चावलों को 1 घंटे के लिए पानी में भिगो दें. कड़ाही में 2 कप पानी व 2 चम्मच शहद डाल कर उबाल लें. ठंडा होने दें. एक बाउल में दही, चावल, किशमिश, 2 चम्मच नारियल पाउडर व क्रीम मिला लें. बचे नारियल पाउडर से सजा कर ठंडीठंडी सर्व करें.
VIDEO : जियोमेट्रिक स्ट्राइप्स नेल आर्ट
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भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पांड्या इन दिनों आईपीएल में मुंबई के खास सितारे बन चुके हैं. मुंबई की टीम अभी आईपीएल के सीजन 11 में प्लेऔफ में जगह बनाने के लिए जद्दोजहद कर रही है, लेकिन टीम की हर जीत में हार्दिक का योगदान जरूर रहा है. हार्दिक आईपीएल में पर्पल कैप की दौड़ में बने हुए हैं और बल्ले से भी तूफानी प्रदर्शन कर रहे हैं.
वैसे हार्दिक अपनी स्टाइल से भी काफी जाने जाते हैं. उनसे उनके प्रशंसकों को काफी उम्मीद रहती है. जब वे उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करते हैं तो वे और उनकी स्टाइल भी आलोचकों के निशाने पर आ जाते हैं. हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उनके बालों का नया स्टाइल काफी चर्चा में आया था.
हार्दिक बचपन में अपने बालों को कलर कराने के बहुत शौकीन थे और इसके लिए उन्हें अपने कोच और मम्मी से बहाना भी बनाना पड़ता था. उनका यह शौक शुरू से ही था जिसका उन्होंने अब खुलासा किया है. हार्दिक ने आईपीएल की टीम मुंबई इंडियंस की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट एक वीडियो में अपने बचपन की यादों को बयान किया है.
The Pandya brothers are reaping the rewards of the sacrifices their parents made.
हार्दिक ने वीडियो में कहा, “मैं शुरू से ही अलग था. 11 साल का था तभी अपने बाल कलर करवा लिए थे. इसके लिए घर पर आकर मम्मी से मार भी खाता था और फिर जाकर कुछ और कराके आता था. बालों को लेकर कोच को उलटे सीधे बहाने बताता था. कोच जब मुझसे पूछते थे कि ये क्या है, तो मैं कहता था कि बाल कटाने गया था तो कलर मेरे ऊपर गिर गया.”
दोस्त नहीं बना पाते थे भाई क्रुणाल
24 साल के हार्दिक ने भारत के लिए अब तक छह टेस्ट, 38 वनडे और 30 टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हैं. उन्होंने कहा, “मैं बहुत ज्यादा शैतानी करता था. लोगों से हमेशा झगड़ते रहता था और कभी दोस्त नहीं बनाता था. हम दोनों भाइयों (बड़े भाई क्रुणाल पांड्या) ने हमेशा मम्मी को बहुत परेशान किया. मैंने क्रुणाल को भी बहुत परेशान किया है. मेरे वजह से क्रुणाल के कभी दोस्त नहीं बनते थे क्योंकि मैं अगर झगड़ा करता था तो उसे अपनी दोस्ती तोड़नी पड़ती थी.”
हरफनमौला खिलाड़ी ने अक्टूबर 2016 में धर्मशाला में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में पदार्पण किया था जबकि जनवरी 2016 में एडिलेड में आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच में उतरे थे. उन्होंने इस वर्ष जनवरी में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अपना पहला टेस्ट खेला था.
हार्दिक ने कहा, “मैं और क्रुणाल डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइट खेलते थे और इस दौरान हमने कई सारे बेड तोड़े हैं. सबसे बड़ी समस्या यह थी कि खेलते-खेलते हम दोनों वास्तव में झगड़ा कर लेते थे. जो एटिट्यूड लोगों में 16-17 साल में आते हैं वह हमारे अंदर 12 साल में ही आ गया था. हालांकि समय के साथ सीखा कि गुस्सा हर चीज का हल नहीं होता है. गुस्से से जीवन में नकारात्मकता आती है. मैं कोशिश करता हूं कि मेरे गुस्से से किसी को दिल न टूटे.”
अपने गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन के दम पर विराट कोहली की बेंगलुरु ने सोमवार (14 मई) को आईपीएल 2018 के मैच में मेजबान पंजाब को 10 विकेटों से शिकस्त दी. यह मैच काफी रोमांचक रहा. अपने दूसरे घर होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में खेल रही पंजाब की टीम मात्र 15 ओवरों में 88 रनों पर ही ढेर हो गई. इस आसान से लक्ष्य को बेंगलुरु ने 8.1 ओवरों में बिना विकेट खोए हासिल कर लिया. इस मैच में उमेश यादव की अगुवाई में गेंदबाजों के शानदार परफौर्मेंस के बाद तूफानी बल्लेबाजी से बेंगलुरु ने पंजाब को 10 विकेट से रौंदकर प्लेऔफ में जगह बनाने की उम्मीदों को बरकरार रखा है.
इस मैच को देखने के लिए कप्तान विराट कोहली की पत्नी अनुष्का शर्मा नहीं आ सकी थी, इसलिए उन्होंने अपने मेकअप रुम से ही बेंगलुरु की टीम को चीयर किया.
दरअसल, बौलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा इन दिनों फिल्म ‘जीरो’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. इस फिल्म की शूटिंग की वजह से अनुष्का शर्मा आईपीएल में विराट कोहली और उनकी टीम बेंगलुरु को चीयर करने के लिए स्टेडियम पर नहीं आ पा रही हैं, लेकिन वह अपनी शूटिंग शेड्यूल से बेंगलुरु के मैच देखने और अपने पति की टीम को चीयर करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं.
सोमवार को पंजाब के साथ खेले गए मैच से पहले अनुष्का ने एक तस्वीर शेयर की. इस तस्वीर में अनुष्का ने जो टी-शर्ट पहनी थी. उसके पीछे विराट कोहली का नाम लिखा था. इस तस्वीर को शेयर करते हुए अनुष्का ने लिखा- कम औन ब्यौज.
अनुष्का के इस ट्वीट का जवाब विराट कोहली ने बहुत ही प्यार भरे अंदाज में दिया है. विराट ने अनुष्का के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है- हां, माय लव, हम आ रहे हैं.
बता दें कि मैच के दौरान भी जब पंजाब के विकेटों का पतझड़ लगा हुआ था, उस वक्त भी अनुष्का बेंगलुरु टीम को जमकर चीयर कर रही थीं. अनुष्का ने शूटिंग सेट के मेकअप रुम के आइने पर अपना मोबाइल फोन लगा लिया था और मैच का मजा ले रही थीं और साथ ही विराट कोहली और उनकी टीम को चीयर भी कर रही थी.
पंजाब के खिलाफ खेले गए इस मैच में कप्तान विराट कोहली ने आईपीएल में एक शानदार रिकौर्ड बनाते हुए डेविड वौर्नर को भी पीछे छोड़ दिया है. इस मैच में पार्थिव पटेल के साथ ओपनिंग करने आए विराट कोहली नाबाद पवेलियन लौटे. विराट ने इस मैच में 28 गेंदें खेलते हुए 6 चौकों और 2 छक्कों के साथ नाबाद 48 रनों की पारी खेली. 48 रनों की पारी के साथ ही आईपीएल 2018 में विराट कोहली ने 500 रन भी पूरे कर लिए.
बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली ने अबतक खेले 12 मैचों में 514 रन बना लिए हैं. बता दें कि आईपीएल में यह 5वीं बार हुआ है, जब विराट ने एक सीजन में 500 या उससे ज्यादा रन बना लिए हैं. इस मामले में उन्होंने डेविड वौर्नर को पछाड़ दिया है. डेविड वौर्नर इस कारनामे को 4 बार कर चुके हैं. वहीं, सुरेश रैना, क्रिस गेल और गौतम गंभीर इस लिस्ट में संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर हैं. इन तीनों खिलाड़ियों ने आईपीएल में यह कारनामा 3-3 बार किया है.
विराट कोहली ने 514 रन (2018), 973 रन (2016), 505 रन (2015), 634 रन (2013) और 557 रन (2011) में बनाए थे.
वहीं, डेविड वौर्नर ने 641 रन (2017), 848 रन (2016), 562 रन (2015), 528 रन (2014) में बनाए हैं.
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आजकल स्मार्टफोन लोगों की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गया है. लोग इसके द्वारा अपने परिवार और दोस्तों से जुड़े रहते हैं. आजकल तो हर किसी के फोन में व्हाट्सऐप तो होता ही है. लेकिन बिना इंटरनेट एसका कोई यूज नहीं होता. व्हाट्सऐप के जरिए चैट करने के लिए इंटरनेट होना जरूरी है. लेकिन आज हम आपको एक ट्रिक बताएंगे जिसकी मदद से आप बिना इंटरनेट व्हाट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर जैसे ऐप चला सकते हैं.
कई बार हमें किसी को कुछ जरूरी फोटो या वीडियो भेजने होते हैं लेकिन इंटरनेट ना होने की वजह से हम ऐसा करने में असमर्थ होते हैं लेकिन एक ट्रिक से आप बिना इंटरनेट भी चैटिंग के साथ मीडिया फाइल भी शेयर कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.
इसके लिए एक स्पेशल सिम कार्ड बाजार में मिल रहा है जिसकी मदद से आप पूरे साल बिना इंटरनेट व्हाट्सऐप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस सिम का नाम चैटसिम है.
इस सिम को आप इसकी वेबसाइट या फिर किसी ई-कौमर्स साइट से खरीद सकते हैं. इसकी कीमत 1,800 रुपये है जिसकी वैधता 1 साल की है. इसके बाद आपको फिर से रिचार्ज कराना होगा.
इस सिम की खासियत यह है कि यह किसी भी फोन में लग जाएगा और आप देश में हों या विदेश में यह सिम हर जगह काम करेगा.
इसकी मदद से आप एक साल के लिए व्हाट्सऐप, फेसबुक मैसेंजर, वी चैट, लाइन, टेलीग्राम जैसे कई ऐप को बिना इंटरनेट के इस्तेमाल कर सकते हैं.
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दिन पर दिन आ रही डाटा चोरी की खबरों से लोगो की नींद उड़ी हुई है. लोगों को अपने डाटा को सुरक्षित रखने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है. अभी हाल ही में कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा फेसबुक डाटा लीक का मामला ठंडा हो ही रहा था कि इसी बीच गूगल पर भी डाटा चोरी का आरोप लग गया है. खबर के मुताबिक अब गूगल पर एंड्रौयड यूजर्स के डाटा चोरी करने का आरोप लगा है. जी हां, भले आप को यह जानकर हैरानी हो रही हो लेकिन यह सच है. जानकारी के लिए बता दें कि गूगल पर आरोप है कि उसने औस्ट्रेलिया के 10 मिलियन यूजर्स का डाटा चोरी कर उनपर नजर रख रहा है. इसके जरिए वह उनकी गतिविधियों को ट्रैक कर रहा है.
सौफ्टवेयर कंपनी ओरेकल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि गूगल हर महीने 1 जीबी के करीब यूजर्स का डाटा इकट्ठा कर रहा है. वह इकट्ठा किये गए उस डाटा को विज्ञापनदाताओं के पास पहुंचा रहा है. जिसकी मदद से एंड्रौयड मोबाइल यूजर्स के फोन पर तमाम तरह के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं. ओरेकल का आरोप है कि फोन में सिम कार्ड नहीं होने और लोकेशन औफ होने के बाद भी वह यूजर्स की लोकेशन को ट्रैक करता है. गूगल एंड्रौयड फोन के आईपी एड्रेस, मोबाइल टावर और वाई-फाई कनेक्शन के जरिए भी यूजर्स की गतिविधियों पर नजर रखता है. कंपनी ने अपने एक प्रजेंटेशन में बताया कि गूगल एंड्रौयड डिवाइस के बैरोमीटर की मदद से हवा के दवाब के जरिए यूजर्स की लोकेशन को ट्रैक करता है. वहीं औस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग ने कहा कि वह इस रिपोर्ट की जांच करेगा.
इस आरोप पर गूगल ने जवाब देते हुए कहा है कि इसके लिए यूजर्स की इजाजत ली जाती है. गूगल ने बताया कि इसके लिए उसकी अपनी प्राइवेसी पौलिसी है. गूगल के मुताबिक वह अपने एंड्रौयड यूजर्स की जिन जानकारियों को इकट्ठा करता है उनमें व्यक्तिगत जानकारी, डिवाइस की जानकारी, लौग जानकारी और स्थान की जानकारी शामिल होती है.
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दिल की तनहाइयों में उतरे तो
जाना कितने तनहा हैं हम
यूं तो चलते रहे दुनिया के
रेले में वक्त के साथ
पर तनहा दिल घुटता ही गया
यूं कहें उसे अकेला छोड़ते गए हम
जो कहा, किया, वो दिल को न भाया
कुछ अनकही रही, कुछ अनसुनी रही
कुछ वक्त के साथ छूटी, कुछ मजबूरी में
कुछ पास आ के नहीं आई
कुछ गई दूरी में
कुछ समझा गलत, तो कुछ माना गलत
कुछ हासिल हुआ, कुछ बिसरा भी
कुछ संजोया तो कुछ बिखरा भी
कुछ कहा, तो रहा कुछ अनकहा भी
कुछ को दिल न माना
तो रही कुछ से शिकायतें
और कुछ को अपना
न कह सका ये दिल
बस यूं कहें कि बहुतकुछ रहा ऐसा
कि दिल पर बोझ बढ़ता ही गया
न बोल सका कुछ, न ही कुछ कर सका
अकेला, बस, अकेला होता चला गया
जब दिल की गहराइयों में उतरे तो
जाना कितने तनहा हैं हम. – नीतू
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भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के अपने अभूतपूर्व वोटरों को बचाने के लिए जिस दलित पैतरे को अपनाया है वह उस पर भारी पड़ेगा. अपने विरोधियों को मिलाना हमारी हिंदू परंपरा रही है पर विरोधियों को मिलाने के बाद उन्हें हमेशा नीचा स्थान दिया गया और इस्तेमाल कर के छोड़ दिया गया. 2014 में ‘सब का साथ’ का नारा लगा कर दलितों और पिछड़ों को पटाया गया पर फिर छोड़ दिया गया. अब समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर सीटों पर हुए लोकसभा उपचुनावों में पटखनी खाने के बाद भाजपा को दलित फिर याद आए हैं और जोरशोर से वह भीमराव अंबेडकर को याद कर रही है हालांकि वह मन से उन की जघन्य विरोधी रही है.
भाजपा जो उलटपलट करती है वह असल में उस की पौराणिक मानसिकता है. अमृत मंथन में देवताओं, जिन्हें भाजपा अपना मानती है, ने समुद्र मथने में असुरों को, जिन्हें भाजपा विदेशी मानती है, मिलाया पर अमृत मिलते ही विष्णु की मोहिनी अवतार के लटकेझटकों से उसे छीन लिया और असुरों को हिस्सा नहीं दिया. यही 2014 के आमचुनाव के बाद सरकार के गठन में किया गया जब सारे मलाईदार मंत्रालय ऊंचों ने अपने पास रख लिए. अब दलित हल्ला मचा रहे हैं तो फिर राम की युद्ध की तैयारी सी की जा रही है और वानरों आदि को फिर फुसलाया जा रहा है. कठिनाई यह है कि अब पौराणिक चालें पूरी तरह हिट नहीं हो रहीं. दलितों को खुश करने के लिए यदि एससी कानून में या आरक्षण प्रक्रिया में कुछ बदलाव लाया गया तो ऊंची सवर्ण जातियां विद्रोह कर जाएंगी. यह न भूलें कि यही जातियां पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा में कम्युनिस्टों तक के साथ जुड़ गई थीं ताकि मजदूरों को लाल झंडे के नीचे पटा कर इस्तेमाल किया जा सके. आज ये जातियां भाजपा में जाने की इच्छुक हैं पर वहां यदि सब मालपुआ दलितों में बंट गया तो फिर उन्हें क्या लाभ होगा?
भारतीय जनता पार्टी में आंतरिक विद्रोह की जो सुगबुगाहट सुनाई दे रही है उस का एक कारण यही है कि पिछले कुछ महीनों से भगवा दुपट्टा अपना रंग छोड़ने लगा है. यह अब मनमरजी करने का पासपोर्ट नहीं रह गया. सवर्ण जातियां यदि तिलक, जनेऊ व भगवा गमछे का लाभ न उठा पाईं तो फिर भाजपा में रहने का उन्हें क्या लाभ होगा? हाल के चुनावों में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. 2 अप्रैल को भारत बंद पर दिखा, उन्नाव व कठुआ में बलात्कारों पर दिखा. यदि भगवा कवच काम का नहीं, तो फिर रामबाण या गांडीव को पाने की लालसा का क्या लाभ? भारतीय जनता पार्टी को ऊंची जातियों पर ही निर्भर रहना होगा क्योंकि उन्हीं की निष्ठा मजबूत है. उन्हें नाराज किया तो कांग्रेसी महल की तरह भाजपा का घर लाक्षागृह बन जाएगा.
भाजपा को जो अंधसमर्थन ऊंची जातियों का मिल रहा है वह दलितों व पिछड़ों का दमन करने की सामाजिक मान्यता को, 21वीं सदी में भी, सही साबित करने के लिए मिल रहा है. इस दमन का न जन्मजात संबंध है न यह उत्पादन के लिए ठीक है. यह पूरे देश और समाज के हाथपैरों में आई सूजन है जिसे हम कम कर नहीं पाते बल्कि पौष्टिकता समझ कर अपनाते फिरते हैं.
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राष्ट्रमंडल खेल 2018 में निशानेबाजी में स्वर्ण पदक विजेता मनु भाकर ने महज 16 साल की उम्र में यह कारनामा कर दिखाया. हरियाणा के झज्जर जिले की इस होनहार युवती का मानना है कि सोने का तमगा जीतने से ज्यादा खुशी अपने राष्ट्रगान की धुन कानों में पड़ने से मिलती है.
मनु 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और मैडिकल की तैयारी कर रही हैं. ऐसा नहीं है कि मनु बहुत नामीगिरामी स्कूल में पढ़ती हैं बल्कि वे साधारण स्कूल में पढ़ती हैं. मनु के पिता रामकिशन भाकर का मानना है कि अकसर अभिभावक बच्चों को महंगे स्कूलों में पढ़ाने की बात करते हैं और उन्हें लगता है कि महंगे स्कूलों में पढ़ाने से सफलता की गारंटी पक्की है पर ऐसा नहीं है. कम फीस वाले स्कूलों से भी बेहतर प्रतिभाएं निकलती हैं और मनु ने यह साबित कर दिखाया है. यह उन मातापिता के लिए भी संदेश है जिन्होंने मन में इस तरह की गलत धारणा पाल रखी है.
मनु की मां सुमेधा भी इस बात पर जोर दे कर कहती हैं कि हर बच्चे में प्रतिभा होती है. लेकिन आजकल मातापिता नंबरों की होड़ में बच्चों पर प्रैशर बनाते हैं और बच्चा अगर इंजीनियर बनना चाहता है तो उसे डाक्टर बनने के लिए कहते हैं, खिलाड़ी बनना चाहता है तो सिंगर बनने के लिए उस पर दबाव डाला जाता है. ऐसे उदाहरण आप को पासपड़ोस में मिल जाएंगे या स्वयं को ही इन उदाहरणों में पा सकते हैं. इसलिए बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए. हां, उसे सहीगलत का रास्ता दिखाएं न कि उसे उस के विरुद्ध कार्य करने के लिए कहें.
मनु के मातापिता उन मातापिताओं के आदर्श हो सकते हैं जो अपने बच्चों पर बोझ डालते हैं. मनु के मातापिता ने मनु की प्रतिभा को समझ कर पूरा साथ दिया, हर जरूरत को पूरा किया. और अब मनु की मेहनत का फल सिर्फ मनु को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को मिल रहा है.
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विधि आयोग ने सरकार से कहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाना चाहिए. यह अच्छी बात है पर सरकार इसे मानेगी, ऐसा लगता नहीं क्योंकि अब तक किसी सरकार ने शायद ही बीसीसीआई पर ऐसा कोई कदम उठाया हो.
बीसीसीआई हमेशा से राजनेताओं और उद्योगपतियों की जागीर रही है. इन लोगों ने बीसीसीआई को कमाऊ संस्था बना कर रखा हुआ है. लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट को सख्त रवैया अपनाना पड़ा था.
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में आयोग से इस बारे में सिफारिश करने के लिए कहा था कि क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को आरटीआई के तहत लाया जा सकता है या नहीं? वैसे, बीसीसीआई को आरटीआई के तहत लाने की मांग लंबे समय से हो रही है. अब विधि आयोग ने कहा है कि बीसीसीआई को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत किसी भी संस्था के सरकारी संस्था होने के लिए जो मानदंड निर्धारित हैं, बीसीसीआई उन पर पूरी तरह से खरा उतरता है. आयोग ने कहा है कि बीसीसीआई सार्वजनिक प्राधिकरण के तहत काम करता है जिसे सरकार से वित्तीय मदद मिलती है.
लोढ़ा समिति ने सब से ज्यादा जोर बोर्ड की चुनाव प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता पर दिया था, पर लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में कुंडली मार कर बैठे लोगों को नानी याद आ गई. खूब दांवपेंच लगाए गए, गुटबाजी की गई पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैए के कारण ये लोग तिलमिलाए हुए हैं.
अब विधि आयोग की सिफारिश से इन लोगों की नींद उड़ी हुई है कि यदि बीसीसीआई आरटीआई एक्ट के दायरे में आ जाता है तो सब नंगे हो जाएंगे. कोई भी कभी भी आरटीआई एक्ट के तहत सूचना मांग सकता है और बीसीसीआई को इस का जवाब देना होगा.
अब बोर्ड के अधिकारी भी दबी जबान कह रहे हैं कि बोर्ड ने सभी विकल्पों को खुला रखा है. हालांकि बीसीसीआई टीम चयन को इस के अंतर्गत लाने के पक्ष में नहीं दिख रहा है. बोर्ड के पदाधिकारी इस पर भी जोड़तोड़ निकालने में कोई कोरकसर छोड़ने वाले नहीं हैं. अब वक्त ही बताएगा कि बीसीसीआई आरटीआई एक्ट के तहत आता है या नहीं?
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कुशीनगर में महात्मा गौतमबुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ था. पर्यटन के लिहाज से कुशीनगर पूरी दुनिया में मशहूर है. महात्मा बुद्ध के तमाम अनुयायी पूरे विश्व से यहां आते हैं. यह बौद्ध परिपथ के नाम से मशहूर
है. सारनाथ और लुंबनी यहां से करीब हैं. कुशीनगर की गोरखपुर से दूरी 50 किलोमीटर है. गोरखपुर गोरक्षा पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में यहां की हर घटना असाधारण हो जाती है.
यही वजह है कि कुशीनगर में स्कूल वैन हादसे की खबर का पता चलते ही मुख्यमंत्री अपने अमरोहा दौरा से पहले कुशीनगर गए. उन्होंने जनता के आक्रोश को ‘नौटंकी’ कह कर पूरे मामले को विवादों में ला दिया. मुख्यमंत्री ने शिक्षा और परिवहन विभाग के निम्न कर्मचारियों के खिलाफ तो कड़े कदम उठाने की बात कही पर मंत्री व शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदार लोगों को सजा न दे कर एकपक्षीय न्याय किया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत हैं. हर काम की शुरुआतपूजापाठ से करते हैं. यह बात और है कि इस के बाद भी उन की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं. पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने ही जिले गोरखपुर के बीआरडी यानी बाबा राधव दास अस्पताल में औक्सीजन की कमी से कई बच्चों की मौत हो गई थी. सरकार ने इस का ठीकरा अस्पताल के डाक्टर कफील अहमद पर फोड़ कर खुद को किनारे कर लिया. हाईकोर्ट ने डाक्टर कफील को जमानत पर छोड़ दिया है.
औक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है, यह साबित करना कठिन काम है. आम आदमी हादसों को जल्द भूल जाता है. दूसरा हादसा होने पर फिर से तेजी आती है.
एक साल के अंदर ही गोरखपुर के पास कुशीनगर में स्कूली वैन रेलगाड़ी की चपेट में आ गई. इस में 13 बच्चों की मौत हो गई. 4 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए. यह घटना 26 अप्रैल को घटी. औक्सीजनकांड की तरह एक बार फिर सरकार ने स्कूल के प्रबंधक करीम जहान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेज दिया. इस के साथसाथ, शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की. पूरे मामले में शिक्षा और परिवहन विभाग के कर्मचारियों के साथसाथ, इस विभाग के मंत्री भी जिम्मेदार हैं. ऐसे में मंत्रियों व उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही न कर सरकार ने एकपक्षीय काम किया है.
प्रदेश में बहुत सारे स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं. यह बात सभी को पता है. शिक्षा विभाग के आलाअफसर और मंत्री खामोश क्यों हैं? मुख्यमंत्री को खुद भी अपनी गलती माननी चाहिए.
ऐसे में जब तक मंत्री स्तर तक सजा नहीं दी जाएगी तब तक सुधार शुरू नहीं होगा. शिक्षा विभाग के साथसाथ परिवहन विभाग के मंत्री की लापरवाही क्यों नहीं दिख रही? मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के कारण गोरखपुर और कुशीनगर की दुर्घटना अहम हो जाती है. यह उसी तरह खास है जैसे गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव में हार के बाद भाजपा स्तब्ध रह गई थी.
जिस तरह से मुख्यमंत्री का क्षेत्र एक के बाद एक वजह से चर्चा में है उस से उन की प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं. मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को पूरा सहयोग नहीं मिल रहा. वहां की खेमाबंदी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है.
एक साल के अंदर ये तीनों ही घटनाएं मुख्यमंत्री के सामने किसी चुनौती से कम नहीं हैं. उन की प्रशासनिक क्षमता पर सवालिया निशान लग रहा है. जिस तरह से मुख्यमंत्री अपना आपा खोते नजर आ रहे हैं उस से साफ है कि वे खुद अपनी कमजोरी को समझ रहे हैं.
कुशीनगर दुर्घटना के बाद जब जनता ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने आक्रोश को जताया तब मुख्यमंत्री ने उसे ‘नौटंकी’ बता कर बंद करने को कहा. मुख्यमंत्री के इस व्यवहार की आलोचना केवल विपक्षी ही नहीं, खुद भाजपा में भी अंदरखाने हो रही है. मुख्यमंत्री का क्षेत्र काफी संवेनशील होता है. ऐसे में वहां का असर पूरे प्रदेश पर पड़ता है.
मासूमों की मौत
गुरुवार 26 अप्रैल की सुबह का समय था. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के दुदही रेलवे स्टेशन से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बहरपुरवा रेलवे क्रौसिंग पर सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर सीवानगोरखपुर पैसेंजर ट्रेन पास हुई. ठीक इसी समय डिवाइन पब्लिक स्कूल के बच्चे वैन से स्कूल जाने के लिए क्रौसिंग पार कर रहे थे. बहरपुरवा रेलवे क्रौसिंग पर कोई बैरियर नहीं लगा था. स्कूल वैन के ड्राइवर ने रेलगाड़ी को नहीं देखा और वैन रेलगाड़ी के सामने आ गई, जिस में 11 बच्चों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जबकि 2 बच्चों की मौत अस्पताल जाते समय रास्ते में हुई. 8 बच्चों की क्षमता वाली वैन में 17 बच्चे सवार थे.
घटना के बाद सरकार का काम शुरू हो गया. मुआवजा, जांच, कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई. कुछ दिन लोग जेल में रहेंगे, फिर बाहर आएंगे. कब किस को क्या सजा मिलेगी, पता नहीं. कुछ दिन में सबकुछ सामान्य हो जाएगा. जिन घरों के चिराग बुझ गए उन का गम कभी दूर नहीं होगा.
दुर्घटना के लिए सब से अधिक जिम्मेदार वैन ड्राइवर था जो इयरफोन लगा कर वैन चला रहा था. उस ने रेलवेलाइन पर बिना ध्यान दिए वैन को क्रौस कराने की गलती की. केवल पूर्वोत्तर रेलवे की बात करें तो 5 सालों में 450 से अधिक दुर्घटनाएं मानवरहित रेलवे क्रौसिंग्स पर हो चुकी हैं, जिन में 325 से अधिक जानें जा चुकी हैं.
पूर्वोत्तर रेलवे में 625 मानवरहित रेलवे क्रौसिंग हैं. दुर्घटना होने के बाद बहुत सारी चर्चाएं होती हैं. इस के बाद किसी नए हादसे के इंतजार में फिर सबकुछ सामान्य हो जाता है. जिस देश में बुलेट ट्रेन की बात हो रही हो वहां आज भी ऐसे हादसे बताते हैं कि देश में बुलेट ट्रेन चलाने से पहले रेलवे के मूलभूत ढांचे में बदलाव की जरूरत है. मानवरहित क्रौसिंग एक बड़ी समस्या है.
लापरवाह शिक्षा विभाग
कुशीनगर दुर्घटना का दूसरा पक्ष शिक्षा विभाग है. यह बात केवल कुशीनगर के स्कूल में ही नहीं चल रही, पूरे प्रदेश में यही हाल है. कुशीनगर में दुर्घटना होने के बाद मामला खुल गया, पर इस के बाद भी शिक्षा विभाग अपने कामों में सुधार नहीं करेगा. ग्रामीण भी अब अपने बच्चों को बस से स्कूल पढ़ने के लिए भेजना चाहते हैं.
शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने के नाम पर बड़ीबड़ी वसूली करता है. इस का हिस्सा शिक्षा विभाग में छोटे कर्मचारी से ले कर मंत्री तक पहुंचता है. मान्यता देने के लिए सालोंसाल स्कूल प्रबंधन को दौड़ाया जाता है. डिवाइन पब्लिक स्कूल को भी मान्यता नहीं मिली थी. ऐसे में उस के यहां पढ़ रहे बच्चों को सेठ बंशीधर विद्यालय से टीसी देने की व्यवस्था होती थी.
स्कूल को सरकारी मान्यता नहीं मिली है, यह बात बहुत सारे पेरैंट्स को पता ही नहीं थी. कुशीनगर के दुदही ब्लौक के मिश्रौली गांव की प्रधान किरन देवी ने अपने 9 साल के इकलौते बेटे रवि और 2 बेटियों 7 साल की सुंदरी और 5 साल की रागिनी का दखिला डिवाइन स्कूल में करा दिया था. किरन देवी के पति अमरजीत पहले प्रधान थे. 750 रुपए प्रति बच्चा फीस दे कर वे अपने 3 बच्चे वैन से स्कूल भेज रहे थे.
जहीर बताते हैं कि उन का बेटा अरशद गांव के स्कूल में पढ़ने नहीं जाता था. उसे शौक था कि वह भी वैन वाले स्कूल में पढ़ने जाएगा. जब से उस का एडमिशन यहां हुआ था वह रोज स्कूल जा रहा था. उत्तर प्रदेश के हर कसबे और गांव में प्राइवेट स्कूल खुल गए हैं. ये स्कूल मान्यता के लिए शिक्षा विभाग के पास भटक रहे हैं पर शिक्षा विभाग इन को मान्यता नहीं दे रहा. शिक्षा विभाग की मिलीभगत से ही ये अपने यहां के बच्चों को किसी मान्यता वाले विद्यालय से प्रमाणपत्र दिला देते हैं. शिक्षा विभाग में रिश्वत की आड़ में यह खेल कई वर्षों से चल रहा है.
सबक सीखने को तैयार नहीं
प्रदेशभर में वाहन चलाते ऐसे तमाम लोग मिल जाएंगे जो कानों में इयरफोन लगा कर ड्राइव करते हैं. बिना हैलमेट के और सीटबैल्ट लगाए बगैर भी लोग खूब ड्राइव करते हैं. रौंग साइड गाडि़यां खूब चलती हैं. हर स्कूलवाहन पूरी तरह से दुरुस्त नहीं होता. जरूरत से ज्यादा सवारी वाहनों में ठूंसी जाती हैं. ट्रैफिक नियम तोड़ कर चलना शान समझा जाता है, जिस में सब से अधिक सत्तापक्ष के लोग होते है. जब जिस की सरकार होती है उस के लोग शान से नियम तोड़ कर चलते हैं. पुलिस और परिवहन विभाग की लापरवाही साफ दिखती है.
अभी तक वैन वाले स्कूल केवल शहरों में ही होते थे. अब गांवों में भी वैन वाले स्कूल होने लगे हैं. गांव, कसबों और छोटे शहरों में किसी भी तरह की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं है. वहां स्कूल वाहनों को चैक करने का कोई ढांचा नहीं हैं. वैन चलाने वाले ज्यादातर चालक लाइसैंसधारी नहीं होते. लाइसैंस बनाने के नाम पर आरटीओ औफिस लूट करता है और जम कर रिश्वत ली जाती है.
कुशीनगर की घटना के बाद चेते परिवहन विभाग ने राजधानी लखनऊ में स्कूल वैन चालकों के लाइसैंस चैक किए. कई चालकों को बिना लाइसैंस पकड़ा गया. परिवहन विभाग के कर्मचारी कहते हैं कि हमारे पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं जो इस तरह की चैकिंग नियमितकर सकें.
नियम कहता है कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करना, नशे में वाहन चलाना, तेज रफ्तार वाहन चलाना, सीटिंग क्षमता से अधिक लोगों को बैठाना, रैड लाइट जंप करना कानून तोड़ना माना जाता है. इस की सजा के रूप में वाहन चलाने वाले ड्राइवर का लाइसैंस 5 माह के लिए रद्द करने का प्रावधान है.
आंकडे़ बताते हैं कि पकडे़ जाने के बाद भी ऐसी कड़ी कार्यवाही नहीं की जाती है.केवल स्कूली वाहनों की बात नहीं है, सड़क पर नियमों की लापरवाही के तमाम उदाहरण मिलते हैं. जब तक लापरवाही पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक सुधार नहीं होगा.
VIDEO : कलर स्प्लैश नेल आर्ट
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