है कि उनकी नाराजगी करण जोहर या उनकी फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह तो कमाल आर खान के खिलाफ हैं..जबकि लोगों को याद होगा कि उन्होने कमाल आर खान व मंगत कुमार के बीच बातचीत का एक आडियो जारी करते हुए ऐलान किया था कि करण जोहर उनकी फिल्म को नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं….

पलपल बदलते अजय देवगन की मंशा क्या है,यह तो आने वाला समय ही बताएगा..

कोहली बने ‘भुवन’ और अश्विन ‘कचरा’

भारत ने तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में न्यूजीलैंड का क्लीन स्वीप कर दिया. कोहली की कप्तानी और अश्विन की फिरकी को लेकर खूब बात हो रही है. सचिन तेंदुलकर से लेकर वीरेंद्र सहवाग तक ने इंडियन टीम को बधाई दी. सोशल मीडिया यूजर्स कहां पीछे रहने वाले थे. अपने-अपने अंदाज में सभी ने वाहवाही दी.

इनमें से एक फनी विडियो तो वायरल हो गया, जिसे खुद रविचंद्रन अश्विन ने भी ट्विटर पर शेयर किया. अश्विन ने विडियो का लिंक शेयर करते हुए लिखा, 'मुझे नहीं पता मेरी हंसी कब रुकेगी.'

आखिर ऐसा क्या है विडियो में?

सस्पेंश को खत्म करते हुए आपको बताते हैं कि पूरा माजरा क्या है. आपको फिल्म 'लगान' तो याद ही होगी. आमिर खान के किरदार भुवन और आदित्य लखिया के रूप में कचरा को कौन भूल सकता है. इस विडियो में भी आपको लगान की ही कहानी दिखेगी, नए किरदारों के साथ.

लगान फिल्म के सीन को एडिट कर इसमें नए किरदारों को जोड़ा गया है. भुवन की जगह इसमें आपको कप्तान विराट कोहली नजर आएंगे और कचरा बने हैं अश्विन. विडियो में हरभजन सिंह, रिद्धिमान साहा, मार्टिन गुप्टिल और रोस टेलर भी दिख रहे हैं.

फौजियों को मिलेगा दिवाली का बोनस गिफ्ट

सरकार ने फौजियों को अंतरिम भुगतान का शानदार दिवाली गिफ्ट दिया है. उधर, डिफेंस चीफ और सरकार आर्म्ड फोर्सेज के लिए नए पे ग्रेड पर चल रहा विवाद निपटाने में लगे हुए हैं.

पे कमीशन का नोटिफिकेशन पेंडिंग होने के चलते प्रेजिडेंट ने उनके लिए अस्थायी तौर पर बकाया भुगतान को मंजूरी दी है. सभी जवानों को मिलने वाला बकाया उनकी मौजूदा सैलरी (डीए सहित) का 10 पर्सेंट होगा, जिसकी गणना जनवरी 2016 के बाद से होगी. इसका मतलब सभी रैंक के जवानों को बोनस के तौर पर एक महीने की पूरी सैलरी मिलेगी. कोशिश की जा रही है कि जवानों को यह रकम दिवाली से पहले मिल जाए. इस साल दिवाली 30 अक्टूबर को है.

सिविल सर्विसेज के उलट आर्म्ड फोर्सेज को पे कमीशन की वजह से बकाया अभी तक नहीं मिला है. उनके लिए नया सैलरी स्केल भी अभी तक लागू नहीं हुआ है. बकाया भुगतान में देरी फोर्सेज के लिए कमीशन के कंपनसेशन स्ट्रक्चर की विसंगतियां दूर करने के मामले में तीनों सेनाओं के प्रमुखों के दखल की वजह से हुई है. सेना प्रमुखों ने कहा है कि जब तक डिसेबिलिटी पे और पेंशन के मामले में विसंगतियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक पे कमीशन की सिफारिशें उन्हें मंजूर नहीं हैं.

त्योहारी सीजन से पहले अडिशनल पेमेंट नहीं मिलने के आसार को देखते हुए सशस्त्र बलों के सेवारत और सेवानिवृत जवान और अधिकारी निराश थे. तीनों आर्म्ड फोर्सेज के प्रमुखों को भेजे गए ऑर्डर के मुताबिक, 'बकाये की गणना के लिए जनवरी 2016 की सैलरी को आधार बनाया जाएगा. अभी दी जा रही रकम रिवाइज्ड पे स्केल पर एरियर के फाइनल कैलकुलेशन से एडजस्ट की जाएगी.'

महिला कबड्डी टीम का दमखम

भारत की महिला बीच कबड्डी टीम ने 5वें एशियाई बीच खेलों में लगातार 5वीं बार खिताब जीता जो मौजूदा खेलों में देश का पहला स्वर्ण पदक है. भारतीय टीम ने थाईलैंड को 41-31 से हराया. वहीं भारतीय पुरुष टीम को फाइनल में पाकिस्तान के हाथों हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इन खेलों का आयोजन हर 2 साल में किया जाता है.

कबड्डी हमेशा से ही लोकप्रिय और मनोरंजक खेल रहा है, खासकर गांवदेहातों में. सही माने में क्रिकेट जैसी लोकप्रियता कबड्डी को मिलनी चाहिए क्योंकि यह खेल न सिर्फ विशुद्ध भारतीय है बल्कि क्रिकेट से पहले से खेला जाता रहा है. क्रिकेट जहां शहर व उच्च वर्ग की रुचि का नतीजा है वहीं कबड्डी में गांवकसबों व मध्यवर्ग की सक्रियता दिखती है.

जब से महिला कबड्डी चैलेंज की शुरुआत हुई है तब से महिलाओं में भी कबड्डी के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है. इस से महिला कबड्डी खेल को एक नई रूपरेखा मिली है. वैसे भी, भारतीय महिला कबड्डी टीम वर्ष 2010 और वर्ष2014 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी है. 2012 और 2013 में हुए विश्वकप खेलों में भारतीय महिला टीम को जीत हासिल हुई थी.

अफसोस बस इतना है कि इतना कुछ करने के बाद भी भारतीय महिला टीम को वह पहचान नहीं मिल पाई जिस की वह हकदार थी. मगर ‘महिला कबड्डी चैलेंज’ के आने से अब धीरेधीरे महिला कबड्डी को पहचान मिलने लगी है. जैसा कि पिछले दिनों महिला कबड्डी चैलेंज की 3 टीमों आईस रिवाज, स्टौर्म क्वींस और फायर बर्ड्स की कप्तानों ने माना था कि जब से महिला कबड्डी चैलेंज की शुरुआत हुई है तब से पहचान मिलने लगी है. हालांकि टीवी चैनल्स को इस में भी व्यापक भूमिका निभाने की आवश्यकता है.

वैसे कबड्डी का खेल इतना आसान भी नहीं है. इस के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से काफी बल का प्रयोग करना पड़ता है, खासकर महिलाओं को अपने बदन को गठीला बनाना पड़ता है. उन्हें छुईमुई वाली छवि से बाहर निकलना पड़ता है, तभी सफलता हाथ लगती है. 

बीसीसीआई की दादागीरी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से फटकार लगाई और कहा कि उस के पदाधिकारी खुद सीधे हो जाएं, वरना उसे आदेश के जरिए उन्हें सीधा करना पड़ेगा, बीसीसीआई खुद को कानून के ऊपर न समझे.

सुप्रीम कोर्ट को ऐसा इसलिए कहना पड़ा क्योंकि उस ने कुछ समय पूर्व बीसीसीआई में पारदर्शिता और क्रिकेट में सुधार लाने के लिए जस्टिस आर एस लोढ़ा समिति का गठन किया था. लोढ़ा समिति ने छानबीन कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट सौंप दी. सुप्रीम कोर्ट ने समिति की सिफारिशों को मानते हुए बीसीसीआई को उन पर अमल करने के लिए कहा. लेकिन दुनिया की सब से रईस क्रिकेट संस्था उन सिफारिशों की अनदेखी कर अपनी मनमानी करती रही.

इस बात से नाराज हो कर जस्टिस आर एस लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि बीसीसीआई हर कदम पर सुधारों को रोकने में लगा हुआ है.

दरअसल, लोढ़ा समिति की सिफारिशों में कहा गया है कि 9 वर्ष से ज्यादा पुराने अधिकारियों को हटाया जाए और 9 वर्ष पुराने अधिकारियों के लिए दोबारा चुनाव न कराए जाएं. एक बार में 3 वर्ष से अधिक पद पर रहना संभव नहीं. 3 बार से ज्यादा कोई भी बीसीसीआई का पद नहीं ले सकता. 70 वर्ष से अधिक उम्र वालों को रिटायर किया जाए.

इस के अलावा कई और ऐसी सिफारिशें की गई हैं जो बीसीसीआई में बैठे पदाधिकारियों को रास नहीं आ रही हैं. वे बौखलाए हुए हैं कि यदि ऐसा हो गया तो सबकुछ उन के हाथ से निकल जाएगा. न पद मिल पाएगा और न ही पैसा. इसलिए ये लोग तिकड़म लगा रहे हैं कि पैसा और पावर की धौंस बनी रहे.

बीसीसीआई के लिए यह बड़े शर्म की बात है कि देश की सर्वोच्च अदालत बीसीसीआई और खेल की भलाई के लिए सुधार की बात कर रहा है और ये सुधरने के बजाय तिकड़मबाजी और धौंसबाजी दिखा रहे हैं. जबकि इस से बीसीसीआई में कामकाज के तरीके भी बदलेंगे और खेल की दशा में भी सुधार आएगा. बीसीसीआई को तो खुद आगे बढ़ कर लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर अमल करना चाहिए और सहयोग देना चाहिए. लेकिन वे इसलिए नहीं करना चाहते हैं क्योंकि ऐसा करने से उन के हाथ से सबकुछ निकल जाएगा और वे कहीं के नहीं रहेंगे.

नए अवतार में अश्मित

अभिनेता अश्मित पटेल फिल्मों में पिटने के बाद टीवी शो ‘बिग बौस’ में नजर आए लेकिन वहां भी उन के कैरियर की गाड़ी को धक्का नहीं लगा. जब फिल्मों में पूरी तरह नाउम्मीद हुए तो सोचा टीवी में ही कैरियर बनाया जाए. वे एक टीवी सीरियल में नजर आएंगे. इस सीरियल का नाम है ‘अम्मा’.

अश्मित इस शो में फैसल के रोल में नजर आएंगे जो इस शो में आए 15 साल के लीप के बाद टैलीविजन पर अपना फिक्शन डेब्यू करेंगे. फैसल अम्मा का गोद लिया बेटा है. अपनी मां जीनत उर्फ अम्मा से प्रेरित फैसल का एकमात्र लक्ष्य है अंडरवर्ल्ड पर राज करना और अपनी मां से ज्यादा ताकतवर बन कर उभरना.

अश्मित पटेल बताते हैं, ‘‘टीवी पर यह मेरा पहला फिक्शन शो है और किसी शो के साथ अपना नया सफर शुरू करने के लिए ‘अम्मा’ से बेहतर और क्या हो सकता है. देखते हैं यह सीरियल उन के कैरियर को कितना आगे बढ़ाता है.   

मनसे का राग पाकिस्तानी

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे, जैसा कि हमेशा से ही वह ऊलजलूल और बचकानी धमकियों भरे बयानों के लिए जानी जाती है, ने एक बार फिर बचकाना काम कर डाला है. इस बार उस के निशाने पर हैं पाकिस्तानी फिल्म कलाकार. हाल में मनसे ने भारत में काम कर रहे पाकिस्तानी ऐक्टर्स को धमकी दी थी कि अगर वे लोग 25 सितंबर तक भारत नहीं छोड़ते हैं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. इस खबर को ले कर अफवाहों का दौर यों चला कि खबर आने लगी कि सलमान खान ने अपनी अगली फिल्म से पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

कोई भी आर्टिस्ट किसी धर्म या देश से नहीं होता. और छद्म देशभक्ति से पीडि़त मूर्ख संगठन इस तरह की बयानबाजी से अपना वोटबैंक मजबूत करने की फिराक में लगे रहते हैं. इस मामले में सैफ का बयान गौरतलब है कि यह सरकार को निर्णय करना है कि किसे यहां काम करने की इजाजत दी जाए, किसे नहीं.

लीजा की शादी

फिल्म ‘क्वीन’ में उन्मुक्त महिला के किरदार से प्रशंसित अभिनेत्री लीजा हेडन असल जिंदगी में भी बेहद उन्मुक्त हैं. अपनी जिंदगी के जीने के तरीकों से ले कर इस से जुड़े फैसले भी वे बेहद आजादखयाली से लेती हैं. उन्हें न सिर्फ अकेले भ्रमण करना पसंद है बल्कि निजी रिश्तों को ले कर वे मुखर भी रहती हैं. जहां उन का कैरियर मौडलिंग और फिल्मों में ठीकठाक चल रहा है, वहीं उन्होंने शादी का निर्णय भी ले लिया और उसे अन्य कलाकारों की तरह आखिर तक छिपाने के बजाय खुल कर स्वीकार भी कर डाला.

लीजा हेडन ने अपने बौयफ्रैंड डीनो ललवानी से शादी करने का निर्णय लिया और दिलचस्प अंदाज में एक रोमांटिक तसवीर पोस्ट करते हुए सोशल साइट पर डीनो से अपनी शादी की घोषणा कर दी. डीनो पाकिस्तान में जन्मे ब्रिटिश उ-मी गुलू ललवानी के बेटे हैं, वे लीजा के साथ एक साल से डेटिंग कर रहे हैं.

औस्कर के दरबार में

हर साल की तरह इस बार भी औस्कर के दरबार में भारत की तरफ से एक फिल्म बतौर एंट्री भेजी गई है. फिल्म का नाम है ‘विसरानाई’. चूंकि इस फिल्म को 2015 में सर्वश्रेष्ठ तमिल फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेता और सर्वश्रेष्ठ संपादन के लिए 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले हैं, इसलिए इसे भारत की ओर से भेजा गया है.

हालांकि औस्कर रेस में ‘उड़ता पंजाब’, ‘तिथि’, ‘सैराट’, ‘नीरजा’, ‘फैन’, ‘सुलतान’ ‘एयरलिफ्ट’ जैसी फिल्में भी थीं लेकिन चयनकर्ताओं को यही फिल्म ठीक लगी. फिल्म आटो ड्राइवर आटो चंद्रन द्वारा लिखे उपन्यास पर आधारित है. एक तरह से बायोपिक है क्योंकि कहानी, लेखक की आपबीती है. उसे 1983 में एक झूठे केस में अरेस्ट किया गया और फिर जेल में उस के साथ जिस तरीके से बर्बरता की गई, उन्हीं अनुभवों के आधार पर उन्होंने उपन्यास लिखा.

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