सर्दी के दिनों अपने गला का विशेष ख्याल रखे,आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़े परेशानी में डाल सकता है, इस मौसम में हर पल गले में खराश होते रहता है. खराश बहुत होने के कारण टॉन्सिल्स या गले का संक्रमण भी हो सकता है. इससे आपके गले में कांटे जैसी चुभन, खिचखिच और बोलने में तकलीफ जैसी समस्याएं आती हैं. यह सब बैक्टीरिया एवं वायरस के कारण होता है,तो कई बार एलर्जी और धूम्रपान के कारण भी गले में खराश की समस्या होती है. कई बार गले की संक्रमण खुद-ब-खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इलाज की जरूरत पड़ती है.

आमतौर पर लोग गले की खराश की बात को अनदेखी कर देते है जो बाद में परेशानी का मुख्य कारण बन जाता है और कभी-कभी यह अनदेखी के कारण कई गंभीर बीमारी का रूप के में सामने आता है. किसी खाने की वस्तु, पेय पदार्थ या दवाइयों के विपरीत प्रभाव के कारण भी गले में संक्रमण हो सकता है. इसके अलावा गले में खराश की समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है. खान-पान में बरती गयी गलती एवं अच्छी तरह मुंह व दांतों की साफसफाई न रखने के कारण भी संक्रमण की आशंकाएं बढ़ती हैं.

ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर के एन सिन्हा बताते है कि गले का संक्रमण आमतौर पर वायरस और बैक्टीरिया के कारण होता है, इसके अलावा कुछ केसों में फंगल इंफेक्शन भी होता है, जिसे ओरल थ्रश कहते हैं. गले का इंफेक्शन में गले से कर्कश आवाज, हल्की खांसी, बुखार, सिरदर्द, थकान और खासकर कुछ निगलते वक्त गले में दर्द होता है. आमतौर पर गले का संक्रमण उचित देखभाल और एंटीबायोटिक से ठीक हो जाता है. लेकिन इसका खतरा तब बढ़ जाता है, जब यह संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया की नित्य बढ़ने लगती है. बैक्टीरिया या वायरस आदि को बढ़ने से रोकने के लिए कुछ घरेलु उपचार है एवं कुछ सावधानिया बरती जा सकती हैं.   इस सर्दी के मौसम में कुछ सावधानियो को ख्याल में रख कर अपनी सुनहरी आवाज को बरक़रार रखे.

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