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शाही और जायकेदार हैदराबादी ट्रिप

हैदराबाद की सोंधी बिरयानी की ही तरह यहां का इतिहास भी बहुत मजेदार है. निजामों का यह शहर दक्षिण भारत का सब से प्रसिद्ध नगर है. इस के प्रसिद्ध होने की कई वजहें हैं. सब से बड़ी वजह शहर से लगभग 11 किलोमीटर दूर स्थित गोलकोंडा का किला है. गोलकोंडा एक छोटा सा कसबा है. हीरे की खानों और उन में से निकले कोहिनूर और होप जैसे बेशकीमती हीरों के लिए मशहूर गोलकोंडा का अपना अलग ऐतिहासिक महत्त्व भी है. गोलकोंडा में मौजूद दुर्ग आज भी कुतुबशाही के राजाओं की शानोशौकत की गवाही देते हैं. ग्रेनाइट की पहाडि़यों में 3 मील लंबी और मोटे पत्थरों की बनी मजबूत दीवारों से घिरा 8 दरवाजों वाला यह दुर्ग, अपने प्राचीन गौरव की गाथा सुना, लोगों को अतीत में धकेल देता है.

इस विशाल किले को अकेले देखना बोरियतभरा हो सकता है, मगर एक गाइड की सहायता से इस किले को देखा जाए तो किले के महत्त्वपूर्ण स्थानों व उन से जुड़ी जानकारियों का लुत्फ उठाया जा सकता है. यहां आसानी से मात्र 750 रुपए में अंगरेजी और हिंदी भाषा बोलने वाले गाइड मिल जाते हैं. गाइड गोलकोंडा किले को दिखाने की शुरुआत किले के सब से रोचक स्थान से करता है. यह स्थान है फतेह दरवाजा. यहां ध्वनिक आभास किया जा सकता है. इस के लिए गाइड जोर से ताली बजा कर दिखाता है, जिस की गूंज किले के हर कोने में सुनाई देती है. गाइड इस तकनीक से जुड़ी कहानी भी सुनाता है. जिस के अनुसार, कुतुबशाही काल में सैनिक आपातकालीन स्थिति में ताली बजा कर राजा को दुश्मनों के आक्रमण का संदेश देते थे. ताली की गूंज दुर्ग के सब से ऊंचे स्थान पर बने राजा के कक्ष तक सुनाई देती थी.

इस रोचक किस्से को सुनाते हुए गाइड किले के दूसरी ओर बनी रामदास जेल दिखाने ले जाता है. इस जेल का नाम एक कैदी के नाम पर पड़ा है जो कुतुबशाही राज्य के दौरान प्रजा से कर वसूलता था और राजकोष में डाल देता था. मगर धनचोरी करने की वजह से उसे जेल में डाल दिया गया. इस जेल से एक और रोचक तथ्य जुड़ा हुआ है, वह यह है कि इस जेल में बौलीवुड फिल्म ‘तेरे नाम’ की शूटिंग हुई थी. पर्यटक इस तथ्य से खुद को आसानी से जोड़ लेते हैं, इसलिए फतेह दरवाजे के बाद किले का यह स्थान दूसरा सब से लोकप्रिय स्थान है.

इस तरह गाइड की मदद से पूरे किले को 3-4 घंटे में पूरा घूमा जा सकता है. मगर किले की सुंदरता निहारना और इतिहास जानना तब तक अधूरा है जब तक किले में होने वाला लाइट शो न देखा जाए. यह शो कुतुबशाही राजाओं की प्रेमकहानी और उन की वीरता की कहानी सुनाता है, जिसे देखनासुनना बेहद रोचक लगता है. इस शो के साथ ही किले की यात्रा पूरी हो जाती है.

चारमीनार और लाड बाजार

चारमीनार को हैदरबाद का दिल कहा जाता है.  कुतुबशाही वास्तुकला का अनुपम उदाहरण पेश करती इन मीनारों पर चढ़ कर पूरे हैदराबाद शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है. यह नजारा बेहद अद्भुत लगता है. इस के अलावा चारमीनार के पश्चिमी ओर हलचल से भरी गलियों के इलाके को लाड बाजार कहा जाता है. यह बाजार नगों से जड़ी चूडि़यों के लिए प्रसिद्ध है. इस के अतिरिक्त यहां मोतियों के हार और मोतियों से बने सामान की दुकानें भी हैं. दिलचस्प बात यह है कि नगों वाली जो चूडि़यां दूसरे शहरों में ज्यादा कीमतों पर मिलती हैं, वही चूडि़यां लाड बाजार में बहुत ही सस्ते दामों में मिल जाती हैं.

मुंह में आ जाएगा पानी

हैदराबाद के खाने में मुगलई, तुर्की और अरबी पाकशैली की झलक मिलती है. मगर बिरयानी हैदराबाद की संस्कृति का अटूट हिस्सा है. सिकंदराबाद रेलवेस्टेशन पर उतरते ही रेलवे के कैफेटेरिया से ले कर पूरे शहर में बिरयानी हर होटल के मेन्यूकार्ड में अव्वल नंबर पर होती है. मगर होटल पैराडाइज की कच्चे गोश्त वाली बिरयानी यहां काफी प्रसिद्ध है. यहां के प्रमुख व्यंजनों में हलीम, पाया और हैदराबादी मुर्ग आदि लाजवाब हैं. हैदराबाद के इतिहास से ले कर पकवान तक पर्यटकों पर इतना गहरा प्रभाव डालते हैं कि इस शहर में बारबार आने का दिल करने लगता है.

गोवा : विदेशी पर्यटन का देसी मजा

गोवा क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सब से छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चौथा सब से छोटा राज्य है. पूरी दुनिया में गोवा समंदर के अपने खूबसूरत किनारों और मशहूर स्थापत्य के लिए जाना जाता है. वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति गोवा को कुछ अलग, लेकिन अद्भुत स्वरूप प्रदान करती है. यह स्थान शांतिप्रिय पर्यटकों और प्रकृतिप्रेमियों को बहुत भाता है.

गोवा में छोटेबड़े लगभग 40 समुद्रीतट हैं. इन में से कुछ समुद्रतट अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं. इसी कारण विश्व पर्यटन मानचित्र के पटल पर गोवा की पहचान विदेशों की तरह है. आकर्षक बीच, रिजौर्ट औैर बजट होटल सैलानियों को खूब आकर्षित करते हैं. गोवा आने वालों को यहां की फिश करी और सीफूड बहुत पसंद आते हैं. साउथ गोवा में मार्टिन कौर्नर, वोकेरो इस के  लिए बहुत मशहूर हैं. साउथ गोवा में फाइवस्टार होटल बहुत हैं. यहां वे सैलानी आते हैं जिन्हें शांत माहौल पसंद है. जो लोग शोरशराबा, लेटनाइट पार्टीज, मस्ती, म्यूजिक पसंद करते हैं वे नौर्थ गोवा को पसंद करते हैं. यहां क्लब ज्यादा हैं. बाघा बीच के पास फैटफिश नामक रेस्तरां है. यहां की फिश थाली बहुत पसंद की जाती है. एंथोनी रेस्तरां का सीफूड लोगों को पसंद आता है. यहां के राहुल बताते हैं कि यहां हमेशा अच्छा और टैस्टी खाना मिलता है.

मौरजिम ग्रांड रिजौर्ट के मनोज कहते हैं कि दिसंबरजनवरी में यहां भीड़ ज्यादा रहती है. टापू पर लोग घूमना ज्यादा पसंद करते हैं. ट्रेबो रेन फौरेस्ट रिजौर्ट में पंजाबी फूड बहुत अच्छा मिलता है. मौरजिम के सफारिया रिजौर्ट में टापू और रिवर का मजा लिया जा सकता है.

बटरफ्लाई बीच : अपने नाम के हिसाब से यह बीच बहुत खूबसूरत है. अपनी अनछुई खूबसूरती की वजह से यह सैलानियों के बीच मशहूर है. एकांत चाहने वालों के लिए इस से बढि़या कोई दूसरी यह जगह नहीं हो सकती. बटरफ्लाई द्वीप पर स्थित यह जगह बेजोड़ है. इस तट पर पहुंचने के लिए अगोंडा या पलोलेम तट से नाव के सहारे जाना होता है. रोमांच के शौकीन काकोलम बीच के तट पर जा सकते हैं. इस को टाइगर बीच भी कहते हैं.

गलजीबाग बीच : देशदुनिया में मशहूर मौरजिम तट की तरह गलजीबाग तट भी विलुप्तप्राय औलिव रिडली कछुए के अंडे देने और सेने वाली जगह है. मगर मौरजिम तट के भीड़भाड़ के बजाय यह तट अपेक्षाकृत शांत रहता है. हां, एक अच्छी बात यह है कि यहां कुछ बेहतरीन और स्वादिष्ठ सीफूड्स मिलते हैं. गलजीबाग तट कानाकोना से 18 किलोमीटर की दूरी पर है, जो तालपोना बीच के दक्षिणी मुहाने पर स्थित है.

होलांत बीच : यह बेहद शांत रहने वाला समुद्री किनारा दूरदूर तक पसरा हुआ है. यह तट थोड़ा पथरीला है, मगर इस की खूबसूरती खुद की ओर खींचने के लिए काफी है.

बेतुल बीच : बेहद चौड़ा और पट्टीदार यह समुद्रीतट मडगांव से 18 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां के नजारे आप को किसी पारंपरिक समुद्री गांव, जो मत्स्य पालन के धंधे में लगे होते हैं, की याद दिला देंगे. इस के नजदीक एक 17वीं शताब्दी का किला और एक खाड़ी भी है. यहां पहुंचने के लिए पहले आप सड़क के रास्ते मोबोर तट पहुंचें, और वहां से कैवेलोसिम-ऐसोलना फेरी की मदद से साल नदी होते हुए यहां तक पहुचें.

आरमबोल बीच : यह बेहद खूबसूरत और शांत समुद्रीतट दोस्तों और परिवार के साथ बार्बेक्यू का मजा लेने के लिए सब से मुफीद जगह है. यह तट धीरेधीरे मशहूर हो रहा है, जो पूरी दुनिया से बोहेमियाई लोगों को खुद की ओर आकर्षित कर रहा है. इस तट के नजदीक आज कई बेहतरीन कैफे व रेस्तरां खुल गए हैं.

अगोंडा बीच : मडगांव से 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह बीच बेहद खूबसूरत और पिकनिक के लिए मुफीद स्थानों में से एक है. समुद्र के किनारे की पहाडि़यां इसे रमणीय स्थल में बदल देती हैं.

कोला बीच : यहां रहने वाले स्थानीय लोग भी इस तट से वाकिफ नहीं हैं. इस छिपे हुए समुद्रीतट तक पहुंचने के लिए आप को कानकोना के दक्षिणी हिस्से की ओर जाना होगा, और फिर वहां से आप को संकेतों का पीछा करना होगा. सुनने में ही कितना दिलचस्प लग रहा है न. अगोंडा तट से 5 मिनट की दूरी पर स्थित यह तट झील से घिरा हुआ है. यहां की सब से अच्छी बात यह है कि यहां रात को रुकने के लिए झोंपड़ीनुमा घर भी बने हैं. यहां रुक कर आप समंदर और वादियों का पूरा मजा ले सकते हैं.

वलसाओ बीच : गोवा के मशहूर मेजोरदा और कोलवा समुद्रीतट के उत्तर में और गोवा के दक्षिणी भाग में स्थित इस अद्भुत तट को कुदरत ने फुरसत में बनाया है, ऐसा लगता है. यहां आप को कुछेक तैराक तैरते हुए मिल जाएंगे जो भीड़भाड़ से बच कर यहां तैरने हेतु आते हैं.

सिंकेरियम बीच : यह सफेद बलुई तट दूरदूर तक पसरा हुआ है. लग्जरी रिजौर्ट्स के आसपास होने के बावजूद यह बेहद शांत समुद्रीतट है. शांतिपूर्वक बैठनेलेटने और खुद में खो जाने के लिए इस से बेहतर जगह शायद ही कोई हो. अरब सागर में डूबते हुए सूरज को देखना और उसे अपने चेहरे पर महसूस करने के लिए इस से मुफीद जगह नहीं मिल सकती.

सिरिदाओ बीच : पणजी से 12 किलोमीटर की दूरी पर और जुआरी नदी के मुहाने पर स्थित यह बेहद शांत और सुरमयी तट है. दूरदूर तक बालू ही बालू पसरी हुई है. इस के अलावा यहां पाए जाने वाले घोंघे, जो समंदर के किनारे पर आ जाते हैं, की चमक इसे और बेहतरीन बनाती है. सिरिदाओ के नजदीक में कई गुफाएं हैं जो यहां घूमनेफिरने वालों के लिए एक और रोमांचक स्थान है. गोवा में पर्यटकों की भीड़ सब से अधिक गरमी के महीनों में होती है. जब यह भीड़ समाप्त हो जाती है तब यहां शुरू होता है ऐसे सैलानियों के आने का सिलसिला जो यहां मानूसन का लुत्फ उठाना चाहते हैं. गोवा के मनभावन बीच की लंबी कतार में पणजी से 16 किलोमीटर दूर कलंगूट बीच, उस के पास बागा बीच, पणजी बीच के निकट मीरामार बीच, जुआरी नदी के मुहाने पर दोनापाउला बीच स्थित हैं. वहीं, इस की दूसरी दिशा में कोलवा बीच ऐसे ही सागरतटों में से है जहां मानसून के वक्त पर्यटक जरूर आना चाहेंगे. यही नहीं, अगर मौसम साथ दे तो वागाटोर बीच, अंजुना बीच, पोलोलेम बीच जैसे अन्य सुंदर सागरतट भी देखे जा सकते हैं.

गोवा को पर्ल औफ ईस्ट भी कहा जाता है. यह विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह है. दुनियाभर से पर्यटक यहां आते हैं. अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, शानदार और भव्य वास्तुकला वाले चर्च, मंदिर व पुराने मकान गोवा में विदेशी सैलानियों को आकर्षित करते हैं. यहां कई वन्यजीव अभयारण्य हैं, जैसे बोंडला वन्यजीव अभयारण्य और कोटिगाव वन्यजीव अभयारण्य और कुछ संग्रहालय, जैसे गोवा राज्य संग्रहालय, नैवेल एविएशन संग्रहालय, पुरातत्व संग्रहालय और पौट्रेट गैलेरी आदि भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. कई किले, जैसे अगुआड़ा दुर्ग, तिरकोल किला और प्रसिद्ध चर्चों, जैसे बैसिलिका औफबोम जीसस, सेंट औगस्टिन चर्च आदि कई स्थान भी हैं जो देखने लायक हैं. गोवा अपनी पार्टियों और कार्निवाल के लिए भी जाना जाता है जो कि खासतौर पर अक्तूबर और दिसंबर महीने में होते हैं.

बाबा साहब के चित्र में बच्चों ने भरे रंग

बच्चों की प्रिय पत्रिका चंपक अब स्कूलों के साथ आवासीय अपार्टमेंट तक पहुंच रही है. जहां बच्चे चंपक पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं.

14 अप्रैल को चंपक इस उदेदश्य से लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में बने रोहिताश प्लेनेट अपार्टमेंट पहुंची और कक्षा 8 तक के बच्चों के बीच 3 ग्रुप में पेटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसे रंग भरो प्रतियोगिता का नाम दिया गया. पहला ग्रुप कक्षा 2 तक के बच्चों का था. इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले बच्चों को संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का स्केच दिया गया और बच्चों ने इसमें रंग भरा.

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर ललिता प्रदीप ने बच्चों को बाबा साहब के बारे में बताया. जिसे सुनकर बच्चों ने संविधान निर्माता को और गंभीरता से जाना और समझा. चंपक क्रियेटिव चाइल्ड कांटेस्ट के साथ आयोजित इस प्रतियोगिता में ललिता प्रदीप ने बच्चों को उपहार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया.

इस मौके पर रेजीडेंसियल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष एमडी शाही ने विजेता बच्चों देवयानी, काशवी टंडन और आराध्या सहित सभी बच्चों को पुरस्कार दिया.

कक्षा 3 से 5 के बच्चों ने माई फेविरट कार्टून बनाया. इसमें शौर्य सिंह, भाव्या टंडन सहित कई बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. कक्षा 6 से 8 के बीच पढने वाले बच्चों ने क्लीन इंडिया ग्रीन इंडियाके आधार को लेकर चित्र बनाया और रंग भरा.

सभी बच्चों को चंपक पत्रिका पढने के लिये दी गई. वहां उपस्थित सभी पैरेंटस ने इसकी सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन दूसरे आवासीय अपार्टमेंट में किये जाये. साधना सिंह, रीता सिंह और रिचा सिंह ने आयोजन में सहयोग दिया.

गलत शॉट खेलने पर कोहली की होती थी पिटाई

क्रिकेट के मौजूदा दौर में विराट कोहली से लोकप्रिय खिलाड़ी शायद ही कोई और होगा. सिर्फ लोकप्रियता में ही नहीं बल्कि सफलता में भी विराट का कोई सानी नहीं है. मगर यह सफलता उनको रातों रात नहीं मिली. इसके लिए उनको बहुत कुछ छोड़ना पड़ा. तो आईए जानते हैं कोहली के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

जिद्दी थे विराट

विराट बचपन से ही जिद्दी थे. अपने कोचिंग के शुरूआती दौर में वह हमेशा सीनियर टीम की ओर से खेलना चाहते थे. विराट ने एक दिन कोच राजकुमार से कहा सर मुझे सीनियर टीम में खेलना है क्योंकि जूनियर खिलाड़ी मुझे आउट नहीं कर पाते. इसके बाद राजकुमार ने विराट को सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलने की इजाजत दी.

छोटी उम्र में सीनियर टीम में खेलना चाहते थे विराट

दिल्ली के लिए रणजी खेल चुके कोच राजकुमार शर्मा की कोचिंग में सैकड़ों लड़कों के बीच एक लड़का ऐसा था जो अपने पिता का हाथ पकड़े वहां आया था. 10 से भी कम उम्र, शरीर से गोल मटोल सा दिखने वाला यह लड़का विराट थे. इतनी छोटी सी उम्र में भी वह जूनियर की बजाय सीनियर टीम में खेलना चाहते थें.

कवर ड्राइव के चक्कर में कई बार गंवाया विकेट

विराट को ‘कवर ड्राइव’ भी बहुत पसंद था. राजकुमार शर्मा बताते हैं कि यह शॉट उसे इतना पसंद था कि वह कई बार गलत गेंद पर इस शॉट को खेलते हुए आउट होने लगा. इसके बाद कोच राजकुमार ने विराट को यह शॉट बहुत ज्यादा खेलने से मना किया.

गलतियों पर पड़ते थे चांटे

विराट के शाट्स को देखकर आज हर कोई उनका मुरीद बन जाता है, लेकिन इन शाट्स में परफेक्शन के पीछे कड़ी मेहनत और कई झन्नाटेदार चांटों का हाथ भी है. जी हां विराट ने गलत शाट्स खेलने पर कई बार थप्पड़ भी खाए.

कोच राजकुमार शर्मा विराट को बहुत चाहते थे, लेकिन इस वजह से वह विराट की गलतियों को अनदेखा नहीं करते थे. विराट जब भी गलत शॉट खेलकर आउट होते उन्हें जोरदार थप्पड़ पड़ते थे. इन थप्पड़ों की वजह से ही आज विराट द्वारा खेले गए हर शॉट में परफेक्शन दिखता है.

कोच को पसंद नहीं था फ्लिक शॉट

कोच राजकुमार शर्मा को विराट कोहली का फ्लिक शॉट पसंद नहीं था. आप सोच रहे होंगे कि जिस शॉट के लिए उनको दुनिया पसंद करती है कोच को वह शॉट क्यों पसंद नहीं था. राजकुमार ने बताया था कि वह नहीं चाहते थे कि विराट गेंद को अक्रॉस द लाइन जाकर खेले, क्योंकि इसमें उनके आउट होने का खतरा रहता था. मगर विराट तो थे जिद्दी वह कोच के मना करने के बावजूद भी यह शॉट खेलते थे.

विराट को लगी थी छक्के लगाने की सनक

कोच द्वारा कवर ड्राइव कम खेलने की हिदायत मिलने के बाद विराट पर छक्के लगाने का भूत सवार हुआ. विराट ने कई बार छक्का लगाने के चक्कर में अपना विकेट गंवाया. इस समय तक विराट इंडिया की तरफ से खेलने लगे थे.

विराट को बार-बार छक्का लगाने के प्रयास में आउट होते देख राजकुमार शर्मा ने विराट को डांट लगाई और हिदायत दी की तुम छक्के के लिए तब तक ट्राई नहीं करोगे जब तक फिफ्टी पूरी ना हो जाए.

अभिनेता राजकुमार राव क्यों डरे हुए हैं

नेशनल अवॉर्ड विनर अभिनेता राजकुमार राव फिल्ममेकर हंसल मेहता की अगली वेब सीरीज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रोल में नजर आने वाले हैं. इस रोल में अपने लुक के लिए राजकुमार राव खास तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए वह अपने बालों की भी कुरबानी देने वाले हैं. सुभाष चंद्र बोस के रोल के लिए राजकुमार आधे गंजे होने वाले हैं. राजकुमार राव सुभाषचंद्र बोस के रोल के लिए काफी डरे हुए भी हैं. खबर है कि राजकुमार इस फिल्म के लिए 10 मई से शूटिंग शुरू करेंगे. फिलहाल इस फिल्म का नाम तय नहीं हुआ है.

राजकुमार सुभाष चंद्र बोस के रोल के लिए आधा गंजा होने की प्लानिंग कर रहे हैं. वह इस रोल को लेकर काफी एक्साइटेड हैं.

एकता कपूर के डिजिटल ऐप एएलटी बालाजी के लॉन्च के अवसर पर खबर मिली थी की, सुभाष चंद्र बोस पर बन रहीं फिल्म की शूटिंग कोलकाता में की जाएगी. फिल्म की शूटिंग के लिए यूरोप और कई अन्य स्थानों पर भी जाया जाएगा.

सूत्रों के मुताबिक जब 10 मई से सीरीज की शूटिंग शुरू होगी तो, लोग राजकुमार राव को आधा गंजा देखेंगे. राजकुमार राव विग नहीं पहनेंगे इसलिए आधा गंजा होने की प्लानिंग कर रहे हैं और सुभाष चंद्र बोस जैसे दिखने के लिए वे जी-तोड़ मेहनत कर रहें हैं.

दिलकश दुबई

दुबई को अगर रेगिस्तान का राजा कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. बहुत सुना था दुबई के बारे में और बहुतकुछ पढ़ा था. दुबई बहुत ही खूबसूरत है, बहुत ही व्यवस्थित, बहुत ही साफसुथरा है, चोरीचकारी का तो वहां सवाल ही पैदा नहीं होता. मेरा बेटा प्रतीक और बहू चारू कुछ वर्षों से दुबई में नौकरी कर रहे हैं. इसलिए दुबईदर्शन की तमन्ना और भी बलवती हो गई. दिल में ढेर सारी उत्सुकता लिए मैं पति के साथ अपनी इस चिरप्रतीक्षित यात्रा पर निकल गई. दुबई के बारे में जितना सुना था, उस से कहीं अधिक पाया. जिस रेगिस्तान को अंगरेज भारत को 60 लाख पौंड में बेच रहे थे, भारत के लेने से इनकार करने के बाद अंगरेजों ने उसे गैर पढ़ेलिखे कबीलों को दे दिया था. 4,000 वर्ग किलोमीटर के इस रेगिस्तान में न खेती लायक जमीन थी, न पेड़पौधे, न पीने का पानी था. बंजर गांवों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था. लोग पढ़ेलिखे नहीं थे. एक तरफ अंतहीन रेगिस्तान था तो दूसरी ओर खारे पानी का समुद्र हिलोरें ले रहा था.

वही रेगिस्तान आज दुबई की शक्ल में न्यूयौर्क से भी अधिक खूबसूरत लगता है. वहां अपार संपदा है. इस का कारण है कि दुबई के शेखों ने कभी भी मजहबी और कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा नहीं दिया. कोई भी चरमपंथी मौलवीमौलाना जरा भी हरकत करे तो उसे देशनिकाला दे दिया जाता है. दुबई में दुनियाभर के लोगों को रहने व व्यापार करने की छूट है. दुबई के निर्माण को 46 वर्ष हो गए हैं. दुबई, अबूधाबी, अजमान, शारजाह, फुजैराह, रस अल खैमाह, उम अल कुवैन – इन 7 राज्यों ने मिल कर संयुक्त अरब अमीरात का गठन किया है. जिसे यूएई कहा जाता है. इस की राजधानी अबूधाबी है, जो इस का सब से बड़ा राज्य भी है.

दुबई में नवंबर से फरवरी तक टूरिज्म का बैस्ट सीजन होता है. इस समय यहां पर पर्यटकों की अथाह भीड़ होती है. नवंबर माह में हम जैट एयरवेज की फ्लाइट से दुबई गए. दुबई का समय भारतीय समयानुसार डेढ़ घंटा पीछे रहता है. दुबई एयरपोर्ट पर काफी कठिन जांचों से गुजरना पड़ता है. दुबई की 20 लाख की जनसंख्या में वहां के मूल अरब मात्र 13 प्रतिशत हैं. अन्य सारे लोग अनेक देशों से यहां काम करने, व्यापार करने के लिए आए हुए हैं. प्रतिदिन दुनियाभर से लाखों टूरिस्ट यहां आते हैं. दुबई के शेखों के दृढ़निश्चय, तेल से प्राप्त अकूत धनराशि दुबई को शानदार बनाने में लगी है. दुबई तो एक रेगिस्तान था, इसे आज का दुबई बनाने के लिए मिट्टी, पत्थर, सीमेंट, पेड़पौधे, फूल, हरीघास, यानी रेत के अतिरिक्त सारी निर्माण सामग्री बाहरी देशों से आयात की गई.

दुबई का अपना कोई उद्योग नहीं है. अन्य देशों से आयातित सामान ही यहां पर मिलता है. कई विदेशी कंपनियां इस को सजानेसंवारने में लगी हैं या यहां आ कर व्यापार कर रही हैं.

पूरे यूएई के सातों राज्यों की जनसंख्या 1.5 करोड़ है. जिन में 30 प्रतिशत तो केवल भारतीय हैं. 13 प्रतिशत निवासियों के अतिरिक्त अन्य देशों से आए हुए हैं. यहां के मूल निवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य की व्यवस्था मुफ्त है. दुबई में चमचमाती सड़कें, सरपट दौड़ता यातायात है. सड़कें 2 लेन से ले कर 8 लेन तक की हैं. यातायात के लिए मैट्रो का जाल बिछा है. दुबई में लाखों टैक्सियां व प्राइवेट वाहन चलते हैं. लाखों लोगों की भीड़ है. अपने वाहन की गति यदि आप ने निर्धारित गति से आगे बढ़ाई तो तुरंत फोटो खिंच जाएगी और फाइन लग जाएगा. इस की सूचना आप तक तुरंत पहुंच जाएगी. दुबई में अपराध नहीं के बराबर हैं क्योंकि एक बार अपराध करते पकड़े गए तो छूटना मुश्किल है. स्वच्छता और पर्यावरण का सख्ती से पालन किया जाता है. एक कागज का टुकड़ा भी कहीं देखने को नहीं मिलता.

दुबई का सारा विकास कार्य निरवील (विकास प्राधिकरण) देखता है. अपार्टमैंट का किराया भी यही तय करता है. इस का नियंत्रण शेख परिवार के लोगों और कंपनी के उच्च स्तर के अधिकारियों के हाथों में रहता है. दुबई में अनेक बड़ेबड़े मौल हैं. जिन में एकदो तो विश्व स्तर के हैं. दुबई का सारा कारोबार बाहर के देशों से आए हुए लोगों के हाथों में है. यहां पर हर तरह का पहनावा देखने को मिलता है. एक तरफ जहां यहां के मूल निवासी सिर से पांव तक ढके रहते हैं यानी कि अपने पारंपरिक पहनावे में रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी छोटेछोटे कपड़ों में दिखाई देते हैं. यहां पैट्रोल सस्ता है, लेकिन पीने का पानी महंगा है. कोल्डड्रिंक्स पानी से सस्ता है. दुबई एक प्रकार से कौस्मोपौलिटन राज्य जैसा है. कोई प्रतिबंध नहीं है. इसलिए प्रतिदिन लाखों पर्यटक यहांअरबों डौलर व्यय करते हैं. दुबई सहित पूरा यूएई गैस नहीं बेचता. इसी से इस के विद्युत ट्रावाइजन चलते हैं. दुबई दिन के उजाले से रात के उजाले में अधिक खूबसूरत दिखाई देता है.

दर्शनीय स्थल

मरीना वाक : रात्रि में मरीना वाक का दृश्य अत्यधिक दर्शनीय हो जाता है. समुद्र से पानी ला कर एक झील सी निर्मित की गई है. जिस के 3 तरफ बड़ेबड़े टावर खड़े हैं. झील में नौकायन की व्यवस्था है.

झील के किनारेकिनारे लगभग 7 किलोमीटर की सड़क बनी है. जिस में टूरिस्ट पैदल या चारपहियों वाली छोटी खुली गाड़ी से घूमते हैं. इस सड़क के एक तरफ खानेपीने के रैस्टोरैंट व मौल वगैरा हैं. गद्दीदार बैंच लगी हैं. खजूर के पेड़ बिजली के लट्टुओं से सजे रहते हैं. यहां पर शाम व रात को पर्यटकों का मेला लगा रहता है.

ऐटलांटिस :  यहां पर भी समुद्र के किनारेकिनारे घूमने के लिए पथ बना हुआ है. खूबसूरत गद्दीदार बैंचों पर बैठ कर सामने सैकड़ों नौकायनों को समुद्र में अठखेलियां करते देख सकते हैं. इस पथ के एक तरफ ऐटलांटिस होटल है जिस में टूरिस्ट आ कर ठहरते हैं.

ऐटलांटिस मौल व ऐक्वेरियम : ऐटलांटिस मौल में देशविदेश से निर्यातित सामान खरीदने की सुविधा है. ऐक्वेरियम तो इतना बड़ा है कि घूमने में डेढ़दो घंटे लग जाते हैं. इस ऐक्वेरियम में छोटी से छोटी व बड़ी से बड़ी मछली व समुद्री जीवों का अद्भुत संसार है. घूमने में ऐसा लगता है कि समुद्र के अंदर ही विचरण कर रहे हैं और जैसे समुद्र और हमारे बीच शीशे की ऊंचीऊंची दीवारें हों.

इब्न बतूता मौल : यह मौल घूमने के लिए अच्छा है. इस मौल के ऊपर एक छत ऐसी बनाई गई है कि वहां लगता है कि हम खुले आसमान के नीचे घूम रहे हैं और ऊपर चांदतारों का समूह अठखेलियां कर रहा हो. यह छत कलाकार की कल्पना और वास्तुकला का कमाल है.

दुबई मौल : यह दुनिया का सब से बड़ा पांचमंजिला मौल है. यहां दुनिया के सभी देशों का सामान मिलता है. दुबई मौल बुर्ज खलीफा से लगा हुआ, इसी का एक हिस्सा है. इस में अनेक देशों के अपने खाने की चीजों के रैस्टोरैंट हैं. इस मौल को ठीक से पूरा घूमने के लिए एक दिन भी कम है.

मिरेकल गार्डन : मिरेकल गार्डन अकल्पनीय, अद्भुत, अप्रतिम, अतुलनीय है. यह फूलों की मानवीय कल्पना, आर्किटैक्ट के दिमाग का अद्भुत संयोजन है. इस मरुस्थल को खूबसूरत बनाने के लिए विभिन्न वस्तुएं दुनिया के देशों से एकत्रित कर के फूलों के स्वर्णिम संसार को अनेक रूपों, कलाकृतियों से इस प्रकार सजायासंवारा गया है कि क्षणभर के लिए दिमाग भ्रमित हो जाता है कि हम किसी रेगिस्तान में हैं या पुष्पलोक में.

सरिया, तारों, पुष्पों, घास व विद्युत की लडि़यों से सैकड़ों कलाकृतियां बनाई गई हैं. कहीं रेल का डब्बा, कहीं बस का डब्बा, कहीं भवन, कहीं वाटिका, कहीं महिला बड़ा सा फुहारा लिए सिंचाई कर रही है और ये सब कलाकृतियां विभिन्न रंगों के फूलों से बनाई गई हैं. सड़क के दोनों तरफ घने पेड़ों की कतारें हैं जो घना जंगल होने का एहसास देती हैं. तितलियों का अद्भुत संसार है. कुल मिला कर इस का शब्दों में वर्णन करना असंभव है.

बुर्ज खलीफा : बुर्ज खलीफा दुनिया की सब से ऊंची इमारत है. यह 828.8 मीटर ऊंची और 150 मंजिल की है. इस का निर्माण वर्ष 2004 में प्रारंभ  कर के 2009 में पूरा कर लिया गया था. इस में जाने के लिए औनलाइन 130 दिरहम और वहीं जा कर काउंटर पर 400 दिरहम दे कर टिकट लेना पड़ता है. पर्यटकों के लिए बुर्ज खलीफा 125वीं मंजिल तक ही खुला रहता है. यहां तक लिफ्ट 63 सैकंड में पहुंचा देती है. ऊपर की मंजिलों में पर्यटकों को नहीं जाने दिया जाता. बुर्ज खलीफा की मोटी कांच की दीवारों से पूरा दुबई दिखाई देता है. यहां पर पर्यटक फोटो खिंचवाते रहते हैं. फोटोग्राफर भी फोटो के लिए घूमते रहते हैं.

डांसिंग फाउंटेन :  बुर्ज खलीफा के पास ही दुनिया का सब से बड़ा डांसिंग फाउंटेन है. इस का समय लगभग आधा घंटा है और हर आधे घंटे बाद शो दिखाया जाता है. संगीत के साथ जल की लहरों का नर्तन बहुत ही आकर्षक व बेमिसाल है.

डेजर्ट सफारी : दुबई से करीब 75-80 किलोमीटर दूर रेगिस्तान में मुख्य सड़क से हट कर 3-4 किलोमीटर के दायरे में कैंप लगाए गए हैं. वहां पर मुख्य सड़क से कुछ खास तरह की गाडि़यों से जाया जाता है. जो रेत के टीलों की सफारी कराते हुए ले जाती हैं. पर्यटक रेत के टीलों की सफारी का लुत्फ उठाते हैं. इन कैंपों में तरहतरह के प्रोग्राम होते हैं, बैले डांस होता है, खानेपीने का प्रबंध होता है. यह सब टिकट में शामिल होता है. टिकट लगभग प्रतिव्यक्ति सवा सौ दिरहम का होता है. ये प्रोग्राम रात में होते हैं. रात में रेत ठंडी हो जाती है. मरु रेगिस्तान के मध्य रात बिताने का अलग ही आनंद होता है.

बर दुबई : यह कहने को पुराना दुबई है पर दुबई के साथ ही इस का भी आशातीत विकास हुआ है. दुबई की तरह ही यहां भी ऊंचे टावर, अपार्टमैंट व मौल हैं. यहां पर भी अनेक देशों का सामान मिलता है. यहां के विकास कार्यों आदि की व्यवस्था निरवील (विकास प्राधिकरण) के हाथ में है. सोना या अन्य सामान लेना हो तो यहीं से लेना चाहिए. बर दुबई, दुबई की अपेक्षा हर लिहाज से सस्ता है. वैसे, निकटवर्ती शारजाह रहने व सामान खरीदने के लिए दुबई से काफी सस्ता है. दुबई में बाहरी देशों से गए श्रमिकों के लिए शहर से काफी दूर आवासीय स्थल बनाए गए हैं. शहर में इन की भीड़ दिखाई नहीं देती.

ग्लोबल विलेज : यह लगभग 20 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां पर बहुत बड़ेबड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान बनाए गए हैं. यहां पर विभिन्न देश अपने देशों का बनाया गया सामान विक्रय करते हैं. प्रतिदिन लाखों लोग आ कर इन प्रतिष्ठानों से सामान खरीदते हैं. ग्लोबल विलेज में अनेक पार्क हैं. लंबाचौड़ा परिसर है. लाखों कारों की रेलपेल है. हर सायं व रातभर मेला सा लगा रहता है. सब से अधिक भीड़ चाइनीज व्यापारिक प्रतिष्ठान में देखी गई. हमारे देश का भी वहां पर बहुत बड़ा व्यापारिक प्रतिष्ठान देखने को मिला. भारतीय व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी काफी भीड़ थी. पाकिस्तान व्यापारिक प्रतिष्ठान में अधिकतर ऊन और चमड़े के जैकेट बेचे जा रहे थे.

जेबीआर बीच : यह दुनिया के बड़े बीच में से एक है. लाखों पर्यटक यहां मोटरबोट और अन्य तरीकों से समुद्र में अठखेलियां कर रहे थे. इस के पास 60-70 मंजिले ऊंचे टावर खड़े हैं, रैस्टोरैंट हैं, होटल हैं. इन होटलों में बाहरी देशों से टूरिस्ट आ कर ठहरते हैं. इन होटलों का किराया बहुत अधिक होता है. यहां पर अपार्टमैंट भी बहुत महंगे हैं. टूरिस्ट और यहां पर रहने वाले लोग नीचे उतर कर घूमते रहते हैं, खरीदारी करते हैं. खातेपीते हैं. यहां जगहजगह पर कल्चरल प्रोग्राम भी होते रहते हैं. लोग पिकनिक भी मनाते हैं. खूब गहमागहमी और रौनक रहती है. रात का पता ही नहीं चलता है. इन के अलावा भी दुबई में घूमने के लिए अनेक जगहें हैं. निर्माण कार्य यहां चलता रहता है. नएनए टूरिस्ट स्पौट बनते रहते हैं. मानवनिर्मित खूबसूरती है दुबई की. दुबई बहुत ही सुंदर, सुरक्षित व व्यवस्थित है.

क्रिकेट ने ली इन खिलाड़ियों की जान

क्रिकेट दुनिया का ऐसा खेल है जिसे लोग बहुत पसंद करते हैं. ये खेल है रोमांच का, जूनून का. क्रिकेट खेल है अनिश्चितताओं का और इस खेल में खिलाड़ियों को चोट लगना आम बात है. फील्डिंग के दौरान मैदान पर चोटिल होना अक्सर लगा रहता है. लेकिन कभी कभी ये चोट भयंकर रूप ले लेती है जिसके कारण खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत भी हो जाती है.

मैच के दौरान खिलाड़ी की मृत्यु सभी को स्तब्ध कर देती है पूरा क्रिकेट जगत व देश इस घटना से दुखी हो जाता है. आइए जानते है ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में.

फिलिप ह्यूज

फिलिप ह्यूज ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज थे. ह्यूज ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के उभरते हुए सितारे थे. उन्होंने अपना टेस्ट करियर का पदार्पण सन 2009 में 20 वर्ष की उम्र में किया था. 20 वर्ष की उम्र में ह्यूज ने अपना पहला शतक जमाया था. इस शतक के बाद ह्यूज ऑस्ट्रेलिया के सबसे कम उम्र में शतक मारने वाले खिलाड़ी की सूची मे शुमार हो गए थे.

सन् 2014, 25 नवम्बर को ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता, शेफील्ड शील्ड के साउथ ऑस्ट्रेलिया और न्यू साउथ वेल्स के मैच में 63 नाबाद पर खेलते हुए सीन एबॉट की बाउंसर गेंद ह्यूज के हेलमेट के नीचे से उनके सर में लगी, जिससे उनके सिर में फ्रैक्चर हो गया और मस्तिष्क की नस फट गई. चोट लगने के कुछ ही सेकंड के अंदर ह्यूज वहीं पिच पर गिर गए और उसके बाद मौत होने तक होश में नहीं आ सके. 27 नवम्बर 2014 को बिना होश आए और अपने 26 वें जन्मदिन से तीन दिन पहले उनकी मृत्यु हो गई.

रमन लांबा

रमन लांबा एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी थे जिन्होंने मुख्यतः एक बल्लेबाज के रूप में चार टेस्ट और 32 वनडे खेला. उनकी मृत्यु तब हो गई जब वे बंगबंधु स्टेडियम में ढाका क्लब क्रिकेट मैच में शॉर्ट लेग पर बिना हेलमेट के क्षेत्ररक्षण कर रहे थे.

बल्लेबाज मेहराब हुसैन ने गेंद को जोर से मारा और वह लाम्बा के सिर पर लगी और वापस विकेटकीपर मसूद खालिद के पास पहुंच गई. चोट ज्यादा गंभीर नहीं थी लेकिन उन्हें एक आंतरिक रक्तस्त्राव का सामना करना पड़ा और दिल्ली से एक न्यूरोसर्जन को बुलाये जाने के बावजूद शीघ्र ही उनकी मृत्यु हो गई.

एक दिवसीय क्रिकेट में उनकी शुरुआत काफी अच्छी रही और उन्होंने अपने पहले ही मैच में 64 रन बनाए और अपने छठे मैच में 102 रन और एक शतक और 2 अर्द्धशतक के साथ प्रति पारी 55.60 के औसत से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 278 रन बनाने के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज घोषित किया गया.

इयान फोले

इयान फोले दाएं हाथ के इंग्लिश क्रिकेटर थे. इसके साथ ही साथ ये बाए हाथ के गेंदबाज भी थे. वह शुरूआती दौर में मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे और आगे चलकर इन्होंने स्पिन गेंदबाजी करनी शुरू कर दी. इनकी मृत्यु 30 साल के बेहद कम उम्र में मैच के दौरान हुई थी.

जुल्फिकार भट्टी

जुल्फिकार भट्टी की मृत्यु क्रिकेट खेलने के दौरान सीने पर गेंद लगने से हुई थी. बेगम खुरशीद मेमोरियल टूर्नामेंट टी 20 मैच के दौरान पुल शॉट लगाने के दौरान हुई थी. चोंट लगने के बाद तुरंत इन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया जहां इन्हें मृत घोषित कर दिया गया . इस घटना के बाद पाकिस्तान के सुक्कुर जिले में 3 दिन का शोक रखा गया था.

अब्दुल अजीज

अब्दुल अजीज का जन्म पाकिस्तान के कराची शहर में में हुआ था. ये एक बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज थे. ये पाकिस्तान के तरफ से प्रथम श्रेणी के मैच खेला करते थे. इनकी मृत्यु सीने पर गेंद लग जाने के कारण हुई थी.

देशप्रेम दर्शाती फिल्मों के देशप्रेमी कलाकार

बॉलीवुड ने हमें ऐसी बहुत सी फिल्में और यादगार किरदार दिए हैं, जिन्होंने हमारे मनोरंजन करने के अलावा हमें देश के प्रति प्रेम की भावना को और बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है.

ऐसी कई फिल्मे आईं जो हमारी रूह को छू गई. आज भी हम फिल्म बॉर्डर में सुनील शेट्टी द्वारा निभाया गया किरदार हम नहीं भूल पाते. उस फिल्म का एक- एक डायलॉग मन में देशप्रेम को जन्म देता है. अब चाहे वे एयरलिफ्ट के अक्षय कुमार हों या स्वदेश में शाहरुख, सबने बड़े परदे पर देशप्रेम को जग जाहिर किया.

आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ किरदारों के बारे में जिन्होंने फिल्मों में दिखाया देशप्रेम..

अमरीश पुरी

फिल्म : दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, परदेस

बॉलीवुड पर दशकों तक राज करने वाली फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ के सभी किरदारों ने फिल्म को अमर बना दिया है. साल 1995 में आई इस फिल्म ने कई अवार्ड्स अपने नाम किये और आज भी कई रिकॉर्ड बना रही है. फिल्म की शुरुआत एक गाने से होती है. गाने के बोल हैं 'घर आजा परदेसी तेरा देश बुलाये रे' ये गीत आज भी दिल में घर किये है.

फिल्म में अमरीश पुरी ने विदेश में रह कर जो देश प्रेम और अपने देश की मिट्टी से जो लगाव दिखाया है, उसने हर भारतीय नागरिक के मन में अपने गांव और देश की मिट्टी के प्रति लगाव पैदा किया है. इसके अलावा अमरीश ने फिल्म परदेस में 'आई लव माय इंडिया' गाना गाकर, एक बार फिर सब को मोह लिया.

शाहरुख खान

फिल्म : स्वदेस

इस फिल्म ने विदेश में रह रहे एक सफल वैज्ञानिक की कहानी को दर्शाया था. वो कैसे वापस अपने देश लौटता है, इसे बखूबी दिखाया गया है. फिल्म में शाहरुख खान ने वैज्ञानिक का किरदार निभाया है, जो दूसरे देश में काम करता है. वो जब भारत लौटता है तो कैसे अपनी मातृभूमि से जुड़ जाता है और शहरों में हो रहे विकास के बारे में गांव वालों को अवगत कराता है. फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारीकर ने किया था. इस फिल्म ने न केवल लोगों की वाह-वाही लूटी बल्कि, शाहरुख खान को भी एक बेहतर अभिनेता बनाया.

ऋतिक रोशन

फिल्म : लक्ष्य

साल 2004 में आई फिल्म ‘लक्ष्य’ कारगिल युद्ध पर आधारित थी. फिल्म एक ऐसे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे पता नहीं है कि उसे भविष्य में क्या करना है. वो सेना में भर्ती होता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने साथियों को जीत दिलाता है.

इस फिल्म में मुख्य किरदार ऋतिक रोशन ने निभाया था. उन्हें इस फिल्म के लिए तारीफ भी खूब मिली. ऋतिक के आलावा फिल्म में प्रीटी जिंटा भी थीं. फिल्म का डायरेक्शन फरहान अख्तर ने किया था.

सनी देओल

फिल्म : गदर

इसमें कोई शक नहीं कि गदर एक प्रेम कथा थी. लेकिन आप को तो ये डॉयलॉग याद होगा 'हिंदुस्तान जिंदाबाद है, हिंदुस्तान जिंदाबाद रहेगा.' किसी पड़ोसी देश में जा कर अपने देश के ज़िंदाबाद के नारे लगाना, सनी के देश प्रेम को दिखाता है.

काजोल

फिल्म : कभी खुशी कभी गम, फना

कभी खुशी कभी गम की कहानी अलग थी. लेकिन काजोल का देशप्रेम फिल्म में देखा जा सकता है. इसके आलावा फिल्म फना में भी वो देशभक्ति और अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीत चुकी हैं.

आमिर खान

फिल्म : लगान, मंगल पांडे, रंग दे बसंती

आमिर खान समय-समय पर अपना देश प्रेम जाहिर करते रहते हैं. उनका ये प्रेम उनके द्वारा की गई फिल्मों में भी दिखता है. वो कुछ चुनिंदा फिल्में ही करते हैं, जिसमें देश के लिए कुछ न कुछ सन्देश जरूर होता है. ‘लगान’ में भूवन का किरदार शायद ही कोई भूला हो. ‘रंग दे बसंती’ में मस्तीखोर कॉलेज स्टूडेंट्स जिनके लिए देशभक्ति सिर्फ किताबी बातें होती हैं. वो देश के युवा को आजादी और अपने हक के लिए लड़ने का पढ़ा देते हैं. आमिर ने इन फिल्मों में बेहतरीन एक्टिंग करके और देशभक्ति से लोगों के दिल में एक अलग जगह बनाई.

खूबसूरत तस्वीरों के लिए अपनाएं ये टिप्स

कोई भी स्मार्टफोन खरीदने से पहले आप यह जरूर चेक करते होंगे कि उसका कैमरा कैसा है. अक्सर लोग ज्यादा मेगापिक्सल के कैमरे वाला स्मार्टफोन लेना पसंद करते हैं. इस उम्मीद में कि तस्वीरें अच्छी आएंगी. मगर अच्छी तस्वीरें लेने के लिए सिर्फ ज्यादा मेगापिक्स वाला कैमरा होना जरूरी नहीं है. और भी कई बातें हैं, जिनका ख्याल रखना होता है.

1. सबसे पहले लेंस साफ करें

कोई भी तस्वीर खींचने से पहले लेंस को साफ करना जरूरी है. अक्सर जेब में या इधर-उधर रख देने पर लेंस में डस्ट आ जाती है. भले ही आपको पहली नजर में लेंस पर छोटे-छोटे कण नजर न आएं, मगर वे फोटो की क्वॉलिटी बिगाड़कर उसे ब्लर कर सकते हैं. इसलिए साफ रुमाल या शर्ट के किनारे से लेंस को पोंछकर साफ करें.

2. लैंडस्केप मोड में फोटो खींचें

अगर आपको कोई लंबा शॉट न लेना हो तो हमेशा फोटो लैंडस्केप मोड (फोन को तिरछा पकड़कर) में फोटो खींचें. ऐसे खींची गईं तस्वीरें ज्यादा खूबसूरत नजर आती हैं.

3. डिजिटल जूम यूज न करें

स्मार्टफोन्स के कैमरों में डिजिटल जूम दिया गया होता है, जिससे आप सब्जेक्ट पर जूम इन कर सकते है. मगर ऐसा करने से फोटो की क्वॉलिटी खराब हो जाती है. दरअसल ऑप्टिकल जूमिंग नॉर्मल फोटो को जूम करके क्रॉप ही करती है. इसलिए बेहतर है कि नॉर्मल फोटो लेकर आप बाद में एडिट करते वक्त क्रॉप करें.

4. HDR मोड इस्तेमाल करें

स्थिर चीजों की तस्वीर लेने के लिए HDR एक शानदार मोड है. हाई डायनैमिक रेंज (HDR) मोड देखता है कि तस्वीर में रोशनी और परछाई समान हो. ज्यादा लाइट या चमकीली तस्वीरों की फोटो लेनी हो तो इसी मोड पर लें. HDR मोड दरअसल अलग एक्सपोजर पर 2 या ज्यादा तस्वीरें लेता है और बेस्ट हिस्सों को मिलाकर एक तस्वीर बनाता है. इसके लिए आपको कैमरा एकदम स्थिर रखना होता है, वरना तस्वीर धुंधली आएगी.

5. रूल ऑफ थर्ड्स

यह फोटोग्राफी का सबसे साधारण नियम है. इसके मुताबिक हमारी आंखें उन तस्वीरों के प्रति आकर्षित होती हैं, जिनमें सब्जेक्ट सेंटर से थोड़ा हटकर होता है. आपने देखा होगा कि कुछ स्मार्टफोन्स में 2 खड़ी और 2 तिरछी लाइनें कैमरा स्क्रीन पर रहती हैं. ये इसीलिए होती हैं, ताकि आप अच्छी तस्वीर ले सकें. इसलिए सब्जेक्ट को हमेशा सेंटर के बजाय थोड़ा हटकर रखें. जैसे कि इस तस्वीर में सब्जेक्ट लेफ्ट साइड में है.

6. फ्लैश इस्तेमाल करने से बचें

प्रोफेशनल फोटोग्राफी में फ्लैश तभी इस्तेमाल की जाती है, जब लाइट बहुत कम हो. इसलिए आपको भी अपने स्मार्टफोन से फोटो खींचते वक्त इमर्जेंसी में ही फ्लैश यूज करनी चाहिए. नैचरल लाइट में खींची गईं तस्वीरें ज्यादा अच्छी नजर आती हैं.

दरअसल फ्लैश लेंस के एकदम करीब होती है और कई बार इसकी वजह से लेंस पर चमक पड़ जाती है. अगर लाइट कम लग रही हो तो सेटिंग्स में जाकर एक्सपोजर या ISO बढाएं. ISO एक हद तक ही बढ़ाएं वरना तस्वीर खराब हो जाएगी.

एक काम की टिप यह भी कि अगर लाइट का सोर्स किसी सब्जेक्ट के पीछे हो तो आप फ्लैश इस्तेमाल कर सकते हैं. मान लीजिए अगर आपको अपने दोस्त की तस्वीर लेनी है और सूरज उसके ठीक पीछे है तो आप फ्लैश यूज कर सकते हैं. तस्वीर अच्छी आने की संभावनाएं ज्यादा होंगी.

7. फोटो खींचने के बाद फिल्टर यूज करें

प्रोफेशनल फोटोग्राफर कई बार फोटो में फिल्टर डालकर उसे और बेहतर बनाते हैं. आप भी अपने स्मार्टफोन पर ऐसा कर सकते हैं. ज्यादातर स्मार्टफोन्स में फोटो में फिल्टर डालने का ऑप्शन आता है, जिससे आप उसकी शेड वगैरह चेंज कर सकते हैं. अगर फोन में ज्यादा फीचर्स न हों तो गूगल प्ले स्टोर से PicsArt या Pixlr जैसा कोई भी फोटो एडिटिंग ऐप डाउनलोड करके ऐसा आसानी से कर सकते हैं.

8. ऑगमेंटेड कलर रिऐलिटी

गूगल प्ले स्टोर से Colorify Augmented Reality ऐप डाउनलोड करें. इसकी मदद से आप तस्वीर में किसी भी रंग को दूसरे रंग से बदल सकते हैं. यह फीचर अन्य कई पॉप्युलर फोटो एडिटिंग ऐप्स में भी है.

9. अपने बेस्ट और खराब फोटो चेक करें

हम जो तस्वीरें लेते हैं, उनमें से कुछ बहुत अच्छी आती हैं तो कुछ बहुत खराब. अब आपको एक काम यह करना है कि एक खराब, एक अच्छी और एक ऑटो सेटिंग पर ली गई तस्वीर लें. अब इनकी Details चेक करें. देखें कि तस्वीर का ISO, एक्सपोजर टाइम और अपर्चर कितना है. इस तरह से आपको पता चल जाएगा कि किस तरह की कंडीशंस में किन सेटिंग्स में आपका फोन अच्छी तस्वीरें लेता है और किनमें खराब. इससे इन बातों का ध्यान रखते हुए आप भविष्य में बेहतर फोटो खींच पाएंगे.

इंटरनेट पर फिर छा गई ‘सोनम गुप्ता’, जानिए इस बार क्या है खास

“सोनम गुप्ता” यह काल्पनिक नाम कुछ महीने पहले अगस्त में 10 रुपये के एक बेहद खस्ताहाल नोट पर नजर आया था, और फिर हाल ही में दिखा 2,000 रुपये के नए जारी नोट पर, जिसपर लिखा था – ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’. बस फिर क्या, सोशल मीडिया पर यह नाम फैलता चला गया और ऐसा वायरल हुआ कि बहुत-सी नामचीन हस्तियों को पछाड़कर अब टॉप 10 ट्रेंडिंग पर्सनैलिटी की लिस्ट में पहुंच चुकी है “बेवफा सोनम गुप्ता”.

सर्च इंजन गूगल द्वारा जारी की गई सूची (टॉप 10 ट्रेंडिंग पर्सनैलिटी) में गूगल ने “सोनम गुप्ता” को तीसरा स्थान दिया है. कुछ समय पहले जब देश नोटबंदी के दौर से गुजर रहा था, उसी वक्त अचानक से सोनम गुप्ता आयी और सोशल मीडिया पर ‘बेवफाई की पहचान’ बन कर छा गई.

गूगल द्वारा बुधवार को जारी की गई ताज़ा सूची में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टॉप ट्रेंडिंग हैं, और दूसरे स्थान पर हैं रियो ओलिम्पिक 2016 में भारत के लिए पदक दिलाने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु. हालांकि गूगल के वर्ल्ड वाइड ट्रेंडिंग सर्च की लिस्ट में सबसे आगे रहे हैं रियो ओलिम्पिक 2016, और उसके बाद ‘पोकेमॉन गो’, जिसने कई देशों में तहलका मचा रखा है.

सर्च इंजन के अनुसार, टॉप फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर हैं सलमान खान की सुपरहिट फिल्म ‘सुल्तान’, और उसके ठीक पीछे थी साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत की ‘कबाली’. शाहिद की ‘उड़ता पंजाब’, अक्षय कुमार की ‘एयरलिफ्ट’ और फिर ‘ऐ दिल है मुश्किल’ भी टॉप 5 फिल्मों में शामिल रहीं. गूगल की सूची में शामिल अन्य चर्चित नामों में अर्नब गोस्वामी, दीपा करमाकर, दिशा पाटनी, पूजा हेगड़े, साक्षी मलिक, विजय माल्या, उर्वशी राउतेला भी शामिल हैं.

देखा जाये तो न्यूज़ इवेंट सर्च में भी रियो ओलिम्पिक सबसे आगे रहा है और उसके बाद अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव को दूसरी तथा ‘ब्रेक्ज़िट’ को तीसरी जगह मिली है. भारत के इंटेरनेट यूजर्स ने इसके अलावा सातवां वेतन आयोग, नोटबंदी तथा पीओके में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में भी काफी सर्च किया है.

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