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कैसे बचें रसोई की दुर्घटनाओं से

हर सुबह की तरह आज की सुबह भी रोमा के लिए काफी हड़बड़ाहट भरी थी. पति, दोनों बच्चों, सासससुर और खुद के लिए नाश्ता तैयार करने से ले कर सभी का लंच पैक करने में रोमा के रसोई से डाइनिंग टेबल तक लगभग 20-25 चक्कर लग चुके थे. जल्दबाजी में कई बार उस के कदम लड़खड़ाए मगर उस ने खुद को संभाल लिया. घर के काम के साथ ही औफिस टाइम पर पहुंचने का प्रैशर उसे बारबार रसोई का काम जल्दी निबटाने के लिए उकसा रहा था. जल्दबाजी में कब उस का हाथ गैस पर चढ़े गरम पतीले से छू गया उसे पता ही नहीं चला. उस के हाथ में छाले पड़ गए. औफिस तो क्या अब हफ्ते भर घर के काम करना भी उस के लिए मुश्किल हो गया था.

रोमा की तरह ऐसी कई महिलाएं हैं, जो आए दिन रसोई में हुई किसी न किसी दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं. हाल ही में घरेलू दुर्घटनाओं पर हुआ एक अध्ययन भी इसी ओर इशारा करता है. अध्ययन के मुताबिक 46% घरेलू घटनाएं सुबह के वक्त होती हैं, जिन में 66% महिलाएं ही घायल होती हैं. अध्ययन में इस बात का भी जिक्र है कि अधिकतर दुर्घटनाएं रसोई का काम करने के दौरान ही होती हैं. दरअसल, रसोईर् का काम पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक करती हैं. लिहाजा, रसोई से जुड़ी दुर्घटनाओं का शिकार भी महिलाएं ही अधिक होती हैं.

इस तरह की दुर्घटनाओं से बचने के लिए पेश हैं, कुछ सुझाव:

रसोई की साफसफाई टाल सकती है हादसा

यदि किचन साफसुथरा है, तो कई बड़े हादसे टल सकते हैं. उदाहरण के तौर पर चिमनी की सफाई को ही लिया जा सकता है. दरअसल, चिमनी में बहुत जल्दी चिकनाई जम जाती है और समयसमय पर यदि इसे साफ न किया जाए, तो यही चिकनाई आग पकड़ कर बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

इस के अलावा किचन का फर्श साफ होना बहुत जरूरी है. इस से कई बड़े हादसे टाले जा सकते हैं. इस बारे में रिऐलिटी शो मास्टर शैफ सीजन 2 की टौप फाइनलिस्ट रह चुकीं विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘‘रसोई में काम के दौरान यदि फर्श पर पानी गिर जाए तो सब काम रोक कर पहले पानी को साफ करें, क्योंकि पानी पर पैर पड़ते ही फिसलने का डर रहता है. हो सकता है कि हाथ में कोई गरम या भारी सामान हो, ऐसे में अधिक चोट लगने का भी खतरा होता है.’’

पानी की फिसलन के अलावा रसोई में गिरने के और भी कारण हो सकते हैं. इन से बचने के कुछ खास टिप्स हैं:

– रसोई में ऊंचे स्थान पर रखे सामान को उतारने के लिए हमेशा सीढि़यों का इस्तेमाल करें. चेयर या टेबल पर कतई भरोसा न करें.

– उतना ही सामान पकड़ कर रसोई में इधरउधर चलें जितना पकड़ने पर आसानी से सामने का रास्ता दिखे और चलने में भी आसानी हो.

– रसोई के दरवाजे पर कोई भी ऐसा सामान न रखें, जो आनेजाने में अवरोध उत्पन्न करे. कई बार सामान की टक्कर से भी गिरने का डर रहता है.

सही पहनावा

रसोई के लिए सही कपड़ों का चुनाव सब से महत्त्वपूर्ण है. विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘‘महिलाएं हमेशा यहीं चूकती हैं. खासतौर पर कामकाजी महिलाएं तो इस ओर ध्यान तक नहीं देतीं. दफ्तर जाने की जल्दी में नायलौन, सिल्क या दूसरा सिंथैटिक कपड़ा पहन कर ही रसोई का काम शुरू कर देती हैं. जबकि रसोई में घुसने का सब से पहला नियम है कि सूती कपड़े पहने जाएं. सूती कपड़े को छोड़ कर हर फैब्रिक जल्दी आग पकड़ लेता है.’’

अधिकतर महिलाओं को ऐप्रन पहनना बोझ लगता है, जबकि रसोई में यह सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है. विजयलक्ष्मी कहती हैं, ‘‘आग की छोटी सी चिनगारी पूरे कपड़े में आग लगा सकती है, मगर ऐप्रन इस चिनगारी को कपड़ों तक पहुंचने से रोकता है. इसे पहनना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह कपड़ों को बांध कर रखता है. कई बार कपड़े हवा में उड़ कर जलते हुए बर्नर तक पहुंच जाते हैं, मगर ऐप्रन ऐसा होने से बचा लेता है.’’

नियमों की अनदेखी ले सकती है जान

रसोई में काम करने के कुछ नियमकायदे होते हैं, जिन की अनदेखी करने पर बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. हर गृहिणी को इन नियमकायदों के बारे में पता भी होता है, मगर वे आलस्य के चलते उन्हें नजरअंदाज कर देती हैं. उदाहरण के तौर पर रात में बिना गैस सिलैंडर बंद किए सो जाना.

नई दिल्ली जोन के डिप्टी चीफ फायर औफिसर सुनील चौधरी इस बाबत कहते हैं, ‘‘घर में आग लगने के अधिकांश मामलों में आग लगने का कारण रसोईर् होती है. रसोई में रखा गैस सिलैंडर जीवन के लिए सब से खतरनाक साबित हो सकता है. यदि इसे रात में बंद न किया जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है.’’

लापरवाही से हादसा

सुनील कहते हैं, ‘‘मयूर विहार के एक घर में सुबहसुबह ब्लास्ट होने से परिवार के तो सभी लोग घायल हुए ही, आसपास के लोगों के घर भी इस से प्र्रभावित हुए. कारण था रसोईर् में रखा फ्रिज और खुला हुआ गैस सिलैंडर. सुबह जैसे ही बर्नर औन किया गया वैसे ही फ्रिज और सिलैंडर में एकसाथ ब्लास्ट हो गया.’’

दरअसल, फ्रिज दिन भर में कई बार खुलता और बंद होता है. इस दौरान कभीकभी फ्रिज की गैस भी लीक होती है. ऐसे में सिलैंडर यदि खुला रह जाए तो बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता. इसलिए फ्रिज को रसोई या उस के आसपास कभी नहीं रखना चाहिए.

इसी तरह यह जानते हुए कि बिना चप्पल पहने बिजली के सामान को हाथ लगाने से करंट लग सकता है, फिर भी कुछ महिलाएं बहादुरी दिखाने से पीछे नहीं हटतीं और दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं.

विजयलक्ष्मी अपने ही घर में हुई एक दुर्घटना का जिक्र करती हैं, ‘‘मेरी मेड ने बिना चप्पल पहने माइक्रोवेव छू लिया था और करंट लगने पर वह खुद को माइक्रोवेव से छुड़ा न सकी और माइक्रोवेव सहित जमीन पर गिर पड़ी. उसे काफी चोट लगी और एक माह तक उसे अस्पताल में रहना पड़ा था.’’

इसलिए रसोई में काम के दौरान चप्पल पहनने की आदत डालें और सावधानी के साथ बिजली से चलने वाले ऐप्लाइंसेज का इस्तेमाल करें.

हमेशा ध्यान रखें कि स्वास्थ्य को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाने वाली रसोई खलनायक भी हो सकती है. इसलिए रसोई में जल्दबाजी और लापरवाही दिखा कर परिवार और अपने जीवन को खतरे में न डालें.         

रसोई को आग से कैसे बचाएं

– क्लास ए: लकड़ी, कागज और कपड़े के लिए.

– क्लास बी: ग्रीस और तेल के लिए.

– क्लास सी: स्विच, मोटर और इलैक्ट्रिक सामान के लिए.

ध्यान रखें कभी भी क्लास ए फायर ऐक्सटिंग्विशर को ग्रीस या बिजली से लगी आग को बुझाने के लिए इस्तेमाल न करें. ऐसा करने पर आग बुझने की जगह और फैल जाती है.       

राजनीति : युवाओं की दिलचस्पी कम

लोकसभा में  युवा सांसदों की बढ़ती तादाद ने राजनीति को एक संभावित कैरियर क्षेत्र बना दिया है. इस क्षेत्र में आने के लिए युवाओं को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं. उन्हें सही प्लेटफौर्म नहीं मिल पाता. यदि कहीं कोई आसार दिखते भी हैं तो वहां पहले से ही सीटें भरी हैं. वैसे तो इस के कई कारण हो सकते हैं, पर सब से बड़ा कारण है, वंशवाद, धनी और बाहुबली लोगों का वर्चस्व. भारत दुनिया का सब से बड़ा लोकतांत्रिक देश है. प्रजातंत्र पर टिकी इस की राजनीति आज भी अपने स्वरूप को स्पष्ट नहीं कर पाई है. भारतीय राजनीति पर गौर करें तो पाएंगे कि इस का रास्ता बड़ा कठिन व टेढ़ामेढ़ा है, जो आम लोगों के लिए सुलभ नहीं है. यहां सिर्फ वही चल सकता है, जो धनी व बाहुबली हो, जो धांधलेबाजी व घोटाले करने में  माहिर हो. जो अपनी बात मनवाने के हथकंडे जानता हो, जो रातोंरात मालदार बनने का गुर जानता हो. फास्ट मनी की कला में माहिर हो.

युवा जहां हर क्षेत्र चाहे वह इंजीनियरिंग का हो, मैडिकल या फिर आईटी, हर जगह पूरे जोशखरोश के साथ दिखते हैं. वहीं फास्ट मनी कमाने वाले क्षेत्र राजनीति को नगण्य मानते हैं. एक आम युवा राजनीति में हिस्सेदार नहीं बनना चाहता है. वह राजनीति के पचड़े से कोसों दूर रहना चाहता है. दूसरी तरफ युवाओं में यह धारणा भी बनी है कि भारतीय राजनीति वंशवाद की जंजीरों में जकड़ी हुई है. भारतीय राजनीति में शुरू से ही वंशवाद का बोलबाला रहा है. युवा नेताओं की बात की जाए तो जो युवा आज राजनीति में हैं, उन की पृष्ठभूमि पहले से ही राजनीति से जुड़ी है. उन की राजनीतिक पारिवारिक विरासत की जड़ें बहुत गहरी हैं. फिर चाहे वे जम्मूकश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला हों, कांगे्रस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, कांगे्रस के दिवंगत नेता माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट, शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव, मिलिंद देवड़ा, कांग्रेस नेता व सिने स्टार सुनील दत्त की पुत्री प्रिया दत्त, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव पी ए संगमा की पुत्री अगाथा संगमा, भाजपा की वरिष्ठ नेता व राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह, जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह हों, शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले या दिवंगत संजय गांधी के पुत्र वरुण गांधी, इन सभी युवा नेताओं को राजनीति विरासत में मिली है.

ऐसे में हम अगर बात करें राजनीतिक कैरियर क्षेत्र की तो आम युवाओं को आज भी मशक्कत करनी पड़ती है. यदि देश की राजनीति सुचारु तरीके से पटरी पर लानी है तो युवाओं को देश की राजनीति में मुख्य भूमिका निभानी ही होगी. भारत संभावनाओं का देश है. यहां हर कोई अपना भविष्य संवार सकता है. हम यह कह सकते हैं कि राजनीति और युवा एकदूसरे के पूरक हैं. राजनीति हमें शासन करने की शक्ति प्रदान करती है. राहुल गांधी अकेले नहीं और भी कई प्रतिभाशाली युवा हैं, जो लोक कल्याणकारी व देश के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य के तहत एक सुनहरे भविष्य व विकसित भारत की बात कर सकते हैं. 

आज भले ही राजनीति का लाभ कुछ परिवारों तक सिमटा हुआ है, पर फिर भी अगर एक साधारण युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े तो आम युवाओं के लिए भी रास्ता आसान हो जाएगा. युवाओं में जोश तथा मौलिक सोच होती है. काम करने का जोश भी होता है, लेकिन एक आम युवा के लिए क्या राजनीति में कहीं कोई गुंजाइश है? अगर कोई युवा विकास और परिवर्तन की बात करेगा तो सत्तासीन नेता व प्रमुख राजनीतिक दल उसे ऐसा नहीं करने देंगे, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें खुद के लिए खतरा लगता है. अपने स्वार्थ के लिए ये नेता व दल किसी भी हद तक जा सकते हैं. इसलिए यही डर इन युवाओं को सता रहा है.

राजनीति में आगे बढ़ने के लिए युवाओं और महिलाओं को खुद ही अपने में जागृति लानी होगी. हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवा महिलाएं हैं. इन में मौलिक सोच तथा कुछ नया कर दिखाने का हुनर होता है. अगर ये जोशीले युवा राजनीति में नहीं आएंगे तो राजनीति का भविष्य उज्ज्वल नहीं होगा. फिलहाल जो राजनीतिक परिदृश्य दिखाई दे रहा है, उस से ऐसा लगता है कि युवाओं का रुख राजनीति की तरफ कम ही हो रहा है. नीतियों व कार्यक्रमों को लोकलुभावन तो बनाया जा रहा है, लेकिन ये कहां कारगर साबित हो रहे हैं या होंगे, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

जिस देश की मुख्यधारा राजनीति हो, वहां की उदासीनता देश व राजनीति के लिए अच्छी नहीं है. आज देश को स्वस्थ राजनीति की आवश्यकता है, पर यह सबकुछ तभी संभव है जब हर किसी की सोच कुछ करने के लिए सकारात्मक हो. असंमजस की स्थिति बेहतर परिणाम नहीं देगी. 

क्या होती है पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम?

अगर आप भी इन्वेस्टमेंट के बाजार में रुचि रखते है तो ये बात आपको भी जाननी चाहिए कि निवेश के क्षेत्र में अलग-अलग स्कीम्स की क्या भूमिकाएं होती हैं. हाई नेटवर्थ इनवेस्टर्स (HNI) पोर्टफोलियो को अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से बनाने के लिए उसका एक हिस्सा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम्स में डाल देते हैं.

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम क्या होती है?

पीएमएस (PMS) के नाम से मशहूर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम एकमुश्त निवेश का खास जरिया होती हैं. पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंट्स के पैसों को शेयरों और दूसरी सिक्योरिटीज में लगाते हैं और उनका पोर्टफोलियो मैनेज करते हैं.

कम से कम कितना पैसा लगाया जा सकता है?

रेगुलेटरी गाइडलाइंस के मुताबिक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीमों में मिनिमम इनवेस्टमेंट 25 लाख रुपये का हो सकता है. इसके लिए इनवेस्टर नए इनवेस्टमेंट के लिए 25 लाख या 25 लाख रुपये से ज्यादा मार्केट वैल्यू के मौजूदा पोर्टफोलियो को ट्रांसफर कर सकते हैं. इनमें कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता है लेकिन PMS मैनेजर्स का इस बात पर जोर होता है कि इनवेस्टर्स कम से कम उसको 3 साल के लिए अपना पैसा दें.

डिस्क्रिशनरी और नॉन-डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजर में क्या फर्क होता है?

डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजर हर क्लाइंट का फंड उनकी जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत और स्वतंत्र रूप से मैनेज करते हैं. नॉन डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंट के निर्देश पर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट करते हैं.

इनवेस्टमेंट किसके पास होता है एवं उसकी मॉनिटरिंग कौन करता है?

जब आप पीएमएस स्कीम चुनते हैं, तब आपके नाम पर अलग से एक बैंक और डीमैट एकाउंट खोला जाता है और सभी इनवेस्टमेंट आपके नाम पर होते हैं. इसी तरह, इनवेस्टमेंट से मिलने वाली इनकम या डिविडेंड आपके बैंक एकाउंट में क्रेडिट होगा और शेयर आपके नाम पर डीमैट एकाउंट में रहेगा. पीएमएस एग्रीमेंट के मुताबिक बैंक और डीमैट एकाउंट ऑपरेट करने का पावर ऑफ अटॉर्नी पोर्टफोलियो मैनेजर के पास होता है. ज्यादातर पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंट को यूजर नेम और पासवर्ड मुहैया कराते हैं जिनका इस्तेमाल उनकी वेबसाइट पर लॉग इन करने और पोर्टफोलियो स्टेटमेंट देखने के लिए कर सकते हैं. सेबी के निर्देशानुसार, पोर्टफोलियो मैनेजर्स को हर छह महीने पर अपने क्लाइंट्स को परफॉर्मेंस रिपोर्ट देनी होती है.

PMS सर्विसेज की फीस कैसे तय होती है?

फीस पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ क्लाइंट के एग्रीमेंट के हिसाब से होता है. फीस साल के अंत में ग्रोथ और पोर्टफोलियो की वैल्यू के हिसाब से सालाना देय होती है.

साइबर अपराध का मकड़जाल

बिहार में साइबर अपराध की तादाद में तेजी से इजाफा होता जा रहा है. इस के लिए नएनए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. बैंकिंग फ्राड की वारदातें सब से ज्यादा बिहार में ही हो रही हैं. औनलाइन शौपिंग साइटों से ले कर औनलाइन सामान बेचने वाली वैबसाइटों पर साइबर फ्राड के मामले बड़ी तेजी में सामने आ रहे हैं.

घर बैठे रुपए कमाने का लालच दे कर नोएडा की एक कंपनी ने 6 लाख, 30 हजार लोगों से 37 अरब रुपए ठग लिए. उत्तर बिहार के 7 हजार से ज्यादा लोग भी ठगी का शिकार बने. सोशल ट्रेड डौट बिज नाम की कंपनी ने बिहार से भी 42 करोड़ रुपए ठग लिए थे.

कई सोशल साइटों पर धोखाधड़ी और किसी को बदनाम करने की वारदातें भी बढ़ती जा रही हैं. फेसबुक पर हजारोंलाखों अकाउंट फर्जी नाम और फोटो से बने हुए हैं. इस पर रोक लगाने के लिए फेसबुक वाले भी समय समय पर एहतियात बरतते रहते हैं, पर फर्जी अकाउंट पर रोक नहीं लग सकी है.

पटना से सटे बिहटा इलाके का रंजय मिश्रा बताता है कि उस ने सुनीता कुमारी के नाम से फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बना रखा है और फोटो भी किसी मौडल का लगा दिया है. वह लड़की बन कर तकरीबन 4 लड़कों के साथ चैटिंग करता है और प्यार व सैक्स की बातें करता है.

रंजय मिश्रा ने आगे बताया कि एक दिन एक लड़के से उस से मोबाइल नंबर मांगा और फोन पर बात करने को कहा. रंजय ने चैट बौक्स में लिखा कि उस के मोबाइल में बैलैंस नहीं है. लड़के ने उस का मोबाइल नंबर मांगा और तुरंत ही

2 सौ रुपए का रीचार्ज करा दिया. उस के बाद रंजय लड़की की आवाज बना कर उस से बातें करने लगा.

उस के बाद रंजय ने बाकी तीनों फेसबुक फ्रैंड्स के साथ भी यही नुसखा आजमाया और अपने मोबाइल फोन को रीचार्ज कराया.

रंजय बताता है कि उस के मोबाइल फोन में हमेशा हजार 2 रुपए का बैलैंस रहता है. इस तरह के न जाने कितने फर्जी अकाउंट फेसबुक पर होंगे और न जाने कौन किस तरह से उन का बेजा इस्तेमाल कर रहा होगा.

पिछले 5 सालों के दौरान साइबर अपराध में 4 गुना इजाफा हो गया है. साल 2012 में जहां ऐसे मामलों की तादाद 51 थी, वहीं साल 2016 में यह बढ़ कर 225 हो गई और साल 2017 में तो 3 महीने में ही सौ मामले दर्ज हो गए.

ऐसे मामलों के बढ़ने से साइबर दारोगा की बहाली की कवायद शुरू की गई है. हर जिले के थाने में एकएक साइबर यूनिट भी बनाई जाएगी.

हाल ही में साइबर ठगी का एक नया ही रूप देखने सामने आया. सैकंडहैंड सामान बेचने वाली एक बड़ी वैबसाइट पर नकली मोबाइल फोन बेचने का मामला सामने आया.

पटना के कुम्हरार महल्ले के रहने वाले एक शख्स ने सैमसंग का एस-7 मौडल मोबाइल फोन खरीदने के लिए और्डर किया. आधी कीमत पर मिल रहे मोबाइल फोन को फुलवारीशरीफ महल्ले का रहने वाला लड़का बेच रहा था. खरीदने के बाद पता चला कि वह मोबाइल फोन नकली है. कंपनी में शिकायत करने पर आईडी ब्लौक कर दी गई.

भागलपुर के चार्टर्ड अकाउंटैंट पल्लव पराशर के पैन नंबर पर साइबर ठगों ने विदेश में 50 अरब रुपए का ट्रांजैक्शन कर लिया. पल्लव पराशर को इस की जरा भी भनक नहीं लगी. पटना से आयकर विभाग ने जब उन्हें नोटिस भेजा, तो वे चौंक गए. उन्होंने 7 जनवरी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में केस दर्ज किया.

दिल्ली पुलिस ने लोगों के बैंक खाते से औनलाइन करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया. इस गिरोह ने पिछले 2 सालों में करोड़ों रुपयों की औनलाइन ठगी की थी. ठगों की पहचान 34 साल के सुभाष और 32 साल के रामशरण राय के रूप में हुई है.

सुभाष ने पुलिस को बताया कि वह लोगों को फोन कर के बैंक का मुलाजिम बताता था और कहता था कि यह काल उन के कार्ड की क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए की गई है. उस के बाद एटीएम का नंबर और पिन मांगा जाता था.

उस के बाद पलक झपकते ही अकाउंट से लाखों रुपए उड़ा लिए जाते थे. उड़ाए गए रुपयों को पेटीएम और औक्सिजन जैसे अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता था. बाद में उस रकम को औनलाइन रीचार्जिंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता. फिर अलगअलग जगहों पर रीचार्ज करने वाले दुकानदारों से संपर्क कर मोटा कमीशन देने का लालच दिया जाता था.

मिसाल के तौर पर अगर एयरटेल कंपनी उन्हें रीचार्ज करने पर 2 फीसदी कमीशन देती है, तो साइबर ठग उसे 30 से 35 फीसदी कमीशन दे देते थे. औनलाइन वालेट से रकम खत्म होने पर दुकानदार और ठग आपस में रकम बांट लेते थे. दुकानदार अपना कमीशन काट कर बाकी रकम ठग को दे देते थे.

पिछले साल बिहार के जानेमाने अर्थशास्त्री शैवाल गुप्ता भी साइबर फ्राड के शिकार बन गए थे. उन से 72 हजार, 8 सौ रुपए की ठगी कर ली गई थी.

शैवाल गुप्ता के मोबाइल फोन नंबर  पर 07503434669 नंबर से विजय सिंह नाम के आदमी ने काल कर के कहा था कि वह दिल्ली पुलिस का सहायक अवर निरीक्षक है. उस ने शैवाल गुप्ता को बताया कि उन के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है.

जब शैवाल गुप्ता ने इस की वजह जाननी चाही, तो कहा गया कि इस मामले में वे सरकारी वकील विनोद अग्रवाल के मोबाइल फोन नंबर 09716801457 पर बात कर लें.

शैवाल गुप्ता ने जब उस नंबर पर बात की, तो बताया गया कि उन के क्रेडिट कार्ड पर 72 हजार, 8 सौ रुपए बकाया हैं. उसी रकम की वसूली के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने केस किया है. उस वकील ने भारतीय स्टेट बैंक का एक अकाउंट नंबर देते हुए कहा कि अगर सैटलमैंट कराना है, तो 72 हजार, 8 सौ रुपए उस में डाल दें.

शैवाल गुप्ता ने 14 अक्तूबर को ऐक्सिस बैंक की बोरिंग रोड शाखा के अपने अकाउंट से भारतीय स्टेट बैंक के बताए अकाउंट में रुपए ट्रांसफर कर दिए. रुपए ट्रांसफर कराने के बाद उन्हें कुछ शक हुआ. जब उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के अकाउंट के बारे में पता किया तो पता चला कि वह अकाउंट तो बिहार के ही सुपौल जिले की भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा का है.

शैवाल गुप्ता ने इस ठगी की सूचना आर्थिक अपराध शाखा (ईओयू) को दी. ईओयू ने जब पूरे मामले की जांच की, तो इंस्पैक्टर विजय सिंह और वकील विनोद अग्रवाल दोनों फर्जी निकले.

सुपौल की जिस भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के अकाउंट में रुपए ट्रांसफर किए गए थे, वह सुपौल के ही जगतपुर गांव के अरविंद कुमार का पाया गया. अरविंद ने कबूल किया कि उस के खाते में 72 हजार, 8 सौ रुपए ट्रांसफर हुए हैं. अरविंद ने पूरी रकम वापस कर दी.

पिछले साल पटना की एक शादीशुदा और 5 महीने के बच्चे की मां फेसबुक के प्यार के चक्कर में फंस कर अपना सबकुछ गंवा बैठी थी. वह एक करोड़ रुपए के गहने और नकदी ले कर अपने आशिक के साथ ससुराल से फुर्र हो गई. इतना ही नहीं, वह अपने साथ 5 महीने के बच्चे को भी ले भागी थी.

पटना के कंकड़बाग इलाके की एक पाइप फैक्टरी के मालिक निखिल कुमार ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि उन की बीवी स्वाति करोड़ों रुपए के गहने और नकदी ले कर अपने प्रेमी शैलेंद्र के साथ भाग गई है.

स्वाति और निखिल की 5 साल पहले बड़े ही धूमधाम से शादी हुई थी. स्वाति को इंटरनैट से काफी लगाव था और वह अकसर कंप्यूटर पर समय गुजारती थी. इसी दौरान फेसबुक पर चैटिंग के जरीए उस की पहचान आस्ट्रेलिया के एक नौजवान शैलेंद्र शर्मा से हुई. वह वहां एमबीए की पढ़ाई कर रहा था.

शैलेंद्र पंजाब के फिरोजपुर जिले के अबोहर सिटी-2 के अजीमगढ़ गांव का रहने वाला था. चैटिंग के जरीए प्यार की कसमें खाते हुए वे दोनों घर से भाग निकले. स्वाति के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर सिकंदराबाद में पुलिस ने उसे धर दबोचा था.

पटना के एसएसपी मनु महाराज बताते हैं कि बिहार पुलिस का साइबर सैल अब सीबीआई की तरह जांचपड़ताल करेगा.               

याद रखें ये बातें

* कभी भी लैंडलाइन फोन या मोबाइल फोन पर किसी को भी अपने बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी न दें.

* अगर कोई फोन पर खुद को बैंक का मुलाजिम बता कर भी कोई जानकारी मांगे तो भी कोई जानकारी न दें. अपने बैंक जा कर मैनेजर से खुद ही इस सिलसिले में पूछताछ कर लें.

* क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या अकाउंट से रुपए निकालने की सीमा कम रखें.

* हर 5-6 दिन पर अपने बैंक अकाउंट की जांच करते रहें और किसी भी तरह की गड़बड़ी की भनक लगने पर बैंक को सूचित करें.

* अपने बैंक अकाउंट का एसएमएस अलर्ट जरूर रखें.

* कोई भी फोन पर आधार कार्ड नंबर मांगे, तो उसे न बताएं.

* लौटरी लगने, डौलर में इनाम मिलने, गिफ्ट मिलने जैसे ईमेल का कोई जवाब न दें.

धर्म के नाम पर सब चलता है

भागवत कथा और सत्संग के कार्यक्रम अकसर यहांवहां होते रहते हैं. इस तरह के कार्यक्रमों में लोगों की भारी तादाद को देख कर कई टैलीविजन चैनल सिर्फ इसी काम के लिए खुल चुके हैं. उन पर सुबह से ले कर शाम तक सिर्फ भक्ति से भरे कार्यक्रम ही दिखाए जाते हैं. मेरे मिलने वाले एक दोस्त के घर में उन की माताजी को इस तरह के कार्यक्रम देखने का बड़ा शौक है. जब मेरा उन के घर जाना हुआ, तो उस वक्त भी उन के यहां टीवी पर भागवत कथा का प्रसारण चल रहा था.

बड़ेबड़े गुच्छेदार बालों वाले एक बाबा भागवत कथा सुना रहे थे. उन का पूरा माथा हलदी और चंदन से बुरी तरह पुता हुआ था. साथ ही, गले में रुद्राक्ष की डिजाइनर माला भी.

एक माला उन के हाथ में भी लिपटी हुई थी, जिसे वे अपने पैर छूने वाले भक्त के सिर पर छुआ देते थे.

मेरे दोस्त का पूरा परिवार एक जगह बैठ कर यह कार्यक्रम देख रहा था. देख क्या रहा था, बल्कि उन्हें दिखाया जा रहा था. उस की माताजी सब को जबरदस्ती बिठा कर कार्यक्रम दिखा रही थीं.

दरअसल, उन्हें एक दिन टैलीविजन पर ही किसी बाबा ने बता दिया था कि लोग अगर सत्संग और भागवत कथा अपनी आने वाली पीढ़ी को नहीं दिखाएंगे, तो हिंदू धर्म बरबाद हो जाएगा. साथ ही, यह धर्म दूसरे धर्मों का गुलाम हो जाएगा.

उसी दिन से दोस्त की माताजी ने पूरे परिवार को भागवत कथा दिखानी शुरू कर दी. सब देख रहे थे, तो मुझे भी वही देखना पड़ा.

भागवत कथा कहने वाले बाबाजी का नाम बड़ा लंबा था. वे अपने प्रवचन में कह रहे थे, ‘‘देखिए, आज के लोगों का सोचना है कि ‘हम दो हमारे दो, बाकी हों तो कुएं में फेंक दो’. यानी आज के मांबाप एक या 2 बच्चों से ज्यादा करने के बारे में सोचते ही नहीं हैं. बच्चों को जन्म देने वाली मां भी ऐसा नहीं सोचती…’’

बाबाजी इतने पर ही नहीं रुके. वे आगे बोले, ‘‘सच्चा मां धर्म सिर्फ 1-2 बच्चों से नहीं, बल्कि कम से कम 10 बच्चों को जन्म देने से निभता है. है कोई ऐसी औरत, जिस के 10 बच्चे हों? अगर है, तो हाथ उठाए, हम उसे सम्मानित करेंगे.’’

बाबाजी बोल रहे थे और उन के सामने बैठी हजारों की भीड़ उन्हें सुन रही थी. टैलीविजन पर देख रहे लाखों लोग अलग से थे.

तभी भीड़ में से एक औरत ने अपना हाथ उठा दिया. बाबाजी ने खुशी के साथ प्रवचन दिया, ‘‘देख लो, हजारों की भीड़ में बस एक औरत है, जिस ने अपना मां होने का सच्चा धर्म निभाया है.

‘‘आइए माई, आप मंच पर आइए. मैं खुद आप को शाल ओढ़ा कर सम्मानित करूंगा.’’

बाबाजी ने खुद उठ कर उस औरत को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया. भीड़ में बैठी औरतें अपनी तकदीर को कोस उठीं. सोच रही होंगी कि काश, आज उन के 10 बच्चे होते, तो बाबाजी ने उन्हें भी सम्मानित किया होता.

वे देशभर में टैलीविजन पर दिखाई दे रही होतीं. मेरे लिए यह एकदम से हैरानी की बात थी. जहां एक ओर आबादी पर लगाम लगाए जाने के लिए कोशिशें की जा रही हों, वहीं यह सब होना वाकई में हैरत में डालने वाला था. रोजाना टैलीविजन पर चलने वाले लाखोंकरोड़ों रुपए के इश्तिहार और जगहजगह पर बने परिवार नियोजन केंद्र तो ठीक बाबाजी के कहने का उलटा करते नजर आते हैं.

सरकार नसबंदी कराने पर हर आदमी को कुछ पैसे भी प्रोत्साहन के रूप देती है, जिस से आबादी काबू में रह सके. अगर हर एक औरत 10 बच्चों को जन्म देने लगे, तो आबादी का आंकड़ा क्या होगा?

बहरहाल, उस औरत को सम्मानित करने के बाद बाबाजी ने फिर से प्रवचन देना शुरू कर दिया. वे कह रहे थे, ‘‘आजकल एक और बात बड़े जोरों पर चलन में है कि घर में लोगों से पूछ कर खाना बनाया जाता है. उन से पूछा जाता है कि तुम आज कितनी रोटी खाओगे? यह प्रथा एकदम गलत है.

‘‘किसी भी घर में ऐसा नहीं होना चाहिए. हर घर में रोज खाने में कम से कम 8-10 रोटियां फालतू बनानी चाहिए, जिस से अगर कोई साधु या मेहमान आ जाए, तो उसे भोजन दिया जा सके.

इस तरह फालतू खाना बनाने से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि बरकत होती है यानी कभी घर में किसी चीज की कमी नहीं रहती.’’

भीड़ में बैठे सभी लोग इस बात से सहमत थे, क्योंकि यह बात उन के पूज्य बाबाजी ने कही थी. लेकिन वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा था कि खाना कम से कम बिगाड़ें, क्योंकि आंकड़ों के हिसाब से अकेले भारत में ही 20 करोड़ से ज्यादा लोग रोजाना भूखे पेट सो जाते हैं. कुपोषण के चलते भारत में तकरीबन 42 फीसदी बच्चे उम्र के हिसाब से सही वजन के नहीं हैं.

भुखमरी मापने वाले ग्लोबल हंगर इंडैक्स यानी जीएचआई ने साल 2011-13 की अपनी रिपोर्ट में भारत को 63वें नंबर पर रखा है, जबकि श्रीलंका 43वें, पाकिस्तान 57वें, बंगलादेश 58वें नंबर पर है. चीन छठे नंबर पर है.

भारत को इस इंडैक्स ने ‘अलार्मिंग कैटीगरी’ में रखा है. लिस्ट में भयानक गरीबी झेलने वाले इथियोपिया, सूडान, कांगो, नाइजर, चाड व दूसरे अफ्रीकी देश शामिल हैं.

दुनिया में भूख से पीडि़त लोगों की कुल तादाद 84 करोड़, 20 लाख है. इन में से 21 करोड़ यानी तकरीबन एकचौथाई लोग अकेले भारत में हैं.

भारत की हालत पहले से भले ही बेहतर हुई है, लेकिन विकसित देशों की बात जाने भी दें, तो पाकिस्तान और बंगलादेश से ज्यादा भुखमरी हमारे देश में है.

कहने को तो हम चांद से भी आगे निकल कर मंगल तक की यात्रा तय करने के सपने देख रहे हैं, पर सचाई यह है कि आज भी पूरी दुनिया में 75 फीसदी लोगों के पास दो वक्त की रोटी और तन ढकने के लिए एक अदद कपड़ा नहीं है.

फिर बाबाजी क्यों ऐसी बातें कर रहे थे? वे अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में देश को किस दिशा में ले जाना चाहते थे? कम से कम धर्म के नाम पर तो ऐसा नहीं होना चाहिए.

लेकिन बाबाजी को इन सब बातों से क्या मतलब. वे न तो ज्यादा पढ़ेलिखे थे और न ही गरीबी से पीडि़त या भूखे. वे तो चाहते थे कि देश में गरीबी बनी रहे, जिस से उन के मानने वालों की ज्यादा से ज्यादा तादाद रहे, क्योंकि गरीब आदमी दुखों से उबरने के लिए ऐसे बाबाओं के पास ही भागता है और फिर वे ही अंधविश्वासों और धर्म का हवाला दे कर उसे और ज्यादा गरीबी, भुखमरी की ओर धकेल देते हैं.                

लड़कियों का चसका

दीपक की शादी को 5 साल बीत चुके थे. इस बीच वह 2 बच्चों का बाप भी बन चुका था. दीपक की पत्नी जितनी पढ़ीलिखी और सुशील थी, उतनी ही खूबसूरत भी थी. इस के बावजूद दीपक नईनई लड़कियों के साथ सोने के सपने देखता रहता था. दीपक का काफी अच्छाखासा कारोबार चल रहा था. ऐसे में उस के पैसे के लालच में नईनई लड़कियां फंस भी जाती थीं. वह कई लड़कियों से जिस्मानी रिश्ते भी बना चुका था. लेकिन उस की इस लत की खबर उस की पत्नी को नहीं हो पाई थी. वह दीपक पर आंख मूंद कर भरोसा करती थी.

दीपक का लड़कियों के साथ हमबिस्तरी करने का चसका दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था, इसलिए वह देर रात घर आने लगा था. एक रात दीपक 12 बजे के बाद भी घर नहीं पहुंचा, तो उस की पत्नी के मन में घबराहट होने लगी, क्योंकि उस ने इस दौरान दीपक के मोबाइल फोन पर कई बार बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उस का फोन स्विच औफ था. दीपक की पत्नी से अब रहा नहीं गया और उस ने ड्राइवर को फोन कर के घर बुलाया. वे दोनों कार से दुकान पहुंचे. दुकान के अंदर की लाइट जलती देख दीपक की पत्नी के मन में एक अजीब सा डर पैदा हो गया, क्योंकि दीपक तो अकसर रात के 11 बजे तक दुकान बंद कर लेता था, इसलिए वह घबराहट में सीधी दुकान के अंदर भागी चली गई और उस ने वहां जो देखा, वह उस के लिए किसी बड़ी चोट से कम न था, क्योंकि दीपक दुकान के फर्श पर एक लड़की के साथ हमबिस्तरी कर रहा था. उन दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा न था. उस समय दीपक की पत्नी को बहुत तेज गुस्सा आया, लेकिन वह बिना कुछ कहे घर चली आई.

दीपक जब घर आया, तो उस की पत्नी उस से बोली ‘‘मैं आप पर आंख मूंद कर भरोसा करती रही और आप ने मेरे प्यार और भरोसे का यह सिला दिया.’’ अब वह दीपक के साथ एक पल भी रहने को तैयार न थी और उस ने दीपक से तलाक लेने को कहा. दीपक ने पत्नी के सामने लाख मिन्नतें कीं, लाख हाथ जोड़े, लेकिन उस ने दूसरे दिन ही कोर्ट में तलाक लेने के लिए अर्जी दे दी. कोर्ट ने दीपक की पत्नी की दलील के आधार पर उसे बच्चों के साथ अलग होने की इजाजत दे दी. दीपक ने लड़कियों के चसके के चलते अपनी सुखी जिंदगी में आग लगा ली थी. उसे न केवल पढ़ीलिखी और प्यार करने वाली पत्नी से अलग होना पड़ा, बल्कि अपने बच्चों से भी हाथ धोना पड़ा. जगहंसाई और समाज में बदनामी हुई सो अलग.

लगे माली चूना

जिन भी लोगों को अलगअलग लड़कियों के साथ सोने की आदत होती है, उन में से ज्यादातर पैसे वाले होते हैं.  इन लड़कियों के चक्कर में पड़ कर वे अपनी नौकरी और कारोबार तक को गंवा बैठते हैं. कभीकभी सैक्स और पैसे की भूखी लड़कियां पैसे वाले लोगों के साथ की गई हमबिस्तरी का वीडियो बना कर उन्हें लंबे समय तक ब्लैकमेल करती हैं. ऐसे में वह शख्स या तो लुटने को मजबूर हो जाता है या खुदकुशी और हत्या जैसे कदम भी उठाने क मजबूर हो जाता है. इस मसले पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवराम गुप्ता का कहना है कि अगर बसाबसाया घर उजड़ने से बचाना है, तो इस तरह की लत से दूरी बनाए रखने में ही भलाई है.

लगती हैं बीमारियां

3 बच्चों के बाप हरीश को अलगअलग लड़कियों के साथ सोने की लत थी. कई लड़कियों के साथ असुरक्षित तरीके से किए गए सैक्स का नतीजा ही था कि उसे एड्स की बीमारी ने जकड़ लिया और असमय ही उस की मौत हो गई. लड़कियों के चसके के चक्कर में हरीश ने खुद को मौत का न्योता दे दिया और अपने पीछे वह पत्नी और बच्चों को रोनेबिलखने के लिए छोड़ गया. अकसर कई लड़कियों के साथ संबंध बनाने वाले लोग हड़बड़ी, घबराहट और किसी के देख लेने के डर के चलते सैक्स के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों को नहीं अपना पाते हैं. ऐसे में वे बिना कंडोम के ही सैक्स संबंध बना लेते हैं. इस की वजह से उन्हें सैक्स से होने वाली खतरनाक बीमारियां पकड़ लेती हैं.

डाक्टर वीके वर्मा का कहना है कि कई लड़कियों से सैक्स संबंध रखने वाले लोग खुद तो इस तरह के संक्रमण के शिकार होते हैं, बल्कि वे अपनी पत्नी और उस से होने वाले बच्चे को भी इस तरह के संक्रमण के बुरे असर से नहीं बचा पाते हैं.

जुर्म आम बात

लड़कियों का चसका हत्या व दूसरे जुर्म की सब से बड़ी वजह माना जाता है. हत्या के ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि जब खुलासा हुआ, तो उस की वजह नाजायज रिश्ते ही पाए गए.

सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद मिश्र का कहना है कि अकसर कई लड़कियों के साथ सैक्स संबंध बनाना न केवल परिवार में कलह की वजह बनता है, बल्कि कई लोगों से सैक्स संबंध रखने वाली लड़कियां पैसे के लालच के चलते हत्या, ब्लैकमेलिंग व फिरौती जैसा जुर्म करने से भी नहीं हिचकती हैं. लड़कियों के चसके का बुरा असर बच्चों पर भी देखा गया है. अकसर इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं, जिन में पति किसी दूसरी लड़की के चक्कर में या तो अपनी पत्नी की हत्या कर देता है या दूसरी औरत के साथ घर बसा लेता है.

नाजायज रिश्तों से कई लड़कियां कुंआरी मां तक बन जाती हैं और बच्चे को जन्म देने के बाद लोकलाज के डर से उन्हें झुरमुटों, कूड़ेकरकट के ढेर में छोड़ जाती हैं. अगर इन सब से बचना है, तो एक साथी के साथ ही संबंध बनाएं और उस के प्रति पूरी ईमानदारी बरतें.      

बिहार में बनने जा रहा है इंटरनेशनल एयरपोर्ट

बिहटा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है. इसके लिए राज्य सरकार ने 270 करोड़ रुपए दिए हैं. गुरुवार को डीएम संजय अग्रवाल ने बिहटा एयरपोर्ट का निरीक्षण किया. डीएम ने बिहटा प्रखंड के विशम्भरपुर एवं कुतलुपुर मौजा में जमीन मालिकों से मुलाकात की.

डीएम संजय अग्रवाल ने बताया कि 10 दिनों के अन्दर सभी रैयतों के भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. बिहटा अंचल के विशम्भरपुर मौजा में 373 रैयतों से 98.99 एकड़ एवं कुतलुपुर मौजा में 114 रैयतों से 27 एकड़ का अधिग्रहण होगा. जमीन मालिकों को एमवीआर का चार गुना मुआवजा मिलेगा.

डीएम ने बताया कि सात दिनों के अन्दर रैयतों को भुगतान की कार्रवाई शुरू की गई है. भू-अर्जन की दैनिक समीक्षा की जाएगी. उन्होंने सीओ को जमीन मालिकों को शीघ्र एलपीसी जारी करने का निर्देश दिया. कलेक्ट्रेट के भू-अर्जन शाखा में विशेष सेल गठित करने के साथ-साथ रैयतों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क भी बनाई गई है.

क्या आप जानते हैं कीबोर्ड की इन कीज का मतलब?

आप भी लगभग हर रोज लैपटॉप या डेस्कटॉप कम्प्यूटर का इस्तेमाल करते होंगे. यूं तो इसके कीबोर्ड में बहुत सी कीज या बटन होती हैं, पर ऐसे बहुत कम लोग हैं जो इन सभी कीज के सारे फंक्शनस जानते हैं.

इन सभी में सबसे खास होती हैं एफ कीज, जो एक से लेकर बारह तक हर सिस्टम कीबोर्ड में मौजूद होती हैं. हर कम्प्यूटर के कीबोर्ड की पहली या दूसरी लाइन में F1 से F12 तक की होती हैं. आप में से बहुत से लोगों को इनके सारे कार्य मालूम होंगे और कुछ लोंगो को इन सभी कीज के कार्यों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होगी.

तो क्या आप जानते हैं इनका उपयोग क्या है? अगर नहीं जानते तो, आज हम बताएंगे आपको कि ये एफ कीज के एक से लेकर बारह तक का आपके सिस्टम में क्या उपयोग है.

F1 : कम्प्यूटर को ऑन करते समय इस की को प्रेस करने पर आप कम्प्यूटर सेटअप में पहुंच जाएंगे. यहां से सेटिंग्स को चेक और चेंज किया जा सकता है.

F2 : विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी फाइल को रीनेम करने के लिए इस की का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में इस की को प्रेस करने पर आप उस फाइल का प्रिंट प्रिव्यू देख सकते हैं.

F3 : विंडोज में इस की का इस्तेमाल करके सर्च बॉक्स खोला जाता है, जिससे किसी भी फाइल या फोल्डर को सर्च किया जा सकता है. इसके अलावा MS-DOS में इस को प्रेस करने पर पहले टाइप की गई कमांड दोबारा टाइप हो जाती है.

F4 : माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में इस की को प्रेस करने पर पिछला काम रिपीट हो जाता है, जैसे- जो शब्द पहले टाइप किया था वह फिर से हो जाएगा,जो शब्द बोल्ड किया है वह फिर से हो जाएगा आदि.

F5 : सबसे ज्यादा इस की का इस्तेमाल रिफ्रेश करने के लिए होता है. इसके अलावा पावरपॉइंट में इसे प्रेस करने से स्लाइड शो शुरू हो जाता है.

F6 : इसको प्रेस करने से विंडोज में खुले फोल्डर्स के कंटेंट दिखने लगते हैं. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में खुले कई सारे डॉक्युमेंट्स को एक-एक करके देखने के लिए Control+Shift+F6 का इस्तेमाल किया जाता है.

F7 : माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में अगर इस की को प्रेस करने के बाद कुछ भी टाइप करेंगे तो उस शब्द की स्पेलिंग चेक होने लगेगी.

F8 : माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में हम टेक्स्ट को सिलेक्ट करने के लिए इस की का इस्तेमाल किया जाता है.

F9 : माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक में ई-मेल भेजने या रिसीव करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कई नए लैपटॉप में इसकी मदद से स्क्रीन की ब्राइटनेस को भी कंट्रोल किया जा सकता है.

F10 : किसी भी सॉफ्टवेयर में काम करते हुए इस की को दबाते ही मेन्यू खुल जाता है. इसके अलावा Shift के साथ F10 प्रेस करने पर यह माउस के राइट क्लिक का काम करता है.

F11 : इंटरनेट ब्राउजर्स (इंटरनेट एक्सप्लोरर, क्रोम) में फुल स्क्रीन व्यू करने के लिए इस की का इस्तेमाल किया जाता है.

F12 : माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में इस की प्रेस करने से Savs As का ऑप्शन खुल जाता है. Shift के साथ F12 प्रेस करने पर माइक्रोसॉफ्ट फाइल सेव हो जाती है.

इंस्टाग्राम से कमा सकते हैं पैसे, देखिए ये वीडियो

फेसबुक के बाद इंस्टाग्राम आज कल बहुत ज्यादा प्रचलन में है और इस पर लोग बहुत सक्रिय नजर आ रहे हैं. ऐसे में हम आप को आज ये बताने जा रहे हैं कि आप इंस्टाग्राम से पैसे कैसे कमा सकते हैं.

जब भी कोई तकनीक आती है, वह बहुत सारे मौके साथ लाती है. ऐसा ही इंस्टाग्राम के साथ हुआ है. इंस्टाग्राम पर लोगों का जमावड़ा बढ़ा, तो बिजनेसमैनों ने भी इंस्टाग्राम से पैसे कमाने का तरीका निकाल लिया.

इंस्टाग्राम पर आप सिर्फ फोटो अपडेट कर सकते है, इस का फायदा उठा कर लोगों ने अपने प्रोडक्ट की फोटो लोगों तक पहुंचाना शुरू कर  दी. फोटो दिखा कर विज्ञापन करने का तरीका बहुत पुराना है, इस तरीके से इंस्टाग्राम पर भी विज्ञापन किया जाता है, पर हम आप को मार्केटिंग तरीका सिखाएंगे.

इस के लिए आप को पहले अमेजन एसोसिएट अकाउंट बनाना होता है, वहां से आप को एक प्रोडक्ट चुनना होता है, जिसे आप बेचना चाहते है, उस के बाद उस प्रोडक्ट का शार्ट लिंक आप को मिल जाता है. जिस को आप इंस्टाग्राम पर लगा देते हैं और साथ ही उस प्रोडक्ट की फोटो भी.

जब इंस्टाग्राम पेज के यूजर उस लिंक पर क्लिक कर के उस प्रोडक्ट को खरीदते हैं, तो अमेजन आप को उस प्रोडक्ट की सेल पर एक कमीशन देता है, ऐसे में आप इंस्टाग्राम और अमेजन की मदद से पैसे कमा सकते हैं.

‘नूतन का बेटा हूं इसलिए सालों तक काम मिलता रहा’

मां की सीख और बौलीवुड में कुछ करने की ललक ही मोहनीश को मायानगरी की रंगीन दुनिया में लाई थी. 1983 में आई फिल्म ‘बेकरार’ से ऐक्टिंग की शुरुआत करने वाले मोहनीश आए तो थे ऐक्टर बनने पर 1989 की ब्लौकबस्टर फिल्म ‘मैं ने प्यार किया’ में सलमान के अपोजिट उन के नैगेटिव किरदार ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया.  मोहनीश ने कई यादगार किरदारों को निभाया है. फिल्म ‘हम आप के हैं कौन’ और ‘हम साथसाथ हैं’ में उन के द्वारा निभाया गया आदर्श बड़े भाई का किरदार हमेशा याद रहेगा. 3 साल पहले आई फिल्म ‘जय हो’ के बाद वे छोटे परदे से जुडे़ और दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं. इन दिनों वे ऐंड टीवी पर आ रहे क्राइम शो ‘होशियार’ को होस्ट कर रहे हैं. पेश हैं, शो के प्रमोशन के दौरान उन से हुई बातचीत के कुछ अंश :

फिल्मों में कैसे आना हुआ?

फिल्मी परिवार से होने के कारण सैट्स पर मेरा अकसर आनाजाना होता था. जब मां मुंबई से बाहर शूटिंग के लिए जाती थीं तो मैं भी उन के साथ ही रहता था. एक दिन फिल्म निर्माता राज खोसला ने मुझे उर्दू सीखने के लिए बुलाया, तब मैं 18-19 साल का था, सैट्स पर ही मेरी उर्दू की क्लास चलने लगी. फिल्मों में जाने का मन मैं पहले ही बना चुका था. खोसलाजी से मिलने पर यह बात फैल गई कि मैं इंडस्ट्री जौइन कर रहा हूं. सन्नी देओल, संजय दत्त, कुमार गौरव समेत मेरे साथ बहुत से स्टार संस ने डैब्यू किया था. शुरुआती फिल्में बौक्स औफिस पर बुरी तरह फ्लौप हुईं.

उस दौर की ‘पुराना मंदिर’ मेरी हिट फिल्म थी, लेकिन हौरर फिल्मों को उस समय बी ग्रेड माना जाता था. फिल्मों में नाकामयाब होने के बाद मैं ने इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना लिया और फ्लाइंग सीखना शुरू कर दिया, क्योंकि काम तो करना ही था. सलमान खान से मेरी दोस्ती बहुत पहले से थी, सूरजजी ‘मैं ने प्यार किया’ फिल्म के औडीशन ले रहे थे, सलमान ने कहा कि तू भी एक बार औडीशन क्यों नहीं देता. मैं गया और फिल्म के लिए सिलैक्ट हो गया. उस फिल्म में निभाया गया मेरा ग्रे करैक्टर मेरे कैरियर का टर्निंग पौइंट साबित हुआ.

मां का कितना प्रभाव पड़ा?

मां का अपने बच्चे पर प्रभाव पड़ना तो लाजिमी है. मां ने 3 बातें मुझे सिखाई थीं, पहली कैमरे के सामने सिंसियर हो कर काम करो, दूसरी, बड़ी तकनीकी वाली बात थी कि शूटिंग के समय रीटेक के बाद जब दोबारा शूटिंग शुरू हो तो याद रखना कि पहले हाथ का ऐंगल क्या था? यह छोटी बात जरूर थी मगर टैक्निकली बहुत बड़ी है. तीसरी बात वे हमेशा कहती थीं कि तुम्हारी नाक लंबी है इसलिए कैमरे के सामने इस का ध्यान रखना.

नूतनजी इतनी बड़ी अदाकारा थीं, परिवार को उन की कमी तो महसूस नहीं हुई?

वे जितनी अच्छी अदाकारा थीं उतनी ही अच्छी एक मां व एक पत्नी भी थीं. सामंजस्य क्या होता है यह मैं ने उन से ही सीखा. वे बेहद बहादुर थीं. कैंसर जैसी बीमारी का उन्होंने बहादुरी से सामना किया. जब उन्हें कैंसर का पता चला तो वे मायूस नहीं हुईं. उन्होंने कैंसर से पहली जंग जीत ली थी, लेकिन उस के बाद कैंसर ने उन के लिवर पर आक्रमण किया. बीमारी के दौरान भी वे हमें हौसला देती रहीं.

उन के जीवित रहते मेरा फिल्मी कैरियर शुरू हो चुका था, लेकिन परवान नहीं चढ़ा था. उन्होंने मेरी फिल्में ‘मैं ने प्यार किया’ और ‘बाग़ी’ देखीं. उन्हें मेरा काम पसंद आया. जब बीच में मेरे पास कोई काम नहीं था तब वे हमेशा मेरी हिम्मत बढ़ाती रहतीं और अमितजी का उदाहरण देतीं. हालांकि मेरे ऊपर घर चलाने की जिम्मेदारी नहीं थी, लेकिन वे कहती थीं कि लाइफ में किसी भी चीज की गारंटी नहीं है. 

उन की कौन सी फिल्में आप को सब से ज्यादा पसंद हैं?

जब मैं छोटा था तब उन की फिल्में कम देखता था, क्योंकि मां अपनी फिल्मों में रोती बहुत थीं और मुझे उन्हें रोते हुए देखना बिलकुल पसंद नहीं था.  मैं उन्हें परदे पर ही सही, लेकिन तकलीफ सहते हुए नहीं देख सकता था. कुछ फिल्में तो मैं ने तब देखीं, जब बड़ा हो गया था. उन की फिल्में ‘सुजाता’, ‘बंदिनी‘, और मिलन’ मुझे बहुत पसंद हैं.  मां के नाम का सहारा इतना रहा कि 20-22 साल तक तो इसी नाम से फिल्में चलती रहीं और काम मिलता रहा. 

आप की इमेज एक ग्रे शेड ऐक्टर की बनी है, अब आप पौजिटिव किरदार निभा रहे हैं तो क्या इस बदलाव को दर्शक पचा पा रहे हैं?

यह सही है कि मैं ने नैगेटिव किरदार ज्यादा निभाए हैं, लेकिन सूरज की फिल्मों में दर्शकों ने मेरे बदले अवतार को बहुत सराहा है. जो प्यार मुझे अच्छे किरदार को निभाने में मिला वह कभी भी ग्रे शेड किरदार में नहीं मिला, इसलिए ऐसे रोल करने से बच रहा हूं क्योंकि इस उम्र में अपनी पहचान विलेन की नहीं एक अच्छे कलाकार की बनाना चाहता हूं.

आप के साथी कलाकारों ने ऊंचाइयां छू लीं. आप कैसे पीछे रह गए?

मैं ने फिल्म ‘तेरी बांहों में’ और ‘पुराना मंदिर’ में हीरो का किरदार निभाया था, लेकिन फिल्म ‘मैं ने प्यार किया’ में काम करने के बाद मैं विलेन बन गया. मैं ने कौमेडी भी की, पौजिटिव संजीदा किरदार भी निभाए हैं. इस के बाद अब छोटे परदे पर भी सक्रिय हूं.

मैं मानता हूं कि मेरे साथी कलाकार आज सितारे बन गए हैं, लेकिन मुझे अपने आप से कोई शिकायत नहीं.

35 साल में आप में क्या बदलाव आया है?

असुरक्षा की भावना से मैं आज तक नहीं उबर पाया हूं. मैं मानता हूं कि हम सभी में असुरक्षा की भावना रहती है. जब मैं इंडस्ट्री में नया आया था तब से ले कर आज तक फिल्मों में जो बदलाव आया है वह तकनीकी रूप से ज्यादा आया है. पहले बंदिशें बहुत थीं, आज उतनी नहीं हैं. आज किसी ऐक्टर को देख कर आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि यह ऐसी फिल्म बनाएगा. पहले सभी के स्लौट सीमित थे. हर फिल्म में कौमेडियन, विलेन, हीरो सभी अलग होते थे, लेकिन आज की फिल्मों की कहानी अलग तरह की होती है. यह बदलाव ही है.

हमेशा से आप राजश्री की फिल्मों में रहे हैं, लेकिन ‘प्रेम रतन धन पायो’ में क्यों नहीं थे?

जब सूरजजी इस फिल्म को बना रहे थे तब मेरे पास उन का फोन आया था कि एक बार मैं इस फिल्म की स्क्रिप्ट देख लूं, लेकिन मैं ने स्क्रिप्ट पढ़ी तो पूरी कहानी में मेरे लायक कोई रोल नहीं था. सलमान इस फिल्म में वैसे ही डबल रोल निभा रहे थे.

आजकल कई सारे क्राइम शो आ रहे हैं, उन के हिट होने का क्या कारण है क्यों लोगों को अपराध देखना पसंद है?

उत्सुकता एक ऐसा शब्द है जो हर जगह होता है. मानवीय प्रवृत्ति ही ऐसी है जिस में दीवार के पीछे क्या है इस की उत्सुकता बनी रहती है. इसलिए ऐसे शोज हिट हैं.  

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