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देसी भुगतान कंपनियों को मिले प्राथमिकता

नोटबंदी के बाद देश में औनलाइन भुगतान के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों की जैसे लौटरी लग गई है. चीन की अली बाबा समूह की 40 प्रतिशत वाली पेटीएम कंपनी इस दौड़ में सब से अधिक मुनाफा कमाने के साथ लोकप्रिय कंपनी बनी है. कंपनी का दावा है कि उस के ग्राहकों की संख्या देश में सरकारी क्षेत्र के सब से बड़े स्टेट बैंक औफ इंडिया के ग्राहकों की संख्या से भी ज्यादा हो गई है.

नोटबंदी के बाद पेटीएम के मोबाइल ऐप के जरिए चाय की दुकानों पर चाय बिक रही है और अन्य दुकानों पर भी लोग जरूरी उपयोग की चीजें खरीद रहे हैं. पेटीएम शब्द लोगों की जबान पर चढ़ चुका है जबकि इस दौड़ में मोबिक्विक जैसी देसी कंपनियां भी हैं लेकिन वे पीछे हट गई हैं.

मोबिक्विक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विपिन प्रीत सिंह का कहना है कि विदेशी डिजिटल कंपनियों के कारोबार पर नियंत्रण के लिए उसी तरह की शर्त होनी चाहिए जैसी विदेशी बैंकों के लिए है. देश में विदेशी बैंकों के लिए निवेश पर उच्चतम सीमा निर्धारित है. मतलब, ये कंपनियां मनमाना निवेश नहीं कर सकतीं. निवेश की इसी तरह की सीमा औनलाइन भुगतान से जुड़ी विदेशी कंपनियों के लिए भी होनी चाहिए. वे आगे कहते हैं कि पेटीएम जैसी चीनी कंपनियों का पैसा सीधे चीन पहुंच रहा है. पेटीएम डिजिटल क्षेत्र में ज्यादा लोकप्रिय है और मनमाने पैसे लुटा कर मनमानी वसूली कर रही है. उस तरह से स्नैपडील की सहयोगी फ्रीचार्ज भी अच्छा निवेश कर रही है. ऐसे में मोबिक्विक जैसी भारतीय कंपनियों को मौका दिया जाना चाहिए.

उन का यह भी कहना है कि पेटीएम की तरह उन की कंपनी 100 फीसदी कैशबैक वाली व्यवस्था लागू नहीं कर सकती. निश्चितरूप से यह चिंता स्वाभाविक है लेकिन सरकार का दायित्व है कि वह अपने स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए मोबिक्विक जैसी कंपनियों को आगे बढ़ाए और उन के कारोबार को प्राथमिकता दे.

ये भी चाहते हैं बहती गंगा में हाथ धोना

असंगठित क्षेत्र के सूक्ष्म और लघु उद्योगों के अखिल भारतीय परिसंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर नोटबंदी के बाद नकदी की दिक्कत का हवाला दे कर कारोबार के पुराने रिकौर्ड पर आयकर नहीं भरने की छूट देने की मांग की है. उन का कहना है कि पहले की आय का रिकौर्ड जमा नहीं करने के लिए उन्हें तंग नहीं किया जाना चाहिए.

सरकार का कहना है कि कारोबार का औनलाइन रिकौर्ड रखने पर गड़बडि़यों पर लगाम लगेगी और लघु तथा सूक्ष्म व्यवसायियों को फायदा होगा. इस क्षेत्र की देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि निर्यात में 40 प्रतिशत और यह क्षेत्र करीब 8 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है. यह असंगठित क्षेत्र है और इसे आयकर के विवरण रखने की योजना के तहत छूट दी जानी चाहिए.

सरकार ने 2016 के बजट में इस क्षेत्र के लिए 2 करोड़ रुपए तक के कारोबार में पूरी तरह से राहत की व्यवस्था की है. उस से पहले इन के लिए 1 करोड़ रुपए तक

के सालाना कारोबार में कर से छूट की व्यवस्था थी. कारोबारियों का संगठन इसी व्यवस्था के तहत पुराने रिकौर्ड रखने में छूट देने की मांग कर रहा है.

सरकार कहती है कि पारदर्शिता के लिए रिकौर्ड का डिजिटल होना आवश्यक है. इस क्षेत्र के कारोबारियों सहित सब के लिए रिकौर्ड को औनलाइन करना अनिवार्य है. इस से पारदर्शिता आएगी और कर चोरी रुकेगी.

वहीं, कई लघु और सूक्ष्म उद्योगों में असंगठित क्षेत्र का कारोबार होने की शह पर बड़े स्तर पर कर्मचारियों का शोषण होता है. तब तो इस क्षेत्र के कारोबारियों का संगठन सक्रिय नहीं होता और न ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखता है. एक मजदूर दिनरात काम करता है और उस के पास परिवार को देखने का समय नहीं है, उस के शोषण के वक्त भी तो अपने अधिकारों का खयाल रहना चाहिए. 

लगातार सात दिन गिरावट पर रहा बाजार

शेयर बाजार में बिकवाली के जबरदस्त दबाव के चलते बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक क्रिसमस से पहले लगातार 7 दिनों तक गिरावट पर बंद हुआ और वह 20 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया. नैशनल स्टौक एक्सचेंज में भी ऐसा ही हाल रहा और वहां सूचकांक 8 हजार अंक के नीचे चला गया. इस से पूर्व डेढ़ साल पहले जून 2015 में बाजार लगातार 7 दिनों तक गिरावट पर रहा था. दिसंबर 15 से शुरू हुआ गिरावट का यह सिलसिला क्रिसमस तक लगातार बना रहा.

बिकवाली के दबाव में बाजार के इस हालत में पहुंचने के लिए अमेरिका के फैडरल रिजर्व के ब्याज दरों को बढ़ाने और शंघाई शेयर बाजार सूचकांक के 2 साल के निचले स्तर पर पहुंचने के अलावा कुछ घरेलू कारण बताए गए हैं. घरेलू कारणों में सब से महत्त्वपूर्ण नोटबंदी के बाद लगातार बदलते नियम भी हैं. इस से सरकार के निर्णयों पर सवाल उठने लगे जिस का सीधा असर थोक बाजार पर देखने को मिला.

क्रिसमस से ठीक पहले बाजार में मामूली रौनक लौटी लेकिन गिरावट के माहौल में बाजार के मूड पर दूसरा कोई असर नहीं हुआ. इधर, बाजार पर नजर रखने वाली जापानी कंपनी नोमूरा की मानें तो अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने और 2018 तक इस में जबरदस्त उछाल के साथ 7.7 प्रतिशत रहने संबंधी आंकड़े ने बाजार में जान फूंकी और सूचकांक लगातार 7 दिन की गिरावट से उबर कर 23 दिसंबर को 8वें दिन तेजी पर बंद हुआ.

सोनाक्षी सिन्हा के इस प्राइवेट वीडियो ने उड़ाए सबके होश

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो अभिनेता वरुण धवन के साथ नजर आ रही हैं. आप भी वीडियो में सोनाक्षी वरुण और सलमान खान की मस्ती को देख सकते हैं. इसको देखने के बाद लोगों की गलत धारणा टूट जाएगी कि सोनाक्षी एक गंभीर स्वाभाव वाली लड़की हैं.

सोनाक्षी सिन्हा ने एक ट्वीट भी किया है कि मुझे और वरुण को अब तक किसी ने भी फिल्म में नहीं लिया है, इसलिए हमने खुद से ही वीडियो बना लिया. आपको बता दें सोनाक्षी का यह वीडियो लोग खूब पसंद कर रहे हैं और यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

वहीं, बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘नूर’ की शूटिंग खत्म कर ली है. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए साझा की है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म यू‌निट के मेंबर्स के साथ अपनी फोटो भी शेयर की है.

फिल्म में एक पत्रकार का रोल निभा रहीं सोनाक्षी ने लिखा है, ‘फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई है. ‘नूर’ के लिए सुनील सिप्पी और विक्रम मल्होत्रा का शुक्रिया. ‘नूर’ सिर्फ फिल्म नहीं, अनुभव है, जो हमेशा याद रहेगा.’

सुनील सिप्पी के डायरेक्‍शन में बन रही नूर में सोनाक्षी के साथ पूरब कोहली भी नजर आएंगे. 21 अप्रैल 2017 को रिलीज होने जा रही यह फिल्म सबा इम्तियाज के नॉवेल ‘कराची, मैं तुमसे प्यार करता हूं’ को लेकर है.

फिलहाल आप देखिए ये प्राइवेट वीडियो

जब धोनी ने संवारा था इन खिलाड़ियों का करियर

महेंद्र सिंह धोनी सबसे लोकप्रि‍य और सबसे ज्यादा चर्चित भारतीय क्रिकेट कप्तानों में से एक हैं. धोनी ने बतौर कप्तान टीम इंडिया को शिखर तक पहुंचाया. सिर्फ इतना ही नहीं धोनी ने अपनी क्नतानी से कई नई प्रतिभाओं का भी खोज किया.

कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपने सफलताता श्रेय धोनी को दिया है. विराट कोहली और क्रिकेटर रोहित शर्मा ने अपने सफल करियर का श्रेय पूर्व कप्तान एमएस धोनी को दिया है. रोहित का कहना है कि धोनी के ही एक फैसले ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी है. वो आज टीम इंडिया में जिस पोजिशन पर हैं, धोनी की वजह से हैं.

विराट ने कहा कि वो धोनी के कारण ही टीम में खुद को साबित कर सके हैं. इतना ही नहीं धोनी और सहवाग ने टीम से बाहर हो रहे विराट कोहली को बचाया था.

जानिए धोनी ने बनाया किन क्रिकेटरों का करियर.

विराट कोहली, कप्तान

वनडे और टी20 का भी कप्तान बनने के बाद विराट कोहली ने अपने क्रिकेट करियर का श्रेय एमएस धोनी को दिया. विराट ने कहा था कि धोनी ने उन्हें कई बार टीम से बाहर होने से बचाया. कई मौके दिए, जिससे उनका खेल बेहतर हो सके.

2011-12 में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में फ्लॉप होने के बाद विराट पर सवाल उठने लगे थे. तब धोनी ने उन पर भरोसा करते हुए उन्हें टीम में बरकरार रखा था.

इस बारे में वीरेंद्र सहवाग ने भी खुलासा करते हुए कहा था, ‘2012 में पर्थ टेस्ट में सिलेक्टर्स रोहित को टीम में चाहते थे. तब धोनी कप्तान और मैं उप-कप्तान था. हमने विराट को टीम में लेने का फैसला लिया और उसके बाद जो हुआ वो सभी जानते हैं.’

आर. अश्विन, ऑलराउंडर

टीम इंडिया को इतना बेहतरीन स्पिनर देने का श्रेय एमएस धोनी को ही जाता है, जिन्होंने अश्विन को लगातार मौके दिए. तमिलनाडु के लिए कई रणजी सीजन खेलने के बावजूद अश्विन 2010 में आईपीएल की परफॉर्मेंस के बाद लाइमलाइट में आए थे.

ये धोनी ही थे जिन्होंने आईपाएल में उन्हें लगाकार मौके दिए. इसके बाद ही अश्विन ने पहले वनडे और फिर टेस्ट डेब्यू किया था. आज अश्विन स्पिनर से ऑलराउंडर बन चुके हैं और इंडिया के मैच विनर खिलाड़ी हैं.

रवींद्र जडेजा, ऑलराउंडर

अश्विन की तरह ही जडेजा को बेहतर बनाने का काम भी धोनी ने ही किया. 2013 से जडेजा चर्चा में आए. धोनी ने उन्हें लगातार मौके दिए और उस साल वो वनडे में भारत के लीडिंग विकेटटेकर बॉलर रहे.

जबकि, 2009 से वनडे खेल रहे जडेजा का इससे पहले एवरेज 38 का था. आज उनका एवरेज 34 का है. 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गावसकर-बॉर्डर ट्रॉफी में जडेजा टीम के न्यू मेंबर थे. उन्होंने सीरीज में 24 विकेट लिए थे.

सुरेश रैना, ऑलराउंडर

सुरेश रैना और एमएस धोनी के बीच स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग है. दोनों टीम इंडिया के अलावा आईपाएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स से भी 8 साल तक साथ खेले. धोनी ने रैना को नंबर 3 पर बैटिंग करने के कई मौके दिए. हालांकि, रैना खुद को यहां साबित नहीं कर सके.

धोनी की गैरमौजूदगी में शुरुआत में रैना ने कई सीरीज में कप्तानी भी की. यहां तक की धोनी ने टेस्ट से रिटायरमेंट के बाद अपनी टेस्ट जर्सी भी रैना को ही दी थी.

रोहित शर्मा, बैट्समैन

रोहित शर्मा का कहना है कि एमएस धोनी के एक डिसीजन ने उनका करियर ही बदल दिया. टीम इंडिया के ओपनर रोहित के अनुसार, वो धोनी ही थे जिन्होंने उन्हें ओपनिंग करने के लिए कहा. गौरतलब है कि रोहित ने 2007 में वनडे डेब्यू किया था और शुरुआत में वो नंबर 6 और 7 पर बैटिंग करने आते थे.

2013 से उन्होंने ओपनिंग करना शुरू किया और इसी साल नवंबर में वनडे में डबल सेन्चुरी लगाने का कारनामा किया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रोहित ने 209 रन बनाए थे. अब वो टीम इंडिया के बेहतरीन ओपनर हैं.

मोहम्मद शमी, बॉलर

2016 में भारत में हुए टी20 वर्ल्ड की टीम इंडिया में मोहम्मद शमी के सिलेक्शन पर सवाल उठे थे क्योंकि शमी चोटिल थे और 2015 वनडे वर्ल्ड कप के बाद से कोई मैच नहीं खेले थे. लेकिन ये धोनी का भरोसा था कि शमी का टीम में होना बॉलिंग को मजबूती देगा.

शमी कह चुके हैं कि धोनी से उनका पिता-बेटे जैसा रिलेशनशिप है. पहली बार टीम में आने पर धोनी ने उन्हें माहौल में ढलने और तालमेल बैठाने में सबसे ज्यादा हेल्प की थी.

शहतूत एक, फायदे अनेक

शहतूत एक स्वाद से भरा व पौष्टिक फल है. शहतूत की मुख्य 3 किस्में हैं, सफेद शहतूत, लाल शहतूत और काला शहतूत. शहतूत का फल जितना रसीला और मीठा होता है, उतनी ही ज्यादा मात्रा में इस में एंटीआक्सीडेंट पाया जाता है. गरमी के मौसम में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है और इस के सेवन से पानी की कमी को दूर किया जा सकता है. यह फल खूबसूरत ही नहीं होता, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है. यह पोषक तत्त्वों की कमी को पूरा करता है. पौष्टिकता की नजर से शहतूत में विटामिन सी, अम्ल, एंटीआक्सीडेंट व खनिज काफी मात्रा में पाए जाते हैं. पोटेशियम और मैंगनीज जैसे खनिजों से युक्त शहतूत में आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस भी पाए जाते हैं.

औषधीय गुण

चूंकि शहतूत का फल एंटीआक्सीडेंट का अच्छा जरीया है, इसलिए यह हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. गरमी में जामुनी शहतूत अपने स्वाद के कारण सभी का मन मोह लेता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस का सेवन गरमी के प्रकोप को कम करता है. शहतूत का पका फल कैंसर के खतरे को कम करता है. इस के अलावा यह गठिया, दिमागी विकार, गुर्दे के रोगों व मलेरिया आदि के इलाज में भी कारगर होता है. यह फल कई दूसरे रोगों जैसे कब्ज, अजीर्ण, सिर का चक्कर, नींद न आना, खून की कमी व बुखार जैसी बीमारियों के इलाज में भी उपयोगी होता है.

शहतूत एंटी ऐज यानी बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम करता है, यह बालों में भूरापन लाता है, क्योंकि इस में ज्यादा एंटीआक्सीडेंट पाया जाता है, जो बालों के लिए अच्छा होता है. यह नकसीर व गरमी के प्रकोप को कम करता है. शहतूत का शरबत बुखार में दिया जाता है.

शहतूत का शरबत खांसी व गले की खराश मिटाता है. यह पाचन शक्ति को बढ़ाने के साथ खून  को साफ करता है. पुराने समय से ही चीन में इस फल का इस्तेमाल कई किस्म की दवाओं को बनाने में किया जाता रहा है.

शहतूत एक सुंदर पत्तेदार पौधा है, जो कि 9-12 मीटर ऊंचा और ज्यादा टहनियों वाला होता है. इस के पत्ते करीब 5-10 सेंटीमीटर लंबे व 3-5 सेंटीमीटर चौड़े होते हैं. फूल हरे रंग का होता है. फल की ऊपरी परत नरम व हलके जामुनी या हरे रंग की होती है, जिस के अंदर सफेद रंग के बीज होते हैं. फल खूबसूरत होता है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इन्हें इस्तेमाल में ला कर 50-60 फीसदी तक ताजा शहतूत जूस निकाला जाता है.

हिमाचल प्रदेश में इस फल में फरवरी से मार्च महीने तक फूल आते हैं और फल अप्रैल से जून महीनों में पक कर तैयार होते हैं. एक अच्छे पौधे से करीब 10-15 किलोग्राम फलों की पैदावार होती है. यह पैदावार कुदरती वातावरण व पेड़ की उम्र पर भी निर्भर करती है.

शहतूत के पेड़ से टहनियां काट कर उस की 6-8 इंच लंबी कटिंग को मिट्टी में लगाया जाता है. इस के 6 महीने के बाद ही 3-4 फुट तक का पेड़ तैयार हो जाता है. 1 एकड़ में शहतूत के करीब 5000 पेड़ लगाए जा सकते हैं, जिन से करीब 8000 किलोग्राम शहतूत के फल प्राप्त किए जा सकते हैं. शहतूत की लकड़ी से बैट बनता है. इस के साथ ही हाकी स्टिक, टेबल टेनिस रैकेट वगैरह भी शहतूत की लकड़ी से ही बनाए जाते हैं.

आज की जरूरत

दक्षिण भारत के अलावा उत्तर भारत में भी शहतूत का उत्पादन होता है. वैसे तो हरे व काले शहतूत के खूबसूरत और मीठे फल खाने में खासे मजेदार होते हैं, मगर शहतूत की खेती का खास मकसद रेशमकीटपालन से जुड़ा होता है, इसलिए इस की खेती करने से दोहरा फायदा होता है. रेशमकीटपालन के व्यवसाय में 50 फीसदी खर्च पत्तियों पर ही हो जाता है, यह कारोबार पत्तियों पर ही निर्भर करता है, पत्तियों पर रेशमकीट का जीवनचक्र चलता है, इसी जीवनचक्र में ये कीट रेशम के कोए बनाते हैं. रेशम के कोए 300-400 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से आसानी से बेचे जा सकते हैं. यदि किसान शहतूत की खेती कर के खुद कीटपालन करें तो दूसरी फसलों से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. शहतूत के पेड़ के हर भाग जैसे फल, हरे पत्ते व लकड़ी का अपना महत्त्व है. ये सभी भाग चिकित्सीय गुणों से भरपूर होते हैं. इस के फल सालभर में 5-8 हफ्ते तक ही मिलते हैं. सामान्य व नमी की परिस्थितियों में यह फल 1-2 दिनों व कोल्ड स्टोरेज में 2-4 दिनों में खराब हो जाता है. शहतूत के रस को 3 महीने के लिए कोल्ड स्टोरेज में रखा जा सकता है, जबकि बोतल बंद पेय कमरे के तापमान में 12 महीने के लिए रख सकते हैं. इस के तमाम उत्पाद जैसे ड्रिंक, स्क्वैश, सिरप, जैली, जैम, फू्रट सौस, फ्रूट पाउडर, फ्रूट वाइन वगैरह बनाना समय की मांग है, ताकि किसानों को इस से अतिरिक्त आमदनी मिल सके.

– डा. नारायण सिंह ठाकुर व हामिद

शादी के लिये 6 हत्यायें

कुप्रथायें अपराधी भी बनाती हैं. लखनऊ पुलिस ने एक ऐसे लूटेरे गैंग का पर्दाफाश किया है जिसके सदस्य शादी के लिये पहले 6 हत्यायें करते हैं. पंजाब के इस गैंग को इस कारण ही ‘छैमार गैंग‘ के नाम से जाना जाता है. इस गैंग में शामिल सदस्य अपनी शादी से पहले 6 हत्याएं जरूर करते हैं. पंजाब का यह गैंग लूट के दौरान विरोध करने पर हत्या करता है. यह गैंग केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी डकैती करता है.

लखनऊ पुलिस ने पंजाब से आये इस गिरोह के 4 सदस्यों को एसटीएफ के सहयोग से मडियांव थाना क्षेत्र में पकड़ा. इनके पास से 2 तंमचे, चाकू नकदी और जेवर मिले. 3 साल पहले इस गैंग ने जौनपुर के शाहगंज इलाके में डाका डाला था. जौनपुर पुलिस ने इनके 2 सदस्यों पर 2-2 हजार रूपये का इनाम भी घोषित कर रखा था.

लखनऊ के एएसपी ट्रांस गोमती दुर्गेश कुमार ने बताया कि रात को पुलिस को यह सूचना मिली की पंजाब के छैमार गैंग के कुछ सदस्य डकैत घैला पुल के पास मौजूद हैं. एसटीएफ के एसआई विनय कुमार और इंसपेक्टर मडियांव नागेश मिश्रा ने फोर्स के साथ इनकी घेराबंदी की. पुलिस को देख इन डकैतो ने फायरिंग कर दी. जवाबी फायरिंग में यह लोग भागने लगे. पुलिस ने 4 बदमाशों को पकड़ लिया. इनकी पहचान कदीम उर्फ पहलवान, अली उर्फ हनीफ, मुन्ना उर्फ बग्गा और सलमान उर्फ अजीम के रूप में हुई. इनके पास से जौनुपर में हुई लूट का सामान भी बरामद किया गया.

असल में यह लोग छैमार गिरोह के सदस्य थे. छैमार गिरोह पंजाब के बदमाशों के द्वारा तैयार किया गया है. यह लोग लोकल अपराधियों को अपने साथ रेकी के लिये रखते है. जो उस घर की तलाश करते है जहां डाका डालनी होती थी. इसके बाद का काम छैमार गिरोह का होता था. लोकल अपराधी कत्ल करने में पीछे हट जाता थे. छैमार गिरोह के क्रूर सदस्य कत्ल का अंजाम देते थे. यह अपना ठिकाना बदलते रहते थे जिससे इनकी शिनाख्त नहीं हो पाती थी. 6 कत्ल करने के बाद यह डकैत शादी कर गृहस्थी बसा लेते थे. लूट के पैसे से वह अपना काम चलाते थे.

असल में आज भी बहुत सारे लोग हत्या जैसे अपराध को बाहुबल से जोड़ कर देखते हैं. जिस वजह से ऐसी प्रथायें भी चलती है. अपराधी खुद का दामन बचाने के लिये ऐसी प्रथाओं का हवाला देते हैं. यह लोग अपने नाम और गैंग का नाम बदल कर अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं.

अपनों पर दांव से तिलमिलाये भाजपाई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा सांसदो से कहा कि वे अपने नाते-रिश्तेदारों को टिकट दिलाने की पैरवी न करें. प्रधानमंत्री की यह बात बताती है कि भाजपा सांसदों के बेटे, बेटियों, पत्नी, भाई और भतीजों को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलेंगे. प्रधानमंत्री की इस बात में कितना दम है यह तो भाजपा के प्रत्याशियों की लिस्ट देखने के बाद ही पता चलेगा. प्रधानमंत्री की इस बात के बाद भाजपा के लिये मुश्किल भरा समय आ गया है.

भाजपा के दर्जन भर नेता ही नहीं दल बदल कर आये नेता भी अपने करीबी लोगों को टिकट दिलाने के भरोसे के बाद ही पार्टी में आये थे. अब ये लोग बेचैन हैं कि उनका क्या होगा?

भाजपा के लिये मुश्किल है कि वह अपने प्रधानमंत्री के बयान की लाज रखे या उसे चुनावी जुमला समझ कर भुला दे. अगर भाजपा ने अपने प्रधानमंत्री के बयान की लाज रखी तो बहुत सारे नेता नाराज होकर पार्टी के साथ भीतर घात कर सकते है. अगर प्रधानमंत्री के बयान के बाद भी परिवार के लोगों को टिकट दिया तो उनका अपमान होगा. भाजपा को इस बात का इल्म है. भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश माथुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य, महामंत्री संगठन सुनील बंसल को सांसदों के साथ तालमेल बैठाने को कहा गया है.

असल में भाजपा के कई सांसद अपने करीबी लोगों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे हैं. इन सांसदों में कुछ अपनी जाति के नाम पर तो कुछ अपने रसूख के नाम पर हक मांग रहे हैं. भाजपा में पहले भी ऐसा होता आया है. पार्टी में कई नेता अपने परिवार के लोगों को टिकट दिलाते रहे हैं. ऐसे नेताओं की लिस्ट लंबी है. भाजपा भले ही दूसरी पार्टियों में परिवारवाद का विरोध करती रही हो पर अपने यहां भी वह इसी राह पर चलती रही है.

विधानसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा सांसदों से अपने करीबियों को टिकट दिलाने की सिफारिश करने से मना कर दिया तो सभी असंतोष में हैं. भाजपा के कई सांसद अपने करीबियों के लिये टिकट चाह रहे थे. इनके लिये असमंजस के हालात बन गये हैं. अब भाजपा के लिये यह मुद्दा साख से जुड़ गया है. एक तरफ मोदी की आदेश है तो दूसरी ओर सांसद की इच्छा है. इसके बीच से रास्ता निकालना सरल नहीं है.

राजनीतिक समीक्षक और पत्रकार नागेन्द्र बहादुर सिंह चैहान कहते हैं ‘परिवारवाद हर दल में कायम है. भाजपा हमेशा से खुद को इससे अलग मानती रही है. इसके बाद भी पार्टी में धीरे-धीरे परिवारवाद बढ़ता जा रहा है. प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को मधुमक्खी के छत्ते सा छेड़ कर असंतोष भड़का दिया है. इसके साथ ही साथ बाहरी नेताओं के आने से भाजपा के लोगों में असंतोष है. टिकट वितरण के साथ यह असंतोष सामने आयेगा. इसको संभालना भाजपा के लिये सरल नहीं होगा. अगर यह लोग अभी कुछ न भी कहे तो चुनाव में भीतरघात तो कर ही सकते है. यह चुनौती भाजपा के लिये सरल नहीं है.’

‘वायसराय हाउस’ का बर्लिन में होगा प्रीमियर

हुमा कुरैशी की पहली अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘वायसराय हाउस’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. यह फिल्म बर्लिनेल 2017 में प्रीमियर के लिए तैयार है.

‘बेंड इट लाइक बैकहम’ फेम गुरिंदर चड्डा व्दारा निर्देशित यह फिल्म एक ऐतिहासिक कहानी है, जिसमें एक प्रेम कहानी को दर्शाया गया है. फिल्म वायसराय हाउस से हॉलीवुड में हुमा के करियर की शुरूआत हुई है.

भारत के आखरी वायसराय के मुस्लिम दुभाषिया आलिया की भुमिका हुमा ने इस फिल्म में निभायी है. इस फिल्म में वायसराय की भुमिका में ह्युग बोनाविले और उनकी पत्नी के रूप में गिलीयन एंडरसन नजर आयेंगीं. वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और उनके समुदाय के बीच के मतभेद और संघर्ष के दौरान खिल रहीं हुमा कुरैशी और ‘100 फुट जर्नी’ फेम अभिनेता मनिष दयाल की प्रेम कहानी नजर आयेगी.

इस ऐतिहासिक फिल्म के ट्रेलर को देखने के बाद दर्शकों की फिल्म को लेकर दिलचस्पी ओर बढ गयी है. अंतरराष्ट्रीय समारोह में दिखायी जानेवाली हुमा कुरैशी की यह तिसरी फिल्म होगी. 2012 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में उनकी डेब्यू फिल्म गैंग्स ऑफ वसेपुर दिखायीं जा चुकी है. 2014 के बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में डेढ इश्किया दिखायी गयी थी.

बर्लिनेल 2017 में अधिकारिक तौर पर वायसराय हाउस फिल्म का चयन किया गया है. और यहां फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर हो रहा है.

हुमा की अगली फिल्म जॉली एल एल बी 2 के प्रमोशन के बाद हुमा अपनी निर्देशिका गुरिंदर और बाकी टिम को बर्लिन में इस फेस्टिवल में शामिल होने के लिए जायेंगीं.

सूत्रों के अनुसार, “हुमा हमेशा से ही अपने व्यावसायिक सिनेमा में बेहतरीन फिल्में करने में कामयाब रहीं हैं. जॉली एलएलबी 2 के बाद अब वह बर्लिन जाकर अपनी फिल्म वायसराय हाउस प्रमोट करेंगीं. लगता हैं, हुमा के लिए यह साल काफी रोमांचक होने वाला है. क्योंकि, जॉली एलएलबी 2 और वायसराय हाउस जैसी उनकी लोकप्रिय और प्रत्याशित फिल्में रिलीज हो रही है.”

होमलोन लेना है आसान

आवास संबंधी ऋणों को होमलोन, हाउसिंग लोन, हाउसिंग फाइनेंस जैसे नामों से जाना जाता है. कुछ बैंक अपने होमलोन प्रोडक्ट्स के कुछ खास नाम रख देते हैं. आप अपनी आवश्यकता के अनुरूप कोई योजना चुन सकते हैं. प्लॉट खरीदने, घर का निर्माण करने, फ्लैट खरीदने, घर का विस्तार या नवीनीकरण करने जैसी सभी जरूरतों के लिए हर बैंक की अपनीअपनी स्कीमें हैं. ऋण देते समय वित्तीय संस्थान मुख्यत 2 बातों पर ध्यान देते हैं. होमलोन की स्थिति में ऋणदाता के लिए यह देखना आवश्यक है कि लोन लेने वाला उसे चुकाने योग्य स्थिति में भी है या नहीं. इस के अलावा यह भी देखा जाता है कि उस संपत्ति की कीमत सही दर्शाई गई है एवं ऋण अदायगी में किसी तरह की चूक होने की दृष्टि में उस संपत्ति से ऋण की भरपाई संभव हो सकेगी.

ऋण की राशि तय करते समय संपत्ति की कीमत में मकान का रजिस्ट्रेशन, स्टैम्प ड्यूटी आदि व्यय भी जोड़े जाते हैं. बैंक या वित्तीय संस्थान इस राशि का 75 से 85% तक ऋण दे सकते हैं. शेष 15 से 25% राशि की व्यवस्था ऋण लेने वाले व्यक्ति को निजी साधनों से करनी होती है. यदि पहले केवल प्लाट खरीदना हो तो ऋण की मात्रा का 30% तक भुगतान किया जाता है. शेष राशि निर्माण के विभिन्न स्तरों पर दी जाती है. होम लोन लेते समय आप को यह भी देखना है कि आप कितनी अवधि में ऋण चुका सकते हैं. उतनी अवधि तक आप को प्रतिमाह एक निश्चित राशि किस्त के रूप में अदा करनी होगी. यह अवधि 5 वर्ष से 20 वर्ष तक हो सकती है.

होमलोन लेने की प्रक्रिया आज कोई जटिल नहीं रही. क्योंकि इस के लिए की जाने वाली औपचारिकताओं की पूरी जानकारी अब आवेदन से पूर्व मिल जाती है. हालांकि ऋण देने वाले संस्थानों की शर्तों, नियमों तथा ब्याज दरों में अंतर जरूर होता है. इन की तुलना कर के ही आप यह तय कर सकते हैं कि आप को ऋण कहां से लेना है. आप उन दस्तावेजों की सूची भी प्राप्त कर सकते हैं, जो आप को ऋण का आवेदन करते समय एवं ऋण प्राप्त करते समय जमा कराने होंगे. इन की जांच समय पर कर के बैंक के लिए ऋण स्वीकृत करना सरल हो जाता है.

ऋण की शर्तों में ब्याज के अतिरिक्त कुछ शुल्क भी शामिल होते हैं. जैसे प्रक्रिया शुल्क, प्रशासनिक व्यय, कानूनी शुल्क, मूल्यांकन शुल्क आदि. इन के विषय में भी पहले ही जान लेना चाहिए. ताकि बाद में ऋणदाता मनमाने शुल्क न जोड़ सके. बैंक आदि ऋण से ली गई संपत्ति को सुरक्षा की दृष्टि से बंधक रखते हैं. साथ ही गारंटर की आवश्यकता भी होती है. इस संदर्भ में क्याक्या नियम हैं. यह भी जान लेना चाहिए. कई बार कोलेट्रल सिक्योरिटी साथ होने पर गारंटर की जरूरत नहीं होती. ध्यान रहे, होमलोन ‘पावर औफ एटार्नी’ वाली संपत्ति पर नहीं मिलता है.

यदि कोई निजी संस्थान ऐसा करता भी है तो वह ऊंची ब्याज दर वसूल करता है. होम लोन लेते समय उस की ब्याजदर पर भी खास ध्यान देना होता है. ब्याजदर विभिन्न अवधि के लिए भिन्न हो सकती है.

सावधानी जरूरी

आजकल अधिकतर बैंक फिक्स्ड रेट पर ही लोन देते हैं. इस में पूरी अवधि तक उसी दर पर ब्याज लगता है. फ्लोटिंग रेट के मामले में ब्याजदर रिजर्व बैंक द्वारा पीएलआर की घोषणा पर निर्भर करती है तथा इस के घटनेबढ़ने के साथ इस में परिवर्तन आता है. ऋण लेते समय यह भी जानना आवश्यक है कि ब्याज खाते के घटते शेष पर लगाया गया है या हमेशा पूरी राशि पर ब्याज लगता रहेगा.

हर वर्ष या प्रति तिमाही या फिर हर माह घटते शेष पर ब्याज लगना ग्राहक के लिए लाभप्रद होता है, जबकि पूरी ऋण राशि पर ब्याज देना बहुत महंगा पड़ता है. सभी राष्ट्रीयकृत बैंक प्राय: घटते शेष पर ब्याज लगाते हैं. कुछ निजी बैंक पूरी ऋण राशि पर ब्याज लगा कर मासिक किस्त तय करते हैं. कुछ बैंक ऋण देते समय ऋण लेने वाले व्यक्ति का बीमा भी कराते हैं.

घर बनाने के बाद होमलोन चुकाने का क्रम शुरू होता है. ऐसे में किसी निर्माणाधीन घर या फ्लैट के लिए ऋण लिया हो तो कुछ बैंक ऋण अदायगी अवकाश भी प्रदान करते हैं. ऐसे में ऋण की अदायगी गृह निर्माण के बाद या 12 से 18 मास बाद शुरू होती है. यह हमेशा ध्यान रखें कि आप के होमलोन की किस्त समय पर दी जा रही है. अन्यथा बैंक पेनल्टी या पेनल ब्याज चार्ज करते हैं. कई बार किसी माध्यम से आप को कोई बड़ी राशि प्राप्त हो और उस की तुरंत कोई आवश्यकता न हो तो उसे होमलोन में जमा कराना अच्छा रहता है. क्योंकि उस से आप को भविष्य में ब्याज कम देना होगा.

कुछ बैंक होमलोन के पूर्व भुगतान और समाप्ति पर 1 से 2% तक का शुल्क भी लेते हैं. लेकिन ज्यादातर बैंक उस स्थिति में यह शुल्क लेते हैं जब ऋण किसी नए ऋण की राशि से चुकाया जाता है. होमलोन का एक बड़ा लाभ आयकर में छूट के रूप में होता है. आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार गृह ऋण पर वित्तीय वर्ष में देय ब्याज की राशि कर योग्य आय में से घटाई जा सकती है. इस विषय में वर्तमान नियम देख लेने चाहिए. इसी तरह धारा 88 के अनुसार एक निश्चित सीमा तक मूलधन की वापसी को निवेश के समान मान लिया जाता है.

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