क्या आप भी अपने साथी की खुशी के लिए छोटेमोटे सैक्रीफाइज करते रहते हैं लेकिन बदले में आप को कुछ नहीं मिलता, तो यह समझ लें कि आप को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप के शिकार हैं. यदि आप अपने को को-डिपैंडैंट रिश्ते से बाहर निकाल कर समानता के धरातल पर लाना चाहते हैं तो इस के कई तरीके हैं.

को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप एक ऐसी रिलेशनशिप है जिस में एक पार्टनर, पूरी तरह से दूसरे पार्टनर पर निर्भर होता है. उस की जिंदगी के अहम फैसले तक वह खुद न ले कर उस का पार्टनर लेता है. ऐसे बहुत लोग होते हैं जो अपने साथी के लिए कुछ त्याग करते हैं और इस के बदले अगर उन्हें कुछ नहीं मिलता है तो समझिए कि वे को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप के शिकार हैं.

ऐसे रिश्ते हमारे आसपास और बौलीवुड में भी मिल जाएंगे. उन में से कुछ उदाहरण हैं- आमिर खान और रीना दत्ता, सैफ अली खान और अमृता सिंह, संजय दत्त और रिया पिल्लई, कोंकणा सेन शर्मा और रणवीर शौरी, सारिका ठाकुर और कमल हासन, कल्कि कोचलिन और अनुराग कश्यप, क्रिकेटर अजहरुद्दीन और ऐक्ट्रैस संगीता बिजलानी, गोल्फर ज्योति रंधावा और ऐक्ट्रैस चित्रांगदा सिंह आदि.

बौलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने साल 2003 में बिजनैसमैन संजय कपूर से शादी की थी. दोनों की शादीशुदा जिंदगी में शुरुआत से ही काफी दिक्कते थीं. और इस रिश्ते के टूटने की वजह भी को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप ही थी. वहीं, संजय दत्त का अपनी पत्नी से तलाक का कारण भी धोखे के संबंध, पत्नी को समय न देना, झूठ बोलना, पत्नी का जरूरत से ज्यादा उन पर निर्भर रहना था. यही इन दोनों के रिश्तों की दरार की वजह भी बना और यह रिश्ता ज्यादा सालों तक नहीं चल पाया. लेकिन वक्त रहते इन्होंने को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप को समझ, अलग होने में ही समझदारी समझी.

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एक बहुत ही फेमस जोड़ी जो अपने विवाह के बंधन बनते समय भी काफी चर्चाओं में थी और संबंध टूटने पर भी, वह है सैफ अली खान और अमृता सिंह की जोड़ी. सैफ और अमृता की उम्र में 12 साल का बड़ा अंतर था. इस के बावजूद सैफ ने परिवार के खिलाफ जा कर अमृता से शादी की.

लगभग 13 साल से ज्यादा एकदूसरे के साथ बिताने के बाद दोनों ने अलग होने का फैसला किया था. इन दोनों के रिश्ते में दरारों की एक वजह थी, दोनों में से एक का अत्यधिक जजमैंटल होना. दूसरी वजह थी मौका मिलते ही एकदूसरे को नीचा दिखाना. तीसरी और खास वजह थी गैरजिम्मेदार होना, जो उन्होंने एक बार खुद स्वीकार किया. सैफ ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि एक समय के बाद वे भी गैरजिम्मेदार हो गए थे.

सैफ ने कहा था, ‘मैं गैरजिम्मेदार था. मुझे हमेशा लगा कि यह परेशानी मेरी नहीं है और परेशानी से निकलने के लिए दूसरे पर निर्भर हो गया था. मेरे लिए सारा के अलावा कुछ भी माने नहीं रखता था.’ उन का कहना है कि अपनी पत्नी और रिश्ते को ले कर पुरुषों का गैरजिम्मेदार होना भी रिश्ते के टूटने का कारण बनता है. जब पतिपत्नी के रिश्तों के बीच बहाने आने लग जाते हैं, तो यही बहाने रिश्ते को टूटने के कगार पर ले जाते हैं. सैफ का मानना है कि शादी के बाद पार्टनर को खुश करते रहना बहुत जरूरी है. कुछ ऐसा ही हुआ था उन के और उन की पत्नी के बीच.

आइए जानते हैं क्याक्या कारण होते हैं को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप के और कैसे इन से बचा जा सकता है :

प्राथमिकता : शुरुआती दौर में सब नयानया लुभावना सा होता है. लेकिन बाद में ऐसे रिश्ते में दोनों को ही घुटन सी महसूस होने लगती है. रिलेशनशिप ऐक्सपर्ट के मुताबिक, को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप में सब से ज्यादा प्रभावित महिलाएं होती हैं क्योंकि पुरुषों की तुलना में वे ज्यादातर उन पर निर्भर रहना पसंद करती हैं. इस रिश्ते में महिलाएं हर समय अपने आत्मसम्मान से जंग लड़ती हुई प्रतीत होती हैं. असल में इस रिश्ते में व्यक्ति की प्राथमिकता सिर्फ सामने वाले व्यक्ति की खुशी होती है.

सैक्रीफाइज : एक बार खुद से सवाल करें कि कहीं आप भी तो नहीं हैं को-डिपैंडैंट. और इस वजह से छोटेमोटे सैक्रीफाइज करती रहती हों, ताकि आप का साथी खुश रहे. परेशानी तब आती है जब सामने वाले व्यक्ति को इन बातों से कोई फर्क न पड़े. वह आप की भावनाओं की कद्र ही न करे, तब समझ लें कि आप भी को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप की शिकार हैं.

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सहनिर्भरता क्यों : को-डिपैंडैंट यानी सहनिर्भरता पर किए गए एक शोध के अनुसार, जब व्यक्ति को अपनी खुद की पहचान, वजूद और वैल्यू के लिए किसी दूसरे की सहमति की आवश्यकता हो तब सहनिर्भरता उत्पन्न होती है.

व्यक्ति का अपने से ज्यादा सामने वाले व्यक्ति की खुशी और जरूरतों के लिए हद से आगे बढ़ कर त्याग करना, को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप की विशेषता है. को-डिपैंडैंट रिश्ते से निकल कर समानता के धरातल पर आने के कई तरीके हैं. जरूरत है तो इस रिश्ते में आप हैं या नहीं, यह जानने की. को-डिपैंडैंट यानी सहनिर्भरता के रिश्ते से निकलने के लिए इन तरीकों को अपनाया जा सकता है.

अवौयड करें

सब से पहले तो खुद को हैल्दी महसूस करना चाहते हैं, तो को-डिपैंडैंट फ्रैंडशिप्स अवौयड करें व अपने को इमोशनली फ्री व इंडिपैंडैंट रखें. ऐसे रिश्ते में प्यार कम, झगड़े, जलन और झूठ की संभावनाएं ज्यादा होती हैं. हर छोटीबड़ी बात के लिए आप को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा, चाहे आप कितना ही अच्छे से अच्छा व्यवहार करें.

यही नहीं, ऐसे रिश्ते में अपनी खुशियों की बलि देने के बाद भी दोष सिर्फ आप का और हर बुराई के लिए भी जिम्मेदार आप ही ठहराए जाएंगे. इन सब बातों की एक वजह ओवर एक्सपैक्टेशंस यानी न खत्म होने वाली उम्मीदें और इच्छाएं हैं.

वजह समझें

कहीं कीमत ज्यादा तो नहीं चुका रहे? जी हां, रिलेशनशिप में रहने के लिए इतनी कुरबानी क्यों? अपनी समस्याओं से उलझते रहने में दूसरों की खुशियों को भूल जाना, वह भी यह सोच कर कि, ‘मैं खुद ही हैंडल कर लूंगा/लूंगी, दूसरे से क्या कहना…’ शुरूशुरू में तो सब ठीक लगता है लेकिन बाद में नकारात्मक भाव मन में घर करने लगते हैं.

परेशानियों के समय किसी से कम्युनिकेट न करना गलत है. अपनी बात अपने दोस्त या पार्टनर से शेयर करें. यही तो वक्त है जानने का कि, क्या वह सच में मित्र है? वह आप की दोस्ती, आप की पार्टनरशिप के लिए सही माने में हकदार है या नहीं? यह भी हो सकता कि आप का दोस्त आप की ऐसी कोई मदद कर सके जिस की आप को जरूरत हो, हालांकि को-डिपैंडैंसी अवौयड करना ही ठीक है. लेकिन जरूरी यह भी है कि अपने संस्कार बचाएं रखें और लाइन क्रौस नहीं करें.

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खराब व्यवहार

यदि आप की परेशानी के समय आप के पार्टनर का व्यवहार आप के साथ खराब है. वह छोटीछोटी बातों पर आप को हर्ट करता है तो फौरन ही इस रिश्ते से बाहर आ जाएं. यदि वह आप की कौल को रिजैक्ट करता है, या घर देर से आए, तो समझ जाइए कि वह आप के प्यार, आप के रिश्ते के लिए उस के मन में कोई सम्मान नहीं.

शोध में यह बात सामने आई है कि जिन बच्चों का बचपन मातापिता के भावनात्मक सपोर्ट के बिना बीता हो, वे बच्चे बहुत जल्द ही जज्बाती हो जाते हैं. ऐसे में उन की को-डिपैंडैंट रिलेशनशिप में पड़ने की आशंका अधिक होती है.

ऐसे बच्चों को अपनी खुशियों से समझौता करने की आदत पड़ जाती है. जब उन के जीवन में कोई ऐसा इंसान आता है जिस से उन को भावनात्मक अपनापन या सुरक्षा मिले, तब उन्हें यही रास्ता समझ में आने लगता है. और यह उन की जीवनशैली का हिस्सा बन जाता है.

इस रिश्ते में रह रहे व्यक्ति हमेशा असहज रहते हैं. उन के अंदर असुरक्षा की भावना बनी रहती है, जिस के कारण उन का मन अशांत रहता है. आसपास सब की मौजूदगी में भी उन्हें सिर्फ अपने पार्टनर की जरूरत या तलाश रहती है. वे उस के बिना एक पल भी रहने में असहज रहते हैं और उन में नकारात्मकता बढ़ती चली जाती है. ऐसे में उन का व्यवहार चिड़चिड़ा और अजीब हो जाता है. उन्हें हर समय अपूर्णता की भावना का एहसास होता है.

समाधान

रिश्ता तोड़ना किसी भी समस्या का हल नहीं होता. लेकिन रिश्ते में बन रही दूरियों को पहचानना ज्यादा बेहतर रहता है. जरूरत से ज्यादा प्यार या तकरार रिश्ते में दरार की एक खास वजह है. रिश्ता चाहे कैसा भी हो उस में थोड़ी सी ढील भी जरूरी है.

आप सब ने पतंग उड़ती हुई तो देखी होगी. ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए पतंग को थोड़ी ढील देनी पड़ती है. लेकिन जब यही ढील ज्यादा हो जाए तो पतंग कट जाती है. रिश्ते की सीमाएं तय करें. आप को पूरा अधिकार है, अपने मन से अपने जीवन को जीने का, लेकिन समझौते के साथ नहीं. अपनी खुशियां दूसरे की झोली में न डालें.

अच्छा है कि साथी से हक के साथ समय मांगें. उस से खुल कर बात करें. अपनी समस्याओं को उस से साझा करें. अपनी रिलेशनशिप की बेल को सूखने से बचाएं. थोड़ा प्यार की फुहारों से सींचें. जैसे पौधे को पनपने के लिए धूप भी जरूरी है वैसे ही इन रिश्तों में थोड़ी तकरार भी बनती है. सो, आप रिश्ते बेहतर बनाएं पर को-डिपैंडैंट नहीं.

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