Harappan Civilization: इतिहास की किताबों में पढ़ाया जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता 1900 ईसा पूर्व में खत्म हो गई. इससे आगे वैदिक सभ्यता का दूसरा चैप्टर शुरू हो जाता है लेकिन कभी सोचा है कि जो सभ्यता अफगानिस्तान से गुजरात तक, 15 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली थी, जिसके 5 बड़े शहर थे, 1000 से ज्यादा गांव थे, जहां नाली, तराजू, मनके, तांबे के औजार बनते थे, वह अचानक कहां गायब हो गई? क्या किसी भयंकर युद्ध में 10 लाख लोग एक रात में मर गए? क्या सारे शहर एक साथ डूब गए? इस महान सभ्यता के खत्म होने का सबूत क्या है?
राखीगढ़ी या मोहनजोदड़ो में युद्ध का कोई निशान नहीं मिला, कालीबंगा में सिर्फ नदी सूखने का निशान है लेकिन कोई भी नदी रातों रात नहीं सूखती और अगर नदी सूखती है तो लोग मरते नहीं, लोग किसी दूसरी नदी के साथ चलते हुए नई सभ्यता बसाते हैं. हड़प्पा की खुदाई के बाद दशकों तक यही पढ़ाया गया कि मोहनजोदाड़ो अचानक जमीन में समा कर गायब हो गया, किसी बाढ़ में डूबकर सिंधु घाटी सभ्यता की मौत हो गई, हड़प्पा सभ्यता रातों रात विलुप्त हो गई लेकिन अब इस सभ्यता की पहली खुदाई के सौ साल बाद आज हम जानते हैं कि सिंधु घाटी कभी खत्म ही नहीं हुई.
मुजफ्फरनगर के मांडी गांव में सन 2000 में ताम्बे के घड़े में मिले कुछ सामान जो 45 सौ साल पहले की सभ्यता के हैं यही साबित करते हैं. यह एक पुख्ता सबूत है कि सिंधु घाटी सभ्यता रातों रात खत्म नहीं हुई. यही सभ्यता हजार सालों में यमुना पकड़कर गंगा की तरफ आ गई. किताबों ने इस सभ्यता को खत्म बताया ताकि सिंधु सभ्यता के बाद के खाली समय में वैदिक काल के आर्यों को फिट किया जा सके लेकिन आर्कियोलॉजी के सबूत कह रहे हैं कि यहीं के लोग यहीं रहे, सिर्फ नदी बदल गई.
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