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इंसान पैसे से शक्तिशाली कभी नहीं बन सकता : सुनील शेट्टी

फिल्म इंडस्ट्री में सबसे पहले एक्शन हीरो के रूप में अपने आप को प्रतिष्ठित करने वाले अभिनेता शुनील शेट्टी स्वभाव से बहुत ही मिलनसार हैं. उन्होंने इंडस्ट्री में अपने आप को स्थापित करने के लिए काफी मेहनत की. अभिनेता के अलावा वे फिल्म निर्माता और उद्यमी भी है. शुरूआती दौर में उन्हें जो भी फिल्में मिली, वे करते गए. कई बार उनकी फिल्में फ्लॉप हुई, पर उनकी सादगी और सहज भाव की वजह से उन्हें फिल्म निर्माता, निर्देशक एक बार फिर से उन्हें मौका देते रहे. लोग उन्हें प्यार से ‘अन्ना’ कहते है. उन्होंने आजतक करीब 110 हिंदी फिल्में की है. हिंदी के अलावा उन्होंने तमिल और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया है.

कर्नाटक के मैंगलोर में जन्मे शुनील शेट्टी का फिल्मी कैरियर फिल्म ‘बलवान’ से शुरू हुआ था. रफ और टफ कद-काठी की वजह से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस फिल्म के सफल होने के बाद से उन्हें पीछे मुडकर देखना नहीं पड़ा. ‘वक्त हमारा है’, ‘गोपी किशन’, ‘मोहरा’, ‘रघुवीर’, ‘गद्दार’, ‘रक्षक’, ‘बॉर्डर’, ‘अपना सपना मनी-मनी’, ’रिफ्यूजी’, ‘रुद्राक्ष’, ‘शूट आउट एट लोखंडवाला’, ‘धड़कन’ आदि सभी उनकी सफल फिल्में है.

सुनील शेट्टी को शुरू से ही फिल्मों में आने की इच्छा थी, वे ‘किक बॉक्सिंग’ में ‘ब्लैक बेल्ट’ धारक है. इसलिए किसी भी एक्शन सीन को करना उन्हें अच्छा लगता है. इसके अलावा उन्हें कॉमेडी और रोमांटिक फिल्में भी पसंद हैं. काम के दौरान ही उनकी शादी माना शेट्टी से हुई जिससे उनके दो बच्चें आतिया शेट्टी और अहान शेट्टी है, जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े है. सुनील ने करीब 4 सालों तक इंडस्ट्री से अपने आप को इसलिए दूर रखा, क्योंकि उन्हें मनपसंद फिल्में नहीं मिल रही थी. अब सुनील शेट्टी एंड टीवी के एक्शन थ्रिलर रियलिटी शो ‘इंडियास असली चैम्पियन, है दम’ से एक बार फिर अपने आप को जबरदस्त तरीके से लॉन्च कर रहे हैं, उनसे बात करना रोचक था, पेश है अंश.

प्र. इस शो से जुड़ने की खास वजह क्या है?

ये शो आम लोगों को लेकर बनाया गया है. जिसमें सकारात्मकता अधिक है. अगर कोई अपने स्वास्थ्य की देखभाल अच्छी तरह से करता है, तो वह अपनी आगे आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकता है. इसलिए इसे जनसाधारण के लिए बनाया गया है, ताकि उनमें फिटनेस के प्रति जागरूकता हो. ये महिला और पुरुष दोनों में होना आवश्यक है, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है. इस शो में आम लोगों के जज्बे को दिखाने की कोशिश की गयी है.इसके अलावा मैंने करीब 4 साल का ब्रेक लिया था, इसके बाद इतना अच्छा मौका मुझे आम लोगों के साथ मिलकर काम करने का मिला, जो मेरे लिए खुशी की बात है.

प्र. आप एक एक्शन हीरो के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन उम्र के इस पड़ाव में भी आप वैसे ही फिट दिखते हैं, कैसे इसे ‘मेंटेन’ रखते हैं?

मैं वर्कआउट, डाइट और योगा पर खास ध्यान देता हूं. रोज करीब एक घंटा व्यायाम करता हूं. वर्कआउट करना, सही डाइट लेना ये सब आदतें होती हैं, जो बचपन से ही आपको डालनी पड़ती हैं. मुझे पता होता है कि डेली बेसिस पर मुझे क्या करना चाहिए और उसी हिसाब से अपने आप को कंट्रोल में रखता हूं. नकारात्मक सोच से अपने आप को हमेशा दूर रखता हूं. एक्शन फिल्मों और टीवी धारवाहिकों से मुझे बहुत प्यार है, इसलिए उसे करने में मैं कभी पीछे नहीं हटता. इसमें मैं होस्ट हूं, लेकिन आम इंसान के उत्साह और उनकी चाहत को करीब से देखने का मौका ही मेरे लिए आकर्षक है.

प्र. फिल्मों में न दिखाई पड़ने की वजह क्या है?

मैंने हर तरह की फिल्में की हैं, लेकिन एक दौर ऐसा आया, जब मुझे ऐसी फिल्में मिलने लगी थी जिसे मैंने करना उचित नहीं समझा. लगा कि कुछ समय परिवार के साथ बिताऊ. मैंने वैसा ही किया. जब मुझे ये शो मिला तो लगा कि ये मेरा ‘लॉन्चिंग पैड’ है. इससे पहले भी मैंने टीवी शो किये हैं, लेकिन ये उससे काफी अलग है. इसकी ब्यूटी, इसका एक्शन है.

प्र. आपने इतने सालों तक इंडस्ट्री में काम किया, क्या कभी पुराने दिन  याद आते हैं?

बहुत याद करता हूं. उस समय इंडस्ट्री का रूप अलग था. हम एक परिवार की तरह सोचा करते थे. महीनों जब एक फिल्म की शूटिंग पर जाते थे, तो एक साथ बैठकर खाना, मौज-मस्ती करना आदि सब होता था. आज तो अलग-अलग वैन का कल्चर आ गया है. काम के बाद लोग वैन में चले जाते है. सब विषय फैशनेबल हो चुका है. किसी के बारें में वे सोचते कम है. आज के बच्चे प्रोफेशनल अधिक हो चुके है. ‘ह्यूमन टच’ चला गया है. मशीन की तरह वे काम करते हैं. फिल्म रिलीज हो गयी, वे आगे बढ़ जाते है. प्यार की भाषा आजकल मेसेज, ईमेल पर चलती है. वे खुद बातें करना भूल चुके है, उनके एजेंट बात करते है. फिल्मों के प्रमोशन भी कंपनियां करती है. बस यही चल रहा है.

प्र. आपके बच्चे भी इंडस्ट्री से जुड़े हैं, उन्हें क्या सलाह देते हैं?

मैंने हमेशा कहा है कि काम भले ही कम मिले, लेकिन इंसानियत को कभी भूलना नहीं चाहिए. इन्सान पैसे से कभी शक्तिशाली नहीं बन सकता, अपने व्यवहार से बनता है. बेटी तो पहले से है, पर बेटा अभी आ रहा है. मैंने उन्हें समझाया है कि आपकी जिम्मेदारी है कि आप सही फिल्म दर्शकों तक पहुचाएं. ‘फ्राइडे’ का ‘टेंशन’ मत लो. अगर आप एक फिल्म में असफल होते हो, तो अगले के लिए मेहनत करो. मेहनत करने से कभी पीछे न हटो. मैंने भी इंडस्ट्री में उसी को फोलो किया है. मुझे याद आता है कि इंडस्ट्री का नहीं होने के बावजूद मुझे काम मिला. फिल्में कई बार चली, कई बार नहीं. फिर भी काम मिला, क्योंकि मेरा सम्बन्ध फिल्मी लोगों से काफी अच्छा था. उन्हें विश्वास था कि कोई भी अगर फिल्म को साईन करने से मना करेगा तो, उन्हें मैं मिलूंगा और वे मेरे पास आते थे, इससे मुझे एक और फिल्म में काम करने का मौका मिलता था.

प्र. आपने हर तरह की फिल्मों में काम किया है, कौन सी फिल्म आपके दिल के करीब है? कोई मलाल अभी बाकी रह गया है?

मुझे जो काम मिला करता गया. कुछ फिल्में है, जो मेरे दिल के बेहद करीब है. फिल्म ‘धड़कन’ जिसमें रोमांटिक किरदार था, ‘बॉर्डर’ जो देश प्रेम की फिल्म थी, जबकि ‘मोहरा’ में एक अपराधी की भूमिका और हेराफेरी में कोमेडी आदि सब किये है. मैं क्रिकेट प्लेयर सुनील गवास्कर का बहुत बड़ा फैन हूं और उनकी बायोपिक में काम करने की इच्छा है, लेकिन उसके लिए अच्छी प्रोस्थेटिक की आवश्यकता होगी, क्योंकि मुझे उनका यंग रूप भी दिखाना पड़ेगा.

प्र. पहले की फिल्में और आज की फिल्मों में क्या अंतर पाते हैं?

आजकल साफसुथरी फिल्मों का थोडा अभाव हो चुका है, चैनल भी आज अधिक है. रिमोट हाथ में होता है और आपको चैनल बदलते रहना पड़ता है. पहले चैनल कम थे और बदलने की भी जरुरत नहीं थी. मेरे हिसाब से ये वेस्ट का अधिक इन्फ्लुएंस है. जो हम पर हावी हो चुका है, लेकिन ऐसे माहौल में मैरीकॉम, नीरजा और दंगल जैसी फिल्में भी बन रही है.

प्र. आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का कितना सहयोग रहा है?

मेरी जिंदगी में शुरू से उतार-चढ़ाव बहुत आये, उस समय मेरे परिवार का सहयोग बहुत रहा. पहले माता-पिता फिर पत्नी का. काम के दौरान मैं बहुत व्यस्त रहता था, जहां जो कमी होती थी, उसे ठीक करता रहा. एक समय ऐसा भी आया, जब मैंने देखा कि परिवार ‘नेगलेक्ट’ होने लगा. फिर मैंने छुट्टी लेकर उनके साथ समय बिताया. मैंने एक बात देखी है कि कठिन समय से निकलना मुश्किल होता है, वक्त लगता है, पर जिंदगी अपने आप से हर चीज को आसान कर देती है.

आईपीएल : 10 सालों में पहली बार बना यह कीर्तिमान

दिल्ली डेयरडेविल्स और गुजरात लॉयन्स के बीच खेले गये आईपीएल के 42वें मुकाबले में कुछ ऐतिहासिक देखने को मिला. कुछ ऐसा जिसकी तारीफ करने से 'क्रिकेट के भगवान' भी खुद को नहीं रोक पाये. दिल्ली के ऋषभ पंत ने मात्र 43 गेंदों में ताबड़तोड़ 97 रनों की पारी खेली और सभी का दिल जीत लिया.

फिरोज शाह कोटला मैदान पर खेले गए इस मैच में दिल्ली ने 17.3 ओवरों में तीन विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया. इस हार के बाद गुजरात की टीम प्ले ऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है. वहीं दिल्ली ने प्ले ऑफ में जाने की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है.

यह आईपीएल के इतिहास में दूसरी बार है जब 209 रन या उससे ज्यादा का लक्ष्य हासिल किया गया है. घरेलू मैदान पर चार मैचों में दिल्ली की यह तीसरी जीत है.

आईपीएल-10 के 42 मैच में ताबड़तोड़ छक्कों से 7 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया. इस मुकाबले के दौरान 31 छक्के लगे, जो किसी भी आईपीएल मैच में सर्वाधिक छक्कों का रिकॉर्ड है.

दिल्ली की ओर से सर्वाधिक 20 छक्के, जबकि गुजरात की पारी में 11 छक्के लगे. दिल्ली के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने 97 रनों की जोरदार पारी के दौरान सबसे ज्यादा 9 छक्के उड़ाए. संजू सैमसन ने 61 रनों की पारी में 7 छक्के लगाए.

संजू सैमसन ने अपनी अर्धशतकीय पारी में सिर्फ छक्के लगाए. यानी 61 रनों में 7 छक्के, 0 चौके. इस आईपीएल में ऐसा दूसरी बार हुआ है. इससे पहले 22वें मैच में मुंबई इंडियंस के नीतीश राणा ने 62 रनों की नाबाद पारी के दौरान एक भी चौका नहीं लगाया, बल्कि 7 छक्के लगाए थे.

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी ऋषभ पंत की इस पारी की तारीफ करने से नहीं रोक पाये. सचिन ने इस पारी को आईपीएल इतिहास की सबसे बढ़िया पारी बताया.

तो वहीं सहवाग ने भी इस पारी को एक्सट्रा स्पेशल बताया.

लालू ने लपका नीतीश का एजेंडा

राजद सुप्रीमो लालू यादव ने गैर भाजपाई दलों को एक झंडे तले लाने के लिए कमर कस ली है. राजगीर में राजद के 3 दिन के प्रशिक्षण शिविर सह राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लालू ने हुंकार भरी कि अगले अगस्त महीने में पटना के गांधी मैदान में महारैली करेंगे. महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और सपा नेता अखिलेश यादव समेत गैर भजपाई दलों के सभी नेताओं को न्यौता देंगे. इससे यह साफ हो जाता है कि नीतीश के द्वारा शुरू किए गए गैर भाजपाई दलों को एकजुट करने की मुहिम का झंडा अब लालू यादव ने थाम लिया है.

अपने पिता के सुर में सुर मिलाते हुए उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने समाजवादी दलों को चेताया कि अगर वे अब भी नहीं चेते तो देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. उन्होंने अपने पिता लालू यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बगैर कहा कि बिहार के 2 बड़े नेताओं ने अपने ईगो को छोड़ कर राज्यहित और देशहित में महागठबंधन बना कर देश को नई राह दिखाई है. अब देश भर के सभी क्षेत्रीय दलों और समाजवादियों को अपना ईगो छोड़ कर एकजुट होने की दरकार है. उन्होंने दावा किया कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने साथ आने का भरोसा दिया है. नेशनल लेवल पर बने महागठबंधन का नेता कौन होगा, इसके जबाब में तेजस्वी ने कहा कि इस पर बाद में फैसला होगा, पहले सभी दल एक मंच पर आ जाएं.

लालू ने अपने कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि अगर अब भी चुप रहे तो भाजपा साजिश के तहत संविधान तक बदल सकती है. सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एकसाथ मिल कर 2019 के आम चुनाव में भाजपा को धूल चटानी है. लालू ने इस बात को बेहद खतरनाक बताया कि नीति आयोग लोकसभा और विधान सभा का चुनाव एक साथ कराने पर जोर दे रही है.

साल 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव जीतने के बाद तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश अपने शपथ ग्रहण समारोह में देश भर के मोदी विरोधी नेताओं और पार्टियों को इकट्ठा करने में भी कामयाब रहे थे. बिहार के बाद नेशनल लेवल पर नरेंद्र मोदी को पटखनी देने के लिए उन्होंने  देश की राजनीति का नया चेहरा बनने के संकेत दे दिया था.

आप के अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस की शीला दीक्षित, तरूण गोगई, सिद्धारमैया, शिवसेना के रामदास कदम, रांकपा के शरद पवार, तृणमूल की ममता बनर्जी, वामपंथी सीताराम येचुरी, जनता दल (एस) के एचडी देवेगौड़ा, इनेलो के अभय चौटाला, झारखंड विकास मोर्चा के बाबूलाल मरांडी, झामुमो के हेमंत सोरेन, अगप के प्रफुल्ल कुमार महंत एक मंच पर जमा हुए थे. शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि 9 राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित 15 दलों के नेता मौजूद थे. सपा प्रमुख मुलायम सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती ने नीतीश के न्यौते को ठुकरा दिया था.

गौरतलब है कि हर आम चुनाव से पहले क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर नया मोर्चा बनाने की कसरत शुरू हो जाती है. साल 2014 के आम चुनाव से पहले भी ऐसी कोशिशें की गई थी, जो परवान नहीं चढ़ सकी. साल 2019 में होने वाले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए अभी से ही पहल शुरू हो चुकी है. नया विकल्प बनाने का दावा करने वालों में ज्यादातर वहीं लोग शामिल हैं, जो पिछले कई सालों से प्रधानमंत्री बनने का सपना पाले बैठे हुए हैं.

11 क्षेत्रीय दलों के मुखिया पिछले कई सालों से अपनी-अपनी महत्वाकांक्षओं को दबा-छुपा कर बैठे हुए हैं. नया फ्रंट बनने की बात पर वह एकजुटता का दिखावा भर करते रहे हैं. इस मोर्चे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव, जनता दल एस के नेता एचडी देवेगौड़ा, बीजू जनता दल के सुप्रीमो नवीन पटनायक और माकपा नेता प्रकाश करात जैसे क्षेत्रीय दबंग शामिल हैं, जो पिछले कई सालों से खुद के प्रधनमंत्री बनने की हवा उड़वाते रहे हैं. मुलायम कई दफे प्रधनमंत्री बनते बनते रह गए.

दिलचस्प बात यह है कि 11 दलों को मिला कर देश को नया विकल्प देने का दावा करने वाले खुद ही असमंजस की हालत में हैं. इसके सभी नेता हमेशा से ही इसकी कामयाबी को लेकर संशय में रहते हैं, इसलिए चुनाव के पहले वह कोई भी रणनीति नहीं बनाते हैं. सारे के सारे यही कह कर मामले को टरका देते हैं कि चुनाव के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी. नीतीश, मुलायम, नवीन, प्रकाश सभी तीसरे मोर्चे की घोड़ी पर चढ़ कर प्रधनमंत्री पद तक पहुंचने की जीतोड़ कोशिश में हैं. चुनाव के बाद ही रणनीति बनाने की बात यही साबित करती है कि जिस दल को ज्यादा सीट मिलेगी, उसके प्रधानमंत्री बनने का दावा और उम्मीद ज्यादा पक्की हो सकेगी.

भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी तीसरे मोर्चे की खिल्ली उड़ाते हुए कहते हैं कि यह हताश और हारे हुए घोड़ों का जमावड़ा भर है. यह कोई नई बात नहीं है, हर आम चुनाव से पहले थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश चालू की जाती है, पर जनता देख चुकी है कि यह प्रयोग हमेशा ही नाकाम रहा है. नेशनल या थर्ड फ्रंट हवाबाजी ही साबित हुई है.

देश में तीसरा मोर्चा या नेशनल फ्रंट बनाने वालों सारे दलों की परेशानी यह है कि पूरे 5 सालों तक वह अपनी डफली अपना राग अलापते रहते हैं और चुनाव आते ही साथ मिल कर सियासी खिचड़ी पकाने लगते हैं. चुनाव की हवा शुरू होते ही तीसरे मोर्चा की हवा भी बननी शुरू हो जाती है, जो आखिरकार हवाबाजी ही बन कर रह जाती है. इसके पहले 4 बार तीसरा मोर्चा बनाने की नाकाम कोशिशें हो चुकी है. अब देखना यह है कि लालू और नीतीश की अगुवाई में यह नया मोर्चा कुछ नया और सियासी रंग जमाता है यह पिछले मोर्चो की तरह चुनाव के बाद तिनका-तिनका बिखर कर अपने-अपने इलाके की सियासत में मसरूफ हो जाता है.   

टेलेंट उत्सव 2017 : बच्चों और मम्मियों ने बिखेरे फैशन के रंग

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित 3 दिन के टेलेंट उत्सव में बच्चों के साथ उनकी मम्मियों ने खूब धूम मचाई. अंश वेलफेयर फांउडेशन द्वारा आयोजित टेलेंट उत्सव में मैगजीन पार्टनर के रूप में महिलाओं की चहेती पत्रिका गृहशोभा थी तो बच्चों की प्रिय पत्रिका चंपक और सुमन सौरभ ने फैंसी ड्रेस और पेंटिंग कंपटीशन में बच्चों का हौसला बढ़ाया. अंश हैंडीक्राट स्टूडियो नाम से फैशन ब्रांड की शुरुआत के लिये साधारण गृहणियों ने रैंप पर उतर कर अलग अलग तरह की ड्रेस का प्रदर्शन किया. इसमें साडी, सलवार सूट और गाउन जैसी तमाम फैंसी पोशाकें शामिल थीं. फैशन डिजाइनर श्रद्वा सक्सेना ने बताया कि महिलाओं को रोजगार देने के लिये अंश हैंडीक्राट स्टूडियो की शुरुआत की गई है.

लखनऊ की बात हो और अवधी स्वाद का जिक्र न हो यह वाजिब नहीं, ऐसे में अवधी व्यंजनों को लेकर एक कुकिंग कंपटीशन का आयोजन भी किया गया. इसमें घर से बने व्यंजनों को सजाया गया. कुकिंग कंप्टीशन की जज शेफ आरती श्रीवास्तव ने अस्मत जमाल, वीरेन्द्र कौर, राखी लखन, मंजुलिका अस्थाना, अतिया सूफियान और आयुष तिवारी को शिक्षाविद पवन सिह चौहान के द्वारा सम्मानित किया गया. अस्मत जमाल का शाही टुकडा सबसे ज्यादा पंसद किया गया. फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में याना गुरूनानी, नावांश और अर्णव गर्ग को समाजसेवी नागेन्द्र सिह चौहान, रीता प्रकाश और सत्या सिंह ने पुरस्कार दिया. पेंटिंग कंपटीशन के विजेताओं अंशिका अग्रवाल, आयुष्मान, अर्णव गर्ग को रीता सिंह, श्रद्वा सक्सेना और ममता सिंह ने सम्मानित किया.

मां के प्रति अपने विचारों को व्यक्त करते हुये लिखी गई रचनाओं को पुरस्कार दिया गया. इसमें 20 रचनाओं को चुना गया. ‘मेरी प्यारी मां’ शीर्षक से लिखी गई कविताओं के विजेताओं को समाजसेवी और नेता अपर्णा यादव बिष्ट, मंहत देव्यागिरी वीएलसीसी की सेंटर हेड सीमा मिश्रा के द्वारा सम्मानित किया गया. विजेताओं में मधुरिमा वाजपेई, ओम कुमारी सिंह, ऋषि श्रीवास्तव, शैलेश सिंह, प्रीति श्रीवास्तव, किसना सरकार, अमिता मलिक नकरा, सुनीता राय, गरिमा वर्मा, निहारिका सिंह, वर्तिका सिंह, साजिदा सबां, मुस्कान रस्तोगी, माहिनी सक्सेना, डाक्टर इति मल्होत्रा, रजनी चौहान, साधना सिंह और शैली यादव प्रमुख थे. महिला नेता श्वेता सिंह ने कहा कि आज के समय में महिलायें पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो रही हैं. ऐसे कार्यक्रम इसकी मिसाल हैं.

डांस कंपटीशन में रिदम डांस फैक्ट्री और फिगो डांस क्रू के द्वारा स्पेशल डांस प्रस्तुत किया गया. जूनियर वर्ग के सोलों में अनुष्का, आर्यन और अंवतिका और सीनियर में अंजुल, सौम्या और योगेश विजेता बने. कपल डांस में शुभम-विशाल और हेमा-किंजल विजेता रहे. विजेताओं को आयोजक संस्था के सचिव अनूप घोष, विशारूख खान और शिक्षिका ममता सिंह चौहान और इंजीनियर पीयूष चौहान ने सम्मानित किया. मंच का संचालन रचना और बासू ने किया. श्रद्वा सक्सेना ने कहा कि इस तरह के आयोजन से परिवार के बीच बेहतर तालमेल बढ़ता है. बच्चों और उनकी मम्मियों के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है. वह घर की चाहरदीवारी से बाहर निकल कर मंच पर आती है और अपने मन के भावों को उकेरती हैं.     

पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम देती हैं बैंक से भी ज्यादा ब्याज

भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर रखते हुए हर कोई थोड़ी बहुत बचत करता ही है. लोग बचत के लिए तरह-तरह के निवेश विकल्प का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अमूमन ज्यादातर लोग बैंक के सेविंग अकाउंट को ही बेहतर मानते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें जमा पैसा आप किसी भी समय निकाल सकते हैं और इस खाते में जमा रकम पर सालाना 4 से 6 फीसद तक का ब्याज भी मिलता है. लेकिन डाकघर यानी पोस्ट ऑफिस में भी ऐसी तमाम स्कीम चलती हैं जो बैंक के सेविंग अकाउंट से भी ज्यादा फायदेमंद हैं. पोस्ट ऑफिस की कुछ ऐसी ही स्कीम जो अच्छा-खासा ब्याज देती हैं.

डाकघर मासिक बचत आय (Post Office Monthly Income Scheme Account -MIS)

डाकघर की मासिक आय खाता योजना ऐसे निवेशकों के लिए होती है जो एकमुश्त राशि का निवेश कर मासिक आधार पर ब्याज पाना चाहते हैं. यह योजना रिटायर्ड कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी होती है. इस खाते में म्च्योरिटी पीरियड पांच साल होता है. इसमें खाता धारक को जमा पर हर महीने ब्याज मिलता है. मौजूदा समय में इस योजना में 7.60 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है. इसे सिंगल या फिर ज्वाइंट दोनों तरह से खोला जा सकता है, दोनों में ही जमा की सीमा अलग-अलग है. जैसा कि सिंगल में अधिकतम निवेश 4.5 लाख है तो ज्वाइंट खाते में आप 9 लाख रुपए तक जमा करा सकते हैं.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)

पीपीएफ अकाउंट वेतनभोगी और व्यापारी वर्ग दोनों के लिए ही होता है. इसमें एक वित्तवर्ष में अधिकतम एक लाख रुपए तक के निवेश पर कर छूट का लाभ मिलता है. इसे या एकमुश्त या फिर 12 किश्तों में जमा किया जा सकता है. यह अकाउंट नाबालिग और बालिग दोनों का हो सकता है. इसका म्च्योरिटी पीरियड 15 साल है. इसमें जमा पर 7.9 फीसद का ब्याज मिलता है.

राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी)

अगर आप सुरक्षित निवेश के साथ बेहतर रिटर्न भी चाहते हैं तो आपको एनएससी का चयन करना चाहिए. इस योजना को सरकारी कर्मचारी, बिजनेसमैन और कर अदा करने वाले अन्य वेतन भोगियों की जरूरतों को मद्देनजर रखते हुए जारी किया गया है. इसमें निवेश की कोई सीमा नहीं होती है. राष्ट्रीय बचत पत्र दो तरह के होते हैं.

इस पर टीडीएस नहीं कटता है. ट्रस्ट और एचयूएफ इसमें निवेश नहीं कर सकते हैं. इसमें जमा पर 7.9 फीसद की दर से ब्याज मिलता है. इसमें जमा पर आयकर की धारा 80सी के तहत छूट मिलती है.

पांच वर्षीय डाकघर आवर्ती जमा खाता

यह भी निवेश का एक बेहतर टूल्स है. इसमें आपका पैसा पांच साल के लिए जमा रहता है. इस खाते में जमा पर 7.2 फीसद की दर से ब्याज मिलता है. साथ ही इस बचत योजना में एक साल के बाद 50 फीसदी रकम निकलाने की व्यवस्था है. ध्यान दें कि प्रति माह इसमें 10 रुपये का निवेश जरूरी है.

डाकघर सावधि जमा खाता (Post office fixed deposit account)

डाकघर सावधि जमा खाता भी निवेश का एक बेहतर माध्यम है, जिसमें आपको 7.8 फीसद की दर से ब्याज मिलता है. यह ब्याज दर आपको पांच वर्षीय खाते पर मिलता है. यह खाता व्यक्तिगत तौर पर खोला जा सकता है. सावधि जमा खाते पर आयकर अधिनियम की धारा 80c के तहत आयकर से छूट मिलती है.

वरिष्ठ नागरिक बचत खाता (एससीएसएस)

यह बचत योजना खासतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है. ये 60 की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए निवेश का शानदार विकल्प है. हालांकि, 55 साल से 60 साल की उम्र के बीच में रिटायर होने वाले या वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने वाले व्यक्ति भी रिटायरमेंट के तीन माह पहले यह खाता खोल सकते हैं. एक हजार रुपए से यह खाता खोला जा सकता है. इसमें अधिकतम निवेश की सीमा 15 लाख रुपए है. इस अकाउंट का म्च्योरिटी पीरियड पांच साल है. इस खाते को अपनी पत्नी के साथ ज्वाइंट अकाउंट के रुप में भी खोला जा सकता है. इस पर 8.4 फीसद की दर से ब्याज मिलता है.

फीफा : 21 साल में पहली बार भारत के नाम हुआ यह रिकॉर्ड

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ फीफा की ताजातरीन रैंकिंग में भारतीय फुटबॉल टीम 21 साल के बाद टॉप 100 देशों में शामिल हो गई है. अप्रैल, 2017 की रैंकिंग में भारत को एक पायदान का फायदा मिला, और वह 101 से 100वें नंबर पर पहुंच गई.

भारतीय फुटबॉल के इतिहास में यह सिर्फ तीसरा मौका है, जब भारतीय टीम की रैंकिंग 100 या 100 के भीतर पहुंची है. इससे पहले अप्रैल, 1996 में भारतीय टीम सौवें नंबर पर पहुंची थी. भारत की सर्वश्रेष्ठ फीफा रैंकिंग 94 है, जो उसने फरवरी, 1996 में हासिल की थी. एएफसी (एशियाई फुटबॉल परिसंघ) रैंकिंग में भारत 11वें नंबर पर कायम है.

केंद्रीय खेलमंत्री विजय गोयल ने यह खबर मिलते ही ट्वीट किया, "भारतीय फुटबॉल 21 साल में पहली बार 100वें पायदान पर पहुंची है…! स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा सिर्फ तीसरी बार हुआ है कि भारतीय फुटबॉल टीम वर्ल्ड टॉप 100 में पहुंची…"

टीम के मुख्य कोच स्टीफन कांस्टेंटाइन ने कहा, “जब तक हम आगे बढ़ रहे हैं, मैं खुश हूं. यह दिखाता है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं. आगे महत्वपूर्ण मुकाबले होने हैं और हम उन्हें हल्के में नहीं ले सकते.”

इस उपलब्धि पर अखिल भारतीय फुटबॉल संघ के महासचिव कुशल दास ने कहा, “यह खुशी की बात है कि हम सौवें नंबर पर पहुंचे. इसके साथ ही हमें आने वाली चुनौतियों को भी दिमाग में रखना है. एएफसी एशियाई कप क्वालीफायर 2019 हमारे लिए बड़ी चुनौती है. संघ, राष्ट्रीय टीम को हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है. हम अपेक्षा करते हैं कि टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी.”

एएफसी एशियाई कप क्वालीफायर में म्यांमार के खिलाफ 1-0 से ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच में कंबोडिया के खिलाफ 3-2 से मिली जीत के चलते भारत रैंकिंग में ऊपर चढ़ा. प्यूर्टो रिको के खिलाफ 4-1 से मिली जीत ने भी इसमें टीम की मदद की. भारतीय टीम ने पिछले 13 में से 11 मैच जीते हैं, जिनमें टीम ने कुल 31 गोल किए.

पिछले ही महीने भारतीय टीम ने 30 से ज्यादा पायदान की छलांग लगाते हुए 101वां स्थान हासिल किया था. दरअसल, पिछले महीने तक मलावी की टीम 100वें पायदान पर थी, लेकिन मैडागास्कर के हाथों 0-1 से हार के बाद मलावी को 13 पायदान नीचे खिसकना पड़ा और इसका फायदा भारत को भी हो गया. मलावी की हार से 101 से 113 तक रैंकिंग वाली सभी टीमों को एक-एक पायदान ऊपर चढ़ने का मौका मिल गया.

मौजूदा फीफा रैंकिंग

1. ब्राजील

2. अर्जेन्टीना

3. जर्मनी

4. चिली

5. कोलम्बिया

28. ईरान (एशिया में सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग)

100. निकारागुआ

100. लिथुआनिया

100. भारत

100. इस्टोनिया

एसी खरीदते समय इन बातों का जरूर रखें ख्याल

गर्मी का कहर शुरू हो गया है. ऐसे में आप एयर कंडीशनर खरीदने की सोच रहे होंगे, लेकिन उससे पहले आपको कुछ बातों को जान लेना बहुत जरूरी है. यदि आप एसी खरीदने जा रहे हैं तो इन गलतियों को ना करें, नहीं तो बाद में आपको दिक्कत हो सकती है.

विंडो और स्पिल्टि एसी

विंडो एसी सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में दिक्कत नहीं होती है, लेकिन सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों ने अब विंडो एसी बनाना बंद कर दिया है. तो आप स्पिल्टि एसी खरीद सकते हैं.

5 स्टार रेटिंग

एसी खरीदते समय 5 स्टार रेटिंग का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी होता है. जितनी ज्यादा रेटिंग वाला एसी खरीदेंगे उतनी ही बिजली की बचत कम होगी और आपको जेब ढिली नहीं करनी होगी. इसलिए स्टार रेटिंग जरूर चेक करें.

बड़े कैमरे के लिए फ्लोर स्टैंडिंग एसी

यदि आपको बड़े कमरे या हॉल के लिए एसी खरीदना है तो आप फ्लोर स्टैंडिंग एसी का चुनाव कर सकते हैं. इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में आपको कोई परेशानी नहीं होगी, साथ ही आपका बड़ा कमरा भी ठंडा रहेगा.

एसी की साइज

एसी की साइज कमरे की साइज पर निर्भर करती है. कमरे के साइज के हिसाब से एसी खरीदें. जैसे- 120 स्क्वायर फीट जगह के हिसाब से 1 टन की क्षमता वाला AC परफेक्ट होगा.

नॉन AC फीचर्स

आजकल मार्केट में ऐसे एसी भी बिक रहे हैं जो कमरा ठंडा करने के साथ-साथ कमरे की हवा को भी साफ कर रहे हैं. इसके अलावा ऐसे एसी कीड़े-मकौड़ों को भगाने वाले एसी भी हैं.

माटी की पुकार या फिर…

मातृभूमि और खून के रिश्तों में एक अजीब सी कशिश होती है जो इन दिनों लालकृष्ण आडवाणी के बयानों से समझ आ रही है. बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आईं तो दिल्ली के एक समारोह में आडवाणी का माटी प्रेम कुछ ऐसे दिखा कि उन की जन्मस्थली सिंध अब जो कि पाकिस्तान में है, इस का उन्हें दुख है. इस  दुख से निवृत्ति का एक ही तरीका है कि सिंध और कराची को भारत में मिला लिया जाए. यह बात हिंदूवादी भजनों और आरतियों के जरिए भी जताते रहते हैं कि एक दिन कराची तक में तिरंगा लहराएगा. आडवाणी अहिंसक तरीके से यह पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं. हालांकि यह माटीमोह व्यर्थ और दिखावे की बात है जिस का वर्तमान भारत माता से कोई लेनादेना नहीं. इसे भूल कर आडवाणी राष्ट्रपति पद की दावेदारी पर ध्यान दें तो बेहतर होगा.

सोने की थाली में

जिस थाली में खाओ, उस में छेद मत करो, कहनेभर की बात है वरना देशभर में होता यही है कि जनता के पैसों से नेता खूब महंगी दावतें उड़ाते हैं पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो हद ही कर दी जो आप सरकार की पहली सालगिरह पर 12 हजार रुपए थाली वाला खाना खिलाया.

महंगाई के इस दौर में कई राज्य सरकारें 5 रुपए में भरपेट भोजन वाली थाली मुहैया करा रही हैं और दिल्ली में  थाली की कीमत आसमान पार कर जाती है. यह बात चिंता की नहीं, बल्कि शोध की है कि उस थाली में क्याक्या नहीं रहा होगा. बारह सौ और बारह हजार की गफलत में शायद मामला सुलझ जाए पर केजरीवाल को अपनी नीयत और मंशा तो साफ रखनी पड़ेगी वरना लोग थाली में झाड़ू लगाने से भी नहीं चूकने वाले. अच्छा होगा अगर सभी राज्य सरकारें अपनी दावती थाली की कीमत सार्वजनिक करें और उस से भी अच्छा यह होगा कि यह थाली सिस्टम ही खत्म किया जाए.

सामाजिक प्रदूषण

गलती मेनका गांधी की नहीं, बल्कि उस एक वैचारिक छत की है जिस के नीचे वे शरण लिए हुए हैं. इसलिए कुछ तो असर पौराणिकवादियों का उन पर पड़ना स्वाभाविक है. गोवा फैस्ट 2017 में बोलते उन्होंने कहा कि लड़कियों से छेड़छाड़ के लिए फिल्में जिम्मेदार हैं, सभी फिल्मों में रोमांस की शुरुआत छेड़छाड़ से होती है. इस से छेड़छाड़ को बढ़ावा मिलता है.

अब तक पर्यावरण प्रदूषण के लिए पहचानी जाने वाली मेनका को कुछ दिनों से लड़कियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है पर इस हड़बड़ाहट में एक पुरानी बात को नए तरीके से बोलने के चक्कर में वे कायदे की बात नहीं कर पा रही थीं कि छेड़छाड़ पुरुषों की लंपट मानसिकता की देन है जिस के लिए दोष लड़कियों या फिर फिल्मों को क्यों दिया जाए. रही बात फिल्मी रोमांस के शुरुआत की, तो आजकल की फिल्मों में ऐसा नहीं होता. 70-80 के दशकों में जरूर ऐसा होता था. बेहतर होगा कि वे कुछ ताजी फिल्में देखें और समझें कि नई पीढ़ी भी परिपक्व रोमांस करने लगी है. यह भी मेनका नहीं बता पाएंगी कि जब फिल्में नहीं थीं, तब छेड़छाड़ की वजहें क्या रही होंगी.

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