विधानसभा चुनाव में किसी दल को बहुमत न मिलने से निर्दलीय विधायकों को लेकर शिवपाल यादव किंग मेकर हो जायेंगे, यह एक तरह का मुगालता ही है. अब दलबदल कानून बदल चुका है. दल तोड़ना और नया दल बनाकर किसी को समर्थन देना सरल नहीं रह गया है. शिवपाल के लिये सपा को तोड़ना सपने जैसा ही है क्योंकि चुनाव में सफलता न मिलने के बाद भी सपा विधायक अखिलेश के साथ ही रहना पसंद करेंगे, क्योंकि ज्यादातर टिकट अखिलेश ने अपने गुट के लोगों को ही दिये है. अपने बयान से शिवपाल केवल अखिलेश को भड़काना चाह रहे हैं. अखिलेश इस चाल को समझते हुए चुप हैं. राजनीति में शिवपाल जैसी उहापोह की हालत ठीक नहीं होती है.

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