वृद्धावस्था में शरीर की ताकत काफी कम हो जाती है. मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इस उम्र में कामकाज की क्षमता कम हो जाती है.  हाल में हुए एक शोध के मुताबिक बुजुर्गों को अपने खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना चाहिए. इससे उनमें दैनिक गतिविधियों की क्षमता संरक्षित रखने और इसके साथ ही अक्षमता के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

अध्ययन में बताया गया कि डाइट में प्रटीन की मात्रा ज्यादा करने से बुजुर्गों में अक्षमता के खतरे को कम किया जा सकता है. इससे वो अपने दैनिक जीवन की चीजें, जैसे खुद से नहाना, खाना, कपड़े पहनना जैसे अन्य काम आसानी से कर सकेंगे.

शोध में शामिल अध्ययनकर्ता की माने को, खोज उस मौजूदा सोच का समर्थन करती है, जिसमें प्रतिदिन प्रोटीन लेने से हम सक्रिय रहते हैं और स्वस्थ तरीके से बूढ़े होते हैं.

इस शोध में 722 लोगों को शामिल किया गया. इसमें 60 फीसदी महिलाएं थीं. अध्ययन की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कम प्रोटीन लेने वाले बुजुर्गों के खराब स्वास्थ्य की वजह से उनकी शारीरिक गतिविधि में कमी आती है और दांत व चेहरे में परिवर्तन होते हैं. इसके नतीजे बताते हैं कि जो ज्यादा प्रोटीन लेते हैं वे कम प्रोटीन लेने वाले लोगों की तुलना में कम अक्षम होते हैं. अध्यनकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि बुजुर्ग व्यक्तियों को बौडी वेट के प्रत्येक 2.2 पाउंड के लिए 1 से 1.2 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए.

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