पोस्टमास्टर होते हुए मेरे पापा ने मुझे इंजीनियर बनाया. पापा का हर काम समय  पर होता था. अपने पापा से मैं ने अनुशासन सीखा. पापा कहते थे, बड़े बनने से अधिक महत्त्वपूर्ण है एक अच्छा इंसान होना.

पापा से मिले अनमोल ज्ञान का सदुपयोग कर के ही मैं अपनी इकलौती बेटी को भी सर्वगुण बना सका. पापा की दी हुई सीख और उन की शिक्षा को विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ बाटूंगा एवं पापा की स्मृति में निर्धन, मेधावी बेटियों की उच्च शिक्षा हेतु आय का 5 प्रतिशत अंश आर्थिक सहायता के रूप में दे कर मातृभूमि की सेवा करता रहूंगा.

Tags:
COMMENT