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50 रुपए में बिकती लड़कियां

दुनियाभर में देह व्यापार के लिए ह्यूमन ट्रैफिकिंग यानी मानव तस्करी का जाल दिनबदिन मजबूत होता जा रहा है. इस में होती मोटी कमाई के मद्देनजर बीते कुछ सालों में भारत समेत दुनिया के कई देशों में यह तस्करी सब से बड़े धंधे के रूप में उभरी है. कई देशों में देह व्यापार को कानूनी मान्यता हासिल है तो कहीं सबकुछ गैरकानूनी. कानून से कहीं नजर बचा कर तो कहीं उसे साथ मिला कर यह धंधा अरबों का हो चुका है.

भारत में तो यह गैरकानूनी है लेकिन अन्य देशों की बात करें तो चीन में देह व्यापार का धंधा करीब 73 अरब डौलर का हो चुका है. हालांकि वहां यह व्यापार गैरकानूनी है इस के बावजूद दुनिया का सब से बड़ा बाजार चीन में ही मौजूद है. चीन सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी मसाज पार्लरों, बारों और नाइट क्लबों में यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा है.

वहीं, स्पेन दुनिया का दूसरा देश है जहां पौर्न व्यापार फलफूल रहा है. वहां यह व्यापार करीब 26.5 अरब डौलर का है. यूएन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 39 फीसदी स्पैनिश पुरुषों ने एक बार यौनकर्मी से संबंध बनाए हैं. जापान में यह व्यापार 24 अरब डौलर, जरमनी में 18 अरब डौलर, अमेरिका में 14.6 अरब डौलर, दक्षिण कोरिया में 12 अरब डौलर और थाइलैंड में 6.4 अरब डौलर का हो चुका है.

जाहिर है जहां इतनी बड़ी कमाई के विकल्प होंगे वहां देह व्यापार के नाम पर मानव तस्करी, लड़कियों की खरीदफरोख्त और उन के खिलाफ अपराध होने तय हैं.

वेश्यावृत्ति का जाल

अगर भारत की ही बात करें, तो यहां का देह व्यापार करीब 8.4 अरब डौलर का माना जाता है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2013 में तकरीबन साढ़े 6 करोड़ लोगों की तस्करी की गई. इन में से अधिकतर बच्चे हैं जिन्हें देह व्यापार, बंधुआ मजदूरी या भीख मांगने के काम में लगाया गया. वाक फ्री फाउंडेशन के 2014 के ग्लोबल स्लेवरी इंडैक्स के मुताबिक, भारत में 1.4 करोड़ से अधिक लोग आधुनिक गुलामी में जकड़े हुए हैं.

वेश्यावृत्ति को कानूनी जामा पहनाने के लिए यहां लंबे समय से एक पक्ष मांग कर रहा है. बावजूद इस के, देश में आज भी इस कारोबार में कोई भी लड़की या औरत मरजी से नहीं आती, या तो हालात उन्हें इस धंधे में ले आते हैं या फिर उन्हें बेच दिया जाता हैं.

फिलीपींस, जहां यह कारोबार करीब 6 अरब डौलर का बताया जाता है, सैक्स टूरिज्म के लिए दुनियाभर में चर्चित है. भारत की तरह फिलीपींस और तुर्की जैसे देशों में गरीबी और मजबूरी की मार झेल रही नाबालिग लड़कियां देह व्यापार का हिस्सा बन रही हैं. लेकिन नेपाल की कहानी तो सब से बुरी है. वहां गरीबी और भूकंप की त्रासदी झेल रहे परिवार अपनी ही बेटियों का सौदा करने को मजबूर हैं.

बदहाल नेपाल

धनुकी सिसकसिसक कर रो रही थी. उस के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. पुलिस वाले कुछ भी पूछते तो उस की सिसकियां तेज हो जाती थीं. आंसू और सिसकियों के बीच वह कुछ बोलती तो समझ में कुछ नहीं आता. पुलिस वाले भी परेशान थे कि इस लड़की को किस तरह से चुप कराएं.

करीब एकडेढ़ घंटे के बाद जब उस का रोना बंद हुआ तो उस 14 साल की मासूम लड़की ने जो कुछ कहा, उसे सुन कर पुलिस वालों के भी होश उड़ गए. उस ने कहा, ‘‘मैं नेपाल के रौटहट की रहने वाली हूं और जिला स्कूल में पढ़ती हूं. मेरे स्कूल के दोस्त सत्येंद्र ने मुझ से कहा था कि हम दोनों के घर वाले हमारा विवाह नहीं होने देंगे, इसलिए हम लोग घर से भाग जाते हैं और भारत में जा कर शादी कर लेंगे.

‘‘सत्येंद्र ने कहा कि पटना में एक उस का पहचानवाला है. वह शादी का सारा इंतजाम करा देगा. हम दोनों पटना आ गए. यहां आने पर उस की नीयत बदल गई. वह मुझ से गंदे काम करने के लिए कहता था. जब मैं शादी की बात करती तो वह बहाने बनाने लगा. कुछ दिनों के बाद उस के साथ 2-4 लड़के भी आने लगे. वे लोग मेरे साथ छेड़छाड़ करने लगे. डर से मेरी आवाज नहीं निकलती थी. वे लोग जोरजबरदस्ती करते और फिर चले जाते. कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा. सत्येंद्र कभीकभी ही मिलने आता और कहता था कि वह मुझे रानी बना कर रखेगा, मैं राज करूंगी. एक दिन मौका मिलते ही मैं कमरे से भाग निकली और थाने आ गई.’’

धनुकी की दास्तान को सुन कर पुलिस वाले भी चकरा गए. पुलिस अफसरों के दिमाग घूमने की वजह यह नहीं थी कि किसी लड़की को बहलाफुसला कर जिस्म के धंधे में धकेल दिया गया, बल्कि वे इस बात को ले कर चकराए थे कि 14-15 साल के बच्चे भी ट्रैफिकिंग के धंधे में लगे हुए हैं. आमतौर पर इतनी कम उम्र के लड़कों पर इन मामलों में पुलिस को शक नहीं होता है.

कुछ इसी तरह पिछले साल 24 अगस्त को 15 साल की नाबालिग नेपाली लड़की जानकी को बहलाफुसला कर उस का पड़ोसी उसे ले भागा. नेपाल से उसे भगा कर वह पटना पहुंचा. 10वीं क्लास में पढ़ने वाली जानकी नेपाल के बीरगंज उपमहानगर पालिका क्षेत्र की रहने वाली है. उस के घर के पास ही रहने वाला विकास कुमार सोनी उस से शादी करने का झांसा दे कर उसे अपने साथ भगा ले गया.

आसपास के लोगों ने बताया कि पिछली 13 जुलाई को जानकी और विकास सड़क के किनारे बातचीत कर रहे थे. लड़की के चाचा वीरेंद्र साहा ने बीरगंज थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में लिखवाया था कि पटना के मालसलामी महल्ले का रहने वाला लड़का विकास जानकी को बहलाफुसला कर ले भागा है.

विकास नेपाल में मोबाइल टावर लगाने का काम करता था. पुलिस ने जब विकास के मोबाइल टावर की लोकेशन का पता किया तो पटना के मालसलामी इलाके में उस के होने का पता चला. लड़की के मामा शिवशंकर चौधरी ने पटना के मालसलामी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और एएसपी विकास वैभव को मामले की जानकारी दी गई. शिवशंकर ने बताया कि पिछली 13 जुलाई को उस की भांजी स्कूल के लिए घर से निकली थी, उस के बाद उस का कोई पता नहीं चला.

भूकंप से बिगड़े हालात

हिमालय की गोद में बसे, प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर नेपाल ने 25 अप्रैल, 2015 और उस के बाद आए तेज व विनाशकारी भूकंप के कई झटकों को झेला. नेपाल के 26 जिलों में भूकंप ने जानमाल को काफी नुकसान पहुंचाया जबकि पश्चिमी हिस्से में इस का खास असर नहीं हुआ. करीब 10 हजार लोगों के मरने और 30 हजार लोगों के घायल होने व 7 लाख से ज्यादा घरों के मलबे में तबदील होने के बाद नेपाल में पलायन की रफ्तार तेज हो गई है. हजारों लोगों की जान गंवाने के बाद नेपाल के सामने सब से बड़ी चुनौती भूकंप के प्रकोप से बच गए लोगों और देश की पूरी व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की है.

नेपाल से लौट कर आया बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी प्रखंड का रहने वाला मजदूर विमल साहनी का कहना है, ‘‘वहां खाने के सामान और पानी की अभी भी बहुत कमी है. सारी दुकानें बंद हैं. बिजली नहीं रहने की वजह से रात में परेशानी कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है.’’

भूकंप की त्रासदी झेल रहा नेपाल अब एक और नया दर्द झेल रहा है. गरीबी और पैसों की किल्लत की वजह से लोग अपनी बेटियों को बेच रहे हैं. कई लड़कियां परिवार को दुख में देख कर खुद को दलालों के हाथों सौंप रही हैं. नेपाल में इन दिनों लड़कियों और बच्चों को काम दिलाने के नाम पर कई दलाल हर इलाके में खासकर राहत शिविरों के आसपास घूम रहे हैं.

साल 2015 में नेपाल में आए भयंकर भूकंप की तबाही के बाद वहां लड़कियां और औरतें 50-100 रुपए में सैक्स करने के लिए राजी हो रही हैं. इस से नेपालियों में एड्स का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.

पब्लिक अवेयरनैस फौर हैल्थफुल एप्रोच फौर लिविंग के मैडिकल डायरैक्टर और एड्स स्पैशलिस्ट डाक्टर दिवाकर तेजस्वी बताते हैं कि पिछले 7-8 महीनों में पटना स्थित उन की क्लीनिक में नेपाल से आए एड्स के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. रक्सौल, बीरगंज और जनकपुर आदि इलाकों के कईर् लोग एचआईवी की चपेट में आ गए हैं. भूकंप के बाद सबकुछ गवां चुकी औरतें और लड़कियां अपना जिस्म बेच कर अपनी जिंदगी चला रही हैं. सैक्स के दौरान सुरक्षा का उपाय नहीं करने से एचआईवी मरीजों की संख्या और बढ़नी तय है. नेपाल से पटना में उन की क्लीनिक में आए एचआईवी मरीजों की तादाद में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है.

सक्रिय गिरोह

दलाल आमतौर पर गरीब बच्चों के मांबाप को समझाते हैं कि वे बच्चों को मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पटना जैसे शहरों में नौकरी पर लगवा देंगे. इस से अच्छा पैसा मिलेगा और उन की जिंदगी बदल जाएगी. खानेपीने की दिक्कत खत्म हो जाएगी. काम के साथ उन के बेटेबेटियों की पढ़ाई का भी इंतजाम कर दिया जाएगा. पढ़ने के बाद ज्यादा अच्छी नौकरी मिल जाएगी.

सुनसरी का रहने वाला जीवन थापा  बताता है, ‘‘मानव तस्करी में संलिप्त गिरोह पढ़ाई, खाना और बेहतर जीवन दिलाने का वादा करते हैं. भूकंप और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे मांबाप आसानी से इन के झांसों में फंस जाते हैं. वे बेटियों को बेहतर जिंदगी देने और कुछ रुपयों के चक्कर में जानेअनजाने उन की जिंदगी को बदतर बना रहे हैं.’’

गौरतलब है कि नेपाल और भारत के बीच 1,750 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है. दोनों देशों के लोगों को एकदूसरे देश में आनेजाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती है. सीमा सुरक्षा बल के डीजी बंशीधर शर्मा कहते हैं, ‘‘दोनों देशों के बीच कुल 26 चौकियां बनी हुई हैं और रोजाना करीब 10 हजार लोग आरपार होते हैं. इस के बाद भी पूरी चौकसी बरती जाती है. ट्रैफिकिंग के मामलों पर भी नजर रखी जाती है और इस बारे में किसी पर थोड़ा सा भी शक होने पर पूरी जांचपड़ताल की जाती है.’’

डीजी बंशीधर आगे कहते हैं, ‘‘बिहार और नेपाल का बौर्डर काफी संवेदनशील है. भारत और नेपाल के बीच रोटी और बेटी का रिश्ता होने की वजह से दोनों देशों के बीच काफी आवाजाही रहती है. ऐसे में संदिग्धों को पहचानने में जवानों को काफी परेशानी होती है. खुलीसीमा का फायदा गैरकानूनी लोग आसानी से उठाने की कोशिश करते रहते हैं. इसे रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल ने बौर्डर इंटरैक्शन टीम का गठन किया है. इस टीम के लोग सादी वरदी में लोगों से मिलतेजुलते रहते हैं और संदिग्धों पर नजर रख रहे हैं.’’

दलालों की चांदी

पूर्णियां कोर्ट के सीनियर वकील संजय कुमार सिन्हा कहते हैं, ‘‘नेपाल में लड़कियों को बेचने व खरीदने का धंधा जोरों से चल रहा है. भूकंप से बदहाल नेपाल में खाने के लाले पड़े हुए हैं. सरकार असमंजस में है. ऐसे में लड़कियों को खरीद कर उन्हें वेश्यालयों तक पहुंचाने वाले दलालों की चांदी हो गई है.

नेपाली लड़कियां 3 से 15 हजार रुपए तक में बेच दी जाती हैं. गरीब पैसों के लालच या परिवार के बाकी लोगों की पेट की आग को बुझाने के लिए बेटियों को दरिंदों के हाथों बेच देते हैं. तस्कर उन लड़कियों को दिल्ली, मुंबई या कोलकाता के बाजारों में डेढ़ से ढाई लाख रुपए तक में बेच डालते हैं. वहां से ज्यादातर नेपाली लड़कियों को अरब, हौंगकौंग, जापान, कोरिया, अफ्रीका, मलयेशिया, थाइलैंड आदि देशों में पहुंचा दिया जाता है. वहां लड़की के सारे पासपोर्ट, वीजा, पहचानपत्र आदि दस्तावेजों को जब्त कर लिया जाता है, ताकि लड़की भाग न सके.’’

काठमांडू और उस के आसपास के इलाकों में चल रही कई ट्रैवल एजेंसियां और मैरिज ब्यूरो संस्थाएं लड़कियों की तस्करी के खेल में शामिल हैं. ऐसा केवल काठमांडू में नहीं, बल्कि दुनियाभर में दलालों की नजर उन मजबूर परिवारों या लड़कियों पर रहती है. लड़कियों की शादी कराने, नौकरी दिलाने आदि का झांसा दे कर वे गरीब और भोलेभाले मांबाप को अपने जाल में फंसा लेते हैं. उन्हें समझाया जाता है कि गरीबी की वजह से वे अपनी बेटी का विवाह तो कर नहीं सकते हैं, ऐसे में मैरिज ब्यूरो के जरिए अच्छा लड़का मिल सकता है.

गरीबी की मार

पोखरा का रहने वाला दिलीप थापा बताता है, ‘‘मेरी बेटी दिव्या की शादी दिल्ली के किसी व्यापारी से कराने की बात कही गई थी. मैं ने ट्रैवल एजेंट की बात मान ली. गरीबी की वजह से मैं अपनी बेटी का विवाह किसी अच्छे लड़के से नहीं कर सकता था. इसलिए मैं बेटी को विवाह के लिए दिल्ली भेजने के लिए राजी हो गया. जब ट्रैवल एजेंट दिव्या को ले कर जाने लगा तो उस ने मेरे हाथ में 2 हजार रुपए थमाए थे. उसी समय मेरा माथा ठनका था कि उस ने

2 हजार रुपए क्यों दिए? रुपए तो मुझे देने चाहिए थे, पर कुछ कह नहीं सका.’’

थापा रोते हुए बताता है, ‘‘आज मेरी बेटी को दिल्ली गए 3 महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन उस का कोईर् अतापता नहीं है. ट्रैवल एजेंट के औफिस में पूछता हूं तो वहां लोग यही कहते हैं कि तुम्हारी बेटी की शादी कर दी गई है. वह अपने ससुराल में राज कर रही होगी.’’ यह कहतेकहते दिलीप की आंखों में आंसू छलक आते हैं. उसे इस बात का मलाल है कि क्यों उस ने अपनी बेटी को ट्रैवल एजेंट के हवाले कर दिया था.

विराटनगर के एक ट्रैवल एजेंट ने बताया कि इन दिनों कई फर्जी ट्रैवल एजेंट्स और प्लेसमैंट एजेंसियों के एजेंट्स नेपाल में खुलेआम धूम रहे हैं. वे इस बात की पड़ताल करते रहते हैं कि किस परिवार को भूकंप से ज्यादा नुकसान हुआ है. किस परिवार में कितनी लड़कियां और बच्चे हैं.

गरीब परिवार की लड़कियों को देख कर उन की बांछें खिल उठती हैं. लड़की के मांबाप को दलाल आसानी से समझा लेते हैं कि उन की बेटी को नौकरी मिल जाएगी और वह हर महीने अपनी कमाई से मोटी रकम घर भेजेगी. उस की शादी भी करा दी जाएगी. जिस से परिवार का गुजारा बढि़या से चलेगा. नया घर बनाने में मदद मिल जाएगी. दलालों के इस झांसे में लोग फंस जाते हैं और उन के हाथों में अपनी बेटी व मासूम बच्चों को सौंप देते हैं.

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद नेपाल के राहत शिविरों में 15 लाख से ज्यादा लड़कियां रह रही हैं और उन की हिफाजत का कोई इंतजाम नहीं है. इतना ही नहीं, करीब 30 हजार ऐसी लड़कियां हैं जिन के मांबाप समेत परिवार के सभी सदस्यों को भूकंप ने लील लिया. वे पूरी तरह से बेसहारा व लावारिस जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं. ऐसी लड़कियों को काम दिलाने के नाम पर बहलानाफुसलाना काफी आसान है. पैसे, भोजन, काम और घर मिलने के लालच में वे बड़ी ही आसानी से दलालों की गिरफ्त में फंस रही हैं.

नेपाल के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वहां 38 फीसदी लोग गरीबीरेखा के नीचे रहते हैं. इस के साथ ही नेपाल एशिया का सब से गरीब देश भी है. बेहतर जिंदगी और कमाई की नीयत से 52.8 फीसदी नेपाली लड़कियां एजेंटों के झांसे में फंस रही हैं. परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए 19 फीसदी और प्रेम के चक्कर में फंस कर 1.4 फीसदी नेपाली लड़कियां घर छोड़ रही हैं.

रक्सौल में रहने वाले भारत-नेपाल मैत्री संघ के सदस्य अनिल कुमार सिन्हा बताते हैं कि नेपाल से 10 से 35 साल की लड़कियों और औरतों की तस्करी होने की खबरें आएदिन सुनने को मिल रही हैं और उन्हें भारत समेत दुबई, हौंगकौंग आदि देशों के वेश्यालयों में पहुंचाया जा रहा है.

दुबई में तस्करी

गौरतलब है कि कुछ महीने दिल्ली एयरपोर्ट पर दिल्ली पुलिस ने एयरलाइन के 2 कर्मचारियों के साथ 2 तस्करों को दबोचा था. वे अपने साथ 21 नेपाली लड़कियों को दुबई ले जाने की कोशिश में थे. लड़कियों ने पुलिस को बताया था कि सभी लड़कियों को दुबई में अच्छी नौकरी देने की बात कही गई थी.

बौर्डर पुलिस के मुताबिक, ‘‘लड़कियों के तस्कर गरीब लड़कियों को वेश्यालयों में पहुंचाने के अलावा उन्हें और भी कई तरह के धंधों में झोंक रहे हैं. इन्हें घरेलू कामकाज, भीख मांगने, मजदूरी, सर्कस में मजदूरी आदि के कामों में भी लगाया जाता है. सुंदर और जवान लड़कियों व औरतों को सैक्स के धंधे में धकेल दिया जाता है और बाकी औरतों को दूसरे कामों में भी लगा दिया जाता है.

पुलिस के मुताबिक, वेश्यालयों के साथ ही डांसगर्ल, बारगर्ल और मसाजगर्ल के रूप में भी नेपाली लड़कियों को आसानी से खपाया जाता है. पटना, मुजफ्फरपुर, रांची, कोलकाता आदि के कई मसाजपार्लरों में नेपाली लड़कियां काम करती हुई आसानी से दिख जाती हैं.

भारत में सैक्स का कारोबार करीब 4 लाख करोड़ रुपए का है. दिल्ली के जीबी रोड, कोलकाता के सोनागाछी, मुंबई के कामाठीपुरा, पुणे के पेठ, इलाहाबाद के मीरगंज, बनारस के शिवदासपुर, मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान, मुंगेर के श्रवण बाजार आदि रैडलाइट इलाकों में 3-4 महीनों के दौरान नेपाली लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पिछले 8 अगस्त को पुणे के पेठ इलाके में छापामारी कर पुलिस ने 700 नेपाली लड़कियों को बरामद किया था.

लड़की को उस के घर से लेने के बाद एजेंट्स लड़की को सीमापार कराने में सहायता पहुंचाने वालों के हाथों में 10-12 हजार रुपए थमा देते हैं. भारत और नेपाल के बीच खुलीसीमा होने के कारण दोनों देशों के लोग बेरोकटोक एकदूसरे के देशों में आतेजाते रहते हैं. सीमा पर बसे लोगों को हर चोररास्ते का पता होता है और वे कस्टम व सीमा सुरक्षा बलों की आंखों में आसानी से धूल झोंक देते हैं. वे लोग एजेंट्स द्वारा सौंपी गई लड़की या औरत को अपना परिवार वाला बता कर सीमा के पार पहुंचा देते हैं.

भारत की सीमा में पहुंचने के बाद एजेंट्स टैक्सी बुक करते हैं और सामान या लड़कियों को बिहार समेत उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई आदि के वेश्यालयों तक पहुंचाते हैं. इस के लिए एजेंट्स टैक्सी वालों को 10 से 15 हजार रुपए तक दे देते हैं. रेल या बस के मुकाबले टैक्सी से सफर करना उन के लिए ज्यादा महफूज होता है.

वेश्यालयों में लड़कियों को बेच कर एजेंट्स 75 हजार रुपए से 1 लाख रुपए प्रति लड़की झटक लेते हैं. वहीं, 30 साल से ज्यादा उम्र की औरतों की कीमत 40 से 50 हजार रुपए लगाई जाती है. विदेशों के वेश्यालयों यानी थाइलैंड, मलयेशिया, कोरिया, जापान, हौंगकौंग, आस्ट्रेलिया, चीन आदि देशों में एक लड़की के बदले एजेंट्स की 30 लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है.

शोषण की हद

रक्सौल पुलिस ने पिछले दिनों एक 14 साल की नेपाली लड़की को जख्मी हालत में रक्सौल रेलवे स्टेशन के पास से बरामद किया. लड़की ने पुलिस को बताया कि वह नेपाल के पोखरा शहर की रहने वाली है. पिछले साल 24 जुलाई को कुछ लोगों ने उसे उठा लिया और 3 दिनों तक अंधेरे कमरे में भूखाप्यासा रखा. जब भूख से उस की बेचैनी बढ़ने लगी तो एक रोटी खाने को दी. उस के बाद 10 से ज्यादा लोगों ने उस के साथ कई दिनों तक बलात्कार किया.

उस के बाद उस की आंखों पर पट्टी बांध कर बाहर निकाला गया और एक अंजान जगह व मकान में छोड़ दिया गया. 2 दिनों के बाद कुछ लोग आए और उसे मुजरा सीखने की ट्रेनिंग देने की बात करने लगे. इनकार करने पर बैल्ट से पीटा गया और 2 लोगों ने बलात्कार किया. बेबस हो कर उस ने मुजरा सीखना शुरू किया. एक सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद उसे दूसरी जगह ले जाया गया. वहां नएनए लोग आते थे और उस से नाचने के लिए कहते और उस के बाद उस का बलात्कार करते.

एक दिन मौका पा कर वह भाग निकली. बाहर निकल कर पता किया तो लोगों ने बताया कि वह मुजफ्फरपुर शहर में है. वहां से ट्रेन में बैठ कर रक्सौल पहुंच गई. वहां से नेपाल जाने की कोशिश कर रही थी कि कुछ पुलिस वालों ने पकड़ लिया.

भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी की रोकथाम का काम कर रही स्वयंसेवी संस्था भूमिका विहार की निदेशक शिल्पी सिंह बताती हैं, ‘‘मानव तस्करी के मामले में बिहार का सीमांचल इलाका ट्रांजिट पौइंट बनता जा रहा है. संस्था की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में 519 बच्चे गायब हुए, जिन में ज्यादातर लड़कियां थी. विवाह और नौकरी का लालच दे कर लड़कियों की तस्करी की जाती है. बच्चों को गायब करने के बाद उन्हें वेश्यालयों में पहुंचा कर उन्हें देह व्यापार के जलील धंधे में झोंक दिया जाता है.’’

कुल मिला कर नेपाल ही नहीं, देशविदेश के हर कोने में लड़कियां देह व्यापार के धंधे में झोंकी जा रही हैं.

उन की मुफलिसी का फायदा उठा कर चमड़ी से दमड़ी कमाने वाले लोगों ने इसे एक कमाऊ पेशा बना लिया है. जिस में ऊपर से ले कर नीचे तक सब भ्रष्ट हैं. इंसानियत के लिहाज से स्थिति भयावह व चिंताजनक है. इंसानियत थोड़े से इंसानरूपी हैवानों की दरिंदगी का शिकार है.        

भूख और गरीबी के हाथों मजबूर

बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के एक पौश इलाके के आलीशान मकान से छुड़ाई गई 16 साल की नेपाली लड़की सुनिति गुरूंग से हुई बातचीत से यह साफ हो जाता है कि नेपाल में आए भूकंप के बाद कई परिवारों के सामने खाने के लाले पड़े हुए हैं. दलाल नेपालियों को बरगला कर उन की बेटियों को खरीदने व बेचने का धंधा कर रहे हैं, लेकिन कई लोग जानबूझ कर अपनी बेटियों को दलालों के हाथों सौंप भी रहे हैं. इस के पीछे उन की यही सोच है कि बेटी बेच कर कुछ पैसे तो मिलेंगे ही, साथ में बेटी भी भूख व गरीबी से नहीं मरेगी. कई बेटियां तो परिवार की फांकाकशी से तंग आ कर खुद ही जिस्म के दलालों से मिल कर मोलभाव कर रही हैं. सुनिति से बातचीत के दौरान कई दर्दनाक व खौफनाक सचाइयों का खुलासा हो जाता है.

भूकंप वाले दिन आप के साथ क्या हुआ था?

भूकंप में मेरे मांबाप की मौत हो गई. जिस समय भूकंप आया था उस समय मैं स्कूल में थी. घर पहुंची तो देखा कि मेरा घर पूरी तरह से गिर गया है और मांबाप उस में दब कर मर गए हैं. चारों ओर चीखपुकार मची हुई थी. मैं भी रो रही थी.

उस के बाद क्या हुआ?

पुलिस वालों ने बताया कि मेरे मांबाप मर गए हैं. उन्होंने पूछा कि और कोई रिश्तेदार है तुम्हारा? मैं ने कहा, ‘‘नहीं.’’ उस के बाद मुझे कैंप में पहुंचा दिया गया. 8 दिनों तक कैंप में रही. खाना और पानी भी नहीं मिलता था. दिनभर में इतना खाना भी नहीं मिलता था कि पेट भर सके.

फिर क्या किया?

काम खोजने निकली तो कहीं काम नहीं मिला. सब यही कहते थे कि कैंप में ही रहो. पूरा नेपाल तबाह हो गया है, कोई काम अभी नहीं मिलेगा.

कैंप में किसी ने कोई बदतमीजी या गलत हरकत तो नहीं की?

लड़कियों के लिए अलग कैंप था, लेकिन वहां खाना और पानी पहुंचाने वाले कुछ लोग लड़कियों और औरतों से गंदी बातें करते थे. मुझे अच्छा नहीं लगता था और बहुत गुस्सा आता था.

दलाल के चक्कर में फंस कर मुजफ्फरपुर कैसे पहुंची?

कैंप में ही खाने का पैकेट बांटने वाले एक आदमी ने कहा कि वह पटना में अच्छी नौकरी दिला देगा. मैं तैयार हो गई. उस ने पटना ले जाने के बजाय मुझे यहां (मुजफ्फरपुर) एक औरत के घर में छोड़ दिया. उस ने कहा कि औरत पटना पहुंचा देगी. 2 दिन तो ठीकठाक गुजरे लेकिन उस के बाद रोज 3-4 आदमी आते और मेरे साथ जबरदस्ती करते थे.

तब क्या सोचा आप ने?

क्या सोचती. उस समय तो लगा कि अब पूरी जिंदगी उसी नरक में बितानी पड़ेगी. बाहर निकलने का कोई ओरछोर ही पता नहीं चलता था. हर तरफ मजबूत पहरा था.

वहां खाना और रुपया आदि मिलता था?

खानापीना तो समय पर मिलता था लेकिन रुपयों के बारे में पूछने पर कहा जाता था कि उस का मेहनताना बैंक में जमा हो रहा है. चुपचाप काम से काम रखो.

बाहर निकलने का मौका कैसे मिला?

एक दिन सुबह उठ कर तैयार हो रही थी कि हल्ला मचने लगा और भागदौड़ होने लगी. मैं कमरे से बाहर निकली तो देखा कि चारों तरफ पुलिस वाले खड़े हैं और सभी को पकड़ रहे थे. मैं बाहर की ओर भागने लगी तो पुलिस वालों ने मुझे भी पकड़ लिया. अब पुलिस वाले कहते हैं कि वे मुझे घर भेज देंगे. अब मैं नेपाल जा कर क्या करूंगी. वहां कौन मुझे काम देगा? कौन खानापीना देगा? जिंदगी कैसे कटेगी? कुछ पता नहीं चल रहा है?

(खुफिया विभाग के एक अफसर के सहयोग से लड़की से बात हो सकी है. उन के अनुरोध पर लड़की का नाम बदल दिया गया है.)

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इसके साथ ही ग्रुप डिस्काउंट पर भी यह ऑफर लागू नहीं होगा. गोएयर ने उड़ान के लिए तय की गई अवधि के मध्य में कुछ ‘ब्लैकआउट डेट्स’ भी रखी है, इन तारीखों पर मानसून ऑफर लागू नहीं होगा. इसके लिए टिकट बुकिंग करते समय कस्टमर चेक कर लें ताकि आपको आगे किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े.

गोएयर की शुरुआत नवंबर 2005 में हुई थी. वर्तमान में कंपनी देश में 23 जगहों से परिचालन कर रही है. इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, दिल्ली, गोवा, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ समेत कई स्थान शामिल हैं.

अभी गोएयर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि 599 रुपए वाला टिकट किस रूट के लिए मिलेगा. इससे पहले स्पाइसजेट 849 रुपए और इंडिगो 899 रुपए में फ्लाइट के प्रमोशन ऑफर्स की घोषणा कर चुके हैं. एयरलाइन कंपनी गोएयर पीएम मोदी की UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम में भी शामिल है. इस स्कीम का उद्देश्य देश में घरेलू उड़ानों को आम आदमी लायक सस्ता करना है. 

कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे हैकर के जाल में

फिरौती के मकसद से ब्रिटेन समेत 90 से ज्यादा देशों के अस्पतालों और कंपनियों पर किए गए साइबर हमले से हड़कंप मच गया है. बड़े पैमाने पर तेजी से बढ़ रहे साइबर अटैक से सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अब कंप्यूटर से लेकर मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड से लेकर बैंक अकाउंट तक साइबर क्रिमिनल्स की पहुंच में हैं. आईए, कुछ ऐसे कॉमन साइबर क्राइम के बारे में जानते हैं जिनसे आपको सतर्क रहने की जरूरत है.

बैंक अकाउंट फ्रॉड

साइबर क्राइम से जुड़े ज्यादातर केस फाइनैंशल फ्रॉड से आते है जिसमें बैंक अकाउंट फ्रॉड के मामले सबसे ज्यादा है. हैकर्स आपकी बैंक अकाउंट डीटेल्स पाने के लिए कई ट्रिक अपनाते हैं. इसके लिए आपको मेल पर कोई लिंक या अटैचमेंट भेजा जाता हैं, जिसपर क्लिक करने पर या तो आप बैंक की फेक साइट पर पहुंच जाते हैं या फिर आपके सिस्टम में खतरनाक मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता हैं. कोशिश करें कि कभी भी किसी भी वेबसाइट, सर्वर, मोबाइल या डेस्कटॉप पर अपने अकाउंट की डिटेल्स सेव न करें.

कंम्प्यूटर वाइरस

अनऑथराइज़्ड सॉफ्टवेयर आपके डिवाइस को डैमेज कर देते हैं. जैसे 'रैंसमवेयर' जो आपके डेटा और इमेज को एनक्रिप्ट कर देता है और इसके जरिए साइबर अटैकर डिजिटल करंसी में फिरौती मांगते हैं.

हैकिंग

आज के दौर में हैंकिग कोई रॉकेट साइंस नहीं, हैकर्स स्पैम मेल भेज कर आपके इमेल एड्रेस को टारगेट करते हैं. आपको बता दें कि जंक मेल फैलाने वाले देशों की लिस्ट में भारत सबसे आगे है. इसके लिए आपको अपने सभी अकाउंट के मजबूत पासवर्ड बनाना चाहिए जिसे आसानी से हैक न किया जा सके. साथ ही मेल पर आने वाले फ्रॉड लिंक से सतर्क रहें, क्योंकि इसपर क्लिक करते ही आपकी जानकारी लीक हो सकती है.

अडवांस फ्री फ्रॉड

कई बार आपको कुछ लुभावने मेल आते होंगे, जिसमें बहुत कम पैसे इन्वेस्ट करके आपको बड़ी पूंजी कमाने का लालच दिया जाता है. वास्तव में ये आपकी डीटेल हैक कर आपको झांसा देने का एक नया जरिया है. इस तरह के ईमेल से सतर्क रहें.

हैरसमेंट

इंटरनेट पर दूसरों का मजाक बनाना, धमकाना, शर्मिंदा करने वाले कॉमेंट करना जिससे यूजर तंग आ जाए, इसे साइबर बुलिंग कहते हैं, जिसे सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के रूप में जाना जाता है.

ब्लैकमेल

ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. इसमें लोगों की निजी तस्वीरें या विडियो को ऑनलाइन पब्लिश करने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम मांगी जाती है.

आपके लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इसका शिकार होने से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए और साथ ही इसका शिकार हो जाने की सूरत में आप क्या करें. ऐसे में आप ये कदम जल्द से जल्द उठाने चाहिए.

फाइल बैकअप

बिना देर किए अपनी सभी फाइलों का एक अलग सिस्टम में बैकअप ले लें. इसके लिए सबसे बेहतर एक एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव रहेगी जो इंटरनेट से जुड़ी न हो. ऐसे में अगर आप साइबर अटैक का शिकार होते भी हैं, तब भी आपकी सारी इन्फॉर्मेशन आपके पास सुरक्षित रहेगी और हैकर्स फिरौती वसूलने के लिए उसका फायदा नहीं उटा पाएंगे.

संदिग्ध ईमेल्स, वेवसाइट्स और ऐप्स से सावधान

रैंसमवेयर के काम करने के लिए यह जरूरी होता है कि हैकर्स शिकार बनाए जाने वाले सिस्टम में उस खतरनाक सॉफ्टवेयर डाउननोड करें. इसी के जरिए बाद में अटैक किया जाता है. फर्जी ईमेल्स, वेबसाइट्स पर दिखने वाले संदिग्ध ऐड्स और अनवेरिफाइड ऐप्स का इस्तेमाल कर के ही इन सॉफ्टवेयर्स को सिस्टम में इंस्टॉल किया जाता है. ऐसे में हमेशा सावधान रहें और गैरजरूरी ईमेल्स और वेबसाइट्स को खोलने से बचें. ऐसे ऐप को कभी इंस्टॉल न करें जिन्हें ऑफिशल स्टोर द्वारा वेरिफाई न किया गया हो. साथ ही कोई भी प्रोग्राम इंस्टॉल करने के पहले उसका रिव्यू जरूर पढ़ें.

ऐंटीवाइरस का इस्तेमाल करें

किसी भी ऐंटीवाइरस का इस्तेमाल कर के अपने सिस्टम में रैंसमवेयर को डाउनलोड होने से रोका जा सकता है. ज्यादातर ऐंटीवाइरस प्रोग्राम्स ऐसे फाइलों को स्कैन कर लेते हैं जिनमें रैंसमवेयर होने की आशंका रहती है. इसके अलावा सीक्रिट इंस्टॉलेशन्स को भी ऐंटीवाइरस रोक पाने में सक्षम होते हैं.

ऑलटाइम बेस्ट आईपीएल टीम के कप्तान हैं धोनी

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने इंडियन प्रीमियर लीग की पिछले दस सालों की अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम चुनी है जिसमें उन्होंने एम एस धोनी को कप्तान चुना है. रिकी पॉन्टिंग ने टीम में आईपीएल नियमों के मुताबिक 4 विदेशी और 7 भारतीय खिलाड़ी चुने हैं. आईए एक नजर डालते हैं रिकी पॉन्टिंग की ऑल टाइम बेस्ट आईपीएल टीम पर.

क्रिस गेल

रिकी पॉन्टिंग ने क्रिस गेल को अपना ओपनर चुना है. गेल 100 आईपीएल मैचों में 41.12 के औसत से 3578 रन बना चुके हैं और उनका स्ट्राइक रेट 151.61 है. गेल के नाम 5 आईपीएल शतक और 21 अर्धशतक भी हैं.

डेविड वॉर्नर

रिकी पॉन्टिंग ने दूसरा ओपनर सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान डेविड वॉर्नर को चुना है. वॉर्नर 39.87 के औसत से 3909 रन बना चुके हैं और उनके नाम 35 अर्धशतक और 2 शतक हैं.

विराट कोहली

रिकी पॉन्टिंग की ऑल टाइम बेस्ट आईपीएल टीम में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली तीसरे नंबर पर हैं. विराट आईपीएल में 148 मुकाबलों में 37.26 के औसत से 4360 रन बना चुके हैं. विराट के नाम 29 अर्धशतक और 4 शतक हैं.

रोहित शर्मा

मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा को रिकी पॉन्टिंग की टीम में चौथे नंबर पर जगह मिली है. 155 मुकाबलों में 33.03 के औसत से 4129 रन बनाए हैं. रिकी पॉन्टिंग के मुताबिक रोहित शर्मा संयम और बिग हिटिंग दोनों कर पाने में खासे सक्षम है इसीलिए उन्हें मिडिल ऑर्डर में रखा गया है.

सुरेश रैना

गुजरात लायंस के कप्तान सुरेश रैना को रिकी पॉन्टिंग ने 5वें नंबर पर जगह दी है. रैना आईपीएल के सबसे अनुभवी बल्लेबाज हैं उन्होंने 160 मैच में 34.37 के औसत से कुल 4538 रन बनाए हैं.

एम एस धोनी

रिकी पॉन्टिंग की ऑल टाइम बेस्ट आईपीएल प्लेइंग इलेवन के कप्तान और विकेटकीपर एम एस धोनी हैं. धोनी ने 155 मैचों में 3506 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 136.95 है. पॉन्टिंग ने धोनी को कप्तान बनाने पर कहा ‘धोनी के पास बेशुमार अनुभव है, जब तक वो क्रीज पर रहते हैं आपकी जीत निश्चित है.’

ड्वेन ब्रावो

रिकी पॉन्टिंग ने अपनी टीम का ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो को चुना है. ब्रावो ने 106 मैच में 22.94 के औसत से 1262 रन बनाए हैं तो वहीं उनके नाम 122 विकेट भी हैं.

हरभजन सिंह

मुंबई इंडियंस के ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को भी रिकी पॉन्टिंग की बेस्ट आईपीएल प्लेइंग इलेवन में जगह मिली है. भज्जी ने आईपीएल में 136 मुकाबलों में 127 विकेट झटके हैं और उनका इकॉनमी रेट सिर्फ 6.95 है.

अमित मिश्रा

दिल्ली डेयरडेविल्स के लेग स्पिनर अमित मिश्रा भी पॉन्टिंग की प्लेइंग इलेवन में हैं. मिश्रा ने 124 मैच में 134 विकेट लिए हैं.

लसिथ मलिंगा

तेज गेंदबाजों की बात करें तो रिकी पॉन्टिंग की टीम में लसिथ मलिंगा को जगह मिली है. मलिंगा ने 107 मैच में 152 विकेट लिए हैं.

आशीष नेहरा

रिकी पॉन्टिंग की प्लेइंग इलेवन के दूसरे तेज गेंदबाज आशीष नेहरा हैं. नेहरा ने 88 आईपीएल मुकाबलों में 106 विकेट अपने नाम किए हैं.

पैसों के बिस्तर पर सोता है यह बॉक्सर

अमेरिका के पूर्व प्रोफेशनल बॉक्सर फ्लॉयड मेवेदर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं. मेवेदर कभी नहीं हारने के लिए तो जाने ही जाते हैं, इसके साथ ही वो अपनी दौलत को लेकर भी चर्चा में रहते हैं. मेवेदर ने अमेरिका के लिए साल 1996 से 2015 तक खेला और अपने करियर के दौरान वो कभी नहीं हारे. एक बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ-साथ मेवेदर अपनी अपार दौलत के लिए भी जाने जाते हैं.

मेवेदर अमेरिका के पूर्व बॉक्सर हैं और उन्होंने अपने करियर की सभी लड़ाई जीतीं. मेवेदर दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी रह चुके हैं. इसके अलावा फोर्ब्स ने अपनी लिस्ट में उन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा कमाने वाला खिलाड़ी बताया था.

अपने करियर के दौरान वो तीन बार 'फाइटर ऑफ द ईयर' का अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. यह अवॉर्ड उन्हें साल 2007, 2013 और 2015 में मिला था. इसके अलावा वो 6 बार बेस्ट फाइटर ईएसपीवाई (Best Fighter ESPY Award) भी जीत चुके हैं.

मेवेदर एक गरीब परिवार से आते हैं. मेवेदर बहुत ही गरीब परिवार से आते हैं. आज उन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि वह कहां से आते हैं. वह 7 लोग एक छोटे से कमरे में रहा करते थे और कई बार उनके यहां बिजली भी नहीं होती थी.

मेवेदर की दादी ने सबसे पहले उनके बॉक्सिंग के हुनर को पहचाना था. मेवेदर ने एक बार अपनी दादी से कहा कि उन्हें नौकरी ढूंढनी चाहिए तब उनकी दादी ने कहा कि नहीं तुम केवल बॉक्सिंग करो. बता दें कि मेवेदर एक बॉक्सर परिवार से ही आते हैं. उनके पिता भी बॉक्सर थे.

फ्लॉयड ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वह अपनी गाड़ी में 5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 32 करोड़ रुपये रख रहे थें. यह पैसा उनके नए स्ट्रिप क्लब के लिए था. जिसका नाम है 'गर्ल कलेक्शन'.

मेवेदर 22 हजार स्कवायर फुट के बंगले में रहते हैं. उनके बंगले में 5 बेडरूम, 5 बाथरूम, लिविंग और डाइनिंग रूम है. इसके अलावा मेवेदर के बंगले में 600 स्कवायर फुट का पूल और प्राइवेट डॉक भी है. साल 2016 में इनकी संपत्ति 340 मिलियन डॉलर थी.

मेवेदर के पास 30 करोड़ की मंहगी कार है. जब उन्होंने यह कार खरीदी थी उस समय मेवेदर दुनिया के ऐसे दूसरे शख्स थे जिनके पास ये कार थी. अपनी इस कार की तस्वीर फ्लॉयड ने इंस्टाग्राम पर भी शेयर की थी.

पिछले साल एक वेबसाइट ने बताया था कि वो बाल कटवाने के लिए 1 हजार डॉलर यानी लगभग 65 हजार रुपये खर्च करते हैं. मेवेदर हफ्ते में दो बार बाल कटवाते हैं और कभी-कभी हफ्ते में तीन बार भी वो हेयर कट करवा लेते हैं. मेवेदर कभी पैसों से बना बिस्तर पर लेटे नजर आते हैं तो कभी बहुत सारा पैसा साथ रख तस्वीरें शेयर करते हैं.

साल 2015 में लॉस वेगस में हुई 'फाइट ऑफ द सेंचुरी' से फ्लॉयड ने लगभग 22 करोड़ डॉलर कमाए थे. मेवेदर ने अपने करियर में आरबों रुपये कमाए और कामयाबी हासिल की. आज लग्जरी लाइफ जीने वाले फ्लॉयड ने अपने बचपन में बहुत सी परेशानियों का सामना किया है.

हिंसक वीडियो गेम्स

मोबाइल और आईपैड, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम, कपिल शर्मा का कौमेडी शो और डीजे के म्यूजिक के परे की दुनिया को आज जिस तरह से इग्नोर किया जा रहा है, यह अगले 5-7 साल में अपना असर दिखाने लगेगा. आज के किशोरों को इन खिलौनों के वीडियो गेम्स में मजा तो आता है पर ये सब बदन पर जंग लगाने वाले हैं, माइंड को रस्टी करने वाले हैं.

मानव की मूलभूत जरूरतों से इन का सीधा संबंध नहीं है. ये किसी को तेज नहीं बनाते, नई जानकारी नहीं देते, कुछ करने की प्रेरणा नहीं देते. टैकी होने से कोई नया कुछ ईजाद कर ले जरूरी नहीं. हो सकता है वे इन बेहद उलझी तकनीकों का पूरा लाभ उठा पा रहे हों पर वे सुख को पास ले आएं जरूरी नहीं.

इतिहास के पन्ने खोल कर देखेंगे तो पता चलेगा कि आदमी तब खुश हुआ जब उस ने उत्पादन के और तरीके ढूंढ़े. आज भी बहुतकुछ नया बन रहा है पर लग रहा है कि जनता का बड़ा हिस्सा जो नया बन रहा है उस का गलत इस्तेमाल कर रहा है.

हिंसा से भरे वीडियो गेम्स रोमांच पैदा करते हैं और किशोरों को शैतानियों से रोकते हैं, पर वे ही उन आत्मघाती हमलों के लिए तो जिम्मेदार नहीं जिन से आज दुनिया भर में खौफ है. इन खेलों में खिलाड़ी एक नहीं कईकई को मारता है और जितनों को मारता है, उतने ज्यादा अंक मिलते हैं. यही गुस्सा फेसबुक और व्हाट्सऐप पर अनर्गल गालियों में दिखता है जो दूसरे देश, धर्म, रंग वाले के लिए कही जाती हैं. यही गुस्सा अब वोटरों की पसंद में बदल रहा है. हर देश में गुस्सैलों का राज होने लगा है. जिस ने जितने मारे वह उतना ही मजबूत.

पश्चिम एशिया की स्प्रिंग रैवोल्यूशन ने ट्यूनीशिया मिस्र व लीबिया में सरकारें बदल दीं क्योंकि मोबाइल और आईपैड से लाखों को घरों से बाहर निकालना आसान था पर उन से कुछ करवाना असंभव, क्योंकि सोशल मीडिया एकदूसरे से जोड़ तो सकता है पर उन्हें जुड़वा कर उनसे कुछ बनवा नहीं सकता. सोशल मीडिया हाथ की उंगलियों की देन है, गंभीरता से विषय पर सोचनेविचारने का प्लेटफौर्म नहीं है.

अगर किशोरों को कुछ नया न करने की आदत पड़ गई तो जो कुछ पिछली 4-5 सदियों में बना है वह हाथ से फिसल जाएगा. एक बार फिसला तो फिर आएगा या नहीं, पता नहीं. टैपटैप करते मोबाइल और आईपैड जरूरी हैं पर इतने नहीं कि ताउम्र इन्हीं को सहारा बना लो. ये सिर्फ जूते हो सकते हैं जो लंबी यात्रा में साथ दें पर ये अपनेआप लंबी यात्रा पर नहीं जा सकते. इन्हें पहना और फेंक दिया वाला स्थान मिलना चाहिए, बस.                            

अमेरिका-नेपाल रिश्तों का ट्रंप काल

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के आने के बाद नेपाल अपने भविष्य को लेकर चिंतित दिखा. यह चिंता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातों में वैश्विक हितों की परवाह न करने की ध्वनि से और बढ़ी. हालांकि नैन्सी पेलोसी के नेतृत्व में नेपाल भ्रमण पर आए डेमोक्रेट सांसदों की यात्रा नेपाल को आश्वस्त करने वाली है. नैन्सी के अनुसार, 70 साल पुराने दोनों देशों के रिश्तों पर अमेरिका में सत्ता परिवर्तन का कोई असर नहीं पडे़गा.

नेपाल में अमेरिका की भूमिका खासी महत्वपूर्ण रही है. 23 जनवरी, 1951 को दोनों देशों के बीच हुए यूएस एड वाले समझौते की परिणति थी कि नेपाल को मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में बड़ी सफलता मिली. 1951 में हालत यह थी कि नेपाल का हर चौथा व्यक्ति मलेरिया से ग्रस्त था. तराई क्षेत्र तो इससे बुरी तरह त्रस्त था, पर यूएस एड का असर था कि नेपाल न केवल इस संकट से मुक्त हुआ, बल्कि खेती योग्य उपजाऊ भूमि विकसित करने का भी रास्ता खुला.

हाल के वर्षों में नेपाल की शिक्षा प्रणाली पर अमेरिका का खासा असर दिखा है. यूएस एड की पहल पर पहली बार देश में दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत हुई और तमाम नेपाली इसका लाभ उठा चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया और जापान के बाद पढ़ाई के मामले में अमेरिका नेपाली युवकों की पसंद बना हुआ है. इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन के 2015-16 के आंकडे़ बताते हैं कि अमेरिका में कुल विदेशी छात्रों का पांच प्रतिशत नेपाली हैं. हालांकि यह दुर्भाग्यपूण है कि द्विपक्षीय संबंधों से नेपाल के आर्थिक विकास को कोई खास गति नहीं मिली.

प्रधानमंत्री प्रचंड भले आश्वस्त हों कि ट्रंप शासनकाल में अमेरिका-नेपाल के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर जाएंगे, पर उन्हें इस आशावाद से आगे जाने की जरूरत है. राष्ट्रपति ट्रंप को अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं, लेकिन विदेशी छात्रों सहित अमेरिका की अप्रवासी आबादी को लेकर उनके रुख पर सवाल उठने लगे हैं. यह एक ऐसा मामला है, जिस पर नेपाल के हजारों छात्रों और उनके परिजनों की नजर इसलिए भी लगी रहेगी कि इसी से तय होगा कि अमेरिकी सांसदों के दल के नेपाल भ्रमण में किए गए दावे और वादे कितने सच साबित होते हैं.

मई में किए जाने वाले खेती के खास काम

मई महीने में मौसम व हालात के थपेड़ों के बीच मेहनतकश किसान हमेशा डटे रहते  हैं और उन के कामों का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता  है. पेश  है

मई महीने के दौरान किए जाने वाले खेती के कामों का

एक खुलासा:

* गेहूं के साथसाथ जई व जौ वगैरह फसलें दे चुके खेतों की मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें ताकि पिछली फसल के अवशेष खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाएं और मिट्टी भी भुरभुरी हो जाए. पिछली फसल का मोटामोटा कचरा बटोर कर खेत से दूर फेंक देना चाहिए.

* मई की गरमी का खास फायदा यह होता  है कि इस से तमाम कीड़ेमकोड़े झुलस कर खत्म हो जाते  हैं. इसीलिए करीब 2 हफ्ते के अंतराल से खेतों की लगातार जुताई करते रहना चाहिए. ऐसा करने से गरमी व लू का असर मिट्टी में अंदर तक जाता  है और वहां मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया व फफूंदी नष्ट हो जाते  हैं.

* मिट्टी को भरपूर धूप का सेवन कराना काफी फायदेमंद होता  है. इस से मिट्टी का अच्छाखास इलाज हो जाता  है और मिट्टी अगली फसल के लिए बढि़या तरीके से तैयार हो जाती  है.

* मई में अपने ईख के खेतों का खास खयाल रखें और 2 हफ्ते के अंतर से सिंचाई करते रहें, ताकि खेतों में भरपूर नमी बरकरार रहे.

* गन्ने के खेतों में सिंचाई के साथसाथ निराईगुड़ाई भी करते रहें ताकि खरपतवार न पैदा हो सकें.

* गन्ने की फसल में कीड़ों व रोगों का खतरा बराबर बना रहता  है, लिहाजा उन के मामले में सतर्क रहें.

* अगर धान की अगेती किस्म की नर्सरी डालनी हो, तो मई के आखिर तक डाल सकते  हैं. नर्सरी में कंपोस्ट खाद या गोबर की खाद का इस्तेमाल जरूर करें.

* धान की नर्सरी डालने में ध्यान रखने वाली बात यह है कि हर बार जगह बदल कर ही नर्सरी डालें. धान की नर्सरी से अच्छा नतीजा पाने के लिए सिंचाई में कमी न करें.

* अगर सिंचाई का इंतजाम हो तो चारे के लिहाज से ज्वार, बाजरा व मक्के की बोआई करें. पानी की दिक्कत होने पर इन फसलों की बोआई न करें, क्योंकि इन फसलों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है.

* मई के आसपास बरसीम, लोबिया व जई की बीज वाली फसलें तैयार हो जाती  हैं. ऐसे में उन की कटाई का काम खत्म करें.

* मई के आखिरी हफ्ते में अरहर की अगेती किस्मों की बोआई करें, मगर बोआई से पहले जुताई कर के व खाद वगैरह मिला कर खेत को सही तरीके से तैयार करना जरूरी है.

* अपने सूरजमुखी के खेतों की सिंचाई करें, क्योंकि मई के गरम मौसम में खेत में नमी रहना जरूरी है.

* सूरजमुखी की सिंचाई के वक्त इस बात का खास खयाल रखें कि पौधों की जड़ें न खुलने पाएं. अगर पानी से जड़ें खुल जाएं, तो उन पर मिट्टी चढ़ाना न भूलें. मिट्टी चढ़ाने से पौधों को मजबूती मिलती है और वे तेज हवाओं को भी झेल लेते हैं.

* मई के दौरान सूरजमुखी की फसल को बालदार सूंड़ी व जैसिड रोग का काफी खतरा रहता  है. ऐसा होने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले कर माकूल इलाज करें.

* गाजर, मूली, मेथी, पालक, शलजम, पत्तागोभी, गांठगोभी व फूलगोभी की बीज वाली फसलें अमूमन मई तक तैयार हो जाती  हैं. ऐसे में उन की कटाई का काम निबटाएं. बीजों को निकालने के बाद सुखा कर उन का भंडारण करें.

* पहले डाली गई तुरई की नर्सरी के पौधे तैयार हो चुके होंगे, लिहाजा मई के अंत तक उन की रोपाई निबटाएं.

* खेत को अच्छी तरह तैयार करने के बाद बारिश के मौसम वाली भिंडी की बोआई करें. बोआई से पहले निराईगुड़ाई कर के खेत के तमाम खरपतवार निकालना न भूलें.

* अगर प्याज के खेतों में नमी कम लगे तो तुरंत हलकी सिंचाई करें. मई के अंत तक प्याज की पत्तियों को खेत पर झुका दें, ऐसा करने से  प्याज की गांठें बेहतरीन होंगी.

* मई में लहसुन की फसल तैयार हो जाती  है, लिहाजा उस की खुदाई करें. खुदाई के बाद फसल को 3 दिनों तक खेत में सूखने दें. 3 दिनों बाद लहसुनों को उठा कर साफ व सूखी जगह पर रखें.

* मई के दौरान अकसर लीची के फलों के फटने की शिकायत सामने आती  है. इस की रोकथाम के लिए लीची के गुच्छों व पेड़ों पर पानी का अच्छी तरह छिड़काव करना फायदेमंद रहता है.

* अपने आम, अमरूद, नाशपाती, आलूबुखरा, पपीता, लीची व आंवला के बगीचों की 10-15 दिनों के अंतराल पर सही तरीके से सिंचाई करते रहें. इस दौरान सिंचाई में लापरवाही बरतना ठीक नहीं  है, क्योंकि गरमी की वजह से बागों का पानी बहुत तेजी से सूखता रहता है.

* अगर औषधीय फसल तुलसी की बोआई करनी हो तो इस के लिए मई का महीना सही रहता  है.

* मई में ही औषधीय फसल सफेद मूसली की भी बोआई करें. यह बहुत ज्यादा फायदे वाली फसल होती है.

* औषधीय फसल सर्पगंधा की नर्सरी डालने के लिहाज से भी मई का महीना बेहद मुफीद होता  है.

* मई के तीसरे हफ्ते में पहाड़ी इलाकों में रामदाना की बोआई करें. बोआई से पहले बीजों को फफूंदीनाशक से उपचारित करना जरूरी है.

* मई के आखिरी हफ्ते में पहाड़ी इलाकों में मंडुआ की बोआई भी की जा सकती  है. यह भी काफी फायदे वाली फसल होती है.

* सूरजमुखी के खेत में मधुमक्खियों के बक्से रखें. बक्सों को छायादार जगह पर ही रखें. बक्सों के आसपास टबों में पानी भर कर रखें ताकि मधुमक्खियों को पानी की खोज में भटकना न पड़े. मधुमक्खियों से दोहरा फायदा होता  है यानी शहद उत्पादन के साथसाथ परागण भी अच्छा होता  है.

* मई की गरमी में अकसर मछली पालने वाले तालाब सूखने लगते  हैं, लिहाजा उन की मरम्मत कराएं ताकि उन का पानी बाहर न निकल सके. तालाब की सफाई का भी खयाल रखें. इस बात का खयाल रखें कि कोई भी तालाब में कचरा न डालने पाए.

* मई में मवेशियों को लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, लिहाजा उन्हें बारबार साफ व ताजा पानी पिलाएं. लू लगने पर पशु के सिर पर बर्फ की पोटली रखें व डाक्टर से इलाज कराएं.

* गरमी की वजह से गायभैंस के छोटे बच्चों को अकसर दस्त की बीमारी हो जाती है, ऐसे में उन्हें दूध कम पीने दें. बीमार बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखें. जरूरी लगे तो डाक्टर को बुलाएं.

* मुरगियों को गरमी से बचाने के लिए उन के शेडों के अंदर कूलरों का इंतजाम करें

या शेड की जालियों पर जूट के परदे लगा कर उन्हें पानी से भिगोते रहें. चूंकि मुरगियां नाजुक होती  हैं, लिहाजा उन का खास खयाल रखना पड़ता  है.

* मवेशियों के खाने का भी पूरा खयाल रखें. उन्हें बासी व खराब चारा न दें, वरना हैजा होने का खतरा रहता  है. ऐसे में पशु को बचाना कठिन हो जाता है.

* आम के नए बाग लगाने के लिए 12×12 मीटर पर गड्ढों की खुदाई करें. नर्सरी में बीजू पौधों की सिंचाई करें और खरपतवार निकालें. फलों का चिडि़यों से बचाव करें. अगेती किस्मों के फलों की तोड़ाई करें और उन्हें बाजार भेजने का इंतजाम करें.

* केले के पौधों में 50-60 ग्राम यूरिया प्रति पौधे की दर से मिलाएं. बनाना बीटिल की रोकथाम के लिए कार्बोफ्यूरान 3 जी या फोरेट 10 जी 1 चाय चम्मच भर गोफे में डालें. फलों और डंठलों पर कालेभूरे धब्बे दिखाई देने पर कापर आक्सीक्लोराइड 0.3 फीसदी के  घोल का छिड़काव करें.

इस के अलावा 5-7 दिनों के अंतर पर सिंचाई करें और नया बाग लगाने के लिए खेत की तैयारी और गड्ढ़ों की खुदाई करें.

* नीबू वर्गीय फलों के बाग की सिंचाई करें. कैंकर बीमारी और सफेद मक्खी का नियंत्रण संस्तुत विधियों के मुताबिक करें. नए बाग लगाने के लिए 6×6 मीटर पर गड्ढों की खुदाई करें.

* अमरूद के बागों में हलकी जुताई और सिंचाई करें. सूखी हुई टहनियों को निकाल कर फेंक दें.

* लीची के फलों को फटने से बचाने के लिए जमीन में सिंचाई द्वारा सही नमी बनाए रखें. नए बाग के लिए 10×10 मीटर की दूरी पर

गड्ढों की खुदाई करें.

* अंगूर में 7 से 10 दिनों के अंतर पर सिंचाई करें. फल पकने की स्थिति से 1 हफ्ते पहले सिंचाई बंद कर दें. फल के गुणों में

बढ़ोत्तरी के लिए इथ्रेल 1 मिलीलीटर प्रति 4 लीटर पानी की दर से या जिब्रेलिक एसिड की संस्तुत मात्रा का पौधों पर पर्णीय छिड़काव करें. फसल सुरक्षा के लिए जाल का इस्तेमाल करें.

* आंवले के नए बाग रोपने के लिए

8-10 मीटर की दूरी पर गड्ढों की खुदाई करें और नए रोपे गए बागों की 10-15 दिनों के अंतर पर सिंचाई करें.

* पपीते की फसल में लिंग  भेद साफ होने पर नर पौधों को निकालें और जरूरत के मुताबिक सिंचाई का काम करें.

सब्जी और मसाले

* टमाटर,  बैगन, मिर्च की फसलों में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें. फलों की तोड़ाई और बाजार का काम करें. टमाटर और  बैगन के फलों से बीज निकालें. मिर्च के पके फलों को तोड़ कर सुखाने और बीज निकालने का काम करें.

* भिंडी की फसल में सिंचाई करें. फलों की तोड़ाई और बाजार ले जाने का इंतजाम करें. पकी फलियों को तोड़ने के बाद सुखा कर बीज निकालने का काम करें. बीमार और बेकार पौधों को निकालने का काम करें.

* लहसुन और प्याज की खुदाई और उन्हें छाया में सुखाने का काम करें. छंटाई कर के उन्हें हवादार कमरों में रखें. लहसुन में पत्तियों सहित बंडल बना कर रखने से नुकसान कम होता  है.                                        ठ्ठ

 

 

 

फूल और सुगंधित फसलें

 

* गुलाब की फसल में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें.

* रजनीगंधा में 15 दिनों के अंतराल पर निम्नलिखित पोषक तत्त्व के मिक्चर को 400 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ की दर से पर्णीय छिड़काव (फसल अवधि में कुल 16 छिड़काव) करें:

यूरिया 1.108 किलोग्राम, डीएपी 1.308 किलोग्राम, पोटेशियम नाइट्रेट 0.875 किलोग्राम, टी पाल 0.1 फीसदी.

* मेंथा में 10 से 12 दिनों के अंतर पर सिंचाई और निराईगुड़ाई करें. नाइट्रोजन की बची एक तिहाई मात्रा (40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) की टापड्रेसिंग का काम करें. 

जिप्सम और पायराइट से सुधरेगा ऊसर

ऊसर जमीन खेती करने के लिहाज से बेकार होती  है. जब जमीन का काफी हिस्सा ऊसर हो तो चिंता वाली बात होती है, मगर इस मामले में वैज्ञानिकों ने हल तलाश लिया है. अब ऊसर जमीन को सुधारा जा सकता . भारत में एक बड़ा हिस्सा ऊसर जमीन का है, जिस में खासतौर पर लवणीय और क्षारीय जमीन मुख्य रूप से पाई जाती है.एक अनुमान के मुताबिक देश में लवणीय और क्षारीय जमीन उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों के बड़े क्षेत्र में पाई जाती है. ऊसरीले इलाकों में खेती करना मुश्किल है या फिर मुमकिन ही नही है. ऐसे में इन समस्याग्रस्त जमीनों का जल्दी से सुधार करने के लिए एक अचूक तरीका है जिप्सम और पायराइट से जमीन का सुधार.

ध्यान देने वाली बात यह है कि जिप्सम और पायराइट न केवल ऊसर जमीन को सुधारते हैं, बल्कि नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के बाद सब से जरूरी द्वितीयक पोषक तत्त्व जैसे सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कुछ सूक्ष्म पोषक तत्त्वों जैसे लोहा वगैरह का भी अच्छा स्रोत हैं. क्या है ऊसर जमीन की पहचान : ऐसी जमीन, जिस में लवण (सोडियम, सोडियम बाईकार्बोनेट, सोडियम क्लोराइड) वगैरह की अधिकता की वजह से ऊपरी सतह सफेद दिखाई देने लगती है या जमीन बहुत ही कठोर हो जाती है और फसलें नहीं उगाई जा सकती हैं, उसे ऊसर जमीन कहते हैं.

ऊसर जमीन की मुख्य पहचान है, जमीन का कड़ा हो जाना, पानी न सोखना, जिस से जमीन पर कटाव होता है और नाले बन जाते हैं, जहां ऊसर क्षेत्र होता है, वहां मकानों में प्लास्टर जल्दी गिरने लगते हैं, यह धीरेधीरे ईंटों को गलाने लगता है. बारिश होने पर यह मिट्टी साबुन की तरह फिसलने लगती है. ऊसर जमीन 3 प्रकार की होती है, लवणीय, क्षारीय और लवणीय व क्षारीय.

लवणीय जमीन : लवणीय मिट्टी का निर्माण आमतौर पर 55 सेंटीमीटर से कम बारिश वाले शुष्क और अर्द्धशुष्क इलाकों में होता है. इस मिट्टी में मृदा स्तर की ऊपरी सतह पर सब से ज्यादा लवण की मात्रा रहती है और सूखे मौसम में मिट्टी की सतह पर उजली पपड़ी सी नजर आती है. मिट्टी का पीएच मान 8.5 से कम पाया जाता है.

क्षारीय जमीन : इसे सोडिक मिट्टी या काली क्षारीय, अलवणीय क्षारीय मिट्टी भी कहते हैं. इस का रंग काला होता है. मिट्टी का पीएच मान 8.5 से 10 तक होता है. मिट्टी में कड़ी परत बनी होती है, जिस से ऐसी जमीन का सुधार करना मुश्किल होता है. लिहाजा, इस में जिप्सम या पायराइट का इस्तेमाल जमीन सुधारक के रूप में करना बेहतर रहता है.

लवणीय व क्षारीय जमीन : यह मिट्टी ज्यादातर भूरे रंग की पाई जाती है और शुष्क क्षेत्रों में ज्यादा देखने में आती है. इस में ऊपरी सतह पर लवण पाए जाते हैं, लेकिन नीचे की सतह पर क्षारीय जमीन की तरह कड़ी परत पाई जाती है. इस का पीएच मान 8.5 से कम, लेकिन नितारने के बाद 8.5 से अधिक होता है.

क्या है जिप्सम : जिप्सम को कैल्शियम सल्फेट के नाम से जानते हैं. इस में 29.2 फीसदी कैल्शियम, 18.6 फीसदी सल्फर व 20.9 फीसदी भारानुसार पानी होता है. इस की खास विशेषताएं निम्न प्रकार हैं:

* यह जमीन सुधारक के साथसाथ कैल्शियम और सल्फर का मुख्य स्रोत होने के कारण मिट्टी को कैल्शियम और सल्फर जैसे द्वितीयक पोषक तत्त्व देता है. इन दिनों ज्यादातर मिट्टी में इन दोनों तत्वों की भारी कमी है. इस की वजह से पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.

* यह जल में घुलनशील होता है.

* इस का कैल्शियम आयन क्षारीय मृदा में से विनिमेय सोडियम आयन को विस्थापित कर के सोडियम क्ले को कैल्शियम क्ले (खराब आयन को लाभदायक आयन) में बदल देने का माद्दा रखता है. कैल्शियम कार्बनिक पदार्थों को मृदा के क्ले कणों को बांधता है, जिस से मिट्टी के कणों में टिकाऊपन आता है, लिहाजा, मिट्टी में हवा का आनाजाना आसान हो जाता है.

* यह सस्ता और सुलभ है.

क्या है पायराइट : इसे आयरन सल्फाइड कहते हैं. इस में सब से  ज्यादा 22 से 24 फीसदी सल्फर, 20 से 22 फीसदी आयरन, 0.5 से 0.6 फीसदी मैग्नीशियम, 35 से 40 फीसदी सिलिका होता है. इस की खास विशेषताएं निम्न प्रकार हैं.

* पायराइट में द्वितीयक पोषक तत्त्वों मैग्नीशियम व सल्फर के अलावा भरपूर मात्रा में आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्त्व भी पाए जाते हैं. मिट्टी को मिलने वाले पोषक तत्त्वों के आधार पर यह जिप्सम से ज्यादा बेहतर है.

* यह पानी व हवा से क्रिया कर के तुरंत ही सल्फ्यूरिक अम्ल और आयरन सल्फेट बनाता है. सल्फ्यूरिक अम्ल और आयरन सल्फेट मिट्टी की क्षारीयता को तेजी से घटा देते हैं.

* इस के द्वारा बनाया गया सल्फ्यूरिक अम्ल ऊसरीली मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट से क्रिया कर के कैल्शियम सल्फेट बनता है, जो मिट्टी को कैल्शियम मिट्टी में बदल देता है.

* जमीन सुधार के समय जिप्सम के मुकाबले पायराइट जल्दी लगभग 7-10 दिनों में ही मिट्टी में क्रिया पूर्ण कर लेता है. वहीं दूसरी ओर जिप्सम को 10-15 दिनों तक पानी में डूबे रहने की जरूरत पड़ती है.

कब होगा प्रयोग : ऊसर जमीन का सुधार साल भर किया जा सकता है. मगर सब से मुफीद समय गरमियों का महीना है. इन दिनों में मिट्टी में पानी सोखने की कूवत ज्यादा होती है. साथ ही, इस से रिसने की क्रिया आसान हो जाती है. रिसाव होने से नुकसानदायक लवण जमीन की निचली सतह में चले जाते हैं, जिस से ऊपरी सतह में लवण की सांद्रता काफी कम हो जाती है.

साथ में क्या होगा प्रयोग : ऊसर जमीन को सुधारने के लिए संस्तुत मात्रा में जिप्सम अथवा पाइराइट की आधी मात्रा और 10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद अथवा 10 टन प्रेसमड अथवा 10 टन फ्लाईएैश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें. यदि गोबर की खाद, प्रेसमड, फ्लाईएैश न हो, तो जिप्सम अथवा पायराइट की संस्तुत की गई पूरी मात्रा का प्रयोग करना चाहिए.

कैसे होगा प्रयोग : जिप्सम या पायराइट का प्रयोग करने से पहले खेत में 5-6 मीटर चौड़ी क्यारियां लंबाई में बना लेनी चाहिए. उस के बाद जिप्सम अथवा पायराइट को देशी हल अथवा कल्टीवेटर से जमीन की ऊपरी सतह में मिला कर और खेत को समतल कर के पानी भर कर के रिसाव क्रिया करनी चाहिए. पहले खेत में 12-15 सेंटीमीटर पानी भर कर छोड़ देना चाहिए. 7-8 दिनों बाद जो पानी बचे, उसे जल निकास नाली द्वारा बाहर निकाल कर फिर से 12-15 सेंटीमीटर पानी भर कर रिसाव क्रिया करनी चाहिए. ऊसर सुधार के बाद 2-3 साल अनिवार्य रूप से पहली फसल धान की लेनी चाहिए.       

नरवाई जलाने से नुकसान

फसल काटने के बाद तने के जो अवशेष बचे रहते  हैं, उन्हें नरवाई कहते  हैं. पिछले सालों का तजरबा रहा है कि किसान फसल कटाई के बाद फसल अवशेष नरवाई को जला देते  हैं. इस से आग लगने के हादसों के  डर के साथसाथ भूमि में मौजूद सूक्ष्म जीव जल कर खत्म हो जाते  हैं और जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता  है. हम खेतों की मिट्टी को सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखें, तो हमें मिट्टी में बहुत से सूक्ष्म जीव नजर आते  हैं, जो नरवाई को जलाने से मर जाते  हैं. फसलों के गिरते उत्पादन और किसानों को हो रहे घाटे के पीछे नरवाई जलना खास वजह  है.

नरवाई को खेत में मिलाने के लाभ

* खेत में जैव विविधता बनी रहती है. जमीन में मौजूद मित्र कीट शत्रु कीटों को खा कर नष्ट कर देते  हैं.

* जमीन में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, जिस से फसल उत्पादन ज्यादा होता  है.

* दलहनी फसलों के अवशेषों को जमीन में मिलाने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती  है, जिस से फसल उत्पादन भी बढ़ता है.

* किसानों द्वारा नरवाई जलाने के बजाय भूसा बना कर रखने पर जहां एक ओर उन के पशुओं के लिए चारा मौजूद होगा, वहीं अतिरिक्त भूसे को बेच कर वे आमदनी भी बढ़ा सकते  हैं.

* किसान नरवाई को रोटावेटर की सहायता से खेत में मिला कर जैविक खेती का लाभ ले सकते  हैं.

नरवाई जलने से नुकसान

* जमीन में जैव विविधता खत्म हो जाती  है और सूक्ष्म जीव जल कर खत्म हो जाते  हैं.

* जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता  है.

* जमीन कठोर हो जाती  है, जिस के कारण जमीन की जलधारण कूवत कम हो जाती है.

* पर्यावरण खराब हो जाता है और तापमान में बढ़ोतरी होती है.

* कार्बन से नाइट्रोजन व फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता  है.

* जीवांश की कमी से जमीन की उर्वरक कूवत कम हो जाती  है.

* नरवाई जलाने से जनधन की हानि होने का खतरा रहता है.

* खेत की सीमा पर लगे पेड़पौधे जल कर खत्म हो जाते  हैं.

आखिर क्या करें किसान

* नरवाई खत्म करने के लिए रोटावेटर चला कर नरवाई को बारीक कर के मिट्टी में मिलाएं.

* नरवाई को मिट्टी में मिला कर जैविक खाद तैयार करें, साथ ही स्ट्रारीपर का इस्तेमाल करें और डंठलों को काट कर भूसा बनाएं.

* भूसे का इस्तेमाल किसान अपने पशुओं को खिलाने के लिए करें और भूसा बेच कर अलग से आमदनी भी हासिल करें

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