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मनोहर कहानियां: रहस्यों में उलझी मिस केरल की मौत

राइटर- शाहनवाज

पहली नवंबर, 2021 की रात के करीब डेढ़ बज रहे थे. केरल के कोच्चि शहर की पुलिस को देर रात खबर मिली कि वेटिला और पलारीवट्टम के बीच होटल ‘होलीडे इन’ के पास एक कार के पेड़ से बुरी तरह से टकरा जाने पर उस के परखच्चे उड़ गए हैं, जिस में 4 लोग सवार थे.

कोच्चि शहर की पुलिस खबर मिलते ही बिना देर किए मौकाएवारदात पर पहुंची तो देखा कि इतनी रात को एक्सीडेंट होने की वजह से आसपास इलाके के लोगों ने सड़क किनारे पड़ी उस कार को घेरा हुआ था.

पुलिस के आते ही भीड़ छट गई. पुलिस ने सब से पहले कार में मौजूद सभी 4 लोगों को एकएक कर गाड़ी से बाहर निकाला और कार सवार सभी लोगों को नजदीक के अस्पताल में भरती कराया. लेकिन कार में सवार 2 युवतियों की मौत हो चुकी थी, जबकि बाकी बचे 2 लोग बुरी तरह से जख्मी थे. इन में से एक और शख्स की मौत भी कुछ देर बाद ही इलाज के दौरान हो गई.

पुलिस ने कार में मौजूद लोगों की पहचान शुरू की तो पता चला कि इन में से एक 2019 की मिस केरल अंसी कबीर (25) थी. जबकि दूसरी उसी साल मिस केरल कंप्टीशन की रनरअप रही अंजना शाजां (24) थी. मरने वाले तीसरे व्यक्ति की पहचान अंसी के दोस्त मोहम्मद आशिक (25) के रूप में हुई. गाड़ी में मौजूद चौथा व्यक्ति जो अकेला उस हादसे में बच गया था, वह उस कार का ड्राइवर अब्दुल रहमान था.

शुरुआती छानबीन में पुलिस को गाड़ी में शराब की कुछ बोतलें मिलीं, लिहाजा पुलिस ने अंदाजा लगा लिया कि ये ड्रंकन ड्राइव का ओपन एंड शट केस है.

यानी पुलिस यह मान कर चल रही थी कि ये दोनों मौडल और उन के दोस्त शराब के नशे में थे, जो गाड़ी चला रहा था वह भी नशे में था, लिहाजा उसी हालत में कार बेकाबू हुई और सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई.

केरल के स्थानीय अखबारों और स्थानीय मीडिया में भी इस खबर को इसी तरह प्रसारित किया जा रहा था जिस से यह लग रहा था कि यह हादसा शराब के नशे में हुआ.

जिस गाड़ी में ये दोनों मौडल्स थीं, उस की तसवीरें देख कर भी ऐसा ही लग रहा था कि यह एक एक्सीडेंट ही रहा होगा. क्योंकि बिना दुर्घटना के किसी गाड़ी की ऐसी हालत नहीं हो सकती. ऊपर से गाड़ी में मिली शराब भी इसी तरफ इशारा कर रही थी.

लेकिन पुलिस के सामने सवाल यह था कि आखिर इतनी रात को अंसी और अंजना कहां जा रहे थे? हादसे को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सब से पहले नैशनल हाईवे 66 पर, जहां अंसी और अंजना की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था, पर मौजूद रास्ते के इर्दगिर्द सीसीटीवी कैमरों की छानबीन करनी शुरू कर दी.

सीसीटीवी कैमरों की छानबीन से पुलिस ने पाया कि जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था, उस की रफ्तार काफी तेज थी. लेकिन हादसे के 7 दिनों के बाद 7 नवंबर, 2021 के दिन पुलिस को कुछ ऐसे सुराग और जानकारियां हासिल हुईं, जिस से कोच्चि में सड़क हादसे में 2 मौडलों का एक्सीडेंट का मामला एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करने लगा था.

दरअसल, पुलिस को यह सूचना मिली कि उस रात को अंसी कबीर और अंजना शाजां कोच्चि के एक होटल जिस का नाम ‘नंबर 18 होटल’ था, से एक हाईप्रोफाइल पार्टी से लौट रही थीं.

यह जानने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को दोबारा से करने के लिए ‘नंबर 18 होटल’ का रुख किया. इसी के साथ ही दुर्घटना वाली रात के सीसीटीवी फुटेज को दोबारा से खंगालने का प्रयास किया गया.

सीसीटीवी फुटेज को दोबारा से देखने के बाद पुलिस को चौंका देने वाले सुराग हाथ लगा, जिस ने इस दुर्घटना को साजिश का रूप दे दिया था. उन्होंने देखा कि जिस गाड़ी में अंसी और अंजना मौजूद थे, उसी गाड़ी का पीछा 2 और गाडि़यां लगातार कर रही थीं.

यही नहीं, पुलिस ने सभी सीसीटीवी फुटेज को रिवर्स (पीछे) कर के देखा तो पाया कि अंसी और अंजना की गाड़ी के साथ वो 2 गाडि़यां भी उसी होटल से एक ही समय पर निकली थीं.

पुलिस को इस हाईप्रोफाइल मामले से जुड़े 2 अहम सुराग हाथ लगे थे, जिस की प्रामाणिकता जांचनी बाकी थी. पुलिस ने बिना समय गंवाए होटल पहुंच कर मामले की छानबीन करनी शुरू कर दी.

जब पुलिस ने होटल की सीसीटीवी फुटेज देखी तो मामला और भी संगीन और पेचीदा हो गया. पता चला कि 31 अक्तूबर की रात को अंसी, अंजना और उन के दोस्त जिस वक्त होटल में पहुंचे थे और जिस वक्त वहां से निकले थे, ठीक उसी वक्त की सारी फुटेज डिलीट की जा चुकी थीं.

क्राइम ब्रांच भी जुटी जांच में

इस से होटल प्रशासन पर पुलिस का शक गहराता चला गया. यहां से इस मामले की आगे की जांच कोच्चि क्राइम ब्रांच के हाथों सौंपी गई.

क्राइम ब्रांच की टीम ने होटल कर्मचारियों से जब इस बारे में पूछताछ की तो होटल कर्मचारियों ने मालिक रोय जोसफ व्यालात की ओर इशारा करते हुए बताया कि फुटेज मालिक के कहने पर ही डिलीट की गई थी.

क्राइम ब्रांच की टीम ने रोय जोसफ व्यालात को हिरासत में ले कर उस से इस बारे में पूछताछ की. लंबी पूछताछ के बाद 17 नवंबर को रोय जोसफ व्यालात ने क्राइम ब्रांच के सामने यह कुबूल कर लिया कि उस ने 31 अक्तूबर और पहली नवंबर की रात को साढ़े 7 बजे से रात 12 बजे तक की विडियो रिकौर्डिंग को नष्ट कर दिया है.

व्यालात ने क्राइम ब्रांच की टीम को बताया कि उस ने अपने एक होटल स्टाफ की मदद ले कर विडियो रिकौर्डिंग की हार्डडिस्क पास के थेवारु में कन्नामगट्टू ब्रिज से बहते हुए पानी में फेंक दी थी.

इस खुलासे के बाद कोच्चि पुलिस ने इंडियन नेवी, कोस्ट गार्ड और कोस्टल पुलिस की मदद से उसी जगह पर नष्ट हुई हार्डडिस्क को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की यह कोशिश कामयाब नहीं हो पाई.

इस के बाद होटल मालिक रोय जोसफ व्यालात और होटल के 5 कर्मचारियों को सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में 17 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन व्यालात ज्यादा समय तक सलाखों के पीछे नहीं रहा.

व्यालात के बड़ेबड़े राजनीतिज्ञों से संबंध होने की वजह से उसे और उस के 5 अन्य कर्मचारियों को अगले ही दिन रिहा कर दिया गया.

इन सभी के बीच अंसी और अंजना का यह मामला कहीं न कहीं उलझता ही जा रहा था. कोच्चि क्राइम ब्रांच के सामने कई सवाल थे, जिन का खुलासा करना जरूरी था. जैसेजैसे इस मामले की परतें पुलिस और क्राइम ब्रांच के सामने खुलती जाती, वैसेवैसे पुलिस खुद को चारों ओर से घिरा हुआ महसूस करती.

कौन थी मिस केरल

साल 2019 में मिस केरल का खिताब हासिल करने वाली 25 वर्षीय अंसी कबीर केरल के त्रिवेंद्रम की रहने वाली थी. अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, अंसी ने कजाकुट्टम के मैरियन कालेज से इलैक्ट्रौनिक संचार में स्नातक की पढ़ाई की थी.

अपने कालेज के दिनों के बाद अंसी ने दिसंबर 2019 में मिस केरल प्रतियोगिता में भाग लिया था. खिताब जीतने के बाद वह शूटिंग और उस से संबंधित अन्य गतिविधियों में बहुत व्यस्त हो गई थी.

अंजना शाजां ने साल 2019 के मिस केरल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया था. अंजना का जन्म हैदराबाद में हुआ था. हैदराबाद के श्री चैतन्य जूनियर कालेज से ग्रैजुएशन की पढ़ाई के बाद अंजना ने केरल के केएमसीटी आयुर्वेद मैडिकल कालेज से मैडिकल की पढ़ाई की और डाक्टर बन गई.

अंजना को 2019 के मिस केरल कंपीटीशन में ‘मिस फोटोजेनिक’ और ‘मिस ब्यूटीफुल स्माइल’ के खिलाब से नवाजा गया था. यही नहीं, अंजना ने ‘सीवन सीपी’ नाम की मलयालम फिल्म में काम कर के फिल्म इंडस्ट्री में कदम भी रखा था.

ये दोनों ही मौडल एकदूसरे की बेहद अच्छी दोस्त थीं. दोनों की दोस्ती मिस केरल प्रतियोगिता के दौरान हुई और देखते ही देखते दोनों अच्छी दोस्त बन गई थीं. जब दोनों की मौत हुई थी तब यह बताया गया था कि दोनों कोच्चि के एक होटल में पार्टी कर के लौट रहीं थीं.

यह हादसा था या सुनियोजित हत्या

इन की कार में कुल 4 लोग थे. बताया जा रहा है कि जब ये कार से लौट रही थीं तभी इन की गाड़ी के सामने कोई बाइक वाला आ गया, जिसे बचाने में उन की कार बेकाबू हो कर पेड़ से टकरा गई थी.

पुलिस और क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुट गई कि होटल में दोनों मौडल के साथ क्या हुआ? जिस होटल में पार्टी करने दोनों मौडल आई थीं, वहां ऐसा क्या हुआ, जिस के बाद अचानक ये घटना हुई जिस में दोनों की मौत हो गई. बताया जाता है कि जिस होटल में पार्टी थी, उस से जुड़े एक शख्स के लिंक ड्रग पेडलर से ले कर कई बड़े नेताओं और अभिनेताओं से हैं.

इस होटल में जो पार्टी हुई थी उसे क्लब 18 का नाम दिया गया था. इस में खासकर युवा देर रात तक पार्टी करते थे. जबकि कोच्चि में लेटनाइट पार्टी और ड्रग्स पर हर तरीके से रोक है.

लेकिन इस होटल में बड़े रसूख के चलते पार्टी होती है. उस रात भी वहां पार्टी हुई थी लेकिन उस के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया था.

बताया जाता है कि दोनों मौडल की होटल में एंट्री करने से ठीक पहले के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट किया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कौन सा राज था, जिस की वजह से फुटेज को हटाया गया?  होटल में दोनों मौडल के साथ ऐसा क्या हुआ था जिस के बाद दोनों का होटल से निकलते ही पीछा किया जाने लगा?

ऐसे में माना जा रहा है कि कहीं होटल में हुई किसी घटना को छिपाने के लिए दोनों मौडल की साजिश के तहत हत्या तो नहीं कराई गई? अब इस एंगल से भी क्राइम ब्रांच की टीम जांच कर रही थी.

एक्टर और ड्रग पेडलर की भूमिका पर सवाल

पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि दोनों मौडल यानी अंसी कबीर और अंजना शाजां को उस रात पार्टी के बाद एक और पार्टी के लिए औफर किया गया था. ये औफर था वीआईपी लोगों के साथ आफ्टर पार्टी का. इस पार्टी का औफर साउथ की फिल्मों के एक मशहूर हीरो और होटल से जुड़े एक शख्स ने दिया था. इन के साथ में एक ड्रग पेडलर और औडी कार का ड्राइवर भी था जिस का नाम सैजू थांकचन है. उसी ने दोनों मौडल को आफ्टर पार्टी करने का औफर दिया था.

उस ने बताया था कि उस पार्टी में वीआईपी लोग शामिल होंगे. उस में एक्टर समेत कई नेता भी रहेंगे. लेकिन होटल में हुई कुछ बातों को ले कर दोनों मौडल ने आफ्टर पार्टी में जाने से सीधे मना कर दिया था.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसी बात क्या थी, जिस की वजह से दोनों ने आफ्टर पार्टी में जाने से इनकार किया? साउथ फिल्मों के एक मशहूर अभिनेता की बातों को भी नजरअंदाज किया? इस की क्राइम ब्रांच जांच कर रही है.

हादसा था तो पीछा कर रहे लोगों ने सूचना क्यों नहीं दी? पुलिस की जांच में यह पता चला है कि जिस रूट से दोनों मौडल की कार त्रिशुर की तरफ जा रही थी, उन रास्तों के कई सीसीटीवी फुटेज देखे गए.

इस दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों मौडलों का 2 कारों से पीछा किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि उन दोनों कारों में से एक में साउथ का वही हीरो और दूसरे में होटल से जुड़ा शख्स था.

देर रात में जब हादसा हुआ तब उस समय मौजूद रहे प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ में और भी चौंकाने वाली बात सामने आई है. उस में यह पता चला है कि हादसे के बाद जब उस में सवार अंसी कबीर और अंजना दोनों गंभीर रूप से घायल थीं तब पीछा कर रहे कार वाले रुके भी थे.

उन में से कुछ लोग कार से बाहर निकल कर घटनास्थल तक आए थे. लेकिन उन दोनों ने इन की कोई मदद नहीं की और न ही पुलिस को सूचना दी.

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ये महज सड़क हादसा था तो पीछा करने वालों ने इस की सूचना पुलिस को दी क्यों नहीं? आखिर ऐसी क्या साजिश थी, जिसे अभी तक छिपाया जा रहा है? बहरहाल, कथा लिखने तक पुलिस इस केस की जांच में जुटी हुई थी.

Cubicles Season 2 Review: कारपोरेट जगत में काम करने वालों की कशमकश

रेटिंगः 3 स्टार

निर्माताः टीवीएफ

निर्देशकः चैतन्य कुंभकोणम

कलाकार:अभिषेक चौहाण, बद्री चौहाण, अभिषेक पांडे, शिवांकित परिहार, सोनू आनंद, निकेतन शर्मा,  प्रतीश मेहता, जैमिनी पाठक, अशीश गुप्ता, खुशबू बैद, आयुषी गुप्ता, निधि बिस्ट, विद्या पटेल व अन्य.

अवधिः लगभग तीस से 36 मिनट के पांच एपीसोड, कुल दो घंटे 42 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः सोनी लिव

क्युबिकल्स’ के पहले सीजन के बाद कोरोना महामारी के चलते ‘वर्क फ्राम होम’चल रहा था, अब धीरे धीरे लोग आफिस जाने लगे हैं.

कहानीः

यूं तो दूसरे सीजन की कहानी वहीं से शुरू होती है,जहां पहले सीजन की कहानी खत्म हुई थी. लेकिन अब पीयूष का पुराना रूममेट कल्पेश चला गया है और अब उसका सहकर्मी गौतम (बद्री चव्हाण) उसका नया रूममेट है. ऐसा लग रहा था कि गौतम ने नए सीजन में पीयूष के साथ जगह बदल ली है, क्योंकि वह पीयूष को क्रैक करने की कोशिश कर रहा है और पीयूष को समय पर बिलों का भुगतान करने की याद दिलाता रहता है.

पुणे में पीयूष प्रजापति (अभिषेक चौहाण) को एक बड़ी आई टी कंपनी ‘‘सायनोटेक’ में अच्छी नौकरी मिल गयी है, लेकिन सैलरी थोड़ी कम है. फिर भी वह खुश है कि उसे बड़ी कंपनी मे उसे काम करने का मौका मिल रहा है, लेकिन जब पीयूष को उसकी कंपनी के बडे़ अफसरों व एचआर की तरफ से दबाव पड़ने लगता है, तो उसके जीवन में समस्याएं पैदा होने लगती हैं. वह दूसरी कंपनी में नौकरी के लिए कोशिश शुरू करता है.

पीयूष प्रजापति (अभिषेक चौहाण) की अपनी कहानी के साथ दूसरे किरदारों की कहानी भी चल रही है. पीयूष की बॉस मेघा अस्थाना (निधि बिष्ट) काम व निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ शेट्टी (निकेतन शर्मा) पिता बनने की दिशा में है और उसे पैटर्निटी लीव चाहिए. गौतम को जीवन साथी की तलाश है. जबकि नई भर्ती हुई सुनयना चौहाण (आयुषी गुप्ता) ‘छोड़ना मत चौहाण’ रटते हुए हर किसी का गला काटकर खुद आगे बढ़ने में यकीन करती है, पर अंततः पीयूष उसका हृदय परिवर्तन करता है.

एक एपीसोड में पीयूष कहते हैं कि एक कर्मचारी और एक संस्था के बीच तीन तरह के रिश्ते होते हैं.

हुकअप- जब कोई कर्मचारी एक माह के भीतर त्यागपत्र देता है.

विलंबित हुकअप – जब मामला 4-6 माह तक खिंचता है. लेकिन जब रिश्ता लंबा चलता है तो वह शादी जैसा होता है. इसीलिए अब पीयूष एक विवाहेत्तर संबंध की तलाश में है. वैसे भी वह अपनी वेतन वृद्धि से खुश नहीं है. लेकिन उसकी दुविधा यह है कि वह तीस प्रतिशत बढ़ी सैलरी के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा व ‘सर ’,‘मैम’ के साथ अपने उच्चाअधिकारियों के साथ बात करने वाली कंपनी में जाए अथवा कम सैलरी के बावजूद वहां काम करे जहां उसने दोस्त बनाए हैं और उच्चाधिकारी अपनेपन के माहौल में काम करते हैं.अंततः वह क्या चुनते हैं इसके लिए ‘क्यूबिकल्स एस 2’ देखना ही उचित होगा.

लेखन व निर्देशनः

निर्देशक की हास्य व ह्यूमर के साथ कथा कथन शैली काफी रोचक है.दर्शक बोर नही होता.इसमें इस बात को रेखंाकित किया गया है कि हर क्यूबिकल एक जैसा लगने के बावजूद कर्मचारियों द्वारा एक ही तरह का काम करने के साथ ही हर कर्मचारी अलग-अलग आकांक्षाओं और पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है.निर्देशक चैतन्य कुंभकोणम कारपोरेट जगत में लोगों के सुबह नौ से षाम पांच बजे तक के जीवन को यथार्थ परक ढंग से चित्रित करने में सफल रहे हैं.वहीं उन्होने

कारपोरेट जगत में गला काट प्रतिस्पर्धा और अनैतिकता की परतों को बाखूबी चित्रित किया है. पर बीच बीच में दिलीप उर्फ आरडी एक्स की बातों व पीयूष के मन की बातों से जिस तरह का उपदेश परोसा गया है, उससे लोग सहमत नही हो सकते. इसे इस वेब सीरीज की कमजोरी समझी जा सकती है.मेघा के किरदार व उसकी कामकाजी व निजी जिंदगी के बीच के कश्मकश पर और अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था. सुनयना चौहाण का किरदार ठीक से नही लिखा गया. इस पर लेखक व निर्देशक दोनो को मेहनत करनी चाहिए थी, पर लेखक व निर्देशक का ध्यान केवल पीयूष पर ही केंद्रित रहा.

अभिनयः

अभिषेक चौहाण ने पीयूष प्रजापति के किरदार को अपने अभिनय से जीवंतता प्रदान की है. उन्होंने पीयूष को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया है. तो वहीं पीयूष की बॉस मेघा के किरदार में निधि बिस्ट ने कमाल का अभिनय किया है. अन्य कलाकारों का अभिनय ठीक ठाक है.

एक्वेरियम में ऐसे रखें रंगीन मछली

डा. सुबोध कुमार शर्मा, विकास कुमार उज्जैनियां,

डा. बीके शर्मा और डा. नेमीचंद उज्जैनियां

एक्वेरियम में रंगीन मछलियों को रखना और उस का पालन एक दिलचस्प काम है, जो न केवल घर की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि मन को भी शांत करता है. रंगीन मछलियां व एक्वेरियम व्यवसाय स्वरोजगार के जरीए पैसे बनाने के मौके भी मुहैया कराता है.

दुनियाभर में 10-15 फीसदी वार्षिक वृद्धि दर के साथ रंगीन मछलियों व सहायक सामग्री का कारोबार 8 बिलियन डौलर से ज्यादा का है. इस में भारत की निर्यात क्षमता 240 करोड़ रुपए प्रति वर्ष है. दुनियाभर की विभिन्न जलीय पारिस्थितिकी से तकरीबन 600 रंगीन मछलियों की प्रजातियों की जानकारी हासिल है.

भारत सजावटी मछलियों के मामले में 100 से ऊपर देशी प्रजातियों के साथ बहुत ज्यादा संपन्न है. साथ ही, विदेशी प्रजाति की मछलियां भी यहां पैदा की जाती हैं. शहरों व कसबों में रंगीन मछलियों को एक्वेरियम में रखने का प्रचलन दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है.

रंगीन मछलियों को शीशे के एक्वेरियम में पालना एक खास शौक है. रंगबिरंगी मछलियां बच्चे व बूढ़े सभी का मन मोह लेती हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि रंगीन मछलियों के साथ समय बिताने से ब्लडप्रैशर कंट्रोल में रहता है और दिमागी तनाव कम होता है.

आजकल एक्वेरियम को घर में सजाना लोगों का एक प्रचलित शौक हो गया है. रंगीन मछलियों के पालन व एक्वेरियम बनाने की तकनीकी जानकारी से अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है.

बहुरंगी मछलियों  की प्रजातियां

देशी और विदेशी मीठे जल की बहुरंगी मछलियों की प्रजातियों की मांग ज्यादा रहती है. व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उन का प्रजनन और पालन भी आसानी से किया जा सकता है. व्यावसायिक किस्मों के तौर पर आसानी से उत्पादन की जा सकने वाली रंगीन मछलियों की प्रजातियां निम्न हैं :

बच्चे देने वाली मछलियां

गप्पी (पोयसिलिया रेटिकुलेटा), मोली (मोलीनेसिया स्पीशिज) और स्वार्ड टेल (जीफोफोरस स्पीशिज).

अंडे देने वाली मछलियां

गोल्ड फिश (कैरासियस ओराट्स), कोई कौर्प (सिप्रिनस कौर्पियो की एक किस्म), जैब्रा डेनियो (ब्रेकिडेनियो रेरियो), ब्लैक विडो टैट्रा (सिमोक्रो-सिंबस स्पीशिज), नियोन टैट्रा (हीफेसो-ब्रीकोन इनेसी), सर्पी टैट्रा (हाफेसोब्रीकौन कालिसट्स) व एंजिल वगैरह.

एक्वेरियम तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री

एक्वेरियम तैयार करने के लिए निम्न सामग्री की जरूरत होती है :

  1. 5-12 एमएम की मोटाई का फ्लोट गिलास नाप के मुताबिक कटा हुआ.
  2. एक्वेरियम के सही आकार का ढक्कन,
  3. जरूरत के मुताबिक और मजबूत तकरीबन 30 इंच ऊंचाई वाला स्टैंड,
  4. सिलिकौन सीलेंट,
  5. पेस्टिंग गन,
  6. छोटेछोटे रंगबिरंगे पत्थर,
  7. जलीय पौधे (कृत्रिम या प्राकृतिक),
  8. एक्वेरियम के बैकग्राउंड के लिए रंगीन पोस्टर,
  9. सजावटी खिलौने व डिफ्यूजर स्टोन,
  10. थर्मामीटर व थर्मोस्टेट,
  11. फिल्टर उपकरण,
  12. एयरेटर व वायु संचरण की नलिकाएं,
  13. क्लोरीन फ्री स्वच्छ जल,
  14. रंगीन मछलियां पसंद के मुताबिक,
  15. मछलियों का भोजन जरूरत के अनुसार,
  16. हैंड नैट,
  17. बालटी,
  18. मग व साइफन नलिका,
  19. स्पंज वगैरह.

एक्वेरियम कहां रखें?

एक्वेरियम रखने की जगह समतल होनी चाहिए और धरातल मजबूत होना चाहिए. लोहे या लकड़ी के बने मजबूत स्टैंड या टेबल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां एक्वेरियम रखना है, वहां बिजली का इंतजाम भी जरूरी है. ध्यान रहे कि एक्वेरियम पर सूरज की सीधी रोशनी न पड़े, वरना उस में काई जमा हो  सकती है.

एक्वेरियम कैसा हो?

एक्वेरियम को खुद बनाने में सावधानी की जरूरत होती है. पौलिश किए हुए शीशे की प्लेट को सीलेंट से जोड़ कर आप एक्वेरियम बना सकते हैं.

बाजार में मुहैया एक्वेरियम विक्रेता से अपनी पसंद का एक्वेरियम भी खरीद सकते हैं. आमतौर पर घरों के लिए एक्वेरियम 60×30×45 सैंटीमीटर लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई की मांग ज्यादा रहती है. शीशे की मोटाई  5-6 मिलीमीटर होनी चाहिए. इस से बड़े आकार का एक्वेरियम बनाने के लिए मोटे शीशे का इस्तेमाल करना चाहिए.

एक्वेरियम को ढकने के लिए फाइबर या लकड़ी के बने ढक्कन को चुन सकते हैं. ढक्कन के अंदर एक बल्ब व ट्यूबलाइट लगी होनी चाहिए. 40 वाट के बल्ब की रोशनी एक साधारण एक्वेरियम के लिए सही है.

एक्वेरियम को कैसे सजाएं?

एक्वेरियम को खरीदने के बाद उसे सजाने से पहले अच्छी तरह साफ  कर लेना चाहिए. साफ करने के लिए साबुन या तेजाब का इस्तेमाल न करें. एक्वेरियम को रखने की जगह तय कर के उसे एक मजबूत स्टैंड पर रखना चाहिए. एक्वेरियम के नीचे एक थर्मोकौल शीट लगानी चाहिए. इस के बाद पेंदे में साफ बालू की

1-2 इंच की मोटी परत बिछा देते हैं और उस के ऊपर छोटेछोटे पत्थर की एक परत बिछा दी जाती है.

पत्थर बिछाने के साथ ही थर्मोस्टेट, एयरेटर व फिल्टर को भी लगा दिया जाता है. एक्वेरियम में जलीय पौधे लगाने से टैंक खूबसूरत दिखता है.

बाजार में आजकल तरहतरह के कृत्रिम पौधे मुहैया हैं. एक्वेरियम को आकर्षक बनाने के लिए तरहतरह के खिलौने अपनी पसंद से लगाए जा सकते हैं.

एक्वेरियम में भरा जाने वाला पानी क्लोरीन से मुक्त होना चाहिए, इसलिए यदि नल का पानी हो तो उसे कम से कम एक दिन संग्रह कर छोड़ देना चाहिए और फिर उस पानी को एक्वेरियम में भरना चाहिए.

एक्वेरियम में कितनी मछलियां रखें?

एक्वेरियम तैयार कर अनुकूलित करने के बाद उस में अलगअलग तरह की रंगबिरंगी मछलियां पाली जाती हैं. रंगीन मछलियों की अनेक प्रजातियां हैं, पर इन्हें एक्वेरियम में एकसाथ रखने के पहले जानना जरूरी है कि यह एकदूसरे को नुकसान न पहुंचाएं.

छोटी आकार की मछलियां रखना एक्वेरियम के लिए ज्यादा बेहतर माना जाता है, जिन के नाम निम्नलिखित हैं:

ब्लैक मोली, प्लेटी, गप्पी, गोरामी, फाइटर, एंजल, टैट्रा, बार्ब, औस्कर,  गोल्ड फिश.

इन मछलियों के अतिरिक्त कुछ देशी प्रजातियां हैं, जिन को भी एक्वेरियम में रखा जाने लगा है. जैसे लोच, कोलीसा, चंदा, मोरुला वगैरह. आमतौर पर 2-5 सैंटीमीटर औसतन आकार की 5-10 मछलियां प्रति वर्गफुट जल में रखी जा सकती हैं.

एक्वेरियम प्रबंधन के लिए जरूरी बातें

थर्मोस्टेट द्वारा पानी का तापमान 240 सैल्सियस से 280 सैल्सियस के बीच बनाए रखें. 8-10 घंटे तक एयरेटर द्वारा वायु प्रवाह करना चाहिए. पानी साफ रखने के लिए मेकैनिकल व जैविक फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए.

एक्वेरियम में उपस्थित अनावश्यक आहार, उत्सर्जित पदार्थों को प्रति सप्ताह साइफन द्वारा बाहर निकालते रहना चाहिए. कम हुए पानी के स्थान पर स्वच्छ पानी भरना चाहिए.

यदि कोई मछली मर जाती है, तो उसे तुरंत निकाल दें और यदि कोई मछली बीमार हो, तो उस का उचित उपचार भी करना चाहिए.

एक्वेरियम कारोबार से अनुमानित आमदनी

रंगीन मछलियों के पालन व एक्वेरियम निर्माण से अच्छी आमदनी की जा सकती है. इस के लिए मुख्यत: निम्न आयव्यय का विवरण दिया जा रहा है. समय, जगह व हालात में इस में बदलाव हो सकता है :

स्थायी लागत

शैडनैट (500 वर्गफुट), छायादार जगह (100 वर्गफुट), फाइबर व सीमेंट की टंकियां (10-15), एयर कंप्रैसर और वायु नलिकाएं, औक्सीजन सिलैंडर-1, विद्युत व जल व्यवस्था व अन्य खर्च 1,25,000 रुपए.

कार्यशील पूंजी

शिशु मछलियां (6,000), प्रबंधन खर्च, बिजली, पानी, मत्स्य आहार, एक्वेरियम निर्माण व सहायक सामग्री, स्थायी लागत पर ब्याज व अन्य खर्चे 1,65,000 रुपए.

आय

मछलियां (10,000 × 20 रुपए), एक्वेरियम टैंक व सहायक सामग्री (120 × 2500 रुपए), बेचे गए एक्वेरियम टैंकों की वार्षिक मेंटेनैंस 1200 रुपए टैंक, कुल आय तकरीबन रुपए 5,80,000-6,40,000 रुपए, शुद्ध आय तकरीबन 3,55,000 से 4,15,000 रुपए प्रति वर्ष हासिल की जा सकती.

मेरी ब्रैस्ट पर स्ट्रैच मार्क्स हो गए हैं, इन्हें हटाने का कोई घरेलू उपाय बताएं?

सवाल

मैं 22 वर्षीय युवती हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरी ब्रैस्ट पर स्ट्रैच मार्क्स हो गए हैं, जो बहुत बुरे दिखते हैं. कृपया इन्हें हटाने का कोई घरेलू उपाय बताएं?

जवाब

शरीर के किसी भी हिस्से पर स्ट्रैच मार्क्स होने का मुख्य कारण वजन का तेज गति से बढ़ना या घटना होता है. आमतौर पर ऐसा किशोरावस्था, प्रैगनैंसी या बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने के कारण होता है. शुरू में ये रैडिश या पर्पलिश दिखते हैं. इन्हें पूरी तरह से हटाया जाना कठिन होता है, लेकिन धीरेधीरे हाइड्रेशन थेरैपी व ऐक्सरसाइज द्वारा इन्हें हलका किया जा सकता है.

घरेलू उपाय के तौर पर आप ऐलोवेरा जैल से स्ट्रैच मार्क्स पर मसाज करें. इस के अलावा शिया या कोकोनट बटर को भी प्रभावित त्वचा पर लगा सकती हैं इस से स्किन हाइडे्रट होगी व स्ट्रैच मार्क्स धीरेधीरे हलके हो जाएंगे.

नीबू का रस भी अपनी ऐसिडिक प्रौपर्टीज के कारण स्ट्रैच मार्क्स को हलका करने में मदद करता है. नीबू के रस से स्ट्रैच मार्क्स पर 10-15 मिनट सर्कुलर मोशन में मसाज करें. बाद में धो लें. लाभ होगा.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

देश में बढ़ती बेरोजगारी

जब देश में बेरोजगारी बढ़ रही हो, छोटे धंधों का सफाया हो रहा हो. किसानों की आमदनी रोजाना घट रही हो, बिमारी का खौफ बढ़ रहा हो, हमारे प्रधानमंत्री क्या कर रहे हैं. काशी कौरीडोर और प्रयागराज के हाईवे का पत्थर रख रहे हैं. यह वैसा ही है जब घर में सब बिमार पड़ रहे हों, फसल पानी न होने की वजह से सूख रही हो, बेटा जेल में मारपीट के अपराध में बंद हो और बाप अपनी जिम्मेदारी निभाने के नाम पर 20 दिन पैदल चलकर एक मंदिर में पूजा करने जा पहुंचा हो कि भगवान अब भला करेंगे.

देश की सरकार को आजकल सिवाए आरतियां करने, तीर्थ बनाने और उपदेश देने के अलावा मानो कुछ और आता ही न हो. एक किसान डरता है कि उसे 20 बीधे के खेत के लिए किनी रातें जाग कर काम करना होता है पर यहां ऊंचे नेता हो या छोटे अफसर सब पूजापाठ में लग कर देश की नैया पार कराने में लगे हैं.

सरकार चल रही है क्योंकि देश के किसान मजदूर और छोटे कारखाने वाले अपने जीने का जुगाड़ करने के लिए रात दिन लगे रहते हैं. उन्हें सरकार बहुत मोटा टैक्स बसूलती है. लोगों को कहा जाता है कि किसान तो मुफ्त का अनाज पा रहे हैं, सस्ती बिजली लीेते हैं, उन्हें मुफ्त में सडक़ें बिना जाती हैं. मजदूरों को कहते हैं कि वे तो नशा करने पड़े रहते हैं. छोटे कारखानेदारों पर टैक्स चोरी के इत्जाम ज्यादा लगते हैं, उन की मेहनत के फायदे, कम गिनाए जाते हैं.

यह सब साजिश है ताकि बड़े नेता अपना निकम्मापन छिपा सकें. इस निकम्मेपन को छिपाने के लिए वे मंदिरों का राग अलापते हैं, आज यहां मंदिर में कल वहां मठ में, परसों उस स्वामी के चरणों में, उस के पहले दिन उस मूॢत पर मालाएं. दिन में 4 बार कपड़े बदलने की फुरसत है पर किसान और मजदूर पास भी न फटकें क्योंकि समय नहीं है. देश के किसान साल भर दिल्ली की सडक़ों पर पड़े रहे, 80′ के करीब की मौत हो गई पर एक बोल बोलने का समय नहीं है. यहां तक कि संसद में जाने का भी समय नहीं है जहां सारे फैसले कहने को लिए जाते हैं. जिस को सुनाने के लिए गैर भाजपाई दलों के सांसद बोलते है वह ही कहीं भगवान से प्रार्थना कर रहा है तो क्या फायदा है ऐसी संसद का?

देश का आम आदमी ऐसी सरकार चाहता है जो राज न करे, देश के धंधों, खेतों, सडक़ों, कानून, पुलिस को चलवाए. देश का आम आदमी हो सकता है. पूजापाठी को देख कर खुश हो जाए पर कहीं ऐसा न हो जैसा सोमनाथ मंदिर पर हमले के समय हुआ था. उस का जो इतिहास मुसलिम इतिहासकारों ने लिख कर उस के हिसाब से मंदिर को बचाने के लिए मंदिर के पुजारी घंटे घडिय़ाल बजा रहे थे कि भगवान खुद आकर महमूद गजनी को खत्म कर देंगे. मगर कुछ हुआ नहीं.

आज फिर दोहराया जा रहा है. पहले मार्च 2020 में दिन में कोरोना पर जीत की घोषणा कोरोना आने से पहले कर डाली गई, फिर जनवरी 21 में कह दिया कि भारत ने जीत पा ली. दोनों बार कितना सहा है. देश में यह हर कोई जानता है. कोई पूजापाठ घंटा घडिय़ाल काम नहीं आया. आज जो काम दिख रहे हैं वे मेहनत की कमाई को धर्म के लाभ पर लुटाना भर है. क्योंकि धर्म का नशा नेताओं में भी और जनता की भी नसों में मंदिर तक भरा है. इसलिए कुछ की तो वाहवाही मिलती रहेगी, जब तक ममता बैनर्जी और स्टालिन सा सामने न होगा.

नई भर्तियों से मजबूत होगा स्वास्थ्य विभाग ढाँचा

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पिछले पौने पांच वर्षों में साढ़े चार लाख सरकारी नौकरियां देकर अपना संकल्प पूरा किया.  कोविड 19 महामारी के दौरान भी योगी का मिशन रोज़गार धीमा नहीं पड़ा. समय की ज़रुरत के अनुसार स्वास्थ्य  विभाग के खाली पद भर कर  स्वास्थ्य   इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत किया.

स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे को  सुदृढ़ बनाने की दिशा में उ. प्र. लोक सेवा आयोग का बड़ा योगदान रहा जिसने अन्य विभागों के साथ साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा में समयबद्ध , निष्पक्ष और त्वरित तरीके से भर्तियां करके नागरिकों को राहत दी.  सार्वजनिक हित को दृष्टिगत रखते हुए, उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से सम्बन्धित पदों का चयन जल्द से जल्द वरीयता के आधार किया  जिससे चुने गए अभ्यर्थी शीघ्रातिशीघ्र अपने नियत पदों पर दायित्व संभाल सके. इस क्रम में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, शुचिता और पारदर्शिता को अक्षरशः सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध कार्यवाही की गयी .

इस क्रम में एलोपैथिक चिकित्साधिकारी (श्रेणी-2) के 15 संवर्गों के 3620 पदों पर चयन सम्बन्धी कार्यवाही का विज्ञापन आयोग द्वारा 28.05.2021 को जारी किया गया जिसमें आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 28 जून थी.  त्वरित कार्यवाही करते हुए आयोग ने अंतिम तिथि के एक महीने में अभ्यर्थियों का साक्षात्कार प्रारम्भ कर दिए. लगभग ढाई महीने मात्र में समस्त संवर्गों के लिए साक्षात्कार पूरे कर लिए गए.  साक्षात्कार समाप्त होने की तिथि 07.10.2021 थी लेकिन उससे पहले ही साक्षात्कार प्रारंभ होने के महीने भर से पहले ही प्रथम दो संवर्ग पीडियाट्रिक्स / एनेस्थेटिस्ट के परिणाम 18 अगस्त , 2021 को जारी कर दिए गए.  यही नहीं, समस्त संवर्गों का अंतिम परिणाम साक्षात्कार समाप्त होने के महीने भर के अंदर ही दिनांक 2.11. 2021 तक जारी कर दिया गया.

इस प्रकार युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए प्राथमिकता के आधार पर एलोपैथिक चिकित्सा विशेषज्ञों के 15 संवर्गों यथा पीडियाट्रिशियन, एनेस्थेटिस्ट फिजिशियन, पैथालाजिस्ट इत्यादि के 3620 पदों पर चयन हेतु 4062 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार सम्पन्न किया गया. लगभग चार माह में 1237 अभ्यर्थियों को चयन के लिए उपयुक्त पाया गया.

इसके अतिरिक्त चिकित्सा विभाग के अन्य संवर्गों यथा स्टेटीशियन कम प्रवक्ता, सहायक आचार्य पैथालाजी, कम्युनिटी मेडिसिन साइक्रियाटिक तथा एनेस्थीसिया के लगभग 82 पदों का परिणाम जारी किया गया तथा एम. ओ. एच. सह सहायक आचार्य के 05 तथा सहायक आचार्य, ब्लड बैंक के 15 पदों का भी साक्षात्कार सम्पन्न हो चुका है. उक्त पदों का परिणाम इसी सप्ताह जारी कर दिया जायेगा जबकि सहायक आचार्य के शेष पदों पर यथाशीघ्र साक्षात्कार कराने की कार्यवाही की जा रही है.

कोविड महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पारदर्शिता, निष्पक्षता सुनिश्चित रखते हुए अपनी गतिशीलता को और आगे बढ़ाया है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उ.प्र. के अंतर्गत स्टाफ नर्स / सिस्टर (ग्रेड-2) (महिला एवं पुरुष) के 4743 पदों का विज्ञापन 16 जुलाई को जारी किया गया. आवेदन के लिए एक माह का समय दिया गया और मात्र डेढ़ मास में तीन अक्टूबर को लिखित परीक्षा आयोजित कर दी गई.उक्त पदों का निम्नवत् श्रेणियों में अंतिम चयन परिणाम औपबंधिक रूप से निम्नवत जारी कर दिया गया है

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 2582 पदों ( 50 पुरुष एवं 2532 महिला) के सापेक्ष 50  पुरुष तथा 1627 महिला अभ्यर्थी चयनित चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के 1235 पदों ( 90 पुरुष एवं 1145 महिला) के सापेक्ष 90 पुरुष तथा 623 महिला अभ्यर्थी चयनित के. जी. एम. यू. के 926 पदों ( 46 पुरुष एवं 880 महिला) के सापेक्ष 46 पुरुष तथा 578 महिला अभ्यर्थी चयनित

उपरोक्त तीनों श्रेणियों में कुल 3014 अभ्यर्थी चयनित हुए

आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक न पाने के कारण 1729 पद भर नहीं सके.आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने बताया कि विज्ञापन जारी होने के लगभग पांच  माह में ही स्टाफ नर्स के 4743 पदों पर चयन की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूर्ण की गयी जो अपने आप में एक प्रेरणास्पद मानदण्ड है. उन्होंने इसके लिए आयोग कार्मिकों की प्रतिबद्धता और संकल्प और आयोग की कार्य संस्कृति को सराहा जिन्होंने कोविड 19 महामारी की अवधि में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृह बनाए रखने के लिए राष्ट्रहित में अपना योगदान किया. उन्होंने बताया कि स्टाफ नर्स (पुरुष) की शेष 448 रिक्तियों का विज्ञापन भी  इसी माह जारी कर दिया जायेगा .

नेहा और साइबर कैफे

राइटर- सुप्रिया शर्मा

नेहा (बदला हुआ नाम, न भी बदला हो तो कहना ऐसा ही पड़ता है, कोर्ट की रूलिंग आड़े आती है) ने तय किया कि वो भी इंटरनेट सीखे. जरूरी था. बाकि सहेलियां ईमेल का जिक्र किया करती थीं. एमएसएन, याहू के किस्से सुनाया करती थीं. जब भी कहीं उसके सर्किल में कोई याहू मैसेंजर या रैडिफ चैट की बातें करता, वो कोफ्त खाती. आखिर उसे ये सब क्यों नहीं पता.

नेहा ने तय किया वो भी इंटरनेट सीखेगी. उसका भी ऑरकुट पर अकाउंट होगा. सन् 2000 के शुरुआती समय में साईबर कैफे में जाकर एक बंद से कैबिन में 80 रुपए घंटा, 50 रुपए आधा घंटा के हिसाब से इंटरनेट सर्फिंग करना शगल हो चला था. नेहा ने कॉलेज के पास वाले साइबर कैफे में 50 रुपए दिए और आधे घंटे के लिए सिस्टम पर जा बैठी. इंटरनेट एक्सप्लोरर खुला हुआ था. पर करना क्या है उसे कुछ समझ नहीं आया. आज का बच्चा बच्चा कह सकता है कि जो न समझ आए, गूगल से पूछलो.. या यू ट्यूब पर देख लो कि हाऊ टू यूज इंटरनेट फर्स्ट टाइम. पर वो वक्त ऐसा न था. जिसने कभी इंटरनेट नहीं चलाया हो कम से कम एक बार तो कोई बताने वाला होना चाहिए न..

नेहा को लगा, 50 रुपए बर्बाद हो गए. उसे कुछ परेशान होता देख, साइबर कैफे मालिक ने कहा- ‘कोई दिक्कत तो नहीं?’ तकरीबन 24-25 साल के इस गुड लुकिंग गाय को नेहा ने बताया, ‘इंटरनेट सीखना है’. राहुल (सायबर कैफे ऑनर) ने कहा- ‘बस इतनी सी बात. दोपहर 2 से 2.30 नीचे बेसमेंट में आ जाओ. सात दिन की क्लास है. ‘और फीस’ नेहा ने सवाल किया. ‘3 हजार रुपए है, पर आपको 50 परसेंट डिस्काउंट.’

‘मतलब कि मुझे 1500 रुपए देने पड़ेंगे. और अगर सात दिन न आना हो, दो-तीन दिन ही…’ नेहा के ये कहते ही राहुल ने कहा- ‘आप 1000 रुपए दीजिए.. दो या तीन दिन, जब तक सीखना हो सीखो.’ नेहा ने कंप्यूटर स्क्रीन की विंडो मिनिमाइज की और चेयर से उठ खड़ी हुई. बोली- ‘थैंक्स. कल आती हूं 2 बजे. फीस कल ही दूंगी.’ ‘आराम से, कोई जल्दी नहीं है’ राहुल ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.

नेहा ठीक 1.55 पर साइबर कैफे के बेसमेंट में कॉपी पैन लेकर मोर्चा संभाल चुकी थी. उसके साथ कोई आठ दस लड़के लड़कियां उस बैच में थे. राहुल ने कंप्यूटर जेंटली ऑन करने, मॉनिटर ऑन करने से लेकर ब्रॉडबेंड आइकन को क्लिक कर मॉडम में नंबर डाइलिंग से शुरुआत की.. और इंटरनेट चलाने के बेसिक्स बताए. आधे घंटे की क्लास शानदार रही. जाते-जाते काउंटर पर राहुल को हजार रुपए दिए और कहा- ‘ये लीजिए फीस.’ राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘ऊं…. अभी नहीं. पहले सीख लो.. फिर दे देना.’ नेहा सरप्राइज थी. उसने मुस्कुरा कर पैसे जींस की जेब में रख लिए. पहले दिन की क्लास से वो उत्साहित थी. इंटरनेट एक्सप्लोरर नाम के नए दोस्त से हुए इंट्रो ने घर तक के पूरे रास्ते उसके चेहरे पर मुस्कान बनाए रखी.

सात दिन बीत चुके थे. नेहा इंटरनेट सर्फिंग का रोज आनंद ले रही थी, राहुल ने अब तक उससे फीस नहीं ली थी. बल्कि अब साइबर कैफे की आधे, एक घंटे की फीस भी वो उससे नहीं ले रहा था. नेहा दो नए दोस्त पाकर खुश थी. नेहा आज याहू मैसेंजर पर अकाउंट बनाकर चैट कर रही थी. ASL (एज, सेक्स, लोकेशन), LOLZ, OMG जैसे नए टर्म लिखे हुए मैसेज देख उत्साहित थी.

‘ओह तो चैटिंग शैटिंग चल रही है’, अचानक पीछे आए राहुल ने कहा. ‘हम्म.. सीख रही हूं.’ नेहा ने जवाब दिया. ‘कैरी ऑन कैरी ऑन.. अब एक घंटा नहीं पूरा दिन भी इंटरनेट पर कम लगने लगेगा. कुछ दिनों में तो घर पर भी सिस्टम लगवा ही लोगी. असल दोस्तों को भूल जाओगी और वर्चुअल दोस्त ही पसंद आएंगे.’ राहुल का तंज समझ नेहा मुस्कुराई और टेबल पर रखे उसके हाथ पर हाथ इस तरह मारा जैसे बिना कहे कह रही हो, ‘चल हट’. ‘अच्छा नेहा थोड़ी देर में नीचे क्लास में आ जाना, आज कुछ स्पेशल सैशन रखा है. नए स्टूडेंट्स भी हैं, बेसिक तो तुम्हीं बता देना सबको.’ ‘मैं’..मैं तो खुद ट्रेनी हूं, मैं क्या बताऊंगी.’ नेहा के जवाब को इग्नोर कर राहुल फुर्ती से नीचे की ओर रवाना हुआ, जाते-जाते सीढ़ी से उसकी आवाज़ जरूर आई, ‘सीयू इन नेक्स्ट 5 मिनट इन बेसमेंट’.

नेहा ने पांच मिनट बाद याहू मैसेंजर से लॉगआउट किया. सिस्टम शट डाउन कर नीचे बेसमेंट की ओर रवाना हो गई. उसे अजीब सा लग रहा था, कि वो कैसे पढ़ाएगी. नीचे जाकर ऐसा कुछ नहीं हुआ. राहुल ने वीपीएन सर्वर के बारे में बताया, कि कैसे आपके ऑफिस में कोई साइट ब्लॉक हो तो आप उसे वहां भी खोल सकते हो. आईटी टीम को बिना पता चले. फ्रैशर्स को सिखाने के लिए एक दूसरे लड़के को कह दिया, जो करीब 15 दिन से क्लास में आ रहा था. नेहा ने राहत की सांस ली. उसने आंखों ही आंखों में राहुल को थैंक्स भी कहा, लंबी सांस लेते हुए. बाकि स्टूडेंट्स अपने अपने टास्क में बिजी थे, नेहा जाने की तैयारी कर ही रही थी कि राहुल से फिर उसकी नजरें मिली, उसने उसकी तरफ आने का इशारा किया. नेहा पर्स वहीं छोड़ डायस पर टेबल के पीछे लगी कुर्सी पर बैठ गई, जो राहुल की कुर्सी के ठीक बराबर थी. सामने टेबल पर राहुल ने इंटरनेट खोल रखा था.  जैसे ही नेहा की नजर स्क्रीन पर गई, वो सकपका गई. राहुल स्क्रीन पर ही नजरें गड़ाए हुए बोला- ‘ये लो नेहा, आज की ये एक्सरसाइज, आगे भी तुम्हारे काम आएगी, ये न देखा तो इंटरनेट पर क्या देखा, तुम्हारे कॉलेज प्रोजेक्ट्स में भी तुम अब एडवांस हो जाओगी.’ राहुल की लैंग्वेज पूरी क्लास को भ्रमित करने के लिए काफी थी, इसीलिए किसी का ध्यान उस ओर गया भी नहीं कि अब तक नेहा पसीने-पसीने हो चुकी है.

स्क्रीन पर पॉर्न साइट खुली हुई थी. राहुल बिलकुल न्यूट्र्ल फेस किए हुए कुछ न कुछ बोले जा रहा था, नेहा अब तक समझ ही नहीं पा रही थी कि वो कैसे रिएक्ट करे. इतने में राहुल ने नेहा के पैर पर हाथ रखा, टेबल कवर होने के कारण उसकी इस हरकत को सामने क्लास में कोई समझ न पाया. नेहा का डर के मारे कलेजा कांप रहा था. उसने उठने की कोशिश की तो राहुल ने जोर से उसे बैठा दिया. ये मानते हुए कि नेहा अब कुछ बोलने वाली है, राहुल ने उसे टोका, ‘नेहा जी ये भी देख लो.’ ये कहते ही राहुल ने वीएलसी प्लेयर पर कर्सर क्लिक किया. वहां एक वीडियो पॉज्ड था. कुछ धुंधला-धुंधला दिखा, लेकिन तीन या चार सैकेंड के बाद ही नेहा को साफ दिख गया कि ये उसी का वीडियो है. नेहा की आंखों से आंसू टपके, लेकिन सामने क्लास को देखते हुए उसने उन्हें पौंछ लिया. उसने अब तक सिर्फ खबरों में ही पढ़ा था कि बाथरूम्स व्गैरह में हिडन कैमरे से लड़कियों के वीडियो बन रहे हैं. पर खुद को उसका शिकार होते देख वो अब स्तब्ध थी. सात दिन पहले बने दोस्त की मुस्कान के पीछे की दरिंदगी वो समझ ही नहीं पाई. नेहा को याद आ गया था कि तीन दिन पहले वो साइबर कैफे से अपनी फ्रेंड की पार्टी में सीधे गई थी. सुबह की घऱ से निकली हुई थी इसलिए ड्रेस साथ लाई थी. साइबर के वाशरूम में ही उसने ड्रेस चेंज की थी, जो उसकी सबसे बड़ी भूल थी.

राहुल धीरे से फुसफुसाता हुआ बोला- ‘शाम को सात बजे तुम्हारा इंतजार रहेगा, यहीं. बताने की जरूरत तो नहीं न कि न आई तो कल इंटरनेट पर तुम ही धमाल मचाती दिखोगी.’

नेहा झट से सामने अपनी सीट तक आई, टेबल पर रखा पर्स और स्कार्फ उठाया और अपनी स्कूटी की और दौड़ पड़ी.

दोपहर से शाम तक नेहा की हालत बिगड़ी रही, घर वाले सोच रहे थे कि लू लग गई. ‘बार-बार कहते हैं फिर भी ध्यान नहीं ऱखती, धूप में बाहर आती जाती है.’ सब उसे ऐसा कहकर टोक रहे थे. नेहा चाहकर भी किसी को बता न सकी. घबराहट में उसे दो बार वोमिट हुई. कभी राहुल की पोर्न वाली हरकत, तो कभी अपना वीडियो आंखों के सामने आ रहा था. और कभी ये सोचकर ही रूह कांप रही थी कि शाम को वो क्या करने वाला है. इसी बीच मम्मी एप्पल ले आईं. वहीं काटकर उसे खिलाने लगीं. मम्मी ये सोच रही थीं कि भूखे पेट गर्मी असर कर गईं और नेहा चाकू को देख रही थी.

शाम सवा सात बजे नेहा साइबर कैफे पहुंची. जैसा उसने सोचा था, ठीक वैसा ही नजर भी आया. राहुल कैफे में टेबल पर पैर रख कर बैठा था. बत्तियां बुझा रखी थी, बस एक कैबिन की लाइट चल रही थी, उसी से रौशनी बाहर आ रही थी. नेहा को आते देख राहुल ने कहा- ‘आओ जान आओ, तीन दिन से जब से तुम्हें वीडियो में बिना टॉपर के देखा है, इस ही लम्हे का इंतजार कर रहा हूं.’

राहुल ने ये कहते हुए सामने रखा डीओ अपनी पूरी शर्ट और बगलों के नीचे छिड़का. सहमी हुई नेहा कुछ धीमे कदमों से ही राहुल की ओर बढ़ी. राहुल ने होठ आगे कर दिए, इस जबरन हक को मानते हुए, कि जैसा वो पिछले पांच घंटों से इमेजन कर रहा है, अब बस वो होने को है.

एक तेज तमाचे ने राहुल को इमेजिनेशन से बाहर निकाला. उसका गाल पर हाथ पहुंचा ही था कि एक जोर का मुक्का उसकी नाक पर आकर लगा और तेजी से खून बहने लगे. अचानक सकपकाए राहुल ने होठों तक आए खून को हाथ से देखा फिर पागल सा होकर वो नेहा को मारने दौड़ा. वो नेहा की ओर बढ़ा ही था कि बाहर के गेट से दो लड़के दो लड़कियां अंदर आए और नेहा को पीछे कर राहुल को पीटने लगे. चंद मिनटों में राहुल अधमरा हुआ पड़ा था, माफी मांग रहा था. बेशर्मी से बार बार माफी मांग रहा था. नेहा के दोस्तों ने एक-एक कंप्यूटर को खंगाला. साइबर के बाकी सिस्टम्स में तो कुछ नहीं था, एक क्लास रूम और दूसरे ऊपर कैफे एरिया में राहुल के सिस्टम में वॉश रूम की कुछ क्लिप्स थी. क्लास रूम के सिस्टम में ऊपर का ही फोल्डर कॉपी किया हुआ था, जिसमें तकरीबन चार लड़कियों के वॉशरूम वीडियो थे. काफी मार पड़ी तो राहुल गिड़गिड़ाया कि नेहा उसका पहला शिकार ही थी. इंटरनेट पर साइबर कैम के लीक्ड वीडियो देख उसकी भी हिम्मत हुई वो ऐसा करे. नेहा के दोस्तों ने दोनों ही सिस्टम से फोल्डर ऑल्ट प्लस कंट्रोल दबाकर डिलीट किए और फिर गुस्से में दोनों सिस्टम भी तोड़ डाले.

फिर कभी उस साइबर कैफे का ताला खुला किसी ने न देखा. कुछ दिनों बाद वहां एक परचूनी की दुकान खुल गई. राहुल वहां कभी नहीं दिखा, हां, नेहा अक्सर गर्दन ऊंची कर स्कूटी पर वहां से गुजरते हुए नजर आती रही.

घर वापसी

कोरोना वायरस के दौरान लागू लौकडाउन में पिछले कई दिनों से गोपाल परिवार के साथ अपने घर पर ही था. देश के सब से स्वच्छ शहर इंदौर में मध्य प्रदेश के अन्य शहरों की तुलना में कोरोना के अधिक मामले उसे रहरह कर परेशान कर रहे थे. इंदौर के कुछ हिस्सों में लोगों का प्रशासन के साथ असहयोग भी उसे चिंता में डाल रहा था. लौकडाउन का उल्लंघन भी उसे परेशान कर रहा था. लेकिन वह कर भी क्या सकता था. वह इस महामारी में लौकडाउन का पालन करते हुए घर में बंद था. उस का परिवार भी उस के साथ लौकडाउन का पालन सख्ती से कर रहा था.

गोपाल के परिवार में वृद्ध माता, पत्नी रेखा और 2 बच्चों का अच्छाभला परिवार है. गोपाल खुद एक टीवी मैकेनिक है. अच्छाभला काम है. लेकिन इन दिनों घर पर रह कर एवं लौकडाउन का पालन कर इस महामारी में डाक्‍टरों के निर्देशानुसार अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा कर रहा था. उसे मालूम था कि इस बीमारी से बचने का एकमात्र रास्ता घर पर रहना ही है.

आज फुरसत के पलों में गोपाल पता नहीं क्यों अतीत की यादों में खो रहा था. उसे आज भी वे दिन याद आ रहे थे जब उस की और उस की पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था और बात न्यायालय तक चली गई थी. आज उसे और उस की पत्नी को देख कर कोई इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकता है. उस के जेहन में अपने उन वकील साहब की याद आ रही थी जो एक दशक पहले उस के तलाक के केस में उस के वकील थे, जिन्होंने उस का परिवार बचाया था. वकील साहब भी उन दिनों उन की तरह ही युवा थे और नईनई वकालत की शुरुआत की थी. आज तो वे शहर के नामीगिरामी वरिष्ठ वकील हैं. उन का नाम भी काफी है. आएदिन समाचारपत्रों में उन का नाम प्रकरणों के संदर्भ में आता रहता है .

यह बात उन दिनों की है जब उस के और उस की पत्नी रेखा के बीच छोटीछोटी बातों ने विकराल रूप ले लिया था. वह नाराज हो कर अपने मायके अपने मातापिता के पास उन के गांव हातौद चली गई थी. इसी नाराजगी में उस ने न्यायालय में तलाक हेतु एक प्रकरण पेश किया. इस के साथ ही उस ने अपने भरणपोषण के लिए दूसरा प्रकरण भी पेश किया. इन प्रकरणों के नोटिस न्यायालय से मिलने पर वह इन वकील साहब से मिला था. वकील साहब ने अपना नयानया औफिस उस के ही मोहल्ले में डाला था.

न्यायालय का नोटिस मिलने पर गोपाल इन्हीं वकील साहब के पास गया. बातचीत में वकील साहब भले और अच्छे लगे. फीस तय कर गोपाल ने कागजात पर अपने हस्ताक्षर कर उन्हें अपने दोनों प्रकरण सौंप दिए. उस ने वकील साहब से पूछा कि उस की पत्नी ने यह प्रकरण किस आधार पर पेश किए हैं?

वकील साहब ने बताया,”हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत आप की पत्नी ने तलाक का यह प्रकरण पेश किया है. इस में वे आधार दिए गए हैं, जिन के आधार पर तलाक लिया जा सकता है. इन में से एक आधार है क्रूरता. तुम्हारी पत्नी ने इसी आधार पर प्रकरण पेश किया है. उन्होंने आप के खिलाफ मारपीट, गालीगलौच एवं उस के मातापिता के अपमान का आरोप लगाया है.

“दूसरा प्रकरण भारतीय दंड प्रक्रिया के अंतर्गत भरणपोषण की सहायता चाही है. आप की पत्नी का कहना है कि वह कमाती नहीं है, इस कारण उसे भरणपोषण हेतु आप से प्रतिमाह एक राशि चाहिए. यह प्रावधान उसे यह अधिकार देता है.”

नियत तारीख पर वकील साहब ने कागजातों को पेश किया. अब प्रकरण चलना चालू हुए तो चलते रहे. तारीख पर तारीख लगती रही. वह और उस की पत्नी रेखा न्यायालय में आते रहे. उस की पत्नी के साथ उन के ससुर और सास भी रेखा को हिम्मत बंधाने आते थे. उस के ससुर रामप्रसाद और सास गोमतीबाई पास के गांव हातौद में रहते थे. रामप्रसाद एक दरजी थे तथा गांव में उन की दुकान थी. दोनों ही उसे गुस्से से देखते रहते थे .

वकील साहब के पूछने पर गोपाल ने बताया,“मैं ने कभी रेखा के साथ मारपीट नहीं की है. मेरी शिकायत तो उस के मातापिता द्वारा हमारी जिंदगी में किए जाने वाले हस्तक्षेप थे. वे हमारी रोज की जिंदगी में हस्तक्षेप करते थे. यही झगड़े का मूल कारण था.”

वकील साहब ने इस पर उसे समझाया, “प्रकरण पेश करने के लिए आधार बनाने होते हैं. शायद इसलिए यह लिखा गया हो. हो सकता है कि इस में झूठ भी हो. हम अपना पक्ष न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे.”

गोपाल की शादी रेखा के साथ हातौद जैसे छोटे गांव में धूमधाम से हुई थी. तब गोपाल के पिताजी भी जीवित थे. दोनों परिवारों में उस समय आपस में काफी स्नेह एवं आदर था. उस के पिताजी की मौत के बाद मामला बिगड़ने लगा. उस के ससुर तथा सास रेखा के प्रति अत्यंत ही संवेदनशील होने लगे. घरपरिवार में उन का हस्तक्षेप दिनप्रतिदिन बढ़ने लगा. आएदिन गोपाल के ससुर रामप्रसाद तथा सास गोमतीबाई उन के घर आने लगे. हर काम और बात पर रामप्रसाद उसे सलाह देने लगे. सास गोमतीबाई भी रेखा के कान भरने लगीं. गोपाल को अपनी और रेखा के जीवन में उन का हस्तक्षेप अखरने लगा. गोपाल की मां भी कभीकभी इस संबंध में उसे बताती थीं. इस को ले कर मां भी अकसर दुखी रहती थीं, लेकिन वे कभी भी हस्तक्षेप नहीं करती थीं.

दिनप्रतिदिन गोपाल की जिंदगी में हस्तक्षेप बढ़ता ही गया. इसे ले कर अब अकसर छोटेमोटे झगड़े होने लगे. रेखा की जब भी अपनी मां से फोन पर लंबीलंबी बातचीत होती थी तब तो निश्चित ही झगड़े होते ही थे. धीरेधीरे इन झगड़ों ने बड़ा रूप ले लिया. सास गोमतीबाई उस की पत्नी को हर मामले पर सलाह देने लगीं. घर पर खाने में क्या बनेगा से ले कर मां की देखभाल व उन पर किए गए खर्च को ले कर झगड़े होने लगे. इन्हीं झगड़ों ने विकराल रूप ले लिया.

एक दिन इस बात पर दोनों पतिपत्नी में झगड़ा हुआ कि आखिर वह मां के लिए इतनी महंगी साड़ी क्यों लाया? रेखा बोली, “मां बाहर जाती ही कहां हैं. इतनी महंगी साड़ी का वह करेंगी क्या?”

इस बात पर गोपाल क्रोधित हो गया. दोनों के बीच झगड़ा बढ़ गया. इस झगड़े के बाद रेखा ने अपने पिता को फोन पर सारी बातें बताई. इस पर रेखा के मातापिता आए और गोपाल पर क्रोधित हो कर अपनी बेटी को अपने घर ले गए.

इस घटना के 1 साल होने के बाद रेखा ने न्यायालय में क्रूरता के आधार पर तलाक का तथा अपने भरणपोषण के मुकदमे न्यायालय में पेश किए. गोपाल ने भी अपने वकील के मारफत जवाब पेश किया. मगर जैसाकि हर मुकदमे में होता है, दोनों ही पक्षों ने कुछ सच तो कुछ झूठ का आधार लिया. दोनों ही ने एकदूसरे को आपसी संबंधों के बिगड़ाव का दोषी माना.

मुकदमे अपनी रफ्तार से चल रहे थे, तारीख पर तारीख. न्यायालय ने आपसी समझौते की कोशिश भी की लेकिन दोनों पक्ष राजी नहीं हुए. गोपाल को दहेज के झूठे मुकदमे में फंसाने की भी धमकी दे डाली. पतिपत्नी के विवादों में अकसर जो आरोप एकदूसरे के खिलाफ लगाए जाते हैं उन में से काफी झूठे भी होते हैं. यही इन मुकदमे में भी हो रहा था. धीरेधीरे दोनों ही पक्ष तारीखों के कारण परेशान होने लगे. कई बरस निकल गए. अब दोनों ही पक्षों को कोई रास्ता समझ में नहीं आ रहा था. दोनों ही पक्षों के मन में अब कहीं न कहीं अपने द्वारा किए गए गलत व्यवहार के प्रति मन में पछतावा भी था.

ऐसी ही एक नियत तारीख पर न्यायालय में गोपाल, रेखा तथा गोपाल के वकील उपस्थित थे. हमेशा की तरह उस के ससुर रामप्रसाद भी थे. जज साहब अपने चैंबर में कोई फैसला लिखवा रहे थे. अनायास ही गोपाल के वकील ने रेखा के पिता से कहा,“रामप्रसादजी रेखा को उस के पति के घर क्यों नहीं भेज रहे हो? दोनों ही युवा हैं. उन के सामने पूरी जिंदगी पड़ी है. उन का जीवन मुकदमेबाजी में बरबाद हो जाएगा. गोपाल से मैं ने बात की है. वह तो रेखा को आज भी ले जाना चाहता है.”

रामप्रसाद ने भी सकारात्मक जवाब दिया. कहा,“वकील साहब, कौन पिता अपनी बेटी को शादी के बाद घर बैठाना पसंद करेगा? बहुत तकलीफदेह होता है एक शादीशुदा बेटी को घर रखना. रोज रेखा की मां रोती है. मेरी तकलीफ का अंदाजा आप लगा सकते हो. अगर गोपाल मेरी बेटी को अपने घर ले जाए तथा अच्छी तरह रखे तो मुझे क्या एतराज हो सकता है,” यह कहते हुए रामप्रसाद की आंखें भर आईं.

इस पर वकील साहब ने गोपाल की तरफ मुड़ कर उस से पूछा, “हां, तो गोपाल क्या कहना है? तुम अपनी पत्नी को ले जाने के लिए तैयार हो?”

इस पर गोपाल ने कहा, “वकील साहब, हम पतिपत्नी के बीच तो पहले भी कोई समस्या नहीं थी. यदि मेरे सासससुर हमारी जिंदगी में हस्तक्षेप कम कर दें तो मैं आज और इसी क्षण रेखा को ले जाने के लिए तैयार हूं. यह वादा करने के लिए भी तैयार हूं कि उसे कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा.”

वकील साहब ने रेखा के पिता से कहा, “आप अपनी बेटी की जिंदगी में खुशियां चाहते हैं या नहीं?”

रामप्रसाद बोले, “रेखा तो हमारी जिंदगी है. इकलौती संतान होने के कारण हमें उस की चिंता रहती है. इसलिए रेखा की मां भी उसे फोन करती रहती हैं. हम इसी चिंता के कारण इंदौर अधिक आते हैं. कभी कुछ काम होता है तो कभी रेखा की चिंता.”

वकील साहब ने फिर समझाया, “यदि आप लोगों के हस्तक्षेप से पतिपत्नी के जीवन में अशांति हो रही है तो ऐसी चिंता किस काम की… यह उन का जीवन खाक कर देगी. आप यदि कुछ समय तक आना और फोन करना कम कर दें और आप की बेटी खुशी से अपने पति के साथ रहे तो आप को कोई एतराज तो नहीं है?”

रामप्रसाद ने भी बगैर कोई समय गवाएं कहा, “भला हमें एतराज क्यों होने लगा? हमें तो अपनी बेटी की खुशियों से मतलब है.”

इतने में ही जज साहब अपने चैंबर से बाहर आए. गोपाल के वकील साहब ने सारी बातें जज साहब को बताई. जज साहब भी खुश हुए. दोनों को समझाया भी. उन्होंने रामप्रसाद से कहा, “हम आप की चिंता को भी समझते हैं. हम रेखा के अपने ससुराल जाने के बाद भी कुछ समय तारीखे लगाएंगे. इन तारीखों पर गोपाल और रेखा न्यायालय में आप से मिल सकेंगे. रेखा भी आप को बता सकेगी कि उसे अपने ससुराल में कोई तकलीफ तो नहीं है. उस के साथ प्रेम और सम्मानपूर्वक व्यवहार हो रहा है अथवा नहीं. आप की एवं रेखा के संतुष्टि के बाद ही प्रकरण समाप्त करेंगे,” यह सुन कर रामप्रसाद, रेखा और गोमतीबाई और उन के वकील भी संतुष्ट हो गए.

रेखा न्यायालय से ही गोपाल के साथ अपने ससुराल जाने के लिए राजी हो गई. गोपाल ने भी अपने सासससुर को विश्‍वास दिलाया कि वह रेखा को पूरे सम्मान, आदर और सुखसुविधा से रखेगा. उसे अपने सासससुर के समयसमय पर फोन करने अथवा आने पर भी कोई एतराज नहीं था .

कुछ तारीखों के बाद जज साहब ने गोपाल, रेखा और रामप्रसाद से बातचीत के बाद प्रकरण समाप्त कर दिया. गोपाल की वृद्ध मां भी इस घटनाक्रम से बेहद प्रसन्न थीं. उन्होंने भी घर पर रेखा का स्वागत किया. रेखा भी घर वापसी से बेहद खुश थी.

आज गोपाल को मुकदमे समाप्त होने के बाद उसी दिन शाम को वकील साहब के कार्यालय में हुई मुलाकात भी याद आई. गोपाल अपने वकील साहब से मिलने उन के कार्यालय गया था. वकील साहब ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि मुकदमे समाप्त हो चुके हैं. उन्होंने गोपाल से रेखा के साथ अच्छी तरह रहने और झगड़ा न करने की तारीफ की.

इस के बाद वकील साहब ने अपनी बाकी फीस की याद दिलाई. इस पर गोपाल बोला, “वकील साहब, बाकी फीस कैसी? फीस तो पूरे मुकदमे की थी. आप ने पूरा मुकदमा तो लड़ा ही नहीं,” यह बात सुन कर वकील साहब के चेहरे पर एक छोटी सी मुसकान उभर आई.

वकील साहब भले थे. इसलिए उन्होने कहा,“फीस भले ही मत दो लेकिन अपनी पत्नी के साथ अच्छी तरह रहना. यदि भविष्य में आप दोनों के बीच कोई विवाद हुआ तो इस बकाया फीस के साथ नए मुकदमे की अग्रिम फीस लूंगा,”यह सुन कर गोपाल अनायास ही भावुक हो गया. वकील साहब की सलाह का साफ असर और परिवार के एक होने का संतोष दोनों उस के चेहरे पर साफसाफ देखा जा सकता था.

इतने में ही रेखा ने उसे आवाज दी. कहा, “आज खाना नहीं खाना है? आज आप कहां खोए हुए हो?”

इस पर गोपाल ने बड़े ही स्नेह से पत्नी का हाथ पकड़ कर मुसकरा कर बोला, “कहीं नहीं. ऐसे ही कुछ पुरानी यादें ताजा हो गईं.”

इस पर रेखा बोली,” पुरानी यादों को छोड़ो, मैं ने आज आप की पसंद की खीर बनाई है. गोपाल ने रेखा का हाथ छोड़े बगैर कहा,“हां, चलो खाना खाते हैं. खीर से तो खाने में और मजा आएगा.”

दोनों ही खाना खाने चल पड़े. बच्चे और मां पहले से ही वहां मौजूद थे.

हम्बल पोलीटीशियन नागराजः भारतीय लोकतंत्र, राजनीति व राजनेताओं पर व्यंगात्मक तमाचा

रेटिंगः चार स्टार

निर्माताः अप्लॉज इंटरटेनमेंट

निर्देशकः साद खान

लेखकः दानिश सैट व साद खान

कलाकार: दानिश सैट, प्रकाश बेलावाडी, विनय चेंदूर, गीताजंली कुलकर्णी, दिशा मदान व अन्य

अवधिः लगभग साढ़े पांच घंटे (लगभग आधे घंटे के दस एपीसोड)

ओटीटी प्लेटफार्मः वूट सेलेक्ट

दानिश सेट की भ्रष्ट राजनेता पर आधारित कन्नड़ भाषा की फिल्म ‘‘हम्बल पोलीटीशियन नागराज’’ ने 2018 में सफलता के झंडे गाड़े थे. अब उसी पर दानिश सैट,साद खान व समीर नायर एक दस एपीसोड की कन्नड़ भाषा में ही वेब सीरीज ‘‘ हम्बल पोलीटीशियन नागराज ’’ लेकर आए हैं, जो कि पांच जनवरी से अंग्रेजी सब टाइटल के साथ ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘वूट सेलेक्ट’’ पर स्ट्ीम हो रही है. यह वेब सीरीज वर्तमान समय की राजनीति व राजनेताओं पर हास्य व्यंग युक्त तमाचा है.

कहानीः

यह कर्नाटक राज्य पर आधारित काल्पनिक कहानी है.जहां विनम्र और आत्ममुग्ध राजनेता नागराज (डेनिश सैट) की अपनी ओबीपी पार्टी है. नागराज हमेशा बंदूक लेकर चलते हैं.बात बात में बंदूक से गोली भी चला देते हैं. उनकी राय में राजनेता देश से बढ़कर है. विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी के विधायक कम जीतते हैं..उधर केजीबी (प्रकाश बेलावडी) के नेतृत्व वाली सेक्युलर पार्टी भी बहुमत पाने से वंचित रह गयी है,उसे बहुमत के लिए तीन विधायक चाहिए. वर्चस्वशाली परिवार के नेतृत्व वाली पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है.

 

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सेक्युलर पार्टी की राष्ट्ीय अध्यक्ष (गीतांजली कुलकर्णी) चाहती हैं कि उनकी पार्टी की सरकार बने और केजीबी मुख्यमंत्री बने. केंद्र में भी सेक्यूलर पार्टी की ही सरकार है.केजीबी मुख्यमंत्री बनने के लिए कुछ ज्यादा ही उतावले हैं. वह राज्य के राज्यपाल गोवर्धन के अलावा प्रधानमंत्री को फोन व संदेश भेजकर उन्हे हर हाल में मुख्यमंत्री बना देने के लिए कहते रहते हैं.राज्यपाल का कहना है कि बहुमत के लिए 114 विधायक चाहिए और केजीबी के पास 111 हैं.

उधर हर हाल में राज्य की सत्ता पर काबिज होने और मुख्यमंत्री बनने के लिए नागराज अजीबोगरीब और गंदे खेल खेलना शुरू कर देते हंै.नागराज पहले सेक्युलर पार्टी के साथ हाथ मिलाने का असफल प्रयास करते हैं.फिर उनकी नजर फैमिली रन पार्टी’ पर होती है. फैमिली रन पार्टी एक विरासत वाली पार्टी है, जिसके शीर्ष पर एक अनजान वंशज करण है,जो अपनी फिरंगी माँ की बात सुनते हैं.

इस पार्टी के कर्नाटक अध्यक्ष पुष्पेश, नोगराज के साथ नही जाना चाहते. मगर नागराज व करण की बात होने के बाद करण,पुष्पेश को आदेश देते हैं कि मां चाहती है कि नागराज से हाथ मिलाओ.अब नागराज ‘फैमिली रन पार्टी‘ के पुष्पेश व उनकी पार्टी के विधायकों को डराकर अपनी पार्टी के विधायकों के साथ एक रिसोर्ट में जाकर बंद कर देते है,सभी के मोबाइल भी छीन लेते है. मगर एक एमएलए मंजय एक वीडियो बनाकर अपनी पत्नी इंदूलेखा तक भेजने में सफल रहते है. वीडियो में रोते हुए मयंज कहता है कि उसका नागराज ने अपहरण कर लिया है. इधर एक विधायक के कम होने से नागराज खुश नही है और वह राज्यपाल से मिलने भी नहीं जा रहे.

अब नागराज हर वक्त टीवी के रियालिटी शो ‘बिग बाॅस’ की तर्ज पर सभी विधायको पर नजर रखने के अलावा उनके साथ ‘सुप्रीम बाॅस’ बनकर बातें भी करते रहते हंै. उसका हर कदम व काम अपमान जनक व मजाकिया ही नजर आता है. फिर नागराज अपनी तरफ से केजीबी के एक विधायक को और केजीबी ‘फैमिली पार्टी’ के तीन विधायकांे की खरीद फरोख्त में लग जाते हैं.इस तरह पूरे दस एपीसोड की वेब सीरीज में लोकतंत्र के नाम पर बहुमत हासिल करने के लिए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनैतिक खरीद- फरोख्त की प्रथा का खेल चलता रहता है और दर्शक इंज्वाॅय करता है.

लेखन व निर्देशनः

इस वेब सीरीज देखकर लोगों को कुछ वर्ष पहले कर्नाटक में भाजपा,काॅंग्रेस व जेडीएस के बीच हुए ‘रिसोर्ट खेल’ की याद आ जाती है. लेखक व निर्देशक ने भले ही किरदारों के नाम काल्पनिक रख दिए हांे,मगर हम आज भी यही राजनीतिक परिदृश्य हम देख रहे हैं. इतना ही नही जिन्होने 2018 में प्रदर्शित दानिश की इसी नाम की फिल्म को पसंद किया था,उन्हें नागराज के किरदार में दानिश सैट की हरकतें हंसाएंगी. इतना ही नहीं इस वेब सीरीज को देखते हुए 1988 में प्रदर्शित मनोहर श्याम जोशी लिखित हास्यव्यंग युक्त सीरियल ‘‘कक्काजी कहिन’’ की भी याद आती है.क्योकि इस सीरियल में जिस मानसिकता को उजागर किया गया था, वही ‘हंम्बल पोलीटीशियन नागराज’ में भी नजर आता है.

निर्देशक ने इसे पैरोडी व हास्य के साथ मिश्रित कर इस तरह पेश किया है कि यह सीरीज राजनीति व राजनेताओं के गाल पर थप्पड़ ही जड़ती है,पर लोग हंसे बिना नहीं रह पाते. निर्देशक व लेखक साद खान ने बहुत ही चतुराई के साथ भारतीय सुरक्षा एजंसियों पर भी तंज कसा है.कुछ जगहों पर अति भी हो गयी है. कुछ किरदार कैरीकेचर बनकर रह गए हैं.

अभिनयः

पोलीटीशियन नागराज के किरदार में अभिनेता दानिश सैट ने जानदार अभिनय किया है.केजीबी के किरदार को निभाने वाले प्रकाश बेलावाड़ी की प्रतिभा तो जग जाहिर है. वह कमाल के अभिनेता हैं.

नागराज के सहायक मंजूनाथ के किरदार में विजय चंदूर अपनी छाप छोड़ जाते हैं.वह अपनी सहज काॅमिक टाइमिंग से लोगों को अपना बना लेते हैं.टीवी पत्रकार दिशा मदान का अभिनय ठीक ठाक है.

वेब सीरीज ‘‘गुल्लक’’ में सर्वाधिक पसंद की जाने वाली अभिनेत्री गीतांजली कुलकर्णी ने जिस अंदाज में पार्टी अध्यक्षा का किरदार निभाया है,वह कमाल का है और वह एक राजनेता की याद दिला ही देती हैं. टीकू टलसानिया को देखना अच्छा लगता है.

कोख को किया कलंकित

सौजन्य- मनोहर कहानियां

गुजरात के जिला खेड़ा के इंडस्ट्रियल एरिया नडियाद और आणंद में ऐसे कई अस्पताल हैं, जो निस्संतान दंपतियों को सरोगेसी मदर (किराए की कोख यानी जो दूसरे के बच्चे को अपनी कोख में पालती हैं) की व्यवस्था करते हैं.

आणंद के एक ऐसे ही निजी अस्पताल में मायाबेन दाबला काम करती थी. लगातार एक ही अस्पताल में काम करने की वजह से मायाबेन की ऐसी तमाम महिलाओं से जानपहचान हो गई थी, जो अपनी कोख किराए पर देती थीं.

इस तरह का काम बहुत गरीब महिलाएं करती हैं, जिन्हें पैसे की बहुत ज्यादा जरूरत होती है या फिर कोई बहुत करीबी रिश्तेदार महिला करती है, जिसे अपने उस रिश्तेदार की बहुत फिक्र होती है.

रिश्तेदार महिला तो अपने रिश्तेदार के लिए इस तरह का काम करती है, पर जो महिलाएं पैसा ले कर किसी अन्य का बच्चा अपनी कोख में पालती हैं, उन के लिए यह एक तरह का धंधा होता है. वे तब तक यह काम करती रहती हैं, जब तक उन का शरीर साथ देता है.

निस्संतान दंपतियों को, जो हर तरफ से निराश हो चुके होते हैं, उन्हें इस तरह की औरतों की तलाश रहती है. पर वे किस से कहें कि मेरे लिए तुम अपनी कोख में मेरा बच्चा पाल दो. हर किसी से या किसी अंजान से तो इस तरह की बात कही नहीं जा सकती. इसलिए इस तरह के लोग किसी दलाल के माध्यम से ऐसी महिलाएं तलाशते हैं.

मायाबेन की इस तरह की अनेक महिलाओं से जानपहचान हो गई थी, इसलिए वह निस्संतान दंपतियों और इस तरह की महिलाओं के बीच दलाली का भी काम करने लगी थी.

इस के अलावा कभीकभी ऐसा भी होता था कि निस्संतान दंपति खुद अपने साथ अपने गांव की या किसी परिचित के माध्यम से किसी गरीब महिला को पैसे का लालच दे कर सरोगेट मदर के लिए ले कर आते थे.

मायाबेन ऐसी महिलाओं से जानपहचान बना कर उन्हें आगे किसी जरूरतमंद के लिए तैयार कर लेती थी. ऐसी ही महिलाओं से सरोगेट मदर के लिए अन्य गरीब महिलाएं भी मिल जाती थीं. इस तरह मायाबेन को नौकरी से जो वेतन मिलता था, वह तो मिलता ही था, इस तरह की दलाली से भी उसे अच्छी कमाई हो जाती थी.

किराए की कोख दिलवाती थी मायाबेन

कहते हैं इंसान बड़ा लालची होता है. उसे कहीं से चार पैसे मिलने की उम्मीद होती है तो वह लालच में यह भी नहीं देखता कि वे चार पैसे उसे सही रास्ते से मिल रहे हैं या गलत रास्ते से. उसे तो बस वे पैसे चाहिए.

ऐसा ही कुछ मायाबेन के साथ भी हुआ. कुछ कमाई अलग से करने के चक्कर में मायाबेन सरोगेट मदर और निस्संतान दंपतियों के बीच दलाली करतेकरते वह बच्चे बेचने का काम भी करने लगी. वह ऐसे निस्संतान दंपतियों को बच्चे भी बेचने लगी, जो किसी भी रूप में बच्चा पैदा करने लायक नहीं होते थे.

हमारे यहां बच्चा गोद लेना भी आसान नहीं है. जबकि हर कोई अपना वारिस चाहता है. इस के लिए यानी एक संतान के लिए आदमी कुछ भी करने को तैयार हो जाता है. मायाबेन ऐसे ही लोगों के लिए मोटी रकम ले कर बच्चे उपलब्ध कराने का काम भी करने लगी थी. क्योंकि उस के पास ऐसी महिलाएं भी थीं, जो पैसे ले कर दूसरे के लिए बच्चा पैदा करने को तैयार थीं.

चूंकि यह आसान काम नहीं है, इसलिए मायाबेन इस के लिए काफी पैसे लेती थी. क्योंकि इस के लिए उसे ऐसी महिलाओं को तलाशना पड़ता था, जो अपना बच्चा बेचने के लिए तैयार होती थीं.

जबकि कोई भी महिला जल्दी से अपना बच्चा बेचने को तैयार नहीं होती. पर एक सच्चाई यह भी है कि पेट की भूख इंसान से कुछ भी करवा सकती है. इन कामों से उसे मोटी कमाई हो रही थी.

चूंकि ऐसा करना कानूनी रूप से गलत है, इसलिए यह काम वह चोरीछिपे करती थी. पर कोई भी गलत काम लगातार कितना भी चोरीछिपे किया जाए, उस की जानकारी लोगों को हो ही जाती है.

ऐसा ही मायाबेन के इस काम के बारे में भी हुआ. जब इस बात की जानकारी कुछ लोगों को हुई तो उन्हीं में से किसी ने यह बात खेड़ा की एसपी अर्पिता पटेल तक पहुंचा दी.

चूंकि यह मामला एक तरह से मानव तसकरी से जुड़ा था, इसलिए इस बात का पता चलते ही उन के कान खड़े हो गए. मायाबेन भले ही किसी गरीब महिला का बच्चा किसी धनी निस्संतान दंपति के हाथों बेचवा कर नेकी का काम कर रही थी, पर कानून की नजरों में था तो यह गलत ही.

महिला एसआई बनी डमी जरूरतमंद

बच्चा खरीदने वाला बच्चे का न जाने किस तरह उपयोग करता होगा? इसलिए जब बात मानव तसकरी की सामने आई तो एसपी अर्पिता पटेल ने इस मामले की सच्चाई का पता लगाने की जिम्मेदारी खेड़ा की एसओजी टीम को सौंप दी.

पुलिस चाहती तो मायाबेन को गिरफ्तार कर के पूछताछ कर सकती थी. पर तब पुलिस को सबूत जुटाना मुश्किल हो जाता. एसपी खेड़ा अर्पिता पटेल इस मामले की तह तक जाने और इस काम में लिप्त महिलाओं को सबूतों के साथ गिरफ्तार करना चाहती थीं. इसीलिए उन्होंने यह काम एसओजी को सौंपा था.

एसओजी प्रभारी ने यह जिम्मेदारी विभाग की तेजतर्रार महिला एसआई आर.डी. चौधरी को सौंपी. आर.डी. चौधरी को पता ही था कि मायाबेन बच्चा बेचती है. इसलिए उन्होंने सोचा कि वह उस से एक जरूरतमंद बन कर मिलें, तभी सच्चाई का पता चल सकता है.

इस के लिए उन्होंने अपने साथ 2 महिला सिपाहियों को ले कर बच्चा बेचने वाले रैकेट की मुखिया मायाबेन लालजीभाई दाबला निवासी 104, कर्मवीर सोसायटी, पीजी रोड नडियाद से मिलने की कोशिश शुरू कर दी. उन की यह कोशिश रंग लाई और वह एक जरूरतमंद यानी डमी ग्राहक के रूप में मायाबेन से मिलने में कामयाब हो गईं.

तय स्थान शांताराम नगर, नजदीक सब्जी मंडी, नडियाद में वह सहयोगियों के साथ तय समय पर पहुंच गईं. पर साथ आई महिला सिपाही इस तरह अलगअलग खड़ी हो गईं, जैसे वे उन के साथ नहीं हैं.

पर मायाबेन दाबला तय समय पर एसआई आर.डी. चौधरी से मिलने अकेली नहीं आई थी. उस के साथ 2 अन्य महिलाएं मोनिकाबेन महेश शाह निवासी किशन समोसा वाले की गली, बणियावड, नडियाद और पुष्पाबेन संदीप पटेलिया निवासी रामादूधा की चाल, मिल रोड, नडियाद भी थीं.

6 लाख में बेचती थी लड़का

मायाबेन ने पहले तो आर.डी. चौधरी को गौर से देखा, उस के बाद धीरे से बोली, ‘‘बताइए, आप क्या चाहती हैं?’’

‘‘मुझे एक बच्चा चाहिए.’’ आर.डी. चौधरी ने कहा.

‘‘क्यों? अभी तो आप की उम्र भी कोई ज्यादा नहीं है. आप चाहें तो आप को अपना बच्चा हो सकता है.’’ मायाबेन ने कहा.

‘‘डाक्टर ने कहा है कि मेरी फेलोपियन ट्यूब ब्लौक है, जो औपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हो सकती. जबकि मुझे बच्चा चाहिए. बच्चा मुझे कहीं से गोद भी नहीं मिल रहा है. सरोगेट द्वारा बच्चा पाने में पैसा भी खर्च करो और इंतजार भी करो. इसलिए मेरा सोचना है कि जब पैसा ही खर्च करना है तो बच्चा खरीद ही क्यों न लूं. मुझे पता चला है कि आप पैसे ले कर बच्चा दिला देती हैं, इसलिए मैं आप के पास आई हूं.’’ आर.डी. चौधरी ने एक सांस में अपनी समस्या ऐसे बताई कि मायाबेन तथा उस के साथ आई महिलाओं को उन पर जरा भी शक नहीं हुआ.

‘‘आप को लड़का चाहिए या लड़की?’’ मायाबेन ने पूछा.

‘‘मतलब?’’ डमी ग्राहक बनी एसआई आर.डी. चौधरी ने जवाब देने के बजाय सवाल किया.

‘‘मतलब यह कि लड़का चाहिए तो उस के लिए अधिक पैसे लगेंगे. लड़की कम पैसों में मिल जाएगी.’’

‘‘लड़के के लिए कितने रुपए देने होंगें?’’ आर.डी. चौधरी ने पूछा.

‘‘लड़के के लिए पूरे 6 लाख रुपए देने होंगे. अगर आप को लड़का चाहिए तो आप 6 लाख रुपए की व्यवस्था कीजिए. आप को लड़का अभी मिल जाएगा.’’ मायाबेन ने कहा.

डमी ग्राहक बन कर आई आर.डी. चौधरी ने हामी भर दी तो मायाबेन ने कहा, ‘‘ठीक है, आप पैसे की व्यवस्था कीजिए. मैं बच्चा मंगा रही हूं.’’

‘‘मैं ने पैसों की व्यवस्था कर रखी है. आप बच्चा मंगाइए. मैं देखूंगी भी तो. बच्चा पसंद आ गया तो सारे पैसे एकमुश्त दे कर बच्चा ले लूंगी.’’ आर.डी. चौधरी ने कहा.

सब कुछ तय हो जाने के बाद मायाबेन ने फोन किया तो एक महिला एक नवजात बच्चा ले कर आ गई. उस महिला के आते ही आर.डी. चौधरी ने अपनी पूरी टीम बुला ली और चारों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में पता चला कि वह बच्चा उसी महिला का था. उस का नाम राधिकाबेन राहुल गेडाम था. वह नागपुर की रहने वाली थी. नडियाद में वह किडनी हौस्पिटल के सामने स्थित कंफर्ट होटल में कमरा नंबर 203 में रुकी थी.

राधिका से की गई पूछताछ में पता चला कि उसे पैसों की काफी जरूरत थी, इसलिए उस ने मायाबेन और उस के साथ मिल कर यह काम करने वाली मोनिका और पुष्पा से संपर्क किया था.

माया ने उस से उस के बेटे का सौदा डेढ़ लाख रुपए में किया था. जबकि उसी बच्चे का सौदा मायाबेन ने आर.डी. चौधरी से 6 लाख रुपए में किया था.

4 महिलाएं हुईं गिरफ्तार

एसओजी द्वारा की गई पूछताछ में पता चला कि मायाबेन और उस के साथ बच्चों का व्यापार करने वाली मोनिका और पुष्पा महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने सूत्रों से इस तरह की गरीब गर्भवती महिलाओं को खोजती थीं.

इस के बाद उन से सौदा कर के उन्हें नडियाद ला कर उन की डिलीवरी करा कर उन्हें तय रकम दे कर उन से बच्चा ले लेती थीं. उस के बाद बच्चा चाहने वाले से मोटी रकम ले कर उसे बच्चा सौंप देती थीं.

यह भी पता चला है कि पहले भी मायाबेन ने सरोगेसी द्वारा बच्चे प्राप्त कर के अलगअलग शहरों गोवा, रायपुर और जयपुर में भी बच्चे बेचे हैं. पुलिस के अनुसार बच्चों का सौदा करने वाला यह रैकेट जरूरतमंद की जरूरत और हैसियत देख कर पैसा वसूलता था.

प्राथमिक पूछताछ के बाद एसओजी टीम ने चारों महिलाओं को थाना कोतवाली नडियाद पुलिस के हवाले कर दिया, जहां थानाप्रभारी एन.जी. गोस्वामी ने चारों महिलाओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 370, 144, 120बी एवं 511 के तहत मुकदमा दर्ज कर चारों को 8 अगस्त, 2021 को अदालत में पेश किया, जहां से चारों महिलाओं को मामले की विस्तृत जांच के लिए 5 दिनों के रिमांड पर लिया.

इस मामले की गंभीरता का इसी बात से पता चलता है कि जैसे ही इस मामले की जानकारी आईजी रेंज वी. चंद्रशेखर को हुई तो वह भी नडियाद आ पहुंचे. उन्होंने एसपी अर्पिता पटेल और जांच अधिकारी एन.जी. गोस्वामी से मिल कर मामले की पूरी जानकारी ली, साथ ही दिशानिर्देश भी दिए कि आगे क्या करना है.

रिमांड के दौरान मायाबेन ने स्वीकार किया कि उसे बेटे की शादी के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए बच्चों को बेचने का यह घिनौना काम उस ने किया.

बच्चों का सौदा करने पर उसे जो 6 लाख रुपए मिलते, उस में से ढाई लाख रुपए उसे मिलते. बाकी के साढ़े 3 लाख रुपए में से डेढ़ लाख बच्चे की मां को और एकएक लाख रुपए मोनिका तथा पुष्पा को मिलते.

पुलिस ने उन से उन लोगों के बारे में पता लगाने की कोशिश की, जिनजिन को उन्होंने बच्चे बेचे थे, पर उन से कुछ हासिल नहीं हो सका. पुलिस डीएनए जांच करा कर यह भी पता करेगी कि जिस बच्चे का सौदा किया गया था, वह राधिका का ही है या किसी और का.

रिमांड के दौरान जांच में सहयोग न मिलने की वजह से पुलिस इस मामले में और ज्यादा जानकारी नहीं जुटा पाई.

रिमांड अवधि खत्म होने पर फिर से चारों महिलाओं को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 12 अगस्त, 2021 को जेल भेज दिया गया.

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