जीवन में सफलता की निशानी है आप का आत्मविश्वास, आप की कार्यकुशलता, आप का व्यवहार. ये गुण लोगों के बीच आप की अलग ही छवि बनाते हैं.

आप निवेश इसलिए करते हैं ताकि कल आप को उस का रिटर्न मिल सके. यही खासीयत लाइफ स्किल्स यानी जिंदगी से जुड़ी कुशलता की है, जो आप को जीवन में सफल होना सिखाती है. यह सफलता कैरियर या निजी रिश्ते में भी मिल सकती है. विज्ञान का भी यही मानना है कि आप वास्तव में लोगों के साथ अच्छी तरह से बातचीत करना सीख सकते हैं.

हार्वर्ड की मनोचिकित्सक हेलेन रेस का कहना है कि कुछ लक्षण आप को अपने आसपास के लोगों के साथ मजबूत और तेज कनैक्शन बनाने में मदद कर सकते हैं. ये निम्न हैं-

आई कौन्टैक्ट : सामने वाले की आंखों में देख कर बातें करना एक आवश्यक कौशल है. यह किसी भी सौदे को जोड़ या तोड़ सकने के लिए काफी है. जब आप आमनेसामने की मीटिंग में शामिल होते हैं और आई कौन्टैक्ट बनाते हैं तो आप बिना सुने कई बातों को जान जाते हैं, जो सामने वाले व्यक्ति की पर्सनैलिटी के बारे में काफी कुछ कह जाता है, खासकर तब, जब बातचीत कम होती है.

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चेहरे की मांसपेशियां : इस से पहले कि आप वास्तव में प्रतिक्रिया दें या कुछ बोलें, आप के चेहरे की मांसपेशियां पहले ही प्रतिक्रिया दे देती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चेहरे की मांसपेशियां उन संकेतों को भेजती हैं, जो मस्तिष्क आगे भेजता है. इसलिए जब आप कुछ बुरा होते देखते हैं तो खिसियानी हंसी हंसते हैं और जब कुछ अच्छा देखते हैं तो अपनेआप मुसकरा देते हैं. सो, जान लें कि मांसपेशियां कभी झूठ नहीं बोलती हैं. इसलिए हमेशा कोशिश करें कि जब आप किसी व्यक्ति से मिलें तो चेहरे पर उदासीनता या क्रोध के भाव न हों बल्कि शालीनता और खुशी दिखे.

सही पोस्चर : सही पोस्चर के सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी लाभ ही नहीं हैं, इस के दूसरे लाभ भी हैं. जब आप सही तरीके से बैठते या खड़े होते हैं तो आप के चेहरे पर आत्मविश्वास, ऊर्जा और खुशी अपनेआप आ जाती है. यह सामने वाले व्यक्ति को आकर्षित करता है. यह अपनेआप बातचीत को आसान बनाता है. साथ ही, सही पोस्चर बातचीत में सम्मान और अधिकार की भावना भी लाता है.

उन की सुनें : दूसरे व्यक्ति की बातों को पूरी तरह से सुनने के पीछे का भी कारण है. जब आप दूसरे व्यक्ति की बातों को सुनते हैं तो आप उन के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ जाते हैं और सही व सहानुभूति के साथ प्रतिक्रिया देते हैं. जब आप किसी के साथ बात कर रहे हों तो अपने फोन में या यहांवहां ध्यान दिए बिना उस व्यक्ति पर ध्यान दें और उस की बातें ठीक से सुन कर जवाब दें.

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भावनाओं पर ध्यान : यह जरूरी है कि आप दूसरे व्यक्ति की भावनाओं पर विशेष ध्यान दें और उसे प्रभावित करें. यदि कोई व्यक्ति खुश, उदास या घबराया हुआ दिखता है तो आप सही तरीके से प्रतिक्रिया दें. यदि सामने वाला गुस्से में है और उस की पिच हाई है तो भी उस की पूरी बात सुनने के बाद ही आप कुछ बोलें. सुगम कम्युनिकेशन तभी हो सकता है जब दोनों पक्ष की भावनाएं मेल खाएं.

दूसरों के विचारों का सम्मान : यह जरूरी नहीं है कि आप के और सामने वाले के विचार मेल खाते हों. अमूमन ऐसा होता है कि हम अपने विचार दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं. हमें लगता है कि हमारी सोच सही है. जबकि, ऐसा नहीं है. संभव है कि सामने वाले के विचार आप से ज्यादा अच्छे हों. और यदि नहीं भी हैं तो यह आप का फर्ज बनता है कि आप दूसरों के विचारों का भी सम्मान करें. इस से आप दोनों के बीच समन्वय तो स्थापित होगा ही, साथ ही, हो सकता है कि व्यक्ति के विचार आप के लिए उपयोगी साबित हों.

   डा. सुजीत पाल  (लेखक स्टेहैपी फार्मेसी के एमडी हैं)    

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