चुनाव भले ही नगर निगम के थे पर हार की कालिख तो पार्टी के मुंह पर पुती. भई, जब देश का मैंगो पीपुल यानी आम जनता महंगाई और भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूब रही हो तो फिर क्या नगर निगम और क्या लोकसभा चुनाव, सियासी कुरसी तो हिलेगी ही.

ऐसा लग रहा था जैसे वे सब तैयार बैठे थे. मतगणना अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि पार्टी के बड़बोले महासचिव का बयान आ गया, ‘‘ये नगर निगम के चुनाव हैं. इन के परिणामों को किसी भी राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा जाना चाहिए. इन चुनावों में स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं, इसलिए इन चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति का दिशासूचक नहीं माना जाना चाहिए. हम परिणामों को ले कर आशान्वित हैं, फिर भी जनता जो भी निर्णय देगी, हमें स्वीकार होगा, शिरोधार्य होगा.’’

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