दादी, नानी बन कर घर व नातीपोते तक ही सीमित न रहें बल्कि बढ़ते समय के साथ आप अपनी ग्रूमिंग करती रहें. अपने रंगरूप के प्रति सचेत रहें. फेशियल मसाज, बालों का रखरखाव आदि के प्रति बेरुखी न अपनाएं. माह में 1 बार ब्यूटीपार्लर जाएं या घर पर ही ब्यूटी ऐक्सपर्ट को बुलाएं. आजकल तो घर पर जा कर भी ब्यूटी ऐक्सपर्ट अपनी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं. यह सब रही बौडी की ग्रूमिंग की बात.

मनमस्तिष्क की ग्रूमिंग के लिए आज के आवश्यक वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग करना अवश्य सीखें. ‘अब क्या करना है सीख कर’ जैसा विचार अपने पास फटकने न दें. आज मोबाइल पर फोटो खींच कर व्हाट्सऐप से भेजना, फेसबुक पर पोस्ट करना और गूगल द्वारा नईनई जानकारी प्राप्त करना सहज हो गया है. रोजमर्रा के सोशल नैटवर्क को अपना कर आप, घर बैठे ही, सब से जुड़ी रहेंगी.

बुजुर्ग महिला विमला चड्ढा अपने 75वें जन्मदिन पर मोबाइल में व्हाट्सऐप व फेसबुक पर उंगलियां चला रही थीं. उन की बहू के साथसाथ उन के नातीनातिन बड़े ही गर्व से उन्हें निहार कर खुश हो रहे थे.

1980 में सोशल साइंटिस्ट विलियम जेम्स ने कहा था कि 30 वर्ष की उम्र तक बना व्यक्तित्व एक प्लास्टर की भांति ठोस हो कर पूरे जीवन हमारे साथ रहता है. यानी इस उम्र तक हम जो बन जाते हैं, वैसे ही पूरे जीवन रहते हैं. यह धारणा 90 के दशक तक चली.

आज के सोशल साइंटिस्ट के अनुसार, हमारा व्यक्तित्व एक खुला सिस्टम है जिस में हम जीवन के किसी भी समय में, वर्तमान स्टाइल, जीवन का नया तरीका अपना सकते हैं. प्लास्टिसिटी सिद्धांत के अनुसार, जिंदगी में उम्र के किसी भी पड़ाव में परिवर्तन किया जा सकता है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...