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बेवफाई के ये तरीके जानकर आप अपने पति की असलियत जान सकती हैं

यूनाइटेड किंगडम के कु ल्युवेन विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में डा. मारटेन लारमूसीयू द्वारा किए एक अध्ययन में पाया गया कि यूके की 2% संतानें गैरपिता से उत्पन्न हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि इतने बड़े स्तर पर लोग बेवफाई में लिप्त क्यों हैं, जबकि बेवफाई, भावनात्मक व यौन विशिष्टता के संदर्भ में किए गए विवाह अनुबंध का उल्लंघन है?

वर्तमान समय में विभिन्न पत्रपत्रिकाओं द्वारा किए गए सर्वे भी इसी बात को इंगित करते हैं कि भारत में भी 25 से 30% विवाहित महिलाएं समयअसमय पर अपने पति के अतिरिक्त अन्य पुरुषों के साथ अपनी कामवासना शांत करती हैं. भले ही यह अतिशयोक्ति लगती हो, लेकिन सच को नकारा नहीं जा सकता. जो महिलाएं बहुत सीधीसादी व गंभीर दिखती हैं वे भी विवाहशादियों व सामाजिक मेलमिलाप के अवसरों पर अपने लिए किसी ऐसे व्यक्ति की खोज में रहती हैं, जो उन की कामवासना को दबेछिपे शांत कर सके.

अधिकतर लोग यह जानते हुए भी कि उन की पत्नियां उन के प्रति वफादार नहीं हैं, तो भी वे इस सत्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से कतराते हैं. कई लोग तो जानबूझ कर भी ऐसा सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि उन की पत्नी उन के प्रति पूरी वफादार है.

1950 के आरंभ में किंसे द्वारा जारी किए सर्वे में बताया गया था कि  विवाह पूर्र्व शारीरिक संबंधों की तुलना में विवाहेतर संबंधों की संख्या अधिक है. किंसे ने लिखा था कि उन के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देने वालों में से 50% विवाहित पुरुषों के तथा 25% विवाहित महिलाओं के विवाहेतर संबंध थे.

इसी प्रकार अमेरिका में यौन व्यवहार पर आधारित जेन्स द्वारा किए गए सर्वे में एकतिहाई विवाहित पुरुष और एकचौथाई महिलाओं का विवाहेतर संबंधों में लिप्त होना पाया गया था. बेवफाई पर सब से सटीक सूचना शिकागो विश्वविद्यालय में 1972 में किए गए एक अध्ययन से आई थी, जिस में 12% पुरुष और 7% महिलाओं ने विवाहेतर संबंधों में लिप्त होना स्वीकारा था.

मनोवैज्ञानिकों का विश्वास है कि व्यक्ति न तो पूरी तरह एकल विवाही है और न ही पूरी तरह बहुविवाही. मानव विज्ञानी हेलनफिशर के मुताबिक व्यभिचार के लिए कई मनोवैज्ञानिक कारण जिम्मेदार हैं.

कुछ लोग विवाह के उपरांत भी यौन संबंधों का अभाव पाते हैं, जिस कारण वे विवाहेतर यौन संबंध कायम कर लेते हैं. कुछ लोग अपनी यौन समस्या के समाधान हेतु तो कुछ अपनी ओर ध्यानाकर्षण के लिए भी विवाहेतर संबंध कायम कर लेते हैं. कुछ लोग प्रतिशोध लेने या विवाह संबंधों को और रोचक बनाने के लिए भी विवाहेतर संबंध कायम कर लेते हैं.

हेलनफिशन ने अपने शोध में व्यभिचार के लिए कुछ जैविक कारण भी बताए हैं. उन्होंने बताया है कि इनसान के मस्तिष्क में 2 प्रणालियां हैं. एक प्रणाली प्रेमालाप और लगाव से जुड़ी है, तो दूसरी पूर्णतया यौन आचरण से. कभीकभी दोनों प्रणालियों का तालमेल टूट जाता है, जिस के कारण बिना भावनात्मक लगाव के व्यक्ति यौन संतुष्टि प्राप्त करने में सक्षम नहीं होता.

सोशल मीडिया पर प्रतिदिन 18 लाख व्यक्ति केवल सैक्स चर्चा करते हैं. बेवफाई के प्रत्येक मामले में व्यक्ति का एक अलग उद्देश्य हो सकता है, लेकिन बेवफाई की मुख्यरूप से 5 श्रेणियां हैं-

अवसरवादी बेवफाई: अवसरवादी बेवफाई तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति समर्पित तो होता है, किंतु अपनी यौनेच्छा पूरी करने के लिए वह किसी अन्य से यौन संबंध स्थापित कर लेता है.

अनिवार्य बेवफाई: यह स्थिति तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति अपने धोखेबाज जीवनसाथी के प्रेम से पूर्णतया ऊब जाता है. तब उस के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह भी किसी अन्य के साथ यौन संबंध बनाए.

विरोधाभासी बेवफाई: यह स्थिति तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहता है, किंतु अपनी प्रबल यौनेच्छा के कारण समयसमय पर अन्य से भी यौन संबंध बनाता रहता है.

संबंधनिष्ट बेवफाई: यह स्थिति तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति अपने वैवाहिक संबंधों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहता है, लेकिन जीवनसाथी से कोई अपनत्व न मिलने के कारण वह किसी अन्य से यौन संबंध स्थापित कर लेता है.

रोमांटिक बेवफाई: यह स्थिति तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी से प्रतिबद्ध रहते हुए कई अन्य के साथ रोमांस करता रहता है.

लेकिन इन सभी प्रकार की बेवफाई हर हाल में दुष्परिणाम ही देती है. ऐसे संबंधों के उजागर होने पर बेइज्जती, आत्मग्लानी, मानसिक तनाव, पारिवारिक संबंधों में बिखराव, मुकदमेबाजी सहित और कई परेशानियां पैदा हो सकती हैं.

बेवफाई हर युग में होती रही है पर आज औरतों के अधिकार ज्यादा हैं. अत: वे ज्यादा रिस्क भी लेती हैं और बेवफाई करने वाले साथी को छोड़ती भी नहीं है. उचित यही है कि आप अपने जीवनसाथी के प्रति ईमानदार रहें. अगर कोई परेशानी है तो पहले तो कोशिश करें उसे बातचीत से हल किया जाए और बेवफाई को जीवन का अंत न समझा जाए. फिर विवाह विशेषज्ञों से बात करें. अलग रहने या तलाक लेने की बात तब करें जब साथी लगातार बेवफाई कर रहा हो.

मैं भी हूं सैल्फी क्रेजी : मोहिनी घोष

मोहिनी घोष जब एक साल की थीं, तब उन के फोटो को ‘फैरैक्स बेबी’ के प्रचार के लिए चुना गया था. उन्होंने बंगला फिल्मों में लंबे समय तक काम किया है. 17 साल की उम्र में वे ‘मिस कोलकाता’ बनी थीं. बाद में वे बंगला फिल्मों के साथसाथ हिंदी व भोजपुरी फिल्में भी करने लगी थीं. बाल विवाह पर बनी हिंदी फिल्म ‘एक नई सुबह’ में उन की ऐक्टिंग को बहुत सराहा गया था. पेश हैं, मोहिनी घोष के साथ हुई बातचीत के खास अंश:

आप की भोजपुरी फिल्मों में शुरुआत कैसे हुई थी?

मुझे साल 2012 में भोजपुरी फिल्म में काम करने का मौका मिला था. तब से अब तक मैं 15-20 भोजपुरी फिल्में कर चुकी हूं. मुझे हमेशा साफसुथरी फिल्में करने में मजा आया है. फिल्म ‘औरत खिलौना नहीं’ में मेरे काम को काफी पसंद किया गया था. अब मैं हर तरह की फिल्में करती हूं.

मुझे भोजपुरी बोली सुनने में बहुत अच्छी लगती है. ऐसे में जब मुझे भोजपुरी फिल्म का औफर मिला, तो मैं ने उस में काम करना स्वीकार कर लिया. ‘दिल हो गईल तोहार’, ‘औरत खिलौना नहीं’, ‘दुलारा’ और ‘हुकूमत’ जैसी फिल्मों से मुझे यहां नई पहचान मिली है. यह बात और है कि मैं शूटिंग खत्म करते ही वापस अपने शहर कोलकाता चली जाती हूं.

भोजपुरी फिल्मों पर फूहड़पन के बहुत आरोप लगते हैं. आप की राय क्या है?

अब इन में सुधार हो रहा है. यहां भी अच्छी फिल्में बनने लगी हैं. समाज में हर तरह की फिल्म के लिए दर्शक हैं. यह तो फिल्म बनाने वाले को तय करना होता है कि वह किन दर्शकों के लिए फिल्म बना रहा है.

भोजपुरी फिल्मों का दर्शक वर्ग काफी बड़ा है. ज्यादातर लोग मेहनतकश हैं, जो केवल मनोरंजन के लिए फिल्में देखते हैं. यहां के लोग शारदा सिन्हा को भी सुनते हैं और गुड्डू रंगीला को भी. केवल भोजपुरी फिल्मों की बात नहीं है, बल्कि हिंदी फिल्मों में भी फूहड़पन कम नहीं होता है. काफीकुछ तो लोगों की सोच पर भी निर्भर करता है. केवल सैक्स और खुलेपन से फिल्में नहीं चलती हैं.

क्या बंगला बोलने वाले कलाकारों को भोजपुरी बोलने में परेशानी आती है?

मैं तो भोजपुरी अच्छी तरह बोल लेती हूं. मैं अपनी फिल्मों की डबिंग भी खुद करती हूं. हां, कई मुश्किल शब्दों के मतलब मुझे पूछने पड़ते हैं, पर मुझे भोजपुरी बोलना अच्छा लगता है.

भोजपुरी फिल्मों में क्या नया बदलाव आया है?

भोजपुरी फिल्मों की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है. यहां के दर्शक पहले से ज्यादा समझदार हो चुके हैं. वे अच्छी फिल्में ही देखते और समझते हैं. मैं इन में हर तरह के रोल कर रही हूं. मेरी फिल्मों के किरदार हर रंग वाले होते हैं, जिस की वजह से मुझे दर्शकों का बहुत प्यार मिला है . मुझे इन फिल्मों में काम कर के ही उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों से जुड़ने और उन की भावनाओं को समझने का मौका मिला है.

आप के परिवार में से कोई भी फिल्मों से नहीं जुड़ा है. क्या कभी आप का विरोध नहीं हुआ?

बंगाली परिवारों में औरतों व लड़कियों को काम करने की आजादी होती है. मैं बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में आ गई थी. इस से न तो मुझे और न ही मेरे परिवार को कुछ अलग लगा. हम लोग इस सब को ले कर पूरी तरह से सहज थे.

मेरा परिवार नौकरीपेशा है. केवल मैं ही फिल्मों में हूं. अभी मैं फिल्म डायरैक्शन की पढ़ाई कर रही हूं.

आप को ऐक्टिंग के अलावा और क्याक्या पसंद है?

मुझे ऐक्टिंग के साथसाथ खाना बनाना, खिलाना, दोस्तों से बात करना और गरीब लोगों के बीच समय गुजारना पसंद है. मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है. मुझे खुद के फोटो खींचने का शौक है. मोबाइल फोन में सैल्फी कैमरा आने से मेरा यह शौक और भी ज्यादा बढ़ गया है.

छुआछूत के शिकार दलितों की ये कहानियां सोचने पर मजबूर कर देंगी

देश के नेता जब बड़े मंचों से बुलंद आवाज में दलितों के हित की बात करते हैं, तो लगता है कि जैसे बदलाव की बयार चल रही है. उम्मीदों के चिराग रोशन हो रहे हैं. सत्तारूढ़ दल का ‘सब का साथ, सब का विकास’ नारा भी उम्मीदों को चार चांद लगा देता है.

तसवीर कुछ इस अंदाज में पेश होती है, जैसे समाज में बराबरी आ रही है. दलित तबका अब अनदेखा नहीं है और उस की जिंदगी में खुशियां दस्तक दे रही हैं.

यह सपने सरीखा हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी नहीं है. जातिवाद और छुआछूत की बीमारी ने 21वीं सदी में भी अपने लंबे पैर पसार रखे हैं. इस पर शर्मनाक बात यह है कि रूढि़वाद के बोझ से लोग निकलने को तैयार नहीं हैं. यों तो संविधान में सब को बराबरी का हक है. कोई दिक्कत आए, तो इसे लागू कराने के लिए सख्त कानून भी बने हुए हैं, इस के बावजूद गैरबराबरी धड़ल्ले से जारी है.

18 अप्रैल, 2017 का ही एक मामला लें. उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के कोतवाली इलाके में एक दलित के यहां शादी समारोह में बरातियों के पीने के लिए फिल्टर पानी के जार मंगवाए गए. सप्लायर वहां पहुंचा, तो उसे जाति का पता चल गया. इस से पानी के अछूत होने का भयानक डर पैदा हो गया. लिहाजा, सप्लायर जार वापस ले जाने लगा.

इस पर दलित भड़क गए और नौबत मारपीट तक आ गई. पुलिस पहुंची और मामला समझौते से निबट गया, लेकिन बात क्या सिर्फ इतनी सी थी? जालौन जिले के झांसीकानपुर हाईवे के नजदीक गिरथान गांव में 16 अप्रैल को मोटा चंदा इकट्ठा कर के सामूहिक भंडारा कराया गया. गांव के दलितों से भी इस के लिए चंदा वसूला गया था.

भोज चल ही रहा था कि इसी बीच कुछ दलित नौजवानों ने भी भोज परोसने के लिए पूरियों की टोकरियां उठा लीं.

बस, इस बात पर दबंगों की त्योरियां चढ़ गईं. उन्होंने सोचा कि शायद चंदा देने के बाद ये बराबरी के भरम के शिकार हो गए हैं. दलितों को वहीं बेइज्जत किया गया. उन्होंने न सिर्फ खाना खाने से इनकार कर दिया, बल्कि दलितों को अलग बिठाने को भी कहा.

दलितों ने इस का विरोध किया, तो झगड़ा हो गया. इतने पर भी शांति नहीं हुई, तो दबंगों ने फरमान जारी कर दिया कि दलितों का बहिष्कार किया जाए. इस फरमान को तोड़ने वालों पर एक हजार रुपए जुर्माना लगाने के साथ ही सरेआम 5 जूते भी मारे जाएंगे.

गांव में बाल काटने की 2 दुकानें थीं. एक ने झगड़े के चक्कर में दुकान बंद कर दी और दूसरे ने दलितों के बाल काटने से इनकार कर दिया. दूसरे दुकानदारों ने भी उन्हें जरूरत का सामान देना बंद कर दिया. ट्यूशन पढ़ाने वाले एक नौजवान ने दलितों के 5 बच्चों को ट्यूशन आने से रोक दिया.

बात अफसरों तक पहुंची. वे भी समझाने के सिवा कुछ नहीं कर सके. आखिरकार दलितों को ही झुकना पड़ा.

दलित बुजुर्ग तुलाराम के मुताबिक, कुएं से पानी भरने से ले कर दूसरी कई बातों में दलित भेदभाव के शिकार रहे हैं. साल 1952 में जब वे 5 साल के थे, तब से यही सब देख रहे हैं.

इसी तरह हाथरस जिले के छीतीपुर गांव में कुछ दलित सार्वजनिक जगह पर हो रही भागवत कथा सुनने के लिए बैठ गए, जिस का आयोजन जाति विशेष के लोगों द्वारा कराया जा रहा था. दलितों को देख कर वे भड़क गए और उन पर आयोजन को अछूत करने का आरोप लगा कर गालीगलौज की. विरोध करने पर उन के साथ मारपीट कर दी गई.

इस घटना में 6 दलित घायल हो गए थे. बाद में कई नेता हमदर्दी का मरहम लगाने वहां पहुंचे, लेकिन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग करने से वे हिचक रहे थे.

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के लोयन गांव का मामला लें. यहां दबंगों को सार्वजनिक नल से दलितों के पानी ले जाने पर एतराज था. रोक लगाने पर दलितों ने विरोध किया, तो बदले में उन्हें गालियां खानी पड़ीं. इतना ही नहीं, दलितों को कई तरह की पाबंदियों का फरमान सुना दिया गया. प्रशासन के दखल से मामला सुलझाया गया.

इसी तरह उत्तराखंड के जयरामपुर गांव में दलितों को अछूत होने के चलते सरकारी नल से पानी लेने से रोक दिया गया. इस की शिकायत तो की गई, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकला.

चंदौसी के गांव गंगुरा में भी खेतों पर घास काटने गई चरन सिंह की 13 साला बेटी सुधा एक मंदिर में लगे नल पर पानी पीने के लिए चली गई, लेकिन पुजारी और वहां बैठे लोगों ने उसे पानी नहीं पीने दिया. चरन सिंह इस बात का विरोध जताने पहुंचा, तो उस के साथ मारपीट की गई.

इलाहाबाद के पुरखास गांव की रहने वाली एक किशोरी को दबंग नौजवान ने ऐसी सजा दी, जिसे वह शायद ही कभी भूल पाए. ये दबंग आमतौर पर पिछड़ी जातियों के थे, जो जमींदारी खत्म होने से पहले दलितों सी हालत में थे और उन के साथ ठाकुरब्राह्मण बैठ कर खाना नहीं खा सकते थे. अब वे अपने को ठाकुरब्राह्मण साबित करने में लग गए हैं.

दलित समुदाय के संगमलाल की बेटी सुशीला खेत पर घास काटने गई थी. इस दौरान उस ने एक दबंग के खेत में शकरकंद के पौधे की पत्तियां भी काट लीं. एक दलित लड़की द्वारा अपने खेत की पत्ती काटने पर गुस्से से तिलमिलाए दबंग के बेटों ने दरांती छीन कर उस के दाएं हाथ की 2 उंगलियों पर वार कर दिया.

इस हैवानियत का पता जब गांव वालों को चला, तो उन्होंने आरोपियों के पिता को पकड़ कर पीट दिया. मामला पुलिस तक पहुंच गया. सुशीला का बड़े अस्पताल में उपचार कराया गया. इस घटना से दबंगों की नजर में दलितों की हैसियत का अंदाजा लगाया जा सकता है.

दलित चिंतक चाहते हैं कि ऐसी सामाजिक बुराई के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की जानी चाहिए. संवैधानिक हकों को मारने वालों के खिलाफ कानून का कड़ाई से पालन हो और उस में डर पैदा हो.

हालांकि दलितों की भलाई के लिए कई तरह के कानून बने हैं, पर कागजी और कानूनी हकों को दबंग सामाजिक तौर पर देने को आज भी तैयार नहीं हैं. बात सिर्फ कानून बनाने से हल होती नहीं दिखती, बल्कि इस के लिए सामाजिक पहल की भी जरूरत है.

दुखी दलित ने खोद दिया कुआं

एक दलित की बीवी ऊंची जाति वाले पड़ोसियों के कुएं से पानी लेने गई, तो उन्होंने छुआछूत की बात कह कर ताने मारे और उसे बेइज्जत कर के लौटा दिया. अमनपसंद पति ने अपने ही अंदाज में जवाब देने की ठान ली. एक दिन उस ने जातिवाद को ऐसा करारा जवाब दिया कि सब हैरान रह गए.

महाराष्ट्र के वाशिम जिले के ताजणे का दिल पत्नी की बेइज्जती से बहुत दुखी हुआ. उस ने एक महीने से ज्यादा की गई मेहनत के बाद बिना किसी की मदद से अपना ही कुआं खोद दिया. ताजणे 8 घंटे की मजदूरी कर के घर आने के बाद हर रोज तकरीबन 6 घंटे खुदाई करता था. जब वह कहता था कि दलितों के लिए अलग कुआं बना रहा है, तो लोग उस का मजाक बनाते थे, लेकिन उस ने इस की परवाह नहीं की. एक दिन ऐसा आया कि कुएं से पानी निकला, तो सब हैरान रह गए.

दलितों की खुशियों पर पहरा

आलम यह है कि दलितों की खुशियों पर भी दबंगों का पहरा होता है. उन के हिसाब से दलितों को उन के सामने खुशियां मनाने की इजाजत नहीं होती. ठीक वैसे जैसे पहले पिछड़ों यानी शूद्रों को खुशियां मनाने पर पाबंदी थी. हां, वे नौकर थे, पर अछूत नहीं.

अब दलितों की शादियों में बैंडबाजे बजने और दूल्हों के घोड़ी पर बैठने पर दबंग एतराज करते हैं. ऐसा करने की कोशिश में उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है. मध्य प्रदेश के मालवा जिले में माना गांव के चंदेर की बेटी की शादी थी. चंदेर ने बैंड पार्टी बुलवा ली. यह बात ऊंची जातियों के दबंगों को नागवार गुजरी. उन्होंने उसे सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी. इस के बावजूद बैंडबाजा बजा, तो दलितों ने खुशियां मनाईं.

दलित की बेटी की शादी में बैंडबाजा बजने से दबंग बुरी तरह नाराज हो गए. बदला लेने के लिए उन्होंने दलितों के कुएं में मिट्टी का तेल डाल दिया.

इसी तरह राजस्थान के जयपुर के हसनपुरा गांव में एक दलित के घोड़ी पर बैठने को ले कर दबंग भड़क गए. झगड़ा बढ़ गया, तो दलितों ने पुलिस में फरियाद कर दी. इस बात से नाराज हो कर दबंगों ने शादी के घर में काम आ रही पानी की टंकी में जहरीली चीज मिला दी, जिस से तकरीबन एक दर्जन लोग बीमार हो गए.

फिरोजाबाद के एक गांव में दबंगों ने दलितों की बरात रोक दी. काफी मिन्नतों के बाद भी उन्होंने दलित को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया. दरअसल, ऊंची जाति के गुमान में रहने वाले दबंग नहीं चाहते कि दलित गांवों में उन की बराबरी कर के खुशियां मनाएं.

इन आसान उपायों से भीनीभीनी खुशबू से महकेगा आपका आशियाना

अगर आप का घर साफ नहीं, तो दुर्गंध आना स्वाभाविक है. इस की वजहें पुराने कारपेट, फफूंद लगी दीवारें, पालतू जानवर, डस्टबिन का अच्छी तरह साफ न होना, कपड़ों का धूप में सही तरह न सूखना आदि हैं. नमी वाले मौसम में तो दुर्गंध दोगुनी हो जाती है. ऐसे में घर की सफाई के साथसाथ उस की दुर्गंध निकालने के बारे में भी सोचना आवश्यक है.

कई बार ऐसा होता है कि घर तो साफ है, लेकिन दुर्गंध आप को परेशान करती है. ऐसे में अरोमायुक्त कैंडल, धूप और अगरबत्तियां आप को दुर्गंध से बचा सकती हैं. आजकल बाजार में तरहतरह के स्प्रे भी मिलते हैं, जो दुर्गंध को आसानी से हटा देते हैं, लेकिन इन का नियमित उपयोग सही नहीं होता. ऐसे में प्राकृतिक अरोमा युक्त कैंडल या धूप दुर्गंध दूर करने का अच्छा विकल्प होती हैं.

इस बारे में मुंबई के डिजाइन एमएफ के इंटीरियर डिजाइनर स्वप्निल मोरे बताते हैं कि पहले इंटीरियर के लिए लकड़ी का फर्नीचर ट्रैंड में था, जिसे बीचबीच में पौलिश करवाना पड़ता था, लेकिन आजकल लैमिनेट फर्नीचर अधिक चलता है, जिसे साफ करना आसान होता है और उस में नमी भी अधिक जमा नहीं होती, जिस से किसी प्रकार की स्मैल नहीं आती.

दुर्गंध दूर करने के टिप्स

पेश हैं, घर की दुर्गंध दूर करने के कुछ टिप्स:

  • सब से जरूरी है घर में वैंटिलेशन का सही होना ताकि गंध बाहर निकल सके. घर के खिड़कीदरवाजों को ऐसे खोलें ताकि क्रौस वैंटिलेशन हो और स्मैल घर से निकल जाए.
  • सुगंधयुक्त अगरबत्तियां, पौटपूरी, स्प्रे आदि का प्रयोग कमरों में ही करें. इन का किचन में प्रयोग न करें.
  • कारपेट को फ्रैश बनाने के लिए उस पर रोजाना प्रयोग में लाने वाले पाउडर का छिड़काव कर वैक्यूम क्लीनर से साफ करें. इस से कारपेट साफ होने के साथसाथ महकेगा भी.
  • कपड़ों की दुर्गंध को हटाने के लिए उन्हें धोने के बाद फैब्रिक रिफ्रैशर का प्रयोग करें. ऐसा करने से कपड़े मुलायम होने के साथसाथ सुगंध भी बिखेरेंगे.
  • दुर्गंध को दूर करने के लिए फर्नीचर को समयसमय पर पौलिश करवाती रहें.
  • बिस्तर, कपड़ों, बाथरूम आदि जगहों पर फिनाइल की गोलियों का प्रयोग करने से दुर्गंध कम हो जाती है.
  • घर के लिए फ्रैगरैंस लैवेंडर, लैमन, क्लोव आदि लेनी सही होती है. इस से दुर्गंध आसानी से चली जाती है.

घरेलू उपाय

घर की दुर्गंध को भगाने के लिए कुछ घरेलू नुसखे भी अपनाए जा सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • अलमारी में नीम की पत्तियां रखें. ऐसा करने से कपड़ों से फफूंद की दुर्गंध दूर हो जाएगी.
  • नीबू को 2 टुकड़ों में काट कर एक कटोरी में रख कर घर के किसी कोने में रखें.
  • थोड़ी मात्रा में कपूर को प्लेट में रख कर जला लें और घर के खिड़कीदरवाजे बंद रखें. कपूर के पूरी तरह जल जाने के बाद खिड़कीदरवाजे खोल दें.
  • घर पर खुद पौटपूरी बनाने के लिए किसी भी मनपसंद फूल की पंखुडि़यों को थोड़े पानी में उबाल लें. ऐसा करने पर उन की महक पूरे घर में फैल जाएगी. फूलों के अलावा संतरे के छिलके, दालचीनी के टुकड़ों, लौंग आदि का भी प्रयोग किया जा सकता है.

शादी से पहले मैं रोजाना हस्त मैथुन करता था. अब मैं ठीक से हम बिस्तरी नहीं कर पाता हूं. मुझे क्या करना चाहिए.

सवाल
मेरी शादी को डेढ़ साल हो गए हैं. शादी से पहले मैं रोजाना हस्त मैथुन करता था. लिहाजा, अब मैं ठीक से हम बिस्तरी नहीं कर पाता हूं. मैं ने महसूस किया है कि अगर मैं 4-5 दिन कम खाना खाऊं, तो हम बिस्तरी ठीक से कर पाता हूं, पर भरपेट खाने के बाद ऐसा नहीं होता. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
सच तो यह है कि कम या ज्यादा खाने या हस्त मैथुन करने से हम बिस्तरी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. आप अच्छी तरह फोर प्ले कर के हम बिस्तरी करें, तो जरूर कामयाब होंगे. धीरेधीरे आप इस काम में माहिर हो जाएंगे. वैसे, कम खाना खाने में हर्ज नहीं है.

डांट डपटकर पढ़ाने के वीडियो में रोती हुई बच्ची इस बौलीवुड गायक की है भांजी

पिछले दिनों एक बच्‍ची का वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक बच्‍ची बुरी तरह रो रही थी और वीडियो में उसकी मां उसे डांट रही थी. यह वीडियो सिर्फ वाट्सएप ग्रुप्‍स पर ही नहीं बल्कि अन्य सोशल प्लेटफार्म पर भी शेयर किया गया था. विराट कोहली, शिखर धवन जैसे कई क्रिकेटर्स और सेलेब्रिटीज द्वारा भी इसे शेयर किया गया. कई लोगों ने इस वीडियो में बच्‍ची के साथ हो रहे व्‍यवहार और महिला की खूब आलोचना की और बच्‍ची के परिवार वालों को काफी बुरा भला भी कहा, साथ ही बच्‍ची के परिवार को संयम से काम लेने की सलाह भी दी थी. विराट कोहली ने लिखा था कि इस तरह से पढ़ाना बेहद दुखी करने वाला है, इससे कोई भी बच्चा कुछ नहीं सीख पाएगा.

लेकिन अब खुलासा हुआ है कि इस वीडियो में रो रही बच्ची बौलिवुड सिंगर तोशी और शारिब साबरी की भांजी है. इस बच्ची का नाम हया है. सारिब के इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस बच्ची के और भी कई सारे वीडियो पोस्‍ट किए गए हैं.

एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए गायक तोशी ने इस वायरल वीडियो पर कहा कि, ‘ विराट कोहली और शिखर धवन हमारी बच्ची के बारे में नहीं जानते हैं. हमें पता है कि वह कैसी है, उसका नेचर वैसा है, एक पल पढ़ती है तो अगले पल खेलने चली जाती है. अगर आप उसे छोड़ दो तो वह कहेगी की मैं मजाक कर रही थी.’ तोशी ने अपने इस बयान में कहा है कि वह अभी 3 साल की है और यह कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसा हर घर में होता है.’ एक मां कि ममता पर आप जजमेंट नहीं कर सकतें.

ये वीडियो वाट्सएप फैमिली ग्रुप से वायरल हुआ है. जहां बच्ची की मां अपने पति को वीडियो के जरिए बताना चाह रही थी कि बच्ची बहुत जिद्दी हो गई है. तोशी ने कहा, ‘हमारे परिवार को बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि ये वीडियो इतना वायरल हो जाएगा.

महंगी हो सकती हैं कारें, खरीदना चाहते हैं तो जल्दी करें

अगर आप महंगी कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो जल्द ही खरीद लें कार क्योंकि जीएसटी परिषद ने पहले ही एसयूवी, मध्यम आकार व बड़ी एवं लक्जरी कारों पर उपकर (सेस) की दर को मौजूदा 15% से बढ़ाकर 25% करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. आज कैबिनेट की बैठक में सरकार द्वारा इस पर मुहर लगाने की संभावना है. सेवाकर लागू होने के बाद गाड़ियां सस्ती हुई थीं.

आपको बता दें कि आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक है. इस बैठक में कई अहम फैसले लिये जा सकते हैं. चर्चा है कि इस बैठक के बाद महंगी गाड़ियां खरीदना और महंगा हो जायेगा.

गौरतलब है कि जीएसटी के तहत कारों को उच्चतम दर 28% कर की श्रेणी में रखा गया है. इस वर्ग में वस्तुओं व सेवाओं पर 1-15% तक का सेस भी लगाया गया है, ताकि उससे प्राप्त आय के जरिये जीएसटी में राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके. नई व्यवस्था के तहत एसयूवी और बड़ी कारों पर सेस की दर बढ़ा दी गयी है.

इस मामले पर वित्त मंत्रालय ने भी बयान जारी करते हुए कहा था जीएसटी के बाद कारों पर कुल कर (जीएसटी और सेस मिलाकर) जीएसटी से पहले वाली व्यवस्था के मुकाबले शुल्क कम हो गया था. जीएसटी परिषद ने 5 अगस्त को हुई अपनी 20वीं बैठक में इस मसले विचार किया और केंद्र सरकार से सिफारिश की कि वह 8702 और 8703 शीर्षक के तहत आने वाले मोटर वाहनों पर अधिकतम सेस मौजूदा 15% से बढ़ाकर 25% करने के लिए विधायी संशोधन करने का प्रस्ताव रखा, जिसे उसी दिन सरकार ने मंजूरी दी थी.

8702 और 8703 शीर्षकों के तहत आने वाले मोटर वाहनों में मध्यम श्रेणी, बड़ी कार, एसयूवी और 10 से ज्यादा, लेकिन 13 से कम लोगों के बैठाने की क्षमता वाले वाहन आते हैं. साथ ही, 1500 सीसी से अधिक क्षमता के इंजन वाले हाइब्रिड वाहन तथा 1500 सीसी से कम इंजन के मध्यम दर्जे की हाइब्रिड कारें भी इसमें शामिल हैं.

आटोमोबाइल सेक्टर नाराज

जीएसटी लागू होने से टैक्स में आई कमी के कारण आटोमोबाइल कंपनियों ने अधिकतर बड़ी कारों और SUV के प्राइसेज में 1.1 लाख से 3 लाख रुपये तक की कमी की थी. अब सरकार की सेस बढ़ाने की योजना से ये कंपनियां नाराज हैं और उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद प्राइस में कमी की गई थी और अब इन्हें बढ़ाना पड़ सकता है.

मिड साइज कारों, बड़ी कारों और SUV पर जीएसटी रेट 28 पर्सेंट का है. इस पर 15 पर्सेंट सेस लगने से कुल टैक्स 43 पर्सेंट होता है. अगर सेस को बढ़ाया जाता है तो कुल टैक्स 53 पर्सेंट पर पहुंच सकता है. हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि 25 पर्सेंट की सीमा है और सेस में बढ़ोतरी इससे कम हो सकती है. जीएसटी से पहले मिड-साइज सेडान पर टैक्स लगभग 47 पर्सेंट और SUV पर 55 पर्सेंट से अधिक था.

मैं 25 वर्षीय युवती हूं. मेरे बाल बहुत झड़ते हैं. कोई ऐसा घरेलू उपाय बताएं जिस से बालों का झड़ना रुक जाए.

सवाल
मैं 25 वर्षीय युवती हूं. मेरे बाल बहुत झड़ते हैं. कोई ऐसा घरेलू उपाय बताएं जिस से बालों का झड़ना रुक जाए?

जवाब
बालों के झड़ने के पीछे खराब जीवनशैली, संतुलित व पौष्टिक आहार का अभाव, प्रदूषित वातावरण व हारमोनल बदलाव जैसे अनेक कारण होते हैं. कईर् बार बाल आनुवंशिक कारणों से भी झड़ते हैं, साथ ही किसी प्रकार की शारीरिक बीमारी या दवा का सेवन भी बालों के झड़ने का कारण हो सकता है. पहले आप अपने बालों के झड़ने का कारण जानें. फिर उस के अनुसार उपाय करें.

घरेलू उपाय के तौर पर आप बालों को झड़ने से रोकने के लिए उन की सप्ताह में एक बार हेयर औयल से मसाज करें और उन में दही लगाएं. झड़ते बालों को रोकने के लिए दही बहुत ही कारगर घरेलू नुसखा है. दही से बालों को पोषण मिलता है. बालों को धोने से कम से कम 30 मिनट पहले उन में दही लगाएं. जब दही सूख जाए, तो बालों को धो लें.

एक अन्य उपाय के तौर पर आप कुनकुने औलिव औयल में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच दालचीनी पाउडर मिला कर पेस्ट बनाएं और नहाने से पहले इस पेस्ट को बालों पर लगाएं. 1 घंटे बाद शैंपू कर लें. इस से बालों का गिरना कम होगा.

झड़ते बालों को रोकने के लिए मेथीदाने का पैक भी एक बेहतरीन उपाय है. इस के अलावा अपने दैनिक आहार में प्रोटीन और आयरनयुक्त पदार्थ अधिक मात्रा में शामिल करें. प्रोटीन और आयरन सिर की त्वचा के ऊतकों के पुनर्निर्माण और कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करने में मदद करते हैं, जिस से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और उन का झड़ना रुक जाता है.

WhatsApp पर आ गया है ये नया फीचर, आपने देखा क्या

मैसेजिंग ऐप वाट्सऐप में आए दिन कुछ ना कुछ नया अपडेट होते रहता है. वाट्सऐप ने अपने iOS और ऐंड्रायड यूजरों के लिए नया फीचर लान्च कर दिया है.

जानना चाहते हैं पढ़े जा चुके मैसेज के लिए दो ब्लू टिक के अलावा क्या-क्या ऐड हुआ है आपके फेवरिट ऐप वाट्सऐप में? तो पढ़ें यह पूरी खबर और जानें वाट्सऐप से जुड़े ये काम के टिप्स और ट्रिक्स.

कलर्ड टेक्स्ट स्टेटस अपडेट

अब आप वाट्सऐप पर फेसबुक जैसे रंगीन बैकग्राउंड वाले स्टेटस अपडेट डाल सकते हैं. कलर्ड स्टेटस डालने के लिए आपको स्टेटस टैब पर जाना होगा. दाईं तरफ कैमरे के ऊपर पेन का आइकन है. उसपर टैप करने पर आपको यह कलर्ड स्टेटस डालने का आप्शन मिलेगा. नीचे की तरफ एक कलर पैलट और टेक्स्ट का फान्ट सिलेक्ट करने का विकल्प नजर आएगा. इनके साथ स्माइली लगाने का भी आप्शन होगा.

अभी यह अपडेट पूरी तरह रोलआउट नहीं हुआ है, इसलिए संभव है कि आपके डिवाइस तक पहुंचने में इसे कुछ वक्त लगे.

वाट्सऐप टेक्स्ट को करें फार्मेट

वाट्सऐप पर आप पहले भी टेक्स्ट को बोल्ड या इटैलिक कर सकते थे, उसका रंग बदल सकते थे, लेकिन अब यह और भी आसान हो गया है. टेक्स्ट में जिस शब्द को बोल्ड करना चाहते हैं उसपर देर तक प्रेस कीजिए ऊपर आप्शनों में 3 डाट दिखेंगे. उनपर टैप कीजिए, और ये सभी आप्शन आपके सामने होंगे.

वाट्सऐप पर ऐसे सर्च करें ईमोजी

वाट्सऐप पर आप अब किसी शब्द को लिखकर उससे जुड़े ईमोजी ढूंढ सकते हैं. मसलन इस तस्वीर में क्राइंग लिखकर ढूंढने पर आंसू वाले सभी ईमोजी दिखने लगे. ईमोजी के नीचे सर्च का आइकन नजर आएगा. वहां जाकर आप ईमोजी ढूंढ सकेंगे.

जानें कब पढ़ा गया आपका मैसेज

आपका मैसेज पढ़ा गया है या नहीं, ये तो ब्लू टिक बता ही देता है. लेकिन कभी-कभी यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि उसे कब पढ़ा गया. आपका मैसेज कब पढ़ा गया यह जानने के लिए उस मैसेज पर टैप कर होल्ड कीजिए और फिर इन्फो पर टैप कीजिए. आपको पता चल जाएगा कि उस मैसेज को कब पढ़ा गया. आईओएस में भी आप मैसेज को टैप कर बाईं तरफ ड्रैग करे तो जान सकेंगे कि उसे एग्जैक्ट किस वक्त पर पढ़ा गया.

चैट्स के लिए शार्टकट क्रिएट करें

आपको सिर्फ उस चैट को टैप कर होल्ड करना है जिसका शार्टकट आप चाहते हैं और पौप अप मेन्यू से ऐड कान्वर्सेशन शार्टकट को चुनना है. अब यह चैट आपकी होमस्क्रीन पर दिखने लगेगी. अपने हिसाब से उसे ड्रैग कर अजस्ट कर लें.

एकसाथ भेजें मैसेज

कई बार आप कई सारे लोगों को एकसाथ मैसेज भेजना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं चाहते कि उन सभी को पता हो कि यह एक ग्रुप मैसेज है.

ब्रौडकास्ट फीचर की मदद से आप ऐसा कर सकते हैं. कई सारे कान्टैक्ट्स को एकसाथ मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन वह मैसेज ऐसा ही दिखेगा, जैसे वह बातचीत सिर्फ आप दो लोगों के बीच हुई हो. ऐंड्रायड में मेन्यू में जाकर ‘न्यू ब्रौडकास्ट’ चुनें. आईओएस में चैट स्क्रीन पर ब्रौडकास्ट लिस्ट टैप कर ‘न्यू लिस्ट’ को चुनें. अब आपको जो भी रिप्लाई करेगा, वह सिर्फ आपको ही दिखाई देगा.

फोन स्विच करने में पुरानी चैट खोने से बचाएं

जब आप नए आईफोन पर स्विच करें या अपना पुराना ऐंड्रायड रिप्लेस करें, तो आप अपनी चैट हिस्ट्री अब नए फोन में बहाल कर सकते हैं. अगर आपके फोन में माइक्रोएसडी कार्ड का आप्शन है, तो मेन्यू>सेटिंग्स>चैट सेटिंग्स>बैकअप कान्वर्सेशन पर जाकर अपनी पुरानी चैट्स का बैकअप लें. कार्ड को नए फोन में डालकर वाट्सऐप इंस्टॉल करें और रीस्टोर का आप्शन दिखने पर रीस्टोर कर लें.

अगर बैकअप इंटरनल स्टोरेज में है, तो आपको चैट बैकअप दूसरे फोन तक अपने लैपटाप या कम्प्यूटर तक मैनुअली पहुंचाना होगा. उम्मीद है कि अगली बिल्ड में गूगल ड्राइव का सपोर्ट वाट्सऐप पर मिलने लगेगा. आईओएस यूजर्स इंस्ट्रक्शन्स के लिए ऐपल की वेबसाइट चेक करें.

इस खिलाड़ी के नाम है वनडे में सबसे तेज 200 विकेट लेने का रिकार्ड

क्रिकेट जगत में आपने कई बेहतरीन गेंदबाज देखे होंगे. ये गेंदबाज अपनी गेंदबाजी के कारण दुनियाभर में मशहूर हैं. क्रिकेट इतिहास में ऐसे तो कई गेंदबाज हैं जिन्होंने 200 विकेट लिए हैं लेकिन आज हम आपको उन गेंदबाजों के बारे में बताएंगे जिन्होंने सबसे तेज 200 विकेट चटकाए हैं. आपको बता दें इस टाप फाइव लिस्ट में कोई भारतीय गेंदबाज मौजूद नहीं है. आइए जानें उन 5 गेंदबाजों के बारे में जिन्होंने सबसे तेज 200 विकेट लेने का रिकार्ड अपने नाम किया है.

सकलेन मुश्ताक

इस लिस्ट में सबसे उपर पाकिस्तान के महान गेंदबाज सकलेन मुश्ताक हैं. इस खिलाड़ी ने ब्रेट ली, वकार यूनिस, शेन वार्न जैसे गेंदबाजों को पीछे छोड़ते हुए इस रिकार्ड को अपने नाम किया. इस महान गेंदबाज ने मात्र 104 एकद्विसीय क्रिकेट मैचों में 200 विकेट पूरे किए थे. इनका यह रिकार्ड अब तक कोई नहीं तोड़ पाया है.

शेन वार्न

आस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वार्न महान गेंदबाजों में से एक हैं. आस्ट्रेलिया के लिए खेलते हुए 125 मैचों में अपने 200 एक दिवसीय विकेट पूरे किए थे. वार्न के नाम कई और रिकार्ड भी दर्ज हैं.

आलान डोनाल्ड

आलान डोनाल्ड साउथ अफ्रीका के प्रतिभाशाली गेंदबाजों में से एक थे. साउथ अफ्रीका के लिए खेलते हुए डोनाल्ड ने मात्र 117 मैचों में 200 विकेट लिए थे.

ब्रेट ली

आस्ट्रेलिया के पूर्व महान गेंदबाज ब्रेट ली भी इस लिस्ट में शामिल हैं. ली के सामने बड़े बड़े बल्लेबाज कापने लग जाते हैं. ब्रेट ली को क्रिकेट में स्पीड का सौदागर कहा जाता है. आस्ट्रेलिया के तूफान कहे जाने वाले ब्रेट ली ने 112 एकद्विसीय मैच खेल कर अपने 200 विकेट लिए थे.

वकार यूनिस

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज वकार यूनिस की स्विंग के आगे अच्छे अच्छे बल्लेबाजों के पसीने छूट जाते थे. यूनिस ने 118 मैच खेल कर 200 विकेट लिए थे.

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