आज की भागदौड़भरी जिंदगी और उस पर ढेरों जिम्मेदारियां इंसान को सुकून से जीने नहीं देतीं. रोटी, कपड़ा और मकान के साथ बच्चों के सुनहरे भविष्य की चिंता रिश्तों की मिठास को धीरेधीरे कड़वाहट में बदल देती है. ज्यादातर पतिपत्नी के रिश्तों में कुछ वर्षों बाद ही प्यारमनुहार की जगह तकरार ले लेती है, जिस से रिश्तों की ताजगी और मिठास कहीं गुम सी हो जाती है.

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