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मेरा बौयफ्रैंड अपनी पिछली गलफ्रैंड जो अब शादीशुदा है के संपर्क में है. इसीलिए वह मुझ से कटाकटा रहता है. मैं क्या करूं कि हमारा रिश्ता सुधर जाए.

सवाल
मैं 22 वर्षीय अविवाहित युवती हूं. 8 महीनों से एक युवक से प्यार करती हूं. वह भी मुझ से प्यार करता है. हम दोनों ने शादी करने का भी मन बना लिया था. लड़के के घरवाले इस शादी के लिए रजामंद हैं पर मेरे मम्मीपापा को यह संबंध स्वीकार नहीं है. कारण मेरे घर वाले रिश्तेदारी में शादी नहीं करना चाहते. लड़का मेरी मौसी की जेठानी का बेटा है.

कुछ दिनों से मुझे बौयफ्रैंड के स्वभाव में कुछ बदलाव सा नजर आने लगा है. लगता है कि वह अपनी पिछली गलफ्रैंड जो अब शादीशुदा है के संपर्क में है. इसीलिए वह मुझ से कटाकटा रहता है. कभीकभी उस के रवैए से लगता है कि वह मुझे छोड़ना चाहता है. इस में थोड़ी गलती मेरी भी है.

उस ने एक बार बातोंबातों में कह दिया था कि वह अपनी गर्लफ्रैंड को आज भी नहीं भूल पाया है. बस उसी दिन से मैं उस पर बेवजह शक करने लगी. वह कभी मेरा फोन देर से उठाता या मुझे मिलने किसी कारण से नहीं आ पाता तो मैं सीधासीधा कटाक्ष करने लगती कि हो न हो तुम अपनी तथाकथित प्रेमिका के पास गए होगे. लगता है मेरे तानोंउलाहनों से ही वह मुझ से कन्नी काटने लगा है. कृपया बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए जिस से हमारा रिश्ता सुधर जाए?

जवाब
सर्वप्रथम तो आप को अपना स्वभाव बदलना होगा. आप के बौयफ्रैंड ने आप से अपनी पहली गर्लफ्रैंड की बात नहीं छिपाई. आप से जिंदगी की अभूतपूर्व सचाई बयां कर दी कि वह आज भी उसे नहीं भुला पाया है. पहले प्यार को भुलाना आसान नहीं होता पर चूंकि उस लड़की की अब शादी हो चुकी है तो उस से आप को कोई खतरा नहीं हो सकता. अत: बेवजह अपने मित्र को तानेउलाहने देना बंद करें वरना आप का यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलने वाला.

रही शादी की बात तो अभी आप दोनों की मित्रता को मात्र 8 महीने हुए हैं. इसलिए अभी कुछ वक्त और लें एकदूसरे को समझने के लिए. समय के साथ थोड़ा मैच्योर भी हो जाएंगी. रिश्तों को परखने की समझ भी आ जाएगी. तब यदि आप को लगे कि आप दोनों एकदूसरे के लिए परफैक्ट जीवनसाथी साबित हो सकते हैं तब घरवालों को शादी के लिए राजी कर सकते हैं.

मोहम्मद शमी ने बीसीसीआई को भी दिया धोखा : हसीन जहां

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब उनकी बीवी हसीन जहां ने उनकी उम्र को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि शमी ने उम्र छिपाकर बीसीसीआई को धोखा दिया है. बतौर सुबूत हसीन ने शमी की हाईस्कूल की अलग-अलग दो मार्कशीट और ड्राइविंग लाइसेंस भी अपनी फेसबुक आइडी पर पोस्ट की हैं.

हसीन की इस पोस्ट को लेकर अब फिर से सोशल मीडिया पर नया हंगामा शुरू हो गया है. वहीं शमी के परिजन इस संबंध में कुछ भी कहने से इन्कार कर रहे हैं. पांच मार्च को हसीन जहां ने सोशल मीडिया के जरिये ही अपने पति शमी के खिलाफ मोर्चा खोला था. उन्होंने अपनी फेसबुक वौल पर पोस्ट करके पति पर दूसरी महिलाओं से संबंध होने का आरोप लगाया था. उसके बाद दोनों अलग हो गए थे. इतना ही नहीं हसीन ने जेठ हसीब पर दुष्कर्म, ससुरालियों पर मारपीट व दहेज उत्पीड़न के आरोप भी लगाए थे.

इस मामले में हसीन ने सभी के खिलाफ कोलकाता में मुकदमा भी दर्ज कराया है. शमी पर उन्होंने मैच फिक्सिंग तक के आरोप लगाए थे. जांच के बाद बीसीसीआई ने शमी को क्लीन चिट दे दी थी. यह मामला अब शांत हो गया था. शमी टीम इंडिया के साथ इंग्लैंड में टेस्ट मैच खेल रहे हैं.

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इस बीच मंगलवार देर रात हसीन ने शमी के लिए एक मुसीबत और खड़ी कर दी है. इस बार हसीन ने शमी की उम्र पर सवाल खड़े करते हुए फेसबुक पर पोस्ट की है. उन्होंने शमी की हाईस्कूल की दो मार्कशीट की फोटो पोस्ट की हैं.

एक मार्कशीट जनता इंटर कौलेज पतेई खालसा अमरोहा की है. इसमें शमी ने वर्ष 2002 में हाईस्कूल किया है और इसमे जन्मतिथि तीन जनवरी 1984 है जबकि हाईस्कूल की दूसरी मार्कशीट उदय प्रताप इंटर कालेज कुतुबपुर खेतबपुर जनपद गाजीपुर की है. यह मार्कशीट वर्ष 2008 की है. इसमें शमी की जन्मतिथि तीन सितंबर 1990 है.

इतना ही नहीं हसीन ने शमी के ड्राइविंग लाइसेंस की एक फोटो भी पोस्ट की है. इसमें उनकी जन्मतिथि पांच मई 1982 लिखी हुई है. हसीन की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. शमी के भाई हसीब अहमद ने कहा है कि हसीन, शमी को परेशान कर मैच से उनका ध्यान भटकाना चाहती हैं.

बढ़ जाएगी टेलीविजन की साउंड क्वालिटी, अपनाकर देखें ये टिप्स

बेशक टीवी मनोरंजन का एक ऐसा साधन है जो हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है, अगर उसकी साउंड क्वालिटी भी मजेदार हो तो क्या कहने. मौजूदा दौर की फिल्में हो या धारावाहिक या कोई भी शो, हर एक स्पेशल साउंड इफेक्ट्स के साथ प्रसारित होते हैं लेकिन इसका मजा तभी लिया जा सकता है जब आपको टीवी की औडियो क्वालिटी बढ़ाने के तरीके पता हों. दरअसल, टीवी में पहले से ही डिफौल्ट औडियो सेटिंग्स काम करती हैं, जोकि हमेशा अच्छा साउंड नहीं देती हैं. अच्छी साउंड क्वालिटी के लिए कुछ तरीके आजमाएं जा सकते हैं.

पहला तरीका: औडियो सेटिंग और इक्वालाइजर से आजमाकर देखें. अगर आपकी टीवी में कई तरह के औडियो मोड जैसे कि मूवी, म्यूजिक, गेम, वौयस, कस्टम आदि उपलब्ध हैं तो मोड बदलकर देखें. अगर कोई भी मोड आपके काम का नहीं है तो कस्टम मोड में जाएं और इक्वालाइजर को अपने हिसाब से सेट करें. बेस ठीक करने के लिए फ्रीक्वेंसी स्लाइडर को 20Hz से 250Hz बीच की रेंज में सेट करें.

दूसरा तरीका: टीवी के लिए टेबल माउंट स्टैंड का प्रयोग करें. अगर टीवी के स्पीकर नीचे की ओर ध्वनि फेंकने वाले हैं तो टेबल माउंट स्टैंड से ध्वनि टकराकर इसकी लाउडनैस में इजाफा करेगी. मेज की सतह गिरते हुए टीवी साउंड में वर्चुअल साउंड इफेक्ट जोड़ती है.

तीसरा तरीका: टीवी के लिए अलग से स्पीकर सिस्टम का इस्तेमाल करें. पहले दो तरीके अगर आपके काम के नहीं है तो अलग से स्पीकर सिस्टम लगाना कारगर होगा. इसके लिए स्पीकर खरीदने से पहले अपने टीवी के कनेक्टिविटी विकल्प को जरूर चेक कर लें. ऐसा अक्सर देखा जाता है और आप खुद भी इस चीज को महसूस कर सकते हैं कि टीवी पर प्रोग्राम भले ही अच्छा आ रहा हो लेकिन औडियो ठीक नहीं है तो वह भी नीरस लगने लगता है.

अब व्हाट्सऐप मैसेज भेजने के लिए लगेगा चार्ज

व्हाट्सऐप जल्द ही मैसेज भेजने वालों से पैसे लेने वाला है. खबरों के अनुसार व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजने के लिए जो कीमत निश्चित की गई है वो आमतौर पर भेजे जाने वाले टेक्स्ट मैसेज की कीमत से भी ज्यादा होगी, हालांकि अगर आप एक आम आदमी हैं तो आपको इसके लिए परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है.

दरअसल फेसबुक व्हाट्सऐप के बिजनेस अकाउंट यूजर्स से मैसेज भेजने के लिए पैसे लेने की तैयारी कर रहा है. इसकी जानकारी खुद व्हाट्सऐप ने दी है. व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट से भेजे गए मैसेज की कीमत का दर तय होगा और उसके तहत बिजनेस अकाउंट चलाने वाली तमाम कंपनियों से मैसेज के लिए पैसे लिए जाएंगे.

मैसेज की कीमत अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होगी. एक मैसेज के लिए 30 पैसे से 5.8 रुपये तक देने पड़ेंगे. खास बात यह है कि मैसेज के लिए पैसे देने पर मैसेज के पहुंचने की गारंटी होगी. फेसबुक प्राइवेसी को लेकर लगातार हो रही खर्च को निकालने के लिए नए तरीके खोज रही है.

व्हाट्सऐप ने बुधवार को कहा कि बिजनेस अकाउंट से शिपिंग कंफर्मेशन, अप्वायंटमेंट रिमांडर, टिकट जैसे नोटिफिकेशंस भेजने के लिए इसके बिजनेस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए एसएमएस के मुकाबले ज्यादा चार्ज देना होगा.

‘अंगूरी भाभी’ का यह ग्लैमरस अंदाज देख आप भी रह जाएंगे हैरान

टीवी पर आने वाले पौपुलर शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने वाली शुभांगी अत्रे इन दिनों अपने एक फोटोशूट को लेकर सुर्खियों में हैं. वैसे तो उनका अंदाज फैंस के बीच सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. लेकिन इन दिनों शुभांगी के अंदाज से ज्यादा उनका नया ग्लैमरस फोटोशूट वायरल हो रहा है.

शुभांगी आमतौर पर सीरीयल में इंडियन लुक और देसी अंदाज में ही नजर आती हैं. लेकिन इसबार नई ग्लैमरस तस्वीरों में भाभी जी अपने देसी अंदाज से बिल्कुल जुदा नजर आ रही हैं. इस फोटोशूट को किसी मशहूर फोटोग्राफर ने नहीं खुद उनके पति पीयूष पूरे ने शूट किया है. गौरतलब है कि पीयूष पूरे भी एक्टर हैं.

फोटोशूट में अंगुरी भाभी यानी कि शुभांगी अत्रे ने ज्यादातर लाइट शेड ही पहने हैं. इस फोटोशूट के बारे में शुभांगी का कहना है, “मुझे लाइट शेड बहुत पसंद है. इनमें सबसे ज्यादा सफेद कलर मेरा पसंदीदा है.


इस ग्लैमरस फोटोशूट को कराए जाने की वजह पूछने पर भाबी जी का कहना है, “लोगों ने मुझे अंगूरी भाभी के लुक में हमेशा देखा है. मैं चाहती हूं कि वो मेरे नए अंदाज को भी देखें.”

रेलवे देता है आपको तमाम प्रकार की सुविधाएं, क्या आपको है पता

इंडियन रेलवे यात्रियों को ऐसी काफी सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाता है जिन्हें बेहद कम लोग ही जानते हैं. लेकिन अगर आपको साल में कई बार ट्रेन से सफर करना पड़ता है तो आपको कम से कम इन नियमों के बारे में पता होना चाहिए. हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको ऐसी ही पांच बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे काफी सारे लोग अनजान रहते हैं.

आसानी से मिल जाती है टिकट की डुप्लीकेट कौपी: अगर आपने रिजर्वेशन काउंटर से टिकट ली है और किसी वजह से टिकट गुम हो गई है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, आप उसकी डुप्लीकेट कौपी भी निकलवा सकते हैं.

इन लोगों को मिलती है सस्ती टिकट: औफलाइन माध्यम से टिकट खरीदने पर विकलांग व्यक्तियों, मरीजों, वरिष्ठ नागरिकों, पुरस्कार विजेता (अवार्डी), शहीदों की विधवाएं, छात्रों, युवाओं, कलाकारों, खिलाड़ियों, मेडिकल प्रोफेशनल्स और अन्य लोगों को सस्ती टिकिटें उपलब्ध कराई जाती है. यह छूट श्रेणी के आधार पर 25 फीसद से 100 फीसद तक होती है. हालांकि अगर औनलाइन माध्यम से टिकट बुक कराई जाती है तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आईआरसीटीसी) पर सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों को ही छूट उपलब्ध करवाई जाती है.

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बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं आप: यूजर आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट लाग-इन कर बोर्डिंग स्टेशन का नाम बदल सकते हैं. इंडियन रेलवे उस सूरत में बोर्डिंग स्टेशन के नाम में बदलाव की अनुमति नहीं देती है जब टिकट औफलाइन मोड में बुक किया गया हो. जिस भी यात्री ने आईआरसीटीसी के माध्यम से औनलाइन टिकट बुक कराया हो वो ट्रेन के डिपार्चर से 24 घंटे पहले तक बोर्डिंग स्टेशन के नाम में बदलाव कर सकता है.

अपना टिकट ट्रांसफर कर सकते हैं आप: कभी-कभी ऐसा भी होता है जब आपके पास रेलवे की कन्फर्म टिकट होती है, लेकिन किसी कारणवश आपको यात्रा कैंसिल करनी पड़ जाती है, ऐसे में अगर आप अपनी जगह किसी और को भेजना चाहें वो वह (आपकी टिकट) टिकट उसके नाम ट्रांसफर की जा सकती है. हालांकि आपको यह काम यात्रा के 48 घंटे पहले करना होगा. यानी अगर आप चाहें तो आप अपने पारिवारिक सदस्य को अपनी टिकट ट्रांसफर कर उसे यात्रा पर भेज सकते हैं. आप अपना टिकट सिर्फ अपने पारिवारिक सदस्यों को ही ट्रांसफर कर सकते हैं. जैसे कि मां, पिता, भाई, बहन, बेटा, बेटी, पति और पत्नी. इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति को इस ट्रिकट को ट्रांसफर कराने की इजाजत नहीं है.

आरएसी वालों को भी मिल सकती है बर्थ: वो यात्री जिनकी टिकट आरएसी (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) श्रेणी की है उन्हें शुरुआती तौर पर बैठने भर के लिए सीट उपलब्ध करवाई जाती है और बाद में स्थान मिलने पर उन्हें बर्थ भी उपलब्ध करवाई जा सकती है. यह उस सूरत में होता है जब काफी सारे यात्री अंतिम मिनटों में अपनी टिकट कैंसिल कराते हैं या फिर यात्री समय पर स्टेशन नहीं पहुंचते हैं.

रूट को आउट करने के बाद कोहली ने अनोखे अंदाज में मनाया जश्न

भारत और इंग्लै़ंड के बीच पहले टेस्ट के पहले दिन भारत का पलड़ा जरूर भारी रहा लेकिन एक समय तक इंग्लैंड टीम इंडिया पर हावी हो ही चुका था. तीसरे सत्र की शुरुआत में इंग्लैंड का स्कोर केवल 3 विकेट के नुकसान पर 216 रन हो चुका था. लेकिन तभी इंग्लैंड के कप्तान जो रूट के रन आउट होने के बाद मैच पलट गया. भारतीय कप्तान विराट कोहली का इंग्लैंड के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के पहले दिन अपने समकक्ष जो रूट के आउट होने के बाद मनाया गया जश्न सुर्खियां बना.

रूट बड़ी पारी की ओर बढ़ रहे थे लेकिन कोहली के सटीक निशाने का शिकार बनकर 80 रन बनाने के बाद रन आउट हुए. रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर रूट दूसरा रन चुराने के लिए दौड़े लेकिन कोहली ने तेजी से दौड़ लगाते हुए गेंद उठाई और तुरंत वापस फेंकते हुए गेंदबाजी छोर पर सटीक निशाने पर इंग्लैंड के कप्तान को रन आउट कर दिया.

कोहली ने इसके बाद ‘माइक ड्राप’ विदाई के साथ रूट के आउट होने का जश्न मनाया जैसा इंग्लैंड के कप्तान ने पिछले महीने भारत पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में इंग्लैंड को 2-1 की जीत दिलाने के बाद किया था.

भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों के सीरीज के पहले टेस्ट के पहले दिन औफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की अगुआई में भारतीय गेंदबाजों ने दिन के आखिरी सत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया. इंग्लैंड ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक नौ विकेट के नुकसान पर 285 रन बना लिए थे जहां स्टम्प्स तक जेम्स एंडरसन (0) और सैम कुरैन 24 रन बनाकर खड़े हुए थे.

दिन के पहले सत्र में एक और दूसरे सत्र में दो विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाजों ने आखिरी सत्र में इंग्लैंड के छह बल्लेबाजों को आउट किया जिसमें सबसे अहम विकेट इंग्लैंड के कप्तान जोए रूट (80) का साबित हुआ. उन्हें भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सीधे विकेटों पर थ्रो मार रन आउट किया.

रूट के जाने के बाद इंग्लिश बल्लेबाज विकेट पर पैर नहीं जमा सके. आदिल राशिद (13) और कुरैन ने भारतीय गेंदबाजों को परेशान करने की कोशिश की, लेकिन यह जोड़ी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी. इंग्लैंड पहले दिन ही औल आउट हो गई होती, लेकिन मोहम्मद शमी की गेंद पर दिन के आखिरी ओवर में दिनेश कार्तिक ने एंडरसन का कैच छोड़ दिया.

भारत की तरफ से रविचंद्रन अश्विन अभी तक चार विकेट ले चुके हैं. अश्विन ने ही पहले सत्र में एलिस्टर कुक (13) को 26 के कुल स्कोर पर बोल्ड कर भारत को पहली सफलता दिलाई थी. आखिरी सत्र में पहला विकेट रूट का गिरा. वह 216 के कुल स्कोर पर आउट हुए. 156 गेंदों में नौ चौकों की मदद से अर्धशतकीय पारी खेलने वाले रूट, जॉनी बेयर्सटो (70) के साथ गैरजरूरी दूसरा रन लेने की जल्द बाजी में अपना विकेट खो बैठे. रूट और बेयर्सटो के बीच चौथे विकेट के लिए 104 रनों की साझेदारी हुई.

रूट के जाने के सात रन बाद बाद उमेश यादव ने बेयर्सटो को बोल्ड कर इंग्लैंड को पांचवां झटका दिया. बेयर्सटो ने 88 गेंदों की अपनी पारी में नौ चौके लगाए. अश्विन ने जोस बटलर को खाता भी नहीं खोलने दिया.

बेन स्टोक्स को भी अश्विन ने अपनी ही गेंद पर लपक मेजबान टीम का सातवां विकेट गिरा दिया. स्टोक्स ने 41 गेंदों पर दो चौकों के साथ 21 रन बनाए. स्टोक्स का विकेट 243 के कुल योग पर गिरा. यहां से कुरैन और आदिल राशिद ने कुछ जुझारूपन दिखाया और आठवें विकेट के लिए 35 रन जोड़े. इस साझेदारी को ईशांत शर्मा ने तोड़ा. ईशांत ने राशिद को पगबाधा आउट कर अपना पहला विकेट लिया. अश्विन ने स्टुअर्ट ब्रौड (1) को 283 के कुल स्कोर पर पवेलियन भेज इंग्लैंड को नौवां झटका दिया.

पहला विकेट अश्विन ने लिया था भारत के लिए

इससे पहले, भारत ने पहले सत्र में 83 रन खर्च कर एक विकेट लिया था. पहले सत्र में भारतीय गेंदबाजों का मजबूती से सामना करने वाले सलामी बल्लेबाज केटन जेनिंग्स (42) दूसरे सत्र में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से शमी की गेंद पर बोल्ड हो गए. 98 के कुल स्कोर पर शमी की गेंद जेनिंग्स के बल्ले से टकरा उनके पैर पर लगी और फिर स्टम्प से जा टकराई. उन्होंने अपनी पारी में 98 गेंदों का सामना करते हुए चार चौके लगाए.

शमी ने डेविड मलान (8) को टिकने नहीं दिया. मलान 112 के कुल स्कोर पर शमी की गेंद पर पगबाधा करार दे दिए गए. यहां से बेयर्सटो ने रूट के साथ पारी को आगे बढ़ाया. इस बीच इंग्लिश कप्तान ने अपना अर्धशतक पूरा किया. दोनों ने चायकाल तक इंग्लैंड को चौथा झटका नहीं लगने दिया था.

भारत के अश्विन के अलावा शमी ने दो विकेट लिए. उमेश और ईशांत को एक-एक सफलता मिली.

नौकरीपेशा लोगों की जल्द ही बढ़ सकती है सैलरी, सरकार बना रही योजना

अगर आप भी नौकरीपेशा हैं तो यह खबर आपको खुश कर देगी. सरकार के नए कदम से नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों की टेकहोम सैलरी बढ़ सकती है. बढ़ी हुई सैलरी को आप भविष्य की योजनाओं में निवेश कर सकते हैं. दरअसल, सरकार सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन यानी प्रोविडेंट फंड सैलरी से कंट्रीब्यूशन में कम करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए लेबर मिनिस्ट्री की एक समिति काम कर रही है. इससे पहले पीएफ में कंट्रीब्यूशन कंपनी और कर्मचारी की तरफ से 12-12 प्रतिशत था. लेकिन अब सरकार इसे घटाकर 10-10 प्रतिशत करने की तैयारी कर रही है.

सभी पक्षों से बातचीत करेगा श्रम मंत्रालय

सूत्रों के अनुसार इस महीने के अंत तक इस सबंधं में  सिफारिशें तैयार हो जाएंगी. सिफारिश तैयार होने के बाद इन्हें लागू किया जा सकता है. इकोनौमिक टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार कर्मचारी के पीएफ शेयर में 2 प्रतिशत तक की कमी की जा सकती है. इसके तहत एम्पलौयर की तरफ से किए जाने वाले कंट्रीब्यूशन में कमी आएगी. समिति की सिफारिशें आने पर श्रम मंत्रालय की तरफ से इस बारे में सभी पक्षों से चर्चा की जाएगी.

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फिलहाल 24 प्रतिशत है सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन

आपकों बता दें, फिलहाल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन कर्मचारी की बेसिक सैलरी की 24 प्रतिशत है. इसमें कर्मचारी का 12 प्रतिशत हिस्सा शामिल है, यह पीएफ अकाउंट में जाता है. कंपनी की तरफ से किया जाने वाला 12 प्रतिशत योगदान पेंशन अकाउंट, पीएफ अकाउंट और डिपौजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम में डिवाइड होता है.

अगस्त के अंत तक लागू होगा नियम

नया नियम लागू होने के बाद कर्मचारी और कंपनी का कंट्रीब्यूशन घटकर 10 प्रतिशत तक हो सकता है. ऐसा होने पर इनहैंड सैलरी बढ़ जाएगी. अभी 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनी में 10 प्रतिशत पीएफ कंट्रीब्यूशन का नियम लागू है. इस बदलाव के बाद सभी कंपनियों में 10 फीसदी कंट्रीब्यूशन का नियम लागू हो जाएगा. नया नियम अगस्त के अंतिम हफ्ते तक लागू होने की उम्मीद है.

मुझे असफलता से कोई समस्या नहीं : जौन अब्राहम

मौडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता जौन अब्राहम पहले कई म्यूजिक वीडियो में दिखाई दिए. इसके बाद उन्होंने एक मीडिया फर्म ज्वाइन कर कुछ दिनों तक काम किया. बाद में आर्थिक तंगी के कारण कम्पनी बंद हो जाने की वजह से उन्होंने मीडिया प्लानर के रूप में दूसरे कंपनी में काम किया. साल 1999 उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट था, जब उन्होंने ग्लैडरैग्स मैनहंट कौंटेस्ट जीता और मैनहंट इंटरनेशनल के लिए फिलिपिन्स गए और सेकेंड रनर अप रहे. यहीं से वे मौडलिंग में प्रसिद्द हुए. देश और विदेश में उन्होंने खूब मौडलिंग की.

फिल्मों में उनका करियर फिल्म ‘जिस्म’ से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री बिपाशा बसु के साथ अभिनय किया. उनकी भूमिका को सराहना मिली. इसके बाद फिल्म ‘धूम’ में उन्होंने निगेटिव भूमिका निभायी. फिल्म बौक्स औफिस पर हिट रही और उनका नाम नामचीन एक्टरों की सूची में शामिल हो गया. साल 2012 में उन्होंने फिल्म ‘विकी डोनर’ बनायीं, जो एक सफल फिल्म रही. अभी जौन फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ के प्रमोशन पर हैं. उनसे मिलकर बातचीत हुई, पेश है अंश.

इस फिल्म में क्या खास बात है जिससे आप उत्साहित हुए?

ये एक एक्शन फिल्म है. मुझे फिर से इस तरह की फिल्म में काम करने का मौका मिल रहा है. फिल्म परमाणु और मद्रास कैफे के बाद फिर से एक्शन फिल्म में काम करना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है, लेकिन इसकी अधिकतर शूटिंग रात को होती थी, जिससे मुझे थोड़ी मुश्किल हो जाया करती थी, पर काफी समय बाद एक कमर्शियल फिल्म बनी है. इसमें रोमांस, एक्शन और ड्रामा सबकुछ है. इसकी कहानी से मैं बहुत प्रेरित हूं. जिस बात को ये फिल्म कहना चाहती है, उससे मैं अपने आपको रिलेट कर सकता हूं. मेरे पिता ने भी न कभी रिश्वत लिया है और न दिया है. एक समय था, जब उनके पार्टनर ने उन्हें धोखा दिया था. उस वक्त भी उन्होंने मुझसे कहा था कि चाहे कुछ भी हो जीवन में हमेशा इमानदार रहना.

फिल्म का कौन सा भाग कठिन था?

मैं हमेशा समय से सोता हूं और समय से उठता हूं, लेकिन इस फिल्म का 80 प्रतिशत सीन्स रात का था. इसे करते हुए तीसरे दिन मैं बीमार पड़ गया और डाक्टर को बुलाना पड़ा. फिर पता चला कि मेरी पूरी बौडी सायकिल औफ हो गई है. मैंने फिल्म साईन की है और मना नहीं कर सकता था. फिर मैं मनोज बाजपेयी के पास गया और उन्हें कुछ कहने को कहा. यही सबसे कठिन भाग था. इसके अलावा निर्धारित समय 47 दिनों में हम सभी ने फिल्म शूट कर डाली.

एक्शन के अलावा आप किस तरह की फिल्में करना पसंद करते हैं?

मुझे कौमेडी बहुत पसंद है. जल्दी मैं फिर से वैसी फिल्म करने वाला हूं. मुझे लोगों को हंसाना पसंद है. फिल्म ‘गरम मसाला’ मेरी पसंदीदा फिल्म है. अक्षय कुमार और मैं साथ में फिर से काम करना चाहते हैं. कौमेडी फिल्म करना सबसे कठिन काम है. टाइमिंग अगर सही हो, तभी मजा आता है.

आपने इतने सालों तक इंडस्ट्री में काम किया है, अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं? क्या कुछ मलाल रह गया है?

मैंने सब तरह की फिल्म की है. वाटर, काबुल एक्सप्रेस, गरम मसाला, देसी ब्वायज, हाउसफुल 2 आदि. मैं अभिनेता और प्रोड्यूसर होने के नाते अधिक कंटेंट क्रिएट करना चाहता हूं और सिनेमा में विभिन्नता लाना चाहता हूं. आमिर खान फिल्मों में हमेशा से ही विभिन्नता लाने में समर्थ रहे हैं. मुझे भी वैसी ही फिल्में बनाने की इच्छा है.

पहले की फिल्म और आज की फिल्मों में कितना बदलाव आया है?

बदलाव अधिक नहीं है, आजकल हर तरह की फिल्में बन रही हैं, जो अच्छा दौर है. मेरे हिसाब से प्रोड्यूसर बनने के बाद मुझमें एक आत्मविश्वास आ गया है. मुझे अभी असफलता से कोई परेशानी नहीं, जो पहले होती थी. अभी मेरे जीवन का सबसे अच्छा समय चल रहा है, जब मैं अपने हिसाब से फिल्में बना सकता हूं और जितने भी निर्देशक जो असफल होने के बाद भी मेरे पास आये, मैंने उनकी फिल्में की, क्योंकि मुझे फैल्योर से कोई समस्या नहीं. मैं उन एक्टरों में से नहीं हूं, जो सिर्फ बड़े निर्देशक के साथ काम करना चाहता हो. मैं किसी का ‘पास्ट’ नहीं देखता.

आगे की फिल्में कौन सी है?

अभी मेरी फिल्म रोमियो अकबर वाल्टर, रौ और बाटला हाउस है.

आप बचपन में कैसे थे?

मैं बहुत शरारती था. पिता बहुत स्ट्रिक्ट थे, मां गुस्सा होने पर झाड़ू से हम दोनों भाइयों को मारती थीं. बहुत ड्रामा चलता था.

आप बाइक के बहुत शौकीन हैं कितनी बाइक अभी तक आपने खरीदी है?

मुझे कौलेज लाइफ से ही बाइक का शौक था, मैंने अपने छोटे भाई से पैसे उधार लेकर पहली बाइक खरीदी थी. मेरी सफलता को मैं मोटरसायकल से ही नापता हूं. मैंने बहुत सारे मोटरसायकल बांट दिए हैं. अभी तक मैंने 300 मोटरसायकल खरीदे हैं.

आप फिल्मों में स्टंट करते हैं उसे देखकर यूथ भी ऐसा करते हैं, जिससे कई दुर्घटनाएं हो जाया करती हैं उनके लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

सभी स्टंट एक्सपर्ट की निगरानी में किया जाता है. इसे आप कभी न दोहराएं. ये एक क्रिएटिव आस्पेक्ट है, जिसका प्रयोग फिल्म को बेहतर बनाने कर लिए किया जाता है.

बेरोजगारी के लिए सरकारी नीतियां हैं जिम्मेदार : अक्षय हुंका

क्या रोजगार युवाओं का अधिकार है, इस सवाल से भी ज्यादा कठिन इस सवाल के जवाब का मिलना है कि क्या सभी बेरोजगार युवाओं, खासतौर से शिक्षितों, को रोजगार मुहैया कराना सरकार की ही जिम्मेदारी है. बेरोजगारी हर दौर में समस्या रही है, जिसे दूर करने का वादा आजादी के बाद की कांग्रेसी सरकारों से ले कर मौजूदा एनडीए सरकार अपनी बातों व भाषणों में करती रही है. युवाओं के हिस्से में लज्छेदार बातों और लुभावने वादों के सिवा कुछ नहीं आया.

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार के साल 2014 के चुनाव में जीतने की एक बड़ी वजह युवा बेरोजगार थे जो तब की यूपीए सरकार से निराश हो चले थे. नरेंद्र मोदी ने एक करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा किया तो बेरोजगार युवाओं ने उन्हें भी मौका देने में हर्ज नहीं समझा. नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री तो बन गए लेकिन उन्होंने वादा नहीं निभाया. नतीजतन, अब बेरोजगारी चरम पर है और सरकार के प्रति युवाओं का गुस्सा फूट रहा है. युवा भड़ास का सामना करने से कतरा रही सरकार कैसेकैसे बहाने बना कर बगलें झांक रही है, यह बात भी अब छिपी नहीं रह गई है.

पिछले 4 सालों में बेरोजगार युवाओं के कई संगठन देश के विभिन्न राज्यों में बने हैं. इन्होंने सड़कों पर आ कर सरकार का विरोध करते अपनी बात कही है और अभी भी कह रहे हैं. ऐसा ही एक संगठन है बेरोजगार सेना, जिस के अध्यक्ष भोपाल के एक शिक्षित युवा अक्षय हुंका हैं. गठन के बाद बेरोजगार सेना से लगभग 50 हजार बेरोजगार युवा सक्रिय रूप से जुड़ चुके हैं. मध्य प्रदेश के मंडला जिले के रहने वाले अक्षय ने विदिशा के सम्राट अशोक अभियांत्रिकी संस्थान से एमसीए किया है. पढ़ाई के बाद उन्होंने देशविदेश की कई नामी कंपनियों में अच्छे पैकेज पर नौकरियां कीं और फिर भोपाल में अपनी सौफ्टवेयर कंपनी खोल ली. अपनी कंपनी के जरिए 7 वर्षों में वे एक हजार से भी ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार दे चुके हैं. यहां प्रस्तुत हैं अक्षय हुंका से की गई बातचीत के प्रमुख अंश :

क्या नौकरियां देना सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी है? आज धारणा यह बन गई है कि यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं कि वह सभी को नौकरी दे. बड़े जोर से पूछा और कहा यह जाता है कि क्या सबकुछ सरकार ही करेगी, जबकि नौकरी तो योग्यता से मिलती है.

लेकिन यह बेहद गलत धारणा है जिसे मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं. देश में कितनी नौकरियां पैदा होंगी, यह सरकार की नीतियों से तय होता है. कहने को तो हम मिश्रित अर्थव्यवस्था में रहते हैं लेकिन सरकारी नीतियां पूंजीपतियों के हिसाब से बनती हैं. नीतियां ऐसी हों जिन से एक व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ की जगह अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलें. बढ़ते एफडीआई और पूंजीपतियों के दबाव से स्वरोजगार पर खतरा मंडरा रहा है. उदाहरण खिलौनों का लें तो देश में खिलौनों की लाखों दुकानें हैं, लेकिन धीरेधीरे बड़ी विदेशी कंपनियां देश में पैर पसार रही हैं जो आने वाले दिनों में इन दुकानदारों को खत्म कर देंगी. ऐसा लगभग हर सैक्टर में हो रहा है.

पर कहा तो यह जाता है कि बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी की वजह है? हमारे देश का यह कल्चर हो गया है कि विदेश में जो है वही विकास मान लिया जाता है. पश्चिमी देशों के लिए यह ठीक भी है जहां जनसंख्या कम है. इसीलिए वहां कई काम मशीनों से किए जाते हैं, लेकिन हमारे देश में जनसंख्या ज्यादा है, इसलिए मशीनों पर निर्भरता कम होनी चाहिए. बेरोजगार सेना और मैं कोई तकनीक या विकास विरोधी नहीं हैं. लेकिन हम मानते हैं कि मशीनों का उपयोग सिर्फ इसलिए नहीं होना चाहिए क्योंकि उस का आविष्कार हो चुका है. कहा जा सकता है कि बढ़ती जनसंख्या नहीं, बल्कि बढ़ता अंधाधुंध अनुपयोगी मशीनीकरण बेरोजगारी का जिम्मेदार है.

सरकारी नीतियों और जनसंख्या पर बात स्पष्ट करेंगे क्या? देखिए, पहले कहा जाता था कि पढ़ोगेलिखोगे तो बनोगे नवाब, लेकिन अब तो इंजीनियरिंग और एमबीए जैसी पढ़ाई करने वालों को भी नौकरियां नहीं मिल रही हैं. आमतौर पर यह धारणा बना दी गई है कि केवल शिक्षा व्यवस्था ही इस की जिम्मेदार है. यह भी आधा सच है कि बेरोजगारी सिर्फ इसलिए है कि शिक्षित ज्यादा हैं और नौकरियां कम हैं.

यह एक नीतिगत मुद्दा है कि सरकार के ऊपर कोई कानूनी दबाव नहीं है कि वह नौकरियां दे ही, इसलिए कोई भी नीति वह पूंजीपतियों के लिए बनाती है जिस में हल्ला यह मचाया जाता है कि इतने हजार करोड़ रुपयों का निवेश होगा. यह नहीं कहा जाता कि कितने हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी. सरकार देश में मनरेगा की तरह शिक्षित युवा रोजगार गारंटी कानून लाए, तभी बात बनेगी. इस से उस पर दबाव बनेगा और वह रोजगारोन्मुखी नीतियां बनाएगी. राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी का परिदृश्य कैसा देखते हैं आप?

लंबे समय से बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिवर्ष एक करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था. इस वादे पर ही युवाओं ने न केवल उन्हें वोट दिया था बल्कि उन का प्रचारप्रसार भी किया था. अब वही युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि नई नौकरियां मिलना तो दूर की बात है, पुराने लोगों की भी नौकरियां जा रही हैं. कांग्रेस सरकार में ‘जौबलैस ग्रोथ’ थी पर अब मोदी सरकार में ‘जौबलौस ग्रोथ’ है.

क्या इस बाबत बेरोजगार सेना का कोई राजनीतिक एजेंडा है? नहीं, हमारा कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है. हां, हम यह जरूर चाहते हैं कि चुनाव धर्म या जाति, जो युवाओं को गुमराह करते हैं, के बजाय बेरोजगारी के मुद्दे पर लड़े जाएं. हम यह भी नहीं कह रहे कि कांग्रेस के जमाने में रोजगार बरसता था लेकिन तब युवा इतना तरसता नहीं था. यह जरूर तय है कि हम रोजगार छीनने वाली सरकार को वोट नहीं देंगे.

पिछले दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने रोजगार केंद्र ठेके पर दिए. बेरोजगारों के लिहाज से इस के क्या माने हैं? यह एकदम गलत फैसला है. इस के जरिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है. सीधे कहूं तो यह एक महत्त्वपूर्ण सरकारी संस्था की सुनियोजित हत्या है.

रोजगार कार्यालय पिछले कई सालों से प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दुरुस्त करने के बजाय सरकार उन्हें निजी हाथों में दे कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है. पुणे की यशस्वी नाम की एक संस्था का उदाहरण मैं यहां देना चाहूंगा जिसे एक लाख नौकरियां देने का जिम्मा सौंपा गया है. इस कंपनी को क्वालिटी फंड के नाम पर 19 करोड़ रुपए दिए जाएंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर वह एक लाख नौकरियां नहीं दे पाई तो उस पर क्या ऐक्शन लिया जाएगा. यह कैसा निजीकरण है जिस में कंपनी काम करे न करे, उसे भुगतान किया ही जाएगा.

मध्य प्रदेश की बात करें तो 52 रोजगार कार्यालयों की जगह कंपनी केवल 15 स्थानों पर ही अपने सैंटर खोलेगी. इस से छोटे जिलों में बहुत समस्या आएगी.

इस का मतलब बेरोजगार युवा दोबारा भाजपा को मौका या वोट नहीं देंगे? आप बताइए क्यों दें हम ऐसी सरकारों को वोट जो युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही हैं. बेरोजगार सेना देशप्रदेश में व्याप्त बेरोजगारी का समाधान ढूंढ़ रही है. हमें कांग्रेस से भी खास उम्मीदें नहीं, और न ही दूसरे किसी राजनीतिक दल से रखते हैं, पर विरोध जताने के लिए बेरोजगार और क्या करें. दरअसल, राजनीतिक स्तर पर देश में असली विपक्ष संसद या विधानसभा में नहीं, बल्कि सड़कों पर आंदोलनरत युवा है.

बेरोजगार दूध के जले हैं, अब वे छाछ भी फूंकफूंक कर पिएंगे और किसी राजनीतिक झांसे में नहीं आने वाले. हम राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं और उम्मीद है कि जल्द उसे ढूंढ़ भी लेंगे. क्या स्वरोजगार के लिए बेरोजगार युवाओं को आसानी से कर्ज मिल रहा है?

बिलकुल नहीं, आसानी से तो क्या, कठिनाई से भी नहीं मिल रहा. स्वरोजगार की सभी योजनाएं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और वैंचर कैपिटलिस्ट फंड ये सब केवल नाम और झूठे प्रचार के लिए हैं, आंकड़ेबाजी के लिए हैं. कई योजनाओं के लिए सरकार ने घोषणा की है कि बैंक लोन के लिए गारंटी की जरूरत नहीं, लेकिन बिना गारंटी के कोई बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं. सरकार चाहे तो मेरी यह चुनौती स्वीकार करे कि वीसी फंड के नाम पर 4 साल में 100 करोड़ रुपए का जो फंड रखा हुआ है, उस से किसी प्रोजैक्ट को पैसे क्यों नहीं मिले.

क्या बेरोजगार सेना का ध्यान गांव, देहातों और कसबों के बेरोजगारों पर भी है? जी हां, बराबर है. वहां तो हालात और भी बदतर हैं. मैं यह नहीं कहता कि गांवदेहातों की बेरोजगारी शहर आ गई है, बल्कि वहां के हालात कुछ उदाहरणों द्वारा बताना चाहूंगा.

अब अच्छी बात यह है कि सभी वर्गों के युवा ज्यादा से ज्यादा पढ़ रहे हैं लेकिन नौकरियों की कमी है. ऐसे में गांवों में परंपरागत और पैतृक व्यवसायों का खत्म होते जाना चिंता की बात है. मोची, धोबी, माली, बढ़ई, कुम्हार वगैरह के काम अब कोई नहीं कर रहा, तो यह स्वाभाविक बात है क्योंकि समाज इन के व्यवसायों को प्रतिष्ठित स्थान नहीं देता, दूसरे, ऊपर जैसे मैं ने कहा, अंधाधुंध मशीनीकरण की मार भी इन व्यवसायों पर पड़ रही है. मिसाल जूतेचप्पलों की लें, तो हर कोई यह जान कर हैरान रह जाता है कि मोचियों की दुकानें अब पहले की तरह हर कहीं नहीं दिखतीं. अब हर कोई महंगे व ब्रैंडेड जूतेचप्पल पहन रहा है जो सालोंसाल नहीं टूटते और जब टूट जाते हैं तो उन्हें फेंक दिया जाता है. यही

बात कपड़ों और बरतनों पर भी लागू होती है. साफ है कि गांवदेहातों के युवा शिक्षित हो कर दोहरी मार झेल रहे हैं. स्किल डैवलपमैंट जैसी योजनाएं इसी वजह से नहीं चल पा रहीं कि पढ़ेलिखे युवाओं को परंपरागत व्यवसायों में अब कोई संभावना नहीं दिखती.

क्या आरक्षण का बेरोजगारी से कोई संबंध है? बिलकुल नहीं है. वजह आरक्षण से यह तय नहीं होता कि कितनी नौकरियां आएंगी, बल्कि यह तय होता है कि जो नौकरियां हैं वे कैसे बंटेंगी.

दरअसल, आरक्षण जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए बनाया गया था जो खुशी की बात है कि कम से कम शहरी इलाकों में तो कम हो रहा है. हालात अब 70 साल पहले जैसे नहीं रह गए हैं, इसलिए इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से सोचे जाने की वकालत मैं करता हूं और यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि बेरोजगारी की मूल समस्या से इस का कोई लेनादेना नहीं है. बेरोजगारी पर मीडिया की भूमिका पर क्या कहेंगे?

मैं मीडिया का आभारी हूं जो हर समय बेरोजगारी का मुद्दा तरहतरह से उठाता रहा है. उसी के दबाव में पकौड़े तलने जैसी सलाह सामने आई और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनावी साल में 80 हजार नौकरियां देने की बात करनी पड़ी. जबकि हर कोई जानता है कि यह चुनावी लौलीपौप है. मीडिया से संबंधित एक बात जरूर मैं आप से साझा करना चाहता हूं कि सभी न्यूज चैनल्स ने बेरोजगार सेना की बात उठाई. पत्रपत्रिकाओं ने भी इसे छापा लेकिन जबरदस्त रिस्पौंस हमें सरस सलिल पत्रिका से मिला. मेरे लिए यह एक दिलचस्प अनुभव था. इस पत्रिका के मुखपृष्ठ पर बेरोजगार सेना के सदस्यों का प्रदर्शन करते एक फोटो छपा था जिस में सदस्य बनने के लिए एक मोबाइल नंबर पर मिस्डकौल देने को दिया गया था.

मेरे पास हजारों फोन आए और अभी भी आते हैं, तब मुझे समझ आया कि इस पत्रिका की अहमियत और पहुंच कितनी अहम है. लेकिन देशभर में हजारों बेरोजगारों के फोन आना गर्व की नहीं, बल्कि शर्म की बात है. देश में इतनी बेरोजगारी आखिर क्यों है.

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