Best Hindi Social Story: भीमा तो बस गांव में आदिवासियों की जीवनशैली देखने गया था, लेकिन फिर क्यों सीबीआई उस के पीछे हाथ धो कर पड़ गई थी? जब भीमा पुलिस के हत्थे चढ़ा तो अंत अकल्पनीय रहा.
‘‘इस घटना में और कौन-कौन शामिल था?’’ सीबीआई अधिकारी ने पूछा.
बुजुर्ग बुद्धिजीवी ने कहा, ‘‘इस हिंसा से मेरा कोई लेनादेना नहीं. यह बात सही है कि नक्सली विचारधारा से प्रभावित हूं. इसी पर भाषण भी चल रहे थे. मैं ने भी मंच पर अपनी बात कही. हिंसा कैसे फैल गई, मु झे पता नहीं. हमें अपनी बात कहने का हक है. इसे नक्सलवाद से जोड़ना दूसरी विचारधारा के लोगों की साजिश है.’’
सीबीआई अधिकारी ने हंसते हुए कहा, ‘‘तुम खुद स्वीकार रहे हो कि तुम नक्सली विचारधारा से सहमत हो. जो विचारधारा ही हिंसक है. वहां हिंसा तो होनी ही थी. जानकारी मिली है कि एक नक्सलवादी भी वहां था.’’
‘‘मु झे इस की कोई जानकारी नहीं है. हमारे खिलाफ सुबूत हो तो हमें गिरफ्तार कर के जेल भेज दो.’’
‘‘वो भी करेंगे. तुम जैसे देशद्रोहियों को तो फांसी पर चढ़ा देना चाहिए. तुम्हारे उत्तेजक, हिंसक भाषणों से ही दंगाफसाद हुआ है. तुम और तुम्हारे साथियों की पूरी गतिविधियों का वीडियो हमारे पास है.’’
‘‘औफिसर, जो हम ने कहा, वह फिर दोहरा सकते हैं. कोर्ट में भी दोहरा देंगे. हम ने ऐसा कुछ नहीं किया कि हिंसक घटना घटित हो. हमें खुद आश्चर्य है कि भीड़ हिंसक कैसे हो गई. आप को इस बात की भी जांच करनी चाहिए. मु झे इस में किसी की साजिश लगती है. आप यह बताइए, हमें किस आधार पर गिरफ्तार करेंगे?’’
‘‘तुम खुद और अपने साथियों को गिरफ्तार ही सम झो. भड़काऊ भाषण देना हिंसा ही है.’’
‘‘फिर तो हर नेता को गिरफ्तार कर के देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए.’’
‘‘उन के भाषणों से हिंसा नहीं होती. खैर, मु झे यह बताओ कि वह नक्सली कहां गया?’’
‘‘मैं ने कहा न, मु झे नहीं मालूम. जंगलों से छिप कर कोई व्यक्ति इस महानगर में भला क्यों आएगा?’’
‘‘हमारे पास पक्की जानकारी है.’’
‘‘तो आप पता कर लीजिए. कौन सा नक्सली हमारी सभा में कहां से आया. मैं किसी नक्सली को नहीं जानता.’’
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