उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक तहसील है मोहनलालगंज, जो लखनऊ से 23 किलोमीटर दूर है. तहसील में कोषागार यानी ट्रेजरी होने की वजह से वहां सिपाहियों की ड्यूटी लगती है. उस रात कोषागार की सुरक्षा के लिए सिपाही रामकिशोर और रामप्रकाश वर्मा की ड्यूटी थी.

रात ढाई बजे के करीब सिपाही रामकिशोर की नींद खुली तो वह लघुशंका के लिए बाहर निकला. उस की नजर तहसील परिसर में बने कुएं की ओर गई तो उस ने देखा कि कुएं के ऊपर लगे लोहे के जाल पर उस का साथी सिपाही रामप्रकाश वर्मा लटक रहा है.

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