हंसतेखेलते परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद उस के उत्तराधिकारी संपत्ति के लिए आपस में लड़नेझगड़ने लगते हैं. यहां तक कि कोर्टकेस की नौबत तक आ जाती है. कोर्ट में समय, श्रम और धन की बरबादी होती है. वर्र्षों तक मामला अटका भी रहता है. कई बार दादा द्वारा किए केस का फैसला पोते तक भी नहीं हो पाता. नतीजतन, संपत्ति होते हुए भी उस के वास्तविक हकदार वर्षों तक उस का उपयोग नहीं कर पाते.

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