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बीसीसीआई के बाद अब यहां से भी अनुराग की छुट्टी तय!

सर्वोच्च न्यायालय ने लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं को लागू करने पर अड़ियल रुख अपनाए हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को बाहर का रास्ता दिखा दिया.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए उनके खिलाफ एक नोटिस भी जारी किया, जिसमें उनसे पूछा गया है कि उन पर झूठी गवाही देने और अदालत की अवमानना का मुकदमा क्यों न चलाया जाए?

'मेरे लिए यह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी'

अदालत ने यह भी कहा कि माफी न मांगने पर अनुराग को जेल भी जाना पड़ सकता है. अदालत का फैसला आने के बाद अनुराग ने कहा, 'भारत में पूरी दुनिया की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावशाली खिलाड़ी हैं. मेरे लिए यह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी. यह लड़ाई खेल संगठन को स्वायत्तता दिलाने की है. मैं किसी भी अन्य नागरिक की तरह सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करता हूं.'

बीसीसीआई देश में सबसे व्यवस्थित खेल संघ

अनुराग ने कहा, 'बीसीसीआई देश में सबसे व्यवस्थित खेल संघ है. भारत के पास सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट अवसंरचना है और बीसीसीआई की मदद से राज्य क्रिकेट संघ इनकी बहुत अच्छी तरह देखरेख कर रहे हैं.'

19 जनवरी को होगी अंतरिम बोर्ड की घोषणा

सर्वोच्च न्यायालय ने एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम और जाने-माने वकील फली नरीमन को उन लोगों के नाम सुझाने के लिए कहा है, जो एक प्रशासक के नेतृत्व में काम करने वाली समिति में शामिल हों. यह समिति बीसीसीआई के संचालन का कामकाज देखेगी. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जनवरी की तिथि निर्धारित की है. इसी दिन बीसीसीआई अंतरिम बोर्ड की घोषणा होगी. न्यायालय ने कहा कि वह उसी दिन प्रशासक की नियुक्ति का आदेश भी जारी करेगा.

बीसीसीआई का अड़ियल रुख

अदालत ने यह भी कहा कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने को लेकर अड़ियल रुख रखने वाले बीसीसीआई के अधिकारियों और बोर्ड से संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों के अधिकारियों को अपना पद छोड़ना होगा.

अनुराग के साथ सचिव पद से हटाए गए शिर्के ने कहा, 'मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है. बीसीसीआई में मेरा काम खत्म हो गया है. अगर सर्वोच्च न्यायालय ने मुझे हटने के लिए कहा है, तो ठीक है. आशा है कि नया प्रबंधन बोर्ड का संचालन सही तरीके से करेगा. बोर्ड की स्थिति पर अब और अधिक आंच नहीं आएगी.'

न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कोर्ट के फैसला का स्वागत किया

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा, 'इन सिफारिशों को लागू करने का फैसला 18 जुलाई को सुनाया गया था. बीसीसीआई इस फैसले को लागू करने के लिए बाध्य थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. इसलिए, ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ रहा है. 'उन्होंने कहा, 'सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन अब यह हो गया. समिति ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तीन रिपोर्ट पेश की. इसके बावजूद सिफारिशों को लागू नहीं किया गया.'

हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन से भी अनुराग की छुट्टी तय

अनुराग ठाकुर की अब हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन से भी छुट्टी तय मानी जा रही है. दरअसल, लोढ़ा कमेटी के अनुसार, लगातार दो या 9 साल तक ही कोई व्यक्ति राज्य क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष रह सकता है. अनुराग 16 वर्षों से एचपीसीए अध्यक्ष हैं. ऐसे में उनकी एचपीसीए से भी छुट्टी होनी तय है.

यही वह सिफारिश है जिसका बोर्ड लगातार विरोध करता रहा है. इसी तरह जिला क्रिकेट संघों में भी इन सिफारिशों के लागू होते ही सब कुछ बदल जाएगा. 70 सदस्यों के एसोसिएशन में ऊपर से नीचे तक कई पदाधिकारियों को अपना गंवना पड़ेगा.

अगला एचपीसीए अध्यक्ष कौन?

सूत्रों की मानें तो अगर अनुराग ठाकुर को एचपीसीए अध्यक्ष पद से हटना पड़ा तो अगला अध्यक्ष कौन बनेगा इस पर माथापच्ची अभी से शुरू हो गई है. वर्तमान में एचपीसीए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हर पांच साल बाद होते हैं. चुनाव प्रक्रिया में एसोसिएशन के सदस्य, जिलों के अध्यक्ष और सचिवों सहित कार्यकारी बोर्ड के 27 और 20 आजीवन सदस्य हिस्सा लेते हैं. हालांकि, चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने वाले अधिकतर एचपीसीए सदस्य अनुराग समर्थक हैं.

करीब सात माह तक रहे बीसीआई अध्यक्ष

शशांक मनोहर द्वारा मई महीने में बीसीसीआई अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद 22 मई को हुई बीसीसीआई की एसजीएम (स्पेशल जनरल मीटिंग) में अनुराग ठाकुर को सर्वसम्मति से बीसीसीआई का अगला अध्यक्ष चुना गया था.

41 वर्षीय ठाकुर बीसीसीआई के दूसरे सबसे कम उम्र के अध्यक्ष थे. उन्हें इस पद पर सितंबर 2017 तक रहना था. अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद भी हैं. इससे पहले वह बीसीसीआई के सचिव थे.

निकल गई ठसक

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू की अक्ल ठिकाने आ गई लगती है. यह नेक और जरूरी काम सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता था. हर बात पर कुछ भी ऊटपटांग बोलने और ट्वीट करने वाले काटजू ने यों ही शौकशौक में केरल के चर्चित सौम्या हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उंगली उठाई तो अदालत ने उन्हें तलब किया. काटजू खुशीखुशी अदालत तक पहुंच गए पर वहां अपने जूनियर्स के सख्त तेवर देख सकपका भी गए.

अदालत ने बेरहमी दिखाई और अवमानना की धौंस दी तो मार्कंडेय काटजू को सौरी कहने में ही अपनी भलाई लगी और दिसंबर के पहले हफ्ते में उन्होंने सौरी बोल भी दिया. अब उम्मीद लगाई जा रही है कि वे अपनी जबान पर लगाम कसे रहेंगे.

अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना कहानी चोर हैं या…

प्रचार के लिए सितारे क्या क्या नहीं करते हैं. पर कई बार इन सितारों का प्रचार का यही हथकंडा उनके लिए ही गले की हड्डी बन जाता है. यूं तो अक्षय कुमार इन दिनों केपटाउन में अपनी पत्नी ट्विंकल खन्ना तथा दोनों बच्चों आरव व नितारा के संग छुट्टियां मना रहे हैं. मगर अक्षय कुमार ने बड़े जोश में केपटाउन से ही 2017 के पहले दिन अपने प्रशंसकों को नववर्ष का तोहफा देने के लिए 2017 में आने वाली अपनी फिल्मों के पोस्टर ट्वीटर पर रिलीज किए. उसके बाद अक्षय कुमार की प्रचारक ने भी यह खबर ईमेल पर हर पत्रकार को भेज दिया. लेकिन यहां तो अक्षय कुमार के साथ ‘सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने’ की नौबत आ गयी. क्योंकि कुछ देर बाद ही अक्षय कुमार के प्रचारक का ईमेल आ गया कि उस खबर में कुछ गलती है, इसलिए उसका उपयोग न करें.

जब हमने प्रचारक के इस तरह के ईमेल की वजह जानने के लिए अपने स्तर पर जांच पड़ताल शुरू की, तब राज खुला कि अक्षय कुमार पर उनकी दो फिल्मों ‘पैड मैन’ और ‘टायलेटः एक प्रेम कथा’ पर कहानी चोरी का ऐसा इल्जाम लग रहा है, जिसका जवाब किसी के पास नही है.

क्या है ‘‘पैड मैन’’ का मसला?

वास्तव में अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना अब बतौर निर्माता पुनः बौलीवुड में सक्रिय हो रही हैं. वह एक फिल्म ‘‘पैड मैन’’ का निर्माण कर रही हैं, जिसका निर्देशन आर बालकी करेंगे. अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, सोनम कपूर व राधिका आप्टे जैसे कलाकारों से युक्त इस फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश के महेश्वर में नर्मदा नदी के तट के अलावा भोपाल में होनी है. जिसके लिए आर बालकी कुछ दिन पूर्व ही लोकेशन भी तय कर आए हैं. अक्षय कुमार ने जो पोस्टर ट्वीटर पर दिया है, उसमें लिखा है-‘‘पैड मैनः बेस्ड आन एन एक्स्ट्रा आडनरी स्टोरी’’. फिल्म के पोस्टर पर नाम के साथ ही सेनेटरी नैपकीन की तस्वीर भी है. जी हां! फिल्म ‘‘पैड मैन’’ की कहानी कोयंबटूर के व्यवसायी अरूणाचलम मुरूगननाथम की जीवनी है.

ट्विंकल खन्ना फिल्म ‘‘पैड मैन’’ को अपनी गत नवंबर माह में आयी चार कहानियों वाली किताब ‘‘द लीजेंड आफ लक्ष्मी प्रसाद’’ की चार कहानियों में से एक कहानी पर आधारित बता रही हैं. मगर इसकी पटकथा ट्विंकल खन्ना नहीं लिख रही हैं. पर यह कहानी एक ऐसे ग्रामीण की है, जो कि समाज के निचले तबके की औरतों को उनके सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए कम कीमत पर सैनेटरी नैपकीन मुहैया कराता है.

उधर अब कुछ सूत्र तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि अमित राय की फिल्म ‘‘आई पैड’’ के कुछ दृश्यों को ज्यो का त्यों कहानी लेखक के तौर पर ट्विंकल खन्ना पहले ही अपनी किताब की इस कहानी में लिख चुकी हैं.

कौन है अरूणाचलम मुरूगननाथम

2016 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित अरूणाचलम मुरूगननाथम ने अपनी पत्नी की तकलीफ को देखकर ‘सेनेटरी नेपकीन’ बनाने की एक सस्ती मशीन का ईजाद करने के साथ साथ उसे गांव गांव तक इस तरह प्रचारित किया कि आज भारत के 29 राज्यों में से 23 राज्यों में अरूणाचलम मुरुगननाथम की ‘सेनेटरी नैपकीन’ बनाने वाली मशीन लग चुकी हैं. बाजार में आम तौर पर मौजूद सेनेटरी नैपकीन के मुकाबले अरूणाचलम की सेनेटरी नैपकीन एक तिहाई लागत में ही आ जाती है. उन्होंने गांव की महिलाओं को सैनेटरी नेपकीन के उपयोग के लिए जागरूक भी किया. 2014 में टाइम पत्रिका ने ‘‘100 मोस्ट इंफ्यूलुशियल पीपुल आफ वर्ल्ड’’ में अरूणाचलम मुरूगननाथम का नाम शामिल किया.

अब लोग सोच रहे होंगे कि ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार तो अच्छा काम कर रहे हैं कि वह ऐसी सैनेटरी नेपकीन बनाने वाले की जिंदगी को सिनेमा के परदे पर लाने जा रहे हैं. मगर असली कहानी यह है कि अरूणाचलम मुरुगुननाथम की जिंदगी पर पहले से ही ‘रोड टू सगम’ फेम निर्देशक अमित राय ‘‘आई पैड’’ नामक फिल्म बना चुके हैं, जो कि निर्माता मोनीष सेखरी व निर्देशक अमित राय के बीच आपसी झगडे़ के चलते प्रदर्शित नही नहीं हो पायी, जबकि यह फिल्म 2015 में ही बन गयी थी. अमित राय ने अपनी इस फिल्म की शूटिंग  2014 में भोपाल में की थी. और फिल्म को बेचने के लिए इस फिल्म को 2015 में गोवा के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’में भी ले जाया गया था, जहां इस फिल्म पर लोगों से अमित राय ने बात की थी. वैसे निर्देशक अमित राय का दावा है कि वह मार्च 2017 में इस फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने वाले हैं. वास्तव में अमित राय चाहते हैं कि फिल्म को प्रदर्शित किया जाए, जबकि मोनीष सेखरी की मंशा रही है कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उनकी फिल्म चर्चा बटोरे, पर इस फिल्म का चयन किसी भी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में नहीं हो पाया.

कुछ सूत्र दावा करते हैं कि अक्षय कुमार ने फिल्म ‘‘आई पैड’’ के निर्माता को समझाने में कामयाब हो गए हैं कि वह अपनी फिल्म को कभी भी प्रदर्शित नहीं करेगा. निर्माता इस बात के लिए क्यों तैयार हुआ, यह बात किसी की भी समझ में नहीं आ रही है.

दक्षिण भारतीय इंसान की जीवनी की शूटिंग हिंदी भाषी प्रदेश मध्य प्रदेश में क्यों?

अमित राय की फिल्म ‘‘आई पैड’’ की कहानी दक्षिण भारतीय इंसान अरूणाचलम मुरूगननाथम की है, पर उन्होंने फिल्म को देशव्यापी बनाने के मकसद से किरदार को हिंदी प्रदेश का बताकर फिल्म को भोपाल में फिल्माया. शायद इसी फिल्म को देखकर आर बालकी ने भी इसे मध्य प्रदेश के भोपाल व महेश्वर में फिल्माने का निर्णय लिया है. अरूणाचलम मुरुगाननाथम के दीवाने तो विदेशी फिल्मकार भी हैं. हौलीवुड फिल्म निर्माता जेम्स कैमरून भी अरूणाचलम मुरूगननाथम से मुलाकात कर चुके हैं.

अक्षय कुमार की फिल्म ‘‘पैडमैन’’ही विवादो में नही आयी है, बल्कि उनकी दूसरी फिल्म ‘‘टायलेट : एक प्रेम कथा’’ भी विवादों में आ गयी है.

‘‘टायलेट : एक प्रेम कथा’’ पर भी चोरी का आरोप

एडीटर से निर्देशक बने श्रीनारायण सिंह की पहली फिल्म “टायलेट : एक प्रेम कथा’’ में अक्षय कुमार व भूमि पेडणेकर की जोड़ी है, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’’ की वकालत करती है. मगर गुजराती फिल्मों के मशहूर निर्देशक कृष्णदेव याज्ञनिक का दावा है कि यह कहानी उनकी निर्माणाधीन फिल्म ‘‘नारायण दास पे एंड यूज’’ से चुरायी गयी है, जिसकी शूटिंग वह जनवरी 2017 के दूसरे सप्ताह से अहमदाबाद में शुरू करने वाले हैं.

इन दोनों फिल्मों की कहानी में ‘पे एंड यूज टायलेट’ चलाने वाले एक युवा को झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली युवती से प्रेम हो जाता है. यह औरत हर दिन टायलेट का उपयोग करने आती थी और तभी इनका प्यार परवान चढ़ता है. फिर यह दोनों शादी कर लेते हैं. दोनों समाज में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं.

सूत्र बताते हैं कि अक्षय कुमार की फिल्म में अक्षय कुमार के किरदार को युवा की बजाय अधेड़ उम्र का दिखाया जा रहा है. अक्षय कुमार ने बाजी मारते हुए अपनी फिल्म के पहले दिन की फोटो ट्वीटर पर डाल दी, जो कि शादी के बाद के सीन की है.

इस चोरी के सवाल पर कृष्णदेव याज्ञनिक कहते हैं-‘‘जब मैं अपनी हिंदी फिल्म ‘डेज आफ तफरी’ की शूटिंग कर रहा था, तभी मुझे इस बात की भनक लगी थी. पर मैं उनके जैसे बड़े लोगों से नहीं लड़ सकता. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मेरी फिल्म की कहानी, किरदार व किरदार का नाम सब कुछ उन तक कैसे पहुंच गया. मैंने तो इस फिल्म की कहानी आज से पांच वर्ष पहले संघर्ष के दिनों में लिखी थी. मैंने यह कहानी कई निर्माताओं को सुनायी थी. पर मुझे ‘डेज आफ तफरी’ के लिए निर्माता पहले मिल गया, तो मैंने वह फिल्म पहले बनायी. मैं यह सोचकर संतोष करके बैठ गया कि मेरी फिल्म गुजराती भाषा में होगी. मेरी फिल्म ‘ब्लैक कामेडी है.’’

मजेदार बात यह है कि ‘‘पैड मैन’’ और ‘‘टायलेट : एक प्रेम कथा’’ को लेकर उठे विवाद पर अक्षय कुमार की तरफ से कोई सफाईनामा नहीं आया, तो दूसरी तरफ बौलीवुड से जुड़े लोग खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं. 

नोटबंदी पर ‘बाबा साहब’ के नाम का मलहम

लखनऊ में भाजपा की परिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के घाव पर बाबा साहब के नाम का मलहम लगाने का प्रयास किया. नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी देश में कोई बदलाव न देखकर परेशान जनता खासकर दलित और गरीब वर्ग को पार्टी से जोड़ने के लिये बाबा साहब अम्बेडकर के नाम का सहारा लिया. लखनऊ की परिवर्तन रैली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भीम एप‘ नाम का एक मोबाइल एप लांच किया. जिसके जरीये मोबाइल बैकिंग को सरल किया जा रहा है.

लखनऊ में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का खुलासा किया कि मोबाइल एप का नाम ‘भीम‘ क्यों रखा गया था? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘बाबा साहब की प्रेरणा से बैकिंग व्यवस्था चल रही है. उनके नाम पर ही ‘भीम एप’ बनाया है. बाबा साहब को रूपये की ताकत और बैकिंग व्यवस्था का पता था. मेरा आग्रह है कि सभी लोग इसका इस्तेमाल करें. बाबा साहब को हर घर में याद किया जाये. भीम एप के जरिये हमने घरघर बाबा साहब को पहुंचाया है. इससे किसी के पेट में चूहे दौड़ें तो कोई फर्क नहीं पड़ता.’

असल में नोटबंदी में सबसे अधिक परेशान देश की सबसे गरीब जनता हुई है. गांव के किसान से लेकर मजदूर तक इससे परेशान हुआ. इस वर्ग को यह लग रहा था कि 50 दिन के बाद देश में ऐसा बदलाव आयेगा जिससे किसान, गरीब और मजदूर को लाभ होगा. 50 दिन बीत जाने के बाद जब ऐसा बदलाव नहीं हुआ तो इस वर्ग को खुश करने के लिये दलित महापुरूष बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के नाम का सहारा लिया गया. प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘भीम एप’ नाम से एक मोबाइल एप जारी किया. इस बात की पूरी चर्चा प्रधानमंत्री ने अपनी लखनऊ रैली में की. प्रधानमंत्री के इस कदम पर सवाल भी उठ रहे है.

दलित चिंतक रामचन्द्र कटियार मानते हैं कि भाजपा बाबा साहब का नाम लेकर वोट लेने की योजना बना रही है. वह कहते हैं कि अगर प्रधानमंत्री बाबा साहब को असल सम्मान देना चाहते थे तो नये नोट पर बाबा साहब का फोटो क्यों नहीं छापा? वह कहते हैं कि भाजपा हर चुनाव के पहले दलित वोट को लुभाने के लिये इस तरह का दिखावा करती है. कभी दलित के साथ रोटी खाने का दिखावा करती है तो कभी दलितों को गंगा स्नान कराया जाता है.

रामचन्द्र कटियार कहते हैं ‘जब तक देश और समाज से छुआछूत, रूढिवादिता खत्म नहीं होगी, ऊंची जातियों ने जिस तरह से दलितो के साथ व्यवहार किया है उसके चलते दलित समाज की मुख्य धारा में शामिल नहीं हो सकते. केवल नाम की राजनीति करके दलितों का भला नहीं हो सकता. अब दलित इस बात को समझता है कि दलित का नाम केवल वोट लेने के लिये लिया जाता है.’

उत्तर प्रदेश के चुनाव में दलित बड़ी ताकत के रूप में मौजूद है. भाजपा को यह लगता है कि जब तक दलित साथ नहीं होगा तब तक जीत सरल नहीं है. ऐसे में भाजपा दलितों का नाम लेकर चुनाव मैदान में जाना चाहती है. नोटबंदी के बाद भाजपा ने जिस तरह से बड़ी रैली का प्रबंधन किया है उससे विरोधियों का यह आरोप सच लगता है कि नोटबंदी का प्रभाव भाजपा पर क्यों नहीं पड़ रहा? 

VIDEO : कपिल शर्मा की ऑनस्क्रीन बीवी की हरकत हुई कैमरे में कैद

सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले सुपरहिट कॉमेडी शो ‘द कपिल शर्मा शो’ में एक खास भूमिका में नजर आने वाली सुमोना चक्रवर्ती के एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर मानो सनसनी मचा दी हैं. जब आप इस वीडियो को देखेंगे तब आपके लिए यह अनुमान लगाना काफी सरल होगा की ये वीडियो शूटिंग के दौरान बीच में मिले ब्रेक में रिकॉर्ड किया गया है.

इस वीडियो में साफ देखा जा सकता हैं की ब्रेक में स्पोर्टिंग स्टाफ के साथ बात करती सुमोना ये क्या हरकत कर रही हैं. ‘द कपिल शर्मा शो’ के एक जबर्दस्त किरदार डॉक्टर गुलाटी की पुत्री की भूमिका निभा चुकी सुमोना चक्रवर्ती ने अपनी जबर्दस्त छाप छोड़ी है. आप इस वीडियो में सुमोना चक्रवर्ती की ड्रेस पर गौर करेंगे तो सुमोना चक्रवर्ती ने जो यह साड़ी पहनी हुई हैं यह सुमोना ने ‘सैराट’ की टीम के आने पर पहनी थी.

हाल ही में सुमोना चक्रवर्ती के ‘द कपिल शर्मा शो’ को छोड़ने की खबर फैल गई थी लेकिन खुद सुमोना चक्रवर्ती ने इस खबर को बेबुनियाद बताया था. और यही नहीं सुमोना चक्रवर्ती ने कहा था की वह ‘द कपिल शर्मा शो’ का हिस्सा रहेंगी और वह इस शो में अपनी भूमिका का बहुत आनंद ले रही हैं. बहरहाल सुमोना चक्रवर्ती का यह वीडियो सोशल मीडिया में तहलका मचा रहा है.

शशिंद्र पाल त्यागी की गिरफ्तारी

इटली की हैलीकौप्टर कंपनी अगस्ता से 12 एडब्लू 101 हैलीकौप्टरों की खरीद में हुए भ्रष्टाचार पर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने पूर्व एयरमार्शल शशिंद्र पाल त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है. 2010 में हुए इस सौदे पर 2012 में ही मीडिया में हेराफेरी की भनक लग गई थी और 2014 में इटली की एक अदालत ने हैलीकौप्टर बनाने वाली कंपनी अगस्ता के प्रमुख को जेल की सजा दे दी थी. अप्रैल 2014 में इटली कोर्ट के कागजों में शशिंद्र पाल त्यागी का नाम आया पर जीरो सहन करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसंबर 2016 में उन्हें तब गिरफ्तार किया जब पूरा देश नोटबंदी के भ्रष्टाचार की मार बुरी तरह सह रहा था. कतारों में लगे देश को इटली से हुए सौदे में हेराफेरी से कोई दर्द हुआ, यह साफ नहीं क्योंकि आजकल तो देश अपने साथ सरकार के ही किए भ्रष्टाचार से पीडि़त है.

अगर सरकारें अपने पैसे को सुरक्षित नहीं रख सकतीं तो चाहे कांग्रेस सत्ता में हो या भारतीय जनता पार्टी की खुद को महाईमानदार बताने वाली सरकार, जनता को यही लगेगा कि हम जो सरकारें चुन रहे हैं वे एक से बढ़ कर एक हैं. 12 हैलीकौप्टरों की खरीद में रिश्वत लेना कोई नई बात नहीं है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय सौदों, खासतौर पर सैन्य सामान की खरीद, में रिश्वत तो होती ही है और दुनिया के सारे देश इस में माहिर हैं. सैनिक सामान बनाने वाली कंपनियां जानती हैं कि वे जो भी बेच रही हैं, उस का कोई मूल्य तय नहीं हो सकता और वे जितना चाहें, मनमाने दाम ले सकती हैं. हर देश इस तरह की खरीद गुप्त रखता है और नेता व सैनिक अफसर इस का पूरा लाभ उठाते हैं, लगभग हर सौदे में. ऐसे सौदे किसी भी देश में हों, रिश्वत तो ली ही जाती है.

शशिंद्र पाल त्यागी को पकड़ना तो भाजपा सरकार के लिए आसान है पर वह उन्हें दंड नहीं दे पाएगी, यह लगभग पक्का है. सेना हर देश में, हमारे यहां भी, इतनी मजबूत होती है कि नेता उस से घबराते हैं. सैनिक अधिकारी चाहें तो सरकार को मजबूर कर सकते हैं कि मामले को रफादफा करो क्योंकि एक को पकड़ने का अर्थ है सैकड़ों को पकड़ने का अधिकार ले लेना. इस पर सेना में खुसुरफुसुर शुरू हो गई. वर्तमान एयर चीफ मार्शल ने इस गिरफ्तारी को वायुसेना के मानसिक बल पर आघात माना है. ऐसे में सरकार टिक नहीं पाएगी. सैनिक अफसरों की पहुंच बहुत दूर तक होती है. और फिर एक तरफ सैनिकों की शहादत को वोटों के लिए भुनाने वाली सरकार उसी सेना की एक विंग के पूर्व प्रमुख को गद्दार कहने लगे, यह दोगली बात कैसे हो सकती है? भारतीय जनता पार्टी 15 दिन पहले ही सैनिकों की आड़ में अपने को कांग्रेस से ज्यादा देशभक्त साबित करने में लगी थी. क्या देश पर मरमिटने वाले शशिंद्र पाल  त्यागी जैसे होते हैं? क्या कहना चाहती है भाजपा असल में?

क्या यह नोटबंदी के कारण उठते हुए गुबार पर पानी के छींटे डालने का प्रयास है? अगर ऐसा है, तो भी भाजपा की स्वघोषित नीति के खिलाफ है जो सैनिकों और पंडितों को एक सा देवताओं समान शुद्ध, देशभक्त, मुहिमों से ऊपर मानती है. नोटबंदी के कारण उठते गुस्से को भ्रष्टाचार के 2-4 मामलों में कुछ गिरफ्तारियों से समाप्त नहीं किया जा सकता. मोदी सरकार अपनी गलती को पिछली सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचारों के चीथड़ों से नहीं ढक सकती.

नशा

ठंडे हुए तलवों और

सुन्न हुई उंगलियों को

रजाई की बांहें जब

तापती हैं

एक अजीब सा नशा

मन पर छाने लगता है

समय कोई भी हो

आंखों में वह नशा

उतर ही जाता है

होंठों से उठते

भाप के छल्लों में

पुरानी सर्दियां

प्लेबैक होने लगती हैं

महसूस होता है

मेरे ठंडे हाथों में

तुम्हारा गुनगुना हाथ

और आंखों में

प्यार का नशा

अब भी वैसी ही

जनवरी की ठंड है

वही मेरा कंपकंपाना

और है तुम्हारी

प्यारी रजाई

जो आज भी

मुझे नशे से

सराबोर कर देती है

एक और नशा है

जो छाने लगता है मुझ पर

फरवरी के आने का

सुनो…

तुम्हें याद है न…

– पारुल ‘पंखुरी’

सोशल मीडिया की लत के खिलाफ हूं : विद्या बालन

फिल्म ‘कहानी-2 : दुर्गा रानी सिंह’ की सफलता से उत्साहित विद्या बालन महिला प्रधान किरदारों को निभाने में माहिर होती जा रही हैं. महिला सशक्तीकरण के मुद्दे व अभिनय में नृत्य, संगीत के प्रशिक्षण के असर पर जानिए उनकी बेबाक राय. मूलतया दक्षिण भारतीय विद्या बालन को कोलकाता के लोग बंगाली समझते हैं क्योंकि बहुत अच्छी हिंदी बोलती हैं. उन से बात करते समय इस बात का एहसास ही नहीं होता कि  वे हिंदीभाषी नहीं हैं. सुजोय घोष निर्देशित फिल्म ‘कहानी 2 : दुर्गारानी सिंह’ में उन्हें सराहा गया है. उन्हें एक सफल फिल्म की आवश्यकता थी जो ‘कहानी 2 : दुर्गारानी सिंह’ ने पूरी कर दी.

विद्या बालन की एक खासीयत यह भी है कि उन्होंने संगीत का प्रशिक्षण ले रखा है, हालांकि अभी तक उन्होंने दूसरी बौलीवुड अभिनेत्रियों की तरह किसी भी फिल्म में गीत नहीं गाया है. हाल ही में जब विद्या बालन से मुलाकात हुई, तो उन से बंगाल, संगीत व महिलाओं के हालात पर विशेष बातचीत की.

आप को पश्चिम बंगाल खासकर कोलकाता के लोग बंगाली समझते हैं?

मैं मूलतया दक्षिण भारतीय हूं, लेकिन कोलकाता के लोग मुझे बंगाली समझते हैं. यह महज संयोग है कि मैं ने 4 फिल्मों की शूटिंग कोलकाता में की और उन में से 3 फिल्मों में मैं ने बंगाली किरदार निभाए. मैं ने 2003 में एक बंगला फिल्म ‘भालो ठेको’ में भी अभिनय किया था. अब तक मैं ने बंगला भाषा काफी सीख ली है. मैं बंगला गीत व संगीत की भी दीवानी हूं. कोलकाता में शूटिंग करना मेरे लिए हमेशा सुखद अनुभव रहता है. वहां हमेशा मुझे गरमजोशी का एहसास मिलता है. वहां के लोग कला और कलाकार की कद्र करना जानते हैं. शायद इसलिए मेरी पहचान से बंगाल जुड़ गया है.

आप ने कर्नाटक संगीत का प्रशिक्षण लिया है, फिर भी अभी तक किसी फिल्म में गाना नहीं गाया?

मैं पेशेवर गायक नहीं हूं. मैं बहुत बेसुरा गाती हूं. संगीत सीखने का अर्थ यह नहीं होता कि सभी लता मंगेशकर बन जाएं. कुछ चीजें अपने लिए सीखी जाती हैं. दक्षिण भारत में हम लड़के व लड़कियों को नृत्य व संगीत बचपन से सिखाया जाता है. इस से हमारे अंदर अनुशासन आता है. इसलिए मैं ने कर्नाटक संगीत के अलावा नृत्य का भी प्रशिक्षण लिया था. पर मैं ने कभी नहीं चाहा कि मैं किसी फिल्म में गीत गाऊं.

संगीत व नृत्य का प्रशिक्षण बतौर कलाकार अभिनय में कितना मदद करता है?

सिर्फ संगीत ही क्यों, नृत्य, मार्शल आर्ट या पेंटिंग का प्रशिक्षण हो, हर प्रशिक्षण इंसान को कभी न कभी मदद जरूर करता है. सभी प्रशिक्षण, जिन से आप जिंदगी में एक नए नजरिए से जुड़ सकें, जिंदगी को नए नजरिए से समझ सकें, कलाकार की मदद करते हैं. हम गीत, नृत्य व दृश्यों में भावनाओं को व्यक्त करते हैं. यदि कलाकार को इस का अनुभव है, यदि कलाकार ने विविध प्रकार का प्रशिक्षण ले कर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखा है, तो वह उस के लिए मददगार ही होता है. देखिए, यह जरूरी नहीं है कि एक कलाकार के तौर पर आप जो कहानी कह रहे हैं, उस के अनुभव से आप निजी जिंदगी में गुजरे हों, मगर यदि आप किताबें पढ़ते हैं, नाटक देखते हैं, संगीत सुनते हैं, तो आप को एक अनुभव का एहसास होता है, इस से आप के प्रदर्शन पर असर पड़ता है.

क्या आप को महिलाओं के मुद्दों पर समाज में कोई बदलाव नजर आ रहा है?

हम कुछ लड़कियों या औरतों से मिलते हैं या कुछ पढ़ते हैं, तो हमें लगता है कि कुछ बदलाव आ गया है. पर जब कुछ अजीब सी घटनाओं के बारे में सुनते हैं, तो लगता है कि कोई बदलाव नहीं आया.

मैं अखबार पढ़ रही थी. मैं ने खबर पढ़ी कि एक मां अपनी जुड़वां बेटियों को पैसे के लिए पड़ोसी के 17 साल के बेटे के हाथों बेचते हुए पकड़ी गई. इस खबर को पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में सवाल उठा कि क्या आज भी औरतों की स्थिति व औरतों से जुड़े मुद्दों में फर्क नहीं आया. पर हम पूरी तरह से यह नहीं कह सकते कि कोई फर्क नहीं आया. कई जगह फर्क आ रहा है, कई जगह फर्क नहीं आया. पर हर जगह से लोग बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, यह एक अच्छी बात है. यह 10-12 वर्ष का मामला नहीं है. सदियों से जो हमारी सोच चली आ रही है, उसे बदलने का मसला है, जिस में समय लगेगा. सदियों से कहा जाता रहा है कि यह मर्दों की दुनिया है. औरतों को इस तरह से रहना चाहिए, उन को फलां काम नहीं करना चाहिए आदि. हर औरत की जिंदगी पहले पिता, फिर भाई, फिर पति और फिर बेटे के साए में ही चलनी चाहिए, यह सोच इतनी जल्दी नहीं बदलेगी.

आप के विवाह के बाद से आप की फिल्में लगातार असफल होती रहीं?

फिल्मों की सफलता या असफलता का मेरी शादी से कोई संबंध नहीं है. हर फिल्म अपने कथानक के मापदंड पर सफल या असफल होती है. एक फिल्म की वजह से दूसरी फिल्म पर असर नहीं पड़ता. दर्शक को फिल्म पसंद आ गई, तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक पाता.

आप ने कहा था कि सोशल मीडिया से लोगों को नहीं जुड़ना चाहिए. पर अब तो आप खुद ही सोशल मीडिया से जुड़ गई हैं?

आप ने एकदम सही पकड़ा. मैं ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम से जुड़ गई हूं. पर मैं इस तरह के मीडियम की लत के खिलाफ आज भी हूं. लोगों में सोशल मीडिया की जो लत लग जाती है, जो एक नशा हो जाता है, मैं उस कखिलाफ हूं. कुछ लोग अपना काम छोड़ कर व्हाट्सऐप या फेसबुक पर लगे रहते हैं. यह गलत है. एक तरह से यह भी शराब की तरह एक नशा बन गया है. मुझे लगता है कि यह क्या पागलपन है कि लोग सोशल मीडिया पर ही एकदूसरे से बात करते हैं. बगल में जो बैठा है, उस से बात करने के लिए उन के पास समय नहीं होता है. मैं सोशल मीडिया से जुड़ी हूं, पर अभी भी पूरी तरह से सोशल मीडिया से नहीं जुड़ी हूं. हर मुद्दे पर अपनी राय दूं, ट्वीट करूं, ऐसा नशा नहीं है. फेसबुक पर भी मैं थोड़ा ही सक्रिय हूं. मैं यह मानती हूं कि दर्शकों, अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ने का यह अच्छा माध्यम है.

पर आप में सोशल मीडिया को ले कर जो बदलाव आया, उस की वजह क्या है?

देखिए, आज सभी सोशल मीडिया व ट्विटर पर सक्रिय हैं. हमारे देश के प्रधानमंत्री भी हर मुद्दे पर ट्वीट करते हैं.  अमिताभ बच्चन भी ट्विटर, फेसबुक पर हैं, ब्लौग लिख रहे हैं. यदि ये सब दिग्गज सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, तो फिर मुझे लगा कि मुझे ज्यादा दूरी नहीं रखनी चाहिए. मैं ने सोचा कि मैं कोशिश कर के देखती हूं. शायद यह मेरे बस का नहीं है या शायद मेरे बस का है. मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि यह इतना बुरा नहीं है. लेकिन इस की लत गलत है.

आप ‘निर्मल भारत अभियान’ से जुड़ कर देश में शौचालय बनवाने की मुहिम का हिस्सा हैं. मगर अब वहां भी कई तरह की गड़बडि़यां सामने आ रही हैं?

इस मसले पर मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है. पर मैं निर्मल भारत अभियान के तहत शौचालय बनवाने के लिए सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, देहातों के कई कार्यक्रमों में जा चुकी हूं. मैं ने देखा है कि लोग जोश से इस मकसद के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं. अब कई प्रकाशक और कौर्पोरेट कंपनियां भी शौचालय बनाने के लिए आर्थिक मदद दे रही हैं. पर भ्रष्टाचार हर जगह होता है. हम सभी भ्रष्टाचार के आगे बेबस हैं. कोशिशें जारी हैं. बीचबीच में अड़चनें भी आती हैं. बहरहाल, कुछ जगह जोरशोर से काम हो रहा है, कुछ जगह पर कार्य बहुत धीमी गति से हो रहा है. कुछ जगह पर लोग शौचालय बनाने के नाम पर पैसे खा रहे हैं, मैं दावे के साथ ऐसा कुछ कह नहीं सकती. पर मैं इस तरह की चीजें पढ़ती रहती हूं. जब हम कार्यक्रम में जाते हैं तो पता चलता है कि कहीं शौचालय बन गए हैं, पर उन में पानी नहीं है, तो सफाई नहीं है या जो बनाए गए थे, वे फिर से टूट रहे हैं, उन की मरम्मत नहीं हो रही. इसतरह की समस्याएं बहुत हैं. पर इन का हल जरूर निकलेगा.

आप एक फिल्म कर रही हैं, ‘बेगम जान’ जिस की कहानी भारतपाक बंटवारे के समय सीमा के वेश्यालय की है, जहां बेगम जान 15-20 लड़कियों से वेश्या का धंधा करवाती है. देश की आजादी को 67 साल हो गए हैं, क्या हालात में बदलाव आया है या वही हालात हैं?

अभी भी बहुत कम औरतों को इस बात का एहसास है कि उन के शरीर पर पहला हक उस का अपना है. ज्यादातर औरतें अभी भी यही समझती हैं कि वे किसी की जायदाद हैं. उन्हें लगता है कि उन की जिंदगी की डोर किसी और के हाथ में है. पर मैं यह मानती हूं कि अब धीरेधीरे यह सोच भी बदल रही है. पर 67 वर्ष में जितना बदलना चाहिए था, उतना नहीं बदला.

एक औरत होने के नाते आप ‘बेगम जान’ के काम को कितना सही या गलत मानती हैं?

मुझे नहीं लगता कि कोई भी औरत या लड़की जानते हुए धंधा करती है. हर किसी की कुछ मजबूरी होती है. इसलिए सही या गलत के माने वहां नहीं रह जाते. उन्हें लगता है कि हम चोरी या डाका डालने या किसी को मौत के घाट उतारने के बजाय जो कर सकते हैं, वह कर रही हैं. ऐसे में सहीगलत कुछ होता नहीं है. हम यही उम्मीद करते हैं कि ऐसा वक्त आए जब किसी भी औरत को अपने गुजारे के लिए यह सब न करना पड़े. पर हो सकता है कि इस में भी बहुत वक्त लग जाए.

इन्हें भी आजमाइए

 – मेहंदी का रंग गाढ़ा करने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका है कि जब मेहंदी लगवाएं, उस के बाद उसे हलका सूखने दें और फिर किसी कंबल या रजाई से मेहंदी को ढक दें. इस से गरमाहट मिलेगी और मेहंदी का रंग गहरा होगा.

– गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए इस का सेवन जुकाम व कफ से राहत  दिलाता है. जुकाम के दौरान अगर आप सादा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

– खांसीजुकाम में एकएक टुकड़ा गुड़ और अदरक को पीस लें. इस में एक चम्मच तुलसी का रस मिला कर गरम कर लें. इसे दिन में 2 या 3 बार खाएं. राहत मिलेगी.

– खाने के तुरंत बाद पेट को आराम देने के लिए बैल्ट खोलने की गलती न करें. इस का डाइजेशन पर बुरा असर पड़ता है और इस से इंटेंस्टाइन भी ब्लौक हो सकती है.

– गुनगुने पानी में फिटकरी और कंडीशनर को समान मात्रा में मिला कर बालों में लगाएं. 15-20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें. सप्ताह में एक बार ऐसा करें, बाल घने होते हैं.

– अगर आप मच्छरों से परेशान हैं तो नारियल तेल में नीम को डाल कर उस का दीया जलाएं, इस से मच्छर नहीं आएं

ऐसा भी होता है

मेरे भैया मुंबई में रहते हैं. एक बार की बात है. भैया और उन के कुछ साथी मीटिंग में शिरकत करने के लिए गाड़ी से कहीं जा रहे थे. अचानक एक गाड़ी सामने से आई. शायद उस गाड़ी का ड्राइवर शराब के नशे में था. लिहाजा दोनों गाडि़यों में टक्कर हो गई.

भैया की गाड़ी में आग लग गई. उन के सब साथी तो निकल गए लेकिन मेरे भैया बेहोश हो गए और अंदर ही फंस गए. जब उन को होश आया तो अपनेआप को सुरक्षित एक अस्पताल में पाया. उन को याद ही नहीं आ रहा था कि किस सज्जन ने उन्हें जलती गाड़ी से निकाला और अस्पताल तक पहुंचाया. उन्होंने उन सज्जन को मन से लाख बार शुक्रिया अदा किया. अभी भी जब हम लोग उस की चर्चा करते हैं तो उन सज्जन के प्रति उन का मन कृतज्ञता से भर जाता है.

ओम प्रकाश, दरभंगा (बिहार)

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पड़ोस में मनोहर लाल रहते हैं. वे प्राइमरी विद्यालय में शिक्षक हैं. उन की पत्नी मीना गृहिणी हैं. दोनों इस बात से दुखी रहते हैं कि उन की कोई संतान नहीं है. दोनों ने काफी इलाज कराया परंतु सफलता नहीं मिली. एक दिन जाड़े की सुबह एक औरत अपनी एक वर्ष की बेटी के साथ भीख मांगती हुई उन के घर आई. भीख के लिए वह अपनी बेटी को आगे कर के कह रही थी कि इस ने 2 दिनों से कुछ नहीं खाया है. इस का पिता हम लोगों को छोड़ कर भाग गया है.

मनोहर लाल की पत्नी को उस औरत पर दया आ रही थी. उस के दिमाग में एक विचार आया कि काश, यह बेटी मेरे पास होती. उस ने इस संदर्भ में अपने पति से बात की. मनोहर को भी पत्नी की बातों में दम लगा. वे उस औरत से बोले, ‘‘मुझे यह लड़की गोद दे दो, मैं इसे पढ़ाऊंगा, लिखाऊंगा, अच्छे घर में शादी करूंगा. तुम्हें इस बारे में कुछ सोचना न होगा. इस लड़की को हमें देने के बाद तुम कमाखा सकती हो. जब मन में आए लड़की से मिल जाया करना.’’ वह औरत सबकुछ सुनती रही और बोली, ‘‘बाबूजी, सोच कर बताऊंगी.’’

दूसरे दिन वह औरत फिर आई और बोली, ‘‘बाबूजी, मैं लड़की देने को तैयार हूं पर आप को इस की कीमत 50 हजार रुपए देनी होगी.’’

मनोहर लाल हैरान हो कर बोले, ‘‘तुम्हें किस बात के पैसे चाहिएं, तुम्हारी लड़की को मैं अच्छी तरह रखूंगा, पढ़ाऊंगा, शादीब्याह करूंगा.’’ पर वह औरत नहीं मानी ?और लड़की ले कर चली गई.

उपमा मिश्रा, लखनऊ (उ.प्र.)

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