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भारत में बढ़ रही है डिओडोरैंट की बिक्री

महकना और ताजा महसूस करना कभी भी आसान नहीं रहा है. यूरोमोनीटर इंटरनेशनल द्वारा हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिओडोरैंट का मार्केट 2011 से 2016 के बीच 177 प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ा है. ब्‍यूटी और पर्सनल केयर पर इस रिपोर्ट में क्रीम, शैम्‍पू और फेस वॉश की ग्रोथ का भी अध्‍ययन किया गया है. 2011 में डिओडोरैंट की बिक्री 1130 करोड़ रुपए थी, जो 2016 में तीन गुना बढ़कर 3,130 करोड़ रुपए हो गई. अधिकांश श्रेणियों में दर्ज की गई ग्रोथ में यह सबसे ज्‍यादा है. हालांकि, अन्‍य ब्‍यूटी और ग्रूमिंग प्रोडक्‍ट्स के मुकाबले डिओडोरैंट का बाजार अभी भी छोटा है और कंपनियां 150 रुपए या इससे अधिक कीमत पर इनकी बिक्री कर रही हैं.

भारत में, शरीर की दुर्गंध से सभी परिचित हैं क्‍योंकि यह सर्वव्‍यापी है. कई सालों तक भारतीय परिवारों में दुर्गंधमुक्‍त हरने के लिए टैलकम पावडर जैसे पोंड्स और संतूर का इस्‍तेमाल किया जाता रहा. लेकिन युवा और इच्‍छुक भारतीय, खर्च योग्‍य अधिक धन के साथ, डिओडोरैंट की ओर रुख कर रहे हैं. कीमती परफ्यूम की तुलना में डिओडोरैंट एक सस्‍ता विकल्‍प भी है. वास्‍तव में भारत का पुरुष ग्रूमिंग मार्केट में डिओडोरैंट का वर्चस्‍व है.

बढ़ती मांग को देखते हुए और नीविया, गोदरेज (सिंथोल) और हिंदुस्‍तान यूनीलिवर (एक्‍स और डव) से प्रतिस्‍पर्धा करने के लिए अधिकांश बड़ी कंज्‍यूमर गुड्स कंपनियों आईटीसी (इंगेज) से लेकर मैरिका (सेट वेट) और इमामी (ही) तक ने पिछले पांच सालों के दौराने महिला और पुरुष दोनों के लिए अपने-अपने ब्रांड बाजार में उतारे हैं.

इतना ही नहीं मध्‍यम आकार की कंपनियों ने भी इस बाजार में प्रवेश किया है. अहमदाबाद की वीनी कॉस्‍मेटिक्‍स, फोग डिओडोरैंट की निर्माता और कोलकाता की मैकनोर, जो वाइल्‍डस्‍टोन ब्रांड से बिक्री करती है, इसके उदाहरण हैं. नई आने वाली कंपनियां अपनी मार्केटिंग और विज्ञापन रणनीति से टॉप सेलिंग डिओडोरैंट ब्रांड बन चुकी हैं.

यूरोमोनीटर के मुताबिक शहरी बाजार के बाहर, जहां ग्रोथ 2020 तक ग्रोथ 5 प्रतिशत वार्षिक रहने की उम्‍मीद है, डिओडोरैंट निर्माताओं को बहुत कुछ करने की जरूरत है. इसलिए कई कंपनियां मास-मार्केट में जाने की तैयारी कर रही हैं. कुछ कंपनियां 100 रुपए से कम कीमत वाली रेंज भी उतारने पर विचार कर रही हैं, ताकि और अधिक लोगों तक इनकी पहुंच आसान बनाई जा सके.

जीवन की मुसकान

मैं घर का सामान लेने सदर बाजार गई. भारी बैग उठाए जब मैं वापस आ रही थी, तभी एक व्यक्ति तेजी से भागते हुए मुझ से टकराया और मैं गिर गई. मुझे गिरा हुआ देख कर भी वह व्यक्ति भाग खड़ा हुआ. तभी उस के पीछे दूसरा व्यक्ति चोरचोर कहता हुआ आया. उस ने मुझे सहारा दे कर उठाया.

मेरे घुटने से खून आ रहा था. उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘आप बेवजह ही जख्मी हो गई हैं.’’ वह व्यक्ति मुझे डाक्टर के पास ले गया.

मैं ने उस से कहा, ‘‘आप ने चोर को न पकड़ कर मेरी सहायता क्यों की?’’

इस पर वह व्यक्ति कहने लगा, ‘‘हमारे यहां बेरोजगारी की समस्या इतनी है कि लोग चंद रुपए कमाने के लिए चोरीचकारी पर उतर आते हैं.’’

उस अजनबी ने मुझे आटो में बिठाया. मैं ने उस को रुपए देने चाहे तो उस ने नहीं लिए. उस ने कहा कि उस ने इंसानियत का फर्ज ही तो निभाया है.      

दीपा गुलाटी

*

मैं और मेरे पति शहर में फैले डेंगू की बीमारी के चपेट में आ गए. कोई सगासंबंधी नजदीक न था प्लेटलेट की कमी से हम शारीरिक रूप से निढाल थे. मेरी अवस्था कुछ ज्यादा नाजुक हो गई थी. हिम्मत कर मेरे पति मुझे शहर के सरकारी अस्पताल तक ले आए. अस्पताल में इसी बीमारी से ग्रस्त लोगों की भरमार थी. चारों ओर आपाधापी, फाइल बनवाने की सैकड़ों औपचारिकताएं, ऊपर से वे खुद भी अस्वस्थ, जैसेतैसे मेरी फाइल बनी. मुझे बैड अलौट किया गया अस्पताल की तीसरी मंजिल पर. एक अनजान व्यक्ति स्वयं आ कर इन के हाथों से व्हीलचेयर ले कर मुझे वार्ड तक छोड़ गया.

मैं तो अर्धमूर्छित थी. मुझे बिस्तर पर लिटा कर ड्रिप वगैरा लगाई गई तो कुछ देर बाद ही मुझे उल्टियां शुरू हो गईं. जोर पड़ने पर हाथ का खून ड्रिप की नलियों में जमा होने लगा. मेरे पति अकेले. वे मुझे संभालें या डाक्टर को बुलाने जाएं.

उसी जनरल वार्ड के अन्य मरीजों के तीमारदार रिश्तेदारों ने इन्हें डाक्टर बुलाने भेजा. कोई मेरी पीठ सहलाने लगी, कोई मेरी बेहाल टांगों को दबाने लगी. अनजान लोगों की निस्वार्थ भावनापूर्ण सहायता ने न केवल हमें मानसिक तौर पर राहत पहुंचाई बल्कि जब तक मैं वहां रही, हमें एक परिवार जैसा ही अपनापन लगा और वे सभी सहायता देते रहे.

आज भी उन अनजान…नहींनहीं, अपनों से बढ़ कर, लोगों के प्रति मन श्रद्धा से झुक जाता है.       

कुलविंदर कौर वालिया

हमारी बेड़ियां

मेरी 80 वर्षीया बूआजी 21 वर्षों से एकादशी व्रत रखती आ रही थीं. पर इस वर्ष व्रत रखते हुए उन को कमजोरी महसूस होने लगी थी. शाम तक चक्कर आने लगते व चाल में थोड़ा कंपन भी लगता था. ऐसी स्थिति में उन के बहूबेटे ने व्रत न रखने परजोर डाला. बूआजी ने

21 वर्षों से परिचित अपने पंडितजी से बात की जिन के कहने पर व्रत रख रही थीं. उन्होंने कहा एकादशी का उद्यापन किए बिना व्रत बंद करने से व्रत स्वीकृत नहीं माने जाएंगे.

उद्यापन के लिए पंडितजी ने 24 लोटे, 24 सुपारी, 24 जनेऊ, फल आदि के साथ स्वयं के लिए वस्त्रों की व दक्षिणा की बात की. विधि के तहत 24 लोटों को व्रती व्यक्ति को ही जल से भर कर पूजास्थल पर रखना था. व्रती बूआजी लोटों में पानी डालते वक्त चक्कर खा कर गिर पड़ीं और उन का माथा लोटे के किनारे से जा टकराया. कृषकाय बूआजी लहूलुहान हो, बेहोश हो गईं. तत्काल उन्हें पास के एक नर्सिंगहोम में ले जाया गया.

व्रत करने पर तथा समाप्ति पर भी पंडितजी की जेब भरती है. कब तक आंखें बंद कर ऐसी आस्थाओं को ढोया जाता रहेगा.    

मीता प्रेम शर्मा

*

मेरी ससुराल में शादी के बाद वरवधू पैदल गांव से बाहर मंदिर में जाते हैं. पुजारीजी का आशीर्वाद लेते हैं. प्रसाद के रूप में पुजारीजी, वधू के पल्ले में फल डालते हैं. मान्यता है कि फलों की संख्या के  हिसाब से ही घर में लड़का या लड़की पैदा होते हैं. बेल का फल प्राप्त हुआ, तो समझो लड़का पक्का है. मेरे पल्ले में पुजारीजी ने 3 फल डाले, जिन में से 2 फल बेल के थे. सासूमां यह देख कर बहुत खुश हुईं.

पर अचानक बारिश के कारण सड़कें कीचड़ में तबदील हो गईं. कच्ची सड़क और कीचड़ के कारण मेरी एक चप्पल कीचड़ में धंस गई. मैं यों ही चलती चली गई. जब पता चला, तो मैं पीछे मुड़ कर अपनी चप्पल ढूंढ़ने लगी.

भारी साड़ी और चुन्नी का पल्ला संभालतेसंभालते दोनों बेल फल गिर गए. फलों के कीचड़ में सने होने के कारण, मैं उन्हें उठाने के लिए नीचे झुकी तक नहीं.

ये सब देख कर सासूमां का चेहरा उतर गया, झट से बोलीं, ‘‘लल्ला, अब तो मुझे पोता न मिलेगा.’’ पति चुप रहे. आज मेरे 2 बेटे हैं पर अगर बेटे न होते, तो मुझे सारी जिंदगी यह किस्सा याद दिलाया जाता.       

रीना राणा

सचिन सिर्फ एक ही है, दूसरा नहीं होगा : तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने जून में शुरू होने वाले आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से पहले मौजूदा विजेता भारतीय टीम को शुभकामनाएं दीं. वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सचिन सिर्फ एक ही है और दुबारा कोई सचिन नहीं होगा. टीम इंडिया को सलाह देते हुए सचिन ने कहा, 'टीम के सभी खिलाड़ियों से एकजुट होकर प्रदर्शन करना होगा और किसी एक खिलाड़ी के भरोसे नहीं रहना चाहिए.

सचिन सिर्फ एक ही है

जब सचिन से पूछा गया कि क्या क्रिकेट जगत को फिर से उनके जैसा कोई खिलाड़ी मिलेगा? इसके जवाब में मास्टर ब्लास्टर ने जवाब दिया, 'मैं नहीं सोचता फिर से कोई दूसरा सचिन तेंदुलकर क्रिकेट में आएगा. वह कोई दूसरा व्यक्ति हो सकता है, लेकिन सचिन सिर्फ एक ही है.'

इस दिग्गज खिलाड़ी ने यह भी कहा कि मैं मानता हूं कि खिताब टीम जीतती है न कि कोई एक खिलाड़ी. उन्होंने कहा, 'अगर आप 2011 के विश्व कप को देखें तो यह टीम की जीत थी किसी एक खिलाड़ी की नहीं.'

फिर से जीत सकते हैं चैंपियंस ट्रॉफी

सचिन ने चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब एक बार फिर भारत लाने की उम्मीद भी जताई. उन्होंने कहा, 'टीम इसको अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम है और खिताब की दावेदार भी है.' भारत ने साल 2013 में इंग्लैंड को हराकर चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया था. यह पहला अवसर था जब टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी जीतने में कामयाब रही थी.

फिल्म में देखेंगे मेरा बचपन और रोमांस

अपने आने वाली बायॉपिक 'सचिन ए बिलियन ड्रिम्स' के बारे में बोलते हुए तेंदुलकर ने कहा, 'इस फिल्म में लोगों को मेरी कुछ बिल्कुल अनजानी बातों के बारे में भी पता चलेगा. अगर मेरे 24 साल के करियर को देखें तो सिर्फ एक चीज इस फिल्म में ऐसी है जिसके बारे में लोग बहुत ज्यादा नहीं जानते. वह है मेरा बचपन. मैंने कैसे क्रिकेट खेलना शुरू किया, इससे जुड़ी यादें बहुत खास हैं. इस फिल्म में दर्शकों को मेरे और अंजली के रोमांस के बारे में पता चलेगा. कैसे मैं उनसे मिला और फिर हम एक-दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंधें इस बारे में दर्शकों को पता चलेगा.'

भारत सरकार के युवा प्रतिनिधि दल में वंदित का चयन

ग्रामीण विकास केन्द्र आईआईटी दिल्ली के शोध छात्र वंदित विजय का चयन भारत सरकार द्वारा दस दिवसीय दक्षिण कोरिया भ्रमण हेतु युवा प्रतिनिधि दल के सदस्य के रूप मे किया गया है. इस दल मे 35 सदस्यों का पूरे देश भर  की शिक्षण संस्थाओं के मध्य से चयन किया गया है. यह दल 10 मई से 19 मई 2017 के बीच दक्षिण कोरिया का भ्रमण कर रहा है, जिसका उद्धेश्य दोनों देशो के मध्य आपसी संस्कृति एवं विरासत को साझा करना तथा आपसी सद्भाव बढ़ाना है.

इन दस दिनों का कार्यक्रम भारतीय दूतावास और दक्षिण कोरियाई सरकार ने बनाया है, जिसमें भारतीय युवा प्रतिनिधिमंडल कोरिया के विभिन्न शहरों मे भ्रमण कर वहां की सांस्कृतिक विरासत को समझेंगे और युवाओं के साथ विचार साझा करेंगे. इस दल के दो दो सदस्य दो दिन किसी न किसी कोरियाई परिवार के घर पर मेहमान बन कर रहेंगे. इस युवा भारतीय प्रतिनिधि मंडल का पूरा खर्च खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार वहन करेगी.

यहां भी पुरुषों से आगे निकलीं भारतीय महिला क्रिकेटर्स

पहले विकेट की ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया. भारत की ओपनिंग जोड़ी दीप्ति शर्मा और पूनम राउत ने साउथ अफ्रीका में खेली जा रही चतुष्कोणीय सीरीज में आयरलैंड के खिलाफ 320 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की.

इन दोनों खिलाड़ियों ने ओपनिंग पार्टनरशिप का वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर दिया. महिला वनडे क्रिकेट इतिहास में इन दोनों की जोड़ी दुनिया की पहली ऐसी जोड़ी बनी है, जिसने 320 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की.

साउथ अफ्रीका के पोचेफ्स्ट्रूम के सेनवेस पार्क में आयरलैंड के खिलाफ खेले जा रहे इस मैच में दीप्ति और पूनम की यह जोड़ी दुनिया की पहली ऐसी जोड़ी है, जिसने 300 रन के पार साझेदारी की हो.

आयरलैंड के खिलाफ खेलने उतरी दीप्ति शर्मा और पूनम राउत की जोड़ी इस मैच में 45.3 ओवर तक क्रीज पर डटी रही. इन दोनों बल्लेबाजों ने आयरलैंड की टीम को 300 रनों के पार जाने तक भी सफलता हाथ नहीं लगने दी.

320 के स्कोर पर 188 रन की पारी खेलने वाली दीप्ति शर्मा पहले विकेट के रूप में जब आउट हुईं, तब यह जोड़ी महिला क्रिकेट इतिहास रच चुकी थी. वहीं पूनम राउत ने 109 रनों की पारी खेली.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम का वनडे में सर्वाधिक स्कोर

इस मैच में भारतीय टीम ने निर्धारित 50 ओवर में 3 विकेट पर 358 रन का विशाल लक्ष्य खड़ा किया. भारतीय महिला टीम का यह वनडे में सर्वाधिक स्कोर है. इससे पहले 2004 में भारतीय महिला टीम ने वेस्ट इंडीज महिला टीम के खिलाफ 298 रन बनाए थे.

188 रनों की आकर्षक पारी

188 रन की आकर्षक पारी खेलने वाली दीप्ति शर्मा ने 160 बॉलों का सामना किया, जिसमें 27 चौके और 2 छक्के शामिल था. इस पारी के बाद अब दीप्ति भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला बल्लेबाज हैं और दुनिया में किसी महिला क्रिकेटर द्वारा बनाया गया यह दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर है. इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क शीर्ष पर हैं, जिन्होंने डेनमार्क के खिलाफ 1997 में नॉटआउट 229 रन की पारी खेली थी.

इससे पहले भारत की ओर से किसी महिला क्रिकेटर द्वारा बनाया गया सर्वश्रेष्ठ स्कोर 138 था, जो जया शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ 2005 में कराची में बनाया था.

क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी

ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में यह साझेदारी महिला और पुरुष दोनों ही मामलों में सर्वश्रेष्ठ साझेदारी है. इससे पहले महिला या पुरुष दोनों तरह की वनडे क्रिकेट में ओपनिंग पार्टनरशिप का रिकॉर्ड 300 रन का नहीं था.

दीप्ति शर्मा और पूनम राउत से पहले ओपनिंग साझेदारी में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड पुरुष क्रिकेट में श्रीलंका के ओपनिंग बल्लेबाज उपुल थारंगा और सनथ जयसूर्या के नाम था. इन दोनों बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के खिलाफ 2006 में लीड्स में 286 रन की पार्टनरशिप की थी.

पुरुष क्रिकेट में सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर और ट्रैविस हेड का नाम है. इन दोनों बल्लेबाजों ने इसी साल 26 जनवरी को पाकिस्तान के खिलाफ एडिलेड में 284 रन मिलकर जोड़े थे.

सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में भारतीय टीम 5वें स्थान पर आती है. 2001 में भारत के सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली की जोड़ी ने केन्या के खिलाफ पार्ल में 258 रन जोड़े थे. 2001 से लेकर 2006 तक यह सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी थी, जिसे 2006 में श्रीलंका के थारंगा और जयसूर्या ने मिलकर तोड़ा था.

वहीं महिलाओं में सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी की बात की जाए, तो इंग्लैंड की सारा टेलर और एटकिंस के नाम यह रिकॉर्ड था. इन दोनों ने 2008 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ लॉर्ड्स में पहले विकेट के लिए 268 रन जोड़े थे.

सहवाग ने दी बधाई

इन दोनों खिलाड़ियों की शानदार पारी से विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी काफी प्रभावित हुए हैं. सहवाग ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए ट्वीट किया, 'दीप्ति शर्मा और पूनम राउत को रिकॉर्ड 320 रनों की ओपनिंग पार्टनरशिप के लिए बधाई. लड़कियों ने वाकई अच्छा खेला. वाह!'

मोदी सरकार : 3 साल, 15 सवाल

आज का दिन देश और बीजेपी दोनों के लिए बेहद खास है. तीन साल पहले आज के ही दिन लोकसभा के नतीजों का एलान हुआ था. जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने बड़ी जात हासिल की था. चुनाव जीतने के तीन साल बाद भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार का दावा है कि उसने अभूतपूर्व काम किया है. लेकिन विपक्ष की राय में सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है. वहीं राजनीतिक विश्लेषक सरकार के कामकाज को मिलाजुला बता रहे हैं.

अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से कालेधन की वापसी से लेकर नौजवानों के लिए नौकरी पैदा करने और देश की सुरक्षा को लेकर कई चुनावी वादे किया थे. ऐसे में आज तीन साल गुजर जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उभरता है कि क्या हुआ मोदी सरकार के वादों का?

 हम करने जा रहे हैं प्रधानमंत्री से 15 सवाल कि आखिर ऐसा क्यों है…

प्रधानमंत्री जी, ऐसा क्यों है…?

1. आपकी पार्टी 23 जनवरी 2014 को करेंसी बदलने का विरोध करती है

और

आप 8 नवम्बर 2016 को खुद करेंसी बदल डालते हैं.

2. आपकी पार्टी 2013 में 85 रुपये किलो तूअर दाल बिकने पर पूरे देश में महंगाई का विरोध करती है

और

आपके शासन में तूअर दाल 150 से 200 रुपये किलो बिकती है.

3. आपकी पार्टी गोवंश हत्या का विरोध करती है

और

आपके सत्ता में आते ही भारत बीफ एक्सपोर्ट में दुनिया का नंबर 1 देश बन जाता है.

4. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब विदेश में नवाज शरीफ से हाथ मिलाते थे तो आप उन्हें डरपोक कहते थे

और

आप खुद बिना बुलाये नवाज शरीफ के जन्मदिन पर केक और बिरयानी खाने पाकिस्तान पहुंच जाते हैं.

5. 2004 से 2014 के बीच आपकी पार्टी रेल किराये में 1 रुपये भी बढ़ाने पर उसके विरोध में रेल का चक्का जाम करती थी

और

आपने सत्ता में आते ही दो साल में रेल किराया लगभग 60-70 प्रतिशत बढ़ा दिया.

6. आपकी पार्टी ने 2004 से 2014 के बीच FDI, GST, AADHAR, MNREGA, कोयला खान नीलामी आदि का विरोध किया

और

सत्ता पाते ही आप उन्हीं सारी योजनाओं का गुणगान कर रहे हो.

7. निर्भया के समय एक बलात्कार के विरोध में आपकी पार्टी 3 महीने आंदोलन करती है

और

बीजेपी शासन में मध्य प्रदेश में प्रतिदिन 12 और दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 7 बलात्कार होने पर आपके कान में जू तक नहीं रेंगती.

8. UPA सरकार ने 125 से 140 डालर प्रति बैरल में अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से कच्चा तेल खरीद के 70 से 75 रुपये लीटर पेट्रोल बेचा, उसके विरोध में बीजेपी  बैलगाड़ी मार्च निकालती थी

और

अब आपके शासन में 50 से 60 डालर प्रति बैरल में कच्चा तेल खरीद कर आप 70 रुपये में पेट्रोल बेच रहे हो.

9. आपकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण रुपये लेते रंगे हाथ पकडे जाते हैं फिर भी आपकी पार्टी ईमानदार है

और

आप बाकी सबके शासन को भ्रष्ट, जंगलराज कहते हो.

10. आपके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के राज में व्यापम एवं खान घोटाला, वसुंधरा राजे का ललित मोदी घोटाला, रमन सिंह का 34000 करोड़ का अन्न वितरण घोटाला होता है और आप अपने मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं मांगते

और

दूसरे के शासन में हर दूसरे दिन किसी न किसी का इस्तीफा मांगने खड़े हो जाते थे.

11. भक्त कहते हैं आप प्रतिदिन 18 घंटे काम करते हैं

पर

ढाई साल में आपने देश का क्या विकास किया यह कहीं नज़र
नहीं आता.

12. आपने 100 दिन में सारा काला धन विदेश से लाने का वादा किया था

और

900 दिन में भी कोई काला धन विदेश से नहीं ला पाये.

13. आपने किसानों को उनके उत्पादन खर्च पर 50% लाभ देने का वचन दिया था

और

पिछले ढाई साल में किसानों के उत्पाद का सरकारी खरीद रेट 1 रुपये भी नहीं बढ़ाया.

14. चने का बेसन 60 रुपये किलो था तब बीजेपी कार्यकर्ता थाली बजाओ आन्दोलन करते थे

और

अब जनता चने का बेसन 150 रुपये किलो खरीद रही है.

15. आपकी पार्टी  सर्विस टैक्स लगाने का विरोध करती थी

और

आपने कुर्सी पर बैठते ही सर्विस टैक्स 2.5% बढा दिया.

क्यों मोदीजी क्यों ?

क्या इन सवालों को जवाब आप दे पाएंगे प्रधानमंत्री जी.

‘गे’ बच्चे की मां बनी आराधना उप्पल

‘‘जाना ना दिल से दूर’’, ‘‘साडा हक’’, ‘‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’’ सहित कई सीरियलों मे अभिनय करने के बाद अब अभिनेत्री आराधना उप्पल एक वेब सीरीज में ‘गे’ बच्चे की मां का किरदार निभा रही हैं. जी हां! रमन हांडा की कंपनी ‘‘नाटक इंटरटेनमेंट’’ के बैनर तले बन रही वेब सीरीज ‘‘नो कास्टिंग नो काउच वनली वाउच’’ में आराधना उप्पल ‘गे’ बच्चे की मां का किरदार निभाते हुए काफी उत्साहित हैं.

जब आराधना उप्पल से हमारी बात हुई, तो हमने उनसे पूछा कि उन्हे किस बात ने इस तरह का किरदार निभाने के लिए प्रेरित किया. इस पर आराधना उप्पल ने कहा -‘‘इसकी मूल वजह यह है कि मेरे कई ‘गे’ दोस्त हैं, जिन्हे इंडस्ट्री में गलत समझा गया. इस वेब सीरीज में इस तरह का किरदार निभाते हुए मैं हर इंसान को समझाना चाहती हूं कि ‘गे’ इंसान आम इंसानों से इतर नहीं होते हैं. हर आम इंसान की तरह ‘गे’ इंसान के अंदर भी भावनाएं होती हैं. वह भी उन्ही की तरह काम कर सकते हैं. मेहनत कर सकते हैं. अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से अंजाम दे सकते हैं.’’

जब हमने आराधना उप्पल से पूछा कि छोटे परदे के सीरियलों के लिए अभिनय करना और वेब सीरीज में अभिनय करने में वह क्या अंतर महसूस करती हैं. तो आराधना उप्पल ने कहा-‘‘वेब सीरीज के लिए शूटिंग करने का अर्थ परिवार के साथ षूटिंग करना रहा, जहां हम किरदार को लेकर ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कर सकते हैं. जबकि छोटे परदे यानी कि टीवी सीरियल में अभिनय करते समय हम पारिश्रमिक राशि के लिए ही काम करते हैं. वहां हमारे किरदार मोनोटोनस होते हैं. वेब सीरीज में हर कलाकार अपने किरदारों को लेकर प्रयोग कर सकता है.’’

हौलीवुड के बाद ध्रुव बाली ने पकड़ी बौलीवुड की राह

‘‘क्रिमिनल माइंड्स ब्राउंड बारडर्स’’ जैसी चर्चित 12 से अधिक फिल्में, दर्जन भर टीवी सीरियल तथा ‘‘डिसेप्शन’’, ‘‘पेन इज टेम्परेरी’’, ‘‘वायड एंड क्रिमिनिल्स’’ जैसी वेब सीरीज में अभिनय कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर चुके अभिनेता ध्रुव बाली मूलतः भारतीय हैं. उनका जन्म भारत में हुआ था. इसी के चलते इन दिनों वह भारतीय फिल्मकार विजित शर्मा निर्देशित बौलीवुड फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ में मुख्य भूमिका निभाकर उत्साहित हैं.

नौ जून को प्रदर्शित होने वाली मनोवैज्ञानिक रोमांचक और हत्या के रहस्य से परिपूर्ण फिल्म ‘‘मिरर गेमः अब खेल शुरू’’ में ध्रुव बाली के साथ पूजा बत्रा व परवीन डबास ने भी अभिनय किया है. न्यूजर्सी और न्यूयार्क में फिल्मायी गयी फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ का निर्माण ‘‘आइसलिरेट फिल्म प्रोडक्शन’’ के बैनर तले एकता शर्मा ने किया है.

वास्तव में एकता शर्मा ने ‘‘पेन इज टेम्परेरी’’ में ध्रुव बाली के अभिनय को देखकर अपनी फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ में रोनी भानोट का मुख्य किरदार निभाने के लिए अनुबंधित किया. ध्रुव बाली माडलिंग में भी नाम कमा चुके हैं. वह किंगफिशर व सैमसंग के लिए माडलिंग कर चुके हैं. तो वहीं वह कई लघु फिल्मों के अलावा सफल म्यूजिक वीडियो ‘‘फकली काल्ड लाइट्स’’ भी कर चुके हैं. सैन फ्रंसिस्को से परफार्मिंग आर्ट की पढ़ाई करने के बाद ध्रुव बाली ने अभिनय में करियर बनाने के लिए हौलीवुड की राह पकड़ी.

हौलीवुड में दर्शकों के बीच ध्रुव बाली की अच्छी पहचान बन चुकी है. इसी के चलते अब ध्रुव बाली को मुख्य भूमिका में लेकर वेब सीरीज ‘‘पेन इज टेम्परेरी’’ को फीचर फिल्म के रूप में बनाया जा रहा है. खुद ध्रुव बाली कहते हैं- ‘‘अब मेरी तुलना जयान मलिक के साथ की जाती है. जिनके साथ मैं  ने ‘यूट्यूब’ पर प्रसारित लाइव प्रसारण वाला इवेंट ‘जूलांडर’ किया था. इसे यूट्यूब पर 18 लाख से अधिक लोगों ने लाइव देखा था. इसी तरह एक शापिंग माल में मैं एक माडलिंग की शूटिंग कर रहा था, वहां भी लोग मुझे जयान मलिक समझकर देखने के लिए इकट्ठा हो गए थे.’’

ध्रुव फिटनेस माडल भी हैं. वह कहते हैं-‘‘मैं हर दिन कम से कम तीन घंटे जिम के अंदर कसरत करता हूं.’’

गुजारा भत्ता कानून : अदालतों का बदलता नजरिया

भारतीय कानून व्यवस्था में महिलाओं के हितों को ध्यान में रख कर कई कानून अस्तित्व में आए हैं. इसी प्रकार की एक कानूनी व्यवस्था गुजारा भत्ता व भरणपोषण को ले कर भी है. लेकिन, अदालतें अब आत्मनिर्भर महिलाओं को गुजारा भत्ता देने से साफ इनकार करने लगी हैं. अदालतें  उन महिलाओं की गुजारे भत्ते की मांग को खारिज कर रही हैं जो पति से वसूली की मंशा रखते हुए तलाक से पहले अपनी नौकरी छोड़ देती हैं या सक्षम होते हुए भी कुछ काम नहीं करतीं.

बदलते माहौल में अदालतें अब पत्नी की योग्यता और कार्यक्षमता का आकलन करने के बाद ही उन्हें गुजारे भत्ते का हकदार ठहरा रही हैं. पत्नी को हर प्रकरण में गुजारा भत्ता मिल ही जाएगा, यह जरूरी नहीं. पेश हैं कुछ उदाहरण जिन्होंने इस मामले को नए मोड़ दिए हैं :

पति की कमाई पर मुफ्तखोरी : हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में महिला को मिलने वाले 5,500 रुपए के मासिक अंतरिम भत्ते में इजाफा कर उसे 25,000 रुपए करने की मांग की याचिका को खारिज कर दिया और अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला पढ़ीलिखी है. महिला के पास एमए, बीएड और एलएलबी जैसी डिगरियां हैं और वह खुद कमा सकती है, इसलिए उस से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह घर पर आलसी की तरह बैठे और पति की कमाई पर मुफ्तखोरी करे.

अदालत ने कहा कि महिला ने गुजारा भत्ते में वृद्धि की मांग का न तो कारण बताया और न ही यह साबित किया कि उस के खर्च में वृद्धि कैसे हो गई.  अदालत का यह फैसला गुजाराभत्ता कानून के हो रहे दुरुपयोग के मद्देनजर  काफी अहम है.

पति भी गुजारे भत्ते का हकदार : भारत जैसे देश में जहां यह माना जाता है कि गुजारे भत्ते की हकदार पत्नी ही होती है, ऐसे में अगर पति से गुजारा भत्ते की मांग कर रही पत्नी को उलटा पति को  गुजारा भत्ता देने का अदालत से फरमान मिल जाए तो आप को हैरानी होगी. लेकिन, ऐसा हुआ है. महिलाओं के गुजारा भत्ता मांगने की इसी खराब आदत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला को आदेश दिया है कि वह अपने पति को गुजारे भत्ते के रूप में हर महीने 20 हजार रुपए का भुगतान करे. अदालत ने महिला को यह भी निर्देश दिया कि वह पति को कार भी दे.

दरअसल, मामला कुछ ऐसा था कि पतिपत्नी के एक विवादित मुकदमे में पति ने वर्ष 2002 में अपनी पत्नी को अपनी संपत्ति की मालकिन बनाया था लेकिन पतिपत्नी के बीच बाद में झगड़े होने लगे जिस के चलते पत्नी ने अपने बच्चों के साथ मिल कर अपने पति को साल 2007 में उस के ही घर से बाहर निकाल दिया. जिस के बाद साल 2008 में पति ने कड़कड़डूमा कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की और साथ ही, हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा-24 के तहत गुजारा भत्ता दिए जाने की गुहार लगाई.

याचिका में पति ने कहा कि उसे घर से निकाला गया और उसे गुजारे के लिए खर्चा तक नहीं दिया जा रहा. याचिका में कहा गया था कि पीडि़त की पत्नी की सालाना आमदनी एक करोड़ रुपए है और उस के पास 4 गाडि़यां भी हैं, दूसरी तरफ पति की कोई आमदनी नहीं है और वह सड़क पर आ चुका है.

जिस के बाद साल 2009 में निचली अदालत ने फैसला सुनाया कि हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत पतिपत्नी में से जो भी आर्थिक रूप से संपन्न है वह दूसरे को गुजारा भत्ता दे सकता है और चूंकि पत्नी आर्थिक रूप से संपन्न है, इसलिए वह हर महीने अपने पति को 20 हजार रुपए गुजारा भत्ता दे.

इस फैसले के बाद पत्नी हाईकोर्ट पहुंची थी लेकिन हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और पत्नी को निर्देश दिया कि वह अपने पति को हर महीने 20 हजार रुपए गुजारा भत्ता और साथ ही कार भी दे.

बराबर कमाई तो गुजारा भत्ता नहीं: पति के बराबर ही कमाने वाली महिला को पति से गुजारा भत्ता पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इस का उदाहरण पिछले दिनों एक मामले में देखने को मिला जिस में गुजारा भत्ता मांगने अदालत पहुंची पत्नी की अर्जी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने खारिज कर दिया. कारण था पत्नी की पति के बराबर ही कमाई होना.

अदालत ने कहा कि लैंगिक समानता के इस दौर में पति को महज मर्द होने के कारण कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है. दरअसल, इस मामले में पत्नी ने पति से आवास सुविधा मुहैया कराने की मांग की थी. अदालत ने कहा कि पत्नी को इस के लिए यह साबित करना होगा कि वह अपनी आर्थिक अक्षमता के कारण अपने लिए आवास का इंतजाम करने में लाचार है.

महिलाओं से आर्थिक सहयोग की उम्मीद : एक अन्य मामले में  महिला द्वारा अपने पति से गुजारा भत्ता मांगने पर कोर्ट ने महिला की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि आज के समय में घर चलाने में महिलाओं से आर्थिक मदद की उम्मीद की जाती है, न कि बेकार बैठने की. महिला द्वारा की गई गुजारे भत्ते की मांग को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिला ने खुद यह स्वीकार किया है कि उस ने ब्यूटीशियन का कोर्स किया है जिस का मतलब है कि उस के पास काम करने और कमाने का हुनर है, लेकिन इस के बावजूद वह काम करना नहीं चाहती.

इस मामले में मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट मोना टारडी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आज के जमाने में महिलाओं से भी उम्मीद है कि वे काम कर घर में आर्थिक रूप से सहयोग करेंगी.

पत्नी होना मुआवजे की वजह न बने: दिल्ली की  ही एक सत्र अदालत ने यह फैसला सुनाया कि अगर पत्नी अपने पति से ज्यादा पढ़ीलिखी है, तो तलाक की सूरत में केवल इस बिना पर उसे मुआवजा नहीं मिल सकता कि वह एक पत्नी है. इस मामले में एक महिला ने अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ते की मांग को ले कर अदालत में मामला दाखिल किया था, लेकिन उस की दलील खारिज हो गई.

जिला व सत्र न्यायाधीश सुजाता कोहली की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि महिला अपने पति से ज्यादा पढ़ीलिखी है, इसलिए  वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है.

कोर्ट ने केस खारिज करते हुए कहा कि महिला कोर्ट को यह बताने में नाकाम रही कि वह ज्यादा पढ़ीलिखी है, लेकिन इस के बावजूद उस ने कभी नौकरी करने के बारे में क्यों नहीं सोचा. याचिकाकर्ता महिला दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट थी  और उस के पास लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा भी था जबकि पति केवल 12वीं पास था.

पति की हैसियत का होगा आकलन: एडवोकेट अनुपमा गुप्ता बताती हैं, ‘‘वैवाहिक विवादों से संबंधित मामलों में कई कानूनी प्रावधान हैं, जिन के जरिए पत्नी गुजारा भत्ता मांग सकती है. सीआरपीसी, हिंदू मैरिज ऐक्ट, हिंदू अडौप्शन ऐंड मेंटिनैंस ऐक्ट और घरेलू हिंसा कानून के तहत गुजारा भत्ते की मांग की जा सकती है. अगर पतिपत्नी के बीच किसी बात को ले कर अनबन हो जाए और पत्नी अपने पति से अपने और अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता चाहे तो वह सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारे भत्ते की अर्जी दाखिल कर सकती है. लेकिन कई महिलाएं कानून का दुरुपयोग करते हुए अपने पति से भारी रकम वसूलती हैं.

‘‘कई बार प्रेमी के संपर्क में रहने के लिए विवाहित महिलाएं अपने मातापिता के घर जा कर बैठ जाती हैं और महिलाओं के लिए बने कानूनों, जैसे दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता के कानूनों का पति पर दुरुपयोग करती है. कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए हाल ही में अदालत ने कई ऐसे फैसले दिए हैं जिन के अनुसार वे इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेंगी. हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा-24 के तहत गुजारा भत्ता तय होता है, जिसे तय करते वक्त पति व पत्नी की हैसियत देखी जाती है. अगर पत्नी की कमाई अच्छी हो और पति बेरोजगार हो तो गुजारा भत्ता पत्नी को भी देना पड़ सकता है. यानी पति या पत्नी जिस की भी माली हालत अच्छी नहीं है, उसे गुजारा भत्ता दिया जाता है. इस मामले में कानून में दोनों के प्रति एक ही नजरिया अपनाया गया है.’’

बिना कारण घर छोड़ेगी तो गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा : एक दूसरे प्रकरण में पत्नी ने शादी के डेढ़ साल बाद ही पति का घर छोड़ दिया था. पति ने उसे इस के लिए कभी नहीं उकसाया था. पति ने उसे घर वापस बुलाने के लिए नोटिस भी भेजा लेकिन जब पत्नी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो पति ने फैमिली कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों को ले कर याचिका दायर की.

इस बीच पत्नी ने गुजारा भत्ता पाने के लिए याचिका दायर कर दी. फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार कर पत्नी की याचिका खारिज कर दी. न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि यदि पत्नी ने बिना किसी ठोस कारण के पति का घर छोड़ा है तो उसे गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं है.

महिला पेशेवर है तो गुजारा भत्ता नहीं  : एक अन्य फैसले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में एक कामकाजी महिला को गुजारा भत्ता इस आधार पर देने से इनकार कर दिया कि महिला खुद एक पेशेवर है. वह बीते 13 साल से चार्टर्ड अकाउंटैंट के पेशे में है.

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और प्रतिभा रानी की खंडपीठ के समक्ष महिला ने अपने व अपने 2 बच्चों के अच्छे जीवन के लिए पति से 3 लाख रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी. निचली अदालत से निराशा हासिल होने पर महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सभी परिस्थितियों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि उसे नहीं लगता कि महिला की याचिका में दम है.

अदालत ने महिला की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिस में उस ने महज 7 हजार रुपए प्रतिमाह कमाने की बात कही थी. खंडपीठ ने कहा कि 7 हजार रुपए की राशि तो न्यूनतम आय के कानून से भी कम है. 13 साल तक चार्टर्ड अकाउंटैंट जैसे पेशे में रहने के बाद महज 7 हजार रुपए प्रतिमाह कमाने की दलील विश्वास योग्य नहीं है.

इस से पूर्व निचली अदालत ने महिला के पति को यह आदेश दिया था कि वह अपने 2 बच्चों के अच्छे जीवनयापन के लिए 22,900 रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे. महिला के पेशेवर होने के कारण उसे गुजारा भत्ता दिए जाने से अदालत ने इनकार कर दिया था.

दरअसल, भारतीय समाज का ढांचा ही कुछ ऐसा बना हुआ है कि महिलाओं को जीवन के हर पड़ाव पर पुरुषों पर आश्रित रहने की आदत डाल दी जाती है और इसी आदत की वजह से महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होते हुए भी पुरुषों पर निर्भर रहती हैं और उन से गुजारे के लिए मुआवजे की मांग करती हैं.

वैसे महिलाएं समानता की, बराबरी की मांग करती हैं, वे कहती हैं कि वे पुरुषों से किसी तरह से कम नहीं. मातापिता भी उन्हें बेटों के बराबर शिक्षा और सुविधाएं देते हैं तो फिर वे आत्मनिर्भर और पढ़ीलिखी होने के बावजूद पति से गुजारे भत्ते की मांग क्यों करती हैं? क्या सक्षम होते हुए भी सुविधा की मांग करना उन की बराबरी के अधिकार के आड़े नहीं आता?      

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