Gen Z India: भारत की जेनजी पीढ़ी रूढि़वादी सोच और तौरतरीकों को नकारती तो है ही, साथ ही, अपनी आत्मानुभूति को प्राथमिकता देती है. इस पीढ़ी वाले सिर्फ नामी ब्रैंड को महत्त्व नहीं देते बल्कि अपनी पर्सनल चौइस, जो उन की बौडी, स्किन, हैल्थ कंडीशन और सोच व पसंद से मेल खाते हैं, वाले प्रोडक्ट्स का चयन करते हैं. वे प्रोडक्ट्स इंटरनैशनल भी हो सकते हैं और लोकल भी. आज पर्सनल चौइस के प्रोडक्ट्स उन्हें डिजिटल प्लेटफौर्म पर आसानी से मिल जाते हैं. जेनजी के लिए इन प्रोडक्ट्स और सर्विसेस को खरीदने का सब से बड़ा जरिया डिजिटल ऐप और वैबसाइट हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक जनरेशन जेनजी का भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा रोल होगा, जहां उन की खरीद बाजार में बड़ा बदलाव और दिशा लेकर आएगी.

बाजार में बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘जनरेशन जी की भारत की जनसंख्या में 27 फीसदी की हिस्सेदारी बढ़ेगी और 2030 तक वे 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डौलर की खपत करेंगे. उन की खपत का प्रमुख क्षेत्र होगा बीपीसी यानी ब्यूटी एंड पर्सनल केयर.’’

यदि हम अभी की बात करें तो जेनजी की हर 2 में से एक लड़की अपनी आय का 20 फीसदी से ज्यादा ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर खर्च करती है. उस के पास त्वचा, बाल और शरीर की देखभाल के लिए अलगअलग रूटीन प्रोडक्ट्स होते हैं और वह पहले की तुलना में दोगुने प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रही है. इस से यह बात और साफ हो आती है कि 2030 तक इस पीढ़ी का ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार में एक बहुत बड़ा हिस्सा होगा.

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