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पहली नजर का प्यार और सैक्स

यह पहली नजर का उफ क्या असर है. तुम्हारी कसम, डगमगाए से हम हैं… उंगलियों में चाबी का गुच्छा नचाते, फुल वौल्यूम में गाते हुए अतुल ने बंधु के कमरे में प्रवेश किया. मेज पर फैली अपनी किताबों को समेटते हुए बंधु ने अतुल से पूछा, ‘‘यार, क्या बात है, बड़ा खुश नजर आ रहा है?’’

‘‘यार, बात ही ऐसी है,’’ कहते हुए अतुल गाने की फिर वही पंक्तियां दोहराने लगा.

बंधु ने अपनी बेचैनी दबाते हुए फिर पूछा, ‘‘अब कुछ बताएगा भी या यों ही गला फाड़ता रहेगा?’’

जब अतुल ने कालेज में ही पढ़ने वाली नीता के साथ अपनी पहली नजर में ही प्यार हो जाने का किस्सा सुनाया तो बंधु हंसने लगा और हंसतेहंसते बोला, ‘‘यार, तू इसे पहली नजर क्यों कह रहा है? मुझे तो लगता है यह शायद तेरी 26वीं नजर वाला प्यार है. एमए में हम दोनों को साथ पढ़ते हुए अभी सिर्फ एक साल ही बीता है, लेकिन इन 12 महीनों में तेरी नजरें 25 युवतियों से तो पहली नजर वाला प्यार कर ही चुकी हैं.

अपनी पहली नजर के प्यार की यों मखौल उड़ता देख अतुल चिढ़ सा गया, बोला, ‘‘मैं सब समझता हूं, तुझ से तो कुछ होता नहीं, बस, बैठाबैठा मेरी तरक्की देख कर जलता रहता है.’’

दोस्त को मनाते हुए बंधु बोला,’’ यार, तू तो नाराज हो रहा है. अरे, मैं क्यों तेरी तरक्की से जलने लगा, मैं तो चाहता हूं कि तू और तरक्की करे. लेकिन जिसे तू प्यार कह रहा है वह प्यार न हो कर मात्र आकर्षण है.’’

बंधु की बात बीच में ही काटता हुआ अतुल बोला, ‘‘यार, तेरी हर समय यह लैक्चरबाजी मुझे पसंद नहीं. अरे, दिलों की बात तू क्या जाने? नीता और मैं दोनों एकदूसरे को कितना चाहने लगे हैं, हम शादी भी करेंगे. तब तेरा मुंह बंद हो जाएगा.’’

कुछ दिनों बाद अतुल के नीता से चल रहे प्रेमप्रसंग का वही अंत हुआ जो उस के पिछले 25 का हुआ था. क्या सच में पहली नजर का प्यार प्रेमियों के अंदर पनपता है? अगर पहली नजर वाला प्यार उत्पन्न होता है तो कुछ समय बाद प्यार से लहराता दिल अचानक सूख क्यों जाता है.

विपरीत सैक्स के प्रति अपार आकर्षण

पहली नजर में होने वाला प्यार काफी हद तक यौनाकर्षण से जुड़ा होता है. लड़केलड़कियां एकदूसरे से विपरीत सैक्स के कारण अपार आकर्षण अनुभव करने लगते हैं. उस आकर्षण को ही वे सच्चा प्यार समझने लगते हैं. वास्तव में यह प्यार नहीं होता. यह तो मात्र एक आकर्षण है, जो विपरीत सैक्स के बीच स्वाभाविक रूप से होता है.

विपरीत सैक्स की आपस में बहुत ज्यादा निकटता से कभीकभी प्यार होने जैसी गलतफहमी होने लगती है. 15 वर्ष की शालू को लगने लगा जैसे वह अपने मास्टर के बिना नहीं जी पाएगी. 25 वर्षीय मास्टरजी उसे घर में सितार सिखाने आते थे. एकांत कमरे में मास्टरजी की समीपता से उसे लगने लगा कि वह मास्टरजी से बहुत प्यार करने लगी है. वह तो अच्छा हुआ कि  शालू पर चढ़ा मास्टरजी का आकर्षण सिर चढ़ कर बोलने लगा. रातदिन बेटी के मुंह से मास्टरजी के किस्से सुन कर शालू की मम्मी का माथा ठनका, बात बिगड़ने से पहले ही मम्मी ने संभाल ली.

कुछ दिन तो शालू ने मास्टरजी को बहुत मिस किया, लेकिन धीरेधीरे वह मास्टरजी को भूलने लगी. अब तो मास्टरजी को देख कर उस का मन दुखी हो जाता है. वह स्वयं से प्रश्न करती है, आखिर इन बौनेकाले मास्टरजी में ऐसा क्या था जो मैं इन पर लट्टू हो गई थी. विपरीत सैक्स के आकर्षण का समीपता के अलावा और भी कारण हो सकते हैं जो दिल में प्यार पैदा कर देते हैं.

कल्पना के अनुरूप मिल जाना

हर लड़का या लड़की की जीवनसाथी के बारे में जरूर कुछ न कुछ कल्पना होती है. कल्पना के अनुरूप कोई भी एक गुण मिल जाने पर प्यार हो जाता है. एक कौन्फ्रैंस  में देवेश नागपुर गए थे. वहीं उन्होंने जींसटौप में सजी हंसमुख मीनाक्षी को देखा, तो उन्हें लगा वे उसे अपना दिल ही दे बैठे हैं. एक सप्ताह की कौन्फ्रैंस में 5 दिन दोनों ने साथसाथ बिताए. वहां आए सभी लोगों को भी देवेश और मीनाक्षी के प्रेम को प्रेमविवाह में बदलने का पूरा विश्वास था. लेकिन जाने से 2 दिन पहले की बात है. मीनाक्षी देवेश से मिलने उन के कमरे में आई.

देवेश उस समय चाय बना रहे थे. मीनाक्षी को आया देख कर उन्होंने उस के लिए भी चाय बनाई. 2 कपों में चाय बना कर देवेश ने मेज पर रखी, मीनाक्षी ने चाय उठाई. अपने कप में बाहर की ओर लगी चाय को उस ने रूमाल से नजाकत से पोंछा. देवेश इस उम्मीद में थे कि उन के कप में लगी चाय भी पोंछेगी, लेकिन उस ने उन के कप की ओर ध्यान ही नहीं दिया.

चाय पी कर जूठे कपप्लेट वहीं छोड़ कर वह चली गई. देवेश मीनाक्षी के इस व्यवहार से आहत हो गए. मीनाक्षी के प्रति उन के मन में प्यार का छलकता सागर उसी समय सूख गया. यह अवश्य था कि उन की पसंद के अनुसार मीनाक्षी स्मार्ट थी, हंसमुख थी, लेकिन जिसे उन की जरा भी परवाह नहीं, ऐसी जीवनसाथी उन्हें जीवन में क्या सुख देगी.

उसी समय कई दिनों से बढ़ाई प्यार की डोर उन्होंने एक झटके से काट डाली. उस के बाद मीनाक्षी से उन्होंने कोई बात नहीं की. अगले दिन वे नागपुर से कानपुर लौट आए.

जब मीनाक्षी की ही समझ में कोई कारण न आया तो औरों की समझ में क्या आता. आखिर सब ने देवेश के जाने के बाद उन्हें धूर्त, मक्कार तथा फ्लर्ट की संज्ञा दी.

अवगुण आकर्षण पर भारी

प्यार हो जाने तथा प्यार के टूट जाने के पीछे मुख्य कारण है हमारी पंसद का बिखरी अवस्था में होना. हमारे दिमाग में जहां एक ओर गुणों की लंबीचौड़ी लिस्ट होती है, वहीं अवगुणों की लिस्ट भी मौजूद रहती है. हमारे इच्छित सभी गुणों का एकसाथ मिलना असंभव होता है.

जब किसी से प्यार होता है तो उस प्यार के पीछे हम उस के किसी गुण से आकर्षित हो कर उस से प्यार करते हैं. लेकिन प्यार में नजदीकी बढ़ने के साथ ही अगर कोई बुराई सामने आ जाती है, तो वह प्यार के आकर्षण को वहीं समाप्त कर देती है.

एक श्रीमान हैं. उम्र 40 वर्ष के लगभग है. लेकिन अभी तक कुंआरे हैं. दिल हथेली पर लिए घूमते हैं. मौका मिलते ही दिल लड़की को सौंपने में नहीं हिचकिचाते, चाहे बदले में उन्हें जूते ही खाने पड़ें. लेकिन कई लड़कियों से दिल लगाने के बाद भी वे अकेले के अकेले हैं. कारण, एक न एक गुण तो उन्हें हर लड़की का आकर्षित कर ही लेता है. लेकिन प्यार में नजदीक आने के बाद कोई अवगुण उन के शादी के जोश को समाप्त कर देता है.

वैसे, दिल के साथ दिमाग का प्रयोग करने वाले प्रेमियों की संख्या काफी कम होती है. चूंकि प्यार अंधा होता है, इसलिए अवगुणों की ओर तो ध्यान जाता ही नहीं. प्यार में डूबे अकसर प्रेमीप्रेमिका एकदूसरे के अवगुणों के प्रति आंखें मूंद कर प्यार के अंधे होने को सत्य साबित करते हैं.

किस की कौन सी अदा कब किस के दिल में

मुग्धा बस से दिल्ली जा रही थी. मुग्धा खिड़की से बाहर का दृश्य निहार रही थी अचानक सिगरेट का धुआं उस की नाक में घुसा. उस ने बुरा सा मुंह बनाते हुए पलट कर देखा. बगल की सीट पर ही बैठा नवयुवक बड़ी मस्ती से सिगरेट के छल्ले निकालनिकाल कर मंत्रमुंग्ध हो, उसे देख रहा था. मुग्धा बुरी तरह झल्लाई, ‘‘आप को कुछ तमीज है.’’

युवक ने सहम कर देखा और फौरन जली हुई सिगरेट अपने जूतों के नीचे मसल डाली. मुग्धा उसे देखती रह गई. अब बाहर के दृश्यों को देखने में उस का मन न लगा. रहरह कर आंखें उसी युवक पर टिक जातीं जो सिगरेट बुझा कर उदास सा बैठा था.

न जाने उस में मुग्धा को क्या लगा कि वह उस युवक के भोलेपन पर मुग्ध हो गई. कुछ देर पहले जितनी बेरुखी से उस ने उसे डांटा था, अब आवाज में उस से दोगुनी मिठास घोलते हुए उस ने युवक से पूछा, ‘‘आप इतनी सिगरेट क्यों पीते हैं?’’ फिर बातचीत का ऐसा सिलसिला चला कि कुछ ही घंटों में वे दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. इस घटना के कुछ ही समय बाद दोनों विवाहबंधन में भी बंध गए.

ठीक इसी तरह निशा अंगरेजी वाले सर, आनंद की आवाज पर फिदा है. सहेलियों के बीच बैठी हो या परिवार वालों के, उस की बातों का केंद्रबिंदु आनंद सर ही रहते हैं.

‘‘क्या आवाज है उन की. लगता है जैसे कहीं बहुत दूर से आ रही है.’’ जितनी देर आनंद सर कक्षा में पढ़ाते, निशा पढ़ाईलिखाई भूल, मंत्रमुग्ध हो आनंद सर की आवाज के जादू में डूबी रहती.

निशा अपने सर की आवाज की दीवानी है तो कक्षा में सब से स्मार्ट दिखने वाली शशि, ग्रामीण कैलाश को देखते न अघाती थी, उस के आकर्षण का केंद्रबिंदु था कैलाश की ठोड्डी में पड़ने वाला गड्ढा. इसी तरह न जाने किस की कौन सी अदा कब किसी के दिल में प्यार की चिनगारी सुलगा दे, यह बतलाना बहुत मुश्किल है.

बेंगलुरु की राधिका

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही कुमारस्वामी की पत्नी राधिका कुमार के खतरनाक फोटो वायरल हुए जिन में वे विभिन्न आकर्षक मुद्राओं में दिख रही हैं और नृत्य भी कर रही हैं. यह नृत्य हालांकि बरसाने की राधा सरीखा नहीं है पर इस में इस कन्नड़ अभिनेत्री की बेमिसाल खूबसूरती और प्रतिभा साफसाफ झलक रही है.

राधिका के वायरल फोटो कुंठा के दायरे में आते हैं या नहीं, यह तो मनोविज्ञानी जानें पर राधिका और कुमारस्वामी की आपसी समझ इस से अप्रभावित रही, यह जरूर अच्छी बात है. कम ही लोग जानते हैं कि दोनों की यह दूसरी शादी है और अपनी बिटिया के साथ वे 8 सालों से हंसीखुशी रह रहे हैं. रही बात राधिका के सौंदर्य की, तो वह तो वाकई अतुलनीय है, इस में शक नहीं.

स्मार्टफोन तो खरीदा लेकिन क्या किया ये जरूरी काम!

आपने नया स्मार्टफोन तो खरीद लिया है लेकिन क्या आपने अपने फोन के सिक्यॉरिटी के लिए कोई एप या कोई फीचर अपनाया है. नहीं ना. तो स्मार्टयफोन खरीदते ही कुछ जरूरी काम जरूर कर लें. स्मार्टफोन खरीदते ही करें ये काम.

डिस्प्ले की सुरक्षा

अक्सर ऐसा होता है कि प्रीमियम स्मार्टफोन तक का डिस्प्ले टूट जाता है. अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए उस पर अच्छी क्वॉलिटी का टेम्पर्ड ग्लास लगवाएं. सामान्य स्क्रीन गार्ड फोन की स्क्रीन को सिर्फ स्क्रैच आदि से बचाता है, लेकिन फोन गिर जाए तो उसकी स्क्रीन को टूटने से टेम्पर्ड ग्लास ही बचाता है.

स्मार्टफोन का बीमा कराएं

स्मार्टफोन का भी बीमा कराया जा सकता है. आजकल कई कंपनियां यूजर्स को स्मार्टफोन का बीमा ऑफर कर रही हैं. इसमें फिजिकल डैमेज, लिक्विड डैमेज और किसी मकैनिकल खराबी के लिए बीमा शामिल है. अगर कभी समार्टफोन में इस तरह की दिक्कतें आ जाएं तो इससे काफी फायदा होता है.

एपलॉक (AppLock) करें इंस्टॉल

आप कभी भी नहीं चाहेंगे कि कोई आपके निजी मेसेज, फोटो और दूसरे डेटा को देखें. इसके लिए आप एपलॉक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे एंड्रॉयड फोन के लिए गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. मोबाइल में मौजूद जिस भी ऐप, फोटो गैलरी आदि को आप चाहेंगे, इस एप की मदद से लॉक कर सकेंगे.

बैक कवर का यूज

मोबाइल की सुरक्षा को लेकर कभी समझौता न करें. अपने स्मार्टफोन की बॉडी को स्क्रैच, निशान और डेंट आदि से बचाने के लिए अच्छी क्वॉलिटी का बैक कवर खरीदें. आजकल बाजार में फैशनेबल और बढ़िया दिखने वाले कवर आसानी से उपलब्ध हैं. जरूरत के हिसाब से बैक कवर या फ्लिप वाले कवर चुन सकते हैं.

फोन चोरी होने पर पता लगाएं

स्मार्टफोन के चोरी होने या खोने पर काफी दिक्कत होती है. इस दिक्कत से बचने के लिए सुनिश्चित करें कि आपके एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर एक्टिवेट हो. इससे आपको स्मार्टफोन की लोकेशन पता लगाने में मदद मिलेगी.

इसके लिए अपने स्मार्टफोन की गूगल सेटिंग्स (Google Settings) में जाएं. स्क्रॉल डाउन करें और आपको सिक्यॉरिटी (Security) का ऑप्शन नजर आएगा. इसे टैप करें और एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर (Android Device Manager) पर जाएं. रिमोटली लोकेट दिश डिवाइस (Remotely locate this device) और अलॉव रिमोट लॉक एंड इरेज ऑन और ऑफ (Allow remote lock and erase on or off) को टिक कर दें. इसमें यह भी ध्यान रखें की बात है कि लोकेशन (Location) की सेटिंग में जाकर एक्सेस टू माई लोकेशन (Access to my location) को भी ऑन करके रखना है. इसके अलावा फोन में गूगल साइन इन होना चाहिए.

एंटी-मालवेयर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल

यह जरूरी है कि आप अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन की सुरक्षा की तरह ही उसके डेटा की सुरक्षा भी करें. नया फोन लेते ही सबसे पहले उसमें एंटी वायरस और डेटा सिक्यॉरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें जिससे मोबाइल के महत्वपूर्ण डेटा और दूसरे सॉफ्टवेयरों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

ये पाकिस्तानी क्रिकेटर कर चुका है बौलीवुड की कई फिल्मों में काम

भारत-पाकिस्तान के बीच हाईवोल्टेज मैच के दौरान आपने कई बार खिलाड़ियों को आपस में भिड़ते देखा होगा. एक दूसरे मुल्क पर छींटाकशी आम बात है. मगर क्या आप जानते हैं कि एक क्रिकेटर ऐसा भी था जो खेलता तो पाकिस्तान के लिए था मगर उसने बौलीवुड की 13 फिल्मों में भी काम किया था. इस क्रिकेटर का नाम था मोहसिन खान, जिन्होंने बौलीवुड की 1 या दो नहीं बल्कि 13 फिल्मों में काम किया था.

बता दें कि हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री रीना रौय ने पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से 1983 में शादी की थी और अपना सफल फिल्मी करियर छोड़ कराची शिफ्ट हो गईं. उस वक्त रीन रौय अपने करियर में बुलंदियों पर थीं. कुछ सालों बाद यह कपल मुंबई लौटा, जहां मोहसिन ने भी बौलीवुड में हाथ आजमाने की कोशिश की. उन्हें जेपी दत्ता की ‘बंटवारा’ और महेश भट्ट की ‘साथी’ में देखा गया.

हालांकि कुछ समय बाद मोहसिन पाकिस्तान वापस चले गए. दोनों की एक बेटी है लेकिन इसके बाद दोनों ने अलग होने का फैसला लिया. रीना का नाम शत्रुघ्न सिन्हा के साथ जोड़ा गया लेकिन फिलहाल वे अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हैं.

15 मार्च 1955 को कराची में जन्मे मोहसिन खान ने 48 टेस्ट मैचों की 79 पारियों में 6 बार नाबाद रहते हुए 2709 रन बनाए थे. इस दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ 200 रन की पारी खेलते हुए 9 अर्धशतक और 7 शतक भी जमाए. वहीं बात अगर वनडे की करें तो 8 अर्धशतक और 2 शतक की मदद से उन्होंने 1877 रन बनाए थे. इस क्रिकेटर ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मैच 2 दिसंबर 1986 को श्रीलंका के खिलाफ खेला था.

हवा में उड़ती सरकार का हारना सुखद है

आमतौर पर सरकारों के बननेबदलने से आम घरवालियों को फर्क नहीं पड़ता पर जब लगने लगे कि जो सरकार आप के घर में घुस रही है और आप को घर चलाने तक की नसीहत देने में लगी हो और उस सरकार के पांव लड़खड़ाने लगें तो थोड़ा सुकून मिलता है. कर्नाटक में सरकार न बना पाने पर और उस के बाद होने वाले उपचुनावों में 15 में से 12 सीटें हार जाने वाले नरेंद्र मोदी वही हैं जो कहते हैं कि चाय देर से मिलने पर पति को झगड़ने का हक नैतिक व नैसर्गिक दोनों हैं. श्रीमान नरेंद्र मोदी ने घरों में घुस कर लोगों से कहकह कर

सस्ते गैस सिलैंडर छुड़वाए और वाहवाही लेने की तर्ज पर एक औरत से कह डाला कि अब पति सिलैंडर होने के कारण चाय देर से मिलने के लिए डांटता तो नहीं होगा यानी उन का अर्थ था कि अगर चाय देर से मिले तो डांटना गलत नहीं है. इसी पार्टी के लोग कहते रहते हैं कि औरतों का बलात्कार होता है तो वे खुद ही जिम्मेदार होती हैं. इसी के समर्थक लोगों के घरों में घुस कर रैफ्रिजरेटर में झांकना हक समझते हैं कि वहां रखा मीट गाय का मांस तो नहीं है.

इसी पार्टी के लोग बिंदी जैसी छोटी चीज पर भारीभरकम जीएसटी को सही मानते हैं. इस पार्टी को मंदिरों, योगासनों, ब्राह्मणों की तो फिक्र है पर 4 सालों में इस ने औरतों के हित का एक भी कानून पास नहीं किया है. अगर तीन तलाक कानून पास हुआ है तो सिर्फ इसलिए कि हिंदू जमात को जताना था कि वह इसलामी कानूनों में दखल दे सकती है. असल में सरकारों के फैसले घरों को उसी तरह प्रभावित करते हैं जैसे व्यवसायों और कारखानों को. सरकारी फैसलों का असर एक घरवाली पर कैसे पड़ेगा, अगर कोई सरकार यह न समझ पाए तो वह निकम्मी है.

नोटबंदी ने लाखों औरतों की छिपाई पूंजी बाहर निकलवा दी और आज भी कुछ नोट हर महिला की साडि़यों से निकल आते हैं, जो कमाए तो पूरी मेहनत से गए थे पर सरकार की बेवकूफी के कदम से कागज के रंगीन टुकड़े भर रह गए. उस सरकार को झटका लगे तो ठीक है. जैसे बेटी अगर घर में तोड़फोड़ करने लगे तो मां की डांट सही होती है वैसे ही वोटरों की यदाकदा डांट भी अच्छी रहती है.

अब सरकार के सामने वैसी ही स्थिति होगी जैसी पति की गलती से कीमती मग टूट जाने के बाद पत्नी की होती है. उम्मीद करें कि इन झटकों से सरकार को लगे कि उस के पास जो हक हैं, वे जानता के दिए हैं, जन्मजात पंडों की तरह के नहीं हैं. सरकार को धर्म और उस की किसी विशेष जाति के लिए हर नागरिक के घर को सुखद व सुरक्षित बनाने का काम करना चाहिए पर ऐसा कहीं होता दिख नहीं रहा है. सरकारें चुने जाने के बाद अकसर सत्ता में इतनी मशगूल हो जाती हैं कि वे भूल जाती हैं कि देश के वोटरों में 50 फीसदी औरतें हैं और उन की कोई भी जाति हो या धर्म, सरकारी फैसलों का उन पर बराबर का असर पड़ता है.

इन चुनाव नतीजों ने हवा में उड़ती सरकार को जो डोर से बांधा है वह सुखद है.

नोट में खोट : इस मशीन के चक्कर में लाखों रुपए गंवा रहे हैं लोग

भारतीय करेंसी के बड़े नोटों को 8 नवंबर, 2016 को एकाएक बंद कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नकली नोटों के कारोबारियों को करारी चोट पहुंचाई थी. ये कारोबारी एक सुनियोजित तरीके से भारतीय अर्थव्यवस्था को खोखला करने की कोशिश में लगे थे. 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद भले ही कुछ दिनों के लिए बाजार में नकली नोट आने बंद हो गए थे. लेकिन स्थिति आज भी पूरी तरह बदली नहीं है.

कुछ जालसाजों ने तो नोट छापने की मशीन बेचने के बहाने लोगों को ठगना शुरू कर दिया है. भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी बपौती समझने वाले कुछ ऐसे गिरोह हैं, जो पुलिस प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर 5 सौ और 2 हजार रुपए के नकली नोट छाप रहे हैं और लोगों को रुपए तिगुना करने का लालच दे कर ठग रहे हैं.

असम के उत्तर लखीमपुर जिले के अंतर्गत कई गांव ऐसे हैं, जहां के अधिकांश लोग इस जालसाजी के धंधे में लगे हैं. एक दिन में अमीर बनने के लालच में लोग वहां अपनी गाढ़ी कमाई लुटाने चले जाते हैं.

आइए जानें, इस गांव के लोग आखिर नोट छापने और नोटों को दोगुना करने का धंधा किस तरह करते हैं.

असम के उत्तर लखीमपुर के एक गांव का रहने वाला है नजरूल काका नूर मोहम्मद उर्फ राहुल. उस का कहना है कि उसे भारतीय रिजर्व बैंक, दिल्ली की ओर से यह अनुमति मिली हुई है कि अगर कोई व्यक्ति उसे 37 लाख रुपए देता है तो वह नोट छापने वाली मशीन से 10 मिनट में एक करोड़ 15 लाख रुपए छाप कर उसे दे सकता है.

उत्तर लखीमपुर जिले के बिहपुरिया से 3 से 4 किलोमीटर दूर बंगालमरा पुलिस चौकी में आने वाले अहमदपुर, ठेंगिया, सोनापुर, फतेपुर, दौलतपुर, कुतुबपुर, इसलामपुर, मिरीसीट समेत तमाम गांवों में रहने वाले अधिकांश लोगों के यहां नोट छापने की मशीनें उपलब्ध हैं.

और तो और भारतीय रिजर्व बैंक का ‘लोगो’ भी मशीन पर है. राहुल ने बताया कि रिजर्व बैंक से नोट छपाई में काम आने वाले 10 करोड़ कागज और मशीन लेने के लिए 10 प्रतिशत रकम बैंक को देनी होगी, तब जा कर आप रुपए छापने की मशीन अपने शहर ले जा सकते हैं. और नोट छापने वाली मशीन के लिए हर महीने आरबीआई को 20 लाख रुपए देने होंगे अन्यथा मशीन वापस करनी होगी.

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यही नहीं मशीन में कोई गड़बड़ी आती है तो कंपनी दूसरी नई मशीन उपलब्ध करा सकती है. राहुल ने बताया कि नोट छापने की सभी जरूरी वस्तुएं नई दिल्ली स्थित आरबीआई उपलब्ध कराती है. राहुल का कहना है कि वह ग्राहकों को खुश करने के लिए पहले 10 हजार से ले कर 20 हजार रुपए लेता है और बदले में 10 का 30 और 20 का 60 हजार मशीन से छाप कर दे देता है. यानी दी गई रकम के 3 गुने नोट मिल जाते हैं.

सच्चाई जानने के लिए लेखक ने पिछले 10 दिनों से उन लोगों से बात करने की लगातार कोशिश की, जो घरों में मशीन से 2 हजार और 5 सौ के नोट छाप रहे हैं. लेखक ने खुद को राशन का थोक व्यापारी बताया. लेखक ने यह भी कहा कि वह 20 लाख रुपए देने को तैयार है, पर बदले में कितना मिलेगा.

जवाब आया कि 20 लाख रुपए के 60 लाख रुपए मिलेंगे, लेकिन हमारी ओर से 15 लाख अलग से दिए जाने का औफर है. यानी 20 लाख रुपए के बदले 75 लाख रुपए दिए जाएंगे.

मामले की तहकीकात करने के लिए लेखक ने असम पुलिस के कई आला अधिकारियों से संपर्क साधा तो पता चला कि रिजर्व बैंक औफ इंडिया का नाम ले कर जालसाजी करने वाले कुछ ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो इस तरह से लालच दे कर लोगों से असली रुपए लूट लेते हैं.

इस समय उत्तर लखीमपुर जिले के विभिन्न इलाकों से नोट दोगुना करने वाले गिरोह अपने जाल में फांस कर लोगों को लूट रहे हैं. गिरोह के लोगों ने अब तक कई लोगों से लाखों रुपए लूट लिए हैं.

गिरोह के जाल में केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) का एक डीएसपी भी फंस कर लाखों रुपए लुटा चुका है. विस्तार से जानकारी हासिल करने के लिए लेखक ने किसी तरह गिरोह के सरगना से संपर्क साधने की कोशिश की, जिस में सफलता मिली.

हुआ यूं कि किसी तरह एक नेपाली युवती का फोन नंबर मिल गया. उस युवती से संपर्क साधने के बाद नोट दोगुना करने वाले राहुल का नंबर मिला.

राहुल से संपर्क करने की कोशिश की तो उस ने फोन काट दिया, लेकिन दूसरे दिन उस से खुद फोन किया और मतलब की बात की. ‘जय माता दी’ कह कर अपनी बात की शुरुआत करने वाले राहुल का असली नाम नजरूल काका नूर मोहम्मद है.

खुद को गुवाहाटी के दक्षिण गांव का रहने वाला बता कर उस ने कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश पर नोट दोगुने करता है. उस ने कहा, ‘‘आप कुछ रुपए ले कर बिहपुरिया आ जाएं, वहां आने के बाद काल करें. हमारा आदमी आप को मेरे घर ले कर आ जाएगा और 5 हजार या 10 हजार रुपए देने के बाद आप के नोट दोगुना कर दिए जाएंगे.’’

चूंकि यह पूरा धंधा गैरकानूनी रूप से चल रहा था, इसलिए हम ने असम पुलिस के एसटीएफ के एडीजीपी वाई.के. गौतम से संपर्क किया. वह हमारी मदद करने को तैयार हो गए. उन्होंने हमारे साथ पुलिस की एक टीम भी भेजी.

हम राहुल के कहे अनुसार, गुवाहाटी से निकल गए. तभी राहुल का फोन आया. उस ने बताया कि वह हर घंटे काल करता रहेगा. सोनापुर, हैबरगांव, कलियाभोमरा पुल और नारायणपुर तक राहुल फोन करता रहा. फिर अचानक 5 बज कर 17 मिनट पर राहुल का मोबाइल स्विच्ड औफ हो गया.

हम लगातार उस के नंबर पर संपर्क करते रहे, लेकिन उस का फोन बंद ही मिला. हम ने लखीमपुर के मां काली होटल में रात गुजारी. सबेरे हम ने नोट दोगुना करने वाले गिरोह की खोजबीन शुरू की, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका.

दोपहर के समय हम बंगालमरा आउट पुलिस चौकी में गए. चौकीइंचार्ज जौन पाठरी से बात करने के बाद हमें नोट दोगुना करने वालों के बारे में सच्चाई पता चली.

चौकीइंचार्ज पाठरी ने बताया कि उन के इलाके के अलावा अन्य कई जगहों पर लोगों को नोट दोगुना करने वाले गिरोहों की कमी नहीं है. हर मकान में नोट छापने के नाम पर एक मशीन है, जिसे नोट छापने वाली मशीन बता कर लोगों को लूटा जा रहा है.

बाद में हमें पता चला कि राहुल नाम के इस शातिर ठग को भनक लग गई थी कि गुवाहाटी से पुलिस की टीम हमारे साथ है. तभी उस ने अपना मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिया था.

तहकीकात करने पर पता चला कि नोट दोगुना करने वालों के जाल में अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय के साथसाथ विभिन्न प्रदेशों के लोग शिकार हो चुके हैं.

नोट दोगुना करने वाले गिरोह वाशिंग मशीन के आकार का एक डब्बा, जो कई रंगबिरंगी लाइटों से जगमगाता रहता है और उस पर आरबीआई का स्टीकर लगा रहता है, में पहले से कुछ असली नोट रख देते हैं और ग्राहक के सामने मशीन को चालू कर दिया जाता है.

मशीन के चालू होने के बाद डब्बे के ऊपर बने एक छेद से 2 हजार के नोट जो एक तरफ छपे हुए होते हैं और दूसरी तरफ सफेद रहता है, डाले जाते हैं. थोड़ी देर बाद एक अन्य स्विच को चालू करने पर नीचे बने छेद से तेज रफ्तार से 2 हजार के नोट एकएक कर के बाहर निकलने लगते हैं.

नोट के बाहर निकलने पर उस के पास आया ग्राहक उस नोट को ले कर बाजार में जाता है और कुछ चीजें खरीदता है. नोट के बाजार में चल जाने से ग्राहक को इस बात का विश्वास हो जाता है कि मशीन से असली नोट ही बाहर आते हैं. फिर वह दोबारा मोटी रकम ले कर उस के पास आता है. नोट दोगुना करने वाले गिरोह के सदस्य नोट के आकार के कागज के टुकड़े को एक तरफ कलर फोटोकापी किए हुए 2 हजार के नोट को लगा कर बंडल बना कर रस्सी बांध देता है.

वह बंडल यह कह कर ग्राहक को दे देता है कि आप ने 20 लाख रुपए दिए थे, ये रहे 60 लाख और कंपनी की ओर से 15 लाख रुपए का औफर भी इसी में है.

नोट के बंडलों को ले कर ग्राहक खुशीखुशी वहां से चला जाता है. बाद में उसे पता चलता है कि वह इस गैंग के द्वारा ठगा जा चुका है. डर और भय से वह इस की शिकायत पुलिस थाने में भी नहीं करता और न ही उस स्थान पर जाने की उस की हिम्मत होती है, जहां से वह नोट के आकार का बंडल ले कर आया हुआ होता है.

बंगालमरा आउट थाने के थानाप्रभारी ने पहले से जब्त की गई नोट छापने की तथाकथित मशीन के अलावा 2 हजार और 5 सौ रुपए के आकार के कागजों के बंडलों के अलावा रुपए की फोटोकापियों और गिरोह द्वारा बनाए गए आरबीआई के लोगो, प्रमाणपत्र आदि दिखाए.

उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले त्रिपुरा से आया एक व्यक्ति अपनी कार टीआर01सी 0741 जेन वाईएक्स से नोट दोगुना करने वाले गिरोह के चक्कर में फंसा था. उसी समय पुलिस की रेड हुई तो वह अपनी कार छोड़ कर भाग खड़ा हुआ.

नोट दोगुना करने वालों को कई बार गिरफ्तार तो किया गया, लेकिन कोर्ट से जमानत पर छूटने के बाद वे फिर से इस धंधे को शुरू कर देते हैं और ग्राहकों की तलाश में ये लोग अपने एजेंट बाजार में छोड़ देते हैं. इस तरह से इन का धंधा चल रहा है.

भाई भतीजावाद पर विश्वास नहीं : कैलाश खेर

कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे मेरठ के इंडियन पौप रौक और प्लेबैक सिंगर कैलाश खेर ने ‘टूटाटूटा एक परिंदा…’ गाने से अपनी पहचान बनाई. उन का शुरुआती दौर काफी संघर्षपूर्ण था. केवल 13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया था और अपने संगीत की पहचान बनाने के लिए पहले दिल्ली, फिर मुंबई आए. उन्होंने सूफी संगीत के साथ रौक का फ्यूजन कर जो शैली विकसित की, वह काबिलेतारीफ है.

वे देश में ही नहीं, विदेशों में भी अपने संगीत की वजह से पहचाने जाते हैं. वे हर तरह के गीतों को गाना पसंद करते हैं. उन्होंने 18 भाषाओं में गाने गाए हैं, जिन में बौलीवुड के 300 गाने हैं. उत्कृष्ट गायिकी के लिए उन्हें इस साल पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया है. साधारण कदकाठी के कैलाश खेर से उन के अंधेरी स्थित स्टूडियो ‘कैलासा’ में मिलना हुआ. अपनी मंजिल तक वे कैसे पहुंचे, इस को ले कर वे बताते हैं-

‘‘मैं दिल्ली का हूं और मेरा बचपन काफी अलग था. मेरे पिता गाते थे, उन्हें देख कर, पढ़ाई के साथसाथ मुझे भी गाने का शौक था. लेकिन गाने से अधिक मुझे रहस्यवाद कविताएं लिखने का शौक था, जो सूफी कहलाता है. बड़े ये गाते थे और मुझे सुनने में बहुत अच्छा लगता था. उस समय मेरी उम्र केवल 4-5 साल की थी. वहीं से मेरे अंदर इसे गाने की इच्छा पैदा हुई. लेकिन परिवार वाले कहते थे कि पढ़ाई पूरी कर नौकरी करना है, जो मुझे पसंद नहीं था.

‘‘मैं अपनी जिद पर अड़ा था कि मैं गाना ही गाऊंगा. इसलिए मैं परिवार में किसी का प्यारा नहीं था और 14 वर्ष की उम्र में घर छोड़ देने के बाद मैं ने सारे रिश्ते छोड़ दिए. अब अपने दम पर जीने की चुनौती आई.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘कामयाब होने से पहले मेरे जीवन में बहुत संघर्ष था. घर छोड़ कर दिल्ली जैसे शहर में अकेले रहना, पेट भरना, पढ़ाई पूरी करना और अपनेआप को साबित करना सब एकसाथ आ गया. किराए पर बहुत दिनों तक रहा, करीब 12 वर्षों तक दिल्ली में 10 से

15 घर बदले. जिंदगी जीने का बहुत बड़ा संघर्ष था. इस संघर्ष से मैं ने विनम्र होना, जीना और चुनौती लेना सीखा. मैं ने इस संघर्ष से एक इंसान बनना भी सीखा.’’

संघर्ष के दिनों में संगीत कहां तक साथ था, इस पर कैलाश बताते हैं, ‘‘उस समय मैं संगीत क्या है, उसे करीब भूल चुका था. कैसे अपना पेट भरूं, कैसे मातापिता को अपनी शक्ल दिखाऊं, इस उठापटक में कब मैं 27 साल का हो गया, पता ही न चला. जिस के लिए घर छोड़ा उसी को नहीं कर पाया, क्योंकि आटे, तेल, लकड़ी आदि में जिंदगी उलझ गई थी. हमारे देश में ऐसे लाखों लोग हैं जो सपने तो देखते हैं पर उन्हें वे पूरे नहीं कर पाते.

‘‘इस के अलावा दिल्ली में मेरा एक छोटा सा एक्सपोर्ट का व्यवसाय भी फेल हो चुका था. मैं अवसाद में चला गया था. उस से निकलने के लिए कई काम किए. एक बार तो आत्महत्या की भी इच्छा हुई, पर इस दौरान मैं ने देखा कि जब भी कुछ गाता था तो सुनने वाले झूम उठते थे. फिर मैं ने साल 2001 में मुंबई आने का प्लान बनाया और अलबम बनाने की सोची.

‘‘2 साल यहां मेहनत की और साल 2004 में ‘टूटाटूटा’ गाने के रिलीज के बाद तो कहानी पूरी तरह से बदल गई. टीवी, रेडियो जिंगल्स और फिल्मों में गाने के औफर मिलने लगे.’’

संघर्ष के दौरान परिवार से अलग रहने के बाद जब सफलता मिली तब फिर परिवार के साथ कैसे जुड़े, इस पर वे कहते हैं, ‘‘मुंबई आने के बाद काम के साथसाथ जब पैसे मिलने लगे, तो जिंदगी में खुशियां मिलने लगीं, आत्मविश्वास बढ़ने लगा. मातापिता के पास गया, उन्हें मुंबई ले आया. अब वे दोनों नहीं रहे पर मैं खुश हूं कि उन्होंने मेरी कामयाबी को देखा है.

मेरी शादी अरेंज्ड है. मेरी पत्नी शीतल भान हाउसवाइफ है. मेरा एक बेटा कबीर 7 साल का है, जो मेरे और अंगरेजी गाने सुनता है. मेरी कामयाबी में परिवार, पत्नी और मेरे सहयोगी सभी का हाथ है. सैलिब्रिटी स्टेटस मुझे उन की वजह से ही मिला है. जीवन में कोई भी प्रसिद्धि आसानी से नहीं मिलती और जो इस से गुजरते हैं, उन्हें इस का मूल्य पता होता है. इसलिए जमीन से जुड़े रहने में कोई मुश्किल नहीं होती.’’

फिल्म इंडस्ट्री में आउटसाइडर यानी बाहरी लोगों को ले कर कैसा रवैया दिखता है? इस पर उन का कहना है, ‘‘जिन में हुनर हो उन्हें मौका मिलता है. इंडस्ट्री कोई नहीं होती, हुनर ही इंडस्ट्री है. आप में अगर प्रतिभा है तो हर कोई आप को पसंद करता है. जब मैं ने ‘देव’ फिल्म के दौरान ‘पिया के रंग, रंग दीनी…’ गाना गाया तो अमिताभ बच्चन भी चौंक कर मुझे देखने लगे थे.

‘‘कैसे भी आप हो, छोटेबड़े, कम या अधिक उम्र, लेकिन हुनर सब का बाप है. भाईभतीजावाद पर मैं विश्वास नहीं करता. रंगभेद और जातिवाद को कभी मैं ने महसूस नहीं किया, लेकिन शुरू में सब सोचते थे कि मैं कौन हूं, कहां से हूं और क्या गा सकता हूं. यह समस्या आई लेकिन जब प्रतिभा दिखी तो सब ने स्वीकार कर लिया.’’

जब आप को रिजैक्शन का सामना करना पड़ा, तब आप ने इस का सामना कैसे किया, इस को ले कर कैलाश कहते हैं, ‘‘मैं तो रिजैक्शन से ही आगे आया हूं. शुरू से अगर मुझे स्वीकृति मिल जाती तो मैं यहां तक पहुंच ही न पाता. शुरू में मैं ने शाहरुख खान की फिल्म ‘चलतेचलते’ के लिए गाना गाया था, मैं खुश था कि मुझे बड़ा ब्रेक मिल रहा है.

‘‘कुछ दिनों बाद जब म्यूजिक रिलीज हुई, तो उस में मेरा नाम नहीं था. उसी गाने को किसी और सिंगर से गवाया गया  था. ऐसी घटना से आप को पता नहीं चलता कि आप रिजैक्ट हो चुके हैं, बड़ा झटका लगा था लेकिन ये सब चीजें आप को सीख देती हैं.’’

रियल एस्टेट : जानेंगे जितना, जोखिम कम होगा उतना

जमीन-जायदाद में पैसा लगाना अक्सर फायदेमंद साबित होता है. इनके दाम में गिरावट आने की आशंका कम होती है. लेकिन दूसरी परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए इस बाजार में दांव लगाने से पहले की तैयारी ज्यादा जटिल होती है.

आम तौर पर माना जाता है कि जमीन-जायदाद की कीमत कभी कम नहीं होती. पिछले एक दशक के दौरान प्रॉपर्टी की दाम जिस हिसाब से बढ़े हैं उसे देखकर ये निवेश के आकर्षक साधन नजर आते हैं. लेकिन, इस मामले में अक्सर यह हकीकत भुला दी जाती है कि किसी निवेश से जितना ज्यादा रिटर्न की गुंजाइश होती है, उसमें जोखिम भी उतना ही अधिक होता है.

फिलहाल जमीन-जायदाद और आवास निर्माण कारोबार मुश्किल दौर में है. फ्लैट और प्लॉट के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन इसी हिसाब से लोगों की आमदनी नहीं बढ़ी. इस कारण प्रॉपर्टी की मांग कम हो गई, जिहाजा इसका बिजनेस ठंडा पड़ गया है.

नेशनल हाउसिंग बैंक की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ महानगरों में प्रॉपर्टी के दाम घटे हैं. इसके अलावा गाहे-बगाहे नोएडा में सुपरटेक के टावर जैसे मामले में सामने आते रहते हैं, जिनमें बड़ी-बड़ी कंपनियों के रिहायशी प्रोजेक्ट कानून के पचड़े में फंस गए हैं. ऐसे प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं. चाहे उन्होंने निवेश के तौर पर दांव लगाया हो या निजी इस्तेमाल के लिए फ्लैट खरीदे हों. इसलिए पैसा लगाने से पहले इसके तमाम पहलूओं पर बारीकी से गौर करना जरूरी है.

पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट

हकीकत यही है कि एक या एक से अधिक फ्लैट या फिर ढेर सारे प्लॉट खरीदने से पोर्टफोलियो नहीं बनता. चूंकि पिछले एक दशक के दौरान जमीन-जायदाद में पैसा लगाने वालों को तगड़ा फायदा हुआ है, लिहाजा इस सेक्टर में दांव लगाने वाले नए निवेशकों के लिए पहली जरूरत यह पता लगाना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला आगे भी जारी रहने की गुंजाइश है या नहीं. इसका सही जवाब मुश्किल है और इस मामले में जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, उनका सही होना संदिग्ध है.

निवेश से पहले की तैयारी तमाम जटिलताओं के बावजूद रियल एस्टेट में पैसा लगाने का एक सही तरीका है. इस क्षेत्र में पहली बार निवेश करने वालों को सबसे पहले यह पता कर लेना चाहिए कि अब तक सही समय पर डिलिवरी के मामले में डेवलपर का रिकॉर्ड कैसा रहा है. इसके अलावा प्रोजेक्ट के लोकेशन पर भी गौर करें. यह देखें कि प्रोजेक्ट आपके दफ्तर या बच्चों के स्कूल के करीब है या काफी दूर. इसके बाद प्रॉपर्टी की लागत पर ध्यान दें. पता लगाएं कि कर्ज चुकाने की ईएमआई कितनी होगी.

ध्यान रखें कि यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो आपकी माली हालत पर ईएमआई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. ऐसे में सबसे पहले यह पक्का करें कि प्रॉपर्टी की डिलिवरी समय पर हो जाएगी. प्रॉपर्टी की डिलिवरी में अक्सर गैर-वाजिब देरी होती है. ऐसा होने पर आपकी लागत बढ़ जाती है और मानसिक तनाव भी होता है.

ऐसे बढ़ती है गैर-वाजिब लागत

इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए कि आपने एक मकान खरीदा है, जिसकी डिलिवरी अगले एक साल में होनी है. आप फिलहाल किराए के घर में रहते हैं, जिसके लिए हर माह 8,000 रुपए चुकाना होता है. इसके अलावा जो मकान आपने लिया है, उसका लोन चुकाने के लिए हर माह 11,000 रुपए की ईएमआई देनी पड़ती है. इस तरह अगले एक साल तक आपको किराए के लिए 96,000 रुपए का इंतजाम करना होगा. इसके बाद किराए से मुक्ति मिल जाएगी क्योंकि जो मकान आपने खरीदा है, उसकी डिलिवरी एक साल में ही होनी है. इस लिहाज से यदि समय पर डिलिवरी होती है, तो आपको हर माह केवल 11,000 रुपए ईएमआई चुकानी होगी और मकान भी आपका अपना होगा.

लेकिन यदि मकान की डिलिवरी में देरी होती है, तो मासिक खर्च का हिसाब-किताब गड़बड़ाना तय है. वजह यह है कि एक साल बीत जाने के बाद भी आपको किराए की रकम चुकानी होगी. यानि किराए का बजट 96,000 रुपए से ऊपर निकलेगा. मान लीजिए कि मकान की डिलिवरी में 6 माह की देरी होती है. ऐसे में 6 माह तक आपको किराया देना पड़ेगा. आम तौर पर एक साल बाद किराए में 10 प्रतिशत इजाफा किया जाता है. इस हिसाब से आपको 52,800 रुपए (8,800 गुना 6) का अतिरिक्त इंतजाम करना होगा.

ईएमआई का हिसाब

किसी भी सूरत में ईएमआई की रकम नेट टेक-होम इनकम के 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा यदि आप घर का किराया भी देते हैं, तो ऐसी स्थिति में किराए और ईएमआई की रकम कुल मिलाकर नेट इनकम के 50-55 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए. इसलिए यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो ऐसा मकान खरीदें जिसकी डिलिवरी 6-9 महीनों में निश्चित तौर पर हो जाए. मूल रूप से कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि लंबे समय तक किराया और ईएमआई साथ-साथ न चुकानी पड़े.

दूसरा मकान खरीदना

इस मामले में भी वैसी ही तैयारी की दरकार होती है, जैसी पहली प्रॉपर्टी खरीदने से पहले की गई थी. अंतर केवल मकसद का होता है. मसलन, दूसरा मकान किराए के तौर पर अतिरिक्त आय के लिए लेना चाहते हैं, निवेश के लिहाज से या फिर दोनों मकसद से. एक उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी पक्की करना भी हो सकता है. इसलिए पहले मकसद जान लें, फिर आगे बढ़ें.

बैंक लोन मानक नहीं होते

आम तौर पर माना जाता है कि रियल एस्टेट के जिन प्रोजेक्ट के लिए बैंक से लोन मिल जाते हैं, उनमें जोखिम नहीं होता. लेकिन, हकीकत यही है कि ऐसे मामलों में बैंक से लोन मिलना कोई मानक नहीं होता. बेहतर यही होगा कि भावनाओं में बहकर कोई फैसला न करें. इसके अलावा ऐसा सोचने का भी कोई कारण नहीं है कि आपके मित्र या परिवार के किसी सदस्य को रियल एस्टेट में पैसा लगाने की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है, तो आपके साथ भी ऐसा ही होगा.

सुरक्षा की गारंटी नहीं होते बड़े नाम

आम तौर पर बड़ी रियल्टी कंपनियों के प्रोजेक्ट मानकों पर खरे माने जाते हैं, जिनमें गड़बड़ियों की आशंका कम होती है. लेकिन, पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसे कई मामले सामने आएं हैं, जिनमें बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी लेने वाले ग्राहकों को धोखा हुआ है. इसलिए इस मामले में यह बाद ध्यान रखनी जरूरी है कि जिस प्रोजेक्ट में पैसा लगा रहे हैं, उसमें कानूनी तौर पर कोई चूक नहीं की गई हो. ऐसे प्रोजेक्ट जब कानूनी पचड़े में फंसते हैं तो दशकों तक मामला नहीं सुलझता . मुंबई में कैंपा कोला सोसायटी का मामला ऐसा ही है, जहां दो दशक बाद हंगामा मचा है.

मैं जब भी आंखों का मेकअप करती हूं, मेरी आंखें ऐसी लगती हैं जैसे बाहर आ जाएंगी. मैं जानना चाहती हूं कि आंखों का मेकअप कैसा होना चाहिए.

सवाल
मेरी आंखें उभरी हुई हैं. मैं जब भी आंखों का मेकअप करती हूं. मेरी आंखें ऐसी लगती हैं जैसे बाहर आ जाएंगी. मैं जानना चाहती हूं कि आंखों का मेकअप कैसा होना चाहिए ताकि मेरी समस्या का समाधान हो सके?

जवाब
आंखें बड़ी होने से चेहरा आकर्षक लगता है, लेकिन ऐसा लगता है आप की आंखें कुछ ज्यादा ही अधिक बड़ी हैं. आप अपनी आंखों को सुंदर आकार देना चाहती हैं, तो इस के लिए आप को अपनी पलकों पर गहरे रंग का आईशैडो इस्तेमाल करना चाहिए या फिर ब्राउन शेड का आईशैडो बहुत अच्छा व नैचुरल लगेगा.

आंखों के बिलकुल नजदीक से आईलाइनर की पतली लकीर खींचें जो धीरेधीरे बाहर की ओर मोटी होती दिखाई दे. इस लकीर को आंखों से बाहर निकाल कर लगाएं. अब अगर अपनी समस्या का परमानैंट हल चाहती हैं, तो इस के लिए परमानैंट आईलाइनर लगवा सकती हैं. परमानैंट लाइनर से आप की आंखों को सही आकार मिल सकता है. इस से आप की आंखें हर पल खूबसूरत और आकर्षक नजर आएंगी.

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ऐसा हो आई मेकअप

गरमी का मौसम है. आप पार्टी में जा रही हैं. आप मेकअप नहीं करना चाहती हैं. लेकिन चाहती हैं कि आप पार्टी में सब से अलग दिखें. ऐसे में आप हैवी मेकअप करने के बजाय अपनी आंखों को ही आकर्षक बनाएं. आज मार्केट में आंखों को आकर्षक बनाने के लिए बहुत से ट्रैंडी आई मेकअप हैं. आंखों को हाइलाइट करने के लिए कलर्स, स्पार्कल, सितारा, स्वरोस्की का प्रयोग किया जा सकता है. आइए जानें, कैसे आप इन के जरिए अपनी आंखों को आकर्षक बना सकती हैं.

आंखें जो लगें सब से अलग

लैपर्ड व कैट मेकअप से आंखों को आकर्षक लुक दिया जाता है. यह मेकअप बेहद खूबसूरत दिखता है. इस से आप की आंखें दूसरों से अलग दिखेंगी. इस मेकअप में आप की आंखों पर लैपर्ड व कैट की स्किन जैसे प्रिंट्स बनाए जाते हैं. इस मेकअप में लिक्विड कलर और एकसाथ 2-3 कलर प्रयोग किए जाते हैं.

आकर्षक लुक देती आंखें

कई बार मेकअप ऐसा होता है कि उस में खालीपन महसूस होता है और यह अच्छा भी लगता है. इन दिनोें यह खालीपन ही चलन का हिस्सा बना हुआ है. आंखों को स्मोकी व कजरारी बनाने के लिए ब्लैक आईलाइनर प्रयोग किया जाता है, लेकिन अब व्हाइट आई मेकअप चलन में है. इस में आंखों के ऊपर व नीचे सिल्वर व व्हाइट आई मेकअप किया जाता है, जिस से आंखों का खालीपन बरकरार रहता है और आंखें दूसरों से अलग भी दिखती हैं.

कलरफुल कलर्स

ड्रामैटिक आई मेकअप में रंगों का काफी प्रयोग किया जाता है. आईब्रो व आंखों के आसपास आप की ड्रैस से मैच करता ड्रामैटिक मेकअप किया जाता है.

फैदर्स जो अलग लुक दे

आजकल फैदर्स का इस्तेमाल मेकअप में भी काफी देखने को मिल रहा है. मार्केट में अलग स्टाइल के फैदर आ रहे हैं, जिन्हें आप आई मेकअप में प्रयोग कर सकती हैं. आप इस में बर्ड्स, पीकौक व ईगल के फैदर ट्राई कर सकती हैं.

फैंटेसी आइज

फैंटेसी मेकअप में सारा कमाल आर्टिस्ट की क्रिएटिविटी का होता है. दरअसल, आर्टिस्ट की कल्पना जितनी अच्छी होगी, वह उतना ही खूबसूरत मेकअप आप की आंखों पर करेगा. फैंटेसी मेकअप में पलकों की ऊपर वाली जगह पर अलग स्टाइल की पेंटिंग की जाती है. इस में पेड़, बटरफ्लाई, फूल, पक्षी वगैरह बनाए जाते हैं. इस के लिए कलर, क्रिस्टल, सैटन, स्पार्कल व ग्लिटर का इस्तेमाल किया जाता है. आंखों के मेकअप का यह आर्ट सब से ज्यादा अलग व ज्यादा वक्त लेने वाला है. फैंटेसी आइज मेकअप में आंखों को सजाने के लिए करीब 2 से 4 घंटे लगते हैं. हालांकि इस स्टाइल से आंखों का मेकअप करने पर ज्यादा खर्च नहीं आता है.

 

दुनिया के ये बैंक सेविंग्स पर उपभोक्ताओं से वसूलते हैं ब्याज

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दरों में इजाफा करने के बाद बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी जहां आम उपभोक्ताओं को परेशान कर रही हैं वहीं सेविंग्स पर मिल रहा कम ब्याज उनकी इस परेशानी को और बढ़ा रहा है.

सेविंग्स पर मिल रहा कम ब्याज दर बेशक चिंता का कारण हो सकता है, लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में ऐसी भी जगहें है, जहां बैंकों में रखे पैसे पर ब्याज देना तो दूर, उल्टे उस पर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है.

आरबीआई की ही तरह दुनिया के सभी केंद्रीय बैंक एक निश्चित अंतराल के बाद समीक्षा बैठक करते हैं. इस समीक्षा बैठक के दौरान या तो कुछ बेसिस प्वाइंट की कटौती की जाती है या फिर कुछ बेसिस प्वाइंट का इजाफा. हाल ही में आरबीआई ने समीक्षा बैठक में रेपो रेट में इजाफा किया था, जिसके बाद बैंकों ने भी ब्याज दरों में इजाफा किया.

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लेकिन स्विस नैशनल बैंक ने अपनी हालिया बैठक में नेगेटिव पौलिसी रेट को पहले की ही तरह बरकरार रखा है. स्विस नैशनल बैंक (एसएनबी) ने डिपौजिट पर (-) 0.75 फीसदी टैक्स रखा है. जिसका मतलब है कि बैंकों में पैसा रखने के बदले ग्राहकों को ही ब्याज का भुगतान करना होगा. ऐसी स्थिति में बैंक लोगों को ज्यादा खुले तौर पर कर्ज देता है ताकि लोगों को निवेश और खर्च के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

इसके अलावा बैंक औफ जापान ने भी ब्याज दरों को नेगेटिव में बरकरार रखा है. एक नजर दुनिया के उन देशों पर जहां पर पैसे रखने की एवज में या तो ब्याज का भुगतान करना पड़ता है या फिर बेहद न्यूनतम ब्याज मिलता है.

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