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बढ़ रहा है बौडी ब्यूटीफुल का क्रेज, आखिर क्यों

बोटोक्स या फिलर ही नहीं कई तरह की सर्जरी भी परफैक्ट लुक देने में कारगर है. चेहरे के दागधब्बों को दूर कर चेहरे पर चमक लाने के लिए कैमिकल पील करवाना भी खासा पौपुलर है. परमानैंट हेयर रिमूवल और टमी टक कुछ ऐसे उपचार हैं, जिन से पर्सनैलिटी में गजब का निखार आ जाता है. मगर गौर करने वाली बात यह है कि इन सब के लिए शादी से कुछ महीने पहले ही प्लान करना जरूरी है.

आप चाहें तो शादी से 1 महीना पहले बोटोक्स व लिप फिलर इंजैक्शन जरूर करवा सकती हैं. जहां आप बोटोक्स से अपनी उम्र कम दिखा सकती हैं, वहीं लिप फिलर होंठों में आकर्षक उभार लातें हैं.

डर्माब्रेशन, लेजर स्किन रीसर्फेसिंग व कैमिकल पील जैसे ट्रीटमैंट के बेहतर परिणाम के लिए इन्हें कुछ मामलों में दोहराना भी पड़ सकता है. जो महिलाएं खुद में खास बदलाव देखना चाहती हों वे फेस लिफ्ट, लाइपोसक्शन व बौडी कंटूरिंग भी करवा सकती हैं. जो अपनी ब्रैस्ट को सही शेप देना चाहती हैं, वे ब्रैस्ट सर्जरी का सहारा ले सकती हैं.

हालांकि ये सभी सर्जरी एक दिन में होने वाली हैं और आप उसी दिन घर भी जा सकती हैं, लेकिन सर्जरी का निशान हटने में थोड़ा समय लगता है. इसीलिए यदि शादी के पहले सर्जरी करवानी हो तो 3 से 6 महीने पहले करवाना ही बेहतर होगा.

बोटोक्स व फिलर प्रक्रिया

अगर आप यह ट्रीटमैंट लेने जा रही हैं, तो पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें. इंसुलिन इंजैक्शन जैसे छोटे बोटोक्स के इंजैक्शन चेहरे पर लगाए जाते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट का समय लगता है. इस का तुरंत असर नहीं होता. 3 से 7 दिनों के अंदर इस का असर चेहरे पर दिखाई देने लगता है. यह असर 3 से 6 महीनों तक बरकरार रहता है.

रिंकल्स, पिंपल्स, डार्क सर्कल्स, ल्यूकोडर्मा जैसी कौमन ब्यूटी प्रौब्लम्स का इलाज आज कौस्मैटिक के एडवांस ब्यूटी ट्रीटमैंट्स ने संभव बनाया है. इन ट्रीटमैंट्स का सहारा ले कर अपनी त्वचा की रंगत निखारने के साथसाथ होंठों, गालों, नाक, कानों, आईब्रोज आदि के आकार में भी स्थाई रूप से मनचाहा परिवर्तन करा सकती हैं. ये परिवर्तन खूबसूरती में चार चांद लगा देंगे.

क्या है राइनोप्लास्टी

अगर आप की नाक की शेप प्रौपर नहीं है, तो आप 1-2 घंटों में हो जाने वाले इस ट्रीटमैंट की मदद से सही शेप पा सकती हैं. यही नहीं इस के साथ ही अपने ऊपरी लिप पार्ट और नोज के बीच नोज पौइंट का ऐंगल भी ठीक करवा सकती हैं. चाहें तो इसे फेस लिफ्ट के साथ भी करवा सकती हैं.

इस के लिए आप को बस एक दिन के लिए ही एडमिट होना पड़ेगा. हां, पूरी तरह से सूजन जाने में 2 महीने का वक्त लग जाता है. मगर अपने कामकाज पर 2-3 हफ्ते बाद लौट सकती हैं. इस पर खर्च करीब क्व50 से 70 हजार तक आता है.

प्लास्टिक सर्जरी भी है विकल्प

शरीर के किसी भी अंग पर चोट लगने या जलने के कारण जो हिस्सा भद्दा दिखाई देता है, उसे प्लास्टिक सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है. इस ट्रीटमैंट में जांघों के पास की स्किन को निकाल कर उस जगह लगा दिया जाता है.

प्लास्टिक सर्जरी की इस विधि को स्किन ग्राफ्टिंग कहते हैं. युवतियां नाक, होंठ, मुंह की चौड़ाई, ब्रैस्ट आदि की सर्जरी ज्यादा कराती हैं.

पुरुषों के लिए आजकल हेयर ट्रांसप्लांट और छाती आदि कौस्मैटिक सर्जरी ज्यादा चलन में है.

ट्रीटमैंट से पहले इन बातों का रखें ध्यान

ट्रीटमैंट लेने से 6-7 घंटे पहले तक ग्रीन टी लेना अवौइड करें. अगर आप की स्किन ऐलर्जिक है, तो पहले अपने डाक्टर को इस की जानकारी जरूर दें. अगर आप प्रैगनैंट हैं या फिर किसी तरह का न्यूरोलौजिकल डिसऔर्डर है तो जरूर डाक्टर को इस के बारे में बता दें. 60 की उम्र पार कर चुकी हैं तो ट्रीटमैंट लेने से 2 दिन पहले तक अलकोहल और स्मोकिंग न करें. ब्रैस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को इस से बचना चाहिए.

बाद में भी ध्यान देना है जरूरी

– डाक्टर की सलाह से ही मसाज या फेस के लिए दूसरे ब्यूटी ट्रीटमैंट्स लें.

– कुछ दिनों तक ज्यादा झुक कर सफाई करने या फिर सामान उठाने से बचें.

साइड इफैक्ट

वैसे तो बोटोक्स का किसी भी तरह का साइड इफैक्ट नहीं होता, पर सभी की स्किन एकजैसी नहीं होती है. इसलिए किसी को भी इस का अलग रिस्पौंस मिल सकता है. चेहरे पर जलन और मार्क्स हो सकते हैं.

द्य सिरदर्द, नजलाजुकाम और आंखों के आसपास की स्किन लाल हो कर उस में खुजली या फिर फेशियल पेन भी हो सकता है.

खर्च

सही खर्च का पता आप के चेहरे पर निर्भर करता है. अगर आप केवल आंखों के हिस्सों तक ही ट्रीटमैंट करवाती हैं, तो इस का पूरा खर्च क्व4 हजार से ले कर क्व7 हजार के बीच आता है. जो आखों के ऊपरी हिस्से यानी माथे पर इस ट्रीटमैंट को करवाना चाहती हैं तो आप को क्व12 हजार से ले कर क्व20 हजार तक खर्चने पड़ सकते हैं. वहीं प्लास्टिक सर्जरी करवाने के लिए इस से कहीं अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है.

सर्जरी का बढ़ता बाजार

कौस्मैटिक तथा प्लास्टिक सर्जरी जैसे उपाय उन के लिए वरदान हैं, जिन्हें किसी वजह से शरीर या चेहरे की विकृति का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब मानसिक संतुष्टि और आकर्षक दिखने की होड़ ने इसे एक अलग तरह का बाजार उपलब्ध करवा दिया है.

इस बाजार का सब से बड़ा खरीदार है युवावर्ग. भारत जैसे देश में यह सर्जरी लोगों के लिए वरदान बन गई है. यही नहीं केवल शादी के मुख्य दिन के लिए युवाओं की बड़ी संख्या अब भारी रकम खर्च कर चेहरे और शरीर का कायाकल्प करवाने में जुटी है.

– डा. करुणा मल्होत्रा, कौस्मैटिक स्किन ऐंड होम्योक्लीनिक

थोड़ा सा फेरबदल बना देता है आप के बैडरूम को आकर्षक

दिनभर की भागदौड़ के बाद अच्छा और सजा बैडरूम आप की थकान को दूर कर देता है. इसलिए बैडरूम को सही तरीके से सजाना बहुत जरूरी है. खुद सजाया गया बैडरूम एक अलग एहसास करवाता है. यदि आप को समझ नहीं आ रहा कि बैडरूम को कैसे सजाएं, तो इस बारे में वैलस्पन इंडिया की इंटीरियर डिजाइनर अश्विनी वैद्य कुछ टिप्स बता रही हैं, जिन्हें अपना कर आप अपने बैडरूम को आकर्षक बना सकती हैं:

– बैडरूम में बैड को सही तरह से सजाना एक कला है. इस के लिए सही आकार का बैड चुनें, जिसे कमरे में रखने के बाद थोड़ी जगह बचे.

– किसी भी सामान को बाहर न रखना पड़े, इस के लिए बैड में बौक्स का प्रोविजन रखें.

– दीवारों के रंग के आधार पर बैड लें, क्योंकि इस से कमरा साफसुथरा और आरामदायक लगेगा, अपनी पसंद के आकार का बैड खरीदने के लिए आप औनलाइन शौपिंग का सहारा ले सकती हैं.

– बैड के लिए आरामदायक गद्दे का चयन करें, जो न तो अधिक मुलायम हो और न ही अधिक सख्त ताकि आप की पीठ को आराम मिले और सुकून की नींद आए.

– बैड को सजाने के लिए डैकोरेटिव तकिए, अच्छी क्वालिटी की चादर, चिक और कुशन का प्रयोग करें. तकिए का आकार भी बैड के अनुसार चुनें. आजकल तकिए अलगअलग आकारों में मिलते हैं. अपनी पसंद के अनुसार 2 या 3 आकार के चुनें.

– बैड की चादर हमेशा हलके रंग की व दीवारों से मेल खाती लें. अगर आप का कमरा छोटा है, तो बड़े प्रिंट और गहरे रंग वाली चादर कभी न लें. थोड़ी सी कढ़ाई इसे आकर्षक बनाती है.

– बैडरूम में बैड ही पूरी जगह को घेर लेता है. ऐसे में आसपास बचे स्थान में साइड टेबल, थोड़ा सा हलका फर्नीचर रख सकती हैं, जिस पर बैठ कर आप किताब आदि पढ़ कर मूड को फ्रैश कर सकती हैं. इस के अलावा साइड टेबल पर कुछ डैकोरेटिव आइटम या फ्लौवर पौट रख कर उस की शोभा और बढ़ा सकती हैं.

– बैडरूम में लाइट का सही प्रयोग करना बहुत जरूरी है. अधिक भड़कीली लाइट का प्रयोग बैडरूम में कभी न करें. यलो या डिम लाइट का प्रयोग बैडरूम में सही रहता है. मध्यम रोशनी में बैडरूम रोमांटिक हो जाता है.

– बैडरूम को अधिक सामान से न भरें. कम से कम सामान रख कर बैडरूम को हमेशा साफसुथरा रखें.

बैडरूम की सजावट में मौसम भी मुख्य भूमिका निभाता है. गरमी के मौसम में कौटन, लिनेन, टैंसल फेब्रिक की चादरों का प्रयोग करें. इन्हें धोने व बिछाने में आसानी रहती है.

मौनसून में नमी युक्त मौसम होने की वजह से ऐसी चादरों की जरूरत पड़ती है जो जल्दी सूख जाएं. ऐसे में कौटन और पौलिएस्टर मिश्रित चादरें लेना सही रहता है.

जाड़े में गरम और आरामदायक बिस्तर सब को आकर्षित करता है. फलालैन की चादरें इस मौसम में गरमी प्रदान करती हैं, जिस से सुकून की नींद आती है.

आप के लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स के लिए दांव पर है पशुओं की जान

जब भी जरमनी की बनी नई कार खरीदी जाती है, एक तरह से खरीदार सारे बंदरों व मानवों के अपाहिज होने या मरने पर स्वीकृति की हामी भरता है जो कंपनी ने शोध के दौरान करी थीं. यह शोध डीजल के धुएं से होने वाली हानी को जांचने के लिए था. जरमनी की कार इंडस्ट्री डीजल के उपयोग को सही साबित करने के लिए यूरोपियन रिसर्च ग्रुप और ऐन्वायरन्मैंट ऐंड हैल्थ के नाम से 2012 से शोध करा रही है.

जरमनी के आछेन यूनिवर्सिटी हौस्पिटल में शोध किया गया कि डीजल के धुंए में मौजूद नाइट्रोजन डाइऔक्साइड का क्या असर पड़ता है. यूनिवर्सिटी हौस्पिटल ने खेद जताया कि प्रयोग ड्राइवरों, मैकैनिकों और वैल्डरों पर होने वाले नुकसान को जांचने के लिए किया जा रहा था.

हैवानियत की हद

बंदरों को डीजल के धुंए से भरे चैंबर्स में रखा जाता था ताकि पता चल सके कि उन की मौत में विषैले तत्त्व कितने और किस तरह जिम्मेदार हैं. फौक्सवैगन कंपनी ने तो जन माफी मांगी है पर मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू के कर्त्ताधर्त्ता तरहतरह से सफाई देते रहे कि उन्हें नहीं मालूम था कि शोध में किस तरह से जानवरों और मानवों को इस्तेमाल करा जा रहा है.

इस तरह के प्रयोग लगभग हर उद्योग कर रहा है और सुरक्षात्मक उत्पादन बनाने के लिए जानवरों व मानवों की बलि चढ़ाने में उन्हें कोई गलत बात नहीं लगती. चीनी उद्योग भी शोध करा चुका है ताकि साबित करा जा सके कि चीनी का दिल की बीमारियों से कोई लेनादेना नहीं है.

पहले हजारों जानवरों को जबरन चीनी खिलाई गई और फिर उन के दिल की चीरफाड़ कर के देखा गया कि क्या नुकसान पहुंचा. न केवल दिल की बीमारियां हुईं, खून का कैंसर भी होना पाया गया तो शोध का परिचय दफन कर दिया गया.

इन्हीं शोधकर्ताओं ने फिर प्रयोग आर्टिफिशियल स्वीटनर्स पर किए ताकि सिद्ध

करा जा सके कि उस से कैंसर होता है और बहुत सतही परिणामों से भ्रांति फैला दी गई कि ये तो कैंसर पैदा करते हैं. इस दौरान भी सैकड़ों जानवर मारे गए.

तंबाकू उद्योग ने सैकड़ों जानवरों को सिगरेट के धुंए में रख कर प्रयोग किए. सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियां जानवरों पर प्रयोग करती हैं यह देखने के लिए कि उन के रसायन त्वचा पर किस तरह का असर डालते हैं. नामी ब्रैंडों में हरेक ने लाखों डौलर इन संस्थाओं को दिए जो जानवरों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उन का प्रोडक्ट ग्राहकों के लिए सुरक्षित  हो सके.

यहां तक कि ब्लेड बनाने वाली कंपनियां भी जानवरों की शेविंग करती हैं ताकि ब्लेड सही और तेज बन सके और शेव करते समय लोगों को नुकसान न हो. अगर आप को पशुओं से प्रेम है तो सावधान रहिए. आप न जाने क्या ऐसी चीज इस्तेमाल कर रहे हैं जिस से जानवरों को मौत का सामना करना पड़ा होगा.

बैंक खातों पर फेसबुक की नजर, मांगी ग्राहकों के अकाउंट की जानकारी

अब फेसबुक की नजर अब आपके बैंक खातों पर है. ऐसा इसलिए क्योंकि फेसबुक ने कई बड़े बैंकों से ग्राहकों की डिटेल्स मांगी है, जिससे वो अपने मैसेंजर प्लेटफौर्म पर नई सेवाओं की शुरुआत कर सके. हालांकि अभी इसकी शुरुआत फेसबुक ने अमेरिका में स्थित बैंकों से मांगी है, लेकिन देर-सवेर यह भारत में भी इस तरह की जानकारी को मांग सकता है.

इन बैंकों से मांगी जानकारी

जिन बैंकों से फेसबुक ने ग्राहकों के बारे में जानकारी मांगी है, उनमें से कई भारत में कार्यरत हैं. इनमें सिटीबैंक, वेल्स फार्गो, जेपी मौर्गन, चेस आदि शामिल हैं. इन बैंकों के विश्व के कई देशों में शाखाएं हैं.

मांगी यह जानकारी

फेसबुक ने बैंकों से जो जानकारी मांगी है उसमें बैंक ग्राहकों के कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन, खातों में कितना बैलेंस है और ग्राहकों ने अपने बैंक खाते से कहां-कहां खरीदारी की है. यह सारी जानकारियां काफी व्यक्तिगत हैं, जिसके चलते बैंक ग्राहक इसका विरोध भी कर सकते हैं.

निजी जानकारी के सार्वजनिक होने का खतरा

अगर सही में फेसबुक बैंकों के साथ मिलकर ऐसा करता है तो इससे हमारी-आपकी निजी जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा है, क्योंकि इससे हैकर भी फायदा उठा सकते हैं और आपके खाते से बैलेंस कभी भी साफ हो सकता है.

मैसेंजर सेवा से कमाना चाहता है पैसे

फेसबुक अपनी मैसेंजर सेवा से पैसे कमाना चाहता है, जिसके लिए उसने बैंकों से संपर्क किया है. हालांकि फेसबुक में डाटा चोरी विवाद के बाद से बैंक इस तरह की सेवाएं लेने से हिचकिचा रहे हैं. कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिकी राष्ट्रपति के 2016 में हुए चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन में 8.7 करोड़ लोगों का डाटा चोरी करने का आरोप भी लगा था.

फेसबुक का इस पूरी कवायद के लिए तर्क है कि सभी बैंक एसएमएस की  जगह उसकी मैसेंजर सेवा का प्रयोग करें. केवल अमेरिका में 1.3 बिलियन लोगों के पास एसएमएस के जरिए बैंकिंग सेवाओं की जानकारी पहुंचती है.

टीम इंडिया के फोटो में अनुष्का को देख फूटा फैंस का गुस्सा

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की पत्नी अनुष्का शर्मा इन दिनों इंग्लैंड में हैं. टीम इंग्लैंड के दौरे पर है और अनुष्का भी इस दौरान अपने पति के साथ वहीं हैं. मंगलवार को टीम इंडिया लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग ने टीम इंडिया को डिनर पार्टी पर आमंत्रित किया था. इस दौरान अनुष्का भी पूरी टीम के साथ वहां नजर आईं. अनुष्का ने ग्रीन कलर का सूट पहन रखा था.

भारतीय बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने इस शानदार मौके की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है. तस्वीर में टीम इंडिया के खिलाड़ियों के अलावा सपोर्ट स्टाफ भारतीय राजनयिक के साथ पोज देते नजर आ रहे हैं. कप्तान विराट कोहली से लेकर मुख्य कोच रवि शास्त्री तक सभी ‘मैचिंग ड्रेस में देखे जा सकते हैं. सब कुछ ठीक रहा, लेकिन सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल हो गई है. इसकी वजह है- तस्वीर में विराट के साथ उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा की मौजूदगी.

अनुष्का का इस खास डिनर पर जाना कुछ फैन्स को बिल्कुल पसंद नहीं आया. इसके लिए सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल भी किया जा रहा है. इस डिनर पर पूरी टीम इंडिया पहुंची. विराट के अलावा और किसी भी क्रिकेटर की पत्नी इस डिनर में शिरकत करती नहीं दिखी. इसी बात को लेकर फैन्स ने सवाल खड़े किए.

एक यूजर ने लिखा है- बीसीसीआई ने अपने आधिकारिक दौरे पर किसी खिलाड़ी को पत्नी के साथ जाने की इजाजत कैसे दे दी..?

एक ट्रोलर का कहना है कि तस्वीर में अनुष्का फ्रंट लाइन में हैं- ये तो ठीक है, लेकिन टीम इंडिया के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे सबसे पीछे कैसे..? इतना ही नहीं कुछ फैन्स ने तो यहां तक कह डाला कि अब अगले मैच में अनुष्का को प्लेइंग इलेवन में भी शामिल कर लेना.

इस विदेशी बाला से शादी करने जा रहे हैं अरबाज खान..?

सलमान खान के भाई और अबिना अरबाज खान ने मलाइका अरोड़ा से 2016 में तलाक ले लिया था. इसके बाद मलाइका तो अपनी गर्लगैंग में खुश रहने लगीं और अरबाज को भी एक गर्लफ्रेंड मिल गई. लंबे समय से बी-टाउन में चर्चा चल रही है कि अरबाज की यह गर्लफ्रेंड जार्जिया एंड्रियन हैं.

बता दें कि मलाइका से अलग होने के बाद अरबाज का नाम कई लड़कियों से जुड़ चुका है. लेकिन अब कहा जा रहा है कि वे विदेशी बाला जार्जिया एंड्रियानी को वो डेट कर रहे हैं. इसी के साथ अब खबर है कि जल्द ही वे दोनों अपने इस रिश्ते को नया नाम देने वाले हैं. उन्‍होंने अपना 51वां बर्थडे भी उन्‍हीं के साथ मनाया था.

गौरतलब है कि अरबाज के जन्‍मदिन के मौके पर जार्जिया ने अपने इंस्‍टाग्राम अकाउंट पर बेहद ही खूबसूरत तसवीर शेयर करते हुए खास तरीके से बर्थडे विश किया था. जार्जिया ने लिखा, ‘ आज का दिन तुम्हारा है. हैप्पी बर्थडे रौकस्टार.’ इस पोस्‍ट के साथ जार्जिया ने दो-दो बार #happybirthday #happybdayboy जैसे हैशटैग का इस्‍तेमाल किया था. उन्‍होंने लव वाले इमोजी का भी इस्‍तेमाल किया था. इस पोस्‍ट में उन्‍होंने अरबाज खान को भी टैग किया है. जार्जिया और अरबाज की इस तस्वीर को बेहद पसंद किया जा रहा है.

कहा जा रहा है कि दोनों अपने रिलेशनशिप को लेकर काफी सीरीयस हैं. जार्जिया और अरबाज को कई मौकों पर एकसाथ देखा गया है. बता दें कि जार्जिया साल 2017 में फिल्‍म ‘गेस्‍ट इन लंदन’ में नजर आई थीं.

शादी और फिटनैस के बारे में बता रही हैं श्रद्धा कपूर

रीयल लाइफ में हलदी सेरेमनी कब हो रही है?

अभी इतनी जल्दी नहीं. जब भी कुछ होगा चुपचाप नहीं होगा. सब को पहले से बता दूंगी अभी तो पूरा ध्यान उन फिल्मों को पूरा करने पर है, जिन्हें साइन कर चुकी हूं.

मतलब इस खबर को सुनने के लिए लंबा इंतजार करना होगा?

मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकती. मैं ने मना नहीं किया है कि मैं कभी शादी नहीं करूंगी. लेकिन इतना पता है कि इतनी जल्दी अभी कुछ नहीं होगा.

फैमिली की तरफ से कोई दबाव?

शादी के लिए? कभी नहीं मेरे पापा बड़े कूल हैं. उन्होंने आज तक मेरे हर फैसले को प्रोत्साहित किया है. कभी दबाव नहीं डाला. शादी के लिए तो वे कभी नहीं कह सकते. जब मैं अपना निर्णय बताऊंगी तभी कुछ होगा.

स्लिमट्रिम होने का राज क्या है?

सिर्फ इतना कि जो भी मन में आता है खाती हूं. खूब जंक फूड लेती हूं. चौकलेट, मीठा जम कर खाती हूं लेकिन खाना सिर्फ घर का ही बना खाती हूं. दिन की शुरुआत वैजिटेबल और फ्रूट जूस से होती है. ऐग, फिश करी, रवाइडली सब मेरे फैवरिट हैं.

वर्कआउट बिलकुल नहीं करतीं क्या?

करती हूं. मैं ने बिना जिम जाए अपना वेट कम किया है, लेकिन रोज सुबह उठ कर वौक करना या ऐक्सरसाइज करना मेरे बस के बाहर है. मैं सुबह नहीं उठ पाती. लेकिन हफ्ते में 3 दिन जरूर वर्कआउट करती हूं. जिम जाती हूं. स्किन ग्लो ऐक्सरसाइज और कंप्लीट फूड से ही करती है.

अपनी खूबसूरती में किस का योगदान मानती हैं?

सौंदर्य उत्पादों खासकर स्किन की ब्यूटी और सौम्यता के लिए मैं वीट निखार हेयररिमूवल क्रीम का इस्तेमाल करती हूं, क्योंकि इस में हलदी के ऐंटीसैप्टिक गुण होने के साथसाथ केसर की सौम्यता भी होती है, जो स्किन की कोमलता बरकरार रखती है.

पहले मना किया अब चाहती हैं साथ

जब श्रद्धा 16 साल की थीं तब सलमान ने उन्हें फिल्म का औफर दिया था, लेकिन पढ़ाई के कारण उन्होंने मना कर दिया था. लेकिन अब श्रद्धा सलमान के साथ काम करने के लिए बहुत बेचैन हैं. वे रणबीर कपूर और सलमान के साथ जरूर काम करना चाहती हैं.

फिट रहने के लिए डांस

डांस करना मेरी दिनचर्या में शामिल है. कितना भी बिजी शैड्यूल क्यों न हो घर पर बंद कमरे में तेज म्यूजिक पर डांस करना मेरे डेली रूटीन में शामिल है. डांस एक कंप्लीट ऐक्सरसाइज है, जिस की वजह से में फिट रहती हूं.

हमेशा डट कर खड़ी रहती हूं.

औरत होने के नाते इंडस्ट्री में कभी असुरक्षा की भावना तो फील नहीं हुई? सवाल पर श्रद्धा कहती हैं, ‘‘मैं हमेशा डट कर खड़ी रहती हूं. कभी अपने को कमजोर साबित नहीं होने देती. मैं महिलाओं से भी कहना चाहूंगी कि अत्याचार को सहो नहीं. उस के खिलाफ आवाज उठाओ और बताओ कि हम महिलाएं कमजोर नहीं हैं.’’

सिद्धार्थ के साथ जोड़ी हिट

फिल्म ‘एक विलेन’ में सिद्धार्थ के साथ बनी जोड़ी सब को पसंद आई थी अब उन्हीं के साथ श्रद्धा दूसरी फिल्म ‘शौर्टगन ठग’ करने जा रही हैं. इसी के साथ राजकुमार राव के साथ फिल्म ‘स्त्री’ तो शाहिद कपूर के साथ ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ फिल्म कर रही हैं.

भारतीय हौकी टीम की दुर्दशा

एक वक्त था जब खेलों में न तो सुविधाएं थीं, न खिलाड़ियों की वाहवाही होती थी और न ही ब्रैंडेड जूते होते थे. लेकिन फिर भी खिलाड़ी गोल्ड मैडल जीत कर लाते थे. पर आज सबकुछ होते हुए भी गोल्ड मैडल के लिए भारतीय हौकी टीम तरस रही है.

आखिरी बार 29 जुलाई, 1980 में मास्को ओलिंपिक में भारतीय हौकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था. हौकी की दुर्दशा के बारे में सभी जानते हैं. पर बुलंदियों तक कैसे पहुंचा जाए, इस पर शायद ही कोई चिंता कर रहा हो. न सरकार, न खिलाड़ी और न ही खेल पदाधिकारी. खिलाड़ी मेहनत तो करते हैं पर हर बार मात खा जाते हैं, जबकि सुविधाएं उन्हें मिल रही हैं. अब तो पैसे भी उन्हें ठीकठाक मिलने लगे हैं. बावजूद इस के, वे गोल्ड मैडल से चूक जाते हैं.

पूरी दुनिया में अपना दबदबा कायम करने वाली भारतीय हौकी को अब हो क्या गया है? आखिर ध्यानचंद सरीखे खिलाड़ी क्यों नहीं मिल रहे हैं? क्या प्रतिभाओं की कमी है इस देश में? ऐसे कई सवाल हैं जो हमेशा मन को कुरेदते रहते हैं.

वर्ष 1964 में टोक्यो ओलिंपिक में हौकी में भारत ने जब स्वर्ण पदक हासिल किया था, तब स्पेन, आस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स व जरमनी जैसी टीमें उभरने लगी थीं. उस के बाद इन देशों के खिलाडि़यों ने काफी मेहनत की, नई तकनीक और नईनई प्रतिभाओं को मौका मिला और इन प्रतिभाओं ने खूबसूरत तरीके से कलाइयों का इस्तेमाल कर, लंबे पास दे कर साबित भी कर दिखाया. इस के उलट भारतीय हौकी दिनोंदिन कमजोर होती चली गई.

दुख इस बात का है कि पहले पायदान से लुढ़क कर आज हम कहीं नहीं हैं जबकि सरकार और खेल संघ हौकी को ले कर बहुत लंबीचौड़ी बातें करते हैं कि खिलाडि़यों की बुनियादी सुविधाओं में कोई कमी नहीं है, प्रतिभाओं की खोज की जा रही है. पर हकीकत में देखा जाए तो सरकार की उदासीनता व खेल संघों की राजनीति ने हौकी को पतन के गर्त में धकेल दिया है. वर्ष 2008 में भारतीय हौकी टीम बीजिंग ओलिंपिक में क्वालीफाई तक नहीं कर पाई, स्वर्ण पदक की तो बात छोड़ ही दीजिए.

कंपनियों के समक्ष प्रतिभाओं की कमी का संकट

दुनिया के कई देशों में प्रतिभाओं की कमी संबंधी एक सर्वेक्षण हाल में सामने आया है. सर्वेक्षण के अनुसार विकासशील, अर्द्धविकसित ही नहीं, बल्कि जापान तथा इंगलैंड जैसे विकसित देशों की कंपनियां प्रतिभाओं की कमी से जूझ रही हैं. उचित और प्रतिभाशाली व्यक्ति न मिलने से कई कंपनियों में शीर्ष पदों पर लंबे समय से भरती नहीं हो पा रही है. इसी वजह से भारत की 56 प्रतिशत कंपनियों में शीर्ष पदों पर भरती में दिक्कत आ रही है.

भारत प्रतिभाओं की कमी से जूझ रहे 10 शीर्ष देशों में शामिल है. सर्वेक्षण में 40 हजार से अधिक कंपनियों को शामिल किया गया है. सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि 45 प्रतिशत कंपनियों को प्रतिभाओं की कमी के कारण पदों को भरने में दिक्कत हो रही है. उन में कई बार निचले स्तर के पदों के लिए भी योग्य व्यक्ति नहीं मिल पाते. प्रतिभाओं की कमी के क्रम में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर है. यहां 56 प्रतिशत कंपनियों को प्रतिभा की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

जापान इस में पहले स्थान पर है और वहां 89 प्रतिशत पदों पर योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं. दूसरे नंबर पर रोमानिया, ताइवान, हौंगकौंग, बुल्गारिया हैं जबकि भारत के बाद शीर्ष 10 देशों में स्पेन, नीदरलैंड्स, इंगलैंड, आयरलैंड तथा चीन शामिल हैं. विश्व मंच पर यह नई तरह की दिक्कत सामने आई हैं.

दुनिया में कहीं भी पढ़ेलिखे युवकों की कमी नहीं है, लेकिन प्रतिभा की कमी है. कुछ साल पहले एक सर्वेक्षण आया था जिस में कहा गया कि भारत में बीटैक की डिगरी हासिल करने वाले युवाओं में 60 फीसदी को अंगरेजी नहीं आती है. यह बड़ी त्रासदी है. सिर्फ गले में डिगरी टांग कर नौकरी मांगने का प्रयास पुराना है. नई पीढ़ी को समग्र बन कर नई सोच के साथ सामने आना है.

मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने वाले हो जाएं चौकन्ने!

आजकल हर किसी आधे से ज्यादा समय फोन पर बितता है. किशोरों व बच्चों के अधिक समय तक फोन पर लगे रहने से उनके मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ सकता है और उनमें अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्और्डर (एडीएचडी) के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं. एक हिन्दी पत्रिका में में प्रकाशित एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है. शोध के अनुसार, अक्सर डिजिटल मीडिया उपयोग करने वालों में एडीएचडी के लक्षण लगभग 10 प्रतिशत अधिक होने का जोखिम दिखाई देता है. लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यह जोखिम अधिक है और उन किशोरों में भी अधिक मिला जिन्हें पहले कभी डिप्रेशन रह चुका है.

एडीएचडी के कारण स्कूल में खराब परफौर्मेंस सहित किशोरों पर कई अन्य नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं. इससे जोखिम भरी गतिविधियों में दिलचस्पी, नशाखोरी और कानूनी समस्याओं में वृद्धि हो सकती है. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डा. के.के. अग्रवाल ने कहा, “स्मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रियता के साथ युवाओं में फेसबुक, इंटरनेट, ट्विटर और ऐसे अन्य एप्लीकेशंस में से एक न एक का आदी होने की प्रवृत्ति आम है. इससे अनिद्रा और नींद टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लोग सोने से पहले स्मार्ट फोन के साथ बिस्तर में औसतन 30 से 60 मिनट बिताते हैं. ”

उन्होंने कहा, “मोबाइल फोन के उपयोग से संबंधित बीमारियों का एक नया स्पेक्ट्रम भी चिकित्सा पेशे के नोटिस में आया है और यह अनुमान लगाया गया है कि अब से 10 साल में यह समस्या महामारी का रूप ले लेगी. इनमें से कुछ बीमारियां ब्लैकबेरी थम्ब, सेलफोन एल्बो, नोमोफोबिया और रिंगजाइटी नाम से जानी जाती हैं.” एडीएचडी के कुछ सबसे आम लक्षणों में ध्यान न दे पाना (आसानी से विचलित होना, व्यवस्थित होने में कठिनाई होना या चीजों को याद रखने में कठिनाई होना), अति सक्रियता (शांत होकर बैठने में कठिनाई), और अचानक से कुछ कर बैठना (संभावित परिणामों को सोचे बिना निर्णय लेना) शामिल हैं.

डा. अग्रवाल ने कहा, “गैजेट्स के माध्यम से जानकारी की कई अलग-अलग धाराओं तक पहुंच रखने से मस्तिष्क के ग्रे मैटर के घनत्व में कमी आई है, जो संज्ञान के लिए जिम्मेदार है और भावनात्मक नियंत्रण रखता है.  इस डिजिटल युग में, अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है पूर्ण संयम, यानी प्रौद्योगिकी का हल्का फुल्का उपयोग होना चाहिए. ”

डा. अग्रवाल ने इसके लिए कुछ सुझाव भी दिये हैं, उनका कहना है कि “इलेक्ट्रानिक कर्फ्यू का मतलब है सोने से 30 मिनट पहले किसी भी इलेक्ट्रानिक गैजेट का उपयोग नहीं करना. पूरे दिन के लिए सप्ताह में एक बार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचें. मोबाइल फोन का उपयोग केवल कौलिंग के लिए करें. दिन में तीन घंटे से अधिक समय तक कंप्यूटर का उपयोग न करें. अपने मोबाइल टौकटाइम को दिन में दो घंटे से अधिक समय तक सीमित करें. दिन में एक से अधिक बार अपनी मोबाइल बैटरी रिचार्ज न करें.” ऐसा करने से आप काफी हद तक मोबाइल से होने वाली समस्याओं से बच पाएंगे.

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