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दुनिया से अलग थलग पड़ते अमेरिका-भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका जाने से पहले जिस तरह मीडिया में बड़ीबड़ी बातों को प्रचारित किया जा रहा था, वैसा कुछ भी नहीं हुआ. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुई पिछली 4 यात्राओं के बाद नया यह था कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी की यह पहली यात्रा थी. सनकी ट्रंप से मोदी की इस पहली मुलाकात को ले कर आशंकाएं थीं. इन दोनों नेताओं की मुलाकात पर दुनियाभर की निगाहें थीं. खासतौर से चीन और पाकिस्तान मोदी के दौरे को उत्सुकता से देख रहे थे.

मोदी की दुनिया के सब से ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कुछ ऐसी ही थी जिस तरह भारतीय पुराणों में भरी कहानियों में कहा गया है कि दुश्मन के शक्तिशाली होने या किसी भी तरह की  मुसीबत आने पर देवता लोग ब्रह्मा की शरण में जाते थे. धर्म की ध्वजा थाम कर सत्ता में आए दोनों ही नेताओं के बीच खूब प्रेमालाप हुआ. एकदूसरे की जमकर तारीफें हुईं. दोनों नेताओं में कई बार गलबहियां हुईं. दोनों ने एकदूसरे को महान करार दिया लेकिन जो ठोस काम होने चाहिए थे वे नहीं हुए, केवल जबानी जमाखर्च देखने को मिला. दोनों नेताओं द्वारा एकदूसरे की मजेदार तारीफों के पुल पर गौर करते हैं :

मोदी ने फरमाया–

भारत और अमेरिका विकास के ग्लोबल इंजन हैं.

अमेरिका भारत का सच्चा मित्र है.

अमेरिका सब से पुराना और भारत सब से बड़ा लोकतंत्र है.

भारत और अमेरिका दुनिया के लिए बहुतकुछ कर सकते हैं.

यह मेरा नहीं, सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है.

आप की बेटी इवांका को भारत आने का निमंत्रण देता हूं.

ट्रंप ने फरमाया–

पीएम मोदी जैसे महान प्रधानमंत्री का यहां होना सम्मान है.

भारत, अमेरिका का सच्चा दोस्त है.

सोशल मीडिया पर मैं और मोदी वर्ल्ड लीडर हैं.

आर्थिक मोरचे पर मोदी ने बेहतरीन काम किया है.

मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं.

भारत सब से तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है.

मोदी ने कई शानदार काम किए हैं.

आतंकवाद के खिलाफ दोनों देश लड़ाई लड़ रहे हैं.

अमेरिका से सैन्य उपकरण की खरीद के लिए भारत का धन्यवाद.

120 करोड़ लोगों को अपने प्रधानमंत्री से जिन समस्याओं को ले कर जो उम्मीदें थीं, उन पर वे बात करने की हिम्मत जुटाते नहीं दिखे. न कोई लिखित व्यापारिक सौदे हुए, न समझौते. सब से बड़ी उम्मीद देश के नौजवानों को एच1 वीजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति को झु़काने को ले कर थी, इस मामले में निराशा हाथ लगी. पेरिस क्लाइमेट डील पर भी कोई बात नहीं हुई. ट्रंप ने कुछ समय पहले कहा था कि भारत इस समझौते में इसलिए शामिल हुआ था क्योंकि उसे इस के बदले में विकसित देशों से अरबों डौलर दिए जा रहे हैं. इस पर भी मोदी ने कोई जवाब नहीं दिया. यह आश्चर्यजनक है.

आतंकवाद पर बेमकसद बातचीत

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, चीन के बढ़ते रुतबे को ले कर भारत व अमेरिका बयानबाजी करते नजर आए. अमेरिका ने यह जरूर किया कि उस ने मोदी की यात्रा से पहले ही जमाते इसलामी के 71 वर्षीय मुखिया आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी करार दे दिया. इस से मोदी के कट्टर हिंदू समर्थकों को जरूर खुशी हुई होगी लेकिन सलाहुद्दीन कोई ऐसा आतंकी नहीं है जिसे जम्मूकश्मीर के बाहर कोई जानता हो. उधर, करोड़ों डौलर का इनामी हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम बैठा है.

दोनों देशों के बीच आतंकवाद पर बातचीत पहली बार नहीं हो रही. जौर्ज डब्लू बुश, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा के समय से बातचीत चल रही है पर अमेरिका को आतंकवाद से खतरा अपना अलग है. भारत को खतरा मूलरूप से पाकिस्तान की ओर से है. अमेरिका ने अब तक पाकिस्तानी आतंकवाद पर ढुलमुल रवैया अपनाया है. कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं दिखाई देता. उलटे, वह इस देश को अपने हथियार बेचता आया है. मोदी खुल कर पाकिस्तान को बेचे जाने वाले अस्त्रशस्त्रों के खिलाफ अमेरिका को आंखें कभी नहीं दिखाते.

भारत और अमेरिका बाहरी आतंकवाद के खात्मे का संकल्प लेते तो नजर आते हैं पर दोनों ही अपनेअपने देशों के भीतर बढ़ती नस्लीय, जातीय, धार्मिक भेदभाव, हिंसा के आतंक पर खामोश हैं. यह भीतरी आतंक ज्यादा खतरनाक है और यह दोनों देशों की सामाजिक एकता, आर्थिक तरक्की व लोकतांत्रिक प्रणाली को खोखला कर रहा है.

यह सच है कि अब पाकिस्तान को अमेरिका की खास मदद की जरूरत भी नहीं है. अब उसे चीन के रूप में एक मजबूत आर्थिक व सामरिक मददगार मिल गया है. चीन की विश्व में बढ़ती ताकत से घबराए अमेरिका और भारत का यह मिलन ‘दुश्मन का दुश्मन हमारा मित्र’ जैसा था. भारत व अमेरिका की ओर से जारी संयुक्त बयान में मूलभूत ढांचे के पारदर्शी विकास और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया गया जिस का इशारा साफतौर पर चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना की ओर था.

दरअसल, चीन का वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट विश्व को जोड़ने की बहुत बड़ी परियोजना है. विश्वगुरु बनने के लिए इस तरह की परियोजना भारत को शुरू करनी चाहिए थी पर बाजी चीन मार रहा है. चीन दुनिया के देशों को साथ ले कर चलने की कोशिश में दिखता है पर भारत और अमेरिका न केवल अपने पड़ोसी देशों से दूर जा रहे हैं, बल्कि चीन को दुश्मन समझ कर उस के साथ मिल कर काम करने से कतरा भी रहे हैं. चीन केवल एशिया में ही नहीं, विश्व का आर्थिक, सामरिक शक्ति का सिरमौर बनता जा रहा है. अमेरिका से अब चक्रवर्ती की पदवी छिनती लग रही है और भारत के विश्वगुरु बनने के सपने में चीन गहरी सेंध लगाता दुनिया को साफ नजर आ रहा है.आर्थिक तरक्की की योजनाओं की बजाय दोनों देशों में धार्मिक ताकतें मजबूत होती जा रही हैं और ये आर्थिक, सामाजिक व लोकतांत्रिक मूल्यों को बिगाड़ कर तानाशाही सोच विकसित करने में जुटी हैं.

भारत और अमेरिका में आएदिन जातीय, नस्लीय, धार्मिक हिंसा की घटनाओं में वृद्घि हो रही है. विकास का एजेंडा हाशिए पर चला गया है. ऐसे में भारत और अमेरिका विश्व में अलगथलग पड़ते दिख रहे हैं.

अहंकार की मार

भारत की बात करें तो पड़ोसी देश चीन, रूस, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका से रिश्तों का मधुर दौर खत्म हो रहा है. चीन बंगलादेश को भी अपने गुट में शामिल करने की कोशिश में है. अब ये देश चीन के गहरे दोस्त बन गए हैं. चीन बारबार भारत से भी मिल कर चलने की गुहार कर रहा है पर भारत का अहंकार अपने ऋषियों और हैहय वंशी राजाओं की भांति बरकरार है. चीन के सरकारी प्रकाशन ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था कि चीन का सहयोगी बनने में ही भारत का भला है पर भारत को अहंकार है कि उस के पास विशाल बाजार है. वन बेल्ट वन रोड योजना में अपनी संप्रभुता से जुड़े मुद्दे पर चीन के तरजीह न देने से भारत इस में शामिल नहीं हो रहा है. भारत एशिया के अपने पड़ोसियों के करीब भी नहीं है. उन से भी अलगथलग पड़ रहा है. भारत जब एशियागुरु ही नहीं बन रहा तो कहां विश्वगुरु? वहीं चीन, एशिया में सब को साथ ले कर चलने की कोशिश कर रहा है. भले ही यह उस की कूटनीति हो या व्यापार बढ़ा कर तरक्की करने की नीति, पर वह बड़ी परियोजनाओं पर काम करता दिखाई दे रहा है. भारत है कि अपने धार्मिक भक्तों को कैलाश यात्रा पर जाने की जिद ठाने है. ताज्जुब है संहारक कहे जाने वाले भगवान, भक्तों के बीच आने वाले चीन का संहार क्यों नहीं कर देते?

चीन और पाकिस्तान एकदूसरे को अपने सब से करीब मानते हैं. चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है, वह चाहे आतंकवाद का मुद्दा हो या कूटनीति का. आतंकी संगठन जैशे मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने की भारत की कोशिशों पर चीन का अड़ंगा इस बात का सुबूत है. और तो और, चीन ने रूस को भी मित्र बना लिया.

उधर अमेरिका अपने सामरिक गठबंधन वाले देशों आस्टे्रलिया और जरमनी को लताड़ लगा चुका है. वह यूरोपीय देशों से छिटकता जा रहा है. यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन-अमेरिका रिश्तों में गरमजोशी नहीं दिखती. अमेरिका ने एच1 वीजा और प्रवासियों व मुसलमानों पर रोक जैसे कदमों से कई देशों से रिश्ता खटाईर् में डाल लिया. अमेरिकी श्रम बाजार ने शुरू से ही पूरी दुनिया से प्रवासियों को आकर्षित किया है और वहां प्रवास की दर विश्व में सर्वाधिक रही है. 2008-2009 के आर्थिक संकट के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका पहले से दूसरे स्थान पर आ चुका है. प्रवासियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार में भरपूर सहयोग दिया है. अमेरिका में परिवहन, आवास, मनोरंजन और सेवासत्कार के क्षेत्र में एकचौथाई कंपनियां प्रवासियों की हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इमीग्रेशन से अमेरिकी समाज का बुढ़ापा कम करने में मदद मिल रही है.

भारत और अमेरिका चीन के प्रभाव को कम नहीं कर पाएंगे. भारत की आधी से ज्यादा आबादी 35 साल से कम उम्र की है. वहीं, चीन और दूसरे विकसित देश बूढ़ी होती आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं. इस के बावजूद भारत चीन से पिछड़ रहा है. वन बेल्ट वन रोड चीन द्वारा प्रायोजित एक योजना है जिस में पुराने सिल्क रोड के आधार पर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों को सड़कों व रेलमार्गों से जोड़ा जाना है. यह योजना मूलरूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिमाग की उपज है. यह 68 से अधिक देशों में फैले यूरेशिया और प्रशांत महासागर में कारोबार और आधारभूत संरचना वाली परियोजनाओं का एक संग्रह है. इस की परिधि में 4.4 अरब लोग और विश्व जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा आता है. करीब एक दशक पहले आई वैश्विक मंदी में चीन की अर्थव्यवस्था डगमगा गई थी. इस ने निर्यातकेंद्रित चीनी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था.

शी जिनपिंग ने पहले चरण में 124 अरब डौलर के निवेश का वादा किया है. बाद के चरणों में परियोजना में ट्रिलियन डौलर जोड़े जाएंगे. परियोजना का मुख्य उद्देश्य चीन को अफ्रीका, मध्य एशिया और रूस से होते हुए यूरोप से जोड़ना है. शी जिनपिंग ने इसे प्रोजैक्ट औफ सैंचुरी बताया है.

चीन का मकसद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से जुड़े देशों की सरकारों को 1.1 अरब डौलर टैक्स मिलेगा. इस से इन देशों की आय में बढ़ोतरी होगी, बेरोजगारी कम होगी. पाकिस्तान के लिए यह परियोजना फायदेमंद साबित होगी. दुनिया से अलगथलग पड़ा पाकिस्तान अब चीन के सहारे आगे बढ़ पाएगा. आतंकवादियों को समर्थन देने का जो ठप्पा उस पर लगा हुआ था वह चीनी मौजूदगी से फीका हो सकता है.

अगर यह प्रोजैक्ट सफल हुआ तो यह दुनिया में होने वाले व्यापार की तसवीर बदल देगा. दुनिया में होने वाले कुल व्यापार का 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्री रास्ते से हो कर जाता है और इस तरह मालवाहक पोत एक देश से दूसरे देश को जाते हैं. यह परियोजना समुद्री रास्तों पर निर्भरता को कम कर सकती है जिस पर अब तक अमेरिका का वर्चस्व है. चीनी राष्ट्रपति की यह योजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उन के ‘अमेरिकी फर्स्ट’ मंत्र के बिलकुल विपरीत है. ट्रंप प्रशासन ने ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप से हाथ खींच लिया जो कि अमेरिका के नेतृत्व में बना एक व्यापारिक समझौता था जिस की स्थापना चीन के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए की गई थी.

इस तरह चीन दुनियाभर के देशों से जुड़ कर अपना कारोबार बढ़ाने के रास्ते तैयार कर रहा है जबकि भारत योग जैसे पाखंडों को फैला कर विश्वगुरु बनने का झूठा दंभ भर रहा है. चीनी राष्ट्रपति ने कहा भी था कि  संरक्षणवाद के रास्ते पर चलने का मतलब है खुद को एक अंधेरे कमरे में बंद कर लेना. पर भारत और अमेरिका इस चीनी पहल को ले कर सुरक्षात्मक रवैया अपनाए हुए हैं क्योंकि वे चीन के रणनीतिक उद्देश्यों को ले कर सशंकित है. हालांकि चीन ने इस परियोजना के लिए न्यू सिल्क रूट सम्मेलन नाम से बुलाई करीब 100 देशों की बैठक में भारत को भी आमंत्रित किया था पर भारत ने भाग नहीं लिया. यह सब से बड़ी गलती थी. इसे विदेश नीति के मोरचे पर मोदी सरकार की बड़ी विफलता बताया गया है. असल में भारत की नाराजगी की वजह चीनपाकिस्तान इकोनौमिक कौरिडोर है. पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने वाला यह कौरिडोर वन बेल्ट वन रोड का ही हिस्सा है. भारत के विरोध के बावजूद दक्षिण एशियाई देशों ने बेल्ट ऐंड रोड फोरम में शामिल होना स्वीकार किया था. पड़ोसी देशों के इस फोरम में शामिल होने से भारत की स्थिति कमजोर हुई है. इस से देश की क्रिएटिविटी भी कमजोर पड़ेगी.

भारत-चीन के पेचीदा रिश्ते

भारत और अमेरिका की दोस्ती चीन की बराबरी नहीं कर सकती. इस दोस्ती की वजह विश्व में चीन का बढ़ता प्रभाव है जो भारत और अमेरिका को नहीं सुहा रहा है. भारत अपनी गुटनिरपेक्ष नीति का त्याग कर अमेरिका का पिछलग्गू बनता जा रहा है. अलगथलग पड़ कर भारत अपनी तरक्की के रास्ते बंद करता जा रहा है. इसी का जवाब देने के लिए वह चीन से एतराज दर्ज कराता रहा है कि जिस से दुनिया को यह एहसास रहे कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश विवादित क्षेत्र हैं.

यह सच है कि चीनी सेना की टुकड़ी ने सिक्किम की नियंत्रणरेखा पार कर भारतीय डोका ला के लालटेन क्षेत्र में घुसपैठ की और भारतीय सेना के पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों से हाथापाई की, जबकि चीन ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने चीनी सीमा में घुसपैठ की. सिक्किम में अंतर्राष्ट्रीय वास्तविक नियंत्रणरेखा लांघ कर चीनी सेना ने भारत के 2 बंकरों को नष्ट कर दिया था. नाथुला दर्रे के रास्ते मानसरोवर जा रहे यात्रियों को रोका गया. यह मार्ग भारत और चीन के बीच 2015 में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत खोला गया था.

एनएसजी के मुद्दे पर भारत और चीन की कड़वाहट पहले से ही बनी हुई है. भारत ग्वादर मामले में अपनी संप्रभुता की बात करता है पर उस का कोई औचित्य नहीं है. भारत कूटनीति में चीन के सामने फेल हो रहा है. चीन हर स्तर पर भारत को मात दे रहा है. पाकिस्तान ने 1963 में पाक अधिकृत कश्मीर का 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को भेंट कर दिया था. तब से चीन पाकिस्तान का मददगार बना हुआ है. उधर, एशियाई देशों के छोटेबड़े देशों में चीन का निवेश और व्यापार बढ़ेगा ही, सामरिक भूमिका भी बढ़ जाएगी. यह रणनीति वह भारत और अमेरिका के खिलाफ रच रहा है. उधर, अमेरिका अपनी ही बनाई नीतियों व समझौतों को रद्द कर रहा है. भारत तिब्बत के धर्मगुरु दलाईर्लामा को शरण दे कर अपना नुकसान कर रहा है. चीन, भारत के लामा प्रेम से नाराज है.

कोई नतीजा नहीं

मोदी की तरह ट्रंप भी धर्म की पीठ पर सवार हो कर सत्ता में आए थे. नफरत, भय फैला कर धु्रवीकरण कर के तमाम अनुमानों को झुठलाते हुए सत्तासीन हुए ट्रंप के कई हास्यास्पद, बेवकूफीभरे फैसले अखबारों की सुर्खियों में रहे. घृणा फैलाने में माहिर ट्रंप के आने के बाद अमेरिका में, भारत की तरह, आएदिन हेट क्राइम की घटनाएं सामने आ रही हैं. अमेरिका में यहूदियों, मुसलमानों और समलैंगिकों पर हमलों की तरह भारत में दलितों, मुसलमानों के साथ भेदभाव व हिंसा की घटनाओं पर दोनों ही नेता कभी खुल कर नहीं बोलते सुने गए.

सब से बड़े और सब से पुराने लोकतंत्र होने पर गर्व करने वाले भारत और अमेरिका दोनों देशों की राजनीति में धर्म का बहुत प्रभाव रहा है. मोदी की तरह ट्रंप के बाकायदा कई धार्मिक नेताओं से संबंध हैं. कुछ समय पहले उन्होंने अपने धार्मिक सलाहकारों की एक लिस्ट भी जारी की थी. इन दोनों नेताओं की ताकत वाकपटुता और उन के अपने धार्मिक  समर्थक संगठन हैं. मोदी-ट्रंप मुलाकात के कोई सार्थक नतीजे निकलने तो दूर, विश्व में इन दोनों देशों के अलगथलग पड़ने के आसार बनते जरूर नजर आ रहे हैं.

विरासत में भी मिलती है एलर्जी

कुछ लोग एलर्जी के आसान शिकार होते हैं क्योंकि उन में एलर्जन के प्रति संवदेनशीलता जन्मजात होती है. लड़कों में लड़कियों के मुकाबले आनुवंशिक रूप से एलर्जी होने की आशंका अधिक होती है. जन्म के समय जिन बच्चों का भार कम होता है उन्हें भी एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर मातापिता दोनों में से एक को या दोनों को एलर्जी होती है तो उन के बच्चे एलर्जी के आसान शिकार होते हैं. वैसे, आनुवंशिक कारण ही एलर्जी होने का एकमात्र कारण नहीं है. एलर्जी होने के कई और कारण भी हो सकते हैं. वे बच्चे, जिन के मातापिता या परिवार में किसी को एलर्जी नहीं है, भी एलर्जी के शिकार हो सकते हैं.

एलर्जी एक मैडिकल कंडीशन है जो आप को बीमार अनुभव कराती है. जब आप किसी चीज को खाते हैं या उस के संपर्क में आते हैं. एलर्जी तब होती है जब इम्यून तंत्र यह विश्वास कर लेता है कि किसी व्यक्ति ने जो चीज खाई है या उस के संपर्क में आया है, वह शरीर के लिए हानिकारक है. शरीर की रक्षा के लिए इम्यून तंत्र एंटीबौडीज उत्पन्न करता है. एंटीबौडीज मास्ट सेल (शरीर के एलर्जी सैल्स) को ट्रिगर करते हैं कि वे रक्त में रसायनों को रिलीज करें. इन रसायनों में से एक है हिस्टामिन. हिस्टामिन आंखों, नाक, गले, फेफड़ों, त्वचा या पाचन मार्ग पर कार्य करता है और एलर्जिक रिऐक्शन के लक्षण उत्पन्न करता है. एक बार जब शरीर किसी निश्चित एलर्जन के विरुद्घ एंटीबौडीज का निर्माण कर लेता है, तो ये एंटीबौडीज आसानी से उन एलर्जन को पहचान लेते हैं, शरीर फिर से हिस्टामिन को रक्त में रिलीज कर देता है, जिस से एलर्जी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

एलर्जी और आनुवंशिकता

एलर्जी विकसित होने की प्रवृत्ति अकसर आनुवंशिक होती है, जिस का अर्थ है कि यह आप के जींस द्वारा आप की अगली पीढ़ी में पास हो सकती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि आप के जीवनसाथी या आप को एलर्जी है तो आप के सभी बच्चों को निश्चित ही एलर्जी हो. अगर मातापिता दोनों में से किसी एक को एलर्जी है तो बच्चों के एलर्जी की चपेट में आने का खतरा 50 प्रतिशत होता है. लेकिन अगर मातापिता दोनों को एलर्जी है तो बच्चों के एलर्जी की चपेट में आने की आशंका 75 प्रतिशत तक रहती है.

यह जरूरी नहीं है कि मातापिता को जो एलर्जी है वही बच्चों को भी हो, उन्हें किसी दूसरे प्रकार की एलर्जी भी हो सकती है. एलर्जी न केवल आनुवंशिकता से संबंधित होती है, बल्कि मातापिता और बच्चों के लिंग से भी संबंधित होती है. एक नए अध्ययन के अनुसार, बच्चे को विरासत में एलर्जी मिलने की आशंका बढ़ जाती है अगर मातापिता में से समान लिंग वाला एलर्जी से पीडि़त है. जैसे, अगर पिता को एलर्जी है तो बेटे को विरासत में एलर्जी मिलने की आशंका अधिक होगी. ऐसे ही, अगर मां को एलर्जी है तो बेटी के लिए खतरा बढ़ जाएगा.

इस लड़की के साथ हर कोई करना चाहता है…देखिए वीडियो

अब तक आपने एक से बढ़कर एक ताकतवर योद्धाओं को देखा होगा. आज हम आपको एक ऐसी महिला से मिलवाने जा रहे हैं जिसके सामने बड़े-बड़े पहलवानों की छुट्टी हो जाती है. इस लड़की का नाम है मामा लाउ. यह जितनी हौट है, इसकी बाजुओं में उतना ही दम है. इन्होंने अपनी बाजुओं के दम पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है.

इस लेडी बाहुबली का पूरा नाम लिंडसे लिंगबर्ग है और लोग इन्हें प्यार से मामा लाउ कहते हैं. वह अपने बाजुओं से सेब तोड़ देती हैं. यह ताश की मोटी तह को दो टुकड़ों में चीर देती हैं. लाउ के नाम एक मिनट में सर्वाधिक सेब अपनी बाजुओं से तोड़ने का रिकार्ड दर्ज है. इनके नाम एक मिनट में 10 सेब और इतने ही वक्त में 5 टेलीफोन डायरेक्ट्री चीरने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज है.

अपनी इस ताकत का अंदाजा उन्हें 20 साल की उम्र में लगा. तब से ही उन्होंने मर्दों की तरह अपनी ताकत को आजमाना शुरू कर दिया. इसके बाद उनके मन में सवाल आया क्या वह अपनी मजबूत बाजुओं से सेब को तोड़ सकती हैं. फिर क्या था उन्होंने इसकी प्रैक्टिस शुरू की और कामयाब भी हो गई. वह पूरी दुनिया में अपनी इस अनोखे स्टंट को परफार्म करती हैं. 

मामा लाउ केटी पैरी की फैन हैं. उनका अगला लक्ष्य एक मिनट में ज्यादा से ज्यादा ताश की गड्डी को दो टुकड़ो में चीरना है. इसका नमूना भी उन्होंने अपने इस वीडियो में दिखाया है. यहां देखें वीडियो.

‘चंबल’ बन गई राजधानी लखनऊ

डकैती के ज्यादातर किस्से ‘चंबल’ के ‘जंगलों’ और ‘बीहडों’ के ही सुनने को मिलते थे. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चंबल जैसे बीहड और जंगल भले न हों, पर डकैतों के कारनामें लोगो को दहला रहे हैं. अब तक लखनऊ की नवनिर्मित कालोनियों को अपना शिकार बनाने वाले डकैत अब शहर की सबसे पौश और सुरक्षित माने जाने वाली कालोनियों को अपना शिकार बनाने में सफल हो रहे हैं.

घर के मालिकों को बुरी तरह से मारपीट कर लहूलुहान करने के बाद उनके हाथ और पांव बांध कर कमरे में बद कर घर में लूट कर फरार हो जाते हैं. कई घटनाओं में तो घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी और गाली गलौज तक की जाती है. दो दिन के अंदर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की साउथ सिटी कालोनी और गोमती नगर कालोनी के विवेक खंड में डकैतों ने अपना हौसला दिखा कर पुलिस और प्रशासन को बौना साबित कर दिया है.

गोमतीनगर का विवकेखंड इलाका सबसे सुरक्षित माना जाता है. बिजली विभाग के रिटायर इंजीनियर गिरीश चन्द्र पांडेय के घर 2 घंटे तक डकैत घुस कर लूटपाट करते रहे. इन सबने गिरीश के साथ उनकी पत्नी, बेटे और बहू को मारपीट कर घायल कर दिया. गिरीश के घर के ठीक सामने रिटायर पुलिस महानिदेशक एमसी द्विवेदी का घर है. इससे पता चलता है कि यह जगह कितनी सुरिक्षत थी. इसके बाद भी डकैत साहस दिखाने में सफल रहे. डकैतों ने 8 लाख से अधिक की लूटपाट की.

गोमती नगर की ही तरह साउथ सिटी लखनऊ की दूसरी सबसे पौश कालोनी है. यहां एचएएल के चीफ सुपर वाइजर देवेन्द्र सिंह नेगी के घर डकैती पड़ गई. विरोध को देखते हुये राज्यमंत्री स्वाति सिंह यहां पहुंची. तो लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. गोमतीनगर में इसके पहले भी एसएम रिजवी और चमन लाल दिवाकर के घर डकैती पड़ चुकी है.

असल में डकैती की घटनायें शहरों में कम देखने को मिलती थी. हाल के कुछ दिनों में राजधानी लखनऊ ही नहीं वाराणसी और मथुरा तक में बड़ी डकैतियां पड़ चुकी हैं. मथुरा में डकैतों ने हत्या को भी अंजाम दिया था और वाराणसी में 12 करोड़ के सोने की लूट हुई. लखनऊ में पहले कई डकैतियां पड़ चुकी हैं. पुलिस दबाव में आकर आनन फानन में जो खुलासे करती है, वह पूरी तरह से सही नहीं होते. असल डकैतों के बच निकलने से उनके हौसले बुलंद हो जाते हैं. ऐसे में वह एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम देते हैं.

कानून व्यवस्था पर किसी भी तरह का समझौता न करने की घोषणा करने वाली योगी सरकार पूरी तरह से असफल हो रही है. पुलिस विभाग में तमाम तबादले करने के बाद भी प्रदेश की कानून व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है. सरकार के लोग इस तरह की घटनाओं को विरोधियों की साजिश मानकर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं. हकीकत यह है कि सरकार प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालने में असफल हो रही है. इससे साफ है कि अपराध रोकने की बात करने वाली सरकार अपराध रोक कर प्रदेश के लोगों को भयमुक्त माहौल देने में पूरी तरह से असफल हो रही है.

टॉप पेड ऐक्ट्रेस की लिस्ट में शामिल हुईं ‘बेहद’ की माया

टीवी शो 'सरस्वतीचंद्र' के बाद जेनिफर विंगेट टीवी पर बहुत ज्यादा नजर नहीं आईं. इसके बाद वह कई शो होस्ट करते दिखीं लेकिन किसी खास किरदार से सुर्खियां नहीं बटोरी. लेकिन अब जेनिफर ने सीरियल 'बेहद' से जबरदस्त कमबैक किया है. देखते ही देखते उन्होंने इस शो में अपने माया के किरदार से दर्शकों को दीवाना बना दिया है.

जेनिफर के लिए दर्शक ऐसे दीवाने बन गए कि वह और उनका शो ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. यह उनकी पॉप्युलैरिटी ही है कि शो की टीआरपी ने छलांग मारी और एक अलग ऊंचाई पर पहुंच गया यह शो.

अब खबरें आ रही हैं कि शो के हिट होते ही जेनिफर की फीस भी बढ़ गई है. कहा जा रहा है कि अब जेनिफर सबसे ज्यादा फीस पानेवाली टीवी ऐक्ट्रेसेस में शुमार हो चुकी हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की, जिसमें वह बिना बालों के नजर आ रहीं. हालांकि, उनका यह बदला हुआ लुक उनके शो का ही एक हिस्सा था.

रिपोर्ट की मानें तो इससे पहले जेनिफर को एक ऐपिसोड के लिए 80-85 हजार रुपए मिलते थे, लेकिन अब उनकी फीस बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी गई है.

दरअसल, कहा जा रहा है कि उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें कई अन्य चैनल और प्रोडक्शन हाउस से ऑफर आने लगे. इस डर से चैनल ने फौरन उनकी फीस बढ़ा दी और एक ऐपिसोड का एक लाख रुपए कर दिया.

 

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धोनी होंगे चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान!

आईपीएल का पहला संस्करण जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स और दो बार की चैंपियन चेन्नई सुपरकिंग्स पर लगा हुआ 2 वर्षों का प्रतिबन्ध समाप्त हो गया है. इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि यह दोनों टीमें 2018 में होने वाले आईपीएल के ग्यारहवें संस्करण में खेलेंगी.

चेन्नई सुपर किंग्स क्रिकेट लिमिटेड के डायरेक्टर के जॉर्ज जॉन ने कहा, 'अगर बीसीसीआई खिलाड़ियों को रिटेन (सुरक्षित रखने की) करने की अनुमति देती है तो हम धोनी को किसी भी हाल में रिटेन करना चाहेंगे.'

जॉर्ज ने कहा, “हालांकि पिछले साल राइजिंग पुणे सुपरजायंट के साथ करार के बाद हमने अब तक धोनी से बातचीत नहीं की है लेकिन हम भविष्य में उनसे जल्द संपर्क करेंगे. हम उसी सपोर्ट स्टाफ को भी टीम में लाने की सोच रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि प्रतिबंध समाप्त हो गया है और हमने सोशल मीडिया पर कुछ कार्यकलाप किये हैं. उन्होंने आगे यह भी कहा कि बैन के बावजूद सीएसके के ब्रांड पर कोई असर नहीं हुआ है और वे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को वापस लेकर आएंगे.

आपको बता दें कि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर 2 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था. जिसके बाद दोनों टीमें आईपीए-9 और आईपीएल-10 का हिस्सा नहीं बन सकी थीं. हालांकि इस बार दोनों टीमों की वापसी तय मानी जा रही है लेकिन बीसीसीआई को अभी ये तय करना है कि वो इस बार 8 टीमों के साथ जाएगी या फिर 10 टीमों के साथ.

किसने निभाया था 20 साल की उम्र में 80 साल के बुजुर्ग का किरदार

हम सभी लोग आलोक नाथ को बॉलीवुड की फिल्मों में संस्कारी बाबूजी के रूप में देखते आए हैं. सोशल मीडिया में भी आलोक नाथ को लेकर काफी चुटकुले चलते हैं. वे तो जैसे जग पिता कहलाने लगे हैं.

आज हम आपको अभिनेता आलोक नाथ के जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो शायद आप नहीं जानते होंगे. उनके निजि जीवन से जुड़े कुछ ऐसे फैक्ट्स जो आप इनके बारे में नहीं जानते होंगे…

नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के स्टूडेंट आलोक नाथ

आलोक नाथ दिल्ली में ही बड़े हुए हैं. उनकी एजुकेशन मॉडर्न स्कूल और हिंदू कॉलेज में हुई है. कॉलेज के दौरान थिअटर की ओर झुकाव होने पर वह नाटकों में भाग लेने लगे. बाद में, आलोक नाथ ने नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में ऐडमिशन ले लिया. कॉलेज के दिनों में उन्होंने कई नाटकों का डायरेक्शन भी किया था.

एकता कपूर की कैसी थी ये नाकाम कोशिश

एकता कपूर ने 'संस्कारी बाबूजी' की इमेज बदलने की कोशिश की थी. एकता अपनी अगली 'क्या कूल हैं हम' सीरीज की तीसरी फिल्म में आलोक नाथ को तुषार कपूर का फादर-इन-लॉ की भूमिका देना चाहती थीं. यह कैरक्टर आलोक नाथ की 'संस्कारी बाबूजी' की इमेज के एकदम विपरीत था. लेकिन आलोक नाथ ने फिल्म में डबल मीनिंग संवादों को देखते हुए यह फिल्म करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, 'मैंने ऐसा काम अपने पूरे करियर में कभी नहीं किया. अब अगर एकदम से मैं सेक्स कॉमिडी करने लगा तो मेरे प्रशंसकों को बहुत बुरा लगेगा.'

रोमांस भी करते हैं बाबूजी

फिल्मों में भारतीय संस्कारों की जानकारी और कन्यादान करने के अलावा आलोक नाथ ने रोमांटिक फिल्में भी की हैं. उन्होंने टीना मुनीम के साथ एक फिल्म की थी जिसमें वह उनके साथ बागों में गाने गाते देखे गए थे. इसके अलावा साल 1987 की एक फिल्म 'कामाग्नि' में आलोक नाथ ने कई लव मेकिंग सीन्स भी किए थे. एक इंटरव्यू में इस फिल्म के बारे में आलोक नाथ ने बताया, 'वो मेरे करियर की शुरुआती दौर था, तब मुझे पैसों की जरूरत थी इसलिए मैंने ऐसे रोल भी किए थे.'

आलोक ने जिंतेद्र के पिता के रोल के लिए कर दिया था इनकार

आलोक नाथ कई फिल्मों में पिता की भूमिका में दिखे हैं, लेकिन एक बार उन्होंने ऐसे ही एक रोल के लिए इनकार भी कर दिया था. उन्होंने बताया, 'मैंने ऐसे लोगों के पिता के रोल भी किए हैं जो उम्र में मुझसे बड़े थे. मैंने जैकी श्रॉफ और ऋषि कपूर के पिता का रोल भी किया है. मैंने कभी किसी फिल्म से इनकार नहीं किया सिवाय एक के जब 20-25 साल पहले मुझ मद्रास के एक प्रड्यूसर ने जितेंद्र के पिता का रोल ऑफर किया था.'

टीवी सीरियल 'बुनियाद' का यादगार रोल

हालांकि आलोक नाथ को कई सफल फिल्मों जैसे 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ-साथ हैं', 'ताल', 'विवाह', 'मैंने प्यार किया' में किए गए पिता के किरदारों के लिए याद किया जाता है लेकिन पहली बार उन्हें पहचान डीडी नेशनल के टीवी सीरियल 'बुनियाद' से मिली थी. साल 1986 में दूरदर्शन पर आने वाले इस शो में जब आलोक नाथ ने बुनियाद के हवेली राम का किरदार निभाया था, तब वे केवल 20 साल के थे, लेकिन जब यह सीरियल अपने अंत में आया था तो उनका किरदार 80 साल के बुजुर्ग व्यक्ति का था.

आलोक ने 500 फिल्मों से अधिक और 40 से 50 टीवी सीरियल्स में काम किया

आलोक नाथ ने अपने करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों और 40 से 50 टीवी सीरियलों में काम किया है. उन्होंने क्षेत्रीय भाषा बंगाली, राजस्थानी, तमिल फिल्मों में भी काम किया है. इसके अलावा वे नादिरा बब्बर के थिअटर ग्रुप में नाटक भी करते रहे हैं.

आलोक नाथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं

आलोक नाथ ने अपने फिल्मी करियर में अलग-अलग तरह के रोल किए हैं. संस्कारी बाबूजी के अलावा उन्होंने नेगेटिव रोल और एक रोमांटिक हीरों के किरदार भी निभाए हैं.

मैं अपनी बीवी की बहन से प्यार करता हूं. वह भी मुझ से प्यार करती है. अब हमें क्या करना चाहिए.

सवाल

मेरी मंगनी हो गई है, पर मैं अपनी मंगेतर की बहन से प्यार करता हूं. वह भी मुझ से प्यार करती है, पर उस की भी मंगनी हो गई है. अब हमें क्या करना चाहिए?

जवाब

आप दोनों को अपने प्यार का इजहार पहले ही कर देना चाहिए था, तब सीधे सीधे आप दोनों की ही मंगनी हो जाती. अभी चूंकि आप लोगों की शादी नहीं हुई है, लिहाजा घर वालों को सारी बातें बता दें, ताकि आप की शादी प्रेमिका से ही हो.

 

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भारतीय खिलाड़ियों के नाम है क्रिकेट के ये 10 अनोखे रिकॉर्ड्स

भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं धर्म है. भारत में क्रिकेट को जो स्थान प्राप्त है वह शायद ही किसी और देश में हो. क्रिकेट के लिए ऐसी दीवानगी बस भारत में ही देखी जा सकती है. और ये दीवानगी हो भी क्यों ना जब भारत ने क्रिकेट को कई ऐसे दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ढ़ेरों रिकार्ड्स बनाए हैं. ये रिकार्ड्स इतने लाजवाब हैं कि इन्हें भूला पाना मुम्किन नहीं. आईए नजर डालते हैं भारतीय खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए कुछ ऐसे ही रिकार्ड्स पर.

सचिन तेंदुलकर के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक

बात रिकॉर्ड्स की हो और सचिन की बात ना हो ये तो हो ही नहीं सकता. जब भी हम क्रिकेट के रिकार्ड्स की बात करते हैं तो सचिन का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतकों का ज्रिक जरूर होता है. इसके अलावा सचिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं. इतना ही नहीं 200 टेस्ट मैच खेलने वाले वो एकलौते खिलाड़ी हैं.

अनिल कुंबले का एक पारी में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड

भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले के नाम टेस्ट क्रिकेट में एक पारी के पूरे के पूरे 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड है. उन्होंने ये कारनामा 7 फरवरी 1999 को पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में किया था. उस मैच में पाकिस्तान की दूसरी पारी के 10 विकेट चटकाकर कुंबले ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा लिया. उनकी शानदार गेंदबाजी की बदौलत उस मैच में भारत ने पाकिस्तान को 212 रनों से मात दी थी. आपको बता दें इससे पहले एक पारी में 10 विकेट झटकने का रिकॉर्ड सिर्फ जिम लेकर के नाम था.

वीरेंद्र सहवाग का टेस्ट में सबसे तेज तिहरा शतक

वीरेंद्र सहवाग भारत के अकेले ऐसे बल्लेबाज रहे हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जड़ा है. उन्होंने ये कारनामा एक बार नहीं बल्कि दो बार किया है. लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरे शतक की. इस मामले में भी इस विस्फोटक बल्लेबाज का नाम सबसे ऊपर आता है. सहवाग के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. साल 2008 में सहवाग ने चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केवल 278 गेंदों पर तिहरा शतक लगाकर टेस्ट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक बनाया था.

युवराज द्वारा जड़े गए एक ओवर में 6 छक्के

2007 टी-20 विश्व कप में भारत बनाम इंग्लैंड मुकाबला और स्टुअर्ट ब्रार्ड के ओवर में स्ट्राइक पर सामने खड़े युवराज सिंह. ये दृश्य सभी भारतीय क्रिकेट फैन के दिल में बसा है. जी हां, हम बात कर रहे हैं युवराज सिंह के 6 गेंदों पर 6 छक्कों के रिकॉर्ड की. इसी मैच में युवराज ने टी20 क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक भी बनाया था. इस मैच में इन्होंने मात्र 12 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया था जो अंतर्राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में आज भी सबसे तेज अर्धशतक है.

पदार्पण खिलाड़ी के रूप में अजहरूद्दीन के 3 टेस्ट में 3 शतक

टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करते हुए शतक जड़ना किसी भी बल्लेबाज के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है. मगर अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में शतक लगाने की कल्पना तो शायद बल्लेबाज सपने में भी नहीं कर सकता. लेकिन भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन ने ये कारनामा कर दिखाया है. जी हां, अजहर ने 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में तीन शतक लगाकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार आगाज किया था.

धोनी के नाम है बतौर कप्तान तीनों प्रारुप में चैंपियन बनने का रिकॉर्ड

महेंद्र सिंह का शुमार क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में किया जाता है. ये वही कप्तान हैं जिसकी कप्तानी में भारत ने आईसीसी की सभी प्रमुख ट्रॉफियों पर अपना कब्जा जमाया. फिर बात चाहे 2007 टी-20 विश्व कप की हो, 2011 विश्व कप या फिर 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की. इन सभी खिताबों को टीम इंडिया ने धोनी की ही कप्तानी में जीता है. ऐसे में ये कहना गलत न होगा कि इन्होंने आईसीसी के सभी टूर्नामेंट अपनी कप्तानी में जीते हैं. ऐसा करने वाले ये दुनिया के एकलौते कप्तान हैं.

रोहित शर्मा के वनडे क्रिकेट में दो दोहरा शतक

एकदिवसीय क्रिकेट में जहां कई दिग्गज बल्लेबाजों के नाम एक भी दोहरा शतक नहीं होता वहीं भारत के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा दुनिया के एकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने वनडे में दो दोहरे शतक लगाए हैं. उन्होंने अपना पहला दोहरा शतक साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंग्लूरू के मैदान पर जड़ा था जबकि उनके बल्ले से दूसरा दोहरा षतक साल 2014 में श्रीलंका टीम के खिलाफ कोलकाता के ईडेन गार्डन्स के मैदान पर निकला. उस मैच में उन्होंने 264 रनों की विषाल पारी खेली थी जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा वनडे क्रिकेट का सर्वाधिक स्कोर भी है.

टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ ने खेली है सबसे ज्यादा गेंदे

भारत की दीवार के नाम से मशहूर दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंद खेलने वाले बल्लेबाज हैं. अपने टेस्ट करियर के दौरान उन्होंने 164 टेस्ट मैचों में कुल 31258 गेंदें खेलीं हैं जो एक विश्व रिकॉर्ड है.

बापू नादकर्णी का टेस्ट क्रिकेट में लगातार सबसे ज्यादा मेडन ओवर फेंकने का रिकॉर्ड

भारत के बाएं हाथ के स्पिनर बापू नादकर्णी को क्रिकेट इतिहास के सबसे कंजूस गेंदबाजों में गिना जाता है. नादकर्णी ने इंग्लैंड के खिलाफ 1963 में लगातार 21 मेडन ओवर डाले थें. उन्होंने अपने इस स्पेल में लगातार 131 डॉट बॉल फेंकी थी. उन्होने 32 ओवर में 27 मेडन सहित सिर्फ 5 रन खर्च किए थे.

रहाणे द्वारा एक टेस्ट में सबसे ज्यादा कैच लपकने का रिकर्ड

किसी एक टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा कैच लपकने का रिकॉर्ड भारत के अजिंक्य रहाणे के नाम है. साल 2015 में श्रीलंका के खिलाफ गाले में हुए टेस्ट मैच में रहाणे ने कुल 8 कैच लपके थे जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है.

गोद लिए बच्चों का दर्द

गोद लेना अच्छी बात है, पर अकसर देखा गया है कि जहां लड़कियों को गोद लिया जाता है, वहां पुरुष अभिभावक उन लड़कियों से बदतमीजी भी कर डालते हैं. अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश का एक मामला आया, जिस में एक पतिपत्नी ने 7 साल की बच्ची को रिश्तेदार से गोद लिया, पर कुछ ही दिन में पड़ोसियों को लगने लगा कि लड़की के साथ कुछ गलत हो रहा है, क्योंकि वह रोती थी तो पड़ोसियों को आवाजें आ जाती थीं.

पड़ोसियों ने पूछताछ भी की, पर उन्हें टाल दिया गया. पर एक दिन जब गोद लेने वाला उस की लाश ले जाता दिखा, तो पुलिस में शिकायत की गई. पोस्टमार्टम में छोटी लड़की पर कई घाव दिखे और पता चला कि गला घोंट कर उस की हत्या की गई थी. उस पर जलने के निशान भी थे. उस लड़की के साथ गुदा मैथुन भी होता था.

गोद लेने वाले को मौत की सजा तो नहीं मिली, पर 7 साल की मिली और यह पक्का हो गया कि जब तक वह बाहर आएगा तब तक न उस की बीवी बचेगी, न घर. अफसोस इस बात का है कि जिन लोगों को छोटे बच्चे अपनी छाया समझते हैं, वे ही उन के साथ गलत काम करते हैं और यह सारे देश में गरीबोंअमीरों सब जगह बुरी तरह हो रहा है. आमतौर पर डर के मारे छोटी बच्चियां चुप रह जाती हैं, क्योंकि उन्हें मालूम ही नहीं होता है कि उन के साथ जो किया जा रहा है, वह कितना गलत है.

इस वहशीपन को रोकने के लिए अकसर सख्त कानूनों की मांग की जाती है, पर यह न भूला जाए कि 7-8 साल की बच्ची कानून की पनाह में नहीं जा सकती. जरूरत तो इस बात की है कि सैक्स के भूखों को समझाया जाए, पर दुनिया में ऐसा कोई सबक नहीं लिखा गया है, जो हर लड़केआदमी को पढ़ाया जा सके.

बच्चों को प्यार और दुलार चाहिए और उस के बहाने उन से गलत काम के खिलाफ मुहिम चलनी चाहिए, जो लगातार लोगों को समझाए कि जैसे लोग आमतौर पर दूसरे की जेब पर डाका नहीं डालते, वैसे ही किसी लड़की, छोटी या बड़ी के साथ मनमानी नहीं की जा सकती. यह समझा जाता है कि इस का पाठ तो लोग खुदबखुद समझ लेंगे, जबकि ऐसा नहीं है.

देशभक्ति, राष्ट्रगान के समय खड़े होना, जय भारत बोलना वगैरह के नारे लगाने की जगह बच्चियों और औरतों को बचाएंगे, उन की इज्जत रखेंगे, उन्हें छेड़ेंगे नहीं के नारे लगने चाहिए. घरघर में यह पाठ पढ़ाना चाहिए, क्योंकि ये गुनाहगार घर के अंदर ज्यादा हैं, बाहर कम. गुनाह के बाद सख्त सजा देना उपाय नहीं है, गुनाह रोकना उपाय है.

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