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दोस्तों को उधार दें, पर जरा संभल के

बैंक के कर्मचारी राहुल कुमार के एक दोस्त ने जब उनसे अपने परिवार में किसी के बीमार होने पर उधार मांगा तो राहुल ने तुरंत उन्हें 40,000 रुपये दे दिए. दो दिन बाद राहुल को पता चला कि उनके दोस्त ने झूठ बोला था और उसने स्मार्टफोन का नया मॉडल खरीदने के लिए पैसा लिया था. राहुल को एक ऐसे व्यक्ति ने धोखा दिया, जिसे वह अपना दोस्त मानते थे.

हमारे देश में दोस्तों और रिश्तेदारों को उधार देना आम बात है. इसमें वास्तविक और काल्पनिक आपात स्थितियों के लिए कम रकम की उधारी से लेकर बिजनेस शुरू करने के लिए दिए जाने वाले बड़े कर्ज शामिल होते हैं. इस तरह की उधारी के लिए आमतौर पर कोई पेपरवर्क या लिखा-पढ़ी नहीं की जाती और इसी वजह से इसमें धोखा खाने की आशंका अधिक रहती है.

आपको अपने जानने वालों को उधार देते समय कुछ सावधानी बरतनी चाहिए. उधार देने से पहले खुद से पूछें कि क्या आप इसे अफोर्ड कर सकते हैं? याद रखें कि शायद लंबे समय तक आपको अपनी रकम वापस नहीं मिलेगी. अगर आप घर खरीदने या अपने बच्चे की एजुकेशन के लिए सेविंग कर रहे हैं तो उधार देने से आपके इस तरह के किसी फाइनेंशियल गोल पर असर पड़ सकता है.

अगर आप उधार लेने वाले को अच्छी तरह जानते हैं तो भी जांच-पड़ताल करना बेहतर रहेगा. केवल उनके कहने पर उन कारणों को स्वीकार न करें जिनके लिए वे उधार मांग रहे हैं, जैसा कि राहुल ने किया था.

मुंबई के आईटी इंजीनियर क्षितिज शर्मा को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था. उनसे एक दोस्त ने अपने परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए उधार मांगा था. क्षितिज ने उन्हें 50,000 रुपये दिए थे. बाद में क्षितिज को पता चला कि उनके दोस्त ने इसी तरह का कारण बताकर अन्य लोगों से भी एक लाख रुपये का उधार लिया था. उस दोस्त के परिवार में कोई भी बीमार नहीं था और उसने उधार की रकम को फिजूल की चीजों पर खर्च कर दिया था. क्षितिज ने छह महीने तक अपने दोस्त के पीछे पड़कर अपनी रकम वसूल की.

आईटी प्रोफेशनल कोयल घोष ने अपनी एक मित्र की नौकरी जाने पर उन्हें एजुकेशन लोन की ईएमआई चुकाने के लिए 25,000 रुपये का उधार दिया था, लेकिन कोयल को अपना पैसा वापस नहीं मिला. लेंडर के तौर पर आपको यह पूछने का अधिकार है कि पैसे की जरूरत क्यों है. अगर आपको लगता है कि जरूरत वास्तविक है तो उधार चुकाने की बॉरोअर की क्षमता को देखें. अगर बॉरोअर को बिल चुकाने या अन्य लेंडर्स की रकम वापस करने में मुश्किल हो रही है तो आपका पैसा वापस मिलने के आसार भी बहुत कम होंगे. इस वजह से दोस्तों और रिश्तेदारों को उधार देने के समय भावनाओं में न बहें.

गूगल से ज्यादा सुरक्षित हैं ये सर्च इंजन

आमतौर पर जो भी सर्च इंजन इस्तेमाल किया जाता है, वे सर्च की गई बातों को ट्रैक करते हैं, फिर आपके सर्च के हिसाब से विज्ञापन दिखाना शुरु कर देते है. अगर आप चाहते हैं कि सर्च इंजन न तो आपकी हिस्ट्री स्टोर करे और न ही आपके द्वारा सर्च किया जाने वाला कंटेंट तो आप इसके लिए प्राइवेट सर्च इंजन इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत से प्राइवेट सर्च इंजन ऐसे हैं, जो न तो आपके द्वारा सर्च की गई बातों को स्टोर करते हैं और न ही आपको ट्रैक करते हैं.

1. वोल्फरम अल्फा (WolframAlpha)

यह कंप्यूटेबल सर्च इंजन है, जो सटीक जवाब ढूंढता है. यह आपके द्वारा सर्च किए गए कॉन्टेंट को स्टोर नहीं करता और न ही कुछ ट्रैक करता है. यह प्राइवेट सर्च इंजन इनबिल्ट ऐल्गॉरिदम्स से कैलकुलेशन करता है और लोगों, हेल्थ, फिटनस, म्यूजिक और फिल्मों के बारे में काफी जानकारी रखता है.

2. गिबरू (Gibiru)

यह भी पूरी तरह से अनसेंसर्ड मगर एनक्रिप्टेड सर्च इजन है, जिसमें किसी भी थर्ड पार्टी डेटा लीक होने की गुंजाइश नहीं है. यह अन्य कई प्राइवेट सर्च इंजन्स से तेज चलता है, क्योंकि यह गूगल कस्टम सर्च को इस्तेमाल करता है. हालांकि यह गूगल द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी ट्रैकिंग मेथड्स को हटा देता है.

3. स्टार्ट पेज (Startpage)

स्टार्टपेज प्रॉक्सी सर्वर के जरिए ब्राउजिंग का ऑप्शन देता है, जिससे वेबसाइट्स आपका आईपी अड्रेस या लोकेशन ट्रैक नहीं कर पातीं. इसे आप अपने ब्राउजर में ऐड कर सकते हैं और कलर थीम्स भी चुन सकते हैं.

4. प्राइवेटली (Privatelee) 

प्राइवेट ली की 'पावरसर्च' कमांड्स से आप अपना सर्च सोर्स व अन्य चीजें चुन सकते हैं. इसका एक और नाम Qrobe.it भी है.

5. यिप्पी (Yippy)

इसकी मदद से आप सर्च रिजल्ट को मैन्युअली फिल्टर कर सकते हैं. इस पर आप वेब, तस्वीरें, न्यूज, ब्लॉग्स और सरकारी डेटा को सर्च कर सकते हैं. इस पर आप गूगल की ही तरह कैश्ड पेज (Cached page) देख सकते हैं.

6. लुकोल (Lukol)

यह गूगल के कस्टमाइज्ड सर्च रिजल्ट दिखाने के लिए प्रॉक्सी सर्वर इस्तेमाल करता है. इसे बेस्ट प्राइवेट सर्च इंजन्स में से एक माना जाता है. यह ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों और स्पैमर्स को दूर रखता है. आपके सर्च को भी गुप्त रखता है.

7. हुल्बी (Hulbee)

यह सर्च इंजन भी आपके सर्च या लोकेशन हिस्ट्री को ट्रैक किए बिना इंटेलिजेंट इन्फर्मेशन देता है. इस ऐप में आपके सर्च को सिक्यॉरिटी के लिए एनक्रिप्ट किया जाता है.

8. गिगाब्लास्ट (Gigablast)

इस ऐप ने अरबों वेब पेज इंडेक्स किए हैं और आपके ऑनलाइन सर्च को ट्रैक किए बिना तुरंत रिजल्ट दिखाता है. इसे भी बेस्ट प्राइवेट सर्च इंजन्स में शुमार किया जाता है.

9. डकडकगो (DuckDuckGo)

यह सबसे सिक्यॉर सर्च इंजन्स में से एक है. यह आपके द्वारा सर्च की गई चीजों को कभी ट्रैक नहीं करता. यह बिना ऐप के तुरंत रिजस्ट दिखाता है. इसमें एक दिन में 10 करोड़ सर्च होते हैं.

10. डिस्कनेक्ट सर्च (Disconnect Search)

डिस्कॉनेक्ट सर्च दरअसल गूगल, बिंग और याहू जैसे बड़े सर्च इंजन्स से सर्च में मदद लेता है, मगर आपके ऑनलाइन सर्च या आईपी अड्रेस को ट्रैक नहीं करता. इससे आप लोकेशन के आधार पर सर्च कर सकते हैं.

11. मेटागर (MetaGer)

​यह सर्वर भी गोपनीय सर्च में आपकी मदद करता है. यह प्रॉक्सी सर्वर को इस्तेमाल करता है और डेस्टिनेशन सर्वर से आपके आईपी को छिपाए रखता है. इसकी डिफॉल्ट लैंग्वेज जर्मन है.

अनारकली ऑफ आरा : स्वरा भास्कर का दमदार अभिनय

कम कपड़े पहनने वाली या नाच गाकर अपना गुजर बसर करने वाली औरत को चरित्रहीन मानने की सोच के खिलाफ व नारी उत्थान के मुद्दों को परदे पर मनोरंजन के साथ अति सशक्त तरीके से उकेरने में अविनाश दास की फिल्म ‘‘अनारकली ऑफ आरा’’ सफल रहती है. बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म गंभीर मुद्दों को बहुत बेहतर तरीके से उकेरती है.

फिल्म शुरू होती है एक आक्रेस्ट्रा के रंगारंग गीत संगीत के द्विअर्थी गाने के कार्यक्रम से, जिसमें गायिका व नृत्यांगना चमेली की बंदूक से गोली चलने से मौत हो जाती है. यह सारा दृश्य उस वक्त मंच पर मौजूद चमेली की बेटी अनारकली देखती रह जाती है. फिर चौदह साल बाद ‘‘रंगीला आर्केस्ट्रा’’ कंपनी में अनारकली (स्वरा भास्कर) की द्विअर्थी गीत गाने से कहानी शुरू होती है.

‘‘रंगीला आर्केस्ट्रा” कंपनी को रंगीला (पंकज त्रिपाठी) चलाते हैं. शादीशुदा होते हुए भी रंगीला मन ही मन अनारकली को चाहते हैं और मौके बेमौके वह अनारकली को छूने से बाज नहीं आते. इसी बीच अपने लिए देवदास बने लड़के अनवर (मयूर मोरे) को अनारकली अपने साथ रख लेती है. वह अच्छा तबला वादक है. एक बार जब पुलिस स्टेशन कें अंदर विजयादशमी के मौके पर आरा के दरोगा (विजय कुमार) के निमंत्रण पर रंगीला अपनी पार्टी लेकर आर्केस्ट्रा करने जाते हैं, तो वहां अनारकली के नृत्य व गायन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ठाकुर धर्मेंद्र (संजय मिश्रा) भी पहुंचते हैं. धर्मेंद्र की राज्य के मुख्यमंत्री से बड़ी निकटता है, इसका वह फायदा उठाते रहते हैं. दरोगा तो धर्मेंद्र की चमचागीरी में लगे रहते हैं.

धर्मेंद्र दारू पीकर मंच पर चढ़कर अनारकली के साथ चिपका चिपकी व अति अभद्र व्यवहार करते हैं. आर्केस्ट्रा का आनंद लेने आए शहर के लोग अनारकली के पक्ष में धर्मेंद्र के कृत्य का विरोध करते हैं, तो पुलिस उन पर लाठी चलाकर भगा देती है. रंगीला भी दूर से ही कहता रहता है कि ऐसा न करें. पर अनारकली निडरता का परिचय देती है और धर्मेंद्र को तमाचा जड़ देती है. दूसरे दिन दरोगा, धर्मेंद्र के घर जाकर बताते हैं कि उन्होंने सभी के कैमरे व मोबाइल से वह दृश्य हटवा दिए थे.

अब धर्मेंद्र, रंगीला के माध्यम से अनारकली को अपने खास आशियाने में बुलाते हैं. जहां दरोगा भी मौजूद है. उस वक्त भी अनारकली निडरता से धर्मेंद्र व दरोगा को दो टूक जवाब देती है. दूसरे दिन धर्मेंद्र के इशारे पर पुलिस अपने एक आदमी को अनारकली के घर के अंदर छिपाकर अनारकली को देह व्यापार के आरोप में गिरफ्तार करती है. रंगीला किसी तरह अनारकली की जमानत करवाता है. पुलिस स्टेशन से निकलकर अनारकली, धर्मेंद्र के घर उन्हें यह सच बताकर चल देती है कि उस दिन मंच पर अनारकली ने उन्हें तमाचा जड़ा था. तब धर्मेंद्र के गुंडे उसे पकड़ने के लिए जाते हैं, अनारकली भागती है. अनवर के साथ दिल्ली पहुंचती है.

दिल्ली में आरा के ही रहने वाले हीरामनी उनकी मदद करते हैं. जिसके चलते एक संगीत कंपनी से अनारकली के कई संगीत एलबम बाजार में आते हैं. एक संगीत एलबम देखकर आरा पुलिस दिल्ली पहुंचती है. अब अनारकली पर अनवर के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया है. अब अनारकली की गिरफ्तारी होनी है, पर हीरामनी बताता है कि उसके पास धर्मेंद्र ने जो कृत्य किया था, उसका वीडियो मोबाइल पर है. उस वीडियो को देखकर अनारकली योजना बताती है और आरा पुलिस के सामने सरेंडर कर देती है.

अदालत में पेशी से पहले वहां मौजूद दरोगा के सामने ही वह धर्मेंद्र से सौदेबाजी करती है. धर्मेंद के इशारे पर पुलिस अनारकली पर लगाए गए आरोप वापस ले लेती है. उसके बाद धर्मेंद्र उसे अपने कॉलेज के कार्यक्रम में गाने के लिए बुलाते हैं. वहां पर पुलिस विभाग के एस पी व धर्मेंद्र की पत्नी व बेटी भी बैठी है. एक गीत गाने के बाद रोचक तरीके से अनारकली धर्मेंद्र को जली कटी सुनाती है और फिर परदे पर धर्मेंद्र के कृत्य का वीडियो चलने लगता है. धर्मेंद्र की पत्नी व बेटी शर्म से नजर झुकाकर वहां से चली जाती है. एस पी महोदय, मुख्यमंत्री को फोन पर जानकारी देते हैं कि मसला गंभीर है, कार्यवाही करनी पड़ेगी. अनारकली खुश है कि उसने धर्मेंद्र को उनकी औकात याद दिला दी.

फिल्म ‘‘अनारकली ऑफ आरा’’ में यह संदेश बहुत अच्छे ढंग से उभरकर आता है कि नाच गाकर अपनी जीविका चलाने वाली नारी चरित्रहीन नहीं हो सकती. इस तरह की नारी को यदि पुरुष प्रधान समाज के पुरुष अपनी जायदाद समझते हैं, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल और अपराध है. किसी की यौन अवस्था या उसकी निजी जिंदगी के रिश्ते के दम पर उसके चरित्र पर लांक्षन लगाना गलत है. यह निर्देशक की खूबी है कि उन्होंने फिल्म में अनारकली को ‘दूध की धुली’ साबित करने का प्रयास नहीं किया है.

अनारकली कहती है कि निजी बैठक और सार्वजनिक मंच में अंतर होता है. फिल्म से यह बात भी उभरकर आती है कि हर नारी यौन संबंधों को लेकर एक रेखा खींचकर रखती है, उस रेखा को लांघने का हक किसी पुरूष को नहीं है. पर फिल्म के कुछ दृश्य हजम नहीं होते हैं. फिर भी पहली बार निर्देशक बने अविनाश दास बधाई के पात्र हैं. फिल्म का गीत संगीत भी कर्णप्रिय है. पर गीत के बोल में भोजपुरी भाषा का पुट हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकते. कुछ खामियों के चलते मल्टीप्लैक्स की वनिस्बत सिंगल थिएटर और खासकर उन सिनेमाघरों में इस फिल्म को ज्यादा पसंद किया जाएगा, जिनमें भोजपुरी फिल्में सफलता बटोरती हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो यह फिल्म स्वरा भास्कर के दमदार अभिनय के लिए हमेशा याद रखी जाएगी. फिल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ देखने के बाद कई अभिनेत्रियां अब अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगेंगी. अनारकली के किरदार में स्वरा भास्कर दर्शक को वह सब परोसती हैं, जो दर्शक को चाहिए. इस फिल्म से स्वरा भास्कर ने साबित कर दिखाया कि वह अपने कंधे पर पूरी फिल्म को लेकर चल सकती हैं.

कुछ दृश्यों में तो स्वरा भास्कर ने अपने अभिनय से संजय मिश्रा जैसे कलाकार की भी छुट्टी कर दी. इस फिल्म में वह प्रभावित नहीं कर पाते हैं. पंकज त्रिपाठी ने ठीक ठाक काम किया है. वास्तव में पटकथा के स्तर रंगीला का किरदार सशक्त नहीं है. अनवर के किरदार में मयूर मोरे ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है.

एक घंटा तिरपन मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘अनारकली ऑफ आरा’’ का निर्माण कपूर तथा निर्देशन अविनाश दास ने किया है. फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं-स्वरा भास्कर, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, विजय कुमार, मयूर मोरे, इश्तियाक खान, नितिन अरोड़ा.

कमल हासन ने चली अपनी चाल

एक भारतीय किताब महाभारत को लोग बहुत इज्जत देते हैं , जिसमें यह साफ जाहिर है कि जुए के चक्कर में एक महिला को दांव पर लगा दिया गया था. पांचाली को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया गया था, जबकि जुआ पुरुष खेल रहे थे. एक निजी चेनल को दिये इंटरव्यू में दक्षिण भारत के प्रतिभाशाली और लोकप्रिय अभिनेता कमल हासन ने यह सच बयानी की तो कट्टर हिंदुवादियों का खून खौल उठा और उन्हें परेशान करने और सबक सिखाने की गरज से हिन्दू वादी संगठन हिन्दू मुनानी काटची ( एच एम के ) के एक सदस्य आदिनाथ सुंदरम जिनके नाम से ही हिन्दुत्व महकता है ने उनके खिलाफ महाभारत और उसके पात्रों का अपमान करने व हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर पी आई एल दाखिल कर दी.

एच एम के के मुखिया अर्जुन सम्पत ( जुए वाले नहीं ) ने आरोप लगाया कि कमल हासन लगातार हिन्दू विरोधी बयान देते रहे हैं और बीते कुछ दिनों में इसमें और इजाफा हुआ है उन्होंने बेवजह ही महाभारत की आलोचना की है जो रामायण के बाद हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा है. क्या वे इतनी शर्मनाक टिप्पणी इस्लाम, कुरान ईसाई धर्म या बाइबिल पर कर सकते हैं अगर कमल हासन माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाई जाएगी. असल में वे एक बड़े अपराधी हैं जो जन्मना तो  ब्राह्मण हैं पर हैं हिन्दू और ब्राह्मण विरोधी और वह हर उस चीज के विरोधी हैं जो तमिलनाडु और भारत के लिए अच्छी है.

देखा जाए तो एच एम के गलत कुछ नहीं कह रहे हैं कि जुआ बड़ा अच्छा और रोमांचक खेल है और यह देश हित में है. इस देश हित के काम में आजकल मोबाइल फोन, घड़ी, अंगूठी, चेन और पेन तक दांव पर लग जाते हैं. द्वापर में पांडवों को पत्नी तक दांव पर लगानी पड़ी थी हालांकि इस पर तत्कालीन धूत विशेषज्ञों ने तकनीकी एतराज यह जताया था कि चूंकि पांडव राजपाट के अलावा खुद को भी हार चुके थे इसलिए उन्हें द्रौपदी को दांव पर लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं.  लेकिन यह धर्म ही है जो नैतिक अनैतिक के पचड़े में नहीं पड़ता, आज भी यही हो रहा है.

कमल हासन ने कोई नई बात नहीं कही है. सदियों से लोग इस बात को लेकर हैरान परेशान हैं कि इन धार्मिक जुआरियों की इज्जत क्यों की जाती है? कंटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था इसका जबाब किसी के पास नहीं. इसी तरह पांचाली को दांव पर क्यों लगाया गया यह जिज्ञासा जिज्ञासा ही बनी हुई है. पर इसमें कोई शक नहीं कि स्त्री तब भी सामान थी और आज भी है और पूरी उम्मीद है कि आगे भी रहेगी क्योंकि एच एम के जैसे कट्टर हिंदुवादी संगठन यही चाहते हैं.

कमल हासन का गुनाह नाकाबिले माफी है उन्हें सजा और प्रताड़ना मिलनी ही चाहिए जो उन्होंने एक धार्मिक विसंगति के बाबत मुंह खोलने की जुर्रत की. अब यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं की अगर वाकई महाभारत रामायण के बराबर आस्था का ग्रंथ है तो हिन्दू उसे घरों मे क्यों नहीं रखते? इसके साथ ही यह मांग क्यों नहीं करते कि जुए को कानूनी मान्यता दी जाये और पत्नियों को दांव पर लगाने की भी छूट दी जाये क्योंकि धर्म ग्रंथ इसकी अनुमति देते हैं. हम हिन्दू राष्ट्र की घोषणा से कितने कदमों की दूरी पर हैं यह किसी से नहीं छिपा पर कमल हासन के पांव तमिलनाडु की राजनीति में पड़ चुके हैं यह साफ दिख रहा है.

जयललिता की मौत के बाद वहां एक अदद शून्य है जो कोई फिल्म अभिनेता ही भर सकता है और जयललिता के ही नक्शे कदम पर चल रहे एक दूजे के.बासु का नाम और चेहरा इसके लिए बुरा नहीं जिसने हिन्दुत्व और ब्राह्मण विरोधी रास्ता चुना उलट इसके एक दूसरे चमत्कारी अभिनेता रजनीकान्त का झुकाब भाजपा की तरफ दिख रहा है यानि एम जी आर और करुणानिधि के नए अवतार प्रकट हो चुके हैं.

कमल हासन ने अपनी मंशा महाभारत और द्रौपदी की आड़ मे जता दी है अब बारी रजनीकान्त की है जिनकी हिंदूवादियों से डील कुछ शर्तों पर अटकी पड़ी है. आर एस एस भी जल्द इस महाभारत में कूद सकता है बस दिल्ली से कर्मयोगी कृष्ण का इशारा मिलने की देर भर है जो उत्तर प्रदेश की विजय के बाद थोड़ा विश्राम कर रहे हैं.

अच्छी बात यह है कि कमल हासन जैसा और जितना विरोध चाह रहे हैं वह हो रहा है यह उनकी पहली पौ बारह है. पर मुद्दे की बात और संदेश यह है कि धर्म के बारे में बोलना गुनाह है और जो बोले सो वो राष्ट्र द्रोही, पाकिस्तान समर्थक, नास्तिक, पतित और वामपंथी है जो पौराणिक सच बोलकर देश के टुकड़े करना चाहता है लेकिन कमल हासन गुरमेहर नहीं हैं जो घबराकर घर लौट जाएंगे. वे तमिलनाडु की कमजोर नस पकड़ कर मैदान में हैं कि ब्राह्मणवाद नहीं चलेगा, लेकिन द्रविड़ आंदोलन नए तरीके से चलेगा जिसकी अगुवाई एक ब्राह्मण ही करेगा.

‘आउट ऑफ फ्रेम’ राजनाथ सिंह

उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुमत वाली सरकार में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनउ के सांसद और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आउट ऑफ फ्रेमनजर आ रहे हैं. योगी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सबसे किनारे बैठे हुये थे. वह भी इतना की फोटो फ्रेमके ही बाहर थे.

उत्तर प्रदेश की राजनीति के फ्रेममें रहने वाले राजनाथ सिंह ऐसे ही आउट औफ फ्रेमथे या इसकी कोई गंभीर वजह है यह अभी साफ नहीं हो पा रहा है. जिस तरह से योगी सरकार में कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को जूनियर होते हुये भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और सालों से पार्टी संगठन का काम कर रहे राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को दरकिनार किया गया उससे लगता है कि राजनाथ सिंह के आउट ऑफ फ्रेमरहने की वजह खास है.

भाजपा में राजनाथ सिंह का राजनीतिक कद किसी भी दूसरे नेता से बड़ा है. वह राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री जैसे सभी खास पदो पर रहे हैं. गृहमंत्री के रूप में भी वह केन्द्र सरकार के सबसे भरोसेमंद पद पर हैं. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की जब रेस चल रही थी तो पूरे प्रदेश की जनता की पसंद नम्बर एक राजनाथ सिंह थे.

हालाकिं खुद राजनाथ सिंह हमेशा इस बात से इंकार करते रहे. ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि प्रदेश सरकार के गठन में राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को मंत्री पद जरूर दिया जायेगा. भाजपा में इस बार विधानसभा का टिकट देने से लेकर मंत्री पद देने तक परिवारवाद का खूब जोर चला. पार्टी को परिवारद का मुद्दा बेकार का लगा. ऐसे में पंकज सिंह के सामने कोई मजबूरी नहीं थी.

पकंज सिंह लंबे समय से पार्टी संगठन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. वह संगठन में महामंत्री के रूप में काम करते रहे हैं. पंकज सिंह को पहले भी विधानसभा का टिकट मिल चुका था पर वह चुनाव नहीं लड़े थे. इस बार वह अच्छी वोट से चुनाव जीते. अखिलेश सरकार के समय सड़कों पर उतर कर कई धरना प्रदर्शन की अगुवाई की थी और पुलिस से लाठी भी खाई थी. पार्टी में प्रदेश स्तर पर उनका कोई विरोध भी नहीं था. ऐसे में पूरी उम्मीद थी कि भाजपा की बहुमत वाली सरकार में उनको मंत्रिमंडल में शामिल किया जायेगा. अगर जूनियर होने के तर्क पर उनको सरकार में शामिल नहीं किया गया तो कल्याण सिंह के बेटे संदीप सिंह को कैसे शामिल किया गया यह सवाल उठता है?

परिवारवाद अब भाजपा के लिये कोई अछूत शब्द नहीं रह गया है. ऐसे में यह बात सामने आ रही है कि राजनाथ के आउट ऑफ फ्रेमहोने की वजह से ही पंकज सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया. भाजपा का पक्ष हो सकता है कि मंत्रिमंडल में किसी को लेना या न लेना मुख्यमंत्री का अपना अधिकार होता है. बचाव के लिये इस तर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है. सही मायानों में अब यह तर्क मायने नहीं रखता. मंत्री के चुनाव में मनमानी से अधिक तमाम तरह के समीकरण काम करते हैं.

भाजपा के कुछ नेता यह भी कहते हैं कि पंकज सिंह के लिये पार्टी ने अच्छा बड़ी जिम्मेदारी सोच रखी है. समय आने पर उनको सौंपी जायेगी. राजनीति में नेता कब फ्रेम के अंदर रहता है और कब फ्रेम के बाहर रहता है यह पार्टी जरूरत पर निर्भर करता है.

आईपीएल में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड है इन खिलाड़ियों के नाम

आईपीएल 2017 को शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं. बल्लेबाजों के अलावा गेंदबाजों ने भी आइपीएल में बढ़-चढ़कर भूमिका अदा की है. हम आपको बता रहे हैं कि किन गेंदबाजों के नाम आईपीएल में अब तक सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है. तो आइए डालते हैं नजर.

लसिथ मलिंगा

श्रीलंका के लसिथ मलिंगा साल 2009 आईपीएल से ही मुंबई इंडियंस टीम की ओर से खेल रहे हैं. साल 2016 आईपीएल में वह चोटिल होने के कारण नहीं खेल पाए थे. बावजूद इसके वह आईपीएल में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उन्होंने अब तक 98 मैचों में 17.80 की बेहतरीन औसत के साथ 143 विकेट लिए हैं.

ड्वेन ब्रावो

वेस्टइंडीज टीम के हरफनमौला खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो पिछले कुछ सालों से आईपीएल में गेंदबाजी के दमपर खूब चमक रहे हैं. वह अक्सर अपनी धीमी गेंदों से बल्लेबाजों को भौंचक्का छोड़ देते हैं. ब्रावो साल 2008 से ही आईपीएल में सक्रिय हैं. वह अब तक 106 मैचो में 122 विकेट ले चुके हैं.

अमित मिश्रा

भारत के अमित मिश्रा साल 2008 से ही आईपीएल में सक्रिय हैं. वह अब तक डेक्कन चार्जस, दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से खेल चुके हैं. साथ ही वह आईपीएल में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर हैं. वह अब तक कुल 112 मैचों में 23.53 की औसत से 124 विकेट अपने नाम कर चुके हैं.

हरभजन सिंह

हरभजन सिंह साल 2008 से ही आईपीएल में सक्रिय हैं और वह शुरू से ही मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा रहे हैं. इस दौरान उन्होंने मुंबई इंडियंस टीम की कप्तानी भी की है. हरभजन ने अब तक 125 मैचों में 119 विकेट लिए हैं.

पीयूष चावला

भारतीय टीम से लंबे समय से बाहर चल रहे स्पिन गेंदबाज पीयूष चावला साल 2008 से ही आईपीएल में सक्रिय हैं. इस दौरान उन्होंने 123 मैचों में 120 विकेट निकाले हैं और उनका गेंदबाजी का औसत 25.68 रहा है.

ऐसे खतरनाक बांउसर्स की बल्लेबाज को छोड़ना पड़ा मैदान

क्रिकेट इतिहास में बल्लेबाज गेंदबाज को पस्त करने के लिए तरह-तरह के शॉट खेलता है. तो वहीं गेंदबाज बल्लेबाज को रोकने के लिए यॉर्कर, रिवर्स स्विंग और बाउंसर जैसी गेंदों को हथियार की तरह उपयोग में लाता है.

गेंदबाज के पास जो हथियार सबसे घातक होता है वो है बाउंसर. गेंदबाज बाउंसर का इस्तेमाल ना सिर्फ बल्लेबाजों को रन बनाने से रोकने के लिए करता है बल्कि अच्छी बाउंसर गेंद बल्लेबाज के मन में डर भी पैदा करती है.

क्रिकेट इतिहास में बहुत से गेंदबाजों ने खतरनाक बाउंसर गेंदें फेंकी हैं. आइए कुछ ऐसी ही खतरनाक बाउंसर गेंदों के बारे में आपको बताते हैं.

शोएब अख्तर बनाम गैरी कर्स्टन

दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज रहे शोएब अख्तर ने ना सिर्फ अपनी पेस से बल्लेबाजों का दिल दहलाया बल्कि अपनी जबड़ा तोड़ने वाली बाउंसर से भी बहुत से बल्लेबाजों का हौसला पस्त किया. 2003 में अख्तर की एक बाउंसर साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज गैरी कर्स्टन को लगी जिसके बाद कर्स्टन कभी क्रिकेट नहीं खेल सके.

ब्रायन लारा बनाम शोएब अख्तर

बाउंसर की रफ्तार अगर 150 किमी प्रति घंटे से ज्यादा हो तो बल्लेबाज कोई भी हो खेलना मुश्किल हो जाता है. वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने शोएब अख्तर की आंधी की रफ्तार वाली बाउंसर झेली और मैदान पर किसी कटे पेड़ की तरह गिर पड़े.

एंडी लॉयड बनाम मैल्कम मार्शल

वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज मैल्कम मार्शल अपनी जबड़ा तोड़ने वाली बाउंसर के लिए जाने जाते थे. मार्शल 1984 में पहले टेस्ट के दौरान इंग्लैंड के एंडी लॉयड को एक बाउंसर डाली थी जो उनके सिर पर लगी और लॉयड जमीन पर गिर पड़े. अगले कुछ दिनों तक लॉयड अस्पताल में रहे.

फिल ह्यूज बनाम शॉन एबट

एक बाउंसर गेंद कितनी घातक हो सकती है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया के युवा बल्लेबाज फिल ह्यूज की मौत सिर में एक बाउंसर लगने की वजह से हुई थी. फिल ऑस्ट्रेलिया के ही तेज गेंदबाज शॉन एबट की बाउंसर से चोटिल होकर मैदान पर गिरे और फिर कभी नहीं उठ पाए.

पीटर कर्स्टन बनाम ग्लेन मैक्ग्रा

अपनी सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर रहे ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने 1993 में साउथ अफ्रीकी बैट्समैन पीटर कर्स्टन को एक बाउंसर फेंकी थी जिसको खेलने वो नाकाम रहे है और गेंद सीधा उनके चेहरे के अगले हिस्से में लगी और वो बेसुध होकर मैदान में ही गिर पड़े.

शिवनारायण चन्द्रपॉल बनाम ब्रेट ली

वेस्टइंडीज टेस्ट टीम की रीढ़ रहे शिवनारायण चन्द्रपॉल ने दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में एक ब्रेट ली की बाउंसर सिर पर झेली इसके बाद वो मैदान में कुछ इस तरह गिरे जिसे देखकर हर किसी की सांस थम गई.

सूरज शर्मा के जीवन और प्यार का दर्शन

दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से दर्शन शास्त्र की पढ़ाई कर चुके ‘लाइफ ऑफ पाई’,‘उमरीटा’, ‘होमलैंड’ और बॉलीवुड फिल्म ‘फिलौरी’ फेम अभिनेता सूरज शर्मा पर दर्शन शास्त्र की पढ़ाई का अच्छा खास असर है. इसी के चलते उनका जीवन दर्शन शास्त्र भी अलग है. अपने जीवन दर्शन की बात करते हुए सूरज शर्मा कहते हैं, ‘‘मेरा जीवन दर्शन यह है कि अगर आप किसी चीज पर यकीन करो, तो उसमें भी कहीं न कहीं थोड़ी जगह ऐसी छोड़ो, जहां आप उस पर भी शक कर सकें. जिससे आप आगे बढ़ सकें. बिना सोचे समझे किसी भी राह पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए. इसलिए सवाल करना जरूरी है. मेरा मानना है कि जिंदगी में बदलाव के अलावा कुछ भी स्थिर नहीं है.’’

तो वहीं प्यार को लेकर अपने जीवन दर्शन को संदर्भ में सूरज शर्मा ने कहा,‘‘मेरे लिए पहली प्राथमिकता पारिवारिक प्यार है. उसके अलावा दोस्तो में जो प्यार मिलता है, वैसा प्यार कहीं नहीं मिलेगा. कुछ लोग प्यार के चक्कर में अपने दोस्तों को छोड़ देते हैं. कुछ समय बाद पता चलता है कि जिस प्यार के चक्कर में दोस्तों को छोड़ा था, वह प्यार भी चला गया और दोस्त भी चले गए. मेरे हिसाब से प्यार दोस्तों में है. यदि आपको किसी से प्यार होगा, तो पहले उससे आपकी दोस्ती ही होगी. रोमांस बाद में होगा. क्योंकि दोस्ती में ही कम्पेनियनशिप व कंफर्टशिप तय होती है.’’

सूरज शर्मा और स्कूल के दोस्त

सूरज शर्मा भले ही अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभिनेता है. मगर स्कूल व कॉलेज के उनके जो दोस्त रहे हैं, उनसे उनकी आज भी दोस्ती है. खुद सूरज शर्मा बताते हैं- ‘‘मेरे कई दोस्त हैं. मेरे कुछ दोस्त मेरी चार साल की उम्र से चले आ रहे हैं. लक्की हं. मेरे यह दोस्त अलग-अलग काम कर रहे हैं. पर यह भी है कि यह जरुरी नही है कि हम हर दिन बात करें. मैं हंसी मजाक में यकीन करता हूं. दोस्ती में हम किसी को भी ग्रांटेड मानकर नहीं चलते. हमें दोस्ती निभाने के लिए सुनना पड़ता है.’’

अब आपका घर का सपना होगा पूरा

हर इंसान का अपना घर का सपना होता है. पर कई बार सही वक्त पर सही प्लैनिंग के अभाव में तो कई बार पैसों की कमी के कारण लोग अपना आशियाना नहीं बसा पाते हैं. पर जल्द ही आपका अपना घर का सपना पूरा हो सकता है.

केंद्र सरकार मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए तोहफा लेकर आई है. सरकार ने मिडल क्लास को टारगेट करते हुए हाउसिंग लोन में 3-4 पर्सेंट छूट देने की घोषणा की है. मध्यम आय वर्ग के लिए कम ब्याज दर पर होम लोन मुहैया कराने के लिए तैयार दिशानिर्देशों को जारी किया गया है. ऐसे लोगों को 12 लाख रुपये तक की लोन राशि पर ब्याज में तीन से चार फीसदी तक की छूट मिलेगी.

'सबको मकान' देने की सरकार की घोषणा के तहत मध्यम आय वर्ग के लोगों को भी सस्ता होम लोन देने का फैसला किया गया है. सस्ते होम लोन से मध्यम आय वर्ग को घर लेने में आसानी होगी. 20 साल की अवधि वाले होम लोन पर अधिकतम 2.35 लाख रुपये की ब्याज सब्सिडी देने का प्रावधान है. अविवाहित युवाओं को भी यह सुविधा मिल सकती है. इस स्कीम के तहत लोन आवेदनकर्ता को प्रोसेसिंग फीस भी नहीं देनी पड़ेगी.

एन आर आई मां के किरदार में लारा की वापसी

खबर है कि पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता अपनी दूसरी होम प्रोडक्शन फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी की तैयारी कर रही हैं और इस बार भी उनका साथ विनय पाठक दे रहे हैं, जिन्होंने लारा की डेब्यू होम प्रोडक्शन में पेरेलल लीड रोल निभाया था.

लारा दत्ता भूपति ने अपने बैनर भीगी बसंती एंटरटेनमेंट के तले 'चलो दिल्ली' का निर्माण किया था. इस फिल्म में लारा के साथ पेरेलल लीड रोल में विनय पाठक नजर आए थे, जबकि अक्षय कुमार ने केमियो किया था. फिल्म को दर्शकों ने भी सराहा था. अब लारा की दूसरी होम प्रोडक्शन फिल्म को सुशील राजपाल के निर्देशन में बनाए जाने की खबर है. सुशील राजपाल फिल्म 'अंतर्द्वंद्व' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं. फिल्म की कहानी बेहद दिलचस्प है. लारा सिंगल NRI मॉम के रोल में हैं, जो उस अज्ञात स्पर्म डोनर की खोज में भारत आती हैं, जिसकी वजह से वो मां बनी हैं.

दूसरी फिल्म लाने में लारा को लगभग सात साल का लंबा वक्त लग गया. हालांकी लारा की आने वाली फिल्म का अभी नाम निर्धारित नहीं हुआ है. लारा की तरफ से जारी स्टेटमेंट में इस बारे में कहा गया है- ''हम ऐसी कहानी की तलाश में थे, जिसमें ह्यूमर और इमोशंस का मेल हो, जैसा कि फिल्म “चलो दिल्ली” में था और अब ऐसी कहानी मिल गई है. अच्छी कहानियों को दिलचस्प किरदारों के जरिए पर्दे पर जीवित करना और लोगों को एक साथ रुलाना और हंसाना सुकून देता है.''

फिल्म की शूटिंग इसी साल जून में शुरू होगी.

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