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ड्वेन ब्रावो को अकेला छोड़कर क्यों भागी श्रिया सरन

बुधवार को मुंबई के होटल में अभिनेत्री श्रिया सरन वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर ड्वेन ब्रावो के साथ भोजन करने के लिए पहुंची थी, जब वह होटल से बाहर निकलने लगीं, तो होटल के प्रवेश द्वार पर कुछ फोटोग्राफरों को देखकर श्रिया सरन क्रिकेटर ब्रावो को अकेला छोड़कर भागते हुए अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गयी. उनकी इस हरकत ने कई सवाल खड़े कर दिए.

इन सवालों के पीछे वजहें भी हैं. बौलीवुड और क्रिकेट का गठजोड़ काफी पुरानी बात है. इसके अलावा फिल्म अभिनेत्रियों द्वारा क्रिकेटर को अपना पति चुनना भी कोई नई बात नहीं है. इसके अलावा श्रिया सरन और ड्वेन ब्रावो ने एक ही रंग के कपड़े पहन रखे थे और चौथी वजह श्रिया का वहां से भागना, जैसे कि कोइ चोर भाग रहा हो. अब श्रिया सरन ही कबूल कर सकती हैं कि आखिर असली माजरा क्या है?

बहरहाल, वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर ड्वेन ब्रावो नृत्य के रियालिटी शो ‘झलक दिखला जा’ का हिस्सा रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘‘तुम बिन 2’’ में एक गाने में नेहा शर्मा के साथ नृत्य भी किया है. तो वहीं श्रिया सरन अभिनेत्री होने के साथ साथ सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग की ब्रांड अम्बेसेडर भी हैं. इसके चलते दोनो का एक साथ भोजन करने किसी होटल में जाना कोई असंभव वाली बात नही है, मगर श्रिया सरन का भागना कई सवाल छोड़ गया….

जयललिता: सेहत और सहमति के मायने

तमिलनाडु के आम लोगों की दिलचस्पी सिर्फ एक बात में है – जयललिता की सेहत कैसी है? आम लोगों जैसी ही सोच काफी हद तक ओ. पनीरसेल्वम जैसे नेताओें की भी होगी – जिन्हें कभी साष्टांग दंडवत करते देखा गया, तो कभी भरी सभा में आंसू पोंछते हुए. ये बात अलग है कि फिलहाल पनीरसेल्वम के पास ही सीएम के सारे अधिकार मौजूद हैं. इससे पहले भी जब कभी वो पूरे मुख्यमंत्री रहे, तब भी वो अपने ही मंत्रालय के दफ्तर से कामकाज निबटाते रहे. जब तक जयललिता जेल से नहीं लौटीं, कुर्सी यूं ही इंतजार करती रही.

विपक्षी दल डीएमके को इस बात से तो कोई एतराज नहीं कि शासन की कमान पनीरसेल्वम के हाथों में क्यों दी गयी है, उनके विरोधी गुट को भले ही आपत्ति हो. डीएमके और साथ में पीएमके का सवाल सिर्फ इतना है कि क्या पनीरसेल्वम को अधिकृत करने के लिए गवर्नर को भेजे गये पत्र पर जयललिता ने हस्ताक्षर किये थे, या नहीं?

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता 22 सितंबर को अस्पताल में भर्ती हुईं. जैसे ही हफ्ता भर बीता कि सेहत को लेकर सवाल उठने लगे. फिर मद्रास हाईकोर्ट को हिदायत देनी पड़ी कि राज्य सरकार सेहत पर स्थिति स्पष्ट करे ताकि लोगों का संदेह दूर हो. बाद में राजभवन की ओर से एक स्टेटमेंट जारी कर जानकारी दी गयी कि संविधान के अनुच्छेद 166 के क्लॉज 3 के तहत मुख्यमंत्री की सलाह के बाद जयललिता के सारे विभागों की जिम्मेदारी वित्त मंत्री पनीरसेल्वम को सौंपी जा रही है. इसके साथ ही पनीरसेल्वम के पास कुल 8 विभागों के कामकाज का जिम्मा हो गया. पनीरसेल्वम को मिले अधिकारों में कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता भी शुमार बतायी गयी.

नयी जिम्मेदारी मिलने के बाद पनीरसेल्वम का पहला दिन अस्पताल में वीआईपी मेहमानों से मिलते जुलते ही बीता. वो कैबिनेट की मीटिंग नहीं ले सके – क्योंकि अमित शाह और अरुण जेटली जैसे मेहमानों के आने से पूरे वक्त गहमागहमी बनी रही. बाकी कामकाज रोज की तरह अस्पताल से चलता रहा. पनीरसेल्वम की सेहत पर फर्क इतना ही पड़ा कि अब उन्हें प्रशासनिक कामकाज देख रहीं शीला बालकृष्णन की हिदायतें नहीं सुननी पड़ेंगी, सलाह की बात और हैं, क्योंकि वो तो सीएम की अधिकृत सलाहकार हैं.

ओ. पनीरसेल्वम को सब लोग OPS कह कर बुलाते हैं. एक करीबी के अनुसार उनका बस एक छोटा सा ख्वाब था – पेरियाकुलम म्युनिसिपल्टी का चेयरमैन बनने का जो 1996 में पूरा भी हो गया. बाद में जो भी तोहफे में मिला वो या तो खुदा की रहमत रही या फिर अम्मा की नेमत. 2001 और 2014 में सीएम की कुर्सी संभाल चुके ओपीएस को 2001 में विधानसभा का टिकट मिला, वो भी शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन की सिफारिश पर, क्योंकि 1999 के लोक सभा चुनाव में वो ओपीएस के ही घर पर ठहरे थे.

विधानसभा चुनाव से पहले ओपीएस के रिश्तेदारों के प्रभाव को लेकर सवाल उठे तो उन्हें भी उसकी कीमत चुकानी पड़ी. तब जयललिता ने उन्हें विधानसभा चुनाव अभियान समिति से भी बाहर रखा, लेकिन एक बार फिर वो अपनी पोजीशन हासिल कर चुके हैं.

जयललिता की सेहत को लेकर डॉक्टरों के हवाले से एआईएडीएमके ने बताया : ''जयललिता तेजी से स्वस्थ हो रही हैं और अखबार भी पढ़ने लगी हैं.'' प्रमुख विपक्षी दल डीएमके के प्रमुख एम. करुणानिधि ने पूछा, "सवाल ये उठता है कि अगर जयललिता ने एक हस्ताक्षरित सलाह जारी की है तो फिर नेताओं को अस्पताल में उनसे मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा है?"

एआईएडीएमके के प्रवक्ता सीआर सरस्वती का कहना है ''पनीरसेल्वम को उनके विभागों का कामकाज संबंधी संदेश जयललिता को भेजा गया था जिस पर उन्होंने 'सहमति' दी. संक्रमण के चलते हर कोई जयललिता के पास नहीं जा सकता. केवल डॉक्‍टर ही जा सकते हैं और इसी तरह उनको संदेश दिया गया. मुख्‍यमंत्री की सलाह के बिना, अन्‍नाडीएमके में कुछ नहीं होता.''

करुणानिधि ने इस मामले में संसद सत्र में विवादों में रहीं एआईएमके की राज्य सभा सांसद शशिकला पुष्पा के हवाले से कहा कि उन्होंने आशंका जताई थी कि कुछ लोग निजी फायदे के लिए जयललिता के फर्जी हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. शशिकला पुष्पा को एआईएडीएमके से निकाल दिया गया है.

करुणानिधि की तरह ही पीएमके प्रमुख, डॉ ए. रामदौस ने कहते हैं, “राज्यपाल को ऐसा नहीं होना चाहिए. असंबंधित लोग सरकारी मशीनरी को नियंत्रित कर रहे हैं. जयललिता रेस्पिइरेटरी सपोर्ट पर होने के कारण कोई इशारा या हस्ताक्षर नहीं कर सकतीं. सब काम संविधान के अनुसार करना चाहिए.” एआईएडीएमके के एक नेता के हवाले से कहा जा रहा है कि ये एक राजनीतिक फैसला है, ताकि विरोधी जयललिता की सेहत का मसला उठाते हुए तमिलनाडु में संवैधानिक संकट का सवाल न खड़ा कर सकें.

INDvsNZ: पहले वनडे से रैना बाहर

भारतीय वनडे टीम में वापसी कर रहे सुरेश रैना न्यूजीलैंड के खिलाफ धर्मशाला में होने वाले सीरीज का पहला वनडे मैच नहीं खेलेंगे. दरसल रैना अभी तक वायरल बुखार से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, जिसकी वजह से वो टीम के साथ धर्मशाला नहीं गए हैं.

वायरल बुखार से पीड़ित थे रैना

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव अजय शिर्के ने कहा, 'बीसीसीआई की मेडिकल टीम के मुताबिक सुरेश रैना अभी भी वायरल बुखार से उबर रहे हैं, जिसकी वजह से उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले पहले वनडे मैच के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया है. उनकी जगह किसी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया जायेगा.'

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था पिछला वनडे

रैना ने भारत के लिए अपना पिछला वनडे मैच एक साल पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुंबई में खेला था. उसके बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया, जिम्बाब्वे में हुई वनडे सीरीज और फ्लोरिडा में हुए टी20 मैचों के लिए टीम इंडिया में शामिल नहीं किया गया था.

रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की कप्तानी कर रहे रैना बुखार की वजह से पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश के खिलाफ बल्लेबाजी करने मैदान में नहीं उतर पाए थे.

भारत बनाम न्यूजीलैंड सीरीज

पहला वनडे: धर्मशाला (16 अक्टूबर)

दूसरा वनडे: दिल्ली (20 अक्टूबर)

तीसरा वनडे: मोहाली (23 अक्टूबर)

चौथा वनडे: रांची (26 अक्टूबर)

पांचवा वनडे: विशाखापत्तनम (29 अक्टूबर)

त्योहारों के मौसम में बढ़ाएं बालों की रौनक

 त्योहार आ रहे हैं और ऐसे में युवतियां एक से बढ़ कर एक दिखना चाहती हैं. इसलिए वे अपनी वेशभूषा, मेकअप, सैंडिल, गहनों आदि पर सब से अधिक ध्यान देती हैं. लेकिन युवतियों का प्रकृतिप्रदत्त गहना हैं बाल, जिन की देखभाल की जिम्मेदारी युवतियों पर ही है. बालों की देखभाल बहुत जरूरी है. सुंदर, स्मूथ, चमकदार और स्वस्थ बाल एक युवती की सुंदरता में चारचांद लगाते हैं. आइए, जानें कैसे करें अपने बालों की देखभाल व उन्हें बनाएं चमकदार.

बालों में नियमित रूप से तेल की मालिश अवश्य करें. तेल से बालों को आवश्यक नमी मिलती है, जिस से बाल दोमुंहे होने से बचते हैं. प्रसिद्ध बाल विशेषज्ञ जावेद हबीब के अनुसार मालिश हमेशा हलके हाथों से, उंगलियों के पोरों से करें. नारियल के तेल से मालिश करने के पश्चात गरम पानी में तौलिए को भिगो कर 2-3 मिनट तक सिर पर लपेट कर रखें ताकि अधिक से अधिक तेल जड़ों में जा सके.

हेयर पैक टिप

एक चम्मच नारियल का तेल, एक चम्मच जैतून का तेल, एक चम्मच शहद और एक चम्मच दही मिला कर बालों में एक घंटे तक लगाए रखें, फिर धो दें. आप अपने बालों को मुलायम और चमकदार पाएंगी.

–       फोर्ब्स द्वारा घोषित विश्व की टौप 10 लाइफस्टाइल वैबसाइट्स में से एक ‘द ब्यूटी बीन’ औनलाइन पत्रिका की एडिटर इन चीफ, अलेक्सिस वोल्फर कहती हैं कि नामी कंपनियों के महंगे सीरम खरीदने से बेहतर है कि आप आसान घरेलू सीरम बनाएं, जिन में न तो रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल होता है और न ही कोई खास खर्च.

बालों का रूखापन हटाने हेतु आधा कप बादाम का तेल, बालों का कमजोर हो कर टूटना कम करने हेतु एक चौथाई कप एवोकाडो का तेल और बालों का लचीलापन बढ़ाने के लिए एक चौथाई जैतून का तेल, तीनों को मिला कर एक बोतल में भर कर रख लें. इसे चाहें तो रातभर लगा कर सुबह शैंपू से बाल धो लें.

–       बालों को चमक प्रदान करने हेतु युवतियां शाइन स्प्रे या सीरम पर टूट पड़ती हैं, किंतु इसे लगाते समय सिर की चमड़ी से कम से कम 2 इंच की दूरी रखें. लगाते समय इसे जड़ों में न लगा कर, बालों के सिरे पर अधिक ध्यान दें जहां पर दोमुंहे होने का खतरा होता है.

–       बालों को लंबा व चमकदार बनाने हेतु शहनाज हुसैन एक पैक बताती हैं, 4 छोटे चम्मच नीबू का रस, 4 छोटे चम्मच कौफी पाउडर, 2 कच्चे अंडे, 2 चम्मच तेल और थोड़ा दही मेहंदी में मिला कर बालों में लगाएं. इस पैक को महीने में 3 बार लगाएं.

–       चमकदार बाल मतलब स्वस्थ बाल. इस के लिए सही खानपान भी बहुत जरूरी है. अपने रोज के खाने में फलसब्जी व पानी की मात्रा उचित रखें. प्रोटीन, लौह व विटामिन बी12 लेने से भी बालों को उचित देखभाल मिलती है.

–       अत्यधिक शैंपू करने से बालों को बहुत नुकसान पहुंचता है, वे रूखेसूखे व बेजान हो जाते हैं. हफ्ते में 2 या 3 बार ही शैंपू करें और जब भी शैंपू खरीदें, तब जांच लें कि उस में सल्फेट न हो जोकि उस की सामग्री में सोडियम लौरेल या सोडियम लौरेथ सल्फेट के नाम से लिखा होगा. सल्फेट से ज्यादा झाग बनता है, लेकिन यही सामग्री बरतन धोने वाले साबुन में भी डाली जाती है.

–       हालांकि सिरके की एक अजब सी महक होती है किंतु यह बालों का पीएच स्तर बनाए रखने में बहुत कारगर होता है.

आधा सिरका और आधा पानी मिला कर शैंपू के पश्चात बालों पर डालें, कुछ देर रुकें, फिर सादे पानी से धो डालें. हंगरी में जन्मे और अब विश्वप्रसिद्ध सौंदर्य विशेषज्ञ पीटर थौमस रौय का मानना है कि ऐसा करने से बालों को किसी कृत्रिम कंडीशनर की आवश्यकता नहीं पड़ती और सिरके की गंध भी कुछ देर में उड़ जाती है.                    

सैक्स: मजा न बन जाए सजा

पहले प्यार होता है और फिर सैक्स का रूप ले लेता है. फिर धीरेधीरे प्यार सैक्स आधारित हो जाता है, जिस का मजा प्रेमीप्रेमिका दोनों उठाते हैं, लेकिन इस मजे में हुई जरा सी चूक जीवनभर की सजा में तबदील हो सकती है जिस का खमियाजा ज्यादातर प्रेमी के बजाय प्रेमिका को भुगतना पड़ता है भले ही वह सामाजिक स्तर पर हो या शारीरिक परेशानियों के रूप में. यह प्यार का मजा सजा न बन जाए इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखें.

सैक्स से पहले हिदायतें

बिना कंडोम न उठाएं सैक्स का मजा

एकदूसरे के प्यार में दीवाने हो कर उसे संपूर्ण रूप से पाने की इच्छा सिर्फ युवकों में ही नहीं बल्कि युवतियों में भी होती है. अपनी इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए वे सैक्स तक करने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन जोश में होश न खोएं. अगर आप अपने पार्टनर के साथ प्लान कर के सैक्स कर रहे हैं तो कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें. इस से आप सैक्स का बिना डर मजा उठा पाएंगे. यहां तक कि आप इस के इस्तेमाल से सैक्सुअल ट्रांसमिटिड डिसीजिज से भी बच पाएंगे.

अब नहीं चलेगा बहाना

अधिकांश युवकों की यह शिकायत होती है कि संबंध बनाने के दौरान कंडोम फट जाता है या फिर कई बार फिसलता भी है, जिस से वे चाह कर भी इस सेफ्टी टौय का इस्तेमाल नहीं कर पाते. वैसे तो यह निर्भर करता है कंडोम की क्वालिटी पर लेकिन इस के बावजूद कंडोम की ऐक्स्ट्रा सिक्योरिटी के लिए सैक्स टौय बनाने वाली स्वीडन की कंपनी लेलो ने हेक्स ब्रैंड नाम से एक कंडोम बनाया है जिस की खासीयत यह है कि सैक्स के दौरान पड़ने वाले दबाव का इस पर असर नहीं होता और अगर छेद हो भी तो उस की एक परत ही नष्ट होती है बाकी पर कोई असर नहीं पड़ता. जल्द ही कंपनी इसे मार्केट में उतारेगी.

ऐक्स्ट्रा केयर डबल मजा

आप के मन में विचार आ रहा होगा कि इस में डबल मजा कैसे उठाया जा सकता है तो आप को बता दें कि यहां डबल मजा का मतलब डबल प्रोटैक्शन से है, जिस में एक कदम आप का पार्टनर बढ़ाए वहीं दूसरा कदम आप यानी जहां आप का पार्टनर संभोग के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करे वहीं आप गर्भनिरोधक गोलियों का. इस से अगर कंडोम फट भी जाएगा तब भी गर्भनिरोधक गोलियां आप को प्रैग्नैंट होने के खतरे से बचाएंगी, जिस से आप सैक्स का सुखद आनंद उठा पाएंगी.

कई बार ऐसी सिचुऐशन भी आती है कि दोनों एकदूसरे पर कंट्रोल नहीं कर पाते और बिना कोई सावधानी बरते एकदूसरे को भोगना शुरू कर देते हैं लेकिन जब होश आता है तब उन के होश उड़ जाते हैं. अगर आप के साथ भी कभी ऐसा हो जाए तो आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सहारा लें लेकिन साथ ही डाक्टरी परामर्श भी लें, ताकि इस का आप की सेहत पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े.

पुलआउट मैथड

पुलआउट मैथड को विदड्रौल मैथड के नाम से भी जाना जाता है. इस प्रक्रिया में योनि के बाहर लिंग निकाल कर वीर्यपात किया जाता है, जिस से प्रैग्नैंसी का खतरा नहीं रहता. लेकिन इसे ट्राई करने के लिए आप के अंदर सैल्फ कंट्रोल और खुद पर विश्वास होना जरूरी है.

सैक्स के बजाय करें फोरप्ले

फोरप्ले में एकदूसरे के कामुक अंगों से छेड़छाड़ कर के उन्हें उत्तेजित किया जाता है. इस में एकदूसरे के अंगों को सहलाना, उन्हें प्यार करना, किसिंग आदि आते हैं. लेकिन इस में लिंग का योनि में प्रवेश नहीं कराया जाता. सिर्फ होता है तन से तन का स्पर्श, मदहोश करने वाली बातें जिन में आप को मजा भी मिल जाता है, ऐंजौय भी काफी देर तक करते हैं.

अवौइड करें ओरल सैक्स

ओरल सैक्स नाम से जितना आसान सा लगता है वहीं इस के परिणाम काफी भयंकर होते हैं, क्योंकि इस में यौन क्रिया के दौरान गुप्तांगों से निकलने वाले फ्लूयड के संपर्क में व्यक्ति ज्यादा आता है, जिस से दांतों को नुकसान पहुंचने के साथसाथ एचआईवी का भी खतरा रहता है.

यदि इन खतरों को जानने के बावजूद आप इसे ट्राई करते हैं तो युवक कंडोम और युवतियां डेम का इस्तेमाल करें जो छोटा व पतला स्क्वेयर शेप में रबड़ या प्लास्टिक का बना होता है जो वैजाइना और मुंह के बीच दीवार की भूमिका अदा करता है जिस से सैक्सुअल ट्रांसमिटिड डिजीजिज का खतरा नहीं रहता.

पौर्न साइट्स को न करें कौपी

युवाओं में सैक्स को जानने की इच्छा प्रबल होती है, जिस के लिए वे पौर्न साइट्स को देख कर अपनी जिज्ञासा शांत करते हैं. ऐसे में पौर्न साइट्स देख कर उन के मन में उठ रहे सवाल तो शांत हो जाते हैं लेकिन मन में यह बात बैठ जाती है कि जब भी मौका मिला तब पार्टनर के साथ इन स्टैप्स को जरूर ट्राई करेंगे, जिस के चक्कर में कई बार भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. लेकिन ध्यान रहे कि पौर्न साइट्स पर बहुत से ऐसे स्टैप्स भी दिखाए जाते हैं जिन्हें असल जिंदगी में ट्राई करना संभव नहीं लेकिन इन्हें देख कर ट्राई करने की कोशिश में हर्ट हो जाते हैं. इसलिए जिस बारे में जानकारी हो उसे ही ट्राई करें वरना ऐंजौय करने के बजाय परेशानियों से दोचार होना पड़ेगा.

सस्ते के चक्कर में न करें जगह से समझौता

सैक्स करने की बेताबी में ऐसी जगह का चयन न करें कि बाद में आप को लेने के देने पड़ जाएं. ऐसे किसी होटल में शरण न लें जहां इस संबंध में पहले भी कई बार पुलिस के छापे पड़ चुके हों. भले ही ऐसे होटल्स आप को सस्ते में मिल जाएंगे लेकिन वहां आप की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती.

हो सकता है कि रूम में पहले से ही कैमरे फिट हों और आप को ब्लैकमैल करने के उद्देश्य से आप के उन अंतरंग पलों को कैमरे में कैद कर लिया जाए. फिर उसी की आड़ में आप को ब्लैकमेल किया जा सकता है. इसलिए सावधानी बरतें.

अलकोहल, न बाबा न

कई बार पार्टनर के जबरदस्ती कहने पर कि यार बहुत मजा आएगा अगर दोनों वाइन पी कर रिलेशन बनाएंगे और आप पार्टनर के इतने प्यार से कहने पर झट से मान भी जाती हैं. लेकिन इस में मजा कम खतरा ज्यादा है, क्योंकि एक तो आप होश में नहीं होतीं और दूसरा पार्टनर इस की आड़ में आप के साथ चीटिंग भी कर सकता है. हो सकता है ऐसे में वह वीडियो क्लिपिंग बना ले और बाद में आप को दिखा कर ब्लैकमेल या आप का शोषण करे.

न दिखाएं अपना फोटोमेनिया

भले ही पार्टनर आप पर कितना ही जोर क्यों न डाले कि इन पलों को कैमरे में कैद कर लेते हैं ताकि बाद में इन पलों को देख कर और रोमांस जता सकें, लेकिन आप इस के लिए राजी न हों, क्योंकि आप की एक ‘हां’ आप की जिंदगी बरबाद कर सकती है.

सैक्स के बाद के खतरे

सैक्स के बाद के खतरे

ब्लैकमेलिंग का डर

अधिकांश युवकों का इंट्रस्ट युवतियों से ज्यादा उन से संबंध बनाने में होता है और संबंध बनाने के बाद उन्हें पहचानने से भी इनकार कर देते हैं. कई बार तो ब्लैकमेलिंग तक करते हैं. ऐसे में आप उस की ऐसी नाजायज मांगें न मानें.

बीमारियों से घिरने का डर

ऐंजौयमैंट के लिए आप ने रिलेशन तो बना लिया, लेकिन आप उस के बाद के खतरों से अनजान रहते हैं. आप को जान कर हैरानी होगी कि 1981 से पहले यूनाइटेड स्टेट्स में जहां 6 लाख से ज्यादा लोग ऐड्स से प्रभावित थे वहीं 9 लाख अमेरिकन्स एचआईवी से. यह रिपोर्ट शादी से पहले सैक्स के खतरों को दर्शाती है.

मैरिज टूटने का रिस्क भी

हो सकता है कि आप ने जिस के साथ सैक्स रिलेशन बनाया हो, किसी मजबूरी के कारण अब आप उस से शादी न कर पा रही हों और जहां आप की अब मैरिज फिक्स हुई है, आप के मन में यही डर होगा कि कहीं उसे पता लग गया तो मेरी शादी टूट जाएगी. मन में पछतावा भी रहेगा और आप इसी बोझ के साथ अपनी जिंदगी गुजारने को विवश हो जाएंगी.

डिप्रैशन का शिकार

सैक्स के बाद पार्टनर से जो इमोशनल अटैचमैंट हो जाता है उसे आप चाह कर भी खत्म नहीं कर पातीं. ऐसी स्थिति में अगर आप का पार्टनर से बे्रकअप हो गया फिर तो आप खुद को अकेला महसूस करने के कारण डिप्रैशन का शिकार हो जाएंगी, जिस से बाहर निकलना इतना आसान नहीं होगा.

कहीं प्रैग्नैंट न हो जाएं

आप अगर प्रैग्नैंट हो गईं फिर तो आप कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगी. इसलिए जरूरी है कोई भी ऐसावैसा कदम उठाने से पहले एक बार सोचने की, क्योंकि एक गलत कदम आप का भविष्य खराब कर सकता है. ऐसे में आप बदनामी के डर से आत्महत्या जैसा कदम उठाने में भी देर नहीं करेंगी.       

मुलाकात, लगाव और प्यार, तो क्यों हो सैक्स की दरकार

नेहा अपने कालेज में बहुत मशहूर थी. वह पढ़ाई में ही नहीं बल्कि कालेज में होने वाले सभी इवैंट्स में भी हिस्सा लेती थी. स्मार्ट और चुलबुली नेहा की सब से दोस्ती भी जल्दी हो जाती थी, क्योंकि वह हरदम किसी की भी मदद करने को तैयार रहती थी. नेहा का कालेज कोऐड था. ऐसे में नेहा की दोस्ती युवकों से भी थी.

नेहा की परवरिश कुछ ऐसे माहौल में हुई थी कि वह कभी युवक युवती में भेद भी नहीं समझती थी. नेहा के कालेज में ही निशांत भी पढ़ता था. उस की भी नेहा से बातचीत होती रहती थी. कई बार वह कुछ ज्यादा ही खुल कर हंसीमजाक कर लेता था. नेहा भी उस से अच्छे दोस्त की तरह खुल कर बात करती थी. नेहा के इस अंदाज से निशांत को लगा कि वह नेहा के व्यवहार का लाभ उठा सकता है.

शुरुआत में निशांत ने 1-2 बार नेहा को ऐसा मैसेज किया, जो दोस्ती के दायरे से बाहर था. नेहा ने शुरू में ऐसे मैसेज को अनदेखा किया, जिस से निशांत का साहस और बढ़ गया. उस ने इसे नेहा की सहमति समझ लिया. एक बार तो निशांत ने नेहा को ऐसा सैक्सी मैसेज भेज दिया कि नेहा के लिए उसे सहन करना संभव नहीं रह गया था. वह गुस्सा या परेशान होने के बजाय निशांत से मिली और समझदारी से उसे बताया कि निशांत मैं तुम्हें दोस्त समझती हूं. मैं दोस्ती की सीमाओं को जानती और मानती हूं. मेरे लगाव और प्यार को कभी यह मत मान लेना कि मैं सैक्स के लिए तैयार हूं. निशांत को जिस अंदाज में नेहा ने समझाया उस से निशांत पूरी तरह से सहम गया.

बात केवल नेहा की ही नहीं है. आमतौर पर ऐसा होता है कि खुले दिल से बात करने वाली युवती से युवक सैक्स की अपेक्षा करने लगते हैं. युवकों को लगता है कि जो युवती फैशनेबल है, खुल कर हर मुद्दे पर बात करती है, वह सैक्स के लिए तैयार हो जाएगी. खुलेपन को सैक्स से जोड़ना अच्छी आदत नहीं है. इस तरह की हरकतों से आप अपना अच्छा दोस्त खो देते हैं. टीनएज और कालेज के दिनों में यह बहुत देखा जाता है. जरूरी यह है कि जिन रिश्तों में मुलाकात, प्यार और लगाव हो वहां पर सैक्स की दरकार गैर जरूरी होती है. इस से रिश्ते बनने के बजाय बिगड़ सकते हैं. समाजशास्त्री डाक्टर दीपा राय कहती हैं, ‘‘सहशिक्षा कालेज की ही बात नहीं है. समाज में जहां भी युवकयुवतियां आपस में मिलते हैं वहीं यह धारणा बन गई है. इसे सुधारने की जरूरत है. यह समझने की जरूरत है कि मुलाकात, प्यार और लगाव सैक्स से अलग होता है.’’

न सहें ऐसे हालात

सब से अधिक जरूरी यह है कि ऐसे हालात जब युवतियों के सामने आएं तो वे दबें या डरें नहीं बल्कि खुल कर अपनी बात पूरे तर्क के साथ रखें. जिस से गलत सोच रखने वाले युवक पहली बार में ही समझ जाएं और जब कोई समझाने पर भी न समझे तब उस के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करना भी जरूरी हो जाता है.

कई बार युवतियां इस भय से अपनी बात को सामने नहीं लातीं कि कहीं उन्हें ही गलत न समझ लिया जाए. ऐसे में उन की चुप्पी को लोग मौन सहमति समझ लेते हैं. तब युवकों की हरकतें और बढ़ने लगती हैं. दोस्ती में मुलाकात, प्यार और लगाव अपनी जगह हैं. इस को सैक्स से दूर ही रखा जाए तभी संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है. संबंधों में जब सैक्स आता है तो न केवल संबंध टूटते हैं बल्कि अपराध की भी संभावना  रहती है.

सैक्स से दूर रह कर परेशानियों से बचाव

समय बदल रहा है. सैक्स को ले कर युवतियों की सोच भी बदल रही है. अब सैक्स के बाद आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए भी युवतियां तैयार रहती हैं. प्लास्टिक सर्जन के रूप में काम कर रही डाक्टर रिचा सिंह बताती हैं, ‘‘शादी के समय युवतियां हमारे पास आती हैं तो उन का एक ही सवाल होता है कि हम ने शादी से पहले सैक्स किया है, इस बात का पता हमारे होने वाले पति को न चले, इस के लिए क्या करें? युवतियों को जब इस बारे में सही राय दी जाती है तो भी वे मौका लगते ही सैक्स को ऐंजौय करने से नहीं चूकतीं.’’

विदेशों में तो सैक्स को ले कर तमाम तरह के सर्वे होते रहते हैं पर हमारे देश में ऐसे सर्वे कम ही होते हैं. कई बार ऐसे सैंपल सर्वे में युवतियां अपने मन की पूरी बात सामने रखती हैं, जिस से पता चलता है कि सैक्स को ले कर युवतियों में नई सोच जन्म ले चुकी है. डाक्टर रिचा कहती हैं, ‘‘शादी से पहले आई एक युवती की समस्या को एक बार सुलझाया गया तो कुछ दिनों में वह दोबारा आ गई और बोली मैडम एक बार फिर से गलती हो गई.’’

सैक्स रोगों की डाक्टर प्रभा राय बताती हैं, ‘‘हमारे पास ऐसे मामले ले कर कई युवतियां आती रहती हैं. वे जानना चाहती हैं कि इमरजैंसी पिल्स को कितनी बार खाया जा सकता है. कई युवतियां तो बिना किसी तरह की सलाह के इस तरह की गोलियों का प्रयोग करती हैं. कुछ युवतियां तो गर्भ ठहर जाने के बाद मैडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा ले कर खा लेती हैं.’’

सैक्स को ले कर बदल रही सोच

सैक्स अब ऐंजौयमैंट का साधन बन गया है. युवकयुवतियां भी खुद को अलगअलग तरह की सैक्स क्रियाओं के साथ जोड़ना चाहते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की फैंटेसीज अब चुपचाप बैडरूम तक पहुंच गई हैं. जहां केवल युवकयुवतियां आपस में तमाम तरह की सैक्स फैंटेसीज को करने का प्रयास करते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की हसरतें चुपचाप पूरी होती रहती हैं. सोशल मीडिया, फेसबुक और व्हाट्सऐप इस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. फेसबुक पर युवकयुवतियां दोनों ही अपने निक नेम से फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और मनचाही चैटिंग करते हैं. इस में कई बार युवतियां अपना नाम युवकों की तरह रखती हैं. जिस से उन की पहचान न हो सके. चैटिंग करते समय इस बात का खास ध्यान रखती हैं कि उन की सचाई किसी को पता न चल सके. यह बातचीत चैटिंग तक ही सीमित रहती है. बोर होने पर फ्रैंड को अनफ्रैंड कर नए फ्रैंड को जोड़ने का विकल्प हमेशा खुला रहता है.

समाजशास्त्री डाक्टर मधु राय कहती हैं, ‘‘पहले ऐसी बातचीत को मानसिक रोग माना जाता था. समाज भी इस को सही नहीं मानता था पर अब इस तरह की घटनाओं को बदलती सोच के रूप में देखा जा रहा है.’’ फेसबुक एक जैसी रुचियां रखने वाले लोगों को आपस में दोस्त बनाने का काम भी करता है. एक दोस्त दूसरे दोस्त को अपनी फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजता है. इस के बाद दूसरी ओर से रिक्वैस्ट कंफर्म होते ही चैटिंग का यह खेल शुरू हो जाता है. हर कोई अपनीअपनी पसंद के अनुसार चैटिंग करता है.

कुछ युवतियां तो चैटिंग के माध्यम से दोस्ती कर के पैसे तक वसूलने लगी हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि सैक्स को ले कर समझदारी बनाए रखें. उसे मुलाकात, प्यार और लगाव से दूर रखें.        

‘जी’ लगाने में हर्ज नहीं

‘जी’ एक सम्मानजनक संबोधन है, जिसे अकसर किसी के नाम के पीछे लगा कर हम उस के प्रति अपना आदर व्यक्त करते हैं, पर यह जरूरी नहीं कि हम हमेशा अपने से बड़ों के नाम के साथ जी लगाएं. जी शब्द आदर के साथसाथ प्रेम व मैत्री को भी बढ़ावा देता है. जी में अपनत्व का भाव छिपा है. लेकिन अपनत्व भरा यह संबोधन आज के किशोरों की जबान पर आसानी से नहीं आता.

अकसर हम अपने सहकर्मियों, दोस्तों को हमउम्र होने के नाते नाम से पुकारते हैं और ऐसा करना गलत भी नहीं है, पर जरा फर्ज करें अगर हम उन के नाम के साथ जी लगा दें तो यह सुनने और बोलने वाले दोनों को और करीब ला देगा. उन के बीच दोस्ती की डोर और मजबूत हो जाएगी.

आजकल फर्स्ट नेम से पुकारने का चयन तेजी से बढ़ रहा है. आईटी या अनेक बड़ी कंपनियों के मालिक तक को कर्मचारी नाम से संबोधित करते हैं. मालिकों को इस से एतराज नहीं होता. उन का मानना है कि इस से आत्मीयता बढ़ती है, लेकिन समाज में इस ट्रैंड को अच्छा नहीं समझा जाता.

किसी के नाम के साथ जी लगाने की ताकत दो दुश्मनों को भी प्रेम व सम्मान के धागे में बांध देती है. एक बार इस शब्द का इस्तेमाल कर के देखिए, दोस्तों पर अपनेपन का जादू चल जाएगा.

दीपा और रोहित के बीच भी इसी जी ने मैजिक का काम किया. उन दोनों के बीच कई दिनों से किसी बात को ले कर नाराजगी चल रही थी जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी फिर एक दिन दीपा ने रोहित को जी लगा मैसेज भेजा जिस से वह अपने गुस्से को खत्म करने पर मजबूर हो गया.

अब जमाना काफी ऐडवांस हो चुका है. रहने, खानेपीने के साथसाथ बोलचाल की भाषा में भी काफी बदलाव हुआ है. अब युवापीढ़ी शौर्टकट या एब्रीविएशंस पर ज्यादा डिपैंड हो गई है. मम्मी की जगह मौम या मम्मा आदि ने ले ली है, तो पापा को पौप या डैडू आदि मौडर्न संबोधनों से रिप्लेस कर दिया गया है. घर में बोले जाने वाले इन्हीं संबोधनों के साथ अगर जी जोड़ दिया जाए तो सामने वाले का सम्मान बढ़ जाता है, हो सकता है इस से सुनने वाला आप से कहीं बढ़ कर आप को सम्मान दे.

अपने यारदोस्तों के नाम के साथ भी जी लगाने में आप ही का फायदा है. इस से आप के रिश्ते मजबूत होंगे और लोग आप को मैच्योर और सुसंस्कृत समझेंगे.

जरूरी नहीं कि नाम के साथ ही जी जोड़ा जाए. घर में या बाहर किसी के बुलाए जाने पर भी आप जी हां या हां जी कह कर जवाब दें, इस से आप को खुद को भी अच्छा लगेगा.

दिल्ली के जीटीबी नगर में रहने वाली प्रेरणा चौहान जो 10वीं में पढ़ती है, जी फैक्टर के बारे में अपना अनुभव बताते हुए कहती है, ‘‘घर में मेरी इमेज एक पैंपर्ड और रूड चाइल्ड की थी. एक वक्त था जब मैं बड़ों को भी उन के नाम से ही बुलाती थी. चाचा, पापा या भाई को उन के नाम से बुलाती थी. धीरेधीरे मेरी इमेज बिगड़े हुए बच्चे वाली बन गई. किसी के पुकारे जाने पर भी मैं बहुत रूडली जवाब देती. दोस्तों के बीच मैं बदमिजाज और नकचढ़ी के नाम से जानी जाने लगी.

‘‘एक दिन मेरी एक दूर की दीदी ने मुझे समझाया. मुझे सलीके से बात करने को कहा व कुछ टिप्स दिए. उन की बातों का मुझ पर जादू सा असर हुआ. उस दिन के बाद मैं घर में सब को जी लगा कर संबोधित करने लगी.

’’मेरे भीतर आए इस बदलाव से सब हैरान थे और खुश भी. अब यह वक्त है कि सोसायटी या फैमिली गैदरिंग में मेरे बिहेवियर का उदाहरण दिया जाता है. ‘जी’ फैक्टर ने मेरी वैल्यू बढ़ा दी है. मैं सभी से यही कहूंगी कि एक बार इस फीलगुड फैक्टर को आजमा कर देखिए, मैजिकल इफैक्ट होगा. खूब प्रशंसा मिलेगी और दोस्तों में रौक भी करेंगे.’’

लिहाजा, जी लगाने से न तो आप छोटे हो जाएंगे और न सम्मानित व्यक्ति बड़ा बल्कि इस का आप को फायदा होगा. आप का भी सम्मान बढ़ेगा. लोग आप को भी जी लगा कर संबोधित करेंगे. तो कीजिए आज से ही एक नई पहल, शुरू कीजिए नया  ट्रैंड और देखिए आजमा कर जी फैक्टर के जादू को.             

‘जी’ लगाने के फायदे

–       इस से आप की अच्छी इमेज बनेगी.

–       आप अपने फ्रैंड सर्कल, सीनियर्स की गुड बुक में शामिल हो जाएंगे. इस से स्वत: ही लोगों में आप के प्रति एक अच्छी इमेज डैवलप होगी.

–       ऐसे संबोधन से आप की टीचर्स और पेरैंट्स के बीच इमेज तो बनेगी ही साथ ही, सोशल गैदरिंग में भी आप का उदाहरण दिया जाएगा.

–       आप के प्रति लोगों के व्यवहार और नजरिए में बड़ा फर्क

भविष्य निर्माण में अहम शिष्टता की भूमिका

केरल के एक आईएएस अधिकारी एन प्रशांत कलक्टर हैं वे महज 35 साल की उम्र में इतने लोकप्रिय कलक्टर हो गए हैं कि लोग उन्हें कलक्टर ब्रदर कह कर पुकारते हैं. वे देश के पहले कलक्टर हैं जिन के फेसबुक पर 2 लाख से भी ज्यादा फौलोअर्स हैं. अनुशासन, शिष्टाचार और प्रशासनिक दृढ़ता के धनी प्रशांत कई सामाजिक गतिविधियों में भी आगे रहते हैं और मलयाली फिल्मों के लिए पटकथा यानी स्क्रिप्ट भी लिखने लगे हैं.

प्रशांत की उपलब्धियों और शानदार व्यक्तित्व से उन के बचपन की एक घटना का गहरा संबंध है. उन की मां एक मैडिकल कालेज में कार्यरत थीं. एक बार उन्हें अपने किसी काम के सिलसिले में स्वास्थ्य सचिव से मिलने जाना पड़ा तो वे प्रशांत को भी साथ ले गईं. स्वास्थ्य सचिव ने उन की मां से मुलाकात की, धैर्यपूर्वक उन की बात सुनी और बातचीत में पूरी गरिमा बनाए रखी.

प्रशांत के बालमन पर स्वास्थ्य सचिव के शिष्ट व्यवहार का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उन्होंने भी उसी वक्त आईएएस अधिकारी बनने की ठान ली और तिरुअनंतपुरम से बीए करने के बाद सरकारी ला कालेज से एलएलएम की डिग्री ली और बाद में आईएएस जैसी कठिन परीक्षा में बैठे और चुने भी गए.

शिष्टता हर किसी को अच्छी लगती है और शिष्ट व्यक्ति दूसरों के मुकाबले जल्दी तरक्की पाते हैं.

अकसर हमारे आसपास भी शिष्टता की ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं, जरूरत इन घटनाओं को देख कर शिष्टता अपनाने की है. आजकल के किशोरों में शिष्टता कम देखने को मिलती है, जिस की कई वजह हो सकती हैं.

शिष्टता एक रा मैटीरियल है

स्कूलकालेज की उम्र और माहौल अब बेहद तनावपूर्ण और बोझिल हो गए हैं. इस उम्र में ही लोग भविष्य निर्माण की बात सोचते व उस का खाका भी अपनी शिक्षा, रुचियों और सुविधाओं के हिसाब से खींचते हैं. हर किसी का सपना एक कामयाब आदमी बनने का होता है जिस में रसूख, रुतबे और पैसों की भरमार होती है.

बेहतर भविष्य बनाने के लिए कौनकौन सी चीजें जरूरी हैं इस सवाल के जवाब में अगर आप शिक्षा, मेहनत, हुनर, पैसा, सुविधाएं और मौके गिनाते हैं तो यकीन मानें आप इन से भी ज्यादा अहम चीज शिष्टता को भूल रहे हैं, वजह शिष्टता महज एक शब्द ही नहीं बल्कि भविष्य निर्माण के लिए एक व्यावहारिक सामग्री है, जिस के माने भी बहुत व्यापक हैं.

यह धारणा गलत नहीं है कि आमतौर पर 85 फीसदी बातें और व्यवहार लोग किशोर उम्र में ही सीख लेते हैं. इन में से जो चीजें जिंदगी भर आसानी से पीछा नहीं छोड़तीं, उन में से एक है अशिष्टता, जो एक ऐसी पहचान बन कर रह जाती है जिसे कोई दूसरा तो दूर, आप खुद भी पसंद नहीं करते पर चाह कर भी इस से छुटकारा नहीं पा सकते. इसलिए व्यवहार को किशोर उम्र से ही संयमित रखना जरूरी है.

शिष्टता कैसे भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभाती है इस की बेहतर मिसाल नौकरी के लिए दिए जाने वाले इंटरव्यू हैं. क्या आप इंटरव्यू रूम में बगैर अनुमति जाने की हिम्मत कर सकते हैं. जाहिर है नहीं, क्योंकि ऐसा आप को सिखाया जाता है यानी किसी भी तरह की अशिष्टता या उद्दंडता आप से मौका छीन सकती है.

यहां फर्क इतना है कि अकसर आप वहां सिखाई गई शिष्टता दिखाते हैं जिस से आप को कुछ हासिल करना होता है. अगर आप लाभप्रद अवसरों पर ही मैनर्स दिखाते हैं तो यकीन मानें आप को शिष्टता सीखने की जरूरत है यानी आप पूरी तरह शिष्ट नहीं हैं और अनजाने में अपने भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं.

अकसर वे अभिभावक बच्चों के भविष्य को ले कर ज्यादा चिंतित रहते हैं जिन के बच्चे अशिष्ट होते हैं. यह अशिष्टता अकसर स्कूल या दोस्तों की संगत की वजह से आती है.

जो बच्चे 10-12 साल की उम्र तक बड़ों का सम्मान करते हैं उन में से कई बड़ी कक्षाओं तक आतेआते तू तड़ाक, अबेतबे और साले जैसे शब्दों का प्रयोग बोलचाल में करने लगते हैं. ऐसा करने में वे अपनी शान समझते हैं. इस प्रवृत्ति पर अगर वक्त रहते अंकुश न लगे तो भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

दो टूक कहा जाए तो अशिष्टता आप को आक्रामक बनाती है और शिष्टता नम्र बनाती है. अशिष्टों को कोई पसंद नहीं करता, अत: निष्कर्ष यही निकलता है कि भविष्य उन्हीं का बेहतर बनता है जो होश संभालते ही शिष्ट बनें. सभ्य समाज अशिष्टों से हर लिहाज से परहेज करता है. खासतौर से उन किशोरों से जो किसी वृद्ध को बजाय सम्मानपूर्वक बाबा, दादा या अंकल कहने के अबे बूढ़े या बुड्ढा कह कर पुकारते हैं.

कैसे बनें शिष्ट

शिष्टता कोई दुर्लभ गुण नहीं है बल्कि बेहद आसान है. आज के समय में तो शिष्ट लोगों की पूछपरख और बढ़ती जा रही है, क्योंकि अधिकांश कंपनियां और नियोक्ता मानते हैं कि एक शिष्ट कर्मचारी ही व्यवसाय बढ़ाने में सहायक हो सकता है और उस में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भी भावना होती है.

अशिष्टता के जरिए आप आक्रामक तो हो सकते हैं पर शिष्टता से हालात कैसे भी हों उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं. भोपाल ट्रैफिक पुलिस के एक इंस्पैक्टर का कहना है, ‘‘अकसर हम बाइक चलाते स्कूली बच्चों को जब रोकते हैं तो जो बच्चे शिष्टता से पेश आते हैं उन्हें हम नसीहत दे कर छोड़ देते हैं पर जो बदतमीजी दिखाते हैं उन्हें सबक सिखाना जरूरी हो जाता है. कुछ बच्चों के तो पासपोर्ट इसलिए नहीं बन पाते कि उन के खिलाफ यातायात नियम तोड़ने का मामला दर्ज हुआ होता है. ऐसे बच्चों का भविष्य क्या होगा आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं.’’

इस इंस्पैक्टर की बात से साफ जाहिर होता है कि अशिष्ट होना अपने पांवों पर कुल्हाड़ी मारने जैसी बात है और यह बात सड़क पर ही नहीं बल्कि जिंदगी के हर क्षेत्र में लागू होती है. उदाहरण स्कूलों का लें तो शिष्ट बच्चे क्लासटीचर की पसंद होते हैं और उन पर टीचर्स ज्यादा ध्यान देते हैं जबकि अशिष्ट बच्चों से तंग आ कर टीचर्स उन पर ध्यान नहीं देते.

यहां टीचर्स को दोष नहीं दिया जा सकता. न ही उन पर किसी तरह के भेदभाव का आरोप मढ़ा जा सकता है, क्योंकि छात्र का व्यवहार तय करता है कि वह टीचर का कितना ध्यान अपनी तरफ खींच कर ज्यादा से ज्यादा शिक्षा उन से ले सकता है.

दरअसल, शिष्टता अनुशासन का एक हिस्सा है जो कामयाबी की पहली शर्त है. इसे अगर एन प्रशांत जैसे सफल आईएएस अधिकारी के उदाहरण से देखें तो ये निष्कर्ष निकल कर सामने आते हैं :

– एक छोटा बच्चा भी शिष्टता से प्रभावित होता है.

– शिष्टता कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती है.

– जीवन में बड़ा और सफल बनने के लिए शिष्टता बेहद  जरूरी है.

– शिष्टता लोकप्रिय भी बनाती है.

– यह आप को दृढ़ भी रखती है और अपने लक्ष्य के प्रति आगाह भी करती है.

– शिष्ट व्यक्ति ही अपने विषय और कार्य में दक्ष होता है.

–  भविष्य बनाने व संवारने के लिए शिक्षा जरूरी है पर उस में शिष्टता न हो तो वह बेकार ही साबित होती है.

शिष्टता कैसे संघर्षशील लोगों को शिखर तक पहुंचाने में सहायक होती है इस की एक मिसाल सदी के महानायक के खिताब से नवाजे गए अभिनेता अमिताभ बच्चन भी हैं जिन्हें मामूली शक्लसूरत का करार देते हुए कभी निर्माता दरवाजे से भगा दिया करते थे, पर अमिताभ बच्चन की शिष्टता आखिर रंग लाई और निर्देशक प्रकाश मेहरा ने उन्हें ‘जंजीर’ फिल्म में बे्रक दिया जो 70 के दशक की एक सुपरहिट फिल्म थी.

यही अमिताभ बच्चन जब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ नामक मेगा शो में एंकर के रूप में दिखते हैं तो उन की शिष्टता की मिसाल औडियंस देती है. उन से मिलने वाले अकसर यह कहते हैं कि वे बहुत ही सरल, नम्र और शिष्ट व्यक्ति हैं बजाय यह कहने के कि वे एक शो मैन और बहुत बड़े अभिनेता हैं.    

आतंक के शिकार भारत व पाक

भारतीय सेना द्वारा कश्मीर में लाइन औफ कंट्रोल को पार कर सीमा पार चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैंपों पर हमले से देश में राहत महसूस की जा रही है कि देश पठानकोट व उरि की घटनाओं पर चुप न रहेगा. यह सर्जिकल स्ट्राइक आसान नहीं होती, क्योंकि इस में बहुत कम समय में शत्रु का सफाया करना होता है. सवाल अभी भी है कि क्या यह हमला पाकिस्तान को सबक सिखाएगा? 4 दिनों बाद बारामूला में 2 अक्तूबर को एक हमला कर आतंकवादियों ने सिद्ध भी कर दिया कि वे सर्जिकल स्ट्राइक से प्रभावित नहीं हैं.

पठानकोट व उरि में हुए आतंकी हमलों से लगता है कि इस देश में सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर है कि हथियारों से लैस सिर्फ 4 आतंकवादी टहलते हुए आर्मी कैंपों में घुस कर गोलीबारी कर सकते हैं. अपनी जान की चिंता न हो तो शायद हमारे सुरक्षा बल कुछ न करें. दोनों हमलों में इन आतंकवादियों को आक्रमण करने से पहले क्यों नहीं पकड़ा जा सका, हमारी सेनाएं व गुप्तचर एजेंसियां क्या सो रही थीं? आतंकियों के पास कई तरह के हथियार व बम थे जिन्हें सीमा पार करते समय छिपाना आसान नहीं था, फिर भी वे देश की सुरक्षा को धता बता गए.

ये शब्द सेना के खिलाफ होने के कारण कड़वे लग सकते हैं पर इसकी जिम्मेदारी सैनिक अफसरों और राजनीतिबाज नेताओं की है कि वे हर समय सतर्क रहने वाली सेना क्यों नहीं तैयार कर पा रहे हैं?

यह ठीक है कि धर्म के नाम पर जिस तरह दुनियाभर में आतंकवादी तैयार किए जा रहे हैं, वह बेहद खतरनाक है. डर है कि वह दिन भी न आ जाए जब कहीं आणविक हथियार से लैस आतंकियों का हमला हो जाए, क्योंकि जो खुद मरने को तैयार हों, वे कुछ भी कर सकते हैं.

ऐसे में देश की सरकार को कोसने या धमकियां देने या पड़ोसी सरकार पर तोहमत लगाने से लाभ नहीं. पाकिस्तान दोषी हो सकता है पर यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान की जनता खुद आतंकवादियों की शिकार है. वहां तो आएदिन हमले होते रहते हैं. 16 दिसंबर, 2014 को पाकिस्तान के पेशावर स्थित आर्मी स्कूल के बच्चों पर हुआ हमला तो वहां की सब से दर्दनाक घटना थी. पाकिस्तान की सेना क्या कर पाई थी उस का बदला लेने के लिए?

आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप तो पाकिस्तान में हर तरफ बिखरे पड़े हैं और पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तानी सेना चाहे, तो भी नहीं घुस सकती. हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि श्रीलंका में भारतीय फौज तमिल टाइगर्स से निबट नहीं पाई थी और कई साल बाद श्रीलंका की सेना ही उन का सफाया कर पाई थी.

अफसोस यह है कि सर्जिकल स्ट्राइक और पठानकोट व उरि जैसी घटनाएं भारत व पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने के राजनीतिक प्रयासों पर पानी फेर देती हैं. इस तरह की घटनाओं से 10-20 जिहादी शांति प्रयासों की रेल की पटरी उखाड़ फेंकते हैं. भारत और पाकिस्तान दोनों गरीब देश हैं, लड़ाई का आर्थिक बोझ नहीं सह सकते हैं और न अरबोंखरबों रुपए लड़ाई की तैयारी में लगा सकते हैं. दोनों देशों की प्राथमिकता धर्म या कश्मीर नहीं, गरीबी व भुखमरी को खत्म करना होनी चाहिए.

धर्मजनित आतंकवाद ने असल में रोटी छीन ली है, ईश्वरअल्लाह दे या न दे, अपनी सुरक्षा के लिए आम आदमी की रोटी छीन जरूर रहा है.

नील नितिन मुकेश ने की सगाई

तमाम कोशिशों के बावजूद अपने समय के मशहूर गायक स्व. मुकेश के पोते व गायक नितिन मुकेश के बेटे नील का करियर बौलीवुड में नही बन पाया. वैसे निजी जिंदगी में उनके रोमांस की काफी चर्चाएं रहीं. मगर दशहरे के दिन नील ने अपने पिता नितिन मुकेश व अपनी मां की पसंद की लड़की रूक्मणी के संग एक पांच सितारा होटल में सगाई कर सभी को चौंका दिया.

सूत्रों के अनुसार नील की रूक्मणी के संग सगाई व शादी की बात काफी पहले ही तय हो चुकी थी. इसी के चलते नील ने मुंबई में अंधेरी इलाके में अपने लिए नया घर खरीद कर उसे सजाना शुरू कर दिया था. सूत्रों के अनुसार मंगलवार, दशहरे के दिन सुबह साढ़े पांच बजे तक वह अपने घर का इंटीरियर करवाते रहे. उसके बाद रोका यानी कि सगाई की रस्म के लिए होटल पहुंचे थे.

अपनी इस सगाई को लेकर नील ने मीडिया से कहा-‘‘मेरा विवाह संस्था में पूरा यकीन है. इसीलिए मैंने एक अच्छी लड़की पसंद करने की जिम्मेदारी अपने माता पिता को सौंपी थी. अब रोका हो चुका है. शादी की तारीख भी जल्दी ही तय हो जाएगी.’’ सूत्रों के अनुसार रूक्मणी मुंबई की रहने वाली हैं और होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद एवीएश इंडस्ट्री में कार्यरत हैं.

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