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मेरी बीवी पेट से नहीं हो पा रही है. डाक्टर कहती है सब ठीक है. इस बारे में आप मुझे खुल कर बताएं.

सवाल

मैं 35 साल का हूं और मेरी बीवी 33 साल की है. मेरी एक बेटी भी है, पर बीवी और बच्चे चाहती है. दिक्कत यह है कि अब वह पेट से नहीं हो पा रही है. मैं ने उसे महिला डाक्टर को भी दिखाया, पर सबकुछ ठीक है. फिर वह पेट से क्यों नहीं हो रही? इस बारे में आप मुझे खुल कर बताएं?

जवाब

जब बीवी में कोई कमी नहीं है, तो वह कभी न कभी जरूर दोबारा पेट से हो जाएगी. आप किसी और माहिर डाक्टर से खुद की भी जांच करा लें. आप के पास बेटी तो है ही. लिहाजा, ज्यादा परेशानी वाली बात नहीं है.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

राज कुमार राव की खुशी

बालीवुड में शुरू से ही अलग तरह के किरदार निभाकर प्रशंसा बटोरते आ रहे अभिनेता राज कुमार राव इन दिनों काफी खुश हैं. उनकी खुशी का राज यह है कि उनकी फिल्म ‘‘न्यूटन’’, जिसमें उन्होंने शीर्ष भूमिका निभायी है, को ‘‘बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2017’’ में काफी पसंद किया गया. अमित वी मसूरकर निर्देशित फिल्म ‘‘न्यूटन’’ का प्रदर्शन ‘‘बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2017’’ में ‘‘इंटरनेशनल फोरम आफ न्यू सिनेमा’’ के तहत दस फरवरी को हुआ और लोगों ने खडे़ होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस फिल्म की प्रशंसा की.

खुद राज कुमार राव कहते हैं-‘‘सच कहूं तो ‘बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2017’ में अपनी फिल्म ‘न्यूटन’ के वर्ल्ड प्रीमियर से पहले मैं दर्शकों के रिस्पांस को लेकर काफी नर्वस और इतने बड़े फिल्म समारोह का हिस्सा होने को लेकर उत्साहित था. मगर फिल्म का प्रीमियर होने के बाद बर्लिन के लोगों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हमारी फिल्म का स्वागत किया, इससे मेरा हौसला बढ़ा. मैं बड़ी विनम्रता से उनका आभारी हूं. अब मुझे अपने देश की जनता से मिलने वाले रिस्पांस का इंतजार है.’’

सना खान ने निर्देशक विशाल पंड्या को फांसा

विशाल पंड्या निर्देशित ईरोटिक फिल्म ‘‘वजह तुम हो’’ में जमकर जिस्म की नुमाइश व अति हॉट दृश्यों को अंजाम दे चुकी अदाकारा सना खान इन दिनों हवा में उड़ रही हैं. इसकी वाजिब वजहें हैं. एक तरफ उन्हे अक्षय कुमार के संग फिल्म ‘‘टायलेटःएक प्रेम कथा’’ में अभिनय करने का अवसर मिला है, तो दूसरी तरफ उन्हें निजी जीवन में जीवन साथी मिल गया है.

सूत्रों की माने तो फिल्म ‘‘वजह तुम हो’’ की शूटिंग के दौरान ही इस फिल्म के निर्देशक विशाल पंड्या के साथ सना खान का रोमांस शुरू हो गया था. सना खान के करीबी सूत्रों का दावा है कि यह दोनों इस कदर एक दूसरे के प्यार में पागल थे कि एक ही कार के अंदर दोनों एक दूसरे के सामने कपड़े तक बदल लेते थे. सना खान के अति करीबी यह भी दावा कर रहे हैं कि सना खान और विशाल पंड्या घंटों एक दूसरे के संग फोन पर बातें करते रहते हैं. इतना ही नहीं सना के खान के अति नजदीकी सूत्रों का दावा है कि विशाल पंड्या के ही कहने पर सना खान ने फिल्म ‘‘टायेलटः एक प्रेम कथा’’ में एक्सपोजर करने से साफ मना कर दिया.

मगर जब हमने सना खान से इस बारे में बात की, तो सना खान ने कहा-‘‘विशाल पंड्या मेरे अच्छे दोस्त हैं और बेहतरीन लेखक व निर्देशक हैं. मगर हमारे बीच प्यार वाला कोई मसला नहीं है. पर यह सच है कि मैं फिल्म ‘‘टायलेट एक प्रेम कथा’’ में अक्षय कुमार के संग छोटी सी भूमिका निभा रही हूं. इसमें मैंने फिर से पैर के तलवे तक अपने शरीर को ढंक कर रखा हुआ है. पूरी तरह से देसी लुक है. यह डिग्लैमरस किरदार है.’’

इस तरह फिल्माए गए कंगना और शाहिद के बीच ईरोटिक सीन

हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए कंगना रानौट ने कबूल किया कि विशाल भारद्वाज निर्देशित फिल्म ‘‘रंगून’’ में उन्होंने कुछ ऐसे सीन भी किए हैं, जिन्हे ईरोटिक कहा जा सकता है. फिल्म के ट्रेलर में भी शाहिद कपूर और कंगना रानौट के बीच बारिश के अलावा कीचड़ में चुंबन सीन नजर आते हैं. जबकि इस तरह के दृश्यों में वह खुद असहज थीं.

शाहिद कपूर की चर्चा करते हुए कंगना रानौट कहती हैं-‘‘शाहिद कपूर का मूड़ हर दिन बदलता रहता है. कभी दोस्ताना स्वभाव, तो कभी शंकास्पद स्वभाव. दूसरी बात मुझे फिल्म में इंटीमेट सीन पसंद नहीं हैं. इस तरह के सीन फिल्माना बहुत कठिन होता है. किसी के साथ आपके संबंध बहुत साधारण होते हैं, पर कुछ मिनट बाद आप उसके मुंह में अपना मुंह लगा रहे होते हैं, यह कैसे आसान हो सकता है. इतना ही नहीं शाहिद कपूर की मूंछे भी बहुत परेशान करती थीं.’’

कुल मिलाकर फिल्म ‘‘रंगून’’ के सेट पर कंगना रानौट और शाहिद कपूर के बीच संबंध बहुत अच्छे नहीं थे, मगर कंगना ने कलाकार के तौर पर इस तरह काम किया कि शाहिद के साथ उनके चुंबन व ईरोटिक सीन देखकर कोई कह नहीं सकता कि इनके बीच के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं.

गुणकारी काली गाजर का हलवा

काली गाजर के गुणों के कारण इस की खेती बढ़ती जा रही है. इस से किसानों को मुनाफा होने लगा है. तमाम गुणों वाली काली गाजर की खेती को किसान लगातार तरजीह दे रहे हैं. पीली व लाल रंग की गाजर के मुकाबले तेजी से इस का बाजार बढ़ रहा है. देश ही नहीं विदेशों में भी इस की मांग बढ़ने लगी है और किसान इसे एक्सपोर्ट करने की दिशा में बढ़ चुके हैं. पंजाब जैसे प्रदेशों में सैकड़ों किसानों ने काली गाजर की खेती को सब्जियों की फसल का खास हिस्सा बना लिया है. कैंसर व पेट की बीमारियों की दवाओं में काली गाजर के इस्तेमाल ने इस की खेती को बढ़ा दिया है.

गर्भावस्था में गाजर का रस पीते रहने से सैप्टिक रोग नहीं होता और शरीर में कैल्शियम की कमी भी नहीं रहती है. बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को नियमित रूप से गाजर के रस का इस्तेमाल करना चाहिए. इस से उन के दूध की गुणवत्ता बढ़ती है. दिल कमजोर होने पर रोजाना 2 बार गाजर का रस पीने से लाभ होता है. गाजर का रस और पालक का रस मिला कर पीने से खून में लाल कणों का इजाफा होता है.

बनाने की सामग्री

काली गाजर 1 किलोग्राम (8-10 गाजरें मध्यम आकार की), चीनी 250 ग्राम, मावा 250 ग्राम, दूध 1 कप, देशी घी 1 टेबल स्पून, किशमिश 1 टेबल स्पून, काजू 12-15 ग्राम, छोटी इलायची 5-6.

बनाने की विधि

हलवा बनाने के लिए काली गाजरों को छील कर अच्छी तरह धो लीजिए और फिर उन्हें कद्दूकस कर लीजिए. मावे को कढ़ाई में डाल कर धीमी आंच पर भून लीजिए. भुना हुआ मावा प्याले में डाल कर अलग रख लीजिए. कद्दूकस की हुई गाजर कढ़ाई में डाल कर गैस पर रखिए और उस में दूध डाल दीजिए. गाजर को नरम होने तक पकने दीजिए. इस के बाद गाजर में चीनी मिला दीजिए. थोड़ीथोड़ी देर में गाजर को पलटे से चलाते रहें. रस जलने तक गाजरों को पकाएं. पकी गाजरों में घी डाल कर भूनें. फिर उस में किशमिश, काजू और मावा मिलाएं. हलवे को चलाते हुए 2-3 मिनट तक और पकाएं. फिर गैस बंद कर दें और छोटी इलायचियों को पीस कर मिलाएं. आप का गाजर का हलवा तैयार है. गाजर के हलवे में सूखे मेवे अपनी पसंद के मुताबिक कम या ज्यादा कर सकते हैं. जो मेवे आप को पसंद हों उन्हें डाल सकते हैं और जो नहीं पसंद हों उन्हें हटा सकते हैं.

अंकुश पर अंकुश लगाना पड़ा भारी

पृथ्वी हांडा परिवार के साथ पंजाब प्रांत के जालंधर शहर के मौडल टाउन में अपनी विशाल कोठी में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुजाता के अलावा एकलौता बेटा जतिन था. कोठी से कुछ दूरी पर मेनमार्केट में उन की 2 दुकानें थीं. एक में हांडा डेयरी थी, जिस में शुद्ध देसी घी का थोक कारोबार होता था तो दूसरी में रेडीमेड गारमेंट्स का. क्वालिटी के लिए उन की दोनों ही दुकानें शहर भर में प्रसिद्ध थीं.

दोनों दुकानें घर से ज्यादा दूर नहीं थीं, इसलिए बापबेटा कोठी से दुकानों तक पैदल टहलते हुए चले जाते थे. हांडा डेयरी का काम पृथ्वी हांडा खुद देखते थे, जबकि हांडा कलेक्शन यानी गारमेंट्स की दुकान उन का बेटा जतिन संभालता था. बापबेटे के दुकानों पर चले जाने के बाद घर में सुजाता हांडा के अलावा 17 साल का नौकर हरीश ही रह जाता था. शरीर भारी होने की वजह से सुजाता को चलनेफिरने में दिक्कत होती थी, इसलिए घर के कामों में मदद के लिए उन्होंने हरीश को रखा हुआ था. 20 सितंबर, 2016 की शाम 5 बजे पृथ्वी हांडा ने जतिन की दुकान पर जा कर कहा, ‘‘बेटा, आज मंगलवार है. थोड़ी देर में तुम घर चले जाना और घर में रखा प्रसाद ले जा कर हनुमान मंदिर में चढ़ा देना.’’

‘‘ठीक है पिताजी, मैं थोड़ी देर बाद चला जाऊंगा.’’ जतिन ने कहा, इस के बाद पौने 6 बजे वह घर के लिए निकला तो करीब 15 मिनट बाद 6 बजे के करीब वह कोठी पर पहुंच गया. उस ने कोठी का मेन गेट अंदर से बंद देखा तो उसे हैरानी हुई, क्योंकि कोठी का मुख्य गेट केवल रात को ही बंद होता था.

बहरहाल, कुछ सोचनेविचारने के बजाय जतिन ने डोरबैल बजाई. कई बार डोरबैल बजाने के बावजूद अंदर से कोई आहट सुनाई नहीं दी तो उसे चिंता हुई. पड़ोसी मि. कपूर ने जतिन को लगातार बैल बजाते देखा तो पास आ कर कहा, ‘‘बेटा, यह गेट लगभग आधे घंटे से बंद है और कुछ देर पहले कोठी के अंदर से चीखने की आवाज आई थीं. अंदर क्या हो रहा है, यह पता करने के लिए मैं ने भी खूब बैल बजाई थी, पर गेट नहीं खुला था.’’

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है ’’ जतिन बुदबुदाया.

वह मि. कपूर से बातें कर ही रहा था कि तभी कोठी के अंदर खड़ी इनोवा कार के स्टार्ट होने की आवाज आई. जतिन चौंका. उसे लगा कि अंदर जरूर कुछ गड़बड़ है. समय न गंवा कर वह कोठी के 15 फुट ऊंचे मुख्यगेट पर चढ़ गया. जब वह अंदर कूदा तो 2 लड़के इनोवा कार से उतर कर कोठी के अंदर भागते दिखाई दिए.

वे लड़के इतनी तेजी से अंदर की ओर भागे थे कि वह उन्हें देख नहीं पाया. सिर्फ एक लड़के के कपड़े दिखाई दिए थे. वह नीली जींस और पीली शर्ट या टीशर्ट पहने था. लड़कों को कोठी के अंदर जाते देख जतिन उन के पीछे भागा, पर ड्राइंगरूम की ओर जाने वाली गैलरी में उसे नौकर हरीश खून से लथपथ पड़ा मिल गया तो वह उस के पास रुक गया. वह उसे झुक कर देखने लगा, तभी उसे छत पर जाने वाली सीढि़यों पर किसी की आवाज सुनाई दी.

हरीश को छोड़ कर जतिन सीढि़यों की ओर बढ़ा तो उस ने देखा कि जो लड़के कार से निकल कर अंदर आए थे, वे सीढि़यों से छत पर जा रहे थे. उन का पीछा करने के बजाय उस ने सीढि़यों का दरवाजा बंद कर के अंदर से कुंडी लगा दी और भाग कर हरीश के पास आया और उस की नब्ज टटोली तो पता चला कि उस की मौत हो चुकी है.

जतिन घबरा गया. मां को आवाज देते हुए वह ड्राइंगरूम में पहुंचा तो वहां मां को खून से लथपथ पड़ी देख कर वह उसे से चिपट कर रोने लगा. तभी उसे लगा कि मां की सांसें चल रही हैं. अब तक उस के रोने की आवाज सुन कर कई पड़ोसी आ गए थे. जतिन ने खुद को संभाला और पड़ोसियों से पिता को फोन करवाने के साथ उन्हीं की मदद से मां को नजदीक के एक अस्पताल ले गया.

वहां के डाक्टरों ने सुजाता का प्राथमिक उपचार कर के उन्हें पटेल अस्पताल ले जाने को कहा. लेकिन पटेल अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन की मौत हो गई. उस समय तक पृथ्वी हांडा भी अस्पताल पहुंच गए थे. जब उन्हें पत्नी की मौत का पता चला तो दुखी हो कर वह बेहोश हो गए.

सूचना पा कर थाना डिवीजन नंबर-6 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सतेंद्र चड्ढा भी अस्पताल पहुंच गए थे. उन्होंने जरूरी काररवाई कर सुजाता की लाश को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद उन्होंने पृथ्वी हांडा की कोठी पर आ कर नौकर हरीश की लाश को भी पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

दिनदहाड़े हुई इन हत्याओं से शहर में सनसनी तो फैल ही गई थी, खबर पा कर शहर के तमाम व्यापारी पृथ्वी हांडा की कोठी पर जमा हो गए थे. सभी में दहशत का माहौल था. एसीपी, डीसीपी, एडीसीपी (क्राइम) तथा पुलिस कमिश्नर अर्पित शुक्ला भी आ गए थे. फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, डौग स्क्वायड, क्राइम टीम अधिकारियों के साथ ही एवं फोटोग्राफर ने भी आ कर अपना काम शुरू कर दिया था.

घटनास्थल यानी कोठी की जांच में पुलिस ने हांडा की कोठी के कंपाउंड में खड़ी इनोवा कार से एक सेफ बरामद की थी, जो कोठी के अंदर से ला कर कार में रखी गई थी. इस का मतलब था सुजाता और नौकर हरीश की हत्या लूटपाट के लिए की गई थी. जाहिर है, हत्यारे सेफ को कार से अपने साथ ले जाना चाहते थे.

कोठी के अंदर जिस कमरे में सेफ रखी थी, उस में एक अलमारी भी थी, जिस का सारा सामान कमरे में बिखरा पड़ा था. अलमारी को देख कर पृथ्वी हांडा ने बताया कि अलमारी से ढाई, पौने 3 लाख रुपए नकद और करीब 10 लाख रुपए के गहने गायब हैं. इस के अलावा वे सुजाता के पहने गहने भी उतार ले गए थे.

पूछताछ में पुलिस को ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिस से लुटेरों तक पहुंचा जा सकता. लेकिन पुलिस ने इतना जरूर अंदाजा लगा लिया था कि जिस ने भी वारदात को अंजाम दिया था, उसे हांडा परिवार की दिनचर्या और कोठी के कोनेकोने की जानकारी थी.

पुलिस कमिश्नर अर्पित शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों की मीटिंग कर के थानाप्रभारी सतेंद्र चड्ढा के नेतृत्व में एसआई नरेंद्र सिंह, जसवंत कौर, एएसआई महावीर सिंह, लखविंदर सिंह, हैडकांस्टेबल जागीरी लाल, सुखविंदर सिंह, संदीप कौर तथा स्पैशल स्टाफ के एएसआई सुरजीत सिंह और सुनीत को मिला कर एक टीम बनाई और जरूरी निर्देश दे कर टीम को इस मामले की जांच सौंप दी.

घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस को एक्टिवा स्कूटर की एक चाबी और टोपी मिली, जो शायद लुटेरों से हड़बड़ी में छूट गई थी. गली में लगे सीसीटीवी कैमरों से पुलिस को कोई मदद नहीं मिल सकी. चाबी मिलने से यह अंदाजा लगाया गया कि हो सकता है कोठी के आसपास कोई एक्टिवा स्कूटर खड़ी हो.

सतेंद्र चड्ढा ने कोठी के आसपास तलाश की तो हांडा की कोठी से कुछ दूरी पर एक एक्टिवा स्कूटर लावारिस हालत में खड़ी मिल गई. उन्होंने कोठी में मिली चाबी उस में लगाई तो वह स्टार्ट हो गई. इस का मतलब वह एक्टिवा स्कूटर लुटेरों की थी. पुलिस ने रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर उस के मालिक के बारे में पता किया तो पता चला कि एक्टिवा मिट्ठापुर के रहने वाले विजय कुमार के नाम रजिस्टर्ड थी.

विजय कुमार से जब स्कूटर के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि एक्टिवा को ज्यादातर उस का 20 साल का बेटा अंकुश चलाता था. एक दिन पहले उस ने बताया था कि बाजार से उस की स्कूटर चोरी हो गई थी, जिस की उस ने रिपोर्ट लिखवा दी थी.

सतेंद्र चड्ढा ने अंकुश के बारे में पूछा तो विजय कुमार ने बताया कि वह पिछली रात से घर नहीं आया था. उन्होंने अंकुश की फोटो और मोबाइल नंबर ले लिया. पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा कर उस की फोटो की कौपी बनवा कर पुलिस वालों के अलावा मुखबिरों को भी दे दीं ताकि वे उस के बारे में पता कर सकें.

2 दिनों बाद यानी 25 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर बसअड्डे के पास से अंकुश को एक लड़के के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर पूछताछ की गई तो पता चला उस के साथ पकड़े गए लड़के का नाम सतीश था. उन दोनों ने ही अन्य 2 साथियों अजय और मलकीत के साथ मिल कर सुजाता हांडा और नौकर हरीश को हौकी और स्टिकपैन से जख्मी कर के लूटपाट को अंजाम दिया था.

इस के बाद दोनों की निशानदेही पर अजय और मलकीत को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पकड़े गए चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश कर के पूछताछ एवं सामान बरामद करने के लिए 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान अंकुश की निशानदेही पर रुपए तो अजय और मलकीत की निशानदेही पर गहने बरामद कर लिए गए.

पूछताछ में पृथ्वी हांडा की पत्नी सुजाता और नौकर हरीश की हत्या तथा लूट की जो वजह सामने आई, वह मात्र बेइज्जती का बदला लेने के लिए किया गया अपराध था.

मिट्ठापुर के रहने वाले विजय कुमार की कपड़ों की सिलाई की दुकान थी, जो खास नहीं चलती थी. फिर भी रातदिन मेहनत कर के उस ने अपने दोनों बेटों अंकुश और विशाल को पढ़ाने की पूरी कोशिश की थी कि वे पढ़लिख कर कुछ बन जाएं. लेकिन उस का यह सपना पूरा नहीं हुआ. अंकुश तो आवारा निकला ही, उस ने छोटे भाई को भी अपने सांचे में ढालने की कोशिश की.

लेकिन इस मामले में वह पूरी तरह सफल नहीं हुआ. इस की वजह यह थी कि विशाल थोड़ीबहुत बुद्धि का इस्तेमाल कर लेता था. अंकुश अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए छोटेमोटे काम कर लिया करता था. इसी क्रम में वह पृथ्वी हांडा के यहां काम करने गया था.

शुरू में उस ने मेहनत और ईमानदारी से काम किया, जिस से पृथ्वी हांडा को उस पर विश्वास हो गया. इस के बाद अंकुश ने घर की कोई जरूरत बता कर पृथ्वी हांडा से 10 हजार रुपए उधार ले लिए. उस ने 2 महीना बाद से 2 हजार रुपए महीना तनख्वाह से कटवाने को कहा था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी उस ने न तो रुपए लौटाए और न ही वेतन से रुपए काटने दिए.

हर महीने वह कोई न कोई बहाना कर के रुपए काटने से रोक देता था. इसी बीच पृथ्वी हांडा को अंकुश के बारे में पता चला कि वह जैसा दिखाई देता है, वैसा है नहीं. अंकुश की सच्चाई जान कर उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने तय कर लिया कि वह उन के रुपए दे या न दे, अब वह उसे अपने यहां काम पर नहीं रखेंगे.

वेतन वाले दिन पृथ्वी हांडा ने वेतन देते समय अंकुश से पूछा, ‘‘तुम उधार के 10 हजार रुपए लौटा रहे हो या तुम्हारे वेतन से काट लूं ’’

‘‘इस महीने रहने दीजिए, क्योंकि भाई का एडमीशन कराना है और पिताजी भी बीमार हैं.’’

पृथ्वी हांडा को पता था कि अंकुश झूठ बोल रहा है, इसलिए उन्होंने गुस्से में अंकुश की तनख्वाह उस के मुंह पर मार कर नफरत से देखते हुए कहा, ‘‘झूठा कहीं का, यहां से दफा हो जा. तू कभी नहीं सुधर सकता.’’

पृथ्वी हांडा ने अंकुश को जो भी कहा था, दुकान के सभी नौकरों के सामने कहा था, जिस से ये बातें उसे बहुत बुरी लगी थीं. उन की इन बातों से नाराज हो कर उस ने उन्हें सबक सिखाने का निश्चय कर लिया. उसी दिन से वह हांडा परिवार का ऐसा दुश्मन बन गया, जिस के बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था.

अंकुश पृथ्वी हांडा को सबक सिखाने की योजना बनाने लगा. लेकिन यह काम वह अकेला नहीं कर सकता था, इसलिए उस ने अपने सहपाठियों सतीश, मलकीत और अजय को यह कह कर अपनी योजना में शामिल कर लिया कि हांडा के घर लूट में करोड़ों रुपए मिलेंगे. सभी नादान उम्र कि युवक थे, इसलिए बिना सोचेसमझे वे अंकुश की बातों में आ गए. अंकुश ने अपने भाई विशाल को भी योजना में शामिल कर लिया. इस के बाद अंकुश ने 28 मई, 2016 को अपने इन्हीं साथियों के साथ मिल कर पृथ्वी हांडा की दुकानों में आग लगा दी. उस ने सोचा था कि आग से ताले और शटर पिघल जाएंगे तो वे अंदर जा कर लूट कर लेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

इस योजना में असफल होने के बाद 20 सितंबर को अंकुश ने साथियों के साथ पृथ्वी हांडा की कोठी पर लूट की योजना बनाई. लेकिन इस में विशाल शामिल नहीं हुआ. योजना के अनुसार, अंकुश मलकीत के साथ ठीक साढ़े 5 बजे पृथ्वी हांडा की कोठी में दाखिल हुआ.

कोठी में दाखिल होने से पहले उस ने अपनी एक्टिवा स्कूटर कोठी से थोड़ी दूरी पर खड़ी कर दी थी. सतीश को उस ने बाहर खड़ा कर दिया था ताकि कोई खतरा दिखाई दे तो वह उसे आगाह कर सके. अंकुश अपने साथ एक हौकी ले कर आया था. कोठी के अंदर जाने से पहले उन्होंने मुख्य गेट को अंदर से बंद कर के ताला लगा दिया था.

कोठी में दाखिल होते ही अंकुश का सामना नौकर हरीश से हुआ तो बिना कोई बातचीत किए उस ने हरीश के सिर पर हौकी से अंधाधुंध वार कर किए. हरीश का सिर फट गया, जिस से खून बहने लगा. वह चीख कर फर्श पर गिर पड़ा था. उसी बीच मलकीत रसोई में से स्टिकपैन उठा लाया और उस ने भी उस के सिर पर कई वार किए. इस मारपीट से हरीश बेहोश हो गया.

हरीश चीखा तो उस की चीख सुन कर ड्राइंगरूम में बैठी सुजाता उठ कर उसे देखने आईं. उसी वक्त अंकुश और मलकीत उन पर भी टूट पड़े. वह भी खून से लथपथ हो कर फर्श पर गिर पड़ीं.

इस के बाद अंकुश ने फटाफट सुजाता के शरीर के गहने उतारे और अंदर अलमारी में रखा कैश और आभूषण अपने कब्जे में ले लिए. वहां रखी सेफ को उठा कर वे बाहर ले आए और इनोवा कार में रख दिया. कार की चाबी कहां रखी रहती है, यह अंकुश को पता था. सेफ में काफी दौलत रखी है, यह भी उसे पता था.

उन्होंने सेफ रख कर जैसे ही कार स्टार्ट की, उसी समय जतिन कोठी के अंदर कूदा. उसे देख कर अंकुश और उस के साथी कार छोड़ कर कोठी के अंदर गए और सीढि़यों से छत पर जा कर पीछे से कूद कर भाग गए. भागने में अंकुश की एक्टिवा स्कूटर की चाबी गिर गई, जिस से वे पकड़े गए.

रिमांड अवधि समाप्त होने पर इंसपेक्टर सतेंद्र चड्ढा ने अंकुश, मलकीत, सतीश और अजय को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जिला जेल भेज दिया गया.     

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

वैलेंटाइन डे पर परिधान हों खास

वैलेंटाइन डे अपने प्रेमी के प्रति समर्पण और प्यार का प्रतीक है. ऐसे में दिल की बात सामने आती है और दिल का रंग लाल होता है इसलिए इस अवसर पर युवतियां लाल व औरेंज कलर के परिधान में दिखती हैं. डिजाइनर श्रुति संचेती कहती हैं कि आप इस दिन कोई भी कलर पहनें, अच्छा दिखना चाहिए. जानिए कैसे परिधान पहनें वैलेंटाइन डे पर :

– पार्टी हो या ईवनिंग डेट, ए लाइन ड्रैस, गाउन वगैरा अधिक आकर्षक लगती है. कलर हमेशा ब्राइट ही पहनें.

– अगर इंडियन ट्रैडिशनल पहनना चाहती हैं तो अनारकली ड्रैस भी पहन सकती हैं. इस से आकर्षक लुक आता है.

– साड़ी भी वैलेंटाइन डे पर अच्छी लगती है. आप रैड या मैरून कलर की साड़ी के साथ गोल्डन कलर  का स्लीवलैस ब्लाउज पहन सकती हैं.

–  वैलेंटाइन डे जाड़े में होता है इसलिए वैस्टर्न या ट्रैडिशनल वियर के साथ गोल्ड या ब्लैक जैकेट पहनें.

–  परिधान के साथ ऐक्सैसरीज भी माने रखती हैं. लाइट कलर की ड्रैस के साथ रैड कलर की ज्वैलरी या ब्लैक कलर की ऐक्सैसरीज फ्रैश लुक देती हैं.

–  अधिक ढीली या टाइट ड्रैस न पहनें. इस से आप पार्टी में डांस फ्लोर पर नहीं जा सकतीं.

–  ड्रैस के साथ हेयर लुक भी सौफ्ट होना चाहिए स्ट्रेट या कर्ली हेयर देनों ही इस दिन अच्छे लगते हैं.

–  वैलेंटाइन डे के दिन वैस्टर्न और इंडियन ड्रैस को मिक्स मैच कर दिया गया कौंटैंपररी लुक भी काफी पौपुलर है.

–  युवक इस दिन सेमी फौर्मल वियर पहन सकते हैं, जिस में डार्क जींस, फौर्मल शर्ट के साथ अच्छा लुक देती हैं. कार्डिगन भी आजकल फैशन स्टेटमैंट बन चुका है.

– साफ जूते पहनें, युवतियां अकसर युवकों के जूतों की ओर ध्यान देती हैं. ऐसे में गंदे जूते आप की पर्सनैलिटी पर दाग लगा सकते हैं.

– अच्छी बैल्ट अवश्य पहनें, यह स्टाइल को पूरी तरह से बदल देती है.

– खूबसूरत क्लासिक घड़ी आप की कलाई में अवश्य होनी चाहिए. इस से आप की पर्सनैलिटी अच्छी लगती है.

प्यार दे या मार दे

रखने को तो घर वालों ने उस का नाम किरण रख दिया था, लेकिन मिडिल स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उस की समझ में आ गया था कि उस की जिंदगी में उम्मीद की कोई किरण नहीं है. इस की वजह यह थी कि प्रकृति ने उस के साथ घोर अन्याय किया, जो उसे एक आंख से दिव्यांग बनाया था.

किरण न बहुत ज्यादा खूबसूरत थी और न ही किसी रईस घराने से ताल्लुक रखती थी. एक मामूली खातेपीते परिवार की यह साधारण सी युवती न तो अपनी उम्र की लड़कियों की तरह रोमांटिक सपने बुनती थी और न ही ज्यादा सजनेसंवरने की कोशिश करती थी. घर में पसरे अभाव भी उसे दिखाई देते थे तो खुद को ले कर पिता का चिंतित चेहरा भी उस की परेशानी का सबब बना रहता था.

उस के पिता डालचंद कौरव अब से कई साल पहले नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवारा के गांव सूरजा से भोपाल आ कर बस गए थे. उन का मकसद बच्चों की बेहतर परवरिश और शहर में मेहनत कर के ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना था, जिस से घरपरिवार का जीवनस्तर सुधरे और धीरेधीरे ही सही, बच्चों का भविष्य बन सके. इस के लिए वह खूब मेहनत करते थे. लेकिन आमदनी अगर चवन्नी होती थी तो पता चलता था कि महंगाई की वजह से खर्चा एक रुपए का है.

वह भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, जहां से मिलने वाले वेतन से खींचतान कर किसी तरह खर्च चल जाता था. 3 बेटियों के पिता डालचंद बड़ी बेटी की शादी ठीकठाक और खातेपीते परिवार में कर चुके थे. उस के बाद किरण को ले कर उन की चिंता स्वाभाविक थी, क्योंकि आजकल हर कोई उस लड़की से शादी करने से कतराता है, जिस के शरीर में कोई कमी हो.

सयानी होती किरण की भी समझ में यह बात आ गई थी कि एक आंख कमजोर होने की वजह से सपनों का कोई राजकुमार उसे ब्याहने नहीं आएगा. शादी होगी भी तो वह बेमेल ही होगी, इसलिए उस ने काफी सोचविचार के बाद तय कर लिया कि जो भी होगा, देखा जाएगा. हालफिलहाल तो पढ़ाई और कैरियर पर ध्यान दिया जाए. अपने एकलौते भाई राजू को वह बहुत चाहती थी, जो बाहर की भागादौड़ी के सारे काम तेजी और संयम से निपटाता था. यही नहीं, वह पढ़ाई में भी ठीकठाक था.

छोटी बहन आरती भोपाल के प्रतिष्ठित सैम कालेज में पढ़ रही थी. किरण भी वहीं से बीकौम की पढ़ाई कर रही थी. वह स्वाभिमानी भी थी और समझदार भी, लिहाजा उस ने मीनाल रेजीडेंसी स्थित एजिस नाम के कालसैंटर में पार्टटाइम नौकरी कर ली थी. वहां से मिलने वाली तनख्वाह से वह अपनी पढ़ाई का और अन्य खर्च उठा लेती थी.

21 अक्तूबर, 2016 को किरण अपने घर ई-34 सिद्धार्थ लेकसिटी, आनंदनगर से रोज की तरह कालेज जाने को तैयार हुई तो घर का माहौल रोज की तरह ही था. चायनाश्ते का दौर खत्म हो चुका था और सभी अपनेअपने औफिस, स्कूल और कालेज जाने के लिए तैयार हो रहे थे.

किरण भी तैयार थी. वह कालेज के लिए घर से निकलने लगी तो चाचा संबल कौरव से खर्चे के लिए कुछ पैसे मांगे. उन्होंने उसे 20 रुपए दे दिए. किरण का भाई राजू भी तैयार था, इसलिए किरण उस के साथ चली गई. ऐसा लगभग रोज ही होता था कि जब किरण जाने लगती थी तो राजू उस के साथ हो लेता था और उसे सैम कालेज के गेट पर छोड़ देता था. उस दिन भी उस ने किरण को कालेज के गेट पर छोड़ा तो वह चुपचाप अंदर दाखिल हो गई. उन दिनों सैम कालेज में निर्माण कार्य चल रहा था.

राजू को कतई अहसास नहीं था कि बहन के दिलोदिमाग में एक ऐसा तूफान उमड़ रहा है, जो उस की जिंदगी लील लेगा. वह दीदी को बाय कह कर वापस चला गया तो किरण सीधे कालेज की निर्माणाधीन बिल्डिंग ब्लौक की छत पर जा पहुंची और चौथी मंजिल पर जा कर खड़ी हो गई. उस के दिल में उमड़ता तूफान अब शबाब पर था, जिस का मुकाबला करने की हिम्मत अब उस में नहीं रह गई थी. लिहाजा वह चौथी मंजिल से सीधे नीचे कूद गई.

इस के बाद सैम कालेज में हल्ला मच गया. इतनी ऊंचाई से नीचे कूदने के बाद किरण के जिंदा बचने का कोई सवाल ही नहीं था. जरा सी देर में छात्रों की भीड़ इकट्ठा हो गई. इस बात की खबर कालेज प्रबंधन तक भी पहुंच गई. फलस्वरूप उसे तुरंत नजदीकी नर्मदा अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल से पुलिस को खबर कर दी गई. किरण को देखने के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

कालेज प्रबंधन ने किरण की बहन आरती को इस हादसे की सूचना दी तो उस ने घर वालों को बताया. घर वाले भागेभागे नर्मदा अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक किरण दुनिया को अलविदा कह चुकी थी. उस के पास से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था, जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि कोई पढ़ीलिखी समझदार युवती खुदकुशी करे और सुसाइड नोट न छोड़े. पर इस मामले में ऐसा ही हुआ था. कौरव परिवार में रोनाधोना मच गया था. किरण के सहपाठी भी दुखी थे कि आखिर जिंदादिल किरण ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया.

पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए छानबीन और पूछताछ शुरू की. जिस खुदकुशी को गुत्थी समझा जा रहा था, वह चंद घंटों में सुलझ गई, जो प्यार में धोखा खाई हीनभावना से ग्रस्त एक लड़की की दर्दभरी छोटी सी कहानी निकली.

किरण ने सुसाइड नोट छोड़ने की जरूरत शायद इसलिए नहीं समझी थी, क्योंकि उसे जो कहना था, उसे वह अपने फेसबुक एकाउंट में लिख चुकी थी. किरण के घर और कालेज वाले यह जान कर हैरान हो उठे थे कि किरण किसी से प्यार करती थी और वह भी इतना अधिक कि अपने प्रेमी की बेरुखी से घबरा गई थी और उसे कई दिनों से मनाने की कोशिश कर रही थी.

सैम कालेज से बीई कर रहा रोहित किरण का बौयफ्रैंड था, जो बीते कुछ दिनों से उसे भाव नहीं दे रहा था. रोहित की दोस्ती और प्यार ने किरण के मन में जीने की उम्मीद जगा दी थी, उस की नींद में कई रोमांटिक ख्वाब पिरो दिए थे. इस से उसे लगने लगा था कि अभी भी दुनिया में ऐसे तमाम लड़के हैं, जो प्यार के सही मतलब समझते हैं. जातिपांत, ऊंचनीच और शारीरिक कमियों पर ध्यान नहीं देते. उन के लिए सूरत से ज्यादा सीरत अहम होती है.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, पर कुछ दिनों से रोहित का मूड उखड़ाउखड़ा रहता था. वह किरण से बात भी नहीं कर रहा था. उस का यह रवैया किरण की समझ में नहीं आ रहा था. अगर रोहित उसे वजह बताता तो तय था कि वह किसी न किसी तरह उसे मना लेती, कोई गलतफहमी होती तो वह उसे दूर कर देती. लेकिन रोहित की इस बेरुखी से किरण को अपने ख्वाब उजड़ते नजर आए और वह खुद को ठगा सा महसूस करने लगी.

जब प्रेमी बात ही नहीं कर रहा था तो वह क्या करती  लिहाजा किरण ने फेसबुक पर कशिश कौरव नाम से बनाए अपने एकाउंट पर मन की व्यथा साझा करनी शुरू कर दी. अपने पोस्टों में उस ने बौयफ्रैंड के छोड़े जाने यानी ब्रेकअप की बात कही और भावुकता में अपने सुसाइड की बात भी कह डाली थी. शायद ही नहीं, निश्चित रूप से वह अपने प्रेमी को अपने दिल का दर्द बताना चाह रही थी, जो उस की सांसों में बस चुका था.

एक जगह उस ने शायराना अंदाज में लिखा था, ‘ऐ इश्क तुझे खुदा की कसम या तो मुझे मेरा प्यार दे या फिर मुझे मार दे.’

प्यार नहीं मिला तो किरण ने खुद के लिए मौत चुनने की नादानी कर डाली, वह भी इस तरह कि कोई रोहित पर सीधे अंगुली न उठा सके. लेकिन फेसबुक एकाउंट में अपने प्यार और प्रेमी की बेरुखी की चर्चा कर के उस ने उसे शक के दायरे में तो ला ही दिया था. दूसरे दिन पुलिस ने साईंखेड़ा स्थित रोहित के घर में दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. जाहिर है, किरण की खुदकुशी के बाद वह गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया था.

पुलिस ने कालेज में पूछताछ की तो एक बात यह भी सामने आई कि रोहित और किरण में दोस्ती तो थी, पर प्यार जैसी कोई बात उन के बीच नहीं थी. किरण की कुछ सहेलियों ने दबी जुबान से स्वीकार किया था कि वह रोहित से एकतरफा प्यार करती थी. इस का मतलब तो यही हुआ कि किरण दोस्ती को प्यार मानते हुए जबरदस्ती रोहित के गले पड़ना चाहती थी. इस बात का खुलासा अब रोहित ही कर सकता है, जो कथा लिखे जाने तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया था.

किरण भावुक थी और रोहित को ले कर शायद वह जरूरत से ज्यादा जज्बाती हो गई थी. इस की एक वजह उस की आंख की विकृति से उपजी हीनभावना भी हो सकती है. रोहित से दोस्ती के बाद निस्संदेह उस की यह सोच और भी गहरा गई होगी. फेसबुक पर उस ने तरहतरह से रोहित को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन असफल रही थी.

जब उसे लगा कि यार और प्यार नहीं तो जिंदगी क्यों, जो अब किसी के काम की नहीं. यही सोच कर उस ने यह खतरनाक फैसला ले डाला होगा.

कौरव परिवार ने इस गम में दिवाली नहीं मनाई. उन्हें अपनी लाडली किरण की मौत के बारे में यकीन ही नहीं हो रहा है. उन्हें लगता ही नहीं कि अब वह इस दुनिया में नहीं है. डालचंद के चेहरे पर विषाद है, पर इसलिए नहीं कि किरण ने उन की चिंता हमेशा के लिए दूर कर दी है, बल्कि इसलिए कि उन की बेटी ने जल्दबाजी में आत्मघाती फैसला ले लिया और खुद ही हमेशा के लिए उन से दूर चली गई.

रोहित का कुछ खास बिगड़ेगा, ऐसा नहीं लग रहा. क्योंकि उस ने अगर किरण से कुछ वादे किए भी होंगे तो उन के प्रमाण नहीं हैं और न ही किरण ने उसे सीधे तौर पर अपनी खुदकुशी का जिम्मेदार ठहराया है.

संभव है कि वह दोस्ती को प्यार समझते हुए मन ही मन रोहित को चाहने लगी हो और ठुकराए जाने पर व्यथित हो कर टूट गई हो. लेकिन वह हौसला और सब्र रख कर जिंदा रहती तो शायद बात बन जाती.      

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जिस्म ने कराया जुर्म

उत्तर प्रदेश पुलिस में हैडकांस्टेबल शिवकुमार की पोस्टिंग शिकोहाबाद के सीओ औफिस में थी. उन का घर वहां से कोई 60-65 किलोमीटर दूर आगरा में था. वहीं से वह रोजाना अपनी ड्यूटी पर आतेजाते थे. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां संगम और ज्योति तथा एक बेटा अमरेंद्र कुमार था. परिवार के साथ वह हंसीखुशी से जिंदगी बिता रहे थे. उन्होंने तीनों बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ायालिखाया था. बड़ी बेटी शादी लायक हुई तो उस की शादी उन्होंने अपने जिगरी दोस्त कुलदीप शैली के बेटे अशोक शैली से कर दी. कुलदीप गाजियाबाद के नेहरूनगर में रहते थे. उन की भी 2 बेटियां परविंद्र और पूजा तथा एक बेटा अशोक था. बेटी परविंद्र का विवाह उन्होंने बुलंदशहर के रहने वाले पंकज के साथ किया था.

संगम की शादी के समय उस की छोटी बहन ज्योति महज 12 साल की थी. अशोक गाजियाबाद में किसी फैक्ट्री में काम करता था. संगम और अशोक का जीवन काफी खुशहाल था. शादी के साल भर बाद ही अशोक एक बेटी का पिता बन गया था. वह जबतब अपनी पत्नी और बेटी के साथ ससुराल आता रहता था. शिवकुमार का बेटा अमरेंद्र एक दवा कंपनी में एमआर था. अशोक की बहन पूजा की शादी में निमंत्रण पा कर शिवकुमार पूरे परिवार के साथ आए थे. शादी में लहंगाचोली पहने ज्योति बहुत खूबसूरत लग रही थी. हालांकि उस की उम्र 14-15 साल थी, पर हृष्टपुष्ट शरीर की वजह से वह जवान लग रही थी. ऐसे में ज्योति की नजर अपने जीजा अशोक से टकराई तो उस की नजरों में उसे कुछ अजीब सा दिखाई दिया. क्योंकि इस के पहले अशोक ने कभी उसे इस तरह नहीं देखा था. चूंकि शादी अशोक की बहन पूजा की थी, इसलिए उस पर काफी जिम्मेदारियां थीं. वह भागदौड़ में लगा था. ऐसे में अशोक कई बार साली से टकराया. एक बार हिम्मत कर के उस ने ज्योति का हाथ पकड़ कर सहलाते हुए कहा, ‘‘ज्योति, आज तुम बड़ी सुंदर लग रही हो. किस पर बिजली गिराने का इरादा है ’’ जीजा की बात सुन कर ज्योति घबरा गई. झटके से अपना हाथ छुड़ा कर वह चली गई. उस का दिल जोरों से धड़क उठा था. वह समझ गई कि जीजा की नीयत ठीक नहीं है.

ज्योति सोच में डूबी थी कि जीजा उसे अजीब नजरों से क्यों देख रहे थे उसे लगा कि शायद उन्होंने मजाक किया होगा  इस बात को दिमाग से निकाल कर वह शादी के कार्यक्रमों में एंजौय करने लगी. लेकिन अशोक ने तो मन ही मन कुछ और ही सोच लिया था. शादी निपट जाने के बाद थकेहारे लोग आराम करने की सोच रहे थे, जबकि शिवकुमार अपने परिवार के साथ घर जाना चाहते थे, लेकिन कुलदीप ने उन्हें एक दिन और रुकने की बात कह कर रोक लिया. इस से अशोक को खुशी हुई, क्योंकि उस का दिल अपनी नाबालिग साली ज्योति पर आ गया था. वह किसी भी तरह उसे हासिल करना चाहता था. शादी की भागदौड़ में सभी काफी थक गए थे. इसलिए खापी कर सभी जल्दी ही सो गए. अशोक के लिए यह अच्छा मौका था. उस ने धीरे से ज्योति को उठा कर कहा, ‘‘चलो, तुम से कुछ बात करनी है.’’

डरीसहमी ज्योति के मुंह से आवाज तक नहीं निकली. उसे एकांत में ले जा कर अशोक उस के शरीर से छेड़छाड़ करने लगा. ज्योति ने विरोध किया तो उस ने कहा, ‘‘चुप रहो, अगर कोई जाग गया तो तुम्हारी ही बदनामी होगी.’’ ज्योति जानती थी कि अगर वह शोर मचाएगी तो घर के लोग उस की बात पर विश्वास नहीं करेंगे. क्योंकि सभी अशोक पर बहुत विश्वास करते थे. आखिर अशोक ने ज्योति को डराधमका कर अपनी हवस पूरी कर ली. यही नहीं, उस ने मोबाइल फोन से उस की कुछ आपत्तिजनक तसवीरें भी खींच लीं. अपना सब कुछ गंवा कर ज्योति कमरे में आ गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे  अशोक ने उसे धमकी दे रखी थी कि अगर उस ने किसी को कुछ बताया तो वह उसे बदनाम कर देगा.

ज्योति खामोश थी. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. बेटी को परेशान देख कर मां मुन्नी ने पूछा तो उस ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया. घर आ कर ज्योति ने राहत की सांस ली. उस ने तय कर लिया कि अब वह जीजा से कभी बात नहीं करेगी. अपने साथ घटी घटना के बारे में उस ने घर वालों से इसलिए नहीं बताया कि कहीं बहन का घर न टूट जाए. इसलिए चुप रह कर वह अपनी पढ़ाई में लग गई. कुछ दिन इसी तरह बीत गए. जीजा का कोई फोन नहीं आया तो उसे लगा कि शायद उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है. लेकिन यह उस की भूल थी. अशोक को इधर गाजियाबाद के एक फार्महाउस में मैनेजर की नौकरी मिल गई थी. एक दिन वह अकेला ही ससुराल पहुंचा. उसे देख कर ज्योति डर गई.

‘‘अरे ज्योति, तुम इधरउधर क्यों भाग रही हो आओ, बैठो मेरे पास.’’ अशोक ने उस का हाथ पकड़ कर पास बैठाते हुए कहा. मुन्नी भी वहीं बैठी थी. इस की असल वजह क्या है, यह मुन्नी को पता नहीं था, इसलिए वह हंसने लगी. क्योंकि जीजासाली के बीच हंसीमजाक होना आम बात है. उस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. खाना खाने के बाद अशोक जाने लगा तो उस ने ज्योति से चुपके से कहा, ‘‘मैं ने आगरा के कुंदु कटरा स्थित एक होटल में कमरा बुक करा रखा है, तुम वहां आ जाना. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

ज्योति ने हिम्मत कर के कहा, ‘‘मैं वहां नहीं आऊंगी.’’

इस पर अशोक ने टेढ़ी नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘तो फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना. मेरी मानो तो तुम्हारा आना ही ठीक रहेगा. मैं होटल में तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’ न चाहते हुए भी ज्योति को होटल जाना पड़ा. अशोक होटल के गेट पर ही मिल गया. उस का हाथ पकड़ कर वह उसे उस कमरे में ले गया, जो उस ने पहले से बुक करा रखा था. कमरे में पहुंच कर उस ने ज्योति के सामने एक कागज रख दिया, जिस पर कुछ टाइप किया हुआ था. ज्योति ने पूछा, ‘‘यह क्या है ’’

‘‘यह हमारी शादी का प्रमाण पत्र है. इस पर तुम दस्तखत कर दो.’’ अशोक ने कहा. ज्योति ने दस्तखत करने से मना करते हुए कहा, ‘‘आप तो दीदी के पति हैं, हमारी शादी कैसे हो सकती है ’’

‘‘देखो ज्योति, मैं तुम से प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना जी नहीं सकता, इसलिए मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूं.’’

‘‘मुझे यह बेहूदगी पसंद नहीं है.’’ कह कर ज्योति कमरे से बाहर जाने लगी तो अशोक ने उसे पकड़ कर बैड पर ही पटक दिया और गुर्राते हुए कहा, ‘‘अगर तुम ने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्हारे पूरे परिवार को खत्म कर दूंगा.’’

उस की धमकी से डर कर ज्योति ने उस कागज पर दस्तखत कर दिए. ज्योति मजबूर थी, इस का फायदा उठाते हुए अशोक ने उस के साथ जबरदस्ती की. उस ने उस की अश्लील वीडियो भी बना ली. ज्योति उस के जाल में पूरी तरह फंस चुकी थी. चाह कर भी वह नहीं निकल पा रही थी. उस के एक ओर कुआं था तो दूसरी ओर खाई. वह जीजा का शोषण सहती रही. मुन्नी कभीकभी पूछती भी कि वह परेशान क्यों रहती है तो वह पढ़ाई का बहाना बना देती. अशोक का जब भी उस के पास फोन आता, वह अवसाद से घिर जाती. वह उसे होटल में बुलाता. उस का वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर अशोक उस के साथ मनमानी करता. इसी तरह 2 साल गुजर गए. अशोक की हिम्मत बढ़ती गई. ज्योति इंटरमीडिएट में आ गई थी. पढ़ाई में उस का मन बिलकुल नहीं लगता था. वह यही सोचती थी कि दुराचारी जीजा से कैसे छुटकारा मिले  उसे अब खुद से नफरत होने लगी थी.

सब कुछ चलता रहा. घर वाले बेटी पर हो रहे अत्याचार से बेखबर थे. बेटी भी अपना मुंह खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी. उसी बीच ज्योति की जिंदगी में नागेंद्र आ गया. वह ज्योति को अच्छा लगता था. दोचार मुलाकातों के बाद दोनों के बीच गहरा प्यार हो गया. नागेंद्र के प्यार से ज्योति का खोया आत्मविश्वास वापस लौटने लगा. इस के बाद जब भी अशोक का फोन आता, वह फोन रिसीव नहीं करती. अशोक की समझ में यह नहीं आ रहा था कि ज्योति ऐसा क्यों कर रही है  यह जानने के लिए एक दिन वह अपनी ससुराल पहुंच गया. उसे इस बार देख कर ज्योति ने तय कर लिया कि वह उस से बिलकुल नहीं डरेगी. मौका देख कर जब अशोक ने उसे होटल चलने को कहा तो उस ने साफ मना कर  दिया. अशोक ने उसे धमकाया तो उस ने कहा, ‘‘जीजा मेहरबानी कर के अब छोड़ दो मुझे.’’ अशोक ने उसे मोहब्बत की दुहाई दी, पर वह नहीं मानी. वह नाराज हो कर चला गया. ज्योति के व्यवहार से उसे लगा कि जरूर कोई उस की जिंदगी में आ गया है. अशोक ज्योति की सहेली के दोस्त सुमित को जानता था. उस ने जब सुमित को फोन किया तो उसे पता चला कि सचमुच ही ज्योति के जीवन में कोई और आ गया है. सच्चाई पता चलने पर अशोक को ज्योति पर बहुत गुस्सा आया.

इस के बाद ज्योति ने अपने प्रेमी नागेंद्र को सारी बात बता दी. उस ने ज्योति की हिम्मत बढ़ाते हुए कहा कि वह हमेशा उस के साथ है. अशोक से उसे डरने की जरूरत नहीं है. इस के बाद अशोक अपने आखिरी हथियार का उपयोग करते हुए धमकी देने लगा कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह उस के नंगे फोटो इंटरनेट पर डाल देगा. ज्योति ने साफ कह दिया, ‘‘जीजा, तुम्हें जो करना हो करो, मैं अब तुम से बिलकुल नहीं मिल सकती.’’ आखिर अशोक ने अंजाम की चिंता किए बिना ज्योति को सबक सिखाने की ठान ली. 9 सितंबर, 2016 को ज्योति कालेज के लिए निकली तो गली में खड़े कुछ लड़कों ने उसे देख कर कटाक्ष किया. वह उन की बातों का विरोध करने के बजाय आगे बढ़ गई. तभी उस के मोबाइल पर उस के भाई का फोन आया. भाई ने उसे तुरंत घर वापस आने को कहा.

ज्योति घर पहुंची तो उस ने देखा मां और भाई गुस्से में हैं. भाई ने उसे कई तमाचे जड़ दिए. भाई के गुस्से को देख कर ज्योति समझ गई कि जरूर जीजा ने उस का अश्लील वीडियो वायरल कर दिया है, जिसे घर वालों ने देख लिया है. ज्योति ने रोरो कर मां और भाई को जीजा की सारी करतूतें बता दीं. असलियत जान कर दोनों ने अपना सिर पीट लिया. ज्योति ने कहा कि वह जीजा की धमकियों से डर गई थी, जिस की वजह से उस ने किसी को कुछ नहीं बताया था. शिवकुमार उस समय ड्यूटी पर थे. अमरेंद्र ने पिता को फोन कर के सारी बात बताई तो उन्होंने कहा कि वह ज्योति को ले कर थाना सदर जाए और पुलिस को सारी बात बता कर रिपोर्ट दर्ज करा दे. अमरेंद्र बहन को ले कर थाना सदर पहुंचा और थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह को सारी बात बता दी. थानाप्रभारी ने उस की बात सुन कर भादंवि की धारा 376, 506, 420, 67, 72 के तहत अशोक सैली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. शिवकुमार और मुन्नी दामाद की इस हरकत से बहुत आहत हुए थे. पर उस ने काम ही ऐसा किया था, जो क्षमा करने लायक नहीं था. अगले दिन आगरा सदर बाजार पुलिस ने गाजियाबाद से अशोक को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में अशोक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पति की करतूत से संगम को अफसोस है. बहरहाल कथा संकलन तक अशोक जेल में था.  

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

लापरवाही न पड़ जाए कहीं भारी

स्कूली लड़कियां ही नहीं स्कूली लड़कों के साथ भी रेप करने के बढ़ते मामले भय और आतंक का माहौल खड़ा कर रहे हैं. स्कूली बच्चों से यौन क्रिया सदियों से चली आ रही है पर उम्मीद थी कि जैसेजैसे लोगों में शिक्षा बढ़ेगी, समाज में कानून का जोर चलेगा, बच्चों के मातापिता अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और पुरुष अपनी सीमाएं जानेंगे, तो ये कुकर्म नहीं होंगे. पर लगता नहीं कि ऐसा हो रहा है या फिर अब थोड़े से मामले ही सुर्खियां बन जाते हैं और डरावना माहौल पैदा कर देते हैं. यह बात पक्की है कि न तो दुनिया भर में सैक्स व्यापार कम हो रहा है और न ही छेड़खानी. जिन देशों में कानून की कड़ी चौकसी है वहां भी बुरी तरह रौंदे जाने के मामले हो रहे हैं और भारत जैसे देश में जहां न के बराबर कानून की चौकसी है, हाल बुरा है. पर फिर भी यह कहना होगा कि मातापिता को अपनी बेटियों की शादी 14 साल की आयु में कर के मुसीबत को टालना अनिवार्य नहीं हो रहा है.

सैक्स अपराधों की एक मुख्य वजह तो प्राकृतिक है पर प्रकृति ने तो एकदूसरे को मारने, एकदूसरे को झपटने और एकदूसरे पर आक्रमण करना भी सिखाया था. मानव ने अपने हजारों साल के इतिहास में इस प्रवृत्ति पर विजय पाई है. आज सड़क पर महीनों कीमती सामान पड़ा रहे, कोई नहीं उठाता. सड़कों पर नगर निकायों के लोहे के बैंच, पानी के हैंडपंप, सिगनल, बैरियर आदि आसानी से चोरी नहीं होते क्योंकि समाज ने शिक्षा दे दी है. घर से बाहर जाती अब हर औरत सुरक्षित महसूस करती है. उस का हल्ला उसे बचाने के लिए काफी है. अगर कोई हादसा हो जाए तो बहुत से मामलों में तो अपराधियों को पकड़ा जाना संभव हो ही जाता है. स्थिति बुरी है पर इतनी नहीं. स्कूली बच्चों के बारे में मातापिता व सामान्य लोग अकसर निश्चिंत से हो जाते हैं और वे सुरक्षा के सामान्य उपाय नहीं अपनाते. यही उन की कमी है. स्कूली बच्चों को, लड़केलड़कियों दोनों को, आगाह करना जरूरी है कि वे जानेअनजाने लोगों के

चंगुल में न फंसें. प्यार और सैक्स भावना में अंतर समझें. बच्चों को भयभीत करे बिना अपना खयाल रखना सिखाना जरूरी है. इस के लिए अगर बच्चों को प्रशिक्षित करना जरूरी है तो मातापिता को भी. क्लासें तो दोनों की लगनी चाहिए. कामकाजी मातापिताओं को दोहरा सावधान होना चाहिए. उन्हें अपना घर अकेले अबोध बच्चों पर न छोड़ कर गु्रप बनाने चाहिए ताकि 3-4 बच्चे बारीबारी एकएक के घर रह कर तब तक अपना काम कर सकें जब तक कि मातापिता काम से लौट कर न आ जाएं. बच्चों को पालने के लिए सही गुर समझाने चाहिएं, वे खुदबखुद सीख जाएंगे, यह भूल जाना चाहिए. सरकारों, कानूनों, पुलिस व संस्थाओं पर ज्यादा निर्भर रहना भी गलत है. बच्चों के मामलों में हर संभव चौकन्ना रहना

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