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आईफोन की खरीद पर मिल रहा है बंपर औफर, आप भी फायदा उठाइये

अगर आप आईफोन के शौकीन हैं और इसे खरीदना चाहते हैं तो आपके लिये खुशखबरी है. एप्पल के आईफोन-7 प्लस के 128 जीबी का मौडल आप 11,000 रुपये से ज्यादा के डिस्काउंट के साथ खरीद सकते हैं. साथ ही आईफोन-7 प्लस, आईफोन 6 और आईफोन 6 एस पर भी भारी छूट मिल रही है. इन शानदार डिस्काउंट का फायदा उठाने के लिए आप पेटीएम मौल का इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां सभी के लिए ये शानदार औफर उपलब्ध हैं.

खबरों के मुताबिक पेटीएम के जरिए एप्पल के फोन पर भारी छूट दी जा रही है. आईफोन-7 128 जीबी वैरिएंट पर 11,000 रुपये का कैशबैक दिया जा रहा है. इस शानदार डिस्काउंट के बाद लोग आईफोन के इस मौडल को 58,393 रुपये की जगह 47,393 रुपये में खरीद सकते हैं.

आईफोन-7 के 32 जीबी वैरिएंट पर 9,100 रुपये का कैशबैक दिया जा रहा है, जिसके बाद इस शानदार फोन को आप 39,099 रुपये में खरीद सकते हैं. ग्राहकों को आईफोन-7 प्लस के 128 जीबी वैरिएंट पर 11,500 रुपये का कैशबैक मिलेगा जिससे इस फोन की कीमत 70,669 रुपये से कम होकर 59,169 रुपये हो जाएगी. एप्पल आईफोन-7 के 32 जीबी वैरिएंट पर आपको 11,000 रुपये का कैशबैक मिलेगा जिसके बाद ग्राहक इसे 51,799 रुपये में खरीद सकेंगे.

आईफोन-6 एस पर 7,000 का कैशबैक दिया जा रहा है. इसके 32 जीबी वैरिएंट को 32,349 रुपये में खरीदा जा सकता है. वहीं एप्पल आईफोन-6 के 32 जीबी वैरिएंट पर 6000 रुपये का कैशबैक दिया जा रहा है, ग्राहक इसे 21,285 रुपये में खरीद सकेंगे.

जानिए हौकी के जादूगर ध्यान‘सिंह’ कैसे बन गए ध्यान‘चंद’

मेजर ध्यानचंद, ये नाम सुनकर ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. हाकी का जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद जब अपनी हाकी स्टिक लेकर मैदान में उतरते थे तो गेंद उनकी स्टिक से और लोग अपनी कुर्सियों से चिपक जाते थे.

आज (29 अगस्त) ही के दिन 1905 में ‘हाकी के जादूगर’ कहे जाने वाले ध्यानचंद का जन्म हुआ था. उनके जन्मदिन को भारत के राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

ध्यानचंद तीन बार ओलंपिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हाकी टीम के सदस्य रहे हैं. इनमें से 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 का लास एंजेल्स ओलंपिक और 1936 का बर्लिन ओलंपिक शामिल है.

आईए आज उनके जन्मदिन पर उनकी जिंदगी के कुछ रोचक किस्सों के बारे में जानते हैं.

16 साल की उम्र में सेना में भर्ती

ध्यानचंद के पिता सेना में थे, जिस वजह से बार-बार ट्रांसफर के कारण वह छठी क्लास तक ही पढ़ पाए. वर्ष 1922 में वह 16 की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए. सेना में लोगों को खेलते देख उनके मन में भी खेलने की ख्वाहिश जागी. सुबेदार बाले तिवारी ने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं और फिर एक दिन वह देश के बेस्ट हाकी खिलाड़ी बन गए.

पहला विदेशी दौरा

वर्ष 1926 में सेना चाहती थी कि हाकी टीम न्यूजीलैंड जाए, जिसके लिए खिलाड़ियों की तलाश शुरू हुई. इस दौरान ध्यानचंद अपनी प्रैक्टिस में जुटे रहे और मन को समझाया कि अगर काबिल हूं, तो मौका मिल ही जाएगा. फिर एक दिन कमांडिग ऑफिसर ने बुलाया और कहा, ‘जवान, तुम हाकी खेलने के लिए न्यूजीलैंड जा रहे हो.’ ध्यानचंद को खुशी इतनी थी कि मुंह से एक शब्द नहीं निकला.

यह पहला मौका था जब भारत की हाकी टीम विदेश दौरे पर गई. न्यूजीलैंड में टीम ने कुल 21 मैच खेले और 18 में जीत का परचम लहराया. भारत ने कुल 192 गोल दागे, जिनमें 100 गोल सिर्फ ध्यानचंद के थे.

क्रिकेटर डोनाल्ड ब्रैडमैन से मिली तारीफ

ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर सर डोनाल्ड ब्रैडमैन ने 1935 में एडिलेड में एक हाकी मैच देखने के बाद कहा था, “ध्यानचंद ऐसे गोल करते हैं जैसे क्रिकेट में रन बनता है.” ब्रैडमैन हाकी के जादूगर से उम्र में तीन साल छोटे थे. अपने-अपने खेल में माहिर ये दोनों हस्तियां केवल एक बार एक-दूसरे से मिलें.

ध्यानचंद के सेलेक्शन में आई दिक्कत

ध्यानचंद का तबादला 1928 में नार्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस वजीरिस्तान (अब पाकिस्तान) में कर दिया गया, जहां हाकी खेलना मुश्किल था. इस वजह से 1932 ओलंपिक में ध्यानचंद के सेलेक्शन को लेकर भी दिक्कतें आईं.

अब किसी से नहीं हारेंगे

न्यूजीलैंड को हराकर हाकी टीम के भारत लौटने पर जब कर्नल जॉर्ज ध्यानचंद से पूछते हैं कि भारत की टीम एक मैच क्यों हार गई तो ध्यानचंद का जबाब होता है कि उन्हें लगा कि उनके पीछे बाकी 10 खिलाड़ी भी हैं. अगला सवाल, तो आगे क्या होगा. जवाब आता है कि किसी से हारेंगे नहीं. इस प्रदर्शन और जवाब के बाद ध्यानचंद लांस नायक बना दिए गए.

पहली बार कहा जादूगर

26 मई 1928 को ध्यानचंद समेत कई खिलाड़ियों की तबीयत खराब थी. लेकिन उनके हौसले में किसी तरह की कमी नहीं थी. तबीयत खराब होने बावजूद भी चीम चैंपियन बनीं. इसी ओलंपिक के बाद पहली बार ध्यानचंद के नाम के साथ ‘जादूगर’ शब्द जोड़ा गया. विदेशी अखबारों ने मैच में ‘जादू, जादूगर, जादू की छड़ी’ जैसे अल्फाज इस्तेमाल किए.

विदेशी महिला ने कहा, मे आई किस यू?

जर्मनी ने इंडिया को मैसेज भिजवाया कि अगर आपकी टीम हमारे यहां आएगी तो खर्चा हम उठाएंगे. फिर इंडियन टीम ने वहां कई मैच खेले और आखिरी मैच में बर्लिन-11 को 4 गोलों से हराया. अब तक तो विदेशी भी ध्यानचंद के दीवाने हो गए थे. चेकोस्लोवाकिया में ध्यानचंद के खेल से इम्प्रेस होकर एक युवती उनके पास आकर बोली, ‘तुम किसी एजेंल की तरह लगते हो, क्या मैं तुम्हें किस कर सकती हूं?’ ये सुनते ध्यानचंद सकपका गए और बोले, ‘सारी मैं शादीशुदा हूं. मुझे माफ करें.’

नाम के पीछे क्यों लगा चंद

ध्यानचंद का असली नाम ध्यान सिंह था लेकिन वह रात को चन्द्रमा की रोशनी में प्रैक्टिस करते थे इसलिए इनके साथियों ने उनके नाम का पीछे चंद लगा दिया.

जब ध्यानचंद का हाकी स्टिक तोड़ दिया गया

एक बार कुछ ऐसा हुआ कि नीदरलैंड में एक मैच के दौरान उनकी हाकी स्टिक तोड़कर देखी गई, इस शक के साथ कहीं स्टिक में कोई चुम्बक तो नहीं लगी. लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा क्योंकि जादू हाकी स्टिक में नहीं ध्यानचंद के हाथों में था.

24 घंटे रुका जहाजों का ट्रैफिक

1928 में ओलपिंक में गोल्ड लेकर भारतीय हाकी टीम बंबई लौटी. स्वागत में बंबई के डाकयार्ड पर जहाजों की आवाजाही 24 घंटे नहीं हो पाई थी.

गोल से लगाया गोलपोस्ट का अंदाजा

एक बार मेजर साहब ने शॉट मारा तो वह पोल पर जाकर लगा तब उन्होनें रेफरी से कहा की गोल पोस्ट की चौड़ाई कम है. जब गोलपोस्ट की चौड़ाई मापी गई तो सभी हैरान रह गए वह वाकई कम थी.

घायल होकर भी खेले ध्यानचंद

1936 ओलंपिक में भारत का मुकाबला हिटलर के देश की टीम जर्मनी से था. बारिश होने पर मैच 15 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया. 15 अगस्त को मैच शुरू हुआ, तो जर्मनी खिलाड़ियों ने आक्रामक रुख अपनाया. ध्यानचंद के दांत में चोट लगी, जिसके चलते उन्हें कुछ वक्त के लिए मैदान छोड़ना पड़ा. इसके बाद ध्यानचंद चोटिल हालत में ही मैदान में लौटे और साथियों को समझाया कि बदले के लिए नहीं, बढ़िया खेल खेलो. बस फिर क्या ध्यानचंद ने वापसी के साथ ताबड़तोड़ गोल दागने शुरू किए.

मैदान छोड़ भागा हिटलर

भारत और जर्मनी के बीच हुए फाइनल मुकाबवे के शुरूआती मिनटों में ही ध्यानचंद की टीम ने जर्मनी की ऐसी धुलाई की कि मैच देख रहा हिटलर स्टेडियम छोड़कर चला गया. भारत ने जर्मनी को 1 के मुकाबले 8 गोल से शिकस्त दी.

ध्यानचंद ने ठुकराया हिटलर का आफर

16 अगस्त को ओलंपिक समापन में हिटलर से ध्यानचंद का सामना होना था. भारतीय हाकी टीम गोल्ड मेडल पहनने वाली थी. हिटलर जब ध्यानचंद से मिला तो उनसे इतना इम्प्रेस हुआ कि उन्हें अपनी सेना में जनरल पद का आफर दिया. लेकिन ध्यानचंद ने सहज भाव से ये आफर ठुकरा दिया.

पद्मभूषण से सम्मानित

हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को फुटबाल में पेले, क्रिकेट में ब्रैडमैन और बाक्सिंग में मोहम्मद अली के बराबर का दर्जा दिया गया है. उन्हें 1956 में भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया.

‘खतरों के खिलाड़ी’ के सेट पर आखिर क्यों फूट फूट कर रोए करण वाही

कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाले रिएलिटी शो खतरों के खिलाड़ी का रविवार का एपिसोड काफी खास रहा. शो में काफी सारा एक्शन, सस्पेंस और ड्रामा दर्शकों को देखने मिला. दिग्गज कंटेस्टेंट करण वाही शो के सेट पर फूट-फूट कर रोने लगे, फिर बेहोश हो गए. उन्हें हौस्पिटल में भर्ती करना पड़ा जिसके कुछ देर बाद उनके पूरी तरह सही होने की खबर होस्ट रोहित शेट्टी ने बाकी प्रतिभागियों को दी. चलिए हम आपको बताते हैं कि शो के सेट पर आखिर क्या हुआ था. करण वाही आखिर क्यों रोने लगे और फिर किस तरह इस स्थिति में पहुंच गए कि वह बेहोश हो गए.

हर रोज की तरह शो शुरु हुआ रवि दुबे और रित्विक धंजानी के बीच एक चिली पेपर टास्क मुकाबले से. रोहित ने रित्विक और बाकी कंटेस्टेंट को वार्निंग दी कि कोई भी टास्क के दौरान अपना चेहरा टी-शर्ट या किसी चीज से नहीं ढकेगा. रित्विक इस रूल को फौलो नहीं कर सके और उन्होंने अपना चेहरा ढक लिया. टास्क फौलो नहीं कर पाने के चलते रित्विक को फियर फंदा टास्क करना पड़ा. इसके बाद शांतनु और गीता यही टास्क करते हैं जिसमें गीता को फियर फंदा से गुजरने की स्थिति में आना पड़ता है. करण वाही को चूंकि पहले ही फियर फंदा मिला हुआ था तो अब इन तीनों को इस टास्क में कंपीट करना था. इस टास्क में तीनों को सर एक शीशे के बौक्स में बंद कर दिया जाता है.

गीता के बौक्स में मकड़ियां थीं, रित्विक के बौक्स में चूहे और करण के बौक्स में सांप. टास्क यह था कि तीनों को पीठ के बल बौक्स को घसीटते हुए फिनिश लाइन तक ले जाना था और वहां पर इसे स्क्रू ड्राइवर से खुद ही खोलना था. करण ने पहले ही टास्क करने से मना कर दिया क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नही थी. लेकिन फिर बाद में वे इस टास्क के लिये राजी हो गये. करण ने टास्क करना शुरू तो किया लेकिन क्योंकि सांपों के बार बार नाक को कवर करने से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उन्होंने टास्क पूरा तो किया लेकिन वह बुरी तरह चिढ़ गए. उन्होंने माइक निकाल कर फेंक दिया और वह रोने लगे.  फिर इसी बीच वह रोते रोते बेहोश होकर गिर पड़े और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा.

घर को जर्म फ्री रखना चाहती हैं तो ये खबर आपके लिए ही है

कहते हैं स्वच्छ घर में ही परिवार स्वस्थ रहता है. यह सही भी है. फिर मौसम चाहे कोई भी हो, हर किसी का जर्म फ्री घर रखना आवश्यक है, क्योंकि इस का प्रभाव सीधा सेहत पर पड़ता है. केवल किसी खास अवसर पर ही नहीं, बल्कि हर दिन घर की साफसफाई जरूरी है. इस से आप कई बीमारियों जैसे सांस संबंधी, कीड़े जनित रोग, वायरल फ्लू आदि से दूर रह सकती हैं.

अगर घर में बच्चे या बुजुर्ग हों तो घर का कीटाणुरहित होना बहुत ही आवश्यक है. इस से आप डाक्टर से दूर रह सकती हैं.

मुंबई के सैरिनिटी पीसफुल लिविंग की इंटीरियर डिजाइनर और कोफौउंडर, अमृत बोरकाकुटी बताती हैं कि जर्म फ्री घर का होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि आजकल कई प्रकार के वायरस अनायास ही हमारे आसपास पनप जाते हैं, जिस से कई प्रकार की वायरल फ्लू हो जाते हैं. इन का इलाज सही समय पर न होने पर ये जानलेवा भी साबित हो सकते हैं.

कुछ टिप्स पर गौर कर घर को जर्म फ्री रखा जा सकता है:

घर की नियमित साफसफाई करें. रोज थोड़ीथोड़ी सफाई करने से घर पूरी तरह जर्म फ्री हो सकता है. पोंछा और डस्टिंग के लिए अरोमा और यूक्लिप्टस के औयल का अधिक प्रयोग करें, इस से बैक्टीरिया को पनपने का मौका नहीं मिलता, साथ ही छोटेछोटे कीड़े भी मर जाते हैं.

पोंछा या डस्टिंग करने के बाद उस कपड़े को अच्छी तरह साबुन से धो कर धूप में सुखा लें. इस से पोंछा साफ रहने के अलावा दुर्गंधरहित भी हो जाएगा.

किचन और बाकी कमरों के लिए अलगअलग पोंछा रखें. इस से घर हाइजिनिक बना रहता है. पोंछे के पानी में फ्लोर क्लीनर लिक्विड का प्रयोग जरूर करें. सब से ज्यादा कीटाणु फर्श पर ही पनपते हैं.

किचन घर का खास हिस्सा होता है, जहां कीड़ेमकोड़े आसानी से जन्म लेते हैं. ऐसे में खाना बनाने के बाद किचन की अच्छी तरह सफाई करें. जूठे बरतनों को उसी समय धो लें. अगर आप के बरतन अगले दिन कामवाली धोती है, तो सभी जूठे बरतनों को पानी से धो कर एक गमले में डिटर्जैंट पाउडर और

पानी डाल कर भिगो कर रखें. गंदे बरतनों के प्रति कीड़े अधिक आकर्षित होते हैं.

जहां अधिक नमी होती है वहां बैक्टीरिया, फफूंद और दूसरे कीड़ेमकोड़े आसानी से पनपते हैं और फिर दूसरी जगहों में भी फैल जाते हैं. ऐसे में इन जगहों से नमी को दूर भगाने के लिए पोंछा लगाने के बाद पंखा चला दें. इस के अलावा कमरे का वैंटिलेशन भी सही रखें.

बिस्तर और टौवेल को गरम पानी और डिटर्जैंट से नियमित धोएं, ताकि ये जर्म फ्री रहें.

परदे और पंखों की सफाई वैक्यूम क्लीनर से महीने में एक बार अवश्य करें. अधिकतर इन जगहों पर धूलमिटटी आसानी से जमा हो जाती है और फिर कीटाणु आकर्षित होते हैं.

किसी भी बरतन या बालटी में पानी अधिक दिनों तक जमा न रखें. इस से मच्छर और कीड़े जन्म लेते हैं. 1-2 दिन में पानी का प्रयोग कर साफ पानी भरें.

अगर घर में बच्चे या बुजुर्ग हों तो अधिक केयर जरूरी है, क्योंकि उन्हें कोई भी बीमारी जल्दी लगती है. साफसफाई के बाद अरोमायुक्त कैंडल या अगरबत्ती जलाएं.

बाथरूम और वाश बेसिन की सफाई भी नियमित करें. इस के लिए ब्लीच की जगह साबुन और पानी ही सही रहता है.

टाइल्स की सफाई के लिए किसी डिटर्जैंट पाउडर और पानी का इस्तेमाल करें. अगर कहीं मैल अधिक जमा हो तो उसे पुराने ब्रश और साबुन की सहायता से रगड़ कर साफ करें.

दरवाजे खिड़कियों को सप्ताह में एक दिन साबुन पानी से धो कर सूखे कपड़े से पोंछ लें. ताकि उन पर धूलमिट्टी जमा न हो और कीड़े न पनपें.

मैं अपनी चाची की जवानी देखकर पागल हो गया हूं. मैं उन के साथ हमबिस्तरी करना चाहता हूं. कैसे करूं.

सवाल
मैं 20 साल का हूं. मम्मी पापा बाकी भाई बहनों के साथ दूसरे शहर में रहते हैं. चाचा एयरफोर्स में हैं और बाहर रहते हैं. मैं चाची व उन के 2 साल के बेटे के साथ गांव में रहता हूं. मैं चाची के साथ हमबिस्तरी करना चाहता हूं. कैसे करूं?

जवाब
आप को गांव में चाची व बच्चे की देखभाल के लिए छोड़ा गया है और आप खुद चाचा बनना चाहते हैं. अगर आप के इरादों का किसी को पता चलेगा, तो आप की खूब फजीहत होगी. आप चाची पर बुरी नजर रखने के बजाय शराफत से रहें. खुद पर काबू न हो, तो गांव छोड़ कर कहीं और चले जाएं.

कार लोन लेने से पहले जरूर पढ़ लें ये खबर

अपना घर और अपनी गाड़ी हर किसी का सपना होता है. अगर आप भी नई कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके पास भी कई आप्शन होंगे. अगर आपकी आए उतनी नहीं है, और आप कार लोन के लिए एप्लाई करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपके लिए कुछ बातों का जानना बहुत जरूरी है.

लोन अमाउंट

कार खरीदने वाले अधिकतर लोगों यह कंफ्यूजन रहता है कि उन्हें कितनी रकम लोन के तौर पर बैंक से लेनी चाहिए. बैंक कार लोन देने से पहले आवेदनकर्ता के आय का विश्लेषण करते हैं. अगर आपकी कार लोन की ईएमआई आपके मासिक आय का 20 फीसदी के आसपास है तो ऐसे में बैंक आपको लोन दे देते हैं. अगर किसी की मासिक सैलेरी 50,000 रुपए है तो कार लोन की ईएमआई 10,000 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए.

सिर्फ इंट्रेस्ट ही काफी नहीं

अगर आप सिर्फ बैंक के ब्याज दरों को देखकर कार लोन लेते हैं तो यह गलत है. मान लें कि आप चार लाख रुपए का कार लोन लेना चाहते हैं. कोई बैंक कार की कीमत का 80 फीसदी लोन पांच साल के लिए 10.5 फीसदी की ब्याज दर पर देता है. वहीं,  दूसरा बैंक 10.25 फीसदी की ब्याज दर पर लोन देता है. इन दोनों ब्याज दरों में सिर्फ 48 रुपए का ही फर्क है. थोड़े से कम ब्याज के चक्कर में एकदम से लोन लेने का फैसला न करें. ब्याज दरों के अलावा दूसरी बातों का भी ध्यान रखें और फिर लोन लेने का फैसला लें.

प्रोसेसिंग चार्ज

बैंक के नियमों के अनुसार कार लोन प्रोसेसिंग फीस तय रहती है. आमतौर पर 2.5 लाख तक के लोन पर बैंक 2500 रुपए तक प्रोसेसिंग चार्ज लेते हैं और इसके साथ ही डाक्‍यूमेंटेशन के 350 रुपए देने पड़ते हैं. वहीं, 4 से 5 लाख के लोन पर बैंक 4000 रुपए प्रोसेसिंग फीस और डाक्‍यूमेंटेशन के लिए 350 रुपए ही लेते हैं. लोन लेने से पहले बैंकों के ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस को भी कंपेयर करना जरूरी है.

प्रीपेमेंट चार्ज का रखें ध्यान

सस्ती ब्याज दरें देखकर लोन के लिए एप्लाई न करें. कार लोन चुकाने के लिए आपको 5-7 साल का वक्त मिलता है. अगर आपकी सैलेरी बढ़ती है और आप लोन को जल्द से जल्द चुकाना चाहते हैं, तो कई बैंकों की पॉलिसी के अनुसार आपसे प्रीपेमेंट चार्ज भी वसूला जाता है. कुछ बैंक प्रीपेमेंट पैनल्‍टी चार्ज नहीं लेते. अगर आपको लगता है कि आपकी आय बढ़ने वाली है तो प्रीपेमेंट वाले बैंकों से कर्ज न लें. बैंक की शर्तों को ध्यान से पढ़े.

अपना क्रेडिट स्कोर पता करें

कार लोन के लिए एप्लाई करने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर के बारे में पता करना जरूरी है. बैंक आपको क्रेडिट स्कोर के हिसाब से ही लोन देगा. लो क्रेडिट स्कोर पर आपका लोन ऐप्लीकेशन रिजेक्ट हो सकता है और हाई क्रेडिट स्कोर पर आपको तुरंत लोन मिल सकता है.

आय के हिसाब से हो व्यय

जितनी आपकी आय है उसी हिसाब से व्यय भी करें. पहले यह तय करें कि क्या आप ईएमआई पेमेंट करने के काबिल हैं या नहीं. अगर आप एक बार भी ईएमआई चुकाने में चुकते हैं तो इसका प्रभाव आपके सिबिल स्कोर पर ही पड़ता है. आपकी अभी की मासिक आय के हिसाब से ही लोन रिपेमेंट की अवधि चुनें. भविष्य में सैलेरी बढ़ने की आशा में कोई भी कदम न उठायें.

ओपो और वीवो के कर्मचारी लौट रहें हैं चीन, जानिए क्या है असल वजह

डोकलाम विवाद के बाद भारत में चीन विरोधी भावनाओं की वजह से दोनों कंपनियां मैनेजमेंट में बदलाव कर रही हैं. खासतौर पर उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में यह उबाल काफी ज्यादा है. महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से कर्मचारियों को वापस बुलाया गया है. इस विवाद के बाद जुलाई और अगस्त में दोनों कंपनियों की बिक्री में तेजी से गिरावट आई थी. जिसकी वजह से ओपो और वीवो में काम करने वाले 400 से अधिक चीन के नागरिक अब अपने देश की ओर लौट रहे हैं.

ओपो और वीवो हैंडसेट ब्रांड्स के तीन दर्जन डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से ज्यादातर लोग वापस अपने देश गए हैं. इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि पिछले साल के दो महीने जुलाई और अगस्त में सेल्स में 30 प्रतिशत की गिरावट आई थी. जिसकी वजह से इन लोगों को वापस बुलाया गया है. इसकी खास वजह नान-परफार्मेंस है. इसकी एक वजह यह बताई जा रही है कि चीन के नागरिकों को भारत में कम अवधि का वीजा मिल रहा है. कहा जा रहा है कि डोकलाम विवाद के सुलह होने के बाद इनमें से कुछ एंप्लायीज वापस भारत आ सकते हैं.

इस महीने कंपनी के चीफ मार्केटिंग आफिसर विवेक झांग भी अपने देश चीन वापस लौट गए. ये भारत में काम करने वाले सबसे हाई प्रोफाइल नागरिक में से एक हैं. इन्होंने आईपीएल की टाइटल स्पौन्सरशिप की डील की बातचीत में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई थी.

ओपो के प्रवक्ता ने कहा कि हम भारत सरकार के नियम कायदों के मुताबिक काम कर रहें हैं और बाजार की अफवाहों से प्रभावित नहीं होते हैं. 2017 में हमारी ग्रोथ शानदार रही है और यह साल ओपो इंडिया के लिए एक शानदार साल साबित हुआ है. इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी यहां हमेशा बेस्ट कैमरा फोन, सेल्फी फोकस्ड स्मार्टफोन नौजवानों लोगों को बेचती रहेगी.

घर को रखना है सुरक्षित तो खरीदें ये गैजेट्स

घर की सुरक्षा के लिए तालों का प्रयोग किया जाता है. लेकिन यह ताले घर की अच्छी तरह सुरक्षा नहीं कर पाते, इस बात पर ध्यान देते हुए आपके घर की पूरी सुरक्षा करने के लिए बाजार में कई नए गैजेट्स आ गए हैं.

आज हम आपको बता रहे हैं कैसे आप गैजेट्स की मदद से अपने घर को सुरक्षित रख सकते हैं. जानें उन गैजेट्स के बारे में.

होम अलार्म सिस्टम

अगर कोई आपकी गैर-मौजूदगी में घर में घुसकर खिड़की, दरवाजा या ड्रौअर खोलने की कोशिश करता है तो यह डिवाइस स्टोर्ड नंबर पर मेसेज भेजकर अलर्ट कर देता है. साथ ही जोर से हूटर बजाकर आस-पड़ोस के लोगों को भी सूचित कर देता है.

अगर कोई शीशा तोड़ता है तो भी यह ऐक्टिव हो जाता है. इसे इंस्टाल करना बहुत आसान है. यह वायरलेस के जरिए एक पैनल से कनेक्ट होता है और एक रिमोट से कंट्रोल होता है.

विडियो डोर फोन

यह डिवाइस वाई-फाई के जरिए आपके स्मार्ट फोन से कनेक्ट हो जाता है. आप घर में हों या नहीं, अगर घर के बाहर कोई आता है तो यह डिवाइस सिग्नल भेजकर आपको बता देता है कि बाहर कोई आया है. इसकी खासियत यह है कि आप अपने फोन पर उसे देख सकते हैं, लेकिन वह सिर्फ आपकी आवाज ही सुन सकता है. इसके जरिए दरवाजे को खोला भी जा सकता है.

होम सेफ

यह आधुनिक जमाने की सेफ है, जो न तो किसी चाबी से खुलती है और न ही इसे खोलने के लिए किसी पासवर्ड की जरूरत है. यह सिर्फ आपके फिंगरप्रिंट से ही खुलती है. स्टील की बनी यह सेफ काफी मजबूत होती है, इसलिए इसे काटना आसान नहीं है. अगर आपके अलावा कोई दूसरा अपने फिंगरप्रिंट से इसे खोलने की कोशिश करता है तो यह सेफ 15 मिनट के लिए फ्रीज हो जाती है.

स्मार्ट लाइट

ये एलईडी बल्ब होते हैं, जो ब्लूटूथ या इंटरनेट से चलते हैं. ब्लूटूथ वाली लाइट मोबाइल के जरिए सिर्फ 30-40 मीटर तक ही कंट्रोल हो सकती है, वहीं इंटरनेट वाली लाइट्स राउटर के जरिए मोबाइल से कनेक्ट होती है. इन्हें कंट्रोल करने के लिए ऐप की जरूरत होती है. इसके लिए मोबाइल में इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है जबकि साथ ही राउटर को भी इंटरनेट से कनेक्ट करना जरूरी है.

मेरे ट्यूशन के सर मेरे अंगों को छूने की कोशिश करते हैं और अकसर कामयाब हो जाते हैं. मैं घर वालों को ये कैसे कहूं.

सवाल
मैं 10वीं जमात में पढ़ती हूं. मेरे ट्यूशन के सर हमेशा मेरे अंगों को छूने की कोशिश करते हैं और अकसर वे इस में कामयाब हो जाते हैं. वे मुझ से ‘आई लव यू’ भी कहते हैं. यह बात मैं अपने घर वालों से कैसे कहूं?

जवाब
आप को यह बात फौरन अपनी मम्मी को खुल कर बतानी चाहिए. वे आप के पापा से सलाह कर के उस टीचर की खबर ले लेंगी. मम्मी से कह दें कि आप उस टीचर से कतई नहीं पढ़ेंगी.

लालू ने लाडलों के कंधों पर डाली भाजपा विरोध की विरासत

राष्ट्रीय जनता दल की ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में 6 घंटे तक 14 दलों के नेताओं ने नरेंद्र मोदी, भाजपा और नीतीश पर जम कर निशाना साधा. रैली से लालू यादव को कितना राजनीतिक फायदा मिलेगा, यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन रैली के बहाने लालू यादव ने अपनी ताकत दिखाने के साथ-साथ बड़ी ही चतुराई से भाजपा विरोध की राजनीतिक विरासत को अपने बेटों तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के कंधे पर डाल दिया. रैली में आए लोग तेजस्वी और तेजप्रताप के भाषण पर जम कर हुंकार भरते नजर आए और भाजपा और नीतीश को सबक सीखाने के लिए आतुर दिखे. तेजस्वी रैली के ‘हीरो’ बन कर उभरे. रैली के जरिए लालू ने मंडल और कमंडल के अपने आजमाए जिन्न को एक बार फिर बोतल से निकालने की पुरजोर कोशिश की है. रैली की कामयाबी के बीच लालू का पूरा कुनबा सत्ता गंवाने और नीतीश-भाजपा के गठजोड़ के दर्द से कराहता भी रहा.

लालू ने कहा कि नीतीश कुमार का कोई उसूल ही नहीं है. वह पलटी मारने में माहिर हैं. भाजपा ने नीतीश को अपने सूंड में लपेट लिया है और अब नीतीश के दिन लद गए है. अब वह भरोसे के काबिल नहीं रहे. यह नीतीश की आखिरी पलटी है. तेजस्वी यादव के उभार से नीतीश को जलन हो रही थी इसलिए भाजपा से मिल गए. परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा दिया, पर लालू कभी किसी से डरा नहीं है. 2020 के विधान सभा चुनाव में भाजपा और नीतीश को जनता सबक सीखाएगी.

अपने बच्चों पर अपनी सियासी विरासत खास कर भाजपा विरोध की राजनीति को सौंपने के अंदाज में उन्होंने कहा कि अब उनकी उमर हो गई है, अब बच्चों का समय आ गया है. सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स और अदालतों के जाल में फंसे होने के बाद भी लालू ने रैली के जरिए अपनी ताकत दिखा दी. उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप ने बड़े ही ठसक के साथ अपने पिता की राजनीतिक विरासत को उठाने के लिए हुंकार भरा. तेजप्रताप ने शंख फूंकने के बाद कहा कि अब उनका मकसद भाजपा को फूंकना है. उन्होंने मंच से कसम खाई कि जब तक भाजपा का खातमा नहीं कर देंगे, तब तक न सोएंगे और न ही सोने देंगे.

तेजस्वी ने लालू के 27 साल पुराने भाषण को दोहराते हुए कहा कि भाजपा हिंदू और मुसलमानों को लड़ाना चाहती है. सबसे बड़ी चीज इंसानियत होती है. जब इंसान ही नहीं रहेगा तो मंदिर की घंटियां कौन बजाएगा? इंसान ही नहीं रहेगा तो मस्जिद में इबादत कौन करेगा? ठीक यही बात लालू ने 21 अक्टूबर 1990 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित सांप्रदायिकता विरोधी रैली में कही थी. सुबह 9 बजे से ही तेजस्वी के अब तक के भाषणों का औडियो-वीडियो टेप चलता रहा.

तेजस्वी ने नीतीश चाचा को जेल भिजवाने की ताल ठोंकते हुए कहा कि ठग और महाठग एक साथ मिल गए हैं और जनता को उल्लू बना रहे हैं. 2 हजार करोड़ के सृजन घोटाला के मसले पर नीतीश चाचा चुप्पी साधे हुए हैं.

लालू की रैली का असर बिहार समेत देश की राजनीति पर पड़ा है. गैरभाजपाई दलों को एकजुट होने का मंच और मौका दोनों ही लालू ने मुहैया करा दिया. अब लालू ने गेंद को मुलायम सिंह यादव, मायावती, शिबू सोरेन, अरविंद केजरीवल, वामदलों के पाले में डाल दिया है. अब इन नेताओं को सोचना-समझना है कि भाजपा विरोध की लड़ाई वह लालू के साथ मिलकर लड़ें, या फिर अपनी डफली अपना राग वाली नीति पर चलते रहें. अगर रैली के मंच पर मौजूद सभी दलों के नेताओं का मन मिलता है तो भाजपा के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

बिहार में सत्ता गंवाने के बाद हताश राजद को रैली ने नया उत्साह और हौसला दिया है. अगर गैर भाजपाई गठबंधन आकार लेता है तो उसमें राजद की अहम और बड़ी भूमिका होगी, क्योंकि सीट के हिसाब से वही सबसे  ताकतवर दल है. राजद कार्यकर्ताओं में जोश भरा है. इसके साथ ही राजद को नुकसान भी हो सकता है, बिहार और केंद्र सरकार का रवैया लालू और उनके परिवार के प्रति और सख्त हो सकता है. रैली में जुटी भीड़ और दलों को साल 2019 तक संभल कर रखना सबसे बड़ी मुश्किल है. रैली का सबसे बड़ा खतरा यह भी रहा कि वह लालू के परिवारवाद की छाया से बाहर नहीं निकल सकी. रैली पर परिवार ही हावी रहा. लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा भारती, समेत लालू के 3 दामाद रैली में मंच पर मौजूद रहे. कई बड़े नेताओं को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया.

जदयू के बागी नेता मंच पर लालू से गलबहियां करते दिखे. शरद ने मोदी और नीतीश पर हमला करते हुए दावा किया कि असली जदयू उनके साथ है और नकली जदयू उनपर काररवाई करने की धमकी दे रहा है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा को नोटबंदी उसी तरह ले डूबेगी, जैसे नसबंदी ने कांग्रेस को मिट्टी में मिलाया था.

राजद की रैली को सुपरफ्लौप करार देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि रैली का मकसद लालू परिवार के भ्रष्टाचार पर परदा डालना था. राजनीति की खिसक रही जमीन को बचाने की नाकाम कोशिश की गई, जिसे जनता ने नकार दिया. रैली में भाड़े के लोग जुटाए गए और उन्हें बांध कर रखने के लिए गंदे गाने और डांस के साथ खाने का भरपूर इंतजाम किया गया था.

नीतीश की बीमारी बड़ी खतरनाक

लालू यादव ने मजाकिया लहजे में कहा कि नीतीश कुमार जब बीमार पड़े तो समझ लीजिए कोई खतरनाक साजिश में लगे हुए हैं. जब उनके घर छापा पड़ रहा था तो वह राजगीर में बीमारी का बहाना बना कर आराम फरमा रहे थे. उनसे बात नहीं हो पा रही थी, उनके लोगों ने कहा कि सेहतमंद होने के लिए पहाड़ का पानी पीने के लिए राजगीर गए हैं. जब भी कोई गंभीर बात होती है तो वह बीमारी का ड्रामा करके राजगीर में आराम फरमाने चले जाते हैं.

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