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शिखर धवन बने वनडे में 4000 रन बनाने वाले दूसरे सबसे तेज बल्लेबाज

टीम इंडिया ने श्रीलंका के खिलाफ विशाखापट्टनम में हुए तीसरे और अंतिम वनडे में आठ विकेट से जीत हासिल करते हुए लगातार आठवीं द्विपक्षीय सीरीज जीती. यह वनडे टीम इंडिया के ओपनर बल्‍लेबाज शिखर धवन के लिए विशेष उपलब्धि वाला रहा. टीम इंडिया के धाक्कड़ खिलाड़ी शिखर धवन ने रविवार को वाई. एस. राजशेखर रेड्डी एसीए-वीसीए स्टेडियम में अपने चार हजार रन पूरे कर एक खास मुकाम हासिल किया.

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धवन ने 95 पारियों में अपने चार हजार रन पूरे किए इतना ही नहीं उन्होंने ने इस मैच में 85 गेंदों में 13 चौके और दो छक्कों की मदद से 100 रन बनाते हुए अपनी टीम को एक अहम जीत दिलाने में भी मदद की. बता दें कि भारत ने श्रीलंका को तीन वनडे मैचों की सीरीज में 2-1 से मात दी.

धवन से पहले भारतीय बल्लेबाजों में सिर्फ विराट कोहली ही ऐसे हैं जिन्होंने कम पारियों में चार हजार रन अपने खाते में डाले.

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धवन ने चार हजार रन पूरे करने के लिए 95 पारियां खेली जबकि कोहली ने चार हजार रन पूरे करने के लिए 93 पारियां खेली थीं. वहीं कुल पांच खिलाड़ियों ने धवन से कम पारियों में चार हजार रन पूरे किए हैं. उन्होंने इस प्रारूप में 12 शतक लगाए हैं. वह सबसे कम पारियों में 12 शतक लगाने वाले 5वें बल्लेबाज हैं.

भारतीय बल्लेबाजों में धवन से पहले कोहली ने 83 पारियों में 12 शतक लगाए थे. इसी तरह सबसे तेज 12 शतक दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के विकेटकीपर बल्‍लेबाज क्विंटन डी काक ने भी लगाए हैं. क्विंटन डी ने महज 74 पारियों में 12 शतक जड़े हैं.

अगर आपके पास है LIC पौलिसी, तो आप ले सकते हैं सस्ता लोन

आमतौर पर भारतीय परिवारों में किसी न किसी सदस्य की भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की पौलिसी रहती है. लेकिन शायद ही आपको यह जानकारी हो कि यह भविष्य सुरक्षित जीवन बनाएं रखने के साथ ही सस्ता लोन लेने के काम भी आती है.

एलआईसी की पौलिसी आपको निवेश, कर लाभ और लोन की भी सुविधा देती है. आमतौर पर लोगों में यही धारणा है कि लोन सिर्फ आपकी व्यक्तिगत कमाई के आधार पर ही मिलता है. लेकिन हम आपको बता दें कि एलआईसी की पौलिसी पर आप लोन ले सकते हैं और वह भी बाजार रेट से कम पर. आपको बता दें कि भारतीय जीवन बीमा नि‍गम से ली गई पौलि‍सी पर आप लोन ले सकते हैं.

ऐसे मिलेगा पौलिसी पर लोन

आपको बता दें कि आज के समय में सभी सरकारी और निजी सेक्‍टर के बैंक, बीमा पौलि‍सी पर लोन की सुविधा देते हैं. हालांकि यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि बीमा पौलिसी पर मिलने वाला लोन, पर्सनल लोन की तरह कम होता है लेकिन आसानी से मिल जाता है. इस लोन को लेने के दौरान बीमा पौलिसी को गांरटी के तौर पर बैंक के पास रखना होता है. लोन अमाउंट पौलिसी की सरेंडर वैल्यू पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए यदि आपकी पौलिसी की सरेंडर वैल्यू एक लाख रुपए हैं तो आपको 80 रुपए तक का लोन आसानी से मिल जाएगा. इतना ही नहीं यह लोन अन्य बैंकों के हिसाब से कम ब्याज दर पर भी होगा.

किन पौलिसी पर मिल सकेगा लोन

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सभी बीमा पौलिसी पर लोन नहीं मि‍लता. ग्राहक को एलआईसी के एंडोमेंट प्‍लान के तहत लोन फैसेलिटी मि‍लती है. इन पर सरकारी और निजी बैंक दोनों ही लोन देने के लि‍ए तैयार हो जाते हैं. इसके अलावा आपको ब्याज समेत लोन लौटाने के साथ ही बैंक की तरफ से यह विकल्प भी दिया जाता है कि आप ब्याज का भुगतान करें और लोन की रकम दावा भुगतान के समय काटने के लिए कहें.

इन दस्तावेजों की जरूरत

यदि आप भी बीमा पौलिसी पर लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए शुरुआत में आपको आवेदन पत्र भरना होगा. इसके बाद आपसे पौलिसी की मूल प्रति को बैंक जमा करवाएगा. साथ ही पौलिसी से मिलने वाले सभी लाभों को लोन की अवधि के दौरान, बैंक या कंपनी में जमा रखा जाएगा. इसके लिए बाकायदा आपसे पेपर्स पर साइन कराए जाते हैं. जब तक आप लोन की राशि को चुकता नहीं कर देते तब तक पौलिसी जमानत के तौर पर रहती है. इसके अलावा बैंक पौलिसी की भविष्‍य में जमा की जाने वाली प्रीमियम की रसीद भी मांगता है.

कि‍तनी ब्‍याज दर पर मि‍लता है लोन

बीमा पौलिसी पर मिलने वाले लोन की ब्‍याज दर का निर्धारण भुगतान किए गए प्रीमियम और दिए जाने वाले प्रीमियम की संख्‍या पर निर्भर करता है. इस पर ब्याज दर साधारण लोन पर लगने वाली ब्‍याज दर से कम होती है. आपको बता दें कि भारतीय जीवन बीमा निगम की वर्तमान ब्‍याज दर 9 प्रतिशत हैं. वहीं बैंक से लोन लेने पर आपको 10 से 14 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करना पड़ता है.

ऐसे किया जाता है लोन का भुगतान

बीमा पौलिसी पर लिए जाने वाले लोन का भुगतान अन्य लोन की तरह किश्तों में किया जाता है. यह कंपनी या बैंक की पौलि‍सी के अनुसार अलग-अलग होता है. इसकी न्‍यूनतम अवधि 6 महीने होती है. कई कंपनियां और बैंक बचे हुए पौलिसी टर्म के हिसाब से भी लोन औफर करती हैं.

अनुराग कश्यप को अभिषेक बच्चन का सहारा

वक्त इंसान से क्या क्या नहीं करवाता है. सूत्रों पर यकीन किया जाए, तो यह वक्त ही है, जो कि बौलीवुड के असफल कलाकार अभिषेक बच्चन और बौलीवुड के असफल निर्देशक अनुराग कश्यप को एक साथ ऐसी फिल्म के साथ जोड़ रहा है, जो फिल्म पिछले दो वर्षों से बन नहीं पा रही है. सूत्रों का दावा है कि आनंद एल राय ने दो वर्ष पहले फिल्म ‘‘मनमर्जिया’’ शुरू की थी, जिसके निर्देशक समीर शर्मा और कलाकार आयुष्मान खुराना व भूमि पेडणेकर थे. 25 प्रतिशत शूटिंग होने के बाद इस फिल्म से समीर शर्मा की छुट्टी कर दी गयी. चार माह बाद फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ फेम निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में यह फिल्म शुरू हुई, पर चार दिन बाद ही पुनः फिल्म बंद हो गयी और अश्विनी अय्यर तिवारी ने फिल्म ‘‘मनमर्जिया’’छोड़ दी.

सूत्रों का दावा है कि दो बार निर्देशक बदले जाने के बाद आनंद एल राय को जब ‘मनमर्जिया’ के लिए कोई सफल निर्देशक नहीं मिला, तो उन्होंने बेकार घूम रहे असफल निर्देशक अनुराग कश्यप को जोड़ा. अनुराग कश्यप के निर्देशक के तौर पर जुड़ते ही इस फिल्म को आयुष्मान खुराना व भूमि पेडणेकर ने फिल्म छोड़ दी. तब इस फिल्म के साथ तापसी पन्नू और मलयालम कलाकार दलक्वीर सलमान को जोड़ा गया. मगर सूत्र बता रहे हैं कि यह दोनों कलाकार भी अब इस फिल्म में नहीं हैं. सूत्रों का दावा है कि हर तरफ से हार कर अब फिल्म ‘‘मनमर्जिया’’ से अभिषेक बच्चन को जोड़ा गया है.

वैसे अनुराग कश्यप और अभिषेक बच्चन दोनों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है.

ज्ञातब्य है कि अभिषेक बच्चन की पिछली कई फिल्में बुरी तरह से असफल रहने के बाद से उनके पास फिलहाल कोई फिल्म नहीं है. तो दूसरी तरफ यही हालात अनुराग कश्यप के हैं. अनुराग कश्यप की लगातार कई फिल्में असफल होने के बाद उनके तीनों भागीदारों ने उनसे रिश्ता खत्म कर‘‘फैंटम’’ कंपनी ही बंद कर भागीदारी वाली कंपनी‘फैंटम’में बिखराव हो गया. अनुराग कश्यप के तीन भागादारों ने उनका साथ छोड़ दिया. हर तरफ से निराश होकर अनुराग कश्यप को बड़ी मुश्किल से दो वर्ष से की हुई फिल्म ‘मनमर्जिया’मिली है, पर उनके साथ कोई कलाकार काम करने को तैयार नहीं था. तो अब वह असफल कलाकार अभिषेक बच्चन पर दांव लगाने जा रहे हैं.

भाई के लिए वरूण धवन के पास वक्त नहीं

वरूण धवन का करियर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है. आज की तारीख में वह इस कदर व्यस्त हैं, कि उनके पास अपने निर्देशक भाई रोहित धवन के लिए भी वक्त नहीं है. सूत्रों के अनुसार निर्माता साजिद नाड़ियादवाला के लिए रोहित धवन एक सुपर हीरो वाली फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं, जिसका निर्देशन रोहित धवन ही करेंगे. रोहित धवन अपनी इस फिल्म से अपने भाई व अभिनेता वरूण धवन को जोड़ना चाहते हैं, मगर रोहित की इस फिल्म में अभिनय करने के लिए वरूण धवन के पास वक्त नहीं है.

सूत्र बता रहे हैं कि वरूण धवन इन दिनों फिल्म ‘‘अक्टूबर’’ का पैचवर्क की शूटिंग कर रहे हैं. इसके बाद वह जनवरी माह में अनुष्का शर्मा के साथ फिल्म ‘‘सुई धागा’’ की शूटिंग शुरू करेंगे. इसके बाद उन्हे अभिषेक बर्मन की मल्टीस्टारर फिल्म पूरी करनी है. इतनी व्यस्तता के चलते वरूण ने अपने भाई रोहित से साफ कह दिया है कि वह उन्हे कम से कम 2019 तक समय नहीं दे सकते.

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मजेदार बात यह है कि रोहित धवन चाहते हैं कि वह अभिनेता के तौर पर सफल अपने छोटे भाई के साथ फिल्म करें, पर छोटा भाई तो अलग ही व्यस्त है. वरूण धवन के मना करने पर अब रोहित धवन क्या करेंगे पता नहीं मगर साजिद नाड़ियाडवाला ने उन्हे सलाह दी है कि वह इस फिल्म के लिए रितिक रोशन से बात कर लें.

हादिया के बहाने लव जिहाद पर चर्चा करना जरूरी है

केरल की अखिला का मुस्लिम युवक शफीन जहां से प्रेम विवाह और फिर अखिला से धर्म बदल कर हादिया बन जाना हिंदू धर्म के रखवालों को धर्म के नाम पर घर घर में घुस कर पैट्रोल डालने का काम कर गया है. इस प्रेम और विवाह को लव जिहाद का नाम दे कर उन्होंने इतना होहल्ला कर डाला कि केरल उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना पड़ा है कि इन दोनों का क्या किया जाए.

लव जिहाद एक बेहूदी बात है और शादियां केवल पंडे मौलवियों के हाथों अपने धर्म या जाति वालों के साथ ही हो सकती हैं के रिवाजों को कायम रखने के लिए की जा रही हैं. गांव गांव में हल्ला मचाया जा रहा है कि मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसा कर मुस्लमानों की गिनती बढ़ाने में लगे हैं ताकि एक दिन भारत मुस्लमानों का देश हो जाए. 2002 के बाद नरेंद्र मोदी खुद चुनाव प्रचार में गुजरात में हिसाब गिनाते घूमे थे कि मुस्लिम 5 से 25 हो रहे हैं ताकि उन की गिनती बढ़ जाए और वे सत्ता पर कब्जा कर सकें.

जवानों के दिलों पर राज करने वाला धर्म कोई नहीं होता पर सारे देश में धर्म, जाति, गोत्र को लेकर चौधराहट दिखाने वाले घर घर में घुस कर जांच परख रहे हैं कि कहीं कोई सैकड़ों साल पुराने रीति रिवाजों को छोड़ कर शादी तो नहीं कर रहा. अखबार के शादी के विज्ञापन तो जातियों के खानों में बंटे होते ही हैं, इंटरनेट की साइटों पर भी आप को अपनी जाति, धर्म, गोत्र बताना होता है तभी कोई साथी मिलता है.

इस मामले में पूछताछ कर के भी सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से युवाओं के हक को कम किया है. उन्होंने हादिया को पढ़ने की आजादी दी है पर उस पर देख रेख की जो जिम्मेदारी डीन पर डाली है उस से साफ है कि 24 साला हादिया या अखिला अब सरकारी मेहमान है, जेल हो या जेल से बाहर.

यह मामला तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को कब का दरवाजे से बाहर फेंक देना चाहिए थाकि जब लड़की बालिग है तो उसे हक है कि वह किस से शादी करे और किस धर्म में रहे. धर्म को मानव इच्छा से ऊपर रखना ही गलत है. यही कट्टरपंथियों को ताकत देता है. यह संदेशा तो चला गया ही कि दूसरे धर्म वाले से प्रेम और शादी करोगे तो हल्ला मचेगा और जब तक पैसा और साधन न हों विवाह टिक न पाएगा.

दोनों अदालतों को तो उन को जेल भेजना चाहिए था जो शादी पर रोकटोक लगा रहे थे. चाहे वह लड़की का पिता अशोकन ही क्यों न हो जो जादू टोने और बहकाने के बहाने लगा रहा था. कट्टरपंथियों को किसी भी तरह की छूट नहीं मिलनी चाहिए, बाल बराबर भी नहीं, कम से कम अदालतों से तो नहीं. जब एक शादी के मामले में श्याम दीवान, कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह जैसे भारी भरकम वकीलों की जरूरत पड़े तो यह आजाद भारत की निशानी नहीं है. यह तो सरकार, अदालतों, पुलिस, कट्टरों का साफ दखल है, यह उन की प्रेम पर जीत है. सुप्रीम कोर्ट ने जो किया ठीक है पर उस का गलत संदेश भी जाता है.

अनमोल रिश्ता दोस्ती का

जब पारिवारिक रिश्तों की डोर टूट जाती है तो एक और रिश्ता हमारे जीवन में काफी महत्त्व रखता है और वह है दोस्ती का, जो विश्वास, सहयोग पर टिका होता है. दोस्त राजदार भी होते हैं और सुखदुख के साथी भी. ऐसे में जो लोग शादी के बारे में नहीं सोचते, वे दोस्ती की छाया और सुरक्षा में रह सकते हैं.

केरल की बास्केटबौल खिलाड़ी गीता वी मेनन और प्लेबैक सिंगर सोनी साई उन सभी लोगों के लिए आदर्श हैं, जिन्हें जिंदगी में अकेलेपन की समस्या है. गीता और सोनी का रिश्ता सभी परिभाषाओं से परे है. आज के जीवन में जहां शादी, तलाक और निराशाएं आम बात है, वहां यह दोस्ती एक बहुत अच्छा उदाहरण है.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जीवन में एक सच्चा दोस्त होना बहुत जरूरी है. एक ऐसा दोस्त जिस से आप अपना दुखदर्द बांट कर मन के बोझ को हलका कर सकें.

दोस्ती की यों तो कई कहानियां हैं, पर यहां हम आप को ऐसी कहानी बताते हैं जो औरों से जुदा है:

पहली मुलाकात

वे पहली बार अचानक बारिश में मिली थीं. उन्हें खुद ही इस बात का पता नहीं था कि उस दिन एक छाते के नीचे 2 अजनबियों के बीच एक अनोखी दोस्ती की शुरुआत हो चुकी थी.

गायिका सोनी साई अपने बेटे के साथ उस की बास्केटबौल की प्रैक्टिस पर आई थीं.

गीता बास्केटबौल खिलाड़ी और प्रशिक्षक हैं. वे इतनी तेज बारिश में इन के लिए छाता ले कर आईं और कहा, ‘‘आओ.’’ इस एक शब्द से ही इन की दोस्ती की शुरुआत हुई.

एकदूसरे का भरपूर साथ

जब गीता और सोनी मिलीं, तब दोनों ही अपने अकेलेपन से भरी जिंदगी के उतारचढ़ाव से गुजर रही थीं. दोनों एकदूसरे का सहारा बन सकती हैं, यह सोच धीरेधीरे इन के बीच पैदा होने लगी और यह सच भी हुआ. आज ये दोनों एलमकारा में एक ही घर में रहती हैं. सोनी गीता के साथ तब खड़ी रहीं जब गीता बास्केटबौल में उभरते खिलाडि़यों के लिए एक अकादमी खोलने की सोच रही थीं. सोनी ने खुद ही इस अकादमी को खोलने का सुझाव दिया था. पेगासस नाम से खुली यह अकादमी मुप्पाथदम गवर्नमैंट हायर सैकेंडरी स्कूल में काम करती है. यह जगह विशेष रूप से इसी अकादमी के लिए मिनिस्टर इब्राहिम कुंजू द्वारा सुनिश्चित की गई है.

5 से 15 वर्ष की आयु तक के बच्चों को यहां ट्रेनिंग दी जाती है. सोनी पेगासस के मैनेजर के रूप में यहां की हर छोटीबड़ी चीज पर निगरानी रखती हैं. बहुत से बच्चे जो यहां ट्रेनिंग लेने आते हैं वे थोड़े गरीब परिवारों से होते हैं, तो ऐसे में उन्हें कम शुल्क में बास्केटबौल की ट्रेनिंग दी जाती है. हालांकि यह अकादमी वित्तीय संकट से जूझ रही है.

गीता का कहना है कि वे अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेंगी. एफएसीटी के सभी साथी खिलाडि़यों ने उन का पूरापूरा साथ दिया.

गीता कहती हैं, ‘‘सोनी ने खुद इस अकादमी को खोलने का सुझाव दिया. जब यह अकादमी शुरू हुई, तो सोनी हर समय मेरे साथ खड़ी रहीं और मुझे सहारा दिया. जब गीता मेरे साथ रिकौर्डिंग के समय स्टूडियो में होती हैं, तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है. जब मैं मलयालम फिल्म ‘जलेसिया’ में गाना गा रही थी तब गीता भी मेरे साथ ही थीं. वे डाइरैक्टर जिन्होंने हमारी दोस्ती की गहराई को समझा, उन्होंने गाने के पूर्वाभ्यास के सभी चित्रों में गीता को भी शामिल किया.’’

ये दोनों ही अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बहुत मेहनत करती हैं, पर जब ये दोनों साथ होती हैं तब इन के व्यवसाय का ग्राफ और भी ऊपर हो जाता है. अकेली महिलाओं को भी जीने का हक है, उन्हें भी व्यवसाय की आवश्यकता है.

जब एफएसीटी की टीम ने बास्केटबौल में राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सारे खिताब जीते तो इस का सब से अधिक श्रेय गीता वी मेनन को दिया गया. पिछले 10 वर्षों से एफएसीटी की महिलाएं सभी मुख्य टूरनामैंट्स जैसे फैडरेशन कप आदि में अपना परचम लहरा रही हैं. गीता ने तब भी इसी खेल को चुना जब उन की बहुत सी सखियां इस राह को छोड़ कर अपने परिवारों की तरफ जाने लगी थीं पर गीता के जेहन में हमेशा से ही सिटी की आवाज और खेल का जज्बा जिंदा रहा. एक ऐसी महत्त्वाकांक्षा जिस ने गीता को इस खेल में बने रहने की शक्ति दी. जिंदगी की कठिन समस्याओं में भी डट कर खड़े रहने की महत्त्वाकांक्षा ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया.

गीता की उपलब्धियां

गीता ने खेल की दुनिया में 2013 में आयोजित वेटेरंस स्पोर्ट्स में अपनी वापसी की. यह एक ऐसे सैनिक की वापसी थी, जिस पर उम्र का कोई प्रभाव नहीं हुआ. उन्होंने लौंग जंप और राष्ट्रीय स्तर पर 4,100 मीटर रिले रेस में गोल्ड मैडल जीता, 2014 में जापान में आयोजित एशियाई मास्टर्स ऐथलैटिक्स खेलों में उन्होंने सिल्वर मैडल जीता.

जापान से लौटने पर एफएसीटी ने उन का जोरदार स्वागत किया. अगस्त 2015 में पैरिस में हुई वर्ल्ड मास्टर्स ऐथलैटिक्स मीट में वे अपने सब से पसंदीदा 2 खेलों में 5वें स्थान पर रहीं. जब वे इन खेलों की तैयारी करने में इतना खतरा उठाती थीं और खूब पैसा भी लगाती थीं तो केवल जीत ही उन के दिमाग में होती थी. यह टूटे दिल पर एक मरहम की तरह काम करता था.

सोनी साई के अंदर की गायिका को पहचान की जरूरत अवश्य है पर जो गीत उन्होंने गाए हैं उन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं है. उन के सभी गाने बहुत मशहूर हैं. साई ऐसी कलाकार हैं जिन्हें खुद का प्रचार करना बिलकुल नहीं आता. वे लाइट म्यूजिक में और स्कूल में राज्य स्तर पर 1998 में मिमिक्री के लिए पहला स्थान जीत चुकी हैं. उन्होंने 4000 से भी अधिक स्टेज प्रोग्रामों में गाने गाए हैं. सोनी हरिहरन, यसुदास, एमजी श्रीकुमार, ब्रह्मानंदन, वेणुगोपाल, जयचंद्रन आदि मशहूर गायकों के साथ प्लेबैक सिंगिंग कर चुकी हैं.

सोनी साई ने पहला गाना 13 वर्ष की उम्र में ‘सुधावासम’ मूवी के लिए गाया. इस के बाद यशुदास के साथ ‘अधीना’ मूवी के लिए गाया. इस के बाद ‘कनल कन्नडी’, ‘भारथन’, ‘धीरा’, ‘बांबे मार्च 12’ व ‘निद्रा’ में गाने गाए. प्रसिद्ध गायक सोनू निगम के साथ ‘चक्कारा माविन कोमबाथु…’ भी गाया.

उन्हें बहुत से पुरस्कार भी मिले जैसे कामुकरा फाउंडेशन अवार्ड (1998), सार्क अवार्ड (1999), बैस्ट सिंगर अवार्ड, राघवन मास्टर ट्रिब्यूट (2014), अरबन डेवलपमैंट कौंसिल द्वारा रोल मौडल सिंगर का खिताब (2015) और केरला अचीवमैंट फोरम जैसे खिताबों से इन्हें नवाजा जा चुका है, इन्होंने यूके, यूएसए, यूएई और पूरे भारत में बहुत शोज किए.

ब्राइडल मेकअप की बारीकियां

हर दुलहन चाहती है कि उस का स्टाइल और लुक ऐसा हो, जिस से वह न सिर्फ उस के जीवनसाथी के, बल्कि ससुराल वालों के भी दिल का नूर बन जाए. तो ऐसा क्या किया जाए, जिस से दुलहन की खूबसूरती पति का मन मोह ले?

सैलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट ओजस राजानी बताती हैं कि सब से पहले दुलहन की पर्सनैलिटी, स्किन टाइप, बालों का टैक्स्चर, कलर, आईब्रोज शेप और फेस कट को परखना होता है. अगर इस में कहीं किसी तरह की कमी है, तो दुलहन को ऐक्सरसाइज और स्किन केयर रूटीन की सलाह दी जाती है, जिस से मेकअप से पहले स्किन और जवां व निखरीनिखरी दिखाई दे.

स्किन केयर रूटीन

स्किन केयर रूटीन के बारे में बात करते हुए ब्राइडल मेकअप आर्टिस्ट आकांक्षा नाइक का कहना है कि दुलहन के लिए अपनी स्किन टाइप के बारे में पता होना बेहद जरूरी है.

शादी से पहले उसे रोजाना क्लींजिंग, टोनिंग और मौइश्चराइजिंग का रूटीन अपनाना चाहिए. यदि स्किन ड्राई है तो सोप फ्री कंसीलर का इस्तेमाल करना चाहिए. त्वचा को दिन में 2 बार मौइश्चराइज भी करना चाहिए.

यदि स्किन टाइप औयली है, तो क्लींजिंग के साथसाथ दिन में 2-3 बार चेहरा धोना भी जरूरी है. औयली स्किन टाइप के लिए टोनिंग बेहद जरूरी है. इस से चेहरे के पोर्स बंद होते हैं और त्वचा से तेल का रिसाव रुकता है. इस के साथसाथ त्वचा को मौइश्चराइज्ड करने के लिए वाटर बेस्ड मौइश्चराइजर लगाना चाहिए. औयली स्किन के लिए फेस मास्क लगाना भी बेहद जरूरी है. इस से चेहरे की डैड स्किन से छुटकारा मिलता है और त्वचा सांस ले पाती है.

वाटर बेस्ड व क्रीम बेस्ड मेकअप का चुनाव

मेकअप में सब से जरूरी है फाउंडेशन का सही होना. अगर बेस मेकअप अच्छी तरह से लगाया गया है और फाउंडेशन का रंग स्किन से अच्छी तरह मेल खाता है, तो एक लाइनर लगा कर भी दुलहन खूबसूरत लग सकती है.

इसी तरह क्रीम बेस्ड मेकअप उन के लिए अच्छा है, जिन के चेहरे पर दागधब्बे, पिंपल्स और डार्क स्पौट्स नहीं होते. लेकिन औयली स्किन के लिए क्रीम बेस्ड मेकअप का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए, वहीं दागधब्बे वाली स्किन के लिए वाटर बेस्ड मेकअप जरूरी है. अगर शादी के दौरान धूप में रहना हो, तो वाटर बेस्ड मेकअप की जरूरत पड़ेगी.

कौंप्लैक्शन के अनुसार मेकअप

आकांक्षा ने बताया कि भारतीयों में 3 तरह के कौंप्लैक्शन होते हैं- गोरा, गेहुआं और सांवला. कौंप्लैक्शन के अनुसार मेकअप का चुनाव करें इस तरह:

गोरी त्वचा : अगर आप की रंगत गोरी है तो आप पर रोजी टिंट बेस कलर और कुछ मौकों पर सुनहरे रंग का फाउंडेशन बेस फबेगा. आंखों का मेकअप करते समय ध्यान रखें कि आईब्रोज को ब्राउन कलर से उभारें. जहां गोरे रंग पर पिंक और हलके लाल रंग का ब्लशर बेहद जंचता है, वहीं होंठों पर लाइट कलर की लिपस्टिक अच्छी लगती है.

गेहुआं रंग : अगर आप का कौंप्लैक्शन गेहुआं है, तो आप को स्किन कलर से मैच करता वाटर बेस्ड फाउंडेशन लगाना चाहिए. त्वचा पर लाइट रंग का फाउंडेशन लगाने से बचना चाहिए. आंखों के मेकअप के लिए ब्रौंज या ब्राउन कलर का इस्तेमाल करना चाहिए. गालों पर ब्रौंज कलर के ब्लशर का इस्तेमाल करना चाहिए. इस स्किनटोन के अनुसार आप पर डार्क रंग की लिपस्टिक जंचेगी.

सांवली त्वचा : सांवली त्वचा का मेकअप करने से पहले सब से ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. सांवली त्वचा के लिए वाटर बेस्ड नैचुरल ब्राउन टोन फाउंडेशन का इस्तेमाल करना चाहिए, इस के लिए फाउंडेशन की ब्लैंडिंग पर भी अच्छी तरह से ध्यान देना चाहिए.

ध्यान रहे कि आप त्वचा के रंग से गहरे शेड का फाउंडेशन इस्तेमाल न करें. आंखों का मेकअप करते समय ध्यान दें कि लाइट रंग के आईब्रोज कलर का इस्तेमाल न करें, लेकिन आउटलाइन के लिए काजल का इस्तेमाल करें. ब्लशर के लिए प्लम और ब्रौंज कलर का इस्तेमाल करें. लिप कलर के लिए पर्पल, रोज और पिंक ग्लौस का इस्तेमाल कर सकती हैं.

ओजस के अनुसार दुलहन इस बात का भी खयाल रखे कि मेकअप ज्यादा नहीं होना चाहिए. इस से उस की उम्र ज्यादा दिखाई देती है, इसलिए हैवी मेकअप से बचें.

ध्यान से चुनें लिप कलर

ओजस के अनुसार आजकल बौलीवुड तारिकाएं भी कम मेकअप और लाइट शेड की लिपस्टिक लगाना पसंद करती हैं. अब हाई डैफिनेशन कैमरे के दिन हैं, जो आप के मेकअप की बारीकियों को और उभार देते हैं. अगर आप डार्क शेड लिपस्टिक लगाएंगी, तो इस से आप शादी की तसवीरों में डरावनी लग सकती

ट्रैंड के अनुसार आजकल मार्केट में कई तरह की लाइट शेड लिपस्टिक आ रही हैं, जो लाइट होते हुए भी आप को डार्क लिपस्टिक के जैसा लुक देंगी. इस से आप के लिप्स को थोड़ा पाउट लुक भी मिल जाएगा. वहीं अगर आप डार्क लिपस्टिक का चुनाव करती हैं, तो आप को आई मेकअप कम करना चाहिए. अगर आप हैवी आई मेकअप कर रही हैं, तो आप को लिप कलर में लाइट शेड ही चुनना चाहिए.

कलर्ड लैंस का चुनाव

ओजस बताती हैं कि आप का रंग गोरा हो, गेहुआं हो या सांवला, आप को आई लैंस के लिए हलके भूरे रंग का ही चुनाव करना चाहिए. आई लैंस में ग्रीन और ब्राउन को मिला कर एक नया कलर बनाया गया है, जो देखने में बहुत अच्छा लगता है. आप को ग्रे और नीला रंग नहीं चुनना चाहिए.

मेकअप से पहले फ्लैश टैस्ट

दुलहन हो या अदाकारा, आप का मेकअप बेस या फाउंडेशन परफैक्ट होना चाहिए. कैमरे की फ्लैश की वजह से मेकअप पहले ही ग्रे दिखाई देता है. ऐसे में आप को बेस लगाने के बाद अपने फोन के कैमरे की फ्लैश औन कर के एक तसवीर लेनी चाहिए. इस से आप को साफ पता चल जाएगा कि आप ने फाउंडेशन अच्छी तरह से लगाया है या नहीं. इसे मेकअप आर्टिस्ट फ्लैश टैस्ट कहते हैं.

कम बेस के साथ जरूरत भर मेकअप

को हमेशा तवज्जो देनी चाहिए. कम फाउंडेशन, लाइट कलर ब्लश और हलके रंग की लिपस्टिक आप के लुक को उभार देती है. इसी सौफ्ट स्टाइलिंग के साथ दुलहन बेहद खूबसूरत दिखाई देती है. इस के अलावा हमेशा अपनी पर्सनैलिटी को ध्यान में रख कर मेकअप करना चाहिए.

जरूरी मेकअप टिप्स

– दुलहन के पास हमेशा उस की स्किनटोन से मैच करता कंसीलर होना चाहिए ताकि वह आंखों के नीचे के काले घेरों और दागधब्बों को आसानी से छिपा सके. दुलहन के लिए टिंटेड मौइश्चराइजर भी बेहद जरूरी है, जिसे लगाने के बाद चेहरे पर हलका ग्लो आ जाता है.

– अगर आप के बाल सही तरह से स्टाइल किए गए हों, तो आप बेहद खूबसूरत दिखाई देंगी. अगर आप बालों को बेबी रखती हैं तो यह आप को एक स्टाइलिश और ग्लैमरस लुक देगा. स्ट्रेट बाल आप को मैच्योर लुक देंगे.

प्रेम विवाह और नाक फुलाती पंचायतें

अपने कुदरती खजाने के लिए मशहूर शांत राज्य केरल में शादी का एक ऐसा मामला गरमाया हुआ है, जिस ने ‘लव जिहाद’ के जिन को बोतल से दोबारा बाहर निकाल दिया है. हालांकि वह जिन भी शर्मिंदा है कि प्यार जैसी पाक चीज को समाज की नाक की खातिर क्यों बारबार बलि का बकरा बनाया जाता है?

मामला कुछ यों है कि केरल के कोट्टायम जिले के टीवीपुरम इलाके की रहने वाली अखिला अशोकन ने एक मुसलिम नौजवान शफीन से निकाह करने के लिए अपने धर्म को बदला और हादिया बन कर उस की जीवनसंगिनी बन गई.

हादिया और शफीन ने निकाह तो कर लिया था, पर उन के आगे की राह कांटों भरी थी, क्योंकि हादिया के पिता अशोकन ने इस मामले को ‘लव जिहाद’ का नाम दे कर केरल हाईकोर्ट का रुख कर लिया था.

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अशोकन ने यह आरोप लगाया कि उन की बेटी अखिला यानी हादिया से जबरदस्ती धर्म बदलवाया गया है और उसे ले कर चिंता जताई कि हादिया को आतंकवादी संगठन आईएस में शामिल कराने के लिए सीरिया भेज दिया जाएगा. यह भी कहा जा रहा है कि इसलामिक स्टेट ने हादिया को अपने यहां भरती किया है, शफीन तो मुहरा भर है.

बता दें कि निकाह के बाद शफीन हादिया को मस्कट ले जाने वाले थे, जहां उन के मातापिता भी रहते हैं, लेकिन चूंकि हादिया यानी अखिला के पिता अशोकन अदालत का दरवाजा खटखटा चुके थे, इसलिए अदालत ने शफीन के हादिया के साथ मस्कट जाने पर रोक लगा दी.

इतना ही नहीं, केरल हाईकोर्ट ने इस शादी को गैरकानूनी करार देते हुए इसे ‘लव जिहाद’ बताया और हादिया को उस के परिवार वालों के हवाले कर दिया. साथ ही, 16 अगस्त को मामले की जांच नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी.

केरल हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए शफीन ने सुप्रीम कोर्ट से नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी की जांच को बंद करने की गुजारिश करते हुए एक याचिका दायर की थी, जिस में एजेंसी पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप लगाया गया था.

उस याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हादिया के पिता अशोकन को नसीहत देते हुए कहा था कि उन्हें अपनी बेटी की निजी जिंदगी में दखलअंदाजी करने का कोई हक नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, लड़की की उम्र 24 साल है और उसे अपने भविष्य के बारे में फैसला करने का पूरा हक है. मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने सवाल उठाया कि यह मामला ‘लव जिहाद’ का है या नहीं, यह बाद की बात है, लेकिन क्या हाईकोर्ट के पास संविधान के अनुच्छेद 226 में दिए गए अधिकार का इस्तेमाल कर के इस शादी को खारिज करने का हक है?

पीठ ने इस मामले की जांच नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी द्वारा कराने के आदेश के मुद्दे पर भी सवाल खड़ा किया. साथ ही, कोर्ट ने लड़की का ब्रेनवाश करने की संभावनाओं को तलाशने का निर्देश दिया.

इधर नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी ने बताया कि केरल में कई कट्टरपंथी समूह लोगों का धर्म बदलवाने की कोशिश में लगे हैं और वे ताजा मुसलिम बने लोगों को जिहाद के नाम पर अफगानिस्तान और सीरिया भेज रहे हैं. हादिया के मामले में भी ऐसा ही होने का शक जताया गया.

जब हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच की, तो पाया कि अशोकन की नई याचिका के बाद हादिया की जल्दबाजी में शादी करा दी गई थी. ऐसा भी लगा कि हादिया को अपने होने वाले पति के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी. हादिया का धर्म बदलवाने वाली औरत की संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों की बात भी कोर्ट के सामने आई.

जज इस नतीजे पर भी पहुंचे थे कि हादिया का दिमाग अपने काबू में नहीं है. उस पर कट्टरपंथ का इतना गहरा असर है कि वह सहीगलत सोचने की हालत में नहीं है.

नतीजतन, इसी साल 25 मई को हाईकोर्ट ने इस निकाह को गैरकानूनी मानते हुए रद्द कर दिया और माना कि इस शादी की कानून की नजर में कोई अहमियत नहीं है.

हादिया और शफीन के निकाह का मामला तो ‘लव जिहाद’ की तलवार पर बड़ी अदालतों में लटका हुआ है, लेकिन हमारे देश में अपनी जातबिरादरी या धर्म से बाहर प्यार और उस के बाद शादी करने वाले जोड़ों पर सितम ढाने वाली गांवों की पंचायतें भी किसी से कम नहीं हैं.

बात साल 2016 की है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के महेशवारा गांव में एक लड़के को गांव की ही एक लड़की से प्यार हो गया और 14 दिसंबर को वे दोनों गांव से भाग कर एक रिश्तेदारी में चले गए और शादी कर ली.

पता चलने पर लड़की के पिता और गांव वाले उन्हें वापस गांव ले आए और 17 दिसंबर की रात को पंचायत हुई. लड़के ने लड़की के साथ रहने की इच्छा जताई, तो पंचायत ने तालिबानी फैसला सुनाते हुए गांव से बाहर शादी करने को कहा और गांव में रहने के एवज में

51 हजार रुपए और 5 मन चावलदाल देने की सजा सुनाई.

लड़के के घर वालों ने यह शर्त मानने से इनकार कर दिया, तो दबंगों ने लड़कालड़की को जम कर पीटा और गांव से बाहर निकाल दिया.

साल 2013 में छत्तीसगढ़ में एक दलित लड़के द्वारा अंतर्जातीय शादी करने पर उसे कड़ी सजा मिली. दरअसल, रामगढ़ जिले के कोसमंदा गांव के निर्मल सारथी ने दूसरी जाति की एक लड़की सुमन से अगस्त, 2010 में घर वालों को बिना बताए घर से भाग कर शादी कर ली थी.

इस के बाद सारा गांव नाराज हो गया. पंचायत बैठी, तो निर्मल सारथी की मां रामबाई और छोटे भाई को बुलाया गया और उन की पिटाई की गई. वे दोनों किसी तरह अपनी जान बचा कर भागे.

अगले दिन रामबाई अपने परिवार वालों के साथ थाने पहुंची, पर उन लोगों की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. पुलिस सुपरिंटैंडैंट और कलक्टर से भी शिकायत की गई, पर कोई फायदा नहीं हुआ.

उधर गांव की पंचायत ने अंतर्जातीय शादी करने वाले निर्मल सारथी और उस के परिवार वालों को गांव में नहीं रहने का लिखित फरमान जारी कर दिया.

इस सिलसिले में वहां के विधायक शुक्राजीत नायक का कहना था, ‘‘एक विधायक होने के नाते मैं अंतर्जातीय शादी के हक में हूं, लेकिन आप को समझना होगा कि जाति और समाज की पंचायत को किनारे कर के ऐसा कुछ करना मुमकिन नहीं है. किसी को अगर शादी करनी है, तो इस में सब की रजामंदी होनी चाहिए.’’

निर्मल सारथी से शादी करने वाली सुमन का मानना था, ‘‘हम ने कोई गुनाह नहीं किया है. हम बालिग हैं, लेकिन हमारे चलते मेरे पति के परिवार वालों को सताया जा रहा है. गांव में मेरे परिवार वालों और दूसरी बड़ी जातियों के डर के चलते कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा है.’’

हालांकि बाद में कुछ सामाजिक संगठनों के दखल से निर्मल सारथी और सुमन गांव लौट आए, लेकिन उन्हें बाद में भी तरहतरह से सताने की कोशिश की गई.

बिहार के समस्तीपुर जिले में एक प्रेमी जोड़े को अंतर्जातीय शादी करना महंगा पड़ गया. वहां के मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के नगर बाजार की महादलित परिवार की लड़की विभा कुरसाहा गांव के एक लड़के राजवल्लभ राय से प्यार करती थी. उन दोनों ने

27 अगस्त, 2016 को शादी कर ली थी. लेकिन नाराज पंचायत ने उन्हें गांव छोड़ देने का फरमान सुना डाला और उन के साथ मारपीट की.

ये तो चंद उदाहरण हैं. कई मामलों में तो इस तरह की शादियों में औनर किलिंग तक हो जाती है. शादी के बाद लड़का और लड़की को भाईबहन की तरह रहने की सजा सुनाई जाती है, चाहे वे एक बच्चे के मांबाप बन चुके हों. दूसरे धर्म में शादी या किसी दूसरी बिरादरी में गठबंधन कर लेना पंचायतों को इतना खलता है कि वे अपने हाथ खून से रंग लेती हैं.

औनर किलिंग के मामले में हरियाणा बदनाम रहा है. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत दूसरे राज्यों में भी ऐसी शादी करने वालों पर कहर बरपाने वाली पंचायतें बैठी हैं, जिन की फूली नाक ऐसे रिश्तों को कतई बरदाश्त नहीं करती है.

दुख की बात तो यह है कि पंचायतें सरेआम अपराध करती हैं या अपराध करने के लिए उकसाती हैं, इस के बावजूद सरकार और पुलिस प्रशासन इन के खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही नहीं कर पाते हैं या ऐसा करने से बचते हैं.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी इन पंचायतों की वकालत करते हुए इन्हें समाज सुधार का अहम हथियार बता देते हैं.

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सवाल उठता है कि ऐसी क्या वजह है, जो ऐसी शादियों के खिलाफ वे ही लोग खड़े हो जाते हैं, जिन से इंसाफ पाने की उम्मीद की जाती है?

दरअसल, चाहे आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन हमारे देश के ज्यादातर लोगों की सोच रूढि़वादी मानसिकता से ऊपर नहीं उठ पाई है. ऐसी शादियों को वे अपनी आन, बान और शान पर बट्टा लगा मानते हैं और उन के खिलाफ जा कर शादी करने वालों की वे हत्या कर देने में झिझक महसूस नहीं करते हैं.

ज्यादातर मामलों में तो पंचायत का अंदरूनी मामला समझ कर प्रशासन उस से कन्नी काट लेता है. हां, ज्यादा दबाव पड़ता है, तो पुलिस दिखावे के लिए एफआईआर दर्ज कर लेती है, लेकिन उस के बाद कार्यवाही करने से बचती है. कभी कोई पुलिस वाला समाज के खिलाफ जा कर मामले की तह तक पहुंचना भी चाहता है, तो पंचायत की एकजुटता के चलते उसे सुबूत ही नहीं मिल पाते हैं.

अगर ऐसी शादियों को करने वाली लड़कियों के नजरिए से देखा जाए, तो वे बहुत बोल्ड कदम उठाती हैं. उन्हें मालूम होता है कि ऐसा करने की सजा के एवज में उन की जान पर भी बन सकती है. तो क्या लड़कियों के फैसलों को दबाने के लिए मर्दवादी पंचायत उन के सपनों को कुचलने की चाल चलती हैं? एक लड़की हो कर हमारे खिलाफ जाएगी, इसे तो सजा मिलनी ही चाहिए, पंचायतों की यही सोच उन्हें गांव से बेदखल करने, आबरू लूटने या जान से मार देने के बेतुके फरमान सुना देती हैं, ताकि और लड़कियां ऐसा कदम उठाने से पहले सौ बार सोचें.

पंचायतों की इस तानाशाही का इलाज क्या है? झूठी शान दिखाने के लिए 2 हंसतेखेलते लोगों की जिंदगी मुहाल कर देने में कौन सी मर्दानगी है? इस का सब से आसान इलाज तो यही लगता है कि जनता में ऐसी शादियों को ले कर जागरूकता आनी चाहिए, पर ऐसा करना भी टेढ़ी खीर है, क्योंकि पंचायतों से ज्यादा तो वे परिवार आगबबूला होते हैं, जिन के बच्चों ने यह हिम्मती कदम उठाया होता है.

पंचायतों में घर के लोग ही अपनी औलाद की फजीहत ज्यादा करते हैं. शर्म की बात तो यह है कि ऐसी दरिंदगी होने के बावजूद कोई पीडि़त को बचाने का जोखिम नहीं उठाता है.

सख्त कानून बना कर ऐसे मामलों को रोका जा सकता है, लेकिन उस में पुलिस प्रशासन का सहयोग होना बहुत जरूरी है. वह पुख्ता सुबूत जुटाए, लड़कालड़की को सिक्योरिटी दे, मांबाप व पंचायत को समझाए, तो ऐसी शादियों को ले कर होने वाले अपराधों में भी कमी आ सकती है.

इस के अलावा सियासी दलों को भी ऐसी शादियों को बढ़ावा देने में पहल करनी चाहिए. सरकार चाहे तो कुछ भी कर सकती है. उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल सरकार अंतर्जातीय शादी करने वाले जोड़ों को 50 हजार रुपए बतौर उपहार देती है. तमिलनाडु में ऐसा करने वाले जोड़ों को सरकारी नौकरी में मदद मिलती है.

जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे ‘राष्ट्रहित’ में सही मानते हुए मान्यता दे दी है, तो छोटी पंचायतों को देश की सब से बड़ी पंचायत का सम्मान करना चाहिए, तभी इस देश से सही माने में जातिवाद की बुराई दूर हो पाएगी.

दोस्त को गोली मार खुदकुशी की

सेना में लांसनायक संतोष कुमार ने मंगलम कालोनी में किराए के मकान में अपने दोस्त रिकेश कुमार सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी. उस के बाद संतोष ने भी गोली मार कर खुदकुशी कर ली.

धायं… धायं… धायं… एक के बाद एक 3 गोलियां चलीं और आसपास के लोगों को कुछ पता ही नहीं चल सका. हैरानी की बात तो यह भी थी कि मकान में रहने वाले मकान मालिक और बाकी किराएदारों को भी गोली चलने की आवाज सुनाई नहीं पड़ी.

24 सितंबर, 2017 को पटना के दानापुर ब्लौक में हुई इस वारदात में किसी ‘तीसरे’ के होने के संकेत ने पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है.

दानापुर थाने के बेली रोड पर बसी मंगलम कालोनी में सेना के 32 साला लांसनायक संतोष कुमार सिंह ने लाइसैंसी राइफल से 22 साला दोस्त रिकेश कुमार सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी और उस के बाद खुद को भी गोली मार ली.

संतोष किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहता था. मकान के आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि हत्या वाले दिन रिकेश कुमार के अलावा एक और आदमी संतोष के घर पर था. किसी ने उस तीसरे शख्स को बाहर निकलते नहीं देखा. पुलिस को उस का कोई अतापता नहीं मिल पा रहा है.

कुछ महीने पहले ही संतोष का तबादला अरुणाचल प्रदेश में हो गया था. उस के बाद दोनों फोन पर ही लंबी बातें किया करते थे. संतोष छुट्टी में घर आता, तो रिकेश से मिलता था.

24 सितंबर, 2017 को संतोष ने रिकेश को फोन कर अपने घर बुलाया. रिकेश ने आने से मना किया और कहा कि घर में काफी काम है. उस के बाद संतोष ने उस से कहा कि उस ने घर पर ही उस के लिए खाना बनवाया हुआ है.

खाने के नाम पर रिकेश ने उस के घर आने के लिए हामी भरी. कुछ देर बाद रिकेश संतोष के घर पहुंच गया और कमरे में बैठ कर टैलीविजन देखने लगा. उसी दौरान वे दोनों बातचीत भी करते रहे. किसी बात को ले कर दोनों में तीखी झड़प शुरू हो गई. कुछ ही देर में संतोष चिल्लाने लगा, पर रिकेश उस की बातों को अनसुना कर टैलीविजन देखता रहा.

संतोष शादीशुदा था और रिकेश की शादी नहीं हुई थी. घर वाले उस के लिए लड़की ढूंढ़ रहे थे. संतोष कुछ महीने पहले तक बिहार में ही पोस्टैड था. वह बिहार रैजीमैंट के ट्रेनिंग सैंटर में इंस्ट्रक्टर था.

रिकेश की भी सेना में सिपाही के पद पर बहाली हुई थी और वह ट्रेनिंग सैंटर में ही ट्रेनिंग ले रहा था. उसी दौरान उस की मुलाकात संतोष से हुई और कुछ ही समय में वे दोनों गहरे दोस्त बन गए.

पुलिस ने उन दोनों के मोबाइल फोन का रिकौर्ड खंगाला, तो दोनों के बीच की बातचीत को सुन कर लगा कि उन की दोस्ती हदें पार कर चुकी थी. दोनों हर तरह की बातें खुल कर किया करते थे.

पुलिस के मुताबिक, रिकेश के एक दोस्त ने बताया कि रिकेश किसी को कुछ बताए बगैर ही बैरक से बाहर निकल गया था. देर तक जब वह बैरक में नहीं पहुंचा, तो उस के साथी जवानों ने रिकेश की मां को फोन कर मामले की जानकारी दी.

रिकेश की मां उस समय भोपाल में थीं. उन्होंने पटना से सटे दानापुर इलाके में रहने वाली अपनी बेटी पिंकी को रिकेश के बारे में पता करने को कहा.

पिंकी अपने पति मनोज को साथ ले कर देर रात संतोष के घर पहुंची. उस ने मकान मालिक राजेंद्र सिंह से संतोष और रिकेश के बारे में पूछा. मकान मालिक ने उन को घर में नहीं घुसने दिया और सुबह आने को कहा.

दूसरे दिन सुबह पिंकी अपने ससुर जगेश्वर सिंह के साथ संतोष के घर पहुंची. पिंकी ने दरवाजा खटखटाया, पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. उस के बाद उस ने जोर से चिल्ला कर आवाज लगाई. काफी कोशिश के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो उस ने मकान मालिक को मामले की जानकारी दी.

मकान मालिक की सहमति के बाद संतोष के मकान का दरवाजा तोड़ा गया. दरवाजा टूटने के बाद जब वे लोग अंदर गए, तो सभी के मुंह से चीखें निकल पड़ीं, कमरे के अंदर संतोष और रिकेश की खून से सनी लाशें पड़ी हुई थीं.

संतोष और रिकेश के परिवार समेत पुलिस भी इस बात से हैरान है कि राइफल की 3 गोलियां चलीं, पर मकान मालिक को उस की आवाज कैसे नहीं सुनाई दी?

हैरानी की बात यह भी है कि मकान में रहने वाले बाकी किराएदारों को भी आवाज नहीं सुनाई पड़ी. कमरे में संतोष की राइफल के साथ 3 जिंदा कारतूस और 3 खोखे बरामद हुए. कमरे में लगा टैलीविजन चल रहा था. कमरे से पुलिस ने संतोष और रिकेश के मोबाइल फोन बरामद किए.

22 सितंबर को संतोष अपनी बीवी रिंकी देवी और 10 साल के बेटे आयुष को सारण जिले के चकिया थाना के दुरघौली गांव में छोड़ आया था. दुरघौली उस का पुश्तैनी घर है. उस के पिता धर्मदेव सिंह किसान हैं.

रिकेश आरा के दोबाहा गांव का रहने वाला था और उस के पिता का नाम विजय कुमार सिंह है. रिकेश की बहन पिंकी और बाकी घर वालों ने बताया कि संतोष अपनी बहन से रिकेश की शादी करवाना चाहता था. उस ने अपनी बहन से रिकेश को मिलवाया भी था. उस के बाद रिकेश उस से फोन पर अकसर बातें करने लगा था.

रिकेश के घर वाले संतोष की बहन को पसंद नहीं करते थे और शादी के लिए राजी नहीं हो रहे थे. संतोष लगातार रिकेश पर शादी का दबाव बना रहा था और रिकेश यह कह कर शादी टाल रहा था कि उस के घर वालों को लड़की पसंद नहीं है.

संतोष की बीवी रिंकी देवी का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था. उस ने किसी से किसी तरह का झगड़ा होने की बात से साफ इनकार किया.

संतोष के कमरे में टंगे संतोष और रिकेश के हंसतेमुसकराते कई फोटो देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन दोनों के बीच काफी गहरी दोस्ती थी.

रिकेश का सिर बाथरूम के अंदर था और जिस्म का बाकी हिस्सा कमरे में था. ऐसा लग रहा था कि उसे मारने के बाद उस की लाश को घसीट कर बाथरूम की ओर ले जाया गया था.

रिकेश के पैर के पास ही संतोष की लाश पड़ी हुई थी. उस के पेट के ऊपर राइफल रखी हुई थी और उस की नली के आगे के हिस्से में खून के दाग थे.

रिकेश के शरीर में 2 गोलियों के निशान थे और संतोष की ठुड्डी पर गोली का निशान था. उस के सिर के पिछले हिस्से में काफी गहरा जख्म था.

संतोष के गले में रस्सी भी बंधी हुई थी और उस का दूसरा छोर सीलिंग पंखे से बंधा हुआ था. इस से यह पता चलता है कि संतोष ने पहले गले में फंदा डाल कर पंखे से लटक कर जान देने की कोशिश की होगी. उस में कामयाबी नहीं मिलने के बाद उस ने गोली मार कर खुदकुशी कर ली.

हिंदुत्व का वीभत्स रूप : राजसमंद में लव जिहाद के नाम पर बर्बर हत्या

देश में फैलाए जा रहे धार्मिक नफरत के माहौल में एक अच्छा खासा आदमी किस तरह दूसरे मजहब के लोगों से घृणा करने लगता है और एक दिन बेरहम तरीके से वह अपने दोस्त का कत्ल करने से नहीं हिचकिचाता. राजस्थान के राजसमंद में 48 साल के मोहम्मद अफराजुल की हत्या करने वाला शंभू लाल रैगर इस की जीतीजागती मिसाल है. दलित समुदाय का शंभूलाल इसी विषैली हवा की चपेट का शिकार बन गया.

6 दिसंबर को उदयपुर जिले के राजसमंद के राजनगर में शंभूलाल ने अजराजुल की लव जिहाद के नाम पर फावड़े और गैंती से निर्ममतापूर्वक हत्या की और फिर पेट्रोल डाल कर जला दिया. इस बेरहम कत्ल का वीडिया बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर जारी कर के नफरत की आग को और हवा देने की कोशिश की गई.

यह भयावह वीडियो ज्योंही वायरल हुआ, इसे देख कर लोग स्तब्ध रह गए. अनेक लोगों ने इस हत्या की निंदा की पर सोशल मीडिया पर कई हिंदू कट्टरपंथियों ने हत्या को जायज ठहराते हुए शंभूलाल का समर्थन किया और उसे हीरो का दर्जा देने का प्रयास किया गया.

शंभू ने अपने नाबालिग भतीजे से तीन वीडियो बनाए थे. एक हत्या के समय का लाइव वीडियो हैं. दो वीडियो कत्ल करने से पहले के हैं. इन में से एक वीडियो में वह स्त्री सम्मान, लव जिहाद और देशभक्ति जैसे मुद्दों पर भाषण दे रहा है. कत्ल के वीडियो में वह दावा कर रहा है कि अपनी बहन की बेइज्जती का बदला लेने के लिए और लव जिहाद को खत्म करने के लिए इस हत्या को अंजाम दे रहा है. वह चेतावनी भी दे रहा है कि हिंदू लड़कियों को पथभ्रष्ट करने वालों का अंजाम यही होगा.

इस हत्या को उस ने लव जिहाद, मेवाड़ प्रेम, इस्लाम विरोध और महाराणा प्रताप की वीरता की बात की है. इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं.

शंभू को पुलिस ने जल्दी ही पकड़ लिया. उस ने पूछताछ में बताया कि वह कुछ सालों से अपने महल्ले में रहने वाली एक औरत के साथ रहता था. वह साथ में काम करती थी. बाद में वह औरत उसे छोड़ कर अफराजुल के पास रहने लगी. शंभू और अफराजुल दोस्त बताए जाते हैं और एक ही महल्ले में रहते थे. शंभू ठेकेदारी का काम करता था और अफराजुल पश्चिम बंगाल से उस के लिए मजदूरों को लाता था.

पुलिस के मुताबिक शंभू ने बताया कि उस के महल्ले की दो लड़कियां गायब हो गई थीं. इन में से वह सुनीता [बदला हुआ नाम] को वह मालदा जिले के सैयदपुर गांव जा कर वापस लाया था. वह सुनीता की मां की गुहार पर खुद ही सैयदपुर गया था. लड़की की मां से उसे लाने के एवज में शंभू ने 10 हजार रुपए इनाम के तौर पर लिए थे. अफराजुल इसी गांव का था. चर्र्चा थी कि उसे अफराजुल ने भगाया था.

यह भी बताया गया कि सुनीता को सैयदपुर गांव से लाने से नाराज बंगाली मजदूरों ने शंभू को मारापीटा भी था. इस से वह सनकी हो गया था. पिछले कई दिनों से इंटरनेट पर लव जिहाद से जुड़े भाषण सुन रहा था. पुलिस का मानना है कि वह इन बातों से परेशान रहने लगा. और साथ के मुस्लिम मजदूरों से नफरत करने लगा. इस के बाद वह हत्या की योजना बना रहा था.

आपसी रंजिश के मामले को वह पूरे हिंदू समाज से जोड़ने में सफल हो गया. इस घटना से लगता है कि अब हिंदू कट्टरता को अपना कर एक आतंकवादी मानसिकता का रूप लेता जा रहा है. हत्या और दंगाफसाद करने वाले लोग माथे पर भगवा पट्टी और जुबान पर भगवान का नारा लगा कर हत्या और आगजनी को अंजाम देने लगे हैं.

देश भर में घातक किस्म का हिंदुत्व पांव पसार रहा है जो लोगों के मनमस्तिष्क में जहर की तरह घुसपैठ कर रहा है. यह काम भारत में राष्ट्रवाद, देशभक्ति के नाम पर बड़े शातिराना तरीके से कराया जा रहा है.

पिछले कुछ समय से देश में जिस तरह की विचारधारा को प्रचारित किया जा रहा है, नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है यह घटना उस विचारधारा की सफलता को दर्शा रही है. देश में धर्मयुद्घ जैसा माहौल बन चुका है. एक बेकसूर मजदूर की हत्या को धर्म का जामा पहना देना उस विचारधारा और समूह का षड्यंत्र है जो दूसरे धर्म के लोगों की हत्या को उकसाती है. वीडियो में शंभू की भावभंगिमा, भाषा उसी हिंदुत्व से प्रेरित लगती है.

यह दशकों से फैलाई जा रही जहरीली विचारधारा का नतीजा है. यह जो माहौल फैलाया जा रहा है उस से शंभू रैगर ही पैदा हो सकते हैं. लाखों की संख्या में इस नफरत के माहौल का असर युवाओं पर पड़ रहा है. युवा बेराजगारों को रोजगार नहीं तो पाकिस्तान, तालिबान, आईएसआईएस की तरह आतंकी समूह बना कर धर्मयोद्घा बनाया जा रहा है. देश में धार्मिक कट्टरता से प्रभावित कर के युवाओं को आतंक की ओर झोंका जा सकता है. लाखों युवा धर्म के नाम पर जान देने और जान लेने को तैयार हैं. इन लोगों का बे्रैनवाश कराया जा रहा है ताकि उन के जरिए दंगे, हत्याएं करवाई जा सकें. देश में एक विषैली पौध तैयार हो रही है. ऐसे में भारत और मजहबी कट्टरपंथी पाकिस्तान में फर्क क्या रह जाता है.

हिंदू आतंकवाद की इस लेबोरेटरी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी समुदाय के युवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. जयपुर से गाय ले जा रहे हरियाणा के नूह के पशुपालक पहलू खान की जान लेने वाले पिछड़ समुदाय के युवा ही थे. इन वर्गों के युवा महज औजार हैं और हिंदुत्व के लिए इस्तेमाल होने के लिए तैयार हैं. बाबरी मस्जिद को ढहाने में यही लोग आगे थे. राममंदिर निर्माण के लिए झंडा उठाने वालों में पिछड़े सब से अधिक पैरोकार बने दिखाई दे रहे हैं. यह समुदाय बल में सब से ऊपर हैं. बुद्धि में नहीं. बुद्धि चलाने वाले तो बहुत थोड़े से हैं, हिंदुत्व की मलाई वही चाट रहे हैं.

मेवाड़ का कर्ज चुकाने, देशभक्ति दिखाने और हिंदुत्व की इज्जत के लिए क्या शंभू रैगर जैसों की जरूरत है? दलितों, पिछड़ों को इस साजिश पर सोचनासमझनो होगा कि उन के दिमाग में धर्म, जाति की नफरत का जहर कौन घोल रहा है और क्यों?

 

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