एक बार एक सरकारी कर्मचारी  सरकारी कार्य से कहीं जा कर आए थे. रास्ते में उन के पांव में कांटा लग गया. वे दफ्तर में आ कर कराहने लगे. सहकर्मी ने पूछा, ‘क्यों, क्या बात है?’ कर्मचारी बोला, ‘कांटा चुभ गया है पांव में.’ सहकर्मी बोला, ‘तो दुखी क्यों होते हो, कांटा निकाल फेंको.’ कर्मचारी बोला, ‘अभी क्यों निकालूं. अभी तो लंचटाइम है, यह मेरा निजी समय है. ड्यूटी के समय निकालूंगा.’

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