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जब बनाएं सपनों का आशियाना, ध्यान में रखें ये बातें

आम लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि यदि जल्दी काम कराना है या समय बचाना है तो संबंधित काम ठेके पर दे दो. भवन निर्माण के क्षेत्र में ठेकेदारी का चलन सब से अधिक है. यहां का ज्यादातर काम ठेकेदारी पर ही होता है. अब तो भवन निर्माण में काम करने वाले कारीगर भी ठेके पर काम करना अधिक मुनासिब समझते हैं.

कैसे करें अनुबंध

भवन निर्माण ठेकेदार से 2 तरह से अनुबंध किया जा सकता है. पहले में यह होता है कि भवन मालिक अपने भवन के निर्माण का संपूर्ण ठेका ठेकेदार को दे देता है. इस में भवन मालिक को सिर्फ पैसा देना पड़ता है. भवन निर्माण सामग्री एवं मजदूर व कारीगरों की व्यवस्था ठेकेदार अपनी तरफ से करता है. दूसरे प्रकार में भवन मालिक निर्माण से संबंधित समस्त सामग्री उपलब्ध करा देता है. इस में ठेकेदार के कारीगर व मजदूर होते हैं.

एक बात यहां जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि ठेका किसी भी प्रकार का हो, ठेकेदार को ठेका देते समय सभी बातें व शर्तें लिखित में होनी चाहिए, ताकि बाद में ठेकेदार अपने अनुबंध से मुकरे नहीं. अकसर होता यह है कि ठेकेदार अपने क्षेत्र के माहिर होते हैं, ऐसे में वे भोलेभाले भवन मालिकों को चूना लगाने से नहीं चूकते. इसलिए ठेकेदार से जो भी अनुबंध करें, लिखित में, स्टांपपेपर पर करें.

आर्किटैक्ट की भूमिका

भवन निर्माण के संबंध में आर्किटैक्ट की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. आर्किटैक्ट की उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि एक आर्किटैक्ट ही भवन मालिक के बजट के अनुसार बढि़या से बढि़या योजना बना कर हवादार व सुंदर भवन का डिजाइन तैयार करता है. एक इंजीनियर भवन में विशालता एवं मजबूती ला सकता हैं, उस में खूबसूरती सिर्फ एक आर्किटैक्ट ही पैदा कर सकता है. किसी भी अनुभवी आर्किटैक्ट के दिशानिर्देशन में कम लागत में बेहतर मकान, सर्वश्रेष्ठ निर्माण क्वालिटी व आवश्यक समयावधि में बनवाया जा सकता है.

सर्वप्रथम भवन मालिक को यह तय कर लेना चाहिए कि उस की आवश्यकता क्या है व बजट कितना है. इस के बाद एक अनुभवी आर्किटैक्ट को अपनी आवश्यकता व बजट बता कर उस के द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मौडलों में से अपनी पसंद का कोई एक मौडल चुन कर  बता देना होता है.

इस के बाद भवन निर्माण का कार्य

3-4 चरणों में संपादित होता है. पहले चरण में आर्किटैक्ट की प्लानिंग-डिजाइनिंग होती है, जिस में एक नक्शा नगर निगम, नगर पालिका, नगर एवं विकास प्राधिकरण द्वारा पास होना होता है. इसी नक्शे के आधार पर वर्क्स ड्राइंग्स जैसे फाउंडेशन ड्राइंग,  छत लैवल ड्राइंग, लाइट फिटिंग की ड्राइंग, सेनेटरी एवं वाटर सप्लाई ड्राइंग्स और आंतरिक साजसज्जा आदि की ड्राइंग बनवाई जाती हैं.

दूसरे चरण में ठेकेदार द्वारा आर्किटैक्ट की देखरेख में भवन निर्माण शुरू होता है. इस के लिए समयसमय पर आर्किटैक्ट हर चरण पर ठेकेदार को दिशानिर्देश देता है व सुपरविजन करता है. इस तरह भवन निर्माण में कोई गड़बड़ी नहीं हो पाती व भवन निर्धारित समयसीमा व लागत के अंदर बन कर तैयार हो जाता है.

भवन मालिक  और ठेकेदार के आपसी अनुबंध में किए गए कार्य के अनुसार भुगतान किया जाता है. ठेकेदार को भुगतान करने से पहले अपने आर्किटैक्ट से रायमशवरा कर लेने में सहूलियत रहती है. यदि आर्किटैक्ट को लगता है कि काम उस की मरजी का नहीं हुआ है तो वह ठेकेदार को भुगतान करने से मना भी कर सकता है.

फाउल रोकने के लिए कर रही हूं काम : हिमा

भारतीय धाविका हिमा दास का कहना है कि जकार्ता एशियन गेम्स में 200 मीटर स्पर्धा के सेमीफाइनल में फाउल होने के बाद वह इस पर काम कर रही है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह खेल का हिस्सा है. हिमा रेस शुरू करने का संकेत देने वाली गन की आवाज से पहले ही दौड़ पड़ी थीं और इसे फाउल में गिना जाता है.

हिमा को मंगलवार को एडिडास कंपनी का ब्रांड दूत बनाया गया. उन्होंने कहा, ‘जब मुझसे फाउल हो गया था तो मैं बहुत दुखी थी. मुझे लगा कि मैंने बेहतरीन मौका गंवा दिया क्योंकि रेस में कुछ भी हो सकता था. टीम की अन्य साथियों ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि यह रेस में होता रहता है और निराश मत हो और आगे की रेस पर ध्यान लगाओ. जब हमने स्वर्ण पदक जीता था तो मुझे कुछ राहत मिली थी.’ हिमा ने जकार्ता एशियन गेम्स में तीन पदक जीते थे. उन्होंने चार गुणा 400 मीटर में स्वर्ण,चार गुणा 400 मीटर मिक्स्ड स्पर्धा में रजत और 400 मीटर में भी रजत पदक जीता था.

असम की हिमा का नाम इस साल मिलने वाले अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया है. इसको लेकर उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस साल मेरा नाम अजरुन पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा. मुझे लगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी और अच्छा प्रदर्शन करना होगा और शायद अगले वर्ष मेरा नाम जाए. लेकिन मेरा नाम जाने से मैं खुश हूं.’

दुती चंद की जीवनी अगले साल जारी होगी

भारत की स्टार धावक दुती चंद मैदान के बाहर और अंदर के अपने अनुभवों को किताब के जरिए साझा करेंगी जिससे प्रशंसक उनकी अब तक की यात्रा के बारे में जान सकेंगे. इस किताब में दुती के गरीबी से निकलकर देश के सबसे सफल धावकों में एक बनने की कहानी होगी. इस किताब में हाइपरएंड्रोजेनिच्म नीति के कारण दुती की परेशानियों और उससे निकलने की भी कहानी होगी.

अरपिंदर की निगाह टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने पर

टिपल जंपर और जकार्ता एशियन गेम्स के स्वर्ण पदकधारी अरपिंदर सिंह की निगाह 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में पदक जीतने पर लगी है. हाल ही में वह आइएएएफ कांटिनेंटल कप पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे. वह एशियन और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा, ‘यह साल मेरे लिए अच्छा रहा लेकिन अगले साल होने वाले टूर्नामेंटों में अच्छे प्रदर्शन की मुझे उम्मीद है. मेरा लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने का है. एशियन गेम्स की तुलना में ओलंपिक बड़ा टूर्नामेंट होता है. हम अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे तो पदक आ जाएगा.’

अनूप जलोटा के इन अजब गजब किस्सों के बारे में आप भी जानिए

‘एक पति सुबह मौज में भजन गुनगुना रहा था.. तभी पत्नी जोर से चिल्लाते हुए बोली, ‘ज्यादा अनूप जलोटा बनने की कोशिश न करना वरना तुम्हारी टांगे तोड़ दूंगी’. आजकल कुछ ऐसे ही जोक्स से पूरा टि्वटर और सोशल मीडिया भरा पड़ा है. दरअसल, अनूप जलोटा ने जब से अपनी गर्लफ्रेंड जसलीन मथारू संग बिग बॉस हाउस में एंट्री ली है, उसी वक्त से वे सुर्खियों में आ गए.

तीन शादियां कर चुके और गर्लफ्रेंड जसलीन के साथ बिग बॉस के घर जाकर बोल्ड खुलासे करने वाले अनूप की जिंदगी से जुड़े लोगों से जब बात की, तो कई चटपटी बातें जानने को मिलीं. हमने जब सात्विक भजन गायक की इमेज रखने वाले अनूप जलोटा की जिंदगी की तह में जाने की कोशिश की, तो पता चला कि कोई उन पर जान छिड़कती हैं, तो कोई उन्हें पिता तुल्य मानती हैं.

‘अनूप चाहते थे कि हम उस मॉडल का इंटरव्यू करें’

बॉलीवुड की जानी-मानी फिल्म पत्रकार कहती हैं कि बिग बॉस में अनूप के इस रंगीन मिजाज को देखकर वे कहीं से भी हैरान नहीं है. उनके आशिक मिजाज होने का अंदाजा उस वक्त हो गया था, जब वे तीन साल पहले उनके घर एक इंटरव्यू के लिए गई थीं. तब अनूप ने अपना नहीं बल्कि अपने साथ आई अमेरिकन-इंडियन ऐक्ट्रेस का इंटरव्यू करने को कहा.’

पितातुल्य मानती हूं : इलियाना

अनूप ने कई नैशनल और इंटरनैशनल टैलंट्स को मौका दिया है. ऐसे में जब इस्राइल में बैठी सिंगर इलियाना से संपर्क किया तो इलियाना द्वारा अनूप के लिए कहे गए बोल बेहद ही चौंका देने वाले थे. इलियाना ने बताया, ‘मुझे अनूप जी ने फेसबुक के जरिए कॉन्टैक्ट किया था. हम फेसबुक फ्रेंड्स हैं. उन्होंने मेरे कुछ गाने सुने और मुझे इंडिया आने को कहा. मैं तो उन्हें पितातुल्य मानती हूं.’

अनूप जरूर नाटक कर रहे होंगे : मधुश्री

जानी-मानी सिंगर मधुश्री ने जलोटा के साथ ही अपने पहले स्टेज शो की शुरुआत की थी. बकौल मधुश्री, ‘अनूप मेरे साथ बेहद ही सलीके से रहे हैं. मैं उनकी निजी जिंदगी में कोई कमेंट नहीं करना चाहती हूं. वैसे भी बिग बॉस नाटककारों का शो है, ऐसे में शो में रहने के लिए जरूर अनूप जी नाटक कर रहे होंगे.

गूगल पर ना करें ये 3 चीजें सर्च, घर से उठा ले जाएगी पुलिस

आज सभी के हाथ में स्मार्टफोन है और स्मार्टफोन से हम गूगल सर्च का उपयोग भी करते हैं. अब तो फोन में गूगल असिस्टेंट का सपोर्ट मिल रहा है जिसकी मदद से हम अपनी आवाज में बोलकर भी सर्च कर सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे सवाल और जानकारियां भी हैं जिन्हें गूगल पर सर्च करने से आप सुरक्षा और जांच एजेंसियों के रडार पर भी आ सकते हैं. आइए आपको उन चीजों के बारे में बताते हैं जिन्हें गूगल पर सर्च न करने में ही भलाई है.

गूगल पर आप मजाक में या टाइम पास करने के लिए भी बम बनाने का तरीका सर्च करते हैं तो आपको पुलिस घर से उठा ले जा सकती है. दरअसल क्राइम और साइबर की नजर उन यूट्यूब चैनल और वेबसाइट्स पर होती है जिन पर बम बनाने के तरीके सिखाए जाते हैं. ऐसे में आप इन वेबसाइट पर जाते हैं पुलिस की नजर में आ सकते हैं और आपके आईपी एड्रेस के आधार पर पुलिस आपके पास पहुंच सकती है.

अगर आप गूगल पर किसी वजह से या जानबूझकर चाइल्ड पौर्न के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आज ही बंद कर दीजिए, क्योंकि ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है. बता दें कि भारत में चाइल्ड पॉर्न देखना, बढ़ावा देना और जानकारी इकट्ठा करना गैरकानूनी है.

ऐसी कोई जानकारी गूगल पर सर्च ना करें जिसकी आपकी पहचान जाहिर हो रही हो. जैसे- लोकेशन, औफिस और घर के बारे में सर्च ना करें. उदाहरण के तौर पर आप गांव का लोकेशन तो सर्च कर सकते हैं लेकिन डायरेक्ट एड्रेस डालकर गूगल में सर्च करना खतरे से खाली नहीं है.

म्यूचुअल फंड में निवेश हुआ सस्ता, कंसेंट मैकेनिज्म में भी बदलाव

सेबी ने म्यूचुअल फंडों का एक्सपेंस रेशियो घटा दिया है. निवेशकों का पैसा मैनेज करने के लिए उनसे ली जाने वाली फीस को एक्सपेंस रेशियो कहते हैं. सिक्योरिटीज मार्केट के रूल्स तोड़ने वालों के लिए कंसेंट मैकेनिज्म में बदलाव, बड़ी कंपनियों के लिए डेट मार्केट से अनिवार्य तौर पर पैसा जुटाने के नियम के साथ मंगलवार की बोर्ड मीटिंग में सेबी ने कई अन्य उपायों का भी ऐलान किया.

सेबी के इन उपायों से म्यूचुअल फंड में निवेश की लागत कम होगी और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा होगी. उसने एचआर खान समिति की सिफारिशों को भी मान लिया है, जिनमें एनआरआई और कुछ विदेशी फंडों के इनवेस्टमेंट पर लगाई गई कुछ पाबंदियों को हटाने की बात कही गई थी. इससे विदेशी निवेशकों की फिक्र दूर होगी,जिन्हें नियमों में सख्ती का डर परेशान कर रहा था.

इक्विटी MF के एक्सपेंस रेशियो में कटौती

साइज के आधार पर ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम्स के एक्सपेंस रेशियो को घटाया गया है. 500 करोड़ रुपये तक मैनेज करने वाली स्कीम के लिए 2.25 पर्सेंट और 50 हजार करोड़ से अधिक एसेट्स वाले फंड्स के लिए 1.05 पर्सेंट का सालाना एक्सपेंस रेशियो तय किया गया है. सेबी ने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटरों को अपफ्रंट कमीशन देने पर भी रोक लगा दी है. सेबी के होलटाइम मेंबर पुरी बुच ने मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक्सपेंस रेशियो में कटौती से निवेशक साल में 1,300-1,500 करोड़ बचा पाएंगे. इस पर मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के सीईओ स्वरूप मोहंती ने कहा कि एक्सपेंस रेशियो कम होने से शॉर्ट टर्म में प्रॉफिटेबिलिटी कम होगी, लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे बिजनेस बढ़ेगा.

कंसेंट मैकेनिज्म

सेबी ने कहा है कि अगर उसे लगता है कि किसी अपराध का मार्केट पर व्यापक असर या निवेशकों को नुकसान हुआ है तो वह कंसेंट मैकेनिज्म से उसे सेटल नहीं करेगा. इस सिस्टम में आरोपी अपनी गलती स्वीकार किए बिना जुर्माना देकर मामला रफा-दफा कर सकता है. कंसेंट मैकेनिज्म से मुकदमेबाजी कम करने में मदद मिलती है. सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने बताया, ‘हम सिद्धांतों के आधार पर ऐसे मामलों में फैसला करेंगे.’

FPI के लिए कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म

सेबी ने बताया कि उसने खान समिति की सिफारिशें मान ली हैं और इस सिलसिले में वह अलग सर्कुलर जारी करेगा. 10 अप्रैल को एक सर्कुलर में सेबी ने एनआरआई और भारतवंशियों के यहां निवेश करने वाले विदेशी फंड्स के बेनेफिशियल ओनर होने पर रोक लगा दी थी. इस कदम का विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि सेबी को बेनेफिशियल ओनर डेफिनिशन का इस्तेमाल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए करना चाहिए.

पर्सनल लोन लेते समय ध्यान रखें ये 5 बातें

पर्सनल लोन वित्‍तीय संकट के समय आपातकालीन परिस्थितियों में काम आता है. शादी के समय होने वाले अनगिनत खर्चें, अस्‍पताल के खर्चें, किसी को ब्‍याज देनी हो या फिर कोई छोटा सा बिजनेस शुरु करना हो पर्सनल लोन आपके लिए हमेशा ही काम आता है. चूंकि पर्सनल या व्‍यक्तिगत लोन पर आपको बहुत अधिक ब्‍याज देना होता है इसलिए एक्‍सपर्ट हमेशा आपको पर्सनल लोन सिर्फ तत्‍काल आवश्‍यकता में ही लेने के लिए सुझाव देंगे. यहां पर आपको कुछ जरुरी चीजें बताएंगे जिसे आपको पर्सनल लोन लेने से पहले चेक कर लेना चाहिए.

योग्‍यता

ऋण की राशि का लाभ उठाने के लिए, आपको अपनी योग्यता की जांच करनी होगी जिसे आप किसी बैंक या किसी वित्तीय संस्थान वेबसाइट के माध्यम से जान सकते हैं और उनके द्वारा प्रदान किए गए व्यक्तिगत ऋण पात्रता कैलक्यूलेटर से जांच सकते हैं. आपकी व्यक्तिगत ऋण योग्यता आपकी आय, पुनर्भुगतान क्षमता, क्रेडिट स्कोर इत्यादि पर निर्भर करेगी. ऋणदाता आम तौर पर व्यक्तिगत ऋण मंजूर करने से इन्‍हीं चीजों की जांच करता है.

पुनर्भुगतान क्षमता

ऋण लेने से पहले, हमेशा यह जांचना उचित होता है कि आप समय पर ईएमआई चुकाने में सक्षम होंगे या नहीं. हालांकि, ऋण देने के समय बैंक या ऋणदाता द्वारा पुनर्भुगतान क्षमता प्रोफाइलिंग की जाती है ताकि उधारकर्ता के नकदी या आय स्रोतों की तुलना करने के लिए उधारकर्ता के पास आवश्यकता के अनुसार ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त स्रोत हों.

प्री-पेमेंट पेनाल्‍टी

आपको इस तथ्य से अवगत होना चाहिए कि उधारकर्ता आम तौर पर शुल्क लेते हैं यदि आप अपने ऋण का भुगतान जल्दी ही करते हैं डील के अनुसार, प्रारंभिक पुनर्भुगतान बैंक या वित्तीय संस्थानों को ब्याज कमाने से रोकता है क्योंकि उन्हें लेने की उम्मीद थी. इसलिए, सबसे कम फौजदारी शुल्क के साथ ऋण लेने की सलाह दी जाती है. वर्तमान में, गृह ऋण पर कोई फौजदारी शुल्क या प्रीपेमेंट जुर्माना लागू नहीं किया जाता है.

ब्‍याज दर

ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर के आधार पर 8 से 16 प्रतिशत के बीच हो सकती है. साथ ही, किसी को ऋण लेने से पहले अन्य संस्थान के साथ ब्याज दरों की जांच और तुलना करनी चाहिए क्योंकि कई प्रतिस्पर्धी कारणों से ब्याज फिर से भिन्न हो सकता है और ऐसे मामले में, आपको सस्ती कीमत पर ऋण प्राप्त करने का लाभ मिल सकता है. आप विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दी गई व्यक्तिगत ऋण ब्याज दरों को देख सकते हैं.

EMI पेमेंट

समान मासिक आय या ईएमआई की गणना ब्याज दर, समय अवधि और ऋण के वर्तमान मूल्य के आधार पर की जाती है. हालांकि, ईएमआई रेंज संकेतक हैं. वास्तविक स्थिति में, इसमें बैंक के नियमों और शर्तों के अनुसार अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं. ब्याज दरें एक असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण के लिए वेतनभोगी व्यक्ति और पेंशनभोगियों के अनुसार आधारित होती हैं. वास्तविक लागू ब्याज दर क्रेडिट प्रोफ़ाइल, ऋण राशि, कार्यकाल, कंपनी जिसके लिए आप काम करते हैं और बैंक के विवेकाधिकार के आधार पर भिन्न हो सकती है.

मारपीट मामले में स्टोक्स और हेल्स को मिलेगी सजा

इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने बेन स्टोक्स और एलेक्स हेल्स पर ब्रिस्टल में मारपीट के मामले में खुद से संज्ञान लेते हुए उन पर चार्ज लगाए हैं. बोर्ड ने कहा कि दोनों ने खेल को बदनाम किया है और इसके लिए सुनवाई की जाएगी. ये मामला पिछले वर्ष सितंबर का है जब ब्रिस्टल नाइट क्लब में दोनों खिलाड़ियों ने वहां दो लोगों के साथ झगड़ा किया था.

वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच जीतने के बाद दोनों इंग्लिश खिलाड़ी ब्रिस्टल में एमबार्गो नाइट क्लब बार में गए थे. वहां झगड़ा हुआ था. इसके बाद स्टोक्स को गिरफ्तार भी किया गया था. ज्यूरी इस इस वर्ष जुलाई में इस केस के लिए सुनवाई की और कई दिनों तक यह चली. बाद में स्टोक्स को दोषी नहीं मानते हुए बरी कर दिया गया. हेल्स पर चार्ज नहीं लगाए गए थे. इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की सुनवाई दिसंबर में अनुशासन समिति के सदस्य होंगे, स्टोक्स और हेल्स 5 और 7 दिसम्बर को उनके सामने पेश होंगे.

स्टोक्स ने ज्यूरी के सामने अपने बयान में कहा था कि मैंने मारपीट बचाव के लिए की थी. वहां मौजूद लोगों को बचाने के लिए मैंने ये कदम मजबूरीवश उठाया था. पिछले वर्ष स्टोक्स इस केस की वजह से कई मैच नहीं खेल पाए थे. एशेज सीरीज के अलावा न्यूजीलैंड और औस्ट्रेलिया के खिलाफ भी वो वनडे सीरीज नहीं खेल पाए थे. इस घटना का असर स्टोक्स की छवि पर भी पड़ा है. हालांकि इस मामले में स्टोक्स को कोर्ट से तो राहत मिल गई थी लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड उनके इस बर्ताव पर उन्हें क्या सजा सुनाता है या फिर उन्हें माफ कर दिया जाता है.

‘जेहाद’ हर इंसान को ‘जेहाद’ का सही मतलब याद दिलाएगी : हैदर काजमी

मशहूर अभिनेता व फिल्मकार मनोज कुमार के सीरियल ‘‘भारत के शहीद’’ में स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस का किरदार निभाकर अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले हैदर काजमी ने बाद में ‘साई बाबा’सहित कई किरदारों को अपने अभिनय से संवारा. वह कई फिल्मों व सीरियलों में अभिनय करने के अलावा ‘पथ’, ‘बौबी’ जैसी फिल्मों का निर्माण तथा ‘कजरी’ जैसी विचारोत्तेजक फिल्म का निर्माण व निर्देशन भी कर चुके हैं. अब वह बतौर निर्माता व अभिनेता फिल्म ‘‘जेहाद’’ लेकर आ रहे हैं.

अपनी अब तक की यात्रा के बारे में क्या कहेंगे?

बौलीवुड में सबके गौड फादर होते हैं, पर मेरा अपना कोई गौडफादर नहीं सिर्फ  ‘गौड’ है. आज भी मैं ईश्वर के भरोसे ही आगे बढ़ रहा हूं. ईश्वर ने कहा कि, ‘चलते रहो, मैं चलता चला जा रहा हूं.’ जब मैं पलट कर पीछे देखता हूं, तो कई वर्ष गुजर चुके हैं. आज जब मैं सोचता हूं क्या खोया क्या पाया? तो महसूस करता हूं कि मैंने पाया तो बहुत कुछ है. मैंने मनोज कुमार के निर्देशन में बने सीरियल ‘‘भारत के शहीद’’ में खुदीराम बोस का किरदार निभाकर बौलीवुड में कदम रखा था. बाद में कई फिल्मों व सीरियलों में अभिनय किया. फिर मैंने पहली फिल्म अंडरवर्ल्ड पर ‘पथ’ बनायी थी, जो कि बहुत ही चर्चित और सफल फिल्म थी. फिर मैंने फिल्म ‘बौबी’बनायी, जिसमें मैंने एक नई लड़की अंतरा विश्वास, जो कि अब मोना लिसा के नाम से काम कर रही हैं, को ब्रेक दिया था. इस फिल्म का रिबन मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने काटा था. इसके बाद मैंने राजस्थान की पृष्ठभूमि पर एक सामाजिक कुप्रथा पर फिल्म ‘कजरी’ का निर्देशन किया. कुछ भोजपुरी फिल्में बनायी. मेरी भोजपुरी फिल्में भी ब्लाक बूस्टर साबित हुई. पर मेरे अंतर्मन ने कहा कि मैं कुछ भटक गया हूं. मन को रचनात्मक संतुष्टि नहीं मिल रही थी. तो भोजपुरी फिल्मों को अलविदा कहकर फिर से बौलीवुड में आ गया. पर बौलीवुड में नकल का दौर चल रहा था. दक्षिण भारत की सफल फिल्मों या विदेशी फिल्मों का रीमेक हो रहा था. नकल हो रही थी. यह सारे नकलची अपने आपको बौलीवुड बता रहे थे. इन्ही वजहों से शेखर कपूर ने कहा था कि, ‘आई एम अशेम्ड कि आई एम इन बौलीवुड.’ यानी कि उन्होंने कहा था ‘मुझे शर्म आती है कि मैं बौलीवुड में हूं.’ देखिए, मैं कोई बात घुमा कर नही करता. जो बड़े लोग कहते हैं, उसी पर विचार करता हूं. शेखर कपूर ने जो कुछ कहा, उस पर मैंने सोचा कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? बहुत सोचने और बौलीवुड में बन रही फिल्मों पर गौर करने पर हमने पाया कि हम नया कुछ नही बना रहे हैं.  बल्कि हम सभी आपको उल्लू बना रहे हैं. तब काफी विचार करने के बाद मैंने फिल्म ‘जेहाद’ बनायी. जिसमें मैंने केंद्रीय भूमिका भी निभायी है.

जब इस फिल्म को ‘कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’में बुलाया गया और मुझे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तथा फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला, तो पहली बार मुझे अहसास हुआ कि बौलीवुड में रहते हुए भी मैंने एक अच्छी फिल्म बनायी है. एक अच्छा काम किया है.

फिल्म ‘‘जेहाद’’ की कहानी का प्रेरणास्रोत क्या रहा?

जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि हिंदी व भोजपुरी फिल्म बनाने के बाद जब मैं पुनः हिंदी फिल्मों की तरफ मुड़ा, तो मैंने सोचा कि मुझे अंतरराष्ट्रीय सिनेमा बनाना है. मैं खुद को बौलीवुड तक सीमित नहीं रखना चाह रहा था. उसके बाद मैंने तमाम भारतीय फिल्मकारों की पुरस्कृत फिल्म देखने के अलावा कई बड़ी बड़ी विदेशी फिल्में देखीं. उसके बाद मेरे दिमाग में आया कि आज की जो बड़ी समस्या है, वह है ‘जेहाद’. आज की तारीख में ‘जेहाद’शब्द सुनकर लोग आपको हेलो करने की बजाए आपके बगल से निकल जाते हैं. लोगों ने  ‘जेहाद’ का मतलब आतंकवाद मान लिया है. ‘जेहाद’ का मतलब किसी को गोली से उड़ा देना हो गया है. पर हकीकत में ‘जेहाद’के यह मायने हैं ही नहीं. तब मैंने सोचा कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के हर इंसान को खासकर मुसलमानों को ‘जेहाद’ का मतलब याद दिलाना चाहिए.

फिल्म ‘‘जेहाद’’ की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी आतंकवादी अल्ताफ की है. उसके जीवन की घटना है कि वह किस तरह से आतंकवादी बना? उसके लिए जेहाद क्या है? फिर आतंकवादी घटनाओं में लिप्त होने के बावजूद उसे कैसे जेहाद का ही मतलब समझ में आता है. तब वह क्या करता है.

हमारे यहां सबसे दुःखद बात यह है कि ‘जेहाद’ का असली मतलब किसी को पता ही नही है. ‘जेहाद’ के नाम पर एक भोला भाला इंसान भी बंदूक उठाकर आतंकवादी बन मासूमों और भारतीय सेना के जवानों को बेरहमी से मौत के घाट उतारता रहता है. वह जेहाद…जेहाद बोलकर चला जाता है. पर किसी ने उससे कभी यह नहीं पूछा कि जेहाद के मायने क्या हैं?

‘‘जेहाद’’ के असली मायने क्या हैं? क्या आपकी फिल्म में इसका मतलब बताया गया है?

कुरान शरीफ में मोहम्मद साहब यानी कि हमारे गुरू ने कहा है कि जेहाद का मतलब अपने अंदर के शैतान को मारना. यानी कि जेहाद का मतलब है अपने अंदर के जानवर से मुक्ति पाना. अपने अंदर के गुस्से पर काबू पाना. अफसोस की बात है कि किसी भी मुस्लिम फिल्म निर्माता ने भी यह नहीं सोचा कि वह लोगों को ‘जेहाद’का असली मतलब समझा दें. फिल्मों के माध्यम से पहले प्रयास किया गया होता, तो शायद भोले भाले युवक आतंकवादी बनने के बारे में कम सोचते. अब मैंने वह काम किया है, जिसकी अपेक्षा लोगों को थी. इसी कारण पूरे विश्व के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में हमारी फिल्म को, हमारे इस कदम को सराहा जा रहा है. यदि यही बात हमारे हिंदू भाइयों को पता होती, तो वह भी मुसलमानों से दूरी ना बनाते. तो हैदर काजमी ने यह काम अपनी फिल्म ‘जेहाद’ के माध्यम से किया है.

जब हमने जेहाद का असली मतलब फिल्म के माध्यम से लोगों को बताया, तो फिल्म देखकर तमाम मुसलमान भाईयों के पैरों तले जमीन हिल गयी. मुझे अफसोस है कि हमारे तमाम मुसलमान भाइयों को भी ‘जेहाद’ का असली मतलब नहीं पता.

मगर कुछ लोगों का मानना है कि  जेहाद का मतलब अपने हक के लिए लड़ना है?

हां! ‘जेहाद’का यह भी मतलब है कि अपने हक के लिए लड़ो. पर हम यह क्यों भूल जाते हैं कि महात्मा गांधी ने भी अपने देश की आजादी यानी कि अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी थी. पर वह लड़ाई अहिंसा के साथ लड़ी गयी. और अंग्रेज भाग गए. मेरा स्पष्ट रूप से कहना यह है कि हक की लड़ाई के नाम पर मजबूर और मासूम बच्चों की हत्या कर देना  ‘जेहाद’नहीं है. जो इस कृत्य को जेहाद का नाम देता है, वह मुसलमान नहीं हो सकता. इसी बात को मैनें अपनी फिल्म ‘‘जेहाद’’ में उठाया है. यही मेरी फिल्म का मुख्य मुद्दा भी है.

क्या इस पर कोई शोध कार्य किया?

मैं तो मुस्लिम हूं. मैंने कुरान शरीफ पढ़ा है. इसके अलावा पूरे दो साल तक कश्मीर में जाकर शोध कार्य किया. शोधकार्य करने के बाद हमने लेखकों की पूरी टीम को दो वर्ष के लिए कश्मीर में बैठाया. वहीं पर स्क्रिप्ट लिखी गयी. लेखकों की टीम में हमने स्थानीय कश्मीरी यानी कि वहां के मशहूर रंगकर्मी भवानी बशीर यासिर साहब को शामिल किया. बशीर साहब ने बहुत से लोगों से मिलवाया.

जिससे कश्मीर की जमीनी सच्चाई के साथ साथ वहां का रहन सहन, सभ्यता, संस्कृति, वेशभूषा व बोली भी हमारी फिल्म का हिस्सा बन सके. हमने तय कर लिया था कि हमारी फिल्म किसी भी सूरत में बौलीवुड फिल्म नहीं होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा होगा.

फिल्म के कलाकारों का चयन?

मैंने अपनी फिल्म में बौलीवुड के कलाकारों को जोड़ने की कोशिश नहीं की. बल्कि फिल्म के किरदारों के अनुरूप कश्मीर के रेडियो व रंगमंच पर काम करने वाले कलाकारों को तलाशा और फिर उन्हें प्रक्षिक्षण दिलाया. एक दो नहीं पूरे चालिस कश्मीरियों को प्रशिक्षण दिलवाया. यह आसान नहीं था. पर हमने ऐसा किया, जिससे हमारी फिल्म ‘जेहाद’ रीयल सिनेमा लगे. पर केंद्रीय भूमिका मैंने खुद ही निभायी है. जबकि कश्मीरी पंडित भावना के किरदार में आल्फिया हैं. हमारी फिल्म में तमाम पूर्व सैनिकों ने भी अभिनय किया है. हमारी फिल्म में जो भी सैनिक नजर आएंगे, वह वास्तविक हैं. पूर्व सैनिकों ने ही फिल्म के एक्शन दृश्यों का निर्देशन भी किया.

मगर आप कश्मीरी नहीं हैं, फिर भी अल्ताफ का केंद्रीय किरदार निभाया?

सही सवाल, मैंने इस किरदार को इसलिए निभाया, क्योंकि इस किरदार में मैं एकदम फिट बैठ रहा था. पर मुझे भी खुद के किरदार को जानने में समय लगा. वहां की चाल ढाल को आत्मसात करने में भी समय लगा. मैंने इस फिल्म में फिरंग पहनी है. मेकअप नहीं किया. पूरी फिल्म में वही फिरंग पहने हुए नजर आता हूं.

मैंने फिल्म को बहुत ही वास्तविकता के धरातल पर पेश किया है. आतंकवादी जंगल में इधर से उधर भागता रहता है, तो उसे नहाने/स्नान करने, मेकअप करने या दाढ़ी बनाने का समय कहां से मिलेगा? यह एक सच्चाई है. हमारी फिल्म में सिर्फ सच नजर आएगा. पूरी फिल्म के दौरान कोई मेकअप मैन नहीं था. हमने फिल्म के कलाकारों का फोटोसेशन भी नहीं करवाया. क्योंकि हम चाहते थे कि जो सच है, वह सामने आए. फिल्म में हीरो कोई नही है. सभी किरदार हैं.

आपने कश्मीर में कहां शूटिंग की?

कश्मीर का नाम आते ही लोग सोचते हैं कि फिल्म के अंदर दो चार दृश्यों में हिस्सों में बर्फ ही बर्फ नजर आएगी. फिल्म में श्रीनगर, गुलमर्ग व डल झील नजर आएगी. लेकिन ‘जेहाद’में ऐसा कुछ नहीं है. पूरी फिल्म में कहीं भी आपको बर्फ नजर नहीं आएगी. क्योंकि जब हम जून या जुलाई में फिल्म को फिल्माते हैं, तो वहां बर्फ नहीं होती है. अब तक लोगों ने एक सुंदर व खूबसूरत कश्मीर को ही फिल्मों में देखा हैं. मैंने पूरे विश्व को वह कश्मीर दिखाने की कोशिश की है, जो अब तक किसी ने नही दिखाया था. ‘मिशन इन कश्मीर’, ‘एलओसी’ जैसी फिल्मों में भी ऐसा कश्मीर नजर नही आया. मैंने अपनी फिल्म ‘जेहाद’में कश्मीर के अंदर की आग को दिखाया है. हमने कश्मीर में डेढ़ सौ किलोमीटर अंदर और पाकिस्तान सीमा से 40 किलोमीटर पहले रार के अलावा चरारे शरीफ, नागबल, दूधगंगा सहित कई इलाकों में शूटिंग की.

कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जाने के बाद आपके क्या अहसास रहे?

मेरा अपने काम के प्रति, अपने सिनेमा के प्रति विश्वास बढ़ गया. जब हमारी फिल्म कान्स में दिखायी गयी और लोगों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हमारे काम को सराहा, तो हमें हमारी जिम्मेदारी के बढ़ने का अहसास हुआ. अब हमें इससे अच्छा सिनेमा बनाना है. हम अधिक मेहनत करने के लिए तैयार हो गए हैं. अफसोस की बात यह है कि ‘कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में भारतीय पवेलियन में मौजूद एक भी भारतीय फिल्मकार या कलाकार हमारी फिल्म ‘जेहाद’ देखने नहीं आया. सभी विदेशी व अंग्रेज लोग फिल्म देखने आए थे. टर्की, फ्रांस, अमरीका के लोगों की भरमार थी. कई प्रोफेसरों ने हमारी फिल्म देखकर हमारी इस बात के लिए सराहना की कि हमने एक कटु सत्य को ईमानदारी के साथ सिनेमा के परदे पर पेश किया है. लोगों को विश्वास नही हो रहा था कि अल्ताफ का किरदार मैंने ही निभाया है. तमाम लोगों ने कहा कि अब बौलीवुड को इसी तरह का अंतरराष्ट्रीय सिनेमा बनाना चाहिए.

इसके बाद हमारी फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कृत किया गया. जब टोरंटो में मुझे पुरस्कृत किया गया, तब मुझे समझ आया कि इस संसार में वास्तविक सिनेमा देखने वालों की संख्या बहुत है.

शोध करते समय आपको आतंकवाद पनपने की वजहें क्या समझ में आयी?

आतंकवाद पनपने की मुख्य वजह यह हैं कि हमारी सरकार और जनता के बीच का सामंजस्य व समन्वय गड़बड़ाया है. सरकारी सुविधाएं व एनजीओ के कार्य कश्मीर के जरूरत मंदों तक नही पहुंच पा रही है. जिसके चलते कश्मीर के कुछ हिस्सों में रह रहे लोगों के मन में सेना व सरकार के प्रति गुस्सा है. पर अब धीरे धीरे बदली हुई सरकार के कार्य काल में सेना स्थानीय लोगों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने लगी है. देखिए मैं स्पष्ट कर दूं कि इसमें कहीं भी कश्मीरियों की गलती नहीं है. हर कश्मीरी अमन व शांति चाहता है. कश्मीरी युवक, कश्मीरी लोग मदद करने के लिए तैयार रहते हैं. मगर सीमापार से जो पाकिस्तानी घुस रहे हैं, वह इन भोलेभाले कश्मीरियों को पैसा आदि देकर बहला फुसला रहे हैं. मैंने करीबन चार साल कश्मीर में बिताया है. मैंने पाया कि 80 प्रतिशत कश्मीरी चाहता है कि, ‘हमें जीने दो. अमन से रहने दो. हमें अपने सेब के बागानों में काम करने दो.’ हां! बाकी 20 प्रतिशत में से दस प्रतिशत वह कश्मीरी हैं, जिनको लालच है या मजबूरी है, जिसका फायदा पाकिस्तान की सरकार व वहां की सेना उठा रही है. 80 प्रतिशत कश्मीरी कहता है कि हम भारत में रहकर खुश हैं, हमें पाकिस्तान में नहीं मिलना है. इनके बच्चे पढ़ना चाहते हैं. लेकिन आरजकता फैला रहे 10 प्रतिशत लोग अपनी राजनैतिक रोटी सेंकते हुए कश्मीर को बर्बाद कर रहे हैं. फिल्म देखकर लोगों को हमारी मेहनत, हमारा शोधकार्य समझ में आएगा.

अब तक कितने पुरस्कार मिले?

जेहाद को अब तक 37 अवार्ड मिल चुके हैं. इसमें 19 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हैं और 18 भारतीय है. कान्स में भी हमारी फिल्म को पुरस्कृत किया गया. आउट औफ द कैन में बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला. हमारी प्रतियोगिता सीधे ईरानी फिल्म से थी. हौलीवुड की फिल्म को हरा कर हमारी फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता. जेहाद मेरी लाइफ टाइम फिल्म है. मैंने खुद कभी नही सोचा था कि मैं इतना अच्छा सिनेमा बना पाउंगा.

किसी भी तस्वीर को मिनटों में कर सकते हैं रिसाइज, जाने प्रक्रिया

मौजूदा समय अधिकांश लोग सोशल साइट का इस्तेमाल करते हैं और ये लोग यहां पर अपनी तस्वीरों को शेयर भी करते हैं. हालांकि कभी कभार फोटो की क्वालिटी लोगों को परेशान करती हैं. यूजर्स की ओर से ये सारी फोटो या तो डीएसएलआर से खीचकर शेयर की जाती है या फिर ये स्मार्टफोन के कैमरे से खींची गईं फोटो होती हैं. ऐसे में कभी-कभी इन फोटो को रिसाइज या फिर क्रौप करना पड़ जाता है, जो कि एक उबाऊ और समय बेकार करने वाला टास्क होता है. अगर आप भी इसी तरह की समस्या से परेशान रहते हैं तो यह खबर बेशक आपके काम की है.

औनलाइन प्लेटफौर्म पर कई ऐसे सौफ्टवेयर मौजूद हैं जिनसे आप इन तस्वीरों को रिसाइज कर सकते हैं. साथ ही, ये सौफ्टवेयर आपकी फोटो के पिक्सल और रेजोल्यूशन को कम नहीं करते. हम अपनी इस खबर में आपको कुछ ऐसी ही सौफ्टवेयर के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.

technology

PHOTOSHOP (फोटोशौप)

तस्वीरों को रिसाइज करने के लिए फोटोशौप एक बेहतर विकल्प है. साथ ही इसका इस्तेमाल काफी आसानी से किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल आप MacOS और विंडोज 10 दोनों में कर सकते हैं. इसमें रिसाइज करने के लिए आपको फोटोशौप को अपने डिवाइस में डाउनलोड करना होगा.

फोटोशौप को डाउनलोड करने के बाद इसे ओपन करें. अब जिस फोटो को आपको रिसाइज करना है उसे ओपन करें. अब फोटोशौप मेनू में ऊपर दिए फाइल को क्लिक करें और उसमें ओपन को सेलेक्ट करें. इसके बाद, अपने फोटो को सेव लोकेशन से सेलेक्ट करें और नीचे-दायीं ओर ओपन बटन पर क्लिक करें.

इमेज को ओपन करने के बाद, फोटोशौप टौप मेनू में फोटो पर क्लिक करें और रिजल्ट ड्रौप-डाउन मेनू से इमेज का साइज चुनें. आपके सामने एक छोटी सी पौप-अप विंडो ओपन होगी जिसमें आपकी फोटो को रिसाइज करने के लिए कई औप्शन दिए होंगे. वहां से अपनी आवश्यकतानुसार चौड़ाई और ऊंचाई, पिक्सल आदि का चयन करें. फोटो एडिट पूरी करने के बाद OK बटन पर क्लिक कर दें.

GIMP

फोटोशौप के अल्टरनेटिव में आप इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह एक शानदार ऐप है जिसका इस्तेमाल अपनी फोटो को एडिट करने के लिए कर सकते हैं. इसे आप मैकOS और विंडोज 10 दोनों में कर सकते हैं.

GIMP सौफ्टवेयर को अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर इंस्टौल कर लें.

इंस्टौल करने के बाद, GIMP के टौप मेनू में फाइल पर क्लिक करें और रिजल्ट ड्रौप-डाउन मेनू से ओपन को सेलेक्ट करें. अब उस इमेज को सेलेक्ट करें जिसे आप रिसाइज करना चाहते हैं. इमेज को सेव लोकेशन से सेलेक्ट करें और ऊपर दायीं ओर दिए गए ओपन बटन को क्लिक करें.

इमेज को रिसाइज करें

इमेज ओपन करने के बाद GIMP के टौप मेन्यू पर इमेज पर क्लिक करें. इसमें ड्राप-डाउन मेन्यू से स्केल इमेज का चुनाव करें.

इसके बाद आपको एक छोटी पौप-अप विंडो दिखेगी, जिसमे रिसाइज और इमेज आल्टर करने जैसे विकल्प मौजूद होंगे. आपको इमेज को जिस भी विड्थ और हाइट में बदलना है उसे सेलेक्ट कर लें और स्केल बटन पर क्लिक करें और आपकी इमेज रिसाइज हो गई.

एशिया कप से बाहर हुआ श्रीलंका, फैंस ने जमकर उड़ाई खिल्ली

बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप का पहला मुकाबला हारने के बाद श्रीलंका को मालूम था कि यहां बने रहने के लिए उसे सोमवार को अबूधाबी में ग्रुप-बी के मुकाबले में अफगानिस्तान को हराना आसान नहीं होगा. हुआ भी कुछ ऐसा ही. अफगानिस्तान के युवा जांबाजों ने श्रीलंकाई शेरों का शिकार करके उन्हें एशिया कप से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

अफगानिस्तान ने श्रीलंका के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए रहमत शाह के 72 और अहसानुल्लाह जनत के 45 रन की बदौलत 50 ओवर में 249 रन बनाए. जवाब में राशिद खान और मुजीब-उर-रहमान जैसे विश्व के शीर्ष स्पिनरों के सामने श्रीलंका के बल्लेबाज टिक नहीं सके और 41.2 ओवर में 158 रन पर टीम ऑलआउट हो गई.

 

नतीजतन, पांच बार की एशिया कप चैंपियन श्रीलंका 91 रन से मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई. इसी के साथ अफगानिस्तान की यह श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों में पहली जीत है जबकि उसने वेस्टइंडीज को पांच मैचों में तीन बार, वहीं बांग्लादेश को पांच मैचों में दो बार शिकस्त दी है. इसके अलावा एशिया कप के इतिहास में यह श्रीलंका की रनों के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी हार है.

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