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रविचंद्रन अश्विन ने पास किया ‘यो-यो’ फिटनेस टेस्ट, अब खेलेंगे रणजी मैच

टीम इंडिया के आलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में ‘यो-यो’ फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है. अश्विन ने इंग्लैंड में वास्टरशयर की तरफ से काउंटी क्रिकेट खेलकर लौटने के बाद तमिलनाडु की तरफ से आंध्रा के खिलाफ सत्र 2017-18 का पहला रणजी ट्राफी मैच खेला और ‘यो यो टेस्ट’ को पास कर लिया.

मैच के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि बैंगलोर का सफर अच्छा रहा. ‘यो यो टेस्ट’ भी सफल रहा. अब रणजी ट्राफी के लिए दोबारा से तमिलनाडु टीम की तरफ से खेलने जा रहा हूं.

बता दें कि कुछ समय पहले अश्विन ने कहा था कि वह ‘यो-यो’ टेस्ट के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं मानकों को मानने वाला इंसान हूं. अगर कोई नया मानक बना है तो मैं उसे पाने की पूरी कोशिश करूंगा. मैं किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूं. हर टीम को बेस्ट बनाने के लिए नए तरीके इस्तेमाल किये जाते हैं, जिसका मैं इसका सम्मान करता हूं. अगर हमें विश्व में सबसे बेहतरीन बनना है, तो इस तरह के टेस्ट का सामना करना होगा.

31 वर्षीय अश्विन को आस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज और टी20 सीरीज के लिए आराम दिया गया था लेकिन ‘यो यो टेस्ट’ पास करने के बाद अब उम्मीदें जताई जाने लगी है कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले वनडे और टी2 सीरीज में वापसी करेंगे लेकिन उससे अश्विन 14 अक्तूबर से त्रिपुरा के खिलाफ ग्रुप सी के रणजी मैच के लिये टीम का हिस्सा होंगे. मालूम हो कि यो यो टेस्ट उस समय सुर्खियों में आया था जब युवराज सिंह और सुरेश रैना कथित तौर पर इसे पूरा करने में नाकाम रहे थे.

अब लोन आपसे सिर्फ एक एप की दूरी पर, फौरन आजमाएं

अब लोन लेना हुआ और भी आसान. अब आपको लोन लेने के लिये यहां वहां जाने की कोई जरुरत नहीं. अब आप अपने मोबाईल के जरिए लोन प्राप्त कर सकते हैं. स्टार्टअप कंपनी मनीटैप ने मोबाइल एप के जरिये पांच लाख रुपये तक का कर्ज दिलाने की सुविधा शुरू की है.

इस साल के आखिर तक कंपनी कुल मिलाकर 300 करोड़ रुपये का कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. कंपनी के सह संस्थापक अनुज ककर ने बताया कि कंपनी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए छोटे शहरों पर ज्यादा ध्यान दे रही है. यही वजह है कि मनीटैप का एप हिंदी और कन्नड़ भाषा में भी उपलब्ध होगा. जल्द ही यह तेलुगु, तमिल, मराठी और गुजराती में भी आएगा.

उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल 14 शहरों में सेवा दे रही है और इस साल के आखिर तक 50 शहरों में उसकी सेवाएं उपलब्ध होंगी. मनीटैप मोबाइल एप के जरिए ग्राहक को तुरंत, कुछ ही मिनट में ऋण राशि मंजूर हो जाती है जिसे वह तीन साल तक अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल कर सकता है. कंपनी ने इस सुविधा के लिए सिविल और बैंकों से गठजोड़ किया है.

ककर ने कहा कि यह अपनी तरह की पहला व अनूठा स्टार्टअप है जो किसी भी व्यक्ति को बैंक से पांच लाख रुपये तक का कर्ज सिर्फ एप के जरिए कुछ ही मिनट में सुनिश्चित करवाता है. इसमें किसी तरह की रहन/जमानत की जरूरत नहीं. मनीटैप का फिलहाल ऋण सुविधा के लिए आरबीएल बैंक के साथ गठजोड़ है. कई और बैंकों व वित्तीय सेवाओं से उसकी बातचीत चल रही है जिसे जल्द ही अमली जामा पहनाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि कंपनी 20,000 रुपये से अधिक मासिक आय वाले वेतनभोगी व स्वरोजगार संपन्न युवाओं को 3,000 रुपये से पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाती है. आवेदक की मंजूर ऋण राशि उसके मनीटैप में आ जाती है जिसे वह जब चाहे अपने खाते में स्थानांतरित कर सकता है. इसमें ग्राहक को ब्याज केवल उसी राशि का देना होता है जिसका वह इस्तेमाल करता है. इसके अलावा कंपनी का आरबीएल बैंक के साथ को ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड भी है.

ककर ने कहा कि बेंगलुरू स्थित मनीटैप ने हाल ही में सेवा इंडिया, एनईए तथा प्राइम वेंचर पार्टनर्स से 1.23 करोड डालर की राशि जुटाई है जिसका इस्तेमाल वह अपनी सेवाओं व परिचालन के विस्तार के लिए करेगी.

करेंगे ये पांच काम तो नहीं होगी भविष्य में पैसों की कमी

30-35 साल तक नौकरी या बिजनेस करने के बाद भी अधिकांश लोगों के पास रिटायरमेंट के बाद पैसा नहीं होता. कारण यह है कि आमतौर पर हम अपने करियर के शुरुआती सालों में सेविंग और इनवेस्टमेंट पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. फाइनेंशियल प्लानिंग के नजरिए से देखें तो इससे हम आसान सेविंग के सुनहरे साल खो देते हैं. रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग उसी वक्त शुरू कर देनी चाहिए, जब आप कमाना शुरू करते हैं. चलिए आज हम आपको बता रहे हैं पांच ऐसे रूल जिनका पालन कर आप अपने रिटायरमेंट के लिए करोड़ों रुपए का फंड बना सकते हैं.

इनकम का 10 फीसदी जरूर बचाएं

रिटायरमेंट प्लानिंग का पहला रूल है कि आप अपनी मासिक इनकम का 10 फीसदी जरूरी बचाएं. अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके प्रोविडेंट फंड में इतनी रकम जाती है. आज आपको यह रकम थोड़ी लग सकती है लेकिन लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की पावर इसे बड़ी रकम में तब्दील कर देगी. अगर आप नौकरी नहीं करते हैं और बिजनेस करते हैं तो आप अपनी इनकम का 10 फीसदी लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं.

पीएफ फंड से बीच में न निकालें पैसा

आप जब भी नौकरी बदलते हैं तो आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग दांव पर होती है. इस समय आपके पास पीएफ निकालने या पीएफ ट्रांसफर कराने का विकल्प होता है. ऐसे में कई बार लोग तात्कालिक जरूरतों के लिए पीएफ निकाल लेते हैं. ऐसा करना अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को दांव पर लगाना होता है. अगर कोई आपात स्थिति न हो तो पीएफ निकालने से बचना चाहिए.

आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाएं

लोग इनकम बढ़ने के साथ अपने निवेश में इजाफा करना जरूरी नहीं समझते. लेकिन ऐसा करना जरूरी है. आप अपनी इनकम में हुई बढ़ोतरी के मुताबिक हर साल अगर अपना निवेश बढ़ाते हैं तो आप बढ़ती हुई महंगाई से अपने फंड को सुरक्षित रखेंगे और रिटायरमेंट के लिए एक बड़ी रकम भी बचा सकेंगे.

बुरे समय के लिए इमरजेंसी फंड बनाएं

अगर आप चाहते हैं कि आपकी रिटायरमेंट की प्लानिंग पर कोई आंच न आए तो आप एक इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं. इमरजेंसी फंड आपकी मासिक आय का पांच गुना तक होना चाहिए. अगर शौर्ट नोटिस पर आपकी नौकरी चली जाती है तो कुछ महीने के लिए आप आसानी से अपने खर्चे को मैनेज कर सकते हैं और आपकी रिटायमेंट प्लानिंग पर भी इसका खास असर नहीं होगा.

बच्चों की शिक्षा के लिए लें लोन

माता-पिता अपने बच्चों की एजुकेशन के लिए खास तौर पर सेविंग करते हैं. इससे उनकी रिटायरमेंट सेविंग प्रभावित होती है. आजकल बैंक आसानी से एजुकेशन लोन देते हैं. ऐसे में आप बच्चों की एजुकेशन के लिए लोन ले सकते हैं. इससे आपकी रिटायरमेंट सेविंग में कोई बाधा नहीं आएगी.

ये है वो रिकार्ड जिसे तोड़ना आज भी सचिन के लिए सपना है

क्रिकेट के खेल में कई भारतीय दिग्गज हुए हैं. इन दिग्गज खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मैच में कई रिकार्ड बनाए हैं. लेकिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक ऐसे भी खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने सिर्फ 10 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला लेकिन सबके चहेते बन गए. इस खिलाड़ी ने भारतीय क्रिकेट को एक अलग मुकाम तक पहुंचा दिया. इस दिग्गज बल्लेबाज ने रणजी मैच में ऐसे रिकार्ड बनाए हैं जिसे तोड़ पाना मुश्किल है. दरअसल हम बात कर रहे हैं दिग्गज भारतीय बल्लेबाज विजय मर्चेंट की.

मुंबई के इस दिग्गज खिलाड़ी का घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकार्ड रहा, लेकिन दुर्भाग्य से दूसरे विश्वयुद्ध ने उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म कर दिया. 12 अक्टूबर 1911 को जन्मे विजय मर्चेंट को अपने वक्त में डौन ब्रैडमैन और कौम्पटन जैसे खिलाड़ियों में गिना जाता था.

22 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 1933-34 में अपना पहला टेस्ट खेला था. वहां से वो 1951 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहे. विजय मर्चेंट को भारत का ‘ब्रैडमैन’ कहा जाता था. रिटायर होने के बाद विजय मर्चेंट चयनकर्ता भी रहे. 27 अक्टूबर, 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

इंग्लिश टीचर के कारण बदल गया नाम

विजय मर्चेंट का नाम विजय ठाकरसे हुआ करता था. एक बार बचपन में उनकी इंग्लिश टीचर ने उनसे उनके नाम और पापा के प्रोफेशन के बारे में पूछा. विजय ने अपना नाम बताया. फिर पापा का प्रोफेशन ‘मर्चेंट’ बताया. पर टीचर नाम और प्रोफेशन में कंफ्यूज कर गई और विजय का नाम विजय ठाकरसे से विजय मर्चेंट हो गया.

रणजी ट्रौफी के ब्रेडमैन

विजय मर्चेंट को यदि रणजी ट्रौफी का ब्रेडमैन कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. मर्चेंट ने रणजी ट्रौफी में 98.75 की औसत से 3639 रन बनाए. सचिन इस टूर्नामेंट में 85.62 की औसत से 4281 रन बनाए हैं.

शतक बनाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी

टेस्ट में मर्चेंट ने 3 शतक लगाए, इनमें से दो शतक अंतिम दो पारियों में बने. मर्चेंट ने अपना आखिरी टेस्ट दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था. यह शतक पांच साल के बाद उस समय बना जब 1951 में विजय मर्चेंट 40 साल 21 दिन की उम्र में कोटला में खेल रहे थे. उन्होंने पहली पारी में 154 रन बनाए यह सबसे उम्रदराज खिलाड़ी द्वारा लगाया गया शतक था.

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दूसरे सबसे बड़े बल्लेबाज

विजय मर्चेंट ने ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका दबदबा बना रहा. उन्होंने 150 मैचों में 71.64 की औसत से रन बनाए. इनमें 45 शतक, और 50 अर्धशतक शामिल हैं. औसत के मामले में डौन ब्रेडमैन (95.14) के बाद वह दूसरे नंबर पर हैं.

गांधी गिरफ्तार थे तो क्रिकेट खेलने से मना कर दिया

1933 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले मर्चेंट ने एक बार इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरीज खेलने से मना कर दिया था क्योंकि महात्मा गांधी और कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था. चार साल बाद वो इंग्लैंड टूर पर जाने को तब तैयार हुए जब सारे लीडर जेल से बाहर आ गए थे.

जब एमसीसी टीम ने 1933 में भारत का दौरा किया तो विजय मर्चेंट की बहन लक्ष्मी महात्मा गांधी का औटोग्राफ लेने के लिए उनके पास गई. संयोग से उन्होंने औटोग्राफ देने के लिए लक्ष्मी की किताब का जो पेज खोला उसमें 1933-34 की एमसीसी टीम के खिलाड़ियों के हस्ताक्षर थे. इस टीम के 17वें सदस्य के रूप में विजय मर्चेंट शामिल थे. गांधी जी ने इसी पेज पर औटोग्राफ दिया.

अंग्रेजों को अपने खेल से बनाया दीवाना

अंग्रेज खिलाड़ी विजय मर्चेंट के खेल से बहुत प्रभावित थे. अंग्रेज खिलाड़ी सीबी फ्रे ने कहा था, चलो इसको सफेद रंग से रंग देते हैं और इसे अपने साथ आस्ट्रेलिया ओपनर बनाकर ले चलते हैं. आप इससे से विजय की लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं. विजय ने अपने दो इंग्लैंड टूर पर मिडिल और्डर में खेलते हुए 800 रन जड़ दिए थे.

क्या आपने देखी तैमूर की बहन इनाया की पहली झलक

करीना कपूर के बेटे तैमूर अली खान अक्‍सर अपनी क्‍यूट फोटोज को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. अब तैमूर के बाद उनकी बहन इनाया की पहली तस्वीर ने सबका ध्‍यान अपनी ओर खींचा है.

जी हां हम बात कर रहे हैं तैमूर की बुआ और अभिनेत्री सोहा अली खान की बेटी इनाया की पहली तस्वीर की.

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अपने मदरहुड को इंज्‍वाय कर रहीं सोहा अली खान ने पहली बार अपने पति कुणाल खेमू के साथ अपनी बेटी इनाया की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है, जो खूब वायरल हो रही है. इस तस्वीर में कुणाल बड़े ध्‍यान से अपनी बेटी को पकड़े हुए हैं. तस्वीर में बेबी गर्ल का चेहरा तो नहीं दिख रहा है पर पापा का बेटी के लिए प्यार जरूर झलक रहा है.

आपको बता दें कि, कुणाल-सोहा की बेबी गर्ल का नामकरण कुछ दिन पहले ही किया गया था. इस बेबी गर्ल का नाम इनाया नौमी खेमू है. जिसकी जानकारी खुद कुणाल ने ट्विटर के जरिए दी थी.

बताते चलें कि, करीना कपूर खान की तरह ही मां बनने के बाद सोहा भी अपना काम जारी रखेंगी. सोहा ‘रंग दे बसंती’, ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स’, ‘दिल मांगे मोर’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं. खबर है कि दिसंबर से वो अपनी अगली फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर 3 की शूटिंग शुरू करेंगी. वहीं कुणाल 19 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म गोलमाल अगेन में नजर आएंगे.

बता दें कि सोहा अली खान और कुणाल खेमू हाल ही में एक बेटी की माता-पिता बने हैं सोहा ने 29 सिंतबर को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में ‘महानवमी’ पर बेटी को जन्‍म दिया. जिसकी खबर खुद कुणाल खेमू ने सोशल मीडिया पर दी थी. कुणाल ने एक ट्वीट कर लिखा, ‘हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आज के शुभ दिन हमारे घर बेटी का जन्म हुआ है. सोहा और बेटी का स्वास्थ्य अच्छा है. हम आपके प्यार और आशीर्वाद के लिए शुक्रिया अदा करते हैं.’

मालूम हो कि सोहा ने 25 जनवरी, 2015 को अपने लान्ग टाइम ब्वायफ्रेंड और एक्टर कुणाल खेमू के साथ शादी की थी. इनकी मुलाकात साल 2009 में फिल्म ‘ढूंढते रह जाओगे’ के सेट पर हुई थी. तील साल डेट और फिर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद, इन्होंने जनवरी 2015 में शादी की थी.

राम मंदिर नहीं अब योगी सरकार लगाएगी ‘राम की मूर्ति’

संविधान भले ही धर्म की राजनीति को गलत माने. धर्म को राजनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता. अयोध्या में अब उत्तर प्रदेश की सरकार राम मंदिर के बजाये ‘राम की मूर्ति’ लगाने की योजना बना रही है. इसको अयोध्या के पर्यटन से जोड़ कर योजना तैयार की जा रही है. पर्यटन विभाग अयोध्या में सरयू नदी के किनारे 100 मीटर ऊंची राम की मूर्ति लगायेगा. इस मूर्ति का जो डिजाइन पर्यटन विभाग तैयार कर रहा है वह दूसरी राम के मूर्तियों से अलग होगा.

इस मूर्ति में राम को धनुष लिये दिखाया जायेगा. अगर सबकुछ ठीक रहा तो दीवाली तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरयू किनारे उस जगह पर भूमिपूजन कर सकते हैं. भाजपा के रणनीतिकार अब इस बात पर चर्चा कर रहे है कि ‘राम की मूर्ति’ की ऊंचाई क्या होनी चाहिये. पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यह मूर्ति भारत में सबसे बड़ी होनी चाहिये.

देश में सबसे ऊंची मूर्तियों में अभी तक सरदार पटेल की बनने वाली थी. इसकी ऊंचाई 182 मीटर रखी जानी है. इसके साथ महाराष्ट्र में 210 मीटर ऊंची शिवाजी की मूर्ति लगाई जानी है. इन दोनों का ही भूमि पूजन हो चुका है. राम की मूर्ति को अगर इन से छोटा रखा गया तो इससे राम का अनादर होगा. 2014 के लोकसभा चुनाव में सरदार पटेल की मूर्ति बड़ा मुद्दा था. इसको बनाने के लिये गांव गांव में हर घर से लोहा दान मांगा गया था. अभी तक यह मूर्ति बन कर तैयार नहीं हुई है. गुजरात सरकार इस मूर्ति को लगा रही है. गुजरात सरकार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने शिवाजी की मूर्ति लगाने की पहल शुरू कर दी. इसका भूमि पूजन हो चुका है.

गुजरात और महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश की सरकार ने राम की मूर्ति को लगाने की शुरुआत कर दी है. सरयू नदी किनारे बनने वाली इस मूर्ति को राम मंदिर से दूर रखा गया है. पर्यटन विभाग 100 मीटर ऊंची मूर्ति लगाने का प्रस्ताव बना चुका है. अब मूर्ति की ऊंचाई को लेकर बदलाव की मांग की जा रही है. भाजपा 2019 के चुनाव से पहले राम की मूर्ति को लगवा देना चाहती है. पर्यटन विभाग नई अयोध्या तैयार करना चाहती है. जिससे पर्यटक ज्यादा से ज्यादा अयोध्या आ सकें.

अयोध्या के संत इसे राम मंदिर से जोड़ कर देखने को तैयार नहीं हैं. वह कहते हैं कि राम मंदिर और राम की मूर्ति अलग अलग मुद्दा है. दोनों को आपस में जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिये. अयोध्या में राम मंदिर का महत्व गर्भगृह से जुड़ा है. उससे अलग कहीं भी राम मंदिर बनाने या राम की मूर्ति लगाने को धार्मिक भावनाओं को पूरा नहीं करेगा. भाजपा इस तरह के काम से लोगों का ध्यान राम मंदिर से हटा नहीं सकती है. अयोध्या का विकास हो पर राम मंदिर को दरकिनार करके ऐसा कोई विकास भक्तों के गले से नीचे नहीं उतरेगा.

जानिए क्यों श्रीदेवी को फीमेल अमिताभ बच्चन कहा जाता है

कहतें हैं मुझको हवा हवाई से तो आप समझ ही गए होंगे की हम किस अभिनेत्री के बारे में बात कर रहे हैं, बौलीवुड की नम्बर वन श्रीदेवी, ऐसी अदाकारा जिसके बारे में जितना कहा जाए उतना कम ही लगता है, बौलीवुड में जहां अभिनेत्रियां सिर्फ शो केस की तरह पेश की जाती थी, वही श्रीदेवी ने अपनी एक्टिंग से यह साबित कर दिया की हीरोइन भी फिल्म में मुख्य किरदार होती हैं.

श्रीदेवी ने चार साल की उम्र से ही एक्टिंग करना शुरू कर दिया था, साउथ की फिल्मों में उन्होंने बाल कलाकार के रुप में काम किया और फिर अभिनेत्री बन गईं, बौलीवुड में उनकी एंट्री भी उन्हीं की तेलगू फिल्म के हिन्दी रिमेक से हुई. फिल्म सोलवा सावन सिनेमाघरों में तो नहीं चली और ना हीं किसी ने श्रीदेवी को नोटिस किया. हालकि श्रीदेवी ने इस फिल्म के पहले फिल्म जूली में छोटी बहन का किरदार निभा चुकी थी.

आखिर वह वक्त आया जब श्रीदेवी फिल्म हिम्मतवाला से सही तरीके से लौंच हुई.  इस फिल्म में जितेंद्र उनके अभिनेता थे. फिल्म सुपर हिट रही बल्कि फिल्म से ज्यादा जीतेंद्र और श्रीदेवी के स्टेप प्रसिद्ध हुए. इसके बाद तो यह जोड़ी तोहफा, मवाली, मशाल, जस्टिस चौधरी जैसी एक के बाद एक हिट फिल्में देती नजर आई.

वैसे श्रीदेवी की फिल्म हिम्मतवाला की रिलीज के बाद फिल्म सदमा जिसमें उन्होंने एक ऐसी लड़की की भूमिका निभाई थी, जिसका दिमांगी संतुलन बच्चों जैसा था, फिल्म ने बौक्स औफिस पर अच्छा बिजनेस तो किया ही साथ ही श्रीदेवी लोगों की पसंदीदा अभिनेत्री भी बन गई. श्रीदेवी की लगातार हिट फिल्मों से उस दौर की दूसरी हीरोइन की डिमांड कम हो रही थी.

श्रीदेवी ही एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्हें बौलीवुड में फिमेल अमिताभ का नाम दिया गया, क्योंकि जिस तरह अभिताभ बच्चन के नाम पर फिल्में चलती थी, उसी तरह जिस फिल्म में श्रीदेवी हो तो सिनेमा घरों का हाउस फुल होना ही है. उनकी एक्टिंग डांसिंग और खास कर चेहरे के हाव भाव वह जिस तरीके से अपने आंखों के साथ खेलती थीं की बस देखने वाले देखते रह जाते थे.

श्रीदेवी के जीवन में यश चोपड़ा का भी अहम रोल है. चांदनी और लम्हे ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचा दिया जहां शायद आज तक कोई अभिनेत्री नहीं पहुच पाई. चांदनी सुपर हिट रही पर लम्हे जो एक अलग कहानी थी. जनता को यह फिल्म रास नहीं आई पर श्रीदेवी को दोनों ही फिल्मों से काफी फायदा हुआ.

श्रीदेवी का ऐसा दौर भी आया जब उनका ग्राफ नीचे की और लुढ़कने लगा. खुदा गवाह,  गुमराह, हीर रांझा, जैसी फिल्मों के फ्लौप होने से प्रेस ने लिखना शुरू कर दिया कि अब श्रीदेवी की नंबर 1 की पोजीशन नहीं बच सकती, पर बोनी कपूर निर्देशित फिल्म जुदाई रिलीज हुई और उनकी एक्टिंग देख श्रीदेवी ने अपनी नंबर 1 पोजीशन बरकरार ही नहीं रखी, बल्कि उन्होंने यह भी साबित कर दिया की उन्हें यहां से कोई नही हटा सकता.

वैसे श्रीदेवी की जिंदगी में कई ऐसे दौर भी आए जब उनके और मिथुन चक्रवती के रिश्ते अखबारों की सुर्खियां बनें. कहा जाता है की श्रीदेवी मिथुन के साथ फिल्म ‘जाग उठा इंसान’ में काम कर रही थी, और इसी फिल्म के दौरान दोनों का प्यार परवान चढ़ा. सुनने में ये भी आया  कि मिथुन ने श्रीदेवी के साथ चुपके से शादी भी कर ली थी, उस वक्त मिथुन पहले से ही योगिता बाली के साथ शादी कर चुके थे और जब मिथुन श्रीदेवी की खबर योगिता तक पहुंची तो वह खुदकुशी करने वाली थीं, इस वजह से मिथुन श्रीदेवी से अलग हो गए.

फिर श्रीदेवी का नाम अमिताभ के साथ भी जुड़ा. लेकिन श्रीदेवी की जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया जब उनकी फिल्में बौक्स औफिस पर फ्लौप होती जा रही थी. फिर उनकी जिंदगी में आए बोनी कपूर, अभी तक सिर्फ बोनी ही श्रीदेवी से एकतरफा प्यार करते थे. बोनी ने श्रीदेवी को अपने घर में ही पनाह दी थी. यह कहकर की श्रीदेवी उनकी मुंहबोली बहन हैं. यहां तक कि श्रीदेवी ने बोनी की पत्नी के सामने उन्हें राखी भी बांधी थी. मोना कपूर को उस वक्त झटका लगा जब श्रीदेवी गर्भवती हुईं, तब जाकर उन्हें बोनी और श्रीदेवी के संबंधों के बारे में पता चला और आखिरकार बोनी और श्रीदेवी ने शादी रचा ली. आज श्रीदेवी अपनी दो बेटियों जान्हवी और खुशी के साथ खुशियों के साथ रह रही हैं.

श्रीदेवी को 2013 में पद्मश्री से नवाजा गया. श्रीदेवी को करीब पांच बार फिल्मफेयर अवौर्ड प्रदान किया गया है. श्रीदेवी ने हिन्दी फिल्मों में ही अवौर्ड अपने नाम नहीं किए, ‍‍तमिल, तेलगू, मलयालम, केरला, आंध्र प्रदेश की फिल्मों से भी अवौर्ड अपने नाम करती रही हैं.

उत्तर प्रदेश में अब बसों पर भी चढ़ा भगवा रंग

सपा और बसपा की नीली-हरी रंग की बसों की कभी भाजपा ने आलोचना की थी. उस समय भाजपा ने सलाह दी थी कि रंग बदलने की जगह पर बसों के हालात बदले जायें जिससे सफर करने वालों को सहूलियत हो. अब जब भाजपा खुद सत्ता में है, वह अपनी सीख पर अमल करने के बजाये बसों के रंगों को बदल कर भगवा करने में लगी है.

भाजपा ने अपनी इन नई बसों को संकल्प सेवा नाम दिया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 बसों से इसकी शुरुआत की है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 4 सालों में 9563 गावों को इस बस सेवा से जोड़ने का संकल्प लिया है. अब तक 4766 गावों को जोड़ने का दावा प्रदेश सरकार कर रही है.

सरकार ने बताया है कि इन बसों में किराया 30 प्रतिशत दूसरी बसों से कम होगा. संकल्प बस सेवा की शुरुआत के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी उपस्थित थे.

उत्तर प्रदेश में बसों का किराया सबसे मंहगा है. सड़कों पर कई तरह की बसें दौड रही हैं. हर सरकार अपने कार्यकाल में एक नई बस सेवा शुरू कर देती है. इसके नाम सरकार के नाम से जुड़े होते हैं. पार्टी के रंग में बसों को रंग दिया जाता है. उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा प्रदेश है जहां एक ही सड़क पर चलने के लिये अलग अलग तरह की कई बसें मिलती हैं. इसके बाद भी प्राइवेट डग्गा मार बसें भी लोगों को सफर करा रही हैं.

असल में हर सरकार जनता के पैसे पर अपनी पार्टी का प्रचार करना चाहती है. इसके लिये वह नई बसों को खरीद कर उनमें पार्टी का रंग भर देती है. बसों के नये होने से यात्रियों को थोड़ा आराम का अनुभव होता है. देखा जाए तो बसों के आने या सड़कों के बनने का प्रभाव यातायात में लगने वाले समय पर नहीं पड़ता है.

वोल्वो जैसी एसी बसों में किराया दोगुना होने के बाद भी एक शहर से दूसरे शहर की दूरी तय करने में समय नहीं बचता. नई नई बस सेवाओं के शुरू होने से किराया बढ़ जाता है. सरकार दिखाने के लिये कुछ सेवाओं का किराया कम कर देती है. इसके बाद भी बाकी सेवाओं में पैसा कम नहीं होता है. भाजपा भी दूसरे दलों की तरह ही अब रंग बदलने में यकीन कर रही है. भाजपा सरकार अब हर काम में भगवा रंग को सामने रखने लगी है. संकल्प बस सेवा इसका एक उदाहरण है. बसों के रंग के सहारे योगी सरकार पार्टी के रंग को लोगों तक पहुचाने में लगी है. सरकार हर काम में हिन्दुत्व के रंग को ही आगे कर रही है.

रातों रात सुपरस्टार बनने वाली डिंपल कपाड़िया की कहानी पढ़िए यहां

सुपर स्टार राजेश खन्ना की पत्नी डिंपल कपाड़िया जितना फिल्मों की वजह से चर्चा में रही हैं, उतनी ही सुर्खियां उन्हें निजी जिंदगी के चलते भी मिलीं हैं. आइए जानते हैं डिंपल की जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियां.

  • डिंपल कपाड़िया बौलीवुड की ऐसी नायिका हैं जो रातो रात एक ही फिल्म से स्टार बन गईं थीं. 8 जून, 1957 को मुंबई में जन्मीं डिंपल को महज 15 साल की उम्र में राज कपूर ने अपनी फिल्म ‘बौबी’ में बतौर नायिका ले लिया. यह फिल्म सुपरहिट हुई और डिंपल एक ही फिल्म से फिल्म इंडस्ट्री की बड़ी नायिका बन गयीं.
  • इसके बाद उनकी जिंदगी ने अलग राह पकड़ ली. अपनी पहली फिल्म से ही डिंपल रातों रात स्कूल गर्ल से ‘सेक्सी रोमांटिक’ हीरोइन बनकर चमक उठीं. पहली फिल्म के लिए ही उन्हें फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस अवौर्ड से नवाजा गया.

  • यह फिल्म जिस साल रिलीज हुई उसी समय डिंपल कपाड़िया ने अपने से 15 साल ज्यादा उम्र वाले राजेश खन्ना से शादी रचा ली. राजेश खन्ना उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार थे.
  • मुंबई में समुद्र किनारे टहलते हुए एक दिन अचानक राजेश खन्ना ने डिंपल के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. डिंपल इस प्रस्ताव को मना नहीं कर पाईं. उनकी शादी फिल्म इंडस्ट्री के लिए कौतुक का विषय थी.
  • शादी के बाद डिंपल कपाड़िया फिल्मों से दूर हो गयीं. वह एक अच्छी पत्नी बनकर राजेश जिंदगी में शामिल हुईं. लेकिन इन दोनों का यह साथ बहुत दिन तक नहीं चला.
  • राजेश खन्ना का कैरियर जैसे जैसे उतार पर जाता गया उनके दांपत्य जीवन में वैसे वैसे खटास बढ़ती गयी. राजेश यह भी नहीं चाहते थे कि डिंपल फिल्मों में काम करें. इस बीच डिंपल दो बेटियों, ट्विंकल और रिंकी की मां बन गई.

  • राजेश और डिंपल के बीच का यह टकराव आखिरकार अलगाव में बदल गया. 1984 में राजेश खन्ना से अलग होने के बाद वह दोबारा फिल्मों में आईं. 1985 में उन्होंने एक बार फिर ऋषि कपूर के साथ जोड़ी बनाई. इन दोनों की फिल्म ‘सागर’ सुपरहिट रही.
  • इसके बाद ‘अर्जुन’, ‘कब्जा’, ‘जख्मी’ ‘औरत’, ‘राम लखन’, ‘क्रांतिवीर’ जैसी कई हिट फिल्मों के साथ डिंपल का नाम जुडा. उन्होंने समांतर फिल्मों में भी काम किया. ‘काश’, ‘लेकिन’, ‘रुदाली’, ‘बांग्ला’ जैसी फिल्में चर्चित रहीं.
  • डिंपल कपाड़िया ने अपने फिल्मी जीवन की तीसरी पारी भी खेली. ‘फिर कभी’, ‘लक बाइ चांस’, ‘दबंग’,  ‘पटियाला हाऊस’, ‘कौकटेल’ जैसी सफल फिल्मों का वह हिस्सा रहीं.

  • राजेश खन्ना जब बीमार हुए तो डिंपल कपाड़िया उनके साथ भी कुछ दिनों तक रहीं. डिंपल से अलग होने के बाद राजेश खन्ना अनीता आडवाणी नाम की महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे थे.
  • कुछ समय पहले डिंपल और सनी देओल को विदेश में एक साथ देखा गया था, जिससे ये अंदाजा लगाया जा रहा था कि वे दोनो एक दूसरे के साथ रिश्ते में हैं क्योकि दोनो ने एक दूसरे का हाथ पकड़ रखा था.

क्या आपको पता हैं गूगल के ये मजेदार ट्रिक्स

आज के समय में जब हमें कुछ सर्च करना होता है तो हम सीधे गूगल पर सर्च करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है google में कुछ ऐसे ट्रिक्स और सीक्रेट हैं जिन्हें टाइप करने के बाद कभी google को आप पानी में डूबते हुए देखेंगे तो कभी पूरा का पूरा पेज ही उल्टा पुल्टा हो जाएगा.

ये कुछ ऐसे सीक्रेट ट्रिक्स हैं जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं. आइए आप भी जानिए ऐसे ही कुछ अनजाने व मजेदार गूगल ट्रिक्स.

Google In 1980

इस ट्रिक से आप जान सकते हैं कि गूगल जब स्टार्ट हुआ था तब किस तरह का दिखता था और कैसे काम करता था. गूगल पर Google in 1980 लिखकर I’m Feeling Lucky पर क्लिक करते ही फोटो में दिख रहा पेज खुल जाएगा और आप महसूस व देख पाएंगे कि 1980 में गूगल कैसा था.

Google Dinosaur Game

अगर आपका इन्टरनेट नहीं चल रहा और आप बोरियत महसूस कर रहे हों तो ये औफलाइन गेम आप बिना इंटरनेट के भी खेल सकते हैं. याद रखें ये गेम सिर्फ तभी चलेगा जब आप औफलाइन होंगे यानी कि जब आपका इंटरनेट नहीं चल रहा होगा. जब आपका इंटरनेट बंद हो और आप गूगल में कुछ भी सर्च कर रहें हों तब आपको ये error मैसेज दिखाई देगा Unable to Connect to the internet. बस तब आप ये डायनासोर वाला गेम खेल सकते हैं.

Google Snake

गूगल स्नेक एक ऐसा गेम है जो अमूमन हर किसी ने खेला ही होगा. देर किस बात की गूगल ट्रिक्स की मदद से कीजिए अपने बचपन की यादें ताजा करें. गूगल पर Google Snake लिखकर I’m Feeling Lucky पर क्लिक करें और गेम खेलें.

Gravity Google

गूगल पर ग्रेविटी गूगल लिख कर I’m Feeling Lucky पर क्लिक करें. इसके बाद आपको गूगल का पूरा पेज उड़ता उड़ता सा दिखेगा भरोसा ना हो तो करके देख लें.

Flip a Coin Google Tricks

जब आप कोई खेल खेल रहे होते हो तो आप पहला दांव किसका आएगा, ये जानने के लिए टौस उछालते हो और टौस उछालने के लिए सिक्के की जरूरत होती है. अब आपको सिक्के की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि ये काम अब Google Trick करेगा. जानिए कैसे. गूगल पर Flip a Coin लिखें और फिर गूगल का जादू देखें.

Do a Barrel Roll Google Tricks

गूगल पर Do a Barrel Roll लिखकर सर्च करें. ऐसा करते ही आपको समझ में आ जाएगा कि गूगल पेज के साथ क्या हुआ.

Google Gravity Pacman

इस गूगल ट्रिक की मदद से आप pacman गेम खेल सकते हैं. गूगल पर Gravity Pacman लिखकर I’m Feeling Lucky पर क्लिक करते ही आपके सामने ये गेम चालू हो जाएगा.

Google Calculator Easter Eggs

number of horns on a unicorn the loneliest number से कैलकुलेटर खुलेगा. इसमें कैलकुलेटर सादा और साइंटिफिक दोनों होंगे. गूगल पर number of horns on a unicorn the loneliest number लिखकर सर्च करें. आपके सामने कैलकुलेटर खुलेगा और आप इसमें अपना हिसाब किताब कर सकेंगे.

Google Sphere

गूगल पर Google Sphere लिखकर I’m Feeling Lucky पर क्लिक करें और गूगल स्फीयर का मजा लें.

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