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‘गूगल मैप गो’ गूगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध, ये होंगे फायदे

गूगल ने हाल ही में भारत में आयोजित अपने सालाना इवेंट गूगल फार इंडिया (Google For India) के दौरान इंडिया फर्स्ट फीचर्स लौन्च करने के साथ ही गूगल मैप के खास वर्जन का भी ऐलान किया था. दरअसल उन्होंने गूगल मैप के जिस वर्जन की बात कही थी वह ‘गो’ सीरीज का है. ‘गूगल मैप गो’ एडिशन की खासियत ये है कि यह कम स्पेसिफिकेशन्स वाले स्मार्टफोन्स में भी काम करेगा.

गूगल द्वारा लौंच नया वर्जन गूगल मैप गो (Google Maps Go) अब गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसे आप आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं. गूगल ने ‘गूगल मैप गो’ के अलावा भी ‘गो’ सीरीज के कुछ दूसरे ऐप्स भी लौन्च किए हैं, जिनमे गूगल गो और फाइल गो शामिल हैं.

गूगल मैप गो ऐप को कंपनी ने हल्का बनाया है और यह प्रोग्रेसिव वेब ऐप वर्जन है. फिलहाल यह ऐप एंड्रायड स्मार्टफोन यूजर्स के लिए ही है और Android 4.1 के पहले के वर्जन में यह नहीं काम करेगा. इसके फीचर गूगल मैप्स जैसे ही हैं, लेकिन इसमें कुछ नए फीचर्स हैं.

गूगल ने इंडिया फर्स्ट स्ट्रैटजी के तहत Google Maps में बाइक विकल्प भी जोड़ा है. कंपनी इसके जरिए बाइकर्स को फायदा देना चाहती है जो गूगल मैप्स के जरिए नेविगेशन करते हैं. बाइक सेलेक्ट करके बाइकर्स शार्टकट से अपनी मंजिल तक जल्दी पहुंच सकते हैं. जल्द ही इसका अपडेट जारीकर आपको यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल फौर इंडिया इवेंट में कंपनी ने Android Oreo Go Edition भी लौन्च किया है जो 512MB से लेकर 1GB रैम वाले स्मार्टफोन्स में चलेगा. इस औपरेटिंग सिस्टम के लिए कंपनी ने कई कस्टमाइज ऐप्स भी लौन्च किये हैं जो Go सीरीज के हैं.

क्रिकेटर अजिंक्या रहाणे के पिता की कार से टकराकर हुई महिला की मौत

भारतीय टीम के दाएं हाथ के बल्लेबाज अजिंक्‍य रहाणे के पिता की कार से एक महिला का एक्सीडेंट हो गया. जानकारी के मुताबिक एक्सीडेंट के बाद कोल्हापुर पुलिस ने शुक्रवार सुबह रहाणे के पिता मधुकर बाबूराव रहाणे को गिरफ्तार कर लिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘सीनियर” रहाणे सुबह के चार बजे नेशनल हाईवे 4 पर अपनी हुंडई आई-20 से मुंबई जा रहे थे. इस मौके पर परिवार भी साथ में था. कंगल इलाके में मधुकर रहाणे ने कार पर से अपना नियंत्रण खो दिया और आशा ताई काम्बले नाम की 65 साल की महिला को टक्कर मार दी. गंभीर रूप से जख्मी हुई महिला को स्थानीय लोग हास्पिटल ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

बताया जा रहा है कि दुर्घटना के वक्‍त कार की रफ्तार काफी तेज थी. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर बाबूराव को गिरफ्तार तो कर लिया पर मामला हाई प्रोफाइल होने की वजह से वह इस मामले पर ज्यादा कुछ बोलने से बच रही है. पुलिस ने कार मालिक के खिलाफ आईपीसी की धारा 304A, 337, 338, 279 और 184.MV एक्ट के तहत केस दर्ज किया है. फिलहाल बाबूराव रहाणे को जमानत पर रिहा कर दिया गया है.

आपको बता दें कि अजिंक्या फिलहाल भारत और श्रीलंका के बीच हो रहे वनडे सीरीज में व्यस्त हैं. उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत की थी. 2013 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका टेस्ट करियर शुरू हुआ. सीरीज का तीसरा और अंतिम वनडे रविवार को विशाखापट्टनम में खेला जाना है. इसके बाद भारतीय टीम का साउथ अफ्रीका दौरा है. जिसमें अजिंक्य रहाणे का  भी चयन किया गया है.

पांच मिनट के परफौर्मेंस की इतनी मोटी रकम लेंगी प्रियंका चोपड़ा

बौलीवुड से लेकर हौलीवुड तक नाम कमा चुकी एक्‍ट्रेस प्रियंका चोपड़ा इंटरनेशनल आर्टिस्‍ट बन चुकी हैं. प्रियंका के फैन्‍स की संख्‍या जितनी भारत में हैं, उतनी ही विदेशों में भी है और यही कारण है कि बौलीवुड की यह ब्‍यूटी दो बार अमेरिकन टीवी का प्रतिष्ठित अवौर्ड पीपुल्‍स चौइस अवौर्ड जीत चुकी है. ऐसे में अब अगर कोई प्रियंका चोपड़ा को किसी इवेंट में बुलाना चाहता है, तो उन्‍हें काफी भारी भरकम रकम चुकानी पड़ेगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रियंका चोपड़ा को ‘जी सिने अवौर्ड्स 2017’ में लाने की कोशिश की जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार प्रियंका को ‘जी सिने अवार्ड्स 2017’ के होने वाले इवेंट में 5 मिनट के डांस परफौर्मेंस के लिए लगभग 5 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं.

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खबर है कि प्रियंका चोपड़ा स्टेज पर लगभग पांच मिनट तक परफौर्म करती हुई नजर आने वाली हैं. प्रियंका चोपड़ा की लोकप्रियता को देखते हुए चैनल भी उनकी इस मांग को पूरा करने के लिए राजी है. यानी प्रियंका की परफौर्मेंस के लिए इस शो के व्यवस्थापक एक मिनट का एक करोड़ रुपये अदा करने वाले हैं.

बता दें कि प्रियंका चोपड़ा इसी साल अपनी पहली हौलीवुड फिल्‍म ‘बेवौच’ में नजर आ चुकी हैं. इसके साथ ही वह इस साल अपने अमेरिकन टीवी शो ‘क्‍वांटिको’ का तीसरा सीजन भी लेकर आ रही हैं. प्रियंका इस शो में मुख्‍य भूमिका में नजर आती हैं और इसके लिए उन्‍हें काफी तारीफें मिली हैं. प्रियंका जल्‍द ही दो और हौलीवुड फिल्‍मों का हिस्‍सा बनने वाली हैं.

हाल ही में इस ‘देसी गर्ल’ को ब्रिटेन में एशिया की सबसे सेक्सी महिला का ख़िताब मिला है. लंदन के विकली न्यूज़लेटर ईस्टर्न आई द्वारा कराए गए ’50 सेक्सिएस्ट एशियन वुमन’ पोल में सबसे ज्यादा वोट पाकर प्रियंका नंबर 1 बनी हैं. यानी अब जी सिने अवौर्ड में फैन्‍स को अपनी देसी गर्ल जल्‍द ही नजर आने वाली हैं.

रविंद्र जडेजा ने किया युवराज वाला कमाल, एक ओवर में जड़ दिये 6 छक्के

भारतीय खिलाड़ी रवींद्र जडेजा ने सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में जामनगर और अमरेली के बीच खेले गए टी20 मैच में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया है. जामनगर की तरफ से खेल रहे जडेजा ने एक ही ओवर में छह छक्के जड़े और केवल 69 गेंदो पर 154 रन बना दिए. रवींद्र जडेजा द्वारा बनाए गए रनों की मदद से जामनगर टीम ने 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 239 रन बनाए. जडेजा ने दसवें ओवर में रन बनाना शुरु किया और 15वें ओवर में उन्होंने छह बौल पर 6 छक्के जड़ दिए. अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए जडेजा ने 10 छक्के और 15 चौकों की मदद से 154 रन बना दिए.

वहीं जामनगर ने अपनी प्रतिद्वंदी टीम अमरेली के सामने 240 रनों का लक्ष्य रखा था जिसे टीम के खिलाड़ी पूरा नहीं कर पाए और टीम 5 विकेट खोकर 118 रनों पर ही सिमट गई. विशाल वसोया ने 36 रन बनाए जबकि निलाम वाम्जा केवल 32 रन ही बना पाए. जामनगर के लिए गेंदबाज महेंद्र जेठवा ने कमाल करके दिखाया. महेंद्र ने 4 ओवरों में छह रन देकर अमरेली टीम के तीन विकेट चटकाएं. जडेजा द्वारा बनाए गए रनों की मदद से जामनगर 121 रनों से मैच को जीतने में कामयाब हुआ और उन्होंने अपने खाते में चार प्वाइंट भी जमा करा लिए.

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आपको बता दें कि बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज जडेजा के लिए यह साल उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. टेस्‍ट में तो जडेजा की शुरुआत धमाकेदार हुई और वह आईसीसी की गेंदबाजों और औल-राउंडर्स की रैकिंग में टौप पर पहुंच गएं. हालांकि वह इसे बरकरार नहीं रख सके और जल्‍द ही सीमित ओवरों की टीम से भी बाहर हो गएं. जडेजा और रविचंद्रन अश्विन ने हाल में कई वनडे और टी20 मैच नहीं खेले हैं. हालांकि जडेजा को दक्षिण अफ्रीका दौरे पर तीन टेस्‍ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह दी गई है.

इससे पहले युवराज सिंह ने टी 20 मैच के दौरान सन 2007 में इंग्लैंड के तेज बौलर स्टुअर्ट ब्रौड के एक ओवर में 6 छक्के जड़कर कुछ चुनिंदा लोगो की सूची में शामिल हो गएं थे. युवी ने इस मैच में न केवल ब्रौड के एक ओवर में छह छक्‍के जमाए थे बल्कि महज 16 गेंद पर तीन चौकों व सात छक्‍कों की मदद से 58 रन बना डाले थे.

उस दिन युवराज ऐसी बल्‍लेबाजी कर रहे थे कि इंग्‍लैंड के गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक उनके आगे डरे-सहमे नजर आ रहे थे. वैसे ब्रौड की इस ‘जोरदार धुलाई’ के पहले युवराज की इंग्‍लैंड के हरफनमौला एंड्रयू फ्लिंटाफ से भी किसी बात पर बहस हुई थी और मस्‍करेन्‍हास फैक्‍टर के साथ इस बहस का मुद्दा भी युवराज की बैटिंग में जुड़ गया था.

इस मैच के बाद युवराज ने कहा था, उन्होंने कहा, ‘जब मेरे ओवर में पांच छक्के लगे थे तो इसके बाद मुझे जितनी संख्या में फोन आए, शायद शतक बनाने के बाद भी उतने नहीं आते. तब मैंने ईश्वर से कहा कि यह ठीक नहीं है, आपको मुझे मौका देना होगा और आज मुझे यह मौका मिल गया.’

वीडियो : जब सबके सामने सुष्मिता ने लगाए ठुमके

सुष्मिता सेन अपने दिलकश अंदाज के लिए मशहूर हैं. उन्हें ब्यूटी विद माइंड कहा जाता है. लेकिन जब वे अपने मूड में आती हैं तो मस्ती करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं. उनका ऐसा ही कुछ मस्ती भरा अंदाज उस समय देखने को मिला जब वे मुंबई के सेंट एंड्रयूज कौलेज के फेस्ट में पहुंचीं. इस दौरान जब उनकी फिल्म ‘मैं हूं न’ का गाना ‘तुमसे मिलके दिल का है जो हाल’ चला तो वह खुद को डांस करने से रोक नहीं पाईं.

गाने के बोल सुनते ही सुष्मिता के पैर खुद ब खुद थिरकने लगे और उन्होंने कौलेज के फेस्ट के दौरान डांस कर रहे स्टूडेंट के साथ ठुमके लगाने शुरू कर दिये. सुष्मिता वहां सबके सामने दिल खोलकर नाचीं. उन्होंने कौलेज स्टूडेंट्स के साथ इस गाने के स्टेप्स पूरी शिद्दत के साथ फौलो किए. इससे पूरा माहौल ही मस्ती भरा हो गया.

सुष्मिता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. इसे काफी पसंद किया जा रहा है.

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बता दें कि ‘मैं हूं न’ में सुष्मिता सेन ने शाहरुख खान की टीचर का किरदार निभाया है. सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स का ताज पहनने वाली पहली भारतीय महिला हैं. 1994 में उन्होंने यह खिताब जीता था. इसके बाद लारा दत्ता ने साल 2000 में यह खिताब जीता. सुष्मिता सेन अपनी फिटनेस के लिए मशहूर हैं. सुष्मिता फिल्म इंडस्ट्री की पौपुलर सिंगल मदर्स में से एक हैं. उन्होनें दो बेटियों अलीशा और रिने को गोद लिया है. हाल ही में वे 42 साल की हुई हैं और उन्होंने इस उम्र में भी अपने फिटनेस के जुनून को नहीं छोड़ा है.

मारुति एसयूवी जिम्नी की फोटोज लीक, कम दाम में है बंपर कार

एसयूवी के शौकीन लोगों के लिए खुशखबरी है, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ‘मारुति’ ‘एसयूवी ब्रीजा’ (BREZZA) की कामयाबी के बाद एक और कौम्पैक्ट एसयूवी को भारतीय बाजार में लौन्च कर सकती है. मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक कंपनी जल्द ही देश में कौम्पैक्ट ‘SUV जिम्नी’ (JIMNY) को लौन्च कर सकती है. सूत्रों का यह भी कहना है कि इंडियन मार्केट से पहले मारुति की इस एसयूवी को जिनेवा मोटर शो-2018 में पेश किया जा सकता है. कंपनी की तरफ से इस कौम्पैक्ट एसयूवी को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है. फिर भी लौन्च से पहले ही इसकी जानकारी लीक हो गई है.

फर्स्ट लुक में मारुति की एसयूवी कार ‘जिम्नी’ (JIMNY) का डिजाइन काफी दमदार लग रहा है. इसमें आगे की तरफ सर्कुलर हेडलैंप और साइड में चौड़े व्हील वाले आर्च दिए गए हैं. फोटो में साफ दिखाई दे रहा है कि जिम्नी के रेग्युलर मौडल में 3 डोर हैं. लीक हुई जानकारी के अनुसार नई ‘जिम्नी’ में 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है. ‘जिम्नी’ में 6 सीट होने की उम्मीद की जा रही है.

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‘मारुति जिम्नी’ में 1.0 लीटर बूस्टरजेट टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन का विकल्प भी दिया जा सकता है. ‘जिम्नी’ के पुराने मौडल की बात करें तो इसमें 1.3 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया था. ‘जिम्नी’ के पुराने इंजन को 5-स्पीड मैन्युअल और 4-स्पीड औटोमेटिक गियरबौक्स से जोड़ा गया था. हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई कि नई ‘जिम्नी’ में औटोमेटिक ट्रांसमिशन होगा या मैन्युअल.

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मारुति की नई एसयूवी जिम्नी का बाहर से लुक दमदार है. इसके इंटीरियर की बात करें तो इसमें जिप्सी से मिलता-जुलता टू-डायल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है. लीक हुई जानकारी के अनुसार जिम्नी में औटो क्लाइमेट कंट्रोल यूनिट को मारुति स्विफ्ट से और फ्लैट बौटम स्टीयरिंग व्हील को मारुति की डिजायर से लिया गया है. इसके अलावा जिम्नी में 7.0 इंच स्मार्टप्ले इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी है.

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मारुति इस कार में सुरक्षा के लिहाज से मल्टीपल एयरबैग की भी सुविधा देगी. मारुति सुजुकी जिम्नी की शुरुआती कीमत 6.5 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) होने की उम्मीद है. इस एसयूवी का मुकाबला भारतीय बाजार में महिंद्रा थार से होने की उम्मीद है.

मोबाइल वौलेट का प्रयोग करते समय ना करें ये गलतियां

भारत को डिजिटल बनाने की मोदी सरकार की योजना और नोटेबंदी के परिणामस्वरूप लोग अब पहले के मुताबिक कहीं ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन करने लगे हैं. यूं तो डिजिटल ट्रांजैक्शन के बहुत से मोड है, जैसे की- नेट बैंकिंग, चेक, ड्राफ्ट, क्रेडिट, डेबिट कार्ड से पेमेंट आदि. लेकिन लोगों को आजकल सबसे आसान तरीका मोबाईल वौलेट का लगता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल नवम्बर के बाद से मोबाइल वौलेट के जरिए ट्रांजैक्शन में कई गुना तेजी आ गई है. इसका एक कारण यह भी है की आजकल सस्ते और बजट स्मार्टफोन लौंच हो रहे हैं, जिसके चलते अधिकतर लोगों के पास मोबाइल होता है. मोबाइल वौलेट से जहां पेमेंट करना आसान है. वहीं, इसका इस्तेमाल करते हुए कुछ सावधानी बरतना जरुरी है. आपको बताते हैं मोबाइल वौलेट का इस्तेमाल करते हुए कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए.

ओटीपी या जानकारी शेयर ना करें

सबसे जरुरी बात तो यह है की ट्रांजैक्शन के लिए आने वाला ओटीपी या मोबाइल वौलेट की जानकारी किसी से भी शेयर ना करें. मोबाइल वौलेट कंपनियां भी अपने यूजर्स को इस बारे में सूचित करती रहती हैं. इसी के साथ यह भी बताया जाता है की किसी का फोन आने पर भले ही वो कंपनी से आए, उससे ओटीपी या वौलेट सम्बंधित जानकारी ना दें.

लौगआउट रखें अकाउंट

अधिकतर लोग अपने फोन मोबाइल वौलेट ऐप में लौगिन कर के रखते हैं. ऐसे में अगर आपके फोन का पासवर्ड ना हो तो कोई भी इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है. इसी के साथ आपका फोन खो जाने पर, आपके वौलेट में मौजूद सारा पैसा भी चला जाएगा.

वौलेट में कैश एड करते समय न करें रिफ्रेश या बैक

कभी-कभी वौलेट में अकाउंट से पैसे भेजते समय नेटवर्क दिक्कतों की वजह से थोड़ा समय लग जाता है. ऐसे में उपयोगकर्ता को रिफ्रेश या बैक करने से बचना चाहिए. तब तक कुछ न करें, जब तक आपके पास ट्रांजैक्शन फेल या सक्सेसफुल होने का मैसेज न आ जाए.

ऐप लौक का करें इस्तेमाल

अगर आपने अपने स्मार्टफोन में लौक नहीं लगाया है तो कम से कम ऐप लौक का इस्तेमाल जरूर कर लें. इससे अगर आप मोबाइल वौलेट में हमेशा लौग-इन कर के भी रखेंगे तो वो सुरक्षित रहेगा. लौक ना होने से आपके वौलेट का किसी अन्य के द्वारा इस्तेमाल कर लिए जाने का खतरा पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है.

सेव पूरी कई तरह के स्वाद

एक तरह की चाट  है सेवपूरी, जिसे चाट के साथ ही साथ नाश्ते के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, उत्तर भारत के सभी प्रदेशों में इसे खाया जाता है. कई जगहों पर इसे पपड़ी चाट के नाम से भी जाना जाता  है.

रेस्तरां से ले कर सड़क पर लगने वाली चाट की दुकानों तक में यह खूब बिकती  है. सेवपूरी की सब से खास बात यह  है कि इस में कई तरह के स्वाद मिलते  हैं. यह 30 रुपए प्रति प्लेट से ले कर 80 रुपए प्रति प्लेट तक में बिकती  है. 1 प्लेट में 6 से ले कर 8 सेवपूरी होती  हैं. मुंबई में यह स्ट्रीट फूड की तरह बिकती है. सेवपूरी या पपड़ी चाट को बनाना बहुत ही सरल होता है.

पपड़ी चाट के कारीगर निशांत कुमार बताते  हैं कि सब से पहले पूरी या पपड़ी बनानी होती  है. यह करारी और छोटे आकार की होती  है. इसे मैदे से बनाया जाता है. इसे तेल या घी में फ्राई कर लेते हैं. जब करारी पूरी तैयार हो जाती  है, तो उस में डालने के लिए चाट को तैयार करते  हैं. इमली और खजूर की चटनी पहले से बना लें. जब चटनी तैयार हो जाए तो पपड़ी चाट को तैयार करने की शुरुआत करें. अगर आप 16 पपड़ी की चाट तैयार करना चाहते  हैं, तो निम्न सामग्री की जरूरत होती है.

पपड़ी चाट पर डालने के लिए सामग्री : 16 पपड़ी, 2 कप आलू कटे हुए, चौथाई कप मूंग उबली हुई, आधा कप टमाटर कटा हुआ, आधा कप प्याज कटा हुआ, 6 चम्मच इमलीखजूर की चटनी, 4 चम्मच हरी चटनी, आधा चम्मच चाट मसाला, आधा कप सेव, 1 चम्मच कटा हरा धनिया.

पपड़ी चाट बनाने की विधि : सब से पहले हरी चटनी तैयार करें. इस को लहसुन, खटाई और हरा धनिया डाल कर बनाया जाता  है. 1 प्लेट में 4 पपड़ी रखना ठीक रहता है. पपड़ी अलगअलग कर के रखें. अब हर पपड़ी में आधा चम्मच कटा आलू, प्याज, टमाटर, मूंग रख दें. फिर हरी और इमली खजूर की चटनी डाल दें. इस के बाद ऊपर से महीन किस्म के सेव डाल दें. बारीक कटे प्याज और हरी धनिया से इसे सजा दें. चाट बनाने का काम खाने के समय ही करें. इसे पहले से बना कर न रखें. पहले से बनाई गई चाट की पपड़ी में कुरकुरापन नहीं रह जाता है. पपड़ी चाट का मजा तभी आता  है, जब चाट में कुरकुरापन रहता  है.

मुंबई और कई शहरों में यह चाट एक रोजगार का जरीया भी है. सड़कों के किनारे इसे खूब बेचा जाता है. सेवपूरी मुंबई में भेल पूरी, पाव भाजी और बड़ा पाव जितनी ही मशहूर  है. यहां आने वाले समुद्र के किनारे टहलते हुए इसे खूब खाते हैं. सेवपूरी को तैयार करने में सब से अहम रोल इस के साथ परोसी जाने वाली चटनी का होता  है. चटनी का स्वाद ही इसे खास बनाता है.

सेवपूरी को बनाने में प्रयोग होने वाले सेव काफी महीन होने चाहिए. सेव बनाने में अच्छी किस्म के बेसन और तेल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसी तरह से पपड़ी को भी बनाने के लिए भी अच्छी किस्म के मैदे और तेल का इस्तेमाल करें.

एक बार लोगों की जबान पर सेवपूरी के स्वाद के चने भर की देर  है. इस के बाद दुकान चलने में कोई दिक्कत नहीं होती  है. लोगों को चाट में अपने मनपसंद स्वाद का ही इंतजार होता है. कुरकुरा, मीठा और तीखा स्वाद पपड़ी चाट या सेवपूरी को खास बनाता है.

सरसों के तेल में मिलावट से दूर रहें

दुनियाभर में खाद्य तेलों का इस्तेमाल साल दर साल बढ़ता जा रहा है. भारत में सरसों के तेल का खाद्य तेलों में खास स्थान है. ऐसे में सरसों से तेल निकालने की यूनिट लगा कर आप भी अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं.

तेल मिल शुरू करने के लिए जरूरी नहीं है कि आप बड़ी यूनिट ही लगाएं, बल्कि आप छोटी मिनी तेल मिल लगा कर भी काम शुरू कर सकते हैं. यह काम आप अपने घर में भी शुरू कर सकते  हैं.

इस के लिए सब से पहले जरूरी  है कच्चे माल की जानकारी होना कि कच्चा माल कहां से, कैसे खरीदा जाए. सरसों का तेल निकालने के लिए सब से पहले सरसों की ही जरूरत पड़ती है.

सरसों के 100 किलोग्राम दानों से तकरीबन 30 से 35 किलोग्राम तेल मिलता  है. बाकी अवशेष को खली के रूप में इस्तेमाल किया जाता  है, जिसे पशुओं को खिलाया जाता है.

सरसों एक मौसमी रबी फसल  है, जो साल में केवल एक बार ही पैदा होती  है, इसलिए अगर आप के पास जगह मौजूद है, तो कोशिश करें कि सीजन के दौरान ही ज्यादा से  ज्यादा सरसों खरीद कर रख लें,  क्योंकि सीजन के दौरान सरसों की कीमत कम होती है, वरना आप को बाद में दूसरे शहर या राज्य से भी सरसों खरीदनी पड़ सकती है, जिस से उस के लाने और ले जाने का खर्च बढ़ेगा और बेमौसम खरीदने पर माल महंगा भी मिलेगा.

सरसों का भंडारण एकदम सूखी जगह पर करें. वहां नमी न हो वरना सरसों खराब हो सकती है. खुद का कारोबार शुरू करने के लिए सरकार की अनेक योजनाएं  हैं, जिन के तहत आप को लघु उद्योग इकाई लगाने के लिए लोन भी मिल सकता  है. भारत सरकार की मुद्रा योजना के तहत भी लोन के लिए आवेदन किया जा सकता  है, जिस से 10 लाख रुपए तक का लोन मिल सकता है. इसलिए अपनी जरूरत के मुताबिक आप सरसों तेल एक्सपेलर खरीद कर अपनी तेल इकाई लगा कर कारोबार शुरू कर सकते हैं.

इसी सिलसिले में एक कृषि मेले में ‘फार्म एन फूड’ के इस प्रतिनिधि की बात मुकेश गोयल से हुई, जिन्होंने मुकेश गिनिंग मिल के नाम से मंडी आदमपुर, हिसार, हरियाणा में अपनी तेल निकालने की इकाई लगा रखी है. पीला घोड़ा के नाम से वे सरसों के तेल का उत्पादन कर रहे हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

कैसे करें मिलावटी तेल की पहचान

*      सरसों का तेल यदि फ्रिज में रखने पर जमने लगे तो समझो कि उस में मिलावट  है.

*      सरसों के तेल को हाथ पर रगड़ कर देखें. अगर वह हाथों पर रंग छोड़ने लगे तो मिलावट  है,  क्योंकि तेल में रंग और खुशबू के लिए रसायन मिलाए जाते हैं.

*      1 चम्मच सरसों के तेल में 5 मिलीलीटर नाइट्रिक एसिड डाल कर हिलाएं. अगर तेल रंग बदलता है, तो उस में सत्यानाशी के तेल की मिलावट हो सकती  है.

*      सरसों के तेल में मिलावट करने के लिए काफी आयल, अरंडी का तेल, सत्यानाशी का तेल, पाम आयल और सोयाबीन का तेल वगैरह के अलावा अनेक तरह के रसायन इस्तेमाल किए जाते हैं.

आप इस कारोबार से कब जुड़े और इस काम की शुरुआत कैसे की

इस काम की शुरुआत साल 2007 में मेरे पिता और मैं ने मिल कर की थी. इस से पहले हम कपास के क्षेत्र में काम करते  थे. हम ने उस समय कौटन मिल लगा रखी थी, लेकिन खास मुनाफा न होने के कारण हम ने उस काम को बंद कर के सरसों का तेल निकालने का काम शुरू किया. इस काम की शुरुआत करने के लिए उस समय तकरीबन 30 से 35 लाख रुपए खर्च हुए थे. कुछ खेती की जमीन भी हमारे पास थी, जिस का फायदा हमें मिला.

बेहतर तरीके से काम शुरू करने के लिए कम से कम कितने एक्सपेलर लगाने पड़ते  हैं

1 एक्सपेलर का खर्च तकरीबन साढ़े 4 लाख रुपए आता है और 4 एक्सपेलर लगा कर इस काम की शुरुआत कर सकते  हैं. इस काम को करने के लिए कितने लोगों की जरूरत होती है  ज्यादा लोगों की तो नहीं, हां 2-3 लोग इस काम के लिए जरूरी होते हैं, जो रोजाना तकरीबन 12 घंटे काम करते  हैं.

आज हर तरफ खाद्य तेलों में मिलावट का जोर है. इस बारे में आप क्या कहेंगे

जी हां, आज के समय में मिलावट बड़ी समस्या है. शुद्ध उत्पाद होगा तो जाहिर है कि कीमत भी ज्यादा होगी. आज हमें 100 दुकानदारों में से 10 दुकानदार ही ऐसे मिलते  हैं जो कहते  हैं कि हमें शुद्ध माल चाहिए वरना ज्यादातर लोगों को तो सस्ता माल ही चाहिए भले ही वह मिलावटी हो. लेकिन हमें बाजार में अपनी साख बनाए रखने के लिए अपने उत्पाद की गुणवत्ता का खास खयाल रखना होगा, तभी आप सफल उद्योगपति साबित हो सकते हैं.

सरसों के 2 तरह के तेल आ रहे हैं, एक कच्ची घानी का दूसरा एक्सपेलर का. कौन सा तेल सेहत के लिए सही है  खाने में इस्तेमाल करने के लिए कच्ची घानी का तेल बेहतर होता है. इस के लिए हम ने भी अपनी यूनिट में बदलाव किया है. एक्सपेलर की जगह अब कोल्हू लगाए गए हैं, क्योंकि अब लोगों की डिमांड कच्ची धानी का तेल है.

कच्ची घानी और पक्की घानी का क्या मतलब है

देखिए, कच्ची घानी में तेल कोल्हू के जरीए निकाला जाता है, जो हमारा पुराना तरीका था, जिस ने अब आधुनिक कोल्हू का रूप ले लिया है. हां, कोल्हू के जरीए तेल धीरेधीरे निकलता है. पक्की घानी तरीके यानी एक्सपेलर से तेल जल्दी निकलता है. इस तरीके में तेल गरम हो जाता है. कोल्हू से तेल धीरेधीरे निकलता है, इसलिए वह ठंडा रहता है और एक्सपेलर वाले तरीके से निकाले गए तेल से ज्यादा अच्छा होता है.

आधुनिक कोल्हू के बारे में कुछ जानकारी दें

जैसे पुराने समय में लकड़ी का कोल्हू होता  था, तरीका अब  भी वही है. हां अब थोड़ा आधुनिक हो गया  है. कोल्हू वैसा ही होता है. लकड़ी को पहले बैलों द्वारा चलाया जाता था अब बैलों की जगह बिजली की मोटर से कोल्हू चलाए जाते  हैं.

एक खास बात और कि कोल्हू में एक बार में सिर्फ 22 किलोग्राम सरसों ही डाली जाती  है, जिस का तेल निकालने में 1  घंटे का समय लगता है. हां, तेल की वैराइटी बढि़या होती है.

यह तेल पौष्टिक होता है और हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है. इसी को देखते हुए हम ने अपनी यूनिट में 48 कोल्हू लगवा रखे  हैं, ताकि उत्पादन समय से और अच्छा मिल सके. एक्सपेलर में एक बार में 5 क्विंटल सरसों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्या दोनों तरीकों से निकाले गए तेल की कीमत में भी फर्क होता है

हां, कुछ कंपनियां इस का फायदा उठाती  हैं. वे 15 रुपए प्रति किलोग्राम तक की दर से तेल की कीमत में फर्क कर देती  हैं. हम अपने उत्पादों में करीब 5 रुपए प्रति किलोग्राम का ही फर्क रखते  हैं.

आप 1 दिन में कितने तेल का उत्पादन करते हैं

हम 1 दिन में तकरीबन 4 टन तेल का उत्पादन कर लेते  हैं. आप किसानों को बताएं कि वे सरसों की कौन सी वैराइटी खरीदें, जिस से उन्हें अच्छी आमदनी हो सके

आजकल हाइब्रिड सरसों चल रही है, उस में तेल की मात्रा ज्यादा होती है. मुनाफे की नजर से यह ठीक भी है. वैसे हम जब भी सरसों खरीदते  हैं, तो उस का वजन देख कर ही खरीदते हैं. सरसों में अगर भारीपन होगा तो जाहिर है कि तेल की मात्रा भी ज्यादा ही होगी. आप सरसों कहां से लेते  हैं   सीधे किसानों से लेते  हैं या कृषि मंडी से लेते  हैं

हम सरकार द्वारा तय की गई कीमत पर ही मंडी से सरसों खरीदते हैं. यह पूरे साल मंडी में मौजूद होती  है,  क्योंकि किसान समयसमय पर मंडी में आ कर अपने अनाज और सरसों बेचते ही  हैं.

आज बाजार में कंपीटिशन का दौर है. आप इस में खुद को कहां खड़ा पाते हैं

देखिए, मैं किसी से कंपीटिशन नहीं करता. मेरा ध्यान केवल अपने उत्पाद की शुद्धता पर  है. आज बाजार में 20 फीसदी माल ही शुद्ध मिल रहा  है. 80 फीसदी मिलावटी माल बाजार में  है. मैं अपनेआप को 20 फीसदी वाली कैटेगरी में रखना चाहता हूं.

बाजार में सरसों का तेल कब ज्यादा शुद्ध मिलता है, फसल सीजन के समय या बिना सीजन के

देखिए, सीजन के समय तेल की गुणवत्ता में फर्क होता  है. उस समय सरसों ताजी आई होती  है, उस में नमी होती  है इसलिए तेल में कच्चापन और हरापन होता है. सीजन निकलने के कुछ महीने बाद सरसों की नमी खत्म हो जाती  है, इस से सरसों के तेल की गुणवत्ता भी अच्छी होती  है. इसलिए घरेलू इस्तेमाल के लिए अगर इकट्ठा तेल खरीदना हो, तो सरसों की फसल का सीजन निकलने के कुछ समय बाद ही खरीदें,  क्योंकि उस समय तक सरसों अच्छी तरह सूख जाती  है, जिस से में शुद्ध व पौष्टिक तेल निकलता है.

आप अपने प्रचार के लिए भी कोई जरीया अपनाते  हैं

इस में मुझे मंडी का काफी सहयोग रहता  है. मैं मंडी से हमेशा अच्छा माल खरीदता हूं, जिस से आसपास के लोग मुझे जानते  हैं और हमारे उत्पाद पर भरोसा करते हैं.

कोई  इस काम की शुरुआत छोटे स्तर से करना चाहे तो उस के लिए आप कुछ बताना चाहेंगे   कितनी रकम से यह काम शुरू किया जा सकता है   कहां से मशीनें खरीदें

छोटी मशीनें लगा कर 3 से 4 लाख रुपए से इस काम की शुरुआत की जा सकती है. जैसेजैसे मांग बढ़ती जाए मशीनें बढ़ा दें. मशीनें पंजाब के लुधियान से खरीदी जा सकती हैं. मशीन बनाने वाली कंपनियां मशीन के बारे में जानकारी देने के अलावा उस से जुड़े कारीगरों की भी जानकारी देती हैं.

अगर आप भी खुद का रोजगार शुरू करना चाहते  हैं या इस संबंध में अन्य जानकारी लेना चाहते  हैं, तो मुकेश गोयल से उन के मोबाइल नंबर 09354966007 पर बात कर सकते  हैं.

  • भानु प्रकाश राणा, मुकेश गोयल (मुकेश गिनिंग मिल्स)

 

पपीता: लागत कम फायदा ज्यादा

पपीता एक जायकेदार फल होने के साथ ही कई खूबियों से  भरपूर होता है. जब किसी को आंखों में कमजोरी या पेट की तकलीफ होती है, तब डाक्टर उसे पपीता खाने की सलाह देते  हैं. पपीता हर जगह आसानी से मिलने वाला फल है.

किसानों के लिए पपीते की खेती करना काफी फायदे का सौदा साबित हो सकता  है. पपीते की खेती में लागत कम आती  है, लेकिन समयसमय पर उस की देखभाल बहुत जरूरी  है. पपीते की खेती के लिए किसी खास किस्म की मिट्टी की जरूरत नहीं होती. इस की खेती किसी भी मिट्टी और जलवायु में आसानी से की जा सकती है.

पपीते की खेती के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. अगर किसान जरा सी सावधानी से काम लें, तो कम लागत में अच्छी पैदावार कर के काफी मुनाफा कमा सकते हैं.

रोपाई  : पौधे लगाने के लिए 1 या 2 मीटर की दूरी पर 50×50 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे खोद लेते हैं. 15-20 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद और 2 किलोग्राम आर्गेनिक खाद का मिश्रण मिट्टी में मिला कर सभी गड्ढों में जरूरत के हिसाब से भर देते  हैं.

जिन इलाकों में पाला पड़ता  है और सिंचाई के साधन मौजूद हों, वहां पौधे लगाने का काम फरवरीमार्च में करना चाहिए. उत्तर भारत में पौधे लगाने का काम आमतौर पर जुलाईअगस्त में किया जाता  है. वैसे तमाम प्रयोगों से साबित हो गया  है कि अक्तूबरनवंबर में पौधे लगाने से विषाणु रोग का खतरा कम हो जाता है.

सिंचाई  : पपीता उथली जड़ वाला पौधा है, इसलिए इसे ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती  है. यह पानी के भराव को सहन नहीं कर सकता. पपीते में कम दिनों पर हलकी सिंचाई करनी चाहिए. गरमी के दिनों में हर हफ्ते और सर्दी के मौसम में 10-15 दिनों पर सिंचाई करना ठीक रहता  है. बारिश के मौसम की खेती के लिए सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती.

खरपतवारों से बचाव : पपीते की अच्छी फसल के लिए 20-25 दिनों के अंतराल में खरपतवार निकालते रहना चाहिए. इस से यह फायदा होता  है कि पौधों का विकास तेजी से होता  है. पेड़ों की कतारों के बीच में गुड़ाई करना जरूरी है. 2 कतारों के बीच पलवार बिछा देने से खरपतवार कम हो जाते  हैं और नमी भी बनी रहती है.

कीड़ों और बीमारियों से बचाव

माहूं  : पपीते में खासतौर से माहूं का प्रकोप होता  है. ये पौधों का रस चूस कर फलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इन से फलों को बचाने के लिए किसान नीम के काढ़े   या गौमूत्र का छिड़काव कर सकते हैं.

लाल मकड़ी : ये कीड़े पत्तियों से रस चूस कर पौधों को कमजोर करते  हैं. ज्यादा प्रकोप होने पर कीड़े फलों से भी रस चूसने लगते हैं. इन की रोकथाम के लिए    गौमूत्र या नीम के काढ़े का छिड़काव करना चाहिए.

कालर राट  : यह रोग पीथियम एफेनीडरमेटेम नामक कवक से फैलता  है. इस के असर से जमीन के पास वाले तने पर धब्बे उभरते  हैं और तना सड़ने लगता है. कुछ दिनों बाद पौधा गिर जाता है. इस की रोकथाम के लिए अरंडी की खली और नमी की खाद देना बहुत जरूरी है. इस के अलावा गौमूत्र या नीम के काढ़े का छिड़काव भी करते हैं.

आर्द्रगलन  : यह नर्सरी का गंभीर रोग है, जो कई तरह के फफूंदों के आक्रमण की वजह से होता है. इस में पौधे जमीन के पास से सड़ने लगते हैं और गिर जाते हैं.

इस की रोकथाम के लिए केरोसिन तेल, गौमूत्र, नीम के तेल या नीम के काढ़े से बीच उपचारित कर के बोआई करते  हैं और नर्सरी की मिट्टी में माइक्रो नीम की खाद और अरंडी की खली मिला कर पौधे तैयार करते  हैं.

मौजेक  : यह विषाणु से होने वाला रोग  है, जो माहूं द्वारा फैलता है. भारत में पपीते की ज्यादातर प्रजातियां इस से प्रभावित होती हैं. इस के असर से पत्तियां चितकबरी हो जाती हैं और डंठल छोटे हो जाते  हैं, नतीजतन फल कम लगते हैं. इस की रोकथाम के लिए माहूं की रोकथाम करना जरूरी होता है. माहूं की रोकथाम के लिए नीम के काढ़े या गौमूत्र का 10-15 दिनों में छिड़काव करें. मौसम खराब होने पर तुरंत छिड़काव करना चाहिए.

नीम का काढ़ा : नीम की 25 हरी व ताजी पत्तियां तोड़ें और कुचल कर पीस लें. फिर उन्हें 50 लीटर पानी में पकाएं. जब पानी घट कर 20-25 लीटर रह जाए, तब बरतन उतार कर उसे ठंडा करें और जरूरत के हिसाब से छिड़काव करें.

गौमूत्र : देशी गाय का 10 लीटर मूत्र ले कर पारदर्शी कांच या प्लास्टिक के जार में भर कर 10-15 दिनों तक धूप में रखें और उस के बाद जरूरत के मुताबिक छिड़काव करें.

फलों की तोड़ाई  : जब फल पक जाते  हैं, तो उन का रंग हरे से पीला हो जाता  है. पके फलों को एकएक कर हाथ से तोड़ें. उन्हें जमीन पर न गिरने दें.

पैदावार  : पपीता के फलों की पैदावार प्रजातियों, जलवायु और रखरखाव पर निर्भर करती  है. औसतन 1 पौधे से 15 से 50 किलोग्राम तक फल हासिल होते  हैं. 1 हेक्टेयर से 400-500 क्विंटल तक उपज हासिल हो जाती है.

फलों का रखरखव : पपीता के फलों को बांस या प्लास्टिक की टोकरियों में भर कर शीतगृहों में रखा जाता  है. पपीता के फल 7-8 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान और 80-90 फीसदी सापेक्ष आर्द्रता पर 3 हफ्ते तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं.

पपेन निकलना : पपीते के फलों से हासिल दूध को सुखाने से जो सफेद पाउडर बनता है, उसे पपेन कहते  हैं. पपेन का इस्तेमाल पेट की तमाम बीमारियों की दवा के तौर पर किया जाता है. इस का इस्तेमाल बवासीर, टेप वर्म, रिंग वर्म के इलाज में, मांस को मुलायम बनाने में, सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में और ऊनी, रेशमी व सूती कपड़ों की सिकुड़न ठीक करने में किया जाता है.

जब पपीते का फल बड़ा हो जाता  है, तब उस पर स्टील के चाकू से 3 मिलीमीटर गहरा खरोंच बनाया जाता  है. खरोंचों से दूध टपकता  है, उसे स्टेनलेस स्टील या कांच के बरतन में जमा कर लेते  हैं.

इस दूध को 40 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान पर सुखा लिया जाता है. सुखाने से पहले इस में 0.05 पोटेशियम मेटा बायीसल्फाइट परीक्षक के  रूप में मिलाते  हैं. इसे कम तापमान पर ही सुखाते  हैं, क्योंकि ज्यादा तापमान पर सुखाने से इस का पेपसिन एंजाइम खत्म हो जाता है. इसे रासायनिक विधि से शुद्ध किया जाता है.

पपीते की किस्में

वाशिंगटन  : यह पश्चिमी भारत की खास किस्म  है. इस के तने की गांठें और पत्तियों के  डंठल बैगनी रंग के होते  हैं. फल अंडाकार होते  हैं और उन के गूदे का रंग पीला होता है. फलों का औसत वजन 1.5 से 2.5 किलोग्राम होता है.

कोयंबटूर : इस के पौधे बोने व एक लिंगी होते  हैं. इस के फल 60-70 सेंटीमीटर की ऊंचाई से लगने शुरू हो जाते  हैं. फलों का आकार गोल और औसत वजन 1.25 किलोग्राम तक होता है.

पूस डिलीशस : यह एक गाइनो डायोसियास किस्म है. इस के फल बहुत अच्छी क्वालिटी के होते  हैं. फलों का वजन 1 से 2 किलोग्राम तक होता  है.

पूसा मेजीसटी  : इस किस्म का पौधा जमीन से 50-55 सेंटीमीटर ऊंचा हो जाने पर फलने लगता  है. इस किस्म के एक पौधे से 30 से 40 किलोग्राम तक पैदावार हो जाती है.

पंत पपीता : यह किसम कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर ने विकसित की है. इस में फल जमीन से 50-60 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर लगते हैं. फलों का आकार मध्यम और औसत वजन डेढ़ किलोग्राम तक होता  है. इस के फल खाने वालों को काफी पसंद आते हैं.

सूर्या : भारतीय बागबानी अनुसंधान संस्थान बेंगलुरु ने इस संकर किस्म को विकसित किया है. इस के फल का औसत वजन 600-700 ग्राम तक हो जाता  है. इस के गूदे का रंग लाल होता है. इस किस्म में 60 किलोग्राम प्रति पौधा तक पैदावार हो जाती है.

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