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कहानी का होगा कोरियन रीमेक

वैश्वीकरण का प्रभाव सिनेमा पर तेजी से नजर आ रहा है. कई सफलतम कोरियन फिल्मों का हिंदी में रीमेक हो चुका है. पर अब पहली बार किसी हिंदी फिल्म का कोरियन रीमेक होने जा रहा है. जी हां! चार साल पहले प्रदर्शित विद्या बालन के अभिनय से सजी रहस्य व रोमांच प्रधान फिल्म ‘‘कहानी’’ का कोरियन रीमेक होने जा रहा है. इस बात की जानकारी फिलहाल फिल्म ‘‘कहानी’ ’के निर्देशक सुज्वॉय घोष ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर दी है. अब देखना है कि क्या किसी अन्य भारतीय फिल्म को भी यह अवसर मिलेगा?

मुझे अपने गांव के पास के ही एक गांव की कालेज की छात्रा से प्यार हो गया है. मैं क्या करूं.

सवाल

मुझे अपने गांव के पास के ही एक गांव की कालेज की छात्रा से प्यार हो गया है. एक दिन उस के ट्यूशन पढ़ने के लिए जाते वक्त मैं ने उसे अपने प्यार के बारे में बताने के लिए आवाज दे कर रोका. मैं कुछ कह पाता, उस से पहले ही वह मुझे पागल कह कर चली गई. वह हमेशा मेरी ओर देखा करती थी, जिस से मुझे लगा था कि वह भी मुझे पसंद करती है. मैं क्या करूं?

जवाब

कोई राह चलती लड़की कभीकभार नजरें उठा कर देख ले तो उसे प्यार नहीं समझना चाहिए. बात साफ है कि वह आप से प्यार नहीं करती. आप से रहा न जाए, तो कोई बहाना निकाल कर एक बार उस से दोटूक बात कर लें. वह मान जाए तो आगे बढ़ें, वरना उस का पीछा करना छोड़ दें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

लंबे समय तक बचत के लिए यूं करें निवेश

लॉन्ग टर्म सेविंग के लिए इन्वेस्टमेंट करना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे आपकी कमाई बढ़ जाएगी. सेविंग करने से पहले अपना इन्वेस्टमेंट प्लैन जरूर बनाएं, जिससे आपका महीने का बजट भी न बिगड़े और बचत करने से आय में भी बढ़ोत्तरी हो जाए. जानिए ऐसे ही कुछ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के बारे में जो आपकी कमाई को लॉन्ग टर्म में काफी बढ़ा देंगे.

बचत के साथ निवेश भी जरूरी

आपको सिर्फ बचत ही नहीं करना है बल्कि बचत को सही प्रकार और सही जगह निवेश करना भी जरूरी है. इसकी वजह है कि निवेश ही एक मात्र माध्यम है, जिसकी मदद से आप रुपए की गिरती कीमत से खुद को सुरक्षित कर सकते हैं. साथ ही ऐसा निवेश आपको भविष्य में भी सुरक्षा प्रदान करता है.

साल की शुरुआत में ही लॉन्ग टर्म गोल तय कर लें. इसी तरह इन्वेस्टमेंट प्लानिंग करें ताकि आपको टैक्स में ज्यादा से ज्यादा छूट मिल सके. इसके लिए आप मेडिकल इन्श्योरेंस ले सकते हैं,एनपीएस या पीपीएफ में निवेश कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आपकी फैमिली में बेटी है तो उसके नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट खोल सकते हैं जिस पर आप साल भर में अच्छी खासी सेविंग कर सकते हैं.

छोटी बचत से करें शुरुआत

इन्वेस्टमेंट प्लानिंग इस तरह से करें की हर महीने आपकी थोड़ी बहुत सेविंग हो सके. इसके लिए अगर आपने पहले से किसी तरह की कोई सेविंग प्लान दिमाग में तैयार नहीं किया है तो उसके बारे में पहले से पता करें और उसके बाद इन्वेस्‍टमेंट का खाका तैयार करें. शादी के बाद इस तरह का प्लानिंग करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे आपको इमरजेंसी के वक्त पैसों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

बैंक में खोल सकते हैं आरडी अकाउंट

आप अपने बैंक की मदद से एक आरडी अकाउंट खोल सकते हैं. आरडी अकाउंट आप उसी बैंक में खोलें जिसमें आपका पहले से सेविंग अकाउंट हो. ऐसा इसलिए है, क्योंकि इससे आपको केवाईसी दुबारा से नहीं करवानी पड़ेगी. आप बैंक में अपने आरडी अकाउंट को सेविंग अकाउंट से लिंक करा सकते हैं. इससे आपके सेविंग अकाउंट से एक निश्चित रकम आरडी अकाउंट में ऑटोमैटिक तरीके से ट्रांसफर हो जाएगी, जिससे आपको बैंक में हर महीने चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. आप 100 रुपए प्रति माह की छोटी सी रकम से इस तरह का अकाउंट खोल सकते हैं.

ईपीएफ में करें निवेश

इंप्लॉई प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) बचत और निवेश का एक बेहतरीन जरिया है. यह आपकी सैलरी आपके हाथ आने से पहले ही काट लिया जाता है. यह दूसरे निवेश माध्यमों के मुकाबले लंबी अवधि के लिए होता है. इसके दो फायदे होते हैं, पहला टैक्स सेविंग और दूसरा बेहतर रिटर्न. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इसके लिए आपको कोई खास कोशिश भी नहीं करनी पड़ती.

टर्म लाइफ इन्श्योरेंस पॉलिसी

खरीदें टर्म लाइफ प्लान वाली इन्श्योरेंस पॉलिसी खरीदना आपके लिए लॉन्ग टर्म में फायदेमंद होता है. हमसे से ज्यादातर लोग पॉलिसी लेने से बचते हैं, लेकिन इसको लेकर आप जीवन में आने वाले कई बड़े खर्चों को प्रीमियम अमाउंट से पूरा हो सकता. मकान खरीदना, बच्चों की हाई एजुकेशन, उनकी शादी,रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली इनकम और एक्सीडेंट व बड़े ऑपरेशन के दौरान होने वाले खर्चों को आप इस पॉलिसी के अमाउंट से कवर हो सकते हैं.

पोस्‍ट ऑफिस की एनएससी

पोस्‍ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट एक बेहतर ऑप्‍शन साबित हो सकता है. पोस्‍ट ऑफिस से आप 1000 रुपए से 10,000 रुपए तक की एनएससी अपने अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी खरीद सकते हैं. पोस्‍ट ऑफिस की यह स्‍कीम देश के किसी भी पोस्‍ट ऑफिस से खरीदी जा सकती है.

गोल्‍ड बॉन्ड

सरकार ने गोल्‍ड बांड स्कीम को लॉन्‍च किया हुआ है. इसमें 2 ग्राम गोल्ड से लेकर अधिकतम 500 ग्राम तक गोल्ड पर बांड लेने का ऑप्शन है. आप अपनी पत्‍नी को सोने का सिक्‍का, गहने न खरीद कर गोल्‍ड बांड दे सकते हैं. गोल्‍ड बांड पर आपको 2.75 फीसदी की दर से सालाना ब्‍याज ऑफर किया जाएगा. इस पर रिटर्न भी मिलेगा. हालांकि इसके रिटर्न पर आपको टैक्स चुकाना होगा.

मैं 17 साल की हूं और 20 साल के एक लड़के को बहुत चाहती हूं. एक दूसरा लड़का भी मुझे चाहता है. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 17 साल की हूं और 20 साल के एक लड़के को बहुत चाहती हूं. वह भी मुझे चाहता है और शादी करना चाहता है. एक दूसरा लड़का भी मुझे चाहता है. मैं ने उसे मना किया है, पर वह मानता ही नहीं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप की उम्र प्यार व शादी के लायक नहीं है. अच्छे लड़कों से दोस्ती ठीक है, पर आगे न बढ़ें, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और अकेले में लड़कों से न मिलें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

सिर्फ राजा का नहीं, प्यादों का भी खेल है शतरंज

जिस देश के लोगों की रगों में बस क्रिकेट दौड़ता हो उस देश में किसी और खेल की बात करने में हिम्मत तो लगती ही है. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हमारे यहां क्रिकेट के मुकाबले दूसरे खेलों को कम तवज्जो दी जाती है. अन्य खेलों के खिलाड़ी कई तरह की परेशानियों से गुजरते हैं. गौरतलब है कि अगर कोई खिलाड़ी पदक जीत के लाता है तो देश के हुक्मरान और बड़ी हस्तियां उन्हें धन से सराबोर कर देते हैं. पर फतह से पहले की तैयारी के लिए कई खिलाड़ियों को जद्दो-जहद करनी पड़ती है.

अपने देश में न जाने कितने माता-पिता तो ऐसे हैं कि सफलता की आस में बच्चों को जबरदस्ती ऐसे खेलों की तरफ ढकेलते हैं, जिनमें उन्हें रूचि ही नहीं होती. मैरी कॉम के पिता भी उन्हें एथलेटिक्स पर ध्यान देने को कहते थे जबकि मैरी बॉक्सिंग करना चाहती थी. आलम यह है कि अब क्रिकेटर ही दूसरे खेलों को लोकप्रिय बनाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि खेल, खेल होता है, कोई स्टॉक मार्केट का शेयर नहीं, जिसमें किसी शेयर से ज्यादा रिटर्न मिले और किसी से कम.

कई बार ऐसा भी देखा गया है कि विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी खिलाड़ियों को वह शौहरत नहीं मिलती जिसके वे हकदार हैं. अब कई वेबसाइट ऐसे खिलाड़ियों के बारे में लिखने लगे हैं, पर बात वही है, जो दिखता है वो बिकता है.

आज हम दूसरे खेलों की पैरवी करने नहीं आए हैं, पर पाठकों के ज्ञान चक्षुओं को खोलना तो फर्ज है न?  

शतरंज… बहुत से लोग इसे चौसर से मिलाकर देखते हैं. पर चौसर तो जुआ है, पर शतरंज सिर्फ बुद्धि का खेल है. शतरंज में शारीरिक बल किसी काम नहीं आता, इसमें बुद्धि ही काम आती है.

विश्व में कुछ लोगों को शतरंज का नशा है. इस खेल में खिलाड़ियों में अपने प्रितद्वंदी को जल्द से जल्द ‘चेकमेट’ करने की होड़ लगी रहती है. कुछ लोगों ने इस खेल में महारत हासिल की है, पर यह उतना लोकप्रिय नहीं है.  

आज हम आपको शतरंज के बारे में ही कुछ ऐसे तथ्य बताएंगे जिनसे आप वाकिफ नहीं होंगे.

1. शतरंज है अपनी विरासत का हिस्सा

आज ‘ब्लीड ब्लू’ के नारों से गूंजने वाले देश में ही शतरंज की उत्पत्ति हुई थी. इसके उत्पत्ति काल को लेकर इतिहासकारों में मतांतर है पर यह पूरी दुनिया मानती है कि शतरंज भारत की ही देन है. 6वीं शताब्दी के आस-पास भारत में शतरंज खेला जाता था. पश्चिमी देशों तक पहुंचते-पहुंचते इसे हजारों साल लग गए. 15वीं शताब्दी में शतरंज ने स्पेन का रूख किया.

2. पहला अंतर्राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट

विश्व का पहला अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट भारत में नहीं ब्रिटेन में 1851 में आयोजित किया गया था.

3. फोल्डिंग चेसबोर्ड

फोल्डिंग चेसबोर्ड का आविष्कार चर्च के पादरी ने 1125 में किया था. उस वक्त चर्च से जुड़े लोगों के चेस खेलने पर पाबंदी थी. इसलिए पादरी ने एक ऐसे चेसबोर्ड का आविष्कार किया. यह चेसबोर्ड बाहर से किताबों की तरह दिखता था, पर असल में यह एक चेसबोर्ड था.

4. शतरंज के महारथी का ताज

डॉ इमानुएल लस्कर 26 साल, 337 दिनों के लिए विश्व चैंपियन थे. इतने दिनों तक वे किसी भी खिलाड़ी से विश्वस्तर पर नहीं हारे. गौर करने वाली बात है कि लस्कर और अल्बर्ट आइंसटाइन अच्छे दोस्त थे.

5. सबसे ज्यादा चालें

शतरंज के खेल में सबसे ज्यादा चालें चलने का रिकॉर्ड निकोलिक और अर्सोविक के नाम दर्ज है. इन दोनों ने मिलकर एक गेम में 269 चालें चली. ध्यान देने वाली बात यह कि शतरंज की बिसात में 5,949 चालें चली जा सकती हैं.

6. दिमाग तेज करने के लिए सबसे बेहतर

सुडोकु, पज्जल, पहेलियां आदि के अलावा शतरंज भी दिमाग तेज करने में मददगार है. एल्जाइमर से पीड़ित रोगियों को शतरंज खेलने के लिए प्रेरित किया जाता है. स्कूल में भी छोटे बच्चों को शतरंज खेलने को कहा जाता है. कुछ शोधों से पता चला है कि शतरंज खेलने वाले बच्चे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं.

7. चैंपियन बनने की नहीं होती कोई उम्र

चेस चैंपियन बनने की कोई उम्र नहीं होती. आप किसी भी उम्र में शतरंज सिखना और खेलना शुरु कर सकते हैं. ऑस्कर शैपिरो 74 साल की उम्र में चेस मास्टर बनें वहीम जॉर्डी मॉन्ट रेनॉड मात्र 10 साल की उम्र में ही चेस चैंपियन बन गए थे.

8. सिर्फ राजा और सामंतों का था अधिकार

जैसा कि और भी कई चीजों पर था, शतरंज पर भी सिर्फ राजा और सामंतों का ही अधिकार था. इसे राज घराने के लोग या अमीर लोग ही खेलते थे. किसी जमाने में शतरंज को ‘गेम ऑफ किंग्स’ भी कहा जाता है.

अगर आप भी अपनी बुद्धि तेज करना चाहते हैं, तो शतरंज जरूर खेलें. बाद बाकि आईपीएल कुछ दिनों में शुरु होने ही वाला है, और आप फिर अपने पसंदीदा टीमों को देखने के लिए टीवी से चिपक ही जाएंगे.

पुरानी फिल्मों के ये गीत, अब नयी फिल्मों में

बॉलीवुड में कुछ लोकप्रिय गीतों की बात की जाए तो पिछले एक साल से अब तक बहुत तेजी से विकास हुआ है, खासकर के पुराने गानों को नये समय में, नये ढंग से पेश करना. हांलाकि रीमिक्स हमेशा से बॉलीवुड में मौजूद रहे हैं.

पिछले एक साल में आपने भी देखा होगा कि पिछली फिल्मों के क्लासिक गानों को फिर से नयी कल्पना और उनमें नया काम करके के दिखाया गया है. उनमें से कुछ हिट भी हुए हैं. इनमें से ज्यादातर याद करने योग्य भी थे.

यहां हम सात ऐसे क्लासिक गाने लेकर आएं हैं, जिन्हें पिछले साल से लेकर अब तक नई बॉलीवुड फिल्मों के जरिए, इन्हीं फिल्मों के लिए फिर से बूट करके दिखाया गया है.

1. पल पल दिल के पास

साल 1973 में आई फिल्म ‘ब्लैकमेल’ से किशोर कुमार का गीत ‘पल पल दिल के पास’ को दोबारा से साल 2016 में फिल्म ‘वजह तुम हो’ के लिए बनाया गया. पर अरिजीत सिंह की जैसे गायक की सुंदर आवाज भी, लोगों को इस नये संस्करण को नापसंद करने से नहीं रोक सकी.

2. ऐ जिन्दगी गले लागा ले

साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘ऐ जिन्दगी’ का गाना ‘ऐ जिन्दगी गले लगा ले’, साल 1983 में आई फिल्म ‘सदमा’ का एक भावनात्मक गीत है. साल 2016 में ये गाना गायक अरिजित सिंह और फिल्म की अभिनेत्री आलिया भट्ट द्वारा गाया गया है. दर्शक दोनों ही संस्करणों को उतने ही उत्साह के साथ पसंद करते हैं, लेकिन इसका मूल गीत हमेशा हमारे दिल में एक विशेष स्थान पर ही रहेगा.

3. हम्मा हम्मा

फिल्म ‘बॉम्बे’ से लिया गया एक गीत, 2017 में आई फिल्म ‘ओके जानू’ में दर्शकों को एक रीमेक की तरह मिला, जो इस बार पूरा रैप सेक्शन से भरा हुआ था.

4. लैला मैं लैला

यह गाना मूल रूप से साल 1980 की फिल्म ‘कुर्बानी’ में था, और इसे अभिनेत्री जीनत अमान पर फिल्माया गया था. वे स्वयं इस बात से खुश हैं कि नई पीढ़ी उनके इस गीत को सुन पा रही है.

5. सारा जमाना

अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म याराना का सबसे यादगार गीत ‘सारा जमाना’, वाकई अविस्मरणीय है. अब आप चाहे जिस भी पीढ़ी के हो उस वक्त भी इसे बहुत पसंद किया गया और आज भी इस गीत के नए संस्करण को उर्वशी रौतेला के साथ बहुत पसंद किया जा रहा है.

6. तम्मा तम्मा लोगे

माधुरी दीक्षित और संजय दत्त के इस गीत को इस साल आई फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के लिए दोबारा, नये ढंग से बनाया गया, जिसमें वरुण धवन और आलिया भट्ट थिरकते नजर आते हैं.

पहले भी और आज भी जब भी हम इस तम्मा तम्मा गीत का आनंद लेते थे, तो वास्तव में पागल और ऊर्जावान महसूस करते हैं.

7. तू चीज बडी है मस्त मस्त

एक बेहद ऊर्जावान कहा जाने वाला गीत, साल 1994 में रवीना टंडन और अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘मोहारा’ से लिया गया है जिसका हाल ही में फिल्म मशीन के लिए रिमिक्स बनाया गया है.

इस भारतीय खिलाड़ी को बोल्ड करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन भी था

टेस्ट क्रिकेट को बल्लेबाज की असल अग्निपरीक्षा माना जाता है. कारण साफ है, क्योंकि क्रिकेट के इस प्रारूप में बल्लेबाज के धैर्य और गेंद को उसकी गुणवत्ता के आधार पर खेलने के लिए जाना जाता है. ऐसी परिस्थिति में जो बल्लेबाज अपने आपको सर्वश्रेष्ठ साबित करता है वही बेहतरीन बन जाता है. क्रिकेट में अगर कोई बल्लेबाज बोल्ड हो जाए तो उसे सबसे खराब आउट माना जाता है. कई बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हुए, जिनकी तकनीक इतनी अच्छी थी कि उन्हें आउट करना गेंदबाजों के लिए बड़ा मुश्किल होता था. आज हम आपको उन पांच बल्लेबाजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने करियर में बहुत कम मौकों पर बोल्ड हुए.

1. दिलीप वेंगसरकर

दाहिने हाथ के बेहतरीन भारतीय बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर ने साल 1976 से 1992 तक टेस्ट क्रिकेट खेली. इस दौरान उन्होंने 116 मैच खेलते हुए 185 पारियों में बल्लेबाजी की. टेस्ट मैच में 42.13 की औसत से 6,868 रन बनाने वाले वेंगसरकर के नाम टेस्ट मैचों में सबसे कम बोल्ड होने का रिकॉर्ड है. 185 पारियों में वेंगसरकर 163 बार आउट हुए जिनमें 16 बार वह बोल्ड हुए हैं. वह टेस्ट मैचों में सबसे कम बार बोल्ड होने वाले बल्लेबाज हैं. वेंगसरकर कुल 22 बार टेस्ट में नॉट आउट रहे हैं. 17 शतक जमाने वाले वेंगसरकर के नाम 35 अर्धशतक भी हैं.

2. इयान हिली

ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक इयान हिली 1988 से 1999 तक टेस्ट क्रिकेट खेले. इस दौरान उन्होंने कुल 119 टेस्ट मैच खेले. भले ही टेस्ट मैचों में हिली ने 27.39 की औसत के साथ 4,356 रन बनाए हों लेकिन बोल्ड वह बहुत कम ही होते थे. 182 पारियो में बल्लेबाजी करने वाले हिली टेस्ट करियर में कुल 159 बार आउट हुए हैं और उसमें वह 16 बार बोल्ड आउट हुए हैं. उनके नाम टेस्ट में कुल 4 शतक हैं. साथ ही उन्होंने विकटों के पीछे 366 कैच और 29 स्टंपिंग की. हिली कुल 23 बार नॉट आउट रहे. हिली का वनडे में स्ट्राइक रेट 83 से ऊपर का है लेकिन छक्के जड़ने में उनका हाथ बहुत तंग था और 168 वनडे मैच खेलकर वह कुल 5 छक्के लगा पाए. साथ ही टेस्ट क्रिकेट में भी उनके नाम 5 छक्के ही हैं.

3. मैथ्यू हेडेन

ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन ओपनरों में से एक मैथ्यू हेडेन ने साल 1993 में अपने टेस्ट क्रिकेट जीवन की शुरुआत की थी. वह साल 2009 तक ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट खेले. इस दौरान उन्होंने 103 मैचों में कुल 184 पारियां खेलीं. हेडेन के नाम पर 8,625 रन हैं जिसमें 30 शतक शामिल हैं. हेडेन टेस्ट में बहुत कम बोल्ड होते थे. इतने लंबे टेस्ट करियर में वह कुल 21 बार बोल्ड हुए हैं. साथ ही आउट कुल 170 बार हुए हैं. बतौर ओपनर नॉट आउट रह जाना बड़ा मुश्किल काम है इसलिए वह कुल कुल 14 बार ही नॉट आउट रहे हैं. हेडेन का टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर 380 है. उनके बोल्ड होकर डिसमिसल का प्रतिशत 12.35 का है जो बताता है कि वह कितने सशक्त बल्लेबाज थे.

4. जावेद मियांदाद

पाकिस्तान के लिए 1976 से 1993 तक क्रिकेट खेलने वाले जावेद मियांदाद ने कुल 124 टेस्ट मैच खेले और 189 पारियों में बल्लेबाजी की. 52.57 की भारी- भरकम औसत से 8,832 रन बनाने वाले मियांदाद टेस्ट मैच में कुल 21 मौकों पर ही बोल्ड हुए हैं. मियांदाद के नाम टेस्ट में 23 शतक हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर 280* है. मियांदाद कुछ समय के लिए पाकिस्तान टीम के कप्तान भी रहे थे और उन्होंने पाकिस्तान टीम को नए स्तर से जमाने में अहम भूमिका निभाई. मियांदाद अपने करियर में कुल 21 बार नॉट आउट रहे.

5. कुमार संगकारा

श्रीलंका के लिए साल 2000 से 2015 तक टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले संगकारा ने 134 टेस्ट मैच खेले और 57 की ऊपर की औसत से 12,400 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 233 पारियों में बल्लेबाजी की और 17 बार नॉटआउट रहे. संगकारा अपने करियर में कुल 22 बार बोल्ड हुए हैं. संगकारा ने नाम 38 शतक हैं और 319 उनका टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर है. टेस्ट में दूसरे सर्वाधिक 11 दोहरे शतक संगकारा के नाम पर हैं उनसे आगे सिर्फ डॉन ब्रेडमेन हैं जिनके नाम 12 दोहरे शतक हैं.

वर्तमान में विराट कोहली सबसे कम बार बोल्ड होने वाले बल्लेबाज हैं. कोहली अभी तक टेस्ट में कुल 97 पारियां खेल चुके हैं. और कुल छह बार ही बोल्ड हुए हैं. ऐसे में वह वेंगसरकर के इस रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं.

(नोट : इस लिस्ट में हमने 180 पारियों से ज्यादा में बल्लेबाजी करने वाले बल्लेबाजों के नामों को शामिल किया है.)

बिना इंटरनेट के चलते हैं ये 10 गेम्स

खाली समय में सभी को अपने स्मार्टफोन पर गेम्स खेलना पसंद होता है. आजकल अच्छी स्पेसिफिकेशंस वाले बहुत से अच्छे स्मार्टफोन्स आ गए हैं जो हेवी गेम को स्टोर कर सकते हैं. मगर समस्या तब होती है जब गेम्स को खेलने के लिए इंटरनेट जरूरत होती है और कनेक्टिविटी कमजोर हो. ऐसे में आप अपने फोन में ऐसे ऐंड्रॉयड गेम्स भी इंस्टॉल कर सकते हैं जिन्हें ऑफलाइन भी खेला जा सकता है.

1. टेम्पल रन (Temple Run)

टेंपल रन ऐसा गेम है जिसने स्मार्टफोन गेमिंग की दुनिया में तूफान ला दिया था. इस गेम में दैत्य से बचने के लिए दौड़ना होता है. इस दौरान खाई में गिरने, दीवार से टकराने या फंदों की गिरफ्त में फंसने से भी बचना होता है. दौड़ते वक्त कॉइन भी कलेक्ट किए जा सकते है. यह गेम इतना पॉप्युलर है कि इसकी थीम पर आधारित एक फिल्म भी बन रही है.

2. सबवे सर्फर्स (Subway Surfers) 

टेंपल रन की ही तरह सबवे सर्फर्स भी रनिंग वाला गेम है. यह सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले गेम्स में से एक है. इसमें पुलिसवाला खिलाड़ी के पीछे पड़ा होता है. बस पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार आगे बढ़ना होता है. इस दौरान कॉइन्स कलेक्ट करके जेटपैक्स और अन्य गिफ्ट अनलॉक किए जाते हैं.

3. बेड़लेंड (Badland)

यह साइड स्क्रॉलिंग ऐक्शन अडवेंचर गेम है. इसमें जंगल है जो वैसे तो बहुत खूबसूरत दिखाई देता है, मगर यहां कुछ गड़बड़ है. यहां पर एक क्रीचर को कंट्रोल करके पता लगाना है कि समस्या क्या है. जंगल में बहुत सारी बाधाएं और जाल वगैरह हैं. गेम में मल्टीप्लेयर मोड भी है, जिसमें अधिकतम 4 खिलाड़ी खेल सकते है. इसमें 23 लेवल हैं.

4. फ्रूट निंजा (Fruit Ninja)

फ्रूट निंजा में आपको स्क्रीन पर दिखने वाले फलों को अपनी फिंगर से स्वाइप करके काटना होता है. ध्यान यह भी देना है कि फलों के बीच में आने वाले विस्फोटकों को नहीं काटना है.

5. एस्फालट 8: एयरबोर्न (Asphalt 8: Airborne)

इस गेम के बगैर बेस्ट ऑफलाइन मोबाइल गेम्स की लिस्ट पूरी नहीं हो सकती है. यह ऐंड्रॉयड के बेस्ट गेम्स में से एक है. इसमें आपको चार कंट्रोल मिलते हैं. लेकिन इस गेम के लिए स्टोरेज ज्यादा चाहिए. इसे अपडेट्स भी बड़े साइज के मिलते हैं.

6. लिम्बो (Limbo)

यह मजेदार 2D पजल गेम है, जिसे ऑफलाइन प्ले किया जा सकता है. खिलाड़ियों को एलिमेंट्स पर ध्यान देकर पजल को सॉल्व करना है और आगे के लेवल में बढ़ना है. यह थोड़ा डरावना गेम है. आगे बढ़ते हुए इसमें बिजली, पानी और गोलियों से भी बचना होता है.

7. माइनक्राफ्ट: पॉकेट एडिशन (Minecraft: Pocket Edition) 

माइनक्राफ्ट पॉकेट एडिशन एक क्रिएशन और सर्वाइवल गेम है. इसमें प्लेयर्स ऑफलाइन खेलते हुए नए वर्ल्ड तैयार कर सकते हैं. क्रिएटिव और सर्वाइल मोड पर आप चीजों को तैयार कर सकते हैं, तोड़ सकते हैं और बुरे लोगों को मार सकते हैं. गेम का मोबाइल वर्जन इसके डेस्कटॉप वर्जन जैसा मजेदार नहीं है, मगर इंटरनेट के बिना गेमिंग के लिए अच्छा है.

8. ऑल्टो एडवेंचर (Alto's Adventure)

यह साइड स्क्रॉलिंग अडवेंचर गेम है जिसके बैकड्रॉप पर खूबसूरत बर्फीले पहाड़ नजर आते हैं. गेम ऑल्टो और उसके दोस्तों की स्नोबोर्ड पर यात्रा पर आधारित गेम है. बीच में उन्हें स्टंट करने होते हैं और क्रैश होने से बचना होता है.

9. वर्ल्ड ऑफ गो (World of Goo)

यह भी एक पजल गेम है. खिलाड़ियों को ब्रिज बनाने होते हैं. मुख्य चुनौती यह है कि इस दौरान अच्छा प्रदर्शन करते हुए 3 स्टार रेटिंग लेनी होती है. इसमें एक फ्रीस्टाइल मोड भी है जिसमें खिलाड़ी ऊंचे टावर बना सकते हैं और अपने रिजल्ट को दुनिया के अन्य खिलाड़ियों के बनाए टावर्स से कंपेयर कर सकते हैं.

10. स्माश हिट (Smash hit)

यह फर्स्ट पर्सन रनिंग गेम है, जिसमें खिलाड़ियों को अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं पर बॉल्स फेंककर उन्हें नष्ट करना होता है. गेम में 50 अलग रूम और 11 स्टाइल हैं.

शिशुओं में बढ़ती विटामिन और मिनरल की कमी

किसी भी शिशु के शुरुआती 1000 दिन उसके जीवन का आधार होते हैं और इसी समय के पोषण से उनके भविष्य की नींव बनती है. लेकिन भारत में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर काफी सुधार होने के बावजूद प्रति वर्ष लाखों बच्चे अपने पांचवे जन्म दिन से पहले विटामिन और मिनरल की कमी से जूझ रहे है. विटामिन और मिनरल की कमी को माइक्रोन्यूट्रियंट की कमी भी कहा जाता है और यह शिशुओं में बिमारियों व मुत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है.

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार विटामिन व मिनरल की कमी का सबसे भयावह परिणाम यह है कि प्रतिवर्ष 26 लाख मिलियन बच्चों का जन्म होता है जिनमें से 7 लाख से ज्यादा शिशु शुरुआती समय तक भी जीवित नहीं रह पाते. स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश की 13 फीसदी आबादी में 6 साल से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं और उसमें से 12.7 लाख बच्चों की पोषण की कमी के चलते रोजाना मौत होती है. इन गंभीर तथ्यों में यह जोड़ना भी जरूरी है कि जिस शुरुआती दौर में शिशुओं को प्रचुर मात्रा में माइक्रोन्यूट्रियंट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी दौर में 75 फीसदी शिशुओं की मृत्यु का कारण पोषक तत्वों की कमी पाया गया है.

दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के नियोनेटोलोजिस्ट डा.सतीश सलूजा के अनुसार  ‘‘6 से 24 महीने की उम्र के बीच के शिशुओं में कमज़ोर विकास और संक्रमण होने के  मामले सबसे ज्यादा आते है और इसका कारण उन्हें सही तरीके से पोषण न मिलना  है. शिशुओं के  सामान्य विकास के लिए सही मात्रा में विटामिन और मिनरल डाइट देना बहुत जरूरी है पांच साल से कम उम्र के शिशुओं में बीमार होने का मुख्य कारण निमोनिया, डायरिया, खसरा और मलेरिया होता  है और इन बीमारियों के होने की मुख्य वजह कुपोषण है.

अगर  किसी भी शिशु को शुरुआती 1000 दिनों के दौरान पोषक तत्वों से युक्त आहार दिया जाए तो तो उनका बेहतर शारीरिक विकास होता है और उनकी  सोचने व याद करने की क्षमता  में वृद्धि  भी होती है और बच्चा वयस्क होने पर कम बीमार होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिशु स्तनपान से ठोस आहार की ओर बढ़ता है तो उसे माइक्रोन्यूट्रियंट देने का गैप सबसे ज्यादा होता है क्योंकि उसकी जरूरतें बढ़ती है लेकिन उसी समय उसे पोषक आहार देना कम होता जाता है.

डा. सतीश सलूजा के अनुसार, “ छ महीने की उम्र के बाद शिशुओं में पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए ज़रूरी है कि इस उम्र में बच्चे को भरपूर पोषक तत्व दिए जायें. इस उम्र में शिशु के स्तनपान के साथ पोषक तत्वों से युक्त आहार (विटामिन व मिनरल युक्तआहार, फोर्टीफाइड अनाज/भोजन, आयरन मल्टी विटामिन ड्राप सप्लीमेंटशन) दिया जाना चाहिए .

चुनौती से आत्मविश्वास बढ़ता है : अनुष्का शर्मा

‘रब ने बना दी जोड़ी’ फिल्म से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली अभिनेत्री और मॉडल अनुष्का शर्मा अब प्रोड्यूसर भी बन चुकी हैं. उन्हें पहला ब्रेक डिज़ाइनर वेंडील रोड्रिक ने अपने पोशाक के साथ दिया, लेकिन अनुष्का को पता चल गया था कि उन्हें इसी ‘फील्ड’ में कुछ करना है. वह मॉडल बनकर ही संतुष्ट थी, लेकिन एक दिन यशराज से उन्हें फोन आया. वह दिल्ली से मुंबई आई और यशराज की एक ऑडिशन में ही उन्हें चांस और तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट मिला. उनकी जिंदगी बदल गयी. उन्हें अधिक संघर्ष नहीं करना पड़ा, न ही किसी प्रकार के ‘कास्टिंग काउच’ का सामना करना पड़ा. उन्होंने धीरे-धीरे सीढियां चढ़ी और आज कामयाबी की शिखर पर पहुंच चुकी हैं.

अनुष्का से जब भी उनके और विराट कोहली के साथ रिश्ते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने से साफ मना कर दिया, क्योंकि इसे वे अपनी पर्सनल बात मानती हैं. इंडस्ट्री में वह अपने आप को लकी मानती हैं क्योंकि बाहर से आने के बाद भी उन्होंने हर बड़े कलाकार के साथ काम किया. हंसमुख और स्पष्टभाषी अनुष्का के साथ मिलना रोचक था, पेश है कुछ अंश.

प्र. फिल्म निर्माता बनने का अनुभव कैसा है?

दूसरी बार निर्माता बनी हूं. ये सही है कि कलाकार के साथ अधिक जिम्मेदारी नहीं होती. उनसे अधिक आशाएं नहीं रखी जाती. सिर्फ अच्छे अभिनय की मांग निर्माता, निर्देशक करते हैं. जब आप खुद निर्माता बनते हैं तो जिम्मेदारी अधिक होती है. हर बार आपको सभी निर्णय लेने पड़ते हैं. सबको एक साथ चलना पड़ता है. लेकिन अगर टीम अच्छी हो और वे बात को आसानी से समझते हैं तो काम करना कोई मुश्किल नहीं होता. हां इतना जरूर है कि हर दिन कुछ न कुछ परेशानी आती है, जिसके लिए आपको तैयार रहना पड़ता है. पहली फिल्म के बाद मैंने ये महसूस किया है कि अधिक जिम्मेदारी से मुझमें अधिक आत्मविश्वास जन्म लेता है, अधिक काम कर पाती हूं. ‘फिल्लौरी’ फिल्म के लिए मैंने अपने भाई कर्नेश शर्मा के साथ काम किया है. दोनों ने मिलकर इसे प्रोड्यूस किया है. बचपन से हम दोनों साथ रहे हैं, दोनों में अच्छी ट्युनिंग है, इससे दोनों के बीच सकारात्मक सोच अधिक हुई है, लेकिन चुनौती वैसी ही होती है.

प्र. क्या आप अभिनय से अधिक फिल्म निर्माण पर ध्यान देना चाहती हैं?

मैं अपने अंदर की आवाज़ को हमेशा सुनती हूं. मैंने कोई प्लान निर्माता बनने के लिए नहीं किया था. ये हो गया, दरअसल जो भी काम मुझे स्ट्रोंगली फीलिंग दे, उसे मैं करती हूं. किसी बात से मैं डरती नहीं. लिखने का काम भी मैं कर रही हूं, क्योंकि लिखने से लेकर अभिनय और निर्माण सब मुझे उत्साहित करते हैं. मैं कवितायें भी लिखती हूं.

प्र. पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में महिला निर्माता बनना कितना मुश्किल है? किस बात का अधिक ख्याल रखना पड़ता है?

मेरे हिसाब से पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए काम करना आसान नहीं होता. पुरुष प्रधान समाज में मुश्किल है. ‘फीमेल एक्टर’ भी इसे फेस करते हैं. समाज अगर ऐसा है, तो उसका असर दिखता है. लेकिन मैंने एक कलाकार के रूप में एक मुकाम हासिल कर लिया है. ऐसे में मेरे लिए कोई भी काम फिल्म से सम्बंधित करना आसान होता है. मेरी अधिकतर फिल्में सफल रही हैं. लोग मुझपर विश्वास करते हैं. इतना ज़रूर है कि मेरे लिए भी चुनौती है और मैं उसे स्वीकार करती हूं. अगर फीमेल प्रोड्यूसर बनना चैलेंज है तो मुझे उसे करने में अच्छा लगेगा. मैं अपने विज़न पर कभी कम्प्रोमाईज नहीं करती. अच्छी फिल्में बनाने की कोशिश करती रहती हूं. सावधानी तो रखनी ही पड़ती है. लेकिन मुझे लगता है कि मैंने सही समय में निर्माता बनने का निर्णय लिया है.

प्र. आपकी सफलता में आपके परिवार का कितना हाथ रहा है?

परिवार का साथ हमेशा रहा है, मां, पिता और भाई ने हमेशा साथ दिया है. इसमें भाई का साथ सबसे अधिक है. जब वे मर्चेंट नेवी में थे और ट्रेवल करते थे, तो उस दौरान फिल्में चुनने से पहले मैं उनकी राय अवश्य लेती थी, क्योंकि वे इंडस्ट्री से नहीं है, इसलिए उनकी सोच आम दर्शक की तरह होती थी. मैंने हमेशा अलग तरह की फिल्में की है. जिसमें कर्नेश का बहुत बड़ा हाथ फिल्मों को चुनने में है.

प्र. क्या कभी आपको अपने कैरियर से खतरा महसूस हुआ?

शुरू में हुआ, क्योंकि मुझे लगा नहीं था कि मैं इस इंडस्ट्री में आउंगी. जब आप सोच लेते है कि आपको करना क्या है तो हर परिस्थिति से निकलने के लिए आप तैयार रहते हैं. मुझे वह अनुभव नहीं था. मैंने रातों-रात सफलता पायी, ऐसे में कैसे इसे सम्हालूं उसे लेकर चिंता हुई और डर भी लगा. लेकिन इतना जरूर सोच लिया था कि मुझे क्या करना नहीं है. 20 साल की उम्र में ही मैंने सोच लिया था कि मुझे आइटम सोंग नहीं करना है, क्योंकि इससे मुझे क्रिएटिवली संतुष्टि नहीं मिलेगी. इस तरह काफी सोच समझकर आगे बढ़ी हूं और अब डर नहीं लगता. मैं बहुत परिश्रम कर सकती हूं और अपना सौ प्रतिशत ‘एफर्ट’ प्रयोग करती हूं. फिर चाहे वह घर की सफाई हो या कुछ और काम.

प्र. क्या इंडस्ट्री में करीब 10 साल तक काम करना कठिन था? किसी कंट्रोवर्सी को कैसे लेती हैं?

नहीं, मेरे लिए आसान था, क्योंकि ‘स्टारडम’ मुझपर कभी हावी नहीं हुआ. मैं एक साधारण लड़की हूं और सोचती हूं कि अगर मुझमें ‘ईगो’ आ जाये तो वह मेरी सृजनात्मकता को तहस-नहस कर देगी. कभी भी मैं अपने आप को सुपरस्टार नहीं समझती. जो रियल में सुपरस्टार है वे उसे सम्हालना जानते हैं. पर अभी तक मैं उसके लायक नहीं हूं. कंट्रोवर्सी से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे शांति बहुत पसंद है और उसे बनाये रखने की कोशिश करती हूं.

प्र. क्या महिलाएं आज भी अपनी रिलेशनशिप को लेकर खतरा महसूस करती हैं?

असल में आजकल लोग अपने रिश्ते को लेकर खुश नहीं रह सकते, जो मिला है उससे उन्हें हमेशा अधिक चाहिए, ऐसा वे सोचते रहते हैं. ऐसे में उन्हें बहुत कुछ खोना पड़ता है. अगर जो मिला है उसी में संतुष्टि रखें, तो रिश्ता कायम रहता है.

प्र. क्या आपको लगता नहीं है कि पुरुष को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए?

केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि उन सभी की सोच को बदलना पड़ेगा, जो महिलाओं के लिए ऐसा सोचते हैं. उसमें परिवार की खास भूमिका होती है. मेरे परिवार में मेरे पिता, मेरे बारे में भी उतना ही सोचते हैं, जितना वे भाई के बारे में सोचते हैं. ये सब परिवार की परवरिश से होता है.

प्र. कोई सुपर पावर मिले तो क्या बदलना चाहती हैं?

एक ‘ट्रू सेंस ऑफ़ फ्रीडम’ को बदलना चाहती हूं. जो लोग अपने आपको सबसे अधिक होनहार समझते हैं, दूसरों को नहीं. इससे लाइफ बड़ी तनावपूर्ण हो जाती है. अगर उनकी सोच बदले तो वे खुद खुश रहने के साथ-साथ दूसरों को भी खुश रख सकते हैं.

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